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मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास और उमर भी अपराधी घोषित, सरकारी जमीन कब्जा कर बनवाई थी मस्जिद

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद माफिया मुख्तार अंसारी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। खबर है कि यूपी पुलिस ने अंसारी की संपत्ति पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने के बाद उसके दोनों बेटों अब्बास और उमर को अपराधी करार देते हुए उन पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है।

इससे पहले पिछले साल भी लखनऊ पुलिस ने अब्बास अंसारी के घर पर छापेमारी की थी। उस समय उसके घर से 6 बंदूक और 4,431 कारतूस बरामद हुए थे। हालाँकि, ताजा कार्रवाई लखनऊ पुलिस ने मुख्तार और उसके बेटों पर डालीबाग में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कराने के मुकदमे में की है। इसके संबंध में जियामऊ के लेखपाल सुरजन लाल ने शिकायत दर्ज कराई थी।

अपनी शिकायत में सुरजन लाल ने आरोप लगाया था कि जिस जमीन पर मुख्तार के बेटों ने टावर बनवाए थे, वह मोहम्मद वसीम की थी। वसीम 1952 में पाकिस्तान चले गए तो संपत्ति निष्क्रांत के रूप में दर्ज हो गई। उक्त जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाकर मुख्तार के बेटों ने वहाँ कब्जा करके दो टावर का निर्माण करवा लिया और जमीन पर एक मस्जिद भी बना ली।

पुलिस कमिश्नर की ओर से जारी आदेश के मुताबिक मुख़्तार अंसारी के बेटों उमर और अब्बास पर 25-25 हज़ार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। दोनों के खिलाफ कुछ दिन पहले अवैध कब्जे के मामले में एफआईआर हुई थी। लखनऊ में उनके अवैध कब्जे वाली दो इमारतों को ढहा भी दिया गया था।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से यूपी प्रशासन लगातार मुख्तार अंसारी के रसूख को खत्म करने के लिए उसकी संपत्ति और उसके करीबियों की संपत्तियों पर कार्रवाई कर रहा है। 27 अगस्त से लेकर 9 अगस्त यानी मात्र 12 दिनों में मुख्तार अंसारी पर 4 बड़ी कार्रवाई कर चुकी है।

सबसे पहले प्रशासन ने 27 अगस्त को माफिया मुख्तार अंसारी की डालीबाग कॉलोनी में स्थित अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया और ऐलान किया कि इमारत ध्वस्त करने में जो खर्चा आया है वह भी मुख्तार अंसारी से वसूला जाएगा। इसके बाद 28 अगस्त को मऊ में उसके करीबी रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर प्रशासन ने कार्रवाई की और बुलडोजर चला कर उसे गिरा दिया। खबरों में इस बूचड़खाने की कीमत 40 लाख बताई गई।

फिर 3 सितंबर को मऊ में ही प्रशासन ने अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे सुरेश सिंह की अवैध रूप से कमाई संपत्ति पर शिकंजा कसा और उसकी 1 करोड़ 5 लाख 40 हजार मूल्य की संपत्ति जब्त की गई। इसमें कई वाहन शामिल थे। 9 सितंबर की खबर के मुताबिक ताबड़तोड़ कार्रवाई के चलते उसे 25 वाहन सीज किए जा चुके थे। सभी वाहनों की कीमत 4. 29 करोड़ थी।

बॉलीवुड की पार्टी में पार्टनर बदलने से ले कर ड्रग्स लेना आम बात है: पत्रकार रेनिल का वीडियो में खुलासा

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद जब कंगना रनौत बॉलीवुड का काला सच दुनिया के सामने लेकर आईं, तब उनकी आलोचना कई बड़े अभिनेताओं से लेकर राजनेताओं ने की। हालाँकि, इस बीच कई कलाकार उनके समर्थन में आवाज उठाते रहे।

अब सोशल मीडिया पर बॉलीवुड की काली दुनिया का सच उजागर करते एक ऐसे पत्रकार की पुरानी वीडियो सामने आई है, जिसने पहले ही एक शो में बात करते हुए बता दिया था कि बॉलीवुड की पार्टियों में न केवल ड्रग्स लेना आम बात है बल्कि एक ही रात में एक पार्टनर को बदलकर दूसरे पार्टनर के साथ जाना भी आम बात है।

सोशल मीडिया पर वायरल होती यह वीडियो जर्नलिस्ट रेनिल अब्राहिम की है। उन्होंने पिछले साल द रणवीर शो में इन बातों का खुलासा किया था। यूट्यूब पर यह वीडियो 6 सितंबर 2019 को ‘बीयर बाइसेप्स’ चैनल पर अपलोड हुई थी।

इसमें एक जगह रेनिल कहते सुने जा सकते हैं कि उनके लिए बॉलीवुड पार्टियों में यह सब देखना बेहद आम बात है। वो कहते हैं कि ऐसी पार्टियाँ कभी घर में तो कभी क्लब में होती हैं। और उनके कई ऐसे जानकार हैं, जो ऐसी पार्टियों में एक रात में ही एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर पर शिफ्ट हो जाते हैं।

रेनिल इन सब चीजों को सामान्य बताते हैं और कहते हैं कि ये सब वो हस्तियाँ भी करती हैं, जिनकी शादी हो चुकी है या वह एक 5-6 साल की मजबूत रिलेनशिप में हैं। वो आगे ऐसी पार्टियों में ड्रग्स सेवन पर भी खुलासा करते हैं। वह कहते हैं कि ऐसा होता जरूर है। लेकिन इसे हर कोई नहीं करता। मगर कुछ लोग हैं, जो ऐसा जरूर करते हैं।

इसके बाद वह एक वाकये का जिक्र करते हुए कहते हैं कि एक पार्टी में बहुत ज्यादा कोकिन शामिल की गई थी। उस पार्टी के लिए महिला यूएस से आई थी और उसने उनके साथ बैठी एक महिला एक्टर को देखकर यह कह दिया था कि तुम एक्टर क्यों हो? तुम और भी ‘बहुत कुछ’ कर सकती थी।

वह इस शो में एक बड़े स्टार के बेटे का नाम लिए बिना कहते हैं कि एक बार उन्होंने सेंटर टेबल पर चढ़कर लड़ाई शुरू कर दी थी। जिसे देख कर पत्रकार को भी लगा था कि आखिर ये सब क्या हो रहा है।

वीडियो जर्नलिस्ट रेनिल अब्राहिम बताते हैं कि बॉलीवुड की युवा जेनरेशन सोशल मीडिया पर अपनी छवि को लेकर बहुत सजग रहती है। एक तरह से उन्हें डर रहता है कि सोशल मीडिया के जरिए कुछ भी बाहर जा सकता है, इसलिए वह सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं करते।

शो में वह एक एक्टर के लड़के का जिक्र करते हैं और बताते हैं कि उन्हें ये बात कई लोगों से सुनने को मिली है कि कोई पहचान न होने के बावजूद भी उस एक्टर का लड़का फीमेल ब्लॉगर और मॉडल्स को मैसेज करता है और जब कोई उसके साथ सोने से मना कर देता है तो वो इस बात को अपने अपमान की तरह लेता है।

सोशल मीडिया पर इस क्लिप को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि वह लड़का जरूर अनिल कपूर का बेटा और सोनम कपूर का भाई हर्षवर्धन ही है।

यहाँ बता दें कि इस पूरे शो को सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड में यह सब इतना आम है कि एक पत्रकार अब इन चीजों को लेकर सहज हो गया है। वह ड्रग्स सेवन को आम बताता है और पार्टनर बदलने को उनकी चॉइस कहता है।

CM गहलोत जी… अपने ‘सबसे भ्रष्ट मंत्री, भ्रष्टाचार के माफिया’ को बर्खास्त करें: कॉन्ग्रेसी विधायक की चिट्ठी, मजे ले रही BJP

राजस्थान की राजनीति में उठा पटक भले ही टीवी में दिखनी बंद हो गई हो, मगर अंदरुनी गहमागहमी अभी भी चालू है। ताजा खबर है कि कोरोना वायरस को शराब से खत्म करने का दावा करने वाले राज्य के वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिख कर सबसे भ्रष्ट मंत्री को कैबिनेट से हटाने की बात कही है। साथ ही उस मंत्री को भ्रष्टाचार का माफिया भी बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भरत सिंह ने अपने पत्र में लिखा, “समाचार पत्रों में पढ़ा है कि आपने (सीएम अशोक गहलोत) प्रभारी मंत्रियों के जिलों में फेरबदल किया है। इसका कितना लाभ होगा, उसको परखने में समय लगेगा। इस बात की आवश्यकता है कि जनता में संदेश देने के लिए आप अपने मंत्रिमंडल के सबसे भ्रष्ट मंत्री को बर्खास्त करें। एक बार पहले भी आप मुख्यमंत्री रहते उनको हटा चुके हैं। यह मंत्री भ्रष्टाचार के माफिया हैं। इनका नाम लिखना आवश्यक नहीं समझता हूँ, गंदगी की बदबू नजदीक के लोगों को ज्यादा दुर्गंध देती है।”

14 सितंबर 2020 को भरत सिंह का लिखा पत्र

पत्र देख कर भाजपा नेताओं ने ली सीएम गहलोत की चुटकी

मुख्यमंत्री को लिखे हालिया पत्र के बाद भाजपा नेता इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर शेयर करके सीएम गहलोत को घेर रहे हैं। सतीश पुनिया ने पत्र साझा करते हुए लिखा, “यह लो जी, एकदम ताजा है और पक्का। जिम्मेदारी से कह सकता हूँ कि यह पत्र बीजेपी राजस्थान ने नहीं लिखवाया है, माखन चुराया किसने? कब? फिर भी बने हुए हैं, बनाए हुए हैं। अशोक गहलोत जी, इश्क के इम्तिहां और भी हैं…।”

वहीं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “लगता है मुख्यमंत्री जी द्वारा कृत फिल्म नकारा निकम्मा का भाग-2 ही जल्द ही रिलीज होने वाला है।”

पिछले साल भी भरत सिंह ने लिखा था पत्र

बता दें कि भले ही भरत सिंह ने अपने पत्र में किसी नेता का नाम न लिया हो। लेकिन उनके इशारों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह प्रमोद जैन भाया को मंत्रिमंडल से हटाने की बात कर रहे हैं। चूँकि प्रमोद जैन ही ऐसे पार्टी के राजनेता हैं, जिन्हें पिछली बार भी कैबिनेट से हटाया गया था।

राजस्‍थान कांग्रेस, राजस्‍थान कांग्रेस में सिर-फुटौव्‍वल, विधायक ने मंत्री पर लगाया भ्रष्‍टाचार का आरोप
पिछले साल सीएम गहलोत को लिखा पत्र

इसके अलावा उन्हीं पर भरत सिंह अक्सर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते रहते हैं। इससे पहले भी भरत सिंह ने सीएम अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में भी उन्होंने प्रमोद जैन भाया पर इशारों में भ्रष्टाचार के आरोप मढ़े थे। साथ ही खनिज विभाग में होने वाले भ्रष्टाचार के मामले में खनिज मंत्री यानी प्रमोद जैन को भ्रष्टाचार की गंगोत्री बताया था।

शराब से होगा कोरोना खत्म

याद दिला दें, सांगोद के विधायक भरत सिंह कुंदनपुर कॉन्ग्रेस के वही वरिष्ठ नेता हैं, जो मई में भी चर्चा में आए थे। उन्होंनें कोरोना वायरस के बीच प्रदेश में शराब की दुकानें खोलने की अपील सीएम गहलोत से की थी। उन्होंने इसके लिए सीएम को पत्र भी लिखा था। कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा था कि जब कोरोना वायरस हाथों को अल्कोहल से धोने पर साफ हो सकता है तो इसे पीने से गले का वायरस भी जरूर साफ हो जाएगा।

अपने पत्र में उन्होंने अवैध शराब के बढ़ते धंधे का मुद्दा उठाते हुए और लॉकडाउन के कारण होते आर्थिक घाटे का हवाला देते हुए सलाह दी थी कि सरकार शराब की दुकानें खोल दे। इस फैसले से पीने वालों को शराब मिलेगी और सरकार को राजस्व मिलेगा। उन्होंने कहा था, “जब अल्कोहल से हाथों को धोने से कोरोना वायरस साफ हो सकता है, तो शराब पीने से निश्चित रूप से गले का वायरस साफ हो जाएगा। अवैध शराब पीकर जान गँवाने से तो ये कहीं अच्छा है।”

मार्क्स चचा नहीं जानते थे कि पुलिस की लाठी से नास्तिक वामपंथियों का मजहब बाहर निकल आएगा

ऑन डिमांड एथीस्टों और पार्ट टाइम वामपंथियों से कार्ल मार्क्स चचा निराश हैं। मार्क्स चचा का कहना है कि वामपंथ और नास्तिकता ही इस सदी का सबसे बड़ा स्कैम है। कॉमरेड जब तक क्रांति-क्रांति चिल्लाता तब तक मार्क्स चचा को यकीन था कि यह आज नहीं तो कल आएगी। लेकिन एक सुबह क्रांतिकारी कॉमरेड का जो निकला, वह क्रांति नहीं बल्कि उसका मजहब था।

एक दिन कॉमरेड ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ चिल्लाने लगा तो मार्क्स चचा के मुँह से भी अपशब्द निकल पड़े। लेकिन मार्क्स चचा का सवाल आज भी यही है कि क्रांति की बातें करता युवा पुलिस और दंगों की जाँच का नाम आते ही मुस्लिम क्यों बन जाता है? पुलिस की लाठी में ऐसी कौन सी ताकत है, जो उसे देखते ही क्रांतिकारियों का मजहब बाहर निकल आता है।

मार्क्स चचा का कहना है कि जमानत के लिए किसी कॉमरेड को गर्भ ठहरना, मुस्लिम बन जाने से श्रेयस्कर है। मगर मार्क्स चचा को क्या पता था कि सर पर ओले पड़ते ही वामपंथ को ‘गुड बाय’ कहने की बारी हर वक्त किसी पितृसत्ता से लड़ती वोक-महिला की नहीं होगी। जब कोई उमर खालिद UAPA के तहत गिरफ्तार होगा तो उसके पास जमानत के लिए उसकी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट उसका दीन ही होगा।

याद कीजिए वह समय जब जेएनयू की फ्रीलांस प्रोटेस्टर, और ऑन डिमांड एथीस्ट, जिस पर चंदा भक्षी होने के भी आरोप रहे। शेहला रशीद ने जब शाह फैजल के साथ जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट को ज्वाइन किया था, तो अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ही उन्होंने इस्लामी नारे से की थी।

जब तक ये क्रांतिजीव जेएनयू जैसे संस्थान में फ़्रीलांस और ‘आजाद’ प्रोटेस्टर के रूप में पहचानी जाती है, तब तक ये वामपंथी स्वरुप में रहती है। ये जेएनयू में रहते वक़्त ‘अकेली, आवारा और आजाद’ है, लेकिन जम्मू कश्मीर पहुँचते ही हिजाब और बुर्क़े में नजर आई। और देखते ही देखते एक वामपंथन मुस्लिम बन गई।

दुर्भाग्यवश शेहला का राजनीतिक जीवन महज 7 माह ही चला लेकिन यह एक अच्छा उदाहरण था यह साबित करने के लिए कि एक वामपंथी होने से पहले और बाद भी एक मुस्लिम के भीतर उसका मजहब जिंदा रहता है।

यह वही शेहला रशीद थी, जो खुद को वामपंथन कहती रही। मगर जिस वामपंथ में धर्म-मजहब की कोई पहचान है ही नहीं, वो शेहला रशीद शाहीन बाग़ में नागरिकता कानून विरोधी रैलियों में, मुस्लिमों के मजहबी उन्मादी नारों की बात करते हुए कहती रही कि अगर आप उनसे शर्मिंदा हैं तो आप हमारे सहयोगी नहीं हैं। अगर आपको इन नारों से दिक्कत है, तो आप भी समस्या का ही हिस्सा हैं।

और इनके वो मजहबी नारे क्या थे? वो नारे थे: हिन्दुओं से आजादी, हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, नारा ए तकबीर अल्लाहु अकबर, तेरा मेरा रिश्ता क्या ला इलाहा इल्लल्लाह…

यही शेहला रशीद के सहयोगी और छात्र नेता उमर खालिद के साथ भी हुआ है। वह उमर खालिद, जो हमेशा से ही पोटेंशियल वामपंथी और पोटेंशियल मुस्लिम बना रहा, UAPA के तहत गिरफ्तारी होते ही पूरा मुस्लिम निकल आया।

नागरिकता कानून के विरोध से शुरू हुआ यह खेल हमेशा से ही मजहबी था। यहाँ तक कि शशि थरूर तक इस बात से नाराज थे और उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों को समझना चाहिए कि CAA/NRC के प्रदर्शन में ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या’ जैसे नारों की जगह नहीं है क्योंकि वहाँ अल्लाह को लाया जा रहा है। ये बात कई मुस्लिमों को नहीं पची क्योंकि उनके लिए हर प्रदर्शन विशुद्ध रूप से मजहबी है क्योंकि उनके लिए पहचान का मतलब भारतीयता, नागरिकता और सामान्य बातों से परे सिर्फ और सिर्फ इस्लाम है, उम्माह है, कौम है।

आश्चर्य यह है कि ‘एंटी एस्टेब्लिशमेंट’ की रोटियाँ सेकने वाले ये गिरोह, ‘हम लड़ेंगे साथी’ की कसमें खाने वाले ये गिरोह ‘आजादी की चिलम फूँकते इन गिरोहों का पुलिस और संस्थाओं का नाम आते ही सबसे पहले मजहब क्यों बाहर निकल आता है?

जिस तरह से पूर्वोत्तर दिल्ली इस साल की शुरुआत में ही हिन्दू-विरोधी दंगों से दहक उठी, वह मुगलकालीन दौर की याद दिलाता है। इस्लामी नारे सड़कों पर थे। लोगों ने खुलकर स्वीकार किया कि शाहीनबाग़ पूरी तरह से मजहबी आंदोलन है। इस शाहीनबाग़ की पटकथा में जो कुछ घटित हुआ वह सब कुछ ही समय सबके सामने आ गया।

दिल्ली पुलिस ने दंगों की जाँच की तो इसमें सिमी और पीएफआई की फंडिंग से लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। इसी में यह तथ्य भी सामने आया कि जेएनयू के ये कथित छात्रनेता दिल्ली दंगों की साजिशकर्ताओं के प्रत्यक्ष सम्पर्क में थे और इनके बीच दंगों, विरोध प्रदर्शनों को लेकर बन्द कमरों में रणनीति बना करती थी। यही उमर खालिद तब दिल्ली दंगों के प्रमुख आरोपित ताहिर हुसैन के भी सम्पर्क में था।

कुछ ही वर्ष पूर्व उमर खालिद को लेकर उसके कम्युनिस्ट साथियों ने दावे किए थे कि उमर खालिद मुस्लिम नहीं बल्कि, अन्य कॉमरेड्स की ही तरह सच्चा कम्युनिस्ट है। लेकिन जब-जब उमर खालिद विवादों में घिरा है और उसकी गिरफ्तारी की बात आई हैं, सबसे पहले उमर खालिद के भीतर का मजहब ही सामने रखा गया। इस बार फिर यह उमर खालिद इस्लाम का अनुयायी बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि दिल्ली दंगों में उसे उसके मजहब के कारण घसीटा जा रहा है।

खास बात यह है कि जब आम आदमी पार्टी का नेता ताहिर हुसैन पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा कसा जाने लगा, तब उसका भी सबसे पहले मजहब ही बाहर निकल आया था और समुदाय विशेष द्वारा खुद को अल्पंसख्यक बताकर निशाना बनाए जाने का पारंपरिक विक्टिम कार्ड खेला गया। जिस अमानतुल्लाह खान की पूरी सर्दियाँ शाहीनबाग़ के मंच से भड़काऊ इस्लामी नारे लगाते हुए गुजरी, वह भी यही कहता मिला कि ताहिर हुसैन को उसके मजहब की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। और कुछ ही दिन में खुद ताहिर हुसैन ने स्वीकार किया कि वो हिंदुओं को सबक सिखाना चाहता था।

वामपंथ की दयनीय मृत्यु

मार्क्सवाद खालिस अर्थशास्त्र से पैदा होकर एक अलग धर्म बनकर तैयार हुआ। ये कूप-मंडूक कम्युनिस्ट मार्क्सवादी किसी कट्टरपंथी मजहबी से भी ज्यादा उच्चकोटि के कट्टरपंथी हैं। खुद को विचारों का पुरुष सूक्त (पुरुषसूक्त, ऋग्वेद संहिता के दसवें मण्डल का एक प्रमुख सूक्त यानि मंत्र संग्रह) मानने वाले वामपंथ की यह वैचारिक मृत्यु दयनीय है।

कहाँ इस कॉमरेड को ‘आर्यों’ को विदेशी साबित करने में अपनी शक्ति का निवेश करना था और कहाँ वह अपने मजहब के प्रमाण पत्र बटोरता नजर आ रहा है। इन सब कॉमरेडों ने घोषणापत्र, यानी मेनिफेस्टो में धर्म को वामपंथ की परिधि से बाहर करने वाले कार्ल मार्क्स चचा की आत्मा को ठेस लगाई है। इनसे बेहतर तो शरजील इमाम था। सफूरा जरगर भी थी, लेकिन उसके नाम में उसका मजहब था और हाथों में प्रेग्नेंसी रिपोर्ट! मगर शरजील ने ना ही नास्तिकता का ढोंग किया और न ही कोई वामपंथ का मुखौटा चुना। उसने राजद्रोह के केस और गिरफ्तारी के बाद भी खुलकर अपने शब्दों को चुना और गर्व से कहा कि यह सब प्रगतिशील वामपंथ नहीं बल्कि इस्लामियत ही थी।

वामपंथ खुद को तार्किक बताता फिरता है, उसने ‘अन्धविश्वास’ से अपने हर संबंध को हमेशा नकारा है। लेकिन आज देखने को मिलता है कि आज क्रांतिजीव को वाद-विवाद, तर्क, अर्थशास्त्र, विज्ञान कुछ नहीं चाहिए, उसे अगर कुछ चाहिए तो सिर्फ क्रांति! यही क्रांति इसका धर्म है, यही कट्टरता ही इसका स्वभाव है और मौकापरस्ती ही इसका आखिरी ‘-इज़्म’ है।

BJP सांसद साध्वी प्रज्ञा को जिस कॉन्ग्रेसी MLA ने जिंदा जलाने की दी थी धमकी, कोरोना वायरस से हुई मौत

मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस विधायक गोवर्धन डांगी का गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में देहांत हो गया। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने ट्वीट किया कि ब्यावरा के विधायक गोवर्धन डांगी ने कोरोनो वायरस संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सैद जाफ़र ने कहा,

“डांगी कुछ दिन पहले कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे। उन्हें भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें गुरुग्राम के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंगलवार (15 सितंबर, 2020) सुबह उनका निधन हो गया।”

साध्वी प्रज्ञा को जिंदा जलाने की धमकी दी

दिवंगत कॉन्ग्रेस विधायक गोवर्धन डांगी ने भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जिंदा जलाने की खुलेआम धमकी दी थी। नवंबर 2019 में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ‘आतंकवादी’ कहे जाने के एक दिन बाद, ब्यावरा कॉन्ग्रेस के विधायक, गोवर्धन डांगी ने भोपाल के सांसद को धमकी देते हुए कहा था कि वह उन्हें जिंदा जला देंगे।

ब्यावरा के विधायक गोवर्धन डांगी ने तब कहा था:

“अगर वो मध्य प्रदेश की धरती पर कदम रखेंगी तो हम सिर्फ उनका पुतला नहीं जलाएँगे… हम उन्हें भी जिंदा जलाएँगे।”

इस धमकी के बाद, भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा भोपाल में एक पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठी थीं। उनकी माँग थी कि कॉन्ग्रेस के विधायक गोवर्धन डांगी के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। लेकिन तब राज्य में कमलनाथ की सरकार थी और सांसद की माँग को थाने में अनसुना कर दिया गया था।

ट्विटर ने उस वैज्ञानिक का किया अकाउंट सस्पेंड, जिसने COVID-19 वायरस के वुहान लैब में बनाने का किया ‘खुलासा’

चीन की वायरोलॉजिस्ट (विषाणु-वैज्ञानिक) डॉ ली-मेंग यान ने एक पेपर प्रकाशित किया। इस पेपर के अनुसार उन्होंने दावा किया कि कोरोनो वायरस को चीनी वैज्ञानिकों ने एक लैब (वुहान लैब) में बनाया था।

इस खुलासे और पेपर पब्लिश होने के बाद डॉ यान को प्रतिष्ठित हॉन्ग कॉन्ग विश्वविद्यालय में अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। जान बचाने के लिए उन्हें देश छोड़ कर भी भागना पड़ा।

रविवार (13 सितंबर, 2020) को डॉ यान ने अपने ट्विटर हैंडल से तीन अन्य चीनी वैज्ञानिकों के साथ सह-लेखक के रूप तैयार किया गया पेपर ट्वीट किया था। तभी तो लोग कमेंट में पूछना शुरू कर दिए थे कि इनके अकाउंट को सस्पेंड होने में कितना समय लगेगा!

और अंततः यह हो ही गया।

ट्विटर ने डॉ ली-मेंग यान के अकाउंट को सस्पेंड कर ही दिया। हालाँकि ट्विटर अकाउंट के सस्पेंड होने से पहले डॉ यान के लगभग 60,000 फॉलोवर हो गए थे।

डॉ यान के ट्विटर अकाउंट का कैशे पेज आप यहाँ देख सकते हैं।

विवाद क्यों?

विश्व भर में कोविड-19 पर शोध कर रहे अन्य वैज्ञानिक अभी तक डॉ ली-मेंग यान और उनके तीन सहकर्मियों द्वारा पब्लिश किए पेपर को ऑथेंटिक नहीं मान रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि इनके शोध पेपर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

दोहरा रवैया फिर उजागर: फेसबुक ने ‘ऊँ जय जगदीश हरे’ भजन को ‘Abusive’ बता अपलोड करने से रोका

फेसबुक का हिन्दुओं के प्रति दोहरा रवैया किसी से छुपा नहीं है। अभी हाल ही में गोपी कृष्ण नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर एक भजन डालने की कोशिश की, मगर फेसबुक ने उन्हें ये कहते हुए पोस्ट करने से मना कर दिया कि उनके द्वारा डाले जा रहे पोस्ट को कई लोगों ने अपमानजनक (अब्यूसिव) बताया है। इसलिए वह इसे फेसबुक पर अपलोड नहीं कर सकते हैं। बता दें कि गोपी कृष्ण ने अपने ट्वीट में लिखा कि वो ‘ऊँ जय जगदीश हरे’ भजन को अपलोड करना चाहते थे।

वैसे ये फेसबुक के लिए कोई नहीं बात नहीं है। इससे पहले भी फेसबुक अपना दोहरा रवैया प्रदर्शित कर चुका है। ये फेसबुक का इतिहास रहा है। फेसबुक पर कई लोगों को ‘सूअर’ लिखने से लेकर ‘जय श्री राम’ को अभिवादन स्वरूप लिखने तक के लिए ब्लॉक किया गया है। एक यूजर का कहना है कि आप अगर संस्कृत में कोई मंत्र लिखते हैं, और कोई उसे ‘हेट स्पीच’ कह कर रिपोर्ट कर दे, तो फेसबुक त्वरित कार्रवाई करते हुए आपका अकाउंट सस्पेंड कर देगा।

सुदर्शन नाम के एक यूजर ने ‘पुरबा’ और ‘पछुआ’ हवाओं के बारे में कुछ लिखा, जिसका और कोई संदर्भ नहीं, लेकिन उसके पोस्ट को हटा दिया गया था। सबसे मजेदार बात तो यह है कि अंकुर त्रिपाठी ने कहीं ‘जय श्री राम’ और ‘श्री अंजनेयम’ लिखा तो उसे कम्यूनिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ बता हटा दिया गया था। गुलशन पाहूजा की बात करें तो उन्होंने अनुच्छेद 370 हटने पर कश्मीर की स्थिति पर कुछ लिखा था और उनका अकाउंट तीन दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।

ये तो बस चंद उदाहरण हैं जहाँ फेसबुक की कम्युनिटी स्टैण्डर्ड की बातें फर्जी साबित हो जाती हैं कि वो रिपोर्ट हुए पोस्ट को जाँचते हैं, उसके बाद कार्रवाई करते हैं। अगर ये इन्हें जाँचते हैं, तो समझ में यही बात आती है कि इनकी टीम में नकारे लोग बैठे हुए हैं। अगर ये लोग नकारे और निकम्मे नहीं हैं, जिन्हें अपना काम ठीक से नहीं आता, तो फिर ये लोग धूर्त और पूर्वग्रहों से ग्रस्त कर्मचारी हैं। ऐसा बार-बार सुनने में आया है कि फेसबुक पर आप हिन्दू देवताओं को अपमान की बात, उनके धार्मिक प्रतीकों को अश्लील तरीके से दिखाने की बात करें, तस्वीरें लगाएँ, आपको कुछ नहीं होगा। वो पोस्ट वहीं रहेगा। लेकिन जैसे ही आप ऐसा कुछ डालते हैं जो समुदाय विशेष के बारे में है तो वहीं कम्युनिटी स्टैण्डर्ड आ जाता है।

बता दें कि फेसबुक हमारा डेटा लेता है, हमारी पसंद-नापसंद, हमारी तस्वीरों को, हमारे लेखों को, लिखने के तरीके को, हमारे कहीं आने-जाने को, हर बात को अपने डेटा सेंटर में रखता है। ये डेटा वो किसी पोलिटिकल पार्टी को बेचता है, किसी फूड चेन को, कपड़े की कम्पनी को, कॉस्मेटिक्स बनाने वाले को, बैंकों को, किसी को भी बेचता है।

यही कम्पनियाँ अपनी करतूतों से किसी देश में सत्ता परिवर्तन कराने की फिराक में रहती हैं, और कहीं ‘ऑर्गेनिक ट्रेंड’ के नाम पर अपने मालिक की विचारधारा को न्यूज ट्रेंड वाले सेक्शन में सबसे ऊपर दिखाती है। वहाँ वैसी खबरों को जगह दी जाती थी जो किसी विचारधारा, पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ हों।

IPL 2020: सौरव गांगुली ने साझा की शारजाह क्रिकेट स्टेडियम दौरे की तस्वीर, पाकिस्तानी खिलाड़ियों को किया ब्लर

इंडियन प्रीमियर लीग 2020 शुरू होने वाला है इसी कड़ी में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली यूएई स्थित शारजाह क्रिकेट स्टेडियम पहुँचे। कुल 3 अलग जगहों पर आईपीएल के मुकाबले होंगे जिसमें से एक शारजाह स्टेडियम भी है। सौरव गांगुली ने स्टेडियम पहुँच कर तैयारियों का जायज़ा लिया। उन्होंने इस दौरान एक तस्वीर भी ली और उसे अपने इन्स्टाग्राम पर साझा भी किया। तस्वीर के साथ लिखा, “मशहूर शारजाह स्टेडियम आईपीएल 2020 के आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने इस पूरी पोस्ट में कुल 3 तस्वीरें साझा की। 

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Famous Sharjah stadium all set to host IPL 2020

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सौरव गांगुली ने एक ऐसी तस्वीर साझा की जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के क्रिकेटर्स को धुंधला कर दिया। जिसके बाद उनकी इस तस्वीर पर नेटीजन्स ने जम कर प्रतिक्रिया दी। बीसीसीआई अध्यक्ष ने बैकग्राउंड में मौजूद जो तस्वीर ब्लर (धुंधली) की उसमें पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद, राशिद लतीफ़, मिस्बाह-उल-हक़, अज़हर महमूद, दानिश कनेरिया समेत अन्य खिलाड़ी मौजूद थे। 

जिस तस्वीर में सौरव गांगुली ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को ब्लर किया

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड के बीच रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे। इसकी एक सबसे बड़ी वजह थी सीमा पर पाकिस्तान की तरफ होने वाली गतिविधियाँ। भारत ने इस मामले पर पहले ही अपना मत साफ़ किया है। भारत का कहना है कि दोनों देशों की क्रिकेट टीम के बीच तब तक द्विपक्षीय शृंखला नहीं खेली जा सकती है जब तक दोनों देशों के बीच सीमा पर हालात सामान्य नहीं होते हैं। 

भारत ने पिछले 14 सालों के दौरान पाकिस्तान में एक भी टेस्ट शृंखला नहीं खेली है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी पिछले 8 सालों में भारत का कोई दौरा नहीं किया है। हालाँकि, दोनों टीम के बीच विश्व कप और चैम्पियंस ट्राफ़ी जैसे आईसीसी के मुकाबले हुए हैं। आईपीएल की बात करें तो सिर्फ साल 2008 में पाकिस्तान के खिलाड़ी इस टूर्नामेंट का हिस्सा बने थे। पाकिस्तान के कुल 11 खिलाड़ी साल 2008 के आईपीएल में शामिल होने वाली अलग-अलग टीम का हिस्सा बने थे। 

ख़बरों के मुताबिक़ आईपीएल के 13वें संस्करण का सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) कुल 120 देशों में किया जाएगा। पाकिस्तान उन 120 देशों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। सऊदी अरब की कुल 3 अलग जगहों पर आईपीएल के मुकाबले खेले जाएँगे जिसमें सौरव गांगुली ने शारजाह का दौरा कर लिया है। इसके बाद वह दो अलग जगहों, आबू धाबी और दुबई का दौरा भी करेंगे जहाँ अन्य मुकाबले होने हैं।  

बीसीसीआई अध्यक्ष 9 सितंबर को दुबई पहुँचे थे इसके बाद उन्होंने 6 दिन की अनिवार्य क्वारनटाइन अवधि पूरी की थी। शारजाह स्टेडियम में आईपीएल के कुल 12 मुकाबले खेले जाएँगे, 22 सितंबर को चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच टूर्नामेंट का पहला मुकाबला होगा। इसके पहले यहाँ भारत और पाकिस्तान के बीच कई अहम मुकाबले खेले जा चुके हैं।      

Fact Check: क्या पूरे देश में 25 सितंबर से फिर लागू होगा लॉकडाउन? जानिए क्या है इस वायरल खबर की सच्चाई

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच लॉकडाउन को फिर से लागू करने की अटकलें लगाई जा रही है। सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि सरकार जल्द ही एक बार फिर से लॉकडाउन लगाने जा रही है।

46 दिन का होगा लॉकडाउन 

वायरल हो रही खबर में कहा गया है कि आपदा विभाग के एक लेटरपैड पर सरकारी आदेश लिखा हुआ है कि ये लॉकडाउन 46 दिन का होगा। साथ ही कहा गया है कि एनडीएमए, योजना आयोग के साथ मिलकर पीएमओ और गृह मंत्रालय से गुजारिश करती है कि 25 सितंबर की रात से लॉकडाउन को लगा दिया जाए। हालाँकि इस दौरान सभी आवश्यक सेवाएँ पहले की तरह चलती रहेंगी।

Whatsapp forward during the rounds about the imminent lockdown

इसी तरह से इन दिनों सोशल मीडिया पर नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के नाम से एक सर्कुलर वायरल हो रहा है। इसमें बताया गया है कि एक बार फिर से 25 सितंबर से लॉकडाउन लगेगा।

Copy of alleged order being circulated on social media websites

वायरल हो रहे लेटर में लिखा है, “देश में कोरोना वायरस के मामलों को फैलने से रोकने और मृत्युदर को कम करने के लिए, योजना आयोग के साथ एनडीएमए भारत सरकार से आग्रह करता है और पीएमओ व गृह मंत्रालय को निर्देश देता है कि 25 सितंबर की आधी रात से 46 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया जाए। देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने के लिए एनडीएमए मंत्रालय को सूचना जारी कर रहा है।”

क्या कहता है पीआईबी का फैक्ट

हालाँकि, सरकार की तरफ से प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा किए गए फैक्ट चेक में इस खबर को फर्जी बताया गया है। पीआईबी फैक्ट चेक के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस संबंध में न तो कोई आदेश जारी किया है, न ही इस संबंध में कोई विचार विमर्श के लिए नोटिस जारी किया है। पीआईबी ने अपने ट्वीट में लिखा, “यह लेटर फेक है। NDMA ने फिर से लॉकडाउन लागू करने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है।”

गौरतलब है कि भारत में मार्च के अंत में देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था। सरकार ने कोरोना वायरस के मामलों की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लागू किया था। इसके बाद जून से कई फेज में लॉकडाउन को फिर से खोला गया। हालाँकि, स्कूल-कॉलेज अभी भी बंद हैं, जबकि मार्च महीने से बंद मेट्रो को एक हफ्ते पहले चलाने की हरी झंडी दी गई।

भारत में कोरोना वायरस के मरीजों का आँकड़ा 49 लाख के पार हो गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा आँकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में देश भर में 83,809 नए केस सामने आए हैं, वहीं 1,054 मरीजों ने जान गँवाई है। इस तरह कुल मरीजों का आँकड़ा 49,30,237 पार हो गया है। अभी 9,90,061 मरीजों का देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 38,59,400 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि मृतकों का आँकड़ा 80,776 पहुँच गया है।

सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में आरोपित रिया चक्रवर्ती के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ करेगी ED: रिपोर्ट्स

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूत्रों ने रिपब्लिक टीवी को बताया है कि एजेंसी सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में आरोपितों के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ करेगी। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनके पिता ने आरोप लगाया कि अभिनेता के अकाउंट से 15 करोड़ रुपए निकाले गए हैं। सुशांत के पिता की शिकायत के बाद ईडी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जाँच कर रही है। मीडिया सूत्रों का कहना है कि ईडी मामले पर शुक्रवार (सितंबर 18, 2020) को कार्रवाई कर सकती है।

रिया चक्रवर्ती को ड्रग कनेक्शन को लेकर NCB ने गिरफ्तार किया है। रिया की गिरफ्तारी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बता दें कि रिया चक्रवर्ती भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ ED द्वारा PMLA मामला दायर किया गया है, रिया के भाई शोविक चटर्जी 4 सितंबर से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रिमांड में है। 

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो द्वारा भी जाँच की जा रही है। NCB के अलावा, दोनों अन्य एजेंसियों ने आरोपित को एक से अधिक बार पूछताछ के लिए बुलाया है और सूत्रों ने कहा कि ED ‘निर्णायक चरण’ में है। गौरतलब है कि मुंबई सेशन कोर्ट ने पिछले दिनों रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती और अन्य लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिन्हें एनसीबी ने गिरफ्तार किया था। 

वहीं जाँच करते-करते एनसीबी की टीम एक टापू पर बने सुशांत के फार्महाउस तक जा पहुँची है। यहाँ एनसीबी की टीम ने एक व्‍यक्ति का बयान भी दर्ज किया है। व्‍यक्ति ने बताया है कि इसी फार्महाउस में रिया चक्रवर्ती सुशांत के साथ कई बार आईं। सुशांत यहाँ दोस्‍तों के साथ पार्टी भी करते थे।

ड्रग्‍स मामले में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार करने के बाद अब एनसीबी की टीम ने पवना डैम पर बने आपती गवंडे नामक टापू पर जाकर सुशांत के फार्महाउस पर जाँच करने पहुँची। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वहाँ एक बोटमैन ने एनसीबी की टीम को बताया कि रिया और सारा को उसने कई बार यहाँ सुशांत के साथ देखा है। उसके अनुसार सुशांत के साथ यहाँ श्रद्धा कपूर को भी देखा गया।

फार्महाउस के मैनेजर रईस ने आज तक को बताया कि सुशांत के फार्महाउस में पार्टीज होती थी जहाँ कई बॉलीवुड सितारे आते थे। मैनेजर ने सारा अली खान का नाम भी लिया। सारा के बाद ही रिया चक्रवर्ती फार्महाउस आईं। मैनेजर ने यह भी बताया क‍ि उन्होंने कभी सुशांत को ड्रग्स लेते नहीं देखा लेक‍िन उनकी पार्ट‍ियों में स्मोकिंग पेपर मँगाए जाते थे। आगे मैनेजर ने बताया कि अप्रैल में रिया का आना जाना शुरू हुआ था। 31 अप्रैल को फार्महाउस में बर्थडे पार्टी सेलिब्रेट किया गया था जिसमें रिया के माता पिता भी आए थे।