Home Blog Page 4260

सैजी अब्बास ने अर्जुन बन किया विधवा से रेप: धर्म परिवर्तन करवाकर निकाह को किया मजबूर, दो बार गर्भपात

लखनऊ में ‘ग्रूमिंग जिहाद’ (लव जिहाद) का मामला सामने आया है। यहाँ के मड़ियागाँव की एक महिला ने वजीरगंज के रहने वाले एक सैजी अब्बास और उसके परिवार के खिलाफ बंधक बनाने के बाद छेड़छाड़, मारपीट, टॉर्चर, शोषण और गर्भपात की शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति की मृत्यु के बाद सैजी अब्बास ने अर्जुन बनकर उससे दोस्ती की, फिर बाद में उसने अपना नाम मनोज बताया।

अब्बास ने विधवा पीड़िता के साथ बलात्कार किया 

अमर उजाला के मुताबिक, पीड़िता सीतापुर की मूल निवासी है। वह अपने नाबालिग बेटे के साथ किराए के मकान में रहती है और पेट पालने के लिए दूसरे के घरों में काम करती है। 2014 में अब्बास ने कहीं से उसका फोन नंबर प्राप्त किया और उससे संपर्क किया। वह पीड़िता का बाइक से पीछा करता था और उससे मिलने के लिए कहता था। एक दिन वह कथित रूप से पीड़िता को उसके दोस्त के घर ले गया और उसके साथ बलात्कार किया। जब पीड़िता रोने लगी, तो उसने उसकी माँग में सिंदूर लगाया और हमेशा उसके साथ रहने का वादा किया।

आरोपित अक्सर पीड़ित के घर जाने लगा और पीड़िता के बेटे ने उसे पिता कहना शुरू कर दिया। वह शादी की जिद करती रही। करीब आठ महीने बाद सैजी अपने साथ मौलवी और परिवार की बुर्कानशीं महिलाओं को लेकर उसके घर आया तब उसका मुस्लिम होने का राज खुला। पीड़िता ने निकाह के लिए मना कर दिया। इस पर उसके परिवार की महिलाओं ने बदनामी कराने की धमकी दी। मजबूरी का फायदा उठाकर उसने निकाह पढ़वा लिया। हालाँकि, निकाहनामे में दस्तखत नहीं किए। इसके बाद सैजी उससे पति की तरह संबंध बनाता रहा। इसके बाद जरा-जरा सी बात पर वह उसकी आए दिन बेरहमी से पिटाई करने लगा। 

 उसे दो बार गर्भपात के लिए मजबूर किया गया

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने दो बार गर्भधारण किया लेकिन आरोपित ने उसे गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया। उसकी बहनें गर्भपात के वक्त पीड़िता के साथ रहती थीं। कुछ महीने पहले, अब्बास की माँ ने पीड़िता से कहा कि वह अपने बेटे की दूसरी शादी करवाएगी और उसे दोबारा फोन न करे। तब पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया और अब्बास, उसके पिता मोहम्मद अशफाक, उसकी बहनों बज्जो, शैला व अंशू और बहनोई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पीड़िता का आरोप है कि आरोपित ने छ: साल तक उसका शोषण किया और किसी और के साथ निकाह किया।

फोन पर ‘सलाम’ सुनकर पीड़िता को उस पर शक हुआ

 पीड़िता ने कहा कि जब भी आरोपित कॉल करता था, तो दूसरी तरफ का व्यक्ति अक्सर उसे ‘सलाम’ कहकर अभिवादन करता था। इससे उसे शक हुआ। जब उसने अब्बास से पूछा कि उसे ’सलाम’ क्यों किया है, क्या तुम मुस्लिम है, तो वह इनकार कर देता था। वह कहता था कि बहुत से लोग उसके वर्कप्लेस पर जाते हैं। इसके साथ ही उसने पीड़िता से कहा कि वह उसके फोन कॉल्स पर ध्यान न दे।

इंडोनेशिया में COVID-19 वैक्सीन भी चाहिए हलाल, उलेमा काउंसिल को भेजा गया प्रस्ताव

इंडोनेशिया का सर्वोच्च मुस्लिम निकाय चीन के सिनोवैक बायोटेक द्वारा विकसित प्रायोगिक कोरोना वैक्सीन (COVID-19 Vaccine) के लिए हलाल सर्टिफिकेट जारी कर सकता है। यह हलाल प्रमाणीकरण दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में टीकाकरण के प्रयासों में अहम फैसला बताया जा रहा है।

इंडोनेशिया के मानव विकास और संस्कृति मंत्री मुअज्जिर एफेंडी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल हलाल उत्पाद गारंटी एजेंसी और खाद्य, औषधि और प्रसाधन सामग्री के मूल्यांकन के लिए संस्थान द्वारा एक अध्ययन पूरा किया गया है जिसके बाद फतवा और हलाल प्रमाण पत्र जारी करने के लिए इसे परिषद के सामने प्रस्तुत किया गया है।

उल्लेखनीय है कि हलाल एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है- जायज़ या वैध। हलाल शब्द इस्लाम धर्म से सम्बन्धित है, जो खाने के मामले में और उसमें भी खासकर मीट के मामले में तय करता है कि वो किस तरह से तैयार किया गया है। इसी तरह ‘हराम’ भी एक अरबी शब्द है जिसे समुदाय विशेष में वर्जित या फिर मजहबी कारणों से अपवित्र मानी जाने वाली चीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

चीन के सिनोवैक बायोटेक द्वारा विकसित प्रायोगिक COVID-19 वैक्सीन की दस लाख से अधिक मात्रा रविवार (दिसंबर 06, 2020) शाम को इंडोनेशिया पहुँच चुकी है। इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्री तरावान अगुस पुटरान्टो ने कहा कि वैक्सीन को इंडोनेशिया में वितरित किए जाने से पहले फेज़-3 क्लिनिकल ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा करने की आवश्यकता है। सरकार लोगों को वही वैक्सीन प्रदान करेगी, जो सुरक्षित साबित हो और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के तहत ट्रायल पास करे।

यूनिसेफ इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रीय राजदूत हरमन सापुत्र ने कहा कि 1.2 मिलियन खुराक केवल 6,00,000 लोगों के लिए पर्याप्त हैं, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को दो खुराक की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, सापुत्र ने कहा कि सरकार को गारंटी देनी चाहिए कि टीका पूरे देश में वितरण के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होगा। सापुत्र ने कहा कि यदि प्रायोगिक टीका तीसरे चरण के ट्रायल में सफल होता है, तो टीकाकरण कार्यक्रम अगले साल के मध्य में शुरू हो सकता है।

फिलहाल, इंडोनेशिया द्वारा कोरोना वैक्सीन का हलाल प्रमाणीकरण सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि हलाल प्रक्रिया अक्सर लोगों के बीच बहस का मुद्दा रहा है। कई लोग इसे मजहब विशेष द्वारा अन्य सभी समुदायों के आर्थिक बहिष्कार का भी नाम देते हैं क्योंकि हलाल कि प्रक्रिया में तैयार की जाने वाली चीज में शुरू से आखिर तक सिर्फ एक ही समुदाय के लोग भाग लेते हैं। और इसके निर्माण से लेकर पैकेजिंग और अंतिम वितरण के किसी भी चरण में यदि दूसरे समुदाय की भागीदारी होती है, तो यह हलाल नहीं रह जाता है।

दवा और कॉस्मेटिक उद्योग में हलाल प्रमाणीकरण

दवा और कॉस्मेटिक कंपनियाँ अपने उत्पाद के लिए हलाल प्रमाणपत्र इस कारण लेती हैं क्योंकि वे उसके लिए जानवरों के बाय-प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती हैं। उदाहरण के तौर पर- परफ्यूम में अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है, लिपस्टिक में कई पशुओं की चर्बी होती है। अक्सर इन चीजों को इस्लाम में हराम माना जाता है जिस कारण इनकी निर्माता कंपनियों को ये बताना होता है कि उन्होंने ऐसे किसी प्रोडक्ट का उपयोग नहीं किया है। हलाल प्रमाणीकरण का विषय अक्सर विवाद का विषय रहा है।

किसानों के नाम पर प्रदर्शन की तैयारी में खालिस्तान समर्थक, 10 दिसंबर को दी कई देशों में भारतीय दूतावास बंद करने की धमकी

दिल्‍ली में चल रहे किसान आंदोलन के बीच लंदन में भारतीय उच्चायोग से बड़ी खबर आ रही है। यहाँ किसानों के नाम पर खालिस्तान समर्थकों ने 10 दिसंबर को प्रदर्शन की तैयारी की है। प्रो-खालिस्तानी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को लंदन, बर्मिंघम, फ्रैंकफर्ट, वैंकूवर, टोरंटो, वाशिंगटन डीसी, सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क में 10 दिसंबर को कार, ट्रैक्टर और ट्रक रैली के जरिए भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की धमकी दी।

इससे पहले रविवार (दिसंबर 6, 2020) को NIA की मोस्ट-वॉन्टेड लिस्ट में टॉप पर रहने वाले एसएफजे के कार्यवाहक परमजीत सिंह पम्मा को लंदन में ‘किसान रैली’ में देखा गया था। पम्मा को उनके समर्थकों के साथ रैली में देखा गया था। रैली में खालिस्तानी झंडे और भारत विरोधी नारे लगे।

यह दावा करते हुए कि ‘खालिस्तान पंजाब के किसानों की दुर्दशा का एकमात्र समाधान है’, एसएफजे, एस गुरुपतवंत सिंह पन्नू ने कहा कि उनके संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार दिवस पर भारतीय दूतावासों को बंद करने का आह्वान किया है।

भारत में एक नामित आतंकवादी पम्मा 1990 के दशक में पंजाब से भाग गया था और 2000 में ब्रिटेन में राजनीतिक शरण दिए जाने से पहले कथित तौर पर पाकिस्तान की यात्रा की थी। उसके बब्बर खालसा इंटरनेशनल और खालसा टाइगर फोर्स जैसे आतंकी संगठनों से संबंध हैं। इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार उसका 2010 में पटियाला और अंबाला में हुए बम विस्फोट और 2009 में राष्ट्रीय सिख संगत के नेता रुलादार की हत्या से भी कनेक्शन है।

भारत के प्रत्यर्पण का अनुरोध करने के बाद पम्मा को 2015 में पुर्तगाल में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, उनका प्रत्यर्पण नहीं हुआ, और वे यूनाइटेड किंगडम लौट आए।

प्रो-खालिस्तानी SFJ सदस्यों ने लंदन में ‘किसान रैली’ में भाग लिया

एसएफजे नेता पन्नू ने आगे कहा कि कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो, ब्रिटिश संसद सदस्यों और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के एक प्रतिनिधि द्वारा किसानों के विरोध का समर्थन करने के लिए संगठन का उत्साह बढ़ाया गया। सिख संगठनों के संघ के कुलदीप सिंह चेरू नाम के एक अन्य खालिस्तान समर्थक को भी लंदन के विरोध प्रदर्शन में देखा गया था। प्रेस और सूचना मंत्री, विश्वेश नेगी ने कहा कि विरोध भारत विरोधी अलगाववादी ताकतों द्वारा किया गया था।

नेगी ने कहा, “महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग को धता बताते हुए उच्चायोग के सामने 3,500 से 4,000 से अधिक लोग एकत्र हुए। हमेशा कि तरह यह जल्द ही स्पष्ट हो गया कि इस सभा का नेतृत्व भारत विरोधी अलगाववादियों ने किया था, जिन्होंने भारत में किसान विरोध का समर्थन करने के नाम पर अपने स्वयं के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया।”

SFJ का भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शन से लिंक

‘किसानों’ के विरोध प्रदर्शन में खालिस्तानी तत्वों की बड़ी भागीदारी देखी गई। खालिस्तान का समर्थन करते हुए कई ‘किसानों’ ने हिंसा और चिंताजनक नारों का सहारा लिया। खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे लगाने के साथ हरियाणा-पंजाब सीमा पर ‘किसान विरोध’ के दौरान, पंजाब के किसानों को सरकार के विरोध में उकसाने के लिए एसएफजे की कथित संलिप्तता पर भी सवाल उठाए जा रहे थे।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान द्वारा वित्त पोषित खालिस्तान संगठन एसएफजे ने पहले खालिस्तान के समर्थन के बदले पंजाब और हरियाणा में किसानों के लिए $ 1 मिलियन का अनुदान घोषित किया था।

किसानों का ‘भारत बंद’: यह शाहीन बाग मॉडल का ही बदला रूप है, आखिर क्यों सरकार को इसे देशद्रोह मानना चाहिए

किसी राज्य को चलाना कोई आसान काम नहीं है, खास कर भारत जैसे देश में तो बिल्कुल भी नहीं। यहाँ पर कई ऐसे डायनामिक्स हैं, जिन पर किसी का सीधा नियंत्रण नहीं हो सकता है। इसमें अपने स्वार्थ वाले ग्रुप, सांस्कृतिक और धार्मिक खींच-तान, एक अलग संस्थान शामिल होता है, जिसके कुछ हिस्सों को विभिन्न विदेशी संस्थानों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।

इस तरह के तमाम कारकों को मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता आने और फिर 2019 में निर्वाचित होने के बाद धता बता दिया। अब उम्मीद की जा रही है कि भारत सरकार इस समस्या से भी निपट लेगी, जिसे आर्टिफिशियल तरीके से क्रिएट किया गया है। वो वाकई में समस्या है ही नहीं।

अगर हम मोदी सरकार के पिछले 6 वर्षों को याद करें तो इस दौरान कई ऐसी परिस्थितियाँ सामने आई, जिसे फर्जी तरीके से गढ़ा गया था। चाहे वो राफेल रोना होना हो या जज लोया की मौत और उसके साथ लगाए गए झूठे इल्जाम। इतना ही नहीं, अयोध्या पर फैसला आने के बाद इस्लामियों ने मुस्लिमों से देश जलाने का आह्वान किया। इसके बाद CAA पर साजिश रची गई, दंगे किए गए और अब किसानों का आंदोलन हो रहा है, जिसे खालिस्तानियों द्वारा हाइजैक कर लिया गया है। मोदी सरकार ने पिछले 6 सालों में इस तरह की समस्याओं का सामना किया।

हालाँकि, यह सभी के लिए चिंताजनक हैं, मगर भारत ने दशकों से ऐसे समय-समय पर उबाल मारने वाले इन समस्याओं से निपटने का तरीका ढूँढ निकाला है। मोदी सरकार से पहले की सरकारें हमारी बातों को सुनने का भी जहमत ही नहीं उठाया। इस सरकार ने सभी की बातें सुननी शुरू कर दी। फिर इसका निराकरण भी होने लगा।

मोदी सरकार के ऐसा करते ही ‘उदारवादियों’ और सरकार के स्वतंत्र रूप से काम करने वाले प्रतिष्ठान का होश ठिकाने आ गया। लोगों ने मोदी में विश्वास दिखाया। इस देश में भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है। सवाल उठता है कि राफेल ‘घोटाले’ का ट्रैप जनता के बीच किसी भी तरह के गुस्से को भड़काने में विफल क्यों रहा? सीधे शब्दों में कहें तो पीएम मोदी लंबे समय तक गायब रहे लोगों में विश्वास को जमाने में कामयाब रहे हैं।

तो उनका फॉल-बैक प्लान क्या है? उन्हें सामूहिक-हत्यारे कहने से काम नहीं चला। विपक्ष उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने में असफल रहा। उन्हें हिटलर कहना काम नहीं आया। सर्जिकल स्ट्राइक को खारिज करने से काम नहीं चला। देश को तब भी बदनाम करने की कोशिश हुई जब चीन ने सीमा पर खून-खराबा किया। लेकिन कुछ भी काम नहीं आया।

जब इसमें से कुछ भी काम नहीं किया, तो उन्होंने लगभग उन लोगों को दंडित करने की योजना तैयार की, जिन्होंने प्रधानमंत्री पर अपना विश्वास जताया था। इस प्रकार, CAA विरोधी दंगों की गाथा शुरू हुई और जिसका अंत दिल्ली-हिंदू विरोधी दंगों के रुप में हुई।

वहीं भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा करना, अयोध्या के फैसले का प्रतिकार करने और ’मुस्लिमों पर हमले’ की आड़ में धकेलने के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना, दिल्ली दंगों के दौरान ‘चक्का जाम’ करना कई ऐसे तरीके हैं जो वास्तव में राष्ट्रीय राजधानी और पूरे देश को पंगु बनाने के लिए अपनाया गया था।

एक वीडियो में सुना गया, “यूपी में 30% शहरी मुसलमान हैं। क्या आपको कोई शर्म नहीं है? आप यूपी में चक्का जाम क्यों नहीं कर सकते? बिहार का वह इलाका जहाँ से मैं हूँ, वहाँ ग्रामीण मुस्लिम आबादी 6% है जबकि शहरी मुस्लिम आबादी 24% है। भारतीय मुसलमान ज्यादातर शहरों में रहते हैं। तो यह आप पर है। आप अपने शहरों को जाम कर सकते हैं। यदि कोई आपसे पूछता है, तो उन्हें मना कर दें।”

“अगर 5 लाख मुस्लिम संगठित हो गए तो हम भारत के बाकी हिस्सों से पूर्वोत्तर को काट सकते हैं। यदि हम स्थाई रूप से नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम हम उत्तर-पूर्व को महीनों तक भारत से काट सकते हैं। हमारी जिम्मेदारी भारत से असम को काटने की है तब सरकार हमारी आवाज सुनेगी। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें शेष भारत से असम को काटना होगा।”

ये शब्द जेएनयू छात्र और ‘द वायर’ के स्तंभकार शरजील इमाम के थे। शरजील इमाम चाहता था कि मुसलमान चक्का जाम करे और चिकन नेक पर कब्जा करें (जो शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ता है)। वह देश भर में, हर जगह सड़क पर मुसलमानों को लाना चाहता था। हमें निश्चित रूप से यह नहीं भूलना चाहिए कि वह शाहीन बाग का मास्टरमाइंड था और शाहीन बाग का उद्देश्य ठीक यही करना था।

उन्होंने वही किया जो AAP नेता ताहिर हुसैन ने किया था। अपने बयान में, ताहिर हुसैन ने एक भयावह योजना का खुलासा किया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्होंने हजारों मुसलमानों के साथ पुलिया को अवरुद्ध कर दिया था। जिससे कि वो चाहे जो भी करें, पुलिस अंदर नहीं आ सकती थी, जहाँ वो हिंदुओं को मार रहे थे, जिसमें अंकित शर्मा की भी नाम शामिल है।

वह अपने साइन किए गए डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में कहता है कि अपनी योजना के अनुसार, उसने अपने आप को बेगुनाह साबित करने के लिए खुद के मोबाइल फोन से पीसीआर और पुलिस अधिकारियों को कई फोन किए थे। उसे पता था कि पुलिस बल चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वे पुलिया को पार नहीं कर पाएँगे। इसके अलावा, मुस्लिम भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ पुल के दोनों ओर हिंदू घरों को जला रही थी।

तो क्या होता अगर शरजील इमाम देश भर के सभी मुसलमानों को सड़कों पर लाने और शहरों को बंद करने में सफल हो जाता? हिंदुओं का नरसंहार होता? क्या इस्लामवादी लोग उन लोगों से बदला लेंगे जिन्होंने पीएम मोदी को वोट दिया? ताहिर हुसैन ने कहा कि दंगे का उद्देश्य ‘काफ़िरों को सबक सिखाना’ था।

ऐसा लगता है कि राष्ट्र के लोगों पर हिंसा और नरसंहार को उजागर करना एकमात्र पॉलिटिकल टूल है। वे शायद उम्मीद करते हैं कि देश के लोग हिंसा से इतने परेशान हो जाएँगे कि उनका विश्वास गुस्से में बदल जाएगा और फिर यह गुस्सा इस्लामवादियों और वामपंथियों पर होने के बजाय मोदी पर निकाला जाएगा।

हालाँकि, उनकी इस योजना ने काम नहीं किया। मार-काट, प्रोपेगेंडा, शहरों को रोकने की कोशिश ने सिर्फ उनके रवैये को उजागर किया। उन्होंने साबित कर दिया कि शाहीन बाग मॉडल ने इस हद तक काम किया है। उन्होंने अब इस मॉडल से चिपके रहने का फैसला किया है और इसकी नकल की है, जिसमें केवल मुद्दा बदल रहा है।

किसान आंदोलन में चक्का जाम और भारत बंद शाहीन बाग मॉडल का ही रूप है। बस इसका कारण एंटी-सीएए से एंटी कृषि बिलों में बदल गया है और बुजुर्ग दादी की जगह पर किसान आ गए हैं। मॉडल वही है। प्रोपेगेंडा भी वही है।

इसके बाद यदि आप ‘हम देखेंगे’ जैसे पोस्टर और ‘जिन्ना वाली आजादी’ जैसे तमाम नारों पर सवाल उठाएँगे तो आपको क्रूर करार दिया जाएगा, जो अपनी अधिकार के लिए लड़ने वाली बूढ़ी दादी के खिलाफ खड़े हैं। आज जब आप खालिस्तानी भागीदारी पर सवाल उठाते हैं तो इंदिरा गाँधी से टकरा जाने, पीएम मोदी को ठोक देने की बात करते हैं। आपको ऐसे राक्षस की तरह पेश किया जाता है जो आपकी मेज तक अन्न पहुँचाने वाले गरीब किसानों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

हर बार जब वे झूठ से लदे एक नाजायज एजेंडे को फैलाना चाहते हैं, तो वे एक ऐसा समूह बनाते हैं, जिस पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। शाहीन बाग की दादी बूढी और कमजोर थी, लेकिन अगर वे राष्ट्र को बाधित करना और अराजकता पैदा करना चाहती थी, तो उन्हें जेल में डाल दिया जाना चाहिए। 

किसान हमारी मेज पर भोजन डालते हैं, लेकिन वे सवाल या फटकार से परे एक अतिरंजित समूह नहीं हैं। वे अपनी उपज के लिए उन लोगों से पारिश्रमिक लेते हैं, जो उस उपज को खरीदते हैं। निष्पक्ष व्यापार को एक दान के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता है, जिससे कि विरोध करने वालों के एक ग्रुप का खालिस्तानी एजेंडा भी निर्विवाद हो जाए।

सीएए के दौरान, वे कानूनों तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए कहते हैं कि मुस्लिम अपनी नागरिकता खो देंगे। उन्होंने खुलकर झूठ बोला। अब वे किसान बिल को किसान विरोधी बनाने के लिए अपने तरीके से पेश कर रहे हैं। शाहीन बाग के समय यह कट्टरपंथी मुसलमानों और वामपंथियों के शामिल होने के बारे में था। अब, यह खालिस्तानियों और कट्टरपंथी मुसलमानों के बारे में है। 

उस समय भी मीडिया ने इसका बचाव किया था, अब भी मीडिया इसका बचाव कर रही है। फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय सीएए के विरोध में उतरा था और अब ऐसा ही किसान आंदोलन के साथ भी हो रहा है। कनाडा और ब्रिटेन ऐसा ही करता नजर आ रहा।

इसमें से कोई भी प्रोटेस्ट के अधिकार के बारे में नहीं है। राज्य को ब्लैकमेल करने के लिए राष्ट्र को रोकने के लिए उनके ‘अधिकार’ के बारे में यह है कि वे राजनीतिक रूप से क्या चाहते हैं। यह राजनीति के बारे में है। यह मोदी के सिर के पिछले हिस्से को पकड़ने और कीचड़ में उनकी नाक रगड़ने के बारे में है। यह अधिकारों या कानूनों के बारे में नहीं है। कानूनों से कोई समस्या नहीं है। वे भारत की सरकार को नीचा दिखाने के लिए एक बहाना है।

अब समय आ गया है कि सरकार इन तिकड़मों को खारिज करे। लोगों को विरोध करने का अधिकार है, मगर इस तरह से झूठे कारणों के लिए नहीं। चाहे वह केंद्र में भाजपा सरकार हो या कॉन्ग्रेस की सरकार। चाहे वह राजनीतिकरण से सहमत हो या न हो, राष्ट्र को रोकना या ऐसा करने का प्रयास करने वालों पर देशद्रोह के समान आरोप होना चाहिए। उन्हें राज्य के खिलाफ युद्ध के रूप में माना जाना चाहिए।

आज तक ने रिलायंस JioTV+ पर दिखाया भारत बंद कार्यक्रम में देश का गलत नक्शा, लोगों ने की कार्रवाई की माँग

फार्म बिल को लेकर चल रहे किसानों के विरोध और 8 दिसंबर के भारत बंद के दौरान, प्रोपेगेंडा समाचार चैनल ‘आज तक’ पर रिलायंस जियो के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भारत का गलत नक्शा देखा गया। सोशल मीडिया यूजर दीपेश ने JioTV प्लस ऐप के फ्रंट पेज पर नजर आ रहे समाचार चैनल Aaj Tak (आज तक) की तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें भारत का गलत नक्शा देखा जा सकता है।

दीपेश ने ट्विटर पर गृहमंत्री अमित शाह के ऑफिस को टैग करते हुए भारत के गलत मानचित्र को दर्शाने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

इन तस्वीरों में दर्शाया गया नक्शा जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ भारत से लद्दाख के बड़े हिस्से को भी भारत की सीमा में नहीं दर्शा रहा है।

इस मुद्दे पर आगे जाँच करने के लिए, हमने अन्य ऐसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की जाँच भी की जो समाचार चैनलों की लाइव स्ट्रीम करते हैं।

डिज्नी + हॉटस्टार के समाचार सेक्शन से लिया गया स्क्रीनशॉट

अन्य ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हमने पाया कि भारत का मानचित्र सही रूप में दर्शाया गया था। जिसका अर्थ है कि ‘आज तक’ द्वारा सिर्फ रिलायसं जियो के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ही भारत का खंडित मानचित्र दिखाया गया जबकि अन्य जगहों पर इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी।

तीन साल तक की सजा का है प्रावधान

कानून के अनुसार, जो कोई भी भारत का गलत मानचित्र प्रकाशित करता है, उसे तीन साल की जेल और/या जुर्माना अदा करना पड़ता है। नियम कहते हैं, “भारत की सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए एक तरह से भारत की क्षेत्रीय अखंडता या सीमाओं पर सवाल उठाना- (1) जो कोई भी, शब्दों के द्वारा या लिखित या संकेतों या दृश्यों द्वारा या अन्यथा, प्रादेशिक अखंडता या भारत के सीमांत तरीके जो भारत की सुरक्षा या सुरक्षा के हितों पर सवालिया निशान लगाते हैं, या उनके लिए पूर्वग्रही हैं, या होने की संभावना है, ऐसे शब्द के लिए कारावास के साथ दंडनीय होगा, जो तीन साल तक का हो सकता है, या जुर्माने के साथ, या फिर दोनों।”

गौरतलब है कि रिलायंस जियो पर प्रदर्शित गलत मानचित्र के बारे में ऑपइंडिया ने Reliance Jio के साथ-साथ AajTak से भी सम्पर्क स्थापित करने का प्रयास किया है। उनके साथ इस मामले में बात होते ही रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

मुंबई पुलिस ने TRP केस में झूठे नाम नहीं लेने पर रिपब्लिक के AVP घनश्याम को बेल्ट से पीटा, यातना दी: हलफनामें में खुलासा

रिपब्लिक टीवी ने आरोप लगाया है कि उनके चैनल के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट घनश्याम सिंह को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लेकर बुरी तरह प्रताड़ित किया। मंगलवार (दिसंबर 7, 2020) को कोर्ट में जमा कराए गए हलफनामे में चैनल ने दावा किया है कि सिंह को ‘चक्की बेल्ट’ तक से पीटा गया।

चैनल ने कहा कि पुलिस हिरासत के दूसरे दिन से घनश्याम सिंह पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि वह टीआरपी केस के अपना नाम ले लें, लेकिन जब उन्होंने दबाव होने के बाद भी ऐसा नहीं किया, तब उन्हें धमकाया गया और उन्हें एक जगह ले जाकर बार-बार प्रताड़िता किया गया। 

हलफनामे के मुताबिक मुंबई पुलिस ने घनश्याम सिंह के लिए कहा, “इनको मारो मारो मारो।” इसके अलावा उन्हें मोटी बेल्ट से भी मारा गया। वह दर्द से रोए भी लेकिन पुलिस अधिकारियों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और वह अपने आकाओं के आदेश का पालन करते रहे।

एक समय आया, घनश्याम सिंह को दूसरे कमरे में डाला गया और एक ऐसे आदमी को दिखाकर जिसे घनश्याम जानते तक नहीं थे, उसकी ओर इशारा करके पुलिस ने उनसे कहा, “आप ऐसे नहीं मानोगे। अभी बताओ आपने पैसे दिए, आप मिले थे इनसे।”

पुलिस ने उनसे कहा, “अभी भी नहीं बोलोगे तो हमारे पास और भी रास्ते हैं।” इस हलफनामे में कहा गया है कि घनश्याम सिंह को हिरासत के दौरान काफी गहरी चोट आई हैं। उनके हाथ पर इसके निशान हैं, जिससे पता चलता है कि उन्हें प्रताड़ित किया गया।

कोर्ट के समक्ष दायर एफिडेविट के मुताबिक घनश्याम सिंह की कस्टडी के दौरान हर नियत प्रक्रिया की अवहेलना की गई, प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों को दरकिनार किया गया और उन्हें हिरासत में प्रताड़ित करने, यातना देने, नुकसान पहुँचाने और शारीरिक रूप से तोड़ने के लिए भयानक, भयावह और जघन्य तरीके अपनाए गए।

इस हलफनामे में यह भी लिखा गया कि पुलिस ने घनश्याम सिंह पर मानसिक दबाव बनाया और टीआरपी केस की झूठी कहानी में फँसाने के लिए उन पर प्रेशर डालते रहे। रिपब्लिक टीवी का कहना है कि घनश्यम सिंह ने पूछताछ में लगातार एक बात बोली कि उन्होंने टीआरपी हेरफेर केस में किसी तरह की पेमेंट नहीं की, लेकिन फिर भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उन्हें धमकाते रहे। सिंह से यह तक कहा गया, “हमारे पास दूसरे रास्ते भी हैं। आधे घंटे बाद तुम कहोगे। 10 दिन बाद तुम बोलोगे।”

उल्लेखनीय है कि घनश्याम सिंह को 6 दिसंबर को बेल मिली थी। उससे पहले वह 26 दिन पुलिस हिरासत में थे। उन्होंने अपनी रिहाई के बाद कहा था कि जब वह पुलिस हिरासत में थे, तो दूसरे दिन (मुंबई पुलिस) ने उन्हें पीटा। पुलिस “जानना” चाहती थी कि रिपब्लिक टीवी ने कैसे “टीआरपी” में हेरफेर की है। उन्होंने कहा, “मैं इनकार कर रहा था क्योंकि हमने कुछ नहीं किया है। मैंने बताया कि हमने कुछ नहीं किया है और मैंने भी कुछ नहीं किया है। उन्होंने काफी कोशिश की और फिर मुझे पीटा गया।”

यहाँ याद दिला दें रिपब्लिक टीवी के ख़िलाफ फेक टीआरपी का पूरा मामला 8 अक्टूबर को मुंबई कमिशनर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ था। हालाँकि, एक दिन के अंदर ही रिपब्लिक टीवी ने यह सबूत दे दिए थे कि मामले में दर्ज हुई शिकायत में उनके चैनल का नाम नहीं है, लेकिन तब भी, मुंबई पुलिस चैनल को निशाना बनाती रही और पिछले दिनों रिपब्लिक टीवी पर कई कार्रवाई कर डाली।

हाउस अरेस्ट पर AAP ने फैलाया झूठ? Video में घर निकलते, समारोह में जाते नजर आए CM केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हाउस अरेस्ट का मुद्दा आज (दिसंबर 8, 2020) सुबह से हर जगह गरमाया हुआ है। आम आदमी पार्टी लगातार दावे कर रही है कि सीएम केजरीवाल के घर के बाहर कुछ लोगों को धरने पर बैठाकर उन्हें घेर लिया गया है। पुलिस, सीएम आवास के बाहर तैनात है और केजरीवाल को न बाहर निकलने की अनुमति मिल रही है और न किसी को उनसे मिलने दिया जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के इन गंभीर आरोपों के बीच भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने एक वीडियो अपने ट्वीट के साथ शेयर किया है। अपने ट्वीट में आदेश गुप्ता ने लिखा, 

“AAP के नेता मीडिया में और ट्वीट करके सफ़ेद झूठ बोल रहे हैं कि कल सुबह से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी को हाउस अरेस्ट कर रखा है, अगर यह सच है तो कल रात वह आराम से घर से बाहर जाते हुए कैसे दिखाई दे रहे हैं? केजरीवाल सरकार की नींव केवल समाज को परेशान करने और झूठ बोलने पर आधारित है।”

वीडियो में हम देख सकते हैं कि अरविंद केजरीवाल अपने घर से 5 बजकर 40 सेकेंड पर अपनी काली गाड़ी से बाहर निकल रहे हैं। पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हटाकर उन्हें निकलने की जगह दिलवाई है। इसके बाद सीएम आराम से चले गए हैं।

इसके बाद एक वीडियो जी न्यूज के पत्रकार जीतेंद्र शर्मा ने भी शेयर की है। वीडियो में नजर आ रही तारीख से पता चल रहा है वीडियो कल रात के 9:25 की है। जीतेंद्र का दावा है कि केजरीवाल कल रात शादी में पहुँचे थे। शेयर की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि अरविंद केजरीवाल 10-12 लोगों के साथ हॉल में घुस रहे हैं।

अब इन वीडियो को देख कर प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि अरविंद केजरीवाल बिना रोक टोक कल तक समारोह अटेंड कर रहे थे, तो आखिर सुबह वह हाउस अरेस्ट कैसे हो गए? कल उनके घर के बाहर एमसीडी के लोग धरना दे रहे थे, तब भी मुख्यमंत्री का दिल उन्हें देख कर नहीं पसीजा और वह सामने से अपनी गाड़ी लेकर निकल गए। लेकिन आज बात जब भारत बंद के विफल होने पर आई और लोग पार्टी से सवाल करने लगे, तो आम आदमी पार्टी की ओर से यह फैला दिया गया कि उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया है।

इस बीच उत्तर दिल्ली के डीसीपी एंटो एल्फॉन्स ने स्पष्ट शब्दों में सीएम आवास के बाहर पुलिस तैनाती को बिलकुल सामान्य बताया है। उन्होंने कहा है कि ये तैनाती सुरक्षा के लिहाज से की गई है ताकि आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियों में झड़प न हो। ये हाउस अरेस्ट नहीं है।

इसके बावजूद एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान इस पूरे मुद्दे पर झूठ फैलाने के लिए आगे आई हैं।  उन्होंने एक ऐसे हाउस अरेस्ट को कश्मीर मॉडल से जोड़ा है जिसे दिल्ली पुलिस पहले ही झूठा और निराधार बता चुकी है। निधि ने सीएम केजरीवाल के प्रति अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए लिखा, “कश्मीर मॉडल, जिसे दिल्ली सीएम ने भी तब समर्थन दिया था, आज दिल्ली आ गया है।”

फ्लॉप रहा ‘भारत बंद’, शाम 7 बजे अमित शाह करेंगे किसानों से मुलाकात: खुली रहीं दुकानें, यातायात सामान्य

पूरे देश में कॉन्ग्रेस सहित सभी विपक्षी दल मिल कर अराजकता का माहौल बनाने की चाहत में ‘किसान आंदोलन’ के जरिए मोदी सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में लगे हुए हैं और इसीलिए ‘भारत बंद’ बुलाया गया। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों को बातचीत के लिए बुलाया है, जिसके बाद सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) की शाम 7 बजे राकेश टिकैत समेत अन्य किसान नेताओं से अमित शाह मुलाकात करेंगे।

राकेश टिकट इसके लिए दिल्ली रवाना भी हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि 13-14 प्रतिनिधि आज शाम 7 बजे केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात करेंगे। बताया जा रहा है कि टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर खुलवा दिया है। साथ ही, वह अन्य किसान संघों से बात करने के लिए सिंघू सीमा रवाना हो गए हैं।

कई राज्यों में भारत बंद का कोई असर नहीं है और लोगों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें खुली रखी हैं। त्रिपुरा में भी सभी दुकानें व बाजार खुले रहे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपद्रव किया। पुडुचेरी में DMK और कॉन्ग्रेस ने मिल कर विरोध प्रदर्शन किया।

जहाँ तक दिल्ली की बात है, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) सतीश गोलचा ने बताया है कि राजधानी में सबकुछ सामान्य है और शांति-व्यवस्था बनी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि यातयात सामान्य है और बाजार खुले हैं। हालाँकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली सदर बाजार में भी चहल-पहल रही। वहीं मुंबई में यातायात पूर्ववत रहा। यहाँ दुकानें खुली रहीं और लोग काम पर भी गए।

जयपुर में जब लोगों ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की बात नहीं मानी तो वो भाजपा कार्यालय को ही घेरने पहुँच गए, जहाँ दोनों पार्टियों के लोगों के बीच हाथापाई भी हुई। पुलिस के समझाने के बाद NSUI के लोग शांत हुए। उन्होंने पीएम मोदी का पुतला भी फूँका। गाजीपुर में यूपी-दिल्ली सीमा पर जाम लगा रहा। चंडीगढ़ में किसान संगठनों ने हाइवे ब्लॉक कर दिया। सभी विपक्षी दल अपनी राजनीतिक फसल काटने के लिए बेताब दिखे।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस और वामपंथी कार्यकर्ताओं ने उपद्रव कर के अराजकता का माहौल पैदा कर दिया। राजस्थान में कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट का दावा है कि 24 राजनीतिक दलों ने इस भारत बंद का समर्थन किया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे बौखलाए हुए विपक्ष की साजिश बताया। पंजाब में बंद का थोड़ा-बहुत असर देखने को मिला, लेकिन पूरे भारत में लोगों ने इसे समर्थन नहीं दिया और ये फ्लॉप दिख रहा है।

उधर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित भारत बंद के दौरान भीम आर्मी के नेता-कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन में उन्हें समर्थन देने पहुँचे और उनके साथ विरोध प्रदर्शन के इरादे से बाहर निकले। लेकिन, वहाँ उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यूपी गेट पर किसानों के धरने में पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने भगा दिया। पुलिस ने भी लाठियाँ चटकाईं और भीम आर्मी के लोगों को किसानों ने खदेड़ दिया।

‘आदिपुरूष’ को लेकर सैफ पर भड़के मुकेश खन्ना, कहा- ‘अपने धर्म के किसी किरदार को, ऐसे बदलने की हिम्मत दिखा दीजिए, माफी मंजूर नहीं’

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान अपनी अपकमिंग फिल्म ‘आदिपुरुष’ की रिलीज से पहले ही सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान माता सीता और रावण को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिससे वो लोगों के निशाने पर आ गए हैं। इसे लेकर अब दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना की भी प्रतिक्रिया आ गई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर सैफ अली खान को लताड़ लगाई है। उनके वीडियो पर लोग जमकर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।

‘धार्मिक किरदारों से छेड़छाड़ की कोशिश कर रहे फिल्मकार’

अपने वीडियो में मुकेश खन्ना कहते है, “मैं देख रहा हूँ कि अभी भी हमारे फिल्मकार हमारे धार्मिक किरदारों के साथ छेड़छाड़ करने की अवांछनीय कोशिश में लगे हुए हैं। मुझे बताया गया है कि हमारे सैफ अली खान ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है, अपनी एक आने वाली फिल्म ‘आदिपुरुष’ के किरदार के बारे में, उन्होंने कहा कि उन्हें लंकेश रावण का रोल करने में बहुत मजा आया, दिलचस्प लगा। उनके हिसाब से वो उन्हें मानवीय और मनोरंजक बना रहे हैं। दयालु दिखा रहे हैं।”

‘अच्छों को अच्छा और बुरों को बुरा रहने दें’

मुकेश खन्ना ने आगे कहा, “मेरा सिर्फ इतना ही कहना है उनसे कि हमारे एपिक (महाकाव्य) के किरदारों के साथ छेड़छाड़ करना बंद कीजिए। जो अच्छे हैं, उन्हें अच्छे रहने दीजिए। जो बुरे हैं, उन्हें बुरे रहने दीजिए, आप अपनी तरफ से कोई ताकत मत लगाइए। आप अपने ही धर्म के किसी किरदार को, इस तरह से बदलकर दिखाने की हिम्मत दिखा दीजिए, कोशिश दिखा दीजिए, मैं आपकी ताकत को मान जाऊँगा। मैं उन सभी बुद्धिजीवियों को, जो सो-कॉल्ड बुद्धिजीवी हैं, मैं उन्हें बुद्धिजीवी भी नहीं कहूँगा क्योंकि वो अपनी बुद्धि का गलत इस्तेमाल करते हैं।”

वहीं वीडियो के साथ मुकेश खन्ना ने एक लंबा चौड़ा कैप्शन भी लिखा है। कैप्शन में उन्होंने कहा है कि हिंदू धर्म खतरे में है और लोगों को सावधान हो जाना चाहिए। मुकेश खन्ना ने कहा कि क्या इस तरह की चीजों के पीछे भी कोई साजिश छिपी है, या फिर ये फिल्म के प्रमोशन से जुड़ा है।

‘हिंदू धर्म खतरे में, हमें माफी मंजूर नहीं’

मुकेश खन्ना कहते हैं, “मुझे ना चाहते हुए भी कहना पड़ेगा हिंदू धर्म खतरे में है। ये दूसरे धर्म वाले हमेशा कहते रहते हैं। अब लगता है हमें भी कहना पड़ेगा। सावधान हो जाइए। अब ब्रेकिंग न्यूज़ ये है कि सैफ ने लिखित माफी माँग ली है अपने वक्तव्य के लिए। वाह! क्या बात है! कहते हैं अंग्रेज़ों ने एक ख़ूबसूरत शब्द बनाया है ‘सॉरी’। तीर मारो, बम चला लो, घूँसा मार दो और फिर कह दो ‘सॉरी’। लेकिन हमें मंजूर नहीं। बोलने के पहले सोचा क्यों नहीं!”

सैफ अली खान ने क्या कहा था? 

बता दें कि सैफ अली खान फिल्म आदिपुरुष में रावण का किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म पर बात करते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि उनके लिए राक्षस देवता की भूमिका निभाना मजेदार अनुभव रहा है। उन्होंने कहा था कि फिल्म में रावण के मानवीय रूप को दिखाया जाएगा और साथ ही इसमें सीता हरण को भी जस्टिफाई करने की कोशिश की गई है। वहीं राम के साथ युद्ध को बदले की लड़ाई के तौर पर दिखाया जाएगा। ये एक बड़े बजट वाली फिल्म है, जिसे टी सीरीज के निर्देशन में बनाया जा रहा है। इस फिल्म में बाहुबली स्टार प्रभास भगवान राम की भूमिका में दिखाई देंगे।

गाजियाबाद: ‘भारत बंद’ में हिस्सा लेने पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने खदेड़ा, लाठियाँ भी चटकाई गईं

जहाँ सभी राजनीतिक संगठन ‘किसान आंदोलन’ के बहाने अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं, वहीं जातिवाद, मजहबी कट्टरता और खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले लोग भी इससे जुड़ते देखे जा रहे हैं। ऐसा ही एक दल है ‘भीम आर्मी’, जो उत्तर प्रदेश में दलितों की राजनीति करने का दावा करता है। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ की अगुआई वाले इस संगठन के लोगों को गाजियाबाद में किसानों ने मार-मार कर भगा दिया।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित भारत बंद के दौरान भीम आर्मी के नेता-कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन में उन्हें समर्थन देने पहुँचे और उनके साथ विरोध प्रदर्शन के इरादे से बाहर निकले। लेकिन, वहाँ उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यूपी गेट पर किसानों के धरने में पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने भगा दिया।

किसानों ने आरोप लगाया कि भीम आर्मी के लोग इस आंदोलन को भड़काने की कोशिश में लगे हुए थे, इसीलिए उन्हें इसमें शामिल नहीं होने दिया गया। खबर के अनुसार, किसानों की शिकायत के बाद पुलिस ने भी लाठियाँ चटकाईं और भीम आर्मी के लोगों को किसानों ने खदेड़ दिया। उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही कह चुकी है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जोर-जबरदस्ती नहीं चलेगी। दुकानों को जबरन बंद नहीं कराया जा सकता है।

वहीं भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जाते समय उन्हें हिरासत में लेकर नजरबंद कर लिया गया है। उधर दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी थीं, लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। दिल्ली में  APMC के अध्यक्ष आदिल अहमद खान हैं। ऐसे में AAP पर कई सवाल उठ रहे हैं।