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नाम कफील लेकिन फेसबुक पर ‘करण’… लड़कियों को भेजता था अश्लील मैसेज, हुआ गिरफ्तार

फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक छात्र को दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की पहचान 23 वर्षीय कफील के रूप में हुई। वह महरौली का रहने वाला है और बीए के प्रथम वर्ष का छात्र है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर ने इस संबंध में बताया कि महरौली की एक महिला ने कुछ दिन पहले एक शिकायत की थी। उसमें उसने बताया था कि उसे कोई करण नाम का लड़का फेसबुक पर भद्दे व अश्लील मैसेज भेजता है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने जब इस मामले में अपनी जाँच शुरू की, तो तकनीकी निगरानी की सहायता से आरोपित पकड़ में आया और शनिवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पड़ताल में मालूम चला कि आरोपित का नाम कफील है। जो शिकायत करने वाली महिला पर ऑनलाइन नजर रख रहा था और खुद को जिम ट्रेनर बताता था। उसने फेसबुक पर करण नाम से फर्जी प्रोफाइल तैयार की थी और उसी से वह महिलाओं को फेसबुक पर अश्लील मैसेज भेजता था।

वहीं, हकीकत यह है कि कफील दिल्ली विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजुकेशन का छात्र है। वह वहाँ से बीए कर रहा है। उसके पिता महरौली में मीट शॉप चलाते हैं। पुलिस ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया है।

पूछताछ के दौरान, आरोपित कफील ने बताया कि वह महिलाओं से दोस्ती करने और उन्हें अश्लील संदेश भेजने के लिए फर्जी फेसबुक आईडी का इस्तेमाल करता था। उसने यह भी बताया कि पहचान का खुलासा होने से बचने के लिए वह हॉटस्पॉट या वाईफाई सेवाओं का इस्तेमाल करता था।

75 सालों से एक पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक: नहीं लेते कोई सरकारी सहायता, देते हैं गीता का ज्ञान भी

ओडिशा के जाजपुर में एक ऐसे बुजुर्ग हैं, जो पिछले 75 वर्षों से अपने क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, बिना एक भी रुपया लिए। उन्होंने 75 सालों में न जाने कितने ही छात्रों को शिक्षा दी लेकिन कभी इसका शुल्क नहीं लिया। इनका नाम है नंदा प्रस्टी, एक वयोवृद्ध शिक्षक, जो न सिर्फ बच्चों को पढ़ाते हैं बल्कि रात के समय वयस्क लोगों को भी शिक्षा देते हैं। ओडिशा के नंदा प्रस्टी किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता लेने से भी इनकार कर देते हैं।

बच्चे जब चौथी कक्षा तक पढ़ लेते हैं, उसके बाद नंदा प्रस्टी उन्हें प्राइमरी स्कूल में भेज देते हैं। शिक्षा देने के प्रति उनका जोश ऐसा है कि पिछले 75 वर्षों से उन्होंने अपनी कमाई के बारे में कुछ नहीं सोचा और इसी तरह से अपना जीवन-यापन करते रहे, बिना किसी आर्थिक ज़रूरत के। उन्होंने जाजपुर जिले के बच्चों को अपनी कमाई के उपर प्राथमिकता दी। वो जाजपुर के बरटांडा गाँव के रहने वाले हैं।

गाँव के सरपंच ने उनसे अनुरोध किया है कि वो सरकारी सहायता स्वीकार करें, ताकि सरकार उनके लिए एक इंफ्रास्ट्रक्चर बना सके। उन्होंने इससे पहले भी कई बार एक भवन निर्माण की योजना नंदा प्रस्टी के सामने रखी, जहाँ वो आराम से बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के काम में लगे रहें। लेकिन, उन्होंने हर बार इसे नकार दिया। गाँव में एक घना पेड़ है, जहाँ बैठ कर वो बच्चों को पढ़ाना पसंद करते हैं।

समाचार एजेंसी ANI की खबर के अनुसार, नंदा प्रस्टी ने बताया कि वो पहले खेतों में काम करते थे और उन्होंने देखा कि गाँव में कई ऐसे लोग हैं, जो निरक्षर हैं। उन्हें ये देख कर बुरा लगता था कि अधिकतर को तो अपना हस्ताक्षर तक करने नहीं आता और वो इसकी जगह अंगूठा लगाया करते थे। वो कहते हैं कि उन्होंने लोगों को बुला कर उन्हें हस्ताक्षर करना सिखाना शुरू किया लेकिन कइयों ने पढ़ने में रुचि दिखाई और वो भगवद्गीता का पाठ सीखने लगे।

ओडिशा के बुजुर्ग शिक्षक नंदा प्रस्टी बताते हैं कि उनका पढ़ाया हुआ पहला बैच जो निकला था, अब उन लोगों के परपोते उनसे पढ़ने आते हैं। गाँव के सरपंच का कहना है कि उनके नकारने के बावजूद वो इस कोशिश में लगे हैं कि एक अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाए, जहाँ वो बच्चों को पढ़ा सकें। सरपंच ने ANI को बताया कि चाहे मौसम कितना भी खराब हो, ठण्ड हो या गर्मी, या फिर तेज़ हवा ही क्यों न चल रही हो – नंदा प्रस्टी बच्चों को पढ़ाने में लगे रहते हैं।

‘मुझे गोली तो नहीं मारोगे बाबू जी’ – गुंडा नईम UP पुलिस के पैरों में गिर कर रोया, गले में एक तख्ती लटका किया आत्मसमर्पण

उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर अभियान के कारण कई अपराधियों के भीतर डर भर गया है। यही कारण है कि वह पकड़े जाने के भय से खुद ही सरेंडर कर रहे हैं। रविवार (सितंबर 27, 2020) को प्रदेश के संभल जिले में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। वहाँ एक इनामी बदमाश ने गिड़गिड़ाते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान उसके गले में एक तख्ती भी थी।

इस तख्ती पर लिखा था, “मैंने गलत काम किया है। मुझे सम्भल पुलिस से डर लगता है। मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूँ। मैं अपराधी हूँ और आत्मसमर्पण कर रहा हूँ। मुझे गोली मत मारो।”

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया जा रहा है कि नईम नाम का यह अपराधी तख्ती लटकाए-लटकाए जब थाने पहुँचा तो एसएचओ के पैरों में गिरकर माफी माँगने लगा और कहने लगा, “मुझे गिरफ्तार कर लो, घर में मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं।”

इस घटना की एक वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में नईम को पुलिस अधिकारी के पाँव में गिर कर माफी माँगते देखा जा सकता है। वह बार बार हाथ जोड़ कर रोते हुए पूछता है, “मुझे गोली तो नहीं मारोगे बाबू जी।”

मौजूदा जानकारी के अनुसार, यह पूरा वाकया संभल थाना क्षेत्र नखासा का है। नईम पर गोकशी से लेकर गैंगस्टर एक्ट में कई मामले दर्ज हैं। काफी समय से फरार होने के कारण पुलिस को इसकी तलाश थी। पुलिस ने इस पर 15 हजार का इनाम भी रखा हुआ था।

इसे पकड़ने के लिए इसके घर और रिश्तेदारों के यहाँ लगातार दबिश दी जा रही थी। हालाँकि, उस बीच यह बदमाश बार-बार बच कर निकल रहा था। मगर, कल अचानक यह तख्ती लटकाए-लटकाए नखासा में सरेंडर करने पहुँच गया।

बाद में थाना प्रभारी के कहने पर पुलिसकर्मियों ने उसे सहारा देकर उठाया और अंदर ले गए। पुलिसकर्मियों ने यह सब देखकर कहा कि बदमाशों पर बढ़ी सख्ती का ही नतीजा है कि अपराधी अब खुद सरेंडर करने आ रहे हैं।

बता दें कि संभल पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकॉउंट से इस आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए वीडियो जारी की है। इस वीडियो में अधिकारी बता रहे हैं कि संभल में काफी समय से गैंगस्टर एक्ट के अपराधियों के खिलाफ़ कार्रवाई चल रही थी। इसी के डर से नईम ने आत्मसमर्पण किया।

भगत सिंह को उनके दादाजी ने जनेऊ संस्कार के समय ही दान कर दिया था… वो ऐलान, जिसे ‘शहीद’ ने जिंदगी भर निभाया

क्रांतिकारी शब्द का अपना स्वभाव होता है। इस शब्द के न तो आगे कुछ और न ही पीछे, जो है बस है। इस बात की सबसे शानदार नज़ीर हैं भगत सिंह और शायद इसलिए इस नाम के जितनी गाढ़ी लकीर किसी दूसरे नाम की नहीं। ऐसे नाम खोजने पर भी नज़र नहीं आते, जो फाँसी के तख़्त पर चढ़ने के पहले मुस्कराते हों। जिनके लिए ज़मीन, घर, परिवार और अपना पिंड छोड़ने के लिए इतनी वजह ही काफी थी कि देश उनकी ओर उम्मीद भरी निगाहों से एक टक निहार रहा था।

23 मार्च 1931 को जब भगत की फाँसी का वक्त आया, तब जितने भी लोग उन्हें देख पाए, सब के सब हैरान थे। भरे हुए गाल, कसा हुआ शरीर और वजन बढ़ा हुआ था। लोग कारावास में रह कर निराश होते थे लेकिन उनके साथ ठीक विपरीत हुआ। भगत सिंह इस बात से उत्साहित थे कि उन्हें देश के लिए शहीद होने के मौक़ा मिल रहा है।

फाँसी के वक्त मौके पर तमाम फिरंगी अधिकारी मौजूद थे, कुछ यूरोप के तो कुछ ब्रिटिश। भगत सिंह ने उन सभी की तरफ देख कर मुस्कराते हुए कहा, “मिस्टर मजिस्ट्रेट, आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपको यह देखने के लिए मिल रहा है। भारत के क्रांतिकारी किस तरह अपने आदर्शों के लिए फाँसी पर भी झूल जाते हैं।”    

भगत सिंह की ज़िंदगी में बेहद कम उम्र के दौरान ही बहुत कुछ तय हो गया था और सब कुछ स्वतः हुआ। भगत सिंह उस वक्त सिर्फ 8 साल के थे, जब उनके सामने नौजवान क्रांतिकारी ‘करतार सिंह सराभा’ फाँसी के तख़्त पर चढ़ गए।

चेहरे पर न कोई शिकन और न कोई परवाह, मुल्क की बात थी तो फाँसी से कैसा भय! आखिर ऐसी मृत्यु सामान्य भी नहीं है, लोग इस सूरत की मौतों को ‘शहीद’ पुकारते हैं। भगत सिंह अपनी जवानी में जो बने, उसके लिए इस घटना का नज़ारा बहुत था। भगत सिंह ने समझने में देरी नहीं कि ‘जो होना है, उसके लिए जवानी ही है और जवानी कब ढल जाए, इसका कोई अनुमान नहीं।’

भगत सिंह 15-16 साल के थे। नेशनल कॉलेज लाहौर से पढ़ाई कर रहे थे। उनकी हिन्दी, पंजाबी और उर्दू तीनों भाषाओं पर बराबर पकड़ थी। उन दिनों कम उम्र में विवाह का चलन था। लिहाज़ा उनके पिता चाहते थे कि भगत सिंह विवाह कर लें लेकिन भगत सिंह ने टाल दिया। दबाव बढ़ा तब भगत सिंह ने अपने पिता को चिट्ठी लिख कर घर छोड़ दिया। वह अपनी चिट्ठी में लिखते हैं, 

“पूज्य पिता जी,
नमस्ते!
मेरी ज़िंदगी भारत की आज़ादी के महान संकल्प के लिए दान कर दी गई है। इसलिए मेरी ज़िंदगी में आराम और सांसारिक सुखों का कोई आकर्षण नहीं है। आपको याद होगा कि जब मैं बहुत छोटा था, तो बापू जी (दादाजी) ने मेरे जनेऊ संस्कार के समय ऐलान किया था कि मुझे वतन की सेवा के लिए वक़्फ़ (दान) कर दिया गया है। लिहाज़ा मैं उस समय की उनकी प्रतिज्ञा पूरी कर रहा हूँ। उम्मीद है आप मुझे माफ़ कर देंगे।
आपका ताबेदार
भगतसिंह

यह जानकारी आज तक सीमित है कि भगत सिंह घर छोड़ कर सीधे कानपुर पहुँचे, गणेश शंकर विद्यार्थी के पास। गणेश शंकर विद्यार्थी के लिए हैरान कर देने वाली बात यह थी कि एक लड़का जिसके जवान होने में वक्त है, उसकी कलम में इतनी धार आई कैसे?

भगत सिंह बहुत कम समय में गणेश शंकर के प्रिय बन गए थे। सबसे मज़े की बात यह है कि भगत सिंह के लेख उनके नाम से छपते भी नहीं थे। उनके सारे लेख ‘बलवंत सिंह’, विद्रोही या अन्य छद्म नामों से प्रकाशित होते थे।

16 मई 1925 को कोलकाता से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक ‘मतवाला’ में उनका एक लेख प्रकाशित हुआ – भगत सिंह के नाम से नहीं ‘बलवंत सिंह’ के नाम से। उस अद्भुत लेख का एक हिस्सा कुछ इस प्रकार है: 

“अगर रक़्त की भेंट चाहिए तो सिवा युवक के कौन देगा? अगर तुम बलिदान चाहते हो तो तुम्हें युवक की ओर देखना होगा। प्रत्येक जाति के भाग्य विधाता युवक ही होते हैं। …सच्चा देशभक्त युवक बिना झिझक मौत का आलिंगन करता है, संगीनों के सामने छाती खोलकर डट जाता है, तोप के मुँह पर बैठकर मुस्कुराता है, बेड़ियों की झनकार पर राष्ट्रीय गान गाता है और फाँसी के तख्ते पर हँसते-हँसते चढ़ जाता है। अमेरिकी युवा पैट्रिक हेनरी ने कहा था – जेल की दीवारों के बाहर ज़िंदगी बड़ी महँगी है।”

“पर, जेल की काल कोठरियों की ज़िंदगी और भी महँगी है क्योंकि वहाँ यह स्वतंत्रता संग्राम के मूल्य रूप में चुकाई जाती है। ऐ भारतीय युवक! तू क्यों गफ़लत की नींद में पड़ा बेखबर सो रहा है। उठ! अब अधिक मत सो। सोना हो तो अनंत निद्रा की गोद में जाकर सो रह… धिक्कार है तेरी निर्जीवता पर। तेरे पूर्वज भी नतमस्तक हैं इस नपुंसत्व पर। यदि अब भी तेरे किसी अंग में कुछ हया बाकी हो तो उठ कर माता के दूध की लाज रख, उसके उद्धार का बीड़ा उठा, उसके आंँसुओं की एक-एक बूंद की सौगंध ले, उसका बेड़ा पार कर और मुक्त कंठ से बोल- वंदे मातरम!”

इस लेख का हर शब्द इस बात का जीवंत प्रमाण है कि बहुतों ने बहुत कुछ लिखा लेकिन इतनी कम उम्र में ऐसा कुछ किसी ने नहीं लिखा। जनता को इस बात की भनक तक नहीं थी कि बलवंत सिंह हैं कौन? खुद गणेश शंकर विद्यार्थी तक नहीं जानते थे कि शब्दों की इतनी गाढ़ी लकीर भगत सिंह की खींची हुई है।

भगत सिंह के एक नहीं बल्कि अनेक ऐसे लेख हैं, जो खुद में आज़ादी के सबसे कीमती दस्तावेज़ हैं। पंजाबी पत्रिका ‘किरती’ में भी उनके कई लेख छपे, जिसके चर्चा पूरे मुल्क में हुई। यहाँ वह विद्रोही नाम से लिखते थे। 

जनवरी 1928 में उनका एक लेख ‘किरती’ में प्रकाशित हुआ, जिसमें उन्होंने काकोरी कांड के क्रांतिकारियों को अपने शब्दों से श्रद्धांजलि दी। भगत सिंह लिखते हैं, “हम लोग आह भरकर समझ लेते हैं कि हमारा फ़र्ज पूरा हो गया। हमें आग नहीं लगती। हम तड़प नहीं उठते। हम इतने मुर्दा हो गए हैं। आज वे भूख हड़ताल कर रहे हैं। तड़प रहे हैं। हम चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। ईश्वर उन्हें बल और शक्ति दे कि वे वीरता से अपने दिन पूरे करें और उन वीरों के बलिदान रंग लाएँ।” 

‘किरती’ में ही भगत सिंह ने बलिदान देने वाले सेनानियों पर आधारित एक श्रृंखला लिखी थी, जिसका शीर्षक था ‘आज़ादी की भेंट शहादतें’। इसमें वह मदन लाल ढिंगरा के लिए लिखते हैं, “फाँसी के तख़्ते पर खड़े मदन से पूछा जाता है- कुछ कहना चाहते हो? उत्तर मिलता है- वन्दे मातरम! माँ! भारत माँ तुम्हें नमस्कार और वह वीर फाँसी पर लटक गया। उसकी लाश जेल में ही दफ़ना दी गई। हम हिन्दुस्तानियों को दाह क्रिया तक नहीं करने दी गई। धन्य था वो वीर। धन्य है उसकी याद। मुर्दा देश के इस अनमोल हीरे को बार-बार प्रणाम।” 

भगत सिंह के लेखों में दो बातें हमेशा नज़र आती थीं। पहला कि नई पीढ़ी के लिए क्रांति शब्द के क्या मायने हैं और दूसरा असल क्रांतिकारियों की तासीर होती क्या है? भगत सिंह का मानना था कि कि देश के लिए मिटने वालों में एक बात समान होती है – ‘वह साधू होते हैं।’ ऐसे साधू जिसे संसार का कोई मोह नहीं है, सिवाय एक चीज़ ‘देश’ के। हालाँकि साधुओं में भी परमात्मा का मोह होता है, ठीक वैसे ही शहीद होने वालों को मुल्क का मोह होता है, मुल्क की मिट्टी और आवाम का मोह होता है। 

8 अप्रैल 1929 को दिल्ली असेम्बली में भगत सिंह द्वारा फेंके गए बम में एक कागज़ का टुकड़ा लगा हुआ था। उसमें जितनी बातें लिखी थीं, वह भगत सिंह के मूल स्वभाव और व्यक्तित्व को समझने के लिए पर्याप्त हैं। भगत सिंह ने कागज़ के टुकड़े में लिखा था कि ‘इंसान मारे जा सकते हैं लेकिन विचार नहीं।’ उनका कहना था कि वह चाहते हैं कि लोगों में इस बात का भरोसा बना रहे कि व्यक्ति मिट सकता है पर उसका व्यक्तित्व नहीं। 

किसी कवि ने शायद इसलिए ही लिखा है, “कुछ नहीं रह जाता है बस लिखा पढ़ा रह जाता है।”

क्रांतिकारियों की किताब के पन्ने ऐसे ही होते हैं। उनमें क्रांति की स्याही बराबर नज़र आती है। उनकी किताबों के पन्ने पलटने पर जितनी तस्वीरें नज़र आती हैं, उनका रंग लाल ही होता है, सुर्ख लाल। आखिर क्रांति और शहादत जैसे कालजयी शब्द सभी के भाग्य में होते भी नहीं, जिनके भाग्य में है, उनकी हस्ती अमर है।

भगत सिंह ने देश को जितना कुछ दिया उसका मोल न तो शब्दों में और न ही जज़्बातों में, न ही बातों में और न ही विचारों में। देश और दुनिया में जो बातें हर सीमाओं से बाहर होती हैं, भगत सिंह की बात उसमें से ही है।   

किसान होंगे खुशहाल, उत्पादन में भी होगा सुधार: अमूल MD ने नए कृषि कानूनों के बताए फायदे

अमूल नाम से मशहूर गुजरात कॉपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डॉयरेक्टर आरएस सोढ़ी ने रविवार (सितंबर 27, 2020) को ट्विटर पर किसानों के लिए मुक्त बाजार के फायदे बताए।

मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि विधेयकों पर की गई चर्चा का हवाले देते हुए सोढ़ी ने ट्विटर पर समझाया कि कैसे कृषि उपज के रूप में दूध की कीमत 8 लाख करोड़ रुपए है। यह गेहूँ, धान और गन्ने के संयुक्त मूल्य से भी अधिक है।

उन्होंने बताया कि डेयरी किसान GCMMF से जुड़े हों या नहीं, वे अपनी उपज/ उत्पाद कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र हैं और खरीदार कहीं से भी उसे खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।

उन्होंने मुक्त बाजार पर बात करते हुए इस बात पर गौर करवाया कि आज एक ओर जहाँ जीडीपी में कृषि का योगदान लगातार घट रहा है, वहीं जीडीपी में दूध के योगदान में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जीडीपी में दूध के योगदान के बढ़ने के साथ-साथ डेरी किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है, और यह सब सिर्फ इस स्वतंत्रता के कारण कि डेरी किसान अपने उत्पाद को कहीं भी बेच सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भले ही अमूल के पास एक बड़ा मार्केट शेयर है, मगर डेयरी एक ऐसा उद्योग है जहाँ 100% एफडीआई की अनुमति है। इसलिए नेस्ले और यूनिलीवर जैसे अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ पहले से ही अपने उत्पादों के साथ भारत में हैं।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पिछले दिनों कृषि कानून में सुधार के नाम पर ऐसे विधेयकों को संसद में पास करवाया है जिनसे फसल उत्पाद को लेकर ऐसा तंत्र विकसित होगा जहाँ किसान मनचाहे स्थान पर अपनी फसल बेच सकेंगे। इसके जरिए किसान अपनी फसल का सौदा सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य के लाइसेंसी व्यापारियों के साथ भी कर सकते हैं।

इसके अलावा एक विधेयक में, किसानों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था का प्रावधान है। भुगतान सुनिश्चित करने हेतु प्रावधान है कि देय भुगतान राशि के उल्लेख सहित डिलीवरी रसीद उसी दिन किसानों को दी जाएँ। मूल्य के संबंध में व्यापारियों के साथ बातचीत करने के लिए किसानों को सशक्त बनाने हेतु प्रावधान है कि केंद्र सरकार, किसी भी केंद्रीय संगठन के माध्यम से, किसानों की उपज के लिए मूल्य जानकारी और मंडी आसूचना प्रणाली विकसित करेगी।

ट्रक में ट्रैक्टर लाया, सड़क पर पटक के जला डाला: कॉन्ग्रेसी नेताओं ने लगाए ‘भगत सिंह’ के नारे, देखें वीडियो

संसद में मोदी सरकार द्वारा पास कराए गए तीन कृषि बिलों के विरोध में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अजीबोगरीब हरकतें करनी शुरू कर दी है। विरोध प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली के इंडिया गेट पहुँचे पंजाब यूथ कॉन्ग्रेस के नेताओं ने एक ट्रैक्टर को पलट कर उसे आग के हवाले कर दिया। इन नेताओं ने उस छोटे ट्रैक्टर को एक ट्रक में डाल कर लाया था, जिसके बाद उसे सड़क पर डाल कर उसमें आग जला दी गई।

साथ ही कॉन्ग्रेस कार्यकर्त्ता जलते हुए ट्रैक्टर के पास ‘भगत सिंह अमर रहें’ के नारे भी लगा रहे थे। पीली पगड़ी व दुपट्टे के साथ पहुँचे कॉन्ग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान भगत सिंह की तस्वीरें भी लहराईं। जैसे ही ट्रैक्टर जलाने की सूचना मिली, पुलिस की एक टीम को घटनास्थल पर रवाना किया गया। साथ ही फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुँची, जिसने आग को बुझाने में सफलता पाई।

ये घटना राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा तीनों कृषि बिलों को मंजूरी देने के 1 दिन बाद हुई। 18 विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति को उन बिलों पर हस्ताक्षर न करने की अपील की थी। मोदी सरकार ने विपक्ष के शोरगुल के बीच सितम्बर 20, 2020 को राज्यसभा में इन्हें पास कराया था। इंडिया गेट पर ट्रैक्टर जलाने के दौरान वहाँ 20 से अधिक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे। ये घटना सोमवार (सितम्बर 28, 2020) की सुबह हुई।

फायर अधिकारियों ने बताया कि सुबह के 7:42 बजे उन्हें कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा ट्रक पर लाए ट्रैक्टर को आग के हवाले किए जाने की सूचना मिली, जिसके बाद 2 फायर टेंडरों को वहाँ भेजा गया। ये लोग 7 बजे के आसपास से ही वहाँ डेरा डाले हुए थे। डीसीपी ईश सिंघल ने बताया है कि इस मामले में क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है और इस घटना को अंजाम देने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। जले हुए ट्रैक्टर को वहाँ से हटा दिया गया है। फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर में शिव मंदिर पर हमला, नंदी की प्रतिमा को दो टुकड़े कर दिया: राज्य में 7वीं ऐसी घटना

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमले का सिलसिला थम नहीं रहा है। चित्तूर जिले में एक शिव मंदिर पर हमला किया गया और मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। ऐसा करने वाले अज्ञात बदमाशों के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। कहा जा रहा है कि इस महीने में ये 5वीं ऐसी घटना है और पिछले कुछ दिनों में 7वीं। ताज़ा घटना रविवार (सितम्बर 27, 2020) को हुई, जब आंध्र प्रदेश के चित्तूर में स्थित मंदिर को निशाना बनाया गया।

आंध्र प्रदेश के गृह मंत्री ने मंदिरों पर हो रहे हमलों को एक साजिश करार दिया था और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी लेकिन इस घटना को 24 घंटे भी नहीं हुए थे, जब नंदी की प्रतिमा को नष्ट किया गया। चित्तूर जिले के गंगाधर नेल्लोर मंडल में अगारा मंगलम गाँव में स्थित शिव मंदिर में ये घटना हुई। रात में ही आए अज्ञात बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि नंदी की प्रतिमा के 2 टुकड़े कर दिए गए।

मंदिर के पास सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण बदमाशों का पता लगाने में पुलिस को परेशानी हो रही है। पुलिस ने बताया है कि मामला दर्ज कर के साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपितों को पकड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विपक्षी दल लगातार जगन मोहन रेड्डी की सरकार पर मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव बना रहे हैं। कोरोना आपदा के बीच तंगी से जूझ रहे राज्य में इन समस्याओं को लेकर सरकार आँख मूँदे हुए है।

चित्तूर के एसपी एनस्थील कुमार ने जानकारी दी कि जैसे ही इस घटना के बारे में सूचना मिली, पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर के इस घटना के बारे में पता लगाया।

तेलुगु देशम पार्टी के नेता जयदेव गल्ला ने राज्य में हिंदू मंदिरों पर हालिया हमलों के लिए आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू (YSR) कॉन्ग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया था। गल्ला ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वाईएसआर पार्टी ऐसे हमलों से लाभान्वित हो रही है।

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर बढ़ रहे हमलों के मद्देनजर टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने भी प्रदेश के सीएम पर आरोप लगाया था कि इतने मामले आने के बावजूद उन्होंने अभी तक एक भी मंदिर में जाने की ज़हमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा था कि सीएम चाहे कोई भी धर्म का अनुसरण करता हो, मगर उसका फर्ज है कि वह हर धर्म के श्रद्धालुओं को समानता और न्याय दें। उन्होंने कहा था कि ये आज की सरकार की जिम्मेदारी है वह हर धार्मिक स्थल की रक्षा करें।

गैंगस्टर फिरोज अली की मौत, गाय को बचाने में UP पुलिस की गाड़ी पलटी: टोयोटा इनोवा से मुंबई से लखनऊ लाया जा रहा था

उत्तर प्रदेश में एक और गैंगस्टर को पकड़ कर लाती गाड़ी पलट गई है। यूपी पुलिस गैंगस्टर एक्ट के आरोपित फिरोज अली को पकड़ने मुंबई गई थी। वहाँ से उसे लाया जा रहा था, तभी मध्य प्रदेश में ग्वालियर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर चांचौड़ा थाना क्षेत्र स्थित पाखरिया पुरा टोल के पास गाड़ी पलट गई। इसमें आरोपित फिरोज अली की मौत हो गई। इस घटना में 2 पुलिसकर्मियों सहित 4 लोग घायल भी हुए हैं।

सभी घायलों का इलाज राजगढ़ अस्पताल में चल रहा है। आरोपित फिरोज अली को मुंबई से लखनऊ लाने के लिए ठाकुरगंज थाने की पुलिस को भेजा गया था। एसीपी चौक आईपी सिंह ने जानकारी दी है कि मूल रूप से बहराइच के दरगाह शरीफ घंटाघर क्षेत्र का निवासी फिरोज अली उर्फ़ शमी कई दिनों से फरार चल रहा था और पुलिस को उसकी तलाश थी। दारोगा जगदीश प्रसाद पांडेय व सिपाही संजीव सिंह को उसे लाने मुंबई भेजा गया था।

ये पुलिसकर्मी निजी गाड़ी से गैंगस्टर को लाने मुंबई गए हुए थे। इस दौरान पुलिस के साथ फिरोज अली का साढ़ू भाई अफजल भी था। आरोपित के ठिकानों को तलाश करने और उसकी पहचान के लिए पुलिस उसे लेकर गई थी। लखनऊ निवासी सुलभ मिश्र नामक व्यक्ति गाड़ी चला रहा था। पुलिस ने नाला सोपारा के झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे फिरोज अली को गिरफ्तार करने में सफलता पाई। फिर उसे लखनऊ लाया जा रहा था।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, रविवार (सितम्बर 27, 2020) सुबह लगभग साढ़े छह बजे पुलिस टीम की गाड़ी गुना जिले की पाखरिया पुरा टोल से ब्यावरा के पास पहुँची, जहाँ वो तेज़ रफ़्तार के कारण अनियंत्रित होकर पलट गई। तेज रफ़्तार होने के कारण गाड़ी सड़क के दूसरे लेन में घुस गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गाड़ी के एक दरजवाजे से आरोपित सहित 3 लोग नीचे गिर गए। फिरोज की जहाँ मौत हो गई, वहीं अफजल का हाथ टूट गया।

दारोगा जगदीश, सिपाही संजीव और ड्राइवर सुलभ भी घायल हुए हैं। चांचौड़ा टीआइ राकेश गुप्ता ने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी है कि सड़क पर एक गाय को बचाने के चक्कर में ये हादसा हुआ। एसपी राजेश कुमार सिंह ने घटनास्थल पर पहुँच कर मामले की छानबीन की। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ड्राइवर को झपकी आ गई थी, जिस कारण गाड़ी पलटी। वहीं दरोगा जगदीश ने गाय को बचाने के चक्कर में हादसा होने की बात कही।

गुना एसपी राजेश सिंह ने कहा है कि इस मामले की जाँच के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश से निवेदन किया गया है। गैंगस्टर फिरोज अली के ऊपर चोरी और लूट समेत 6 मामले दर्ज थे। कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था। जिस गाड़ी से हादसा हुआ, वो टोयोटा की इनोवा कार थी। इस हादसे में गाड़ी के भी परखच्चे उड़ गए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में नीलगाय के कारण हादसा होने की बात भी कही गई है।

इससे पहले जुलाई 2020 में जब 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपित खूँखार गुंडे विकास दुबे को जब यूपी एसटीएफ उज्जैन से गिरफ्तार कर के कानपुर ला रही थी, तब बारिश में गाड़ी के एक्सीडेंट होने के बाद गैंगस्टर ने एक पुलिसकर्मी का पिस्टल छीन कर भागना चाहा और एनकाउंटर में मारा गया। इसी तरह उसके गुर्गे प्रभात मिश्रा को भी फरीदाबाद से पुलिस ला रही थी लेकिन वो भी एनकाउंटर में मारा गया था।

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच ने बॉलीवुड में ड्रग्स की घुसपैठ को बेनकाब कर दिया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) इस मामले में रिया चकवर्ती सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्ध कपूर जैसी अभिनेत्रियों से पूछताछ कर चुकी है। करण जौहर की एक पार्टी भी जॉंच के दायरे में है। फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि उस पार्टी का वीडियो असली है।

इस बीच रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने रविवार (सितंबर 27, 2020) को बॉलीवुड की पार्टियों में शामिल रही एक इनसाइडर का इंटरव्यू लिया है। इनसाइडर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हालाँकि उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

बॉलीवुड की ड्रग्स पार्टियाँ देखने का दावा करने वाली इस इनसाइडर ने बताया, “बॉलीवुड में ड्रग्स नहीं है, ड्रग्स में बॉलीवुड है। ये कड़वा सच है कि आज के बॉलीवुड स्टार्स सोने से पहले, उठने से पहले, जैसे हमलोग लंच-डिनर करते हैं, वैसे वे ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं। अभी तो सिर्फ A लिस्टेड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम सामने आया है। अभी तो और भी कई अभिनेता और अभिनेत्रियों के नाम सामने आने बाकी हैं।”

दीपिका की पार्टियों के बारे में बताते हुए चश्मदीद कहती हैं, “जब दीपिका की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ फिल्म की शूटिंग के समय पार्टी चल रही थी। वहाँ काँच के बड़े से टेबल पर पूरा ड्रग्स रखा हुआ था और लोग लाइन में लगकर ड्रग्स का सेवन करते थे। 2:30-3:00 बजे के आस-पास जब उनका ड्रग्स खत्म हो गया तो उन्होंने अपने बंदे को फोन करके कहा चाहे जैसे भी हो अरेंज करो। दीपिका नहीं, मगर एक आर्टिस्ट तो पागल जैसे करने लगे कि मुझे अभी के अभी चाहिए। पता नहीं कैसे उस समय बंदे ने अरेंज किया और 4 बजे के आसपास वो आया। ड्रग्स लेने के बाद वह आर्टिस्ट शांत हुआ।”

चश्मदीद आगे खुलासा करते हुए कहती हैं, “मैं नाम नहीं लूँगी लेकिन बड़े-बड़े एक्टर्स अपने घर से ड्रग्स बेचते हैं। उनके पास किलोग्राम के हिसाब से होता है। उनको पता होता है कि उन पर कोई शक नहीं करेगा। इसमें एमडीएम, कोकीन, एलएसडी, सीबीडी ऑयल, वीड, टैबलेट और अन्य मादक पदार्थ शामिल हैं। वे खुद ड्रग्स डील करते हैं और उनकी पत्नी भी इसमें शामिल होती है। सभी एक्टर्स को पता होता है कि किसके घर पर ड्रग्स है।”

बॉलीवुड माफिया के बारे में ‘कड़वी सच्चाई’ का खुलासा करते हुए, चश्मदीद ने कहा, “फिल्म शूटिंग और सक्सेस पार्टियों के दौरान, कई अभिनेता और निर्माता भारी मात्रा में दवाओं की खरीद और खपत करते हैं, जिनमें एमडीएम, कोकीन, एलएसडी, सीबीडी ऑयल, वीड, टैबलेट और अन्य मादक पदार्थ शामिल हैं, जो इंजेक्ट किए जाते हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बॉलीवुड की कुछ बड़ी हस्तियाँ और उनके साथी जो 90 के दशक से फिल्मों में काम कर रहे हैं, अपने घरों से इनकी बिक्री में लगे हुए हैं।”

चश्मदीद ने आगे कहा कि बांद्रा में रहने वाले एक ‘बड़े’ निर्देशक और निर्माता अक्सर इन ड्रग पार्टियों के आयोजन के लिए अपना मुंबई विला देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनेता भी इन पार्टियों में शामिल होते हैं और वहाँ ड्रग्स सप्लाइ के लिए एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

सुशांत सिंह राजपूत के बारे में दावा करते हुए इस चश्मदीद ने कहा कि अभिनेता अपने काम के लिए प्रसिद्ध थे। लेकिन बॉलीवुड के दिग्गज उन्हें पसंद नहीं करते थे, क्योंकि उन्होंने ड्रग्स का सेवन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि सुशांत कुछ साल पहले अपने दोस्त के साथ गोवा गए थे, जहाँ उन्हें ड्रग्स की पेशकश की गई थी, लेकिन अभिनेता ने इसे लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सुशांत ने काम अच्छा किया लेकिन वह इंडस्ट्री के लोगों के दिलों में जगह नहीं बना पाए, क्योंकि वह ड्रग्स नहीं लेते थे।

चश्मदीद ने दीपिका के बारे में भी चौंकाने वाला खुलासा किया, जो हाल ही में ड्रग चैट सामने आने के बाद से NCB के स्कैनर पर हैं। चश्मदीद ने रिपब्लिक टीवी से कहा, “मैं कुछ दिन पहले गोवा में पार्टी में थी। मुझे पता चला कि दीपिका भी वहाँ पहुँची है और उसे एक होटल में क्वारंटाइन के लिए ले जाया गया। मेरे एक करीबी दोस्त ने बाद में खुलासा किया कि अभिनेत्री होटल में वास्तव में ‘बॉडी डिटॉक्स’ कर रही थी।”

अर्जेंटीना: सांसद ने ऑनलाइन सत्र में गर्लफ्रेंड का स्तन चूमा, वीडियो वायरल होने पर दिया इस्तीफा

अर्जेंटीना के 47 वर्षीय सांसद जुआन एमिलो एमिरी (Juan Emilio Ameri) को कॉन्ग्रेस (संसद) के निचले सदन से इस्तीफा देना पड़ा है। असल में उन्होंने संसद के ऑनलाइन सत्र के दौरान अपनी गर्लफ्रेंड का स्तन चूम लिया था। इसका वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। साल्टा का प्रतिनिधित्व करने वाले जुआन पेरोनिस्ट पार्टी (Peronist party) से जुड़े हैं।

संसद में पेंशन फंड निवेश को लेकर चर्चा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा हो रही थी। इस चर्चा में जुआन भी भाग ले रहे थे। वीडियो में, सांसद की गोद मे उनकी प्रेमिका को बैठे देखा जा सकता है। ऑनलाइन रहने के दौरान ही प्रेमिका का टॉप निकाल वे स्तन पर किस करने लगे।

यह घटना शुक्रवार की है। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को अर्जेंटीना सरकार के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम भी किया जा रहा था। जिसके बाद यह विवादास्पद वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

कोरोना वायरस महामारी की वजह से ज़ूम वीडियो एप्प की मदद से अर्जेंटीना में कॉन्ग्रेस के सत्र का आयोजन किया गया था। अधिकांश सांसद ने इस बहस में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया था।

मामले के तूल पकड़ने पर जुआन ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें लगा मीटिंग खत्म हो गई है और कैमरा बंद है। उन्होंने बताया कि उनकी प्रेमिका की हाल में ही ब्रेस्ट सर्जरी हुई थी और वे उसका निरीक्षण करना चाहते थे। इसी दौरान उन्होंने प्रेमिका की सर्जरी वाली जगह को चूमा था। उन्होंने बताया उनके घर मे इंटरनेट कनेक्शन बहुत खराब है।

इस घटना के बाद से ही उन्हें निलंबित करने की माँग उठने लगी थी। इसे देखते हुए उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया। घटना की निंदा करते हुए निचले सदन ने एक बयान जारी कर कहा कि हम ऐसे गैर जिम्मेदाराना हरकत की मँजूरी नहीं दे सकते हैं। हम गारंटी देंगे की सभी नियमों को लागू किया जाए।