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पूरे गाँव में अकेला वाल्मीकि परिवार, वसीम और शौकीन दे रहे हाथरस कांड दोहराने की धमकी: एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में कुत्ते को डंडा मारने की बात से शुरू हुआ विवाद अब पीड़ित परिवार के पलायन तक पहुँच चुका है। एक वाल्मीकि परिवार को धमकियाँ दी जा रही हैं कि हाथरस कांड जैसे हालात दोहराए जाएँगे। इस मामले के सुर्ख़ियों में आने के बाद पुलिस हरकत में आई और कुल 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया – वसीम, शौक़ीन और बादल। पुलिस फ़िलहाल 3 अन्य आरोपितों की खोजबीन में जुटी हुई है और क्षेत्र में फ़िलहाल तनाव की स्थिति बरकरार है।  

मेरठ के पास एक जगह है परीक्षितगढ़ और उसके अंतर्गत आने वाले गाँव सिखेड़ा में यह घटना हुई। 16 अक्टूबर 2020 को वाल्मीकि समाज से आने वाले संदीप ने एक कुत्ते को डंडा मारा, जिसके बाद उसका वसीम नाम के युवक से विवाद हो गया। इसके बाद कई लोगों ने संदीप की पिटाई कर दी और उसके लिए जातिसूचक शब्दों का उपयोग किया। जिसके बाद पुलिस ने शांति भंग करने का मामला दर्ज करते हुए धारा 151 लगा कर कार्रवाई की। हालात ऐसे बने कि वसीम ने संदीप को डराना-धमकाना शुरू कर दिया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ संदीप का कहना है कि वसीम ने उसे यहाँ तक धमकी दी कि हाथरस कांड दोहराया जा सकता है। मामले का सबसे अहम पहलू है कि सिखेड़ी गाँव में संदीप का परिवार इकलौता वाल्मीकि समाज का परिवार है। लिहाज़ा उस पर धर्म परिवर्तन और पलायन का भी दबाव बनाया जा रहा है। इन हालातों का सामना करने के बाद संदीप ने अंततः आरोपितों (वसीम, शौक़ीन और बादल) के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने इन तीनों आरोपितों के विरुद्ध दंड संहिता की धारा 323, 504, 506, 452 और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया। 

विवाद के दौरान संदीप बुरी तरह घायल हुए था और वह पिछले कई दिनों से बिस्तर पर हैं। मामले की जानकारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने इस प्रकरण में कार्रवाई की बात कही। उन्होंने घटना के संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा कि कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। 

जिसके बाद उत्तर प्रदेश, मेरठ पुलिस ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए ट्वीट किया। मेरठ पुलिस ने ट्वीट में लिखा, “उपरोक्त प्रकरण में वादी पक्ष की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है तथा आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।” एक मीडिया समूह से बात करते हुए इंस्पेक्टर आनंद प्रकाश मिश्र ने भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में 3 अन्य आरोपितों का नाम शामिल किया गया है और उनकी तलाश जारी है। फ़िलहाल गाँव में भारी मात्र में पुलिस बल तैनात है।    

पटना: कॉन्ग्रेस मुख्यालय पर IT टीम का छापा, गाड़ी से बरामद हुए ₹8.5 लाख, प्रभारी ने कहा- हमें क्या लेना देना

बिहार चुनावों की सरगर्मी के बीच बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) देर शाम प्रदेश राजधानी पटना में स्थित कॉन्ग्रेस के कार्यालय सदाकत आश्रम में IT विभाग की टीम का छापा पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, IT विभाग की टीम कार्यालय में नोटिस देने पहुँची थी। टीम ने यह नोटिस कार्यालय के बाहर खड़े वाहन से 8.5 लाख रुपए बरामद होने के बाद दिया।

इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और बिहार कॉन्ग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल से पूछताछ की गई है व अन्य लोगों से भी पूछताछ जारी है। आईटी की टीम ने कॉन्ग्रेस दफ्तर में नोटिस चिपका दिया है। वहीं, शक्ति सिंह गोहिल ने कहा, “मुझे नहीं मालूम ये किसका पैसा है।” उन्होंने कहा कि अगर उनके कंपाउंड में गाड़ी से 8 लाख रुपया निकलता है तो उन्हें उससे क्या लेना-देना है? 

गोहिल का कहना है, “ये साज़िश है, हार से ये लोग बौखला रहे हैं। यहाँ कई लोगों की गाड़ी होती है, हमें नहीं पता किसकी गाड़ी में क्या मिला। हम पाई पाई का हिसाब देंगे। ये लोग जानबूझकर ये सब कर रहे हैं। हमें कोई डर नहीं है।” गोहिल ने कहा कि सदाकत आश्रम से कुछ नहीं मिला है, कम्पाउंड के बाहर से किसी गाड़ी में पैसा मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसा कह कर यहाँ इनकम टैक्स की टीम ने नोटिस दिया है। 

मीडिया खबरों के अनुसार आयकर विभाग ने इस मामले में एक शख्स को पकड़ा है। उसने अपने बयान में कहा है कि पैसा पटना में किसी को दिया जाना था। अब आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस से इस पूरे मामले में जवाब माँगा है। आईटी टीम ने कॉन्ग्रेस से सवाल किया है कि फंड कहाँ से आया और किस नेता ने पकड़े गए शख्स को पैसा दिया?

इसके अलावा, माना जा रहा है कि वाहन से पैसे बरामद होने के बाद अब विभाग के रडार पर कई स्थानीय नेता है, जिनसे पिछले कुछ दिनों में हुई संदिग्ध लेन-देन को लेकर पूछताछ होगी। गोहिल ने तो अपने बयान में कहा है कि कंपाउंड के बाहर एक वाहन से पैसे बरामद होने के बाद उन्होंने (आईटी टीम) नोटिस दिया है। कंपाउंड के अंदर कोई पैसा बरामद नहीं हुआ। इस पूरी जाँच में वह सहयोग करेंगे।

बता दें कि युवा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष केशव चंद यादव ने इस छापे की निंदा की हैं। उन्होंने लिखा, “कोरोना पर जिस प्रकार से भाजपा राजनीति कर रही है, यह अप्रत्यक्ष रूप से बिहार की जनता को रिश्वत है। बिहार क्रांतिकारियों की भूमि है और देश को एक नई दिशा देने का काम किया है। चुनाव में जुमलेबाज नरेंद्र मोदी और जनादेश का अपमान करने वाले नितीश कुमार को जनता उखाड़ फेंकने का काम करेगी।”

आगे केशव ने लिखा, “पार्टी के बिहार मुख्यालय पर आयकर विभाग द्वारा रेड करना अत्यंत निदंनीय है। भाजपा-जदयू अपनी हार को नजदीक आते देख सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनाने जा रही है।”

कौन से पंडित.. दरिंदे हैं साले: एजाज खान के ‘जहरीले’ Video पर लोगों ने की गिरफ्तारी की माँग

विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले एजाज खान की आज सोशल मीडिया पर एक और Video सामने आई है। Video में एजाज खान पंडितों को गाली देता नजर आ रहा है। इस जहरीले Video के वायरल होने के बाद ट्विटर पर #अरेस्ट_मुल्ला_एजाज भी ट्रेंड हो रहा है।

इस हैशटैग के साथ ही, भाजपा नेता कपिल मिश्रा से लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल समेत सैंकड़ों लोग एजाज की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। हालाँकि बता दें कि यह वीडियो हाल की नहीं है। एजाज ने अपने यूट्यूब अकॉउंट पर इसे पिछले साल 8 सितंबर 2019 को अपलोड किया था।

इस वीडियो में वह दिल्ली के एक युवक साहिल की हत्या पर अपनी बात रख रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे वो साहिल की मौत को आधार बनाकर पंडितों को हत्यारा बताने की कोशिश कर रहा है और कहते सुना जा सकता है कि साहिल अपने दोस्तों का झगड़ा निबटाने के लिए पंडितों की गली में गया और वहाँ उसकी लिंचिंग कर दी गई।

अपनी वीडियो में एजाज ने हर तरह से यह बताने की कोशिश की कि साहिल को मुस्लिम समझकर मारा गया। वीडियो के आखिर में उसे कहते सुना गया:

“ये सारे पंडितों की पूरी गली को इतना मारो और इनको जेल में डालो। कौन से पंडित? ये दरिंदे हैं साले। बल्कि सारे हिंदुस्तान के पंडितों को इनको अंदर करवाना चाहिए। इन्होंने पंडितों का नाम भी खराब किया है। पंडितों की जाति का नाम खराब किया है। ब्राह्मणों की जाति का नाम खराब किया है। अब तो ऐसा हो गया है कि पंडित भी मॉब लिंचिंग कर रहे हैं। मतलब ब्राह्मण पंडित भी मॉब लिंचिंग में आ गए हैं। क्या बात है यार! कमाल हो गया।”

अब यहाँ बता दें कि इस वीडियो में जिस साहिल को मॉब लिंचिंग का शिकार बताकर एजाज पंडित व ब्राह्मणों को दोषी बता रहा है, उसकी मौत मॉब लिंचिंग में नहीं, बल्कि दो लोगों के साथ मोटरसाइकिल को रास्ता न देने की वजह से हाथापाई में हुई थी। इस दौरान वो जख्मी हो गया था और फिर घर जाने के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।

पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकरे ने इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि अगस्त 30, 2019 की घटना है। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया, जिसमें से एक नाबालिग है। साथ ही पुलिस ने तब इस मामले में किसी भी तरह की सांप्रदायिक एंगल न होने की बात कही थी। एजाज खान की तरह वामपंथी गिरोह के लोगों ने इस केस में मॉब लिंचिंग एंगल के साथ खूब प्रोपगेंडा भुनाया था।

अब एजाज की यह वीडियो वायरल होने के बाद एजाज खान की गिरफ्तारी की माँग हो रही है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने लिखा, “जो एजाज खान ने बोला है उसके बाद माफी संभव नहीं लोगों में भयानक गुस्सा है, तुरन्त उसके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्यवाही ही एकमात्र विकल्प आशा करता हूँ। राज्य सरकार और कानून व्यवस्था संभालने वाले इसकी गंभीरता को जल्दी समझ लेंगे।”

प्रशांत पटेल #अरेस्ट_मुल्ला_एजाज को अपना समर्थन देते हुए कहते हैं कि एजाज को शरीया के मुताबिक सबक सिखाना चाहिए।

ट्विटर यूजर्स का कहना है कि एजाज खान की गिरफ्तारी जल्द से जल्द होनी चाहिए, ताकि उसे सबक सिखाया जा सके। यूजर अपनी वीडियो जारी करके कह रहे हैं कि एजाज खान ने जो पंडित ब्राह्मणों का अपमान किया है, वह उसके लिए माफी माँगे।

‘सनातन वुमन’ नाम की यूजर ने सवाल पूछा है कि अगर ऐसी ही वीडियो कोई पंडित की जगह मौलाना कहते हुए लगा दे तो क्या सेकुलर समाज उसे स्वीकारेगा। वह लिखती हैं, हमारे संयम की परीक्षा मत लो। माँ दुर्गा के सौ करोड़ श्रद्धालु जानते हैं कि ऐसे असुरों को कैसे खत्म करना है।

कुछ लोग इसे हिंदुओं के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने वाली वीडियो बता रहे हैं और कह रहे हैं कि हो सकता है ऐसी ही लोग पालघर साधु लिंचिंग के पीछे रहे हो। ये मुस्लिम समुदाय को हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़का रहा है।

राहुल गाँधी को लद्दाख आना चाहिए था, हम भी उनके चुटकुलों पर हँस लेते: BJP सांसद नामग्याल

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी पर निशाना साधा है। लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव को लेकर भाजपा सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गाँधी को चुनाव प्रचार में जरूर आना चाहिए था। इससे लेह के लोगों को चुटकुले सुनकर हँसने का मौका मिल जाता।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार नामग्याल ने कहा, “मैं अनुरोध करता हूँ कि कॉन्ग्रेस को लद्दाख में राहुल गाँधी (चुनाव प्रचार के लिए) को लाना चाहिए था। हमारे लोग भी थोड़ा चुटकुले सुनते, हँसते-खिलखिलाते। नहीं ला पाए। अफसोस की बात है। उन्हें (कॉन्ग्रेस) सोनिया गाँधी को भी लेह भी लाना चाहिए था, हम सुनना चाहते थे कि मैडम जी के क्या विचार हैं?”

वह आगे कहते हैं, “हम भी उनके मुँह से सुनना चाहते हैं कि 70 वर्षों में लद्दाख को एक केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा न दिला पाने के बारे में उनके पास बोलने के लिए क्या बचा है।”

वह कहते हैं कि जब गुलाब नबी आजाद ने 8 जिले बनाए तब भी लद्दाख को एक भी जिला नहीं दिया। यूटी का दर्जा कैसे देते। कॉन्ग्रेस पार्टी के पास न लाने की क्षमता है, न वह लेकर आ सकते हैं और लाने का कोई फायदा है। भाजपा ने जनता को संदेश दिया कि वह लद्दाख के साथ हैं। यहाँ के लोगों के साथ हैं। अलग अलग मंत्रियों ने यहाँ आकर गाँव-गाँव जाकर केवल चुनाव प्रचार नहीं किया बल्कि गाँव के हालात देखे, लोगों की मानसिकता जानने की कोशिश की, इसलिए भाजपा यहाँ अपने नेताओं को ला पाई। वह यहाँ के हालातों को जानेंगे और उनकी बात भी रखेंगे।

पिछले साल लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) घोषित होने के बाद वहाँ पहली बार यह चुनाव हो रहा है। उल्लेखनीय है कि लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की 26 सीटों पर आज सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हुए थे, जो शाम चार बजे तक चले। वहाँ कुल 94 उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला 89776 मतदाता करेंगे। मतगणना 26 को होगी और उसी दिन परिणाम भी आ जाएँगे। 

नवरात्र के अपमान पर Eros Now के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, क्षमा माँगने से भी लोगों का गुस्सा नहीं हुआ शांत

हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले इरोज नाउ (Eros Now) को किसी भी कीमत पर लोग माफ करने को तैयार नहीं है। क्षमा पत्र जारी करने के बावजूद सोशल मीडिया पर कई ऐसी FIR की कॉपी देखने को मिल रही हैं जिसमें इरोज नाउ के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज है।

मुंबई में भाजपा प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने Eros Now के ख़िलाफ़ दर्ज शिकायत की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “साइबर अपराध और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के संबंध में इरोज नाउ और प्रोड्यूसर क्रिशिका लुल्ला के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की। बहुत जल्द इसका फॉलो अप भी किया जाएगा।”

इससे पहले सुरेश ने इरोज नाउ को कहा था कि वह लगातार हिंदुओं की भावनाओं को आहत कर रहे हैं। अब जल्द ही कोर्ट में मुलाकात होगी।

इसी तरह वकील चांदनी शाह ने भी हिंदुओं की भावना आहत करने के मामले में शिकायत करवाई है। अपने ट्विटर पर उन्होंने बताया, “जैसा कि मैंने वादा किया था, मैंने आईटी एक्ट की धारा 67 (ए) के साथ आईपीसी की 153 (ए), 295 (ए), 504, 505, 506 में शिकायत दर्ज की है।” उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि उन्होंने @ArreTweets, @Arresai, @sharan_saikumar, http://arre.co.in पर शिकायत करवाई है।

गौरतलब है कि इरोज नाउ ने हिंदुओं के पवित्र पर्व नवरात्रि पर आपत्तिजनक तस्वीरें साझा करने के लिए इससे पहले आज सुबह क्षमा पत्र जारी किया था। उन्होंने लिखा था कि वह हर धर्म संस्कृति का बराबर सम्मान करते हैं, उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था।

बता दें कि नवरात्र के मौके पर इरोज नाउ ने इस तरह की कई तस्वीरें साझा की थीं, जो सांस्कृतिक त्योहार के दृष्टिकोण से आपत्तिजनक थीं और हिन्दू पर्व का अपमान करते थे। जबकि अन्य मज़हब के त्यौहारों पर यही इरोज नाउ ने बेहद धर्म निरपेक्ष तरीके से शुभकामनाएँ दी थीं। 

इसी दोहरे रवैये को देखते हुए ट्विटर पर सुबह से #BoycottErosNow ट्रेंड कर रहा था। कई नामी हस्तियों ने इसे शेयर किया था। लोग लगातारआपत्तिजनक तस्वीरें शेयर करते हुए पूछ रहे थे कि क्या जैसा इरोज नाऊ ने नवरात्रि के लिए किया, क्या वैसे ही शुभकामनाएँ किसी और मजहब के त्योहार पर दे सकता है? इसके अलावा क्षमा पत्र के बाद दर्ज हुई हालिया शिकायतें भी इसी ओर इशारा करती हैं कि सोशल मीडिया पर लोग अब ऐसे घटिया प्रयोगों को फैलने से रोकने के लिए अग्रसर हैं, ताकि हिंदुओं के त्योहारों का मजाक बनाकर चर्चा में आने वालों को सबक मिल सके।

UP: पुलिस ने 200 लोगों के बौद्ध बनने की खबर बताई फर्जी, सरकारी योजना के कागज को कहा धर्मांतरण का सर्टिफिकेट

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ख़िलाफ़ चल रही एक और बड़ी साजिश से पर्दा उठा है। हाल में कुछ रिपोर्ट्स आई थीं कि वाल्मिकी समुदाय के लोगों ने आर्थिक तंगी व उत्पीड़न के कारण बौद्ध धर्म अपना लिया। यह भी दावा किया गया कि हाथरस की घटना के बाद गाजियाबाद में इस घटना के विरोध में कथित दलित समुदाय के तकरीबन 200 से ज्यादा लोगों ने धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म अपना लिया। अब इसी मामले में ताजा खुलासे से पता चला है कि यह सब मात्र उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के ख़िलाफ़ एक साजिश थी।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में धर्मांतरण की खबरें आने के बाद एक स्थानीय भाजपा नेता ने इस खबर को फेक न्यूज करार दिया, जिसके बाद प्रशासन ने अपनी जाँच शुरू की। पड़ताल में पता चला कि पूरा केस ही झूठा है और कहीं भी किसी प्रकार के धर्मांतरण के सबूत नहीं मिले। इसके अलावा, किसी तरह का कोई सर्टिफिकेट, पंजीकरण नंबर आदि भी जाँच के दौरान नहीं मिला है जिससे धर्म परिवर्तन की खबर सही साबित होती।

धर्म परिवर्तन मामला

खबरों में दावा किया गया था कि 14 अक्टूबर को आर्थिक तंगी व उत्पीड़न से तंग आकर 50 दलित परिवारों के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि यह मामला साहिबाबाद पुलिस थाने के करेरा गाँव का है, जहाँ लोगों को धर्म परिवर्तन के बाद सर्टिफिकेट भी दिए गए।

इस संबंध में एक स्थानीय व्यक्ति मोंटू वाल्मिकी ने पुलिस थाने में शिकायत करवाई थी। अपनी शिकायत में मोंटू ने कहा था कि धर्मांतरण की पूरी कहानी केवल समाज में अशांति फैलाने के लिए गढ़ी गई। जब पुलिस ने इस मामले में जाँच की तो आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ और यह भी पता चला कि लोगों को सरकारी योजनाओं के बहाने कागज प्रस्तुत किए गए थे और बाद में उन्हें ही धर्मांतरण के कागज कह दिया गया।

पुलिस की जाँच रिपोर्ट

सिटी एडीएम शैलेंद्र सिंह ने एसपी के साथ इलाके के निरीक्षण में धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं पाया। अपनी जाँच रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि उन्हें कोई धर्म परिवर्तन के सबूत नहीं मिले और न ही कोई पंजीकरण नंबर मिला।

एसपी सिटी ने बताया कि जो नाम और नंबर दिखाए गए वह मैच नहीं करते थे और कुछ लोगों ने तो उन्हें खाली पन्ना तक दिखाया। उन्होंने कहा कि उन्हें वाल्मीकि समुदाय के लोगों से एक ज्ञापन जरूर मिला था, और अब उनकी समस्याओं को जल्द सुना जाएगा।

भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर लगाए आरोप

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र में गंदी राजनीति का इल्जाम आम आदमी पार्टी पर लगाया है। भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि इलाके में कोई धर्मांतरण नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ISI और दाऊद इब्राहिम के बीच सांठगांठ देश में अस्थिरता और सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन के लिए पवन नामक व्यक्ति को 10 लाख रुपए का भुगतान किया गया था।

यहाँ बता दें कि मीडिया में धर्म परिवर्तन की यह खबर आने के बाद वामपंथी गिरोह ने बड़ी तेजी से इसे आगे बढ़ाया। सत्यहिंदी के सह संस्थापक व पूर्व AAP नेता आशुतोष ने समाचार पत्र की कटिंग शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें उम्मीद है इसे आरएसएस पढ़ रही होगी। आशुतोष ने ट्वीट में लिखा कि योगी सरकार और यूपी में भाजपा के लिए गंभीर आत्मनिरीक्षण की जरूरत है।

मोदी सरकार सिर्फ बिहार को देगी मुफ्त कोरोना वैक्सीन? जानिए क्या है सच्चाई

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का घोषणा पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि जैसे ही कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार हो जाएगी वैसे ही उसका वितरण बिहार के लोगों में होगा और वह भी मुफ्त। लोगों ने दावा किया है कि मोदी सरकार सिर्फ बिहार को ही मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराएगी।

लेकिन वित्त मंत्री द्वारा जारी किया गया बयान बहुतों की समझ के दायरे से कोसों दूर था। इसके अलावा, बहुत से लोगों ने इसे निर्दयी फैसला बताया क्योंकि इसके तहत कथित तौर पर सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। 

अपना प्रलाप जारी रखते हुए इन्हीं लोगों ने कहा कि ऐसे में पीएम केयर्स फंड की क्या उपयोगिता है?

जैसा कि पत्रकार महोदया को इस संबंध में जानकारी नहीं थी और वह ऐसे अहम मामलों की जानकारी रखती भी नहीं होंगी, भारत में वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया पीएम केयर्स फंड की मदद से ही की जा रही है। 

इसके बाद कॉन्ग्रेस समर्थक ट्रॉल्स की कल्पनाएँ भी हवा से बातें करने लगी और उनका आदतन प्रलाप शुरू हो गया। उनका कहना था कि क्या चुनाव के समयानुसार वैक्सीन की उपलब्धता तय होगी। 

इसी तरह अन्य ट्रॉल्स ने गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आम नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात कही।

हालाँकि यह मसला है भी नहीं, भारत में टीकाकरण कुछ इस तरह काम करता है: 

राज्य सरकार का विषय है टीकाकरण

भारतीय जनता पार्टी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने इस बात की जानकारी ट्विटर पर साझा की। उन्होंने बताया कि कोरोना का टीका उपलब्ध कराना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है –

उन्होंने बताया कि अन्य रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी योजनाओं की तरह भारत सरकार राज्य सरकारों को कम से कम दामों पर टीका उपलब्ध कराएगी। इस दायरे में भाजपा शासित और गैर भाजपा शासित दोनों तरह के राज्य आते हैं इसलिए यह राज्य सरकार की मर्ज़ी है कि वह वैक्सीन के लिए रुपए लेते हैं या नहीं। टीका (वैक्सीन) राज्य सरकार का विषय है इसलिए भाजपा सरकार ने घोषणा पत्र में वादा किया है कि सरकार बनाने पर राज्य के लोगों को मुफ्त में टीका उपलब्ध कराएँगे। ठीक इसी तरह गैर भाजपा शासित प्रदेश जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल यह निर्णय लेने के लिए स्वच्छंद हैं कि वह अपने नागरिकों को मुफ्त में टीका देना चाहते हैं या नहीं। 

इस तुलना लॉकडाउन के दौरान चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेन से भी की जा सकती है जो मजदूरों के लिए शुरू की गई थी और इसके ज़रिए मजदूर घर जा सकते थे। भारतीय रेलवे ने इस योजना के तहत ट्रेन चलाने के लिए राज्य सरकारों से कम से कम रुपए लिए थे। यह राज्य सरकारों पर निर्भर करता था कि वह श्रमिक ट्रेन से आने वाले मजदूरों से किस हद तक कीमत वसूलते थे। इसका मतलब यह है कि चुनाव के चलते बिहार को किसी तरह का विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों को कम से कम दामों पर वैक्सीन उपलब्ध कराएगी, इसके बाद यह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है कि वह इसके लिए कोई कीमत वसूलना चाहते हैं या नहीं।           

कुणाल कामरा का फैन है अ#ह के नाम पर सर कलम करते रहने की धमकी देने वाला नदीम सैयद

पेरिस में इस्लामी कट्टरपंथ का शिकार हुए इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को आज पूरा फ्रांस श्रद्धांजलि दे रहा है। देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी घटना के बाद साफ संदेश दिया है कि वह इस्लामी कट्टरता के सामने नहीं झुकेंगे। लेकिन इसके जवाब में नदीम सैयद ने कहा है कि वो अल्लाह के नाम पर सर कलम करते रहेंगे। नदीम के सोशल मीडिया इतिहास से पता चलता है कि वो कुनाल कामरा का भी फैन है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 22 अक्टूबर को ट्वीट करते हुए कहा– “हम नहीं रुकेंगे प्रोफ़ेसर (We will continue, professor)”। उनके इस ट्वीट पर देश विदेश से सैंकड़ों प्रतिक्रियाएँ आईं। इनमें कुछ कट्टरपंथियों की भी थी और कई भारतीय भी शामिल थे। इन्हीं में से एक नाम निकल कर आया नदीम सैयद।

नदीम सैयद, भारत से भी है और उन लोगों में भी शामिल है जिन्होंने ट्वीट पर अपनी कट्टर मानसिकता का परिचय दिया। इसने फ्रांस राष्ट्रपति के ट्वीट के जवाब में लिखा, “इंशाअल्लाह, हम सर कलम करते रहेंगे। (We will continue to behead, God willing)”

इस ट्वीट को देखने के बाद कई लोग हैरान रह गए और सक्रिय ट्विटर यूजर्स ने इसकी जानकारी जुटानी शुरू की। BefittingFacts नाम से ट्विटर यूजर ने नदीम सैयद की प्रोफाइल देखते हुए पाया कि ये नदीम सैयद जो पैगंबर का अपमान करने वालों के सिर कलम करने की धमकियाँ सरेआम दे रहा है, वह तो कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा का फैन है। 

जी हाँ, नदीम ने इसी साल जून में कुणाल की क्लिप शेयर करते हुए लिखा था, “मेरा पसंदीदा” इस कैप्शन के साथ उसने तीन हँसने वाले इमोजी भी लगाए थे।

अब इसी कुणाल कामरा के फैन का रिप्लाई (जो फ्रांस राष्ट्रपति के ट्वीट पर दिया) वायरल होने लगा है। नदीम सैयद ने लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद अपनी प्रोफाइल भी डिसेबल कर ली है। लेकिन, सोशल मीडिया पर नदीम को लेकर व उसके कुणाल कामरा के फैन लिस्ट में शामिल होने पर लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, “देश कोई भी हो पर इन शांतिदूतों की सोच एक ही होती है।”

एक यूजर का कुणाल कामरा जैसे लोगों से पूछना है कि क्या नदीम सैयद इस्लाम का समर्थक ही है? क्योंकि उसके मुताबिक तो इस्लाम शांति का मजहब है और नदीम ने उसे गलत साबित कर दिया।

बता दें कि वामपंथी प्रोपगेंडाबाजों के प्रति ऐसे कट्टरपंथियों का झुकाव समय समय पर देखने को मिलता रहता है। पिछले दिनों हमने देखा था कि हिंदू देवी देवताओं को गाली देने वाली हीर खान रवीश कुमार, अभिसार शर्मा और पुण्य प्रसून्न वाजपेयी की कट्टर समर्थक थी। वह अपने दर्शकों से अपील भी करती थी कि जाकर इन पत्रकारों को फॉलो करें। हालाँकि, यह कहना सम्भव नहीं होगा कि ऐसे लोगों के आदर्श क्या इन्हें इस कट्टरता के लिए प्रेरित करते हैं या फ्री ये लोग स्व-प्रेरणा से ऐसा फैसला लेते हैं।

Video: मजार के अंदर सेक्स रैकेट, नासिर उर्फ़ काले बाबा को लोगों ने रंगे-हाथ पकड़ा

लखनऊ में एक चौंकाने वाली घटना में मजार के एक संरक्षक काले बाबा उर्फ़ नासिर को एक सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ‘एशिया नेट न्यूज़’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके के हुसैनाबाद में स्थित जामा मजार के केयर टेकर ‘काले बाबा’ कथित तौर पर इलाज के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण करता था और देह व्यापार का धंधा भी चलाता था।

सोशल मीडिया पर नासिर उर्फ़ काले बाबा के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिनमें मजार के अंदर बने कमरे में एक महिला और पुरुष को आपत्तिजनक हालत में देखा जा सकता है। यह खुलासा होने पर मौके पर जमा हुई भीड़ नासिर उर्फ़ काले बाबा को मजार से बाहर घसीट लाई और पिटाई के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया।

जाँच में पता चला कि आरोपित नासिर उर्फ काले बाबा नाम का व्यक्ति मजार में लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चला रहा था। स्थानीय लोगों को बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) सुबह उस पर शक हुआ तो वह कमरे में गए। वहाँ देखा कि एक महिला और युवक आपत्तिजनक हालत में लिप्त थे। जिसका वीडियो भी बनाया गया है।

नोट : इस वीडियो में अश्लील दृश्य शामिल हैं, सिर्फ वयस्क ही इसे देखें

काले बाबा इलाज के नाम पर करता था शोषण

रिपोर्ट्स के अनुसार, लोगों ने बताया कि आरोपित नासिर उर्फ़ काले बाबा महिलाओं को इलाज के नाम पर अपने पास बुलाता था और फिर उनके सफेद दाग या बच्चे न होने की समस्या का इलाज करने का दावा करता था। इसी की आड़ में वह महिलाओं से जिस्म का धंधा भी करवाता आया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से उन्हें मजार के अंदर गलत काम होने की शिकायतें मिल रही थी, जिसके बाद अचानक लोग मजार में घुस गए। एसीपी चौक आईपी सिंह ने बताया कि मजार संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जा रहा है।

शिया विरोधी दंगों की खबर ट्वीट करने पर ट्विटर ने दिया भारतीय सम्पादक को ‘पाकिस्तानी कानून’ वाला नोटिस

माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर विचारधारा को लेकर उसके पूर्वग्रह के कारण अनेकों बार आरोप लगते आए हैं। इस बार ट्विटर ने दक्षिणपंथी पोर्टल ‘ऑर्गनाइज़र’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर की एक रिपोर्ट पर यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि यह पाकिस्तानी कानून का उलंघन करती है।

दरअसल, ‘ऑर्गनाइज़र’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने ट्विटर पर पाकिस्तान में शिया समुदाय के विरोध में सुन्नी समुदाय के प्रदर्शन से सम्बन्धित एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस पर प्रफुल्ल केतकर ने एक ट्वीट करते हुए बताया – “दोस्तों, ट्विटर ने मुझे पाकिस्तान में सुन्नियों का शियाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की ‘ऑर्गनाइजर’ की एक तथ्यों पर आधारित कहानी शेयर करने के लिए नोटिस भेजा है। ट्विटर का दावा है कि इसने पाकिस्तान के कानून का उलंघन किया है। खुद देखिए और ट्विटर के पूर्वग्रहों पर विचार करिए।”

प्रफुल्ल केतकर ने ऑर्गनाइजर की जो रिपोर्ट शेयर की थी उसका शीर्षक था- “काफिर काफिर शिया काफिर, पाकिस्तान में शिया (समुदाय) का उत्पीड़न जारी है।”

यह रिपोर्ट सितम्बर माह में पाकिस्तान में भड़के शिया विरोधी प्रदर्शनों के सम्बन्ध में है। दरअसल, पाकिस्तान के कराची में हजारों लोग शिया-विरोधी प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए थे। सोशल मीडिया पर लोग इससे जुड़े पोस्ट, फोटो और वीडियो शेयर कर रहे थे। इस दौरान ‘शिया काफिर हैं’ के नारे बुलंद किए गए और आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के बैनर लहराए गए। यह संगठन शियाओं की हत्या के लिए ही कुख्यात है।

ऐसे में ट्विटर का एक भारत के नागरिक को पाकिस्तान के नियमों का हवाला देना ट्विटर की कार्यशैली के साथ ही उनकी मंशा पर भी सवाल खड़े करता है। यह ऐसा ही है जैसे स्विट्जरलैंड के कई इलाकों में रात के दस बजने के बाद टॉयलेट में फ्लश करना गैरकानूनी है और यदि भारत में बैठा कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसे स्विट्जरलैंड के इस कानून का हवाला देकर धमकाया जा रहा हो।

नया नहीं है ट्विटर का दक्षिणपंथ के प्रति पूर्वग्रह

ट्विटर पर ऐसे आरोप कई बार लगते आए हैं जब उन्होंने किसी मजहब विशेष के लिए दक्षिणपंथियों को निशाना बनाया हो। हाल ही में ट्विटर ने लेह की ‘जियो लोकेशन’ जम्मू कश्मीर, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना में दिखाई थी। यही नहीं, पेरिस में शिक्षक की गला काटकर हत्या करने की घटना की निंदा करने पर ट्विटर ने एक दक्षिणपंथी अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया। ट्विटर ने उसे हेट स्पीच करार दिया था।