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1000 सालों हिन्दू सहिष्णुता ही तो दिखा रहा है लेकिन इस चक्कर में नुकसान भी उनका ही हुआ

“पिछले 1000 वर्षों में आखिर क्यों भारतीयों को इतने कष्टों का सामना करना पड़ा, जबकि भारतीय सामान्यतः सरल स्वभाव के होते हैं और न ही इन्होंने कभी किसी पर आक्रमण किया।” किसी ने यह प्रश्न सद्गुरु श्री जग्गी वासुदेव से किया। इस प्रश्न ने मुझे भी परेशान किया। सद्गुरु ने इस दिशा में जवाब दिया कि भारतियों ने कभी शत्रु को समझने का काम नहीं किया। 

उदाहरण स्वरूप आखिर क्यों पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को जिन्दा छोड़ दिया यह जानने के बावजूद कि उसने कभी युद्ध के किसी नियम का पालन नहीं किया। युवा राजा ने निश्चित ही इस बात विश्लेषण नहीं किया कि, कैसे वह आक्रमण कारी इतना अनैतिक बना। राजा को शायद इस्लाम की कोई जानकारी ही नहीं थी जो कि उनके अपने हिन्दू धर्म से एकदम अलग था। 

आज भी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। आज भी शत्रु के बारे में स्पष्टता बहुत कम ही है जबकि स्वामी विवेकानंद और श्री अरोबिन्दो यह देख चुके थे की खतरा कहाँ से आता है। विवेकानंद ने तो कहा भी था कि किसी के हिन्दू धर्म छोड़ने का सिर्फ यह मतलब नहीं कि एक हिन्दू कम हुआ बल्कि यह है कि एक शत्रु बढ़ गया। कैसे? क्या यह संभव है कि धर्म इंसानों को शत्रु बना देता है? इस पर जरूर गहन विचार की आवश्यकता है। 

बहुत बड़ा अंतर है एक ओर हिन्दू धर्म में और दूसरी ओर इस्लाम और ईसाई धर्म में, जिसका हमें सामान्यतः पता ही नहीं। हमें इनके बारे में पता होना चाहिये और इन पर उंगली उठाने का साहस होना चाहिए, ऐसा मानवता की भलाई के लिए आवश्यक है। 

पहला बड़ा अंतर यह है: जहाँ सनातन धर्म और वेद सबसे प्राचीन हैं और भारत की महान और भद्र सभ्यता का आधार हैं, वहां ईसाई धर्म और इस्लाम नए नवेले हैं जिन्होंने प्रचलित संस्कृतियों को नष्ट कर उनके स्थान पर कट्टरआस्था पर आधारित व्यवस्था थोप दी।

बहुत सारी सभ्यताएँ जैसे इंका, माया, एज़टेक्, बेबीलोन, ग्रीस, पर्शिया, अफगानिस्तान समाप्त हो गयीं और इनके इतिहास को झुठला दिया गया। पाकिस्तान और बांग्लादेश में ही देखो, प्राचीन हिन्दू संस्कृति गायब हो चुकी है। भारत भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लाखों लोग मारे गए और ज्ञान का खजाना आग की लपटों के भेंट चढ़ गया जब अनगिनत ग्रंथों से भरे पुस्तकालय जला दिए गए।

पर क्या धर्म का ध्येय लाभप्रद नहीं होना चाहिए? क्या धर्म भगवान के बारे में नहीं है, हमारे अस्तित्व के कारण के बारे में नहीं है, और मानव का उस महान शक्ति के साथ सम्बन्ध के बारे में नहीं है? और उस दैविक शक्ति की पूजा और उसके प्रति समर्पण के बारे में नहीं है? क्या दुनिया के संविधानों में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है जिसे संयुक्त राष्ट्र का समर्थन प्राप्त है। फिर क्यों इतनी बर्बरता? आखिर कहाँ गलती हुई?

इसे आसानी से देखा जा सकता है परन्तु कोई इस तरह देखना नहीं चाहता। इसका कारण यह है कि ‘ईश्वर की आज्ञा’ जैसे असंभव दावे बलात लागू किये गए, पहले हिंसा के साथ और बाद में बच्चों को सिखा कर और धर्म छोड़ने वालों पर कठोर सजा लगा कर। इस तरह समय के साथ इनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गयी। क्या गलत था बहुत ही कम लोग कह पाए क्योंकि कोई अपने जीवन को खतरे में नहीं डालना चाहता। इन धर्मों ने असहमति को वस्तुतः ख़त्म कर दिया। 

क्या गलत था इसे और ढंग से समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा 

वेद जो कि हमारे ब्रम्हांड की उत्पत्ति और हमारे अस्तित्व का सबसे प्राचीन ज्ञान है एक महान हस्ती ( अक्सर जिसे ब्रह्म कहा जाता है ) की अवधारणा करते है, जिससे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुई जो हर जगह व्याप्त है। इसका मतलब है कि ब्रह्म हमारे अंदर भी है और माया शक्ति के बल से हमारे विचारों और चित्त में समाया है। प्राचीन ऋषियों ने इसकी उत्पत्ति का विश्लेषण किया और हमारे अस्तित्व के लिए जिम्मेदार शक्तियों को खोजा जिन्हें हम देव कहते हैं। वो देख पाए कि सूक्ष्म अंतरिक्ष भी स्थूल अंतरिक्ष की तरह ही है और इस तरह अपने अंदर की गहराईयों में जाकर वो अंतरिक्ष में पहुँच पाए, आकाश का मानचित्र बनाया और भावी पीढ़ी के लिए मानव पहुँच के सभी क्षेत्रों में अथाह ज्ञान का सृजन किया। अथाह ज्ञान जो कि विराट चेतन में शुरू से मौजूद था ऋषियों ने पाया अपनी गहन तपस के श्रम से।  

इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि प्राचीन समय में भारतीय सभ्यता ने विश्व के कई भागों पर अपना प्रभाव छोड़ा है। लाखों वर्षों के लम्बे इतिहास में (भारतीय ग्रंथों के अनुसार जिन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए), बहुत सारे देवी-देवताओं की अलग-अलग प्रकार की पूजा विकसित हुई, जो कि एक ही ब्रह्म का प्रतिरूप थे, परन्तु भिन्न-भिन्न वर्गों में कोई वैमनस्य नहीं था। उनका सह अस्तित्व था। किसी ने भी एक मार्ग को थोपने की वकालत नहीं की।

यह बदल गया जब सम्राट अशोक ने अपने राज्य के सभी लोगों को लिए एक ही ऋषि गौतम बुद्ध के मार्ग को अपनाने पर जोर दिया। बुद्ध तो अशोक के पैदा होने से पहले ही मर चुके थे परन्तु कई सभाओं में बुद्ध के प्रवचनों को संकलित करके नियम बनाये गए जो कि अशोक की प्रजा को मानने होते थे। उसने दूसरे देशों में धर्म प्रचारक भी भेजे।

इस तरह अशोक ने उस परंपरा को तोड़ दिया जिसमें हर कोई अपने अंदर मौजूद ब्रह्म को अपने मूल में जानने का मार्ग चुने और स्थापित किया जिसे ब्रिटिश लोगों ने बाद में सर्वोपरि भारतीय मार्ग कहा। हर वो जो अलग होकर अपने अनुयायी चाहता है स्वाभाविक रूप से इस बात पर जोर देगा की उसका पंथ सबसे अच्छा है। और अगर लोग इससे सहमत नहीं हुए तो इसे एक दबाव बना कर फैलाया जा सकता है अगर सत्ता हाथ में है तो। बाद में आदि शंकराचार्य ने बुद्धों को शास्त्रार्थ में चुनौती दी और अधिकतः भारतीय पुनः अपने कम सख्त धर्म में वापस आ गए। 

उसी दौरान, भारत से बहुत दूर सिर्फ 1700 साल पहले रोमन सम्राट ने एक ईसाई धर्म के एक छोटे पंथ को राज्य का धर्म बना दिया। उसने सोचा होगा कि उसकी सारी प्रजा अगर एक ही धर्म को माने तो इसमें फायदा होगा। संक्षेप में वह मसीहा जिसका यहूदी इंतजार कर रहे थे जीसस क्राइस्ट के रूप में आ चुका था नहीं पहचाना जा सका और यहूदियों द्वारा ही मारा गया। 

हालाँकि, राज्य का शह पाते ही इस पंथ ने एक सत्तावादी और हिंसक दौर दिखाया। इसने मौजूदा मंदिरों को ढहा दिया, ग्रंथों को जलाया और मिश्र की एक महिला दार्शनिक हिपटीया की भी हत्या कर दी। और जल्दी ही ईसाई मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप को कुचलने लगे और एक नए आस्थावादी पंथ को लोगों पर थोपने लगे।

वो इतने असहिष्णु कैसे बने? उसका कारण उनका वह दावा था जिसमें एक महान सच्चा ईश्वर, जो कि ब्रह्माण्ड का निर्माता था और पिता था जो स्वर्ग में रहता था ने अपने एकलौते पुत्र जीसस क्राइस्ट को पृथ्वी पर भेजा मानवों को अपने मूल पाप से बचाने के लिए, और कहा कि सभी को जीसस का कहा मानना चाहिए। और जीसस ने क्या कहा? ऐसा कहते हैं कि उन्होंने कहा कि बिना जीसस के कोई भी पिता (ईश्वर) तक नहीं पॅंहुच सकता। इस तरह चर्च यह दावा करता है कि जीसस में विश्वास सर्वथा जरूरी है नरक की अनंत आग से बचने के लिए।

कुछ शताब्दियों बाद वही कहानी दोहराई गयी: सातवीं शताब्दी के मोहम्मद ने ऐलान किया कि एक सच्चे अल्लाह ने उससे एक देवदूत गेब्रियल के जरिये बात की है और उसने जो कहा है वही सारी मानव जाति को मानना होगा। और अल्लाह मनुष्य से क्या चाहता है? वह चाहता है कि सब लोग मोहम्मद को अंतिम पैगम्बर के रूप में कबूल करें जिसे उसने (अल्लाह ने) अपना सारा ज्ञान दे दिया है। और उनकी सबसे बड़ी इच्छा यह है कि अल्लाह में और उस पैगम्बर में आँख बंद कर भरोसा करें: वह चाहता है कि उसके मानने वाले तब तक युद्ध (जिहाद) करें जब तक कि सारे लोग अल्लाह को न मानने लगें। जो विरोध करेंगे वो लोग हमेशा के लिए जहन्नुम (नरक) में अत्यधिक कष्ट भोगेंगे।

मोहम्मद ने खुद दिखाया कि जिहाद कैसे की जाती है। उदाहरण के लिए उसने यहूदी टोलियों पर हमला किया, आदमियों को समर्पण के बावजूद काट डाला, उनकी महिलाओं को रखैल बना लिया और उनकी संपत्ति को लूट लिया। उसकी मृत्यु के बाद उसके अनुयायिओं ने मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप के भागों को कुचलना शुरू कर दिया और जो लोग पहले बलात ईसाई बना दिए गए थे उनसे जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया गया। यह एक ख़ूनी मुहिम थी और भयानक बर्बरता की वजह से अत्यधिक सफल थी। 

इस्लामी आततायी भारत में भी घुसे और खून की नदियाँ बहा दीं। फिर भी प्राचीन भारतीय संस्कृति को पूरी तरह नहीं उखाड़ पाए क्योंकि नया धर्म इस सभ्यता के आगे बहुत गौण था। फिर भी भयानक बर्बरता के बूते इस्लामी आक्रांताओं ने भारतीय समाज में बड़ी घुसपैठ कर ली और बहुत सारे हिन्दुओं का धर्म बदल कर इस्लाम हो गया और बाद में पुर्तगाली और ब्रिटिश राज्य में ईसाई धर्म हो गया।  

भारत के स्वतन्त्र होने के बाद भी ईसाई धर्म और इस्लाम ने हिन्दू संस्कृति को ख़त्म करने का प्रयास नहीं छोड़ा है। सभी प्रकार के चर्च इस काम को गर्मजोशी और बहुत सारे धन के साथ कर रहे हैं और दुर्भाग्यवश उन्हें इसमें विभिन्न ‘योजनाओं’ जैसे कि जोशुआ योजना, के माध्यम से सफलता भी मिल रही है। इस्लाम इस काम को बहुत सारे बच्चे पैदा करके और लव जिहाद के द्वारा कर रहा है और हिन्दुओं और ईसाइयों को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि इस्लाम बेहतर है उस धर्म से जो बंदरों और चूहों की पूजा करता है। जो कोई भी इस दबाव डाल कर धर्म परिवर्तन करने के तरीके पर एतराज करता है वह बेरहमी से मारे जाने का खतरा उठाता है।

इतनी शताब्दियों में एक बात तो साफ़ हो चुकी है कि ईसाई धर्म और इस्लाम दूसरों के लिए खतरनाक हैं और उन अपने ही धर्म वालों जो पूरी तरह से उनके मत में विश्वास नहीं रखते और ‘सिर्फ एक सत्य की अवधारणा’ पर संदेह प्रकट करते हैं के लिए भी खतरनाक है। इस्लाम और ईसाई धर्म ने करोड़ों समान्य लोगों को मार डाला, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने इन धर्मों से निष्ठा नहीं रखी या दूसरे धर्म के साथ जुड़े रहे।

आज भारत में 20 करोड़ मजहब विशेष के लोग हैं और शायद 4 करोड़ से ज्यादा ईसाई है, क्योंकि बहुत से ईसाई जातिगत फायदे के लिए अपने हिन्दू नाम को बरक़रार रखते है। क्या वे भारत के शत्रु हैं, जैसा स्वामी विवेकानन्द ने बताया था?

दुश्मन एक कटु शब्द है। फिर भी जिन लोगों का धर्मपरिवर्तन हुआ है अगर वो उस पर भरोसा करने जो उन्हें सिखाया गया है तो वो निश्चय ही हिन्दुओं को हेय दृष्टि से देखेंगे। उनके मन में ये बात बैठ जाती है कि वे (हिन्दू) सच्चे ईश्वर को स्वीकार नहीं करते। जब मैं छोटी थी तब हम कैथोलिक लोग प्रोटेस्टेंट को तिरस्कृत दृष्टि से ही देखते थे। हम कैथोलिकों को लगता था की हम सही थे और दूसरे गलत और हेथन लोग तो बहुत ही गलत थे। 

उन्नीस सौ अस्सी के दशक में, मैंने शांतिवन के एक ईसाई आश्रम में कुछ समय बिताया था, जो कि हम विदेशियों जो हिन्दुओं और बौद्धों के प्रति मित्रता पूर्ण व्यव्हार रखते थे, के प्रति उदार था। फिर एक बार मैंने एक बेनडिक्टिन मोंक, बेडे ग्रिफिथ्स को वहाँ की नौसिखिया भारतीय ननों से बात करते सुना। मैं स्तंभित थी यह देख कर कि कितना डट कर वह ननों को सिखा-पढ़ा रहा था कि सिर्फ उनकी आस्था सच्ची है और मैंने बाद में उससे प्रश्न किया। उसका जवाब था, “मुझे इनकी आस्था को मजबूत करना है ताकि वो जान सकें कि हिन्दू धर्म की सीमा कहाँ तक है।”

हिन्दू सीमाओं की चिंता नहीं करते। वे सभी आस्थाओं को स्वीकारते हैं। हर उस तरीके को स्वीकारते हैं जो अपने सत्व को पहचानने में मदद कर सकता है। परन्तु ऐसी सोच दूसरे धर्म के अनुयायिओं की नहीं है, जिन्हें गुजारे के लिए सीमाओं की जरुरत है। हिन्दू सामान्यतः इस सोच को नहीं समझते। वो अपनी सहज बुद्धि का उपयोग करते हैं और इस तरह की बातों को कि अगर उन्होंने धर्मांतरण नहीं किया तो वे नरक की आग में जलेंगे, अनदेखा कर देते हैं। वो कभी इस बात की कल्पना नहीं करते कि कोई इस तरह की बकवास को गंभीरता से लेता होगा। 

पर वे गलत हैं। बहुत से लोग इन बातों (बकवास) पर भरोसा करते हैं। इस तरह की धारणा खतरनाक और विभाजनकारी है। इससे घृणा प्रेरित अपराधों का सृजन होता है। चूंकि इन बातों के कोइ प्रमाण नहीं हैं और कभी हो भी नहीं सकते, इसलिए इन खतरनाक धारणाओं की तरफ उंगली उठाने और आलोचना करने की जरुरत है। इस को बच्चों को नहीं सिखाया जाना चाहिए 

हालाँकि ईसाईयों ने हाल के दशकों में हत्याएँ करना बंद कर दिया है, लेकिन ख़ास मजहब ने नहीं किया। और यह रोज होता है। और वो आतंकवादी असल में भरोसा करते हैं कि वो सही कर रहे हैं और उन्हें जन्नत (स्वर्ग) में ऊँचा स्थान मिलेगा (Q 4. 95)। कौन-सा युवा अपनी जान आत्मघाती हमले में गँवा देगा अगर उसे यह भरोसा न दिला दिया गया होता कि काफिरों को मारने के बाद उसके साथ अच्छा होगा।

यह स्थिति गंभीर है। यह बहुत बुरा है कि खुद को पवित्र समझने वाले ईसाई हिन्दुओं को नीची दृष्टि से देखते हैं। यह और भी बुरा है कि पवित्र ‘मजहबी’ दूसरों को हेय दृष्टि से देखें, हमसे सफेद झूठ (तक़ैय्या) बोलें और हमें नुकसान पहुँचाएँ और मार भी दें, और उनका जमीर भी इसको बुरा न माने। एक सामान्य तर्क कि कुरान 5.32 एक भी आदमी को मारने को वर्जित करता है एक धोखा है। पहली बात तो यह कि, अल्लाह इजराइल के पुत्रों को सम्बोधित कर रहा है और दूसरी, एक व्यक्ति अगर बुरा करे तो उसे मारा जा सकता है। और एक कट्टर आस्थावादी के नज़रों में इससे बड़ी बुराई क्या होगी कि कोई अल्लाह और उसके पैगम्बर में भरोसा नहीं करे?

भाग्यवश, बहुत से लोग हैं जिनकी आस्था खो चुकी है। खास तौर से ईसाईयों के बड़े समूह, जब से विरुद्ध मत के लिये सजा बंद हुई है, चर्च से मुक्त हो चुके हैं। बहुत सारे अल्पसंख्यकों के मन में भी संदेह है। एक परिचित के अनुमान के अनुसार सऊदी अरब में 10 प्रतिशत लोग नास्तिक हो चुके हैं। ऐसे बहुत से विडियो हैं जिनमें समुदाय विशेष वाले अपनी पूर्व-आस्था की खुलेआम आलोचना करते हैं। ये उनके लिए खतरनाक है। सामाजिक दबाव बहुत बड़ा होता है और उनका अपना परिवार उन्हें मार सकता है। ऊपर से कई देशों में धर्मत्याग के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।

और यहाँ फिर हिन्दू अपना काम नहीं करते हैं। वे उन्हें सहारा नहीं देते जो अपने कट्टर धर्म को छोड़ देते हैं। उससे भी बुरा तो जब सरकार भी लोगों को अपने धर्म में ही रहने के लिए प्रोत्साहन देती है ‘अल्पसंख्यक लाभ’ देकर।

क्या किया जा सकता है? हम मिल कर इस बारे में सोंचे। पर एक बात की अवश्य जरुरत है: हमें ईमानदार होना पड़ेगा और निडर होना होगा इस्लाम और ईसाई धर्म के हानिकारक पक्ष को उघाड़ने में, दोनों को ही इस बात में कोई दुराव छिपाव नहीं है कि वे हिन्दू धर्म को ख़त्म करना चाहते हैं।

हर किसी को अधिकार है कि वो उस परम शक्ति कि उपासना करे। इसकी गारंटी धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि इस अविश्वसनीय ब्रह्माण्ड के मूल में एक महान बुद्धि और शक्ति है। परन्तु किसी को भी इस तरह के आधारहीन दावे करने का हक़ नहीं है कि वह परमशक्ति कुछ से प्रेम करता है और किन्हीं दूसरों से नहीं और यहाँ तक कि ऐसे अधिकांश मानवों को हमेशा के लिए नरक की आग में फ़ेंक देता है जो इस बात को नहीं स्वीकारते कि परम सत्य सिर्फ एक व्यक्ति (यहाँ दो है…) को दिया गया है। इस बात को कोई मतलब नहीं है। और इसने मानवता को इतना कष्ट पहुँचाया है।

स्पष्ट रूप से इस तरह का दावा (कि सिर्फ एक व्यक्ति का ही अनुसरण किया जाये ) सत्य नहीं है। फिर भी काफी लम्बे समय से हिन्दुओं ने अपनी जान के डर से इस का विरोध नहीं किया। पर अब धीरे धीरे हिन्दुओं को ताकत मिलने लगी है। कई लोगों को अपनी विरासत की बड़ी कीमत महसूस होने लगी है और पता लगने लगा है कि उन्हें धोखा दिया गया है इस बात का विश्वास दिला कर कि हिन्दू धर्म का कोई मोल नहीं। 

क्या उनमें इतना साहस आ पाएगा जब वो आग्रह करें कि उनकी धरोहर का सम्मान किया जाये और भारत और विश्व भर में छात्रों को पढ़ाया जाये? ऋषियों की अंतर्दृष्टि कभी भी किसी भी परीक्षण में गलत साबित नहीं हुई और इसने विज्ञान, कला और तारतम्य को प्रेरित किया है।

झूठ को फैलते रहने देने में कोई सदाचार नहीं है। 

मूल लेख: मारिया वर्थ
अनुवाद : प्रो प्रशांत शुक्ला

एनकाउंटर के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे निर्भया के गुनहगारों के वकील, रेप के लिए महिलाओं को मानते हैं जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट में सपा की राज्यसभा सांसद जया बच्चन और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 2 याचिकाओं में हैदराबाद पुलिस द्वारा डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) गैंगरेप व हत्याकांड के आरोपितों के एनकाउंटर को न्यायेतर बताया गया है। एक याचिका अधिवक्ता जीएस मणि व प्रदीप कुमार यादव ने दायर की है। वहीं दूसरी याचिका वरिष्ठ वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है। मणि व यादव की याचिका में एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की माँग की गई है।

वहीं एमएल शर्मा ने अपनी याचिका में बच्चन और मालीवाल पर ‘अवैध हत्याओं को बढ़ावा देने’ का आरोप लगाया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की है कि जब तक इस मामले में चारों आरोपित दोषी साबित नहीं हो जाते, तब तक मीडिया को इस मामले पर डिबेट आयोजित करने से रोका जाए। मणि व यादव की याचिकाओं में कहा गया है कि इस एनकाउंटर में 2014 के सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। बता दें कि डॉक्टर रेड्डी गैंगरेप व हत्याकांड के आरोपितों को पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएट करने ले गई थी लेकिन उन्होंने पुलिस पर पत्थरबाजी की और हथियार छीन लिए, जिसके बाद पुलिस की आत्मरक्षा की कार्रवाई में चारों ढेर हो गए।

एमएल शर्मा वही वकील हैं, जिन्होंने दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप कांड में आरोपितों की पैरवी की थी। पहले तो उन्होंने 23 वर्षीय निर्भया गैंगरेप व हत्याकांड के सभी 5 आरोपितों की तरफ़ से पैरवी की लेकिन अंत में उन्होंने आरोपित मुकेश की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जिरह की। उन्होंने उस वक़्त कहा था कि उन्होंने आज तक ऐसा कभी नहीं सुना कि किसी ‘सम्मानित महिला’ का कभी बलात्कार हुआ हो। उन्होंने उस वारदात के लिए निर्भया के पुरुष मित्र को जिम्मेदार ठहरा दिया था। शर्मा ने कहा था कि अविवाहित जोड़ों को रात के बाद बाहर निकलना ही नहीं चाहिए।

एमएल शर्मा ने राफेल मामले में भी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी। 2016 में एक बयान देते हुए उन्होंने ख़ुद के ही बयान से दो क़दम आगे बढ़ाया था। शर्मा ने तब कहा था कि निर्भया के साथी ने ही उसके ख़िलाफ़ गैंगरेप की वारदात की साज़िश रची। निर्भया के शरीर में लोहे का रॉड घुसा कर आँत निकाले जाने के आरोप पर एमएल शर्मा ने कहा था कि ये संभव ही नहीं है। उनका आरोप था कि पुलिस ने पूरे मामले को सनसनीखेज बनाने के लिए लोहे की रॉड वाली कहानी गढ़ी। उन्होंने बीबीसी की विवादस्पद डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ में भी कई विवादित बयान दिए थे।

एमएल शर्मा ने इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले में भी याचिका दायर की थी। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले जब सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया, तब शर्मा इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। उन्होंने अजीबोगरीब दलील दी थी कि संविधान में कहीं भी अंतरिम बजट का जिक्र नहीं है, इसीलिए यह असंवैधानिक है। बजट पेश होने के कुछ ही घंटों बाद वकील शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से इसे रद्द करने की माँग की थी।

निर्भया गैंगरेप काण्ड को पुलिस ने सनसनीखेज बनाया: वकील एमएल शर्मा

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में एमएल शर्मा ने कहा था कि बलात्कार के लिए पुरुष से ज्यादा महिलाएँ जिम्मेदार होती हैं। उन्होंने कहा था कि बलात्कार होते समय महिलाओं को संघर्ष नहीं करना चाहिए बल्कि जो हो रहा है, उसे होने देना चाहिए। साथ ही वो कहते हुए दिखे थे कि निर्भया मामले में अगर पीड़िता चुपचाप रेप होने देती तो आरोपित ‘सब कुछ कर के’ उसे घर तक छोड़ देते और केवल उसके साथी की पिटाई करते। बाद में इस बयान पर हंगामा होने पर शर्मा ने सफाई दी कि ये स्क्रिप्टेड शो था और उन्होंने डायरेक्टर के कहने अनुसार एक्टिंग की थी।

वहीं आम लोगों की बात करें तो अधिकतर लोग पुलिस की कार्रवाई से ख़ुश नज़र आ रहे हैं। हैदराबाद में पुलिस पर लोगों ने फूल बरसाए। पुलिसकर्मियों को कंधे पर उठा कर घुमाया गया। स्कूल छात्राओं ने पुलिस को देखते ही अपनी ख़ुशी का इजहार किया। सोशल मीडिया पर लोगों ने तारीफ़ की। वहीं कुछ मानवाधिकार संगठनों को बलात्कार के आरोपितों का एनकाउंटर में मारा जाना नागवार गुजरा और उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाओं की लाइन लगा दी। तेलंगाना हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर तक चारों आरोपितों के शवों को दफ़नाने या जलाने पर रोक लगाई हुई है।

नाबालिग से दूसरी बार गैंगरेप: आरोपित अल्ताफ, सरफराज, इरशाद, सौयब पलवल से फरार

हैदराबाद में गैंगरेप और ब्रूटल मर्डर के आरोपितों का एनकाउंटर हो चुका है लेकिन अभी भी कुछ दरिंदे सबक लेने को तैयार नहीं हैं। ताजा मामला हरियाणा के पलवल शहर का है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पलवल जिले से 17 वर्षीय लड़की का अपहरण कर गैंगरेप करने का मामला सामने आया है।

पुलिस के मुताबिक पलवल में चार दरिंदों ने नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की वारदात को उस समय अंजाम दिया जब रात के समय पीड़िता टॉयलेट के लिए घर से बाहर निकली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला थाना प्रभारी हीरामणी ने बताया कि पीड़िता की माँ ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी 17 वर्षीय बेटी चार दिसंबर की रात 11 बजे टॉयलेट करने के लिए घर से बाहर निकली थी। तभी चार युवकों ने उसका अपहरण कर लिया और खेत में ले जाकर बारी-बारी से उसका रेप किया।

पीड़िता की माँ ने पुलिस को बताया कि बेटी के शौच के लिए घर से बाहर जाने के दौरान आरोपित अल्ताफ, सरफराज उर्फ सफ्फू, इरशाद उर्फ मंगली व सौयब ने नाबालिग का अपहरण कर लिया और खेत में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप जैसी दरिंदगी की। चारो आरोपितों ने लगभग दो घंटे बाद पीड़िता नाबालिग को खेत में ही छोड़ कर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़िता ने घर आकर आपबीती अपनी माँ को बताई तो वह दंग रह गई। उसके बाद पीड़ित परिवार ने थाने पहुँचकर गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला थाना पुलिस ने पीड़िता नाबालिग की माँ की शिकायत पर चारों नामजदआरोपितों उसी दौरान गाँव रुपड़ा के रहने वाले अल्ताफ, सरफराज उर्फ सफ्फू, इरशाद उर्फ मंगली और सौयब के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सभी आरोपित फरार बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला थाना प्रभारी हीरामणी के अनुसार पीड़िता की माँ का यह भी आरोप है कि इन्ही चारों आरोपितों अल्ताफ, सरफराज उर्फ सफ्फू, इरशाद उर्फ मंगली और सौयब ने ही 13 अगस्त 2019 को भी उनकी बेटी से गैंगरेप किया था। तब इसकी शिकायत उन्होंने बहीन थाने में दर्ज कराई थी। जिसे बाद में पुलिस ने कैंसिल कर दिया था। महिला थाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर बीती रात नामजद इन चारों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि आरोपितों की धड़पकड़ के लिए दबिश दी जा रही है।

‘भारत दुनिया का रेप कैपिटल’ – विदेशी मीडिया के प्रोपेगेंडा को एक बार फिर राहुल गाँधी ने बढ़ाया आगे

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके पर शनिवार (दिसंबर 7, 2019) केरल के कालपेट्‌टा में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने देश में हो रहे रेप वारदातों को लेकर बयान दिया – अमूमन जैसा होता है, बयान विवादित ही दिया! उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की रेप कैपिटल के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इंटरनैशनल न्यूजपेपर में भारत को रेप कैपिटल कहा जाता है।

उनका कहना है कि विदेशी राष्ट्र सवाल पूछ रहे हैं कि भारत अपनी बेटियों और बहनों की देखभाल क्यों नहीं कर पा रहा है। विदेशी मीडिया हमारे देश के बारे में क्या कहता है, इस पर हमारा बस नहीं है लेकिन विपक्ष के बड़े नेता होने की गरिमा के तहत आप क्या कहते हैं, यह तो राहुल गाँधी को पता होना ही चाहिए। लेकिन नहीं! इन्हें तो सिर्फ राजनीति करनी है। मुद्दा फिर चाहे रेप जैसा गंभीर ही क्यों न हो, ये करेंगे राजनीति ही! शायद राहुल गाँधी को यह भी नहीं पता कि विदेशों में भी रेप होते हैं और बहुत ही विभत्स होते हैं।

चूँकि राहुल गाँधी आज विपक्ष में हैं इसलिए सत्ता पक्ष को टारगेट कर रहे हैं वो भी रेप के मुद्दे पर लेकिन शायद यह भूल रहे हैं कि 16 दिसंबर 2012 को जब देश को झकझोर देने वाला निर्भया रेप कांड हुआ था, तब इनकी ही सरकार थी। दरअसल सरकार के बाहर रहकर सरकार के ऊपर दोषारोपण करना बेहद आसान होता है। और यही काम राहुल गाँधी ने अब तक किया, कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने देश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए। राहुल गाँधी ने कहा कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा के मामले बढ़े हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ता जा रहा है। हर दिन देश में महिलाओं से रेप, छेड़छाड़ और उत्पीड़न की खबरें सामने आती हैं, यह कानून के नदारद होने की स्थिति है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है। उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। दलितों को पीटा जा रहा है, उनकी बाहों को काटा जा रहा है। आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं, उनकी जमीनें छीनी जा रही है। हम रोज पढ़ते हैं कि यहाँ दुष्कर्म हुआ, छेड़छाड़ हुई। देश को चलाने वालों को लगता है कि सारी ताकतें उन्हीं के हाथ में हैं। हमारी संस्थागत ढांचा नाटकीय रूप से टूट रहे हैं। इसका बड़ा कारण है, लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस देश को चलाने वाला व्यक्ति हिंसा और आँखें बंदकर सत्ता में विश्वास करता है।

ठोक दिया, ठीक किया, दिल को बड़ा सूकून मिला: हैदराबाद एनकाउंटर पर ‘दंगल गर्ल’ बबीता फोगाट

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‘क़यामत तक बाबरी मस्जिद वहीं रहेगी, वो मस्जिद थी, मस्जिद है… मस्जिद ही रहेगी’ – ओवैसी की SC को धमकी!

हमेशा अपनी घृणास्पद टिप्पणियों के लिए विवादों में रहने वाले चंद्रागुट्टा के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष आज सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन डाल रहा है, इसका मतबल यह है कि 70 बरस की नाइंसाफ़ी के बाद भी उन्हें इंसाफ़ पर यक़ीन है। लेकिन यह तो बहुत ही सभ्य वक्तव्य है… विवादित और जहरीला सुनने के लिए वीडियो को थोड़ी देर और सुनिए।

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अपने तल्ख़ अंदाज़ में ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों के साथ कहाँ-कहाँ नाइंसाफ़ी नहीं हुई। पढ़ाई-लिखाई से लेकर नौकरियों और अधिकारों को लेकर भी नाइंसाफ़ी हुई है। अपने क्षेत्र का हलावा देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ भी आधारभूत आवश्यकताओं को लेकर नाइंसाफ़ी होती है। इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की बस्तियों में स्कूल और बैंक होने की जगह वहाँ पुलिस स्टेशन बनाए जाते हैं। यह सब नाइंसाफ़ी है।

ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों के साथ इतनी नाइंसाफियाँ होती हैं, बावजूद इसके हमें इंसाफ़ पर यक़ीन है। इसी यक़ीन को आधार बनाते हुए मुस्लिम पक्ष अयोध्या मामले पर आए फ़ैसले के ख़िलाफ़ रिव्यू पिटिशन दाखिल करने के लिए प्रेरित कर रहा है। लोगों को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, “हमको इस मुल्क़ के दस्तूर पर भरोसा है, हमको इस मुल्क़ की अदालत पर भरोसा है। इसको ग़लत नज़र से न देखें। हमारे बुज़ुर्गों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फ़ैसला होगा उसे मानेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर बात करते-करते उन्होंने रिव्यू पिटिशन के बारे में कहा… और यहीं पर उन्होंने जहर भी उगला। एक तरह से सुप्रीम कोर्ट को चुनौती भी दे डाली।

“रिव्यू पिटिशन पर जो भी फ़ैसला होगा, वो चाहे हमारे हक़ में आए या न आए, हमको वो फ़ैसला भी क़बूल है। लेकिन, यह भी एक हक़ीक़त है कि क़यामत तक बाबरी मस्जिद जहाँ थी, वहीं रहेगी। चाहे वहाँ पर कुछ भी बन जाए। वो मस्जिद थी, मस्जिद है… मस्जिद ही रहेगी।”

बता दें कि नवंबर के महीने में हैदराबाद की 16वीं अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने सैदाबाद पुलिस को जुलाई 2019 के दौरान करीमनगर में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान घृणास्पद भाषण के लिए विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

शहर के एक वकील के करुणासागर ने 1 अगस्त को उक्त न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि चंद्रांगुट्टा के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने करीमनगर में एनएन गार्डन फंक्शन हॉल में 23 जुलाई को एक सार्वजनिक सभा ‘जलसा-ए-यादे फखर-ए-मिलात’ के दौरान जहरीले और नफरत फैलाने वाली भाषा का प्रयोग किया था।

एक जनसभा के दौरान विवादित बयान देते हुए उन्होंने कहा था, “हम 25 करोड़ हैं और तुम (हिन्दू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।” इसके आगे उन्होंने कहा था, ”लोग उन्हीं को डराते हैं जो आसानी से डरते हैं। वह (RSS) क्यों हम से घृणा करते हैं। क्योंकि वह हमारा सामना 15 मिनट भी नहीं कर सकते हैं।”

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महिलाओं की पुकार सुने जुडिशरी: RS प्रसाद की सलाह के बाद बोले CJI बोबडे- न्याय तुरंत नहीं हो सकता

केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारतीय न्यायपालिका को सलाह दी है कि वो पीड़ित महिलाओं की आवाज़ सुने और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस देश की महिलाएँ काफ़ी गहरे दर्द में हैं और वो न्याय के लिए तड़प रही हैं। प्रसाद ने कई गणमान्य जजों व बड़े वकीलों की उपस्थिति में बोलते हुए कहा कि न्यायपालिका को इन पीड़ित महिलाओं की पुकार सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से वो इसके लिए निवेदन कर रहे हैं।

रविशंकर प्रसाद ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि देश में घृणित अपराधों के लिए 704 फ़ास्ट ट्रैक अदालतें हैं और ऐसी कई अदालतें स्थापित की जाने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि पॉस्को (बाल यौन अपराध संरक्षण क़ानून) के अंतर्गत आने वाले मामलों के लिए अलग से 1123 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही न्यायपालिका में अमूल-चूल बदलाव की ओर इशारा करते हुए केंद्रीय न्याय एवं विधि मंत्री ने कहा कि अब ‘ऑल इंडिया जुडिशल सर्विसेज’ का समय आ गया है क्योंकि भारत के कई लॉ स्कूलों से काफ़ी सारे प्रतिभावान छात्र-छात्राएँ निकल कर सामने आ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने जुडिशरी को सलाह देते हुए कहा कि हमें प्रतिभा को आकर्षित करने की ज़रूरत है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साढ़े पाँच वर्षों में 469 हाईकोर्ट जजों को बहाल किया गया है। उन्होंने बताया कि नियुक्तियों को और तेज़ किया जाएगा। कॉलेजियम सिस्टम की चर्चा करते हुए प्रसाद ने कहा कि किस जज की नियुक्ति होनी चाहिए, ये कॉलेजियम को ही तय करना है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि जजों की नियुक्ति के समय ऐसे लोगों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके परिवार का कोई भी सदस्य लीगल या जुडिशल सिस्टम का हिस्सा नहीं रहा हो।

केंद्रीय मंत्री ने ये बातें राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन के उद्घाटन के मौके पर कही। इस अवसर पर देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे भी मौजूद थे। सीजेआई बोड़बे ने इस दौरान कहा कि न्याय अपना चरित्र खो देता है, जब यह बदले का रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि न्याय त्वरित रूप से किया जा सकता है या फिर ऐसा होना चाहिए। 2018 में सरकार के ख़िलाफ़ हुए जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बोलते हुए जस्टिस बोबडे ने कहा कि न्यायिक सुधार की प्रक्रिया जुडिशरी ख़ुद करेगी और इसे सार्वजनिक रूप से करना है या नहीं, इसपर बहस हो सकती है।

नई तकनीक पर बात करते हुए सीजेआई बोबडे ने कहा कि न्यायपालिका में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रयोग को बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले महीने शुरू हुई ‘ट्रांसलेशन सर्विस’ में एआई का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सलाह के बाद किया गया।

‘1,000 से ज्यादा फ़ास्ट ट्रैक अदालतें, 1 साल में होगा 1,66,882 बलात्कार-पॉक्सो मामलों का निपटारा’

देश में बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या और इनमें न्याय की धीमी प्रक्रिया को देखते हुए मोदी सरकार ने देश भर में 1023 फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का निर्णय लिया है। इनमें केवल पॉक्सो और बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी। इसके ज़रिए सरकार एक साल में लंबित 1,66,882 रेप और पॉक्सो मामलों का निपटारा कर देना चाहती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने हर एक राज्य और हाई कोर्ट से इनके गठन और संचालन के लिए हाँ या न इसी साल 31 दिसंबर तक कर देने के लिए कहा है। इनके लिए सुझाव अगले वित्त आयोग (2020-25) की रिपोर्ट में भी होने की उम्मीद है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में बताया कि 16 राज्यों ने केंद्र सरकार को इसके लिए हाँ कर दिया है। इसके अलावा 704 फ़ास्ट -ट्रैक अदालतों का गठन हो चुका है और उनमें न्यायिक काम चल रहा है।

भाजपा सांसद राजकुमारी दीया कुमारी ने इस निर्णय का स्वागत किया है।

उन्नाव मामले में भी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले को फ़ास्ट ट्रैक अदालत के हवाले करने की घोषणा कर दी है।

ठोक दिया, ठीक किया, दिल को बड़ा सूकून मिला: हैदराबाद एनकाउंटर पर ‘दंगल गर्ल’ बबीता फोगाट

शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) की सुबह हैदराबाद में वेटनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप के चारों आरोपितों के एनकाउंटर की खबर आई। इस खबर से पूरे देश में हलचल मच गई और हर तरफ से इसको लेकर प्रतिक्रिया आने लगी। इसको लेकर अधिकतर लोगों ने खुशी जताई है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

बबीता फोगाट ने इसको लेकर एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “सुबह उठते ही सबसे पहले आज जो खबर मिली उस खबर से दिल को बड़ा सुकून मिला। हैदराबाद पुलिस ने गैंगरेप के चारों आरोपितों को एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस ने बड़ा ही साहसिक निर्णय लिया है और मैं पुलिस के इस निर्णय के साथ हूँ।”

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हैदराबाद पुलिस के इस निर्णय से आज पूरा देश खुशी मना रहा है। देश की महिलाओं में आज एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का उदय हुआ है।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “ठोक दिया, ठीक किया।”

पहलवान गीता फोगाट ने भी हैदराबाद पुलिस को सलाम करते हुए ट्वीट किया, “हैवानों का एनकाउंटर।”  इसके अलावा पहलवान योगेश्वर दत्त और भारतीय बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हैदाराबाद की पुलिस के सलाम किया। सायना नेहवाल ने लिखा, “Great work #hyderabadpolice ..we salute u”

वहीं ओलिंपिक मेडलिस्ट रेसलर योगेश्वर दत्त ने भी इस कदम के लिए हैदराबाद पुलिस की सराहना करते हुए ट्वीट किया, “सुप्रभात! आज सुबह-सुबह दिल को सुकून पहुँचाने वाली खबर मिली। हैदराबाद में यह एनकाउंटर हमारे कानून के रक्षकों की समाज के राक्षसों पर शानदार विजय है। पुलिस विभाग को कोटि-कोटि नमन। निर्णय का तरीका चाहे जो रहा हो, परंतु इसमें लिया गया समय काबिले-तारीफ है।”

एक अन्य ट्वीट में योगेशेवर दत्त ने लिखा, “जो भी हुआ बहुत अच्छा हुआ देश के दिल को थोड़ा सा सकुन मिला आज। राक्षसों से कोई हमदर्दी नहीं।”

राज्यपाल ने औरंगज़ेब के साथ की CM ममता बनर्जी की तुलना, कहा- बंगाल में लोकतंत्र ख़त्म

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना क्रूर इस्लामिक शासक औरंगज़ेब से की है। सीएम ममता ने कुछ दिनों पहले धनखड़ को तुगलक की संज्ञा दी थी। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए धनखड़ ने कहा कि ममता बनर्जी के सारे काम उन्हें मुग़ल आक्रांता औरंगज़ेब की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि वो ममता को औरंगज़ेब नहीं कह रहे हैं, लकिन ‘बंगाल की आयरन लेडी’ उसी की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने समानांतर सरकार चलाने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अगर ये सच होता तो ये सब होता ही नहीं लेकिन आरोप लगते रहते हैं।

राज्यपाल ने तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार की कार्यशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पूरी तरह ख़त्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि वीसी रूम बंद कर दिया जाता है और विधानसभा के गेट को बंद कर दिया जाता है। राज्यपाल ने बताया कि जब वो शहरों के दौरे पर जाते हैं तो उन्हें वहाँ कोई नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि उनके साथ वही हो रहा है, जो औरंगज़ेब ने छत्रपति शिवाजी के साथ किया था। उन्होंने कहा कि सरकार में पाँच-छह ऐसे मंत्री हैं जो उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उन्हें सूचित किए बिना ही विश्वविद्यालयों में वीसी की नियुक्ति कर दी जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के साथ मिल कर लोकल टीवी चैनल व स्थानीय मीडिया भी उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। राज्यपाल ने कहा कि ‘मिशन मोड पर चलने वाली’ मुख्यमंत्री के इशारे पर स्थानीय अख़बार उनका नाम उछालते हैं। ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट’ में बोलते हुए राज्यपाल धनखड़ ने कहा:

“मैं एक संवैधानिक पद पर हूँ। मुझे पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करनी है। लेकिन, मुख्यमंत्री लोगों से मेरे बारे में कुछ भी उलटा-सीधा कहते रहती हैं। अगर वो राज्यपाल की इज्जत नहीं करेंगी तो फिर कैसे चलेगा? एससी-एसटी बिल को लेकर मेरे पास फाइल आई तो मैंने 3 दिन इंतज़ार करने के बाद बताया कि ये क़ानून तो पहले से ही है। इसका उनके पास कोई जवाब नहीं। लिंचिंग वाले बिल पर मैंने सभी को टेक्स्ट भेजने को कहा लेकिन मेरे द्वारा भेजा गया टेक्स्ट विपक्षी नेताओं को मिला ही नहीं। “

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि ममता बनर्जी लड़ाई कर रही हैं और उनका निशाना वो हैं। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी को चाय पर बुलाने के बावजूद वो नहीं पहुँचीं। हालाँकि, राज्यपाल ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वो कनेक्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राज्यपाल बनने के बाद वो पीएम से मिले थे।

‘राजीव गाँधी से तत्काल वापस लिए जाएँ भारत रत्न, 1984 में सेना बुलाई होती तो न होतीं हजारों सिखों की हत्याएँ’

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने माँग की है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को 1991 में मरणोपरांत दिया गया ‘भारत रत्न’ तत्काल वापस लिया जाए। शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए बादल ने कहा कि नए खुलासे से साफ हो जाता है कि राजीव गाँधी ने नरसंहार को रोकने के लिए सेना को इजाजत नहीं दी थी। उन्होंने राजधानी दिल्ली में सिखों के नरसंहार को रोकने के लिए सेना की तैनाती नहीं होने दी थी क्योंकि इस नृशंस घटना के पीछे उनके परिवार का हाथ था।

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का बयान भी इस आरोप की पुष्टि करता है कि अगर राजीव गाँधी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के नेतृत्व में किए जा रहे दंगे को रोकने के लिए सेना को बुलाने की अपील पर ध्यान दिया होता तो 1984 के सिख नरसंहार को रोका जा सकता था। दंगाई सिखों और उनकी संपत्ति को निशाना बना रहे थे। बादल ने कहा कि मनमोहन सिंह के बयान के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड से भी साबित होता है कि राजीव गाँधी की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में सेना को नहीं बुलाने का निर्णय लिया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “पूरा सिख समुदाय इस बात से आक्रोशित है कि एक व्यक्ति, जिसने हजारों सिखों के दमन की योजना बनाई और उसकी देखरेख में इसे रोकने की अपील को नजरअंदाज किया गया, उसे देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दे दिया गया। इस अन्याय को सुधारा जाना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूँ कि राजीव गाँधी से तत्काल इस सम्मान को वापस लिया जाए।”

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि राजीव गाँधी और उन सभी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए, जिन्होंने कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा लूटमार को रोकने के लिए सेना को दिल्ली में आने से रोका था। राजनीतिक नेताओं और उन अफसरों को, जो इस अपराध के लिए जिम्मेदार हैं, को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इससे भविष्य की पीढ़ी के सामने ऐसी बर्बरता करने वालों के प्रति सबक पेश किया जा सकेगा।

इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से सड़कों, संस्थाओं और योजनाओं आदि से राजीव गाँधी का नाम हटाने की माँग करते हुए कहा कि सभी सड़कों, एयरपोर्ट्स, संस्थाओं और सरकारी योजनाओं से राजीव गाँधी का नाम तत्काल हटाया जाए।

उनका कहना है कि देश किसी ऐसे व्यक्ति का सम्मान नहीं कर सकता जिसने कसाई का काम किया है। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह और शहीद उधम सिंह जैसे शहीदों को सम्मानित करने के लिए सभी स्थलों और योजनाओं का नाम बदला जा सकता है, जो इस सम्मान के वास्तव में हकदार हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम सिख समुदाय की भावनाओं के अनुरूप हैं और 1984 के नरसंहार के पीड़ितों की पीड़ा को कम करने में मददगार होंगे।

इस दौरान उन्होंने पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आखिर क्यों वो अभी तक इस मामले पर चुप हैं और गाँधी परिवार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान से खुलासा हो गया है कि कॉन्ग्रेसी गुंडों के नेतृत्व में किए जा रहे नरसंहार को रोकने के लिए राजीव गाँधी ने सेना को इजाजत नहीं दी थी। आगे बादल ने अमरिंदर सिंह को निशाने पर लेते हुए कहा, “यह दिखाता है कि आपके लिए गाँधी परिवार की गुड बुक्स में रहना और अपनी कुर्सी को बचाना, अपने समुदाय के साथ खड़े होने और इसके खिलाफ नरसंहार करने वालों के लिए कठोर सजा की माँग करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।”