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सिलीगुड़ी में BJP कार्यकर्ता की मौत से बंगाल पुलिस ने किया किनारा, कहा-किसी ने पास ने दागी शॉटगन, अब CID करेगी जाँच

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भाजपा कार्यकर्ता की मौत के बाद पार्टी ने आज (दिसंबर 8, 2020) वहाँ 12 घंटे का बंद बुलाया है। इस बीच राज्य पुलिस ने भी कार्यकर्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अपना बयान दिया है। 

पुलिस ने कहा है कि कार्यकर्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसकी मृत्यु शॉटगन से लगी चोट के कारण हुई है। अब पुलिस इस रिपोर्ट के आधार पर खुद पर लगे इल्जामों को खारिज कर रही है।

पुलिस का कहना है, “पुलिस शॉटगन इस्तेमाल नहीं करती। तो जाहिर है कि कल सिलीगुड़ी में हुए प्रदर्शन के दौरान हथियार बद्ध लोग लाए गए थे और उन्होंने हथियार से गोली दागी।”

पुलिस ने कहा है कि मृतक को किसी पास खड़े शख्स द्वारा पास चोट पहुँचाई गई। वहाँ पहले से हथियारों का उपयोग करके हिंसा पैदा करने की मंशा थी। अब पश्चिम बंगाल की सीआईडी इसकी जाँच करेगी। सच्चाई बाहर आएगी और जिसने भी इस अपराध की साजिश रची और अंजाम दिया उसे बख्शा नहीं जाएगा।

उल्लेखनीय हैं कि कल भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने बंगाल सरकार के खिलाफ ‘उत्तरकन्या अभिजन’ के तहत दो स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे।  इसी प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। 

मार्च के दौरान दोपहर करीब दो बजे सिलीगुड़ी के तीनबत्ती पर भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोर्चाबंदी करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी पुलिस बल को बुलाया गया। इस झड़प में कई पत्रकार, भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस के जवान घायल हो गए हैं। वहीं एक बीजेपी कार्यकर्ता की मौत भी हो गई है। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी।

घटना पर प्रक्रिया देते हुए सांसद और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कहा, “पुलिस ने भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर आँसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उन्हें यूनिफॉर्म उतार कर टीएमसी गुंडों को ज्वाइन कर लेना चाहिए। भाजपा के कई कार्यकर्ता उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हो गए। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।” 

अम्बानी के जियोमार्ट और पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाना है किसानों का मकसद, बाजार बंद तो बहाना है – गुप्त सूत्र से खुलासा

किसानों ने आज अपनी माँगों को लेकर भारत बंद की घोषणा की है जिसके व्यापक रुझान विदेशों में रह रहे एक-आध भारतीय किसानों के फेसबुक पोस्ट में देखने को मिल रहे हैं। लेकिन इस भारत बंद के पीछे छुपी एक गहरी साजिश का पर्दाफाश हमारे एक ख़ुफ़िया रिपोर्टर कॉमरेड पैट्रिक जिन्ना ने कर डाला है।

आज किसानों द्वारा किए गए भारत बंद की वास्तविकता को सामने रखते हुए हमारे ख़ुफ़िया रिपोर्टर कॉमरेड पैट्रिक जिन्ना ने बताया कि ये भारत बंद और कुछ नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अम्बानी सहित तमाम पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने की साजिश का ही पहला चरण है।

इस दावे पर हैरानी जताते हुए जब हमने उनसे पूछा कि आखिर किन तथ्यों के आधार पर वो इतना बड़ा खुलासा कर रहे हैं, तो इस पर हमारे ख़ुफ़िया रिपोर्टर ने हमें बताया कि वह भी सोशल मीडिया पर किसानों के हितों को लेकर कई बार हैशटेग चला चुके हैं इस कारण वह भी अब एक किसान ही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे ये सभी किसान पूँजीपतियों से मिले हुए हैं और भारत बंद कर के वो और कुछ नहीं बल्कि लोगों के बीच अम्बानी के जियोमार्ट, फ्लिपकार्ट, अमेजन आदि की लोकप्रियता को ही बढ़ा रहे हैं। और इनकी लोकप्रियता बढ़ने का मतलब है पूँजीपतियों की आमदनी में वृद्धि। गौरतलब है कि ये वही पूँजीपति हैं जिनके खिलाफ ढपली बजा बजाकर आज भी वामपंथी सड़कों पर माँगकर बीड़ी पीने को मजबूर हैं।

उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जब सारे ‘अन्नदाता किसान’ सालभर सड़कों पर रहेंगे और सिर्फ बिवाइयों की HD फोटोग्राफी ही करते रहेंगे तो मार्केट से सब्जियाँ और चावल अपने आप ही गायब होने लगेंगे। ऐसे में निजी क्षेत्र के पूँजीपति सब्जी उगाकर अपने ही ऑनलाइन ऐप्स पर बेचना शुरू कर देंगे और लोगों के घरों तक पहुँचा देंगे। बाजार भी अगर बंद हो गए तो ऑनलाइन सामान बेचने वाले कॉर्पोरेट घराने भी चोखी कमाई करेंगे। भले ही, टायरों में हवा भरने और पंचर बनाने के व्यवसाय वालों का दावा है कि ‘साहेब’ सामान तो ऑनलाइन बेच लेंगे लेकिन पंचर साटने और ट्यूब बदलने का काम भी डिजिटल कैसे करते हैं… हम भी देखेंगे।

रिपोर्टर जिन्ना ने कहा कि यह एक बड़ा ‘मास्टर गेम’ खेला जा रहा है, जिसका नतीजा डिजिटल इंडिया की सफलता के रूप में सामने आना है। उन्होंने कहा कि आज कुछ किसान ऐसे भी थे, जो भारत बंद के बावजूद उनके साथ खड़े नहीं थे, वो यूट्यूब पर जो वीडियो देखते पकड़े गए उनका शीर्षक था- ‘इंस्टाग्राम में फ़ॉलोअर्स कैसे बढ़ाएँ।’

इन किसानों का कहना है कि वो दिलजीत दोसाँझ जैसे किसानों से प्रेरित हैं और अब उन्हें भी असली मार्किट की पहचान हो गई है। साथ ही, उन्होंने कहा कि ‘हम किसान-विसान नहीं हैं, हम तो यहाँ बस गीता भाटी की सैंडिल ढूँढने आए हैं।’

74 साल की सोनिया गाँधी ने किया बड्डे कैंसल… देश के हर बच्चे ने दुख में तोड़ डाली पेंसिल

किसानों की माँगों को देखते हुए अब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी अपना जन्मदिन ना मनाने का ऐलान किया है। सोनिया गाँधी का कहना है कि जब उनका 50 साल का बेटा देश के लिए अभी तक युवा है तो फिर वो अपने 74वें ‘स्प्रिंग’ में पहुँचने पर आखिर कैसे युवा नहीं हो सकतीं? वो भी तब जबकि वो इंदिरा गाँधी की बहु हैं और लोगों को इस दिन उनका जन्मदिन मनाकर पुण्य मिलना था। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए उनका जन्मदिन ना मानने का फैसला ऐतिहासिक ही माना जाना चाहिए।

हालाँकि, सोनिया गाँधी पर यह भी आरोप लगे हैं कि उनके इस फैसले से उनके जन्मदिन पर कितने ही लोगों के केक बनाने से लेकर उसे बाँटने वालों तक के रोजगार पर कैंची चली है। इस नुकसान पर सोनिया गाँधी ने कहा- ‘इसमें तेरा घटा मेरा कुछ नहीं जाता।’ इसके अलावा, जो पुण्य इस अवसर पर जनता सोनिया गाँधी को जन्मदिन की बधाई देकर कमा सकती थी, वह अब इससे भी वंचित रहेगी और यही किसान विरोधियों की सजा भी तय की गई है।

ब्रिटेन में टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू, 90 साल की महिला मरीज को दी गई Covid वैक्सीन की पहली खुराक

दुनिया में कोरोना वायरस ने कहर मचाया हुआ है। हालाँकि, अब वैक्सीन के कारण कोरोना वायरस (कोविड-19) के खत्म होने की उम्मीद की जा रही है। इस क्रम में दुनिया में कोरोना वैक्सीन को दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। ब्रिटेन (यूके) में लोगों को कोरोना वैक्सीन दिए जाने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरूआत हो चुकी है। इस दौरान उत्तरी आयरलैंड की एक 90 वर्षीय महिला यूके के सामूहिक टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत में फाइजर/बायोएनटेक कोविड वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) लगाने वाली दुनिया की पहली शख्स बन गई हैं।

उत्तरी आयरलैंड की 90 साल की महिला मार्गरेट कीनन को ट्रायल से इतर दुनिया में पहला कोरोना वायरस का टीका दिया गया है। कीनन ने मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) की सुबह 06:31 GMT पर कोवेंट्री, मध्य इंग्लैंड में स्थानीय अस्पताल में (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) टीका लिया।

एनिस्किलीन की मार्गरेट कीनन ने कहा है कि उन्हें कॉवेंट्री के यूनिवर्सिटी अस्पताल में कोरोना वायरस की वैक्सीन हासिल करते हुए विशेषाधिकार महसूस हुआ दरअसल, यूके में 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के अलावा कुछ स्वास्थ्य और देखभाल कर्मचारियों का टीकाकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य सबके जीवन को फिर से सामान्य करना है।

वहीं दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन लेने के बाद कीनन ने कहा, “दुनिया में कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन लेते हुए मुझे विशेषाधिकार महसूस हुआ है। यह मेरे लिए सबसे अच्छा जन्मदिन है। यह मेरे जन्मदिन से पहले का सबसे अच्छा तोहफा है। अब मैं नए साल में अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए तैयार हूँ।” बता दें कि मार्गरेट कीनन अगले हफ्ते 91 साल की हो जाएँगी।

कीनन अपने दोस्तों के बीच ‘मैगी’ के नाम से जानी जाती है। वह पूर्व में ज्वैलरी शॉप में असिस्टेंट थी। चार साल पहले वह वहाँ से रिटायर हुईं। उनकी एक बेटी, एक बेटा और चार पोते हैं।

वहीं उत्तर-पूर्वी इंग्लैंड के भारतीय मूल के 87 वर्षीय हरि शुक्ला दुनिया के उन कुछ पहले लोगों में शामिल होंगे, जिन्हें कोविड-19 का टीका लगेगा। शुक्ला को न्यूकैसल में एक अस्पताल में ‘फाइजर/बायोनटेक’ (Pfizer-BioNTech) की ओर से विकसित टीका लगाया जाएगा। टाइन एंड वेयर के निवासी शुक्ला ने कहा कि उन्हें लगता है कि अपने टीके की पहली दो खुराक लगवाना उनका कर्तव्य है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस पल को ‘एक बड़ी प्रगति’ बताया और ब्रिटेन में मंगलवार को ‘वी-डे’ या ‘वैक्सीन डे’ होने की बात कही। शुक्ला ने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ कि अंतत: हम इस वैश्विक महामारी के अंत की ओर बढ़ रहे हैं और मैं खुश हूँ कि टीका लगवा कर मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा हूँ। मुझे लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है और मदद के लिए जो हो सकेगा वह मैं करुँगा।”

बता दें कि पिछले हफ्ते नियामकों की ओर से कोरोना वैक्सीन के उपयोग को मंजूरी देने के बाद फाइजर वैक्सीन का उपयोग शुरू करने वाला ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बन गया है। वहीं ब्रिटेन में केयर होम्स में रहने वाले लोगों और कर्मचारियों को वैक्सीन लगेगी। इसके बाद 80 साल से ऊपर के बुजुर्ग और स्वास्थ्यकर्मियों को लगाई जाएगी। फिर 75 साल से ऊपर के बुजुर्गों को वैक्सीन दी जाएगी। इसके बाद 70 साल और फिर 65 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन मिलेगी। इसके बाद 18 से 65 साल वाले वो लोग, जिनमें जोखिम ज्यादा है, उन्हें वैक्सीन के दायरे में रखा जाएगा। फिर 18 से 65 साल के वो लोग जिनमें रिस्क थोड़ा कम है, उन लोगों को वैक्सीन लगेगी।

जिसे दिल्ली पुलिस कह रही फेक न्यूज, उसे NDTV की पूर्वकर्मी निधि राजदान बता रही- ‘कश्मीर मॉडल’, जानिए क्या है मामला

किसानों के भारत बंद के आह्वान को दिल्ली की केजरीवाल सरकार कल तक अपना पूरा समर्थन दिखा रही थी। मगर, आज इसे विफल होता देख, AAP ने आरोप लगाया है कि सीएम अरविंद केजरीवाल को गृह मंत्रालय ने हाउस अरेस्ट करवा दिया है। हालाँकि, पुलिस ने इस खबर को फर्जी और निराधार कहकर खारिज कर दिया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उत्तर दिल्ली के डीसीपी एंटो एल्फॉन्स ने स्पष्ट शब्दों में सीएम आवास के बाहर पुलिस तैनाती को बिलकुल सामान्य बताया है। उन्होंने कहा है कि ये तैनाती सुरक्षा के लिहाज से की गई है ताकि आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियों में झड़प न हो। ये हाउस अरेस्ट नहीं है।

इसके बावजूद एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान इस पर झूठ फैलाने के लिए आगे आई हैं। उन्होंने एक ऐसे हाउस अरेस्ट को कश्मीर मॉडल से जोड़ा है जिसे दिल्ली पुलिस पहले ही झूठा और निराधार बता चुकी है। निधि ने सीएम केजरीवाल के प्रति अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए लिखा, “कश्मीर मॉडल, जिसे दिल्ली सीएम ने भी तब समर्थन दिया था, आज दिल्ली आ गया है।”

निधि का यह ट्वीट देखकर कई लोगों ने इसे पूरी तरह से फेक न्यूज कहा है और आम आदमी के साथ उन्हें भी एजेंडा चलाने वाला बताया है।

वहीं कुछ आप समर्थकों ने पूछा है कि आखिर अरविंद केजरीवाल ने नेताओं को नजर बंद की जाने वाली बात को कब समर्थन दिया? इन समर्थकों का कहना कि आज लुटियन दिल्ली वाले खुलकर केजरीवाल के प्रति नफरत दिखा रहे हैं। क्या वह ऐसी चीज तब कहेंगे जब इसी तरह का काम पत्रकारों के साथ होगा।

वहीं किरण जीत सिंह नाम के यूजर ने निधि को समझाया है, “अनुच्छेद 370 को हटाने का समर्थन करना हाउस अरेस्ट को समर्थन देने से बहुत अलग है। अपना झूठ बोलना बंद करो। अपना एजेंडा चलाना बंद करो। कितनी पाखंडी हो?”

तब भारत बंद बहुत बुरा रहा, गलत राजनीति था: अभी बंद पर नाच रहे लिबरल्स की असलियत समझने के लिए चलिए 8 साल पीछे

‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में देश भर में कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने ‘भारत बंद’ का आयोजन कर रखा है और केंद्र सरकार के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन जारी है, जिसके तहत दुकानों वगैरह को जबरदस्ती बंद कराया जा रहा है। इसी बीच पत्रकारों का लिबरल गिरोह जिसे ये बंद आज बड़ा ही खूबसूरत लग रहा है, कभी बंद विरोधी हुआ करता था। यानी, आज जब ये अराजकता मोदी सरकार के खिलाफ फैलाई जा रही है, तो सभी इसे चाशनी में डाल कर चूसने को बेताब हैं।

सबसे पहले बरखा दत्त की बात। मई 2012 में जब पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे थे तो यूपीए सरकार के खिलाफ भारत बंद आयोजित किया गया था। तब बरखा दत्त ने कहा था कि ये भारत बंद लोकतंत्र में विरोध का सबसे बुरा तरीका है और इससे किसी को मदद नहीं मिलती, इससे कोई वजह पूरी नहीं होती। वही बरखा दत्त अब इस आंदोलन का महिमामंडन करने में लगी हैं और ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों को महान साबित कर रही हैं।

अब इस विरोध प्रदर्शन के महिमामंडन में लगीं बरखा दत्त

अब आते हैं राजदीप सरदेसाई। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, गैस सब्सिडी घटाने और बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में सितम्बर 2012 में यूपीए सरकार के खिलाफ हुए भारत बंद में जब सरकार को समर्थन दे रही पार्टियाँ भी शामिल थीं, तब राजदीप ने लिखा था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने बंद को असंवैधानिक घोषित कर रखा है, फिर बंद क्यों? वहीं अब वो इस बात से नाराज दिख रहे हैं कि भाजपा शासित राज्यों में पुलिस दुकानदारों को दुकानें खुली रखने के लिए ‘चेता’ रही है।

राजदीप सरदेसाई अब ‘भारत बंद’ का प्रचार करने में लगे हैं

इसी तरह मई 2012 में संगीतकार विशाल डडलानी ने गर्व के साथ घोषित किया था कि वो ‘अव्यवहारिक’ बंद की अवहेलना करने में सफल रहे। उन्होंने लिखा था कि वो न सिर्फ काम पर गए, बल्कि घूमे भी और सामान्य दिनों की तरह अपनी ज़िंदगी जी। उन्होंने बंद का आयोजन करने वाले नेताओं के लिए ‘Suck On That’ भी लिखा। अब? अब वो कह रहे हैं कि वो ख़ुशी से इस बंद के साथ हैं। ये भारत बंद भी राजनीतिक दलों का ही है, फिर भी विशाल डडलानी इसे ‘किसानों का नेताओं के खिलाफ’ बंद मान रहे।

वहीं NDTV के तो कहने ही क्या। मई 2012 में वो कह रहा था कि आम आदमी के नाम पर राजनीति की जा रही है और ‘भारत बंद’ भी इसी का नतीजा है। अब एनडीटीवी हर राज्य में ‘भारत बंद’ का समर्थन कर रहे राजनीतिक दलों को लेकर लगातार खबरें चला रहा है और विशेषज्ञों के हवाले से डर फैला रहा है कि कैसे अर्थव्यवस्था लगातार नीचे गिर रही है। वो बता रहा है कि कैसे सभी विपक्षी पार्टियाँ बंद के समर्थन में हैं।

अब देखिए रवीश कुमार को। उन्होंने मई 2012 में ‘ट्रेन रोको, रास्ता रोको, रोको सारा इंडिया, तेल बढ़ेगा देश जलेगा, कैसे चलेगा इंडिया, पार्टटाइम पॉलिटिक्स का हो रहा है डांडिया’ जैसी पंक्तियाँ लिख कर बंद का विरोध किया था। अब वो ट्विटर पर तो सक्रिय नहीं हैं, लेकिन अब वो सरकार के खिलाफ रोज कुछ न कुछ लिख कर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लगे हैं। फ़िलहाल ‘भारत बंद’ पर वो मौन साधे हुए हैं।

ममता बनर्जी ने तो अपने वफादार नेताओं को भेज कर सिंघु सीमा पर जमे किसान नेताओं और इच्छाधारी प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव से बात भी की। वो इस ‘भारत बंद’ का भी समर्थन कर रही हैं। वहीं सितम्बर 2012 में उन्होंने इसे ‘बंद राजनीति’ का नाम देते हुए कहा था कि वो इन चीजों का समर्थन नहीं करतीं। ये अलग बात है कि खुद अपने राज्य में कृषि सुधार कानूनों को वो 2014 में ही लागू कर चुकी हैं।

हालाँकि, लिबरल गिरोह की तमाम कोशिशों के बावजूद महाराष्ट्र के पुणे में तो भारत बंद के बावजूद सब्जी मंडियाँ खुली हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने इस पर कहा, “हम किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हैं, लेकिन हमने बाजार खोले हुए हैं ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाली फसल स्टोर की जा सके और वह खराब न हो। इन्हें हम कल ही बेचेंगे।” दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों की यही स्थिति है लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। 

केजरीवाल के ‘झूठ’ को कपिल मिश्रा की चुनौती: हाउस अरेस्ट और भारत बंद पर दिल्ली CM की बोलती बंद

किसानों की ओर से बुलाए गए भारत बंद के बीच आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गृह मंत्रालय के इशारे पर उनके घर में हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस दावे को झूठा बताया है और पुलिस ने भी इस इल्जाम को खारिज किया है।

AAP पार्टी ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी की मदद से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घर में ही हाउस अरेस्ट कर दिया है। पार्टी का कहना है कि कल सिंघू बॉर्डर से लौटने के बाद उनके घर के आस-पास घेराबंदी की गई। मुख्यमंत्री की सभी बैठकें भी रद्द हो गई हैं।

मीडिया खबरों में AAP सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि गृह मंत्रालय के आदेश पर पुलिस ने दिल्ली नगर निगम के तीनों मेयर को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठा दिया है और इसका बहाना बना कर पुलिस ने मुख्यमंत्री के घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी। 

आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने मीडिया से कहा, “हमारे विधायकों को भी मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया जा रहा है। हम मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करेंगे और उनसे मिलकर उन्हें घर से निकालेंगे ताकि वह किसानों के साथ खड़े हो सकें।”

एक ट्वीट में AAP ने कहा, “भाजपा की दिल्ली पुलिस ने सीएम अरविंद केजरीवाल को कल सिंघू बॉर्डर पर किसानों से मिलने के बाद घर में नजरबंद कर दिया है। किसी को भी अपने निवास छोड़ने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।”

आम आदमी पार्टी के आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। नॉर्थ डीसीपी ने साफ कहा, “ये आरोप झूठे और निराधार हैं। हमारी फोर्स तैनात हैं। अरविंद केजरीवाल कल 8 बजे भी निकले थे और 10 बजे के बाद भी बाहर आए थे।” वहीं, भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सभी आरोपों को झूठा बताते हुए इसे भारत बंद की विफलता से जोड़ा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं चुनौती देता हूँ अरविंद केजरीवाल को, हाउस अरेस्ट का झूठ बोलना बंद करें। बाहर निकल कर दिल्ली का एक भी मार्केट या बाजार या इंडस्ट्रियल एरिया दिखाएँ, जो बंद हो। पूरी दिल्ली में कहीं भी एक भी जगह बंद का असर दिखाएँ? दिल्ली वालों ने बंद को फ्लॉप कर दिया है।”

बता दें कि आम आदमी पार्टी लगातार सीएम के हाउस अरेस्ट को लेकर मीडिया में बयानबाजी कर रही है लेकिन, अरविंद केजरीवाल या उनकी पार्टी की ओर से कपिल मिश्रा की चुनौती का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है और न ही किसी नेता ने मंडी में जाकर बंद का फोटो भेजा है। उधर, सोशल मीडिया पर लगातार दावे हो रहे हैं कि भारत बंद का प्लॉन फ्लॉप हो चुका है और हर बाजार खुले हैं।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी जिन मेयरों के धरने को गृह मंत्रालय की साजिश बता रही है, उसे लेकर भी धरने पर बैठे लोगों की माँग है कि आम आदमी पार्टी सरकार उनका 13000 करोड़ का बकाया चुकाए, तो वो चले जाएँगे। ये प्रदर्शनकारी बाकायदा हिसाब देकर अपना पैसा माँग रहे हैं। ये सब कल से सीएम आवास के बाहर बैठे हैं, अगर स्थिति इनकी वजह से बिगड़नी होती तो कल सीएम न घर आ पाते और न 8 या 10 बजे घर से निकल पाते।

सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन पर बैठे लोगों की वीडियो में कल उन्हें कहते सुना गया था कि केजरीवाल सरकार ने उनसे वादा किया था कि सारा बकाया चुकाया जाएगा और उनसे यह भी कहा गया था कि वह लोग उनसे आकर कभी भी मिल सकते हैं। प्रदर्शनकारी शिकायत करते हैं कि कल सुबह जब वे मुख्यमंत्री से मिलने पहुँचे तो उनसे कहा गया कि सीएम उनसे मिलेंगे, लेकिन थोड़ी देर बाद सीएम कुछ कहे और बिना उनसे मिले चले गए।

इस के बाद तीनों मेयरों और अन्य अधिकारियों ने मिल कर वहाँ धरना नहीं दिया। साथ ही ऐलान किया, “उन्होंने अगर हमारा पैसा क्लियर किया तो ही हम यहाँ से जाएँगे, वरना सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यदि दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर आई तो उसके जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री ही होंगे।”

बम ब्लास्ट में BJP कार्यकर्ता की मौत हो जाती है… और लिबरल गिरोह इस पर जोक-Meme-इमोजी बना उड़ाते हैं मजाक

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं पर हमले का दौर जारी है। लेकिन, सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि जो लिबरल गिरोह लोकतंत्र की दुहाई देते नहीं थकता है, वही गिरोह अब इन घटनाओं पर खुशियाँ मना रहा है। पश्चिम बंगाल में गुंडों द्वारा किए गए हमले के बाद भाजपा जनता युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने ‘नहीं डरेंगे’ का नारा लगाया, इस दौरान बमबारी होती रही। इसके बावजूद तथाकथित कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस घटना का मजाक उड़ाया।

कुणाल कामरा ने इसकी तुलना माउंटेन ड्यू के एडवर्टाइजमेंट से की, जिसमें ‘डर के आगे जीत है’ वाला स्लोगन दिया गया था। उन्होंने तेजस्वी सूर्या का मजाक बनाते हुए लिखा – ‘डर के आगे डर है’। इस ट्वीट का रिप्लाई करते हुए पंजाबी गायक एमी विर्क ने हँसने वाले इमोजी डाले। एमी के ट्विटर हैंडल को देखने पर पता चलता है कि वो कई दिनों से दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में प्रोपेगंडा फैलाने में लगे हुए हैं।

दरअसल, ट्वीट किए गए वीडियो में जब तेजस्वी सूर्या ‘नहीं डरेंगे, नहीं डरेंगे’ के नारे लगा रहे थे, तभी उनके आसपास ही फायरिंग/बम ब्लास्ट की आवाज़ आती है। इस आवाज़ को सुनने के बाद वो अपना सिर नीचे कर के रूमाल से छिपाते हैं, जिस पर लिबरल गिरोह तंज कस रहा है। चेतना नामक ट्विटर यूजर ने वीडियो में गोली चलने की आवाज़ का समय ट्वीट करते हुए लिखा कि 0:02 में तेजस्वी सूर्या डर गए।

वहीं सौरभ जैन नामक ट्विटर यूजर ने तो तेजस्वी सूर्या को ‘मीम मैटेरियल’ तक करार दिया। यानी, वामपंथियों ने हिंसा का महिमामंडन किया, जबकि वो बाकी समय लोकतंत्र की दुहाई देते हुए व्यतीत करते हैं। खुद को लेखिका बताने वाली प्रियंका सचेती ने इस वीडियो पर ‘Lol’ लिख कर कूल बनने की कोशिश की। ‘रैंडम मैन’ नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि जब आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन को लेकर उनकी सरकार की नीतियों के बारे में सवाल करते हैं, तो ऐसा ही होता है।

लोगों ने कुणाल कामरा से और तेजस्वी सूर्या के वीडियो का मजाक बना रहे लोगों से पूछा कि क्या वो लोकतंत्र में हिंसा का समर्थन करते हैं? भाजपा शासित राज्यों में एक पत्ता भी हिलने पर मोदी को जिम्मेदार ठहराने वाले लोग पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रायोजित हिंसा का महिमामंडन कर रहे हैं। वहीं इस हिंसा के पीड़ितों का मजाक बनाते हुए उन्हें ‘मीम मैटेरियल’ बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 100 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।

बता दें कि इस बमबारी में एक भाजपा कार्यकर्ता की मौत भी हो गई। घटना सिलीगुड़ी के तीनबत्ती की है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को बीजेपी कार्यकर्ता राज्य सचिवालय की शाखा ‘उत्तरकन्या’ की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान दो जगहों पर उनकी पुलिस से झड़प हुई। बीजेपी का आरोप है कि हमले में उनके कार्यकर्ता उलेन रॉय की मौत हो गई। पुलिस ने भी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और आँसू गैस के गोले छोड़े।

‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ वालों को पुरस्कार खेती में मिला क्या? – पद्मश्री विजेता और जैविक खेती करने वाले भारत भूषण ने लताड़ा

‘किसान आंदोलन’ के बीच केंद्र सरकार को कृषि कानूनों को लेकर किसानों का समर्थन भी मिल रहा है। जहाँ एक तरफ 20 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर के सरकार को अपना समर्थन दिया, वहीं दूसरी तरफ पद्मश्री सम्मान विजेता किसान भारत भूषण त्यागी ने नए ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि क्या इन लोगों को ये अवॉर्ड खेती में पुरस्कार स्वरूप मिला?

उन्होंने कहा कि महज झूठी ख्याति प्राप्त करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने ‘News 18’ के उमेश श्रीवास्तव के साथ बातचीत में कहा कि कृषि कानूनों को हमें द्विपक्षीय रूप में समझना चाहिए। इससे न सिर्फ बिचौलियों की अंधेरगर्दी ख़त्म होगी, बल्कि खेती के कई नए विकल्प भी खुल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा में कोई खोट नहीं है। उन्होंने मंडियाँ और MSP खत्म होने की चर्चाओं को भी निराधार और अफवाह बताया।

उन्होंने कहा कि ये अफवाह फैलाई जा रही है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कारण किसानों की जमीनें कॉर्पोरेट कंपनियाँ हड़प लेंगी। उन्होंने याद दिलाया कि जहाँ सरकार ने MSP पूर्ववत बने रहने की बात कही है, वहीं वास्तु अधिनियम में भण्डारण को संरक्षित करने की बात भी कही गई है। उन्होंने किसानों को समझाया कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में जमीन कोई मुद्दा है ही नहीं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वो जब सरकार से बातचीत करने जाएँ, तो विरोध वाली मानसिकता न रखें।

उन्होंने समझाया कि विरोध वाली मानसिकता से बातचीत करने से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आते हैं। 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किसान ने कहा कि मंडियों और बाजारों के जरिए किसानों को जो उचित मूल्य नहीं मिला करता था, उसका समाधान इस कानून में किया गया है। उन्होंने इसे एक सार्थक पहल करार देते हुए कहा कि किसानों को इससे कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ये गलत भ्रम है।

जैविक खेती को देश-विदेश में पहुँचाने वाले बुजुर्ग किसान भारत भूषण त्यागी बुलंदशहर जनपद की स्याना तहसील क्षेत्र स्थित बीहटा गाँव के निवासी हैं। वो एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने जैविक खेती के लिए कइयों को जागरूक किया है। उनके फार्म पर मंत्री से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक पहुँचते रहते हैं और जैविक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। अब उन्होंने कृषि कानूनों का समर्थन किया है।

20 सदस्यीय किसानों के प्रतिनिधिमंडल का सरकार को ज्ञापन

उधर जिन 20 किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को समर्थन दिया है, उनमें से अधिकतर पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा के ही हैं। उन्होंने अपने ज्ञापन में कहा कि हम हरियाणा के 70,0000 PFO से जुड़े और 50,000 प्रगतिशील किसान इस कानून के समर्थन में हैं। उन्होंने सुझाए गए संशोधनों के साथ इन तीनों कानूनों को जारी रखने की अपील की और कहा कि इन्हें वापस न लिया जाए। उन्होंने अपील की कि इस कानून को सरकार दबाव में आकर रद्द न करें।

आपको उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित सिसाना गाँव के बारे में भी जानना चाहिए, जहाँ 30 वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग हो रही है। इस गाँव की सफलता की दास्तान इसी से समझ लीजिए कि यहाँ के किसानों को अपनी उगाई सब्जियों के भाव दिल्ली स्थित आजादपुर मंडी से ज्यादा मिलती है, जो देश की शीर्ष मंडी कही जाती है। यहाँ के किसानों ने अपने निजी अनुभव शेयर कर न सिर्फ कृषि कानूनों का समर्थन किया, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की सफलता की दास्तान भी सुनाई।

जो था इस्लामी आतंक का गढ़, आतंकवाद मुक्त होते ही उस डोडा जिले में लगे ‘भारत माता की जय’ के नारे

जम्मू-कश्मीर में डीडीसी चुनाव के मद्देनजर कुल 8 चरणों में मतदान होना है। कल 5वें चरण की वोटिंग संपन्न हुई है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आई है। ये वीडियो डोडा जिले के कारी घाटी की है। इस वीडियो में स्थानीय लोग जोर-जोर से भारत माता की जय के नारे लगाते नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो को भाजपा प्रवक्ता सैयद शहनवाज हुसैन ने अपने ट्विटर पर कल शेयर किया है। उन्होंने इसे शेयर करते हुए लिखा,

डोडा जिले की कारा घाटी… यहाँ की आवाम ने पहले आतंक का सिर कुचला और अब उनके दिलों से आ रही है मुल्क से मोहब्बत की गूँज। आप भी सुनिए… कारा घाटी में गूँजती ‘भारत माता की जय’!

वीडियो में हम देख सकते हैं कि घाटी में पहुँचे भाजपा नेता भीड़ के बीच खड़े होकर भारत माता की जय कह रहे हैं और सामने खड़ी भीड़ उनके साथ ‘भारत माता की जय’ दोहरा रही है।

शहनवाज हुसैन घाटी के आवाम को समझाते हैं, “अगर कोई मौलवी साहब आकर आपको कहे कि आपने भारत माता की जय कहा है, अब तुम खारिज हो गए, तो ऐसा नहीं है। अपने मुल्क की तारीफ करने में, अपने मुल्क से मोहब्बत करने में कोई दिक्कत नहीं है।”

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा सराहा गया है। यूजर्स इस वीडियो को देख कर खुशी व्यक्त कर रहे हैं। वह कहते हैं, “शाहनवाज जी घाटी में जहाँ पहले नौजवानों को भटकाया जा रहा था। आज उनके हाथों में भारत का झंडा और दिल में भारत माता के लिए प्रेम देख कर बहुत खुशी हो रही है।”

एक अन्य यूजर लिखते हैं, “शहनवाज जी क्या बेहतरीन बदलाव हमारे स्वर्ग की घाटी में आ रहा है। यही सत्य और सच्चाई है, जम्मू और कश्मीर के युवाओं को भटकाने और अपने पद के लिए स्वार्थी जेहादी एजेंडा चमकाने वालों ने न जाने कितनों के औलादों की अल्प आयु में जान गवाँ दी। अब जाग रहे हैं। देखिएगा एक दिन यही आवाम उन्हीं को अंजाम देगी।”

उल्लेखनीय है कि इसी साल जून माह में सुरक्षाकर्मियों के प्रयासों से डोडा जिले को आतंकवाद मुक्त किया गया था। डीजीपी दिलबाग सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा था, “मसूद के रूप में आखिरी सक्रिय आतंकवादी के मारे जाने के बाद अब डोडा जिला पूरी तरह आतंकवाद मुक्त हो गया है।”

बता दें कि इससे पहले डीडीसी चुनावों के प्रथम चरण के दौरान एक और वीडियो कश्मीर से आई थी। इस वीडियो में घाटी के लोग भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी से बात करते नजर आए थे। इस वीडियो में बुजुर्ग व्यक्ति भाजपा नेता से कह रहे थे कि उन्हें कश्मीर में देख कर उन लोगों का दिल खुश हो गया है। यह उनकी खुशकिस्मती है कि वो कश्मीर में आए।

वहीं मुख्तार अब्बास नकवी भी उनसे वादा करते दिखे थे कि वह लोग हर कष्ट को दूर करेंगे। वह बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब बराबर हैं। इसलिए उन्होंने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया है। नकवी कहते हैं, जो गलत बातें कर रहे हैं, वह मुल्क के भी दुश्मन हैं और मोदी के भी दुश्मन हैं।

‘दिल्ली में जबरदस्ती मार्केट बंद करवाना चाहते थे AAP के मंडी चेयरमैन आदिल खान… लेकिन सब खुला है, भारत बंद फ्लॉप!’

केंद्र सरकार से अपनी माँग मनवाने के लिए किसानों ने आज (दिसंबर 8, 2020) भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद में उन्हें कई अलग-अलग क्षेत्रों (राजनीतिक दलों) से समर्थन मिल रहा है। लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो किसानों के साथ खड़े हैं, मगर भारी नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं हैं। सब्जी और फल मंडियों के व्यापारी इसी सूची में आते हैं।

महाराष्ट्र के पुणे में तो भारत बंद के बावजूद सब्जी मंडियाँ खुली हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने इस पर कहा, “हम किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हैं, लेकिन हमने बाजार खोले हुए हैं ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाली फसल स्टोर की जा सके और वह खराब न हो। इन्हें हम कल ही बेचेंगे।” 

दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों की यही स्थिति है लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने ट्वीट में इसका जिक्र किया। उन्होंने सुबह-सुबह अपने ट्वीट में लिखा, “मेरे पास दिल्ली की फल सब्जी मंडियों के व्यापारियों के फोन आ रहे हैं। व्यापारी मजदूर सब आज मंडियाँ खोलना चाहते हैं। केजरीवाल सरकार के नियुक्त मंडी चैयरमैन जबरदस्ती बंद के निर्देश दे रहे हैं।”

हालाँकि इसके बाद उनका ट्वीट आया, जिसमें उन्होंने फल सब्जी मंडियाँ खुलने की बात कहीं। उन्होंने लिखा, “दिल्ली की फल सब्जी मंडियाँ खुल गई हैं। ओखला, आजादपुर मंडियों में व्यापार जारी है। दिल्ली की सारी मार्केट, बाजार, इंडस्ट्रियल एरिया खुलेंगे- सदर बाजार, चाँदनी चौक, लाजपत नगर, सरोजिनी, गाँधी नगर, नेहरू प्लेस, कनॉट प्लेस, करोलबाग, कमला नगर सब खुलेगा। दिल्ली में बंद फ्लॉप।”

उनके अलावा नीलकांत बक्शी ने भी अपने ट्वीट में आम आदमी पार्टी द्वारा नियुक्त चेयरमैन के दबाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “ओखला मंडी पूर्ण रूप से खुली है। आम आदमी पार्टी नियुक्त चेयरमैन आदिलजी ने बड़ा जोर लगाया कि यहाँ तो उनकी चल जाएगी लेकिन कुछ ना हुआ, मंडी खुली और माल का भरमार है। ओखला मंडी आभार।”

जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में  APMC के अध्यक्ष आदिल अहमद खान हैं। इसके अलावा राजीव सिंह मेंबर सेक्रेट्री हैं। इनके अतिरिक्त मार्केटिंग कमेटी में 8 अन्य सदस्य भी नियुक्त किए गए हैं। APMC का उद्देश्य फलों और सब्जियों के विपणन की सुविधा देना है। इसके अलावा किसानों, उत्पादकों/विक्रेताओं व उपभोक्ताओं के फायदे व सुरक्षा के लिए नियमन लागू करना है।

भारत बंद को लेकर इससे पहले आदिल खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि आजादपुर मंडी समेत दिल्ली की दूसरी मंडियों के व्यापारियों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए मंडी में व्यापार न करने का निर्णय लिया है। मंडी के सभी संगठनों ने निर्णय लिया है कि किसानों के समर्थन के लिए मंडी में अपना व्यापार बंद रखेंगे।