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पाकिस्तान में महँगाई की मार, आटे के लिए मची हाहाकार: 3 दिन से भूखे व्यक्ति ने रो-रोकर सुनाया दुखड़ा, वीडियो वायरल

पाकिस्तान में महँगाई का असर साफ दिख रहा है। गिरती अर्थव्यवस्था से पहले से ही चरमराया पाकिस्तान अब कमरतोड़ महँगाई को लेकर सुर्खियों में है। यहाँ पर महँगाई कुछ इस कदर है कि लोगों में मूलभूत खाने-पीने की चीजों को लेकर भी हाहाकार मचा हुआ है।

सब्जियाँ तो दूर, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान के कई हिस्सों में आटा 75 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है। कई जगहों पर तो आटे की किल्लत के कारण कुछ ही दुकानों पर आटा उपलब्ध होने की वजह से दुकानों पर लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं। 

इसी दौरान एक शख्स आटा नहीं मिलने के कारण इतना दुखी और निराश हो गया कि वह अपना सिर पीट-पीट कर रोने लगा। जब मीडिया उसे कवर करने पहुँची तो उसने मीडिया के कैमरे के सामने अपना रोना-गाना शुरू कर दिया और इमरान खान सरकार को कोसते हुए अपने दुखड़े सुनाने शुरू कर दिए।

दरअसल, एक व्यक्ति 3 दिनों से आटे के लिए तरस रहा था लेकिन उसे कहीं आटा नहीं मिला अंत में वह बेचारा रोने लगा। उसने वायरल वीडियो में बताया कि उसने व उसके परिवार बच्चों ने 3 दिनों से खाना नहीं खाया है। उसने बताया कि अपने बच्चों के कारण 3 दिनों से दौड़ रहा है पर उसे कहीं आटा नहीं मिल रहा है। 

वीडियो में वह व्यक्ति रोते हुए कहता है, “मैं अपने बच्‍चों के लिए तीन दिनों से दौड़ रहा हूँ लेकिन आटा नहीं मिल रहा है। 15 रुपए में एक रोटी मिल रही है। हम गरीब लोग कहाँ जाएँ, कहाँ से खाएँ। आटे के लिए इतना पैसा कहाँ से दूँ, दवाइयाँ कहाँ से खरीदूँ। हम सूखी रोटी भी खाने को तैयार हैं लेकिन वह भी नहीं मिल रही है। 3 दिन से मारा मारा फिर रहा हूँ आटे के पीछे।”

महँगाई के खिलाफ देश के अलग-अलग कोनों में विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। गले तक कर्ज में डूबे पाकिस्तान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भ्रष्टाचार और कुशासन की वजह से इमरान सरकार से तंग आ चुकी जनता अब भूख से बिलबिला रही है। पड़ोसी देश में इन दिनों महँगाई चरम पर है। खाने-पीने की चीजें हद से ज्यादा महँगी हो गई हैं। आलम यह है कि गेहूँ की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। पाकिस्तान में एक किलो गेहूँ के लिए लोगों को 60 से 75 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

पाकिस्तान में महँगाई का इस कदर बेकाबू होना यूँ तो नई बात नहीं है, लेकिन इस बार बात अलग है। पाकिस्तान में इस समय इस तरह महँगाई बढ़ना इमरान खान को बेचैन इसलिए कर रहा है क्योंकि विपक्ष ने पहले ही महागठबंधन बनाकर सेना और इमरान खान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी महीने से व्यवस्था परिवर्तन के लिए देशव्यापी आंदोलन किए जाने हैं। माना जा रहा है कि महँगाई से बेचैन जनता विपक्ष के साथ सड़कों पर उतर सकती है।

मिलिए उससे जिसने बनाया था Tanishq का ‘सेक्युलर’ वीडियो: शरजील इमाम की समर्थक, करती हैं CAA का विरोध

टाटा समूह की ‘Titan’ की सब्सिडियरी कम्पनी ‘Tanishq’ द्वारा ‘लव जिहाद’ का महिमामंडन करने वाले विज्ञापन वीडियो को लेकर अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस वीडियो को “Culture Film Company” नामक प्रोडक्शन हाउस ने बनाया था। इस कम्पनी का स्वामित्व जोइता पटपटिया (Joyeeta Patpatia) के पास है। साथ ही इस विज्ञापन वीडियो का निर्देशन भी उन्होंने ही किया था।

अब जोइता पटपटिया (Joyeeta Patpatia) के सोशल मीडिया हैंडल्स से जो स्क्रीनशॉट्स सामने आ रहे हैं, उससे पता चलता है कि वो न सिर्फ सीएए की विरोधी हैं बल्कि देश को खंडित करने की धमकी देने वाले शरजील इमाम की फैन भी हैं। साथ ही वो ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग के लोगों की प्रशंसा करते हुए भी पाई जाती हैं। उन्होंने मार्च 2020 में ‘The Quint’ का वीडियो ‘सब याद रखा जाएगा’ भी शेयर किया था।

सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जोइता पटपटिया (Joyeeta Patpatia) ने प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें शेयर करते हुए ‘No CAA’ और ‘No NRC’ के ट्रेंड के साथ फेसबुक पर पोस्ट किए थे। उन्होंने इन विरोध प्रदर्शनों को मानवता की एकता करार दिया था। ‘Tanishq’ के वीडियो को लेकर भी उन्होंने कहा कि इसे काफी प्यार से बनाया गया है और इसमें जरा भी घृणा नहीं है। हालाँकि, अब उनके खिलाफ भी सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया है।

वहीं विरोध के बाद ‘Tanishq’ द्वारा इस विज्ञापन वीडियो को हटाए जाने को लेकर भी उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरीज के लिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। लोगों के बयानों को अपनी स्टोरीज में डालते हुए जोइता पटपटिया (Joyeeta Patpatia) ने लिखा है कि उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के पास कुछ अच्छा करने को नहीं है, वो इस वीडियो के खिलाफ घृणा फैला रहे हैं। उन्होंने इसके लिए ‘दक्षिणपंथी ट्रॉल्स’ को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ये उनलोगों ने इसके खिलाफ दुष्प्रचार किया।

जोइता ने किया था ‘Tanishq’ के विज्ञापन वीडियो का निर्देशक

अब जोइता अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर हर उस व्यक्ति का पोस्ट शेयर कर रही हैं, जो इस वीडियो की आलोचना करने वालों को भला-बुरा कह रहे हैं। उन्होंने एक स्टोरी शेयर की, जिसमें लिखा था कि ‘वो लोग’ ‘लव जिहाद’ देखते हैं लेकिन हमें ‘लव? जी हाँ’ दिखाई देता है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर इस वीडियो को ‘सेक्युलर इंडिया’ के टैग के साथ शेयर किया और लिखा कि ये उनका भारत है। विरोधियों को उन्होंने ‘ट्रॉल्स’ करार दिया।

बता दें कि ‘लव जिहाद’ की कई खबरों के बीच आए इस वीडियो में महिला को पारम्परिक साड़ी, बिंदी और गहने पहने हुए दिखाया गया है। हालाँकि, उसके साथ परिवार में जो अन्य लोग हैं, वो मुस्लिम हैं। उसके साथ जो बुजुर्ग महिला दिख रही है, उसने बिंदी भी नहीं लगाई है। परिवार के लोग गहनों से लदी हिन्दू महिला को सरप्राइज के लिए बगीचे में लेकर जा रहे होते हैं। बैकग्राउंड में दीपमालाएँ हैं और नटराज की प्रतिमा भी है। मुस्लिम परिवार को एकदम ‘सहिष्णु’ दिखाने का प्रयास किया गया है।

Tanishq के शोरूम पर हमला, NDTV ने चलाई ब्रेकिंग खबर… खुद IPS ऑफिसर ने जाँच कर बोला – ‘झूठी खबर चलाई गई’

आभूषण ब्रांड तनिष्क ने मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) को अपने उस विज्ञापन को वापस ले लिया, जिसमें दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोगों के एक परिवार को दिखाया गया था। तनिष्क ने सोशल मीडिया पर तीखे हमले किए जाने के बाद अपना विज्ञापन वापस ले लिया, जिसमें लोगों ने उस पर ‘लव जिहाद’ और ‘फर्जी धर्मनिरपेक्षता’ को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे।

कंपनी के इस कदम को लेकर सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर तीव्र बहस शुरू हो गई। तनिष्क ने अपने आभूषण संग्रह ‘एकत्वम’ को बढ़ावा देने के लिए विज्ञापन पिछले सप्ताह जारी किया था और तभी से इसे लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। 

इसके बाद वामपंथी मीडिया चैनल एनडीवी ने ब्रेकिंग चलाते हुए दावा किया कि विवाद के चलते गुजरात में तनिष्क के एक स्टोर पर हमला हुआ है। एनडीटीवी के मुताबिक, हमलावरों की भीड़ ने कथित तौर पर स्टोर मैनेजर को माफी पत्र लिखने के लिए कहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क स्टोर पर हमला हुआ है। हमला होने के बाद स्टोर मैनेजर के माफी पत्र में कथित तौर पर सेक्युलर विज्ञापन प्रसारित करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए कच्छ जिले के लोगों से माफी माँगवाई गई।

हालाँकि कच्छ के IPS ऑफिसर ने इस खबर का पूरी तरह से खंडन किया। उन्होंने इस खबर को प्रोपेगेंडा के तहत चलाई जाने वाली खबर बताया। उन्होंने कहा, “मीडिया चैनल दिखा रहे हैं कि तनिष्क शॉप पर हमला हुई है, दंगा हुआ है या चोरी हुआ है, तो ये यब गलत न्यूज है, फेक न्यूज है। ये एक प्रोपेगेंडा के हिसाब से चल रहा है। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।” उन्होंने बताया कि शोरूम के मालिक भी इस बारे में बात करना चाहते हैं।

तनिष्क के विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया था। 

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

हाथरस केस में मृतका के परिवार और गवाहों को दी गई थ्री लेयर सुरक्षा, लगाए गए CCTV: योगी सरकार का SC में हलफनामा

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित युवती से कथित गैंगरेप और मौत मामले में यूपी की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है। अपने हलफनामे में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि पीड़िता के परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थ्री लेयर की सुरक्षा मुहैया कराई गई है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पीड़िता के परिवार और गवाहों के संरक्षण के प्रयासों पर जवाब दाखिल करने को कहा था। कोर्ट ने सरकार को कहा था कि वो गवाहों की सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर डिटेल रिपोर्ट फाइल करें।

अपने हलफनामे में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके साथ ही सरकार ने बताया कि उन्होंने गाँव में सीसीटीवी लगवाए हैं ताकि कड़ी निगरानी रखी जा सके और मृतक पीड़िता के परिवार को सुरक्षा प्रदान की जा सके। 

राज्य सरकार ने हलफनामे में यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने पीड़ित परिवार के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए गाँव में पुलिस कर्मियों को तैनात किया है। हलफनामे में कहा गया है कि पीड़ित परिवार की महिला सदस्यों की सुरक्षा के लिए गाँव में महिला पुलिस की भी एक टीम तैनात की गई है। साथ ही योगी आदित्‍यनाथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वो सर्वोच्‍च न्‍यायालय सीबीआई जाँच की निगरानी करें।

पिछली सुनवाई में प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध एक जनहित याचिका की प्रतिक्रिया में प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय से हाथरस मामले में सीबीआई जाँच का निर्देश देने का अनुरोध किया था। साथ ही अदालत से हाथरस कांड की जाँच पर 15 दिनों की स्थिति रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करने के लिए सीबीआई को निर्देश देने के लिए कहा था। इसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यूपी डीजीपी द्वारा दायर किया जा सकता है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने हाथरस मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली है और मामला भी दर्ज कर लिया है।

हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले में सीबीआई ने पहले दिन मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) को घटनास्थल का मुआयना किया था और सबूत जुटाए थे। टीम ने पीड़ित परिवार के लोगों से भी पूछताछ की थी। इस दौरान सीबीआई की टीम पीड़िता के भाई को साथ लेकर अज्ञात स्थल पर गई। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में बताया गया था कि पीड़िता के भाई के बयानों में कुछ असमानता पाए जाने के बाद सीबीआई ने कथित तौर पर यह निर्णय लिया।

उसके बयानों में असमानता के कारण ही सीबीआई ने पीड़िता के भाई से पूछताछ करने का फैसला किया। इससे पहले बताया गया CBI की टीम ‘नष्ट किए गए सबूतों’ को वापस लेने के लिए एक फोरेंसिक विशेषज्ञ टीम के साथ भी वहाँ गई थी। सीबीआई बुधवार (अक्टूबर 14, 2020) को फिर से पीड़ित परिवार से पूछताछ कर रही है। इसके लिए मृत पीड़िता के दोनों भाइयों और पिता को हाथरस में कृषि कार्यालय स्थित सीबीआई के अस्थाई कार्यालय में बुलाया गया है। 

महिला को आत्मदाह के लिए उकसाया: कॉन्ग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व राज्यपाल के बेटे को लखनऊ पुलिस ने लिया हिरासत में

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित विधानसभा के बाहर अंजना तिवारी नाम की महिला ने खुद के शरीर में आग लगा कर आत्मदाह की कोशिश की थी। अब इस मामले में कॉन्ग्रेस के ही एक नेता आलोक प्रसाद को हिरासत में लिया गया है। लखनऊ पुलिस ने कॉन्ग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व राज्यपाल सुखदेव प्रसाद के बेटे आलोक प्रसाद को हिरासत में लिया है। आरोप है कि मंगलवार (अक्टूबर 13, 2020) को आत्मदाह का प्रयास करने वाली महिला को UP कॉन्ग्रेस के SC विभाग के अध्यक्ष आलोक प्रसाद ने ही उकसाया था।

‘आजतक’ की खबर के अनुसार, पुलिस ने बुधवार की सुबह उनके आवास से ही आलोक प्रसाद को हिरासत में ले लिया। महिला ने उनके द्वारा उकसाए जाने के बाद खुद के ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डाल कर आग लगा ली और आत्मदाह का प्रयास किया। 35 वर्षीय महिला का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहाँ उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। आलोक के पिता सुखदेव प्रसाद राज्यपाल भी रहे थे।

महिला का आरोप है कि महाराजगंज के निवासी अखिलेश तिवारी से उसकी शादी हुई थी जिसके बाद तलाक हो गया। तत्पश्चात महिला ने धर्म परिवर्तन कर आसिफ नाम के युवक से शादी कर ली। बताया गया है कि शादी के बाद आसिफ सऊदी अरब चला गया। महिला ने आसिफ के परिजनों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। हाथरस मामले के बीच इस तरह की घटना का सामने आना चर्चा का विषय बन रहा है।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने ‘जय भीम’ का नारा देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दलित कॉन्ग्रेस के चेयरमैन आलोक प्रसाद जी को मध्य रात्रि बिना वारंट गिरफ़्तार करना निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए साजिशों का खेल कर रही है और लगातार दलितों-वंचितों का दमन कर रही है। उन्होंने कहा, “सीएम जान लें कि कॉन्ग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है।“

महिला का नाम अंजना तिवारी है। लेकिन, आसिफ के साथ निकाह के बाद उसने अपना नाम बदल कर आइसा रख लिया था। उसने विधानसभा के गेट पर खुद को आग लगाई। महिला ने जैसे ही खुद को आग लगाई, पुलिस ने जल्दी-जल्दी में वहाँ पहुँच कर उसे बचाया और अस्पताल में ले जाया गया। लखनऊ डीसीपी सेंट्रल सोमेन वर्मा का कहना है कि जाँच शुरू है और इस मामले की तह तक पुलिस पहुँचेगी।

पहले गुंडा अयान खान का, अब भू-माफिया का… मुंबई पुलिस थाने में केक खिला मनाती है बर्थडे, Video वायरल

पिछले दिनों सुशांत सिंह राजपूत समेत कई मामलों को लेकर विवादों से घिरने वाली महाराष्ट्र पुलिस का कथित तौर पर एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में पुलिस एक हिस्ट्रीशीटर का जन्मदिन मनाते दिख रही हैं।

मामला मुंबई से सटे वसई विरार के तुलिंज थाने का है। थाने में भूमाफिया के बर्थडे सेलीब्रेशन की वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल है। इसे न्यूज 24 ने अपने ट्विटर से शेयर भी किया है।

जानकारी के अनुसार, तुलिंज पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक डीएस पाटील के केबिन में सभी पुलिस स्टाफ के साथ सचिन गाला नाम के भूमाफिया का जन्मदिन मनाया गया। दिलचस्प बात यह है कि सचिन गाला नाम के इस भूमाफिया के ख़िलाफ़ इसी पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी के कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।

इसके अलावा इस संबंध में वसई और विरार शहर की महानगर पालिका द्वारा अवैध निर्माण को लेकर भी एमआरटीपी का नोटिस जारी किया गया है। हिस्ट्रीशीटर के ऊपर यह भी आरोप है कि उसने जानवरों के चारागाह के लिए महाराष्ट्र प्रशासन द्वारा आरक्षित जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर उस पर निर्माण कार्य करवाया है।

बता दें कि वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सचिन का जन्मदिन मनाने के वक्त वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक समेत पूरा पुलिस महकमा और कुछ अन्य लोग उनके केबिन में मौजूद हैं। वहीं पुलिस अधिकारी स्वयं आरोपित को उसके परिजनों की तरह केक खिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र पुलिस का ऐसा कारनाम पहली दफा सामने नहीं आया है। इससे पहले एक अन्य हिस्ट्रीशीटर अयान खान का जन्मदिवस भी भांडुप पुलिस थाने में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा पिछले वर्ष मनाया गया था। इस घटना में भी कई पुलिसकर्मी आरोपित को केक खिलाते नजर आए थे। हालाँकि बाद में इस वीडियो के आधार पर 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। इनके नाम कॉन्सटेबल सुभाष घोसलकार, अनिल गायकवाड, माररूति जुमाडे और सब इंस्पेक्टर पंकज शेवाले और सचिन कोक्रे हैं।

‘सरकारी पैसे से नहीं पढ़ाई जा सकती कुरान, अगर ऐसा है तो बाइबिल और गीता भी पढ़ाओ’ – हिमंत बिस्वा सरमा

असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य के सभी सरकारी मदरसों को बंद करने का निर्णय ‘समानता’ के लिए लिया गया है। असम सरकार ने सभी मदरसों को बंद कर के उन्हें नियमित स्कूलों में तब्दील कर दिया है, जिससे कई इस्लामी विचारधारा वाले लोग नाराज़ हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी पैसे से कुरान नहीं पढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है (सरकारी पैसों से कुरान पढ़ाया जाता है) तो फिर बाइबिल और भगवद्गीता भी पढ़ानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस चलन को खत्म कर के समानता लाने के लिए ये निर्णय लिया गया है। ‘ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF)’ के मुखिया और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा है कि राज्य की भाजपा सरकार ने जिन मदरसों को बंद कर दिया है, उनकी पार्टी की सरकार बनने पर उन सभी मदरसों को वापस बहाल किया जाएगा। कई पार्टियों ने सेकुलरिज्म की बातें करते हुए इस फैसले का विरोध किया है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने इस दौरान ‘लव जिहाद’ के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि मुस्लिम लड़के अक्सर खुद को हिन्दू दिखाते हैं और हिन्दू लड़कियों से शादी कर लेते हैं। उन्होंने इसे ‘किसी को विश्वास को धोखा देना’ करार दिया। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कई मुस्लिम लड़के हिन्दू नाम के साथ फेसबुक अकाउंट बनाते हैं और किसी मंदिर के साथ खुद की तस्वीर डालते हैं, ताकि किसी को लगे कि वो मुस्लिम हैं।

उन्होंने कहा कि जब लड़की उससे शादी कर लेती है, तब उसे अचानक से पता चलता है कि जिससे उसकी शादी हुई है, वो मुस्लिम है। उन्होंने कहा कि ये प्रामाणिक शादी कभी नहीं हो सकता, ये किसी के भरोसे को धोखा देना हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन मामलों को देख रही है और अगले 5 वर्षों में ये सुनिश्चित किया जाएगा कि ये शादियाँ स्वेच्छा से हो, किसी को जाल में फँसा कर नहीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि असम सरकार कार्रवाई कर रही है।

असम में विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में प्रस्तावित है। डिब्रूगढ़ में भाजपा महिला मोर्चा की एक बैठक में शिक्षा मंत्री ने कहा था, ‘‘हमें असम की जमीन पर लव जिहाद के खिलाफ एक नई और कड़ी लड़ाई शुरू करनी होगी। अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो हम यह निर्णय लेंगे कि अगर कोई भी लड़का धार्मिक पहचान छुपाता है और असम की बेटियों और महिलाओं पर कुछ भी नकारात्मक टिप्पणी करता है तो उसे कड़ी सजा मिले।” 

‘फर्जी नाम रखकर, मंदिर में फोटो खिंचा कर लड़की से शादी करना विश्वासघात है न कि सच्ची शादी’

लव जिहाद के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में कई सरकारें इसे रोकने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं और इसके खिलाफ़ मुखर होकर एक्शन भी ले रही हैं। आज इसी कड़ी में असम के मंत्री (वित्त, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण) व भाजपा विधायक हिमंत बिस्वा सरमा ने भी अपना बयान दिया है।

उन्होंने लव जिहाद की ओर इशारा करते हुए बताया कि जो मुस्लिम लड़के झूठा नाम रख कर हिंदू लड़कियों से निकाह करते हैं, वह कोई सच्ची शादी नहीं होती बल्कि विश्वासघात होता है।

समाचार एजेंसी से बात करते हुए असम मंत्री हिमंत बिस्वा ने कहा, “कई मुस्लिम लड़के हिंदू नाम से फेसबुक अकॉउंट बनाते हैं और मंदिर में जाकर अपनी तस्वीर डालते हैं और जब एक बार लड़की ऐसे लड़कों से शादी कर लेती है तो उसे लड़के का असली नाम पता चलता है। इसे असली विवाह नहीं बल्कि विश्वासघात कहा जाता है।”

बता दें कि इससे पहले असम मंत्री हिमंत ने मदरसों पर भी अपना बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके राज्य में नवंबर में सभी मदरसों को बंद करने के बारे में एक अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 100 संस्कृत स्कूल भी बंद किए जाएँगे।

बिस्वा ने एएनआई को बताया था, “मेरी राय में, कुरान का शिक्षण सरकारी धन पर नहीं हो सकता है। अगर हमें ऐसा करना है तो हमें बाइबल और भगवद गीता दोनों को भी पढ़ाना चाहिए। इसलिए, हम एकरूपता लाना चाहते हैं और इस प्रथा को रोकना चाहते हैं।” 

गौरतलब है कि पिछले दिनों लव जिहाद के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब लड़की को हिंदू नाम बताकर फँसा लिया गया और बाद में उसे नरकीय जीवन जीने पर या तो मजबूर किया गया या फिर मार कर कहीं फेंक दिया गया। पिछले दिनों भी इसी संबंध में भाजपा के वरिष्ठ नेता हिमंत बिस्वा ने असम चुनावों के मद्देनजर आह्वान किया था कि यदि उनकी सरकार आई तो इस लव जिहाद के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होगी।

उन्होंने कहा था, ‘‘हमें असम की जमीन पर लव जिहाद के खिलाफ एक नई और कड़ी लड़ाई शुरू करनी होगी। अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो हम यह निर्णय लेंगे कि अगर कोई भी लड़का धार्मिक पहचान छुपाता है और असम की बेटियों और महिलाओं पर कुछ भी नकारात्मक टिप्पणी करता है तो उसे कड़ी सजा मिले।” 

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था, ‘‘लव जिहाद ने असम की बेटियों के लिए पहाड़ जैसी बड़ी समस्या खड़ी की है। कई लड़कियों की तो तलाक की नौबत आ गई क्योंकि उन्हें गलत नाम बताकर लड़कों ने धोखा दिया।”

PM मोदी की ‘जय हो-जय हो’ कर रहे कॉन्ग्रेसी, लेकिन गलत टैग को ट्रेंड करा कर उड़वा ली हँसी

जब बेरोजगारी दर घटती है, तो इसका अर्थ है कि रोजगार बढ़ा है और बेरोजगारी में कमी आई है। केंद्र सरकार को इसे अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करना चाहिए, लेकिन यहाँ उलटा हो रहा है। विपक्षी कॉन्ग्रेस ही घूम-घूम कर सबको बता रही है कि बेरोजगारी दर घटी है। अर्थात, कॉन्ग्रेस कह रही है कि कि बेरोजगारी में कमी आई है, इसीलिए लोग नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार का विरोध करें। बिहार चुनाव से पहले ये ट्रेंड कराया जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि कॉन्ग्रेस पार्टी को आँकड़े नहीं पता हैं। ‘भारतीय यूथ कॉन्ग्रेस’ के कई राज्यों के ट्विटर हैंडल्स से बताया गया कि जून में बेरोजगारी दर 12.02% थी, जो अगले ही महीने जुलाई में घट कर 9.15% हो गई है। इसे बुरी खबर की तरह दिखाते हुए पार्टी ने ‘युवा विरोधी नीतीश-मोदी’ का टैग भी ट्रेंड कराया। इससे कॉन्ग्रेस नेताओं और उनके सोशल मीडिया हैंडलर्स की समझ का भी पता चलता है।

कॉन्ग्रेस ने सोशल मीडिया पर दिखाई अपनी नासमझी

जैसा कि आप ऊपर संलग्न किए गए स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं, ‘इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस’ के तेलंगाना, गोवा और ओडिशा के ट्विटर हैंडल्स ने बरोजगारी दर के घटने का मातम मनाया और इसे बुरी खबर की तरह दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ ट्रेंड्स चलाए। ऐसे ही नीचे संलग्न किए गए स्क्रीनशॉट में हरियाणा और तमिलनाडु के यूथ कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल्स को यही करामात करते हुए देख सकते हैं।

बेरोजगारी दर का घटना है बुरी खबर? कॉन्ग्रेस ऐसा ही सोचती है

‘लाइव मिंट’ की खबर के अनुसार, जुलाई 2020 में भारत की बेरोजगारी दर गिर कर कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के पहले के काल वाली स्थिति में चली गई, जिससे पता चलता है कि नौकरियाँ बढ़ी हैं। ‘Centre of Monitoring Indian Economy (CMIE)’ के आँकड़ों की मानें तो जून में बेरोजगारी दर 10.99% था, जो जुलाई में घट कर 7.43% पर गिर कर आ गया। ओडिशा और गुजरात में बेरोजगारी दर सबसे कम है।

‘मैंने कभी नहीं लगाया रेप का आरोप’: पीड़िता ने चिन्मयानन्द के खिलाफ सारे आरोपों को नकारा, बयान से मुकरने का मामला दर्ज

पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानन्द पर चल रहे रेप केस के मामले में अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान नया मोड़ आया। एलएलबी की जिस छात्रा ने उन पर रेप के आरोप लगाए थे, उसने अब ये केस वापस ले लिया है। पीड़िता अब अपने पुराने बयान से भी मुकर गई है। आरोपों से मुकरने के बाद अभियोजन पक्ष ने पीड़िता को ‘पक्षद्रोही’ साबित करते हुए उसके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत मुकदमा पंजीकृत करवाया है।

एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज पवन कुमार राय ने अभियोजन पक्ष की अर्जी को स्वीकार कर लिया है। साथ ही पीड़िता और उसके वकील को इस अर्जी को लेकर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए गुरुवार (अक्टूबर 15, 2020) की तारीख तय की गई है। सरकारी वकील अभय त्रिपाठी ने कहा कि पीड़िता ने सितम्बर 5, 2019 को खुद इस मामले की FIR लोधी कॉलोनी थाने में दर्ज कराई थी।

पीड़िता के पिता ने भी शाहजहाँपुर में एक FIR दर्ज कराई थी। बाद में दोनों ही FIR को आपस में मर्ज कर दिया गया था। इसके बाद इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया था, जिसने सीआरपीसी की धारा-161 के तहत मामले की जाँच शुरू की और मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाया। इन दोनों बयानों में रेप की बात दोहराई गई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है कि पीड़िता ने 9 अक्टूबर को जानबूझ कर अपना बयान बदला।

वकील अभय त्रिपाठी का दावा है कि अदालत से बाहर ही आरोपित और पीड़िता का समझौता हो चुका है, जिसके बाद वो अपने बयान से पलट गई है। फ़रवरी 2020 में चिन्मयानन्द ने स्वास्थ्य कारणों से जमानत की अर्जी दी थी, जिसके बाद उन्हें बेल मिल गई थी। अगस्त 2019 में चिन्मयानन्द के ही शाहजहाँपुर स्थित कॉलेज में पढ़ने वाले विधि संकाय की छात्रा कई दिन तक गायब रही थी, जिसके बाद उसने एक वीडियो के जरिए कई आरोप लगाए थे।

इसके अगले ही महीने चिन्मयानन्द को गिरफ्तार कर लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच को इसकी जाँच सौंपी थी और SIT का गठन किया था। अब 23 वर्षीय छात्रा ने अपने सारे आरोपों को नकार दिया है। पीड़िता ने कहा कि उसने कोई आरोप लगाया ही नहीं था। इसी मामले में चिन्मयानन्द के वकील ने एक अज्ञात नंबर से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगे जाने की शिकायत भी दर्ज कराई थी।

चिन्मयानंद पर आरोप लगाने वाली छात्रा के लापता होने के बाद यह मामला सुर्ख़ियों में आया था। अपने वीडियो में पीड़ित छात्रा ने चिन्मयानंद पर आरोप लगाते हुए कहा था कि संत समाज के एक बहुत बड़े नेता ने मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी से मदद की गुहार लगाते हुए पीड़ित छात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसके बाद पुलिस ने छात्रा को उसके दोस्तों के साथ राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी के पास एक होटल से बरामद किया था।