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कॉन्ग्रेस MP गौरव गोगोई की अंग्रेज बीवी का ISI से है कनेक्शन? असम CM की पोस्ट से छिड़ी बहस, दावा- जो लेते हैं जॉर्ज सोरोस से पैसा उनसे भी जुड़ा है कॉन्ग्रेस सांसद का NGO

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सांसद का नाम लिए बिना उनकी पत्नी की नागरिकता और उनके ISI से सम्बन्धों के आरोप लेकर भी बात की है। उन्होंने इससे उठे प्रश्नों का जवाब माँगा है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर असम मुख्यमंत्री ने लिखा, “ISI से संबंधों के आरोप, युवाओं के ब्रेनवॉश और उनको पाकिस्तानी दूतावास में कट्टरपंथी बनाने समेत पिछले 12 साल से भारतीय नागरिकता ना लेने पर उठे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, धर्मांतरण कार्टेल से जुड़ा होना और देश की सुरक्षा को अस्थिर करने के लिए जॉर्ज सोरोस समेत पैसा लेना ऐसी चिंताएँ हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।”

जहाँ हिमंत बिस्वा सरमा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ है कि वह कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के बारे में बात कर रहे थे। दोनों की शादी 20 13 में हुई थी। 12 साल बाद भी कोलबर्न ने अपना ब्रिटिश पासपोर्ट बरकरार रखा है। उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी सवाल उठाया कि एक सांसद की पत्नी को इतने लंबे समय तक विदेशी नागरिकता बनाए रखने की अनुमति क्यों दी गई है, जबकि राजनयिकों के लिए एक अलग नियम है। उन्होंने IFS अधिकारियों की विदेशी नागरिक से शादी को लेकर नियम पर बात की। इसके तहत उन्हें अनुमति लेनी होती है और उनके साथी को 6 महीने में नागरिकता लेनी होती है।

गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ वर्तमान में ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट के लिए काम कर रही हैं, जो जलवायु मुद्दों पर काम करता है। वह दिल्ली में क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर भी काम करती हैं।

असम के सीएम उन पर सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों का जिक्र कर रहे थे। इन आरोपों के अनुसार, एलिजाबेथ अली तौकीर शेख के जरिए ISI से जुड़ी हैं, जो CDKN के एशिया का डायरेक्टर है। उसने पाकिस्तान योजना आयोग में भी काम किया है। एलिजाबेथ ने पाकिस्तान में तौकीर शेख के साथ मिलकर काम किया।

गौरव गोगोई के NGO पर FCRA उल्लंघन का आरोप

इससे पहले गौरव गोगोई ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि मणिपुर में अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए भाजपा जॉर्ज सोरोस और उनके ओपन सोसाइटी फाउंडेशन का मुद्दा उठा रही है। दिलचस्प बात यह है कि गौरव गोगोई के सोरोस से पैसे लेने वाले संगठनों से संबंध हैं।

गौरव गोगोई फार्म 2 फूड के नाम के NGO के संस्थापक हैं। जोरहाट में स्थित इस NGO का सहयोगी नेशनल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (NFI) है। यह संगठन जॉर्ज सोरोस और अन्य डीप स्टेट से पैसा लेता है। NFI ने जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन, ओमिडयार नेटवर्क और रॉकफेलर फाउंडेशन को फंड देने वालों के रूप में बताया है।

ये सभी संगठन भारत सहित दुनिया भर में राष्ट्रवादी सरकारों के खिलाफ काम करने वाले डीप स्टेट के एसेट के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने कई भारत विरोधी अभियानों को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, फार्म 2 फूड को FCRA लाइसेंस नहीं मिला हुआ है। ऐसे में यह विदेशी चन्दा नहीं ले सकता।

इसके बावजूद, यह NGO विदेशी संगठनों के साथ काम कर रहा है, जिससे सवाल उठता है कि क्या समूह FCRA कानूनों का प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है। फार्म 2 फूड ने स्विस रे फाउंडेशन को भी अपने सहयोगी के तौर पर दिखाया है। स्विस रे द्वारा संचालित फाउंडेशन जलवायु और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर काम करता है।

इसकी वेबसाइट बताती है कि यह अन्य सहायता के अलावा अपने भागीदारों को फंड भी देता है। फार्म 2 फूड की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इसे उस वर्ष ₹1 लाख 80 हजार का डोनेशन और ₹14 लाख 74 हजार का चन्दा मिला। हालाँकि, इसमें पैसा देने वालों का नाम नहीं है। इसलिए, यह पता नहीं लगाया जा सकता कि इसे सीधे तौर पर कोई विदेशी फंडिंग मिली है या नहीं।

मुफ्त में चीजें मिलने से बढ़ रही कामचोरी: ‘चुनावी रेवड़ी’ पर बरसा सुप्रीम कोर्ट, कहा- उन्हें मुख्यधारा में शामिल करें; Freebies कल्चर पर PM मोदी भी कर चुके हैं आगाह

चुनावी रेवड़ी बाँटने की पीएम मोदी की चिंता पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अब मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 फरवरी 2025) को कहा कि चुनाव से पहले रेवड़ी बाँटने की प्रथा के कारण लोग काम नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें मुफ्त मे राशन और पैसा मिल रहा है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में नकदी बाँटने की खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

मुफ्त चीजें बाँटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधी ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों के आश्रय के अधिकार से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव से पहले मुफ्त चीजें देने की प्रथा पर असहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि बेघर लोगों को मुख्यधारा के समाज में शामिल किया जाना चाहिए।

जस्टिस गवई ने कहा, “दुर्भाग्य से इन मुफ्त सुविधाओं के कारण… लोग काम करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें मुफ्त राशन मिल रहा है। उन्हें बिना कोई काम किए ही राशि मिल रही है।” पीठ ने कहा, “हम उनके प्रति आपकी चिंता की सराहना करते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उन्हें समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाए और राष्ट्र के विकास में योगदान करने की अनुमति दी जाए।”

केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रही है, ताकि शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों को आश्रय प्रदान करने सहित कई मुद्दों का समाधान किया जा सके। इस पर पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि केंद्र के मिशन को लागू करने में कितना समय लगेगा। इस मामले की सुनवाई 6 सप्ताह बाद होगी।

दिल्ली हाई कोर्ट का नकदी बाँटने के मामले का सुनवाई से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (12 फरवरी 2025) को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा द्वारा BJP, आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में चुनावों में मतदाताओं को नकदी बाँटने के दलों के राजनीतिक वादों को ‘भ्रष्ट आचरण’ आचरण बताते हुए इस पर रोक लगाने की माँग की थी।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा। हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ मामले में इसी तरह का मामला लंबित है।

यह जनहित याचिका सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ढींगरा द्वारा दायर की गई थी, जो समय यान (सशक्त समाज) नामक संगठन के अध्यक्ष भी हैं। यह याचिका दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस ढींगरा की ओर से पेश वकील ने कहा कि राजनीतिक दल सरकारी खजाने की कीमत पर मुफ्त चीजें बेचने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा मौद्रिक योजनाओं की आड़ में मतदाताओं की स्पष्ट अनुमति के बिना डेटा एकत्र किया जाता है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील सुरुचि सूरी ने कहा कि इस मामले से संबंधित एक याचिका पहले ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि 2023 के आदेश के अनुसार इस मामले में तीन जजों की बेंच गठित करने की आवश्यकता है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में जाए। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रेवड़ी बाँटने की प्रथा पर चिंता जताई थी।

ऐसी तस्वीर नहीं बना सकता AI जिसमें कोई बाएँ हाथ से लिखता दिख रहा हो: PM मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बताई ‘सीमा’, नेटिजन्स नहीं बदल पाए नतीजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 फरवरी को पेरिस में ग्लोबल AI शिखर सम्मेलन में भाषण दिया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने AI से जुड़ी कई बातें बताईं। उन्होंने कहा कि AI बीते कुछ दिनों में लोगों के लिए मददगार रहा है, उसने लोगों को मेडिकल रिपोर्ट तक समझने में सहायता की है।

जहाँ AI लगातार बेहतर होता जा रहा है, वहीं उसमें अब भी कुछ कमियाँ हैं। किसी इंसान या वस्तु की तस्वीर बनाने वाले जेनरेटिव AI को लेकर अब भी कुछ समस्याएँ हैं। पीएम मोदी ने पेरिस में ऐसी ही एक समस्या की तरफ इशारा किया। उन्होंने बताया कि AI ऐसी तस्वीरें नहीं बना सकता, जिसमें कोई व्यक्ति अपने बाएँ हाथ से लिख रहा हो।

प्रधानमंत्री मोदी की इस बात के बाद सोशल मीडिया पर इसे ट्राई करने वालों की एक बाढ़ आ गई। लोगों ने अलग-अलग तरीकों से बाएँ हाथ से लिखते हुए तस्वीर बनवाने की कोशिश AI प्रोग्राम्स से की। हालाँकि सफलता किसी को नहीं मिली और पीएम मोदी की बात हर बार सही साबित हुई।

हमने भी की कोशिश, ये रहा परिणाम

DALL.E3 पर चलने वाला बिंग AI बाएँ हाथ से लिखते हुए आदमी की तस्वीर नहीं बना पाया, चाहे हमने जैसे भी पूछा।

AI ने प्रॉम्प्ट में ‘बाएँ हाथ’ लिखे होने के चलते आदमी को उसके बाएँ हाथ से कॉफी पीते हुए दिखाया, लेकिन इसने एक भी बार बाएँ हाथ से लिखने वाली तस्वीर नहीं बनाई।

जब हमने एक दूसरे प्रॉम्प्ट में बाएँ हाथ पर जोर दिया, तो इसने तीन हाथ का आदमी बना दिया। लेकिन यहाँ भी उसके बाएँ हाथ में पेन नहीं पकड़ाया।

बिंग AI ने लेकिन एक बाज की बाएँ हाथ से लिखते हुए तस्वीर बना दी। भले ही पढ़ने में यह बड़ा हास्यास्पद लगे, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इसने पक्षी को दिखाया दिया लेकिन इंसान को नहीं।

ग्रोक ने कर दिया मना

ट्विटर के AI ग्रोक ने भी ऐसी तस्वीर नहीं बनाई। अलग-अलग प्रॉम्प्ट देने पर केवल दाएँ हाथ से लिखता हुआ आदमी उसने दिखाया। उसने टेक्स्ट में लिखने पर हर बार बाएँ हाथ से लिखने की तस्वीर बनाने की पुष्टि की लेकिन जब असल मेंतस्वीर बनी तो इसमें मामला गड़बड़ ही रहा।

यहाँ तक ग्रोक ने आदिमानव की भी पेंटिंग बनाती हुई तस्वीर में दाएँ हाथ से होता काम दिखाया।

ग्रोक इंसानों को नहीं, बल्कि बंदरों को तक बाएँ हाथ से काम करते नहीं दिखाता। ऐसा ही इसने एक बंदर पर दिए गए प्रॉम्प्ट में किया।

मेटा भी हो गया फेल

मेटा भी इस काम में फेल हो गया। इसका मॉडल एमू किसी भी व्यक्ति की बाएँ हाथ से लिखने की तस्वीर नहीं बना पाया।

यहाँ तक कि ये कार्टून की भी तस्वीर नहीं बना पाया।

पीएम मोदी की कही हुई बात हर बार हमारे प्रयोग में भी सही ही साबित हुई।

रोहिंग्या मुस्लिमों को बिल्कुल FREE मिले राशन+शिक्षा+चिकित्सा, सुप्रीम कोर्ट में मामला: याचिका डालने वाला गोंजाल्विस, जॉर्ज सोरोस से हैं इसके लिंक

‘रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ नाम के एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शरणार्थियों के लिए सुविधाओं की माँग की है। NGO ने याचिका में कहा कि कोर्ट केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दे कि दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को स्कूलों और अस्पतालों तक पहुँच दी जाए। इस मामले की सुनवाई सोमवार (10 फरवरी) को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने की।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता एनजीओ को निर्देश दिया था कि वह कोर्ट को बताए कि दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थी कहाँ-कहाँ बसे हुए हैं और उन्हें क्या-क्या सुविधाएँ मिली हुई हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को स्कूलों और अस्पतालों में प्रवेश से वंचित रखा जाता है, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है।

कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा, “वे शरणार्थी हैं, जिनके पास UNHCR (शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त) कार्ड हैं और इसलिए उनके पास आधार कार्ड नहीं हो सकते। लेकिन, आधार कार्ड के अभाव में उन्हें सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि रोहिंग्या शाहीन बाग और कालिंदी कुंज में झुग्गियों में और खजूरी खास में किराए के मकानों में रह रहे हैं।

बता दें कि इस एनजीओ द्वारा दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को निर्देश देने की माँग की गई है कि वे रोहिंग्या बच्चों को आधार कार्ड या भारतीय नागरिकता न होने के बावजूद मुफ्त शिक्षा दें। जनहित याचिका में आगे माँग की गई थी कि इन रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को सरकार द्वारा पहचान पत्र माँगे बिना कक्षा 10, 12 और स्नातक सहित सभी परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

शिक्षा के अलावा, याचिका में इन रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ अंत्योदय अन्न योजना के तहत उपलब्ध सब्सिडी वाले खाद्यान्न देने की माँग की गई है। दरअसल, ये NGO और गोंजाल्विस चाहते हैं कि शरणार्थी के दर्जे वाले इन अवैध घुसपैठियों को भारत के एक नागरिक वाली हर सुविधा इन्हें मुफ्त में मिले।

कौन हैं गोंजाल्विस

अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (HRLN) के संस्थापक हैं। यह सामाजिक-कानूनी सूचना केंद्र के तत्वावधान में काम करता है। इसे पहले जॉर्ज सोरोस के एनजीओ से फंड मिल चुका है। HRLN ने जिन प्रयासों में भाग लिया है, उनमें इस्कॉन के अक्षय पात्र के खिलाफ अभियान, भारतीय राजद्रोह कानूनों के खिलाफ अभियान और भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना शामिल है।

यह RTE अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए सक्रियता में भी शामिल रहे हैं, जो हिंदू-संचालित संस्थानों के खिलाफ काम करता है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि गोंसाल्वेस के HRLN को 2020 के एंटी-सीएए दंगाइयों का अदालतों में बचाव करने के लिए चार यूरोपीय चर्चों से 50 करोड़ रुपए भी मिले। इसके अलावा, HRLN देश भर में कई ऐसे संगठनों से भी जुड़ा हुआ है जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करना चाहते हैं।

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (R4R)

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स एनिशिएटिव की स्थापना साल 2017 में पंजीकृत किया गया था। इसे ग्लोबल स्टेटलेसनेस फंड (GSF) से धन प्राप्त होता है। GSF नीदरलैंड स्थित इंस्टीट्यूट ऑन स्टेटलेसनेस एंड इंक्लूजन की एक परियोजना है। इन्हें दुनिया भर में सत्ता गिराने के लिए कुख्यात हो चुके जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से धन प्राप्त होता है।

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स एनिशिएटिव के शिक्षा और आंदोलन निर्माण निदेशक अली जौहर रिफ्यूजी इंटरनेशनल (आरआई) के पहले शरणार्थी फेलो कार्यक्रम में फेलो थे। अली जौहर (मौंग थीन श्वे) 2005 में भारत आए थे। वे मूल रूप से म्यांमार के रखाइन राज्य के रहने वाले हैं। आरआई के अध्यक्ष जेरेमी कोनइंडिक विवादास्पद यूएसएआईडी के पूर्व कर्मचारी हैं।

USAID मीडिया, एक्टिविस्ट, संदिग्ध अधिकार समूहों और यहाँ तक ​​कि इस्लामी आतंकवादी संगठनों को फंड देता था। जेरेमी कोनइंडिक यूएसएआईडी के यूएस फॉरेन डिजास्टर असिस्टेंस के कार्यालय के निदेशक थे। ट्रम्प प्रशासन ने यूएसएआईडी को निष्क्रिय नहीं कर दिया है। अली जौहर फ्री रोहिंग्या गठबंधन का हिस्सा हैं। इस समूह को ग्लोबल स्टेटलेसनेस फंड से भी धन प्राप्त होता है।

(मूल रूप से अंग्रेजी में सिद्धि सोमानी द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं)

फोन बंद कर गायब है AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, UP-राजस्थान में भी हो रही है तलाश: दिल्ली पुलिस CP को ‘एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी’ वाले अंदाज में लिखा पत्र

दिल्ली के आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान की तलाश में दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक छापेमारी की है। अमानतुल्लाह खान पर पुलिस की एक टीम पर हमला करवाने का आरोप है। इस मामले में उसके खिलाफ FIR दर्ज हुई है। अमानतुल्लाह ने दावा किया है कि वह दिल्ली में ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमानतुल्लाह खान मामला दर्ज होने के बाद से अपना फोन बंद करके गायब है। वह अपने घर पर भी नहीं मौजूद था। दिल्ली पुलिस स्पेशंल सेल और क्राइम ब्रांच की टीमें उसकी तलाश में उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक गईं थीं। यहाँ एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की गई। हालाँकि, अभी वह गिरफ्तार नहीं हो सका है।

दिल्ली पुलिस को शक है कि अमानतुल्लाह को कुछ लोग शरण दे रहे हैं। अमानतुल्लाह खान पर मकोका के तहत कार्रवाई भी कर सकती है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि वह जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लेगी। इसके लिए टीमें भी गठित हो गई है।

इस बीच अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को एक पत्र लिखा है। इसमें उसने दावा किया है कि वह दिल्ली में ही है। उसने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस उसे फंसाना चाहती है। उसने उस अपराधी का भी बचाव किया है, जिसके भागने में मदद करने का MLA अमानतुल्लाह का आरोप है।

उसने अपने पत्र में लिखा, “मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में हूं, मैं कहीं भागा नहीं हूँ। दिल्ली पुलिस के कुछ लोग मुझे झूठे मामले में फंसा रहे हैं। जिस व्यक्ति को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार करने आई थी, उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। जब उस व्यक्ति ने अपने कागजात दिखाए, तो पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए मुझे झूठे मामले में फंसा रही है।”

गौरतलब है कि सोमवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम जामिया नगर में एक भगोड़े अपराधी शाहबाज को पकड़ने गई थी। इसी दौरान अमानतुल्लाह अपने समर्थकों के साथ आ गया और दिल्ली पुलिस की टीम को घेर लिया। अमानतुल्लाह और उसके साथ की भीड़ ने आरोपित को भगा दिया।

उन्होंने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और मारपीट की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की। दिल्ली पुलिस ने अमानतुल्लाह खान के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई धाराएं लगाईं और उसकी तलाश चालू की लेकिन वह नहीं मिला।

सोमनाथ के जिस शिवलिंग को मोहम्मद गजनी ने किया खंडित, उसके टुकड़े पंडित सीताराम शास्त्री ने दिखाए: कहा- संतों ने मूर्ति बना इनकी पूजा की, मंदिर में हो स्थापना

सीताराम शास्त्री नाम के गुजरात के एक पुजारी ने दावा किया है कि इस मंदिर का प्राचीन एवं खंडित शिवलिंग उनके पास है। उन्होंने कहा कि वे शिवलिंग के इन टुकड़ों के संरक्षक हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि इसे फिर से प्रतिष्ठित किया जाए। शास्त्री का दावा है कि 11वीं शताब्दी में मोहम्मद गजनी ने मंदिर और मूल शिवलिंग को ध्वस्त कर दिया था।

इस मंदिर के पुजारियों के वंश से आने वाले सीताराम शास्त्री ने अपने दावे को लेकर एक वीडियो भी बनाया है। वीडियो में पुजारी शास्त्री ने दावा किया है कि वह पिछले 21 वर्षों से पवित्र लिंगम के टुकड़ों को संरक्षित कर रहे हैं और अब वह चाहते हैं कि इसे सोमनाथ मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाए। इस सिलसिले में उन्होंने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की है। रविशंकर ने उनका समर्थन किया है।

शास्त्री ने कहा, “शिवलिंग के ये हिस्से मुझे 21 साल पहले मिली थीं। इससे पहले इन्हें मेरे चाचा ने रखा था। उन्होंने स्थापित करवाने का आदेश दिया था। ये सोमनाथ की असली मूर्ति है। 1000 साल हो गए हैं। ये मेरे चाचा को उनके गुरु प्रणवेंद्र सरस्वती जी ने दी थी। उसके बाद मेरे चाचा ने 60 साल तक इसकी पूजा की। ये मूर्ति मेरे, उनके और उनके गुरु के पास गुरु-प्रथा से ही आई है।”

उन्होंने आगे कहा, “1,000 साल पहले यह शिवलिंगम 3 फीट नीचे गिर गया था और गुरुत्वाकर्षण के बावजूद फर्श से 2 फीट ऊपर लटका रहा। इस शिवलिंगम को नष्ट करने के लिए आक्रमणकारियों ने कई हमले किए। आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर में प्रवेश करने के लिए लगभग 50,000 लोगों की हत्या की थी। उसने मंदिर की सभी कीमती चीजें लूट लीं और शिवलिंगम को नष्ट कर दिया।”

पुजारी का कहना है कि महमूद गजनवी द्वारा पवित्र शिवलिंग को नष्ट करने के तुरंत बाद विभिन्न संतों ने इसके टूटे हुए टुकड़ों को इकट्ठा किया। उनसे कई मूर्तियाँ बनाईं और वर्षों तक उनकी पूजा की। इसके बाद संतों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सही समय आने पर उन्हें मंदिर में फिर से स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके चाचा ने उन्हें मंदिर में कम-से-कम दो मूर्तियाँ स्थापित करने का आदेश दिया है।

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मूर्तियों को सोमनाथ मंदिर में स्थापित करने के लिए उन्होंने कई संतों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “मैं हाल ही में इसे शंकराचार्य जी के पास ले गया…मैं इसे धीरेंद्र सरस्वती जी के पास भी ले गया। उन्होंने मुझसे कहा कि राम मंदिर का काम पूरा हो जाने के बाद वे इस शिवलिंगम की स्थापना की प्रक्रिया शुरू करेंगे, लेकिन अब वे समाधिस्थ हो चुके हैं।”

पुजारी ने आगे कहा, “उसके बाद मैं इसे विजेंद्र सरस्वती जी के पास ले गया और वे इसे देखकर खुश हुए। उन्होंने इसे बेंगलुरु में गुरु श्री श्री रविशंकर के पास लाने को कहा और कहा कि वे इसे स्थापित करने में मेरी मदद करेंगे। इस मूर्ति में ऐसी शक्तियाँ हैं, जिनके बारे में मुझे जानकारी नहीं थी। श्री श्री रविशंकर ने आश्वासन दिया है कि इसे सोमनाथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इससे मैं बहुत खुश हूँ।”

फ्रांस के लोगों ने वीर सावरकर के लिए क्यों लड़ी थी ‘लड़ाई’: PM मोदी ने मार्सेल पहुँच दी श्रद्धांजलि, फ्रांसीसी और अंग्रेजी सरकार के बीच बढ़ गया था तनाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन 11 फरवरी को मार्सेली पहुँचे और वीर सावरकर को याद किया। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए दी। उनके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 से 12 फरवरी तक की अपनी यात्रा में उन्होंने AI सम्मेलन को भी संबोधित किया।

पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में कहा, “मार्सिले पहुँच गया। भारत की स्वतंत्रता की खोज में इस शहर का विशेष महत्व है। यहीं पर महान वीर सावरकर ने साहसपूर्वक भागने का प्रयास किया था। मैं मार्सिले के लोगों और उस समय के फ्रांसीसी कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने मांग की थी कि उन्हें ब्रिटिश हिरासत में ना सौंपा जाए। वीर सावरकर की बहादुरी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी!”

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि मार्सिले की यात्रा में भारत और फ्रांस के बीच संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। यहाँ एक भारतीय वाणिज्य दूतावास का भी उद्घाटन किया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “इससे लोगों के बीच आपसी संपर्क और मजबूत होगा। मैं प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करूँगा।”

प्रधानमंत्री मोदी और इमैनुएल मैक्रों फ्रांसिसी शहर मार्सिले में इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सप्रेरिमेंटल रिएक्टर प्रोजेक्ट का दौरा करेंगे। यह प्रोजेक्ट न्यूक्लिर संलयन (फ्यूजन) रिसर्च में एक महत्वपूर्ण सहयोग है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मजारगुएस युद्ध कब्रिस्तान जाएँगे। वहाँ वे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अपना बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे।

मार्सिले का वीर सावरकर से कनेक्शन

दरअसल, सन 1910 में नासिक षडयंत्र मामले में अंग्रेजों ने उन्हें लंदन से गिरफ्तार किया था। ब्रिटिश अधिकारी सावरकर को भारत ला रहे थे, ताकि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। वे एसएस मोरिया जहाज से लाया जा रहा था। यह जहाज 8 जुलाई साल 1910 को फ्रांस के मार्सेिले बंदरगाह पर पहुँचा। सावरकर ने इसे भागने के एक अवसर के रूप में देखा।

उन्होंने यहाँ से निकल कर फ्रांस में शरण लेने की सोची। इसके लिए उन्हें सबसे पहले इस जहाज से निकलना था। उन्होंने एक पोर्टहोल के जरिए जहाज से बाहर निकलने की कोशिश की। वह तैर कर फ्रांस के तट की जाने लगे। इसी दौरान उन्हें फ्रांस के अधिकारियों ने पकड़ लिया और अंग्रेजों के हवाले कर दिया। सावरकर को लेकर फ्रांस और ब्रिटेन में कूटनीतिक तनाव भी रहा।

फ्रांस का आरोप था कि सावरकर की वापसी अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन था। ब्रिटेन ने इसका उचित रूप से पालन नहीं किया गया। साल 1911 में मामले को लेकर स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने फैसला सुनाया कि सावरकर की गिरफ्तारी में अनियमितता थी। हालाँकि, ब्रिटेन सावरकर को वापस फ्रांस को वापस देने के लिए बाध्य नहीं था।

फ्रांसीसी सरकार का तर्क था कि सावरकर को ब्रिटिश अधिकारियों को सौंपना अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करना था। अंग्रेजों ने मुकदमा चलाने के बाद सावरकर को अंडमान निकोबार द्वीप पर स्थित सेलुलर जेल, जिसे कालापानी कहा जाता था, भेज दिया गया था। फ्रांस के लोगों और कई नेताओं ने सावरकर को ब्रिटेन के हाथों सौंपने का विरोध किया था।

अपना LLM तैयार कर रहा है भारत, AI पर काम करने के लिए वर्क फोर्स मौजूद: पेरिस से PM मोदी ने दुनिया को बताए इरादे, सम्मेलन में 100 देशों के राष्ट्राध्यक्ष हुए शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय फ्रांस दौरे पर हैं। वहाँ आज (11 फरवरी 2025) वह अपने ‘मित्र’ राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ पेरिस में चल रहे AI एक्शन शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में करीब 100 देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। प्रधानमंत्री का ज़ोर समावेशी, सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से नवाचार और मानव कल्याण के लिए AI प्रौद्योगिकी के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर है।

AI सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, AI से जुड़ी एक बड़ी आशंका रोज़गार ख़त्म होने को लेकर जताई जा रही है, लेकिन इतिहास गवाह है कि तकनीक ने नए तरीक़े के रोज़गार पैदा किए हैं। ज़रूरत लोगों के स्किलिंग और री-स्किलिंग की है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानि AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत कई स्टार्ट-अप और तकनीक को विकसित करने पर ज़ोर दे रहा है। रोबोटिक्स, हेल्थकेयर, ट्रांसलेशन में भारत के कई AI स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा सतत विकास का लक्ष्य हासिल करने के लिए AI मददगार होगा।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से AI के ख़तरे, AI नियंत्रण, AI की सेवाएँ, उसके फायदे के अलावा दुनिया के सभी देशों द्वारा AI का समान रूप से उपयोग में लाए जाने को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि मशीन मानव की मास्टर नहीं हो सकती है। ऐसे में सभी को ज़िम्मेदारी समझनी होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत AI को अपनाने, सार्वजनिक हित के लिए AI एप्लिकेशन बनाने, डेटा की प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही भारत के पास AI तकनीक पर काम करने के लिए कुशल वर्क फोर्स भी मौजूद है।

उन्होंने इस कार्यक्रम में भारत के अपने एलएलएम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही अपना लॉर्ज लैंगवेज मॉडल तैयार कर लेगा (जिसके बाद एआई भारतीय यूजर्स के मुताबिक उन्हें सर्विस दे पाएगा।)

बता दें कि पीएम मोदी 10 फरवरी को दो दिवसीय फ्रांस यात्रा के लिए गए हैं। वहाँ भारतीयों ने उनका जोर-शोर से स्वागत किया। हाथ में तिरंगा लेकर अपना उत्साह दिखाया। एआई समिट और सीईओ फोरम की बैठक में शामिल होने के बाद पीएम मोदी अमेरिका के लिए रवाना होंगे।

(प्रसार भारती – SHABD के सौजन्य से)

350+ मार गिराए, 700+ ने हथियार डाले: जानिए अमित शाह की डेडलाइन को कैसे पूरा कर रहे सुरक्षा बल, अबूझमाड़ से बीजापुर तक हर एक नक्सल गढ़ कर रहे ध्वस्त

छत्तीसगढ़ में लगातार नक्सलियों पर सुरक्षाबल काल बन कर टूट रहे हैं। बीजापुर में हुए एक हालिया एनकाउंटर में 31 नक्सली मार गिराए गए। जवानों ने 4 तरफ से घेर कर उन्हें मारा। गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। सुरक्षाबल लगातार एक के बाद एक नक्सली गढ़ तोड़ते जा रहे हैं। उन इलाकों में भी अब जवान पहुँच रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली खुला घूमते थे। बस्तर से लेकर गढ़चिरौली तक नक्सली जान बचाते फिर रहे हैं।

बीजापुर में किया सफाया

नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई 9 फरवरी, 2025 को इन्द्रावती नेशनल पार्क, बीजापुर में हुई। यहाँ नक्सलियों की एक सीक्रेट मीटिंग पर हमला बोलकर छत्तीसगढ़ पुलिस, DRG, STF, बस्तर टाइगर और केन्द्रीय सुरक्षाबलों ने 31 नक्सली मार गिराए। नक्सली इस हमले से चौंक गए। पुलिस को सूचना मिली थी कि इन्द्रावती नेशनल पार्क में छोटाकाकलेर और लोद्देड इलाके में नक्सलियों की एक बैठक हो रही है। यह बैठक नक्सलियों ने आगे रणनीति बनाने के लिए बुलाई थी। इस बैठक में तेलंगाना, बस्तर, इन्द्रावती एरिया के नक्सली शामिल थे।

सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन के लिए बड़ी प्लानिंग की थी। इसमें जवानों ने नक्सलियों को चौंकाने के लिए महाराष्ट्र सीमा का भी उपयोग किया। लगभग 1000 जवान इस ऑपरेशन में शामिल थे। यह बीजापुर के अलावा महराष्ट्र की तरफ भी घुसे। इसके लिए जवानों को 100 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। जवान कुछ दिन पहले ही इस ऑपरेशन के लिए निकल ह्चुके चुएक थे। नक्सली इससे चौंक गए। पहाड़ी पर यह मुठभेड़ चालू हुई। तेलंगाना के नक्सलियों ने भागने की कोशिश की लेकिन मारे गए। फायरिंग के बाद यहाँ 31 शव और बड़ी संख्या में हथियार मिले।

लगातार हो रहे बड़े ऑपरेशन

सिर्फ इन्द्रावती नेशनल पार्क ही नहीं इससे पहले 2 फरवरी को कोरचोली में हुए एक ऑपरेशन 8 नक्सली मारे गए थे। 20 जनवरी, 2025 को ही गरियाबंद में भी पुलिस एनकाउंटर हो चुका है। इस एनकाउंटर में 29 नक्सली मारे गए थे। 16 जनवरी को हुए ऑपरेशन में सुकमा में 18 नक्सली मारे गए थे। इससे पहले अबूझमाड़ में 5 नक्सली मार गिराए गए थे। यह एनकाउंटर छतीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अलग-अलग इलाकों में हुए हैं। इनमें अबूझमाड़ और गरियाबंद आदि नक्सलियों के गढ़ रहे हैं। अब इन इलाकों में सुरक्षाबलों के सैकड़ों कैम्प हैं।

आत्मसमर्पण पर भी जोर

सुरक्षाबल लगातार नक्सलियों के बड़े गुट साफ़ कर रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, 2024 में ही छत्तीसगढ़ के भीतर 239 नक्सली मार गिराए गए थे। 2025 में छत्तीसगढ़ में 87 नक्सली मार गिराए जा चुके हैं। सुरक्षाबल नक्सलियों को मार ही नहीं रहे बल्कि उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं। 2024 में छत्तीसगढ़ के भीतर 925 नक्सली गिरफ्तार भी किए गए थे। इसके अलावा 738 ने नक्सलवाद की राह छोड़ कर आत्मसमर्पण किया था।

छतीसगढ़ की विष्णु देव साय की सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि नक्सलियों के बहकावे में आए लोग वापस मुख्यधारा में जुड़ जाएँ। हालाँकि, सुरक्षाबलों को लगातार निशाना बनाने वाले नक्सली मान नहीं रहे। ऐसे में उसने उनका सफाया करने का निर्णय कर रखा है।

हिंसा में तेजी से आई कमी

नक्सली हिंसा में बीते कुछ वर्षों में तेजी से कमी आई है और उन इलाकों में विकास भी हुआ है। लोकसभा में गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए एक जवाब के अनुसार, 2010 में देश में 126 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे लेकिन यह संख्या 2024 में घट कर 90 आ गई। 2010 में देश में 1000 से अधिक नक्सली हिंसा की घटनाएँ हुई थीं। यह 2024 में घट कर 374 पर आ गईं। इसके अलावा सुरक्षाबलों को 2010 में 1000 से अधिक जवान खोने पड़े थे। यह संख्या घट 2024 में घट कर 105 पर आ गई है।

मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने की योजना

नक्सलियों पर हो रही इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के पीछे केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दी हुई डेडलाइन सुरक्षाबलों के लिए मंत्र की तरह काम कर रही है। गृह मंत्री शाह ने अगस्त 2024 में रायपुर में ऐलान किया था कि देश में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुँची है। उन्होंने कहा था कि मार्च 2026 तक देश से नक्सली समस्या खत्म कर दी जाएगी। उन्होंने कहा था कि अब छत्तीसगढ़ के अलावा देश के बाकी राज्य नक्सली समस्या से मुक्त हो चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र में समस्या केवल एक जिले सीमित है।

बीजापुर में हुए एनकाउंटर के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने का प्रण दोहराया है। उन्होंने कहा, “साथ ही पुनः यह संकल्प दोहराता हूँ कि 31 मार्च 2026 से पहले हम देश से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त कर देंगे, ताकि देश के किसी भी नागरिक को इसके कारण अपनी जान न गँवानी पड़े।”

 

हनुमान चालीसा का पाठ केवल भक्ति नहीं, यौगिक ब्रीदिंग भी… हार्ट रेट रखता है स्थिर, एंग्जायटी भी करता है दूर: डॉक्टर ने चौपाइयों सहित बताए फायदे, पढ़ने का सही तरीका भी समझाया

ज्योतिष शास्त्र में हनुमान चालीसा पढ़ने के बहुत से फायदे आपने सुने होंगे, लेकिन मेडिकली भी इसके फायदे होते हैं ये शायद कम ही सुना होगा। हाल में यूट्यूब पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ स्वेता अड़ातिया ने इसपर वीडियो बनाई है। डॉ स्वेता ने अपनी वीडियो में हनुमान चालीसा के वैज्ञानिक दृष्टि से फायदे गिनाए और दावा किया कि हनुमान चालीसा पढ़ना दिल और दिमाग के लिए बहुत लाभकारी है।

उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा को ‘यौगिक ब्रीदिंग’ माना जाता है। इसका अर्थ है कि जब आप इसे पढ़ते हैं, तो आपकी सांसें एक विशेष पैटर्न में चलती हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ चौपाइयों को बोलते समय सांस अंदर ली जाती है (जैसे- जय हनुमान ज्ञान गुण सागर), जबकि अन्य चौपाइयों को बोलते समय सांस बाहर छोड़ी जाती है (जैसे- जय कपिस तिहु लोक उजागर), कुछ में होल्ड रखी जाती है (जैसे- रामदूत अतुलित बलधामम), कुछ में सांस होल्ड रखने के बाद बाहर जाती है ( जैसे-अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।)

डॉक्टर स्वेता के अनुसार यह प्रक्रिया हार्ट रेट वैरिएबिलिटी (HRV) को प्रभावित करती है, जो दिल की स्थिति को स्वस्थ रखने में मदद करती है। वहीं अगर हनुमान चालीसा का उच्चारण सही से किया जाए तो इसका सीधा असर ‘लिम्बिक सिस्टम’ पर पड़ता है जिसकी वजह से वाकई व्यक्ति की एंग्जायटी कम होती है और भीतर बसा डर दूर होता है।

डॉक्टर ने बताया कि हनुमान चालीसा पढ़ने से वेगस नर्व सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर के कई कार्यों जैसे डाइजेशन (पाचन) और तनाव प्रबंधन में मदद करता है। जब यह नर्व सक्रिय होती है, तो शरीर की कई प्रक्रियाएँ अपने आप ठीक हो जाती हैं।

अपनी वीडियो में उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि इसके फायदे इसे आराम से पाठ करके हासिल किए जा सकते हैं, तेज-तेज पढ़ना गलत है। उन्होंने कहा कि ये सारी बातें प्रयोग करके देखी जा चुकी हैं कि हनुमान चालीसा पढ़कर दिल और दिमाग दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है

इस वीडियो को यूट्यूब पर 18 जनवरी को अपलोड किया गया था। अब तक इसे 57 हजार व्यूज आ चुके हैं। वहीं इसे 2 हजार 400 लोगों ने लाइक किया है। इसमें उन्होंने हनुमान मंत्र से लेकर सांस लेने के पैटर्न तक को बताया है।