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जिसने सुशांत के लिए लिखा- नखरे दिखाने वाला, उसने करण जौहर की मेहरबानी के बाद छोड़ी ‘पत्रकारिता’

अपने लेखों के जरिए सुशांत सिंह राजपूत की छवि धूमिल करने वाले फिल्म आलोचक राजीव मसंद ने ‘पत्रकारिता’ को अलविदा कह दिया है। उन्होंने करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन के नए वेंचर को बतौर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) ज्वाइन किया है। इस बात की जानकारी पत्रकार सौम्यादित्य ने ट्विटर पर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह बताया गया है कि पत्रकार राजीव मसंद अब धर्मा कॉर्नरस्टोन को अगले हफ्ते से ज्वाइन करने वाले हैं। वह वहाँ COO (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) के तौर पर ज्वाइन करेंगे। करण और अन्य शीर्ष अधिकारियों को लगता है कि इस पद के लिए राजीव बिलकुल सही व्यक्ति हैं और वह नई प्रतिभाओं की खोज में मदद करेंगे।

बता दें कि 15 दिसंबर 2020 को ही करण जौहर ने अपना नया वेंचर बंटी सजदेह की कॉर्नरस्टोन स्पोर्ट और मैनेजमेंट के साथ शुरू किया था। ये वही फर्म है जिसमें सुशांत सिंह राजपूत की प्रबंधक दिशा सालियान मैनेजर बनने से पहले काम करती थीं। 

कहा जा रहा है कि दिशा इसी फर्म के जरिए सुशांत के संपर्क में आईं थीं। इसके बाद जब जून 2020 में सुशांत और दिशा सालियान दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई तो सितंबर 2020 में सीबीआई ने इस कंपनी के सीईओ बंटी सजदेह को समन भेजा। ये समन सुशांत के फ्लैट में रहने वाले सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ के बाद बंटी को भेजा गया था, उसी ने अपने पहले बयान में यह नाम लिया था। 

सुशांत की मृत्यु के बाद मुंबई पुलिस ने राजीव मसंद को भी पूछताछ के लिए समन भेजा गया था, जिसके चलते बांद्रा थाने में उनसे पूछताछ भी हुई। इसके अलावा कंगना रनौत ने भी मूवी माफिया पर बात करते हुए राजीव मसंद का नाम लेकर कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत मामले में राजीव से पड़ताल होनी चाहिए।

गौरतलब है कि सुशांत के जाने के बाद कई लोगों ने बॉलीवुड के गिरोह को लेकर अपना गुस्सा व्यक्त किया था। इस बीच यह बात सामने आई कि एक्टर को बदनाम करने के लिए किसी के इशारे पर निगेटिव आर्टिकल लिखे जाते थे। इन लेखों में सुशांत की छवि बिगाड़ने का प्रयास हुआ। राजीव मसंद उन्हीं लोगों में से एक थे जिन्होंने टैलेंटेड एक्टर के लिए ‘skirt-chaser’, ‘overpaid outsider’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया। साथ ही उन्हें नखरे दिखाने वाला एक्टर भी कहा।

BHU में शुरू होगा हिंदू अध्ययन: प्राचीन शास्त्रों से लेकर सैन्य विज्ञान तक में छात्रों को किया जाएगा पारंगत

बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में हिंदू स्टडीज के नाम से पूर्णत: हिंदू धर्म व संस्कृति पर ही आधारित कोर्स की विधिवत शुरूआत की जा रही है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एक बार फिर राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थकता सिद्ध करने की दिशा उठ खड़ा हुआ है। आधुनिकता के साथ सनातन प्राचीन परंपरा की थाती संजोए BHU में छात्र अब वेद, पुराण, ब्राह्मण और श्रमण परंपरा के साथ रामायण, महाभारत, दर्शन, ज्ञान मीमांसा सहित हिंदू धर्म के वैशिष्ट्य और परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।

भारत अध्ययन केंद्र द्वारा स्नातकोत्तर की उपाधि देने वाले इस कोर्स का पाठ्यक्रम कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह की अध्यक्षता में बनारस और देश-विदेश के कई नामी-गिरामी आचार्याें द्वारा तैयार किया गया है, जिस पर हाल ही में कला संकाय प्रमुख की अध्यक्षता वाली बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई है।

बीएचयू, जेएनयू, आइआइटी-कानपुर समेत देश भर के विद्वानों ने बैठक कर फैसला लिया है कि भारत में पहली बार बीएचयू में हिंदू अध्ययन की शिक्षा दी जाएगी। हिंदू स्टडीज नामक नए कोर्स को 2021-22 के इसी सत्र से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत दो वर्षीय एम ए का कोर्स होगा, जो कि इसी सत्र 2021-22 से शुरू हो जाएगा।

भारत में यह पहला मौका है जब इस कोर्स के तहत देश में सनातन परंपरा, ज्ञान मीमांसा सहित तत्व विज्ञान लेकर सैन्य विज्ञान जैसे प्राचीन हिंदू शास्त्रों को एकेडमिक स्वरूप प्रदान किया गया है। इस कोर्स के अंतर्गत हिंदू धर्म के वैशिष्ट्य और परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम की रचना की गई है, जिसमें मुख्य रूप से तत्त्व, प्रमाण विमर्श, वाद परंपरा और शास्त्रों के अर्थ निर्धारण की पद्धति, पाश्चात्य ज्ञान मीमांसा, रामायण, महाभारत, स्थापत्य, लोकवार्ता, लोक-नाट्य कला, भाषा विज्ञान और प्राचीन सैन्य विज्ञान को विषय रूप में शामिल किया गया है।

ऑपइंडिया ने इस हिन्दू धर्म के अध्ययन की सम्पूर्ण परिकल्पना, कोर्स, इसकी आवश्यकता और उद्देश्यों को लेकर प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय से विस्तृत बातचीत की है। इससे पहले कि मैं उनसे बातचीत का व्यौरा दूँ आप यह जान लीजिए कि हिन्दू अध्ययन के इस डिज़ाइन के पीछे कौन सी प्रमुख हस्तियाँ शामिल हैं।

विशेष रूप से पाठ्यक्रम में निर्णय लेने के दौरान बोर्ड आफ स्टडीज की बैठक में कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर सिंह की अध्यक्षता में जेएनयू के प्रो. रामनाथ झा, आइआइटी-कानपुर के प्रो. नचिकेता तिवारी, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. ब्रजकिशोर स्वाई (ओडिशा), बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्र, लोकगायिका प्रो. मालिनी अवस्थी, प्रो. प्रद्युम्न शाह, प्रो. विमलेंद्र कुमार, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र वाराणसी के निदेशक प्रो. विजय शंकर शुक्ल, प्रो. राकेश उपाध्याय, प्रो. केशव मिश्र, डा. अर्पिता चटर्जी, प्रो. सदा शिव कुमार द्विवेदी समेत कई अन्य प्रमुख आचार्य मौजूद थे, जिन्होंने लंबे विचार-विमर्श के बाद पाठ्यक्रम पर अपनी संस्तुति दी।

ऑपइंडिया ने इसी कोर्स से जुड़े और बोर्ड ऑफ़ स्टडीज में शामिल प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय से बातचीत करके जानना चाहा इस कोर्स के उद्देश्यों के बारे में तो उनका साफ कहना था कि भारत में हिन्दू धर्म और शास्त्रों को लेकर मनमानी व्याख्या चल रही है। खासतौर से हमारे इतिहासकार जिनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जिनको संस्कृत भाषा तक नहीं पता लेकिन वो व्याख्या कर रहे हैं हिन्दू धर्म, शास्त्र और सनातन परंपरा की, जिनके अध्ययन का स्रोत ही विकृत है तो क्या व्याख्या करेंगे यह कोई भी समझ सकता है।

प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय का कहना था, “ज़्यादातर ऐसे विचारधारा के लोग हैं जिनका एकमात्र उद्देश्य हिन्दू धर्म और सनातन परंपरा से द्रोह के कारण अपने नैरेटिव के लिए हर जगह अनावश्यक डिबेट खड़ा करके उसे ख़ारिज करना है न कि उसे समझाना और उस पर वास्तविक विमर्श करना।”

उन्होंने कुछ इतिहासकारों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “कई ऐसे प्राचीन इतिहास के विशेषज्ञ बने हुए हिन्दू धर्म पर व्याख्यान देते फिर रहे हैं। इन्हें खुद मूल ग्रंथों का ज्ञान नहीं है। जो परंपरा से ऋग्वेद पढ़ रहे हैं उन्हें उसमें गाय काटने का वर्णन नहीं मिलेगा लेकिन जिन्हें हिन्दू धर्म को सिर्फ बदनाम करना है वह ऐसा कोई भी क्षेपक-प्रक्षेपक के सहारे जो भारत का है, जो इस राष्ट्र का गौरवशाली तत्व है उसे विकृत और दुष्प्रचारित करने में लगे हैं।”

साथ ही उन्होंने यह जोड़ा कि इस सम्पूर्ण अध्ययन का उद्देश्य किसी के साथ विवाद करना नहीं बल्कि आगे आने वाले दिनों में सनातन और हिन्दू धर्म को केंद्र में रखकर प्राचीन शास्त्रों से लेकर, योग, ज्ञान, सैन्य और शास्त्र परम्पराओं का समावेशन करते हुए अपनी विशिष्टताओं को उभारना है। इस पर शोध और लेखन को बढ़ाना है ताकि आगे आने वाली पीढ़ी अपनी विशिष्टतता को जानकर गौरवान्वित हो न कि ऐसे किसी भी दुराग्रह के कारण खुद को हीन समझे। हमारे मूल शास्त्रों ग्रंथों में बहुत कुछ ऐसा विशिष्ट है जिससे आज भी वह सनातन परंपरा इतना कुछ झेलते हुए भी अक्षुण्य है।

ऑपइंडिया से बातचीत में बुद्ध और जैन साहित्य पर भी चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाद में जो भी धर्म, मत या विचारधारा निकले उनका भी मूल सनातन ही है। उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ब्राह्मण से लेकर श्रमण परम्पराओं का अध्ययन भी इस अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। कैसे इस प्राचीन भूमि पर सनातन से ही बाकी परम्पराएँ किस तरह से निकली, कहाँ तक यात्रा की, उनके मूल में क्या था, उनके ज्ञान मीमांसा का स्रोत क्या रहा है इन सबको लेकर न सिर्फ शास्त्रीय बल्कि व्यावहारिक और प्रयोगात्मक दृष्टि से भी अध्ययन पर जोर दिया जाएगा।

प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है ताकि इसकी लोकप्रियता के साथ आगे चलकर इसमें नेट-जेआरएफ के साथ शोध को भी बढ़ावा मिले और आने वाली पीढ़ियाँ अपने वैशिष्ट्य को उसके मूल रूम में जान और समझ सकें न कि उसके विकृत स्वरुप को ही सत्य मानकर भ्रमित हों। ऐसा इस दिशा में तमाम विद्वानों का मत है।

किसने डिलीट किया पूजा भारती का फेसबुक अकाउंट? हाथ-पैर बाँध डैम में फेंकी गई थी MBBS छात्रा

झारखंड के हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रही पूजा भारती के मौत का राज और भी गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह बात सामने आ रही है कि पूजा का फेसबुक अकाउंट डिलीट किया जा चुका है।

पूजा भारती की मौत के मामले में जाँच कर रही एसआइटी की टीम हर एक पहलू को बारीकी से इन्वेस्टिगेट कर रही है। पुलिस की जाँच अलग-अलग स्थानों पर चल रही हैं। छात्रा के कमरे, घटनास्थल, ई-रिक्शा, बस कंडेक्टर और गार्ड का बयान के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और छात्रों के बयान को भी आधार मान कर पुलिस जाँच में जुटी है। मामले में अब तकनीकी दायरा भी बढ़ता जा रहा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पूजा के फ़ोन के डिटेल खँगाल रही है। साथ ही उसके फेसबुक अकाउंट से भी डाटा निकलने की तैयारी चल रही है। जिसके मद्देनजर पुलिस ने फेसबुक को पत्र लिख जाँच में सहयोग करने के लिए कहा है। कथित तौर यह बात सामने आई है कि छात्रा का फेसबुक अकाउंट डिलीट किया जा चुका है। हालाँकि इस संबध में फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस घटना पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस व झामुमो सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र ही इस मामले के आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया तो भाजपा सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी। पार्टी ने इस घटना पर पुलिस के रवैए को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरी घटना

पूजा भारती परीक्षा देने के लिए घर से निकली और लापता हो गई। बाद में उसकी लाश पतरातू डैम (Patratu Dam) से 12 जनवरी, 2021 सुबह बरामद हुई। 22 साल की पूजा भारती गोड्डा की रहने वाली थी।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लड़की का शरीर बँधा हुआ था और उसे बाँध में डुबोकर बेरहमी से मार दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आई है कि पूजा को जिन्दा ही डैम में फेंक दिया गया था। मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी में हुए पोस्टमॉर्टम में पूजा भारती के पेट से पानी निकला है। डॉक्टर्स का कहना है कि मरे हुए व्यक्ति के पेट में पानी नहीं पहुँच पाता है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूजा भारती को जिन्दा ही बाँधकर पानी में फेंक दिया गया।

पोस्टमॉर्टम में मृतका के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे। हत्या से पहले बलात्कार की आशंका की जाँच के लिए सैम्पल भेजे जा चुके हैं और इस पर अभी रहस्य बना हुआ है। पूजा भारती हत्या मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

केरल में नॉन हलाल रेस्तराँ खोलने वाली महिला से कहा- यह सब ठीक नहीं, फिर भी झुकी नहीं

तुशारा (Thushara) नाम की महिला ने केरल के एर्णाकुलम में एक नॉन हलाल रेस्तराँ खोला है। ट्विटर यूजर प्रतीश विश्वनाथ ने अपने अकाउंट के जरिए उनकी इस नई पहल की जानकारी दी है। उनके मुताबिक इस जगह सिर्फ़ गैर-हलाल खाना ही सर्व होता है और बाहर बैनर पर साफ-साफ यह लिखा है कि इस जलपान गृह में हलाल खाना प्रतिबंधित है।

तुशारा बताती हैं कि जब उन्होंने इसे शुरू किया तब कई मुस्लिमों ने उनके विचार का विरोध किया। लेकिन उन्होंने सभी की बातें सुनने के बाद भी अपने इस आइडिया पर काम किया। आज उन्हें इस रेस्तराँ को खोले डेढ़ साल बीत गए हैं। वह कहती हैं, “मुस्लिमों ने लगातार कहा कि ये सब ठीक नहीं है। जब भी हिंदू कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, मुस्लिम हस्तक्षेप जरूर करते हैं।”

एर्नाकुलम के इस रेस्तराँ में तमाम ग्राहक बिना किसी आपत्ति के खाना खाने आते हैं, जिसके आधार पर महिला कहती हैं, “जिन्हें मेरे नॉन-हलाल कॉन्सेप्ट से आपत्ति नहीं है उनका मैं स्वागत करती हूँ और जिन्हें परेशानी है, उनके पास यहाँ न आने का विकल्प है।”

महिला बताती हैं कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो बिना हलाल हुआ खाने को पसंद करते हैं इसलिए किसी के पास यह अधिकार नहीं है कि उन्हें हलाल खाना खिलाएँ। बाहर लगे बैनर के बारे में तुशारा कहती हैं कि भोजनालयों के बाहर गैर-हलाल बोर्ड रखने को इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

हलाल मीट का विरोध करने पर हो चुके हैं केरल में 4 लोग गिरफ्तार

गौरतलब है कि केरल में हलाल मीट को लेकर विवादों की सूची बहुत लंबी है। हाल में एक मामला आया था, तब ‘मोडी’ नाम की एक बेकरी पर हलाल मीट की उपलब्धता बताने के लिए स्टिकर लगा था, जिसे देखकर हिंदू संगठनों ने विरोध किया।

रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला संगठन की पराक्कड़वु (Parakkadavu) इकाई के अध्यक्ष अरुण अरविंद और कुछ अन्य लोगों के बेकरी में पहुँचने के बाद शुरू हुआ था। जहाँ उन लोगों ने गैर-हलाल भोजन की माँग की। लेकिन उन्हें वहाँ जानकारी दी गई कि वे सिर्फ़ हलाल खाना ही सर्व करते हैं। इसके बाद पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा और अरविंद समेत 4 गिरफ्तार कर लिए गए।

टाइम्स नाऊ के मुताबिक फिलहाल ये सब बेल पर हैं। लेकिन उनके संगठन ने हलाल खाने के विरुद्ध अपना कैंपेन और तेज कर दिया है। वह ऐसे उत्पादों और सेवाओं पर प्रतिबंध की माँग करते हुए अधिकारियों से संपर्क करने की योजना बना रहे हैं।

इसके अतिरिक्त केरल के ईसाइयों ने भी केरल में हलाल मीट के बॉयकॉट का आह्वान किया था। कोच्चि स्थित क्रिश्चियन ग्रुप चर्च ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन (CASA) ने ईसाइयों से आग्रह किया कि वे अब हलाल भोजन न खरीदें। वहीं हिंदू समूहों ने भी ईसाइयों का समर्थन किया, क्योंकि उन्हें वहाँ पर हलाल मीट बेचने के लिए मजबूर किया जाता है।

इसके बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इस पूरे अभियान को मुस्लिमों को टारगेट करने वाला अभियान बताया। मगर, CASA ने घोषणा की थी कि ईसाई क्रिसमस से कुछ दिन पहले अपना विरोध-प्रदर्शन करेंगे और इसके लिए गैर-हलाल तरीके से काटे गए जानवरों को खरीदने में पैसे लगाएँगे।

हलाल मीट क्या है?

हलाल मीट उसे कहा जाता है जिसकी पूरी प्रक्रिया में केवल मुस्लिम व्यक्ति ही शामिल हो। गैर मुस्लिमों को हलाल फर्म से जुड़ने की अनुमति भी नहीं होती। इस्लामी रिवाजों के मद्देनजर कुछ ऐसी शर्तें होती हैं जिसे हलाल के दौरान पूरा करना होता है। भारत में हलाल की सर्टिफिकेशन अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं, जो यह स्पष्ट करते है कि गैर-मुस्लिम कर्मचारियों को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता और इसमें सिर्फ़ मुस्लिम कर्मचारी ही होते हैं। इसमें यह भी साफ लिखा है कि गैर मुस्लिम द्वारा काटा गया जानवर का मीट हलाल में नहीं आता।

ED का कसा शिकंजा तो संजय राउत की पत्नी ने ‘बिना सूद वाला’ कर्जा चुकाया, PMC बैंक घोटाले की आरोपित की बीवी से मिला था लोन

बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी को समन किया था। अब प्रवर्तन निदेशालय ने खुलासा किया है कि राउत की पत्नी वर्षा ने बैंक घोटाले के आरोपित की पत्नी से लिए 55 लाख रुपए के ‘फ्रेंडली लोन’ को चुका दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्षा राउत ने एक रिश्तेदार के माध्यम से ईडी को दस्तावेज सौंपते हुए यह दावा किया कि उसने अपने पति द्वारा लिखी गई फिल्म ‘ठाकरे’ से प्राप्त पैसों से बैंक के कर्ज को चुका दिया है। बता दें वर्षा फ़िल्म ठाकरे की निर्माताओं में से एक थीं। इंटरेस्ट फ्री लोन लगभग एक दशक पहले लिया गया था।

वहीं वर्षा राउत के लोन के पैसे लौटाने वाले दावे पर बीजेपी नेता ने हमला बोला है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने ट्वीट कर लिखा, “संजय राउत कहते हैं कि उनकी पत्नी ने सारा पैसा लौटा दिया है। हिसाब तो देना ही होगा।” सौमेया ने आगे लिखा, “आखिर में संजय राउत साहब को पैसा वापस करना ही पड़ा, लेकिन हिसाब भी देना ही पड़ेगा।”

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खिलाफ जाँच कर रही है। आरोप है कि PMC बैंक स्कैम के आरोपित प्रवीण राउत की पत्नी और एक अन्य कंपनी ने कुल मिला कर वर्षा के अकाउंट में 67 लाख रुपए भेजे थे।

पीएमसी बैंक घोटाला मामले में वर्षा पूछताछ के लिए 4 जनवरी, 2021 को मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर पहुँचीं थी। तीसरी बार समन मिलने पर वर्षा ने ईडी के सामने हाजिरी लगाई थी। इससे पूर्व 2 समन भेजे जाने पर वह स्वास्थ्य आधार पर पेश नहीं हुईं थीं।

ED ने जानकारी दी थी कि प्रवीण राउत ने हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) के नाम पर अवैध लोन्स और अन्य मद में कुल 95 करोड़ रुपए की हेराफेरी की। प्रवीण राउत को किए गए पेमेंट्स के कई कागजात तक नहीं थे। HDIL के अकाउंट बुक से पता चलता है कि प्रवीण राउत ने पालघर में घर लेने के लिए ये रुपए लिए थे। इस आपराधिक लेनदेन में प्रवीण ने अपनी पत्नी माधुरी के अकाउंट में भी 1.6 करोड़ रुपए भेजे थे।

ED ने जानकारी देते हुए कहा कि इस रकम में से 55 लाख रुपए इंटरेस्ट फ्री लोन के नाम पर वर्षा राउत को ट्रांसफर किए गए। इनमें से 50 लाख रुपए दिसंबर 23, 2010 को ट्रांसफर किए गए थे। बाकी के 5 लाख रुपए मार्च 15, 2011 को भेजे गए थे।

ED ने बताया था कि इस रकम का इस्तेमाल मुंबई के दादर ईस्ट में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया। M/s अवनी कंस्ट्रक्शंस नामक कंपनी में वर्षा और माधुरी पार्टनर्स भी हैं। ओवरड्रॉन कैपिटल को लोन में बदल कर इस कंपनी के द्वारा भी वर्षा राउत को 12 लाख रुपए भेजे गए। मात्र 5625 रुपए के कंट्रीब्यूशन को आधार बना कर ये रकम वर्षा को भेजी गई।

‘मोदी जैसे गंदे लोगों को फाँसी पर लटका दूँगा’: बच्चा बोल रहा- NDTV-BBC से सीखा

अराजकतावादियों के लिए देश में घटनाक्रम कोई भी रहा हो, उन्होंने अपने लक्ष्य पर सबसे आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही रखा है। ऐसे वाकए यूँ तो लिबरल जमात अक्सर ही दोहराती आई है, लेकिन गत वर्ष शाहीनबाग के बहाने इस वर्ग ने अपनी घृणा को स्पष्ट रूप से जमीन पर उतारना शुरू कर दिया।

कुछ लोग किसान आंदोलनों को शाहीनबाग-2 की संज्ञा दे रहे हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘शाहीनबाग मॉडल’ को अपनाना भी है। हमने देखा कि पिछले कुछ समय से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देना ट्रेंड बन गया। इसके लिए तरीके भी बेहद ‘रचनात्मक’ अपनाए जाते रहे हैं।

मसलन, बच्चों के मुँह से ‘मोदी मुर्दाबाद’ बुलवाना, बच्चों से कहलवाना कि वो मोदी को गोली मारना चाहते हैं या फिर मोदी को फाँसी लगाना चाहते हैं। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा में बना हुआ है, जिसमें एक पगड़ी पहने हुए बच्चा ये कहते हुए देखा जा सकता है कि वो बड़े होकर मोदी को फाँसी लगाना चाहता है और जब उससे पूछा गया कि आखिर उसने ये कहाँ से सीखा तो बच्चा जवाब में NDTV और बीबीसी जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा मीडिया संस्थानों का नाम लेता है।

इंस्टाग्राम पर ‘Intrepid saffron’ नाम के अकाउंट ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें लिखा है, “अपने बच्चों को NDTV मत देखने दें, इस वीडियो को देखें।” ‘Intrepid saffron’ द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो पर लिखा है कि वामपंथियों के विषैले प्रोपेगेंडा को फ़ैलाने के लिए बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

इसमें सर पर पगड़ी पहने एक बच्चा कहता है, “मुझे ये भी लगता है कि ये जो मोदी है न, ये सारे पैसे लेकर भाग जाएगा। मैं बड़ा होकर आईएएस बनना चाहता हूँ। क्योंकि अगर मेरे जिले में ऐसे लोग पैदा हुए, वो गंदे लोग अगर मोदी की तरह पीएम हुए न, तो मैं उन्हें जेल में नहीं अंकल, फाँसी के ‘कंधे’ पर लटका दूँगा।”

इसके आगे जब एंकर बच्चे से पूछता है कि उसने आखिर ये सब कहाँ से सीखा तो बच्चे ने चैनल्स के नाम लिए- “एनडीटीवी और बीबीसी।”

यही वीडियो ट्विटर पर ‘आलू बोंडा’ नाम के अकाउंट द्वारा भी शेयर किया गया है। ‘आलू बोंडा’ ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “मोदी जैसे गंदे लोगों को फाँसी पर लटका दूँगा ~ नन्हा सरदार!”

हालाँकि, ये वीडियो कहाँ की है और कब की है यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया में किसान आंदोलनों के बीच बड़े स्तर पर शेयर किया जा रहा है। इससे पहले सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान भी इसी तरह बच्चों में जहर भरने के मामले सामने आए थे। याद दिला दें कि इसी प्रकार बच्चों का इस्तेमाल पिछले साल सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में हुआ था। लोगों ने अपने बच्चों को प्रदर्शन पर लाकर बिठा दिया था और बच्चों से नारे लगवाए गए थे, “जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा, जामिया तेरे खून से इंकलाब आएगा, जेएनयू तेरे खून से इंकलाब आएगा.. हम लड़कर लेंगे आजादी।”

नागरिकता कानून के विरोध के बाद कोरोना वायरस की महामारी के दौरान मध्य प्रदेश के इंदौर में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज हुए एक मुस्लिम परिवार के 6 साल के बच्चे ने नारा लगाकर कहा था कि हम मोदी को मारेंगे।

राजनीतिक हितों के नाम पर बच्चों का इस तरह इस्तेमाल सही चलन नहीं है, चाहे वह कोई भी समाज हो। हमारा इस खबर को प्रकाशित करने का मकसद है कि लोग अपने बच्चों को ऐसे तत्वों से दूर रखें जो उनके बालमन में इस प्रकार का जहर बोते हैं।

राम मंदिर के लिए राष्ट्रपति ने दिए ₹5 लाख, निधि समर्पण अभियान के पहले दिन वाल्मीकि मंदिर पहुँचे संघ प्रमुख

श्रीराम मंदिर निधि समर्पण अभियान की शुरुआत शुक्रवार (15 जनवरी 2021) को हुई। अभियान के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए शुभकामनाओं सहित 5 लाख रुपए की राशि दान की।

अभियान के तहत आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात की।

राष्ट्रपति से हुई मुलाक़ात के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी जी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, राम मंदिर निर्माण समिति के मुखिया नृपेन्द्र मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत अध्यक्ष कुल भूषण आहूजा मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह अभियान आगामी डेढ़ महीने तक चलेगा।  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता इस अभियान के अंतर्गत चंदा इकट्ठा करने के लिए 5 लाख गाँवों में जाकर लगभग 12 करोड़ परिवारों से संपर्क करेंगे। इसके अलावा दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने चंदे के लिए कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से मुलाक़ात की। साथ ही पदाधिकारी अलग-अलग प्रदेशों के मशहूर लोगों से मिल कर भव्य मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग की माँग करेंगे। 

आज ही संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंदिर मार्ग स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर में जाकर महामंडलेश्वर पूज्य संत कृष्ण शाह विद्यार्थी जी महाराज से निधि समर्पण के लिए संपर्क किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अयोध्या में राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के लिए एक लाख रुपए के सहयोग की राशि का चेक प्रदान किया। पदाधिकारियों से बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर को सौभाग्यशाली भी बताया।   

इसी क्रम में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री प्रणिता सुभाष ने भी ट्वीट करके लोगों से आर्थिक सहयोग करने का निवेदन किया था। अभिनेत्री ने ट्वीट में कहा, “मैं अयोध्या के राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के लिए 1 लाख रुपए की शुरुआती प्रतिज्ञा करती हूँ। मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप सभी इस ऐतिहासिक क्षण में सहयोग के लिए आगे आएँ।”     

अभियान की शुरुआत के पहले विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया था, “अभियान के लिए शुभकामना प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से भी समय माँगा गया है। इस अभियान में अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने के लिए विहिप और संघ के कार्यकर्ता देश भर के 5 लाख गाँवों में रहने वाले 12 करोड़ से ज़्यादा परिवारों से संपर्क करेंगे।” 

‘200 आतंकी मार गिराए, 300-400 घुसपैठ की ताक में’: सेना प्रमुख नरवणे ने कहा- व्यर्थ नहीं जाएगा गलवान का बलिदान

सेना दिवस (Army Day) के मौके पर सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने दिल्ली के करियप्पा मैदान में परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने 5 जवानों को उनके शौर्य और साहस के लिए सेना मेडल से सम्मानित भी किया। 10 पैरा स्पेशल यूनिट के नाइक संदीप को जम्मू-कश्मीर में दो आतंकियों का एनकाउंटर कर अपने कमांडर की जान बचाने के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अलावा सेना प्रमुख नरवणे ने आतंकवाद के प्रति भारतीय सेना के सख्त रवैये को लेकर भी कई अहम बातें कहीं।

उन्होंने कहा, “हम सभी उत्तरी बॉर्डर पर चीन के साथ बने तनाव के हालातों को अच्छे से जानते हैं। बॉर्डर पर यथास्थिति में बदलाव लाने के लिए रचे गए षड्यंत्र का कड़ा जवाब दिया गया था। मैं देश को भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि गलवान घाटी में किया गया सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम बातचीत और राजनीतिक मानकों की मदद से समस्या का हल निकालने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन इस बीच कोई हमारे धैर्य की परीक्षा करने की गलती नहीं करे।” 

सेना प्रमुख ने कहा, “बॉर्डर के इर्द-गिर्द प्रशिक्षण शिविरों में 300-400 आतंकवादी घुसपैठ करने की ताक में बैठे हैं। सीज़फायर उल्लंघन की घटनाओं में 44 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी हुई और ये पाकिस्तान के नापाक इरादों की पोल खोलता है। पिछले साल सेना ने एलओसी के नजदीक और आतंकवाद विरोधी अभियान में लगभग 200 आतंकवादियों को मार गिराया था।” 

सेना के आधुनिकीकरण को लेकर उन्होंने कहा, “सेना आधुनिकीकरण के लिए तमाम अहम कदम उठा रही है। आपातकाल (इमरजेंसी) और फास्ट ट्रैक योजनाओं के तहत सेना ने 5000 करोड़ रुपए के उपकरण खरीदे और 13000 करोड़ का समझौता किया। हमने पिछले कुछ वर्षों में सेना को अत्याधुनिक बनाने के लिए और भी कई ज़रूरी कदम उठाए हैं।” 

‘बेकार आवाज वाली लता ने लोगों के करियर बर्बाद किए’: लिबरलों की दुलारी ‘कावेरी’ को नेटिजन्स ने लताड़ा

बॉलीवुड गायिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज पर बहस छिड़ी हुई है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब कावेरी नाम की एक ट्विटर यूजर ने कहा कि लता मंगेशकर की आवाज ‘ओवर रेटेड’ है और उन्होंने इंडस्ट्री में लोगों के करियर बर्बाद किए। इसके बाद ट्विटर पर मौजूद तमाम लोग ये ट्वीट करने वाली कावेरी के पक्ष और विपक्ष में लिखने लगे।

दरअसल, कावेरी नाम की एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “भारतीयों को ये मानने के लिए ब्रेनवॉश किया गया है कि लता मंगेशकर की आवाज़ अच्छी है। यही नहीं, उनकी आवाज़ बिगड़ी हुई और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल की हुई (ओवर यूज्ड) है।”

कावेरी के इस ट्वीट पर अब तक लगभग डेढ़ हजार रीट्वीट और करीब साथ हजार लाइक भी आ चुके हैं। उन्होंने इस पर एक नहीं बल्कि कई ट्वीट करते हुए लिखा, “लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ की उम्र से अधिक गाने गाए। संगीत से जुड़े जो लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते, वो इसलिए क्योंकि लता मंगेशकर पावरफुल थीं और इसलिए कोई उनसे भिड़ना नहीं चाहता था। लता मंगेशकर लोगों को तबाह करने का दम रखती थीं।”



जब यह विवाद बढ़ने लगा तो कावेरी ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्होंने ये बात पहले भी कई बार कही लेकिन तब उन्हें इस स्तर तक नहीं सुना गया था।

कावेरी ने लता मंगेशकर को लेकर ट्वीट जारी रखते हुए लिखा, “मुझे खुशी है कि उन्होंने उमराव जान के लिए गाना नहीं गाया। पाकीजा तक वो मुझे इतनी बुरी नहीं लगीं, इसलिए मुझे इससे ज्यादा ऐतराज नहीं है। मुझे इन दोनों ही फिल्मों के ओएसटी पसंद हैं।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि लता मंगेशकर ने अकेले ही कई लोगों के करियर तबाह किए, जिनमें से एक अनुराधा पौढ़वाल भी हैं। इस पर कावेरी ने जवाब में लिखा कि वो बस ये कहने ही वाली थी और लता मंगेशकर रेखा भारद्वाज के साथ भी यही करती अगर वो समकालीन होते।

कावेरी के ही इस ट्विटर थ्रेड पर एक अन्य यूज़र ने भी अपनी सहमति जताते हुए कुछ और उदाहरणों का भी जिक्र करते हुए लिखा, “इसके बाद आप कहेंगे कि शाहरूख खान हमेशा ओवर एक्टिंग करते हैं, सचिन तेंदुलकर को आवश्यकता से अधिक महत्त्व दिया गया और अमिताभ बच्चन को रिटायर हो जाना चाहिए, अब उन्हें झेलना मुश्किल है। मैं इनमें से किसी भी बात से अहसहमत नहीं हूँ।”

इसके बाद इस विवाद में कूदने वालों में गायक अदनान सामी भी मौजूद थे। उन्होंने लता मंगेशकर के बचाव में ट्विटर पर लिखा, “बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।” साथ ही उन्होंने कहा कि मुँह खोलकर दुनिया को अपनी मूर्खता के बारे में बताने के बजाय चुप रहना चाहिए।

रमेश श्रीवत्स ने भी लता मंगेशकर के समर्थन में ट्वीट करते “लता मंगेशकर के खिलाफ ज़हर उगलना बंद करिए। अगर आज तक किसी भी इंसान की आवाज़ इतनी परफेक्ट रही है कि उसे किसी संगीत वाद्य की तरह इस्तेमाल किया जा सके तो वह लता मंगेशकर की आवाज़ है। वो एक वाद्य यंत्र जैसी परफेक्ट हैं, जिसमें भावनाएँ भी हैं।”

‘ममता दीदी की पतंग तो कटेगी’: अब MP शताब्दी रॉय ने दिखाए बागी तेवर, 16 जनवरी को बड़ा ऐलान संभव

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की आंतरिक लड़ाई थमती नजर नहीं आ रही है। पार्टी सांसद शताब्दी रॉय ने अब बागी तेवर दिखाए हैं। वहीं भाजपा महासचिव और बंगाल के पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने 41 टीएमसी विधायकों के संपर्क में होने का दावा किया है।

विजयवर्गीय ने कहा, “बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से सत्ता कभी भी छूट सकती है। हमारे पास तृणमूल कॉन्ग्रेस के लगभग 41 विधायकों की सूची है, जो भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी बदलने के लिए तैयार हैं। अगर हमने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया तो ममता बनर्जी की सरकार किसी भी समय गिर जाएगी। लेकिन हम उन नामों की पड़ताल कर रहे हैं क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि कोई नकारात्मक पृष्ठिभूमि का व्यक्ति हमारी पार्टी का हिस्सा बने। ममता जी की पतंग तो कटेगी 100%, क्योंकि हमने इतनी ढील दी है। अब तो एक हाथ खींचेंगे और सरकार गिर जाएगी। इसलिए हमें विश्वास है कि ममता जी की पतंग तो गई।”  

इधर टीएमसी सांसद और अभिनेत्री शताब्दी रॉय ने फेसबुक पर जनता के नाम पोस्ट लिख कर अपना दुःख और पार्टी के प्रति गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “मेरे निर्वाचन क्षेत्र बीरभूम के लोगों का 2021 बहुत अच्छे बीते, लोग स्वस्थ रहें। मेरा पार्टी के साथ गहरा रिश्ता रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से लोग मुझसे लगातार पूछ रहे हैं मैं कार्यक्रमों में क्यों नहीं नज़र आती हूँ? मैं उन्हें बताना चाहती हूँ कि मुझे लोगों से मिलना और उनके बीच रहना पसंद है लेकिन तमाम ऐसे लोग हैं ये नहीं चाहते हैं।” 

शताब्दी रॉय ने उन लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है लेकिन इतना ज़रूर कहा है कि वह 16 जनवरी दोपहर दो बजे स्पष्ट करेंगी कि उनका अगला कदम क्या होगा।   

इस बीच विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मद्देनज़र रखते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष, अमिताव चक्रवर्ती, मुकुल रॉय और संगठन के अन्य नेता केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक के लिए दिल्ली का दौरा करेंगे। फ़िलहाल इस बैठक के एजेंडे को लेकर जानकारी स्पष्ट नहीं है लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा होगी। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल के चुनाव संभावित तौर पर अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकते हैं।