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हिन्दुओं की दाढ़ी पर खार: वह तकलीफ जो उन दिनों मुग़लों को थी, आज मोदी-विरोधियों को है

इन दिनों प्रधानमंत्री मोदी की दाढ़ी को लेकर विरोधियों में बड़ी हाय-तौबा मची हुई है। मुद्दा कोई भी हो, उसे मोदी की दाढ़ी से जोड़ा जाना मानो अनिवार्य सा हो गया है। बस्तर से कॉन्ग्रेसी सांसद दीपक बैज ने जीडीपी के मुद्दे को इसके साथ जोड़ दिया, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने बंगाल-चुनाव के साथ तो वहीं तेजप्रताप यादव ने पेट्रोल के दामों के साथ। इतना ही नहीं बरखा दत्त और शशि थरूर के एक इंटरव्यू एवं पाकिस्तानी न्यूज़-चैनलों की कुछ डिबेट्स में भी मोदी की बढ़ती हुई दाढ़ी पर ‘गंभीर चर्चा’ हो चुकी है।

वैसे दाढ़ी-मूँछ रखना, नहीं रखना या कितनी रखनी है, यह विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत मसला है और राजनीतिक चर्चा में इसकी कोई जगह नहीं बनती। फिर भी, जब कई लोगों की बदहजमी का कारण मोदी की बढ़ती हुई दाढ़ी ही है, तो हमारे लिए इतिहास की गहराइयों में जाकर इस विषय को भी गंभीरता से समझना जरूरी हो जाता है।

केश और दाढ़ी रखना, यह भारत में अनादि काल से हिन्दू साधु-सन्यासियों की परंपरा रही है। गुरु गोबिंद सिंह ने भी जब खालसा-पंथ की घोषणा की तो ‘पाँच ककारों’ में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया गया था। इसी कारण मध्यभारत के इतिहास में एक समय ऐसा भी आया जब पंजाब के आसपास के विस्तार में सिखों एवं हिन्दुओं की एकता में ‘दाढ़ी-मूँछ’ एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई थी जिस पर मुग़ल खूब खार खाते थे।

सिख धर्म के उदय में भले ही हिन्दू-मुस्लिम एकता का उदारवादी दृष्टिकोण था लेकिन सिखों को भी ‘काफिरों’ की संज्ञा मिलने में देर न लगी। सिख गुरुओं की हत्याएँ, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबज़ादों को जिंदा दीवार में चुनवा देने की घटना एवं गुरु के अनुयायियों पर दमन यह सब उसी ‘मुसलमान बनाम काफ़िर’ की सोच का ही नतीजा था।

जब गुरु गोबिंद सिंह ने देखा कि इस्लाम के नाम पर हिन्दुओं एवं सिखों को काफिर बताकर खूब अत्याचार ढाये जा रहे हैं तब उन्होंने एक हिन्दू सन्यासी ‘लछमनदास’ को उन अत्याचारियों को दण्डित करने का जिम्मा दिया और उसे एक नया नाम दिया ‘बंदा’। वही बंदा जिसे मुस्लिम इतिहासकारों ने ‘इस्लाम के दुश्मन’ के रूप में वर्णित किया है।

सिख धर्म में बंदा की भूमिका एक सेनानायक की तौर पर देखी जा सकती है, जिसके काल में मुसलमानों में यह बात घर कर गई थी कि यदि बंदा जीत गया तो वे सब बर्बाद हो जाएँगे! बची-खुची कसर वजीर खान ने पूरी कर दी, जिसने मुल्ला-मौलवियों को राजी किया कि वे काफिरों के खिलाफ जंग छेड़ दें। यूँ तो बंदा का आंदोलन किसानों से जुडी एक क्रांति थी लेकिन मुसलमान शासकों के संरक्षण में पले-बड़े मस्लिम इतिहासकारों ने इस क्रांति को भी ‘इस्लाम विरोधी जिहाद’ साबित किया हुआ है।

खुशवंत सिंह अपनी किताब ‘सिखों का इतिहास’ में बंदा के विषय में लिखते हैं कि ‘यमुना से लेकर रावी और उसके पार, अगर किसी आदमी का जोर था, तो वह बंदा ही था और अगर किसी सत्ता की इज्जत थी, तो वह किसान फौजें (बंदा की फौजें) ही थी। सौभाग्यशाली दिनों में अगर बंदा ने थोड़ा और जोखिम उठाया होता, तो उसने दिल्ली और लाहौर को भी फतह कर लिया होता और इतिहास की पूरी दिशा ही बदल दी होती।’

मुगल इतिहासकार खफी खान तत्कालीन स्थिति पर लिखता है कि ‘इन काफिरों ने नया शासन चलाया, सिर और दाढ़ी के बाल काटने से मनाही कर दी। इस पथभ्रष्ट पंथ के विद्रोह और तबाही को शहंशाह की जानकरी में लाया गया जिससे उन्हें खासी ‘तकलीफ’ हुई।

सिखों के इतिहास पर यदि गौर करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि सिख आंदोलन को हिंदुओं के बहुत बड़े बहुमत का सहयोग प्राप्त न होता तो कदाचित यह धर्म आज की वर्तमान स्थिति में नहीं पहुँच पाता। गौर करें तो इस्लाम के हमलों के खिलाफ यह हिंदुओं का प्रतिरोध ही था, जिसने सिख आंदोलन को सफल बनाया। ‘बहादुर शाहनामा’ से ज्ञात होता है कि चूँकि बंदा की क्रांति को हिन्दुओं को पूर्ण समर्थन था, इसी के खार में 1710 के सितंबर महीने में उसने हिन्दुओं को दाढ़ी बनाकर ही रहने की एक घोषणा जारी कर दी।

अब इतिहास के इसी वाकए को वर्तमान परिदृश्य के साथ जोड़कर देखें तो मोदी के दाढ़ी बढ़ाने पर विरोधियों को तकलीफ क्यों है, बखूबी समझा जा सकता है।

नोट: यह लेख अभिषेक सिंह राव द्वारा लिखा गया है

श्वेता के बाद मस्जिद का मौलवी भूला माइक बंद करना? खर्राटों की आवाज़ वाला वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर अक्सर अजीबोगरीब चीज़ें वायरल होती हैं, और फिर उसे हास्य का विषय बनते भी देर नहीं लगती। इसका सबसे हालिया उदाहरण है ज़ूम (Zoom) पर चल रही क्लास का वीडियो, जिसमें श्वेता नाम की लड़की माइक बंद करना भूल जाती है। इसी कड़ी में अब एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सुनाई दे रही आवाज को कथित तौर पर मस्जिद में माइक खुला छोड़कर सो रहे मौलवी के खर्राटों की आवाज बताया जा रहा है।

इस वीडियो को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि मौलवी मस्जिद का माइक बंद करना भूल गया। फिर क्या था; रात भर आस-पास के लोग मौलवी के खर्राटे की आवाज सुनाते रहे। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तमाम प्रकार की प्रतिक्रियाएँ देखने के लिए मिल रही हैं।

एक ट्विटर यूज़र द्वारा साझा किए गए इस वीडियो को अब तक लगभग 50 हज़ार लोग देख चुके हैं। इसके अलावा, वीडियो पर 2903 लाइक्स और 783 रीट्वीट हैं। लगभग 14 सेकेंड के इस वायरल वीडियो के कैप्शन में लिखा है, “मौलवी साहब माइक ऑन करके सो गए।” वीडियो में साफ़ तौर पर सुना जा सकता है मौलवी सो रहा है और उसके खर्राटों की आवाज़ दूर दूर तक सुनाई दे रही है।

सोशल मीडिया की आबादी ने इस मौके का फ़ायदा उठाने में बिलकुल देरी नहीं की। नेटिज़न्स ने इस वीडियो और वीडियो में सुनाई देने वाले मौलवी के खर्राटों की भरपूर मौज ली। फ़िलहाल इस वीडियो में बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं उपलब्ध हो पाई है कि ये कहाँ और कब का है, लेकिन नेटिज़न्स इस वीडियो पर जमकर मीम्स बना रहे हैं। 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा कि काफी समय बाद मैंने इतनी मज़ाकिया चीज़ देखी है। 

वहीं एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “आस्था की पराकाष्ठ नींद में भी परवरदिगार की इबादत। नतमस्तक।” 

एक यूज़र ने तो इस वीडियो को श्वेता वाले मीम से ही जोड़ दिया,  

एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा, “भाई जितने बार सुन रहा हूँ इतनी बार हँसी आ रही है। 

इस ट्विटर यूज़र ने कहा, “अल्लाह ऐसी सुकून की नींद सब को फ़रमाए।”

मंदिरों के खुलने से बढ़ रहा महाराष्ट्र में कोरोना: शिवसेना ने भाजपा पर लगाया आरोप

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अब वहाँ की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना ने इसके लिए राज्य में विपक्ष में बैठी भाजपा (BJP) को ही जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए भाजपा को राज्य में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने कहा है कि मंदिरों के खुलने और BJP की ‘मंदिर राजनीति’ की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए हैं।

शिवसेना ने कहा कि विपक्षी दल भाजपा के दबाव के कारण मंदिरों को खोलने का निर्णय लिया गया। महाराष्ट्र में स्थिति दिन पर दिन बदतर होती जा रही है और प्रतिदिन कोरोना के 6000 से भी अधिक मामले सामने आ रहे हैं। राज्य में कोरोना के कुल 44,765 सक्रिय मामले है। केरल 59,817 मामलों के साथ अब भी देश भर में नंबर-1 पर बना हुआ है और वहाँ भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।

महाराष्ट्र में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 20,87,632 मामले सामने आए हैं, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। इसके बाद 10,25,938 मामलों वाले केरल का नंबर आता है। आप देख सकते हैं कि पहले और दूसरे स्थान पर काबिज इन राज्यों के बीच दोगुने का फासला है। महाराष्ट्र में अब तक कोरोना ने 51,713 लोगों की जान ली है। जानने वाली बात ये है कि दूसरे किसी भी राज्य में इस संक्रमण से इसके एक चौथाई लोग भी नहीं मरे हैं।

ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र टेस्टिंग के मामले में सबसे आगे है, क्योंकि उत्तर प्रदेश 3 करोड़ टेस्टिंग के साथ नंबर-1 पर काबिज है और इस मामले में महाराष्ट्र पाँचवें नंबर पर आता है जहाँ 1.6 करोड़ टेस्टिंग हुई है। सीएम उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि मास्क पहनना ही कोरोना के खिलाफ एकमात्र ढाल है। भाजपा विधायक आशीष सेलार ने पूछा है कि आखिर ऐसी स्थिति कैसे आई कि राज्य में दोबारा लॉकडाउन लगाने की बातें हो रही हैं?

महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री बच्चू कडु दूसरी बार कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इससे पहले सितम्बर 2020 में भी उन्हें कोरोना हुआ था। अमरावती जिले के आँचलपुर के विधायक ने उनसे सभी से टेस्ट कराने की अपील की है, जो उनके संपर्क में आए। राज्य के दो अन्य मंत्री राजेश टोपे और जयंत पाटिल को भी कोरोना हो गया है। मार्च के पहले हफ्ते के आसपास राज्य में बजट भी आना है, ऐसे में समस्या गंभीर हो गई है।

ज्ञात हो कि महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार (फरवरी 18, 2021) को कोरोनो वायरस मामलों में एक बार फिर उछाल आने के बाद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लॉकडाउन सहित नए कोरोना दिशानिर्देशों की घोषणा की। तीन दिन पहले ही अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के 700 नए मरीज सामने आए थे। इसके बाद महाराष्ट्र में सख्ती बढ़ा दी गई है। बीएमसी ने सार्वजनिक रूप से मास्क के बिना पाए जाने पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

कॉन्ग्रेस नेता के ‘नाचने-गाने वाली’ बयान पर कंगना ने कहा- मैं हड्डियाँ तोड़ने वाली राजपूत हूँ, I don’t shake a*s

मध्य प्रदेश स्थित बैतूल में कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद सुखदेव पानसे ने अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर एक विवादित बयान दिया है। कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री पानसे ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को ‘नाचने-गाने वाली’ कहा है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थक सुखदेव पानसे कृषि क़ानून और महँगाई को लेकर ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट पहुँचे थे। इस दौरान पूर्व सांसद ने ये विवादित बयान दिया। 

सुखदेव पानसे ने कहा, “कंगना जैसी नाचने-गाने वाली महिला ने किसानों के सम्मान को ठेस पहुँचाई है। कंगना ने मध्य प्रदेश के किसानों का भी अपमान किया है। प्रदेश की पुलिस ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की है। जब कॉन्ग्रेस किसानों के सम्मान में खड़ी होती है उस पर लाठी चार्ज किया जाता है। पुलिस को कंगना की कठपुतली की तरह काम नहीं करना चाहिए क्योंकि सरकारें बदलती रहती हैं। इस पुलिस कार्रवाई की जाँच होनी चाहिए और जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती है तब तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।” 

कॉन्ग्रेस नेता के इस बयान पर चर्चा बढ़ने के बाद कंगना ने खुद इसका जवाब दिया। कंगना ने ट्वीट करते हुए लिखा, “ये मूर्ख जो कोई भी है, क्या ये जानता है मैं दीपिका, कैटरीना या आलिया नहीं हूँ। मैं इकलौती हूँ, जिसने आईटम नंबर्स ठुकराए, बड़े सितारों (खान/कुमार) के साथ फ़िल्में करने से मना किया। जिसकी वजह से पूरा बॉलीवुडिया गैंग मेरे विरोध में है। मैं राजपूत हूँ, मैं कमर नहीं मटकाती, हड्डियाँ तोड़ती हूँ।”

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर आक्रामक रवैया रखने और तीखे जवाबों के चलते सुर्ख़ियों में बने रहने वाली कंगना रनौत जब मध्य प्रदेश में ‘धाकड़’ फिल्म की शूटिंग कर रही थीं तब मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेताओं ने फिल्म की शूटिंग रोकने के लिए आंदोलन की धमकी दी थी। जब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबरन शूटिंग रोकने का प्रयास किया तो प्रदेश पुलिस ने उन पर कार्रवाई की थी।    

लद्दाख के इस ‘इडियट’ ने सेना के लिए बनाया अनोखा सोलर मिलिट्री टेंट: बाहर -14°C और भीतर +15°C तापमान

वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें एक बार फिर से उनके इनोवेटिव प्रयास की सराहना हो रही है। उन्होंने एक ‘सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट’ तैयार किया है, जिसकी सहायता से भारतीय सेना के जवानों को बहुत ज्यादा ठंड वाले माहौल में रहने में भी आसानी होगी। सोनम ने बताया कि उन्होंने गलवान घाटी में भारतीय सेना की सहायता के लिए इस टेंट को तैयार किया है।

उन्होंने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) की रात ये तस्वीरें शेयर की और बताया कि रात के 10 बजे जहाँ बाहर का तापमान -14°C था, वहीं टेंट के भीतर का तापमान +15°C था। अर्थात, टेंट के बाहर के प्राकृतिक तापमान से टेंट के भीतर का तापमान 29°C ज्यादा था, जिससे गलवान घाटी में भारतीय सेना के जवानों को वहाँ रात गुजारने में खासी आसानी होगी और साथ ही इतनी ज्यादा ठंड से भी राहत मिलती है।

सबसे बड़ी बात ये है कि ये टेंट सौर ऊर्जा पर संचालित है। सोनम वांगचुक ने बताया कि इससे कई टन केरोसिन तेल के उपयोग में भी कमी आएगी, जिससे प्रदूषण भी नहीं होगा। इससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मदद मिलेगी। सोनम ने बताया कि इस एक टेंट के भीतर 10 जवान आराम से रह सकते हैं। उन्होंने एक और बड़ी जानकारी दी कि इस टेंट में लगे सारे उपकरण और पार्ट्स पोर्टेबल हैं। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

साथ ही, इसका वजन भी 30 किलो से कम है, जिससे एक जगह से दूर जगह तक इसे ले जाने में कोई समस्या नहीं आएगी। उन्होंने इस ‘सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट’ के बारे में जानकारी दी कि ये पूर्णरूप से ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट है, जिसे कि लद्दाख में ही बनाया गया है।

उन्होंने इस ट्वीट के साथ ‘कार्बन न्यूट्रल’ का हैशटैग भी इस्तेमाल किया है। इसका अर्थ हुआ कि इसके उपयोग से वातावरण में जरा भी कार्बनडाईऑक्साइड पैदा नहीं होगी। बता दें कि सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ में आमिर खान का कैरेक्टर ‘फुनसुख वाँगड़ू’ इन्हीं सोनम वांगचुक से प्रति था।

उधर पैंगोंग त्सो झील के आसपास भारत-चीन के बीच समझौते के बाद चीन की सेना पीछे हट गई है। साथ ही उसने अपने अस्त्र-शस्त्र भी हटा लिए हैं। भारत ने भी समझौते का पालन किया है। अब दोनों देशों की सेनाओं के बीच दसवें दौर की वार्ता होगी। रेचिन ला और रेजांग ला दर्रों पर तनाव ख़त्म हो गया है। अन्य क्षेत्रों को लेकर भी बातचीत जारी है। पहली बार ‘Disengagement’ के सभी समझौते लिखित में दोनों पक्षों द्वारा तैयार किए गए हैं।

इधर चीन की स्टेट मीडिया पीपुल्स डेली ने बताया है कि चार चीनी सैनिक, जो कि पिछले साल जून में भारत मे हुए हिंसक झड़प के दौरान शहीद हुए थे, उन्हें मरणोपरांत मानद उपाधियों और प्रथम श्रेणी के योग्यता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। एक कर्नल, जिन्होंने उनका नेतृत्व किया और गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह पहली बार है जब चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि भारत के साथ गलवान हुए टकराव के दौरान उनके सैनिक भी हताहत हुए थे।

केरल में होता है लव जिहाद: ‘मेट्रो मैन’ ने असहिष्णुता को बताया फर्जी, कृषि कानूनों का किया पूर्ण समर्थन

17 वर्षों तक दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के प्रबंध निदेशक रहे ई श्रीधरन भारतीय जनता पार्टी में में शामिल हो गए हैं। देश के हालिया मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ‘लव जिहाद’ का भी जिक्र किया है। ‘मेट्रो मैन’ ने कहा कि वो ‘लव जिहाद’ वाली विचारधारा के खिलाफ रहे हैं क्योंकि उन्होंने देखा है कि केरल में हिन्दू लड़कियों को इसके जाल में फाँसा जाता है। उन्होंने कहा कि वो भाजपा को केरल में सत्ता में आने में मदद करेंगे और मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने के लिए भी तैयार हैं।

दिल्ली मेट्रो के जनक माने जाने वाले ई श्रीधरन ने कहा, “हाँ, मैं देख रहा हूँ कि केरल में क्या हो रहा है। हिंदुओं को शादी के लिए फँसाया जाता है और अंत में उन्हें भुगतना पड़ता है। मुस्लिम और ईसाई लड़कियों के साथ भी ऐसा होता है। मैं इन चीजों का विरोधी हूँ।” श्रीधरन ने कहा कि वो व्यक्तिगत रूप से शाकाहारी हैं और अंडे तक नहीं खाते, और उन्हें माँस खाने वाले पसंद भी नहीं। बीफ खाने के सवाल पर उन्होंने ऐसा कहा।

NDTV से बात करते हुए 88 वर्षीय ‘मेट्रो मैन’ ने कहा कि वो जीवन भर प्रोफेशनल जिम्मेदारियाँ निभाते रहे हैं, लेकिन अब समाज और केरल के लिए राजनीति से जुड़ कर कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केरल में पिछले 20 वर्षों में कोई इंडस्ट्री नहीं आई। भ्रष्टाचार और स्कैंडलों की बात करते हुए उन्होंने केरल सरकार पर केंद्र से लड़ते रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा में राष्ट्र से प्यार करने वाले मेहनती लोग हैं।

उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित रहे हैं लेकिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी उनके अच्छे संबंध थे और उन्होंने ही दिल्ली मेट्रो का पहला सेक्शन खुलवाया था। उन्होंने बताया कि वाजपेयी ने दिल्ली मेट्रो का पहला टिकट खुद खरीदा था। भाजपा नेता ने भाजपा के सांप्रदायिक पार्टी होने की बात से स्पष्ट मना किया।

ई श्रीधरन ने तीनों कृषि कानूनों का भी समर्थन किया और साथ ही स्पष्ट किया कि देश में कोई असहिष्णुता नहीं है। तीनों कानूनों के विरोध में पिछले 100 दिनों से भी अधिक समय से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई विदेशी व्यवस्था भारत को बदनाम करने का प्रयास करे तो उसे नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार कि बातों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते, वही असहिष्णुता के आरोप लगा देते हैं।

श्रीधरन ने बताया कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने उनके साथ राज्य में कई प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को ईमानदार, भ्रष्टाचार-मुक्त, प्रतिबद्ध, मेहनती, दूरदर्शी और देशहित में संलग्न नेता बताया। उन्होंने कहा कि आजकल फैशन हो गया है कि सरकार कुछ भी करे तो उसका विरोध करो। उन्होंने ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ छीने जाने के आरोपों को भी गलत बताया।

बेरोजगारों को योगी सरकार का तोहफा: 50 हजार रिक्त पदों पर होंगी भर्तियाँ, यहाँ जानें पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार ने प्रदेश के सरकारी विभागों में रिक्त पद भरने के लिए नई भर्तियों के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। ये पद लगभग 50 हजार के करीब हैं व इन पर नियुक्ति उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा की जाएगी। इसके लिए आयोग द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली के तहत प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) कराएगा।

विभिन्न सरकारी विभागों के इन रिक्त पदों को भरने के लिए की जा रही तैयारी के बाबत प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि तमाम विभागों के रिक्त पदों को भरने के लिए आयोग की योजना तैयार हो गई है। साथ ही प्रदेश सरकार को भी इस संबंध में जानकारी दे दी गई है। जिसके बाद सीएम मे इन सीटों को पारदर्शिता के साथ भरने का आदेश दिया है।

बता दें कि आयोग ने पिछले दिनों इस संबंध में परीक्षा प्रणाली का खाका तैयार करके उसी प्रेजेंटेशन सीएम योगी के समक्ष पेश की थी। उसके बाद अब आयोग ने सरकारी विभागों के रिक्त पदों को भरने के लिए आयोग द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली के तहत  प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) कराने की तैयारी शुरु की है।

इस परीक्षा में सफल होने वालों को शॉर्ट लिस्ट किया जाएगा। फिर उन्हें मेन्स में बैठने का मौका मिलेगा। जब परीक्षार्थी उसमें भी सफल हो जाएगा तो अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, परिवार कल्याण विभाग में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 9212 पदों, राजस्व परिषद में राजस्व लेखपाल के 7882 पदों, कृषि निदेशालय में प्राविधिक सहायक-ग्रुप -सी के 1817 पदों, राजस्व परिषद में कनिष्ठ सहायक के 1137 पदों, आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षक विभाग में सहायक लेखाकार के 1068 पदों, गन्ना एवं चीनी विभाग में गन्ना पर्यवेक्षक के 874 पदों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग में प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ के 700 पदों , वन विभाग में वन रक्षक के 694 पदों, प्रशिक्षण एवं सेवा योजना विभाग में अनुदेशक के 622 पदों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में एक्सरे प्राविधिज्ञ के 456 पदों पर भर्ती करने के लिए कार्यवाही शुरु की गई है। 

इस नियुक्ति प्रक्रिया में सबसे पहली परीक्षा दो घंटे  की होगी। इसमें 100 प्रश्न पूछे जाएँगे। प्रत्येक गलत जवाब में नेगेटिव मार्किंग है। पहला रिजल्ट परसेंटाइल पर आएगा।  इन पदों पर स्नातक किए छात्र को भी मौका मिलेगा और प्रोफेशनल कोर्सेज और इंटरमीडिएट समेत तकनीकी योग्यता रखने वालों को भी। इसके लिए आयोग अलग-अलग विभागों से आए भर्ती प्रस्तावों को योग्यता के आधार पर अलग करेगा। मुख्य परीक्षा में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियां विभिन्न विभागों में की जाएँगी।

उन्नाव हत्याकांड: एकतरफा प्यार में चिप्स ख़िलाने के बाद जहर देकर की गई लड़कियों की हत्या, यूपी पुलिस का खुलासा

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के असोहा में बुधवार (फरवरी 17, 2021) को खेत में दो लड़कियों का शव और एक लड़की के गंभीर हालत में मिलने से सनसनी फैल गई। विपक्षी दलों ने मौका देख योगी सरकार पर निशाना साधा, लेकिन पड़ताल में पता चला कि पूरा मामला एक तरफा प्रेम का था।

हालिया जानकारी के मुताबिक लखनऊ आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने इस मामले में खुलासा करते हुए बताया कि लड़कियों की कीटनाशक पिलाकर हत्या करने की कोशिश हुई। इस बात को आरोपित विनय ने स्वयं स्वीकार किया है।

पूछताछ के दौरान विनय ने पुलिस को बताया कि वह तीनों में से एक लड़की से एकतरफा प्यार करता था। लड़की के इंकार करने पर उसने पानी की बोतल में कीटनाशक मिलाकर उसे पिलाया। लेकिन वह पानी अन्य दोनों लड़कियों ने भी पी लिया। जिससे उनकी मौत हो गई। तीनों लड़कियाँ दोनों आरोपित लड़कों को जानती थीं। आरोपितों ने उन्हें गेहूँ में रखने वाली कीटनाशक पिलाई थी। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पताल में भर्ती किशोरी से पड़ोस के गाँव का विनय कुमार प्यार करने लगा था। लेकिन कई बार प्रपोज करने पर जब लड़की नहीं मानी तो उसने कीटनाशक मिलाकर उसे पानी पीने को दे दिया। इससे पहले उसने लड़की को नमकीन खिलाई थी, जिसका पैकेट पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। जिसे उन्होंने घटनास्थल से पाया और उसे फॉरेंसिक टीम को जाँच के लिए भेजा।

दरअसल, इसी पैकेट को सूँघने के बाद खोजी कुत्ता बार-बार एक दुकान की ओर बढ़ रहा था, जहाँ से वह चिप्स खरीदी गईं। जब पुलिस उस दुकान पर जाँच के लिए गई तो एक नया एंगल सामने आया। दुकानदार ने बताया कि घटना से पहले लड़कियाँ उसकी दुकान से नमकीन खरीदने आईं थी। 

इसी बिंदु पर आगे जाँच करते हुए विनय के बारे में भी पता चला। पूछताछ में उसने बताया कि वह प्यार करता था उससे बात करने के लिए फोन नंबर माँग रहा था। लड़की के कई बार मना करने पर यह बात उसे बर्दाशत नहीं हुई और उसने गुस्से में ये कदम उठाया। गौरतलब है कि असोहा के इस केस में दो लड़कियों की मृत्यु हो गई है, वहीं एक की हालत अस्पताल में नाजुक बनी हुई है। एक लड़की के पिता ने घटना के 18 घंटे बाद असोहा थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। 

भारत की स्वाति मोहन: ‘स्टार ट्रेक’ से हुईं अंतरिक्ष की ओर आकर्षित, अब MARS पर NASA के रोवर लैंडिंग का किया नेतृत्व

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के पर्सविरन्स रोवर ने गुरुवार (फरवरी 18, 2021) को मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। तय समय के दौरान इस रोवर ने कम से कम 472 मिलियन किमी का सफर तय किया, वो भी 19000 किमी प्रति घंटा की स्पीड से। जब रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर लैंडिग की तब एक भारत से जुड़ी आवाज ने इसकी हर जानकारी दी।

ये आवाज भारतीय-अमेरिकन वैज्ञानिक स्वाति मोहन की थी। उन्होंने बताया, “मैंने ऑपरेशन के दौरान मंगल 2020 का एटिट्यूड कंट्रोल सिस्टम का नेतृत्व किया, और पूरे डेवलपमेंट तक लीड सिस्टम इंजीनियर रही। एटिट्यूड कंट्रोल सिस्टम उस व्हेकिल को देखता है जहाँ उसे होना चाहिए और यह भी पता लगाने में मदद करता है कि अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कहाँ जा रहा है।”

नासा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, स्वाति मोहन का परिवार संयुक्त राज्य अमेरिका में तब गया था जब वह सिर्फ एक साल की थीं। उन्होंने 2000 में मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के लिए कॉर्नेल विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने से पहले उत्तरी वर्जीनिया/वाशिंगटन डीसी मेट्रो क्षेत्र में अपना बचपन बिताया।

अपने ग्रेजुएशन के बाद, स्वाति मोहन ने 2010 में एयरोस्पेस, एरोनॉटिकल और एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में Massachusetts Institute of Technology (एमआईटी) से एमएस और पीएचडी पूरी की।

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जानकारी के अनुसार नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में 2004 और 2005 के बीच सिस्टम इंजीनियर के रूप में काम करते हुए स्वाति मोहन ने 2005 में MIT में पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लिया था। अपनी पीएचडी पूरी होने के बाद, वह एक गाइडेंस नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम इंजीनियर के रूप में फिर से नासा में शामिल हो गईं। उन्होंने कैसिनी मिशन और GRAIL के ऊपर काम किया है। उसके बाद 2013 से वह MARS प्रोजेक्ट पर हैं। 

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बताया जाता है कि स्वाति शुरू में बाल रोग विशेषज्ञ बनना चाहती थीं, लेकिन अंत में वह नासा पहुँच गईं। इसके बारे में उन्होंने बताया, “मुझे अंतरिक्ष में हमेशा दिलचस्पी थी, लेकिन मुझे उस रुचि को नौकरी में बदलने के अवसरों के बारे में वास्तव में नहीं पता था। जब मैं 16 साल की थी, तब मैंने अपनी पहली फिजिक्स की क्लास ली। मैं भाग्यशाली थी कि मेरे पास एक महान शिक्षक थे, और सब कुछ समझना इतना आसान था। तभी मैंने वास्तव में इंजीनियरिंग को अंतरिक्ष तक पहुँचने का रास्ता माना था।”

अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए, वह कहती हैं, “मुझे याद है 9 साल की उम्र में मैंने ‘स्टार ट्रेक’ को पहली बार देखा। जहाँ अंतरिक्ष के सुंदर चित्रण वाले क्षेत्रों को खंगाला जा रहा था।” वह कहती हैं कि उन्हें याद है कि उन्होंने उस समय सोचा कि वह भी ऐसा करना चाहती हैं, वह भी ब्रह्माण के नए सुदर क्षेत्रों को खोजना चाहती हैं। 

वह कहती है कि अंतरिक्ष इतना व्यापक है कि अभी हमने बस सीखना ही शुरू किया है। उनके अनुसार वह गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सबसिस्टम व अन्य मंगल परियोजना के बीच कम्युनिकेशन के दौरान प्रमुख बिंदु थीं। इसके अलावा टीम को प्रशिक्षित करने, GN&C टीम के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं को पूरा करने और मिशन नियंत्रण स्टाफिंग को शेड्यूल करने में भी शामिल है।

वह कहती हैं, “GN & C सबसिस्टम अंतरिक्ष यान की ‘आँख और कान’ है … मंगल पर प्रवेश, अवरोहण और लैंडिंग के दौरान, GN & C अंतरिक्ष यान की स्थिति निर्धारित करता है और लैंडिंग को सुरक्षित रूप से करने के लिए आदेश देता है।”

रिंकू शर्मा के परिवार के पास पहुँचे ₹57 लाख, 26 फरवरी तक ट्रांसफर हो जाएँगे ₹1 करोड़: BJP नेता कपिल मिश्रा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रिंकू शर्मा की हत्या ने पिछले दिनों पूरे देश को झकझोर दिया। हर ओर से इस घटना के बाद इंसाफ की माँग उठी। ऐसे में कुछ लोग वह भी रहे जिन्होंने इंसाफ की माँग उठाने के साथ साथ रिंकू शर्मा के परिवार की आर्थिक सहायता करने का बीड़ा उठाया। भाजपा नेता कपिल मिश्रा उन्हीं लोगों में शामिल थे, जो अब तक परिवार के पास 50 लाख रुपए भिजवा चुके हैं।

आज भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी दी कि रिंकू शर्मा की माँ के अकॉउंट में ₹50 लाख उनकी ओर से जा चुके हैं। इसके अलावा मनीष मुंद्रा ने भी रिंकू के पिताजी के अकॉउंट में 7 लाख 50 हजार रुपए भेजे हैं। यानी कुल सहायता 57 लाख 50 रुपए की हो चुकी है। कपिल मिश्रा का दावा है कि 26 फरवरी तक 1 करोड़ रुपए परिवार के खाते में ट्रांसफर हो जाएँगे।

गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा नेता पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर गए थे। वहाँ उन्होंने इस हत्या को आतंकी घटना करार दिया था। साथ ही कहा था कि कुछ राम, मन्दिर, जय श्री राम के खिलाफ नफरत भर रहे हैं। हम मिलकर परिवार को एक करोड़ रुपए की सहायता दे रहे हैं।

कपिल मिश्रा ने इस दौरान हत्या को जिहाद कहते हुए बयान दिया था कि निशाना लगाकर बेटे को मारा गया है, उसे चुन कर मारा गया है जो सबसे ज्यादा जोश और उत्साह के साथ धर्म का काम करता था, उसको उसके घर में घुस कर मारा गया। फिर चैन नहीं पड़ा तो अस्पाल में जाकर दोबारा मारा गया।

उनके अनुसार इसको कोई साधारण आपराधिक घटना नहीं माना जा सकता। इसको वैसे ही समझना पड़ेगा जैसे किसी आतंकी घटना को समझा जाता है। मारने वालों को तो फाँसी होनी ही चाहिए और मारने वालों के पीछे वो कौन लोग थे जिन्होंने उनके दिमाग में ऐसा जहर भरा, जिन्होंने उनके दिमाग में ऐसी नफरत भरी कि कोई तो चंदा माँगने आए राम मंदिर का तो उसको भी निशाना बनाकर मारा जाए, उस मास्टरमाइंड को भी पकड़ा जाना जरूरी है।

उन्होंने माँग की थी कि इस घटना की जाँच सामान्य आपराधिक घटना की तरह न हो, बल्कि आतंकी हमले की तरह हो। इसी दौरान उन्होंने ये भी बताया था कि वह लोग परिवार को 1 करोड़ रुपया आर्थिक मदद के तौर पर दे रहे हैं और उसे परिवार के बैंक खाते में ट्रांस्फर करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।