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कश्मीर का मुनीब जुटाता था पैसा, आतंकी खरीदते थे गोला-बारूद: कतर से लैंड करते ही एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकवादी मुनीब सोफी को शुक्रवार (5 फरवरी, 2021) को गिरफ्तार किया। ओवरग्राउंड वर्कर मुनीब जम्मू-कश्मीर के बिजबेहाड़ा का रहने वाला है। कतर से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही उसे पुलिस ने अरेस्ट कर लिया।

खबरों के मुताबिक, सोफी मारे गिराए गए पाकिस्तानी आतंकवादी वलीद भाई के लिए काम कर रहा था।
कश्मीर जोन पुलिस ने मुनीब सोफी के बारे में ट्विटर पर जानकारी साझा करते हुए लिखा है “कुलगाम पुलिस ने जैश ए मोहम्मद के सहयोगी ‘मुनीब सोफी’ को इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है। वह आज ही कतर से प्रत्यर्पित होकर नई दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचा था। वह पाकिस्तान के आतंकी वलीद भाई के लिए काम कर रहा था, जिसे पिछले साल एक एनकाउन्टर में मार गिराया गया था।”

वलीद भाई पाकिस्तान का JeM IED (इम्प्रूव्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विशेषज्ञ था, जोकि आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए घाटी में काम करता था। वह जम्मू-कश्मीर पुलिस के सबसे वांछित आतंकवादियों के लिस्ट में भी शामिल था।

जुलाई 2020 में जम्मू और कश्मीर के दक्षिणी कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में वलीद भाई और जैश-ए-मोहम्मद दो अन्य आतंकियों को मार गिराया था। आईजीपी ने तब कहा था कि वलीद भाई दक्षिण कश्मीर में चार कॉर्डन-एंड-सर्च ऑपरेशन के दौरान बच निकला था।

पुलिस ने एक बयान में कहा है कि गिरफ्तार किए गए ओवरग्राउंड वर्कर की भूमिका प्राथमिकी संख्या 58/2020 में धारा 13, 18, 19, 38, 39 यूएलए (पी) अधिनियम के तहत सामने आई थी। उक्त मामले में गिरफ्तार किए गए अभियुक्त ने पुलिस को बताया था कि वह अन्य ओवरग्राउंड वर्करों के साथ कश्मीर के विभिन्न जिलों से जैश-ए-मोहम्मद के लिए पैसा इकट्ठा कर रहा था।

मुनीब सोफी एकत्रित धन का इस्तेमाल पाकिस्तान में वलीद भाई के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए करता था। इससे पहले कुलगाम पुलिस ने मुनीब के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी किया गया था और गैर-जमानती वारंट भी निकाला था।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को सुरक्षाबलों ने पुलवामा जिले से JeM के दो ओवरग्राउंड वर्कर्स को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस अधिकारी ने बताया,“सेना और सीआरपीएफ के साथ पुलिस ने अवंतीपोरा क्षेत्र से अभियुक्त संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी साथियों को गिरफ्तार किया जो आतंकियों को रहने और खाने-पीने में मदद करते थे।”

2 बच्चों के अब्बा इरशाद ने 8 साल की मौसेरी बहन से किया रेप, फिर ब्लेड से गला रेत खेत में फेंक दिया

बिहार के भोजपुर में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। मोहम्मद इरशाद ने नाबालिग मौसेरी बहन के साथ दुष्कर्म किया और पकड़े जाने के डर से ब्लेड से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी। हत्यारे ने बच्ची का शव गाँव की ही खेत में फेंक दिया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना भोजपुर जिले के बिहिया गाँव की है। आरोपित भाई मोहम्मद इरशाद घुमाने के बहाने अपनी 8 साल की नाबालिग बहन को खेत में ले गया और फिर मौका पाकर उसके साथ बलात्कार किया। जब दर्द से कराहती बच्ची बेहोश हो गई तब आरोपित ने वापस गाँव आकर ब्लेड खरीदा और घटनास्थल पहुँचकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

परिजनों के मुताबिक, देर रात तक जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों को उसकी चिंता हुई। उन्होंने बार-बार इरशाद से उसके बारे में पूछा। इरशाद ने बताया कि वह आ जाएगी। कहीं खेल रही होगी। शुक्रवार (5 फरवरी 2021) सुबह ग्रामीणों को खून से लथपथ बच्ची की लाश खेत में मिली। परिजनों ने गाँववालों को जानकारी दी कि मौसेरा भाई मो. इरशाद गुरुवार शाम उसे अपने साथ ले गया था।

ग्रामीणों ने बताया कि नाबालिग बच्ची के नीचे का कपड़ा फटा हुआ था और गुप्तांग पर खून के धब्बे थे। उसका गला कटा हुआ था। बगल में कई ब्लेड पड़े थे। स्थानीय लोगों ने कहा किसी धारदार हथियार से उसका गला रेता गया था। बच्ची की हालत देख आगबबूला हुए गाँववालों ने इरशाद को जमकर पीटा और सख्ती से पूछताछ की। इरशाद ने गाँव वालों के सामने बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या की बात कबूल ली।

इसके बाद परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बारे में बताते हुए SP हरकिशोर राय ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित इरशाद 2 बच्चों का बाप है। वह खुद अपने रिश्तेदार के घर में रहता है। मृतक बच्ची का परिवार और उसका घर अगल-बगल में ही है। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम सिविल सर्जन सह प्रभारी अधीक्षक के द्वारा गठित चार डॉक्टरों का टीम ने किया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की जाँच की जाएगी।

‘7 दिन में शांतिपुर छोड़ो, नहीं तो हत्या के जिम्मेदार खुद होगे’: बीजेपी में गए MLA को दीवारों पर लिखकर धमकी

पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले राज्य में राजनीतिक हिंसा और सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में भगदड़ जोरों पर है। हाल ही में टीएमसी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए विधायक अरिंदम भट्टाचार्य को खुलेआम धमकी दी जा रही है।

दीवारों पर लिखा गया है, “7 दिन में शांतिपुर छोड़ो वरना अपनी हत्या के लिए तुम खुद जिम्मेदार होगे।” अरिंदम ने इस घटना की जानकारी होने पर चुनौती स्वीकार करते हुए कहा है, “मैं शांतिपुर छोड़कर नहीं जाऊँगा।”

नदिया के शांतिपुर में दीवारों पर लिखकर भट्टाचार्य को हत्या की धमकी दी गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा नदिया से शनिवार (6 फरवरी 2021) को राजव्यापी परिवर्तन रथ यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं। पार्टी ने इस तरह की घटना की निंदा की है। राज्य की स्थिति देखते हुए चुनाव आयोग से सेंट्रल फोर्स की तैनाती की माँग की है।

जानकारी के अनुसार बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा सांसद स्वप्नदास गुप्ता के नेतृत्व में चुनाव आयोग को पत्र लिख कर सेंट्रल फोर्स को राज्य में तैनात करने की माँग की है। चुनावों के मद्देनजर पार्टी ने यह माँग इसलिए उठाई है ताकि इलेक्शन निष्पक्षता के साथ संपन्न हों। पार्टी ने कहा है कि ऐसे पुलिस कर्मी भी पूरी प्रक्रिया से दूर रहने चाहिए जिन पर बीते समय में किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े होने का आरोप हो।

अरिंदम भट्टाचार्य को दी जा रही धमकी को लेकर बीजेपी महासचिव व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा है, “ये कैसी कानून-व्यवस्था। बंगाल में किस तरह का लोकतंत्र चल रहा है, ये उसी का एक नमूना है। शांतिपुर नादिया की दीवारों पर विधायक श्री अरिंदम भट्टाचार्य को खुली धमकी लिखी है, ‘7 दिन में शांतिपुर छोड़ दो, नहीं तो तुम्हारे खून के जिम्मेदार तुम खुद होगे।’ तृणमूल का जनताविहीन लोकतंत्र।”

टूटे दाँत, कटा गला, शरीर पर आधे कपड़े: कोलकाता में 8 साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या

कोलकाता के जोरबगान में गुरुवार (फरवरी 5, 2021) को एक 8 साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बच्ची बुधवार को अपने मामा के घर घूमने गई थी। उसी दिन शाम को वह लापता हो गई। बहुत ढूँढने पर गुरुवार को एक इमारत में उसकी लाश मिली। रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के शव पर आधे कपड़े थे। उसका गला कटा हुआ था। दाँत तोड़ दिए गए थे और बालों को नोचा गया था। उसकी हालत ऐसी थी जैसे उसका यौन उत्पीड़न हुआ हो।

जाँच अधिकारी ने बताया, “घटनास्थल पर खून से सना चाकू, लड़की के चार दाँत, बालों का गुच्छा साफ तौर पर बताते हैं कि बच्ची ने मरने से पहले हत्यारे से काफी संघर्ष किया होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है या नहीं ये रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा। ऐसा लग रहा है कि हत्यारे बच्ची को पहले से जानते थे।

मृतक की मामी ने बताया कि वह तीसरी क्लास में पढ़ती थी और बुधवार को अपनी नानी से मिलने आई थी। मगर जब रात करीब 8 बजे वह गायब हो गई तो उसकी तलाश शुरू की गई। गुरुवार की सुबह एक स्थानीय, जब पड़ोस की छत पर गया तो उसने बताया कि बच्ची यहाँ है। इसके बाद बच्ची के पिता पुलिस का कॉल आने के बाद भाग कर वहाँ गए। वह कहते हैं कि उसे देख, “मुझे पता चल गया था कि अब सब कुछ खत्म हो गया है। मैं सिर्फ़ न्याय ही माँग सकता हूँ।”

कुछ लोग पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने बच्ची को सही समय पर खोजना नहीं शुरू किया। वहीं जाँच अधिकारी के अनुसार प्राथमिक जाँच बताती है कि बच्ची के बुधवार को गायब होने के बाद उसका यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में एक आदमी या एक समूह ने उसकी हत्या कर दी।

बता दें कि घटना को लेकर स्थानीयों में काफी गुस्सा है। इस दौरान झड़प की बात भी सामने आई है। भाजपा और टीएमसी दोनों ने मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। बंगाल में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ट्वीट किया है। उन्होंने ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराध अब भी चिंता का विषय है। वही राज्य सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पंजा का कहना है कि ये घटना बेहद अफसोसजनक है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर हैं। जो भी इन सबमें शामिल होगा उसने अधिकतम सजा दिलवाई जाएगी।

‘असली जंग कानून वापसी के बाद’: ग्रेटा का टूलकिट बनाने वाले खालिस्तानी का वीडियो वायरल

कृषि कानून के खिलाफ हो रहा ‘आंदोलन’ अब अलग ही दिशा पकड़ चुका है। स्‍वीडिश ऐक्टिविस्‍ट ग्रेटा थुनबर्ग द्वारा साझा किए गए ‘टूलकिट’ को बनाने का शक पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) पर है। कनाडा बेस्‍ड इस संस्‍था का फाउंडर खालिस्तानी एमओ धालीवाल है। कहा जा रहा धालीवाल किसानों के प्रदर्शन के सहारे भारत में खालिस्तानी आंदोलन को हवा देने की ताक में है। सोशल मीडिया पर धालीवाल का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

वीडियो में खालिस्तानी समर्थक धालीवाल द्वारा भारत विरोधी भड़काने वाले बयानों को सुना जा सकता है। वायरल क्लिप में वह कह रहा है, “यदि कृषि कानून कल वापस हो जाते हैं, तो यही हमारी जीत नहीं होगी। कृषि कानूनों की वापसी के साथ जंग की शुरुआत होगी और इसका अंत यही नहीं होगा। किसी को यह मत बताने दीजिए कि यह लड़ाई कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ खत्‍म हो जाएगी, क्योंकि वे इस आंदोलन से ऊर्जा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे आपको बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आप पंजाब से अलग हो, और आप खालिस्तान आंदोलन से अलग हो, आप नहीं हो।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धालीवाल का यह वायरल वीडियो 26 जनवरी को भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान शूट किया गया था। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

गौरतलब है कि ग्रेटा थुनबर्ग ने जो दस्तावेज भूल से सार्वजानिक किया उसमें सोशल मीडिया पर इस पूरे एजेंडे की प्लानिंग की एक ‘पावर पॉइंट स्लाइड’ भी था। इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ है। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया’ पर किसानों से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा सामग्री की भरमार है और उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थक सामग्री भरपूर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशों में भारत विरोधी अभियान चलाने के लिए पॉप स्टार रिहाना को अलगाववादी एमओ धालीवाल के पीआर फार्म की तरफ से 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया गया था। बताया जाता है कि धालीवाल, मरीना पैटरसन, पीआर फार्म्स में रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में काम करने वाली अनीता लाल, कनाडा में विश्व सिख संगठन के निदेशक और कनाडाई सांसद जगमीत सिंह जैसे लोगों ने जनता को भड़काने और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

कॉन्ग्रेस को राहुल गाँधी ने दिए ₹54 हजार, सिब्बल से मिले ₹3 करोड़: प्रदर्शन की तरह चंदा भी गिरा

भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission) ने 2019-20 में कॉन्ग्रेस को मिले चंदे से जुड़ी एक रिपोर्ट पिछले दिनों जारी की थी। इससे पता चलता है कि अस्तित्व के संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस की वित्तीय हालत भी पतली है। पार्टी 2019-2020 में महज 139.01 करोड़ रुपए का ही चंदा जुटाने में सफल रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार गिरावट आई है। इससे पहले पार्टी को कुल 146 करोड़ रुपए का चंदा प्राप्त हुआ था।

संबंधित कानूनों के प्रावधानों के तहत राजनीतिक दलों को हर साल लोगों, कंपनियों, इलेक्टोरल ट्रस्ट और संगठनों से मिले 20,000 रुपए से अधिक चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है।

ईसीआई साइट पर उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार, कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग को 30 दिसंबर, 2020 को जानकारी दी कि 2019-20 में पार्टी को 139 करोड़ रुपए का योगदान मिला है।

Congress’s contribution report for 2019-20 uploaded on the official ECI site

यह राशि 2018-19 में एकत्र की गई राशि की तुलना में कम है।

Congress’s contribution report for 2018-19 uploaded on the official ECI site

इस रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि पार्टी की स्थापना के बाद से ही इसका कमान सँभालने वाली गाँधी परिवार का योगदान इसमें नाममात्र ही है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी फंड में 50,000 रुपए दिए हैं जबकि उनके बेटे और पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने 54,000 रुपए का ही योगदान दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं, जिन्होंने अगस्त 2020 में सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर बड़े संगठनात्मक बदलावों की माँग की थी, ने पार्टी आलाकमान के बराबर या उनसे ज्यादा योगदान पार्टी फंड में दिया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और G-23 के सदस्य कपिल सिब्बल ने 2019-2020 के बीच पार्टी कोष में सबसे अधिक तीन करोड़ रुपए का योगदान दिया। कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची में कपिल सिब्बल के अलावा, पार्टी फंड में योगदानकर्ता के रूप में जी -23 के अन्य पाँच सदस्य भी शामिल हैं। ‘जी23’ के अन्य सदस्यों में से आनंद शर्मा, शशि थरूर और गुलाम नबी आज़ाद ने 54-54 हजार रुपए, मिलिंद देवड़ा ने एक लाख रुपए और राज बब्बर ने एक लाख आठ हजार रुपए दिए हैं।

इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, स्वर्गीय मोतीलाल वोरा, स्वर्गीय अहमद पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री परनीत कौर और अधीर रंजन चौधरी ने भी राहुल गाँधी जितना ही, यानी कि 54,000 का योगदान पार्टी फंड में दिया था।

मजेदार बात यह है कि पिछले साल मार्च में कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी वित्त वर्ष 2019-20 में पार्टी को 54 हजार रुपए दिए थे।

उल्लेखनीय है कि जिन कॉरपोरेट्स ने कॉन्ग्रेस पार्टी के फंड में योगदान दिया उनमें प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (Prudent Electoral Trust) का 31 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा योगदान है। उसके बाद बिजनेस हाउस आईटीसी (Business House ITC) ने 13 करोड़ रुपए और आईटीसी इन्फोटेक ने 4 करोड़ रुपए का दान किया है।

2020 में UPSC परीक्षा का आखिरी अटेम्प्ट गँवा चुके अभ्यर्थी न करें चिंता: मोदी सरकार ने दिया एक और अवसर

अक्टूबर 2020 में अपना आखिरी अटेम्प्ट देने वाले यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम के अभ्यर्थियों को केंद्र सरकार ने राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने अदालत को बताया कि कोविड-19 महामारी के चलते फैसला लिया गया है कि ऐसे अभ्यर्थी एक दफा और यानी 2021 में भी सिविल परीक्षा दे सकते हैं।

इससे पूर्व केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि वह सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं होने से अपना आखिरी मौका गँवा देने वाले अभ्यर्थियों को एक और अवसर देने के पक्ष में नहीं है। केंद्र ने यह भी साफ किया था कि राहत उम्र सीमा से बाहर हो चुके अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगी। 

बता दें कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही एक अभ्यार्थी रचना सिंह ने 4 अक्टूबर 2020 को हुई यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा छूट जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कोर्ट में सरकार से एक अतिरिक्त मौका दिए जाने की गुहार लगाई थी। 

इस याचिका में कुछ अन्य अभ्यार्थी भी शामिल थे जो संकट/लॉकडाउन आदि के चलते परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। इनकी ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पक्ष रख कर दलीलें दी थीं।

इसके बाद 29 जनवरी को सुनवाई में पीठ ने सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से सवाल किए थे कि सिर्फ इस बार के लिए अतिरिक्त अवसर दिया जाता है तो कितने अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिलेगा और यूपीएससी के गठन होने के बाद से अब तक कितनी बार इस तरह की छूट दी गई है?

फिर 1 फरवरी की सुनवाई में शीर्ष अदालत को सॉलिस्टर जनरल ने बताया कि अतिरिक्त अवसर दिए जाने पर कुल 3308 उम्मीदवारों को इसका लाभ मिलेगा। जिस पर पीठ ने कहा कि अधिकतम आयु सीमा में बदलाव किए बिना एक बार छूट देने से 3300 से अधिक उम्मीदवारों को राहत मिलेगी। 

मालूम हो कि 30 सितंबर 2020 को न्यायालय ने कोविड-19 महामारी और देश के कई राज्यों में बाढ़ के चलते 4 अक्टूबर को होने वाली UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2020 को स्थगित करने से इंकार कर दिया था। जिसके चलते प्रारंभिक परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों में से 100 से ज्यादा अभ्यर्थी ऐसे थे जिनका यह आखिरी अटेम्प्ट था।

इन अभ्यर्थियों ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर सिर्फ एक बार की छूट के तौर पर 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका देने की माँग की थी। कुछ अभ्यर्थियों ने कहा है कि कोविड-19 से जुड़ी ड्यूटी में लगने के कारण उन्हें तैयारी का समय नहीं मिल पाया। जबकि कुछ का कहना था कि दूर-दराज के इलाके में खराब इंटरनेट सुविधा के चलते उन्हें ऑनलाइन अध्ययन सामग्री नहीं मिल सकी। 

दिल्ली पुलिस ने गूगल से माँगा वो सभी IP Address, जिन्होंने तैयार की भारत विरोधी प्रोपेगेंडा प्रोटेस्ट की ‘टूलकिट’

दिल्ली पुलिस ने कल (4 फरवरी 2021) उन लोगों पर एफ़आईआर दर्ज की थी, जिन्होंने ‘टूलकिट’ (toolkit) दस्तावेज़ को साझा किया था जो साबित करता है कि किसान आंदोलन को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन ‘सुनियोजित’ था। अब दिल्ली पुलिस ने गूगल (google) से आईपी एड्रेस (IP address) या लोकेशन (location) माँगी है, जिससे यह पता चल सके कि असल में किसने टूलकिट को अपलोड (upload) किया था। 

यानी दिल्ली पुलिस ने गूगल से कहा है कि वह ऐसे लोगों की तकनीकी लोकेशन ट्रेस (trace) करे, जिन्होंने राजधानी दिल्ली में दंगे भड़काने के लिए टूलकिट को सबसे पहले गूगल ड्राइव (google drive) पर साझा किया था। जिसे बाद में स्वीडन की जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी साझा किया था, जो अंत में भारत के खिलाफ बड़ी साज़िश के रूप में सामने आया था। 

दरअसल, ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया था। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया था। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया था कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।  

इसके बाद उसने एक और ट्वीट किया, जिसमें गूगल डॉक्युमेंट की एक फाइल शेयर की गई थी। इस फाइल में भारत में चल रहे किसान आन्दोलन को हवा देने वाले सोशल मीडिया कैंपेन का शेड्यूल और तमाम रणनीति दर्ज थीं। यह गूगल डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ग्रेटा ने लिखा था कि जो लोग मदद करना चाहते हैं यह ‘टूलकिट’ उनके लिए है। इस लिंक में भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने की कार्ययोजना का विवरण था।

गुरुवार (5 फरवरी 2021) को दिल्ली पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की थी जिन्होंने ‘टूलकिट’ शेयर किया था। दिल्ली पुलिस ने इस बारे में बयान जारी करते हुए बताया था कि एफ़आईआर में ग्रेटा थनबर्ग का नाम नहीं शामिल किया है। एफ़आईआर ‘अज्ञात लोगों’ पर दर्ज की गई है जिसमें मुख्य आरोप है, तमाम समूहों के बीच नफ़रत भड़काना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना। क्राइम ब्रांच के स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन ने मुद्दे पर कहा था, “शुरूआती जाँच में पता चला है कि टूलकिट ‘खालिस्तानी समर्थक समूह’ पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) द्वारा तैयार की गई थी। 

दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर 

दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 ए (अलग-अलग समूहों या धर्मों के बीच नफ़रत फैलाना), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 124 ए के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस का इस मुद्दे पर कहना है कि एफ़आईआर टूलकिट बनाने वालों के खिलाफ दर्ज की गई है और फ़िलहाल इस मुद्दे पर जाँच जारी है। 

इसके पहले भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने विदेशी चेहरों से कहा था कि वह कृषि सुधार क़ानूनों पर टिप्पणी करने या प्रोपेगेंडा फैलाने से पहले इससे जुड़े प्रावधानों को अच्छे से समझ लें। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की थी। 

ऑपइंडिया ने इस बारे में पहले ही रिपोर्ट्स प्रकाशित की थीं जिसमें बताया गया था कि रिहाना और ग्रेटा द्वारा किया गया ट्वीट अचानक नहीं आया था। बल्कि यह भारत के खिलाफ मिथ्या प्रचार की रणनीति के तहत सुनियोजित था, ऐसी रणनीति जो भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए रची गई थी।      

‘वह रोज दारू पीता है, लड़की बाजी करता है… मेरे दो बच्चों को कैद कर रखा है’: उद्धव के मंत्री धनंजय मुंडे नए विवादों में घिरे

उद्धव सरकार में मंत्री व नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता धनंजय मुंडे फिर विवादों में हैं। इस दफा उनके ख़िलाफ़ शिकायत उनकी लिव इन पार्टनर करुणा शर्मा ने की है। दोनों के दो बच्चे हैं। पिछले दिनों करुणा की ही बहन रेनू शर्मा ने एनसीपी नेता पर बलात्कार का आरोप लगाया था।

करुणा ने धनंजय मुंडे पर उनके बच्चों को कैद किए रखने का इल्जाम लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुंडे ने उनके दो बच्चों को अपने बंगले ‘चित्रकूट’ में 3 महीने से ‘कैद’ कर रखा है। उन्होंने दावा किया कि जब वह 24 जनवरी को बच्चों से मिलने गईं तो 30-40 पुलिसकर्मियों की बड़ी टीम ने उन्हें बंगले में प्रवेश करने से रोक दिया।

बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित करुणा ने पुलिस महानिदेशक हेमंत नगराले के पास अपनी शिकायत दी है। उन्होंने कहा है, “मेरी छोटी बेटी 14 साल की है और बंगले पर कोई महिला केयरटेकर भी नहीं है। धनंजय मुंडे का चाल-चलन अच्छा नहीं है। वह रोज लड़की बाजी करता है और दारू पीता है। दोनों बच्चों को मेरे खिलाफ भड़काता है और नशे में उनके सामने कपड़े उतारकर नंगा हो जाता है। इसलिए बच्चों के साथ कुछ भी हुआ तो उसके लिए धनंजय मुंडे जिम्मेदार होंगे।”

अपनी शिकायत में महिला ने कहा है कि यदि उन्हें उनके बच्चों से मिलने नहीं दिया गया तो वह 20 फरवरी 2021 से आमरण अनशन पर बैठेंगी। इसके लिए उन्होंने चित्रकूट बंगले के सामने, मंत्रालय के सामने या आजाद मैदान में बैठने के लिए अनुमति माँगी है। साथ ही मुंडे के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की है।

अपनी शिकायत में उन्होंने मुंडे के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 376, 377, 420, 471, 324, 363, 506, घरेलू हिंसा की धारा 18, 19 व आईटी एक्ट दांपत्य अधिकार की धारा 9 के तहत मामला दर्ज करने को कहा है।

गौरतलब है कि धनंजय मुंडे और उनकी लिव इन पार्टनर में काफी समय से कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिछले दिनों जब करुणा की बहन रेनू शर्मा ने मुंडे पर रेप का आरोप लगाया तो उन्होंने (धनंजय ने) अपनी सफाई देते हुए करुणा से अपने रिश्तों का खुलासा किया था। उन्होंने यह भी बताया था,

“ साल 2019 से करुणा, उसकी बहन रेनू और भाई ब्रिजेश ने मुझे ब्लैकमेल करना शुरू किया और मुझसे पैसे माँगने लगे। उन्होंने मुझे मारने की धमकी भी दी। 12 नवंबर 2020 को मैंने इस बाबत एक शिकायत भी करवाई थी। रेनू ने फर्जी और बदनाम करने वाले आरोप सोशल मीडिया पर पोस्ट करने शुरू किए। सारे आरोप निराधार हैं और सब कुछ उनके पैसे लेने के लिए करुणा और ब्रिजेश के प्लान का हिस्सा है।”

इसके बाद मालूम हुआ कि करुणा और धनंजय ने बंबई हाईकोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने एक मध्यस्थ के जरिए आपसी विवाद सुलझाने का फैसला किया है। दूसरी ओर ये भी खबर आई कि गायिका रेनू शर्मा ने भी धनंजय मुंडे के खिलाफ दायर की गई अपनी शिकायत को वापस ले लिया। मगर, ताजा शिकायत से पता चलता है कि ये मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है न ही कोर्ट से बाहर इसे सुलझाने के प्रयास हो रहे हैं।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर (2020) में मुंडे ने हाई कोर्ट में मानहानि का एक मुकदमा दर्ज कर अनुरोध किया था। उसमें कहा गया था कि महिला को उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर उनकी निजी तस्वीरें एवं वीडियो पोस्ट करने से रोकने का आदेश दिया जाए। अदालत ने 16 दिसंबर को दिए अंतरिम आदेश में महिला को निर्देश दिया था कि वह अगले आदेश आने तक मुंडे की कोई निजी तस्वीर या वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड न करे।

ट्वीट के बदले रिहाना को मिले थे ₹18 करोड़, खालिस्तानी कनेक्शन भी आया सामने: रिपोर्ट

किसान आंदोलन के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुए अभियान के पीछे कनाडा स्थित पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) संगठन की ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ सामने आई है। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें सिक्योरिटी एस्टेब्लिशमेंट सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि इस अभियान को ‘कनाडा के नेताओं और कार्यकर्ताओं’ का समर्थन था।

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक , सूत्रों का मानना ​​है कि स्काईरॉकेट (Skyrocket), जो एक पीआर फर्म है और जिसका डायरेक्टर एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल है, ने आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करने के लिए पॉप स्टार रिहाना को 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। भारतीय करेंसी में यह 18 करोड़ रुपए से अधिक है।

सूत्रों का मानना है कि एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग द्वारा साझा किया गया टूलकिट भारत को बदनामी करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। धालीवाल, मरीना पैटरसन, पीआर फार्म्स में रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में काम करने वाली अनीता लाल, कनाडा में विश्व सिख संगठन के निदेशक और कनाडाई सांसद जगमीत सिंह जैसे लोगों ने जनता को भड़काने और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

अनीता लाल पोएट्री जस्टिस फाउंडेशन की सह-संस्थापक भी हैं। इस संगठन का नाम ग्रेटा थुनबर्ग द्वारा साझा किए गए टूलकिट में प्रमुखता से शामिल है। बता दें, यह पूरा मामला रिहाना द्वारा किसान विरोध-प्रदर्शन के पक्ष में ट्वीट करने के बाद शुरू हुआ है। उसने एक ट्वीट करते हुए लोगों से पूछा कि हम लोग क्यों नहीं इनके बारे में बात कर रहे हैं।

वहीं रिहाना के ट्वीट के बाद ही एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग और पोर्न स्टार मिया खलीफा भी भारत के इस मसले में कूद गई और अपना ज्ञान देना शुरू कर दिया। जब स्कूल छोड़ कर एक्टिविस्ट बनी ग्रेटा ने विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करने के बारे में अधिक जागरूकता फैलाने के लिए टूलकिट को साझा किया, तो इसने सोशल मीडिया पर इस पूरे एजेंडे की प्लानिंग का खुलासा कर भारत को बदनाम करने की इस साजिश का भंडाफोड़ कर दिया।

टूलकिट से खुलासा हुआ कि यह अभियान नवंबर 2020 से चल रहा है। 23 और 26 जनवरी पर इनकी बड़े स्तर पर इस प्रोपेगेंडा फैलाने की योजना थी। बता दें, भारत के लिए यह दोनों दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं।

जब भारत के खिलाफ चल रहे इस पूरे प्रोपेगेंडा का खुलासा हुआ तो देश के खेल जगत और मनोरंजन जगत के तमाम दिग्गजों ने खुलकर इसका विरोध किया। साथ ही लोगों से ऐसे विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए कहा। जिसके बाद ट्विटर पर #IndiaAgainstPropaganda #IndiaTogether नाम से हैशटैग ने काफी ट्रेंड किया।

गौरतलब है कि ग्रेटा थुनबर्ग ने जो दस्तावेज भूल से सार्वजानिक किया उसमें सोशल मीडिया पर इस पूरे एजेंडे की प्लानिंग की एक ‘पावर पॉइंट स्लाइड’ भी था। इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ है। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया’ पर किसानों से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा सामग्री की भरमार है और उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थक सामग्री भरपूर है।