गडकरी ने न केवल विकास न होने के दावे पर सवाल उठाया, बल्कि इशारों में यह भी पूछ लिया कि क्या प्रियंका गाँधी यूपीए सरकार के समय में अपने हिंदुत्व का प्रदर्शन कर पातीं?
सीएम योगी ने लिखा, “हमारी सरकार जब से सत्ता में आई है हमने लंबित 57,800 करोड़ रुपए का गन्ना बकाया भुगतान किया है। ये रकम कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है। पिछली सपा-बसपा सरकारों ने गन्ना किसानों के लिए कुछ नहीं किया जिससे किसान भुखमरी का शिकार हो रहा था।”
फ़िरोज़ पारसी थे। क्या कॉन्ग्रेस इसीलिए फ़िरोज़ को याद नहीं करना चाहती क्योंकि उनका नाम आते ही उनके कारण नेहरू के मंत्री के इस्तीफा देने की बात फिर से छेड़ी जाएगी? क्योंकि बड़े कॉंग्रेस नेताओं व उद्योगपतियों के बीच संबंधों की बात फिर से चल निकलेगी?
कॉन्ग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व: प्रियंका गाँधी ने कई मंदिरों के दर्शन करने के साथ-साथ गंगा-आरती में भी हिस्सा लिया। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उनकी बोट यात्रा समाप्त होगी। प्रयागराज में उन्होंने मोतीलाल नेहरू के बनाए स्वराज भवन में रात गुजारी।
ऑपइंडिया ने राहुल गाँधी और हथियार दलाल संजय भंडारी के बीच संबंधों का ख़ुलासा करते हुए कई दस्तावेज पेश किए थे। राहुल और पाहवा के बीच संदिग्ध ज़मीन सौदे हुए जो सीसी थम्पी द्वारा वित्तपोषित था। अब हमारे पास और भी एक्सक्लूसिव दस्तावेज हैं।
एजेंसी ने सीसी थम्पी और पाहवा को पहले भी पूछताछ के लिए समन जारी किया था। पाहवा ने अभी तक एजेंसी के समन का कोई जवाब नहीं दिया है। थम्पी अभी अमेरिका में इलाज करा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) जल्द ही उसका बयान भी दर्ज करेगी।
भाजपा के ग्राम प्रधान के साले के ससुर के किसी बयान को उठा कर भाजपा के झूठ के रूप में प्रचारित कर एक-एक घंटे का शो कर लेने वाली तथाकथित पत्रकारों की इस जमात ने राहुल-भंडारी कनेक्शन पर आँखें मूँद ली। इन्हे साँप सूंघ गया।
राहुल गाँधी संजय भंडारी के साथ संदेहास्पद ज़मीन सौदों में बुरी तरह घिरते नज़र आ रहे हैं। भाजपा ने OpIndia के ख़ुलासे के बाद राजनीतिक हमले तेज़ कर दिए हैं। तीन तरफ से अटैक करते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को राफेल तक घेरा जा रहा है।