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पिता मुलायम के समधी को बेटे अखिलेश ने पार्टी से बाहर निकाला, कहा – विधायक कर रहे थे BJP से साँठगाँठ

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सिरसागंज, फिरोजाबाद से समाजवादी पार्टी विधायक हरिओम सिंह यादव को 06 साल के लिए कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया। फीरोजाबाद जिले के सपा नेताओं मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम सिंह यादव के खिलाफ एकजुट होकर पार्टी हाईकमान से उन्हें निष्कासित करने की माँग की थी।

अखिलेश यादव ने हरिओम सिंह यादव पर पर भाजपा का साथ देने और साँठगाँठ करने का आरोप लगाया है। सोमवार (फरवरी 15, 2021) को पार्टी द्वारा यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक हरिओम यादव के बेटे विजय प्रताप को समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगाते हुए पहले ही पार्टी से बाहर कर दिया था। विजय प्रताप पर पार्टी विरोधी और अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे। 

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सपा द्वारा जारी आदेश

पार्टी द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, “समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव जी के निर्देशानुसार समाजवादी पार्टी के विधायक सिरसागंज, श्री हरिओम सिंह यादव, जनपद फिरोजाबाद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने तथा भाजपा से साँठगाँठ करने के कारण पार्टी से 06 वर्ष के लिए निष्काषित किया जाता है।”

‘भं*% लोगों को कोई काम नहीं’ – क्रिकेटर युवराज सिंह के खिलाफ FIR, माँग चुके हैं पहले भी माफी

भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के ख़िलाफ़ हरियाणा में केस दर्ज हुआ है। सिंह पर आरोप है कि उन्‍होंने पिछले साल 1 जून को इंस्टाग्राम लाइव चैट के समय यजुवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के प्रति अभद्र व अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया। इस चैट की वीडियो वायरल होने के बाद तब युवराज सिंह को माफी भी माँगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि वह शब्द उनके मुँह से अनजाने में निकल गए थे।

रविवार (फरवरी 14, 2021) को यह मामला दोबारा उछला, जब हरियाणा पुलिस ने हिसार के थाना हांसी में उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153, 153ए, 295, 505 के अलावा एससी/एसटी एक्‍ट की धारा 3 {1) (r) और 3(1)(s) के तहत एफआईआर दर्ज की।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा के थाने में एक वकील ने इस संबंध में 8 माह पहले शिकायत करवाई थी, लेकिन मामला इस पर अब जाकर दर्ज हुआ। शिकायत के अनुसार, युवराज सिंह ने चहल और यादव पर बात करते हुए जातिगत टिप्पणी की थी। उन्होंने युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के लिए भं*% शब्द का इस्तेमाल किया था।

युवराज ने रोहित शर्मा से बात करते हुए कहा था, “भं*% लोगों को कोई काम नहीं है यूजी और इसको (कुलदीप को)।” इस पर रोहित ने कहा था, “यूजी को देखा क्या वीडिया डाला अपने फैमिली के साथ। मैंने उसको वही बोला कि अपने बाप को नचा रहा है, पागल तो नहीं है वो।”

बता दें कि इस मामले पर पिछले साल विवाद होने के बाद युवराज सिंह पहले ही माफी माँग चुके हैं। पिछले साल उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर माफी माँगते हुए लिखा था, “मैं ये बात साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं किसी भी तरीके के भेदभाव में विश्वास नहीं रखता हूँ। चाहे वो भेदभाव जाति के आधार पर हो, रंग के आधार पर हो, लिंग के आधार पर या मजहब के आधार पर हो। मैं अपना जीवन लोगों की भलाई के लिए जीता आया हूँ और आगे भी जीता रहूँगा।”

दिशा से खालिस्तानी की Zoom पर मीटिंग… टेलीग्राम से ग्रेटा को टूलकिट: भारत के खिलाफ द्वेष बढ़ाना था लक्ष्य- दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टूलकिट केस में अब तक हुई जाँच के बारे में और दिशा रवि (Disha Ravi) की गिरफ्तारी को लेकर जानकारी दी है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह टूलकिट बेहद ही सुनियोजित तरीके से बनाई गई है और किस तरह से किसान आंदोलन को समर्थन देना है, इसमें उसकी पूरी जानकारी थी।

पुलिस साइबर सेल के जॉइंट कमिश्नर प्रेमनाथ ने कहा, “जैसा कि हम जानते हैं कि 26 जनवरी को बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। 27 नवंबर से किसान आंदोलन चल रहा था। 4 फरवरी को हमें टूलकिट के बारे में जानकारी मिली, जो कि खालिस्तानी सगठनों की मदद से बनाई गई थी।”

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि दिशा ने टूलकिट को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शेयर किया फिर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। उन्होंने कहा कि टूलकिट को विश्वस्तर पर फैलाने की योजना थी और इसमें गलत जानकारियाँ दी गईं थीं। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि मीडिया हाउसों और ‘फैक्ट चेकर्स’ के नामों का भी टूलकिट में उल्लेख है। उन्होंने कहा कि आरोपित ही यह बता पाएँगे कि पीटरक फ्रेडरिक का नाम टूलकिट में क्यों है।

इस टूलकिट का संबंध खालिस्तानी संगठन Poetic Justice Foundation (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से है और इस टूलकिट को चार फरवरी को बनाया गया था। टूलकिट में ‘भारत की पहचान योग और चाय’ की छवि को नुकसान पहुँचाने से लेकर दूतावासों को भी नुकसान पहुँचाने की बात है। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

साइबर सेल के ज्वाइंट सीपी प्रेमनाथ ने बताया कि टूलकिट के कई स्क्रीनशॉट खुले प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं और उनकी जाँच की जा रही है। जब जाँच में पर्याप्त सबूत जुटा लिए गए तब टूलकिट की एडिटर निकिता जैकब के खिलाफ कोर्ट से 9 फरवरी को उनके खिलाफ तलाशी वारंट हासिल किया गया।

पुनीत नाम की कनाडा में रहने वाली एक महिला ने इन लोगों को खालिस्तानी गुट ‘Poetic Justice Foundation’ से मिलवाया। निकिता और शांतनु ने ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ से जूम मीटिंग की और किस तरह से सोशल मीडिया पर पूरा अभियान चलाया जाना है इसे लेकर बैठक की। पुलिस ने ये भी बताया कि दिशा रवि, ग्रेटा थनबर्ग को जानती थी, इसलिए उनसे कहा गया कि वो ग्रेटा को टूलकिट भेजें। तब दिशा ने ही ग्रेटा को टेलीग्राम एप के जरिए टूलकिट भेजी। 

उनके मुताबिक, “एक टीम मुंबई पहुँची, जहाँ उसने निकिता के घर पर 11 फरवरी को तलाशी ली। वह उसके साथी शांतनु और दिशा ने इस दस्तावेज को तैयार किया था। ई-मेल अकाउंट शांतनु ने बनाया था, जो कि इस डॉक्यूमेंट का ओनर है और बाकी लोग उसके एडिटर्स।” ज्वॉइंट सीपी के अनुसार कनाडा मूल की पुनीत (महिला) ने इन लोगों का खालिस्तानी समर्थक Poetic Justice Foundation से संपर्क कराया था।

इससे पहले टूलकिट मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी मिली थी। सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) के फाउंडर एमओ धालीवाल ने कनाडा में रह रहे अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था। इनका मकसद 26 जनवरी से पहले ट्विटर पर एक बड़ी मुहिम छेड़ना था।

गणतंत्र दिवस से पहले इन सबकी एक ज़ूम मीटिंग भी हुई थी। इस मीटिंग में निकिता, धालीवाल के साथ दिशा भी शामिल हुई थी। पुलिस के मुताबिक 60 से 70 लोग जूम मीटिंग में शामिल हुए थे। मीटिंग में एमओ धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है। मकसद था – किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना। 

साइबर सेल के ज्वाइंट सीपी प्रेम नाथ ने कहा कि इस मीटिंग में ट्विटर स्टॉर्म के लिए हैशटैग तय किया गया और पूरी योजना बनाई गई। ये लोग जितना ज्यादा हो सके दुष्प्रचार करना चाहते थे। पुलिस का दावा है कि दिशा और निकिता के लैपटॉप से आपत्तिजनक सूचनाएँ बरामद की गई हैं।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, देश का माहौल बिगाड़ने के लिए तैयार किए गए टूलकिट की मुख्य साजिशकर्ता दिशा रवि ही है। क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने टूलकिट को ट्वीट करने के बाद डिलीट किया था, उसे दिशा रवि ने कई बार एडिट किया था। कोर्ट में जब पुलिस रिमांड पर सुनवाई हुई तो दिशा रो पड़ी और उसने कबूल किया कि उसने 2 लाइन एडिट की थी। पुलिस ने दिशा का मोबाइल जब्त किया है लेकिन उसका डाटा पहले ही डिलीट किया जा चुका था जिसे अब पुलिस रिट्रीव करेगी।

पुलिस ने कहा, “शांतनु और ‘दिशा एक्सआर’ नाम के एनजीओ से जुड़े हैं। पीटर फेडरिक ने ये प्लान किया कि किसे हैशटैग ट्रेंड करना है, किसे फॉलो करना है और कब क्या ट्वीट कराना है। 2005 से हम इन्हें जानते हैं। टूलकिट एक ऐसा डॉक्यूमेंट था, जो कुछ लोगों के बीच शेयर होना था लेकिन ग्रेटा ने गलती से ये ट्वीट कर दिया। पुलिस के अनुसार, [email protected] का एडमिन शांतनु था।”

दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के अधिकारियों ने दिशा रवि को बेंगलुरु से सोलादेवनहल्ली से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने दिशा पर संगीन इल्जाम लगाए हैं। दिशा रवि पुलिस फिलहाल पाँच दिन के पुलिस के रिमांड पर है। वहीं निकिता जैकब और शांतनु के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं।

‘1 दिन में पइसा डबल’: राहुल गाँधी ने राजस्थान में ‘कृषि बिजनेस’ बताया ₹40 लाख करोड़, असम में ₹80 लाख करोड़

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के आँकड़े हर भाषण में बदल जाते हैं लेकिन आज तक तथाकथित फैक्ट-चेकिंग पोर्टल्स ने कभी उनके दावों में आ रहे विरोधाभाषों के बारे में नहीं बताया। राफेल को लेकर भी अक्सर ऐसा होता था और अब तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के दौरान भी यही हो रहा है। राजस्थान से असम पहुँचते ही राहुल गाँधी के आँकड़े सिर्फ बदले ही नहीं, बल्कि दोगुने हो गए।

राहुल गाँधी शनिवार (फरवरी 13, 2021) को राजस्थान में थे और इस दौरान उन्होंने पीलीभंगा में किसान महापंचायत में हिस्सा लेने के अलावा अजमेर में भी एक ट्रैक्टर रैली में जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान वो राजस्थानी पगड़ी और वेशभूषा में दिखे। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस कृषि का है और अगर आप सोचते हैं कि गाड़ी बनाने या हवाई जहाज का बिजनेस सबसे बड़ा है, तो आप ग़लतफ़हमी में हैं।

आगे उन्होंने ‘सबसे ज़रूरी बात’ कहते हुए बताई कि ये दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस है, जो 40 लाख करोड़ रुपए का है। उन्होंने कहा कि ये एक व्यक्ति का बिजनेस नहीं है क्योंकि गाड़ी बनाने के मामले में टाटा सारी गाड़ियाँ बनाता है, महिंद्रा बनाता है। फिर उन्होंने कहा कि कृषि एक ऐसा बिजनेस है, जिसमें मजदूर से लेकर किसान तक सब शामिल हैं। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उनका वो भाषण देख सकते हैं।

‘कृषि का बिजनेस’ वाला हिस्सा देखें 9:05 के बाद

इसके ठीक 1 दिन बाद राहुल गाँधी पहुँचे असम के शिवसागर में। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म है, ऐसे में उनके आँकड़े भी बदल गए। यहाँ CAA विरोधी नारे लिखे गमछा पहने आए राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार अब तीन ‘खेती के बिल लेकर’ आई है, जिसके बाद पूरा ’80 लाख करोड़ का हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस’ सिर्फ दो लोगों के हाथ में चला जाएगा।

‘सबसे बड़ा बिजनेस’ वाला हिस्सा 20:00 के बाद

राहुल गाँधी ने दोनों जगह ये बातें दोहराई कि मोदी सरकार खेती के सिस्टम को ख़त्म करना चाहती है लेकिन कहीं कृषि कानूनों की एक भी खामी नहीं गिना पाए। गिनाया भी तो वही उल्टी-सीधी चीजें कि उद्योगपति जब जहाँ जैसे चाहेंगे, वो किसानों की फसल ‘छीन’ लेंगे। ऊपर संलग्न किए गए दोनों वीडियो कॉन्ग्रेस पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के हैं, जिनका लाइव प्रसारण किया गया था। राजस्थान का आँकड़ा असम में दोगुना हो गया।

इसी तरह नवंबर 2016 में, राहुल गाँधी ने दावा किया था कि मोदी सरकार ने तब बड़े उद्योगपतियों के 1.1 लाख करोड़ रुपए के ऋण माफ कर दिए थे। 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार के दौरान, राहुल गाँधी ने बेवजह इस आँकड़े को 20,000 करोड़ रुपए और बढ़ाकर 1.3 लाख करोड़ रुपए कर दिया। कर्नाटक में, उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर एक और शानदार आँकड़ा हासिल किया था- 2.5 लाख करोड़ रुपए जो कि माफ कर दिए गए थे।

दिशा रवि पर इंडियन मीडिया की रिपोर्टिंग और प्रोपेगेंडा को मिला पाकिस्तान का साथ, खुल कर आई इमरान सरकार

टूलकित मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में ली गई पर्यावरण ‘एक्टिविस्ट’ दिशा रवि को लेकर वामपंथी मीडिया गिरोह हर तरह से चिंता जाहिर कर रहा है। बीबीसी से लेकर द वायर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के जरिए सवाल खड़ा किया जा रहा है कि आखिर इस तरह की गिरफ्तारी लोकतंत्र के लिए कितना बड़ा खतरा है। वहीं विपक्षी नेता भी पूरा दम खम लगा कर इस मामले पर अपना प्रोपगेंडा फैला रहे हैं।

अब इसी क्रम में और इसी बिंदु पर पड़ोसी मुल्क की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए -इंसाफ ने इस गिरोह को समर्थन दिया है। ट्विटर पर PTI के हैंडल से नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर निशाना साधा गया। साथ ही दिशा रवि को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाया गया।

पीटीआई ने लिखा, “मोदी/आरएसएस शासन में भारत अपने खिलाफ सभी आवाजों को चुप कराने में विश्वास रखता है… अब, उन्होंने दिशा रवि को भी ट्विटर टूलकिट मामले में हिरासत में ले लिया है।”

मालूम हो कि एक ओर जहाँ किसान आंदोलन के नाम पर चल रहे प्रोपगेंडे को पहले ही वामपंथी मीडिया और विपक्ष हवा देने में जुटा है, वहीं अब दिशा रवि की खबर के जरिए भी यह गिरोह देश की छवि को मटियामेट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

दरअसल, पिछले दिनों पर्यावरण ‘एक्टिविस्ट’ ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए टूलकिट सामने आने के बाद किसान आंदोलन से जुड़े पूरे वैश्विक षड्यंत्र का खुलासा हुआ था। पुलिस तभी से इस केस में जाँच कर रही थी। अब हाल में जब पुलिस ने दिशा को पकड़ा तो बातें प्रोपेगेंडा का आकर लेकर देश के लोकतंत्र तक आ गईं।

द वायर ने तो इस गिरफ्तारी को सबके मुँह पर सत्ता का बूट बताया। इसी वेबसाइट ने ये भी कहा कि भाजपा के पास अपने कठोर आलोचकों के लिए अपना टूलकिट है, जिसे उसने भूतकाल में खूब इस्तेमाल किया है।

इसी तरह बीबीसी की एक रिपोर्ट है। इसमें तमाम ट्वीट इकट्ठा करके पहले इस बात पर रिपोर्ट हुई है कि कैसे 21 साल की एक बीबीए छात्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, फिर ये बताया गया है कि ट्विटर पर कौन उसे लेकर प्रश्न उठा रहा है।

बता दें कि मीडिया गिरोह की भाँति कई विपक्षी राजनीतिक दल भी इस गिरफ्तारी के विरोध में दिशा को लेकर अपनी भावनाएँ प्रकट कर रहे हैं। प्रियंका गाँधी लिखती हैं, “डरते हैं बंदूकों वाले एक निहत्थी लड़की से… फैले हैं हिम्मत के उजाले एक निहत्थी लड़की से।”

आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल लिखते हैं, “21 साल की दिशा रवि की गिरफ्तारी लोकतंत्र पर एक अभूतपूर्व हमला है। हमारे किसानों का समर्थन करना कोई अपराध नहीं है।”

इसी प्रकार कपिल सिब्बल ने लिखा, “दिशा रवि, जलवायु कार्यकर्ता। क्या देश इतना कमजोर है कि एक ट्वीट से उसकी सुरक्षा को खतरा है? क्या देश इतना कमजोर है कि 22 साल की कार्यकर्ता से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है? क्या देश इतना असहिष्णु है कि वह किसानों के साथ खड़े युवाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकता है? क्या यह ‘बदलाव’ मोदीजी चाहते थे?”

26 जनवरी से पहले खालिस्तानी संगठन के साथ मीटिंग – निकिता, धालीवाल के साथ थी दिशा भी: टूलकिट मामले में सुत्रों का खुलासा

टूलकिट मामले में बेंगलुरु से दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद अब दिल्ली पुलिस को निकिता जैकब और शांतनु नाम के आरोपितों की तलाश है। निकिता और शांतनु पर टूलकिट साजिश में शामिल होने का आरोप है। इस बीच टूलकिट मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी मिली है। सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) के फाउंडर एमओ धालीवाल ने कनाडा में रह रहे अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था।

इनका मकसद 26 जनवरी से पहले ट्विटर पर एक बड़ी मुहिम छेड़ना था। गणतंत्र दिवस से पहले इन सबकी एक ज़ूम मीटिंग भी हुई थी। इस मीटिंग में निकिता, धालीवाल के साथ दिशा भी शामिल हुई थी। मीटिंग में एमओ धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है। मकसद था – किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना। 

सूत्रों के मुताबिक चार दिन पहले स्पेशल सेल की टीम निकिता जैकब के घर गई थी। उसके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जाँच की गई। उस वक्त शाम हो गई थी, इसलिए निकिता से पूछताछ नहीं की गई। जाँच टीम ने कहा था कि वो अगले दिन फिर आएँगे, लेकिन जब अगले दिन स्पेशल सेल की टीम निकिता के यहाँ पहुँची, वह गायब मिली। फिलहाल निकिता जैकब फरार है।

उसके खिलाफ पुलिस ने NBW यानी गैर ज़मानती वारंट जारी करवाया है। आरोपित निकिता जैकब ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी गैर जमानती वारंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। निकिता जैकब ने गैर-जमानती वारंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में ट्रांजिट जमानत याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई कल (फरवरी 16, 2021) होगी। मामले में एक अन्य आरोपित शांतनु के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को बेंगलुरु के सोलादेवना हल्ली से पर्यावरण एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब शांतनु और निकिता जैकब नामक दो अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए मुंबई में दबिश दी जा रही है। पुलिस ने गूगल से भी तकनीकी मदद माँगी है। स्वीडन की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से लीक किए गए टूलकिट डॉक्यूमेंट को लेकर ये कार्रवाई की जा रही है।

दिशा ने चालाकी करते हुए अपने फोन के डेटा को डिलीट कर डाला, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि हजारों लोग उक्त साजिश में शामिल हैं, जो खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू से प्रभावित हैं। निकिता जैकब के बारे में कई लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ी हुई है। बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस करने वाली निकिता का नाम तभी सामने आया था, जब टूलकिट के लीक होने के बाद लोगों ने इसकी लाइव एडिटिंग के स्क्रीनशॉट्स लिए थे।

पालघर: रेस्टोरेंट के बाहर 2 लोगों पर फायरिंग और धारदार हथियार से हमला, 1 की हालत नाजुक

महाराष्ट्र के पालघर जिला स्थित नालसोपारा के मोरगाँव में रविवार (फरवरी 14, 2021) शाम तीन अज्ञात नकाबपोशों ने एक रेस्टोरेंट के बाहर चार राउंड फायरिंग करते हुए दो लोगों पर हमला कर दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नालसोपारा में तुलिंज पुलिस स्टेशन क्षेत्र में यह घटना एक बार एंड रेस्टोरेंट के बाहर हुई। तीन अज्ञात लोगों ने दो लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। पुलिस के अनुसार, यह घटना रात करीब 9 बजे हुई। घायलों की पहचान बलिराम गुप्ता और राजू के रूप में हुई है। ये दोनों लोग मोरगाँव में रेस्टोरेंट के बाहर खड़े थे।

घायलों में से एक, बलिराम गुप्ता ने कहा, “हम रेस्टोरेंट के बाहर थे। तभी नकाब पहने कुछ अज्ञात लोगों ने अचानक हम पर गोलीबारी की। उन्होंने दो गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद मैं घायल हो गया और फिर नकाबपोशों ने मेरे दोस्त राजू पर हमला कर दिया। वो स्कूटर पर सवार थे और उन्होंने पीछे से हमला किया।”

घायलों को पास ही के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ बलिराम गुप्ता की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन एक अन्य पीड़ित राजू की हालत नाजुक बताई जा रही है। राजू पर भी गोली चलाई गई और उनके सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया था।

तुलिंज पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र कांबली ने कहा, “हमलावरों ने चार राउंड फायरिंग की, जिनमें से तीन घायलों को लगी। तीनों हमलावर मास्क पहने हुए थे और हम उन स्कूटरों की जानकारी खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिनका उन्होंने हमला करने के लिए इस्तेमाल किया था।”

पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि इस हमले के पीछे की वजह आपसी मतभेद हो सकती है। पुलिस का कहना है कि हमलावर इन दोनों घायलों के ठिकाने के बारे में अच्छी तरह से जानते थे और इस तरह हमले की योजना भी बनाई गई थी। इलाके में लगे सीसीटीवी को स्कैन किया जा रहा है और आगे की जानकारी माँगी जा रही है।

सुशांत की बहन प्रियंका के खिलाफ होगी जाँच, रिया ने कराई थी FIR, नहीं होगी रद्द: बॉम्बे HC का फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (फरवरी 15, 2021) को दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन प्रियंका के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, उनकी एक अन्य बहन मीतू के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया गया और उन्हें राहत मिली। ये FIR सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती ने दायर किया था। सुशांत के पिता द्वारा पटना में दर्ज कराई गई FIR में रिया चक्रवर्ती मुख्य अभियुक्त के रूप में नामित की गई थी।

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने दोनों बहनों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया, जिन्होंने FIR को रद्द करने की माँग की थी। रिया ने अपने FIR में इन दोनों पर दिल्ली के एक डॉक्टर के साथ मिल कर सुशांत का फेक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने का आरोप लगाया था। सितम्बर 7, 2020 को दायर की गई FIR में कहा गया था कि इस प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार दवाएँ लेनी शुरू करने के 5 दिन बाद सुशांत की मौत हो गई।

रिया का आरोप है कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर तरुण कुमार ने प्रियंका और मीतू के कहने पर ‘अवैध रूप से’ वो दवाएँ लिखी थीं। मुंबई पुलिस ने रिया की शिकायत के आधार पर स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS), 1985 के तहत FIR दर्ज की थी। अक्टूबर 6, 2020 में वकील माधव थोराट के माध्यम से याचिका दायर कर दोनों बहनों ने FIR को रद्द करने का निवेदन किया था।

बॉम्बे HC की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया प्रियंका सिंह के खिलाफ मामला बनता है और उनके खिलाफ जाँच में कोई अवरोध नहीं आनी चाहिए। रिया ने अंदेशा जताया था कि इन्हीं दवाओं के खाने से और दवाओं का कॉम्बिनेशन गलत होने से उनकी मौत हुई। जबकि दोनों बहनों का आरोप था कि सुशांत की मौत के मामले में चल रही जाँच को भटकाने के लिए ये FIR दर्ज कराई गई। साथ ही इसमें 91 दिन की देरी को भी रद्द करने का आधार बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि रिया चक्रवर्ती ने अपने खिलाफ दर्ज की गई FIR और CBI जाँच के बाद किसी परोक्ष मंशा से ये मामला दर्ज करवाया। इससे पहले CBI ने भी कहा था कि एक ही मामले की अलग-अलग FIR दर्ज कर के उसकी सामानांतर जाँच नहीं चलाई जा सकती, वो भी जब केंद्रीय एजेंसी जाँच में लगी हो। रिया का कहना है कि उनके कहने के बावजूद सुशांत ने मुंबई के डॉक्टर की बताई दवाएँ लेने की बजाए अपनी बहनों द्वारा बताई गई दवाएँ ली।

इस साल की शुरुआत में साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने दिवंगत फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर सड़क का नाम रखने वाले प्रस्ताव को पास किया था। पार्षद अभिषेक दत्त ने माँग की थी कि सुशांत सिंह राजपूत इंजीनियरिंग के छात्र थे और दिल्ली से उनका कनेक्शन था, इसीलिए एंड्रयूज गंज वार्ड में रोड नंबर 8 (एंड्रयूज गंज से लेकर इंदिरा कैंप तक की सड़क) का नाम सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर कर दिया जाना चाहिए।

‘हिंदू कोई धर्म नहीं, सबको सिख हो जाना चाहिए’: किसान आंदोलन की आड़ में कम्युनल कार्ड

हरियाणा के बहादुरगढ़ के नामी जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने पिछले हफ्ते ऐलान किया कि वह 21 अप्रैल को 250-300 लोगों के साथ सिख धर्म अपनाएँगे। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, सबको सिख धर्म स्वीकार लेना चाहिए। ये वही नेता हैं जिन्होंने हरियाणा में जाट आरक्षण की आग को भड़काया था। 

टिकरी बॉर्डर पहुँचे सांगवान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की माँग नहीं मान रही है। वह कानून लागू करने की कोशिश कर रही है। लेकिन किसान ऐसा नहीं होने देंगे। सांगवान ने ये भी माँग उठाई कि 26 जनवरी को हुई हिंसा में जितने भी लोगों पर केस हुआ है, सबको वापस लिया जाना चाहिए।

किसानों को भड़काते हुए सांगवान ने कहा कि चूँकि सरकार उनकी माँग नहीं सुन रही है, इसलिए उन्हें नए प्लान की जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बातें नहीं मानी तो वह 250-300 लोगों के साथ मिल कर सिख धर्म अपना लेंगे।

कौन हैं हवा सिंह सांगवान?

बता दें कि 73 वर्षीय हवा सिंह सांगवान सीआरपीएफ के पूर्व अधिकारी हैं और जाट आंदोलन के प्रमुख नेता भी।वे लगातार बहादुरगढ़, झज्जर, हरियाणा से जाट समुदाय के लिए आरक्षण माँगते रहे हैं। साल 2011 में ‘रेल रोको’ उपद्रव में उनकी अहम भूमिका थी। इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि साल 1990, में सांगवान को अयोध्या में पोस्ट किया गया था। उस समय लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा जब वहाँ पहुँची तो वह वही साइट पर थे और उन्होंने कई बार विवादित ढाँचे को बचाने की कोशिश की थी।

साल 2020 में अहीर समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में हवा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी राव तुला राम और अहीर समुदाय के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी। बाद में विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें अपना पोस्ट डिलीट करना पड़ा और उन्होंने माफीनामा भी जारी किया। इस मामले में उनके ऊपर आईपीसी की धारा 153ए, 505 (2) के तहत साइबर पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था और लैपटॉप भी सीज कर लिया गया था।

गौरतलब है कि वर्तमान में जब कथित किसान आंदोलन चुनिंदा नेताओं को छोड़ कर भारी जनसमर्थन नहीं पा रहा है तो इस प्रोटेस्ट को सांप्रदायिक व जातिगत रंग दिया जाने का प्रयास हो रहा है। हाल में हरसिमरत बादल ने लोकसभा में इस पूरे आंदोलन को सिख बनाम हिंदू का मामला बता दिया था। ये भाषा बिलकुल वैसी ही थी जिस तरह से खालिस्तानी बोलते हैं। उससे पहले साल 2020 के दिसंबर माह में बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत पर ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी करने के मामले में केस दर्ज हुआ था।

हाथरस कांड: सिद्दीक कप्पन को 5 दिन की बेल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मीडिया से दूर रहना

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस मामले में कथित तौर पर हिंसा भड़काने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार सिद्दीक कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने पाँच दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीक कप्पन को केरल में अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए जमानत दी है।

सिद्दीक कप्पन ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि उनकी माँ की हालत ठीक नहीं है और वो मौत के कगार पर है। अदालत ने कप्पन को कुछ शर्तों के साथ ही सिद्दीक कप्पन की जमानत मंजूर की है।

5 अक्टूबर को मथुरा में गिरफ्तार हुए सिद्दीक कप्पन की जमानत का उत्तर प्रदेश सरकार ने विरोध किया, लेकिन अदालत ने कहा कि अपनी माँ की मृत्यु को लेकर कोई झूठ नहीं बोलता।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस सिद्दीक कप्पन को उसके घर केरल लेकर जाएगी और घर की रखवाली करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब सिद्दीक कप्पन अपनी बीमार माँ से मुलाकात करेगा, उस समय पुलिस वहाँ पर मौजूद नहीं रहेगी। 

साथ ही, अदालत ने उन्हें मीडिया से बात ना करने और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कुछ ना कहने/लिखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सिद्दीक कप्पन अपनी माँ, रिश्तेदार, डॉक्टर और करीबी दोस्तों के अलावा किसी और से नहीं मिलेगा।

हाथरस कांड में उत्तर प्रदेश पुलिस ने मथुरा से पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन सीएफआई के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। सिद्दीक कप्पन जो कि कथित तौर पर पत्रकार भी है, इन्हीं में शामिल था। इन लोगों पर पीएफआई के इशारे पर हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश रचने का आरोप था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में सितंबर 14, 2020 को एक मामला सामने आया था, जिसमें दावा किया गया कि आरोपितों ने कथित तौर पर युवती की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ काट दी, जिसके बाद पीड़िता की 29 सितंबर को दिल्ली में इलाज के बाद मौत हो गई। इस घटना को लेकर जमकर बवाल हुआ और विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस पर जमकर राजनीति की थी।