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पहली से तलाक़, दूसरी की बदले की फुफकार, तीसरी से ‘बेबी प्लानिंग’… तेज प्रताप यादव की शादियों की शतरंज में पर्दे के पीछे कई खिलाड़ी, सियासी है बिसात

विवाह निजी जीवन का मसला होता है। कहते हैं, मियाँ-बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी। लेकिन, हमने प्राचीन काल से लेकर अबतक, राजा-महाराजाओं से लेकर नेताओं तक को कूटनीति व राजनीति के लिए विवाह संबंध स्थापित करते हुए देखा है। भारत में विवाह सिर्फ़ एक लड़का और एक लड़की का नहीं होता है, दो परिवारों का होता है। तेज प्रताप यादव के विषय में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती और चन्द्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से उनकी शादी भी शायद दो राजनीतिक घरानों द्वारा एक और एक को मिलाकर ग्यारह बनाने की कोशिश थी।

हालाँकि, इस ‘ग्यारह’ ने अब बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार के चेहरे पर ‘बारह’ बजा दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कंटेंट तो अबतक आपने देख ही लिए होंगे, इसीलिए बहुत कुछ दोहराने की ज़रूरत नहीं है। संक्षेप में ये समझिए कि तेज प्रताप यादव के फेसबुक हैंडल से एक पोस्ट होता है जिसमें वो अनुष्का यादव के साथ अपनी तस्वीर डालकर 12 वर्षों से रिलेशनशिप में होने की बात स्वीकार करते हैं। हंगामा होने पर ‘अकाउंट हैक होने’ और ‘AI से छेड़छाड़ कर तस्वीर बनाने’ जैसे बहाने मारकर यू-टर्न ले लिया जाता है।

इस दौरान लोग पूछते हैं कि अगर 12 वर्षों से तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव रिलेशनशिप में थे तो फिर उन्होंने 2018 में ऐश्वर्या राय से विवाह करके उनका जीवन क्यों ख़राब किया? ऐश्वर्या राय फिलहाल अलग रह रही हैं। तेज प्रताप पर उन्होंने घरेलू हिंसा और अजीबोगरीब व्यवहार का आरोप लगाकर ऐश्वर्या राय ने तलाक़ का मामला दायर कर रखा है। ख़ुद तेज प्रताप यादव एक पॉडकास्ट में बता चुके हैं कि ये शादी पॉलिटिक्स के लिए हुई थी। सारण के परसा में राय परिवार का प्रभाव है। पिता-पुत्र अबतक 13 बार MLA रह चुके हैं।

आइए, अब सोशल मीडिया पर चल रही इस कहानी को और अधिक न पेरते हुए सीधे शतरंज की उस बिसात पर चलते हैं जहाँ हर किरदार अपने-अपने मोहरे लेकर तैयार है और जो दिख रहा है उसे समझना उतना आसान नहीं है। पर्दे के पीछे जो खेल चल रहे हैं वो बिहार के विधानसभा चुनाव तक कई बड़े उथल-पुथल मचाने वाले हैं। लालू परिवार के क़रीबी दबी ज़ुबान से कह रहे हैं कि एक तरह से इस पूरे मामले में तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के अरमान पर पानी फेर दिया है। वो अरमान, जो बीमार लालू यादव की अंतिम इच्छा मानी जाती है।

मैं यहाँ जो भी लिखने जा रहा हूँ, उसकी पुष्टि न मैं करता हूँ और न ही संस्थान। ये बता देना इसीलिए आवश्यक है, क्योंकि इस खेल में कोई भी टीम खुलकर अपना स्कोरकार्ड प्रदर्शित करने की इच्छुक नहीं है और दूसरी बात ये कि अभिषेक मिश्रा को अब तक न्याय नहीं मिला है ये याद रखा जाना चाहिए। अभिषेक मिश्रा, उसी BIT मेसरा का होनहार छात्र जिससे मैं पढ़ा हूँ। इसपर हम आगे चर्चा करेंगे लेकिन उससे पहले एक भविष्यवाणी ये नोट करके रख लीजिए कि इस पटकथा में क्लाइमैक्स तभी आएगा जब संजय यादव की पटना से विदाई होगी।

अनुष्का यादव के चैट्स, निशु सिन्हा नामक नई महिला की एंट्री

आइए, बातों को अधिक न घुमाते हुए सीधे तथ्यों पर चलते हैं। आजकल चैट्स बहुत कुछ बोलते हैं, उन चैट्स को ही देखते हैं। कथित चैट में बेचैन अनुष्का यादव किसी को मैसेज बताती हैं कि तेज प्रताप यादव और निशु सिन्हा मालदीव जा रहे हैं। इंस्टाग्राम पर मालदीव में ध्यान करते हुए तेज प्रताप यादव का वीडियो भी आया था। अब पता चल रहा है कि उनका विदेश जाना अनायास नहीं था। अनुष्का यादव को पहले ही पता था कि वो मालदीव जाने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, असल में जाना अनुष्का को ही मालदीव था तेज प्रताप के साथ, लेकिन इस खेल में थोड़ा बदलाव हुआ।

तभी बेचैन अनुष्का यादव उस चैट में कहती हैं कि अब उन्हें मीडिया में आना होगा। साथ ही वो जानकारी देती हैं कि अभी उनकी तबीयत ख़राब है और वो अस्पताल में दाखिल हैं। ख़ैर, बात आगे बढ़ती है तो वो ख़ुद ही बताती हैं कि तेज प्रताप यादव 17 मई, 2025 को मालदीव जा रहे हैं और 23 को लौटने की योजना है। तभी बीच में एक और किरदार की बात आ जाती है – निशु सिन्हा। निशु सिन्हा कौन हैं, इस बारे में अनुष्का यादव को पहले से ही आईडिया था, तभी वो जिससे चैट कर रही होती हैं उनको बताती हैं कि निशु सिन्हा का तेज प्रताप के साथ क्या रिश्ता है?

हमें सूत्रों से मिले इस कथित चैट में वो ये भी कहती हैं कि तेजस्वी यादव ने ही तेज प्रताप और निशु सिन्हा को मालदीव भेजा है। क्यों? तो ‘बेबी प्लानिंग’ के लिए। इसके बाद इस चैट में जो आता है वो और चौंकाने वाला है, जो ये कहता है कि कभी शिवलिंग से लिपट कर दुग्ध स्नान करने तो कभी वृन्दावन में बाँसुरी बजाने वाले तेज प्रताप यादव ने एक नहीं बल्कि तीन-तीन शादियाँ कर रखी हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते, लेकिन सामने वाले शख्स ने जब तेज प्रताप और निशु के बीच रिश्ते के बारे में पूछा तो अनुष्का ने जो जवाब दिया वो गौर करने लायक है।

इस कथित चैट में अनुष्का यादव ने बताया, “तेज प्रताप यादव और निशु सिन्हा के बीच पति-पत्नी का रिश्ता है। वो शादीशुदा हैं।” सामने वाला शख्स चौंक कर पूछता है कि इसकी कितनी शादियाँ हैं भाई! इसपर जवाब दिया जाता है कि पहली ऐश्वर्या राय, दूसरी अनुष्का यादव यानी वो ख़ुद और तीसरी निशु सिन्हा। हम एक और दावा सूत्रों के हवाले से कर रहे हैं – जिस शख्स से अनुष्का यादव का ये चैट वायरल हो रहा है उसका नाम है – वो परिवार की ही रिश्तेदार हैं। राबड़ी देवी जब मुख्यमंत्री थीं, तब पूरे बिहार में उनके दोनों भाइयों साधु और सुभाष का दबदबा चलता था। सत्ता गई तो दोनों से लालू परिवार के रिश्ते भी तल्ख़ हो गए और अब तो दोनों भाई खुलेआम मीडिया के सामने ही जीजा से लेकर भतीजे तक पर गंभीर आरोप लगाते हैं।

तो चलिए, कहानी को आगे बढ़ाते हैं। महाभारत में द्रौपदी बदले की आग में जली थी, रामायण में सूर्पनखा बदले की आग में जली थी, सन् 2025 में फिर से एक नारी की बदले की आग धधक उठती है। अनुष्का यादव ने आगे लिखा, “शाम से लेकर सुबह तक न्यूज़ देख लीजिएगा दीदी। मैं बोली थी न बदला लूँगी। वो मालदीव गए हैं निशु सिन्हा के साथ।” जब सामने वाले शख्स ने कहा कि उन्होंने कोई न्यूज़ नहीं देखी है, तो अनुष्का ने फुँफकारा, “न्यूज़ अब चलेगी।” इस चैट में तेजस्वी यादव का नाम आना ये बताता है कि लालू परिवार को सबकुछ पहले से पता था, वरना बात ‘बेबी प्लानिंग’ तक नहीं पहुँचती। ध्यानार्थ, ये सब सूत्रों के हवाले से है और हम पुष्टि नहीं करते। चलिए, आगे बढ़ें?

जिन निशु सिन्हा का जिक्र आ रहा है, बताया जाता है कि उनका घर बिहार के ही खगौल में है। वहीं जिन अनुष्का यादव का जिक्र आ रहा है, उनकी कहानी BN कॉलेज से शुरू होती है जहाँ वो और तेज प्रताप एक साथ पढ़ाई करते थे। प्रेम कहानी में एक तीसरा किरदार भी है – आकाश यादव, अनुष्का का भाई। कहते हैं, आकाश की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ आकाश में पतंगों की तरह ऊँची उड़ती हैं। तेज प्रताप का हाथ सर पर पड़ा तो पार्टी में तेज़ी से उदय भी होने लगा। लेकिन, तथ्य तो ये है कि लालू यादव का अपनी राजनीतिक विरासत को लेकर हमेशा अपने छोटे बेटे तेजस्वी पर ही भरोसा रहा और दिल्ली में हुई कार्यकारिणी तक में वो ये ऐलान कर चुके हैं।

अनुष्का यादव के चैट्स
अनुष्का यादव के चैट्स
अनुष्का यादव के चैट्स
अनुष्का यादव के चैट्स

आकाश को बिहार छात्र राजद के अध्यक्ष पद से नवाज़ा गया। हालाँकि, इसे लेकर राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और तेज प्रताप के बीच टकराव भी सामने आया। कहते हैं, पार्टी के एक कार्यक्रम में उन्होंने पोस्टरों में तेज प्रताप को मुख्य बनाकर तेजस्वी को गोल कर दिया था। परिणामस्वरूप, गाज गिरी और हटा दिए गए। तेज प्रताप ने बगावत कर दी। 2021 की इन घटनाओं की कड़ी को आप आज से जोड़िए, बहुत कुछ समझ आ जाएगा। अब हम आपको इससे भी आगे की जानकारी देते हैं।

आकाश यादव अपने मेंटर तेज प्रताप यादव का सोशल मीडिया भी देखा करते थे। यानी, जैसे लालू-तेजस्वी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर संजय यादव की छाप दिखती है वैसे ही तेज प्रताप यादव के फेसबुक पोस्ट आकाश यादव लिखा करते थे। एक और चीज गौर कीजिए – सामान्यतः ऐसे बड़े ऐलान ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से किए जाते रहे हैं, लेकिन तेज प्रताप यादव का ये पोस्ट फेसबुक से हुआ। खैर, ये चिंतन का विषय है। पोस्ट फेसबुक से ही क्यों हुआ, ‘X’ से क्यों नहीं?

भाई आकाश के लिए बहन ‘अनुष्का प्रताप यादव’ का इंस्टाग्राम पोस्ट

आकाश यादव को पार्टी के हटाए जाने के बाद बागी तेज प्रताप यादव इतने नाराज़ हो गए थे कि उन्होंने जगदानंद सिंह के खिलाफ न्यायपालिका का दरवाजा तक खटखटाने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने घोषणा की थी कि जगदानंद सिंह पर जबतक कार्रवाई नहीं होगी तबतक वो पार्टी की किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। आकाश यादव ने भी खुलकर तेजस्वी यादव पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। बाद में वो पशुपति कुमार पारस की LJP में शामिल हो गए थे।

निशु सिन्हा की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें वो लालू परिवार के साथ बिलकुल सहज नज़र आ रही हैं। एक तस्वीर में तो वो तेजस्वी यादव के साथ बैठी हुई हैं और एकदम सहज हैं। निशु सिन्हा पटना स्थित डॉन बॉस्को स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत थीं। उनका नाम सामने आने के बाद इंस्टाग्राम पर ख़ुद को ‘अनुष्का प्रताप यादव’ लिखने वाले लड़की को समस्या होनी ही थी, सो हुई। निशु सिन्हा के भाई को भी दिल्ली में तमाम तरह की संपत्तियाँ दिए जाने की बातें चर्चा में हैं।

निशु सिन्हा (लाल ड्रेस में), जो डाउन बॉस्को स्कूल में पढ़ा चुकी हैं

अभिषेक मिश्रा को अबतक नहीं मिला न्याय, बोलने से डरते हैं लोग

बिहार में राजद से जुड़े कई लोगों को ये चीजें पहले से पता थीं, लेकिन कोई बोल नहीं रहा था। कभी लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य राँची स्थित BIT मेसरा में पढ़ती थीं और दोस्तों के साथ दशम जल-प्रपात घूमने गई थीं, इसी दौरान अचानक से उनकी मृत्यु हो जाती है। 15 मिनट में ऑटोप्सी हो जाती है और डूबने से मौत की बात कही जाती है। लड़का कोई साधारण परिवार से नहीं था। पिता डॉ सुभाष मिश्रा दिल्ली स्थित राममनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी थे। भाजपा नेताओं के मित्र थे।

अभिषेक के चेहरे पर एक गहरे कट का निशान था, ऊपर का एक दाँत टूटा हुआ था, उनके दाहिने पाँव पर जख्म था, पीछे से खोपड़ी भी फैक्चर्ड थी – लेकिन नहीं, ये तो ‘डूबने की दुर्घटना से हुई मौत’ थी। रागिनी वहाँ मौजूद थी, लेकिन कभी कुछ नहीं कहा इस पर। भ्रष्टाचार में जेल में बंद मधु कोड़ा 2006 में झारखंड के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उनकी सरकार को लालू यादव की RJD का समर्थन था। खुद लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। रागिनी-अभिषेक के साथ जो 2 दोस्त भरत और विशाल थे, उन्हें मौके पर से सीधे मुख्यमंत्री आवास ले जाया गया। वहाँ से दोनों कहाँ गायब हुए, किसी को पता नहीं चला।

3 दिनों बाद जब वो सामने आए तो उन्होंने बताया कि अभिषेक मिश्रा और रागिनी यादव शादी की योजना बना रहे थे, दोनों परिवारों को इनकी दोस्ती के बारे में पता था। रागिनी कई बार अभिषेक के माता-पिता से मिल चुकी थी। कई बार उनके घर भी गई। जब डॉ मिश्रा अपने परिवार के साथ राँची पहुँचे तो राजद नेताओं ने उनलोगों को घेरे रखा। आज रागिनी अपने जीवन में ख़ुश हैं, जमकर राजनीतिक पोस्ट भी करती हैं। ससुर जितेंद्र यादव और पति राहुल यादव सपा के नेता हैं। जमीन के बदले नौकरी का जो रेलवे घोटाला है, इसमें दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में ₹150 करोड़ के मकान-प्लॉट सिर्फ ₹4 लाख में लालू परिवार ने खरीद ली। ‘AB एक्सपोर्ट्स’ नामक इस कंपनी के अधिकतर शेयर तेजस्वी यादव के नाम हैं, जबकि रागिनी यादव कंपनी में डायरेक्टर हैं। ED उनसे पूछताछ भी कर चुकी है।

तो बात ये है कि अभिषेक मिश्रा के साथ जो हुआ, वैसा किसी और के साथ हो जाए इसका डर बना रहता है। यही कारण है कि बिहार में पत्रकारों से लेकर नेताओं तक को बहुत सोच-समझकर बोलना पड़ता है।

तेज प्रताप यादव के मालदीव जाने से लेकर तस्वीरें लीक होने तक: ये सब एक्सीडेंटल नहीं

तेज प्रताप यादव का मालदीव जाना या उन्हें भेजा जाना, निशु सिन्हा का उनके साथ जाना, अनुष्का यादव को सब पता होना, तस्वीरें लीक होना, फिर चैट लीक होना और तेज प्रताप यादव को पार्टी व परिवार से निष्कासित किया जाना – RJD से जुड़े क़रीबी सूत्र बताते हैं कि ये सब महज संयोग नहीं है, ये क्रोनोलॉजी अपने भीतर कई राज़ छुपाए हुए है। राजद ने शुरुआत में वायरल हो रही तस्वीरों को सोशल मीडिया से हटवाने में रुचि नहीं दिखाई, ये भी हमारे सूत्र बताते हैं। ये सब पार्टी में फ़िलहाल संजय यादव ही देख रहे हैं। हरियाणा वाले संजय यादव तेजस्वी के पुराने रिश्तेदार हैं, पार्टी में फ़िलहाल जितनी उतनी चलती है उतनी किसी की नहीं, ख़ासकर के जगदानंद सिंह के बिस्तर पकड़ने के बाद से।

अब तीन-तीन लड़कियों से शादी कर उनका जीवन बर्बाद करने वाले तेज प्रताप यादव को दोषी बताया जाए या फिर उनके खिलाफ परिवार और पार्टी में ही बड़े स्तर पर साजिश के दावे को सही मानकर उनसे सहानुभूति जताई जाए? दोनों ही बातें हैं शायद, लेकिन लालू यादव और उनका पूरा परिवार इस प्रकरण में दोषी ही दोषी नज़र आ रहा है। सबकुछ पता होने के बावजूद निष्कासन का ड्रामा तब खेला गया, जब चीजें सार्वजनिक हुईं (या करवाई गईं?)। सुभाष यादव भी कह रहे हैं कि केवल लालू यादव ही नहीं, पूरे परिवार और समाज को इसके बारे में पता था।

बिहार की राजनीति में ऐश्वर्या राय और अनुष्का यादव – अहीर परिवार की दो-दो लड़कियों के साथ अन्याय का मामला तूल पकड़ने वाला है। BJP जल्द ही इस मामले को आगे बढ़कर उठाती हुई दिखेगी। उसके अन्य घटक दल भी इस मुद्दे को लेकर लालू परिवार को निशाना बनाएँगे। पटना से लेकर मालदीव तक हुई इस हलचल के कारण दिल्ली में भी गहमागहमी है। इसी साल अक्टूबर में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। अभी इस प्रकरण की कई परतों का उधड़ना बाकी है, इंतज़ार कीजिए!

लालू जी, इधर-उधर की बात न करिए, ये बताइए कि ऐश्वर्या राय का तमाशा क्यों बनाया?

शुक्र है कि सोशल मीडिया का दौर है! शुक्र है कि बिहार जंगलराज से काफी आगे निकल चुका है! वरना इंतजाम तो तेज प्रताप यादव की ‘लव स्टोरी’ को हैकिंग और AI के दावों में दफना देने की थी। आशंका अनुष्का के अभिषेक हो जाने की थी। पर नेटिजन्स ने तेज प्रताप यादव और अनुष्का की तस्वीरों/वीडियो की बाढ़ लाकर लालू प्रसाद यादव और राजद को मजबूर कर दिया।

सवाल यह नहीं है कि ये तस्वीरें/वीडियो लीक कैसे हुई? किसने की? क्यों की? सवाल है कि सब कुछ जानते हुए भी ऐश्वर्या राय के जीवन को तमाशा क्यों बनाया गया? इसी सवाल को दबाने के लिए लालू यादव ने ‘नैतिकता’ और ‘पारिवारिक मूल्यों’ का बुर्का ओढ़कर तेज प्रताप यादव को परिवार और पार्टी से ‘बेदखल’ करने का ऐलान किया है।

संभव है कि बिहार में विधानसभा चुनाव के पूर्ण होते ही इस बेदखली की समय सीमा भी समाप्त हो जाए। लेकिन लालू यादव का पाखंड इस बात से भी उजागर होता है कि जिस नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों का हवाला देकर वे स्वजातीय अनुष्का यादव को ठुकरा रहे हैं, उन्हीं नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों के साथ उन्होंने अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव की पत्नी के तौर पर ईसाई महिला रचेल गोडिन्हो को राजश्री बनाकर कबूल किया है। फिर अपने ही स्वजातीय अनुष्का यादव को सार्वजनिक तौर पर बड़े बेटे की पत्नी के तौर पर स्वीकार करने में उनकी कौन सी नैतिकता, कौन से पारिवारिक मूल्य आड़े आ गए?

इस रिश्ते को स्वीकार करने से तो उनकी कथित नैतिकता और पारिवारिक मूल्य के साथ-साथ राजद की आधार जाति को भी मजबूती मिलती। यदि ऐसा न भी होता तो सब जानते हैं कि राजनीतिक तौर पर तेज प्रताप यादव को न तो लालू यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता है और न ही उनका वैसा राजनीतिक प्रभाव है। उन्होंने कुछ मौकों पर पार्टी को हाँकने की कोशिश की, इस कोशिश में जगदानंद से लेकर रघुवंश बाबू तक को रेल गए, फिर भी खुद को न पार्टी में और न जनता की नजर में एक नेता के तौर पर स्थापित कर पाए। आश्चर्यजनक तौर पर जब राजद के इन बुजुर्ग नेताओं को सार्वजनिक तौर पर तेज प्रताप यादव ने अपमानित किया, तब भी लालू यादव की नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों को कोई खतरा नहीं दिखा।

लालू यादव की यह नैतिकता और पारिवारिक मूल्य तब भी न जगे जब चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहला दिया गया। नहलाने वाले को वे संसद में भेजते रहे। तब भी न जगी जब जंगलराज में फल-फूल रहे अपहरण उद्योग को खाद-पानी देने के लिए बिहार के लोगों के बच्चे उठाए गए। तब भी न जगी जब एक शादी के लिए शो रूम से फर्नीचर से लेकर गाड़ी तक जबरन उठा लिए गए और कारोबारी बिहार को छोड़कर चले गए। तब भी न जगी जब एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा कर नरसंहार करवाए गए और सैकड़ों बच्चे अनाथ हो गए।

फिर अचानक से सजायाफ्ता लालू यादव के पारिवारिक मूल्य और नैतिकता एक प्रेम की स्वीकारोक्ति पर क्यों और कैसे जग उठी? इन्हीं सवालों का जब आप जवाब खोजते हैं तो पता चलता है कि लालू यादव जिस नैतिकता और पारिवारिक मूल्य की बात कर रहे हैं, असल में वह खोट पर खड़ी है। तेजस्वी यादव से लेकर रोहिणी आचार्य तक पप्पा के जिस मूल्यों की दुहाई दे रहे हैं, वह पारिवारिक राजनीति में एक काँटा के साफ होने की खुशी से अधिक कुछ भी नहीं दिखती।

सब जानते हैं कि बेटे ही नहीं, बल्कि बेटियों को भी राजनीति में सेट करने का लालू यादव पर भारी दबाव है। मीसा भारती के बाद अब रोहिणी आचार्य को विरासत में हिस्सा चाहिए। चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव, अनुष्का राव और राज लक्ष्मी यादव भी अपना हिस्सा पाने के लिए लाइन में लगी हुई हैं। सबको सेट करने के लिए चाहिए सत्ता। बिहार की सत्ता।

ऐसे में जिस तरह से तेज प्रताप यादव की लव स्टोरी सार्वजनिक हुई, जिस तरह यह तथ्य सामने आया कि वे 12 साल से अनुष्का यादव के साथ रिलेशन में हैं, उसने लालू परिवार के उस छल को भी चर्चा में ला दिया जो उसने 12 मई 2018 को बिहार की ही अपनी एक स्वजातीय बेटी ऐश्वर्या राय के साथ किया था।

न किसी से प्रेम करना गुनाह है। न पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट आने के बाद उनका अलग हो जाना असामान्य है। इसलिए 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद जब ऐश्वर्या राय को ससुराल से बेइज्जत कर निकाला गया, तब बिहार के लोग इसे लालू यादव का पारिवारिक मामला मान आगे बढ़ गए। लेकिन आज अनुष्का के साथ 12 साल पुराने रिश्ते की सच्चाई सामने आई है तो इसने बताया है कि असल में लालू यादव का पारिवारिक मूल्य अपनी राजनीति के लिए किसी की भी बेटी की जिंदगी को तमाशा बना देना ही है।

आज राजनीति पर चोट पहुँचते देख उन्होंने तेज प्रताप यादव को बेदखल किया है, क्योंकि ‘माई-बहिन’ की बात कर बिहार की सत्ता में लौटने का ख्वाब पाल रही राजद और लालू परिवार को इस प्रकरण ने ‘माई-बहिन’ की नजरों में ही नंगा कर दिया है। लालू नहीं चाहते कि बिहार की ‘माई-बहिन’ इस चुनावी मौसम में ऐश्वर्या के न्याय की बात करें। पर लालू यादव और उनके कुनबे को पता होना चाहिए कि ये वो बिहार है, जिसकी नैतिकता और पारिवारिक मूल्य उनके तरह खोटे नहीं हैं। इन सवालों के बोझ तले दफन हो जाना ही अब उनकी नियति है।

1 पाकिस्तान के कितने अब्बा? भारत से सिंधु जल समझौता रद्द करने का बदला चीन से लेने की लगाई गुहार, लाहौरी पत्रकार ने अमेरिकी मैगजीन में लिखा- ब्रह्मपुत्र का पानी रोक दो

पाकिस्तान के लोग या तो अपनी ही दुनिया में जीते हैं या फिर कुछ ऐसा चटक लेते हैं जो इतना तगड़ा है कि दिमाग सातवें आसमान पर चला जाता है। वरना कोई बताए, लाहौर के ‘पत्रकार’ उमैर जमाल ने जो तमाशा मचाया है, उसे क्या कहेंगे? इन्होंने अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट’ में एक ऐसा लेख ठोंक दिया है, जो हकीकत (मुमकिन) कम और पाकिस्तानी फसाना (फैंटेसी) ज्यादा लगता है।

बात ये है कि भारत ने इंडस वाटर ट्रीटी (IWT) यानी सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का समझौता रद्द करने की बात कही, तो जमाल साहब को मिर्ची लग गई। और इस मिर्ची का इलाज करने के लिए इन्होंने न तो पाकिस्तानी नेताओं से बात की, न पाकिस्तानी आवाम से कुछ कहा.. बल्कि सीधे चीन को बुला लिया कि “भाई, आके भारत से बदला ले!”

हाँ, सही पढ़ा! जिस दुनिया में देश अपने झगड़े आपस में या कूटनीति से सुलझाते हैं, वहाँ पाकिस्तान… जो हमेशा का ‘टीनएजर’ है, अपने दो-दो ‘बापों’ को बुलाने की सोच रहा है। एक तो चीन, दूसरा अमेरिका। ये तो वही ‘तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है’ वाला डायलॉग है, लेकिन मज़े की बात ये है कि जमाल साहब को शायद खुद नहीं पता कि उनका ‘बाप’ है कौन। अरे नहीं… हम असल बाप की बात नहीं कर रहे, बल्कि उस ‘डिप्लोमैटिक बाप’ की बात कर रहे हैं, जिसे पाकिस्तान हर बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुलाता है। और अभी-अभी उसके एक बाप ने भारत के हाथ-पैर तोड़कर उसे मरने से बचाया है और माफी माँग कर सीजफायर कराया है।

आतंकवाद पर सिल लिया मुँह, लेकिन भारत पर लगा दिया इल्जाम

दरअसल, जमाल साहब ने अपने लेख में एकदम फिल्मी स्टाइल में भारत को विलेन बनाया। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र तक नहीं किया, जिसमें 26 बेगुनाह हिंदुओं की जान चली गई। ये हमला ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने किया, जो पाकिस्तान से चलने वाले लश्कर-ए-तैयबा का ‘हमशक्ल भाई’ है। लेकिन जमाल साहब को ये सब छोड़कर बस भारत की बुराई करनी थी। और कर भी दिया… कि “अरे, भारत ने पानी का समझौता तोड़ा, ये तो गलत है!”

अरे भाई, पहले अपने घर में पनप रहे आतंकवाद को तो देख लो! 26 लोगों की जान गई और तुम्हें एक लाइन भी निंदा के लिए नहीं सूझी? ये तो वही बात है कि कोई चोर चोरी करे और जब पकड़ा जाए, तो उल्टा असली मालिक को ही गाली दे।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दबाकर रेले गए पाकिस्तान से उम्मीद थी कि वो अपने यहाँ आतंकवाद पर लगाम लगाएगा, लेकिन जमाल साहब को लगता है कि भारत का जवाब देना गलत है। ये है उनकी ‘पत्रकारिता’! और वो भी कहाँ? अमेरिका की मैगजीन में! जैसे भारत से पंगा हुआ तो सीधे ‘मम्मी-पापा’ (यानी अमेरिका) को चिट्ठी लिख दी। और साथ में ‘मौसेरे भाई’ चीन (चोर-चोर मौसेरे…. समझ तो गए ही होंगे) को भी धमकी देने के लिए बुला लिया। अरे यार… ये क्या बात हुई? थोड़ा तो शर्म करो!

चीन को बुलाया, लेकिन…

जमाल साहब का लेख तो एकदम घटिया पाकिस्तानी सीरियलों वाले मसाले की तरह है। वो लेख में कहते हैं कि अगर भारत ने इंडस नदियों का पानी रोका, तो चीन ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक देगा। अरे, ये तो वही बात हुई कि स्कूल में पिटने वाला बच्चा अपने बड़े भाई को बुलाए – “भाई आजा, इसे ठोक दे!”

वैसे, चीन तो कोई तुम्हारा पक्का यार भी नहीं है। चीन तो बस अपना बिजनेस देखता है। वो पाकिस्तान को कर्ज़ा देता है, ब्याज वसूलता है और अपने प्रोजेक्ट्स चलाता है। तुम्हारे कहने पर वो भारत से पंगा क्यों लेगा? और वैसे भी भारत ब्रह्मपुत्र पर चीन की हरकतों पर पहले से नजर रख रहा है। ये धमकी तो वैसी है जैसे कोई कहे, “मैं तुझे रेलने(मारने) वाला हूँ”, लेकिन उसके पास लाठी भी नहीं है!

जमाल साहब ये भी भूल गए कि भारत कोई कमजोर मुल्क नहीं है। भारत ने पहले ही चीन की दादागिरी का जवाब दिया है। तो ये सोचना कि चीन आएगा और भारत को डराएगा, ये तो एकदम खुली आँखों से देखे जाने वाला सपना(फैंटेसी) है। वो भी ऐसी-जैसे कोई नौसिखिया लेखक लिखे.. और फिर वो सोचे कि वही सबसे बड़ा उस्ताद है।

अमेरिकी मैगजीन में क्यों चिट्ठी?

अब सवाल ये है कि जमाल साहब ने ये सारी बातें पाकिस्तान के किसी अखबार में क्यों नहीं लिखीं? क्यों अमेरिका की मैगजीन में जाकर रोना रो रहे हैं? ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अपनी बात को दुनिया के सामने ले जाकर भारत को घेरना चाहता है। शायद वो चाहते हैं कि अमेरिका या कोई और ‘बड़ा बाप’, बीच में आए और भारत को डाँट दे। ये वही पुराना तरीका है, जिसमें पाकिस्तान कश्मीर और पानी जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाता है। लेकिन भारत ने तो साफ कर दिया है, “सुन… ये मेरा और तेरा मसला है, इसमें किसी तीसरे को मत ला।”

वैसे, हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान ही नहीं सारी दुनिया को बता रखा है कि अभी कोई ‘सीजफायर’ नहीं हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के बड़े अधिकारी बार-बार कह रहे हैं कि ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ अभी भी चल रहा है। मतलब साफ ही है कि भारत अपनी शर्तों पर काम करेगा, किसी के दबाव में नहीं।

पाकिस्तान खौरियाया कुत्ता – न घर का, न घाट का

जमाल साहब अपने कपड़े फाड़ के बार-बार धमकी दे रहे हैं कि अगर भारत ने पानी रोका, तो पाकिस्तान में ‘अराजकता’ फैल जाएगी। वो ये भी कहते हैं कि पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने ‘पानी के हितों’ की रक्षा की बात कही है। खैर, इसका हम क्या ही करें… तू पहले अपनी हालत सुधार.. फिर लड़ने की बात कर।

पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था IMF के कर्ज पर चल रही है। बिजली का बिल भरने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। बाँध बनाने के लिए चीन से उधार माँगते हो। और फिर भारत को युद्ध की धमकी दे रहे हो? ये तो वैसी ही बात है जैसे कोई बर्बाद आदमी अपने पड़ोसी को धमकाए कि वो उसका पानी काट देगा, जबकि उसका अपना नल पहले ही बंद है।

बता दें कि पाकिस्तान ने हाल ही में IMF से 1 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया और वो उस पर जश्न मना रहा है। पर कर्ज लेकर जश्न मनाना.. ऐसा सिर्फ पाकिस्तान और पाकिस्तानी ही कर सकते हैं। खैर, जमाल साहब.. अपने बरखुरदारों से तो जरा कह देते कि जनाब.. पहले अपना घर संभालो, पड़ोसी से बाद में लड़ लेंगे।

पानी पर भारत ने की मेहरबानी, लेकिन पाकिस्तान ने अच्छा सिला दिया

इंडस वाटर ट्रीटी कोई बंधन नहीं था, बल्कि भारत की मेहरबानी थी। 1960 में ये समझौता हुआ था ताकि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी का बँटवारा शांति से हो। लेकिन जब पाकिस्तान की तरफ से आतंकवादी हमले हो रहे हैं, तो भारत क्यों चुप बैठे? भारत ने अभी तक पानी पूरी तरह रोका नहीं है, लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो वो ऐसा कर सकता है। और ये भारत का हक है। जमाल साहब को ये बात समझ नहीं आ रही। वो बस धमकी दे रहे हैं, लेकिन उनकी धमकियों में कोई दम नहीं है।

जमाल की पत्रकारिता पाकिस्तानी ड्रामे की तरह

जमाल का लेख पत्रकारिता कम, ड्रामा ज़्यादा है। ऐसा लगता है जैसे वो कोई पर्चा बाँट रहे हों, जिसमें लिखा हो, ‘दुनिया वालो, हमें बचा लो!’ वो भारत को डराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी बातें हवा में तीर छोड़ने जैसी हैं। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को रोकने में मेहनत करता, अपनी अर्थव्यवस्था को ठीक करता, तो शायद उसे ऐसी चिट्ठियाँ लिखने की ज़रूरत न पड़ती। लेकिन इसके बजाय, वो दुनिया भर में जाकर रो रहा है। कभी अमेरिका से मदद माँगता है, कभी चीन को उकसाता है।

आखिर में… पाकिस्तान की ये आदत पुरानी है कि वो अपनी कमज़ोरियों को छुपाने के लिए भारत को दोष देता है। जमाल साहब ने तो पूरी कोशिश कर ली कि दुनिया भारत को विलेन माने और पाकिस्तान को बेचारा। लेकिन भारत अब वो पुराना भारत नहीं, जो चुपचाप सब सह ले। भारत ने साफ कर दिया है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देगा, तो उसे इसका जवाब मिलेगा। और अगर पानी का समझौता तोड़ने की नौबत आई, तो भारत वो भी करेगा, बिना किसी डर के।

तो जमाल साहब, धमकी देना छोड़ो। अपने ‘बाप’ को बुलाने की बजाय, पहले अपने घर को संभालो। और हाँ, अगली बार अगर धमकी देनी हो, तो पहले ये पक्का कर लो कि तुम्हारा ‘बाप’ तुम्हारा है भी या नहीं!

(मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसका भावानुवाद किया है श्रवण शुक्ल ने।)

‘एक बार तो अल्लाह भी माफ कर देता है…’: नोमान इलाही के लिए भी चाहिए ‘माफी’, ISI जासूस के कैराना से पानीपत तक के लिंक ऑपइंडिया ने खँगाले

छोड़ दो बच्चा है। पता नहीं क्या फितूल आ गया उसके। एक बार तो अल्लाह ताला भी माफ कर देता है। अगर नहीं छोड़ते तो रोटी कपड़ा तो देगी उसे सरकार?

ये बात ISI जासूस नोमान इलाही के लिए ऑपइंडिया से कैराना की एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला ने कही। इलाही का घर कैराना के बेगमपुरा इलाके में है। बुजुर्ग महिला हमें इलाही के तालाबंद घर के बाहर ही मिली थीं।

कैराना, उत्तर प्रदेश की वह जगह है जो सुर्खियों में गलत वजहों से ही आती है। अभी हरियाणा के पानीपत से नोमान इलाही की गिरफ्तारी ने उसे चर्चा में ला दिया है। 2014 में यह जगह हिंदू व्यापारियों की हत्या और 2016 में हिंदुओं के पलायन को लेकर चर्चा में आया था। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस माहौल में बदलाव आया और पलायन कर चुके कई हिंदू फिर से वापस लौटे हैं।

नोमान इलाही की हकीकत जानने के लिए ऑपइंडिया के रिपोर्टर दिल्ली से करीब 125 किलोमीटर दूर कैराना तक गए। लोगों से पूछते-पूछते कैराना के उस बेगमपुरा तक भी पहुँचने में कामयाब हुए. जहाँ नोमान इलाही का घर है।

मैं बाहर नहीं आ सकती, पर्दा है: नोमान इलाही की पड़ोसन

मिश्रित आबादी के बीच एक संकरी गली में नोमान इलाही के घर के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। हमने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटाया। एक महिला ने नाम न बताते हुए जालीदार दरवाजे के अंदर से (पहचान छिपाते हुए) कहा, “इनके सारे काम गलत हैं। ये किसी के पैसे लेकर भागते हैं तो किसी का कुछ। इन लोगों से हमारा कोई मतलब नहीं है। ये कई सालों से यहाँ नहीं रहते हैं।” बाहर आकर बात करने के अनुरोध पर महिला ने कहा, “मैं बाहर नहीं आ सकती। पर्दा है। मैं अपना नाम नहीं बताऊँगी। इसे (नोमानी) खत्म कर दीजिए या जेल में डाल दीजिए।”

नोमान इलाही की गली में सन्नाटा, कोई पहचान बताने को तैयार नहीं

जिस गली में नोमान इलाही का घर है, सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बात करने से बच रहे थे। अपनी पहचान भी नहीं बता रहे थे। ऐसी ही एक महिला ने अपना नाम न बताते हुए कहा, “करीब 2 साल से नोमान के घर पर ताला लगा है। इसके भाई मजदूरी करते हैं और बहनों की शादी हो चुकी है। नोमान जब यहाँ रहता था तो बहुत अच्छा था बाहर जाने के बाद पता नहीं।” इस दौरान अन्य महिलाएँ अपने खिड़कियों से झाँक रहीं थी। लेकिन कैमरा सामने आते ही घर के अंदर चली जा रहीं थीं। इसी बीच एक युवक ने कहा, “नोमान के कारण कैराना बदनाम हुआ है। उसने जो भी किया है, गलत किया है।”

नोमान इलाही के लिए माफी चाहती हैं बुजुर्ग महिला

नोमान के घर के पास हाथ में चिप्स लिए खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “जब यहाँ रहता था तो अच्छा था। अब पता नहीं। जैसा उसने किया है, वैसा वह भरेगा। वह एक-दो बार पाकिस्तान गया होगा। उसके वहाँ रिश्तेदार हैं।” इस महिला का यह भी कहना था कि उनके रिश्तेदार भी पाकिस्तान में रहते हैं, लेकिन वे कभी गईं नहीं, क्योंकि पासपोर्ट नहीं बन सका। इसी बुजुर्ग महिला ने नोमान इलाही को माफ कर देने की बात की, जिसका हमने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया कि नोमान की गिरफ्तारी के बाद इस गली में लोगों का आना बढ़ गया है। इसी दौरान नोमान के घर के सामने वाले मकान में मौजूद एक लड़के ने बताया, “वह (नोमान इलाही) जब भी यहाँ आता था तो अकेला ही घर में रहता था और फिर ताला लगाकर चला जाता था।”

जिस मस्जिद में जाता था नमाज पढ़ने, उसके इमाम बोले- मैं नोमान इलाही को नहीं जानता

हमने गली के सामने वाली मस्जिद के उस इमाम से भी बात करने की कोशिश की जहाँ नोमान इलाही नमाज पढ़ने के लिए जाता था। लेकिन मस्जिद के इमाम ने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। इमाम शहजाद ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। उसने गलत किया है। उसे सजा मिलनी चाहिए।”

इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले दानिश ने बताया, “नोमान ने शहर का नाम बदनाम किया है। पहले (जब वह कैराना रहता था) वह अक्सर नमाज के लिए मस्जिद आता था। मैंने उसे देखा है। अब वह अपनी बहन के यहाँ पानीपत रहता है। इसका बाप भी नकली पासपोर्ट बनाने का काम करता था। उसने देश के साथ गद्दारी की है। उसे फाँसी की सजा होनी चाहिए।” वहीं बैठे एक बुजुर्ग ने कहा, “मैं उसे नहीं जानता। लेकिन उसे अपने किए की सजा जरूर मिलनी चाहिए।”

सपा राज में ‘मिनी पाकिस्तान’ कहलाता था कैराना

कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रदीप गोयल ने बताया कि सपा सरकार में कैराना ‘मिनी पाकिस्तान’ के नाम सा जाना जाता था। योगी सरकार के बाद छवि सुधरी है। लेकिन नोमान की गिरफ्तारी ने फिर से कैराना की छवि को धूमिल किया है।

हमें देखते ही भड़क उठी नोमान इलाही की बहन

नोमान इलाही की गिरफ्तारी पानीपत से हुई है। यहाँ के सेक्टर-29 स्थित मोहन नगर में वह अपनी बहन के घर रहता था। यहाँ हमें कैमरा के साथ देखते हुए नोमान इलाही के रिश्तेदार भड़क उठे। करीब 75-80 गज के पुराने से मकान के फर्श पर बैठी नोमान की बहन जीनत ने कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई घर में अंदर आने की। किससे पूछकर घर के अंदर आए। हमें किसी से बात नहीं करनी। अपना कैमरा बंद करो।”

हमने नोमान के जीजा इरफान से बात करने की कोशिश की तो उसने कहा कि हम मीडिया से तंग आ चुके हैं। मीडिया पूछती कुछ है और दिखाती कुछ है। हमें किसी से बात नहीं करनी। उसने कहा, “अब हमारा नोमान से कोई नाता नहीं है। उसने हमारी 35 साल की कमाई हुई इज्जत को मिट्टी में मिला दिया है।”

उल्लेखनीय है कि 3 बहन और 3 भाइयों में नोमान सबसे छोटा है। उसका निकाह नहीं हुआ है। उसका जीजा इरफान पानीपत में कार धुलाई सेंटर के साथ साथ बाइक लेमिनेशन और लकड़ी का भी काम करता है।

‘घास भारत का खा रहा, दूध पाकिस्तान में दे रहा’

जिस गली में नोमान की बहन का घर है, उसके बाहर दुकान करने वाली एक महिला ने ऑपइंडिया को बताया, “वह कभी-कभी बीड़ी का बंडल लेने के लिए दुकान पर आता था। हमें कभी शक ही नहीं हुआ कि वह ऐसा भी कुछ करता है। अगर वह गुनहगार है तो कानून उसे सजा दे।”

पड़ोस की एक अन्य लड़की का कहना था कि यदि उनलोगों को पता होता तो वे पहले ही नोमान इलाही की खबर पुलिस को देकर उसे पकड़वा देते। उसने कहा, “ऐसे बंदे तो गोली मार देनी चाहिए। घास भारत का खा रहा है और दूध पाकिस्तान में दे रहा है।”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने के 10 घंटों में ही भारत ने हवाई हमलों से तोड़ दी कमर, घुटने पर आ गया था पाकिस्तान: जानिए फौजी ठिकानों पर हमलों के बाद क्यों माँगने लगा सीजफायर की भीख?

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसके बारे में हर दिन नई-नई बातें सामने आ रही हैं। ये ऑपरेशन कितना कामयाब रहा और इसे कैसे अंजाम दिया गया, इसकी जानकारी हाल ही में स्ट्रैट न्यूज ग्लोबल पर नेशनल सिक्योरिटी एनालिस्ट नितिन ए गोखले की एक रिपोर्ट से मिली। इस रिपोर्ट में 10 मई को 10 घंटे तक चले भारत के हवाई हमलों का पूरा ब्योरा है।

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 हिंदुओं की जान चली गई थी। पहलगाम आतंकी हमले को पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा के मुखौटा संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ)’ ने अंजाम दिया था। उसने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। इस हमले के बाद भारत ने युद्ध जैसी तैयारियाँ की और फिर पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी कैंपों पर सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया।

भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में हमला किया और कई आतंकी लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया, जिसमें 100 से अधिक आतंकी भी मारे गए। ये हमला आतंकी ठिकानों पर थी, न कि आम जनता या पाकिस्तानी फौजी ठिकानों पर। हालाँकि पाकिस्तान ने आतंकी ठिकानों पर हमलों को खुद पर हमले की तरह लिया और भारत पर जवाबी हमले की तैयारी की। पाकिस्तान ने पूरी ताकत से भारत पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला बोला, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उन हमलों को बुरी तरह से नाकाम कर दिया।

पाकिस्तानी हमलों के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर का दूसरा हिस्सा शुरू किया। 10 मई को रात 2.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक भारत ने जवाबी हमले किए और पाकिस्तानी एयर डिफेंस नेटवर्क की कमर तोड़ दी। इस बार भारत ने पाकिस्तान के अहम फौजी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके कुछ ही घंटों के भीतर पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए और सीजफायर की रहम माँगने लगा।

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता सिर्फ भारत के हमलों की ताकत और पैमाने की बात नहीं है, बल्कि एक बेहद कड़े संदेश की तरह भी रहा, जो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि उसके समर्थकों तक भी गया। मैसेज साफ था- भारत अब आतंकी हमलों को चुपचाप सहन नहीं करेगा। इस ऑपरेशन की सफलता से साफ है कि भारत ने अपनी रक्षा, जवाब देने की नीति और दुश्मनों को तबाह करने की रणनीति को बदला है, जो उसके दुश्मनों की साँसे रोक देने वाला है।

अमेरिका की चेतावनी और भारत का जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण के बाद 9 मई की रात को एक बड़ा घटनाक्रम शुरू हुआ। रात करीब 10:30 बजे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान कुछ ही घंटों में बड़ा हमला करने वाला है।

पीएम मोदी का जवाब साफ और सख्त था। भारत न सिर्फ हमला झेलने को तैयार है, बल्कि उसका जवाब और तेजी से देगा। यह बात पहले ही पहलगाम हमले के बाद सार्वजनिक तौर पर कही जा चुकी थी, लेकिन वेंस का फोन अंतिम इशारा था।

इसके बाद भारत के युद्ध परिषद (War Council) की बैठक हुई। बैठक में एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुख आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी शामिल हुए। बैठक में हमले की रणनीति पर बात हुई। पीएम मोदी ने साफ निर्देश दिए कि अब सिर्फ योजना नहीं बनानी, बल्कि पाकिस्तान के हमलों का करारा जवाब देना है और उसकी ताकत को पूरी तरह खत्म करना है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये नतीजे मिले भी।

पाकिस्तान का हमला, भारत का करारा जवाब

10 मई की रात 1:30 बजे पाकिस्तान ने अपनी चाल चली। उसने भारत के उत्तरी और पश्चिमी हवाई अड्डों पर बड़ा हमला किया। लेकिन भारत के मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर आदमपुर जैसे ठिकानों पर तैनात S-400 ने ज्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया। उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान से आने वाली मिसाइलों-ड्रोन्स को ट्रैक किया, बल्कि उन्हें नष्ट भी कर दिया। भारत इस हमले के लिए पहले से ही तैयार था और उसकी यह तैयारी पूरी तरह से रंग लाई।

…और फिर भारत का जवाबी हमला शुरू

पाकिस्तान के हमलों के बाद भारत ने जवाबी हमला बोला। सुबह 2:30 बजे भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस, स्कैल्प और क्रिस्टल मेज मिसाइलों के साथ-साथ स्वदेशी हारोप और नगास्त्र जैसे हथियारों से हमला किया। ये हमले इतने सटीक और ताकतवर थे कि पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली शुरू से ही घुटनों पर आ गई। चूँकि पाकिस्तान को इस ताकतवर हमले का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था, ऐसे में पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों में अफरा-तफरी मच गई।

पहले ही हमले में रावलपिंडी के पास नूर खान हवाई अड्डा भारतीय हमलों का निशाना बना, जो पाकिस्तान की फौज के हेडक्वॉर्टर के करीब है। भारत ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में हमला किया, जिसे रोकने के लिए पाकिस्तान के पास कोई सिस्टम नहीं था, क्योंकि उसका एयर डिफेंस सिस्टम शुरू में ही बर्बाद हो चुका था। भारत के हमले में पाकिस्तान के दो मोबाइल कमांड सेंटर तबाह कर दिए गए, एक C-130 विमान जमीन पर ही नष्ट हो गया। दक्षिण में रहीमयार खान हवाई अड्डे का रनवे और बाकी हिस्से पूरी तरह बर्बाद कर दिए गए।

इसके साथ ही नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात भारतीय सेना ने M-777 हॉवित्जर तोपों और एक्सकैलिबर गोला-बारूद से पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला किया, जिससे इस्लामाबाद पर और दबाव बढ़ गया।

भारत के हमले हुए और तेज, तो बढ़ गई पाकिस्तान में घबराहट

भारत यहीं नहीं रुका। दूसरी लहर के हमलों ने पाकिस्तान को और डराया। सरगोधा और मुरीदके जैसे F-16 स्क्वाड्रन तैनात की तैनाती वाले महत्वपूर्ण हवाई अड्डों को सटीक निशाना बनाया गया। पाकिस्तान में इतने गंभीर और अंदर तक जाकर किए गए हमलों की वजह से इस्लामाबाद से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मच गया।

सुबह 9:30 बजे तक पाकिस्तान में घबराहट फैल चुकी थी। दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के जरिए बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि बात सिर्फ सैन्य हॉटलाइन पर होगी। इस बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रहा था और ये कह रहा था कि वो सीजफायर के लिए तैयार है।

हमलों के आखिरी चरण में भारत ने तोड़ी पाकिस्तानी डिफेंस की कमर

एक तरफ पाकिस्तान हमले रोकने के लिए भीख माँग रहा था और सीजफायर के लिए गिड़गिड़ा रहा था, तो भारत रुका नहीं था, बल्कि वो अपने ऑपरेशन के तीसरे और चौथे चरण को अंजाम दे रहा था। इस चरण में भारतीय बलों ने रफीकी, सुक्कुर, जैकोबाबाद, भोलारी, चुनिया, पसरूर, अरिफवाला और मुरिद जैसे हवाई अड्डों और रडार ठिकानों को निशाना बनाया। नूर खान पर बार-बार हमले से पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह से चरमरा गया और वो अपनी रक्षा करने की जगह ऑपरेशनल तौर पर पंगु हो गया।

तड़के जनरल मुनीर ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फोन किया। अब तक पाकिस्तान को नुकसान की भयानकता समझ आ चुकी थी।

भारत का ‘अपर हैंड’ और पाकिस्तान ने पीछे खींचे कदम

भारत ने करीब दोपहर 12 बजे अपने हमले रोके। 12:30 बजे पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन 3:30 बजे तक बात नहीं हो पाई। भारत ने अपनी नीति के मुताबिक शाम 5 बजे से हमले रोक दिए, लेकिन यह तभी हुआ जब पाकिस्तान ने सैन्य हॉटलाइन के जरिए औपचारिक अनुरोध किया।

ऑपरेशन सिंदूर को शुरू और खत्म हुए दो हफ्ते बीत चुके हैं। बंदूकें खामोश हैं। जंग की आवाजें थम गई हैं, लेकिन इस ऑपरेशन ने वो कर दिखाया, जो कागजी कार्रवाई या बयानबाजी नहीं कर पाई। इसने साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद का जवाब सिर्फ बयानों या आत्मरक्षा से नहीं देगा। अब वो आतंकी हमलों का करारा जवाब देगा और वो सिर्फ आतंकियों ही नहीं, आतंकियों के साथियों को भी बर्बाद कर देगा।

बता दें कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद से परेशान रहा है। ऑपरेशन सिंदूर एक साहसिक कदम है, जिसने साफ संदेश दिया कि भारत न सिर्फ अपनी रक्षा करेगा, बल्कि उकसावे का जवाब जोरदार तरीके से देगा। भले ही अभी सीजफायर (युद्धविराम) हो, भारत ने साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। अब कोई भी आतंकी हमला युद्ध माना जाएगा।

आतंकवाद पर कड़ा वार, शेरों की बढ़ती दहाड़ और ड्रोन उड़ाती महिलाएँ: PM मोदी ने 122वीं बार की ‘मन की बात’, ऑपरेशन सिंदूर पर बोले- ये सैन्य मिशन नहीं, भारत की बदलती तस्वीर है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (25 मई 2025) रेडियो शो ‘मन की बात’ के 122वें एपिसोड को संबोधित किया। ऑपरेशन सिंदूर के सफल होने के बाद ये उनका पहला रेडियो कार्यक्रम है। देश की जनता को संबोधित करते हुए इस दौरान उन्होंने देश के सैन्य मिशन पर बात की।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं है, ये हमारे संकल्प, साहस और बदलते भारत की तस्वीर है और इस तस्वीर ने पूरे देश को देश-भक्ति के भावों से भर दिया है, तिरंगे में रंग दिया है।”

पीएम ने कहा, “आज पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, संकल्पबद्ध है। आज हर भारतीय का यही संकल्प है, हमें आतंकवाद को खत्म करना ही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी सेनाओं ने जो पराक्रम दिखाया है, उसने हर हिंदुस्तानी का सिर ऊँचा कर दिया है।”

पीएम मोदी ने एक बार फिर से देश को बताया कि किस सटीकता के साथ हमारी सेनाओं ने आतंकी मुल्क के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया। उन्होंने कहा कि भारत के द्वारा छेड़े गए ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया भर में आतंक के खिलाफ लड़ाई को एक नया विश्वास दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर ने आत्मनिर्भर भारत के हथियारों और तकनीक की ताकत को भी प्रदर्शित किया है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में देशभक्ति की लहर तेज हुई है।

वह बोले कि इस ऑपरेशन ने लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई। लोग इसके बाद कविताएँ, संकल्प गीत लिखते दिखे। बच्चों ने ऐसी पेंटिंग बनाई जिनमें बड़े संदेश थे। देश के गाँव-कस्बों में तिरंगा यात्राएँ निकाली गईं।

पीएम मोदी ने इसके बाद महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के उस गाँव का भी जिक्र किया जो कुछ समय पहले नक्सल हिंसा के कारण बुनियादी चीजों से अछूता था। उन्होंने कहा कि माओवाद प्रभावित क्षेत्र काटेझरी में पहली बार बस सेवा शुरू होने से सामाजिक व आर्थिक विकास की नई उम्मीदें जगी हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में शिक्षा के नतीजे बेहतर होने से भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

गुजरात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गिर वन्यजीव क्षेत्र में पिछले पाँच वर्षों में शेरों की संख्या 674 से बढ़कर 891 हो गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। इसके साथ ही, सिक्किम के ‘Crafted Fibers’ प्रोजेक्ट ने स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाकर सांस्कृतिक समृद्धि बढ़ाई है।

तेलंगाना की महिलाओं की प्रशंसा करते हुए, महिलाओं द्वारा ड्रोन तकनीक का उपयोग कर खेती में क्रांति लाने की बात कही, जबकि आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता मिलने से परंपरागत चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा मिली है। साथ ही CBSE द्वारा ‘शुगर बोर्ड’ जैसी पहल से बच्चों में स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा दिया है।

इसके बाद उन्होंने योग दिवस पर बात की और याद दिलाया कि कैसे 21 जून 2015 को शुरू किए गए इस प्रयास पर लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में उन्होंने गुजरात में पाँच सालों में बढी शेरों की संख्या का जिक्र किया।

‘एक ही धर्म (हिंदुओं को) के लोगों को चुन-चुन कर मारा’: मोदी सरकार के ऑल पार्टी मिशन पर गए शशि थरूर ने खोली पाकिस्तान की पोल, पहलगाम आतंकी हमले को रखा दुनिया के सामने

पहलगाम आतंकी हमले में हिंदुओं के नरसंहार को कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने दुनिया के सामने बयाँ किया। थरूर उस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जिसे मोदी सरकार ने अलग-अलग देशों में भेजा है ताकि इस हमले और ऑपरेशन सिंदूर के रूप में भारत की प्रतिक्रिया के बारे में दुनिया को बताया जाए।

न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास में बोलते हुए थरूर ने आतंकियों के इरादों को पूरी दुनिया को बताया। शशि थरूर ने आतंकियों के इरादों को साफ करते हुए बताया कि आतंकियों ने पहले लोगों की धर्म की पहचान की और फिर सिर्फ उसी आधार पर उनकी हत्या की। जो हिंदू थे-वो मार दिए गए, जो मुस्लिम थे – उन्हें छोड़ दिया गया।

कश्मीर की तरक्की को रोकने की साजिश

शशि थरूर ने बताया कि इस हमले का समय और क्रूरता सोची-समझी थी, ताकि कश्मीर की बढ़ती साख को नुकसान पहुँचे। कश्मीर अब एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यटन स्थल बन रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले साल कश्मीर में अमेरिका के ऐस्पन, कोलोराडो से ज्यादा पर्यटक आए। यह सिर्फ सामान्य स्थिति नहीं, बल्कि समृद्धि का प्रतीक है।” अनुच्छेद 370 हटने के बाद मोदी सरकार के विकास कार्यों से कश्मीर में शांति और प्रगति दिख रही थी, जिसे आतंकी रोकना चाहते थे।

थरूर ने जोर देकर कहा कि यह हमला कोई सामान्य आतंकी घटना नहीं थी। यह सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की सुनियोजित कोशिश थी। उन्होंने कहा, “यह ऐसा नहीं था कि कोई बम धमाके में अंधाधुंध लोगों को मार रहा था। आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों को चुना और उनकी हत्या की।”

सिर्फ हिंदुओं को निशाना बनाया गया

इस आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक थे। शशि थरूर ने बताया कि सभी मृतक हिंदू थे और उन्हें उनके धर्म के कारण मारा गया। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें एक हिंदू प्रोफेसर ने इस्लामी कलमा पढ़कर अपनी जान बचाई, क्योंकि आतंकियों ने उन्हें मुस्लिम समझ लिया।

थरूर ने कहा, “कुछ मामलों में पति को गोली मारी गई और पत्नी को कहा गया कि वह जाकर दुनिया को बताए कि उसे उसके धर्म के कारण मारा गया।” फिर भी उन्होंने भारत की जनता की तारीफ की कि इस उकसावे के बावजूद देश में कोई जवाबी हिंसा नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि भारत में कोई जवाबी हिंसा नहीं हुई।” भारतीय समाज ने एकजुट होकर दुख और दृढ़ता दिखाई।

आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी

आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने हमले के एक घंटे के भीतर इसकी जिम्मेदारी ले ली। थरूर ने कहा, “भारत को इस बात पर कोई शक नहीं था कि यह हमला कहाँ से हुआ।” हालाँकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।

मोदी सरकार ने तुरंत एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने का फैसला किया। थरूर इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। हालांकि कुछ विपक्षी नेताओं को इस प्रतिनिधिमंडल और थरूर जैसे नेताओं के चयन पर आपत्ति थी, लेकिन सरकार ने सभी विचारधाराओं को शामिल करके भारत की बात को और विश्वसनीय बनाया। ऑपरेशन सिंदूर के विवरण को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से रखा गया।

पुलिस को देख भागे ‘लव जिहादी’, पैंट से गिरी पेन ड्राइव से सामने आया रेप-ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क: सूफियान चला रहा था गैंग, MP के नागदा में भी टारगेट पर थी हिंदू लड़कियाँ

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा से लव जिहाद का मामला सामने आया है, पुलिस जाँच में खुलासा हुआ है कि कुछ युवक हिंदू नाम रखकर लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे, फिर उनके साथ दुष्कर्म कर अश्लील वीडियो बनाते और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करते थे।

इस मामले में पुलिस ने छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपित फरार है। गिरफ्तारी का यह मामला गुरुवार (22 मई 2025) की रात तब सामने आया, जब बिरलाग्राम थाना पुलिस की टीम बीसीआई परिसर के खंडहर क्षेत्र में गश्त कर रही थी।

वहाँ कुछ संदिग्ध युवक घूमते नजर आए जो पुलिस को देखकर भागने लगे। इसी दौरान उनके मोबाइल और पेन ड्राइव मौके पर गिर गए। जब इनकी जाँच की गई, तो उनमें कई लड़कियों के अश्लील वीडियो मिले। जिसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई जिसके बाद जाँच शुरू हुआ। पुलिस का मानना है कि अगर यह डिवाइस न मिलते, तो यह अपराध लंबे समय तक दबा रहता।

पकड़े गए आरोपितों में मुख्य आरोपित सूफियान इंदिरा कॉलोनी का निवासी है, जहाँ अन्य आरोपितों में सोहेल उर्फ वासीद, उस्मान, तौहिद और वीरू एक अन्य सोहेल शामिल हैं। सभी को शुक्रवार (23 मई 2025) को कोर्ट में पेश किया जाना था, लेकिन संभावित हमले की आशंका के चलते उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने सभी आरोपितों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहाँ पुलिस अब इनसे पूछताछ कर रही है।

इस बीच बार एसोसिएशन की पुस्तकालय सचिव कांता सरोज ने जानकारी दी कि संघ ने निर्णय लिया है कि कोई भी वकील इन आरोपितों की पैरवी नहीं करेगा। साथ ही, यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा ताकि पीड़िताओं को शीघ्र न्याय मिल सके।

पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित वीडियो बनाकर उन्हें पेन ड्राइव में सुरक्षित रखते थे ताकि मोबाइल चेकिंग के दौरान पकड़े न जाएँ। आरोपितों का दावा है कि उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं किए, लेकिन पुलिस हर पहलू से जाँच कर रही है।

एसपी प्रदीप शर्मा ने खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 10,000 रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। मामले का खुलासा पुलिस की सतर्क गश्त के कारण संभव हो सका। फिलहाल, एक आरोपित अरुण वर्मा फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की एक टीम केदारनाथ भेजी गई है। पुलिस ने इस पूरे मामले में सुफियान पर तीन अपराध धारा 376 (2), 376(3), 376, 506,64 (2), 70(1), 351(3), 3(5), 66 में केस दर्ज किया है।

‘लव जिहादी’ पत्रकार उमर राशिद के खिलाफ NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान, ‘द वायर’ से भी कई सवालों के जवाब माँगे: पीड़िता ने किया था मिलीभगत की ओर इशारा, कहा था- नहीं हो रही निष्पक्ष जाँच

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ‘द वायर’ के पत्रकार उमर राशिद के खिलाफ स्वतः संज्ञान लिया है, जब एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोपों में बलात्कार, यौन शोषण, शारीरिक हमला, मानसिक उत्पीड़न, तथा धार्मिक और सांस्कृतिक अपमान शामिल हैं। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया है।

एनएचआरसी ने उमर रशीद के खिलाफ लगाए गए विस्फोटक आरोपों पर एटीआर माँगी

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए 5 जून 2025 तक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह कदम इंस्टाग्राम पर वायरल हुए बयान की समीक्षा के बाद उठाया गया, जिसमें पत्रकार उमर राशिद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आयोग ने इन दावों को ‘गंभीर’ और ‘बेहद परेशान करने वाला’ करार देते हुए मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया है।

शिकायतकर्ता ने ‘द वायर’ की मिलीभगत की ओर इशारा किया

एनएचआरसी में दर्ज शिकायत में शिकायतकर्ता ने ‘द वायर’ के संपादकीय तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में ‘द वायर न्यूज पोर्टल के प्रबंधन’ द्वारा की जा रही आंतरिक जाँच पर अविश्वास जताते हुए कहा गया है कि जाँच निष्पक्ष नहीं है और यह सिर्फ औपचारिकता भर है, जिसका उद्देश्य आरोपितों को बचाना है। साथ ही, शिकायत में हितों के टकराव और संगठन की छवि बचाने के लिए संभावित दबाव और दमन की भी आशंका जताई गई है।

एनएचआरसी ने उमर रशीद पर बलात्कार, यातना और जबरन गोमांस खिलाने के गंभीर आरोपों के संबंध में द वायर से जवाब माँगा

यह मामला ‘द वायर’ की संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबे समय से इस पोर्टल पर प्रतिगामी दृष्टिकोणों को ‘असहमति की राय’ के रूप में पेश करने के आरोप लगते रहे हैं। अब यह संस्थान एक कथित सीरियल यौन अपराधी को बचाने के आरोपों के चलते खुद जाँच के दायरे में है, जिससे उसकी नीयत और जवाबदेही दोनों पर संदेह गहराता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने ‘द वायर’ पोर्टल के मैनेजमेंट को निम्नलिखित प्रश्न जारी किए हैं।

पुलिस शिकायत के संबंध में:

क्या द वायर न्यूज़ पोर्टल के प्रबंधन ने आरोपित के खिलाफ लगाए गए यौन, शारीरिक और मानसिक शोषण के गंभीर आरोपों के जवाब में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज की?

अगर कोई शिकायत दर्ज की गई थी, तो वह किस तारीख को दर्ज की गई थी और किस पुलिस स्टेशन में?

शिकायत दर्ज होने के बाद से संबंधित कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की है?

क्या अधिकारियों को बलात्कार और गंभीर शारीरिक हमले के गंभीर आरोपों के बारे में विशेष रूप से सूचित किया गया था, जैसा कि पीड़िता ने अपने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है?

पीओएसएच जाँच के संबंध में:

क्या कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पीओएसएच अधिनियम) के प्रावधानों के तहत द वायर न्यूज पोर्टल के प्रबंधन द्वारा औपचारिक जाँच शुरू की गई है?

यदि हाँ, तो जाँच की वर्तमान स्थिति क्या है? मामले को संभालने के लिए गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सदस्य कौन हैं?

क्या शिकायतकर्ता/पीड़ित से आईसीसी ने संपर्क किया है, और जाँच के दौरान उसकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

इंस्टाग्राम पर आई गवाही से पूरे देश में गुस्सा फैल गया

एक अज्ञात महिला की वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में ‘द वायर’ के पत्रकार उमर राशिद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें यौन हिंसा, शारीरिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न का विस्तृत विवरण शामिल है। महिला ने आरोप लगाया कि राशिद ने दिल्ली के लिब्रल मीडिया जगत में अपनी प्रभावशाली स्थिति का इस्तेमाल कर उसे फंसाया। वह बताती है कि राशिद ने प्रगतिशील राजनीति पर बातचीत और लोधी गार्डन में सैर जैसे प्रतीकात्मक इशारों के ज़रिए उसका विश्वास जीता और दावा किया कि उसने यही रणनीति कई अन्य महिलाओं के साथ भी अपनाई।

उसके अनुसार, भावनात्मक रूप से जुड़ने के बाद रिश्ता हिंसक और अपमानजनक बन गया। उसने आरोप लगाया कि उसे बार-बार बलात्कार, थप्पड़, लात मारने और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, विशेषकर तब जब वह भावनात्मक रूप से कमज़ोर अवस्था में होती थी।

उसने लिखा “जब मैं बीमार थी, तब उसने मेरा बलात्कार किया, जब मैंने उससे ऐसा करने से मना किया। उसने सुरक्षा का उपयोग करने से इनकार कर दिया। मैं क्लीनिक में गई, गर्भपात करवाया, परीक्षण करवाया।”

मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक अपमान

पीड़िता ने बहुत भावुक होते हुए अपने साथ हुए अपमान की भी बात की, जिसमें उसके पैरों पर भीख माँगने के लिए मजबूर होना भी शामिल है, जबकि राशिद ने कथित तौर पर उसकी माँ के काल्पनिक यौन शोषण का विस्तृत विवरण दिया है।

उसने आगे आरोप लगाया कि राशिद ने उसे जबरदस्ती गोमाँस खिलाया, जबकि वह उसकी धार्मिक और व्यक्तिगत घृणा से पूरी तरह वाकिफ था। उसने कहा कि ऐसा उसने अपनी कश्मीरी मुस्लिम पहचान को स्थापित करने और उसे एक गैर-मुस्लिम महिला के रूप में अपमानित करने के लिए किया था। पीड़ित के मुताबिक “मैंने इसे उगल दिया, उसने मुझे इसे फिर से खाने को कहा, वह जानता था कि मुझे यह पसंद नहीं है।”

नेट FDI में गिरावट पर कॉन्ग्रेस और मीडिया ने फैलाया भ्रम: जानें 2014 से 2025 के बीच कैसे मजबूत हुई भारतीय अर्थव्यवस्था, मोदी सरकार के प्रयासों से विदेशी कंपनियों का विश्वास बढ़ा

कॉन्ग्रेस पार्टी और भारत के कई मीडिया संस्थानों ने शुक्रवार, (23 मई 2025) को देश में फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (FDI) में आई ‘भारी’ गिरावट को लेकर रिपोर्ट्स की। इन रिपोर्टों में उन्होंने ऐसे दिखाया जैसे भारत में FDI का गिरना मतलब मोदी सरकार की नीतियों में बड़ी गड़बड़ी है जिसके कारण विदेशी कंपनियाँ अब विश्वास नहीं कर रहीं।

कॉन्ग्रेस की केरल इकाई ने मौके का फायदा उठाते हुए इस पर प्रतिक्रिया दी। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “भारत में विदेशी निवेशकों और देश के भीतर भारतीय निवेशकों के भरोसे में गिरावट एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। सभी ने भारत से उम्मीदें छोड़ दी हैं, यह 11 वर्षों की विभाजनकारी राजनीति और अविवेकपूर्ण नीति निर्माण का नतीजा है।”

कॉन्ग्रेस के केरल हैंडल द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वामपंथी प्रचार आउटलेट ‘द वायर’ से जुड़ी पत्रकार सीमा चिश्ती ने आरोप लगाया कि भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 96.5% की भारी गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।

टीएमसी के पूर्व सांसद जवाहर सरकार, जिन्हें फर्जी खबरें फैलाने के लिए जाना जाता है, उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “विदेशी निवेशक संघियों, भक्तों और गोदी मीडिया के दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं होते। वे निवेश से पहले देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का आँकलन करते हैं। मोदी के भारत में उनका विश्वास खत्म हो चुका है, यह नेट एफडीआई में आई भारी गिरावट से साफ झलकता है।”

नेट एफडीआई में 96% की गिरावट की खबर मुख्यधारा मीडिया में व्यापक रूप से छाई रही, लेकिन आम पाठकों को इसके प्रभावों और अर्थ को लेकर बहुत कम या कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ रिपोर्टों में यह आरोप लगाया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था गिरावट की ओर बढ़ रही है और मौजूदा मोदी सरकार के तहत आर्थिक प्रगति की कोई आशा नहीं बची है।

‘नेट एफडीआई’ में गिरावट के बारे में समाचार रिपोर्टों का स्क्रीनशॉट

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

इन्वेस्टोपेडिया के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किसी कंपनी या सरकार द्वारा किसी विदेशी परियोजना या फर्म में किया गया दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण निवेश होता है। भारत में इसका मतलब भारतीय कंपनियों में किया गया विदेशी निवेश है।

वित्तीय वर्ष 2014-2015 से भारत में FDI प्रवाह लगातार बढ़ा है। ऑपइंडिया ने RBI और PIB के आँकड़ों के आधार पर जो चार्ट तैयार किया है, उसके अनुसार 2014-2015 में भारत में FDI प्रवाह 45.15 बिलियन डॉलर (3.75 लाख करोड़) था, जो 2024-2025 में बढ़कर 81 बिलियन डॉलर (6.72 लाख करोड़) हो गया।

वर्ष दर वर्ष तुलना करें तो वित्तीय वर्ष 2015-2016 में FDI में 23.05% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 2024-2025 में यह वृद्धि 13.60% रही।

(स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित आंकड़े – यहाँ, यहाँ और यहाँ)

वित्तीय वर्ष 2022-2023 और 2023-2024 में शुद्ध एफडीआई में गिरावट देखी गई, हालाँकि इन वर्षों में सकल एफडीआई प्रवाह अभी भी महत्वपूर्ण था।

इसके बावजूद, कुल मिलाकर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मजबूत बना हुआ है और दीर्घकालिक प्रवृत्ति के अनुसार यह साल-दर-साल बढ़ रहा है, जो दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और बेहतर स्थिति में है।

आरबीआई के अनुसार, “लगभग सभी क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से 100% एफडीआई के लिए खोल दिया गया है। अब लगभग 90% एफडीआई स्वचालित मार्ग के तहत आता है। हाल के वर्षों में हमने रक्षा, बीमा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, दूरसंचार और अंतरिक्ष जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उदारीकरण के कई उपाय लागू किए हैं, ताकि अर्थव्यवस्था को और अधिक खोला जा सके।”

‘नेट एफडीआई’ को लेकर विवाद

नेट एफडीआई वह अंतर होता है जो ग्रोस एफडीआई फ़्लो और भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए विदेशी निवेश, विनिवेश तथा विदेशी संस्थाओं द्वारा धन की वापसी के बाद बचता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई 2025 के लिए जारी अपने बुलेटिन में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-2025 में शुद्ध एफडीआई 0.4 बिलियन डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2023-2024 में यह 10.1 बिलियन डॉलर था।

कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इन दोनों आँकड़ों के बीच के अंतर को निकालते हुए दावा किया है कि नेट एफडीआई में 96.5% की गिरावट आई है, और इसे भारत की आर्थिक स्थिति में गंभीर गिरावट के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आरबीआई द्वारा जारी मई 2025 बुलेटिन का स्क्रीनशॉट

जैसा कि दिए गए ग्राफ से स्पष्ट है, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में ग्रोस एफडीआई पफ़्लो 81 बिलियन डॉलर रहा, जो कि 2023-2024 के 71.3 बिलियन डॉलर की तुलना में 13.6% अधिक है।

इसी समय अंतराल में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी निवेश और विनिवेश में भी वृद्धि देखी गई। यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियाँ अब विदेशों में रणनीतिक निवेश और अधिग्रहण कर रही हैं, और भारत में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भी निकालना आसान हुआ है, यह दोनों ही आर्थिक परिपक्वता और मजबूती के संकेत हैं।

RBI ने अपने बुलेटिन में बताया, “इस अवधि में नेट FDI फ़्लो में गिरावट अधिक प्रत्यावर्तन और बाहरी निवेश के कारण हुई, जो इस बात का संकेत है कि भारत एक परिपक्व बाजार बन चुका है, जहाँ विदेशी निवेशक आसानी से प्रवेश और निकास कर सकते हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की सकारात्मक स्थिति को दर्शाता है।”

निष्कर्ष

उल्लेखनीय ग्रोस एफडीआई फ़्लो भारत में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है, जो इस तथ्य से और भी पुष्ट होता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 686.1 बिलियन डॉलर (56.95 लाख करोड़) है, जो 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी, उससे जुड़े पत्रकारों और मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र ने भारत में एफडीआई फ़्लो की साल-दर-साल वृद्धि की अनदेखी की। उन्होंने केवल शुद्ध एफडीआई में आई गिरावट को अलग-थलग करके प्रस्तुत किया और इसके आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था की नकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की।

इन चुनिंदा और भ्रामक दावों के बावजूद, सच ये है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है और देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।