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‘आज तक’ ने हाथरस मामले में किया HC के आदेश का उलंघन, IB मंत्रालय ने दिए NBSA को कार्रवाई करने के निर्देश

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने ‘इंडिया टुडे मीडिया नेटवर्क’ के समाचार चैनल ‘आज तक’ को नोटिस भेजा है। ये नोटिस इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन को लेकर भेजा गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना की जाँच को लेकर गोपनीयता बरतने की बात कही गई थी।

मंत्रालय के आदेश के बाद अब इस मामले में समाचार चैनल ‘आज तक’ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये नोटिस बृहस्पतिवार (नवंबर 5, 2020) को भेजा गया। ज्ञात हो कि यूपी के हाथरस में एक अनुसूचित जाति की युवती की मौत को विपक्षी दलों ने राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने NBSA को निर्देश दिए हैं कि वो ‘आज तक’ चैनल के खिलाफ उचित कार्रवाई करे। कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थक साकेत गोखले द्वारा दायर की गई शिकायत के बाद ये आदेश दिया गया। गोखले ने उत्तर प्रदेश सरकार के एडिशनल मुख्य सचिव को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि ‘आज तक’ ने हाथरस मामले में चल रही सीबीआई जाँच को लेकर खबर चलाई, जबकि इलाहबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में गोपनीयता बरतने के स्पष्ट आदेश दिए थे।

केंद्रीय मंत्रालय ने NBSA को लिखा पत्र (फोटो साभार: LiveLaw)

समाचार चैनल ‘आज तक’ ने सीबीआई द्वारा मृतका के परिवार से पूछे गए प्रश्नों को लेकर खबर चलाई थी, जिसे साकेत गोखले ने इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश के उलंघन का मामला बताया। गोखले ने इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया। अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने NBSA से कहा है कि वो 15 दिनों के भीतर इस मामले में एक्शन ले। ‘इंडिया टुडे मीडिया नेटवर्क’ इससे पहले भी कई नियमों के उल्लंघन के मामलों में एजेंसियों की जाँच का सामना कर रहा है।

इससे पहले, न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने इंडिया टुडे समूह के हिंदी भाषा समाचार चैनल ‘आज तक’, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की असंवेदनशील और सनसनीखेज रिपोर्टिंग के लिए माफी माँगने का आदेश दिया था। ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने ‘आज तक’ को 27 अक्टूबर को रात 8 बजे अपने चैनल पर ‘लाइव’ माफी माँगने का आदेश दिया था। हिंदी समाचार चैनल ने 28 अक्टूबर को रात 9 बजे के बाद अपनी माफी को प्रसारित किया।

केरल की चर्च में IT रेड: प्रचारक ने गरीबों के नाम पर जुटाया विदेशी टैक्स-फ्री चंदा, इसाई प्रचार व रियल एस्टेट में किया निवेश

IT विभाग ने केरल स्थित ‘बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च’ और इसके मुखिया इसाई मत के प्रचारक केपी योहानन के घर और ऑफिस में छापेमारी की। हाल ही में इस चर्च पर आरोप लगा कि वह चैरिटी फंड (दान निधि) का इस्तेमाल धार्मिक और निजी कार्यों के लिए कर रहा है, जिसके बाद स्थानीय लोगों से मिले इनपुट के आधार पर यह छापेमारी की कार्रवाई की गई। इसाई प्रचारक केपी योहानन पर आरोप है कि उसने गरीबों के नाम पर विदेश से धन इकट्ठा किया और उसका इस्तेमाल रियल एस्टेट क्षेत्र में और अपने निजी इन्वेस्टमेंट में किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आयकर विभाग के सूत्रों ने इस मुद्दे पर कई अहम जानकारी दी। अधिकारियों ने योहानन के घर पर खड़ी एक गाड़ी से 57 लाख रुपए और कुछ फोन भी जब्त किए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, छापेमारी का अभियान गुरुवार (5 नवंबर 2020) को शुरू हुआ था और यह अभी तक केरल समेत देश के अन्य क्षेत्रों में जारी है। अभी तक अनेक परिसरों से लगभग 8 करोड़ रुपए बरामद किए जा चुके हैं। फ़िलहाल छापेमारी का यह अभियान जारी है। गौरतलब है कि 2012 में भी राज्य सरकार ने केपी योहनन के खिलाफ जाँच का आदेश दिया था।

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, ‘बीलीवर्स ईस्टर्न चर्च’ देशभर में कई पूजास्थलों, विद्यालयों, कॉलेजों तथा केरल में एक मेडिकल कॉलेज और एक अस्पताल का संचालन करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चर्च को गरीबों और निराश्रितों की मदद के लिये विदेश से दान प्राप्त हुआ है, लेकिन वास्तव में इस तरह के टैक्स फ्री फंड का अचल संपत्ति लेनदेन में व्यक्तिगत और अन्य अवैध खर्चों के लिये बेहिसाब नकद लेनदेन में इस्तेमाल किया गया था।

इसके अलावा, केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही केरल के बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च का एफ़सीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) एमाउंट रद्द कर दिया था। यह कार्रवाई तब की गई जब यह पता चला कि विदेशों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग (फंड्स) की वजह चैरिटी (दान) होती है, लेकिन यहाँ उसका इस्तेमाल धार्मिक कार्यों के लिए होता है।

‘चर्च को विदेश से मिलने वाला चंदा समुचित माध्यमों से मिला था लेकिन उन्होंने इसका धार्मिक उपयोग में किया। एफ़सीआरए रद्द होने के बावजूद चर्च का प्रयास रहता था कि अन्य ट्रस्ट की मदद से फंड्स मिल जाएँ। 

आयकर विभाग चर्च द्वारा किए गए पिछले 10 साल के लेन-देन की जानकारी एकत्रित कर रहा है। चर्च को पिछले कुछ सालों में लगभग 4 हज़ार करोड़ रुपए का आर्थिक सहयोग मिला जिसमें से ज़्यादातर राशि धार्मिक संस्थाओं के निर्माण और रियल स्टेट कारोबार में खर्च हो गया।

प्रथम दृष्टया ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि चर्च ने लगभग 1 हज़ार करोड़ रुपए रियल स्टेट में खर्च किए है। चैरिटी (दान निधि) के लिए दिए गए आर्थिक सहयोग का इस्तेमाल चर्च चलाने के लिए हुआ है जो कि धार्मिक कार्य है। क्योंकि छापेमारी का अभियान जारी है इसलिए दिशानिर्देशों के उल्लंघन की सीमा के बारे में फ़िलहाल कोई दावा नहीं किया जा सकता है।     

केरल सरकार करेगी मंदिर में ST समुदाय के पुजारी की नियुक्ति: मंदिर बोर्ड पहले भी कर चुका है 6 दलितों को शामिल

केरल की राज्य सरकार ने त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के एक व्यक्ति को मंदिर के पुजारी के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है। यह पहली बार है जब अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसी शख्स को बोर्ड के पुजारी के तौर पर नियुक्त किया गया है। 2017 में बोर्ड में 6 दलितों को भी शामिल किया गया था।

त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड राज्य के 1248 मंदिरों की देखभाल और प्रबंधन का जिम्मा संभालता है। फ़िलहाल, पार्ट टाइम आधार पर बोर्ड में 18 एससी (SC) और 1 एसटी (ST) पुजारी की नियुक्ति की गई है। सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर का प्रबंधन भी यही बोर्ड करता आ रहा है। मंदिर बोर्ड, जो कि केरल राज्य की वामपंथी सरकार के अधीन है, एसटी समुदाय के एक व्यक्ति को पुजारी नियुक्त करेगा।

केरल राज्य के पर्यटन और देवास्वोम मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने जानकारी दी है कि ये पहली बार है जब राज्य में त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने किसी अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के पुजारी की नियुक्ति का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड फिर से इतिहास रच रहा है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग के 19 व्यक्तियों को त्रावणकोर देवस्वॉम बोर्ड में अंशकालिक शांति अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए सिफारिश की जाएगी। उन्होंने बताया:

“अगस्त 23, 2017 को अस्तित्व में आई रैंक सूची से त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड में अंशकालिक शांति के पद के लिए अब तक 310 व्यक्तियों का चयन किया गया है। हालाँकि, चूँकि उस समय परीक्षा के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के पर्याप्त उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष अधिसूचना के अनुसार तैयार की गई रैंक सूची को अंतर को भरने के लिए बृहस्पतिवार (नवंबर 11, 2020) को प्रकाशित किया गया था। अनुसूचित जनजाति के लिए 4 रिक्तियाँ थीं लेकिन केवल एक आवेदन प्राप्त हुआ था।”

उन्होंने ये भी जानकारी दी कि जब से LDF सरकार सत्ता में आई है, भर्ती बोर्ड को पुनर्गठित किया गया है और 474 उम्मीदवारों को त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड में विभिन्न पदों के लिए चुना गया है, कोचीन देवस्वोम बोर्ड में विभिन्न पदों के लिए 325 उम्मीदवारों का चयन किया गया है और 16 उम्मीदवारों का चयन मालाबार देवास्वोम बोर्ड के लिए किया गया है। उन्होंने ये भी बताया कि अब तक तीन देवस्वाम बोर्डों के लिए कुल 815 उम्मीदवारों का चयन किया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने भी 5000 ऐसे पुजारियों को प्रशिक्षित कर विभिन्न मंदिरों में नियुक्त किया है, जो एससी-एसटी (दलित) समुदाय से आते हैं। संगठन के निवेदन के बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने पैनल में इन पुजारियों को जगह दी है। खासकर दक्षिण भारत में संगठन को इस कार्य में खासी सफलता मिली है। अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एससी-एसटी (दलित) समुदाय के 2500 पुजारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने-पढ़ाने वाले BJP नेता व मौलवी को भरना पड़ा ₹10 लाख का मुचलका

उत्तर प्रदेश के बागपत के विनयपुर गाँव स्थित मस्जिद में हनुमान चालीसा और गायत्री मंत्र का पाठ करने के मामले में स्थानीय पुलिस ने भाजपा नेता और मौलवी से मुचलका (बॉन्ड) भरवाया। खेकड़ा थाने के पुलिस निरीक्षक अनिल कुमार ने शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) को जानकारी दी कि 5-5 लाख रुपए का मुचलका बनाया गया और उस पर भाजपा नेता मनुपाल बंसल और मौलवी अली हसन से हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

पुलिस का कहना है कि इस घटना को लेकर कहीं भी किसी भी प्रकार का तनाव नहीं है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। हाल ही में खबर आई थी कि मस्जिद में हनुमान चालीसा और गायत्री मंत्र का पाठ करने की अनुमति देने वाले मौलवी को मुस्लिम समाज के लोगों ने बैठक कर के मस्जिद से निकाल दिया है। पुलिस ने इस घटना को असत्य बताते हुए कहा कि मौलाना अली हसन को निकाले जाने की खबर सही नहीं है।

पुलिस ने बताया कि मौलवी को कुछ दिनों के लिए घर भेजा गया है और वो कुछ ही दिनों में वापस आ जाएँगे। वहीं भाजपा जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं जनसंख्या फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनुपाल बंसल ने दावा किया है कि भाजपा या उनकी संस्था का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है और ये उनका व्यक्तिगत निर्णय था। उन्होंने मौलवी को निकाले जाने की बात पर कहा कि ये गलत है क्योंकि उन्होंने तो भाईचारे का सन्देश दिया था।

दरअसल बागपत में खेकड़ा क्षेत्र के विनयपुर गाँव में भाजपा की जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं जनसंख्या फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनुपाल बंसल मंगलवार (नंवबर 3, 2020) को मस्जिद में पहुँचे थे। उनका कहना था कि मौलाना अली हसन से इजाजत लेने के बाद उन्होंने भाईचारे के लिए पवित्र स्थान मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान चालीसा के पाठ को फेसबुक पर लाइव किया गया और गायत्री मंत्र का पाठ भी किया गया था। 

इससे पहले एक अलग घटना में उत्तर प्रदेश में मथुरा के एक मंदिर में नमाज पढ़ने के बाद गोवर्धन इलाके की ईदगाह में चार युवकों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। ईदगाह मस्जिद में मंगलवार (नवंबर 3, 2020) सुबह किए गए इस हनुमान चालीसा पाठ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस एक्शन में आई और तत्काल चारों युवकों को हिरासत में ले लिया गया था। युवकों का शांतिभंग की धाराओं में चालान कर जेल भेज दिया गया था।

ऑस्ट्रिया: बंद हुईं इस्लामी कट्टरपंथ का गढ़ बन चुकी मस्जिदें, अन्य मस्जिदों पर कार्रवाई की तैयारी

ऑस्ट्रिया के विएना में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) द्वारा आतंकवादी हमले अंजाम दिए गए, जिनमें 4 लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इसके कुछ ही दिन बाद ऑस्ट्रिया की सरकार ने ऐसी मस्जिद को बंद करने का निर्णय लिया है जो कथित तौर पर कट्टरपंथी आतंकवाद का अड्डा बन गई थी। इन आतंकवादी हमलों को 20 वर्ष के मैकडॉनियन (Macedonian), कुज्तिम फेजुलई (Kujtim Fejzulai) ने अंजाम दिया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने मार गिराया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विएना की सरकार दो मस्जिदों पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगाने की तैयारी कर रही है, सरकार को इस बात का संदेह है कि फेजुलई को कट्टरपंथी बनाने में संस्थाओं की भूमिका अहम रही है। ये दो मस्जिद ओट्टाक्रिंग (Ottakring) शहर के मेलिट इब्राहिम (Melit Ibrahim) और दूसरी मेडीइन (Meidling) क्षेत्र की तेवहिद (Tewhid) मस्जिद हैं। जाँच के दौरान यह बात सामने आई है कि आतंकवादियों का इन दो मस्जिदों में आना-जाना अक्सर लगा रहता था। 

जाँच में यह भी पता चला है कि इन दो मस्जिदों में से केवल एक ही आधिकारिक रूप से पंजीकृत मस्जिद है और दूसरी का पंजीकरण बतौर इस्लामी एसोसिएशन हुआ है। इस मुद्दे पर ऑस्ट्रिया के आंतरिक मंत्री कार्ल नेहैमर (Karl Nehammer) ने भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, “हम उन हिंसक अपराधियों का सामना कर रहे हैं जो बेहद गहन रूप से राजनीतिक इस्लाम के तंत्र से जुड़े हुए हैं और विचारधारा की आड़ में आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।”

इस घटना की पुष्टि करते हुए ‘इस्लामिक रिलीजियस कम्युनिटी ऑफ़ ऑस्ट्रिया’ ने बताया कि उनकी अधिकारियों से इस  मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। चर्चा के बाद यह नतीजा निकल कर आया कि वह एक आधिकारिक मस्जिद बंद कर रहे हैं। इस संस्था ने अपने बयान में कहा कि अधिकांश मस्जिद इसलिए बंद की गईं क्योंकि उन्होंने धार्मिक सिद्धांतों और संविधान के नियमों का उल्लंघन किया। इतना ही नहीं, मस्जिद ने इस्लामी कानूनों को क्रियान्वित करने वाले देश के क़ानून की भी अवहेलना की है।

ऑस्ट्रिया सरकार के आंतरिक मंत्रालय ने कहा है कि वह और भी मस्जिदों पर पाबंदी लगाएगी अगर उनके संबंध कट्टरपंथी इस्लामियों से मिलते हैं। इसके अलावा जितनी भी मस्जिदों से राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा होगा उन सभी मस्जिदों को बंद किया जाएगा।

आतंकवादी हमलों के संबंध में अभी तक ऑस्ट्रिया की सरकार ने कुल 15 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आंतरिक मंत्रालय के अधिकारियों ने यहाँ तक बताया कि इन सभी आतंकवादियों का सीधा संबंध कट्टरपंथी इस्लामी वर्ग से था। इसके अलावा, 7 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और 4 को आतंकवाद के आरोप में दोषी घोषित किया गया। 

बकैत की रिपोर्ट: अर्णब के ‘समर्थन’ में रवीश की बकैती | Ravish supports ‘not a journo’ Arnab

रवीश कुमार ने अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी को लेकर फेसबुक पोस्ट लिखा है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी क्यों और किस तरह से हुई, इस बारे में आपको पता ही होगा। रवीश कुमार का लेख देर से आया लेकिन उसमें कपड़े धोने से लेकर चाय पीने तक की बातें हैं। उन्होंने वैसे ही लिखा है, जैसे कोई भी वामपंथी तब बोलता है जब उसके मुँह में बाँस डाला जाता है। क्योंकि, उसे भय होता है कि फलाँ विषय पर न बोलने के कारण उसकी रही-सही स्वीकार्यता या लोकप्रियता भी खो जाएगी।

वामपंथी लिखना शुरू ऐसे करते हैं, जैसे किसी को लगे कि रवीश कुमार ने विरोधी खेमे का होते हुए भी कितना बड़ा स्टैंड लिया है। लेकिन, जैसे ही आप आगे बढ़ेंगे, आपको लगेगा कि इसमें कोई बदलाव नहीं है और ये वही रवीश है, जो मधुर शब्दों में जहर फैला रहा है। पहले पैराग्राफ में ही रवीश ने गिरफ़्तारी के तरीकों पर सवाल करते हुए कानून के जानकारों से हवाले से इसे गलत बताया। लेकिन, दूसरे पैराग्राफ में ‘Whataboutery’ शुरू हो जाती है।

इसके तहत वामपंथी उस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं कि इसके साथ ऐसा हुआ है तो उसके साथ भी भाजपा शासित राज्य में ऐसा हुआ। जब रवीश बार-बार गरीबों और रोजगार की बात करते हैं, लेकिन उन्हें सोचना चाहिए कि जब 1000 पत्रकारों पर FIR हुई, तब क्या उन्होंने कुछ लिखा? अब सारे वामपंथी लिख कर खानापूर्ति कर रहे हैं। रवीश कुमार सहित सारे साथ में लिख रहे हैं कि वो अर्णब गोस्वामी को पत्रकार नहीं मानते।

अगर अर्णब गोस्वामी के दिमाग में जहर था (आपके हिसाब से), तो क्या उन 1000 पत्रकारों के मन में भी जहर भरा था? रवीश कुमार को तो पिछले 6 साल में देश में कुछ अच्छा दिखा ही नहीं। छोटे-छोटे पत्रकारों को निशाना बनाना रवीश कुमार का पेशा है। इस लेख में भी वो पूछ रहे हैं कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो अर्णब गोस्वामी स्टैंड लेंगे? जब ‘पत्रकारिता पर हमला’ होगा तो कोई क्यों नहीं स्टैंड लेगा?

रवीश की इस बकैती पर विस्तृत वीडियो आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

लालू का करीबी जो जेल में रहते MLC बना, रंगदारी की.. जिस BJP नेता की हत्या की, उसी की पत्नी के खिलाफ लड़ रहा चुनाव

बिहार की राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं जिन पर अपराधिक आरोप हैं तो कई ऐसे भी हैं जो आपराधिक गतिविधियों में अभी भी शामिल हैं। आतंक ऐसा है कि इनके नाम के पहले ‘बाहुबली’ जोड़ा जाता है। वैसे तो इनका धंधा काला होता है लेकिन अपनी कॉलर को सफेद रखने के लिए ये राजनीति का दामन थाम लेते हैं।

हम बात कर रहे हैं पटना के दानापुर के MLC रीतलाल यादव की, जिसका आतंक पटना समेत पूरे सूबे में कुछ इस तरह कायम है कि जेल में कैद रहने के बावजूद भी लाखों-करोड़ों का हफ्ता वसूली, अवैध जमीन कब्‍जा, रंगदारी का काम किया जाता है।

पटना के कोथवाँ गाँव के रहने वाले रीतलाल यादव के नाम का सिक्का कभी रेलवे के ठेकाओं में चलता था। रीतलाल यादव पेशे से ठेकेदार रहे हैं। दानापुर में सड़क और रेल सेवाओं का अच्छा नेटवर्क है। कहा जाता है कि रेलवे के ठेकों ने ही रीतलाल को इतना बड़ा बना दिया कि पूरे इलाके में लोग उसे जानने लगे। 90 के दशक में रीतलाल का खौफ इस कदर था कि उनके रहते रेलवे के टेंडर किसी और को नहीं मिल सकता था। फिर उसका नाम अपराधों में भी आने लगा। इसी तरह धीरे-धीरे रीतलाल पर मुकदमों की संख्या बढ़ती चली गई। 

90 के दशक में पटना से लेकर दानापुर तक रीतलाल यादव के नाम की तूती बोलती थी। साल 2015 में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर दानापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुका रीतलाल यादव अभी एमएलसी है। जेल में रहते हुए ही वो स्वतंत्र रूप से एमएलसी चुना गया था।

BJP नेता की हत्या का संगीन आरोप

रीतलाल यादव पर बीजेपी नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या का संगीन आरोप है। इसके अलावा रीतलाल यादव के दूसरे अपराधों की फेहरिस्त काफी लंबी है जिस वजह से वो कई सालों से जेल में ही बंद हैं।

हफ्ता वसूली, अवैध जमीन कब्जा और रंगदारी रीत लाल यादव का मुख्य पेशा है और इसी वजह से पूरे राज्य में उनके नाम का दहशत रहा है। रीतलाल यादव पर जेल में रहकर ही इन सभी गोरखधंधे और गैरकानूनी कामों को अंजाम देने का आरोप भी लगता रहा है।

जेल में रहकर वसूली का धंधा

रीतलाल यादव भले कई सालों से जेल में बंद रहे हों लेकिन बाहर उसके गुर्गे उनके नाम पर वसूली का धंधा करते हैं। बीते साल रीतलाल यादव के गुर्गों ने एक कोचिंग संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी थी। गुर्गों को पैसे देने से इनकार करने पर कथित तौर पर जेल से ही रीतलाल यादव ने संस्थान मालिक को पैसे नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।

इतना ही नहीं, एक डॉक्टर को बंद लिफाफे में जिंदा कारतूस भेजकर भी रंगदारी माँगने का आरोप रीतलाल यादव और उनके गुर्गों पर हैं। डॉक्टर से रीतलाल यादव के गुर्गों ने कारतूस भेजने के बाद 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगी थी।

लालू के करीबी रह चुके रीतलाल यादव का नाम सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्यानारायण सिंह की हत्या में उछला था। 30 अप्रैल 2003 को जब राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ‘तेल पिलावन-लाठी घुमावन’ रैली कर रहे थे, तब इसी दिन खगौल के जमालुद्दीन चक के पास दिनदहाड़े भाजपा नेता सत्यनारायण सिंह को उनकी ही गाड़ी में गोलियों से भून डाला गया।

शिक्षण संस्थान के संचालक से 1 करोड़ माँगने का आरोप

इस हत्याकांड में रीतलाल यादव का नाम सामने आने के बाद उसे ‘डॉन’ के नाम से जाना जाने लगा। रीतलाल यादव इस वक्त तक मुखिया थे। इस हत्या के बाद काफी हंगामा भी हुआ था। राजद के पूर्व नेता रीतलाल यादव के गुर्गों द्वारा एक बार फिर एक शिक्षण संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रूपए रंगदारी की माँग की गई है थी। यह रंगदारी उस वक्त माँगी गई थी जब रीतलाल यादव पटना के बेऊर जेल में कैद थे।

जब जेल में ही पुलिस को मारनी पड़ी रेड

एक डॉक्टर से भी रीतलाल के गुर्गों ने 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगी थी। यह वर्ष 2015 की बात है। रीतलाल जेल में ही था। उस समय एक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज करवाई कि रीतलाल उन्हें रेलवे टेंडर नहीं डालने के लिए धमका रहे हैं और रंगदारी भी माँग रहे हैं। इसके बाद रात 4 बजे सैकड़ों पुलिस वाले बेउर जेल पहुँचे और रेड मारी। इस रेड में रीतलाल के वॉर्ड से रेलवे टेंडर से जुड़े कागजात मिले थे। मोबाइल भी मिला था। साथ में एक लोहे की रॉड और दो चाकू भी पुलिस ने जब्त किए थे।

हालाँकि, कहा जाता है कि रीतलाल यादव के आपराधिक जीवन की शुरुआत 90 के दशक में हो चुकी थी। बताया जाता है कि 13 सालों में ही रीतलाल यादव का साम्राज्य पटना जिले में तो फैला ही, दानापुर डीवीजन से निकलने वाले हर रेलवे टेंडर पर उसका और उसके गिरोह का साम्राज्य भी स्थापित हो गया। कहा जाता है कि जिसने भी उसके खिलाफ जाने की कोशिश की उसे भून डाला गया।

जिसके पति का कत्ल किया, उसी भाजपा उम्मीदवार के विरोध में लड़ रहा है चुनाव

बिहार विधान सभा चुनाव में आरजेडी इस बार बाहुबलियों के भरोसे अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में जुटी है। इसी कड़ी में राजद ने एक और बाहुबली को टिकट दिया है। रीतलाल यादव RJD के टिकट पर दानापुर चुनाव लड़ रहे हैं। इनके खिलाफ करीब 33 मामले दर्ज हैं।

सबसे बड़ी बात, रीतलाल के खिलाफ जो महिला नेता BJP की टिकट से खड़ी हैं, खुद उनके पति की हत्या का आरोप रीतलाल पर है। रीतलाल को लालू यादव का करीबी माना जाता है और कहा तो यहाँ तक जाता है कि 90 के दशक में पटना से लेकर दानापुर तक रीतलाल का सिक्का चलता था।

इस सीट पर जो BJP की उम्मीदवार हैं, उनका नाम है आशा देवी। आशा देवी चार बार विधायक रह चुकी हैं और मौजूदा सीट से BJP की विधायक हैं। आशा देवी के पति सत्यनारायण सिन्हा की 30 अप्रैल, 2003 को कथित तौर पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रीतलाल, आशा देवी के पति की हत्या के मुख्य आरोपित है।

भाजपा नेता की हत्या के बाद रीतलाल तब और चर्चित हो गया, जब उस पर चलती ट्रेन में बख्यिारपुर के पास दो रेलवे ठेकेदारों की हत्या करने का आरोप लगा। इसके बाद रीतलाल ने अपने विरोधी नेऊरा निवासी चुन्नू सिंह की हत्या छठ पर्व के समय घाट पर उस समय कर दी जब वह घाट बनवा रहे थे।

इस घटना के बाद पटना पुलिस और एसटीएफ रीतलाल के पीछे पड़ गई क्योंकि तब चुन्नू को पुलिस का मुखबिर भी माना जा रहा था। पर अपने इलाके में ‘रॉबिन हुड’ की छवि वाले रीतलाल की परछाई भी पुलिस तब तक नहीं पा सकी जब तक वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव के पूर्व उन्होंने खुद अदालत में आत्मसमर्पण नहीं कर दिया।

रीतलाल ने 2010 में जेल में बंद रहते हुए आशा देवी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, हालाँकि वह हार गया। रीतलाल को लोग ‘डॉन’ कहते हैं। वह पहली बार पूरी तरह चर्चा में 2014 के दौरान आया, जब RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने उसे पार्टी का महासचिव घोषित किया था। लालू ने ऐसा इस वजह से किया, ताकि उसे पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ने से रोका जा सके। दरअसल, उस वक्त लालू की बेटी मीसा भारती इस सीट से चुनाव मैदान में थीं।

बताया जाता है कि खुद लालू प्रसाद यादव अपनी बेटी मीसा भारती को चुनाव जिताने के लिए भी रीतलाल यादव से मदद माँग चुके हैंं। रीतलाल यादव ने लालू प्रसाद को मदद का आश्वासन दिया था हालाँकि मीसा भारती चुनाव हार गई थीं। रीतलाल यादव जेल से दानापुर विधानसभा का चुनाव भी लड़े। बाद में वे एमएलएसी बने। साल 2012 में रीतलाल यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया गया था। 

4 सितंबर 2010 में हुआ था गिरफ्तार

हत्या, हत्या की धमकी, डकैती, और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आपराधिक कृत्यों में नाम आने के बाद 4 सितंबर 2010 से ही रीतलाल यादव ज्यादातर समय जेल में बंद हैं। उसे इसी साल 25 जनवरी को सिर्फ 15 दिनों के लिए बेटी की शादी में पैरोल मिली थी। हालाँकि शादी के बाद उन्हें 10 फरवरी को फिर से सरेंडर करना पड़ा।

चार फरवरी को रीतलाल की बेटी अंकिता की शादी थी। बेटी की शादी में मेहमानों को बुलवाने के लिए छपवाए गए कार्ड में रीतलाल यादव की ओर से एक विशेष अनुरोध किया गया था। जिस कारण उनकी बेटी की शादी का कार्ड सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ। साथ ही, रीतलाल यादव भी अचानक चर्चा में आ गया था। 

रीतलाल यादव ने अपनी बेटी की शादी के कार्ड के कवर पर ही मोटे अक्षरों में एक अनुरोध प्रकाशित करवाया था। अनुरोध था: ‘आवश्यक सूचना- हथियार लाना वर्जित है।’ मतलब यह कि रीतलाल यादव अपनी बेटी की शादी में आने वाले मेहमानों से यह अपील की थी कि वो अंकिता की शादी में हथियार लेकर न आएँ। 

बेऊर जेल से रंगदारी माँगने के बाद दूसरी जेल में किया गया शिफ्ट

पटना की बेऊर जेल में बंद रीतलाल यादव के वहीं से धंधा चलाने और रंगदारी माँगने के कई आरोपों के बाद उन्हें वहाँ से हटाकर भागलपुर के केंद्रीय कारागार में ट्रांसफर कर दिया गया था, जहाँ उन्हें उच्च श्रेणी की जेल में रखा गया था और जेल प्रशासन पर कई तरह की सुविधाएँ देने का आरोप लगा था।

कोरोना काल में फिर तोड़ा कानून, दर्ज हुई एफआईआर

साल 2012 में प्रवर्तन निदेशालय ने रीतलाल यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था जिसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था। वो कई सालों से पटना की बेऊर जेल में बंद था। 2020 में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान ही पटना हाईकोर्ट ने उसे इस मामले में तय सजा से ज्यादा समय तक ट्रायल के दौरान ही सजा काटने लेने की वजह से जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया था।

जमानत पर बाहर आते ही रीतलाल यादव ने एक बार फिर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और लॉकडाउन के दौरान ही 30-40 गाड़ियों का काफिला लेकर अपने समर्थकों के साथ अपने क्षेत्र हाथीखाना मोड़ के पास जुट गए। सरकारी आदेशों का उलंघन करने के आरोप में रीतलाल यादव समेत करीब सौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

बता दें कि रीतलाल और उसकी पत्नी के पास दस करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, इसमें आरजेडी प्रत्याशी के पास 350 ग्राम सोना है। उसकी पत्नी और स्कूल टीचर पिंकी यादव के पास 150 ग्राम सोना है। खास बात है कि करोड़ों रुपए की संपत्ति का मालिक होने के बावजूद दोनों के पास कार या मोटरसाइकिल तक नहीं है।

रीतलाल के बैंक में 48,29,053 रुपए जमा हैं और 18.48 लाख रुपए का शेयर व बॉन्ड हैं। उसकी पत्नी के बैंक में 12.90 लाख रुपए जमा है। हलफनामे में रीतलाल ने बताया कि उसकी आय का स्त्रोत एमएलसी का वेतन है। आरजेडी उम्मीदवार रीतलाल के पास कुल 6.4 करोड़ रुपए की जमीन जायदाद है जबकि उसकी पत्नी 4.58 करोड़ रुपए की संपत्ति की मालकिन है।

उमर खालिद पर UAPA के तहत मुकदमे से केजरीवाल पर भड़की आइशी घोष, कहा- ‘ये विश्वासघात नहीं भुलाया जाएगा’

दिल्ली दंगों के आरोपित व जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के लिए केजरीवाल सरकार ने यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अब यही बात JNU छात्र नेता अध्यक्ष आइशी घोष को आहत कर गई। आइशी घोष ने अपने ट्वीट में सीएम का नाम लिख कर स्पष्ट कहा कि ये धोखेबाजी/ विश्वासघात वो कभी नहीं भूलेंगी।

आइशी ने लाइव लॉ के ट्वीट पर अपना रिप्लाई दिया, जिसमें जानकारी दी गई थी कि केजरीवाल सरकार ने उमर के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। इसी ट्वीट पर आइशी ने लिखा, “श्रीमान अरविंद केजरीवाल प्रत्येक विश्वासघात को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”

एक यूजर ने आइशी के इस ट्वीट को पढ़कर अरविंद केजरीवाल के पक्ष में अपनी दलील रखी। श्याम नाम के यूजर ने लिखा, “एलजी को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करके केंद्र सरकार ने प्रॉजिक्यूटर्स नियुक्त किए। आप सरकार ने निर्णय का विरोध भी किया और पैनल को खारिज भी किया लेकिन एलजी ने आप सरकार को ओवर रूल कर लिया। आइशी तुम छात्र राजनीति में कभी कन्हैया की जगह नहीं ले पाओगी। अपने फैक्ट्स को सुधारो।”

आइशी के इस ट्वीट पर कई लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने मुख्यमंत्री को सही ठहराया। वहीं कुछ ने पूछा कि केजरीवाल ने कौन सा विश्वासघात कर दिया? इस पर एक यूजर ने लिखा कि पहले चंदा लिया, वोट लिया और फिर मुकदमा चलाने की भी इजाजत दे दी, आखिर ये धोखा नहीं तो क्या है? इसी तरह कई यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नेटिजन्स बोले कि पहले इन्हें मैक्रों ने धोखा दिया अब केजरीवाल ने।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की तरफ से दर्ज किए गए हर केस में प्रॉसिक्यूशन की मंजूरी दे दी है। अब यह कोर्ट को देखना है कि आरोपित कौन हैं।

बता दें कि इस साल के फरवरी माह में हुए दंगों में उमर खालिद को 13 सितंबर को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।

मुंगेर केस में SP लिपि सिंह सहित 7 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज: आरती के समय भक्तों को बेरहमी से मारने का आरोप

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई एवं पूर्व एसपी लिपि सिंह द्वारा आदेश नहीं मानने पर गोली मारने के आदेश दिए जाने को लेकर स्थानीय अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है। शिकायत में लिपी सिंह और वर्तमान एसडीओ खगेशचंद झा सहित सात पुलिस अधिकारियों का उल्लेख है।

प्रभात खबर के अनुसार, वाद पत्र केलू यादव उर्फ ​​दयानंद कुमार ने अधिवक्ता निर्मल कुमार के माध्यम से दर्ज की है। यादव ने शिकायत दायर करते हुए विजयादशमी की रात हुई घटना और मामले की लीपापोती में लगी तत्कालीन एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों की कारगुजारियों का खुलासा किया है। साथ ही एसपी लिपि सिंह, एसडीओ खगेशचंद्र झा के साथ ही कृष्णा कुमार, धर्मेंद्र कुमार, कोतवाली थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, कासिम बाजार थानाध्यक्ष शैलेश कुमार, मुफस्सिल थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार को आरोपित ठहराया है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि 26 अक्टूबर को माता रानी का विसर्जन कराने के लिए निश्चित मार्गों से होते हुए एमसीएन चैनल स्थित तिनबटिया पर दुर्गा माता की प्रतिमा को रखा गया। घटना के वक्त भक्तों द्वारा माता की आरती की जा रही थी। उसी दौरान आरोपित वहाँ पहुँचे और कथित तौर पर अभद्रता करते, गाली देते हुए आयोजन को बर्बाद करने की धमकी दी। इतना ही नहीं फिर दुर्गा प्रतिमा को कंधा देने वाले कहार कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बेरहमी के साथ पीटना शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई और लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे।

हालाँकि, थोड़ी देर बाद फिर वहाँ सभी लोग एकत्रित होकर बड़ी दुर्गा प्रतिमा को कंधा देकर किसी तरह बाटा चौक के पास पहुँचे। बाटा चौक पर पर माता दुर्गा की महाआरती का समारोह होने वाला था। जैसे ही माँ दुर्गा की प्रतिमा को वहाँ रखा गया तुरंत ही दीनदयाल चौक से गोलियों की आवाजें आईं और वापस भगदड़ मच गया।

शिकायत पत्र में आगे बताया गया कि आरोपितों ने गाली देते हुए लोगों को मारने और बात नहीं मानने पर गोली मारने को कहा। वे लोग वादी सहित समिति के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पर लाठी-डंडा, बट से जान से मारने की नीयत से मारने लगे। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों को काफ़ी गंभीर चोटें आई। भक्त पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए, चूँकि यह खुद पुलिस से संबंधित था, इसलिए उन्हें वहाँ से भी गालियाँ देते हुए भगा दिया गया। जिसके बाद पीड़ितों ने न्यायालय के अवकाश खत्म होने के बाद न्यायालय में केस दर्ज करवाया। भक्तों ने सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग भी की।

विसर्जन के दौरान मुंगेर में हत्या

दुर्गा पूजा विसर्जन समारोह के दौरान बिहार के मुंगेर शहर में फैली हिंसा में एक भक्त की मौत हो गई। एसपी मुंगेर लिपि सिंह ने भक्तों पर पुलिस द्वारा की गई बर्बरता का बचाव किया था। जिसमें दावा किया गया कि भक्तों ने पथराव कर आगामी हिंसा को भड़काया। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ द्वारा किए गए पथराव से 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। सिंह ने आगे कहा कि भीड़ में से ही एक सदस्य ने गोलियाँ चलाईं जिस वजह से 18 वर्षीय भक्त की मौत हो गई।

वहीं CISF की रिपोर्ट में बताया गया कि दुर्गा पूजा जुलूस समारोह में उपस्थित लोगों पर पुलिस द्वारा पहली गोली चलाई गई थी। साथ ही दुर्गा पूजा में भाग लेने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए एसपी मुंगेर लिपि सिंह ने पहले जो दावा किया था, उसके विपरीत CISF की रिपोर्ट सामने है।

WhatsApp में आया UPI के जरिए नया पेमेंट फीचर: जानें कैसे होगा लेन-देन आसान

मैसेजिंग एप वाट्सएप पर अब रुपयों के लेन-देन का काम भी मैसेज भेजने जितना आसान हो गया है। हाल में NCPI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के साथ साझेदारी करने के बाद वाट्सएप ने यूपीआई का उपयोग करते हुए इस फीचर यानी इंडिया-फर्स्ट, रियल टाइम पेमेंट सिस्टम को डेवलप किया है।

न्यूजबाइट के अनुसार इसका परीक्षण दो साल पहले शुरू हुआ था लेकिन तब कुछ बाधाओं और विश्वसनीय न होने के आरोपों के कारण यह विफल रही। मगर अब फेसबुक द्वारा इसे खरीदने के बाद इसे यह भुगतान सेवा चालू करने की अनुमति मिल गई है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि उसने फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए ‘गो लाइव ऑन यूपीआई’ को मंजूरी दी है।

आगे बयान में कहा गया है कि वाट्सएप अब अपने यूपीआई यूजरबेस का विस्तार “क्रमबद्ध तरीके से कर सकता है, जिसकी शुरुआत यूपीआई में 20 मिलियन के अधिकतम रजिस्टर्ड यूजरबेस के साथ होती है।”

कंपनी ने इस सर्विस के लिए ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और जियो पेमेंट बैंक के साथ साझेदारी की है। यह सुविधा सभी एप्पल यूजर्स के लिए अब उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं एंड्रॉयड यूजर्स को भी नए अपडेट के साथ इसका लाभ मिलने लगेगा। हालाँकि, शुरू में जब तक यह लॉन्च फेज में है, हर कोई इस फीचर को एक्सेस नहीं कर पाएगा।

वाट्सएप पर इस पेमेंट फीचर का इस्तेमाल कैसे करें?

  • – वाट्सएप पे का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपनी मैसेजिंग एप को अपडेट करें। 
  • – इसके बाद सेटिंग्स पर जाएँ और पेमेंट पर क्लिक करके पेमेंट मैथड एड करें। अब आपको बैंकों की एक लिस्ट मिलेगी।
  • – यहाँ आपको उस बैंक पर क्लिक करना है, जिसका अकाउंट आपको वाट्सएप पेमेंट के लिए एड करना है 
  • – फिर, आपके फोन नंबर का वेरिफिकेशन होगा। इसके लिए आपको ‘वेरीफाई वाया एसएमएस’ टैब पर क्लिक करना होगा। ध्यान रहे कि यह नंबर वही होना चाहिए जिससे आपका बैंक अकॉउंट लिंक है और जिससे वाट्सएप चालू है।
  • – अब आपको अपने डेबिट कार्ड को वेरीफाई करवाना होगा और वेरिफिकेशन के कंप्लीट होते ही आप अन्य यूपीआई एप्स की तरह यहाँ भी पिन सेट करेंगे।
  • – इसके बाद आपको आपका बैंक नजर आने लगेगा।

कैसे करेंगे पेमेंट?

  • – पेमेंट का तरीका वाट्सएप पे में बेहद आसान है बस ये ध्यान रखना है कि जिसे आपको पेमेंट देनी है वो आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में हो। या फिर आपके पास उसकी यूपीआई आईडी हो। 
  • – आपको पैसे भेजने के लिए अटैचमेंट पर क्लिक करना होगा और फिर पेमेंट पर।
  • – इसके बाद आप अमाउंट लिख कर यूपीआई पिन का इस्तेमाल करेंगे और आसानी से पेमेंट कंप्लीट हो जाएगी। जैसे ही ट्रांजैक्शन पूरा होगा आपके ईमेल व फोन पर मैसेज आ जाएगा।