मेवात में इस समय दलितों की जो स्थिति है, वैसी तो शायद पाकिस्तान में जो हिंदू बचे हैं, उनकी भी स्थिति न हो। मेवात के 500 गाँवों में 103 गाँव हिंदूविहीन हो गए हैं और 84 गाँवों में 4-5 परिवार शेष है।
मुस्लिम बहुल मेवात दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं है। लेकिन प्रताड़ना ऐसी जैसे पाकिस्तान हो। हिंदुओं के रेप, जबरन धर्मांतरण की घटनाएँ रोंगेटे खड़ी करने वाली हैं।
गाँव में दशकों से रह रहे 30 परिवारों के करीब 240 लोगों ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। एक वृद्धा का अंतिम संस्कार भी हिन्दू रीति-रिवाजों से किया।
वो ऐसा कर के न सिर्फ़ ज़रूरतमंदों का हक़ मार रहे हैं बल्कि संवेदनहीनता का परिचय भी दे रहे हैं। हम बात कर रहे हैं ऐसे लोगों की, जो अपने घर में पर्याप्त राशन होते हुए भी प्रशासन के सामने झूठ बोल कर फायदा उठाना चाहते हैं।
बुधवार को आशा वर्करों की एक टीम पुलिस की टीम को साथ लेकर इंदिरा कॉलोनी में डोर टू डोर जाकर सर्वे कर रही थी। लेकिन सर्वे के दौरान कुछ युवकों ने टीम का विरोध करना शुरू कर दिया। उग्र युवकों ने आशा वर्करों व पुलिस के समझाने पर भी उनकी बात नहीं मानी और उन पर हमला बोल दिया। इस हमले में महिला पुलिस कर्मी घायल हो गई।