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इमरान खान भाँग को सूखा कर चरस बनाते थे, 10-20 रुपए के नोट में कोकीन डाल कर सूँघते थे: साथी क्रिकेटर का खुलासा

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सरफराज नवाज ने खुलासा किया है कि उनके मुल्क के प्रधानमंत्री इमरान खान पुराने दिनों में नशेड़ी थे। फ़ास्ट बॉलिंग की दुनिया में ‘रिवर्स स्विंग’ के जनक के रूप में जाने जाने वाले 71 वर्षीय सरफराज नवाज 1985 में निर्दलीय चुनाव जीत कर पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के एसेम्बली में चुने गए थे। उन्होंने ‘गूगली न्यूज़ टीवी’ पर खुलासा किया कि इमरान खान अपने क्रिकेट के दिनों में कोकीन का नशा किया करते थे।

बता दें कि इमरान खान भी पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान रहे हैं और उनकी कप्तानी में पाकिस्तान ने वर्ल्ड कप भी जीता था। सरफराज नवाज ने बताया कि एक बार इंग्लैंड के खिलाफ बॉलिंग नहीं करा सके थे तो शाम को उनके घर आए थे और वहीं आकर नशा किया था। उन्होंने बताया कि कई खिलाड़ियों के साथ उनके घर आए इमरान खान ने चरस का सेवन किया था। साथ ही वो कोकीन सूँघा करते थे।

उन्होंने बताया कि लंदन में कोकीन को रोल कर के और नाक में डाल के इमरान खान उसका सेवन करते थे। उन्होंने कहा कि ये उनके सामने की बात है और 1987 में पाकिस्तान का इंग्लैंड के साथ मैच था, तब इमरान खान उनके इस्लामाबाद स्थित आवास पर आए थे। उन्होंने बताया कि इमरान खान 10-20 रुपए के नोट में कोकीन डाल कर उसका सेवन करते थे और भाँग को सूखा कर उसका चरस बनाया करते थे।

सरफराज नवाज ने इमरान खान को लेकर किया खुलासा

पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि इमरान खान को उनके सामने लाकर ये बातें पूछी जाएँ और वो मुकर के दिखाएँ। उन्होंने कहा कि वो इस बात के अकेले गवाह नहीं हैं, बल्कि कई अन्य लोग भी हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान नशे के आदी रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि जब इमरान ने उनके घर आकर नशा किया था, तब उनके साथ मोहसिन खान, अब्दुल कादिर और सलीम मलिक भी थे। ये सभी इस बात के गवाह हैं।

बता दें कि सरफराज नवाज 1969-1984 तक पाकिस्तान की तरफ से क्रिकेट खेल चुके हैं और उन्होंने 55 टेस्ट मैच में 177 विकेट लिया था। उन्होंने 45 वनडे भी खेले थे और 63 विकेट लिया था। वो अपने बाउंसर्स, यॉर्कर्स और स्विंग से बल्लेबाजों को खासे परेशान किया करते थे। साथ ही निचले क्रम में मुश्किल समय में अच्छी बल्लेबाजी भी किया करते थे। जिस साल उन्होंने चुनाव जीता, उसी साल उन्होंने पाकिस्तान की मशहूर अभिनेत्री रानी से शादी की थी।

इमरान खान फ़िलहाल दुनिया भर में खुद को इस्लाम का मसीहा साबित करने में लगे हुए हैं और तुर्की को खलीफा बनाने के अभियान में जुटे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कट्टर बताते हुए उन पर इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मैक्रों ने इस्लाम की जानकारी न होने के बावजूद मुस्लिमों पर हमला किया व इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दिया।

मोहम्मद चाँद और फैजल ने मथुरा के नंदबाबा मंदिर में घुस कर पढ़ी नमाज: हिन्दू-मुस्लिम एकता की दी दुहाई, FIR दर्ज

मथुरा के नंदबाबा मंदिर में दो मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा नमाज पढ़ने के बाद तनाव का माहौल पैदा हो गया है, जिसके बाद मंदिर के प्रबंधन को सफाई देनी पड़ी। लोकप्रिय नंदबाबा मंदिर में ये घटना 4 दिन पहले की है, जब इन दोनों ने वहाँ ‘जौहर की नमाज’ अदा की। रविवार (नवंबर 1, 2020) को इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद हिन्दू संगठन भी नाराज़ हो गए। मंदिर के सेवायत कान्हा गोस्वामी ने पुलिस में तहरीर दायर की है।

इसके आधार पर FIR भी दर्ज कर ली गई है। मथुरा में मोहम्मद चाँद सहित 4 युवकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। एसएसपी ने जानकारी दी है कि फैसल खान और चाँद मोहम्मद समेत 4 युवकों के विरूद्ध धारा 153-A, 295 ,505, के तहत बरसाना थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने ख़ुफ़िया विभाग को मामले की जाँच सौंप दी है। मंदिर में नमाज पढ़ कर तस्वीरें वायरल किए जाने के पीछे क्या मंशा थी, इसकी जाँच हो रही है।

दरअसल, गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को नन्दगाँव के प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में दोपहर को दो युवक अपने साथियों के साथ हरी टोपी लगा कर पहुँचे। एक व्यक्ति ने अपना नाम फैजल खान बताया और अपने साथ आए साथियों का परिचय मोहम्मद चाँद, नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के रूप में दिया। उन लोगों ने बताया कि वो मंदिर के सेवायत पुजारी कान्हा गोस्वामी के दर्शन हेतु आए हैं और हिन्दू-मुस्लिम एकता में विश्वास रखने वाले लोग हैं।

वो अपने मोबाइल फोन में कई हिन्दू साधु-संतों और महंतों के साथ अपनी तस्वीरें भी दिखाने लगे, ताकि उन पर यकीन कर लिया जाए। इसके बाद वो लोग सीधे गेट संख्या 2 के पास पहुँचे। कोरोना महामारी के कारण मंदिर में लोगों की चहल-पहल उतनी नहीं है, जिसका फायदा उठा कर फैजल और चाँद वहीं पर नमाज पढ़ने लगे और बाक़ी दोनों ने तस्वीरें क्लिक कीं। वहाँ खड़े लोगों ने नमाज पढ़ने से लाख मना किया, लेकिन वो नहीं माने।

नीलेश गुप्ता व आलोक रत्न खुद को गाँधीवादी कार्यकर्ता बताते हैं। जहाँ हिन्दू संगठनों में इसे लेकर आक्रोश है, ‘कौमी एकता मंच’ के मधुबन दत्त चतुर्वेदी इसे सांप्रदायिक सौहार्दता की मिसाल बता रहे हैं। आरोपितों का कहना था कि वो ’84 कोस की यात्रा’ पर आए थे। मोहम्मद चाँद और फैजल दिल्ली की ‘खोदाई खिदमतगार’ संस्था के सदस्य हैं। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाइयाँ सुना सबको अपने हिन्दू-मुस्लिम एकता प्रेमी होने का यकीन दिलाया और बिना अनुमति नमाज पढ़ी।

बरसाना थाने में दर्ज हुई FIR

सेवायत कृष्ण मुरारी उर्फ कान्हा गोस्वामी ने कहा कि उन्हें मथुरा के नंदबाबा मंदिर परिसर में नमाज पढ़े जाने की कोई जानकारी नहीं है। फैजल ने अपने फेसबुक अकाउंट से तस्वीरें पोस्ट की। भाजपा नेता प्रेम श्रोत्रिय ने कहा कि मंदिर में नमाज अदा कर शांत माहौल को बिगाड़ने का काम किया गया है। वहीं पंकज गोस्वामी ने इसे मंदिर की गरिमा के साथ खिलवाड़ करार दिया। नंदन लाल ने पूछा कि क्या मस्जिदों में रामायण-गीता का पाठ होता है?

फैजल खान ने मंदिर प्रबंधन को विश्वास में लेने के लिए रामायण की चौपाई ‘रामहि केवल प्रेम पियारा, जान लेहि सो जान निहारा’ का इस्तेमाल किया था। उसने श्रीकृष्ण और उनके मित्र उद्धव के बीच प्रेम और ज्ञान को लेकर हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान ने प्रेम को ऊपर रखा था। उसने दावा किया कि उसका ग्रुप दिल्ली से सायकल से आया है। उसने ये भी कहा कि जो श्रीराम और श्रीकृष्ण का रास्ता है, वही पैगंबर का रास्ता है।

‘बाबा का ढाबा’ वाले पहुँचे थाने, यूट्यूबर गौरव वासन पर लगाया पैसों के हेर-फेर का आरोप

‘बाबा का ढाबा’ की वीडियो वायरल होने के बाद से उसके मालिक कांता प्रसाद लगातार खबरों में हैं। पहले सोशल मीडिया पर उनके संघर्ष का जिक्र हर जगह किया जा रहा था और अब उनके साथ हुई धोखाधड़ी के कारण उन पर चर्चा जारी है। ताजा खबर के मुताबिक, कांता प्रसाद ने उनकी वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर गौरव वासन (Gaurav Wasan) के ख़िलाफ़ अपनी शिकायत दायर करवाई है। यह शिकायत मालवीय नगर थाने में दर्ज हुई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कांता प्रसाद ने यूट्यूबर गौरव वासन पर धोखाधड़ी, विश्वासघात, पैसों के हेर-फेर, आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है। इसके अलावा वासन पर यह भी आरोप लगा है कि उन्होंने जानबूझकर केवल अपने और अपने परिवार/दोस्तों के बैंक डिटेल और मोबाइल नंबर दानदाताओं के साथ साझा किए और उनको कोई भी जानकारी दिए बिना विभिन्न प्रकार के भुगतानों के माध्यम से दान की भारी राशि इकट्ठा की।

इस मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें शिकायत मिल गई है और जाँच की जा रही है। फिलहाल कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

यहाँ बता दें कि सोशल मीडिया पर बुजुर्ग दंपत्ति की वीडियो वायरल होने के कुछ दिन बाद एक अन्य यूट्यूबर लक्ष्य चौधरी ने गौरव वासन पर कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। लक्ष्य का इल्जाम था कि जो पैसे बुजुर्ग दंपत्ति के लिए माँगे गए, वह उन तक नहीं पहुँचे।

ऑनलाइन स्कैमिंग पर बनाई गई वीडियो में लक्ष्य चौधरी ने समझाया था कि कैसे लोग इसी तरह की इमोशनल वीडियो बना कर पैसे ऐंठते हैं। इसके बाद उन्होंने गौरव वासन को लेकर कहा कि उसने बाबा का ढाबा के लिए डोनेशन माँगा लेकिन उन लोगों के साथ पैसे नहीं शेयर किए।

एक इंटरव्यू में भी कांता प्रसाद ने यह स्वीकारा था कि उन्हें अभी तक गौरव से कोई रुपए नहीं मिले हैं। इस पर चौधरी ने गौरव पर फंड गबन करने के आरोप लगाए और कहा कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी कांता प्रसाद को मदद नहीं पहुँचाई गई है। यूट्यूबर लक्ष्य ने कहा था कि गौरव ने कांता प्रसाद की मदद के लिए अपना कॉन्टैक्ट दिया और कांता प्रसाद के बैंक डिटेल्स की जगह अपनी ही अकॉउंट डिटेल्स शेयर की।

बता दें कि यूट्यूबर गौरव वासन ने 7 अक्टूबर को बाबा का ढाबा का एक वीडियो अपने यू-ट्यूब चैनल व फेसबुक पर अपलोड किया था। इस वीडियो में उन्होंने लोगों से कांता प्रसाद और बादामी देवी की मदद की अपील की थी। ये वीडियो हर जगह तेजी से वायरल हुआ और लोग दूर-दूर से यहाँ खाना खाने के लिए आने लगे। इससे बुजुर्ग दंपति को कुछ दिन बहुत फायदा हुआ मगर बाद में फिर वही हालत हो गई।

AMU के फरार छात्र नेता फरहान जुबैरी की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश, फ्रांस के बहाने उगला था देशविरोधी जहर

फ्रांस के बहाने देशविरोधी बयान देने वाले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्र नेता फरहान जुबैरी की तत्काल गिरफ़्तारी का आदेश जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन लोगों पर नकेल कसना शुरू किया है, जो फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की आड़ में देशविरोधी गतिविधियाँ कर रहे हैं। फरहान जुबैरी पर कई गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस्लामी कट्टरवाद पर एक के बाद एक कार्रवाई कर रहे फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान AMU के छात्र नेता फरहान जुबैरी ने ईसाईयों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पुलिस ने जानकारी दी है कि अब फरहान जुबैरी फरार हो गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी गिरफ़्तारी के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। FIR के अनुसार, गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को शाम 4 बजे AMU के छात्र नेता फरहान जुबैरी द्वारा डक प्वाइंट से बाब-ए सैय्यद गेट तक विरोध मार्च निकाला गया।

साथ ही फ्रांस की ‘शार्ली हेब्दो’ पत्रिका में छपे पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स के लिए ईसाईयों को दोषी बताया गया और उनके जान-माल की क्षति की धमकी दी। FIR में जिक्र किया गया है कि इस आपत्तिजनक टिप्पणी से जनमानस में भय और असुरक्षा की भावना जन्म ले सकती है। इसलिए, पुलिस ने समुचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के वैधानिक कार्रवाई की बात कही है। अब उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर भी उसका बयान खूब शेयर हुआ था, जिसमें वो ईसाईयों के कत्लेआम को जायज ठहरा रहा था। उसने कहा था कि पैगम्बर मुहम्मद के साथ बदसलूकी करने वाले का सिर कलम कर दिया जाएगा। कानपुर के विधनू के रहने वाला जुबैरी AMU छात्र संघ का पदाधिकारी रह चुका है और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से जुड़ा हुआ है। CAA विरोधी उपद्रवों में उसकी सक्रिय भूमिका रही थी।

अलीगढ़ के सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जुबैरी पर शिकंजा कसने के लिए कई पुलिस टीमों को लगाया गया है। उसने भड़काऊ बयान देते हुए कहा था कि हम जिसकी उम्मत में हैं, जिसकी खातिर ज़िंदगी में हैं, अगर उनके लिए कोई गलत बात करेगा तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के अन्य हिस्सों में भी मुस्लिम समुदाय के नेताओं और लोगों ने फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।

मई 2020 में भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र और पूर्व कैबिनेट सदस्य फरहान जुबैरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। AMU में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर हुए बवाल में वह शामिल था। उस पर कुल 11 मुकदमे दर्ज किए गए थे। एसपी सिटी की गाड़ी पर पथराव, पुलिस पर हमले सहित सात मुकदमों में वह वांछित चल रहा था। वो कुछ दिन जेल में भी रहा था।

‘अंबेडकर ने मनुस्मृति को जलाया या कुछ और?’ – अमिताभ बच्चन, KBC और सोनी TV के खिलाफ शिकायत दर्ज

कौन बनेगा करोड़पति 12 (KBC) में मनुस्मृति जलाए जाने से संबंधित सवाल पूछने पर अमिताभ बच्चन के ख़िलाफ़ लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज हुई है। यह शिकायत अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से करवाई गई है।

अमिताभ बच्चन के अलावा शिकायत में सोनी इंटरटेनमेंट चैनल को भी नामजद किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि केबीसी में जातिगत मतभेद करने वाला सवाल पूछा गया ।

जानकारी के मुताबिक, महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी, प्रदेश प्रवक्ता पंकज तिवारी, कार्यकारिणी सदस्य विकास पांडे समेत कई नेताओं ने शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को हजरतगंज थाने पहुँचकर अपनी शिकायत लिखवाई।

इस शिकायत के साथ ही महासभा की ओर से केबीसी की निर्माता कम्पनी और होस्ट अमिताभ बच्चन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी माँग की गई। ऋषि त्रिवेदी ने केबीसी में पूछे गए सवाल का हवाला देते हुए का कि इस तरह का अनावश्यक सवाल पूछ कर हिंदू समाज को जातिगत मतभेद फैलाने और भड़काने का काम किया गया है, जिसे महासभा कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

बता दें कि हिंदू महासभा ने जिस सवाल पर आपत्ति जताई है, वह केबीसी 12 के 30 अक्टूबर को प्रसारित एपिसोड में पूछा गया था। इसमें क्राइम पेट्रोल सीरियल के होस्ट अनूप सोनी और बेजवाड़ा विल्सन ने हिस्सा लिया था। 11 वें प्रश्न के रूप में मनुस्मृति से संबंधित सवाल किया गया।

अमिताभ बच्चन ने दोनों प्रतिभागियों से पूछा था:

“25 दिसंबर 1927 को डॉक्टर बीआर अंबेडकर और उनके अनुयायियों ने किस धर्मग्रंथ की प्रतियाँ जलाई थीं? ए. विष्णु पुराण, बी. भगवद गीता, सी. ऋगदेव, डी. मनुस्मृति?”

इसे सुन कर बेजवाड़ा विल्सन ने इसका जवाब दिया और अमिताभ बच्चन ने लॉक करते हुए उन्हें सही जवाब देने पर बधाई दी। साथ ही तालियाँ बजा कर उनका अभिवादन किया।

अमिताभ बच्चन ने आगे कहा:

“1927 में डॉक्टर बीआर अंबेडकर ने जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को वैचारिक रूप से अनुचित ठहराने के लिए प्राचीन हिंदू जो पाठ था मनुस्मृति, उसकी निंदा की और उन्होंने इसकी प्रतियों को भी जलाया।”

अब इसी सवाल के पूछे जाने के बाद से केबीसी और अमिताभ बच्चन ट्विटर पर # BoycottKBC के नाम से ट्रेंड होने लगे। लोगों का पूछना है कि क्या ये बात किसी और धर्म या मजहब से संबंधित बात होती, तो भी अमिताभ ऐसे ही सवाल करते? फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने इस सवाल की वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि कम्युनिस्टों ने केबीसी को हाइजैक कर लिया है।

एक यूजर संयोगिता सिन्हा ने लिखा, “अमिताभ_बच्चन को शर्म आनी चाहिए कि हरिवंश राय बच्चन की संतान हैं और इतना भी नहीं पता कि मनुस्मृति एक साधारण किताब है न कि ग्रंथ और इसको भगवद् गीता से तुलना करके सबसे नीच काम किया है।”

विष्णु आजाद लिखते हैं, “ये है सदी का महानायक, जिसे हम सबने सर पर बिठा रखा है l मनुस्मृति के बारे में इस जिहादी ने इस तरह अपमानित करने वाला प्रोपेगेंडा चलाकर अपनी सनातन विरोधी मानसिकता को जगजाहिर कर दिया हैl”

आसान पिच पर लालू के माई समीकरण और तेज प्रताप का मुश्किल इम्तिहान!

बिहार विधानसभा की 94 सीटों के लिए तीन नंवबर को वोट डाले जाएँगे। 17 जिलों की इन सीटों पर कई बड़े नाम चुनाव लड़ रहे हैं। पर इस चरण की सबसे दिलचस्प लड़ाई हसनपुर सीट पर है। यहाँ लालू प्रसाद यादव के माई (मुस्लिम+यादव) समीकरण और उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की परीक्षा होनी है।

हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.91 लाख मतदाता हैं। इनमें भी 73 हजार यादव और 23 हजार मुस्लिम। कागजों पर यह सीट राजद के माई समीकरण के लिहाज से फिट है। यहाँ से जीत भी हर बार यादव उम्मीदवार की ही होती है। यही कारण है कि तेज प्रताप यादव ने अपनी पुरानी सीट महुआ छोड़कर यहाँ से मैदान में उतरने का फैसला किया।

बाढ़ से प्रभावित इस इलाके के ग्रामीण इलाकों की सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। यहाँ तक कि निवर्तमान विधायक और जदयू के उम्मीदवार राजकुमार राय के पैतृक घर तक जाने वाली सड़क भी दुरुस्त नहीं है। तेज प्रताप यादव का दावा है कि राजकुमार राय ने लगातार 10 साल विधायक रहने के बावजूद विकास का कोई काम नहीं किया है। वे विकास करने के लिए इस सीट पर आए हैं।

प्रचार के दौरान युवाओं को लुभाने की तेज प्रताप यादव ने भरपूर कोशिश की। इसी कड़ी में वे कभी क्रिकेट खेलकर तो कभी खेतों में ट्रैक्टर चलाकर, कभी साइकिल चलाकर तो कभी लोगों के साथ सत्तू और लिट्टी चोखा खाकर और कभी बांसुरी बजाकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करते नजर आए।

लेकिन, जमीन पर तेज प्रताप के लिए राह इतनी भी आसान नहीं है। खासकर, पत्नी ऐश्वर्या के साथ हुए उनके विवाद को लेकर महिलाओं और उनके स्वजातीय मतदाताओं में भी नाराजगी दिखती है। ऑपइंडिया की टीम इस इलाके में तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव की सभा के अगले दिन पहुँची थी। इससे पहले तेज प्रताप के नामांकन में भी तेजस्वी आए थे। बावजूद रोजगार और पलायन के मुद्दे पर यहाँ के चुनाव को केंद्रित करने की कोशिश में उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी।

हसनपुर के फुल्हारा गॉंव का चुनावी मूड

ऐसे में अति पिछड़ा (77000), मल्लाह (35000), दलित व महादलित (37000), कोइरी-कुर्मी (25000) तथा सवर्ण-मारवाड़ी (21000) मतदाताओं की भूमिका निर्णायक हो जाती है। 2010 में जदयू के राजकुमार राय ने अन्य जातियों की गोलबंदी के सहारे ही राजद के माई समीकरण को ध्वस्त कर दिया था। 2015 में नीतीश कुमार के राजद के साथ चले जाने के बाद उन्होंने माई और अतिपिछड़ा समीकरण के बदौलत जीत हासिल की थी। राजकुमार राय एक बार फिर 2010 के फॉर्मूले पर समीकरण साधने में लगे हैं। इन्हीं वर्गों का हवाला देकर वे तेज प्रताप यादव को बड़े अंतर से पराजित करने का दावा करते हैं।

तेज प्रताप यादव और राजकुमार राय की सीधी टक्कर के बीच पप्पू यादव की पार्टी जाप के उम्मीदवार अर्जुन यादव और लोजपा के मनीष सहनी को मिलने वाले वोट निर्णायक रहेंगे। अर्जुन यादव ने पिछले चुनाव में निर्दलीय के तौर पर करीब 10 हजार वोट हासिल किए थे। इसी तरह मनीष सहनी के पक्ष में उनके स्वजातीय मतदाताओं और लोजपा के परपंरागत वोटरों का झुकाव भी दिखता है। यह जदयू उम्मीदवार की जीत की हैट्रिक की राह में बड़ा रोड़ा है। हालाँकि राजकुमार राय का दावा है कि मुकेश सहनी की वीआईपी के एनडीए में शामिल होने की वजह से यह वर्ग भी उनके साथ है। दिलचस्प यह है कि मनीष सहनी भी पहले वीआईपी में ही थे।

हसनपुर से जदयू के उम्मीदवार राजकुमार राय का साक्षात्कार

ऐसे में यहॉं की लड़ाई बेहद दिलचस्प दिख रही है। जैसा कि मंगलगढ़ के रामचंद्र यादव कहते हैं, “तेज प्रताप और राजकुमार में से कोई भी दो-चार हजार वोट से जीतेगा।”

व्यंग्यात्मक गजलें और अश’आर: मुनव्वर राणा के नाम

किसी के हिस्से में टट्टी, किसी के पाद आया
मैं घर में सबसे कट्टर था, मेरे हिस्से जिहाद आया

दस्तरख़ान बिछ गया, बीफ खाने लगे फसादी
मैं सबसे मोटा था, मेरे हिस्से सलाद आया

चौदह से ही था परीशाँ बहुत, लौटा दिया ‌अवार्ड
सत्रह में लग गए जब योगी मोदी के बाद आया

मैं तो क्लोसेट जिहादी था, करता था शायरी
दुकाँ हुई जो बंद तो बाहर मेरा उन्माद आया

हमारे वैचारिक अब्बू इकबाल ने ही कर दी थी शुरुआत
फ्रांस में गर्दन काटना तो बहुत-बहुत बाद आया

तो क्या हुआ कुछ गर्दन काटे, बस्तियाँ जला दीं हमने
कौम सबसे पहले है, देश तो सबसे बाद आया

मन तो बहुत था कि पाकिस्ताँ में जा बसें
मोटा तो था पहले ही, ऐन वक्त पर जुलाब आया

राहत ने चरस बोई थी बाप-ए-हिन्दोस्तान वाली
वही चरस बोने मैं मुनव्वर-ए-बर्बाद आया

अंतिम गजल तक पढ़िएगा क्योंकि लम्बी है, और दिल्ली दंगों की असलियत बयान करती है

दूसरी गजल:

पड़ी सायकिल को देखते ही पंचर साट देते हैं
खड़े काफिर को देखते ही गर्दन काट देते हैं

हाथ उठा कर, बुलाओ, शरण दो, बसा भी दो, लेकिन
आदतन हम उन्हीं हाथों को अक्सर काट देते हैं

कोई आइसिस बनाता है, कोई बनता है तालिबान
वो फटते हैं, यहाँ हम नज्मों की पंचर साट देते हैं

यही तो है हमारा इक तरीका इतने सालों का
गंगा-जमुनी के पीछे हम तो लाशें पाट देते हैं

तीसरी गजल:

मेरे हाथों में पेट्रोल बम, हथियारों को वो देती है
पुलिस ले जाती है तो अम्मी गुस्से में रो देती है

वो कहती है कि मशालों के तेल चेक कर लूँ मैं
न मारा एक भी काफिर तो अम्मी चरस बो देती है

चौथी गजल:

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
मैं काफिर मारूँ, न मारूँ, अम्मी ख़फ़ा नहीं होती 

मैं मोटा हूँ खिलाती है वो मुझको बीफ की बोटी
बनाते देखती है मुझको बम, दफा नहीं होती

चंद अशआर:

लगे थे पोस्टर मेरे जब लखनऊ के बाजारों में
मुद्दतों से अम्मी ने बदला नहीं वालपेपर अपना

ऐ अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया
जिहादी ने पेट्रोल बम फेंका, शहर में उजाला हो गया

जरूरत की सारी बातें वो बच्चों को सिखाती है
हाथ में ही न बम फूटे, वो अक्सर याद दिलाती है

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं शायर से फसादी हो जाऊँ
सुसाइड वेस्ट से इस तरह लिपट जाऊँ कि जिहादी हो जाऊँ

घेर लेने को जब भी बलाएँ आ गईं
आतंकियों को बचाने मेरी शायरी आ गईं

कभी भी बीच दंगे हार कर, खुल कर नहीं रोना 
जहाँ जलती मशालें हों, नमी अच्छी नहीं होती 

अंतिम गजल: ये गजल नहीं पेंटिंग है, जो मैंने तब पढ़ी जब मुझे लगा कि हमें बहुत सताया जा रहा है, हमें हमारा काम ठीक से करने नहीं दिया जा रहा, पुलिस हमें दंगा करने से रोक लेती है, हमारे पीएचडी के विद्यार्थियों को भी ठीक से आग लगाने वाली बातें नहीं कहने देतीं।

तुमने जो भी बम पकड़ा, दस गुणा फोड़ आए हैं
फसादी हैं, मगर हम एक दुनिया छोड़ आए हैं

कई आँखें अभी तक ये शिकायत करती रहती हैं
कि हम दिल्ली में कुछ जिंदा लाशें छोड़ आए हैं

उँगलियाँ इस जिस्म से खिलवाड़ करना कैसे छोड़ेगी
कि कुछ काफिर घरों को बिन जलाए छोड़ आए हैं

देखना इसमें कैसे-कैसे कहानियाँ सब दिखेंगी आपको। ध्यान देना…

कभी फैसल की छत से देखते थे जलती राजधानी को
बड़ी मजबूरियों में ये नजारा छोड़ आए हैं

महीनों तक सफूरा ख्वाब में भी बड़बड़ाती थी
सुखाने के लिए छतों पर हम कुछ ईंटें छोड़ आए हैं

वो बैठक, हाँ वही बैठक, अरे हाँ-हाँ वही बैठक
वहीं तो प्लानिंग-ए-दंगा की बातें छोड़ आए हैं

जो एक पतली सड़क मौजपुर से चाँदबाग जाती है
वहीं ह्यूमन चेन के ख्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं

वो दिल्ली के जले घरों का खामोशी से मुँह तकना
शाहीन-जामिया हम तुमको अकेला छोड़ आए हैं

गले मिलते हुए हिन्दू, गले मिलते हुए क्रिश्चन
जले दिलबर के राखों का नजारा छोड़ आए हैं

कल एक PFI वाले से कहना पड़ गया हमको
तुमने जो काम सौंपा था, अधूरा छोड़ आए हैं

वो हैरत से हमें तकता रहा कुछ देर फिर बोला
जलाना है हमें भारत, वो सारा छोड़ आए हैं

अभी हम सोच में गुम थे कि उससे क्या कहा जाए
वो ताहिर और फैसल था हमारा, छोड़ आए हैं

उधर का कोई मिल जाए तो उससे हम यही पूछें
कि बम हम छोड़ आए हैं, या धमाका छोड़ आए हैं

तू हमसे काफिर इतनी बेरुखी से बात करता है
अंकितों को तो छूरा मार नाले में मरता छोड़ आए हैं

ये दो कमरों का घर और ये गुजरती जिंदगी अपनी
वहाँ हम ताहिर-ओ-फैजल की बिल्डिंग छोड़ आए हैं

बहाया था लहू पूरी प्लानिंग के साथ हमने तो
वो जो माचिस खरीदा था वो जलता छोड़ आए हैं

बहुत कम दाम में अहमद ने एसिड जो खरीदा था
उसे दस दाम दे कर बिना फेंके वहीं पर छोड़ आए हैं

हँसी आती है अपनी ही अदाकारी पे खुद हमको
बने फिरते हैं पीएचडी, धमाका छोड़ आए हैं

वहाँ पर तो समय कम था, तमन्नाएँ जियादा थीं
पुलिस को देख कर आधे जले घर छोड़ आए हैं

किसी की आरजू के पाँव में जंजीर डाली थी
किसी काफिर की गर्दन में वो फंदा छोड़ आए हैं

हमें डिफेंड करते-करते तो शरमा गई होंगी
वो लिबरल जिनकी आँखें हम टीवी पर छोड़ आए हैं

वो खत जिस पर तेरे होठों ने अपना नाम लिक्खा था
लव जिहादों के चद्दर पर बिछा कर छोड़ आए हैं

गए वक्तों की अल्बम देखने बैठे तो याद आया
ये मोहनपुरी बचा कैसे, वो नक्शा छोड़ आए हैं

यहाँ आते हुए हर कीमती सामान ले आए
मगर शिव विहार की मूर्ति को साबुत छोड़ आए हैं

और अंत में एक बहुत बार पढ़ा गया शेर, कि

एक आँसू भी सियासत के लिए खतरा है
तुमने देखा ही नहीं पिछवाड़े का चबूतरा होना

राजस्थान और दिल्ली में पटाखों की खरीद-बिक्री पर रोक, CM गहलोत ने कहा – लोगों का स्वास्थ्य खराब होगा

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने दीवाली से पहले न सिर्फ पटाखों की आतिशबाजी, बल्कि इसकी खरीद-बिक्री पर भी रोक लगा दी है। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार का कहना है कि पटाखों की आतिशबाजी से निकलने वाले धुएँ से कोरोना संक्रमित रोगियों और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसीलिए इसे बैन किया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दावा है कि प्रदेश के लोगों के जीवन की रक्षा हेतु ये कदम उठाया गया है।

गहलोत ने कहा कि पटाखों से निकलने वाले धुएँ के कारण कोविड मरीजों के साथ ही हृदय और श्वास रोगियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए दीवाली पर लोग आतिशबाजी न करें। राजस्थान में पटाखों के बिक्री के अस्थायी लाइसेंस पर भी बैन लगाने का आदेश दिया गया है। सीएम गहलोत ने कहा कि शादी सहित अन्य समारोहों में भी आतिशबाजी पर रोक लगाई जाए। दीवाली के दो सप्ताह पहले ये निर्णय लिया गया है।

‘कोरोना समीक्षा बैठक’ के दौरान अशोक गहलोत ने ये निर्णय लिया। ‘नो मास्क-नो एंट्री’ और ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि राज्य में पटाखों की जितनी भी दुकानें हैं, उन सबका क्रय-विक्रय का लाइसेंस रद्द किया जाए। ये रोक अस्थायी लाइसेंसों पर लगाई जाएगी। जर्मनी, यूके, फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे विकसित देशों की बात करते हुए गहलोत ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गई है।

इधर दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार सिर्फ ग्रीन पटाखे ही चलाए जा सकेंगे। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में ग्रीन पटाखों के अलावा किसी अन्य प्रकार के पटाखों की खरीद-बिक्री या उपयोग की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि इनसे दिल्ली की हवा प्रदूषित हो जाती है और इसके लोगों के जीवन पर गंभीर असर भी पड़ता है। मंगलवार (नवंबर 3, 2020) से केजरीवाल सरकार ‘एंटी फायर क्रैकर अभियान’ शुरू करेगी।

इस अभियान को चलाने के लिए डीपीसीसी की 11 टीमें गठित की जा रही हैं। दिल्ली सरकार इसके लिए पुलिस का सहयोग भी लेने की तैयारी में है। राय ने कहा कि पटाखों और पराली के जलाए जाने से होने वाला धुआँ ही दिल्ली के प्रदूषण का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि इन पटाखों को जलाने से दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है। साथ ही एंटी क्रैकर स्क्वाड भी बनेगा। पटाखों की खेप जब्त होने पर गंभीर कार्रवाई होगी।

याद हो कि 2019 में उत्तर प्रदेश के देवबंद में दीवाली से कुछ दिन पहले अब्दुल वकील कासमी नामक एक मौलाना ने फतवा जारी कर पटाखे फोड़ना गैर इस्लामिक बताया था और साथ ही पटाखों का व्यवसाय करके मिलने वाले लाभ को हराम करार दिया था। उसने कहा था कि मुस्लिमों के लिए ये हराम हैं और पटाखे फोड़ने का उल्लेख किसी भी धार्मिक किताब में नहीं हैं। पिछले साल भी पटाखों पर कई राज्यों में प्रतिबन्ध था।

दलित IAS ऑफिसर को भीड़ ने मौत होने तक मारा… गुंडे नहीं बिहार के माननीय विधायक-सांसद थे मारने के आरोपी

आज उत्तर बिहार शांत है। 90 के दशक के खूनी खेल से दूर। पर खून के छींटे अभी भी मौजूद हैं। कहानी के सूत्रधार खत्म नहीं हुए। हाँ, रास्ते जरूर बदल गए हैं। मुन्ना शुक्ला अपनी पत्नी के लिए लालगंज सीट से ताल ठोक रहे हैं। उधर लवली आनंद (Lovely Anand) सुपौल से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। आप कहेंगे दोनों में क्या संबंध है? मुन्ना शुक्ला और लवली के पति आनंद मोहन (Anand Mohan) दोनों ही गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या के आरोपित थे। मुन्ना शुक्ला बरी हो गए पर आनंद मोहन आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

पाँच नवंबर, 1994 की शाम मुजफ्फरपुर में डीएम की हत्या प्रतिक्रिया थी। ठीक एक दिन पहले अंडरवर्ल्ड डॉन कौशलेंद्र शुक्ला उर्फ छोटन शुक्ला (Chhotan Shukla) की हत्या हुई थी और डीएम का मर्डर उन्हीं की शव यात्रा के दौरान हुई। ये वक्त बिहार की राजनीति में माफियाराज का स्वर्णकाल था। उस समय जो खून के छींटे निकले, उनकी छाप बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election) में भी दिखाई दे रही है।

5 दिसंबर 1994 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जिस भीड़ ने डीएम की पीट-पीट कर हत्या की थी, उस भीड़ का नेतृत्व आनंद मोहन और उनके साथ सजा पाए नेता कर रहे थे। एक दिन पहले मुजफ्फरपुर में आनंद मोहन की पार्टी के नेता रहे छोटन शुक्ला की हत्या हुई थी। इस भीड़ में शामिल लोग छोटन शुक्ला के शव के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। 

इस दौरान मुजफ्फरपुर के रास्ते पटना से गोपालगंज जा रहे डीएम जी कृष्णैया पर भीड़ ने मुजफ्फरपुर के खबड़ा गाँव में हमला कर दिया था। मॉब लिंचिंग में डीएम की मौत हो गई थी। कृष्णैया तब मात्र 35 वर्ष के थे। शव यात्रा में बीपीपी सुप्रीमो आनंद मोहन, उनकी पत्नी और वैशाली की पूर्व सांसद लवली आनंद, छोटन शुक्ला के भाई और विधायक मुन्ना शुक्ला, विक्रमगंज के पूर्व विधायक अखलाक अहमद, शशिशेखर और अरुण कुमार सिन्हा भी शामिल थे। इन लोगों पर डीएम की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप था।

जब शव यात्रा निकली तो बदला ही नारा था। डीएम जी कृष्णैया के ड्राइवर ने बड़ी कोशिश की उनको बचाने की। लाल बत्ती देख कर जी कृष्णैया (Gopalganj DM G Krishnaiyyah) को बाहर निकाला गया, लोगों ने घेर कर मारा। देख कर लोगों को लगा कि गोली मारने से पहले ही मर गए होंगे क्योंकि तब तक भीड़ ने उन्हें बुरी तरह से कूच दिया था। इसके बाद भी भुटकुन शुक्ला ने कथित तौर पर फायरिंग कर उनके जिंदा रहने की संभावना पर विराम लगा दिया। बहुत देर बाद पुलिस लाश ले गई। तब तक सायरन बजने लगा था और कर्फ्यू लग चुका था।

छोटन शुक्ला की शव यात्रा में गोपालगंज के डीएम की हत्या ने बैठे बिठाए एक और मुद्दा भी दे दिया था। गोपालगंज के डीएम दलित थे। न्यायालय के पन्नों में दर्ज कई सौ पेज की रिपोर्ट में काफी विस्तार से इस हत्याकांड के बारे में बताया गया है। इन पन्नों में दर्ज तमाम गवाहों की गवाही कहती है कि किस तरह नया टोला स्थित छोटन शुक्ला के घर से निकली शव यात्रा जब भगवानपुर पहुँची तो वहाँ क्या हुआ था। भगवानपुर में करीब 5000 लोगों की भीड़ के बीच में आनंद मोहन ने एक आक्रोशित भाषण दिया था। 

आनंद मोहन ने अपने भाषण में छोटन शुक्ला की हत्या में शामिल लोगों को कुत्तों की मौत मारने और बिहार में खून की होली खेलने जैसी भड़काऊ बातें भी कही थीं। भगवानपुर में भाषणबाजी के बाद शवयात्रा खबड़ा और रामदयालु होते हुए छोटन शुक्ला के पैतृक गाँव लालगंज जानी थी। खबड़ा मूलरूप से भूमिहार बहुल क्षेत्र है। यहाँ जबर्दस्त भीड़ थी। लोग आक्रोशित थे। इसी बीच हाजीपुर से मीटिंग समाप्त कर गोपालगंज लौट रहे डीएम जी कृष्णैया भीड़ में फँस गए। सरकार और प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित भीड़ में से किसी ने रिवॉल्वर से उन पर फायरिंग कर दी। बहुत नजदीक से उन्हें गोली मार दी गई।

सैकड़ों पुलिसकर्मी भी शवयात्रा को शांतिपूर्वक निकालने के लिए लगाए गए थे। पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बीच डीएम को गोली मार दी गई। गोली लगने के बाद वहाँ अफरातफरी मच गई। पुलिस ने भी जमकर लाठीचार्ज किया। इस लाठीचार्ज में सैकड़ों लोग घायल हुए। डीएम को घायलावस्था में एसकेएमसीएच ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

हाजीपुर पहुँचते-पहुँचते आनंद मोहन और लवली आनंद गिरफ्तार कर लिए गए। उधर, लालगंज के पैतृक गांव में छोटन शुक्ला का दाह संस्कार कर दिया गया। पर डीएम की हत्या ने बिहार की पूरी राजनीति में भूचाल ला दिया। एक दलित अधिकारी को सवर्णों की भीड़ के बीच हत्या ने बिहार की राजनीति को नया जातिगत मुद्दा जो दे दिया था।

जज ने इस मामले में आरोपित किए गए 36 में से 29 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। आपराधिक छवि वाले छोटन शुक्ला की 4 दिसंबर 1994 को विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुक्ला की हत्या का आरोप बाहुबली और बिहार के पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद पर लगा था, जिनकी 13 जून 1998 को पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान परिसर में हत्या कर दी गई। बृजबिहारी उस समय बिहार के साइंस एंड टेक्नॉलजी मंत्री थे और तकनीकी संस्थानों में दाखिले में गड़बड़ी के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था।

कृष्णैया की हत्या में पटना की निचली अदालत ने आनंद मोहन को 2007 में फाँसी की सजा सुनाई थी। आनंद मोहन के साथ पूर्व मंत्री अखलाक अहमद और अरुण कमार को भी मौत की सजा सुनाई गई थी। बाद में हाई कोर्ट ने आनंद मोहन की फाँसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया।

इसी मामले में अदालत ने आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद, मुन्ना शुक्ला, शशि शेखर और हरेन्द्र कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने दिसंबर 2008 में सबूतों के अभाव में इन्हें बरी कर दिया। आनंद मोहन ने जेल से ही 1996 का लोकसभा चुनाव समता पार्टी के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की थी। 2 बार सांसद रहे आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी एक बार सांसद रह चुकी हैं।

कुख्यात क्रिमिनल होने के बावजूद मुजफ्फरपुर की सवर्ण आबादी का छोटन के साथ इमोशनल कनेक्ट था। रघुनाथ पांडे के लिए तो ये बड़ा लॉस था। वो कॉन्ग्रेस के टिकट पर लगातार विधायक बनते रहे थे। इस जागीर को सँभालने में छोटन की जरूरत थी। लालू का राज था और बैकवर्ड-फॉरवर्ड जातीय संघर्ष अपना चरम छू रहा था। लेकिन सम्राट अशोक और छोटन जैसे युवाओं को लगा कि कब तक नेताओं के लिए काम किया जाए। बूथ कैप्चरिंग के काम से अलग अब ये अपनी खुद की राजनीतिक पहचान बनाना चाहते थे।

तब सामाजिक न्याय की आड़ में लालू यादव (Lalu Prasad Yadav) गाहे-बगाहे समाज में जहर भी बो रहे थे। भूरा बाल (भूमिहार-राजपूत-ब्राह्मण-लाला यानी कायस्थ) साफ करो की बात कर लालू ने सवर्णों को गोलबंद कर दिया। जगह-जगह जातीय दंगे हुए। खास बिरादरी के लोगों को थानेदार बनाने के आरोप लगे। 1995 में लालू यादव की दूसरी परीक्षा थी। इस विधानसभा चुनाव से पहले 1994 में ही वैशाली में लोकसभा का उपचुनाव हुआ। 

इससे पहले लोग आनंद मोहन को ज्यादा नहीं जानते थे। उन्होंने सहरसा के रॉबिनहुड से नेता का शक्ल इजाद किया। ये भी सच है कि लालू आगमन के बाद कसमसाए बिहार के अगड़ों में उनके संभ्रांत नेताओं ने नहीं बाहुबली नेताओं और कथित अपराधियों ने आस जगाई। इन्हीं में एक आनंद मोहन ने लालू को खुलेआम चुनौती दी और वो भी उसी की भाषा में। लालू विरोध को आवाज मिली आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी से।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य की बात करें तो अगड़ी-पिछड़ी की राजनीति को नीतीश बहुत दूर ले आए हैं, जहाँ पुरानी जातीय सीमाएँ टूट चुकी हैं। इसी के साथ जातीय वर्चस्व और इससे जुड़ी अदावत की कहानी भी काफी बदल चुकी है। बृजबिहारी प्रसाद की पत्नी रमा देवी सांसद हैं और इसी उत्तर बिहार में बीजेपी का ओबीसी चेहरा बन कर उभरी हैं।

कंगना रनौत के खिलाफ फेक वीडियो बनाने के लिए 60 लाख रुपए मिले ध्रुव राठी को, खुद अभिनेत्री ने लगाया आरोप

क्रिएटिव फ़िल्म डायरेक्टर Eray Cather ने शनिवार (1 नवंबर, 2020) को एक बड़े यूट्यूबर पर पैसे लेकर नामचीन लोगों के खिलाफ वीडियो बनाने का आरोप लगाया है। नामचीन लोगों में अभिनेत्री कंगना रनौत, रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के परिवार शामिल हैं।

हालाँकि Eray ने इस दौरान किसी का नाम नहीं लिया था। लेकिन यूट्यूबर और आम आदमी पार्टी के समर्थक ध्रुव राठी ने माना कि Eray ने इनडाइरेक्टली उसकी ओर इशारा किया है और उसने उन सभी आरोपों से इनकार किया। जिसके बाद कंगना रनौत ने बताया कि ध्रुव को उसके खिलाफ वीडियो बनाने के लिए 60 लाख रुपए दिए गए थे।

कैथेर ने अपने ट्वीट में आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त यूट्यूबर के 4 मिलियन से भी ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और उसे सुशांत की मृत्यु में उनके परिवार वालों की भूमिका पर आरोप लगाने को लेकर 65 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। फिल्म निर्देशक ने कहा, “इस वीडियो के लिए समय सीमा 1-2 सप्ताह दी गई है। इसी YouTuber को पहले कंगना और अर्नब को निशाना बनाने के लिए काम पर रखा गया था।”

उन्होंने आगे कहा, “यूट्यूबर प्रति वीडियो के 30-40 लाख रुपए लेता है। कंगना और अर्नब के लिए उन्हें प्रत्येक वीडियो का 35 लाख रुपए भुगतान किया गया था। अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।”

ध्रुव राठी ने इस ट्वीट के यूट्यूबर को खुद के रूप में चिन्हित किया

गौरतलब है कि एरे कैथेर ने अपने ट्वीट थ्रेड में किसी भी यूट्यूबर का नाम नहीं लिया था। हालाँकि, आम आदमी पार्टी समर्थक व्लॉगर (वीडियो ब्लॉगर) और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ध्रुव राठी ने मान लिया कि यह ट्वीट उन्हें लेकर किया गया है। उन्होंने पूछा, “लोल, क्या यह बकवास फर्जी खबर मुझे लेकर है?”

संयोग की बात है कि यूट्यूबर राठी के भी 4.5 मिलियन सब्सक्राइबर हैं। राठी ने यह स्पष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि उसने वीडियो बनाने के लिए किसी भी प्रकार से पैसे नहीं लिए हैं।

AAP समर्थक व्लॉगर ने कहा, “सबसे पहले कंगना के वीडियो बनाने के लिए किसी ने मुझे कोई पैसा नहीं दिया। दूसरी बात, मैं SSR पर कोई वीडियो बनाने की योजना नहीं कर रहा हूँ। और तीसरा मैं वास्तव में चाहता हूँ कि मेरी स्पॉन्सरिंग फीस प्रति वीडियो 30 लाख हो, मैं कितना अमीर होऊँगा।”

उल्लेखनीय है कि नाम नहीं होने के बावजूद ध्रुव राठी ने कॉन्ट्रोवर्सी पर स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता महसूस की, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से आरोपों की सत्यता की पुष्टि हुई। एरे कैथेर ने बाद में बताते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि राठी ने सुशांत राजपूत पर वीडियो बनाने का विचार छोड़ दिया।

क्रिएटिव फिल्म निर्देशक ने लिखा, “पहला: मैंने किसी का नाम नहीं लिया है। यदि आप इसे महसूस करते हैं, तो आपका स्वागत है। दूसरा: आपकी फीस और डील के बारे में, ध्रुव राठी – मैं इसके बारे में निश्चित रूप से बात करूँगा, लेकिन अभी मेरा वो फोकस नहीं है। इसलिए थोड़ा ठहरिए। तीसरा: ख़ुशी है कि आपने वीडियो बनाने का फैसला छोड़ दिया और अब इसकी प्लानिंग नहीं कर रहे। आपने इसका जवाब दिया।”

वहीं कॉन्ट्रोवर्सी होने के एक दिन बाद कंगना रनौत ने बीएमसी विवाद को लेकर ध्रुव राठी को उनके खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने के लिए फटकार लगाई। AAP समर्थक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी देते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा, “हा हा सही कहा! एरे कैथेर, बेशक, इस डिमविट को फेक वीडियो बनाने के लिए पैसे मिलते हैं। मेरे घर पर बीएमसी नोटिस के बारे में झूठ बोलने के लिए मैं उसे सलाखों के पीछे ले जा सकती हूँ, जिसके लिए उसे 60 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। जब तक सरकार का समर्थन या पैसा नहीं दिया जाएगा, तब तक कोई भी कानूनी मामलों के बारे में खुल कर झूठ क्यों बोलेगा?”

बता दें कि ध्रुव राठी ने अभी तक कंगना के खिलाफ लगाए गए फर्जी समाचारों के आरोपों का जवाब नहीं दिया है।

उल्लेखनीय है कि ऐसा पहली बार नहीं है। ध्रुव राठी इससे पहले भी इसी तरह कई फर्जी खबर चला चुके हैं। इनमें दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों और पीएम मोदी के खिलाफ कई झूठ शामिल हैं।