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सोमनाथ में गजनवी का गुणगान करने वाले इरशाद रशीद ने माँगी माफी: मौलाना के खिलाफ गुजरात पुलिस ने दर्ज किया केस

एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा गुजरात के सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त करके उसे लूटने वाले इस्लामी आक्रांता महमूद गजनी का गुणगान करता हुआ वीडियो वायरल होने के बाद अब गुजरात पुलिस हरकत में आ गई है। पत्रकार जनक दवे के अनुसार पुलिस ने मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज करते हुए पकड़ने की कोशिशें तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक मौलाना की पहचान हो गई है और उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

इस मुस्लिम शख्स की पहचान इरशाद रशीद के रूप में हुई है। वह 2016 से ‘जमाते आदिला हिंद’ नाम से एक इस्लामी यूट्यूब चैनल चला रहा है। कट्टरपंथी इस्लामवादी अतीत में कई बार हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने और सांप्रदायिक विद्वेष भड़काने के लिए अपने इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर चुका है।

इरशाद रशीद का यूट्यूब पेज (साभार: Janak Dave)

वायरल वीडियो में वो व्यक्ति ‘बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम’ से अपनी बात की शुरुआत करते हुए बताता है कि वो गुजरात के उस सोमनाथ मंदिर के पास आया हुआ है, जिसे कभी महमूद गजनवी और मोहम्मद इब्ने काजिम ने ‘फतह’ किया था। उसने मुस्लिमों को सलाह देते हुए कहा कि हमारे कारनामे रोशन बाग़ के अंदर लिखे हुए हैं और जरूरत है कि अभी वाली नस्ल अपने पूर्वजों के उन कारनामों को पढ़े, जैसे महमूद गजनवी ने दरिया को पार कर के पूरे हिंदुस्तान को ‘फतह’ किया था। उसने कहा कि आज का इतिहास भले ही उन्हें चोर-डाकू या जो भी कहे, लेकिन असली इतिहास उन्हें दीन और इस्लाम का प्रसार करने वाला बताया है।

महमूद गजनवी के महिमामंडन वाला इरशाद रशीद का वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने नाराजगी जताई और कट्टरपंथी इस्लामवादी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

रोष के बाद, रशीद ने आज अपने चैनल पर एक वीडियो मैसेज अपलोड किया। इसमें उसने वायरल हुए वीडियो के लिए माफी माँगी। रशीद का दावा है कि उसने उस वीडियो को उस समय रिकॉर्ड किया था जब वह 4 मई, 2019 को सोमनाथ मंदिर गया था। उसका कहना है कि छोटे वीडियो की शूटिंग के पीछे उनका उद्देश्य केवल हिंदू मंदिर की प्रशंसा करना था। उसने मीडिया और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स पर उसके पुराने वीडियो को विकृत करने और गलत ढंग से पेश कर उसे गलत दिखाने का आरोप लगाया।

इरशाद रशीद का वीडियो

इरशाद रशीद ने अपने वीडियो मैसेज में कहा, “मेरा इरादा भारतीयों या मेरे गुजराती भाइयों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना या हिंदू पूजा स्थल का अपमान करना नहीं था। चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या चर्च हो, यह सभी हमारे पूजा स्थल हैं। मेरा इरादा मंदिर का अपमान करने या किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं था।”

‘हाथ हमारे पास भी हैं और गिरेबान तुम्हारे पास’: वसीम रिजवी ने वीडियो जारी कर धमकाने वाले मौलानाओं को दी चेतावनी

शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयतों को हटाने के संबंध में याचिका दाखिल करने के बाद मुस्लिम समुदाय में गुस्सा इतना अधिक बढ़ गया है कि खुलेआम उनके सिर कलम करने पर इनाम देने की घोषणा कर दी।

इस बीच वसीम रिजवी ने मंगलवार (मार्च 16, 2021) को एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में रिजवी ने अपने खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर मौलानाओं पर निशाना साधा और कहा कि हाथ हमारे पास भी हैं और गिरेबान तुम्हारे पास, लेकिन हम नहीं चाहते कि माहौल खराब हो। 

वसीम रिजवी ने कहा, “मौलाना कल्बे जव्वाद, टीले वाली मस्जिद के इमाम और सुन्नी धर्मगुरु अब्दुल वली फारुकी अपने गुंडे भेजकर शियों के घरों पर गली-गलौच और इबादतगाह में तोड़फोड़ और बदतमीजी करवा रहे हैं, वो सही नहीं है। आपको लखनऊ शहर का माहौल खराब करने की इजाज़त किसी ने नहीं दी है।”

साभार- न्यूज़ 18

उन्होंने कहा, “मैंने अभिव्यक्ति की आज़ादी के तहत अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में रखी है, जिसमें मौलाना कल्बे जव्वाद भी पार्टी हैं। वो चाहें तो अपनी बात सुप्रीम कोर्ट में रख सकते हैं लेकिन सड़कों पर माहौल खराब करना यह गैर जिम्मेदाराना हरकत है। हाथ हमारे पास भी हैं और गिरेबान तुम्हारे पास भी है लेकिन हमने लखनऊ शहर का माहौल खराब करने की कोशिश नहीं की।”

बता दें कि तालकटोरा में स्थित कर्बला में बनी वसीम रिजवी की हयाती कब्र को तोड़ डाला गया है। इस संबंध में विरोध करने पर कर्बला के मुतवल्ली फैजी की जम कर पिटाई की गई। इस मामले में तालकटोरा थाने में मामला दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के बाद ही रिजवी ने वीडियो जारी किया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि अयोध्या की विवादित ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जानी चाहिए। शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन रिजवी ने कहा कि न सिर्फ़ अयोध्या बल्कि मथुरा और काशी सहित उन सभी 11 मस्जिदों को हिन्दुओं को सौंप दी जानी चाहिए, जो मुग़ल बादशाहों ने मंदिर तोड़ कर बनवाए थे। इसमें दिल्ली की क़ुतुब मीनार परिसर में स्थित मस्जिद सहित गुजरात की मस्जिदें भी शामिल हैं।

असम सरकार द्वारा नवंबर से राज्य में सरकारी मदरसों को बंद करने के फैसले का स्वागत करते हुए शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा था कि जब तक सब धर्म के बच्चे एक साथ बैठकर नहीं पढ़ेंगे तब तक कट्टरपंथी मानसिकता, इस्लाम के गलत प्रचार और दूसरे धर्मों से नफरत खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मदरसे पूरी तरह से बंद होने चाहिए और उन्हें स्कूलों में कन्वर्ट कर देना चाहिए। हर धर्म का सम्मान होना चाहिए।

हाल ही में मुरादाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता अमीरुल हसन जाफरी ने रिजवी का सर काट कर लाने पर 11 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि घोषित इनाम की व्यवस्था वह अपने पास से और बार एसोसिएशन के लोगों के माध्यम से एकत्र करेंगे और अगर इसके बाद भी रकम कम पड़ जाती है तो वो अपनी औलाद को बेच देंगे, लेकिन वसीम रिजवी का सिर क़लम करने वाले को पूरा इनाम देकर रहेंगे।

वीडियो: बुलेट पर लड़कियों का खतरनाक स्टंट पड़ा भारी, यूपी पुलिस ने काटा ₹11000 का चालान

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दो लड़कियों का बाइक पर खतरनाक स्टंट करता वीडियो वायरल हुआ है। इसमें एक लड़की बाइक चला रही है और एक उसके ऊपर बैठी है। बताया जा रहा है कि यह वायरल वीडियो गाजियाबाद के गोविंदपुरम क्षेत्र का है। बाइक पर गाजियाबाद आरटीओ रजिस्ट्रेशन नंबर होने की भी बात कही जा रही है। अब यही स्टंट लड़कियों को महँगा पड़ गया है।

वायरल हो रहे इस 12 सेकंड के वीडियो में दोनों दोनों युवतियाँ बुलेट पर सवार हैं। दोनों ने लाल रंग की टीशर्ट पहन रखी है और पीले रंग की टोपी भी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है इनकी टीशर्ट पर ए-प्लस जिम लिखा हुआ है।

वीडियो में एक लड़की बुलेट चलाती दिख रही है तो दूसरी उसके कंधे पर बैठी है। लड़कियाँ जहाँ से गुजर रही हैं उन्हें देखकर लोग हैरान होते दिख रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि जिस रोड पर स्टंट किया जा रहा है वहाँ से आम लोग भी गुजर रहे हैं। फिर भी ये लड़कियाँ बेखौफ होकर स्टंट कर रही हैं। जब पुलिस के संज्ञान में यह वीडियो आया तो ट्रैफिक पुलिस ने बुलेट का 11,000 रुपए का ई-चालान कर दिया। गाजियाबाद पुलिस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी भी दी है।

इस 11,000 के चालान में तीन अलग-अलग चालान हैं। पहला बिना हेलमेट लगाकर दोपहिया वाहन चलाने के लिए एक हजार का चालान। दूसरा बिना राज्य सरकार की अनुमति के बिना रेसिंग और ट्रायल ऑफ स्पीड के तहत पाँच हजार का चालान। तीसरा सेक्शन तीन और चार के तहत पाँच हजार का चालान। बुलेट का नंबर 14 ईएल 7054 है और यह एक महिला के नाम पर रजिस्टर है।

पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “तत्काल कार्रवाई अमल में लाते हुए उपरोक्त वाहन का ₹11000 का चालान किया गया। ट्रैफिक नियमों का पालन करें अपनी और दूसरों की जान को खतरे में न डालें।” इस वीडियो में बैकग्राउंड म्यूजिक भी सुना जा सकता है जिससे यह पता चलता है कि इन्हीं लड़कियों ने यह वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंंट पर डाला होगा ताकि सोशल मीडिया पर अपनी पहुँच बढ़ाई जा सके। 

सचिन वाजे पर ताबड़तोड़ खुलासे के बीच पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के समर्थन में चला ट्विटर कैंपेन, जानिए क्या है मामला?

सोमवार (मार्च 16, 2021) को मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को एंटीलिया बम कांड मामले में उनकी बेगुनाही का समर्थन करने के लिए सैकड़ों ट्वीट किए गए।

परमबीर सिंह के समर्थन में किया गया ट्वीट

इनमें से ज्यादातर ट्वीट्स में दावा किया गया कि परमबीर सिंह को ‘स्कॉर्पियो कार विवाद’ में ‘घसीटा’ गया।

परमबीर सिंह के समर्थन में किया गया ट्वीट

इनमें से किसी ने भी उल्लेख नहीं किया कि कैसे ‘स्कॉर्पियो कार’ वास्तव में विस्फोटक लदी थी और एंटीलिया, रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली।

परमबीर सिंह के समर्थन में किया गया ट्वीट

इन ट्वीट्स में दावा किया गया कि परमबीर सिंह को राजनीतिक लाभ के लिए विवाद में घसीटा गया।

परमबीर सिंह के समर्थन में किया गया ट्वीट

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों ने मुंबई पुलिस आयुक्त के कार्यालय से सफेद इनोवा कार बरामद की है। शक है कि 25 फरवरी को एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी स्कॉर्पियों खड़ी करने की घटना में एक सफेद इनोवा कार का भी इस्तेमाल किया गया था। इसी तरह का कैंपेन ‘टूलकिट’ मामले में भी चलाया गया था।

मराठी मीडिया आउटलेट साकाल के अनुसार, एनआईए के अधिकारियों ने सफेद इनोवा को मुंबई पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में ट्रेस किया है। करीब से देखने पर उन्होंने पाया कि यह वही सफेद इनोवा कार है, जिसका इस्तेमाल विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो के साथ किए जाने की आशंका है। जानकारी के मुताबिक इस कार पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ था।

इधर शिवसेना ने वाजे की गिरफ्तारी से आहत होकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के मुखपत्र सामना में जाँच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। लेख में वाजे के विरुद्ध हुए एक्शन को बदले की कार्रवाई कहा गया है।

सामना के हालिया लेख में एटीएस से मामला एनआईए को सौंपे जाने पर भी शिवसेना ने सवाल उठाए। उनका मत है कि इस गिरफ्तारी से भाजपा को ऐसा आनंद मिला है, जिसके वर्णन में शब्द कम पड़ जाएँगे। अपने तर्क को साबित करने के लिए इसमें अर्णब गोस्वामी का उदाहरण दिया गया है।

सामना के लेख के मुताबिक, सचिन वाजे बहुत समय से भाजपा की हिटलिस्ट में थे। इसलिए मुंबई पुलिस की जाँच पूरी होने तक केंद्रीय दस्ता रुकने को तैयार नहीं था। उनके अनुसार, देश में कश्मीर जैसी जगहों पर विस्फोटक मिलते हैं लेकिन क्या कभी जाँच एजेंसी का दस्ता वहाँ गया।

‘पानी तो बहाना है, मंदिर असली निशाना है’: महिलाओं के बाद अब बच्चों को बनाया जा रहा ढाल, नहीं कहेगा ‘सॉरी’ हिन्दू समाज

2018 का साल शुरू होते ही माहौल बनाया जाने लगा था कि मंदिरों में बलात्कार होते हैं क्योंकि जम्मू के कठुआ में एक मामले में मंदिर के पुजारी और उसके बेटे-भतीजे पर एक 8 साल की लड़की के रेप का आरोप लगा। हालाँकि, इस केस का एक आरोपित विशाल जंगोत्रा निर्दोष पाया गया। ग्रामीणों का कहना था कि लड़की के अपहरण के बाद मंदिर में छिपाया ही नहीं जा सकता। लेकिन, तब तक मंदिरों को बदनाम करने वाले इस काम में आगे निकल चुके थे।

हाल ही में मायावती की अनधिकृत बायोपिक कही जा रही फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ में ऋचा चड्ढा के मुख्य किरदार के माध्यम से दिखाया गया है कि मंदिरों में दलितों को प्रवेश नहीं दिया जाता है।अब जब देश के लाखों मंदिर बर्बाद हो चुके हैं, कइयों की मरम्मत के लिए रुपए नहीं हैं और जिनके पास हैं वो सरकार के पास चले जाते हैं – वामपंथी-इस्लामी गठजोड़ ने बचे-खुचे मंदिरों को बदनाम करने का ठेका ले लिया है।

बस यही ‘सॉरी आसिफ’ प्रकरण का सार है। बच्चे की जिस तरह से पिटाई की गई, उसका कोई समर्थन नहीं कर सकता। उसे डाँट कर वहाँ से भगाया जा सकता था या फिर पुलिस को सूचित किया जा सकता था। दो लोगों ने उसकी पिटाई कर दी और वीडियो वायरल हो गया। मामला गाजियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर का है। वीडियो वायरल होने के बाद स्वरा भास्कर सरीखे सेलेब्रिटीज ने इस ट्रेंड में भागीदारी सुनिश्चित की।

कठुआ वाले मामले के बाद भगवान शिव के त्रिशूल पर कंडोम की तस्वीर बना कर वायरल किया गया था। अबकी बाबासाहब भीमराव आंबेडकर द्वारा एक बच्चे को चुल्लू से पानी पिलाने की तस्वीर वायरल कर लिखा गया कि यहाँ पानी पीने का संघर्ष पुराना है। इसकी तुलना कथित जमींदारी प्रथा से कर के दलितों को हिन्दुओं से अलग दिखा कर मुस्लिमों के साथ उनकी एकता प्रदर्शित की है। ‘भीम आर्मी’ जैसे दलों के नेता आसिफ से मिलने पहुँचने लगे।

‘भीम आर्मी’ वाले मीडिया के सामने आकर बोलने लगे कि दलितों का मंदिरों में प्रवेश पहले से ही वर्जित है। जबकि वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि नाबालिग आसिफ मंदिर के भीतर पानी पीने क्यों आया जब बाहर आसपास कई नल थे? मंदिर में कई बार डकैती हो चुकी है। एक हिन्दू नेता की हत्या हो गई थी। एक महंत को जान की धमकी मिलती रहती है। ऐसे में एक मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाके में एक भी ऐसी मस्जिद नहीं थी, जहाँ आसिफ पानी पी पाता?

क्या मंदिर प्याऊ हैं, जहाँ कोई भी आकर पानी पी ले? मंदिर में आने के कुछ तय नियम-कानून होते हैं। वहाँ लोग स्नान करने के बाद भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं। मंदिर प्रशासन के कायदों के हिसाब से चीजें होती हैं। क्या कल को आसिफ को शौच लग जाए तो वो किसी दूसरे मजहब या धर्म के पवित्र स्थल में कर देगा और बाद में इसे ‘स्वच्छ भारत’ से जोड़ दिया जाएगा? आसिफ को अगर किसी ने भेजा था, तो उसका पता लगाया जाना चाहिए।

एक नाबालिग के नाम पर राजनीति नई नहीं है। शाहीन बाग़ आंदोलन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस तरफ लोगों का ध्यान दिलाया भी था कि कैसे पुरुष खुद रजाई में सो रहे हैं और महिलाओं को सड़क पर भेज दिया गया है। बिलकिस दादी से लेकर कई महिलाओं की तस्वीरें वायरल की गईं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी तस्वीरें बिकती हैं। महिलाओं, खासकर बुजुर्गों, के नाम पर सहानुभूति आती है।

JNU में ऐसे ही एक दिव्यांग छात्र को आगे कर के पोस्टर बॉय बना दिया गया था और उसके बहाने दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा गया था। हाल ही में हजारीबाग की तस्वीर वायरल हुई, जहाँ करीब एक दर्जन बच्चों को सड़क पर नमाज पढ़ने भेज दिया गया और उनका स्पीड ब्रेकर की तरह उपयोग किया गया। बसों से लेकर बाइक्स तक रुके रहे। अगर बच्चों की गलती नहीं है तो उन्हें आगे कर के कौन प्रोपेगंडा की फसल काटना चाह रहा है?

आखिर क्यों सॉरी आसिफ? ये बात उसके अम्मी-अब्बू कहें, जिन्होंने उसे सिखाया नहीं कि मंदिर में बिना मतलब घुस कर कुछ भी नहीं शुरू कर देते। ये बात वहाँ का मुस्लिम समाज कहे जिन्होंने मस्जिदों में पानी पीने की व्यवस्था नहीं की। अगर की, तो आसिफ को बताया नहीं। आसिफ को सॉरी वो सेलेब्रिटीज बोलें, जिन्हें लगता है कि मंदिरों ने उनकी कमाई खा ली है और उन्हें वही सब करना चाहिए, जैसा बॉलीवुड के लोग चाहते हैं।

हिन्दू शर्मिंदा नहीं होगा क्योंकि ये मामले प्यास और पानी से जुड़ा ही नहीं हुआ है। हिन्दू सॉरी इसीलिए नहीं बोलेंगे, क्योंकि कश्मीर में उनके नरसंहार के बाद भी बॉलीवुड का एक डायरेक्टर कहता है कि अपना नरसंहार करने वालों को ही सॉरी बोलो। हिन्दुओं को कोई सॉरी बोलने को इसीलिए न कहे, क्योंकि डासना में जो हुआ वो एक स्थानीय मारपीट थी जिसे सांप्रदायिक रंग देकर मंदिर को बदनाम करने वाला नैरेटिव गढ़ा गया।

उस मंदिर में अक्सर मुस्लिम समाज के लोग आते हैं और हिन्दू बहू-बेटियों के साथ छेड़खानी करते हैं – ऐसा वहाँ के स्थानीय लोगों और महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का भी कहना है। जब निर्भया मामले में एक नाबालिग बलात्कार कर सकता है तो फिर क्या जहाँ इस तरह की घटनाएँ आम हैं, वहाँ के लोग ऐसे किसी लड़के पर उसकी हरकतों को देख कर शक नहीं कर सकते? 15 साल का लड़का पढ़ा-लिखा भले न हो, उसे आसपास की समझ तो होती है।

दोनों पक्षों के सामने आने से पहले ही ‘सॉरी आसिफ’ ट्रेंड होने लगता है, मीडिया उसका इंटरव्यू लेने लग जाता है, ‘भीम आर्मी’ उसके घर पहुँच जाती है और मंदिरों के विरोध में प्रोपेगंडा फैलाया जाता है – क्या ये सब कुछ ही देर में अचानक हो गया? इस पूरे प्रकरण में दूसरे पक्ष की एक ही गलती है कि उसने लड़के की पटाई की। ये नहीं होना चाहिए था। जैसा कि महंत यति ने सवाल पूछा – मंदिरों में डकैती होती थी तब वामपंथी मीडिया पोर्टल्स कहाँ थे?

ऐसे कृत्यों से सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है। राम मंदिर को उन्होंने घृणा का प्रतीक साबित करने की लाख कोशिशें की, लेकिन जनभावनाओं के आगे सफल नहीं हो पाए। इसीलिए, अब किसी भी मंदिर, संत या हिन्दू एक्टिविस्ट को लेकर पूरे समुदाय को शर्मिंदा महसूस करने का ज्ञान दिया जा रहा है। नहीं, हिन्दू सॉरी नहीं बोलेगा। हिन्दू समुदाय शर्मिंदा नहीं है। आसिफ को उसके परिवार और मुस्लिम समाज सॉरी कहे, जिन्होंने उसे सिखाया नहीं कि मंदिर के नियम-कायदे क्या होते हैं।

विस्फोटक भरी स्कॉर्पियो चोरी नहीं हुई, सचिन वाजे करते थे इस्तेमाल; ड्राइवर पुलिस फोर्स में तैनात: एंटीलिया मामले में बड़ा खुलासा

एंटीलिया बम मामले में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। टीवी 9 मराठी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एंटीलिया के बाहर मिली विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो कार कभी चोरी नहीं हुई, बल्कि सहायक पुलिस अधिकारी सचिन वाजे द्वारा इस्तेमाल की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, कार चोरी नहीं हुई थी बल्कि सचिन वाजे द्वारा इस्तेमाल की जा रही थी। मराठी वर्नाक्यूलर मीडिया आउटलेट के हवाले से सूत्रों ने बताया कि कार का इस्तेमाल वाजे ने किया था, और उसने हिरेन को चोरी होने की झूठी शिकायत दर्ज करने के लिए कहा था। एनआईए का मानना है कि कार के मालिक पर अपनी लापता कार के बारे में शिकायत दर्ज करने के लिए दबाव डाला गया था। स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन ने विक्रोली पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

यह भी बताया जा रहा है कि वाजे फर्जी नंबर प्लेट बनाने के लिए एक स्थानीय दुकान में गया था। उन्होंने दो कारों- स्कॉर्पियो और इनोवा के लिए फर्जी नंबर प्लेट्स बनाईं, जो कि अंबानी निवास के बाहर पाई गईं। सूत्रों ने बताया कि स्कॉर्पियो को स्कूटर की नंबर प्लेट के साथ लगाया गया था।

जानकारी के मुताबिक अंबानी के आवास के बाहर मिली दो कारों के ड्राइवर पुलिस बल में काम कर रहे हैं। टीवी 9 मराठी के सूत्रों के अनुसार, इनोवा और स्कॉर्पियो दोनों के ड्राइवर पुलिस फोर्स में काम कर रहे हैं और दागी पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के संपर्क में थे।

मामले में एक और खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि वाजे की सोसाइटी का जो सीसीटीवी फुटेज गायब हुआ था, वो किसी और ने नहीं बल्कि दागी पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने ही गायब किया था। टीवी 9 मराठी की रिपोर्ट के अनुसार कथित तौर पर वाजे ने यह कहते हुए अपनी सोसाइटी का सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिया कि पुलिस द्वारा आधिकारिक उपयोग के लिए DVR की आवश्यकता है। बाद में फुटेज को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाजे ने कथित तौर पर वीडियो फुटेज जब्त कर ली थी ताकि पूछताछ के दौरान कोई सबूत न मिले।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वाजे ने वीडियो फुटेज प्राप्त करने के लिए अपने दोस्त के नाम पर सोसाइटी को एक पत्र लिखा था। पत्र फिलहाल एनआईए के कब्जे में है। सूत्रों ने कहा कि पत्र में अंबानी मामले की जाँच के लिए फुटेज की जरूरत थी और वाजे ने हस्ताक्षर किए थे।

एनआईए द्वारा शुरुआती जाँच में, यह कथित तौर पर पाया गया है कि वाजे ने सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करने की कोशिश की थी। यह भी पता चला है कि वाजे ने न सिर्फ सीसीटीवी फुटेज को बल्कि सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर को भी नष्ट करने की कोशिश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई डीवीआर जो वाजे के कब्जे में थे, क्षतिग्रस्त हालत में पाए गए हैं।

गौरतलब है कि एंटीलिया केस की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए पुलिस अफसर सचिन वाजे को सस्पेंड कर दिया गया है। मुंबई पुलिस ने सोमवार (मार्च 15, 2021) को वाजे को सस्पेंड कर दिया। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस के आदेश से सचिन वाजे का निलंबन हुआ है। फिलहाल सचिन वाजे 25 मार्च तक एनआईए की हिरासत में है। उस पर एंटीलिया केस का सूत्रधार होने के आरोप हैं।

श्रीलंका में बुर्का और 1000 मदरसों पर पाबंदी की तैयारी से भड़का पाकिस्तान: विभाजनकारी कदम बताते हुए मानवाधिकार का दिया हवाला

पाकिस्तान ने श्रीलंका में बुर्का पर प्रतिबंध और एक हजार मदरसों को बंद करने की सिफारिश को ‘विभाजनकारी’ बताया है। इसके साथ ही पाकिस्‍तान ने श्रीलंका को चेतावनी भी दी है। श्रीलंका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की निंदा की है। कहा है कि सुरक्षा के नाम पर उठाए जाने इस तरह के विभाजनकारी कदमों से मुस्लिमों की भावनाएँ आहत होंगी। साथ ही अल्पसंख्यकों के मूलभूत अधिकारों का हनन होगा। 

श्रीलंका में पाकिस्तानी उच्चायुक्त साद खट्टाक (Saad Khattak ) ने कहा, “बुर्का बैन से श्रीलंका और दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएँ आहत होंगी। कोरोना महामारी की वजह से श्रीलंका पहले ही आर्थिक मुश्किलों में घिरा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी श्रीलंका को अपनी छवि को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे दौर में, आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, सुरक्षा के नाम पर इस तरह के विभाजनकारी कदम उठाने से देश में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों को लेकर सवाल और बढ़ेंगे।”

श्रीलंका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त साद खट्टाक की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब तीन दिन पहले श्रीलंका के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री सरत वीरासेकेरा (Sarath Weerasekera) ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कैबिनेट मंत्रियों से बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की मंजूरी देने की माँग के लिए शुक्रवार (मार्च 12, 2021) को एक पत्र पर हस्ताक्षर किए।

सरत वीरासेकेरा ने बताया, “हमारे शुरुआती दिनों में मुस्लिम महिलाएँ और लड़कियाँ बुर्का नहीं पहनती थीं। यह मजहबी अतिवाद का प्रतीक है जो हाल में ही सामने आया है। हम इसे निश्चित तौर पर बंद कर देंगे।” उल्लेखनीय है कि बौद्ध बहुल देश में चर्च और होटलों पर 2019 में हुए आतंकी हमलों के बाद बुर्का पहनने पर अस्थायी तौर पर पाबंदी लगा दी गई थी। इन हमलों में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

विरासेकेरा ने कहा कि सरकार की योजना 1000 से ज्यादा ऐसे मदरसों को बंद करने की भी है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी स्कूल खोल कर बच्चों को वह नहीं पढ़ा सकता जो वह पढ़ाना चाहता है।”

2 मई के बाद TMC गुंडों को चुन-चुन कर सजा: बंगाल में CM योगी, कहा – मंदिर से डरने वाले कर रहे चंडी पाठ

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को मोर्चे पर उतार दिया है। उन्होंने मंगलवार (मार्च 16, 2021) को पुरुलिया में जनसभा को सम्बोधित किया, जिसके बाद बाँकुरा और मेदिनीपुर में उनकी जनसभा होनी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस दौरान TMC और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले ये लोग मंदिर में जाने से डरते थे लेकिन अब ममता दीदी भी मंदिर में जाकर चंडी पाठ कर रही हैं।

उन्होंने लोगों को ध्यान दिलाया कि अब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी मंदिर-मंदिर जाकर मत्था टेक रहे हैं। रैली में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल के गुंडे कानून को नहीं मानते हैं।

CM योगी ने आगे कहा कि दो मई के बाद TMC की विदाई तय है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के गुंडों को दो मई के बाद चुन-चुन कर सजा दी जाएगी। उन्होंने बंगालवासियों से कहा कि वो राम और कृष्ण की धरती से आए हैं। उन्होंने कहा:

“बंगाल हमेशा से परिवर्तन की धरती रही है। बंगाल ने देश को राष्ट्रगान भी दिया और वंदे मातरम भी दिया है। यहाँ अराजकता का दौर खत्म होने जा रहा है और भाजपा के आते ही अराजकता को रफा-दफा कर दिया जाएगा। राहुल गाँधी ने भी आजकल मंदिर में जाना शुरू कर दिया है लेकिन उन्हें मंदिर में बैठना तक नहीं आता। अब वो भी मंदिर में माथा टेक रहे हैं।”

उन्होंने ममता बनर्जी के ‘जय श्री राम’ नारे से चिढ़ने पर भी चुटकी ली।

पुरुलिया में योगी आदित्यनाथ की जनसभा

उन्होंने कहा, “2019 में जब यहाँ आया था तो मेरे हेलिकॉप्टर को उतरने नहीं दिया गया था। तब मैं झारखंड में हेलिकॉप्टर उतार कर 35 किलोमीटर सड़क मार्ग से बंगाल में पहुँचा था। मैंने उसी समय तय कर लिया था कि मैं पुरुलिया से चुनाव प्रचार का शुभारंभ करूँगा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सभा में लोगों को आने से रोका जा रहा है और उन्हें कहा गया कि यहाँ भीड़ नहीं होगी, लेकिन अब सभी बंधनों को तोड़ कर लोग यहाँ पर आ गए हैं। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अस्पताल से निकलने के बाद अब ताबड़तोड़ रैलियाँ शुरू कर दी हैं।

ममता बनर्जी ने बाँकुरा में कहा कि मैं रोज 25-30 किलोमीटर चलती हूँ, लेकिन अभी खड़ी होकर भी नहीं बोल पा रही हूँ। उन्होंने कहा कि जिसके पाँव में चोट लगती है, वही समझता है। पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने को कहा था। लेकिन उनका कहना है कि अगर वो सोती रहीं तो भाजपा जनता को जो दर्द देगी, वो असहनीय होगा।

तोड़ी हयाती कब्र, हर जिले में होगी FIR: कुरान के खिलाफ SC जाने वाले वसीम रिजवी, जिनसे परिवार ने भी तोड़ा नाता

कुरान की 26 आयतों को ‘हिंसक’ बता कर उन्हें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने के खिलाफ हर जिले में FIR दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। पसमांदा मुस्लिम समाज ने भी उनके बयान का विरोध किया है। समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने कहा कि कुरान-ए-पाक की आयतों को हटाने की माँग करने का अर्थ है इस्लाम से बगावत।

अनीस मंसूरी ने कहा कि जो कुरान की सत्यता और पवित्रता पर शक करते हैं, उनका इस्लाम से कोई लेनादेना नहीं। उन्होंने बताया कि उनका संगठन हर जिले में वसीम रिजवी के खिलाफ इस्लाम को बदनाम करने और माहौल बिगाड़ने की साजिश के तहत FIR दर्ज कराएगी।

तालकटोरा में स्थित कर्बला में बनी वसीम रिजवी की हयाती कब्र को तोड़ डाला गया है। इस संबंध में विरोध करने पर कर्बला के मुतवल्ली फैजी की जम कर पिटाई की गई। इस मामले में तालकटोरा थाने में मामला दर्ज कर के आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले वसीम रिजवी एक शिया मुस्लिम हैं। उनके पिता रेलवे में कर्मचारी थे, जिनकी मौत तभी हो गई थी, जब वसीम 6ठी कक्षा में थे। रिजवी अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनकी माँ ने सभी भाई-बहनों का पालन-पोषण किया। अब उनके छोटे भाई ने कहा है कि परिवार का वसीम से कोई लेनादेना नहीं।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NMC) ने वसीम रिजवी से बिना शर्त माफ़ी माँगने को कहा है। NCM ने उन्हें नोटिस भेजी है। संस्था के उपाध्यक्ष आतिफ रसीद ने कहा कि उन्होंने काफी भड़काऊ, आपत्तिजनक और पूर्वग्रह से ग्रसित बयान दिया है। संस्था ने कहा कि उनका बयान एक विशेष समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है और शांति-व्यवस्था में बाधक है। 4 लोगों की शिकायत के बाद ये नोटिस भेजी गई।

नगर निगम का चुनाव लड़ने का फैसला करने के बाद वसीम रिजवी की राजनीति में एंट्री हुई और फिर उन्होंने शिया वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य से लेकर अध्यक्ष पद तक का सफर तय किया। रिजवी ने बाबरी ढाँचा को हिंदुस्तान की धरती पर कलंक बताया था और 9 विवादित मस्जिदें हिन्दुओं को देने की बात कही थी।

वसीम रिजवी वही हैं, जिन्होंने चाँद-तारे वाले झंडे को इस्लाम का नहीं, मुस्लिम लीग का झंडा बताया था। उन्होंने कहा था कि मोहम्मद साहब अपने कारवाँ में काले और हरे झंडों का प्रयोग करते थे।

उन्होंने इस्लामी मदरसों को बंद कर देने की माँग करते हुए कहा था कि वहाँ आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है। उन्होंने कहा था कि मदरसों में आतंकी ट्रेनिंग दी जाती है और आधुनिक शिक्षा से उसका कोई वास्ता नहीं।

मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या पर टिप्पणी करते हुए वसीम रिजवी ने कहा था कि जानवरों की तरह बच्चे पैदा करने से देश का नुकसान होता है। अब उन्होंने कहा है कि कुरान पढ़ाने से हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है।

हाल ही में मुरादाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता अमीरुल हसन जाफरी ने रिजवी का सर काट कर लाने पर 11 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि घोषित इनाम की व्यवस्था वह अपने पास से और बार एसोसिएशन के लोगों के माध्यम से एकत्र करेंगे और अगर इसके बाद भी रकम कम पड़ जाती है तो वो अपनी औलाद को बेच देंगे, लेकिन वसीम रिजवी का सिर क़लम करने वाले को पूरा इनाम देकर रहेंगे।

‘अलहमदुलिल्लाह! हमारे पूर्वजों ने हिंदुस्तान फतह किया’: गजनवी का गुणगान करते मुस्लिम व्यक्ति ने सोमनाथ में बनाया वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति गुजरात के सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर के उसे लूटने वाले इस्लामी आक्रांता महमूद गजनी का गुणगान करता दिख रहा है। सोमनाथ मंदिर से कुछ ही दूर पर स्थित एक बीच पर जाकर उक्त व्यक्ति ने ये वीडियो खुद ही बनाया है। लोगों ने गुजरात पुलिस को आगाह किया है कि ये हमारे मंदिरों पर खतरे की धमकी भी हो सकती है।

इस वीडियो में वो व्यक्ति “बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम” से अपनी बात की शुरुआत करते हुए बताता है कि वो गुजरात के उस सोमनाथ मंदिर के पास आया हुआ है, जिसे कभी महमूद गजनवी और मोहम्मद इब्ने काजिम ने ‘फतह’ किया था। इसके बाद वो कैमरे को मंदिर की तरफ घूमा कर दिखता है कि सामने ही मंदिर नजर आ रहा है। बीच पर कई अन्य लोग भी टहलते हुए दिख रहे हैं। वो बताता है कि इसी दरिया से मोहममद इब्ने काजिम की फ़ौज आई थी।

वो व्यक्ति उस वीडियो में कहता है, “ये दरिया पाकिस्तान से भी जुड़ता है। ये वही सोमनाथ मंदिर है जिसे आप देख रहे हैं, जिसे महमूद गजनवी ने तबाह किया था। उसका इतिहास आप पढ़ते हैं। मुस्लिमों का जो इतिहास है, वो काफी उज्ज्वल इतिहास है। हमें किसी के सामने दबने या झुकने की ज़रूरत नहीं है। अलहमदुलिल्लाह हमारे पूर्वजों ने बड़े-बड़े कारनामे किए थे। हमें उन कारणों को खुद भी पढ़ना चाहिए और दूसरों को भी पढ़ाना-दिखाना चाहिए।”

उसने मुस्लिमों को सलाह देते हुए कहा कि हमारे कारनामे रोशन बाग़ के अंदर लिखे हुए हैं और जरूरत है कि अभी वाली नस्ल अपने पूर्वजों के उन कारनामों को पढ़े, जैसे महमूद गजनवी ने दरिया को पार कर के पूरे हिंदुस्तान को ‘फतह’ किया था। उसने कहा कि आज का इतिहास भले ही उन्हें चोर-डाकू या जो भी कहे, लेकिन असली इतिहास उन्हें दीन और इस्लाम का प्रसार करने वाला बताया है।

साथ ही उसने एक शेर भी पढ़ा – ‘दूर बैठा कोई तो दुआएँ देता है, मैं डूबता भी हूँ तो समंदर उछाल देता है।’ उसने अंत में सोमनाथ मंदिर की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि ये मंदिर यहाँ से आधा किलोमीटर दूर ही है और वो वहाँ भी गया था। बता दें कि महमूद गजनवी एक लुटेरा था, जिसने भारत के मंदिरों के धन को देख कर यहाँ 17 बार हमला किया था। उसने सोमनाथ मंदिर को तबाह कर दिया था।

आज़ादी के बाद केएम मुंशी और सरदार पटेल के प्रयासों से सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। जब सरदार पटेल के प्रयासों के बाद मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसके उद्घाटन के लिए निमंत्रण भेजा गया, जिस पर नेहरू बिफर गए। उन्होंने डॉक्टर प्रसाद को पत्र लिख कर कहा था कि वो किसी ‘संप्रदाय को बढ़ावा देने’ वाले कार्यक्रम में शामिल न हों। पत्र-पत्रिकाओं में इससे जुड़ी खबरें छपने ही नहीं दी गईं।