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सलमान एंड फैमिली विषधर साँप… सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर अभिनव कश्यप ने खोले बॉलीवुड के राज

सलमान ख़ान की फिल्म ‘दबंग’ के निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप ने सरकार से माँग की है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की विस्तृत जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि सुशांत भले ही चले गए लेकिन उनकी लड़ाई अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने कई बड़ी समस्याओं को सामने ला दिया है, जिससे आज बॉलीवुड में कई लोग जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुशांत की मौत के पीछे कोई बड़ी वजह है, जैसे बॉलीवुड में ‘मी टू’ का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने ‘यशराज फिल्म्स’ पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी ने सुशांत को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया होगा, ये जाँच का विषय है। उन्होंने कहा कि ये लोग करियर बनाते नहीं हैं बल्कि करियर और ज़िंदगी, दोनों ही बिगाड़ते हैं। उन्होंने अपने एक दशक के अनुभव की बात करते हुए कहा कि बॉलीवुड की सभी टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसियाँ कलाकारों को मौत के एक जाल में फँसाने का काम करती हैं।

बकौल अभिनव, वो लोग ऐसे सफेदपोश हैं जिनके सभी से अच्छे सम्बन्ध हैं और इस खेल में सभी शामिल हैं। उनकी थ्योरी है- “हमाम में सब नंगे हैं, जो नहीं हैं, उनको नंगा करो क्योंकि अगर एक भी पकड़ा गया तो सभी पकड़े जाएँगे।” उन्होंने खुलासा किया कि कास्टिंग डायरेक्टर वगैरह कट/कमीशन स्ट्रेटेजी पर काम करते हैं और शिकार के रूप में ऐसे नॉन-मुम्बइया अभिनेताओं को ढूँढ़ते हैं, जिनका न कोई कनेक्शन हो और न ही ज्यादा संपत्ति हो।

अभिनव ने बताया कि इसके बाद उन कलाकारों को बॉलीवुड के बड़े सेलेब्रिटीज से परिचय कराने के नाम पर पार्टियों और रेस्टॉरेंट्स में आमंत्रित किया जाता है। लॉन्च समारोहों का हिस्सा बनाया जाता है। उन पार्टियों में जाकर नाम और पैसे कमाने की इच्छा तो तीव्र हो उठती है लेकिन नए कलाकारों को जिस तरह से वहाँ नज़रअंदाज़ किया जाता है, उनका आत्मविश्वास टूट जाता है और वो हतोत्साहित महसूस करते हैं। अभिनव ने कहा:

“इसके बाद उन कलाकारों को बॉलीवुड के ‘शिकारियों’ से बचाने के नाम पर कई सालों का कॉन्ट्रैक्ट साइन करा लिया जाता है। उनके पास हस्ताक्षर करने के अलावा शायद ही कोई विकल्प होते हों क्योंकि इसके लिए सभी तिकड़म आजमाए जाते हैं। इन कॉन्ट्रैक्ट्स को तोड़ना वित्तीय रूप से भी अभिनेताओं के लिए ठीक नहीं होता। एक बार उन्होंने साइन कर दिया तो फिर उन्हें काफ़ी कम रुपए देकर उनसे बँधुआ मजदूर की तरह काम लिया जाता है। अगर वो उनके चँगुल से किसी तरह निकल भी जाएँ तो उनका पूर्ण बायकॉट कर दिया जाता है। फिर वो ‘अच्छे कल’ की उम्मीद में कैम्प बदलते हैं लेकिन वो कल कभी नहीं आता।”

इसके बाद अभिनव ने जो बताया, वो काफ़ी शॉकिंग है। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रोडक्शन हाउसेज भी उन कलाकारों के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि अंत में कई मजबूर कलाकारों को एस्कॉर्ट सर्विस या फिर वेश्यावृत्ति के धंधों की ओर रुख करना पड़ता है। बकौल अभिनव सिंह कश्यप, बॉलीवुड में कई पुरुष एस्कॉर्ट्स भी हैं, जिनका इस्तेमाल अमीर और प्रभावशाली हस्तियों के अभिमान और यौन भूख मिटाने के लिए किया जाता है।

अभिनव सिंह कश्यप के अनुसार, वो भी धमकियों और जबरदस्ती कॉन्ट्रैक्ट साइन कराने जैसी हरकतों का सामना कर चुके हैं। उदाहरण स्वरूप उन्होंने ‘दबंग’ की शूटिंग के समय अरबाज खान द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार की बात की। अभिनव ने आरोप लगाया कि अरबाज खान और सलमान खान उनके करियर को अपनी मुट्ठी में रखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ‘दबंग 2’ का निर्देशन करने से इनकार कर दिया।

अभिनव सिंह कश्यप ने बताया अपना अनुभव

उन्होंने आरोप लगाया कि अरबाज खान अष्टविनायक फिल्म्स के मुखिया राज मेहता को कॉल कर के उनके अगले प्रोजेक्ट को रुकवा दिया। इसके बाद वो वायकम पिक्चर्स के साथ जुड़े लेकिन वहाँ सोहैल खान ने इसके सीईओ विक्रम मल्होत्रा को फोन कर के ये प्रोजेक्ट भी रुकवा दिया। बकौल अभिनव, उन्हें न सिर्फ़ 7 करोड़ रुपए का साइनिंग अमाउंट वापस करना पड़ा बल्कि 90 लाख रुपए अतिरिक्त ब्याज के रूप में भी देने पड़े।

अभिनव बताते हैं कि उन्हें रिलायंस एंटरटेनमेंट ने बचा तो लिया लेकिन ‘बेशरम’ को लेकर इतना नकारात्मक प्रचार अभियान चलाया गया कि वो फ्लॉप हो जाए। इसके बाद फिल्म के सैटेलाइट राइट्स न बिकने देने की कोशिश की गई लेकिन रिलायंस और Zee के बीच किसी तरह डील हो गई। उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं और उनके परिवार के महिला सदस्यों को बलात्कार की धमकी मिलती है।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने भी जाँच करने से इनकार कर दिया और जाँच हुई भी तो निष्कर्ष नहीं निकल पाया कुछ। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ ये सब अभी भी चालू है, वो लड़ रहे हैं। बाद में कई लोगों ने अभिनव के स्वास्थ्य और स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की, जिसके बाद उन्होंने एक अन्य फेसबुक पोस्ट लिख कर बताया कि वो बिलकुल ठीक हैं। उन्होंने विवेक ओबेरॉय और कंगना रनौत का समर्थन किया।

सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम संस्कार में भाग लेने के बाद विवेक ओबेरॉय ने कहा कि जब उन्होंने सुशांत के पिता को अपने बेटे की चिता को अग्नि देते हुए देखा तो उनकी आँखों में जो दर्द झलक रहा था वो बर्दाश्त के बाहर था। विवेक ने लिखा, “मैंने सुशांत की बहन को रोते देखा और उसे वापस आ जाने के लिए कहते देखा तो मैं बता नहीं सकता कि मुझे अपने मन में कैसा अनुभव हुआ। काश मैं सुशांत को अपने अनुभवों के बारे में बता पाता।“

वहीं कंगना ने करीब दो मिनट का वीडियो जारी कर बॉलीवुड इंडस्ट्री से सवाल पूछा है कि सुशांत की मौत आत्महत्या थी या प्लान्ड मर्डर? कंगना ने लिखा, “सुशांत सिंह की मौत ने हम सबको झकझोर के रख दिया है। लेकिन वे लोग, जो इस चीज में माहिर हैं कि कैसे समानांतर नैरेटिव चलाया जाए, वो ये कहने लगे हैं कि जिनका दिमाग कमजोर होता है, वे डिप्रेशन में आते हैं और सुसाइड कर लेते हैं।”

मटन के नाम पर बेचा जा रहा था बीफ: कर्नाटक से शहबाज, अफरोज और रहमान गिरफ्तार

कर्नाटक के हसन जिले के अर्सिकेरे नगर में मटन की जगह बीफ बेचने का काम न जाने कितने दिनों से जोरों पर था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इस संबंध में अब 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों की पहचान शहबाज, अफरोज और रहमान के तौर पर हुई है। इन पर आरोप है कि ये तीनों अर्सिकेरे में अपने मटन स्टॉल पर बीफ बेचते थे।

इन तीनों को पुलिस ने अपने ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया। इसके अलावा पुलिस ने इस मामले में कसाईखाने के मालिकों के ऊपर कर्नाटक गौहत्या और मवेशी हत्या रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एनजीओ के संज्ञान में आने के बाद इस केस का खुलासा हुआ। साथ ही कई गौवंशों को अवैध कसाईखाने से निकाला जा सका।

बेंगलुरु मिरर के अनुसार, गौ ज्ञान फाउंडेशन की कार्यकर्ता नंदिनी मटियानी बताती हैं कि उन्हें शुक्रवार को इस बारे में सूचना मिली कि अर्सिकेरे नगर के टिप्पू रोड में कई अवैध बूचड़खाने चल रहे हैं, जहाँ सैकड़ों की तादाद में गायों को काटा जाता है और फिर उसे मटन के नाम पर बेच दिया जाता है।

इसकी जानकारी मिलते ही नंदिनी संगठन के 4 सदस्यों के साथ अर्सिकेरे के टिप्पू सड़क पर स्थित मटन बाजार गईं। इस दौरान उनके साथ पुलिस भी थी। वहाँ जाकर संगठन ने कुछ दुकानदारों को रंगे हाथ पकड़ा लेकिन कुछ लोग अपनी दुकाने बंद करके भागने में सफल हो गए।

कसाईखाने के स्थिति के बारे में बात करते हुए नंदिनी कहती है, “वहाँ बहुत गंदगी थी। हमें गायों के सिर और पैर एक कोने में पड़े मिले। कुछ बछड़े भी थे। बावजूद ऐसे सख्त नियम के कि आप एक जानवर को दूसरे जानवर के सामने नहीं मार सकते, फिर भी वहाँ एक छोर पर मृत गाये थीं और दूसरी तरफ बछड़े रो रहे थे। वहाँ हमें एक पूरा कमरा शवों व हड्डियों से भी भरा मिला।”

अपनी इस रेड में गौ ज्ञान फाउंडेशन के लोगों को कटे जानवरों की हड्डियाँ और उनके शव भी इलाके में खुले पड़े मिले। एक अन्य कार्यकर्ता रूमा जे के मुताबिक, इस रेड में उन्होंने 6 बछड़ों और 7 गायों को रेस्क्यू किया और उन्हें मांड्या के उस आश्रयगृह में भेज दिया, जहाँ पहले से ही 1300 गायों को बचाकर रखा गया है।

बता दें कि संगठन ने अब इस मामले के संबंध में अर्सिकेरे टाउन पुलिस को शिकायत दर्ज करवा दी है। पुलिस ने उपयुक्त प्रावधान Karnataka Prevention of Cow Slaughter and Cattle Prevention Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान शहबाज, अफरोज और रहमान के रूप में हुई।

…जब किया जा रहा था सुशांत सिंह राजपूत का अंतिम संस्कार, तभी सदमे में उनकी भाभी छोड़ गईं यह संसार

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद उनकी भाभी भी सदमे से चल बसीं। बताया जा रहा है कि उनकी भाभी सुशांत की मृत्यु को बर्दाश्त नहीं कर सकीं। वो पहले से ही बीमार चल रही थीं। सुधा देवी की मौत उस समय हुई, जब सुशांत का मुंबई में अंतिम संस्कार चल रहा था। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत का संयुक्त परिवार है। उनके पिता और चचेरे भाई नीरज सिंह बबलू सारी प्रक्रिया पूरी करने मुंबई पहुँचे थे।

बता दें कि बबलू छातापुर से लगातार चौथी बार विधायक चुने गए हैं। सुधा देवी सुशांत सिंह राजपूत की चचेरी भाभी थीं। सुशांत सिंह राजपूत के पैतृक गांव पूर्णिया के मलडीहा में रह रहीं सुधा देवी ने अपने देवर की मौत की ख़बर सुनने के साथ ही भोजन-पानी त्याग दिया था। पूर्णिया में उनके गाँव और पटना के राजीव नगर से सुशांत की बचपन की यादें जुडी हुई हैं। दोनों ही क्षेत्रों के लोग उनकी मौत के बाद रोते दिखे।

सुशांत की भाभी अपने घर के बाहर जुटी लोगों की भीड़ देखते ही बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। परिजनों ने उन्हें सांत्वना दी, जिसके बाद उन्हें डॉक्टरों से भी दिखाया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह बार-बार यही पूछ रही थीं कि सुशांत ठीक है या नहीं? फिर देर शाम उनकी भी मौत हो गई, जिससे परिजनों पर गम की दोहरी मार पड़ गई। उनका कुछ दिनों से इलाज भी चल रहा था।

खगड़िया स्थित सुशांत के ननिहाल में भी मातम का माहौल है। वो जब भी बिहार आते थे तो इलाक़े के लोगों से ज़रूर मिला करते थे। सुशांत सिंह राजपूत के पिता के बारे में कहा जा रहा है कि वो भी गहरे सदमे में हैं और किसी से भी बातचीत नहीं कर रहे हैं। मुंबई में बेटे की लाश देख कर उन्हें और गहरा धक्का लगा।

वहीं सुधा देवी के पति और सुशांत के चचेरे भाई अमरेंद्र सिंह का तो रो-रो कर बुरा हाल है। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ से बताया कि सोमवार (जून 15, 2020) की सुबह से उनकी पत्नी की तबियत ज्यादा खराब होने लगी थी। शाम 5 बजे के क़रीब उन्होंने अंतिम साँस ली। अमरेंद्र सिंह रोते हुए बार-बार यही कह रहे थे कि पहले भाई ने साथ छोड़ा, अब पत्नी भी चली गईं। अब वे किसके सहारे जिंदा रहेंगे।

हाल ही में 8 जून को सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने मुंबई के मलाड स्थित इमारत में 14 मंजिल से कूद कर आत्महत्या की थी। सुशांत सिंह राजपूत के घर से हाइपरटेंशन और डिप्रेशन की दवाओं के पेपर मिले हैं। उनके मामा ने आरोप लगाया है कि ये आत्महत्या नहीं है क्योंकि सुशांत ऐसा कर ही नहीं सकते थे। वहीं मुंबई पुलिस अभिनेता के पिछले 6 माह से डिप्रेशन में होने की बातें कह रही है।

‘गाय का मीट बनाओ, हम सब खाएँगे’ – आदिवासी से ईसाई बने रमेश के घर पादरियों का खेल – VHP के साथ दर्द किया साझा

लॉकडाउन के दौरान झारंखड में ईसाई मिशनरियों के द्वारा आदिवासियों का धर्मांतरण जारी है। इस बीच एक वीडियो हमारे पास आया है, जिसमें करीब एक साल पहले आदिवासी से ईसाई बने एक परिवार के मुखिया ने अपना दर्द बयाँ करते हुए घर वापसी की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि पादरी ने उनके घर जाकर पत्नी को गाय का मांस बनाने और उन्हें उसे खाने के लिए उकसाया।

विश्व हिंदू परिषद के झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशव राजू की ओर से ऑपइंडिया को एक ऐसे व्यक्ति का वीडियो भेजा गया, जिसके परिवार का करीब एक साल पहले पादरियों ने प्रलोभन देकर धर्मांतरण करा दिया था। इस व्यक्ति की पहचान रमेश हांसदा, (संथाली जनजाति) निवासी सोपोडेरा, परसुडीह, जिला जमशेदपुर रूप में हुई है।

ऑपइंडिया के पास आए वीडियो में पीड़ित रमेश ने बताया, “इस बीच मेरा शरीर कमजोर हो गया, मैं काम धंधा नहीं कर सका। इस दौरान पादरी लोग आ गए और बोले कि हमें क्रिश्चियन धर्म में शामिल करना है। फिर लड़का लोग आया था और बोला कि पार्टी बनाएँगे। बोला- गाय माँस खाते हो? हम नहीं खाते हैं। वो लोग एक-डेढ़ किलो (गो मांस) लाया था। फिर उसने मेरी वाइफ की ओर इशारा करके बोला कि इसे सब आता है, ये बनाएगी। वाइफ ने मना कर दिया। वाइफ ने कहा कि यहाँ नहीं बनाएँगे और बनाने भी नहीं देंगे। फिर वो लोग चले गए।”

रमेश ने बताया कि पादरी हमारे पीछे करीब दो साल से पड़ा हुआ था। वह भी इसलिए कि घर की हालत ठीक नहीं है, इसको योजना करके क्रिश्चियन बनाया जाए।

जब रमेश से पूछा गया कि अभी आप क्या सोच रहे हैं? तो उन्होंने स्पष्ट बताया, “इस टाइम कुछ नहीं मिल रहा है। थोड़ा सा राशन लॉकडाउन में आया था। एक-दो बार दिया है। अभी तो कुछ नहीं आता है। हम चर्च में नहीं जाते हैं।” इसके बाद रमेश से पूछा गया कि आगे क्या इरादा है? इस सवाल पर उन्होंने बताया कि वो फिर से हिंदू धर्म यानी आदिवासी धर्म में शामिल होंगे।

दरअसल रमेश हांसदा से जमशेदपुर जिले के विहिप (विश्व हिंदू परिषद) जिलामंत्री जनार्दन पंडित ने उनके घर जाकर उस समय बात की, जब उनके पास सूचना आई थी कि रमेश ईसाई धर्म को त्याग कर वापस अपने धर्म में आना चाहते हैं।

जनार्दन पंडित ने ऑपइडिया से बातचीत में बताया, “रमेश के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे रहते हैं। आदिवासी समाज से आने वाले रमेश की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इसी का फायदा उठाकर पादरियों ने इलाज के बहाने चर्च में बुलाया और प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण करा दिया।”

जनार्दन पंडित ने बताया कि पादरी लोग काफी समय से उनके परिवार का धर्मांतरण कराने की जुगत में लगे हुए थे, लेकिन वह कभी चर्च नहीं गए। आज उन्हें अपने धर्मांतरण पर अफसोस है और वह फिर से हिंदू धर्म में वापसी करना चाहते हैं।

आपको बता दें कि रविवार (14 जून, 2020) को विश्व हिंदू परिषद झारखंड के पदाधिकारियों ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान दावा किया था कि लॉकडाउन के दौरान झारखंड में बड़े पैमाने पर ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों का धर्मांतरण किया जा रहा है। इसे सफल बनाने के लिए चर्च के एजेंट गाँव-गाँव जाकर हिंदुओं के खिलाफ जहर उगल रहे हैं।

इस दौरान विहिप झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशव राजू ने बताया कि फिलहाल वो राज्य के सभी जिलों में धर्मांतरण के काम में लगे लोगों और प्रलोभन में आकर धर्म बदलने वाले लोगों का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। इस कार्य के पूरा होते ही इस सूची को प्रशासन को सौंपा जाएगा और प्रशासन पर इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए दबाव भी बनाया जाएगा।

हरियाणा: नूंह के जमालगढ़ गाँव में छापेमारी, घरों में बने थे गोदाम, 2572 गायों की खाल बरामद

हरियाणा के नूंह जिले में चल रहे बड़े पैमाने पर तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने एक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने जमालगढ़ गाँव से लोगों के घरों और गोदामों से 2,572 गोवंश की खाल बरामद की। साथ ही पुलिस ने गाँव से एक टाटा 407 वाहन भी बरामद किया।

गोवंशों को रखने वालों के खिलाफ पुन्हाना पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में शामिल सभी तस्करों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसपी के आदेशों का पालन करते हुए, डीएसपी विवेक चौधरी ने 10 जून की सुबह 5 बजे से 7 बजे तक जमालगढ़ गाँव में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी अभियान शुरू करने से पहले पुलिस ने गाँव को सील कर दिया था ताकि कोई भी गाँव से भाग न सके। इसके बाद हर घर, हर दरवाजे पर जाकर सर्च अभियान चलाया गया।

तलाशी के दौरान पुलिस को गाँव से बड़ी संख्या में गाय की खाल और एक वाहन मिला। पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली थी कि गाँव के कुछ निवासी दिल्ली और हापुड़ में गाय के मांस और उसकी खाल को बेचने के लिए गोहत्या करते हैं। मुखबिर ने पुलिस को बताया कि यदि उन्होंने गाँव में छापेमारी को तो भारी मात्रा में गोवंश बरामद होंगे।

छापेमारी के दौरान जब पुलिस आसिफ नाम के एक शख्स के घर पहुँची तो पाया कि 9 लोग टाटा 407 वाहन पर गाय की खाल लोड कर रहे थे। पुलिस को देखते ही सभी आरोपित कार को छोड़ कर भाग गए। आरोपितों की पहचान निन्ना उर्फ निज़ाम, सलामू, दीनू, अहमद हुसैन, बाबुदीन, असर, इलियास और मामन के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस ने वाहन से तकरीबन 414 गायों की खाल बरामद की। इसके बाद उन्होंने असर के घर में बने एक गोदाम पर छापा मारा जहाँ से 620 गायों की खालें मिलीं। निज़ामू, फ़ारुख, हसीम के घरों में बने गोदामों पर छापे से कुल 1060 गायों की खालें बरामद हुई।

इसके बाद दीनू, अहमद हुसैन, इलियास और मामन के घरों में बने गोदामों पर छापे मारे गए। जहाँ से कुल 478 गायों की खाल मिली। अभियुक्त निन्नह उर्फ निजाम, फारूक, हासिम, दीनू, अल्ली, आसिफ, निजाम, मुस्तकीम, नियाजू कुल 2572 गाय की खाल और एक टाटा 407 के साथ पाए गए।

गौरतलब है कि हरियाणा पशु तस्करों के लिए फलते-फूलते मैदान के रूप में उभरा है। जुलाई 2019 में गो-तस्करों का विरोध करने पर गोपाल नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई थी। इसी तरह, हरियाणा और यूपी में पशु तस्करों द्वारा हिंसक हमलों के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जब पशु तस्करों ने पुलिस पर गोली चलाए। हरियाणा के मेवात को पशु तस्करी और अवैध वध का केंद्र माना जाता है।

आतंकी ठिकाने में कंडोम, वियाग्रा का भंडार: कश्मीर में इस्लाम के नाम पर सेक्सुअल टेरर, बंदूक की नोंक पर यौन शोषण

जम्मू-कश्मीर के शोपियॉं में आतंकी ठिकाने से भारी मात्रा में कंडोम, वियाग्रा, गर्भनिरोधक गोलियॉं और पोर्न बरामद किया गया है। इससे पता चलता है कि कश्मीर में इस्लाम के नाम पर जारी ‘जिहाद’ की आड़ में सेक्सुअल टेरर को अंजाम दिया जा रहा है। आतंकी कश्मीरी महिलाओं का यौन शोषण करते हैं।

यह कुछ ऐसा ही है जैसा सीरिया में आईएस आतंकी यजीदी महिलाओं के साथ करते हैं। घाटी में चल रहे इस सेक्सुअल टेरर (Sexual terror) को लेकर टाइम्स नाउ ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

न्यूज चैनल के मुताबिक शोपियाँ में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने से कंडोम के 19 पैकेट, वियाग्रा टैबलेट के 5 पैकेट, पोर्न, गर्भनिरोधक गोलियों के 10 पैकेट आदि बरामद हुए हैं।

सीमा पार से आतंकी इस्लाम और कश्मीर के लोगों की ‘आजादी’ के नाम पर आते हैं। मगर इसकी आड़ में वे कश्मीर के युवा लड़कों, लड़कियों, असहाय महिलाओं को अगवा करते हैं। उनका यौन शोषण करते हैं।

पाकिस्तान समर्थित आतंकी अपनी यौन तृप्ति के लिए कश्मीरी लड़कियों को जबरन उनके घर से उठा लेते हैं। ऐसी ही एक पीड़िता ने आपबीती टाइम्स नाउ के साथ साझा की। उसे जैश के आतंकियों ने अगवा किया था।

उसने बताया कि बंदूक की नोंक पर उसे अगवा किया गया। अपहरण कर जैश के आतंकी से जबरन निकाह करवा दिया गया।

पीड़िता ने बताया कि वह पहले से ही शादीशुदा थी। उसकी शादी तनवीर अहमद के साथ हुई थी। जैश आतंकियों ने उसके पति तनवीर को काफी मारा-पीटा और पीड़िता को तलाक देने के लिए मजबूर किया। जिस दिन पीड़िता का अपहरण किया गया उसके पिता हॉस्पिटल में थे। वो कहती है कि जब उसने जैश के आतंकियों के साथ जाने इनकार कर दिया तो उन लोगों ने जबरन अगवा कर लिया।

पीड़िता के पिता ने भी टाइम्स नाउ से बात करते हुए इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने तो इसकी शादी तनवीर के साथ की थी। फिर दाऊद जबरदस्ती मेरी लड़की को ले गया। उसने मार-पीट करके हमारी लड़की को ले लिया। हमने उसे छुड़ाने की कोशिश की तो बंदूक दिखाकर धमकाया और मारा भी। हम लाचार थे, हम क्या करते।”

उन्होंने बताया कि दाऊद धमकी देता था कि अगर उन्होंने लड़की को उसे नहीं सौंपा तो वो उसे मार देगा। वो लड़की को लेने के लिए किसी भी वक्त वहाँ पर चला आता था।

गौरतलब है कि हाल ही में, जम्मू और कश्मीर का शोपियाँ जिला इस्लामिक आतंकवादियों के केंद्र के रूप में उभरा है। पिछले दो हफ्तों में, छह शीर्ष कमांडरों सहित लगभग 22 आतंकवादियों को इस क्षेत्र में नौ अलग-अलग अभियानों में ढेर किया गया है। जम्मू और कश्मीर में इस साल अब तक सुरक्षा बल सौ से अधिक आतंकियों को ढेर कर चुके हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में अनंतनाग में हिंदू सरपंच अजय पंडिता की हिजबुल के आतंकवादियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। अजय पंडिता की बेटी ने अपने पिता की हत्या करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिशोध लेने की बात कहते हुए कहा था कि जिसने भी ये किया है, उसको वो जिंदा नहीं छोड़ेंगी। एक गोली तो मारेंगी ही।

ट्रेलर: विनोद दुआ के बोल…अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Vinod Dua mashup

विनोद दुआ ने पिछले कुछ सालों से बहुत हाथ-पाँव मारा है प्रपंच फैलाने में। अजीत भारती खोल रहे हैं पूरा कच्चा-चिट्ठा।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

इस्लामाबाद में ‘लापता’ हुए भारतीय उच्चायोग के कर्मचारी लौटे, पाकिस्तानी उच्चायुक्त को तलब कर दी गई थी हिदायत

इस्लामाबाद में लापता हुए भारतीय उच्चायोग के दोनों कर्मचारी लौट आए हैं। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। बताया है कि दोनों कर्मचारी सुरक्षित रूप से वापस भारतीय मिशन में लौट आए हैं।

इससे पहले इन्हें कथित तौर पर गिरफ्तार करने की खबर आई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को तलब किया था।

उनसे कहा गया था कि गिरफ्तार किए गए अफसरों को परेशान ना किया जाए और ना उनसे किसी तरह की पूछताछ की जाए। भारत ने गिरफ्तार अफसरों को तुरंत उनकी कार समेत भारतीय दूतावास पहुॅंचाने को कहा था। साथ ही पाकिस्तान को याद दिलाया था कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि सोमवार सुबह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सुरक्षा अधिकारी और उनका ड्राइवर बाहर गए थे, लेकिन तय जगह नहीं पहुँच पाए। आईएसआई द्वारा इन्हें अगवा किए जाने की आशंका जताई जा रही थी।

बता दें कि कुछ ही दिनों पहले भारतीय राजनयिक गौरव अहलूवालिया का पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बाइक सवार लोगों ने पीछा किया था और डराया-धमकाया था। खबर थी कि एक ISI एजेंट ने भारतीय राजनयिक का पीछा किया, उनकी जासूसी की। इसके बाद भारत ने कड़ा एतराज जताया था।

उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान उच्चायोग के दो पाकिस्तान अधिकारियों आबिद हुसैन और ताहिर हुसैन पर जासूसी के आरोप लगने के बाद भारत ने उन्हें देश छोड़ने के लिए कह दिया था। ये दोनों दिल्ली में वीजा विभाग में काम करते थे। इसके बाद पाकिस्तान में बीते कुछ दिनों से भारतीय अधिकारियों का पीछा किया जा रहा है।

भारत ने अत्यधिक निगरानी को लेकर विरोध भी दर्ज कराया था। माना जा रहा है कि अपने अधिकारियों के पकड़े जाने से बौखलाया पाक अब वहाँ काम कर रहे भारतीयों को फँसाने की फिराक में है।

अधिकारियों को तुरंत उनकी कार सहित दूतावास भेजें: पाकिस्तानी उच्चायुक्त को MEA ने किया तलब

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज (जून 15, 2020) सुबह भारतीय उच्चायोग के 2 अधिकारियों के लापता होने पर भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को विदेश मंत्रालय में तलब किया। वे दोपहर में मंत्रालय पहुॅंचे।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि सोमवार सुबह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सुरक्षा अधिकारी और उनका ड्राइवर बाहर गए थे, लेकिन तय जगह नहीं पहुँच पाए। भारत ने लापता अफसरों की इस्लामाबाद में गिरफ्तारी की रिपोर्ट पर पाकिस्तान को सख्त हिदायत दी है।

भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि गिरफ्तार किए गए अफसरों को परेशान ना किया जाए और ना उनसे किसी तरह की पूछताछ की जाए। भारत ने कहा कि गिरफ्तार किए गए अफसरों को तुरंत उनकी कार समेत भारतीय दूतावास भेजा जाए। इन अफसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है।

टाइम्स नाउ के पत्रकार निकुंज गर्ग ने बताया था कि दोनों अधिकारियों का अपहरण पाकिस्तान की खुफिया सेवा आईएसआई ने किया है। कर्मचारियों को भारतीय अधिकारियों से संपर्क किए हुए कई घंटे हो चुके हैं।

बता दें कि कुछ ही दिनों पहले भारतीय राजनयिक गौरव अहलूवालिया का पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बाइक सवार लोगों ने पीछा किया था और डराया-धमकाया था। खबर थी कि एक ISI एजेंट ने भारतीय राजनयिक का पीछा किया, उनकी जासूसी की। इसके बाद भारत ने कड़ा एतराज जताया था।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने बताया है कि दो भारतीय अधिकारी इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर थे जब उन्हें आईएसआई ने अगवा किया था। उन्होंने कहा कि अब पाकिस्तानी एजेंसी के अपराधों को छुपाने के लिए कहानी बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान उच्चायोग के दो पाकिस्तान अधिकारियों आबिद हुसैन और ताहिर हुसैन पर जासूसी के आरोप लगने के बाद भारत ने उन्हें देश छोड़ने के लिए कह दिया था। ये दोनों दिल्ली में वीजा विभाग में काम करते थे। इसके बाद पाकिस्तान में बीते कुछ दिनों से भारतीय अधिकारियों का पीछा किया जा रहा है।

भारत ने अत्यधिक निगरानी को लेकर विरोध भी दर्ज कराया था। माना जा रहा है कि अपने अधिकारियों के पकड़े जाने से बौखलाया पाक अब वहाँ काम कर रहे भारतीयों को फँसाने की फिराक में है।

अमित शाह ने कोरोना वार्डों में CCTV कैमरे लगाने के दिए निर्देश, LNJP जाकर हालात का लिया जायजा

दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना केसों से निपटने के लिए अब देश के गृहमंत्री अमित शाह ने खुद कमान सँभाल ली है। सोमवार (15 जून 2020) को शाह ने सर्वदलीय बैठक की। इसके बाद वे LNJP अस्पताल जाकर हालात का जायजा लिया।

LNJP अस्पताल पहुँचे अमित शाह ने कॉन्फ्रेंस रूम में वरिष्ठ डॉक्टरों से मुलाकात की। इस दौरान डॉक्टरों ने शाह को अस्पताल में कोरोना मरीजों की संख्या, कोरोना से अभी तक होने वाली मौतें और दिल्ली से बाहर के कोरोना मरीजों की अस्पताल में संख्या के बारे में अवगत कराया। वहीं अमित शाह ने डॉक्टरों से कोरोना वायरस से होने वाली मौत और उनके ठीक होने की दर के बारे में जानकारी ली।

गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के चीफ सेक्रेट्री को निर्देश दिए हैं कि वह अस्पतालों के अंदर सभी कोरोना वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगवाएँ, जिससे कि वार्ड में मौजूद कोरोना मरीजों की ठीक से देखभाल की जा सके और उनकी समस्याओं को दूर किया जा सके।

इससे पहले हुई सर्वदलीय बैठक में अमित शाह ने सभी राजनीतिक दलों से इस संकट में लोगों के हित के लिए मिलकर काम करने का अनुरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के उपराज्यपाल से दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना वायरस पर चर्चा करने के बाद ऐलान किया कि अब दिल्ली में हर दिन 18 हजार कोरोना के टेस्ट किए जाएँगे।

अमित शाह ने आगे कहा, “ऐसे संकट के समय में राजनीतिक मतभेदों को भुला दिया जाना चाहिए और सभी दलों को एकजुट होकर दिल्ली के लोगों के लिए काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सभी को मिलकर इस महामारी को रोकने के लिए काम करना चाहिए।”

शाह ने कहा, “राजनीतिक दलों के बीच की एकता दिल्ली में स्थिति के बारे में लोगों के बीच विश्वास और विश्वास बढ़ाने का काम करेगी। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूँ कि वे अपने कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने के लिए कहें कि केंद्र द्वारा दिल्ली के लोगों के लिए लिए गए फैसलों को तेजी से जमीन पर लागू किया जाए।”

नॉर्थ ब्लॉक में हुई सर्वदलीय बैठक में दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी- आम आदमी पार्टी, भाजपा, काँन्ग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी शामिल थी।

दरअसल देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना मरीजों की दुर्दशा और कोरोना के टेस्ट में कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों तल्ख टिप्पणी की थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए केन्द्र सरकार को भी नोटिस जारी किया था।

इसके बाद ही केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में बिगड़े हालात की कमान को अपने हाथों लिया और तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाई। उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री की चिंताओं पर अमित शाह ने घोषणा की कि कोरोना वायरस मरीजों के लिए बेड की कमी से निपटने के लिए केन्द्र 500 रेलवे कोच की व्यवस्था करेगा।

महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद दिल्ली कोरोना वायरस के संकट की तीसरी सबसे बुरी स्थिति वाला राज्य है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 41,182 हो गई है, जबकि कोरोना से मरने वालों की संख्या 1,327 हो गई है।

पिछले कई दिनों से इंटरनेट पर दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना वायरस के मरीजों के बेड न मिलने की खबरें लगातार घूम रही थीं। इसकों गंभीरता से लेते हुए अमित शाह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई और कोरोना संकट से निपटने के लिए चर्चा की।