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प्रियंका गाँधी पहुँचीं उन्नाव, UP पुलिस की लाठीतोड़ पिटाई के बाद भागे प्रदर्शनकारी कॉन्ग्रेसी

इधर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मिलने पहुँचीं, उधर यूपी में कॉन्ग्रेसी भी योगी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर निकल गए। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर कॉन्ग्रेस के झंडे लेकर पहुँचे कार्यकर्ताओं ने तब भागना शुरू कर दिया, जब यूपी पुलिस ने लाठियों से उन्हें जम कर पीटा। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो गया। इसमें देखा जा सकता है कि पुलिस ने जम कर लाठिया भाँजते हुए प्रदर्शनकारी कॉन्ग्रेसियों की बखिया उधेड़ दी। अफरातफरी के बीच सभी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपनी पार्टी का झंडा-बैनर लिए पुलिस से बचते हुए भाग निकले।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी विधानसभा में ही धरने पर बैठे हुए हैं। उनका आरोप है कि अपराध कम करने का दावा करने वाली योगी सरकार ‘उन्नाव की बेटी’ को नहीं बचा पाई। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता को उन्हीं 5 लोगों ने जला कर मार डाला, जिन पर उसके साथ बलात्कार का आरोप था। सुनवाई के लिए रायबरेली कोर्ट जा रही पीड़िता बचने के लिए 1 किलोमीटर तक भागती रही और पुलिस को फोन तक किया लेकिन आरोपितों ने केरोसिन तेल डाल कर उसे जला डाला। मरने से पहले पीड़िता ने कहा था कि वो गुनहगारों को मौत की सज़ा मिलते देखना चाहती हैं।

चूँकि पीड़िता का शरीर 90% जल चुका है, उसके भाई ने कहा है कि अंतिम क्रियाकर्म के लिए जलाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। इसीलिए, परिजनों ने उसे दफनाने का फ़ैसला लिया है। इधर प्रियंका गाँधी ने उन्नाव पहुँच कर परिजनों से मुलाक़ात करने के बाद कहा कि यूपी में क़ानून-व्यवस्था विफल रही है। वहीं उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सज़ा दिलाने का भरोसा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा:

“ये एक बहुत ही निंदनीय घटना है। यह काला दिन है। भाजपा सरकार के आने के बाद होने वाली यह इस तरह की पहली घटना नहीं है। सीएम योगी ने विधानसभा में कहा था कि अपराधियों को ठोक दिया जाएगा लेकिन वो एक बेटी को नहीं बचा पाए। जब तक यूपी के मुख्यमंत्री, डीजीपी और गृह सचिव इस्तीफा नहीं देते, तब तक इस मामले में न्याय नहीं हो सकता। उन्नाव वारदात को लेकर कल सभी जिलों में सपा शोक सभा आयोजित करेगी।”

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि इस किस्म की दर्दनाक घटनाओं को यूपी सहित पूरे देशभर में रोकने हेतु राज्य सरकारों को चाहिए कि वे लोगों में कानून का खौफ पैदा करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र भी ऐसी घटनाओं को मद्देनजर रखते हुये दोषियों को निर्धारित समय के भीतर हीफाँसी की सख़्त सज़ा दिलाने का क़ानून ज़रूर बनाए।

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सरदार पटेल के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने तोड़ डाला अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का रिकॉर्ड

अपने अनावरण के साल भर बाद ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को प्रतिदिन देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या अमेरिका के 133 साल पुराने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के पर्यटकों से अधिक हो गई है। गुजरात स्थित इस स्मारक को देखने औसतन 15000 से अधिक पर्यटक रोज पहुँच रहे हैं।

सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड ने एक बयान में कहा है, ”पहली नवंबर, 2018 से 31 अक्टूबर, 2019 तक पहले साल में रोजाना आने वाले पर्यटकों की संख्या में औसतन 74 फीसदी वृद्धि हुई है और अब दूसरे साल के पहले महीने में पर्यटकों की संख्या औसतन 15036 पर्यटक प्रतिदिन हो गई है।”

बयान में कहा गया, ”सप्ताहांत के दिनों में यह 22,430 हो गई है। अमेरिका के न्यू यॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को देखने रोजाना 10000 पर्यटक पहुँचते हैं।” स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊँची प्रतिमा है। यह दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है।

यह प्रतिमा गुजरात में केवड़िया कॉलोनी में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के समीप है। भारतीय मूर्तिकार राम वी सुतार ने इसका डिजायन तैयार किया था। पहली बार वर्ष 2010 में इस परियोजना की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर, 2018 को उसका अनावरण किया था।

सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के बयान में कहा गया है कि इस स्मारक के पर्यटकों की संख्या में वृद्धि का श्रेय जंगल सफारी, बच्चों के न्यूट्रीशन पार्क, कैक्टस गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन, एकता नर्सरी, नदी राफ्टिंग, बोटिंग आदि जेसे नये पर्यटक आकर्षणों को दिया है। बयान के अनुसार, ”इन अतिरिक्त पर्यटक आकर्षणों से नवंबर, 2019 में पर्यटकों की रोजाना संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है।” इसके अलावा इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इस साल 30 नवंबर तक केवडिया में 30,90,723 पर्यटक पहुँचे, जिससे कुल 85.57 करोड़ रुपए की आय हुई है।

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NDTV की इंटरनेशनल बेइज्जती: ओबामा को लेकर छापा था फेक न्यूज, अमेरिका में उड़ाया गया मजाक

मीडिया संस्थान NDTV को एक ऐसे चैनल के रूप में जाना जाता है, जिसका बेहूदा और बेशर्म तरीके से झूठ फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है। चैनल ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर इस तरह से बेशर्म कारनामे करने में काफी कामयाबी हासिल की है। इसमें वित्तीय धोखाधड़ी से लेकर पाकिस्तान के एजेंडे को हवा देना, भारत को नीचा दिखाना और 26/11 के आतंकी हमले के दौरान लोगों के जान को खतरे में डालना शामिल है। हालाँकि हमें इनके ‘कारनामे’ के बारे में कम ही पता था। जानकारी के मुताबिक NDTV अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी बेइज्जती करवा चुका है। बता दें कि 2012 में एक अमेरिकी टीवी शो ‘द न्यूज़रूम’ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका मजाक उड़ाया गया था।

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है। जिसे एडवोकेट जे साई दीपक ने ट्विटर पर शेयर किया। इसमें 2012 में सीजन 1 के एपिसोड 4 में ‘द न्यूज़रूम’ का एक वीडियो दिखाया गया है। वीडियो में NDTV द्वारा फैलाए जा रहे झूठ के एक भाग को दिखाया गया है।

इस कड़ी के सेगमेंट में, विल मैकऑन ने जेफ डेनियल की भूमिका निभाई, जो न्यूज नाइट के एंकर और मैनेजिंग एडिटर हैं। वह समाचार प्रस्तुत करते हुए इस बात पर चर्चा करते हैं कि कैसे झूठ को दुनिया भर में फैलाया जाता है।

‘द न्यूजरूम’ सीरीज के एपिसोड का स्क्रीनशॉट

इस दौरान एंकर ने उस झूठ के बारे में बात करते हुए 2010 के NDTV के एक लेख का उल्लेख किया। जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा भारतीय प्रधानमंत्री के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए मुंबई, भारत का दौरा करने वाले थे। एंकर का कहना था कि इस तरह की यात्राओं में आम तौर पर प्रति दिन 5 मिलियन डॉलर खर्च होते हैं। फिर एंकर ने NDTV के एक लेख को उद्धृत किया, जिसमें गुमनाम स्रोतों के हवाले से कहा गया था कि इस यात्रा के लिए प्रति दिन $200 मिलियन खर्च होंगे। इसके बाद एपिसोड में यह बताया गया कि कैसे अमेरिकी मीडिया ने बगैर हकीकत का पता लगाने की कोशिश किए इसे प्रसारित किया। जबकि व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी करते हुए इसे गलत बताया था।

‘द न्यूजरूम’ जैसे अमेरिकी टीवी शो में NDTV के नाम का मजाक उड़ाया जाना एक ऐसा कारनामा था, जिसने लोगों का काफी ध्यान खींचा, NDTV का भी। इसके बाद NDTV का वापस से प्रतिष्ठा हासिल करना असंभव सा लगता है। बता दें कि NDTV ने 2010 में जो लेख प्रकाशित की थी, वह मूल रूप से पीटीआई एजेंसी फीड थी।

2010 में NDTV द्वारा प्रकाशित लेख

पीटीआई एजेंसी फीड में कहा गया था, “महाराष्ट्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा, ठहरने और राष्ट्रपति के दौरे के अन्य पहलुओं पर लगभग $200 मिलियन की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।” इसमें आगे कहा गया कि गुप्त सेवा एजेंटों, अमेरिकी सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों सहित लगभग 3,000 लोग राष्ट्रपति के साथ होंगे। व्हाइट हाउस और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के कई अधिकारी पिछले एक सप्ताह से हेलीकॉप्टर, एक जहाज और उच्च सुरक्षा वाले सुरक्षा उपकरणों के साथ यहाँ पहले से ही मौजूद हैं।

हालाँकि, इस खबर को उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से नकार दिया था। लेकिन जैसा कि नकली-समाचार आउटलेट NDTV की प्रकृति है, यूएस की प्रतिक्रिया को लेख में कभी नहीं जोड़ा गया। बता दें कि ‘द न्यूजरूम’ एक अमेरिकी टेलीविजन राजनीतिक ड्रामा सीरीज है, जिसे मुख्य रूप से आरोन सोरकिन द्वारा लिखा गया है, जिसका 24 जून, 2012 को एचबीओ पर प्रीमियर हुआ था और 14 दिसंबर 2014 को समाप्त हुआ था। ये सीरीज 3 सीजन में दिखाया गया। जिसमें 52 से 73 मिनट के 25 एपिसोड थे।

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वीरप्पन को मार गिराने के बाद 450 Km पैदल चल मंदिर में करवाया था मुंडन, अब बने शाह के सलाहकार

पूर्व आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में बतौर सलाहकार नियुक्त किया गया है। विजय कुमार को कई राज्यों की पुलिस की नाक में दम कर के रखने वाले खूँखार डाकू एवं तस्कर वीरप्पन को मार गिराने के लिए जाना जाता है। उन्हें गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 वर्ष का होगा। 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे विजय कुमार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जम्मू कश्मीर और वामपंथी आतंकवाद से पीड़ित राज्यों के मुद्दे पर सलाह देंगे। 67 वर्षीय कुमार की नियुक्ति को लेकर 3 दिसंबर को सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया।

के विजय कुमार इससे पहले कई बड़े पदों पर रह कर अपनी क्षमता का परिचय दे चुके हैं। उन्हें जम्मू कश्मीर मामलों का सलाहकार इसीलिए बनाया गया है क्योंकि वो पहले भी वहाँ के राज्यपाल के सलाहकार रह चुके हैं और उन्हें राज्य की स्थितियों का का अच्छा अनुभव है। वो सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल रह चुके हैं। उन्होंने हैदराबाद में स्थित नेशनल पुलिस अकादमी में बतौर डायरेक्टर काम किया है। वो 2012 में सीआरपीएफ के डीजी से रिटायर हुए थे।

के विजय कुमार को बहुचर्चित चन्दन तस्कर वीरप्पन को मार गिराने के लिए जाना जाता है। उन्होंने तमिलनाडु पुलिस की उस स्पेशल टास्क फ़ोर्स का नेतृत्व किया था, जिसने सालों तक कई राज्यों की पुलिस को छकाने वाले वीरप्पन को 2004 में मार गिराया था। वीरप्पन जंगलों में छिपा रहता था और उसे पूरे जंगल की एक-एक जगह की जानकारी रहती थी। इस कारण उसे पकड़ने के लिए पुलिस जब भी जंगलों में जाती तो पुलिस फ़ोर्स को भारी क्षति होती थी। इसके बाद पुलिस ने किसी तरह वीरप्पन को जंगल से बाहर निकालने की योजना बनाई थी।

के विजय कुमार के बारे में एक और जानने लायक बात ये है कि वीरप्पन के ख़ात्मे के बाद एक मंदिर में उन्होंने अपना मुंडन करवाया था। ‘ऑपरेशन कोकून’ के नायक विजय कुमार ने सत्यमंगलम में स्थित बन्नारी अम्मान मंदिर में अपने सिर का मुंडन करवाया था। उस मंदिर में जाकर बाल मुँड़वाने के लिए उन्होंने चेन्नई से 450 किलोमीटर का सफर चल कर तय किया था। 4 दशकों तक पुलिस का सिरदर्द बने वीरप्पन को मार गिराने के लिए पूरे देश में उनकी ख़ासी वाहवाही हुई थी।

वीरप्पन को पकड़ने के लिए 1992 में भी स्पेशल टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया था। कर्णाटक और तमिलनाडु की सरकारों ने एसटीएफ का गठन किया था। वीरप्पन के आपराधिक कारनामों का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने कन्नड़ सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार कहे जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता डॉक्टर राजकुमार का अपहरण कर लिया था। इससे तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनाव व्याप्त हो गया था और पूरे कर्नाटक में हिंसा भड़क गई थी। उसने कर्नाटक के मंत्री नागप्पा का भी अपहरण किया था। आख़िरकार वीरप्पन को 2004 में विजय कुमार ने नेतृत्व वाली एसटीएफ ने मार गिराया।

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सऊदी एयर फोर्स के मो. सईद ने अमेरिका के नौसेना अड्डे पर की गोलीबारी: हमलावर समेत 4 की मौत, 8 घायल

अमेरिका के फ्लोरिडा में शुक्रवार (6 दिसंबर) को नौसेना के अड्डे में सऊदी वायु सेना का एक शूटर घुस आया और उसने अमेरिकी नौसेना स्टेशन में आग लगा दी। फ्लोरिडा के अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने इस घटना को आतंकवादी हमले की संभावना करार दिया है।

एसकैम्बिया काउंटी के शैरिफ कार्यालय ने ट्विटर पर एक संदेश जारी किया। इस संदेश में कहा गया है कि पेनसाकोला में स्थित नौसेना अड्डे में अब कोई सक्रिय शूटर नहीं है। अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की कि हमलावर के अलावा एक व्यक्ति को गोलीबारी में मार दिया गया है साथ ही घायलों को इलाज के लिए ले जाया गया है। गोलीबारी के बाद घायलों को पास के अस्पतालों में भेज दिया गया।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा वो नौसेना एयर स्टेशन पेनासाकोला में व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नज़़र रखते हैं, जहाँ 16,000 से अधिक सैन्यकर्मी और 7,400 नागरिक कार्यरत थे।

ख़बर के अनुसार, शूटर का नाम मो. सईज अलशमरानी है। वह सऊदी अरब का नागरिक है। इस घटना के बाद ट्रम्प ने अपने ट्वीट में लिखा कि उन्हें फ्लोरिडा में एनएएस पेनासाकोला में दु:खद शूटिंग पर पूरी ब्रीफिंग से अवगत कराया गया और इस घटना के बारे में फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस से बात हुई। उन्होंने कहा, “इस कठिन समय में मेरी प्रार्थनाएँ पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं, जाँच प्रक्रिया अभी जारी है।”

ट्रम्प ने शुक्रवार दोपहर एक ट्वीट में कहा कि सऊदी अरब के राजा सलमान ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है और हमले में मारे गए लोगों और घायलों के परिजनों व दोस्तों के के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है।

NBC समाचार ने बताया कि संदिग्ध शूटर की पहचान सऊदी के मोहम्मद सईद अलशमरानी के रूप में की गई है। एस्कामिया काउंटी शेरिफ डेविड मॉर्गन के अनुसार, वह कथित तौर पर अमेरिका में प्रशिक्षण पर था और उसने हमला करने के लिए एक हैंडगन का इस्तेमाल किया था।

इस मामले की जाँच FBI के नेतृत्व में की जा रही है क्योंकि फ्लोरिडा के अधिकारियों ने इसे आतंकवादी हमला होने की संभावना से इनकार नहीं किया। स्थानीय क़ानून प्रवर्तन अधिकारियों के अनुसार, यह सब सुबह 6.50 बजे शुरू हुआ जब नौसैनिक अड्डे पर गोलाबारी की ख़बरें आईं और दो काउंटी शेरिफ डिपो घटनास्थल पर पहुँच गए।

दो लोग आग लगने से घायल हो गए और एक के हाथ में गोली लग गई, वहीं एक अन्य के पैर में चोट लग गई। दो घायलों की सर्जरी करनी पड़ी। इनके अलावा छ: अन्य लोग भी घायल हो गए।

Dailymail ने NBC के हवाले से लिखा कि सऊदी नागरिक मोहम्मद सईद अलशरामनी के रूप में पहचाने जाने वाले इस शख्स ने शुक्रवार तड़के पेनसाकोला के नेवल एयर स्टेशन में एक क्लासरुम के अंदर आग लगा दी। पुलिस ने तुरंत घटना का जवाब दिया और उसे गोली मार दी। इस बीच छ: अन्य सऊदी नागरिकों को हमले के तुरंत बाद बेस के पास से गिरफ़्तार कर लिया गया। शूटर ने शुक्रवार सुबह 7 बजे से कुछ देर पहले एक क्लासरुम की इमारत में आग लगा दी। हमले में हमलावर समेत चार लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए।

एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस (Ron DeSantis) ने इस बात की पुष्टि की कि शूटर सऊदी अरब का था, जो लंबे समय से अमेरिका के सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित कर रहा था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “ज़ाहिर तौर पर इस व्यक्ति के विदेशी नागरिक होने, सऊदी वायु सेना का हिस्सा होने और फिर हमारी धरती पर प्रशिक्षण देने के बारे में कई सवाल उठ रहे होंगे।” डेसेंटिस ने कहा कि सऊदी अरब सरकार को इस हमले में घायल हुए पीड़ितों की बेहतरी के लिए ठोस क़दम उठाने चाहिए।  

ग़ौरतलब है कि एक दिन पहले ही अमेरिका के एक सैन्य अड्डे पर्ल हार्बर नेवल शिपयार्ड में गोलीबारी हुई थी। स्थानीय समयानुसार शाम 2.30 बजे इस जॉइंट बेस पर्ल हार्बर-हिकम में गोलीबारी शुरू हुई थी। पर्ल हार्बर या ‘पर्ल बंदरगाह’ हवाई द्वीप में हॉनलूलू से दस किमी उत्तर-पश्चिम, संयुक्त राज्य, अमेरिका का प्रसिद्ध बंदरगाह एवं नौसैनिक अड्डा है। इस बंदरगाह के 20 वर्ग किलोमीटर की परिधि में सैकड़ों जहाजों के ठहरने का स्थान है। हाल के दिनों में अमेरिका के वाशिंगटन डीसी, टेक्सास, ओहियो और फ्लोरिडा समेत कई जगहों पर गोलीबारी की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

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ऑटो ड्राइवर ने चाकू लेकर किया 5 साल की बच्ची का रेप, ख़ून से लथपथ नाबालिग अस्पताल में

देश में बलात्कार की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस बार मामला बिहार से है। बिहार, जहाँ की स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने कहा है कि राज्य में हर 6 घंटे में औसतन 1 बलात्कार की घटना होती है। उसी बिहार के दरभंगा से खबर है। यहाँ एक ऑटो चालक ने 5 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार कर दी। दरिंदगी का आलम ये था कि ख़ून से लथपथ नाबालिग पीड़िता को आनन-फानन में डीएमसीएच में भर्ती कराया गया। वहाँ बच्ची का ऑपरेशन किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

मामला इतना गंभीर था कि कई थानों की पुलिस के साथ डीएसपी अनोज कुमार पीड़िता को देखने दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (DMCH) पहुँचे। डीएसपी ने मीडिया को बताया कि ऑटो चालक बच्ची को बहला-फुसला कर ले गया था। उसने गाछी (जंगल) में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। पीड़ित बच्ची के परिवार ने बताया कि वो एक अन्य बच्चे के साथ बाहर खेल रही थी, तभी ऑटो ड्राइवर तेतर साहनी की बुरी नज़र उस पर पड़ी।

तेतर ने दोनों बच्चों को प्रलोभन दिया और फिर उन्हें ऑटो में बिठा कर अपने साथ ले गया। सुनसान जंगल में ले जाकर उसने बच्ची के साथ रेप किया। जब बच्ची के घरवालों ने आस पास उसे न पाकर खोजना शुरू किया तो किसी ने बताया कि बच्ची को ऑटो में बैठे देखा गया है। परिजनों ने काफ़ी ढूँढने के बाद पाया कि सड़क किनारे एक ऑटो लावारिस हालत में पड़ी हुई थी। ऑटो के नजदीक पहुँचने पर जंगल के अंदर से बच्ची के रोने की आवाज़ आई। आवाज़ सुनते ही परिजन रात के अँधेरे में मोबाइल का टॉर्च जला कर उस तरफ़ दौड़ पड़े। लोगों की आवाज़ सुन कर आरोपित वहाँ से भाग निकला।

जब ऑटो ड्राइवर ने बच्ची के साथ रेप किया, तब बच्ची का साथी भी उसके बगल में ही था। दोनों बच्चे वहीं पर मौजूद थे। परिजनों ने बताया कि आरोपित दोनों बच्चों की जान लेने की फ़िराक में था। किसी व्यक्ति ने आरोपित तेतर के हाथ में चाकू भी देखा था। वह भगवानपुर का रहने वाला है। पीड़ित बच्ची ग़रीब परिवार से है। उसके पिता बाहर मजदूरी करते हैं। उक्त घटना सदर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुई। मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपित पर कार्रवाई की जा रही है।

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बक्सर में दोहराई गई हैदराबाद जैसी घटना, लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के बाद पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

हर सप्ताह घटिया गोला-बारूद के कारण होता है एक हादसा: आयुध कारखानों से परेशान देश की सेना!

देश के आयुध कारखानें (ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड, OFB) सेना की अहम गोला-बारूद की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे सेना की परिचालन संबंधी तैयारियाँ प्रभावित हो रही हैं। इसके साथ ही सामग्रियों की कमी और गुणवत्ता की समस्या के चलते कई खाली और दोषपूर्ण फ्यूज की आपूर्ति की वजह से कई बड़े हादसे भी हुए हैं। संसद में पेश रक्षा सेवाओं पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने 14 मई को बताया था कि OFB द्वारा टैंक, तोपखाने, वायु रक्षा और अन्य तोपों की आपूर्ति की जा रही गोला-बारूद की खराब गुणवत्ता के कारण सेना ने अधिक संख्या में होने वाले हादसों पर आवाज उठाया था। इनमें 41 आयुध कारखानें ऐसे हैं, जिनके वार्षिक बजट 15,000 करोड़ रुपए से अधिक हैं। सेना ने रक्षा मंत्रालय को बताया कि औसतन हर सप्ताह गोला-बारूद से जुड़े एक हादसे हो रहे हैं, जो नियमित रूप से घातक चोट के साथ ही उपकरण को नुकसान पहुँचा रहे। इसके लिए ओएफबी द्वारा निर्मित किए जा रहे अधिकांश गोला-बारूद जिम्मेदार हैं। ये सेना के विश्वास को भी कमजोर करते हैं।

शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को संसद में पेश की गई 2017-2018 के लिए ओएफबी के प्रदर्शन पर कैग की रिपोर्ट ने समान रूप से चिंताजनक तस्वीर को प्रदर्शित किया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि 31 मार्च, 2018 तक आयुध फैक्ट्रियाँ सेना की प्रमुख माँगों को पूरा नहीं कर सकी थीं। 

सेना और नौसेना ने 2013-14 से 2017-18 के बीच 9 प्रकार के गोला-बारूद में फ्यूज-संबंधित दोष / समस्याओं के कारण कम से कम 36 दुर्घटनाओं के बारे में बताया। इसमें 81 एमएम हाई-विस्फोटक (एचई) मोर्टार बम, एल -70 एयर डिफेंस गन के लिए 40 एमएम एचई राउंड, रॉकेट लॉन्चर के लिए 84 एमएम 84 रोशन ’मून और टी -72 टैंकों के लिए 125 एमएम एचई गोले शामिल हैं।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फ्यूज वांछित समय और स्थान पर सुरक्षित और विश्वसनीय विस्फोट प्रदान करने के लिए गोला-बारूद का एक आवश्यक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोषपूर्ण फ्यूज से बैरल फटने के साथ-साथ आकस्मिक और समय से पहले विस्फोट हो सकता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि फ्यूज की गुणवत्ता जाँचने के लिए अत्यधिक देरी की गई, जिसका कोई औचित्य नहीं था। इसलिए संबंधित कारखानों द्वारा दोष जाँचने के लिए लिए बताए जा रहे उपचारात्मक उपाय निराधार है।

इसके अलावा इसमें कहा गया है कि कुछ प्रमुख गोला-बारूद वस्तुओं के लिए सेना की माँगों की एक बड़ी मात्रा 31 मार्च 2018 तक बकाया रही। इस प्रकार इसकी परिचालन तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आयुध कारखानों ने 2017-18 में केवल 49% वस्तुओं के लिए उत्पादन लक्ष्य प्राप्त किया। इसमें कहा गया कि उत्पादन और आपूर्ति में ओएफबी की कमी के कारण सेना के स्टॉक में सात प्रकार के गोला-बारूद (32% से 74% तक) और पाँच प्रकार के अतिरिक्त फ़्यूज़ (41% से 94%) की गंभीर कमी हुई। सेना OFB की सबसे बड़ी ग्राहक है, जिसका कुल उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा हर साल 14,000 करोड़ रुपए से अधिक का है।

कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओएफबी द्वारा किए गए काफी कम निर्यात आगे चलकर 2016-17 में 22.6 करोड़ रुपए से घटकर 2017-18 में 13.9 करोड़ रुपए हो गया। संयोगवश रिपोर्ट ऐसे समय में आती है जब सरकार ने ओएफबी के निगमीकरण के लिए सुरक्षा पर कैबिनेट समिति के लिए एक मसौदा नोट तैयार किया है, जिसमें लगभग 1.45 लाख कर्मचारी हैं, जो कार्यात्मक स्वायत्तता, दक्षता और नई विकास क्षमता को बढ़ाने के लिए हैं।

वहीं सीसीएस नोट का का कहना है कि यह कदम 2024-25 तक ओएफबी के कारोबार को 30,000 करोड़ रुपए तक बढ़ाने में मददगार साबित होगा। इसके निर्यात में 25% तक बढ़ोतरी होगी और साथ ही 2028-29 तक मौजूदा 20% से लेकर 75% तक प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता के बढ़ने की संभावना है।

मैं अपनी बहन को दफनाऊँगा क्योंकि जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है: उन्नाव पीड़िता का भाई

उन्नाव में बलात्कार पीड़िता को पाँच आरोपितों ने मिल कर जला डाला। इसके बाद ज़िन्दी और मौत से जूझ रही पीड़िता को दिल्ली स्थित सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) की रात पीड़िता को हार्ट अटैक आया और मृत्यु हो गई। इस घटना से पूरा देश सन्न रह गया। पीड़िता के परिजनों ने माँग की है कि सभी दोषियों को मौत की सज़ा दी जाए। परिवार का कहना है कि वो अब पीड़िता के पार्थिव शरीर को जलाएँगे नहीं बल्कि दफनाएँगे। उनका कहना है कि पहले से ही दरिंदों द्वारा आग लगा कर जला दी जा चुकी पीड़िता के शरीर में जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है, इसीलिए उनके शव को दफनाया जाएगा।

बलात्कार पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी बहन 90% जल चुकी है, ऐसे में अंतिम क्रियाकर्म हेतु जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर दुःख जताते हुए बयान जारी किया है। पुलिस और प्रशासन भी सवालों के घेरे में है क्योंकि परिजनों ने आरोप लगाया है कि लगातार मिल रही धमकियों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने एक्शन नहीं लिया। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों के मन में क़ानून का डर बनाए रखने की ज़रूरत है।

23 वर्षीय पीड़िता के साथ ये घटना तब हुई, जब वह रायबरेली कोर्ट में सुनवाई के लिए जा रही थी। पीड़िता ने मरने से कुछ देर पहले अपने भाई से कहा था- “भैया, बचा लो! मैं मरणा नहीं चाहती। जिन्होंने मेरे साथ ग़लत किया है, उन्हें मैं मौत की सज़ा पाते देखना चाहती हूँ।” बता दें कि पीड़िता को जलाने आरोपित वही लोग हैं, जिन्होंने उसका बलात्कार किया था। उन्होंने उसका पीछा कर के उसपर केरोसिन तेल डाला और आग लगा दी। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक बदहवास अवस्था में भागती रही। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था।

जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थी। यूपी सरकार ने कहा था कि वो पीड़िता के इलाज का पूरा ख़र्च उठाएगी। परिजनों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए बल्कि वो आरोपितों को मौत की सज़ा मिलते देखना चाहते हैं।

‘हैदराबाद के जैसा दौड़ा-दौड़ाकर गोली मारी जाए…’ – उन्नाव में जला कर मार दी गई बेटी के पिता का छलका दर्द

उन्नाव की बेटी भी मर गई, कल ये 5 भी एनकाउंटर में मारे जाएँ तो समाज जश्न क्यों न मनाए?

…एक और ‘प्रीति रेड्डी’, उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता पर लाठी-डंडे-चाकू से वार, केरोसिन डाल जलाया ज़िंदा

बक्सर में दोहराई गई हैदराबाद जैसी घटना, लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के बाद पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

मुखिया की बेटी की शादी में महिला डांसर को गोली मारने का मामला: 2 गिरफ़्तार, पीड़िता की हालत सामान्य

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में कुछ लोगों द्वारा एक महिला डांसर के चेहरे पर गोली चलाने का वीडियो वायरल हुआ था। चित्रकूट पुलिस ने इस सम्बन्ध में कार्रवाई करते हुए 2 लोगों को गिरफ़्तार किया है। दोनों के नाम सुधीर और फूलसिंह हैं। पुलिस ने जानकारी दी है कि पीड़िता की हालत सामान्य है और डॉक्टरों द्वारा उनका इलाज किया जा रहा है। चित्रकूट पुलिस ने आगे बताया कि उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन धाराओं में आरोप पंजीकृत करते हुए गिरफ़्तारी की है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप पुलिस को बयान देते हुए देख सकते हैं:

चित्रकूट में एक विवाह समारोह के दौरान माहौल तब अचानक से बदल गया जब एक व्यक्ति ने महिला डांसर के चेहरे पर गोली चला दी। डिस्को लाइट्स और म्यूजिक के बीच चल रहे नाचगान के दौरान महिला को आरोपित ने धमकी दी कि “गोली चल जाएगी” और अंततः उसने गोली चला दी। दरअसल, हुआ यूँ था कि समारोह के दौरान म्यूजिक सिस्टम में कुछ ख़राबी आने के कारण महिला ने डांस करना बंद कर दिया था, जो आरोपितों को नागवार गुजरा। इसीलिए, उन्होंने तैश में आकर गोली चला दी।

गोली महिला के चेहरे (ठुड्डी पर) पर लगी और वो तुरंत गिर पड़ीं। 22 वर्षीय पीड़िता को उसके बाद पास के अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ इलाज के बाद अब उसकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। ये घटना 30 नवंबर को मऊ क्षेत्र के टिकरा गाँव की है। पीड़िता हीना को ग्रामप्रधान सुहीर सिंह पटेल की बेटी की शादी में नाचने के लिए बुलाया गया था। हीना की साथी डांसर ने बताया कि वो दोनों म्यूजिक सिस्टम के ठीक होने का इंतजार कर रही थीं, तभी आरोपित ने हीना के चेहरे को लक्ष्य बना कर गोली चला दी।

साथी डांसर महिला ने बताया कि वो दोनों वहाँ के लोगों के साथ पूरा सहयोग कर रही थीं, फिर भी उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया। इन डांसरों को दूल्हा पक्ष द्वारा हमीरपुर से बुलाया गया था। उनके नाचगान के दौरान भी आरोपित ने पहले से ही जश्न मनाते हुए फायरिंग कर रहे थे। ख़बरों के अनुसार, इस घटना में दो अन्य लोग भी घायल हो गए। पुलिस को इस सम्बन्ध में उसी रात सूचना मिल गई थी, जिसमें बरात में गोली चलने की बात कही गई थी। अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपोटों की गिरफ़्तारी की है।

1991 के बाद पहली बार! हाई कोर्ट के किसी वर्तमान जज पर CBI ने किया केस दर्ज, खुद CJI ने दी थी अनुमति

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने एक निजी मेडिकल कॉलेज प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (PIMS) में छात्रों को दाखिले में कथित गड़बड़ी के संबंध में दिल्ली और लखनऊ में कई जगहों पर छापे मारे। इस संबंध में एजेंसी की ओर से शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि एजेंसी ने निजी चिकित्सा संस्थान में दाखिले में अनियमितताओं के संबंध में रिश्वत सहित अन्य आरोपों में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की संबंधित धाराओं के तहत सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एन शुक्ला को भी नामजद किया है और उनके लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि एजेंसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश शुक्ला के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आई एम कुद्दूसी, PIMS के बीपी यादव और पलाश यादव और सुधीर गिरि को भी मामले में नामजद किया है।

सीबीआई ने कहा कि उसने लखनऊ, मेरठ और दिल्ली में न्यायमूर्ति शुक्ला सहित सभी सात अभियुक्तों के परिसरों में कई बार छापेमारी की। इस दौरान जाँच एजेंसी ने संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किए। उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने 31 जुलाई 2019 को आदेश जारी कर सीबीआई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कार्यरत न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी थी। जिसके बाद 4 दिसंबर को एसएन शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था।

बता दें कि 1991 के बाद यह यह पहला मामला है जब सीजेआई ने एक जाँच एजेंसी को किसी कार्यरत न्यायमूर्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी। इन पर प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पक्ष में निर्णय देने के लिए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। न्यायमूर्ति शुक्ला पर छात्रों के प्रवेश की समय सीमा बढ़ाने, मौजूदा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर PIMS का पक्ष लेने का आरोप है।

एजेंसी ने इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आई एम कुद्दुसी को सितंबर 2017 में पहली एफआईआर दर्ज करने के एक दिन बाद गिरफ्तार किया था। यह मुकदमा जनवरी 2020 में शुरू होने की संभावना है। सीबीआई के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि न्यायमूर्ति कुद्दुसी ने एक निजी व्यक्ति के साथ 25 अगस्त, 2017 को लखनऊ में अपने निवास पर न्यायमूर्ति शुक्ला से मुलाकात की और इस दौरान उन्हें अनैतिक लाभ पहुँचाया गया।

एफआईआर में कहा गया है कि मामले पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले में अंतर आने पर बीपी यादव ने न्यायमूर्ति शुक्ला को पहुँचाए गए अनैतिक लाभ को वापस पाने के लिए आई एम कुद्दुसी का सहारा लिया। इसके बाद कुद्दुसी ने जस्टिस शुक्ला से अनैतिक लाभ की वापसी के लिए संपर्क किया और इसका एक हिस्सा वापस कर दिया गया। इसके अलावा एफआईआर में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिट याचिका को वापस लेने के लिए अभियुक्तों के बीच एक साजिश रची गई थी।

उल्लेखनीय है कि यह मेडिकल कॉलेज समाजवादी पार्टी के नेता बीपी यादव और पलाश यादव का है। 2017 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने मेडिकल संस्थान का निरीक्षण किया था। इस दौरान यहाँ बुनियादी सुविधाएँ कम पाई गई और मेडिकल की पढ़ाई के मानक भी पूरे नहीं हो रहे थे। जिसके बाद आदेश के तहत प्रसाद इंस्टिट्यूट समेत देश के 46 मेडिकल कॉलेजों में मानक पूरे न करने पर नए प्रवेशों पर रोक लगा दी गई थी।

नए प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद प्रसाद इंस्टिट्यूट की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने मेडिकल कॉलेजों को राहत नहीं दी थी। इसके बाद प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इस याचिका पर जस्टिस एसएन शुक्ला की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस एसएन शुक्ला ने सुनवाई के बाद प्रसाद इंस्टिट्यूट को नए प्रवेश लेने की अनुमति दे दी। इस फैसले को लेकर अन्य मेडिकल कॉलेजों के बीच हड़कंप मच गया। तभी से जस्टिस शुक्ला पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे थे।