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कभी तम्बाकू की पुड़िया के नाम पर हमला, कभी अश्लीलता के नाम पर हत्या… निहंगों की मॉरल पुलिसिंग का शिकार हुई एक और महिला: अब है सुधार की जरूरत

पंजाब के भटिंडा में हाल ही में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर कमल कौर भाभी की हत्या कर दी गई। कमल कौर भाभी की लाश एक गाड़ी में खून से लथपथ अवस्था में मिली। पुलिस ने मामले में जाँच की तो पता चला कि कमल कौर की हत्या निहंग सिखों ने की थी। 

इस मामले में पुलिस ने दो निहंग सिखों को गिरफ्तार किया। बताया गया कि एक निहंग अब भी फरार है। हत्या करने वाले इन निहंग सिखों के नाम निमरनजीत सिंह और जसप्रीत सिंह हैं। मामले में फरार चल रहे अमृतपाल सिंह की तलाश जारी है। वह इस हत्या का मुख्य आरोपित है। 

गिरफ्तार निहंगों ने बताया है कि वह कमल कौर भाभी के कथित अश्लील कंटेंट बनाने को लेकर नाराज थे। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कंचन को समझा चुके थे लेकिन नहीं मानने पर उन्होंने एक विज्ञापन देने के बहाने कमल कौर को बुलाया और एक गैराज में ले जाकर हत्या कर दी। 

उन्होंने बताया कि कमल कौर पंजाब के युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा रही थी। इस मामले में फरार निहंग ने और भी भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा है कि अभी वह पकड़ा नहीं गया है और गिरफ्तारी से पहले 6-7 ऐसे ही इन्फ्लुएंसरों को मार कर जेल जाएगा। 

उसने चेतावनी भी दी है कि अगर 24 घंटे के भीतर अश्लील कंटेंट नहीं हटा तो उसकी गाड़ी ऐसा कंटेंट बनाने वालों के शहर में होगी। उसने इससे पहले 15 मिनट का एक वीडियो भी कमल कौर भाभी की हत्या का कारण बताते हुए रिलीज की थी। 

इस पूरे मामले ने एक बार फिर पंजाब में नैतिकता के आधार पर होने वाली हत्याओं और निहंगों के कानून तोड़ने की बहस को जन्म दे दिया है। बीते कुछ सालों में निहंग लगातार कई बार ऐसी हिंसक वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। अधिकांश हत्याओं के पीछे ऐसा कोई कथित समाज सुधारक टाइप कारण होता है। 

यह कोई अकेला ऐसा मामला नहीं है जब किसी इन्फ्लुएंसर को निहंग धमका रहे हो। पंजाब की एक और इन्फ्लुएंसर प्रीत जट्टी ने भी एक ऐसा ही वीडियो साझा किया है। उसे भी यही अमृतपाल सिंह लगातार धमकियां दे रहा है। प्रीत जट्टी को ज्योतिष संबंधित एक वीडियो बनाने पर माफी माँगने को मजबूर किया गया है। 

अब उसे विदेशी नंबरों से काम करके गानों पर भी वीडियो ना बनाने की धमकी दी जा रही है। प्रीत जट्टी ने इस मामले में एक FIR दर्ज की है। जहां यह एक ओर सीधे तौर पर महिलाओं की स्वतंत्रता पर हमले का मामला है, तो वहीं इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अपने आप को निहंग बताने वाले इन लोगों ने कैसा डर का साम्राज्य स्थापित कर लिया है। 

‘पंजाब के युवा को सुधारने’ और ‘अश्लीलता ना फैलाने’ के नाम पर यह कोई पहली बार मोरल पुलिसिंग की घटना नहीं हुई है। इससे पहले अगस्त, 2023 में एक लड़की के नाईट आउट पर जाने पर अमृतसर में उसके पिता ने ही उसकी हत्या कर दी थी। यह शख्स भी एक निहंग था।

उसने सबक सिखाने के नाम पर इस लड़की की लाश को पूरे गाँव में बाइक से बाँध कर घुमाया भी था। उसने हत्या के बाद कहा था कि यह बाकी लड़कियों के लिए एक सीख होगी। उसे हत्या का कोई भी पश्चाताप नहीं था। यह भी एक ऐसा मामला था जहाँ महिलाओं की आजादी पर हमला तो हुआ ही, वह भी इतनी बर्बरता से।

जुलाई, 2024 में एक बिहारी शख्स पर निहंगों ने सिर्फ इसलिए हमला कर दिया था क्योंकि कथित तौर पर उसके पास तम्बाकू की पुड़िया थी। यह शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी हड्डी पसली टूट गई थीं। यह घटना अमृतसर के हरमंदिर साहिब के पास हुई थी।

इसके अलावा एक पंजाबी सीरियल उडारिया की शूटिंग के सेट पर भी निहंगों ने खूब उत्पात मचाया था। जुलाई, 2024 में यह घटना हुई थी। निहंग इस बात से नाराज थे कि इस सीरियल में सिख विवाह का शूट किया जाना था। निहंगों ने इसे बेअदबी के नाम पर सही ठहराया था।

यह बात एकदम स्पष्ट है कि अश्लीलता की समाज में जगह नहीं होनी चाहिए, ना ही किसी धर्म के आदर्शों की बेअदबी होनी चाहिए। लेकिन इन सबके लिए हत्या और तलवारों से हमले कतई जायज नहीं हैं। पाकिस्तान में बेअदबी के नाम पर हमले जघन्य हत्याएँ देखी हैं।

कमलेश तिवारी की भारत में बेअदबी के नाम पर हत्या की गई। निहंग सिख अगर किसी बेअदबी या अश्लीलता से नाराज हैं तो उन्हें कानूनी रास्ता अख्तियार करना चाहिए ना कि किसी की हत्या करके वीडियो बनाने चाहिए। हत्या कर देना और फिर उसे समाजसुधार के नाम पर जायज ठहराना तालिबानी सोच जैसा है।

कई मौकों पर निहंगों ने पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया है। एक पुलिसकर्मी का हाथ एक निहंग ने काट दिया था। विडंबना यह है कि कई मामलों में निहंगों के इन कृत्यों को लोग सही ठहराते हैं। हत्या के बाद उन पर फूलों की बरसात की जाती है।

निहंगों पर सिख धर्म की रक्षा का भार है, वह सिखों का लड़ाका समूह हैं, लेकिन पंजाब से लेकर दिल्ली तक ऐसी घटनाएँ उनको लेकर नकारात्मक विचार बनाती हैं। यदि जल्द ही सिखों के भीतर से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने की कोशिश नहीं हुई तो यह विकराल रूप ले लेगी।

अहमदाबाद में एअर इंडिया के ड्रीमलाइनर क्रैश ने बताया, एयरोस्पेस में आत्मनिर्भरता भारत के लिए क्यों जरूरी: तकनीक में पीछे होने का बहाना अब नहीं करेगा काम

गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून,2025 को हुए विमान हादसे ने 250 से अधिक जिंदगियाँ छीन लीं। विमान में बैठने वालों के साथ ही जमीन पर मौजूद 20 से अधिक लोग काल के गाल में समा गए। दुर्घटना का शिकार होने वाला विमान अमेरिकी कंपनी बोइंग का बनाया हुआ 787 ड्रीमलाइनर था। 

विमान टेक ऑफ के एक मिनट के भीतर ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अभी दुर्घटना के कारण स्पष्ट नहीं हुए हैं। कहीं दावा है कि चिड़िया टकराई तो कहीं कहा गया कि विमान के दोनों इंजन फेल हो गए और वह उड़ने में अक्षम रहा। 

विमान का डाटा रिकॉर्ड करने वाला उपकरण ब्लैक बॉक्स घटनास्थल से बरामद हुआ है। कई और ऐसे उपकरण बरामद हुए हैं, जिनका उपयोग दुर्घटना के कारण के परीक्षण में होगा। इसके बाद ही कारण स्पष्ट हो सकेगा। 

संभव है कि इसमें कुछ महीने या एक साल तक लग जाए। इस बीच उंगलियाँ बोइंग कंपनी पर भी उठी हैं। बोइंग का हालिया वर्षों में सुरक्षा पर ट्रैक रिकॉर्ड खराब रहा है। उसके 737 मैक्स विमान लगातार दुर्घटना का शिकार हुए हैं। 

जो विमान हादसे का शिकार हुए, उनके साथ भी तकनीकी समस्याओं की बात सामने आई। यह बातें बोइंग के पूर्व कर्मचारी ने कहीं थीं। उसका दावा था कि गड़बड़ तरीके से बनाए हुए ड्रीमलाइनर विमान एअर इंडिया को दिए गए थे। 

आगे क्या होगा, यह समय बता पाएगा। लेकिन, इस विमान हादसे ने दोबारा से भारत में एयरोस्पेस इंडस्ट्री को मजबूत किए जाने की माँग को बल दिया है। 

यह विमान भारत में नहीं बना था। भारत में उड़ने वाले 90% से अधिक नागरिक विमान भारत में नहीं बने होते। ऐसा नहीं है कि भारत में अगर कोई विमान बनाया जाए तो वह कभी दुर्घटना का शिकार नहीं होगा। 

लेकिन बात यह है कि हमारे स्वयं के बनाए विमान पर हमारा नियंत्रण होगा। उसके निर्माण, उसके प्रमाणन और उपयोग की जाने वाली तकनीकों पर हम नजर रख सकेंगे। 

जैसा कि बोइंग के मामले में सामने आया कि वहाँ लापरवाही का दौर चल रहा है, संभव है कि भारत में हमें यह नहीं देखना पड़ता। वैसे तो हमें साजिश की थ्योरी में ज्यादा विश्वास नहीं करना चाहिए, लेकिन बोइंग जैसी कम्पनियाँ मुनाफे पर चलती है। 

यह सिद्ध हो जाए कि हादसा बोइंग की तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ, तो उन्हें अरबों डॉलर का नुकसान होगा। वहीं अगर यह सिद्ध हो जाए कि हादसा पायलट की किसी गलती से हुआ, तो बोइंग साफ बच सकती है। 

ऐसा होगा, यह जरूरी नहीं है लेकिन बड़ी अमेरिकी कंपनियां पहले भी जाँच प्रभावित करते पकड़ी गई हैं। भारतीय पायलट विश्व में पेशेवरों में गिने जाते हैं, उनके माथे यह दोष मढ़ा जाना एक और समस्या होगा।

अहमदाबाद हादसा हो सकता है कि पायलट की ही गलती से हुआ हो, लेकिन भारतीय एयरोस्पेस इंडस्ट्री को मजबूत करने का तर्क यहाँ भी कमजोर नहीं पड़ता। विदेशी विमानन कंपनियों पर निर्भरता के चलते हमें पहले भी बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। 

वर्ष 2023 में भारत की स्थानीय एयरलाइन गो फर्स्ट इसी के चलते बंद हो गई। उसके एयरबस से खरीदे विमानों में प्रैट एंड व्हिटनी के इंजन लगे थे। यह इंजन गड़बड़ हुए जिसके चलते गो फर्स्ट के दर्जनों विमान जमीन पर खड़े हो गए। इंजन कंपनी ने कई बार कहने के बाद भी सुनवाई नहीं की, और एक भारतीय एयरलाइन बिना किसी गलती के बंद हो गई। 

यह कहानी सिर्फ गो फर्स्ट की नहीं है। NITI आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि अलग अलग समस्याओं की वजह से वर्तमान में लगभग 130 से अधिक विमान जमीन पर खड़े हैं और इससे एयरलाइंस को रोज करोड़ों का घाटा सहना पड़ रहा है। 

भारत में वर्तमान में लगभग 800 यात्री विमान सेवाएं देते हैं, ऐसे में समझिए कि बाजार पर यह खड़े विमान क्या फर्क डाल रहे हैं। किसी बाजार की 16% कैपेसिटी अगर कम हो जाए तो उसका सीधा नुकसान ग्राहक उठाता है। 

इन जमीन पर खड़े अधिकांश विमानों के पीछे तकनीकी कारण है जिसकी कुंजी विदेशी कंपनियों के पास है। यदि ऐसे ही विमान हम भारत में बना रहे होते तो संभवतः यह स्थिति आने से पहले सचेत होते और कम से कम आने के बाद तो दूसरों का मुंह ना ताक रहे होते। 

भारतीय एयरलाइंस ने वर्तमान में लगभग 1500 विमानों का ऑर्डर दे रखा है। यह सारे ऑर्डर या तो बोइंग या एयरबस को मिले हैं। इसके चलते लाखों करोड़ का फायदा अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस था जर्मनी जैसे देशों को हुआ है। स्थानीय स्तर पर विमान का निर्माण यह पैसा भी बच सकता है। 

समस्याएँ सिर्फ यात्री विमानों में हो, ऐसा नहीं है। वायु सेना या थल सेना के लिए खरीदे जाने वाले विमानों में तो और भी दिक्कतें हैं। भारतीय वायु सेना कार्गो यानी सैन्य साजोसामान को ढोने वाले रूसी IL 76 विमान उपयोग करती है। 

इन विमानों के साथ भी समस्याएं रही हैं। रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि इन विमानों का उड़ान के लिए पूरे समय तैयार ना होना एक बड़ा मुद्दा है। रूस इन तकनीकी समस्याओं को हल नहीं कर पाया है। इसी तरह भारत निर्मित तेजस विमान अमेरिकी इंजन के भरोसे हैं। 

अमरीकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक इसके लिए इंजन देती है। इस इंजन की सप्लाई में एक वर्ष की देरी हुई है, इसके चलते तेजस विमानों का निर्माण अधर में अटका हुआ है। वायुसेना इसको लेकर चिंता जता चुकी है। जनरल इलेक्ट्रिक को 100 से अधिक इंजन सप्लाई करने हैं, जिनमें से वह अभी 10 भी नहीं कर सकी है। 

यह सूची और लंबी होती चली जाती है। इन सब के मूल में एक ही बात है और वो है आत्मनिर्भरता। यह बात सही है कि हम अभी तकनीकी तौर पर सक्षम नहीं हैं कि ड्रीमलाइनर जैसे विमान या जनरल इलेक्ट्रिक के इंजन जैसे इंजन बना पाएँ। लेकिन यह तर्क सदैव नहीं दिया जा सकता। 

हमें कहीं ना कहीं से शुरू करना ही होगा। यदि सदैव हम यही सोच कर बैठे रहे, तो विदेशों पर ही निर्भर रहेंगे। यह भी नहीं है कि हमने कभी ऐसा कुछ किया ना हो। ब्रह्मोस जैसी मिसाइल बनाना हो या फिर तेजस का निर्माण है, हमने जब प्रयास किए हैं, तब सफल रहे हैं। 

अब भी ऐसे ही कदम की जरूरत है, अहमदाबाद विमान हादसा दुखद है, लेकिन इसके साथ ही सीख भी है कि आत्मनिर्भरता का कोई विकल्प नहीं। 

ईरान के रक्षा मंत्रालय पर इजरायल ने साधा निशाना… परमाणु बनाने वाले ठिकानों को भी नहीं छोड़ा: हर जगह दागी मिसाइल, साफ कहा- अब हमला किया तो पूरा तेहरान जला देंगे

इजरायल और ईरान के बीच तीसरी रात भी जंग जारी रही। दोनों देशों ने एक दूसरे पर जमकर मिसाइलें दागी। पिछले 48 घंटे से संघर्ष जारी है। दोनों देशों की सुबह सायरन की आवाजों से हुई। इजरायल ने ईरान के रक्षा मंत्रालय को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके साथ तेहरान और बुशहर में ऑयल डिपो और गैस रिफाइनरी समेत 150 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (14 जून 2025) रात को तेहरान की एक ऊँची रिहायशी इमारत पर इजरायली हमले में 29 बच्चों समेत 60 लोगों की मौत हो गई। इजरायल के मुताबिक IDF ईरान की परमाणु हथियार परियोजना को नुकसान पहुँचाने के लिए उन ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इनमें ईरान के रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय, एसपीएनडी परमाणु परियोजना का मुख्यालय और अन्य लक्ष्य शामिल थे।

वहीं, टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक ईरान ने इजरायल के 4 ठिकानों पर हमला किया। इनमें तेल अवीव के अलावा बत याम, रेहोवोत और रमत गान क्षेत्र शामिल हैं। यहाँ बैलिस्टिक मिसाइल हमले में एक 60 साल की महिला समेत 8 लोगों की मौत हुई है। जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

बता दें कि इजरायल अब ईरान के सभी न्यूक्लियर ठिकानों को पूरी तरह तबाह करने की योजना पर काम कर रहा है। ईरान में फोर्दो, खोनडाब, नतांज, इस्फहान और बुशेहर जैसे पाँच बड़े न्यूक्लियर प्लांट हैं, जिन्हें इजरायल लगातार निशाना बना रहा है।

इससे पहले इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने ईरान को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि अब ईरान के हमले के जवाब में इजरायल कोई कमी नहीं छोड़ेगा। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान की ओर से इजरायल पर एक भी मिसाइल का हमला होता है तो जवाब में ‘तेहरान जल जाएगा।’

ईरान परमाणु की नहीं देगा जानकारी

ईरान और इजरायल के बीच परमाणु युद्द के बीच ईरान ने फैसला लिया है। ईरान ने कहा कि वह इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के साथ अब और सहयोग नहीं करेगा। साथ ही ईरान ने इजरायल के हमलों पर IAEA की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई।

ईरान उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने IAEA को लेकर कहा कि इसका कोई मतलब नहीं है कि हमारे साइट पर हमला हो और एजेंसी चुप रहे। उन्होंने कहा, “ईरान अब IAEA को अपने न्यूक्लियर साइट डेवलपमेंट की जानकारी नहीं देगा।”

केदारनाथ से लौटते वक्त रुद्रप्रयाग में हेलीकॉप्टर क्रैश, 23 महीने के बच्चे समेत 7 की मौत: खराब मौसम के कारण बिगड़े हालात, NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटीं

उत्तराखंड में रविवार(15 जून 2025) को केदारनाथ धाम से फाटा आ रहा हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड क्षेत्र में सुबह करीब साढ़े पाँच बजे ये हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ। हादसे के वक्त हेलिकॉप्टर में कुल सात यात्री ही थे। सूचना पाते ही NDRF और SDRF की टीम मौके पर पहुँचीं। रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ। मुख्यमंत्री धामी ने खुद इसकी जानकारी दी।

जानकारी के अनुसार खराब मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ है। हेलीकॉप्टर आर्यन एविएशन का बताया जा रहा है। । हेलिकॉप्टर नोडल अधिकारी राहुल चौबे और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने इस घटना की पुष्टि की है।

मृतकों में 23 महीने के बच्चा भी शामिल है। हेलिकॉप्टर गौरी माई खर्क से ऊपर जंगल में गिरा था। जिसके बाद गौरीकुंड के ऊपर घास काट रही नेपाली मूल की महिलाओं ने हेलीकॉप्टर क्रैश होने की सूचना दी। बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर हादसे में बीकेटीसी के कर्मचारी विक्रम सिंह रावत भी सवार थे।

हेलिकॉप्टर हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “जनपद रुद्रप्रयाग में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। बाबा केदार से सभी यात्रियों के सकुशल होने की कामना करता हूँ”।

गौरतलब है कि इस बार चारधाम यात्रा के दौरान अलग-अलग धामों पर हेलिकॉप्टर क्रैश जैसी कई घटनाएँ हुई हैं। इतना ही नहीं कई बार हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग भी करानी पड़ी है। कुछ दिनों पहले ही चारधाम यात्रा के दौरान बीच सड़क पर ही हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। वहीं एक हेलीकॉप्टर यात्रा की शुरुआत में ही क्रैश हुआ था। इस हादसे में भी कई लोगों की मौत हुई थी।

अहमदाबाद प्लेन क्रैश में चली गई 241 यात्रियों की जान, फिर भी लापरवाही आ रही नजर: गड़बड़ियों को नजरअंदाज करने की परंपरा पर कब लगेगी लगाम

एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट (AI 171)  गुरुवार (12 जून 2025) को उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंडों में विमान क्रैश हो गाय और अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल परिसर में स्थित मेडिकल स्टाफ हॉस्टल से टकरा गई। इस टक्कर के बाद विमान में आग लग गई और धुँए का गुबार चारो तरफ फैल गया।

इस दुर्घटना में तकरीबन 265 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में विमान में सवार यात्री और क्रू के सदस्य तो थे ही, पर साथ ही जमीन पर मौजूद कई लोग भी इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि कई शव इतनी बुरी तरह जल गए कि उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया।

यह विमान एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर था, जो अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट जा रहा था। इसमें कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई यात्री शामिल था। इनके अलावा 10 केबिन क्रू और 2 पायलट भी विमान में मौजूद थे। यह घटना हाल के वर्षों में भारत की सबसे बड़ी और दर्दनाक हवाई दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी इस हादसे में मारे गए। दूसरी ओर एक सकरात्मक पहलू में, ब्रिटिश नागरिकों में शामिल 40 वर्षीय विश्वास कुमार रमेश इस भयानक दुर्घटना में चमत्कारिक रूप से बच गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

न्यू इंडिया अब्रॉड की रिपोर्ट के अनुसार, एक चश्मदीद ने बताया कि “विमान का आधा हिस्सा उस आवासीय इमारत पर गिरा जहाँ डॉक्टर अपने परिवारों के साथ रहते थे”। इसके अलावा, विमान का आगे का पहिया अस्पताल परिसर की कैंटीन पर जा गिरा, जहाँ उस समय छात्र दोपहर का भोजन कर रहे थे।

प्रारंभिक जाँच के मुताबिक, अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से उड़ान भरने के एक मिनट से भी कम समय के अंदर, दोपहर 1:38 पर  विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान महज 625 फीट की ऊँचाई तक ही पहुँच पाया था, जबकि एयरपोर्ट की ऊँचाई लगभग 200 फीट थी।

हादसे से ठीक पहले विमान अचानक नीचे की ओर क्यों आने लगा, इसका कारण अब तक साफ नहीं हो पाया है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बोइंग कंपनी से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को सामने ला दिया है। 12 जून को जब न्यूयॉर्क स्टॉक मार्केट बंद हुआ, तो बोइंग के शेयर करीब 5% गिर गए।

पिछले साल बोइंग को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा था। सुरक्षा खामियाँ, गुणवत्ता नियंत्रण में गड़बड़ियाँ, और कर्मचारियों की सात सप्ताह चली लंबी हड़ताल, जिससे कंपनी को हर महीने लगभग 100 करोड़ रुपए (1 बिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ।

बोइंग अब भी 2018 और 2019 की दो बड़ी दुर्घटनाओं के प्रभाव से जूझ रहा है, जो इसके 737 मैक्स विमान से जुड़ी थी, जिनमें कुल 346 लोगों की मौत हुई थी। पिछले महीने, कंपनी और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत बोइंग को उन दुर्घटनाओं के लिए आपराधिक जिम्मेदारी से छूट मिल गई।

हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी बोइंग ने हाल ही में एक समझौते के तहत कुछ शर्तों को मानने पर सहमति दी है। कंपनी ने जुर्माना भरने, सुरक्षा और गुणवत्ता सुधार में निवेश करने, संघीय जाँच में रुकावट डालने की बात स्वीकार करने और हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए एक फंड में पैसा देने पर हामी भरी है।

हालाँकि, पीड़ित परिवारों ने इस समझौते का विरोध किया है। अब इस सौदे को लागू करने के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी है। बोइंग को पिछले कुछ वर्षों में गंभीर सुरक्षा समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जो अब भी कंपनी की छवि और भरोसे को नुकसान पहुँचा रही है।

सोशल मीडिया ने बोइंग को घेरा

जापान की सबसे बड़ी एयरलाइन ऑल निप्पॉन एयरवेज को 2011 में पहला बोइंग ड्रीमलाइनर मिला था। भारत में, एयर इंडिया करीब तीन दर्जन बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों का संचालन करती है, जो दुनिया भर में उड़ान भर रहे 1,100 से ज्यादा विमानों का हिस्सा है। इस हादसे में शामिल विमान को जनवरी 2014 में एयर इंडिया को सौंपा गया था।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने बोइंग विमानों की खराब गुणवत्ता और प्रदर्शन पर सवाल उठाए। पत्रकार सूर्या कानेगाँवकर ने बोइंग के पुराने रिकॉर्ड पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने विमानों में नकली टाइटेनियम का इस्तेमाल किया, सॉफ्टवेयर की खामियों को नजरअंदाज किया, और गलत इंजीनियरिंग डिजाइनों को सुधारने की जगह उन्हीं का उपयोग जारी रखा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बोइंग ने सुरक्षा नियमों की बार-बार अनदेखी की है।

कानेगाँवकर ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों ने कंपनी की अंदरूनी खामियों को उजागर किया, वे बाद में मृत मिले और बोइंग ने अपने अपराध छुपाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) को ‘खून का पैसा’ दिया।

उनका आरोप है कि बोइंग और वाशिंगटन के बीच ऐसा समझौता है जिससे दूसरे देशों को घटिया विमान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। उनके शब्दों में, ‘संक्षेप में, यही है बोइंग की असली तस्वीर’।

स्पुतनिक इंडिया द्वारा पोस्ट किए गए 2014 के एक लीक वीडियो में, बोइंग ड्रीमलाइनर असेंबली में काम करने वाले कर्मचारियों ने विमान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

पिछले साल, अल-जजीरा ने साउथ कैरोलिना स्थित बोइंग की चार्ल्सटन फैक्ट्री का एक छिपा हुआ कैमरा वीडियो जारी किया। इसमें एक व्यक्ति ने गुप्त रूप से फैक्ट्री में काम करने वाले 15 कर्मचारियों से पूछा कि क्या वे उस विमान में उड़ान भरना चाहेंगे जिसे वे खुद बना रहे हैं।

चौंकाने वाली बात यह थी कि 15 में से 10 कर्मचारियों ने मना कर दिया, जिससे बोइंग ड्रीमलाइनर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एक बोइंग कर्मचारी ने साफ शब्दों में कहा, “मैं इन विमानों में से किसी पर भी नहीं उड़ूँगा, क्योंकि मैं देखता हूँ कि यहाँ कैसी घटिया गुणवत्ता का काम हो रहा है”। जिस व्यक्ति ने छिपा हुआ कैमरा पहना था, उसने बताया कि जब उसने फैक्ट्री की वास्तविक स्थिति देखी, तो वह उसे मीडिया तक लाने के लिए मजबूर हो गया।

एक गुमनाम मुखबिर ने कहा, “787 ड्रीमलाइनर से जुड़ी 90% समस्याओं को छुपा दिया गया है। ये तो सिर्फ ऊपर दिख रही बर्फ की छोटी सी चोटी है, असली समस्या इससे कहीं बड़ी है”।

एक नेटिजन (इंटरनेट यूजर) ने बोइंग की आलोचना करते हुए उसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ कहा और सवाल उठाया कि इतने खराब रिकॉर्ड के बावजूद कंपनी के खिलाफ कोई गंभीर जाँच क्यों नहीं हो रही है।

एक अन्य पत्रकार ने इस बात को खास तौर पर उठाया कि बोइंग के पूर्व कर्मचारी और मुखबिर जॉन बार्नेट ने अपनी मौत से ठीक पहले बोइंग के 787 विमान में गंभीर गुणवत्ता से जुड़ी खामियों के बारे में चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ये कमियाँ भविष्य में घातक हादसों का कारण बन सकती हैं।

एक लेख में लिखा गया है कि अगर किसी हादसे में पायलट बच जाता है, तो बोइंग उस पर मुकदमा कर देती है, और अगर पायलट की मौत हो जाती है, तो उसे ही हादसे के लिए दोषी ठहरा देती है। इससे कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बचती रहती है, और यही तरीका बार-बार इस्तेमाल किया जाता है।

ड्रीमलाइनर विमानों में पहले से ही गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएँ रही हैं। इन खामियों के कारण इसकी डिलीवरी एक साल से ज्यादा समय तक रोक दी गई थी। बाद में, 2022 की गर्मियों में अमेरिकी विमानन संस्था (FAA) ने बोइंग की उस योजना को मंजूरी दी, जिसमें गलत सामग्री से बने टाइटेनियम के हिस्सों को बदलना और विमान के ढाँचे में मौजूद बेहद पतले, कागज जितने फासलों को बंद करना शामिल था। बोइंग का कहना था कि उस समय ये समस्याएँ विमान की तत्काल सुरक्षा पर असर नहीं डाल रही थीं।

हाल ही में एक बार फिर समस्या सामने आई। इस साल की शुरुआत में, पंजीकरण संख्या N819AN वाले एक ड्रीमलाइनर में हाइड्रोलिक लीक और फ्लैप में खराबी के कारण 25 दिनों के अंदर कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी।

बोइंग की संकटपूर्ण विरासत

इथियोपियन एयरलाइंस का एक बोइंग 737 मैक्स 8 विमान, जिसमें 149 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे, नैरोबी जा रहा था। यह विमान अदीस अबाबा से उड़ान भरने के सिर्फ 6 मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

इथियोपियाई जाँच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हादसे का एक मुख्य कारण बोइंग का नया उड़ान नियंत्रण सॉफ्टवेयर था, जिसे MCAS (Maneuvering Characteristics Augmentation System) कहा जाता है। यह सिस्टम बार-बार विमान की नोज को नीचे की ओर धकेलता रहा, जिससे पायलट विमान का संतुलन नहीं संभाल पाए।

इस खामियों की पुष्टि अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और फ्रांस की जाँच एजेंसी BEA (Bureau of Inquiry and Analysis) ने भी की। इस गंभीर दुर्घटना के बाद, बोइंग 737 मैक्स विमानों को 20 महीने से ज्यादा समय तक दुनिया भर में उड़ान भरने से रोक दिया गया।

चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने मार्च 2022 में एक बोइंग 737-800 विमान, जो कुनमिंग से ग्वांगझू जा रहा था, गुआंग्शी प्रांत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गई। यह हादसा इतना गंभीर था कि पूरा देश हैरान रह गया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तुरंत इस हादसे की गहन जाँच के आदेश दिए। इस घटना के बाद, चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने अपने सभी 737-800 विमानों की उड़ानें रोक दीं।

चीन के नागरिक उड्डयन प्रशासन (CAAC) ने बोइंग के उस शुरुआती दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि हादसा पायलट की गलती से हुआ। इसके बजाय, चीन की एजेंसी ने इस दुर्घटना के लिए बोइंग के MCAS सिस्टम के खराब डिजाइन को जिम्मेदार ठहराया।

जेजू एयर की फ्लाइट दिसंबर 2024 में 7C2216 ने दक्षिण कोरिया के मुआन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बेली-लैंडिंग की (यानी विमान का पेट रनवे से टकराया)। विमान रनवे से फिसलकर बाहर निकल गया, एक दीवार से टकराया, और विस्फोट हो गया।

इस हादसे में विमान में सवार 175 यात्रियों में से सभी की मौत हो गई, और छह में से चार क्रू मेंबर भी मारे गए। केवल दो क्रू मेंबर ही बचाए जा सके। इसके बाद दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने ऐलान किया कि वे देश की सभी एयरलाइनों द्वारा उड़ाए जा रहे बोइंग 737-800 विमानों की तुरंत सुरक्षा जाँच करेंगे।

इसके एक महीने पहले, नवंबर में, लिथुआनिया के विनियस एयरपोर्ट के पास एक कार्गो विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह विमान स्पेनिश कार्गो कंपनी स्विफ्ट एयर का था, जो डीएचएल (DHL) के लिए बोइंग 737 चला रही थी। यह हादसा लैंडिंग से ठीक पहले हुआ, जब विमान एक रिहायशी इलाके के पास गिर पड़ा। इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए।

बोइंग की उत्पादन में देरी और इसके नई मॉडल वाले विमानों में भरोसे की कमी के चलते यूरोप में कई एयरलाइंस अब भी पुराने वाणिज्यिक विमान मॉडल का इस्तेमाल कर रही हैं।

सुरक्षा चिंताओं और लगातार आने वाली तकनीकी समस्याओं की वजह से एयरलाइंस बोइंग के नए विमानों पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही हैं। वहीं, बोइंग की निर्माण से जुड़ी समस्याओं के कारण विमानों की डिलीवरी में देर हो रही है और बैकलॉग बढ़ता जा रहा है।

जनवरी 2025 में, एक बोइंग 737 मैक्स 9 विमान में उड़ान के दौरान केबिन का एक दरवाजा अचानक गिर गया, जिससे विमानन उद्योग में बड़ी चिंता फैल गई। यह घटना अलास्का एयरलाइंस की उड़ान में हुई थी। किसी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन इससे बोइंग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।

इस हादसे के बाद, अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) ने अधिकांश बोइंग 737 मैक्स 9 विमानों को जाँच के लिए ग्राउंडेड (उड़ानों से रोका) कर दिया। बाद में जानकारी सामने आई कि बोइंग ने पिछले दो सालों में अपनी कंपनी में विविधता, समानता और समावेश (DEI) को प्राथमिकता देने के लिए संस्थागत बदलाव किए थे।

बोइंग के विवादास्पद ट्रैक रिकॉर्ड का कोई अंत नहीं

दो ईंधनों के रिसाव की वजह से मार्च 2013 में जापान एयरलाइंस के 787 ड्रीमलाइनर विमान को उड़ान से हटा दिया गया था। इसी तरह, यूनाइटेड एयरलाइंस के 787 विमान में भी बैटरी की समस्या आई थी। इसके बाद, अमेरिका और जापान की सरकारों ने दोनों देशों के ड्रीमलाइनर विमान बेड़े को उड़ान भरने से रोक दिया और गहन जाँच शुरू की।

बोइंग ने एयर इंडिया को भी चेतावनी दी थी कि वह भारत में तेज और उच्च स्तर के तूफानों के पास अपने 787 विमान न उड़ाए, क्योंकि वहाँ इंजन जमने का खतरा ज्यादा होता है। इस कारण, ड्रीमलाइनर को दिल्ली-टोक्यो मार्ग से हटा दिया गया।

FAA के सुरक्षा मूल्यांकन के तहत, एयर इंडिया के दिल्ली-कोलकाता मार्ग पर उड़ान भर रहा 787 ड्रीमलाइनर विमान विंडशील्ड टूटने की वजह से वापस दिल्ली लौट आया। इसके अलावा, एयर इंडिया के दो अन्य 787 विमानों को भी रोक दिया गया क्योंकि उनके जनरल इलेक्ट्रिक (GE) इंजन उसी श्रृंखला के थे जिनकी जाँच चल रही थी।

एयर इंडिया के 787 बेड़े ने शुरूआत के 14 महीनों में 136 छोटी-बड़ी तकनीकी समस्याओं का सामना किया। इससे कंपनी को अपने मार्गों पर अन्य विमानों से उड़ानें बदलनी पड़ीं और पायलट रखरखाव और विमान वित्तपोषण पर प्रतिदिन लगभग 1.43 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। इसके कारण कुल खर्च में रोजाना 60 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई।

बोइंग ने जवाब में ‘मॉडिफिकेशन पैकेज’ पेश किया, जिसमें सभी ड्रीमलाइनर विमानों को 10 दिनों के लिए ग्राउंडिंग दी गई और विमान के सॉफ्टवेयर और घटकों में सुधार किया गया।

2015 से 2024 के बीच एयर इंडिया के 787 विमानों में इंजन बंद होने, उड़ान नियंत्रण की समस्याएँ, गियर न वापस लेना, केबिन में धुआँ, संचार टूटना, विंडशील्ड में दरार, केबिन दबाव की समस्या, बेहद अधिक टर्बुलेंस, एल्टीट्यूड में गिरावट, स्लेट की खराबी, टायर फटने और हाइड्रोलिक लीक जैसी 32 घटनाएँ हुईं। इन तकनीकी समस्याओं के कारण दो बार दुर्घटनाएँ भी हुईं, जिनमें कई यात्री घायल हुए।

व्हिसलब्लोअर्स ने बोइंग को बेनकाब किया

बोइंग के इंजीनियर 2024 में सैम सालेहपुर ने 787 ड्रीमलाइनर विमान की संरचनात्मक मजबूती को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने विमान के धड़ (फ्यूजलेज) के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया और जरूरी सावधानियाँ नहीं बरतीं, जिससे भविष्य में खतरनाक दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

सालेहपुर ने जनवरी 2024 में FAA (संघीय विमानन प्रशासन) को शिकायत दी कि बोइंग की टीम ने धड़ के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ते समय खाली जगहों (गैप्स) को ठीक से नहीं भरा, जिससे घर्षण बढ़ता है और विमान का जीवनकाल घटता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियरों पर बिना जाँच के काम को मंजूरी देने का दबाव था। FAA इस शिकायत की जाँच कर रहा है।

सालेहपुर का कहना है कि उन्होंने ये समस्याएँ तीन साल तक बताईं, लेकिन उन्हें नजर अंदाज कर दिया गया, काम में देरी न करने के लिए कहा गया और चुप रहने के लिए दबाव डाला गया।

उन्होंने अमेरिकी सांसदों को बताया कि बोइंग के खिलाफ बोलने पर उन्हें धमकाया और परेशान किया गया। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि विमान के पुर्जों को जबरदस्ती फिट करने के लिए कर्मचारी उन पर कूदते थे, जिससे वो टुकड़े विकृत हो जाते थे, और यह तरीका गलत और खतरनाक है।

ऐसी ही 2021 में भी गलत असेंबली की शिकायतें सामने आई थीं, जिस पर FAA और बोइंग ने ड्रीमलाइनर की डिलीवरी रोक दी थी। बाद में, निर्माण प्रक्रिया में बदलाव के बाद डिलीवरी फिर से शुरू कर दी गई, लेकिन उस दौरान किसी भी विमान को उड़ानों से नहीं रोका गया।

ड्रीमलाइनर को बनाने वाली साउथ कैरोलिना की फैक्ट्री पहले भी व्हिसलब्लोअर्स की शिकायतों का केंद्र रही है। जॉन बार्नेट, जो वहाँ गुणवत्ता प्रबंधक थे और करीब 30 साल तक बोइंग में काम कर चुके थे।

उन्होंने 2019 में कहा था कि कंपनी में दबाव में काम कर रहे कर्मचारी खराब हिस्से जानबूझकर लगा रहे हैं। बार्नेट का दावा था कि बोइंग ने उनके खिलाफ प्रतिशोध लिया, और कई सालों की कानूनी लड़ाई के बाद, 2023 में उन्होंने आत्महत्या कर ली। बोइंग और उनके परिवार के बीच इस साल उनके केस का समझौता हो गया।

इसी तरह, जोशुआ डीन, जो स्पिरिट एयरोसिस्टम्स (बोइंग के आपूर्तिकर्ता) में गुणवत्ता लेखा परीक्षक थे, ने भी FAA से शिकायत की थी कि वहां 737 उत्पादन लाइन पर सीनियर मैनेजमेंट गंभीर गड़बड़ियाँ कर रहा है। बाद में उनका भी निधन हो गया।

सेंटियागो पेरेडेस, जो स्पिरिट एयरोसिस्टम्स में निरीक्षक थे, ने डीन की मौत के बाद खुलेआम अपनी चेतावनियाँ सामने रखीं। उन्होंने कहा कि उन्हें भी लंबे समय से अनदेखा किया गया और अब वे डरे तो नहीं हैं, लेकिन सतर्क हैं। उन्होंने कहा, “मैं अब वही काम पूरा करना चाहता हूँ जो डीन ने शुरू किया था”।

जोकरों द्वारा डिजाइन, बंदरों द्वारा निगरानी

अमेरिकी कॉन्ग्रेशनल इन्वेस्टीगेटर्स को 2020 में सौंपे गए 100 से ज्यादा पन्नों के आंतरिक दस्तावेजों से पता चला कि बोइंग के कर्मचारियों ने 737 मैक्स विमान के निर्माण के दौरान गंभीर लापरवाहियाँ की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों ने संघीय सुरक्षा नियमों का मज़ाक उड़ाया, नियामकों को गुमराह करने की बात की और विमान में भविष्य में होने वाली संभावित तकनीकी खामियों पर चुटकुले किए।

बोइंग के पायलटों और इंजीनियरों के बीच हुई बातचीत में, उन्होंने सॉफ्टवेयर बग और 737 मैक्स के उड़ान सिमुलेटर से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। ये 2018 और 2019 की दो घातक दुर्घटनाओं में शामिल रहे, जिनमें 346 लोग मारे गए।

कर्मचारियों ने बताया कि बोइंग ने कई तकनीकी समस्याओं को जानबूझकर छिपाया, जब FAA ने विमान के निर्माण और नए पायलटों के प्रशिक्षण में इस्तेमाल होने वाले सिमुलेटर को मंजूरी दी थी। इन पायलटों ने पहले कभी 737 नहीं उड़ाया था।

कुछ कर्मचारियों ने मैक्स के डिजाइन पर सवाल उठाए। एक ने 2017 में कहा, “इस विमान को जोकरों ने डिजाइन किया है, जिनकी निगरानी बंदर कर रहे हैं।” इसके अलावा, FAA अधिकारियों का भी कई बार मजाक उड़ाया गया।

2019 की एक मीडिया जाँच में सामने आया कि बोइंग ने अपने कर्मचारियों पर दबाव डाला कि वे सुरक्षा खामियों की रिपोर्ट न करें, और कंपनी सुरक्षा की बजाय डिलीवरी और लाभ को प्राथमिकता दे रही थी।

न्याय विभाग ने बोइंग को संरक्षण दिया

बोइंग और अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने मई 2024 में एक समझौता किया, जिसके तहत बोइंग को 737 मैक्स विमान से जुड़ी दो घातक दुर्घटनाओं से पहले अधिकारियों को गलत जानकारी देने के लिए आपराधिक सजा तक से छूट मिल गई।

इन दो हादसों में 346 लोगों की मौत हुई थी। इस समझौते के तहत, बोइंग को $1.1 बिलियन (9,130 करोड़ रुपए) से ज्यादा का जुर्माना और भुगतान करना पड़ा, जिसमें पीड़ितों के परिवारों के लिए $445 मिलियन(3,693.5 करोड़ रुपए) का मुआवज़ा भी शामिल है।

DoJ ने कहा कि बोइंग ने FAA की जाँच में बाधा डालने और उसे गुमराह करने की साजिश करना स्वीकार किया है। इसके बाद, सितंबर 2024 में अमेरिकी सीनेट की एक समिति ने बोइंग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया और FAA की निगरानी पर सवाल उठाए। समिति ने कहा कि बोइंग के कर्मचारी सुरक्षा की बजाय तेज उत्पादन के दबाव में काम कर रहे थे।

सीनेट समिति ने यह भी कहा कि बोइंग की सुरक्षा में खामियाँ, FAA के साथ पारदर्शिता की कमी और एजेंसी की धीमी प्रतिक्रिया से साफ है कि FAA की निगरानी प्रभावी नहीं रही। FAA ने बोइंग में कई जाँचे शुरू कीं, जिनमें से एक 116 पन्नों की रिपोर्ट में 97 मामलों में नियमों के उल्लंघन की की बात सामने आई।

इसमें उत्पादन नियंत्रण, पुर्जों की सही तरीके से हैंडलिंग और स्टोरेज, और कर्मचारियों की लापरवाही शामिल थी। FAA ने यह भी बताया कि पिछले साल बोइंग के व्हिसलब्लोअर्स ने 200 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कीं, जिससे यह साफ हुआ कि कंपनी के अंदर गलतियों को ‘छिपाने की परंपरा’ है।

इन सब विवादों, नियमों की अनदेखी, और विमानों में सुरक्षा समस्याओं के कारण बोइंग का बाज़ार मूल्य (मार्केट कैप) पिछले पाँच वर्षों में 30% से ज्यादा गिर गया है। इस संकट के बीच, कंपनी की शीर्ष नेतृत्व टीम में भी बड़े बदलाव हुए। बोइंग को सुधारने के लिए नए सीईओ केली ऑर्टबर्ग ने सेवानिवृत्ति बाद वापस आकर फिर से जिम्मेदारी संभाली है।

‘ईरान ने हमले बंद नहीं किए तो जल जाएगा पूरा तेहरान’: इजरायली रक्षा मंत्री ने दी चेतावनी, कहा – अभी तो ये शुरुआत, अंत होगा भयानक

इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने ईरान को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि अब ईरान के हमले के जवाब में इजरायल कोई कमी नहीं छोड़ेगा। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान की ओर से इजरायल पर एक भी मिसाइल का हमला होता है तो जवाब में ‘तेहरान जल जाएगा।’

इजरायल की ओर से ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमलों किए गए। जवाब में ईरान लगातार इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर रहा है। इसके बाद अब इजरायल की ओर से ये चेतावनी आई है।

इजरायल के रक्षा मंक्षी इजरायल काट्ज के X पोस्ट का स्क्रीनशॉट

काट्ज ने पोस्ट में लिखा, “ईरानी तानाशाह अपने शासन के अस्तित्व के लिए तेहरान के निवासियों को अपनी आपराधिक नीतियों का बंधक बना रहा है। वहाँ रहने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

ईरान ने इजरायल को धमकी देने के लिए देश की सबसे उँची मस्जिद जामकारन के गुंबद पर लाल झंडा फहराया था। इसका अर्थ शिया परंपरा में मौत या हमले का बदला लेना होता है। इसके बाद इजरायल ने साफ शब्दों में अपनी चेतावनी ईरान के साथ दुनिया के सामने रख दी है।

इससे पहले शुक्रवार (13 जून 2025) को इजरायली सेना ने ‘राइजिंग लायन’ नाम का ऑपरेशन चलाकर ईरान के 9 वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों को मार दिया। ये वैज्ञानिक ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे थे।

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने इसकी जानकारी एक वीडियो को साझा करते हुए एक्स पर दी है। IDF ने एक 3D एनिमेशन वीडियो के जरिए ये बताया है कि कैसे उसके हमलों में 9 ईरानी परमाणु वैज्ञानिक और लगभग 6 शीर्ष IRGC कमांडर मारे गए हैं।

इनमें ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बाघेरी, IRGC प्रमुख हुसैन सलामी, खतम-अल अंबिया सेंट्रल मुख्यालय के प्रमुख घोलम अली राशिद, IRGC वायु सेना प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अमीर अली हाजीजादेह, IRGC वायु सेना ड्रोन यूनिट कमांडर ताहिर पोर और IRGC वायु सेना वायु रक्षा यूनिट कमांडर दावूद शेखियन शामिल हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के शीर्ष सलाहकार अली शमखानी को भी निशाना बनाया गया।

ईरान ने इसके जवाब में ‘टू प्रॉमिस थ्री‘ नाम से ऑपरेशन चलाया और इजरायल पर 200 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इनमें से अधिकांश मिसाइलों को इजरायल की आयरन डोम रक्षा प्रणाली ने रोक लिया। इसके बावजूद इजरायल के तेल अवीव, रमात गन और रिशोन लेजिओन समेत कुछ अन्य इलाकों में कुछ मिसाइलें गिरीं, जिसमें कई नागरिकों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ये पहले ही कह दिया है कि ईरान पर हमला जारी रखा जाएगा। वहीं आम लोगों के लिए इजरायली अधिकारियों ने ये कहा है कि इजरायल का मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अगले आदेशों तक बंद रहेगा। र

यूरोप में टूरिस्टों की भरमार के खिलाफ प्रदर्शन, स्पेन-इटली-पुर्तगाल में ‘ओवर टूरिज्म’ के खिलाफ रविवार को सड़कों पर उतरेंगे लोग: कई शहरों में पर्यटकों पर लगाया गया है टैक्स

यूरोप के कई शहरों में टूरिस्टों की भरमार के खिलाफ रविवार (15 जून 2025) को बड़े प्रदर्शन होने वाले हैं। स्पेन, इटली, पुर्तगाल और फ्रांस के लोग इस भीड़ से तंग आ चुके हैं। ‘साउथर्न यूरोप अगेंस्ट टूरिस्टिफिकेशन’ नाम का संगठन इस आंदोलन को चला रहा है।

स्पेन के बार्सिलोना, ग्रेनेडा, पाल्मा, सैन सेबेस्टियन, मिनोर्का और इबीसा में लोग सड़कों पर उतरेंगे। पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन और इटली के वेनिस, जेनोवा, पलेर्मो, मिलान और नेपल्स में भी टूरिस्टों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होंगे। फ्रांस के कुछ शहर भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

पिछले साल जुलाई में बार्सिलोना में प्रदर्शनकारियों ने टूरिस्टों पर वाटर गन से पानी फेंका था। बार्सिलोना और पाल्मा में पहले हुए प्रदर्शनों में करीब 20,000 लोग शामिल थे। इस साल अप्रैल में एक वर्कशॉप भी हुई, जिसमें प्रदर्शनकारी टूरिस्टों के लिए जगहों पर घुसने से रोकने या हवाई अड्डों पर धरना देने की योजना बना रहे थे।

यूरोप में हर साल टूरिस्टों की तादाद बढ़ रही है। इस साल टूरिस्टों के खर्च में 11% की बढ़ोतरी हुई, जो 838 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई। बार्सिलोना में 2024 में 26 मिलियन टूरिस्ट आए, जिससे वहाँ के मेयर ने 2028 तक शॉर्ट-टर्म किराये के घर बंद करने का ऐलान किया। पिछले 10 साल में वहाँ किराया 68% और घर खरीदने की कीमत 38% बढ़ी। बार्सिलोना के 31% लोग टूरिस्टों को नुकसानदेह मानते हैं। ग्रीस के सेंटोरिनी और बेल्जियम के ब्रुगेस जैसे शहरों ने टूरिस्टों की संख्या कम करने के लिए टैक्स और नियम लागू किए हैं।

टूरिस्टों की भरमार से स्थानीय लोगों को कई दिक्कतें हो रही हैं। घरों के किराये आसमान छू रहे हैं, सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है, और स्थानीय संस्कृति को नुकसान हो रहा है। प्रदर्शनकारी टूरिस्टों की संख्या पर रोक लगाने की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारों को टूरिस्टों और स्थानीय लोगों के बीच बैलेंस बनाना चाहिए। इस आंदोलन से यूरोप में टूरिज्म की नीतियों पर बहस तेज हो गई है। क्या ये प्रदर्शन टूरिस्टों की संख्या कम कर पाएँगे या ये सिर्फ गुस्सा निकालने का जरिया बनकर रह जाएँगे?

अहमदाबाद प्लेन क्रैश की वीडियो बनाने वाला बच्चा नहीं हुआ गिरफ्तार: सोशल मीडिया पर झूठ बोल रहा ‘द लल्लनटॉप’ का पत्रकार, गुजरात पुलिस ने सच्चाई बताई

गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार (12 जून 2025) को भीषण प्लेन क्रैश हुआ। उसके बाद हर किसी के मन में ये जानने की जिज्ञासा थी कि आखिर उड़ने के कुछ सेकेंडों में प्लेन कैसे क्रैश हो गया। कुछ समय बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें प्लेन के उड़ने के बाद उसके क्रैश होने का फुटेज शामिल था। इसे बनाने वाला एक 15 वर्ष का बच्चा था।

वीडियो वायरल होने के बाद एक अफवाह उड़ी कि पुलिस ने वीडियो बनाने वाले बच्चे को गिरफ्तार कर लिया है। इसे लेकर लल्लन टॉप न्यूज पोर्टल के एसोसिएट एडिटर अभिनव पांडे ने पुलिस पर ही सवाल खड़े कर दिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पर पोस्ट साझा की जिसमें अभिनव ने लिखा, “बच्चा पहले से ही बहुत ज्यादा डरा हुआ था। उसे और क्यों डराया जा रहा है? पहली बार वो शहर आया था,पहली बार उसने प्लेन देखा। अहमदाबाद पुलिस निहायती गलत कर रही है। ये क्या तरीका है?”

अभिनव के साथ-साथ कई अन्य मीडिया हाउस के पोर्टल पर भी पुलिस द्वारा बच्चे को हिरासत में लिए जाने की अफवाह फैलाई गई थी।

अहमदाबाद पुलिस ने खोली पोल

अभिनव की सवाल पूछती हुई यह पोस्ट उन पर तब भारी पड़ गई जब अहमदाबाद पुलिस ने इस बात का खंडन कर दिया। पुलिस ने अभिनव की ही पोस्ट में रिप्लाई किया और इस बात को झूठा करार दे दिया।

अभिनव की X पोस्ट पर अहमदाबाद पुलिस के जवाब का स्क्रीनशॉट

अहमदाबाद पुलिस ने लिखा, “वीडियो को बनाने के लिए किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है। मोबाइल वीडियो की स्क्रीन रिकॉर्डिंग वायरल हुई। वीडियो बनाने वाले नाबालिग ने पुलिस को वीडियो का विवरण दिया। वह अपने पिता के साथ गवाह के तौर पर बयान देने आया था। फिर उसे उसके पिता के साथ भेज दिया गया। कोई गिरफ़्तारी या हिरासत नहीं की गई है।”

पुलिस के इस ट्वीट के बाद अब अभिनव की जमकर किरकिरी हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स अभिनव को गलत तरीके से खबर को फैलाने के लिए लताड़ रहे हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स ने लल्लनटॉप के प्रति भी अपना गुस्सा जाहिर किया है।

हिंदुओं की आस्था का केंद्र हैं मंदिर, विधर्मियों को रोजगार देने का स्कीम नहीं: तिरुपति से शनि शिंगणापुर तक ‘मुस्लिम घुसपैठ’

महाराष्ट्र के अहिल्या नगर (पुराना नाम-अहमदनगर) जिले में शनि शिंगणापुर मंदिर ने शुक्रवार (13 जून 2025) को 167 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जिनमें 114 मुस्लिम थे। मंदिर में कुल 114 मुस्लिम काम कर रहे थे और वो सभी इस कार्रवाई में निकाल दिए गए। मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि ये लोग अनुशासन नहीं मान रहे थे और कई महीनों से काम पर नहीं आ रहे थे।

ये फैसला तब हुआ जब हिंदू संगठन शनिवार (14 जून 2025) को बड़ा प्रदर्शन करने वाले थे। इसकी वजह एक वीडियो था – जिसमें मुस्लिम कारीगर मंदिर के पवित्र चबूतरे पर काम कर रहे थे।

इस पूरे मामले के बाद सवाल उठते हैं कि आखिर हिंदू मंदिर में 114 मुस्लिम कर्मचारी थे ही क्यों? बतौर हिंदू मेरा मत साफ है कि हिंदू मंदिरों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी होने चाहिए। इस लेख में यही बात समझाने की कोशिश की गई है।

शनि शिंगणापुर में क्या हुआ?

शनि शिंगणापुर का मंदिर भगवान शनि का है। ये मंदिर अनोखा है क्योंकि यहाँ कोई दीवार या छत नहीं है, सिर्फ एक काला पत्थर है, जो शनिदेव का प्रतीक है। रोज हजारों लोग दर्शन करने आते हैं, और खास मौकों जैसे अमावस्या पर लाखों लोग पहुँचते हैं। गाँव में घरों के दरवाजे भी नहीं हैं, क्योंकि लोग मानते हैं कि शनिदेव उनकी रक्षा करते हैं।

हाल ही में मंदिर ट्रस्ट ने 167 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इनमें 114 मुस्लिम थे, जो खेती, कचरा प्रबंधन, और शिक्षा जैसे काम करते थे। ट्रस्ट का कहना है कि ये लोग पाँच महीने से बिना बताए गायब थे और काम में लापरवाही कर रहे थे। लेकिन फैसला 8 और 13 जून 2025 को हुआ, ठीक उस वक्त जब हिंदू संगठन 14 जून को प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे।

बीजेपी के आध्यात्मिक मोर्चे के प्रमुख आचार्य तुषार भोसले ने इसे हिंदुओं की जीत बताया। उन्होंने कहा, “हमने मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के लिए आंदोलन किया। मंदिर प्रशासन को झुकना पड़ा। मैं सभी शनि भक्तों और हिंदू समाज को बधाई देता हूँ।” उनका मानना था कि मुस्लिम कर्मचारियों की मौजूदगी मंदिर की पवित्रता को नुकसान पहुँचाती है।

शनि शिंगणापुर मंदिर से जुड़े विवाद की शुरुआत एक वीडियो से हुई, जिसमें मुस्लिम कारीगार शनि शिंगणापुर के पवित्र चबूतरे पर काम कर रहे थे। मंदिर का ये हिस्सा बहुत पवित्र है, और हिंदू भक्तों को लगा कि ऐसा काम सिर्फ हिंदुओं को करना चाहिए।

हिंदू मंदिर में गैर-हिंदू कर्मचारी क्यों नहीं होने चाहिए

एक हिंदू भक्त के लिए मंदिर सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि भगवान का घर है। यहाँ की हर चीज – पूजा, रीति-रिवाज, और माहौल को पवित्र रखना जरूरी है। हिंदू धर्म में मंदिर की पवित्रता बहुत मायने रखती है। अगर कोई गैर-हिंदू जो हिंदू नियमों को न माने, मंदिर के काम में शामिल हो, तो ये भक्तों की आस्था को ठेस पहुँचा सकता है।

उदाहरण के लिए हिंदू धर्म में कई नियम हैं – जैसे शाकाहारी भोजन, पूजा से पहले स्नान और खास मंत्रों का जाप। मंदिर में काम करने वाले को इनका पालन करना चाहिए। अगर कोई गैर-हिंदू इन नियमों को न माने, तो मंदिर का सात्विक माहौल खराब हो सकता है। शनि शिंगणापुर में जब एक मुस्लिम कर्मचारी मंदिर के चबूतरे पर चढ़ा, तो भक्तों को लगा कि ये गलत है। ऐसे पवित्र काम सिर्फ हिंदुओं को करने चाहिए, जो इन नियमों को समझते हों।

ये सवाल उठता है कि 114 मुस्लिम कर्मचारी वहाँ थे ही क्यों? मंदिर के काम, चाहे वो पूजा हो, रखरखाव हो या कोई और काम.. ये कम हिंदुओं को ही मिलना चाहिए। हिंदू भक्तों का मानना है कि मंदिर की सेवा वही करे, जो उसकी पवित्रता को समझे। गैर-हिंदू कर्मचारी, भले ही वो अच्छे इंसान हों, हिंदू रीति-रिवाजों को पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए मंदिरों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी रखना सही है।

कानून और परंपरा भी यही कहते हैं

इस सोच को कानूनी समर्थन भी मिला है। जनवरी 2024 में मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि तमिलनाडु के हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदू लोग ‘कोडिमरम’ (झंडे वाले खंभे) से आगे नहीं जा सकते। कोर्ट ने कहा कि मंदिर हिंदुओं की पूजा के लिए हैं, और गैर-हिंदुओं का पवित्र जगहों पर जाना मंदिर की पवित्रता को नुकसान पहुँचा सकता है। ये फैसला साफ बताता है कि मंदिरों में हिंदू परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अगर गैर-हिंदुओं को मंदिर के पवित्र हिस्सों में जाने की इजाजत नहीं, तो उन्हें मंदिर के काम में शामिल करने का क्या मतलब? शनि शिंगणापुर में मुस्लिम कर्मचारी भले ही पूजा न करते हों, लेकिन मंदिर की दीवार या शिखर पर काम करना भी पवित्र काम है। ऐसे काम हिंदुओं को ही करने चाहिए, ताकि कोई विवाद न हो।

ऐसे कई मंदिर हैं, जहाँ गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। जैसे सबरीमाला मंदिर में सख्त नियम हैं। तेलंगाना स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में ऐसी ही घटना के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केवल हिंदू कर्मचारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था। शनि शिंगणापुर में भी यही भावना है कि मंदिर का हर काम हिंदू धर्म के हिसाब से हो।

मंदिरों के मैनेजमेंट से खुद को दूर रखें सरकारें

ये विवाद ये भी दिखाता है कि सरकार मंदिरों को अपने कंट्रोल में रखती है। महाराष्ट्र में कई मंदिर ट्रस्ट को सरकारी अधिकारी चलाते हैं। हिंदू संगठन इसका विरोध करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि मंदिरों का पैसा धर्म और संस्कृति के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, न कि सरकारी खर्चों में। 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने शनि शिंगणापुर मंदिर को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की थी, लेकिन हिंदू संगठनों ने इसे रुकवाया।

इस बार आचार्य तुषार भोसले और उनके संगठन ने मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की माँग की। कुछ लोग इसे राजनीति कह सकते हैं, लेकिन हिंदू भक्तों के लिए ये मंदिर की पवित्रता की लड़ाई है। जैसे अयोध्या के राम मंदिर में हिंदू अधिकारियों को अहम जगह दी गई, वैसे ही शनि शिंगणापुर में भी हिंदू कर्मचारी होने चाहिए।

फैसले पर सवाल उठाने वालों को जवाब

शनि शिंगणापुर देवस्थान के सीईओ गोरक्षनाथ दरंदाले ने बताया कि करीब 2400 कर्मचारी यहाँ काम करते हैं। इनमें से कई काम पर नहीं आते। ऐसे लोगों की सैलरी भी रोकी गई है। इसके बाद ही ये कार्रवाई की गई। कईयों की सैलरी 5-5 माह से रुकी है। कुछ लोग कहते हैं कि 114 मुस्लिम कर्मचारियों को निकालना भेदभाव है। ट्रस्टी अप्पासाहेब शेटे का कहना है कि धर्म की वजह से नहीं, बल्कि खराब काम और गैर-हाजिरी की वजह से ऐसा हुआ। लेकिन 167 में से 114 मुस्लिम कर्मचारियों का निकाला जाना और फैसले की टाइमिंग सवाल उठाती है।

हालाँकि हिंदू भक्तों का मानना है कि मंदिर का काम कोई साधारण नौकरी नहीं। ये सेवा है, जो आस्था और परंपरा से जुड़ी है। भले ही कर्मचारी पूजा न करते हों, लेकिन मंदिर के हर काम में पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है। अगर गैर-हिंदू कर्मचारी मंदिर की दीवार पेंट करें या शिखर पर चढ़ें, तो ये भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। इसलिए मंदिर में सिर्फ हिंदू कर्मचारी रखना ही सही है।

मद्रास हाई कोर्ट का फैसला भी यही कहता है कि मंदिरों में हिंदू परंपराओं को प्राथमिकता मिले। गैर-हिंदुओं को दूसरी नौकरियों में मौका मिल सकता है, लेकिन मंदिरों में हिंदुओं को ही काम करना चाहिए।

पहले भी बदले हैं नियम

शनि शिंगणापुर मंदिर पहले भी विवादों में रहा है। 2016 में महिलाओं को मंदिर के गर्भगृह में जाने की इजाजत नहीं थी। तब कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने आंदोलन किया, और बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि कोई कानून महिलाओं को मंदिर में जाने से नहीं रोक सकता। इस फैसले के बाद 400 साल पुराना नियम टूटा। ये दिखाता है कि समय के साथ मंदिरों के नियम बदल रहे हैं।

हिंदू भक्तों का मानना है कि मंदिरों में गैर-हिंदू कर्मचारियों को रखने का कोई मतलब नहीं। अगर मंदिर हिंदुओं का है, तो उसका हर काम हिंदुओं के हाथ में होना चाहिए। इससे न विवाद होगा, न किसी की भावनाएँ आहत होंगी।

मद्रास हाई कोर्ट का फैसला हर जगह हो लागू

शनि शिंगणापुर का ये मामला साफ करता है कि हिंदू मंदिरों में सिर्फ हिंदू कर्मचारी होने चाहिए। इसके लिए साफ नियम बनने चाहिए। पूजा, रखरखाव या कोई भी काम, जो मंदिर से जुड़ा हो, हिंदुओं को ही करना चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट का फैसला इसकी शुरुआत है, लेकिन इसे हर मंदिर में लागू करना होगा।

सरकार को मंदिरों से अपना कंट्रोल हटाना चाहिए। मंदिरों को हिंदू समाज चलाए, ताकि उनकी पवित्रता बनी रहे। हिंदू संगठनों को भी अपनी बात रखते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि कोई तनाव न बढ़े।

एक हिंदू भक्त के लिए मंदिर की पवित्रता सबसे ऊपर है। इसलिए शनि शिंगणापुर में 114 मुस्लिम कर्मचारियों का होना गलत था। ऐसे में मंदिर का हर काम हिंदुओं के हाथ में होना चाहिए, ताकि भक्तों की आस्था बनी रहे। ये फैसला सही दिशा में है और इसे हर हिंदू मंदिर में लागू करना चाहिए।

असीम मुनीर को नहीं आया था अमेरिका से कोई बुलावा, कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने केवल पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाया: सच खुलने पर लग रही लताड़, लोग बोल रहे- माफी माँगो

पिछले दिनों एक खबर आई थी कि पाकिस्तानी फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर को अमेरिका ने सेना दिवस के मौके पर अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है। खबर उड़ी कि मुनीर को व्हाईट हाउस बुलाया गया है। इसके बाद कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत की आलोचना की थी। अब अमेरिका ने इसे फर्जी खबर करार दिया है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सामने आ रहा है।

असीम मुनीर के न्यौते पर अपने ट्वीट में जयराम ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। लिखा, “यह खबर भारत के लिए कूटनीतिक और सामरिक दृष्टि से एक बड़ा झटका है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मोदी सरकार कह रही है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, ऐसे में पाकिस्तानी सेना प्रमुख का अमेरिकी सेना दिवस में बतौर अतिथि शामिल होना निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है”।

जयराम रमेश ने अमेरिका पर भी सवाल उठाया था और कहा था “यह वही व्यक्ति है जिसने पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले भड़काऊ और उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया था, सवाल उठता है कि अमेरिका की मंशा क्या है?”

हालाँकि कुछ समय बाद ही अमेरिका ने स्पष्ट किया कि असीम मुनीर के न्यौते वाली बात पूरी तरह से अफवाह है। अब, जब पूरी खबर ही झूठी निकल गई तो सोशल मीडिया पर जयराम रमेश को लोगों ने घेरना शुरू कर दिया। एक के बाद एक कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट कर कहा कि जयराम रमेश को अपने आलोचनात्मक और झूठे बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए।

किसी वरिष्ठ नेता की तरफ से इस तरह की खबरें फैलाना और उसी खबर के आधार पर देश के ही खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणी करना उन पर भी कई सवाल खड़े करता है।

जयराम रमेश ने जब पोस्ट किया था तब कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं ने भी भारत के खिलाफ इसी तरह की बयानबाजी की थी। हालाँकि बाद में जो खबर आई वो जयराम के बयान और सोशल मीडिया पर फैली अफवाह से एक रत्ती भी मेल नहीं खा रही है। ऐसे में लोगों का गुस्सा भी जायज है।