हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मेटा (Meta) इंडिया की कंटेंट मॉडरेशन और पॉलिसी से जुड़े फैसले अब तक एरह से मोदी सरकार के खिलाफ नजर आने लगे हैं। यह बहस तब और आग की तरह फैल गई जब लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पोस्ट डालने शुरू किए।
नेटिजन्स का कहना था कि उनके फेसबुक और इंस्टाग्राम फीड पर ज्यादातर ऐसे पोस्ट दिखाई दे रहे हैं, जिनमें सरकार की आलोचना की जा रही है। इन दावों के बाद इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई, जहाँ कुछ लोग इसे एल्गोरिदम (Algorithm) का असर बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।
सबसे वायरल ‘हिंदुत्व नाइट’ नाम की सोशल मीडिया यूजर की एक पोस्ट में कहा गया, “पिछले 6 से 8 महीनों में पूरा फेसबुक एंटी-मोदी हो गया है… जब भी मैं फेसबुक खोलती हूँ, मुझे 50 हजार लाइक्स वाले एंटी-मोदी पोस्ट ही दिखाई देते हैं।”
Entire Facebook has turned anti-modi in the last 6-8 months
— Hindutva Knight (@HPhobiaWatch) April 5, 2026
Whenever I open facebook I just see anti-modi posts with 50k likes. Even my long term modi supporting friends are sharing anti-modi posts
I don't ask what changed because everyone has different reasons. BJP…
यूजर ने यह भी दावा किया कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं बल्कि उनके मोदी सरकार का समर्थन करने वाले दोस्तों ने भी अनुभव किया है। यूजर ने लिखा, यहाँ तक की मेरे पुराने मोदी समर्थक दोस्त भी मोदी-विरोधी पोस्ट शेयर कर रहे हैं। मैं यह नहीं पूछ रही कि क्या बदल गया, क्योंकि सबके अपने-अपने कारण होते हैं। BJP नेतृत्व इस भ्रम में जी रहा है कि सब कुछ ठीक है क्योंकि BJP कल्याणकारी योजनाओं के दम पर चुनाव जीतती है।।”
इस पोस्ट पर एक यूजर ने जवाब देते हुए मेटा इंडिया पब्लिक पॉलिसी एग्जिक्यूटिव प्रियंका राव खान के नाम का जिक्र किया गया था। इस जवाब के बाद पोस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई और मेटा इंडिया में पॉलिसी से जुड़े पदों पर काम करने वाले लोगों को लेकर एक लंबा थ्रेड शुरू हो गया। धीरे-धीरे प्रियंका खान की सोशल मीडिया गतिविधि, प्रोफाइलट डिटेल्स से लेकर उनकी प्रोफेशनल जानकारी के स्क्रीनशॉट भी वायरल हो गए, जिससे नेटिजन्स ने मामले में वैचारिक निष्कर्ष तक पहुँचने की कोशिश की।
खास बात यह भी सामने आई कि प्रियंका राव खान के सोशल मीडिया अकाउंट्स लॉक या प्राइवेट हैं। पहले प्रियंका के ‘एक्स’ प्रोफाइल पर एक बैनर लगा था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नाजी’ कहने वाले पोस्टर छपे थे। इसी साल फरवरी में उनके प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिसके बाद उन्होंने वह बैनर हटा दिया।
Ms Prianka Rao-Khan, a Public Policy Manager at Meta, and wife of an active Congress Media Team Member has now changed her Twitter Header with profile picture
— Muji Singh Rangi (@mujifren) April 5, 2026
Her earlier twitter header was a protest pic where placards like "Shah Modi Nazi" and "Modi….. The End is Nigh" was… pic.twitter.com/XX5NJbhBiA
विवाद शुरू करने वाला सोशल मीडिया थ्रेड
झुनझुनवाला नाम के ‘एक्स’ हैंडल का यूजर अनुराग पोस्ट करता है, उसने फरवरी में एक थ्रेड साझा किया था और फिर ‘हिंदुत्व नाइट’ की पोस्ट पर कमेंट के रूप में भी वही बातें दोहराईं, जिसमें उसने प्रियंका राव खान के बैकग्राउंड, उनके ऑक्सफॉर्ड ब्लावात्निक स्कूल एसोसिएशन से जुड़े होने और उनके प्रोफाइल हेडर पर पहले मौजूद और अब हटाए जा चुके बैनर का उल्लेख किया था।
उनकी इस पोस्ट को वरिष्ठ पत्रकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने भी क्वोट किया, जिससे इस चर्चा को और अधिक महत्व मिला। फरवरी में एक पोस्ट में कंचन गुप्ता ने लिखा था कि प्रियंका राव खान ने “ऑक्सफोर्ड में अपना समय नेतृत्व की ट्रेनिंग लेने में नहीं, बल्कि हिंदू विरोधी और भारत विरोधी विचार फैलाने वाले एक एक्टिविस्ट के रूप में बिताया” और आगे उन्होंने यह भी जोड़ा कि बाद में मेटा प्लेटफ़ॉर्म ने उन्हें भारत में पब्लिक पॉलिसी मैनेजर के रूप में नियुक्त किया।
This @PriankaRao spent her time in Oxford not training as a ‘leader’ but a hate-spewing anti-Hindu, anti-India activist.
— Kanchan Gupta 🇮🇳 (@KanchanGupta) February 18, 2026
For obvious reasons @Meta found her suitable for the job of ‘Public Policy Manager’ in India.
Using that cover she continued with her anti-India activism. https://t.co/HxFukG5fGd
कंचन गुप्ता ने यह भी सुझाव दिया कि जो यूजर्स मॉडरेशन के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें और कहीं देखने की जरूरत नहीं है जिससे यह धारणा और मजबूत हुई कि राजनीतिक झुकाव रखने वाले व्यक्ति पॉलिसी के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
यह चर्चा तब और बढ़ गई जब यह सामने आया कि प्रियंका राव खान के पति मोहम्मद खान हैं, जो INC की मीडिया टीम से जुड़े बताए जाते हैं। अनुराग की पोस्ट के जवाब में मोहम्मद खान जो खुद को एक वकील बताते हैं, उन्होंने अनुराग को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और लिखा, “अरे डरपोक कमीने। यह मेरी बीवी है। देखते हैं कि हैरेसमेंट के लिए क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का सामना करने पर तुम कितने बहादुर होते हो। तुम्हारी प्रोफाइल पर कुछ दूसरे क्रिमिनल कंटेंट के भी स्क्रीनशॉट लिए हैं। तुम्हें खुद जाकर इसे सही साबित करते हुए देखने का इंतजार रहेगा।”

गुजरात के मुख्यमंत्री की मेटा प्रतिनिधियों के साथ बैठक ने चर्चा का मोड़ा रुख
यह विवाद केवल प्रियंका राव खान और मोहम्मद खान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेटा प्लेटफ़ॉर्म के अन्य कर्मचारियों को भी शामिल करता है। ऐसे ही एक कर्मचारी अमन जैन हैं, जो वर्तमान में मेटा में सीनियर डायरेक्टर और हेड पब्लिक पॉलिसी के पद पर कार्यरत हैं। हाल ही में एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से हुई थी।

इस बैठक में मेटा प्लेटफ़ॉर्म के प्रतिनिधियों ने AI, वेयरेबल्स, स्किलिंग और ई-गवर्नेंस से जुड़ी पहलों पर चर्चा की। इसके बाद सोशल मीडिया पर पुराने पोस्ट और पॉलिसी इकोसिस्टम से जुड़े लिंक सामने आने लगे। नेटिजन्स ने मेटा प्लेटफ़ॉर्म के डिलीट किए गए पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को ‘आत्ममुग्ध’ बताने वाले आर्टिकल को ‘रोचक रचना’ कहा था।
This tweet by Meta India's Public Policy Chief now stands deleted
— Muji Singh Rangi (@mujifren) April 6, 2026
Few hours back their public policy manager had deleted her profile header which had "Modi, Shah Nazi" placard pic.twitter.com/McGrwtYey4
उस आर्टिकल का टाइटल ‘टू नाइटमेयर फोरटोल्ड‘ था, जिसे जेम्स मनोर ने लिखा था और अमन जैन ने उस आर्टिकल से एक खास कोट शेयर किया था, जिसमें लिखा था, “मोदी पक्के नार्सिसिस्ट लोगों के बीच एक पक्के नार्सिसिस्ट होंगे। यह सत्ता में बने रहने का कोई नुस्खा नहीं है।” यह पोस्ट और आर्टिकल दिसंबर 2013 के थे, यानी नरेंद्र मोदी के मई 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभालने से पहले के।
सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पोस्ट का इस्तेमाल यह तर्क देने के लिए किया कि प्लेटफॉर्म की पॉलिसी को आकार देने वाले व्यक्ति पूरी तरह राजनीतिक रूप से निष्पक्ष नहीं हो सकते।
प्रियंका राव ने छोड़ दिया मेटा?
प्रियंका राव खान के ‘लिंक्डइन’ प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट्स ने इस चर्चा में एक और पहलू जोड़ दिया। प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने जून 2022 से मार्च 2026 तक मेटा प्लेटफ़ॉर्म में पब्लिक पॉलिसी मैनेजर के रूप में काम किया है। यह संभावना भी जताई जा रही है कि अब वह कंपनी में न हों, हालाँकि उनके लिंक्डइन प्रोफाइल पर इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पॉलिसी रोल्स में निष्पक्षता पर सवाल
यह विवाद किसी पक्की नीति या नियम को लेकर नहीं है, बल्कि लोगों की सोच और धारणा से जुड़ा है। लेकिन इस बहस ने एक बार फिर यह चिंता सामने ला दी है कि बड़ी टेक कंपनियों में काम करने वाले लोग, जो पब्लिक पॉलिसी जैसे अहम पदों पर होते हैं, क्या पूरी तरह राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहते हैं या नहीं? खासकर तब, जब ये प्लैटफॉर्म्स चुनाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दो पर लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं।
जब ऐसे पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक विचार खुलकर जाहिर करते हैं, तो लोगों के मन में सवाल उठने लगेत हैं कि क्या कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म के फैसले निष्पक्ष हैं या फिर उनके निजी विचार उन पर असर डालते हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की चिंता यह है कि अगर किसी तरह का पक्षपात दिखता भी है, तो इससे प्लैटफॉर्म पर भरोसा कम हो सकता है। खासकर उन प्लैटफॉर्म्स पर, जिनका इस्तेमाल करोड़ों लोग करते हैं।
चाहे ये चिंता सच हो या सिर्फ लोगों की सोच, लेकिन इस विवाद ने यह जरूर दिखा दिया है कि अगर नेतृत्व से जुड़े लोगों पर राजनीतिक झुकाव का शक भी होता है, तो प्लैटफॉर्म की निष्पक्षता पर सवाल जल्दी उठने लगते हैं।
(मूलरूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)


