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हाथरस केस: नार्को टेस्ट के बाद अब पीड़ित परिवार ने पॉलीग्राफ टेस्ट से भी किया इनकार

हाथरस के बुलगढी गाँव में युवती की मौत की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने मृतका के परिवार के सदस्यों से सच्चाई जानने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को कहा है। मृतका के भाई और माँ से इस संबंध में घटनास्थल पर पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने सच और झूठ का पता लगाने के लिए किए जाने वाले इस पॉलीग्राफ टेस्ट को कराने से इनकार कर दिया। 

सीबीआई द्वारा पीड़िता के भाई से कई बार पूछताछ किए जाने के बाद पता चला है कि मुख्य आरोपित संदीप पीड़िता के भाई द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन के माध्यम से लगातार संपर्क में था। सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। हालाँकि पीड़िता के भाई की आवाज का सैंपल लिया गया, और अब एजेंसी द्वारा इसकी ऑडियो जाँच की जाएगी।

सीबीआई के सवालों के बारे में मृतका के भाई ने बताया कि सीबीआई ने उनसे सच झूठ का पता लगाने (पॉलीग्राफ टेस्ट) के लिए टेस्ट कराने को कहा। इस पर उसने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए इंकार कर दिया। ऑडियो टेस्ट की बात कहने पर उसने (भाई ने) हाँ कर दी। पीड़िता के भाई का कहना है कि जेल में बंद लोगों से पूछताछ की जाए, उन्हें आराम से जेल में बिठा रखा है। मृतका के भाई ने कहा कि उनसे पूछा जाए कि उसकी बहन को कैसे मारा।

मृतका के बड़े भाई ने आरोप लगाया है कि सीबीआई पूरे मामले को प्रेम प्रसंग के रूप में चित्रित करना चाहती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया है कि जाँच एजेंसी ने स्वीकार किया कि मामला हल होने के कगार पर है। इस बीच मृतका की भाभी ने हाथरस के डीएम का टेस्ट कराने की माँग तक की। उन्होंने कहा कि डीएम का टेस्ट क्यों नहीं करवाया जा रहा है?

CBI ने रीक्रिएट किया क्राइम सीन

सीबीआई 12 अक्टूबर से हाथरस की घटना की जाँच कर रही है। जाँच एजेंसी ने उच्च न्यायालय से तीखी टिप्पणी के बाद अपनी जाँच तेज कर दी है। डीएसपी सीमा पाहुजा के नेतृत्व में 15 सदस्यों की एक टीम शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) दोपहर करीब 12 बजे फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँची और क्राइम सीन को रीक्रिएट किया।

पीड़ित की माँ और भाई को CRPF के संरक्षण में घटनास्थल पर लाया गया। टीम ने पीड़ित के भाई को घटना स्थल से लगभग 100 मीटर की दूरी पर मैदान के पिछले हिस्से पर बैठा दिया, जबकि सीबीआई की दूसरी टीम पीड़ित की माँ के साथ खेत में पहुँची। इसके बाद, पीड़िता की माँ से पूछताछ की गई।

CBI की टीम ने लगभग 20 मिनट तक माँ से पूछताछ की जिसके बाद पीड़िता के भाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया। दोनों से अलग-अलग पूछताछ करने के बाद सीबीआई सच्चाई तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

हाथरस के पीड़ित परिवार के कई चेहरे हैं

हाथरस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लड़की के परिवार की लगातार बदलती स्थिति रही है। शुरुआत में, पीड़ित परिवार ने केवल हमले का आरोप लगाया था, और बलात्कार का आरोप एक हफ्ते बाद जोड़ा गया। इससे मामले को लेकर बहुत भ्रम पैदा हो गया था, क्योंकि अब तक उपलब्ध चिकित्सा और फॉरेंसिक सबूत बलात्कार के आरोप की पुष्टि नहीं करते हैं। इसी तरह, मामले में जाँच पर भी परिवार का रुख भी बदलता दिख रहा है, खासकर पीड़ित के भाई द्वारा दिया गया बयान अविश्वसनीय बना हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा यह मामला सीबीआई को सौंप दिए जाने के बाद मृतका के भाई ने कहा कि परिवार ने इसकी माँग नहीं की। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता के भाई ने कहा कि उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग नहीं की क्योंकि एसआईटी जाँच पहले से ही चल रही है। अब परिवार सुप्रीम कोर्ट के तहत न्यायिक जाँच की माँग कर रहा है।

परिवार ने नार्को टेस्ट कराने से इनकार किया था

हाथरस में पीड़िता के परिजनों ने अभी पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से ही इनकार नहीं किया है। इससे पहले, उन्होंने नार्को टेस्ट लेने से भी इनकार कर दिया था। एसआईटी जाँच की शुरुआती रिपोर्ट में पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट की सिफारिश की गई है। हालाँकि, पीड़िता की माँ ने सिफारिश को खारिज कर दिया है, यह कहते हुए कि उसका परिवार नार्को टेस्ट से नहीं गुजरेगा।

यहाँ तक कि जब समाचार चैनल ‘आज तक’ के रिपोर्टर ने मृतका की दुखी माँ से कहा था कि नार्को टेस्ट से छिपे हुए मामले के तथ्यों का पता चल जाएगा, तो माँ ने जवाब दिया था, “हमें नहीं पता कि नार्को टेस्ट क्या है और इसलिए हम इसे नहीं करवाना चाहते हैं।”

हाथरस कांड

14 सितंबर को, एक 19 वर्षीय लड़की का गला घोंटा गया था, और बाद में उसने 29 सितंबर को अस्पताल में दम तोड़ दिया था। आरोपित के खिलाफ शुरू में हत्या के आरोप लगे थे। हालाँकि, बाद में बलात्कार के आरोप भी शामिल किए गए थे।

उस समय हाथरस मामला पॉलिटिकल ड्रामा और मीडिया प्रोपगेंडा का आधार बन गया था। कॉन्ग्रेस नेताओं राहुल और प्रियंका गाँधी, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद, टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन, और कई अन्य लोग राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ हमला करने के लिए परिवार से मिलने हाथरस गए थे।

‘जूते से मारा, कुछ अज्ञात पीने को दिया, रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट’: जानिए अर्णब की गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस ने क्या किया

अर्णब गोस्वामी के वकीलों द्वारा उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने के बाद कुछ चौंकाने वाले खुलासे सामने आए है। जमानत के अलावा इस याचिका में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए और अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी कहा गया है।

बता दें अर्णब को मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय और उनकी माँ को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 4 नवंबर बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने उन्हें न्यायिक सहमति के बिना हिरासत में लिया था। वे 18 नवंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। पिछली 3 रातों से उन्हें अलीबाग में बने कोविड सेंटर में रखा गया था।

जमानत याचिका पर आज दोपहर 12 बजे से न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद करने का अनुरोध किया है। अपनी जमानत याचिका में उन्होंने बताया कि किस तरह मुंबई पुलिस ने उन्हें मारा-पीटा और प्रताड़ित किया।

अर्णब ने घर से बाहर घसीटे जाने और गिरफ्तार करने के बाद मुंबई पुलिस द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित करने की कहानी सुनाई है।

  • 1) अर्णब के बाएँ हाथ पर 6 इंच का गहरा घाव हुआ।
  • 2) रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट।
  • 3) अर्णब ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें जूते से मारा।
  • 4) पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया।
  • 5) नस में चोट होने का दावा
  • 6) पानी तक नहीं पीने दिया।
  • 7) पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें कुछ तरल का सेवन करने के लिए मजबूर किया गया और जोकि पीने लायक नहीं था।

इस मामले में अर्णब गोस्वामी की बंदी प्रत्यक्षीकरण अर्जी कहती है:

गिरफ्तारी के दौरान और एक पुलिस वैन में अलीबाग में ट्रांसफर होने के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें जूते से मारा। पानी तक नहीं पीने दिया। अर्णब ने अपने हाथ में 6 इंच गहरा घाव होने, रीढ़ की हड्डी और नस में चोट होने का दावा भी किया है। उनका कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया। साथ ही पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें कुछ तरल का सेवन करने के लिए मजबूर किया गया और जोकि पीने लायक नहीं था।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस 2 साल पुराने बंद मामले में उन्हें गिरफ्तार करने उनके आवास पर पहुँची थी। इस दौरान उन्होंने अर्णब गोस्वामी से हाथापाई भी की। जिसके बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर पुलिस द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में यह दलील तब आई जब मुंबई पुलिस ने मनमाने तरीके से महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के निर्देश पर इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के 2018 के बंद मामले में फिर से जाँच शुरू की।

याचिका की सुनवाई का आज तीसरा दिन है। कल, उच्च न्यायालय ने अर्णब गोस्वामी को उच्च न्यायालय में भी एक अलग जमानत आवेदन दायर करने के लिए कहा था।

अर्णब गोस्वामी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कल मुंबई उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी गैरकानूनी थी और उन्हें हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं था। बंद मामले को बिना अदालत की अनुमति से खोल देना अपने आपमे संदिग्ध परिस्थितियों को दर्शाता है।

हरीश साल्वे ने कहा कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानसभा में आरोप लगाया था कि आत्महत्या के लिए अर्णब जिम्मेदार था। यहीं से पूरा मामला शुरू होता है। उन्‍होंने कहा कि पुलिस एक ऐसे पुलिस रिमांड को पाना चाहती है, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया था।

साल्वे ने कोर्ट से कहा था कि अगर अन्वय नायक ने वित्तीय नुकसान के कारण आत्महत्या की, तो उनकी माँ ने अपना जीवन क्यों समाप्त कर लिया? हम आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों को नहीं जानते हैं। किसी ने यह स्थापित नहीं किया कि अवैध कमीशन है। साल्वे ने तर्क देते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में अर्नब को हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

उल्लेखनीय है कि गोस्वामी को रायगढ़ पुलिस ने 4 नवंबर की सुबह उनके मुंबई आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अलीबाग के CJM ने उन्हें 18 नवंबर तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।

जिस पर HC में दायर याचिका में उठाया गया मुख्य तर्क यह है कि मजिस्ट्रेट द्वारा 2019 में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामले में एक क्लोजर आदेश पारित होने के बाद न्यायिक आदेश प्राप्त किए बिना मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस के पास कोई पावर नहीं है।

रिलायंस समूह ने कामाख्या मंदिर को भेंट किया 20 किलो सोना, दिवाली तक मुख्य गुम्बद पर चढ़ेगी सोने की परत

देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर इस साल दिवाली में सोने से सजाया जाएगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने इस प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी ली है जिसके तहत कामाख्या मंदिर के गुंबद को सजाने के लिए 20 किलो सोना उपहार स्वरुप दिया है। इस शिखर पर पत्ती के आकर में सोने की परत (लीफिंग) चढ़ाई जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरआईएल इस मंदिर के शिखर को दिवाली से पहले 20 किलो सोने से सुसज्जित करेगा। 

इस प्रोजेक्ट को रिलायंस समूह की तरफ से कामाख्या मंदिर के लिए उपहार के रूप में बताया जा रहा है। रिलायंस समूह के मुखिया मुकेश अंबानी ने मंदिर के प्रशासन से जुड़े लोगों से वादा किया है कि वह मंदिर की सज्जा (लीफिंग) के लिए 20 किलो सोना दान करेंगे। वहीं, कामाख्या मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि रिलायंस समूह की तरफ से सोना भेजा जा चुका है जो कि कुछ दिन पहले ही वहाँ पहुँचा। इसके अलावा, रिलायंस समूह के आभूषण संभाग (jewellery division) की तरफ से सजावट का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है।

रिलायंस समूह ने प्रोजेक्ट के लिए अपने कर्मचारी और पर्याप्त सुरक्षा भी भेज दी है। फ़िलहाल रिलायंस समूह के अंतर्गत काम करने वाले इंजीनियर, सोने का काम करने वाले (ज्वेलर) और अन्य लोग मंदिर से जुड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में जुट गए हैं। तय योजना के अनुसार इस प्रोजेक्ट को दिवाली के पहले पूरा किया जाना है। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई से भेजे गए रिलायंस समूह के कर्मचारी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत से लगे हुए हैं। शिखर के लिए तांबे का एक ढाँचा (कॉपर फ्रेम) तैयार किया गया है जिससे सोने की सजावट को सही से रखा जा सके।

पहले था सोने का कलश, अब पूरा गुंबद होगा सोने का 

मंदिर प्रशासन से जुड़े मोहित शर्मा ने इस संबंध में अन्य अहम जानकारी भी दी। उन्होंने गुवाहाटी प्लस से बात करते हुए बताया कि कलश या मंदिर की चोटी पहले से ही सोने का बना हुआ था। लेकिन रिलायंस समूह द्वारा किए गए दान के बाद पूरा गुंबद ही सोने का होगा, रिलायंस समूह इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च उठा रहा है। मुकेश अंबानी कामाख्या माता के बड़े भक्त हैं और वह संभावित तौर पर प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद मंदिर दर्शन करने आएँगे। फ़िलहाल इस मामले में रिलायंस समूह की तरफ से पुष्टि होनी बाकी है। 

भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने निभाई अहम भूमिका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, असम की राज्य सरकार में मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी को इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई। रिलायंस समूह ने इस संबंध में सितंबर के दौरान ही प्रस्ताव पेश किया था।

कामाख्या मंदिर प्रशासन का मानना था कि महामारी के चलते श्राइन पिछले काफी समय से बंद था। लेकिन दिवाली से पहले सोने की मदद से की जाने वाली मंदिर की सजावट का कार्य निसंदेह ज़्यादा भक्तों को आकर्षित करेगा। इतना ही नहीं, दिवाली उत्सव के मौके पर यह आकर्षण का एक केंद्र भी बना रहेगा। सोने की लीफिंग का कुल खर्च लगभग 10 करोड़ रुपए आँका गया है।           

चुनाव प्रक्रिया पर ट्रम्प सवाल उठाएँ तो ‘झूठे’ और भारत में EVM पर आरोप ‘गंभीर’: देखें रवीश कुमार की दोहरी बातें

NDTV के पत्रकार रवीश कुमार का दोहरा रवैया एक बार फिर से सामने आया है और इस बार उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना को लेकर भारत को बदनाम करने की कोशिश की है। रवीश कुमार ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अमेरिका में मतों की गिनती में जैसे ही डोनाल्ड ट्रम्प पिछड़ने लगे, उन्होंने ‘झूठ का एक्सेलेटर’ दबा दिया। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस में चल रही ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस को कई समाचार चैनलों ने प्रसारण रोक दिया। यही रवीश खुद भारत में EVM का रोना रोते रहे हैं।

रवीश कुमार ने दावा किया कि अमेरिका के समाचार चैनलों ने ये कहते हुए ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण रोक दिया कि वो पहले अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए तथ्यों की जाँच करेंगे। इसके बाद अपना प्रोपेगंडा फैलाते हुए रवीश पूछने लगे कि अगर ऐसा भारत में हो जाए तो ED की टीम सिर्फ घर में ही नहीं जाएगी, बल्कि पूरे घर को ही ED के दफ्तर में मँगा लिया जाएगा। एसोसिएट प्रेस ने जानकारी दी है कि ABC, CBS और NBS जैसे बड़े चैनलों ने प्रसारण रोका।

उन्होंने कहा कि ट्रम्प चुनाव मे धाँधली को लेकर ‘अनर्गल’ आरोप लगा रहे थे, इसीलिए इन चैनलों का कहना था कि वो पहले ट्रम्प द्वारा लगाए गए भ्रामक आरोपों की जाँच करेंगे। अभी जो रवीश कुमार अमेरिकी चुनावों को पवित्र और उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले को झूठा बता रहे हैं, वही रवीश कुमार भारत में उन लोगों का समर्थन करते रहे हैं, जो यहाँ की चुनाव प्रक्रिया और EVM पर सवाल खड़े करते हैं।

रवीश कुमार का वो वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि EVM हैकिंग के आरोपों को मजाक में नहीं, बल्कि गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव को हैक किया गया था या उसमें गड़बड़ी हुई थी, ये सवाल फिर से उठ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि जिस EVM मशीन को देवता मानते हुए हम मजाक में सारे आरोपों को उड़ा देते हैं, लंदन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसे लेकर कई आरोप लगाए गए हैं।

रवीश कुमार ने कहा था कि EVM को लेकर संदेह इतना बढ़ गया है कि वज्रगृह के बाहर राजनीतिक कार्यकर्ता जमा हो जाते हैं और देखते रहते हैं कि कहीं EVM को बदल न दिया जाए या फिर उसे हैक न कर लिया जाए। तब वो देश के कई इलाकों में EVM पर लगे आरोपों की जाँच की बात कर रहे थे। आज यही रवीश कुमार अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल न उठाने को कह रहे हैं। और जब यही चीजें भारत में हो तो बुरी हो जाती है।

उधर रवीश कुमार ने अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी को लेकर भी फेसबुक पोस्ट लिखा है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी क्यों और किस तरह से हुई, इस बारे में आपको पता ही होगा। पहले पैराग्राफ में ही रवीश ने गिरफ़्तारी के तरीकों पर सवाल करते हुए कानून के जानकारों के हवाले से इसे गलत बताया। लेकिन, दूसरे पैराग्राफ में ‘Whataboutery’ शुरू हो जाती है। रवीश कुमार सहित सारे गिरोह के लोग साथ में लिख रहे हैं कि वो अर्णब गोस्वामी को पत्रकार नहीं मानते।

BHU आयुर्वेद में ‘गर्भ संस्कार थेरेपी’ से पैदा होंगे ‘अभिमन्यु’: भजन-मंत्र-वेद-पाठ के जरिए होगी महिलाओं की डिलीवरी

देश के प्रख्यात शैक्षणिक संस्थान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विज्ञान विभाग ने एक अनूठी प्रक्रिया शुरू की है जिसका नाम है, ‘गर्भ संस्कार थेरेपी’। इस थेरेपी का उद्देश्य महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशुओं को जन्म के पूर्व से ही अच्छे संस्कार दिए जाएँ। इस थेरेपी की सहायता से गर्भवती महिलाओं को वैदिक थेरेपी, ध्यान थेरेपी, आध्यात्मिक संगीत थेरेपी और पूजापाठ थेरेपी की मदद से गर्भ में पलने वाले शिशुओं का पालन-पोषण किया जाएगा।   

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत की सनातन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पूरे विश्व में अनुसंधान का विषय है। वर्तमान आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई बड़े सकारात्मक परिवर्तन किए हैं लेकिन प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता सबसे अलग है। इन बिंदुओं को मद्देनज़र रखते हुए पुरातन परम्पराओं का अनुसरण करते हुए गर्भ संस्कार थेरेपी की शुरुआत की गई है। बीएचयू के आयुर्वेद विभाग ने इस थेरेपी की शुरुआत इसलिए की जिससे शिशुओं को गर्भ में रहने के दौरान ही उचित संस्कार दिए जा सकें। 

इस मुद्दे पर बात करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सुंदर लाल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, प्राध्यापक एसके माथुर ने इससे संबंधित कई अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा, “गर्भ संस्कार कोई नई प्रक्रिया नहीं है। आयुर्वेद में इस प्रक्रिया का अनुसरण सदियों से हो रहा है, वैज्ञानिक स्वीकृति के बिना इस प्रक्रिया को उतनी अहमियत नहीं मिल पाई थी। हम गर्भ संस्कार को प्रसूति विभाग तंत्र (obstetrics) के अंतर्गत दोबारा नए सिरे से शुरू कर रहे हैं, यह गर्भवती महिलाओं के लिए ज़रूरी भी होता है।” 

इसके बाद उन्होंने कहा कि यह बात वैज्ञानिक रूप से सिद्ध की जा चुकी है कि अच्छे वातावरण और अच्छे संगीत का मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गर्भ संस्कार थेरेपी के तहत गर्भवती महिला को अच्छा संगीत, बेहतर साहित्य और प्रेरणादायक चीज़ें दिखाने पर जोर दिया जाएगा। गर्भ पर पड़ने वाले इन चीज़ों के प्रभाव को वैज्ञानिक विधि से देखा और समझा जाएगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत सितंबर महीने के अंतिम हफ्ते में हुई थी जिसे फ़िलहाल लगभग पूरी तरह से क्रियान्वित किया जा रहा है।

आयुर्वेद विभाग के तहत आने वाले प्रसूति तंत्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सुमन ने भी इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “आयुर्वेद में कुल 16 संस्कारों का उल्लेख है जिसमें से एक गर्भ संस्कार है। तमाम पौराणिक कथाओं के अनुसार गर्भ संस्कार का महत्व अत्यधिक है, इसके अनुसार शिशु को गर्भ के भीतर ही शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। इस थेरेपी के अंतर्गत महिलाओं को वेद पढ़ने के लिए दिए जा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती महिलाओं को भजन सुनाया जा रहा है, उन्हें अच्छे महापुरुषों से संबंधित साहित्य पढ़ाया जाता है। गर्भ में पलने वालों शिशुओं को जिस तरह का वातावरण मिलता है वह बड़े होकर वैसे ही बनते हैं। ऐसे में यह प्रक्रिया गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित होगी।”

भारतीय आयुर्वेद में गर्भ संस्कार थेरेपी कोई नई प्रक्रिया नहीं है, इसकी शुरुआत होने से महिलाओं में उल्लास और प्रसन्नता का माहौल है। गर्भवती महिलाओं का मानना है कि गर्भ संस्कार की मदद से शिशुओं को अच्छा संस्कार मिलेगा और वह समाज में बेहतर योगदान दे सकेगा। महाभारत में भी अर्जुन पुत्र अभिमन्यु ने माँ के गर्भ में रह कर ही चक्रव्यूह के 6 द्वार तोड़ने की शिक्षा ग्रहण की थी।           

कभी शाम होते घरों में बंद कर दी जाती थीं बिहार की महिलाएँ, आज हैं चुनावी बहस का हिस्सा: लालू से नीतीश तक के सफर में कुछ तो बदला है

अपने प्रिय नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ की पुनः यात्रा ने पाटलिपुत्र की महान स्त्रियों की विरासत की चिर स्मृति मन में जगा दी। वही भूमि, जिसने 16 महाजनपदों की अवधारणा देकर भारत को राज करना सिखाया। उसकी महिलाएँ आत्मबल से कितनी लबालब होंगी, जिन्होंने भारतवर्ष को उत्तरोत्तर सम्राट तैयार कर के दिए!

रामायणकालीन माता सीता हों, जिन्होंने लंका जैसे शक्तिशाली साम्राज्य से अकेले निडरता से आँखें मिलाई, उर्मिला, जिन्होंने स्वाधिकार से लक्ष्मण को अपने स्वच्छंद धर्म निर्वाहन को प्रवृत्त किया। कैसा विषद आत्मबल रहा होगा सुजाता का, जिनकी ‘जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई, उसी तरह आपकी भी हो’ की शुभेक्षा से भरी खीर ग्रहण करने मात्र से बुद्ध को आत्मबोध हो गया।

फिर यशोधरा, मूरा, शुभाद्रंगी जैसे माताएँ और राजकन्याएँ हों, या उभया मिश्रा जैसी विदुषी, जिनके सामने शंकराचार्य को भी लगभग घुटने टेकने पड़े, बिहारी महिलाओं के शौर्य को बहुत दूर जाकर ढूँढना नहीं पड़ता।

वैसे ‘प्रिंट की जोती’ की मानें, या फिर यूँ भी बिहार मातृसत्तात्मक ही रहा है यानी, ‘बिहारी गाइज आर मोस्टली मम्माज़ बॉय’ (‘जोती’ जी से साभार) सिवाय एक यादव परिवार की बहू के, जो आधी रात को घर से निष्कासित की जाती है, उसे अपवाद रखें। हुआ तो गाँधी परिवार में मेनका जी के साथ भी ऐसा ही, परंतु हम इसे लेकर भारत में और बिहार में महिलाओं की पारंपरिक स्थिति पर धारणा नहीं बना सकते।

जैसा कि सर्वविदित है कि सामाजिक कुपोषण की पहली शिकार भी स्त्री होती हैं। वर्षों तक घोटालों और प्राकृतिक आपदा झेलता बिहार निश्चित ही अपने कई समर्थ नौनिहालों से हाथ धो चुका है और इसका बहुत बड़ा मूल्य महिलाओं ने चुकाया।

एक ‘जातउद्घोषक’ सरकार में एक जाति विशेष की महिलाओं के चुन-चुन कर बलात्कार किए जाने की बात हो या बाहुबलियों की अतिशयोक्ति, बिहार की ललनाओं की परीक्षा सदियों तक चली।

वैसे, लालू के समय में जो बिटिया शाम होते ही ढोर जैसे घरों में बंद कर दी जाती थी, अब शाम को विहंगो जैसे साईकिल पर उन्मुक्तता से बैठ बिहार विहार करती है। इस वाक्य के अलंकार निश्चय ही भावातिरेक में लालू के उस काल को सोच कर आते हैं, जब अपराध ने अपनी नई सीमाएँ तय कीं।

सीमाएँ ही नहीं, अपराध निरन्तर नए रूप और प्रतिमान स्थापित करता रहा। स्वाभाविक है कि समाज में अपराध की पहली और अंतिम भोक्ता महिलाएँ होती हैं, चाहे आपको कुल का मान मर्दन करना हो, या फिर व्यक्ति और समुदाय का। लेकिन NRCB के आँकड़ों से यह जानना बहुत सुखद रहा कि नीतीश कुमार के शासन में बिहार में महिलाओ के विरूद्ध अपराध भारत में तीसरे पायदान पर हैं। राजस्थान और दिल्ली से कहीं अधिक सुरक्षित बिहार अब स्वछंद साँस लेता प्रतीत होता है।

इस चुनावी मौसम में तब जानने का मन हुआ कि राजनीतिक पराक्रम के खेल में महिलाओं को लेकर कोई चुनावी वार्ता है भी या नहीं? इसी क्रम में बिहार में जारी विधानसभा चुनाव के चुनावी एजेंडे पर देखे गए कुछ राजनीतिक भाषणों से भी वास्ता पड़ा।

आशानुरूप, सबसे निराशाजनक बात थी कि बिहार के राजपुत्रों- तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के भाषणों से खानापूर्ति के अलावा महिला विकास और सशक्तिकरण जैसे शब्द ही गायब थे। चिराग ज्यादा सुनने में नहीं आए पर वो अपेक्षाकृत काफी कुशल वक्ता और नेता हैं।

ऐसे ही भारतीय जनता पार्टी का पक्ष रखते हुए श्री गुरुप्रसाद पासवान को इस बीच काफी न्यूज चैनल पर सुना जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बातें पता चलीं। इसके अनुसार, बिहार में इस बीच राजग सरकार के अंतर्गत –

  • 7 करोड़ जन-धन खाते, जो अक्टूबर 2020 तक खुले, उनमें 2.5 करोड़ महिलाओं के हैं
  • 4 लाख मुद्रा योजना के अन्तर्गत आवंटित ऋण में 2.5 लाख महिलाएँ लाभान्वित हुईं
  • 15 करोड़ महिलाएँ स्वयम सहायता के माध्यम से एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में बहुआयामी भूमिका निबाह रही हैं।
  • इसमें समाज की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था, पंचायत में दिया गया आरक्षण उल्लेखनीय है

यह जानकारी उत्साहजनक है और उससे भी ऊपर, यह देखना सुखद है कि बिहार के राजनीति में लालू के जातिगत गोलबंदी और तुष्टीकरण से ऊपर महिला विकास और सशक्तिकरण का एक स्वस्थ और बहुप्रतीक्षित विमर्श शुरू हुआ जो अब तब बिहार के राजनीतिक पृष्ठभूमि से नदारद था! इस सकारात्मकता का स्वागत होना चाहिए और ईश्वर इस मंथन को पुष्पित-पल्लवित करे!

नोट: यह लेख श्रद्धा सुमन राय द्वारा लिखा गया है, जो कि वर्तमान में एक बहुराष्ट्रीय संस्था में यांत्रिक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

‘हिन्दू SC/OBC जाति प्रमाण पत्र वाले ईसाई पादरियों को आंध्र सरकार ने दिए ₹5000’: NGO के पत्र पर कार्रवाई का आदेश

आंध्र प्रदेश में NGO ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ ने अपनी रिसर्च में पाया था कि राज्य में 29841 ईसाई पादरियों को 5000 रुपए का एकबारगी मानदेय दिया गया। ये रुपए ‘डिजास्टर रिलीफ फण्ड’ से दिए गए। साथ ही इनमें से 70% ऐसे हैं, जिनके पास SC/OBC जाति प्रमाण पत्र हैं। अब केंद्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस मामले में कार्रवाई के लिए आंध्र प्रदेश के अधिकारी को पत्र लिखा है।

NGO ने उस पत्र को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए बताया कि मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश के सामाजिक कल्याण मंत्रालय के प्रधान को पत्र लिख कर हिन्दू SC/OBS जाति प्रमाणपत्र के जरिए 5000 रुपए उठाने वाले पादरियों पर कार्रवाई के बाद ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ भेजने को कहा है। NGO ने इस मामले में नेशनल SC & BC कमीशन को पत्र लिखते हुए इसे ईसाई धर्मान्तरण के लिए सरकारी प्रलोभन करार दिया था।

इन दोनों आयोगों ने NGO ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ ने निवेदन किया था कि इस मामले में जाँच कराई जाए और इसके लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी का गठन कर के उसे आंध्र प्रदेश भेजा जाए। साथ ही उसने इस मामले में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल को भी पत्र लिख कर ईसाई पादरियों के हिन्दू SC/OBC जाति प्रमाण पत्र रद्द करने को कहा था, क्योंकि ये एक साथ दो-दो धर्मों की सुविधाओं का फायदा उठा रहे हैं।

NGO ने इसे ‘दोहरी धार्मिक पहचान’ का खुलासा करते हुए माँग की है कि न सिर्फ एक साथ दो-दो धर्मों की सुविधाओं का लाभ उठा रहे इन पादरियों पर कार्रवाई की जाए, बल्कि आंध्र प्रदेश सरकार को भी पादरियों को मानदेय देने से रोका जाए। संस्था ने इसे करदाताओं के बहुमूल्य योगदान की बर्बादी करार दिया। उसने कहा कि आंध्र प्रदेश की सरकार हर महीने ऐसे पादरियों को वेतन देने जा रही है, जो अच्छी बात नहीं है।

हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को बेंगलुरु से 80 किलोमीटर दूर कपालबेट्टा में जीसस क्राइस्ट की दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा पर चल रहे कार्य को रोकने का आदेश दिया था, जिसका शिलान्यास कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने किया था। रामनगर जिले में चल रहे इस काम को रोकते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा था कि उसकी अनुमति के बिना इस पर कोई काम नहीं होना चाहिए। एक PIL पर सुनवाई करते हुए उच्च-न्यायालय ने ये आदेश सुनाया।

‘तुम्हें ई-तमाचा मारूँ क्या?’: UN ने हिन्दुओं को दिया ‘पर्यावरण फ्रेंडली’ दीपावली बनाने का ज्ञान, लोगों ने लगाई लताड़

अब दीपावली के मौके पर हिन्दुओं को ज्ञान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) भी आगे आ गया है। ‘यूनाइटेड नेशंस (UN) इन इंडिया’ के ट्विटर हैंडल ने भारत के लोगों से अपील की है कि इस दीपावली वो खुल कर ‘ई-पटाखे’ फोड़ें। उसने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और ‘यूएन एनवायरनमेंट प्रोग्राम’ के साथ मिल कर लोगों से ‘पर्यावरण फ्रेंडली दीपावली’ मनाने की अपील की और इसके ‘जादू’ को अनुभव करने को कहा। हालाँकि, इससे कई लोग नाराज़ भी दिखे।

‘यूएन (UN) इन इंडिया’ ने लोगों से अपील की कि वो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ‘AR फिल्टर्स’ का इस्तेमाल कर के अपने बचपन के फेवरिट पटाखों के साथ तस्वीरें पोस्ट करने को कहा। इसके जवाब में ‘उत्तराखंड वॉर मेमोरियल’ के अध्यक्ष तरुण विजय ने पूछा कि क्या कभी संयुक्त राष्ट्र ने ‘पर्यावरण फ्रेंडली’ ईद या क्रिसमस मनाने की अपील की है? अन्य लोगों ने पूछा कि क्या दीपावली पर हिन्दुओं को पटाखे न फोड़ने के ज्ञान देने की जगह इन दोनों त्यौहारों पर पर्यावरण बचाने की अपील करने की UN की हिम्मत भी है?

कुछ अन्य लोगों ने कहा कि उनका मन कर रहा है कि संयुक्त राष्ट्र की इस ट्वीट पर वो उसे ऑनलाइन ही ‘ई-तमाचा’ मारें। वहीं एक व्यक्ति ने याद दिलाया कि जब पूरी दुनिया में पर्यावरण को लेकर कोई बात भी नहीं होती थी, तब अति-प्राचीन काल में भारतीय सभ्यता में पर्यावरण की बातें की जाती थीं। उसने याद दिलाया कि ऋग्वेद और यजुर्वेद में पेड़ों को न काटने और प्रदूषण न फैलाने की बात कही गई है।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि अगर पटाखों को प्रतिबंधित ही करना है तो सालों भर ऐसा किया जाना चाहिए, सिर्फ दीपावली के मौके पर नहीं। साथ ही नए वर्ष के मौकों पर पटाखों के महिमामंडन करने पर भी सवाल किया। कइयों ने उस पर हिन्दूफोबिया फैलाने का आरोप लगाया। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हमारे त्यौहार आपके लिए ‘सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम’ नहीं है। एक ने सेलेब्रिटीज की शादियों और IPL के समय भी ज्ञान देने को कहा।

वहीं एक ट्विटर यूजर ने एक वीडियो के माध्यम से हमला बोला। उसने दावा किया कि ये वीडियो यूएन हेडक्वार्टर के पास हुए पटाखों के सेलेब्रेशन का है। साथ ही पूछा कि क्या इससे पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलता? उसने याद दिलाया कि अमेरिका की जनसंख्या भारत की एक तिहाई है लेकिन वो भारत से ढाई गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाता है। लोगों ने प्रदूषण फैलाने वाले बड़े-बड़े अन्य कारकों पर उपाय करने को कहा, जबकि UN दीपावली पर हिन्दुओं को ‘ई-पटाखे’ फोड़ने पर ज्ञान दे रहा है।

बता दें कि दिल्ली में दीपावली से पहले केजरीवाल सरकार ने भी पटाखों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) को इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि पटाखे जलाने और पटाखे बेचने वालों पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे पहले सीएम केजरीवाल ने ग्रीन क्रैकर समेत किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था।

बिहार चुनाव: पूर्णिया में मतदाताओं की भीड़ ने किया सुरक्षा बलों पर हमला, 5 राउंड फायरिंग, 2 लोग गिरफ्तार

शनिवार (नवंबर 7, 2020) को बिहार में तीसरे और अंतिम चरण का चुनाव चल रहा है। इस दौरान पूर्णिया में फायरिंग की बातें कही जा रही है। दो मतदाताओं की गिरफ़्तारी की खबर भी है। बताया गया है कि मतदान केंद्र पर अचानक से मतदाताओं ने हमला बोल दिया, जिसके बाद CISF के जवानों ने पाँच राउंड हवाई फायरिंग की। हालाँकि, चुनाव आयोग ने अभी तक बिहार के पूर्णिया में मतदान के दौरान मतदाताओं और जवानों की झड़प में फायरिंग होने की पुष्टि नहीं की है।

‘प्रभात खबर’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्णिया जिला के मरंगा थाना अंतर्गत सतकोदरिया पंचायत के अलीनगर बूथ संख्या 282 पर मतदाताओं की एक बड़ी भीड़ जमा हो गई। उन्होंने बताया कि वो अपना मताधिकार का प्रयोग करने आए हैं। चूँकि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इस बार के चुनावों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया जा रहा है, इसीलिए सुरक्षा बलों ने मतदाताओं को लाइन में लगने को कहा।

अचानक से मतदाताओं ने कतार छोड़नी शुरू कर दी और लाइन को तोड़ दिया। इसके बाद जवान उन्हें समझाने लगे, लेकिन मतदाताओं ने उनकी बात नहीं बनी। इसी बात को लेकर सुरक्षा बलों के जवानों और मतदाताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मतदान केंद्र पर भीड़ ने हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस द्वारा 5 राउंड फायरिंग की गई। 2 मतदाताओं को गिरफ्तार किए जाने की खबर भी सामने आई है।

पूर्णिया के एसपी विशाल शर्मा ने इस घटना की पुष्टि की है। साथ ही, लाठीचार्ज की बात भी मीडिया द्वारा कही जा रही है। मतदाताओं का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने ही उनकी पिटाई की, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। मतदान केंद्र पर वरिष्ठ अधिकारी पहुँचे हैं और BSF के जवानों को लगाया गया है। वहीं, बिहार चुनाव के दौरान मतदाताओं ने पूर्णिया के अधिकारियों के सामने सुरक्षा बलों के जवानों पर उनसे अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने हमला नहीं किया।

बिहार चुनाव: नीतीश के ‘तीर’ को वोट देने पर RJD समर्थकों ने बुजुर्ग को बेरहमी से पीटा

बिहार में एक बुजुर्ग ने नीतीश कुमार के चुनाव चिन्ह तीर पर वोट देने की बात कही तो लालटेन के निशान वाले RJD समर्थकों ने बुजुर्ग की बुरी तरह से पिटाई कर डाली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें बुजुर्ग व्यक्ति RJD के गुंडों द्वारा अपने साथ की गई मारपीट के बारे में बता रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान जारी है।

बुजुर्ग के साथ मारपीट करने वाले लोग कथित तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के समर्थक बताए जा रहे हैं और वह बुजुर्ग व्यक्ति को इसलिए पीट रहे हैं क्योंकि उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के लिए मतदान किया।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने इस घटना का वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “यह वीडियो मधेपुरा का है जहाँ तीर (जेडीयू) पर वोट देने की बात कही तो आरजेडी समर्थकों ने बुजुर्ग की बुरी तरह पिटाई कर दी। आरजेडी का मतलब बिहार में गुंडाराज।” घटना बिहार, मधेपुरा जिले के भवानीपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बरगाँव की बताई जा रही है।   

मतदान के दौरान इस तरह के वीडियो का सामने आना बिहार में राजद की गुंडागिर्दी को दर्शाता है। वीडियो में लोग बुजुर्ग व्यक्ति से पूछते हैं कि उनके साथ क्या हुआ तब वह बताते हैं कि आरजेडी के स्थानीय नेताओं और समर्थकों ने उसे नीतीश कुमार की पार्टी को मतदान करने के लिए अपशब्द कहा और बुरी तरह पीटा। बुजुर्ग रोते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हैं। वो कह रहे हैं कि आरजेडी के समर्थकों ने उसके साथ हिंसा की और कपड़े तक फाड़ दिए।

आज सुबह 7 बजे से ही बिहार की 78 विधानसभा चुनाव सीटों के लिए 16 जिलों में मतदान शुरू हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरे चरण के चुनाव में लगभग 2.34 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करने वाले हैं, नतीजतन चुनाव आयोग ने भी इससे संबंधित हर ज़रूरी प्रबंध और दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

तीसरे और अंतिम चरण के चुनावों में 1204 उम्मीदवारों का भाग्य दांव पर लगा है। इसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सर्वाधिक 46 उम्मीदवार हैं, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के 42, जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) के 37, भारतीय जनता पार्टी के 35 और कॉन्ग्रेस के 25 उम्मीदवार शामिल हैं।