'भारत माता की जय बोलने पर ऐतराज जताने वाली कॉन्ग्रेस अब देशद्रोह का क़ानून हटाने की भी बात कह रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी चाहती है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग को, भारत को गाली देने वालों को, तिरंगे का अपमान करने वालों, नक्सलवादियों के समर्थकों को खुली छूट मिले।'
रवीश वास्तविकता में मुश्क़िल सवाल न तो सामने वाले से पूछते हैं और न ही खुद से… उन्हें बड़े जहाज़, मंच पर जाकर फोटोबाजी और महँगे प्रसाधन से भी परहेज नहीं। ऐसे में मोदी जी को भी बिना झिझक… प्रधानमंत्री रहते रवीश के सामने बैठ कर कहना चाहिए - 'पांडे जी तुम भी कम नहीं हो बे… हें हें हें'!
यदि पीएम मोदी के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर डालें तो फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम प्लेटफार्म्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलोवर्स की संख्या 11,09,12,648 है।
इस लिस्ट में कामरेड कन्हैया कुमार के समर्थक युवा नेता जिग्नेश मेवानी से लेकर कॉन्ग्रेस नेता दिव्या स्पंदना और अन्य कई नाम मौजूद हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी काल्पनिक और मनोवैज्ञानिक घृणा के कारण बेहद भद्दी बातें कही गई हैं
टैगोर लगातार अपने लेखन में महात्मा गाँधी की देशभक्ति की आलोचना करते नजर आते थे। उन्होंने लिखा कि किस तरह से कुछ लोगों के लिए यह उनकी आजीविका है, उसी तरह से कुछ लोगों के लिए राजनीति है, जहाँ वो अपने देशभक्ति की विचारधारा का व्यापार करते हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और राज्य में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि नींद की कमी ने पीएम मोदी को मानसिक रोगी बना दिया है। बघेल ने साध्वी प्रज्ञा को चाकूबाज बताते हुए कहा कि वह शुरुआत से आदतन अपराधी और झगड़ालू प्रवृत्ति की रही हैं।
न्यायालय ने आयोग से कहा था कि पहले वह फिल्म को देखे फिर उसकी रिलीज़ पर निर्णय ले। निर्वाचन आयोग ने फिल्म को देखने के बाद अपने विचार न्यायालय के सामने रखे थे जिसके बाद न्यायालय ने आयोग के निर्णय को बरक़रार रखा था।
वो दिन दूर नहीं जब पूरा दिन PUBG खेलने के बाद राहुल गाँधी PUBG को ही कॉन्ग्रेस द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक साबित कर देंगे। ऐसा करने के लिए उनके पास मीडिया गिरोह से लेकर नेहरुवियन सभ्यता वाले, किसी भी समय अवार्ड वापस करने वालों के गैंग, स्लीपर सेल अवस्था में हर वक़्त मौजूद तो हैं ही।
पंडित नेहरू जब प्रधानमंत्री थे। तब कुम्भ में भगदड़ मच गई थी। हजारों लोग कुचल के मारे गए थे। लेकिन सरकार की लाज बचाने के लिए, पंडित नेहरू पर कोई दाग न लग जाए, इसके लिए खबरें दबा दी गईं। कुछ अखबारों में कोने में खबर छिपा दी गई। इसमें पीड़ितों को भी कुछ नहीं दिया गया। ऐसा पाप देश के पहले प्रधानमंत्री के काल में हुआ।