निकाह होने के बाद से ही पीड़िता पर उसके ससुर और देवर की नीयत खराब थी। दोनों उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालते थे। जब उसने इनकार कर दिया तो उसे और उसके ढाई साल के बच्चे को मारपीट कर घर से निकाल दिया।
घटना 31 जनवरी की बताई जा रही है। तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने इसकी शिकायत करते हुए सुरक्षा की माँग की है। लेकिन, पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।
घटना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ गृह क्षेत्र की है। पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने इसे निर्भया से भी भयावह घटना बताते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि पैसे नहीं देने पर पुलिस ने शव ले जाने को कहा।
उमा भारती, सिंधिया और विजयवर्गीय की गर्मजोशी से हुई मुलाक़ात भोपाल के गलियारों में चर्चा बटोर रही है। सिंधिया को लेकर कयासों का दौर अरसे से लग रहा है। बीच-बीच में उनके समर्थक प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को असहज करने वाले बयान भी देते रहते हैं।
यह विवाद हिंदू और मुस्लिमों के बीच पूजा को लेकर लंबे अरसे से चला आ रहा है। यह पूरा विवाद मंदिर की जगह को लेकर है, जहाँ मुस्लिम समुदाय के लोग इसे मस्जिद का स्थान मानते हैं और वहीं हिंदू धर्म के लोग इसे सरस्वती माता का मंदिर का स्थान मानते हैं।
तस्वीर हटाने के आरोप में मोहम्मद राहिल को गिरफ्तार किया गया है। कहा जा रहा है कि उसने बगैर किसी की अनुमति के तस्वीर हटाई थी। सीएए से नाराज होकर उसने ऐसा किया था।
मध्य प्रदेश के कटनी ज़िले में पुलिया निर्माण के दौरान एक नदी से खुदाई में 11वीं सदी की मूर्तियाँ निकली हैं, जिनको पुरातत्व विभाग ने संरक्षित करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। वहीं लोगों ने ज़िले में पुरातत्व विभाग का संग्रहालय खोलने की माँग की है।
"सुनो कमलनाथजी! यदि कोलाहल नियंत्रण कानून है तो वह केवल मंदिरों के लिए नहीं हो सकता। आपके जीवन में यदि कोई पारदर्शिता बची है तो रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक इसे सभी के ऊपर लागू कराइए, वरना न आष्टा के मंदिर से स्पीकर हटेंगे, न किसी मंदिर से।"
कॉन्ग्रेसी नेताओं के बीच मारपीट की यह दुखद घटना इंदौर में कॉन्ग्रेस कार्यालय में हुई। दरअसल, गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। तभी दो नेताओं के बीच झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया और वो एक-दूसरे से उलझ पड़े।
इस मामले में पुलिस और कमलनाथ सरकार पर लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि आरोपितों के समुदाय विशेष से जुड़े होने के कारण मामले को दबाने की कोशिश की गई।