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क्या है कृषि बिल में? किसानों के साथ धोखा हुआ? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti explains 2020 farm bills

2006 में स्वामीनाथन कमिटी की एक रिपोर्ट आई थी, जो किसानों की समस्या का हल बताना चाह रही थी कि कहाँ-कहाँ पर सुधारों की आवश्यकता है। संसद में तीन बिल पास हुए हैं, जिसमें से दो को लेकर काफी विवाद हो रहा है।

इसमें से एक बिल किसानों को अपनी उपज अपने मन मुताबिक बेचने की आजादी देता है। वो चाहे तो आढ़त में बेचे, बगल वाली मंडी में बेचे या फिर कहीं और, जहाँ उन्हें अधिक दाम मिलने की उम्मीद हो। दूसरा बिल APMC से संबंधित है। 

इन तीनों बिलों ने 5 जून 2020 को ही अधिनियम का रूप ले लिया था, लेकिन तब से लेकर पिछले सप्ताह संसद में लाए जाने तक किसी भी राजनीतिक दल, किसान संगठन अथवा राज्य सरकार ने कोई विरोध नहीं जताया। क्यों? क्योंकि राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पतन होने वाली पार्टियाँ संसद में नौटंकी करके अस्तित्व में रहने की कोशिश करते हैं।

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संजय सिंह और डेरेक ओ ब्रायन ने ईशान करण की चिट्ठी नहीं पढ़ी… वरना पत्रकार हरिवंश से पंगा न लेते

मैं अमूमन सुबह देर से उठता हूँ। आज (22 सितंबर 2020) सुबह आँख खुली तो पता चला कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश संसद परिसर के भीतर धरने पर बैठे सांसदों के लिए चाय लेकर पहुँचे थे। धरने पर बैठे सांसद अपने निलंबन का विरोध कर रहे थे। इन सांसदों को सदन के भीतर उपसभापति के खिलाफ असंसदीय व्यवहार के कारण ही निलंबित किया गया था। फिर भी हरिवंश का विशाल हृदय देखिए।

ऐसा नहीं है कि रविवार को सदन में जो कुछ हुआ था, उसने हरिवंश को आहत नहीं किया होगा। उन्होंने तीन पन्नों की एक चिट्ठी भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को लिखी है। इसमें कहा है, “राज्यसभा में जो कुछ हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, तनाव और मानसिक वेदना में हूँ। मैं पूरी रात सो नहीं पाया।” इतनी पीड़ा से गुजर रहे हरिवंश ने 24 घंटों के लिए उपवास रखने का फैसला किया है।

इन सब खबरों से गुजरते हुए मेरे मन में वे स्मृतियाँ ताजा हो गईं, जब मैं प्रभात खबर के धनबाद संस्करण में काम करता था। हरिवंश उस समय हमारे समूह संपादक हुआ करते थे। वे बैठते राँची में थे। लेकिन धनबाद खबरों के लिहाज से बड़ा सेंटर था। मेरे बीट भी ऐसे थे, जिनकी उस समय झारखंड से लेकर केंद्र तक सरकार थी। पर मैं बड़ा ही उद्दंड कर्मचारी था। सुबह की बैठक में शायद ही कभी जाता था। बरसों से जमे जमाए सिटी चीफ से अलग पंगा चल रहा था। सिटी चीफ से ही कुछ बीट लेकर मुझे दिए गए थे। टशन की एक वजह यह भी थी।

सिटी चीफ अक्सर मुझे सस्पेंड कर देते थे। कहते थे- राँची से आदेश आया है। यह सिलसिला दीपक अंबष्ठ के स्थानीय संपादक बनकर आने के बाद थमा था। हर बार जब-जब मैं सस्पेंड हुआ, काम पर कुछ दिन बाद हरिवंश जी बुला लिया करते थे। सस्पेंड लोगों के प्रति उनके मन में सद्भावना तभी से रही है। चाहे वह मुझ जैसा छोटा कर्मचारी हो या फिर संसद के ‘माननीय’।

मुझे 2009 के सितंबर की वह घटना भी याद आई, जब मैंने दिल्ली में दैनिक भास्कर ज्वाइन कर लिया। दिसंबर में मैं राँची गया था। मेरा एक महीने का वेतन बचा था। पैसा धनबाद से मिलना था। पर पहले राँची यह सोचकर चला गया कि हरिवंश जी और विजय भैया से मिल लूँगा। धनबाद आने पर मुझे 5 महीनों का पैसा मिला था। वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि हरिवंश जी का फोन आया था। उन्होंने कहा था कि इन पैसों से दिल्ली में जमने में मुझे सहूलियत होगी।

मैंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, नई दुनिया, आउटलुक जैसे बड़े संस्थानों में काम किया है। एक से एक संपादक देखे हैं। पर ऐसा दूसरा संपादक नहीं देखा, जो पुराने कर्मचारी के लिए इतना सोचता हो। असल में संपादक अपने कर्मचारियों के लिए भी इस तरह का बड़प्पन नहीं दिखा पाते।

2008 की बात होगी। बोकारो स्टील प्लांट का विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण होना था। राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत कुछ गाँवों में बिजली पहुॅंचाने का उद्घाटन होना था। तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों यह हुआ था। बोकारो में ब्यूरो ऑफिस था। पर बड़े आयोजनों के वक्त उस दफ्तर से रिपोर्टर और फोटोग्राफर भेजे जाते थे, जिसके अधीन उस जगह का एडिशन आता था। बोकारो, धनबाद संस्करण के तहत ही था। असल में इस तरह के अवसर स्थानीय अखबारों के लिए बड़े मौके होते हैं। इन आयोजन को कई पन्ने समर्पित कर दिए जाते हैं। इसलिए अतिरिक्त लोग लगाए जाते हैं कि कवरेज में सहूलियत हो।

धनबाद वाले संपादक के लिए उस जमाने में एक एंबेसडर हुआ करती थी। रिपोर्टर, फोटोग्राफर भी अमूमन उसी गाड़ी से बाहर भेजे जाया करते थे। जब रिपोर्टर कार्यक्रम को कवर कर लौट रहा था तो पता चला कि जिन गाँवों में बिजली पहुँचने का उद्धाटन हुआ है, उनमें से कुछ सड़क से थोड़ा नीचे उतरते ही है। दफ्तर से आदेश नहीं होने के बावजूद रिपोर्टर ने फैसला किया कि कुछ गाँव हो आए। वह इन गाँवों में पहुॅंचा तो पता चला कि कहीं ट्रांसफर्मर तो लगा है, पर घरों तक तार नहीं पहुँचे हैं। कहीं पोल ही लगे थे। जिन तीन या चार गाँव में रिपोर्टर और फोटोग्राफर गए, उनमें से कहीं भी घरों में बिजली नहीं पहुँची थी। कुछ तस्वीरें ली गईं। कुछ स्थानीय लोगों से बात की गई और रिपोर्टर व फोटोग्राफर धनबाद लौट आए।

लौटने पर सिटी चीफ को बताया गया कि ऐसा मामला है। उन्होंने सुनते ही खा​रिज कर दिया। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। ये सब तो बाद में भी होता रहेगा। उस समय के स्थानीय संपादक का स्वभाव था कि सबको अलग-अलग सहला दो। इसकी वजह से उन गाँवों की रिपोर्ट छपने की उम्मीद नहीं थी। हरिवंश जी को फोन किया गया। उन्होंने कहा कि ठीक है खबर और तस्वीरें भेजिए। मैं देखता हूँ। एक-एक कर संस्करण फाइनल होकर छपने जा रहे थे, पर उस खबर की कहीं कोई चर्चा नहीं थी।

मुझे याद है उस देर रात बेहद मायूस होकर अपने घर गया था। सुबह आँख खुली तो धनबाद संस्करण में आठ कॉलम में वह खबर लीड छपी थी। तब के धनबाद के सांसद ददई दुबे ने लोकसभा में प्रभात खबर की वह रिपोर्ट भी दिखाई थी और प्रधानमंत्री से फर्जी उद्धाटन करवाने के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की माँग की थी।

यानी, सुबह-सुबह सरप्राइज देना हरिवंश जी की पुरानी आदत है। कभी खबर प्रकाशित कर छोटे कर्मचारियों को सरप्राइज करना, कभी चाय से खुद के साथ अनुचित व्यवहार करने वालों सांसदों को सरप्राइज करना।

राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को लिखी उनकी तीन पन्ने की चिट्ठी देखकर, एक-एक पन्ने की उन दो चिट्ठी की भी याद आई, जो कुछ समय के अंतराल में आई थी और जिन्हें दफ्तर के नोटिस बोर्ड पर लगाया गया था। एक उनके बेटे की शादी के प्रीतिभोज में आमंत्रण का। दूसरा, पत्रकारिता की जिम्मेदारियों का उल्लेख करता हुआ, जिसे पढ़कर कोई उस प्रीतिभोज में जाना नहीं चाहता था। जबकि इस चिट्ठी के आने से पहले सिटी चीफ रोज लिस्ट तैयार करते थे कि कौन जाएगा और किसको ड्यूटी करनी है उस दिन।

दूर बैठकर भी कर्मचारियों के मन को बखूबी पढ़ लेने वाले हरिवंश जी, अब आसन पर बैठ संजय सिंह से लेकर डेरके ओ ब्रायन के मन की ‘राजनीति’ को पढ़ते होंगे। हँसते होंगे। आज वे संपादक होते तो अखबार के पहले पन्ने का बॉटम जरूर ईशान करण की चिट्ठी होती। ईशान करण एक ‘पाठक’ थे। पता नहीं अब उनकी चिट्ठी छपती है या नहीं। उस जमाने में खूब छपती थी। जब-जब वह चिट्ठी छपती यह चर्चा भी होती थी कि असल में ईशान करण, हरिवंश जी का ही छद्म नाम है। वो चिट्ठियाँ होती ही इतनी बेबाक थी कि काटो तो खून नहीं।

दिल्ली दंगों और CAA विरोधी उपद्रव के लिए ₹1.61 करोड़ की फंडिंग: ताहिर और इशरत सहित 5 के खाते में आए थे रुपए

दिल्ली सीएए विरोधी दंगों की फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, एक्टिविस्ट खालिद सैफी, आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा उर रहमान और जामिया के ही मीरान हैदर को हिन्दू-विरोधी दंगों के लिए 1.61 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली थी। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में ये खुलासा हुआ है।

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों को लेकर पुलिस ने 15 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, जिन्होंने इस पूरे वारदात की साजिश रची। दिसंबर 10, 2019 को ही इशरत जहाँ के बैंक अकाउंट में एक कॉर्पोरेशन बैंक अकाउंट से 4 लाख रुपए पहुँच गए थे। जाँच में पता चला कि ये अकाउंट मूल रूप से महाराष्ट्र के महादेव विजय कस्ते के नाम से रजिस्टर्ड है। महादेव को इस बारे में कुछ पता नहीं था। वो समीर अब्दुल साई नामक व्यक्ति के पास बतौर ड्राइवर कार्यरत थे।

महादेव ने बताया कि उन्होंने समीर अब्दुल साई के कहने पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.137 लाख का गोल्ड लोन लिया और बैंक द्वारा इतनी ही रकम उनके कॉर्पोरेशन बैंक अकाउंट में डाली गई। इसके बाद साई ने उसमें से 4 लाख रुपए इशरत जहाँ को भेजे। साई ने पूछताछ में खुलासा किया कि गाजियाबाद का इमरान सिद्दीकी उसका बिजनेस पार्टनर है। दिसंबर 2019 में उसने इशरत जहाँ, गुलजार अली और बिलाल अहमद के बैंक अकाउंट डिटेल्स देकर उनमें तुरंत 10-10 लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा था।

जब साई ने इतनी रकम भेजने में असमर्थता जताई तो फिर उसने इशरत जहाँ के अकाउंट में 5 लाख रुपए तुरंत डालने को कहा। वहीं इमरान रिश्ते में इशरत का देवर लगता है और उसने इशरत से 4 लाख रुपए लिए थे। उसने दावा किया कि ये रकम उसने बिजनेस के लिए ली थी। हालाँकि, उसे अपने आईटी रिटर्न में न सिर्फ ये बातें छिपाई, बल्कि पूछताछ में उन रुपयों के खर्च का हिसाब-किताब भी नहीं दे पाया।

वहीं जाँच में आगे पता चला कि इशरत जहाँ ने जनवरी 10, 2020 को खुद ही अपने बैंक अकाउंट से 4.609 लाख रुपए की निकासी कैश के रूप में की थी। जाँच में पता चला कि इस रकम का इस्तेमाल उसने अपने परिचित अब्दुल खालिद के माध्यम से हथियार खरीदने और सीएए विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग में की थी। इन हथियारों का दंगों में इस्तेमाल हुआ। दिसंबर 1, 2019 से फ़रवरी 26, 2020 तक ताहिर हुसैन से जुड़े एक बैंक अकाउंट से भी 17.25 लाख रुपए निकाले गए।

साथ ही ‘श्री साई ट्रेडर्स’ को आरटीजीएस के जरिए जनवरी 7 को 20 लाख रुपए, जनवरी 13 को 10 लाख रुपए और जनवरी 14 को 14 लाख रुपए और फिर उसी दिन 16 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। ताहिर हुसैन ने 60 लाख रुपए को कैश में बदलने के लिए ये सब किया और इसके लिए उसने कमीशन चैनल का सहारा लिया। ताहिर हुसैन ने लोगों को दंगों के लिए जुटाने, हथियार व अन्य चीजों की व्यवस्था करने और विरोध प्रदर्शनों को संचालित करने में बड़ी रकम खर्च की।

जामिया मिल्लिया इस्मालिया के एलुमनाई असोसिएशन ने इसमें बड़ा किरदार अदा किया। AAJMI के दो बैंक एकाउंट्स थे। ऊपर दी गई अवधि में इनमें से एक बैंक अकाउंट में 87.5 हजार रुपए डाले गए। शिफा उर रहमान ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए 70,000 रुपए निकाले थे। AAJMI को इन कार्यों के लिए कुल 7.6 लाख रुपए मिले थे। इनमें से 5.55 लाख रुपए विदेश में कार्यरत जामिया के पूर्व छात्रों ने भेजे।

इस मामले में और जाँच जारी है लेकिन इतना खुलासा हुआ है कि इस फंडिंग को छिपाने के लिए अलग-अलग खर्चों का फेक बिल भी तैयार किया गया था। सऊदी, यूएई, ओमान और क़तर से जामिया के पूर्व छात्रों ने रुपए भेजे थे। मीरान हैदर के अकाउंट में भी इस अवधि में 86,644 रुपए ट्रांसफर हुए थे। उसके पास से मिले रजिस्टर के हिसाब से उसे दंगों को भड़काने के लिए 4.825 लाख रुपए प्राप्त हुए थे। इससे साफ़ है कि दिल्ली दंगों की फंडिंग के लिए ताहिर और इशरत सहित इन पाँचों ने जम पर फंडिंग का जुगाड़ किया था।

सुशांत सिंह केस: अभी जेल में ही कटेंगे रिया और शौविक के दिन-रात, कोर्ट ने 6 अक्टूबर तक बढ़ाई न्यायिक हिरासत

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती को अभी जेल में ही रहना होगा। स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की न्यायिक हिरासत की अवधि 6 अक्टूबऱ तक बढ़ा दी है। वहीं, जमानत के लिए रिया चक्रवर्ती और उनेक भाई शौविक चक्रवर्ती ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर 23 सितंबर को सुनवाई होगी। 

सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स केस में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती के 14 दिनों की न्यायिक हिरासत का आज आखिरी दिन था। एनसीबी की गिरफ्तारी के बाद रिया चक्रवर्ती को 22 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। वह मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। बता दें कि रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका दो बार कोर्ट से ठुकरा दी जा चुकी है।

एनसीबी की जाँच में अब बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण का भी नाम सामने आया है। NCB के हाथ एक व्हाट्सएप चैट लगी है, जिसमें ड्रग्स के खरीद-फरोख्त की बात की जा रही है। एनसीबी ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को फिर से सुशांत सिंह राजपूत की टैलेंट मैनेजर जया शाह को पूछताछ के लिए बुलाया है। इस पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

ड्रग्स केस में कई और फिल्मी सितारों के नाम जुड़ रहे हैं। जया शाह के एक कथित चैट में D और K नाम का जिक्र है। NCB के सूत्रों के मुताबिक, D का मतलब है दीपिका पादुकोण और K का मतलब है करिश्मा। करिश्मा को NCB ने समन भेजा था।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ड्रग्स कनेक्शन की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती को 8 सितंबर को मुंबई से कई दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। अगर रिया चक्रवर्ती इस मामले में दोषी पाई जाती हैं तो उन्हें करीब 10 साल तक की सजा हो सकती है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे।

अभी तक की जाँच में बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों के नाम सामने आ चुके हैं जिनको जल्द ही समन देकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, श्रद्धा कपूर और डिजाइनर सिमोन खंबाटा ये वो नाम हैं जो अभी तक की जाँच में सामने आए हैं।

बता दें कि 28 वर्षीय रिया चक्रवर्ती को सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपितों के बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। NCB ने इस मामले में सभी आरोपितों से कड़ी पूछताछ की थी और कथित ड्रग रैकेट में इन सबकी भूमिका का पता लगाने के लिए NCB ने रिया चक्रवर्ती का सामना सुशांत सिंह राजपूत के घर के मैनेजर सैमुअल मिरांडा, उसके घर के कर्मचारी दीपेश सावंत और शोविक चक्रवर्ती के साथ कराया था। 

11 सितंबर को एक विशेष अदालत ने रिया चक्रवर्ती को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो वह दूसरों को सतर्क कर सकती हैं और वे सबूत नष्ट कर सकते हैं। रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में कहा था कि वह निर्दोष हैं और उसे झूठा फँसाया गया है। बता दें कि रिया को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के कई धाराओं के तहत बुक किया गया है।

दिल्ली दंगों से पहले चाँदबाग में हुई बैठक: 7 गाड़ियों में महिलाएँ जहाँगीरपुरी से लाई गई, देखें व्हाट्सअप चैट में कैसे हुई हिंसा की प्लानिंग

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को 15 आरोपितों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की। चार्जशीट में सबूत के तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप चैट और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) को भी शामिल किया गया है।

आरोप पत्र में कहा गया कि व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए दिल्ली को जलाने की साजिश रची गई। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया कि साजिशकर्ताओं ने दंगों के लिए बसों का इंतजाम किया और 300 महिलाओं समेत कई लोगों को इकट्ठा किया। 

इतना ही नहीं, इसमें यह भी बताया गया कि आरोपितों ने दंगे करवाने के लिए 16-17 फरवरी की देर रात चाँद बाग में मीटिंग करने का निर्णय लिया था। यहीं इनके बीच यह बात हुई कि दिल्ली में चल रहे प्रोटेस्ट के अंतिम चरण को उत्तरपूर्वी दिल्ली के इलाकों में अंजाम दिया जाएगा। इसमें नार्थ ईस्ट, शाहदरा, साउथ डिस्ट्रिक्ट, चाँद बाग, जफराबाद एरिया को प्रदर्शन के हॉटस्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया।

हलफनामे में इस बात का उल्लेख है कि बैठक में शामिल प्रमुख लोगों को यह मालूम था कि जो प्रोटेस्ट मुस्लिम बहुल इलाकों में साइड लेन पर चल रहा है उसे बड़ी सावधानी से मिश्रित जनसंख्या वाले इलाकों में ‘चक्का जाम’ में बदलने की आवश्यकता है ताकि सामान्य आवाजाही बाधित हो और दंगे हो सकें। 

यहाँ बता दें कि इसी चक्का जाम के बाद से उत्तरपूर्वी दिल्ली में दंगे होना शुरू हुए थे। दंगाइयों ने पुलिस पर हमला बोला था और सार्वजनिक संपत्तियों को आग के हवाले किया गया था। इसके अलावा इसी चक्का जाम के बाद कॉन्सटेबल रतन लाल समेत कई लोगों की मृत्यु हुई थी।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उन सभी लोगों के नाम का उल्लेख किया है जो उस बैठक में शामिल हुए और बाद में दंगों के मामले में व रतन लाल की हत्या के केस में उनकी गिरफ्तारी भी हुई। पुलिस ने चार्जशीट के साथ कई कॉल डिटेल्स का हवाला दिया है।

इसके अलावा कुछ चैट्स ऐसी हैं जो इस समय व्हॉट्सएप पर वायरल हो रही है। इनमें कुछ चैट सफूरा जरगर से संबंधित हैं जिनकी गर्भावस्था में हुई गिरफ्तारी को लेकर कुछ दिन पहले तक हाय-तौबा मचा हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसी ही एक चैट में सफूरा जरगर ने उस दौरान ग्रुप में लिखा था, “जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास चक्का जाम कर दिया गया है और लोगों को वहाँ पर चक्के जाम के सपोर्ट के लिए इकठ्ठा करना है। यह भी तय किया गया कि 23 फरवरी को चाँद बाग से इकठ्ठा होकर बाकी साइट्स पर जाकर चक्का जाम करना है क्योंकि चक्का जाम होगा तभी दंगा होगा। क्योंकि जब तक दंगा नही होगा तब तक हमारी बात कोई नही सुनेगा।”

फिर जेसीसी-जेएमआई ग्रुप में हुई एक चैट में सफूरा जरगर को एक शहजर नाम के लड़के को चुप कराते देखा जा सकता है। वह कहती हैं कि यहीं सारे प्लॉन लिख दोगे तो एग्जिक्यूट क्या करोगे।

पुलिस ने अपने हलफनामे में उन लोगों का भी खुलासा किया है जिनकी निगरानी में पूरी साजिश रची गई। यूनाइटेड हेट अगेंस्ट के नदीम खान को एक राशिद नाम के व्यक्ति ने रात के 2:36 पर कॉल किया था। यह कॉल उस समय की गई थी जब दंगों से पहले मीटिंग चल रही थी। वहीं अत्थर खान (आम आदमी पार्टी नेता और बैठक का आयोजन करने वाले) को भी फिल्ममेकर राहुल रॉय ने 23 फरवरी को 12:18 कॉल किया था।

यहाँ बता दें, कि अभी तक जो व्हॉट्सएप चैट सामने आई हैं उनमें से एक में देखा जा सकता है कि अब्दुल अजीज नाम का व्यक्ति कहता है कि जहाँगीरपुरी से कुछ लोग बसों में बैठकर शाहीन बाग जा रहे हैं, जिनकी गेदरिंग 250-300 है जिनमें करीब 80% औरतें हैं इस्त्राफिल, तबरेज की लीडरशिप में शाहीन बाग चली गई हैं।

इस चैट में जो 250-300 महिलाओं का उल्लेख है उन्हें लेकर चार्जशीट में दावा है कि 23 फरवरी 2020 की सुबह 8.41 मिनट पर तरबेज नाम के युवक ने जाह्नवी मित्तल को कॉल किया और उसे अपने पास उपलब्ध मैन पावर और लॉजिस्टिक्स की जानकारी दी।

फिर जाह्नवी मित्तल ने इन महिलाओं को पहले बड़ी चालाकी से शाहीन बाग ले जाने की बात की। उसके बाद 1:03 मिनट पर जब इनकी गाड़ियाँ मोरी गेट पहुँची तो उसने तबरेज को कहा कि उन सबको शाहीन बाग से जाफराबाद ले आया जाए।

पुलिस के हलफनामे के मुताबिक शाम 4:30 बजे 1 घंटे 15 मिनट का सफर तय करके तबरेज की देख रेख में इन महिलाओं को 6 बस और 1 ट्रक में भर कर शाहीन बाग से जाफराबाद लाया गया। इसकी जानकारी राहुल रॉय को टेलीफोन पर पिंजरा तोड़ की देवांगना कालिता ने स्वयं दी और यह भी बताया जाफराबाद में हमले के बाद इन महिलाओं को जहाँगीर पुरी छोड़ा गया। बता दें हिंसा के लिए लाई गई महिलाओं की गाड़ियों का किराया देवांगना कलिता और नताशा नरवाल ने चुकाया था।

इसके अलावा इसमें से एक चैट में ओवेस सुल्तान खान नामक व्यक्ति का भी सामने आया है। हर चैट में इसका मैसेज पढ़कर यही समझ आ रहा है कि ओवेस लगातार साजिशकर्ताओं को समझाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं थी।

वह एक DPSG ग्रुप में लिखता है, “मैं शिक्षित नहीं हूँ लेकिन मैं इतना बता सकता हूँ कि पिछली रात में रोड ब्लॉक करने का जो तुम्हारा प्लान था उसके बारे में स्थानीय लोग सब जानते हैं। तुम्हारा जो प्लान है उससे हिंसा भड़क सकती है। इसलिए आग से मत खेलो, ये केवल तुम्हें ही नहीं बल्कि हम सबको नुकसान पहुँचाएगा। हमारा प्रदर्शन अहिंसात्मक होगा। हम विचारों के जरिए लोगों को प्रभावित करेंगे।”

इसके बाद यही ओवेस सुल्तान एक मैसेज में यह भी कहता है, “तुम्हारी इच्छाओं के कारण सीलमपुर के स्थानीय लोग बड़ी मुश्किल में है। हर स्थानीय चिंता में है। हमारे पास अब भी 1992, 2006 और हालिया हिंसा के जख्म हैं जहाँ तुम में से कोई भी हमारे लिए खड़ा नहीं हुआ। बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया है।”

सऊदी में गिरफ्तार आतंकी शोएब और गुल नवाज को NIA की टीम भारत लाई: दिल्ली और बेंगलुरु धमाकों के बाद से थी तलाश

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान शोएब और गुल नवाज के रूप में हुई है। इनमें से शोएब केरल के कन्नूर का निवासी है जबकि नवाज उत्तर प्रदेश का। एनआईए की स्पेशल टीम इन्हें अरब के रियाद से लेकर आई है। इससे पहले सऊदी अरब प्रशासन की मदद से इन्हें 2 हफ्ते पहले हिरासत में लिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल निवासी शोएब साल 2008 में बेंगलुरु सीरियल ब्लास्ट केस का आरोपित है, जो धमाके के बाद से फरार था। उसके संबंध भारतीय मुजाहिद्दीन से भी हैं। वहीं गुल नवाज पाकिस्तान के लश्कर ए तैयबा आतंकी संगठन से संबंध रखता है। वह दिल्ली में हुए बम धमाकों का आरोपित है।

बता दें, इस कार्रवाई से पहले इन दोनों आतंकियों के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका था। रियाद में इनके ख़िलाफ़ लुक आउट नोटिस जारी होने के बाद इन्हें भारत लाया गया। यहाँ इनसे रॉ के अधिकारियों और अन्य एजेंसियों ने कई घंटे पूछताछ की।

आगे की कार्रवाई के लिए शोएब को बेंगलुरु और गुल नवाज को दिल्ली लाया जाएगा। फिलहाल शोएब से कोच्चि स्थित एनआईए के मुख्यालय में पूछताछ हुई है। वहीं गुल नवाज से तिरुवनंतपुरम स्थित आईबी मुख्यालय में सवाल किए गए।

उल्लेखनीय है कि शोएब भारतीय मुजाहिद्दीन का सक्रिय सदस्य है। इस संगठन का संस्थापक नसीर फिलहाल जेल में बंद है। वहीं, शोएब 2014 में पाकिस्तान चला गया था। वहाँ उसने कथिततौर पर निकाह किया और अपना बिजनेस करने लगा। वह रियाद में आता जाता रहता था। उसकी जानकारी जुटाने के बाद एनआईए ने रियाद प्रशासन से संपर्क किया और शोएब को गिरफ्तार किया।

इन दोनों की गिरफ्तारी से पहले एनआईए ने अल कायदा के आतंकियों को शुक्रवार को हिरासत में लिया था। इनकी पहचान इयाकूब बिस्वास, मुर्शीद हसन और मुशर्रफ हसन के रूप में हुई थी। इनके अलावा अल कायदा के 6 आतंकी नजमुस साकिब, अबु सूफिया और मैनुल मंडल, लियो यीन अहमद, अल मामून कमल, अतितुर रहमान को बंगाल के मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार किए गए थे।

अगले जनम मोहे विपक्ष ही कीजो : किसान विरोधी इस फासिस्ट सत्ता की इमेज क्यों नहीं बिगड़ने देता विपक्ष

संसद में किसानों के हितों को लेकर किसानों का सर्वकालिक हितैषी वर्ग एकबार फिर सत्ता पक्ष का विरोध कर रहा है। आज का यह विपक्ष, जो कि एक लम्बे समय तक भारत की सत्ता, किसान, युवा का भाग्यविधाता बना रहा, आज फिरसे किसानों के साथ खड़ा नजर आ रहा है। इसका कहना है कि यह कानून किसान विरोधी हैं। लेकिन यदि यह कानून किसान विरोधी हैं तो फिर विपक्ष परेशान क्यों है?

वास्तव में, यदि सत्ता पक्ष कोई भी गलत फैसला लेता है तो इसका प्रत्यक्ष प्रभाव जनता पर ही पड़ता है। लेकिन विपक्ष हर बार केंद्र सरकार की छवि की खातिर मतदाताओं और सत्ता के बीच सत्ता का शुभचिंतक बनकर वकील की भूमिका निभाने के लिए तत्पर नजर आता है।

विपक्ष ने यह ‘कूटनीति’ साल 2015 में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक से शुरू कर दी थी। विपक्ष को तो चाहिए कि वह जितना हो सके केंद्र सरकार की छवि खराब होने दे। विपक्ष को तो सरकार की हर खराब नीति का इन्तजार करते हुए उसे सहमति देनी चाहिए ताकि सरकार की छवि चुपके से खराब होती रहे।

विपक्ष जमकर हो जाने दे लोकतंत्र की हत्या, फासिज़्म का आतंक, पितृसत्ता का नंगा नाच, मनुवाद का उत्कर्ष, इन्टोलेरेंस चली जाए चरम पर.. इस इन्तजार में कि एक दिन जब वो सत्ता में आएँगे तो किसानों के खेतों में सुनहरे टायल्स लगवाएँगे, ताकि किसानों और उनके हितों के बीच मिट्टी न आ सके। और तब तक मारीच की तरह भेष बदलकर जनता को सत्ता के खिलाफ बरगलाता रहे, जब तक जनता इस मारीच रूपी विपक्ष को धोखे से असली तीर मारकर चित नहीं कर देती।

विपक्ष को चाहिए कि सत्ता ऐसे दर्जनों विधेयक रोज लेकर आए, जो कभी किसान विरोधी हो तो कभी युवा विरोधी हों, चाहे वह फैसला फासिस्ट हो, चाहे एनार्किस्ट हो। और जब सरकार के इन फैसलों के परिणाम (दुष्परिणाम) विपक्ष के मन मुताबिक़ आने शुरू हों तो जनता में सरकार के प्रति खूब आक्रोश पैदा हो। जनता सरकार के इन कानूनों से जमकर कुपित हो और अगले चुनाव में जनता हँसी – ख़ुशी विपक्ष को सत्ता सौंप दे।

यह विपक्ष का बड़प्पन ही है कि केंद्र सरकार की इमेज के लिए सदन में खुद लड़ रहा है, दंगा कर रहा है, माइक तोड़ रहा है…संसद में विशेषाधिकारों के बीच गुंडागर्दी और बाहर गाँधीगर्दी कर रहा है और सरकार के बजाए लोगों के बीच अपनी ही इमेज खराब कर रहा है। ऊपरवाला ऐसा विपक्ष डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर ने ‘इलेवन चिनपिंग’ तक को दे।

लेकिन मानो इस विपक्ष की बुद्धि नेहरू के नमक में ऑक्सीकृत होकर घुल चुकी है। यह है कि सत्ता पक्ष की छवि खराब होने ही नहीं देता और फिर कयामत के दिन EVM का रवीश रोना रोता है।

बुलडोजर नहीं, अब डाइनामाइट से उड़ा दिया जाएगा अतीक अहमद का कोल्ड स्टोरेज, अब तक 11 सम्पत्तियाँ जमींदोज

उत्तर प्रदेश में माफिया घोषित किए गए पूर्व सांसद अतीक अहमद की बेनामी सम्पत्तियों को योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एक-एक कर के जमींदोज किया जा रहा है। अब तक उसकी अवैध सम्पत्तियों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा था लेकिन अब इसके लिए डायनामाइट से विस्फोट का सहारा लिया जाएगा। पिछले 2 सप्ताह में प्रयागराज में अतीक अहमद की 11 सम्पत्तियों को ध्वस्त किया जा चुका है।

साथ ही अतीक अहमद की 10 सम्पत्तियों को सीज कर के जब्त भी कर लिया गया है। अब प्रशासन उसकी कुछ इमारतों को डायनामाइट लगा कर बारूद के जरिए ध्वस्त करेगा। इसके लिए तैयारियाँ चालू हैं। उसकी करोड़ों की इमारतों को धूल में मिलाने के लिए डायनामाइट का सहारा लिया जाएगा। इस बात की तैयारी की जा रही है कि इससे आसपास के लोगों को कोई परेशानी न हो और दूसरों की सम्पत्तियों को कोई नुकसान न पहुँचे।

इसके लिए विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई है। उनकी निगरानी में ही इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। प्रयागराज में तमाम जगहों पर अतीक अहमद और उसके परिवार के लोगों की काफी अवैध जमीनें हैं। प्रयागराज से 20 किलोमीटर दूर अंदावा में उसकी 4 बीघा जमीन है। यहाँ 10,000 स्क्वायर मीटर के क्षेत्र में अतीक अहमद ने कोल्ड स्टोरेज बनवा रखे हैं। ये 5 मंजिला कोल्ड स्टोरेज चार हिस्सों में बनाया गया है।

बताया जाता है कि न सिर्फ प्रयागराज बल्कि आसपास के कई जिलों में यही सबसे बड़ा कोल्ड स्टोरेज है। इसे अतीक अहमद और उसके परिजनों का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है क्योंकि इस कोल्ड स्टोरेज की कीमत करोड़ों में है और इसके किराए से हर महीने उन लोगों को लाखों रुपए की आमदनी होती है। ‘एबीपी न्यूज़’ की खबर के अनुसार, ये भूमि अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन के नाम पर रजिस्टर्ड है।

इसके निर्माण के लिए विकास प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। बिना नक़्शे के बने इस कोल्ड स्टोरेज को हाल ही में अवैध घोषित कर के इसे ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए थे। बुलडोजर के इस्तेमाल के बावजूद कई दिनों में इसका 10% हिस्सा भी नहीं गिर पाया है, जिसके बाद अब इसके लिए नई रणनीति बनाई गई है। अब रिमोट के माध्यम से इसे डायनामाइट से मिट्टी के ढेर में बदल दिया जाएगा।

इसके लिए पूरे इलाक़े को खाली कराया जाएगा क्योंकि इसके आसपास कोई नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्र में कुछ दिनों पहले एक इमारत को इसी तरीके से जमींदोज किया गया था, इसीलिए उस कार्य को अंजाम देने वाले विशेषज्ञों से संपर्क साधा गया है। यूपी में ये एक तरह का पहला मौका होगा। बुलडोजर से ज्यादा समय लगेगा, इसीलिए ये रणनीति कारगर होगी। सीएम योगी राज्य में माफियाओं के जाल को ख़त्म करने के मामले में सख्त हैं।

उधर मऊ से भी खबर आई थी कि पूर्व सांसद मुख़्तार अंसारी पर कार्रवाई लगातार जारी है और उसकी व उसके गुर्गों की संपत्ति को एक-एक कर जब्त किया जा रहा है। उसके गिरोह IS-191 के लिए काम करने वाले करीबियों पर मऊ जनपद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक उसकी 25 वाहनों को सीज किया जा चुका है। सभी सीज किए वाहनों की कीमत 4.29 करोड़ रुपए बताई गई है। मऊ में हो रही इस कार्रवाई से हिस्ट्रीशीटर नेता की कमर टूट गई है।

‘…तुम्हारा हश्र भी कमलेश तिवारी जैसा होगा’ – UP में अपने ही विभाग के मंत्री को शकील अहमद ने दी धमकी

उत्तर प्रदेश में एक दर्जा प्राप्त मंत्री को ही जान से मार डालने की धमकी मिली है। बीज विकास निगम के उपाध्यक्ष और दर्जा प्राप्त मंत्री राजेश्वर सिंह को निगम के ही सहायक भंडार अधिकारी द्वारा धमकी दिए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि अधिकारी शकील अहमद ने राजेश्वर सिंह को धमकाया कि उनका भी हश्र हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी जैसा ही होगा। बता दें कि कमलेश तिवारी की कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी।

बख्शी का तालाब थाने में मंत्री राजेश्वर सिंह ने शकील अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। ये घटना शनिवार (सितम्बर 19, 2020) की है, जब मंत्री बीकेटी क्षेत्र में स्थित बीज निगम के गोदाम का निरीक्षण करने पहुँचे हुए थे। राजेश्वर सिंह का कहना है कि जब से उन्हें जिम्मेदारी मिली है, तब से वो लगातार निरीक्षण के लिए आते हैं। इसी क्रम में वो बीकेटी संयंत्र में भी गए थे। शकील अहमद वहाँ 23 सालों से तैनात हैं।

मंत्री ने बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने सहायक भण्डारण अधिकारी शकील अहमद को गोदाम से अनुपस्थित पाया। परियोजना अधिकारी एके राव ने 8 बार फोन कर के शकील अहमद से बात की और उन्हें उपस्थित होने को कहा। मंत्री ढाई घंटे तक वहाँ रहे लेकिन शकील अहमद लगातार बहानेबाजी करते रहे। वो कभी खुद के ऑफिस में होने तो कभी रास्ते में होने की बात कर रहे थे। बाद में उन्होंने गाड़ी पंक्चर होने का बहाना बनाया।

इसके बाद मंत्री राजेश्वर सिंह ने खुद शकील अहमद से बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त अधिकारी फोन पर ही उनके साथ गाली-गलौज पर उतर आया। उसने धमकाते हुए कहा, “ज्यादा भंडार व माल की जाँच के चक्कर में पड़ोगे तो तुम्हें जान से मारवा दूँगा।” उसने जाँच-पड़ताल बंद करने की धमकी देते हुए मंत्री से कहा कि वो उसका कुछ भी नहीं उखाड़ पाएँगे। इसके बाद उसने धमकाया कि राजेश्वर सिंह का वही हश्र होगा, जो लखनऊ में कमलेश तिवारी का हुआ था।

मंत्री ने जानकारी दी है कि अभी तक के निरीक्षण में भंडार में 56 करोड़ रुपए के घोटाले की बात सामने आई है। शकील अहमद के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, 506 और 507 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।

बीकेटी थाने की पुलिस का कहना है कि जाँच के बाद उसकी गिरफ़्तारी हो सकती है। ‘सुदर्शन न्यूज़’ ने इसे अपने अभियान से जोड़ कर देखते हुए जानकारी दी कि इसकी फाइल सीएम योगी के पास भेज दी गई है और इस मामले में 2 अधिकारी निलंबित हुए हैं।

जून 2020 में इसी तरह से जब पत्रकार अमीश देवगन ने अपने शो में ख्वाजा गरीब नवाज के लिए अनजाने में ‘आक्रांता’ शब्द का प्रयोग कर दिया था तो इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पे असामाजिक तत्वों द्वारा हिंदूवादी नेता का हश्र याद दिलाकर बताया जा रहा था कि पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ बोलकर एक गलती कमलेश तिवारी ने भी की थी। इससे पहले भी कई अन्य लोगों को कमलेश तिवारी का नाम लेकर धमकाया जा चुका है।

तुम मुस्लिम नहीं हो… तुम तो मोदी का जन्मदिन और राम मंदिर पर खुश होते हो: AltNews का ‘कूड़ा फैक्ट चेक’

मुस्लिम समूह या समूहों द्वारा जब भी कुछ ऐसा किए जाने की खबर आती है, जो लिबरल गैंग को पसंद नहीं आता – तो फैक्ट-चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाला ‘ऑल्ट न्यूज़ (AltNews)’ तुरंत सक्रिय हो जाता है। ऑल्ट न्यूज यह दिखाने लगता है कि अरे वो मुस्लिम थोड़े हैं, वो तो संघ का हिस्सा हैं।

यहाँ सवाल उठता है कि क्या अगर मुस्लिम समुदाय के लोग पीएम मोदी का समर्थन करते हैं या राम मंदिर पर ख़ुशी जताते हैं तो वो मुस्लिम नहीं रहे? AltNews तो यही कहता है। पीएम मोदी का जन्मदिन मनाने वाले मुस्लिम प्रोपेगेंडा पोर्टल AltNews के हिसाब से मुस्लिम नहीं है।

लिबरल गैंग की ओर से जिस तरह से कंगना रनौत और पायल घोष का महिला होने का सर्टिफिकेट कैंसल कर दिया गया है, ठीक उसी तरह AltNews मुस्लिमों के मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट कैन्सल करने में देर नहीं लगाता है। और तो और, इसे फैक्ट-चेक के नाम पर परोस भी देता है, अगर उन्होंने कभी भी कुछ ऐसी चीज का समर्थन किया हो – जो पीएम मोदी या भाजपा द्वारा किया गया है या मीडिया गिरोह के एजेंडे के खिलाफ जाता है।

AltNews में ऐसी ख़बरों को लिखने वाली पत्रकार का नाम पूजा चौधरी है, जो वहाँ सीनियर एडिटर हैं और आजकल अनुराग कश्यप का समर्थन करने में लगी हुई हैं। यहाँ हम ऐसी 4 ख़बरों को दिखा कर बताएँगे कि कैसे उनके द्वारा उन लोगों को मुस्लिम मानने से इनकार किया जा रहा है, जिन्होंने पीएम मोदी का समर्थन किया है। मुस्लिमों को मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट बाँटने वाले AltNews की कारस्तानियों की एक एक बानगी भर है।

गुरुवार (सितम्बर 17, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 70वाँ जन्मदिवस था और उस मौके पर निजामुद्दीन मरकज की इमारत के बाहर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इकट्ठा होकर उनके जन्मदिवस को मनाया। उस दौरान मौलाना सुहैब अंसारी ने कहा कि पिछले 6 वर्षों में पीएम मोदी ने कभी जाति-मजहब की बात न कर के 130 करोड़ भारतीयों की ही सिर्फ बात की है। मौलाना द्वारा पीएम मोदी का जन्मदिन मनाने का वीडियो भी वायरल हुआ।

मुस्लिम महिलाओं ने मनाया पीएम मोदी का जन्मदिन, AltNews ने रद्द किया सर्टिफिकेट

वीडियो वायरल होने के बाद AltNews तुरंत एक खबर के साथ आया। उसने ANI पर इस खबर को प्रकशित करने के लिए निशाना साधा। साथ ही उसने ‘याहू न्यूज़’ और ‘फाइनेंसियल टाइम्स’ की भी इस खबर को प्रकाशित करने के लिए आलोचना की।

AltNews ने उन लोगों को इसीलिए मुस्लिम मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि वो भी ‘भारतीय आवाम पार्टी’ का हिस्सा थे और उस पार्टी ने कभी RSS के साथ मंच साझा किया था और वो पार्टी पीएम मोदी का समर्थन करती है।

मुस्लिम महिलाओं ने राम मंदिर का किया समर्थन, AltNews ने फैलाया प्रोपेगेंडा

इस कथित फैक्ट-चेक में दावा किया गया कि हैदराबाद के मौलाना आज़ाद नेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर फिरोज बख्त अहमद ने भले ही पीएम मोदी को ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाला बताते हुए उनकी बड़ाई की हो लेकिन उनकी बात इसीलिए नहीं मानी जाएगी क्योंकि वो पहले से ही पीएम मोदी के समर्थक रहे हैं। चूँकि वो संघ से जुड़े ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ के लिए लेख लिखते हैं, इसलिए फैक्ट-चेक पोर्टल के लिए वो मुस्लिम नहीं हैं।

मुस्लिमों ने केक काट कर मनाई बकरीद, फिर चला फैक्ट-चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा

इसी तरह कुछ मुस्लिम महिलाओं ने ‘कसम खुदा की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएँगे’ का नारा देते हुए अयोध्या में राम मंदिर का समर्थन किया था। ये खबर नवम्बर 2018 में मेरठ से आई थी। यहाँ भी AltNews ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाली दोनों महिलाओं के ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ और ‘राष्ट्रीय एकता मिशन’ से जुड़े होने की बात करते हुए उनका मुस्लिम होना ही रद्द कर दिया। चूँकि इन महिलाओं ने भाजपा का समर्थन किया था, इसलिए AltNews इन्हें मुस्लिम नहीं मानता?

AltNews की कारस्तानियों का नमूना

इसी तरह लखनऊ में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा केक काट कर बकरीद मनाने की बात सामने आई। बता दें कि बकरीद पर कई लोग जीवहत्या न करने की बात करते हैं क्योंकि उस दिन लाखों जानवरों को काटा जाता है। यहाँ भी प्रोपेगेंडा पोर्टल ने दावा कर दिया कि मीडिया पोर्टल ऐसा दिखाना चाह रहे हैं कि लखनऊ में सारे मुस्लिमों ने ऐसा किया, जबकि सच्चाई ये नहीं है। कारण- इनमें से कुछ ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ से जुड़े थे।

इन घटनाओं से पता चलता है कि फैक्ट-चेक के नाम पर ‘वो तो पहले से ही भाजपा समर्थक हैं’ और ‘उनका संगठन तो संघ से जुड़ा हुआ है’ लिख कर मुस्लिमों के मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट रद्द किया जा सकता है- अगर उन्होंने पीएम मोदी का जन्मदिन मनाया हो, बकरीद पर शाकाहार को बढ़ावा दिया हो और राम मंदिर का समर्थन किया हो। ऐसा करने पर उन्हें मुस्लिम नहीं लिखा जाना चाहिए, ये AltNews के फैक्ट-चेक का सार है।

ज्ञात हो कि इस पोर्टल का संस्थापक ज़ुबैर खुद एक बच्ची की प्रताड़ना के मामले में आरोपित है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। बाद में उसे कोर्ट से राहत मिली। इस मामले में ट्विटर को भी बाल आयोग ने नोटिस भेजा था।