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निलंबित AAP सांसद संजय सिंह ने टीवी पर स्वीकारा कि उन्होंने उपाध्यक्ष का माइक तोड़ा, कहा- लोकतंत्र की रक्षा कर रहे थे

संसद में उपद्रवी व्यवहार के कारण एक सप्ताह के लिए निलंबित किए जाने के बाद AAP के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आज (सितंबर 22, 2020) को राष्ट्रीय टेलीविजन पर अनायास ही स्वीकार कर लिया कि संसद में कृषि बिल पर पर हंगामे के बीच उन्होंने सदन के उपाध्यक्ष का माइक तोड़ दिया।

हालाँकि, संजय सिंह ने अपने अनियंत्रित व्यवहार का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसा लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया।

संजय सिंह को सीएनएन न्यूज 18 के एक पत्रकार के साथ एक साक्षात्कार में उनके असभ्य व्यवहार के बारे में सुना गया। पत्रकार से बात करते हुए संजय सिंह कहते हैं, “मैं मानता हूँ कि मैं मेज पर चढ़ा था। मैं यह भी स्वीकार करता हूँ कि मैंने माइक तोड़ा, लेकिन मैंने जो कुछ भी किया, वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसा किया, लोकतंत्र की हत्या को रोकने के लिए किया।”

यह पूछे जाने पर वेंकैया नायडू ने कहा कि निलंबित सांसदों में से किसी को भी अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है, इसी वजह से उन्हें निलंबित किया गया, AAP नेता संजय सिंह ने खुद और अन्य विधायकों का बचाव करते हुए कहा कि वे ‘लोकतंत्र को बचाने’ की कोशिश कर रहे थे।

संजय सिंह ने कहा, “यह सरकार की गलती है। उन्होंने कृषि बिलों को जबरन पारित करके लोकतंत्र की हत्या की है। यह एक संवैधानिक नियम और परंपरा है कि भले ही एक ही सदस्य विभाजन वोट की माँग करे, तो उन्हें यह करने की जरूरत है।”

गौरतलब है कि राज्यसभा ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को संजय सिंह समेत 8 विपक्षी सांसदों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया। इस दौरान वो सदन की कार्यवाही में भी हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इनको असंसदीय व्यवहार के लिए दोषी पाया गया था। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जिन सांसदों को सस्पेंड किया, उसमें संजय सिंह के अलावा डेरेक ओब्रायन, राजू सातव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन, सैयद नज़ीर हुसैन और एलमरान करीम के नाम शामिल हैं।

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की ड्यूटी पर मार्शल के साथ मारपीट की वीडियो क्लिप कल वायरल हो गई थी। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “संसद में मार्शल का गला दबाकर मारते संजय सिंह। बाद में घूँसों से मार्शल पर हमला किया।” वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ वह दुखद, शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण था।

एक यूजर प्रशांत पटेल उमराव ने ट्वीट कर कहा था, “संजय सिंह ने राज्यसभा में मार्शल का गला दबाया और घूँसों से मार्शल पर हमला किया। माइक तोड़ना, बिल की कॉपी फाड़ना और सभापति की टेबल पर अभद्रता करके डेरेक ओ ब्रायन व संजय ने अपनी पुरानी आदतों का परिचय दिया है। इनका यह कृत्य किसी भी प्रकार से विद्वत राज्यसभा के अनुकूल नहीं है।”

बता दें कि राज्यसभा में बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए थे। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया।

भारत के आगे एक बार फिर नतमस्तक हुआ नेपाल: विवादित नक्‍शे वाली किताब पर PM ओली ने लगाई रोक

नेपाल की केपी ओली सरकार ने देश के विवादित नक्‍शे वाली किताब के वितरण पर रोक लगा दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने श‍िक्षा मंत्रालय की ओर से जारी इस किताब के विषयवस्‍तु पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इसके बाद नेपाली कैबिनेट ने श‍िक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह न केवल इस किताब का वितरण रोके बल्कि उसके प्रकाशन पर भी रोक लगाए। नेपाली कैबिनेट के इस फैसले से शिक्षा मंत्री गिरिराज मणि पोखरल को करारा झटका लगा है।

काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने कहा था कि इस किताब में कई तथ्‍यात्‍मक ग़ल्तियाँ और ‘अनुचित’ कंटेंट है, इस वजह से किताब के प्रकाशन पर रोक लगाई गई है। कानून मंत्री श‍िव माया ने कहा, “हमने यह निष्‍कर्ष निकाला है कि किताब के वितरण पर रोक लगा दी जाए।” माया ने माना कि कई गलत तथ्‍यों के साथ संवेदनशील मुद्दों पर किताब का प्रकाशन गलत कदम था।

नेपाल की एजुकेशन मिनिस्ट्री ने कुछ दिन पहले इस विवादित किताब को लॉन्च किया था और इसे सेकंडरी स्कूल के स्टूडेंट्स के लिए रेफरेंस बुक कहा गया था। नेपाल के एजुकेशन मिनिस्टर गिरिराज मनी पोखरेल ने 15 सितंबर को 110 पेज की यह किताब ‘सेल्फ स्टडी मटीरियल ऑन नेपाल्स टेरिटरी एंड बॉर्डर’ रिलीज की। इसमें मुख्य तौर पर भारत के साथ नेपाल के सीमा विवाद का जिक्र है और बताया गया है कि भारत के कई इलाके नेपाल का हिस्सा हैं।

इस किताब में नेपाल का नया एरिया 147,641.28 स्क्वायर किलोमीटर दिखाया गया है, जिसमें 460.28 स्क्वायर किलोमीटर एरिया कालापानी का है। नेपाल के नए पॉलिटिकल मैप में भी भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पयाधुरा एरिया को अपना बताया गया है। इस किताब की प्रस्तावना खुद नेपाल के एजुकेशन मिनिस्टर ने लिखी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि किस तरह उन्होंने 24 साल पहले कालापानी, लिुपलेख और लिम्पयाधुरा से भारतीय सेना को हटाने के लिए कैंपेन किया था।

नेपाल के सीनियर पॉलिटिकल जर्नलिस्ट बिनोद घीमीरे ने काठमांडू रिपोर्ट में कहा है कि जो नया मैप नेपाल सरकार ने जारी किया था, वहीं इस किताब में भी है लेकिन लगता है कि पॉलिटिकल सर्कल में इस किताब की प्रस्तावना पर ज्यादा आपत्ति है, जिसमें अनडिप्लोमेटिक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

लैंड मैनेजमेंट मिनिस्ट्री का भी कहना है कि इसमें कई जगहों पर गलत और असंवेदनशील टिप्पणी की गई है। मिनिस्ट्री के मुताबिक अभी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का पूरा एरिया का नाम अब तक पब्लिश नहीं किया है और उससे पहले ही किताब छापना ठीक नहीं है।

बिनोद घीमीरे ने कहा कि यह लगता है कि इस किताब से विदेश मंत्रालय भी खुश नहीं है क्योंकि यह डिप्लोमेसी के लिहाज से भी सही नहीं है। नेपाल में कई एक्सपर्ट्स भी इस किताब के छापने के वक्त को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनके मुताबिक ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे वक्त में जब भारत-नेपाल के बीच डिप्लोमेटिक बातचीत कई महीनों से रुक गई थी, ऐसे में इस तरह का कदम भारत-नेपाल के बीच रिश्ते खराब करने वाला होगा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने इस किताब पर रोक लगाकर इसका ख्याल रखा है कि भारत-नेपाल के बीच रिश्ते खट्टे न हों।

बता दें कि भारत और नेपाल के बीच मई में सीमा विवाद पैदा हो गया था। इस बीच नेपाल सरकार ने बच्चों की एक किताब में विवादित नक्शा प्रकाशित किया है। यही नहीं, इसमें भारत के साथ सीमा विवाद का भी जिक्र है। नेपाल के इस कदम से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत को झटका पहुँचने की आशंका पैदा हो गई थी।

नोटबंदी और कृषि बिल के लिए एक ही शख्स के इंटरव्यू के वायरल दावे को ANI एडिटर ने नकारा, कॉन्ग्रेस ने फैलाया ‘झूठ’

इन दिनों सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि समाचार एजेंसी ANI ने हाल ही में पारित किए गए किसान बिल और 2016 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नोटबंदी के लिए एक ही व्यक्ति का इंटरव्यू लिया। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक विनय कुमार डोकानिया ने एक समान दिखने वाले दो व्यक्तियों की तस्वीरें शेयर करते हुए आरोप लगाया कि ANI ने किसान बिल के लिए उसी व्यक्ति का साक्षात्कार लिया, जिसने 2016 में नोटबंदी की सराहना की थी। ये तस्वीरे काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

Fake tweet by INC social media co-ordinator

ANI की प्रधान संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा इस दावे का सख्ती से खंडन किया गया। उन्होंने दावा किया कि तस्वीरें दो अलग-अलग व्यक्तियों की थी। डोकानिया झूठ बोल रहे थे।

हालाँकि, ट्वीट और भी ज्यादा वायरल तब हो गया जब दिल्ली कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष अभिषेक दत्त ने डोकानिया के ट्वीट का हवाला देते हुए स्मिता प्रकाश से पूछा कि ट्वीट का सच क्या है। ANI के प्रधान संपादक ने जवाब दिया कि उनके सहयोगी ने फर्जी ट्वीट के साथ विवाद शुरू किया और बाकी लोगों ने इसे शेयर किया।

दत्त ने कहा कि अगर यह ट्वीट फर्जी था तो वह इसे जल्द से जल्द हटा देंगे। हालाँकि, स्मिता प्रकाश के स्पष्ट स्पष्टीकरण के बावजूद, इस लेख को लिखने के समय तक ट्वीट को नहीं हटाया गया है। इसके बजाय, एएनआई के विरोधियों द्वारा ट्विटर पर ट्वीट को व्यापक रूप से साझा किया गया है।

लोगों ने स्मिता प्रकाश के कार्य की नैतिकता पर भी सवाल उठाए। वैभव विशाल नाम के एक ट्विटर यूजर ने कहा कि वह व्यक्ति किसान की तरह बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। उसने नए बनियान, नए गमछे आदि पहन रखे थे। इसके साथ ही वैभव ने स्मिता से अपनी टीम से सवाल करने के लिए भी कहा।

इस पर स्मिता प्रकाश ने चुटकी लेते हुए व्यक्ति से माफी माँगी कि एक शख्स भूखे किसान की छवि में फिट नहीं बैठता है। इसके बाद एएनआई द्वारा इंटरव्यू लिए गए किसानों की छवियों को शेयर करते हुए, वैभव विशाल ने कहा कि एएनआई को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

शब्दों की जंग और भी ज्यादा तब छिड़ गई, जब सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फर्जी ट्वीट को शेयर करते हुए नकली आरोपों के लिए स्मिता प्रकाश से स्पष्टीकरण या खंडन माँगा। ट्विटर यूजर ने ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि एएनआई अपने आकाओं के लिए यह सब कर रही है लेकिन उन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया। 

इस तिरस्कारपूर्ण टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए स्मिता प्रकाश ने वरिष्ठ अधिकारी की खिंचाई करते हुए उन्हें एक ‘कॉपी पेस्ट कलाकार’ कहा, जो कल्पना से तथ्य को अलग नहीं कर सकते और बिना सत्यापन के दूसरों पर आरोप लगा सकते थे। थापर ने स्मिता प्रकाश द्वारा जारी स्पष्टीकरण के लिए आभार व्यक्त किया, लेकिन उनके गुस्से के लिए उनसे सवाल किया।

स्मिता ने जवाब दिया, “हाँ, आपने मुझे अपने ट्वीट में ‘पाखंडी’ और ऐसी अन्य चीजें कही। मैं उतना ही वापस दे सकती हूँ जितना मुझे मिलता है। चूँकि आपने वर्दी पहनी थी, इसलिए आपको एक विरोधी की सराहना करनी चाहिए।”

समाचार एजेंसी एएनआई पर समय-समय पर हमले होते रहते हैं, जो ज्यादातर प्रोपेगेंडिस्ट द्वारा किया जाता है। वो न्यूज एजेंसी पर ‘propaganda’ outlet  होने का आरोप लगाते हैं, वहीं, वे आमतौर पर एक और समाचार एजेंसी, PTI को पीएम मोदी जैसे नेताओं की छवि को खराब दिखाने और फर्जी तस्वीर शेयर करने के लिए फ्री पास दे देते हैं।

इस साल अगस्त में, PTI को भारत में कोरोना वायरस मामलों की कुल संख्या पर पीएम मोदी को गलत बताते हुए पाया गया था। उससे पहले, जून में, पीटीआई ने चीनी राजदूत सुन वेइदॉन्ग का साक्षात्कार लिया, , जिसमें उन्होंने गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच टकराव के लिए भारत को दोषी ठहराया। 

ड्रग तस्कर केशवानी ने पूछताछ में लिया दीया मिर्जा का नाम: NCB बाकी सितारों के साथ उन्हें भी जल्द भेजेगी समन

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग एंगल सामने आने के बाद अब बॉलीवुड के कई सितारों का नाम धीरे-धीरे एनसीबी की लिस्ट में शामिल हो रहा है। दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान के बाद अब एनसीबी के निशाने पर बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा का नाम है।

दीया का नाम पूछताछ के दौरान ड्रग तस्कर अनुज केशवानी ने लिया है। केशवानी ने बताया कि दीया की मैनेजर ड्रग्स खरीदती थी। उन्होंने इसके सबूत भी दिए हैं। अब इस मामले में एनसीबी जल्द ही दीया मिर्जा को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एनसीबी ड्रग्स ऐंगल की जाँच कर रही है। इससे पहले खबर आई थी कि दीपिका की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने समन भेजा है।

इससे पहले इस मामले में रिया चक्रवर्ती, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आ चुका है। खबर है कि सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत इसी हफ्ते समन भेजा जाएगा। इनके साथ सिमोन खंबाटा और रकुलप्रीत का नाम भी आ रहा है। 

रिया चक्रवर्ती ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया था कि उन्होंने सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुलप्रीत सिंह और सुशांत के साथ लोनावला में पार्टी की थी। NCB ने सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व बिजनेस मैनेजर श्रुति मोदी और टैलेंट मैनेजर जया शाह से भी पूछताछ की है।

जया शाह के कई एक्ट्रेस के साथ चैट सामने आए हैं, जिसमें वो ड्रग्स की बात कर रही हैं। दीपिका पादुकोण के मैनेजर करिश्मा प्रकाश का जया शाह के साथ एक फोटो सामने आया है। हालाँकि फिलहाल ये साफ नहीं हो पाया है कि करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने क्यों तलब किया है।

वहीं कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का भी खुलासा किया था। इसमें बॉलीवुड के कई सितारे जाँच के घेरे में आ सकते हैं। इस चैट में बॉलीवुड के 5 टॉप ऐक्टर्स के नाम सामने आए हैं। चैट के दौरान जो नाम दिख रहे हैं वह सब एक अक्षर (जैसे- N,J,S,D,K) में हैं। इस चैट में ड्रग्स के लेन-देन की बात हुई है। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। अब बताया जा रहा है कि ड्रग चैट की D यानी दीपिका पादुकोण हैं और जिस K से ‘माल’ यानी ड्रग्स मॉंग रही हैं, वह असल में करिश्मा हैं।

व्यंग्य: रवीश जी दुबरा गए हैं, एतना चिंता हो रहा है देस का कि का कहें महाराज!

नमस्कार, मैं बकैत कुमार!

अभी जीडीपी के सदमे से उबरे नहीं थे कि किसानों पर हमला बोल दिया गया। भारत का युवा तो आईपिल, सॉरी IPL, फ्री में कैसे देखें उस पर सर्च कर रहा है। उसी गूगल में, उसी उँगली से लिखे कि ‘जीडीपी पर बकैत कुमार की राय’ तो मेरा लेख मिल जाएगा। मटीरियल तो मैं रोज बनाता हूँ, नोट्स की तरह उपलब्ध कराता हूँ। प्वाइंट-वाइज चाहिए तो वो भी दे दूँगा, लेकिन युवा वर्ग सो रहा है। उसको पढ़ना है मेरा फेसबुक पोस्ट, लेकिन पढ़ कर खाली गरियाता है, और भाग जाता है। ऐसे जागेगा भारत?

फिर कहते हैं ‘बकैत जी, आप ही की बकैती से उम्मीद है। उम्मीद से तो हम भी बैठे थे मई 2019 में, कि युवाओं के लिए इतने पोस्ट लिखे, स्टूडियो से कैम्पेनिंग की, रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीवी, R&DTV को हिन्दी में भी टॉप टेन से बाहर करा दिया… किस लिए? भक्तों की इतनी गालियाँ सुनी, किस लिए? इसीलिए न कि वापस भाजपा छोड़ कर कोई भी आ जाए तो हम लोगों का भी चैनल जो है ‘एक्सक्लूसिव’ जानकारी निकाल कर टीआरपी पा जाएगा। हमको भी तो मन है कि कोई कैबिनेट मिनिस्टर बरखा टाइप बदलवा कर देखें! लेकिन जा रे जमाना, ये होने नहीं दिया। मजनूँ! साला जलता है हमसे!

खैर, युवा सोता रहा और मोदी ने एक और रिफॉर्म, मेरा मतलब है कि हमला, कर दिया। नोटबंदी से राहुल गाँधी अभी भी त्रस्त है, आज भी राहुल गाँधी जो भी वीडियो बनाता है, एक बार नोटबंदी पर जरूर बोलता है। आप ऐसे क्रिएटिव आदमी को वोट नहीं देते जो चार साल बाद भी डीमोनेटाइजेशन रट रहा है, लेकिन मोदी को देना है। काहे? काहे कि शौचालय बनवा दिया, गैस दिलवा दिया, बत्ती लगवा दिया, जीवन सुधार दिया… ठीक है कि जीवन सुधार दिया लेकिन एक आम आदमी के जीवन में संघर्ष ही तो है। वही तो उसके अस्तित्व की परिभाषा का आधारबिन्दु है और आपने वह भी खींच लिया। ये किस तरह की सरकार है?

जीएसटी से क्या हुआ? वन नेशन वन टैक्स का मतलब तो यही होता है न कि जितना टैक्स आटा पर उतनी ही ‘चेभरोलीट’ की गाड़ी पर। जब वो नहीं कर सके तो काहे का जीएसटी, ‘एक देश, एक टैक्स’। लेकिन युवा वर्ग जो है वो सो रहा है, वो IPL का शेड्यूल ढूँढ रहा है कि शाम में किस का मैच है। एक तो वैसहिए हमारा R&DTV चैनल नहीं देखता था कोई, अब ये कोरोना के टाइम में क्रिकेट हो रहा है। नहीं, ठीके है। जब ऊपर से ही कुआँ में ही भाँग मिला दिया है तब और कर भी क्या सकते हैं।

अब देखिए किसान वाला बिल आया है। ऊपर से सब ठीक लगता है कि किसान को विकल्प हो गया, वो अपनी उपज किसको बेचे, कहाँ बेचे। लेकिन गहराई में जाने से पता चलता है कि एक गरीब किसान को सरकार कन्फ्यूज करना चाहती है कि वो कहाँ बेचे। पहले सिस्टम ठीक था कि एक जगह जाना है, गेहूँ-मकई सब बेच देना है। पैसा भी तय होता थ, दलाली भी तय थी। अब, ये नई खुराफात सूझी मोदी को कि कृषि को भी उदारवादी बनाना है। योगी तो इनसे उदारवादी बने नहीं आज तक, कृषि को बनाने जा रहे हैं।

आप यह सोचिए कि ये सरकार दलालों को खत्म करना चाहती है! दलालों से समस्या क्या है? कॉन्ग्रेसी सत्ता की दलाली तो लम्बे समय तक मेरा चैनल, मेरे सहकर्मी आदि करते रहे हैं। इसी से पेट चलता है। बिना पेमेंट के कर रहा हूँ, कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी तक में भविष्य ढूँढ रहा हूँ, इससे बड़ी दलाली और क्या होगी? लेकिन मोदी सरकार दलालों के पीछे ही पड़ गई है।

आप सोचिए कि दलाली जैसा इनोवेटिव कोई चीज है? दिल्ली में देखिए कि मोमो की दुकान से ज्यादा प्रॉपर्टी डीलर हैं। सोफा पर बैठे रहते हैं, मकान किसी का, चाहिए किसी को, और आधे महीने का रेंट ले लेते हैं। कल को इस पर बिल ले आना और हन्नी-लक्की सब घर बैठेंगे फिर। क्या मेहनत नहीं करते दलाल? राडिया टेप में सुनिए हमारी मेहनत। धूप में खड़े रहते हैं, छाती जलती रहती है, आत्मा धिक्कारती है कि रे बकैतबा, राहुल गाँधी को कैसे कर लेता है डिफेंड… लेकिन मजाल है कि चेहरे पर मुस्कुराहट के अलाव एक शिकन तक आ जाए जब डिम्पलधारी राहुल जी सामने हों।

किसान लोग सीधे लोग होते हैं। अब कहा जा रहा है कि वो कॉन्ट्रैक्ट साइन करें और खेती करें। बताइए आप! किसान खेती करेगा कि कॉन्ट्रैक्ट साइन करेगा? फिर मोदी कह देगा कि किसान को एमबीए कर लेना चाहिए ताकि वो समझ सके कि कॉन्ट्रैक्ट में क्या लिखा हुआ है। किसान तो गरीब होते हैं, उनको क्या मतलब कि वो चार पैसे ज्यादा कमा लें। ज्यादा पैसे कमाएगा, तो वो फ्रिज खरीद लेगा, एसी लगा लेगा, डबल बेड पर गद्दा बिछा लेगा और स्मार्टवाच से स्लीप ट्रैकिंग करेगा कि हे एप्पल वाच जी महाराज, हमको गहरी नींद आई कि नहीं, ये बता दो।

फिर आप सोचिए कि ‘चिड़ियों के जगने से पहले खाट छोड़ उठ चला किसान’ वाली कविता का क्या होगा? क्या आपको नहीं लगता कि मोदी के ये किसान वाले बिल साहित्य विरोधी हैं? सोचिए कि किसान शब्द सुनते ही कैसी छवि मन में उभरती है: एक नरकंकाल, जिस पर थोड़ी चमड़ी हो, दिखने में कोयला जैसा काला हो, मैली धोती को घुटने से ऊपर चढ़ाए हो, और भवों के ऊपर एक हाथ रख कर बादल की राह देख रहा हो।

मोदी ने क्या किया? मोदी ने इस ऐतिहासिक और सर्वकालिक लोकप्रिय छवि को बदलने की कोशिश की है। अब किसान जो है वो ऐसा गरीब टाइप नहीं दिखेगा। वो समान कहीं और बेच लिया करेगा। वो मंडी के आढ़तियों से ब्याज पर पैसे ले कर उसी आढ़त में, कम तौल पर वाले तराजू की वैज्ञानिकता पर अपनी उपज को नहीं बेच पाएगा। ये एक युग की समाप्ति जैसा है।

आप ही सोचिए कि कल्कि अवतार हुआ भी नहीं और मोदी युग की समाप्ति करवा रहा है। स्वयं को हिन्दू हृदय सम्राट कहलवाने वाला आदमी विष्णु भगवान को ही चुनौती दे रहा है। कह रहा है कि कलियुग में तुम्हें आने ही नहीं देंगे, युग ही बदल देंगे। क्या यह हिन्दू-विरोधी विधेयक नहीं है?

एक समाज के तौर पर हम कहाँ जा रहे हैं? धरती घूम रही है और हम भी घूम रहे हैं। इसी धरती पर मोदी हमें घुमा रहा है। जबकि लेहरू जी द्वारा भारत को दिए गए विज्ञान की सौगात यही कहती है किसान को किसान ही रहने दो, उसको व्यापारी मत बनाओ वरना कॉन्ग्रेस के द्वारा प्रतिपादित ऊष्मप्रवैगिकी के प्रथम नियम के अनुसार, भारत में किसान और गरीब न तो बढ़ते हैं, न कम होते हैं, वो बस कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा अपनी अवस्था त्यागने का प्रलोभन पा सकते हैं।

मोदी ने इस वैज्ञानिक बात को बदलने की कोशिश की है। किसान अब व्यापारी हो जाएगा। आप ही सोचिए फिर व्यापारी क्या करेगा? व्यापारी तो एक खेल भी हुआ करता था जिसमें लोग कलकत्ता जाने पर किराया लेते थे, और दो बार जाने पर ज्यादा किराया लेते थे। अब मैं कलकत्ता नहीं जा पाता, न ही वहाँ की खबरें दिखा पाता हूँ क्योंकि दीदी किराया तो लेती ही है, टीएमसी के लोग साथ में खर्चा-पानी भी दे देते हैं।

लेकिन बात समझ में आती है जब आप इस पर मनन-चिंतन करते हैं। बनिया आदमी बनियावृत्ति में ही यकीन रखता है। वो तो कहेगा ही कि गेहूँ ज्यादा उपजा लिए तो बेच लो। यहाँ मत बेचो, वहाँ बेचो जहाँ पैसा ज्यादा मिलता है। इस आदमी के लिए सब चीज बस पैसा ही है। पैसा, जबकि शास्त्रों के अनुसार, हाथ का मैल है। आखिर किसानों को हाथ का मैल क्यों दिलवाना चाहता है मोदी? कोरोना के समय में जब बीस सेकेंड तक हाथ धोना चाहिए, तब मोदी जी कह रहे हैं कि हाथ का मैल घर में रखो।

ओहो! अब समझ में आया! रिलायंस वाले हैंडवाश और सेनिटायजर भी तो बेचते हैं।

नमस्कार!

आयकर विभाग ने उद्धव ठाकरे और उनके बेटे के साथ ही शरद पवार और उनकी बेटी को भेजा नोटिस, गलत जानकारी साझा करने के आरोप

आयकर विभाग ने NCP के शरद पवार को नोटिस भेजा है। यह नोटिस उन्हें पिछले 3 चुनावों के लिए दायर अपने चुनावी हलफनामों पर स्पष्टीकरण माँगने के लिए भेजा गया है। शरद पवार के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, बेटे आदित्य ठाकरे और शरद पवार की बेटी, सांसद सुप्रिया सुले को भी आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेजे गए हैं।

इस मुद्दे पर बोलते हुए एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, “मुझे अपने चुनावी हलफनामे के बारे में आयकर विभाग से नोटिस मिला। चुनाव आयोग के निर्देश पर, आयकर ने 2009, 2014 और 2020 के लिए चुनावी हलफनामों पर एक नोटिस भेजा है। आईटी विभाग ने सुप्रिया सुले को अपने अंतिम 3 चुनाव हलफनामों का विवरण देने के लिए भी कहा है। ऐसा लगता है कि आयकर विभाग में कुछ लोगों से ज्यादा प्यार है।”

बता दें कि पिछले दिनों चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से उद्धव और आदित्य ठाकरे के साथ ही सुप्रिया सुले के खिलाफ प्राप्त उन शिकायतों की जाँच करने को कहा था, जिनमें उन पर लोकसभा / विधानसभा चुनावों के लिए अपने हलफनामे में गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगा था। इसके एक दिन बाद पार्टी ने इसे ‘नियमित प्रक्रिया’ बताया था।

शिवसेना मंत्री अनिल परब ने कहा था, “आयकर प्राधिकरण के साथ एक हलफनामे में दी गई जानकारी को क्रॉस-चेक करना एक नियमित प्रक्रिया है। चुनाव आयोग और आयकर विभाग आम तौर पर जानकारी साझा करते हैं, इसलिए मुद्दे में कोई नई बात नहीं है।” उन्होंने ही उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे दोनों के चुनावी हलफनामे तैयार किए थे।

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक भी इससे हैरान नहीं थे। इसे एक ‘नियमित प्रक्रिया’ के रूप में चित्रित करते हुए, उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी के लिए एक उम्मीदवार के आयकर रिटर्न में हलफनामे में दर्ज जानकारी को सत्यापित करना सामान्य था। मलिक ने जोर देकर कहा, “यदि कोई विशिष्ट प्रश्न है, तो हम उसका उत्तर देंगे।”

गौरतलब है कि ठाकरे पिता-पुत्र द्वारा दायर हलफनामों में कुछ गंभीर विसंगतियाँ सामने आई थी। RTI कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के डेटा में विरोधाभास का हवाला दिया था। एक जो बड़ी विसंगति सामने आई थी, वह थी आदित्य के चुनावी हलफनामे में बैंक खाते का गायब होना, जिसका उल्लेख उद्धव के हलफनामे में किया गया था।

उद्धव के हलफनामे में पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे का बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ज्वाइंट अकाउंट की जानकारी दी गई थी। इसमें 9,52,568 लाख रुपए जमा होने की बात कही गई थी। हालाँकि, विधानसभा चुनाव के दौरान सौंपे गए आदित्य के शपथ पत्र में इस अकाउंट का उल्लेख नहीं था। कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों ठाकरे के पास HUF (Hindu Undivided Family) कैटेगरी के तहत शेयर रखने की तारीखें भी अलग-अलग थी।

PM मोदी के जन्मदिन पर अपमानजनक वीडियो किया वायरल, सोनू खान को UP पुलिस ने किया अरेस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर अभद्र व अपमानजनक टिप्पणी करने वाले आरोपित को उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर पुलिस ने आज (सितंबर 22, 2020) गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित युवक की पहचान सोनू खान के रूप में हुई है। सोनू पर आरोप था कि इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अपमानजनक व अभद्र टिप्पणी वाला संदेश व्हॉट्सएप पर वायरल किया।

मिर्जापुर पुलिस ने यह जानकारी ट्विटर पर शेयर करके दी। उन्होंने आरोपित की गिरफ्तारी होने के बाद की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र व अपमान जनक टिप्पणी व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने वाला अपराधी गिरफ्तार।”

ट्वीट में साझा जानकारी के अनुसार, सोनू खान को आज उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से उसका वह फोन भी बरामद किया गया है, जिससे उसने प्रधानमंत्री मोदी पर अपमानजनक संदेश वायरल किया। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 153ए, 501, 505 (2) और आईटी एक्ट धारा 66 में मामला दर्ज किया है।

गौरतलब है कि इससे पहले मिर्जा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में वॉट्सऐप पर वायरल की गई अभद्र टिप्पणी का समर्थन करने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया था। उससे पहले पुलिस अभद्र टिप्पणी करने वाले एक आरोपित को जेल भेज चुकी थी।

थाना मिर्जापुर एसओ वीरेशराज गिरी ने बताया था कि गाँव मिर्जापुर के रहने वाले अनुज सेन ने बेहट के गाँव बबैल के बुजुर्ग निवासी तालिब मलिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तालिब मलिक पर आरोप था कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हुए वॉट्सऐप पर अभद्र और अमानवीय टिप्पणी की थी। पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

तालिब से पहले पुलिस ने इसी मामले में बहेड़ा निवासी आरोपित राजेश को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और उनके मोबाइल भी अपने पास ले लिए थे। इसी तरह अभी हाल में एक आबिद हुसैन नाम का युवक भी गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि उसने फेसबुक पर पीएम मोदी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की। जिस पर कई स्थानीय लोगों ने शिकायत दर्ज करवाते हुए उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की थी।

‘यूपी में फिल्म सिटी से टूटेगा गिरोह विशेष का आधिपत्य’: CM योगी ने फ़िल्मी हस्तियों के साथ की बैठक, ब्लूप्रिंट तैयार

उत्तर प्रदेश (यूपी) के नोएडा में फिल्म सिटी के निर्माण के लिए कवायद तेज हो गई है और इसके लिए ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहल कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास से ही भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों से बातचीत की, जिनमें कई फिल्म निर्देशक, अभिनेता-अभिनेत्री और संगीतकार शामिल थे। सीएम योगी ने इस दौरान फिल्म सिटी को लेकर सभी की राय जानी और सभी को काफी ध्यान से सुना।

इस बैठक में सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी सौंदर्या, फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, अभिनेता अनुपम खेर व परेश रावल, गायक अनूप जलोटा, कैलाश खेर व उदित नारायण और गीतकार मनोज मुंतसिर शामिल थे। इस बैठक में वरिष्ठ वयोवृद्ध कहानीकार के विजयेंद्र प्रसाद भी शामिल हुए, जिन्होंने ‘बाहुबली’, ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘मणिकर्णिका’ जैसी सुपरहिट फिल्मों की कहानियाँ लिखी हैं। वो देश के सबसे बड़े निर्देशकों में से एक एसएस राजामौली के पिता हैं।

फिल्म उद्योग से जुड़े विनोद बच्चन और ‘तान्हाजी’ के निर्देशक ओम राउत भी इस बैठक में शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन दिग्गज फ़िल्मी हस्तियों ने सीएम योगी के समक्ष अपनी बात रखी, जो अधिकारियों की पूरी टीम के साथ उनलोगों को सुन रहे थे। बताते चलें कि नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा प्रशासन की तरफ से सीएम योगी को जमीन की उपलब्धता का पूरा ब्यौरा भेज दिया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी सम्बद्ध लोगों से राय लेकर ये तय करेंगे कि इन तीनों स्थलों में से फिल्म सिटी के निर्माण कहाँ किया जाए। मुंबई सहित सभी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों ने इस घोषणा का स्वागत किया है। मंगलवार (सितम्बर 22, 2020) को हुई बैठक में राजू श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण से हिंदी पट्टी को ज्यादा प्रमुखता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सतीश कौशिक ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा सिनेमा हॉल्स बनाने से ये होगा कि जो फ़िल्में बनेगी, वो लोगों तक अच्छे तरीके से पहुँचेंगी। वहीं अनूप जलोटा ने कहा कि हिंदी पट्टी के जो महान लोग हैं, उनपर इधर और फ़िल्में बन सकती हैं जो मुंबई में नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि ये फिल्म सिटी कमाल की बनेगी और दूसरी से अच्छी बनेगी क्योंकि यहाँ दक्षिण से भी लोग आ जाएँगे। राजू श्रीवास्तव ने भी अपने चुटकुलों के जरिए अपनी बात रखी।

हमने ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ जैसी फ़िल्में बना चुके विवेक अग्निहोत्री से बात की, जो इस बैठक में न सिर्फ मौजूद थे बल्कि उन्होंने सीएम योगी को अपने विचारों से भी अवगत कराते हुए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि काफी कुछ करने की घोषणाएँ तो बहुत लोग करते हैं लेकिन सीएम योगी ने इन चीजों से आगे बढ़ते हुए घोषणाओं को जल्द से जल्द अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू की है।

विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि वो उनलोगों में थे, जिन्हें यूपी सरकार की तरफ से सबसे पहले ही इस बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने सभी उपस्थित हस्तियों से उनके सुझाव माँगे, जिसके बाद ववेक अग्निहोत्री ने बैठक में कहा कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में हिंदी पट्टी की कहानियाँ ठीक से नहीं आ पाती हैं और यहाँ से फिल्म इंडस्ट्री में जाने वालों को मुंबई ही जाना पड़ता है, जिसमें से अधिकतर इतना खर्च करने में सक्षम नहीं हैं।

बकौल विवेक अग्निहोत्री, उन्होंने बैठक में कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को संघर्ष करने के लिए मुंबई जाने की बाध्यता ख़त्म हो जाएगी और वो यहीं फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बना सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि एक राजनीतिक समस्या भी खड़ी हो गई है, जिसमे एक गिरोह विशेष के लोगों का आधिपत्य भी टूटेगा क्योंकि गाँवों से जो लोग आएँगे, वो ग्रामीण जगत की अच्छी कहानियाँ लेकर आएँगे, जिन्हें मुंबई के शहरी मानसिकता वाले फ़िल्मकार पसंद नहीं करते।

उन्होंने कहा कि वो पिछले 7 वर्षों से इसके लिए संघर्ष कर रहे थे और उन्होंने कई लोगों को इससे जोड़ा है। उन्होंने बताया कि सीएम योगी ने सभी लोगों की बातों को न सिर्फ ध्यान से सुना, बल्कि सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी। कई अन्य लोगों ने भी अपनी राय रखी। किसी ने यूपी में सिनेमा हॉल्स बढ़ाने की व्यवस्था करने की बात की तो किसी ने सिनेमा को लेकर एक यूनिवर्सिटी बनाने का सुझाव दिया। यूपी में वीएफएक्स के लिए सेंटर बनाने की भी माँग उठी।

विवेक अग्निहोत्री ने बैठक में सीएम योगी के रुख के बारे में बात करते हुए कहा कि वो कम से कम समय में उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए 1000 एकड़ की भूमि की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही गई है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि ये फिल्म सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। इसके लिए पूरी योजना तैयार कर ली गई है। बैठक में उपस्थित लोगों को नक्शों और डायग्राम्स के जरिए इसका पूरा ब्लूप्रिंट दिखाया गया।

इसके लिए ब्लूप्रिंट बनाने से आगे भी कदम बढ़ा दिया गया है और अधिकारियों को इस काम के लिए लगा भी दिया गया है। फिल्म सिटी के निर्माण के सम्बन्ध में निर्देशक मधुर भंडारकर और भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रहे रवि किशन ने सीएम आवास जाकर योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही बॉलीवुड में प्रतिभाओं को दबाने की बातें चल रही है, जिसके आलोक में इस फिल्म सिटी की घोषणा से सभी उत्साहित हैं।

जल्द ही इस फिल्म सिटी के लोकेशन को लेकर घोषणा होगी। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कई लोगों ने आवाज़ उठाई थी कि यूपी-बिहार जैसे राज्यों से मुंबई जाने वालों को वहाँ उचित सम्मान नहीं मिलता है और कई तो वहाँ के माहौल में घुल-मिल भी नहीं पाते हैं। जिस तरह से बॉलीवुड में ड्रग्स के जंजाल को लेकर एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं, यूपी में फिल्म सिटी से हिंदी पट्टी को एक नई पहचान मिलनी तय है।

मुजम्मिल पाशा की मीटिंग, PFI और SDPI को हिंसा का निर्देश: NIA ने बेंगलुरु दंगे की प्लानिंग का किया पर्दाफाश

बेंगलुरु हिंसा मामले में जाँच को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को SDPI नेता मुजम्मिल पाशा को ‘भीड़ को उकसाने’ के लिए नामित किया। पाशा ने पूर्वी बेंगलुरु के इलाकों में हिंसा भड़काई और डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर हमला किया।

NIA ने मंगलवार को जारी अपने बयान में कहा, “SDPI के राज्य सचिव मुजम्मिल पाशा ने पहले एक मीटिंग बुलाई थी और इसमें उसने PFI/SDPI के सदस्यों को भीड़ को भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उग्र भीड़ ने बेंगलुरु शहर के अंतर्गत आने वाले डीजे हल्ली, केजी हल्ली और पुलकेशी नगर इलाकों में दंगा भड़काया।”

NIA ने आगे यह भी कहा, कॉन्ग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के कावेल बारासंडा में 11 अगस्त को उनके भतीजे नवीन द्वारा फेसबुक पर अपलोड किए गए कथित अपमानजनक पोस्ट के बाद 1000 से अधिक लोग वहाँ पर हो गए थे। नवीन के फेसबुक पोस्ट ने कथित तौर पर ‘मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं का अपमान’ किया था।

बेंगलुरु सिटी पुलिस द्वारा गठित एक जाँच दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की भूमिका की जाँच कर रही है। NIA ने दो मामले भी दर्ज किए हैं। एक मामला डीजे होली में दर्ज किया गया है, जबकि दूसरा मामला कदुगोदानाहल्ली (केजी हल्ली) पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व शहर महापौर अरुण प्रताप और स्थानीय नागरिक वार्ड पार्षद संपत राज के निजी सहायक सहित 300 से अधिक लोगों पर दंगे भड़काने और बर्बरता करने का आरोप लगाया गया था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पुलिस को पता चला था कि पाशा दंगाइयों के बीच रुपए बाँट रहा था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। सीसीटीवी फुटेज से ये भी पता चला था कि पुलिस पर किए गए हमले की साजिश पहले ही अच्छी तरह से रच ली गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए पहले ही दंगाइयों को पूरी साजिश के बारे में बता दिया गया था और वो व्यवस्थित तरीके से वहाँ आए थे।

कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने भी कहा था कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया दंगा था। उनकी मानें तो फेसबुक पोस्ट के 1 घंटे के भीतर ही हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने 200-300 गाड़ियाँ फूँक डाली व विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। मंत्री ने कहा था कि साजिशन इस हिंसा को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे SDPI का हाथ है।

सीएम येदियुरप्पा ने कहा था कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

अकरम, शेरखान सहित करीब 12 लोगों ने सरिया, डंडे से तोड़ी कपड़ा व्यापारी वीरेंद्र की टाँग: दुकान बेचकर चले जाने की देते थे धमकी

दिल्ली के संगम विहार इलाके से एक दुकानदार पर जानलेवा हमले की घटना सामने आई है। पीड़ित का नाम वीरेंद्र है। 19 सितंबर 2020 को दोपहर 12 बजे के आसपास वीरेंद्र के कपड़े की दुकान में घुस कर उन पर हमला बोला गया। यह हमला उनकी दुकान के पास कपड़े की ही दुकान करने वाले अकरम, शेर खान और आशु समेत 10-12 लोगों ने किया।

इस हमले में वीरेंद्र की टाँग टूट गई, कंधा फ्रैक्चर हो गया और उँगली में भी चोट आई। उनके अलावा हमलावरों ने उनके भाई बृजेश पर भी हमला किया। दोनों फिलहाल एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। अस्पताल ने उन्हें बताया है कि वीरेंद्र की टाँग में रॉड डाली जाएगी।

एम्स में भर्ती घायल वीरेंद्र का कहना है कि संगम विहार में उनकी कपड़ों की दुकान है और उसी के सामने दूसरी दुकान आशू और अकरम की है। वह लोग कई बार उन्हें दुकान बेचकर वहाँ से जाने की धमकी दे चुके हैं। वीरेंद्र ने ऑपइंडिया को घटना वाले दिन की जानकारी देते हुए बताया कि 19 सितंबर को उन्होंने अपनी दुकान के बाहर से जाते हुए एक कस्टमर को देखा, तो उसे अपनी दुकान में बुला लिया।

इसके बाद जब ग्राहक वहाँ से कपड़े लेकर चले गए, तो सामने वाली अकरम की दुकान से अकरम, आशू और शेरखान उनकी दुकान पर 10-12 लोगों के साथ आ गए और ग्राहक बुलाने के नाम पर मारपीट शुरू की। उनके पास लाठी-डंडे व सरिया था। सबने मिल कर वीरेंद्र पर हमला बोल दिया और कहने लगे ग्राहक बुलाता है।

अस्पताल में भर्ती वीरेंद्र

वीरेंद्र के मुताबिक, उनका घर दुकान से दो किलोमीटर दूर है जबकि अकरम का घर भी दुकान के पास है और उसके कई रिश्तेदार भी वहीं आस पास रहते हैं। ऐसे में दूसरे पक्ष ने इस बात का फायदा उठाया और उन्हें जान से मारने के इरादे से हमला किया। दूसरे माले पर बैठे वीरेंद्र के भाई बृजेश ने जब आवाजें सुनीं, तो वो नीचे बचाने आया, मगर उसे भी हमलावरों ने सरिया मार दिया।

वीरेंद्र कहते हैं, “वे कम से कम 12-15 लोग थे, हम दो मिल कर क्या कर लेते। उन्होंने टाँगो, कंधों और उंगली पर मारने के बाद हमारी दुकान से 30-40 हजार रुपए की नकदी भी गल्ले से निकाली। बाद का हमें कुछ भी याद नहीं है क्योंकि हम बेहोश हो गए थे।” वह कहते हैं कि जिन लोगों ने उन पर हमला किया उनमें से वह सिर्फ़ अकरम आशू और शेरखान को पहचानते हैं। मगर, यदि बाकी सबको सामने लेकर आया जाए, तो वह सबको पहचान लेंगे।

वीरेंद्र के भाई बृजेश भी पूरी घटना पर अपनी शिकायत में लिखते हैं कि जब हमला हुआ वह दूसरे माले पर ग्राहक को कपड़े दिखा रहे थे, तभी उन्हें चिल्लाने की आवाज आई। उन्होंने जाकर देखा तो दूसरी दुकान के लोग उनके भाई को मार रहे थे। उन्होंने बीच में जब रोकना चाहा तो उन पर भी हमला हुआ। शेरखान ने उन्हें सरिया मारी और अकरम ने हाथ-पैर में मारा। इसके अलावा आशू ने भी उनपे हमला किया। अब वह इस मामले पर सिर्फ़ कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर उस दिन उन्हें बीट वाले नहीं बचाते तो वह सब मिलकर उन दोनों भाइयों को मार डालते।

घटना के 2 दिन बाद शिकायत दर्ज

हमले में घायल वीरेंद्र की एम्स में भर्ती होने के बाद एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया था कि पूरा मामला 19 सितंबर का है लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। कोई उनका बयान लेने भी नहीं आया है। हालाँकि जब ऑपइंडिया ने उनको संपर्क किया तब पुलिस वहाँ पहुँच चुकी थी और उनका बयान दर्ज हो रहा था।

एफआईआर में बयान

शिकायत में कल ही इस मामले में एफआईआर की गई है। पुलिस ने पूरे मामले को धारा 323, 341 और 34 दर्ज किया है। यह एफआईआर वीरेंद्र के भाई बृजेश की शिकायत उपर्युक्त बयान पे हुई है। मामले में एक्शन को लेकर ऑपइंडिया ने संगम विहार थाने में संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई।