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मुझे नहीं पता था कि इक़बाल मेमन ही इक़बाल मिर्ची है: प्रफुल्ल पटेल से ED ने 12 घंटे तक की पूछताछ

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने प्रवर्तन निदेशालय से पूछताछ के दौरान बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इक़बाल मेमन ही इक़बाल मिर्ची है। ईडी ने 12 घंटे से भी अधिक समय तक उनसे पूछताछ की। पटेल ने कहा कि मिर्ची के साथ डील उनके एक रिश्तेदार द्वारा की गई थी, जिनकी कुछ वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है।आतंकी दाऊद इब्राहिम के क़रीबी इक़बाल मिर्ची और उसकी पत्नी से वित्तीय डील करने के मामले में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चल रहा है और ईडी इसकी जाँच कर रही है।

पटेल परिवार से जुड़े मिलेनियम डेवेलपर्स और इक़बाल मिर्ची के बीच हुई उस डील को लेकर नए खुलासे के बाद इस मामले की जाँच तेज़ हो गई है। ईडी को अब एक फ़ारूक़ पटेल की तलाश है, जिसने इक़बाल मिर्ची और प्रफुल्ल पटेल के बीच डील में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। इक़बाल मिर्ची के साले मुक्तार पटका से पूछताछ के दौरान ईडी को फ़ारूक़ के बारे में पता चला। फ़ारूक़ ही वो व्यक्ति था, जो भारत में इक़बाल मिर्ची के सारे ज़मीनी कामकाज को देखता था। प्रफुल्ल पटेल ने स्वीकार किया है कि वो फ़ारूक़ से परिचित हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इक़बाल मिर्ची ने 1985 में मुंबई के वर्ली में स्थित एक ज़मीन पर अतिक्रमण कर लिया था। वो ज़मीन पटेल परिवार से जुड़ी ज़मीन का हिस्सा थी। मिर्ची यहीं से अपने ड्रग्स के कारोबार चलाने लगा था। इसके बाद वह गिरफ़्तारी से बचने के लिए भारत से भाग निकला। इसके बाद 1999 में इक़बाल मिर्ची की बीवी हाजरा के साथ मिलेनियम डेवेलपर्स की डील हुई। मिलेनियम डेवेलपर्स ने यहाँ 15 मंजिला ईमारत बनाई, जिसे सीजे हाउस नाम दिया गया। इसमें 2 फ्लोर्स इक़बाल मिर्ची और उसके दोनों बेटों को दे दिए गए। इक़बाल मिर्ची की 2013 में लंदन में मृत्यु हो गई थी।

इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा ने मिलेनियम डेवेलपर्स को 5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। ईडी ने प्रफुल्ल पटेल से इस सम्बन्ध में पूछताछ की। हालाँकि, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने इसका कोई स्पष्ट उत्तर न देते हुए अनुमान लगाया कि ये मेंटेनेंस से जुड़ा कोई पेमेंट हो सकता है। इक़बाल मिर्ची और प्रफुल्ल पटेल की फोन पर बातचीत भी हुई थी, इसके डिटेल्स निकालने का प्रयास ईडी कर रही है। गृहमंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू के दौरान पटेल और मिर्ची की डील को देशद्रोह करार देते हुए शरद पवार और राहुल गाँधी को ख़ुद को पाक-साफ़ साबित करने की चुनौती दी थी।

ईसाई स्कूल में जबरन धर्म परिवर्तन, विरोध करने पर वार्डन ने 9वीं के लड़के को इतना मारा कि वो मर गया

त्रिपुरा में पबियाछारा के कुम्हारघाट होली क्रॉस स्कूल में जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने से नौवीं कक्षा का एक छात्र परेशान था। इस बात को लेकर स्कूल मैनेजमेंट का उसने विरोध भी किया था। लेकिन उसका विरोध उस पर भारी पड़ा। उसे हॉस्टल में प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण जीबीपी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक छात्र की पहचान हैप्पी देबबर्मा के रूप में हुई है।

15 वर्षीय छात्र देबबर्मा की मौत ने त्रिपुरा सरकार को इस मामले में न्यायिक जांच की ओर कदम बढ़ाने को लेकर विवश कर दिया है। बता दें कि छात्र की मौत का कारण भयंकर तरीके से किए गए वार के चलते आई अंदरूनी चोट बताई गई है।

इस मामले में होली क्रॉस स्कूल के वार्डन बुलचुंग हलम के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। बता दें कि वार्डन बुलचुंग छात्र देबबर्मा को हमेशा परेशान किया करता था। 25 सितम्बर को वार्डन ने हैप्पी के कमरे में घुसकर उसे इतनी लात मारी कि उसे गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उसकी मौत भी हो गई।

इस मामले में पुलिस ने ईसाई स्कूल के पादरियों और स्कूल में हॉस्टल के वार्डन को मृतक छात्र की माँ की तहरीर पर गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि पादरी जो पॉल और फादर अल्फ्रेड को बेल दे दी गई मगर बुलचुंग और फादर लेंसी डी सूज़ा को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक छात्र हैप्पी तमाम गरीब बच्चों का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के खिलाफ था। बुल्चुंग द्वारा जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करने का हैप्पी ने विरोध किया। नाराज़ बुलचुंग ने इस पर हैप्पी को बुलाया और एक ऐसे कोने में लेकर गया जो किसी भी CCTV की नज़र में नहीं है। मौके का फायदा उठाते हुए बुलचुंग ने छात्र देबबर्मा को पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान हैप्पी के सीने में बुलचुंग ने इतनी ज़ोर से मुक्का मारा कि वह वहीं गिर गया। इसके बाद उसने हैप्पी के ऊपर चढ़कर उसको मारना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की शिकायत जब फादर लेंसी डी सूज़ा तक पहुंची तो उसने मारपीट की इस घटना को देखते हुए हैप्पी को प्राथमिक इलाज दिलाकर यह बात किसी को नहीं बताने की भी चेतवानी दी।

मामले को संभालने के लिए स्कूल प्रशासन ने हैप्पी को उसका आखिरी एग्जाम होते ही छुट्टियों के लिए उसकी माँ के पास घर भेज दिया। घर पहुँचे हैप्पी को तेज़ बुखार और सीने में दर्द की शिकायत हुई। इस पर जब घर वालों ने 29 सितम्बर को एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया मगर उसके बावजूद कोई आराम मिलता नहीं दिखा तो हैप्पी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल की बजाय छात्र के परिजनों से उसे अगरतला के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। जाँच में सामने आया कि हैप्पी के श्वास प्रणाली यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम में गंभीर चोटें आई हैं, जिसके चलते उसके फेफड़े और दिल दोनों की हालत बेहद नाज़ुक है।

अपने आखिरी क्षणों में हैप्पी ने खुद पर बीते ज़ुल्म की पूरी कहानी अपने घर वालों को सुनाई। उसने बताया कि कैसे स्कूल में पादरी और वार्डन के चलते उसे कितनी परेशानी और दिक्कत का सामना करना पड़ा। हैप्पी की माँ ने बाद में बताया कि अगर उसे वहाँ फिर भेजा जाता तो वह उन परिस्थितियों में जी भी नहीं पाता।

आईसीडीएस में काम करने वाली हैप्पी की माँ ने पुलिस को बताया, “धर्मान्तरण के लिए दबाव बनाए जाने से नाखुश रहने वाले बच्चों के संबंध में बात करते हुए हॉस्टल का वार्डन स्कूल के फादर से झूठ बोलता था। पिछले साल भी एक लड़की ने इसी मामले को लेकर आत्महत्या की थी।”

एक जाँच अधिकारी ने बताया- “हैप्पी की मौत प्राइवेट स्कूलों के चरित्र पर कई तरह के सवाल उठाती है ख़ास कर वह जो मिशनरी इंस्टीट्यूशनों द्वारा संचालित हैं। पिछले साल लाहरी देबबर्मा नाम की एक लड़की ने आत्महत्या कर ली थी जिसके बाद राज्य सरकार ने सीआईडी जाँच के भी आदेश दिए थे मगर कुछ भी सामने नहीं आया।”

राज्य के शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ सिलसिलेवार शिकायतें आ रही हैं। सरकार एक ऐसी शिक्षा नीति तैयार कर रही है, जिससे इस तरह की घटनाओं पर रोकथाम की जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लाब कुमार देब ने जबरन धर्मंतारण जैसी घटनाओं के मामलों के चलते इस मामले पर गंभीरता से संज्ञान लिया है। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच कराने का फैसला किया है।

सऊदी अरब, यूएई और तुर्की समेत 134 देशों से बाहर किए गए 519000 पाकिस्तानी

आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान को शर्मसार करने वाली एक और खबर सामने आई है। बीते पॉंच साल में 134 मुल्कों से उसके पॉंच लाख से ज्यादा नागरिक बाहर किए गए है। फर्जी दस्तावेजों और आपराधिक मामलों के कारण इनलोगों को बाहर निकाला गया।

पाकिस्तानी गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक 2014 के बाद से 519,000 पाकिस्तानी नागरिक विभिन्न मुल्कों से निर्वासित किए गए हैं। दिलचस्प यह है कि मजहब का मसीहा बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के नागरिक सबसे ज्यादा इस्लामिक मुल्कों से ही निकाले गए। पाकिस्तानियों को बाहर निकालने के मामले में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और तुर्की अव्वल हैं।

रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि तुर्की और सऊदी अरब के निर्वासित शिविरों में अभी भी कम से कम 65,000 पाकिस्तानी रह रहे हैं। सऊदी पाकिस्तानियों को निकालने में सबसे आगे है। 2014 के बाद से उसने 3,25,000 से अधिक पाकिस्तानियों को निष्कासित किया है। इसी दौरान 52,000 से अधिक पाकिस्तानियों को निष्कासित करके यूएई सूची में दूसरे स्थान पर है। ओमान और तुर्की में अवैध रूप से रह रहे 47,000 पाकिस्तानी पाँच साल के भीतर घर लौटाए गए हैं।

इसी तरह, 2014 से 2019 के बीच 18,312 पाकिस्तानी मलेशिया से, 15,320 ब्रिटेन से, 17,534 ग्रीस से,
15,413 ईरान से, 936 अमेरिका से, 275 चीन से, 445 कनाडा से और 920 जर्मनी से निकाले गए हैं। यूरोपीय देशों ने भी अच्छी-खासी तादाद में अवैध रूप से बस गए पाकिस्तानियों को बाहर किया है। इटली ने 945, फ्रांस ने 845, स्पेन ने 494, बेल्जियम ने 375, नॉर्वे ने 301, ऑस्ट्रिया ने 270, स्वीडन ने 112, नीदरलैंड ने 145, रोमानिया ने 165, स्विटजरलैंड ने 65 और बुल्गारिया ने 175 अप्रवासियों को वापस पाकिस्तान भेजा है।

कथित तौर पर, पाकिस्तानी निर्वासितों की यह बड़ी संख्या, पाकिस्तान में सक्रिय रूप से काम करने वाले मानव तस्करी समूहों का शिकार होती हैं। अब तक, आंतरिक मंत्रालय ने देश में ऐसे 1000 से अधिक समूहों की पहचान की है। मानव तस्कर अक्सर ऐसे लोगों का शिकार करते हैं जो बेहतर जीवन और बेहतर रोज़गार के अवसरों की तलाश में विदेश जाना चाहते हैं।

कमलेश तिवारी की हत्या की निंदा नहीं करूँगा, वो इसी लायक था: राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल रज्जाक ख़ान

हिंदुत्ववादी नेता कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या पर सोशल मीडिया में हा-हा करते ‘शांतिदूत’ तो आपने बहुतेरे देखे होंगे। अब लाइव टीवी पर भी इस जघन्य वारदात की निंदा करने से इनकार किया जा रहा है। टाइम्स नाउ के एक डिबेट में शामिल राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल रज्जाक खान ने कहा कि कमलेश तिवारी की हत्या की वे निंदा नहीं करेंगे और वह इसका हकदार था।

स्वयंभू राजनीतिक विश्लेषक ने ये बातें शनिवार (19 अक्टूबर) को तिवारी की हत्या पर चल रहे डिबेट शो के दौरान कही। बहस के दौरान खान ने इस घटना की निंदा से इनकार कर जोर देते हुए कहा कि तिवारी इसके ही हकदार थे।

टाइम्स नाउ टीवी चैनल पर चल रही लाइव चर्चा में 6 पैनलिस्ट शामिल थे। अब्दुल रज्जाक ख़ान बतौर राजनीतिक विश्लेषक चर्चा में भाग ले रहे थे। ख़ान कई राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। कथित तौर पर, वे बीबीएमपी नगरपालिका चुनावों में बसपा के उम्मीदवार थे। उससे पहले वे जेडीएस के प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

गौरतलब है कि कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। लेकिन, मुस्लिमों का एक वर्ग इस जघन्य वारदात की सराहना करता भी नजर आ रहा है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने उनकी हत्या को जायज ठहराया है।

बता दें कि मध्य प्रदेश के मुफ़्ती-ए-आज़म के अब्दुल रज्जाक ने कमलेश तिवारी के खिलाफ 2016 में लोगों को क़ानून हाथ में लेने के लिए उकसाया था। रज्जाक ने कहा था,

“हम पूरी निष्ठा के साथ भारत में रहते हैं और उम्मीद करते हैं कि भारत के कानून हमारे धार्मिक भावनाओं के प्रति निष्पक्ष और ईमानदार रहेंगे, खासकर पैगंबर के मामले में। लेकिन यदि कानून हमें न्याय प्रदान नहीं करता है, तो हमारे लिए कानून के प्रति वफादार रहना कठिन होगा और हमें इसे अपने हाथों में लेना होगा।”

उल्लेखनीय है कि कमलेश तिवारी की पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बयान के बाद आई थी। आजम खान ने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि आरएसएस के सदस्य समलैंगिक होते हैं।

अब भारत बर्दाश्त नहीं करेगा Pak का समर्थन, PM मोदी हुए सख्त: रद्द की तुर्की दौरे की योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना तुर्की दौरा रद्द कर दिया है। तुर्की द्वारा जम्मू कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की लगातार कुर्दिश और सीरिया के लोगों की हत्या कर रहा है, जिसकी भारत ने आलोचना की थी। भारत ने कुर्द की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उसकी सम्प्रभुता को समर्थन दिया था। बता दें कि तुर्की ने साइप्रस के एक बड़े भाग पर कब्ज़ा कर रखा है। पीएम मोदी का तुर्की दौरा रद्द होने से वहाँ के राष्ट्रपति रेसेप तैयब अर्दोगान को करारा झटका लगा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिन के दौरे पर तुर्की जाने वाले थे लेकिन वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को भारत ने गंभीरता से लिया है क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। यहाँ तक कि एफएटीएफ (फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स) की पेरिस में आयोजित बैठक में भी तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया। इससे पहले तुर्की, चीन और मलेशिया के समर्थन के कारण ही पाकिस्तान एफएटीएफ में ब्लैकलिस्ट होने से बच गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर 27-28 को सऊदी में एक बड़े निवेश समिट में भाग लेने जा रहे हैं। वो वहीं से तुर्की जाने वाले थे। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस दौरे को अभी तक अंतिम रूप दिया ही नहीं गया था, इसीलिए दौरा कैंसल करने वाली बात उठती ही नहीं। पीएम मोदी इससे पहले 2015 जी-20 समिट में भाग लेने तुर्की गए थे। तुर्की के राष्ट्रपति भी जुलाई 2018 में भारत दौरे पर आए थे। लेकिन, तुर्की के राष्ट्रपति ने जम्मू कश्मीर में ‘भारत द्वारा मानवाधिकार हनन’ की बातें कर के दोनों देशों के रिश्तों में खटास ला दी।

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की की राष्ट्रपति को भेजे गए एक अजीबोगरीब पत्र में उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वो एक डील पर सहमत न हुए तो तुर्की की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया जाएगा। भारत ने भी तुर्की को लताड़ लगाते हुए सलाह दी थी कि जम्मू कश्मीर पर बिना परिस्थितियों को समझे किसी देश के पूर्णरूपेण आंतरिक मुद्दे पर नकारात्मक टिप्पणी करना सही नहीं है। हालाँकि, तुर्की ने कुर्द पर बमबारी का सिलसिला अभी रोका नहीं है और वहाँ के राष्ट्रपति को कई हत्याओं का जिम्मेदार माना जा रहा है।

‘NYAY योजना’ पर राहुल गाँधी ने देश से बोला था झूठ, नोबेल विजेता अभिनीत बनर्जी ने किया खुलासा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने करारा झटका दिया है। बनर्जी को नोबेल मिलने की घोषणा के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने अपनी पार्टी से उनके जुड़ाव को प्रदर्शित करते हुए यह कहा था कि कैसे ‘न्याय योजना’ को तैयार करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। यहाँ तक कि राहुल ने भी उन्हें बधाई देते समय लिखा कि बनर्जी ने ‘न्याय योजना’ की रूपरेखा तैयार करने में मदद की थी। साथ ही राहुल यह कहना नहीं भूले कि इस योजना में ग़रीबी को ख़त्म करने और अर्थव्यवस्था को सुधारने की क्षमता थी।

अब नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने अपने दिए एक इंटरव्यू के दौरान राहुल गाँधी के कई दावों को नकार दिया है। बनर्जी ने कहा है कि ‘न्याय योजना’ के क्रियान्वयन के लिए इनकम टैक्स बढ़ाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं था। बता दें कि इस योजना के तहत हर परिवार में किसी एक बेरोज़गार व्यक्ति को प्रति वर्ष 72,000 रुपए दिए जाने वाले थे। अभिजीत बनर्जी का मानना है कि अगर केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार बनती तो उन्हें इस योजना को लागू करने के लिए आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं बचता। इससे राहुल के एक पुराने बयान की पोल खुलती नज़र आ रही है।

इस साल अप्रैल में तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था कि ‘न्याय योजना’ के क्रियान्वयन के लिए इनकम टैक्स नहीं बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि इस मिनिमम इनकम गारंटी स्कीम को फंड करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मध्यम वर्ग से रुपए वसूले जाएँगे। राहुल ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जाएगा। राहुल गाँधी ने अजीबोगरीब दावा करते हुए कहा था कि विजय माल्या, मेहुल चौकसी, अनिल अम्बानी, नीरव मोदी और ललित मोदी जैसों से इस योजना के लिए रुपए वसूले जाएँगे, जिन्हें ‘मोदी ने रुपए दे दिए।’

अर्थशास्त्री बनर्जी ने कॉन्ग्रेस को झटका देते हुए कहा है कि वो नहीं मानते हैं कि ‘न्याय योजना’ एक अच्छी तरह तैयार की गई योजना थी। साथ ही उन्होंने इस योजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार बताने से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि अगर यूपीए की जीत हो जाती तो उस पर इतना राजनीतिक और आर्थिक दबाव होता कि उसे इस योजना में बदलाव करना पड़ता। बनर्जी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के उन दावों को भी नकार दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि उन्होंने ‘न्याय योजना’ को डिज़ाइन किया है। बनर्जी ने कहा कि उनका योगदान सिर्फ़ सूचनाएँ और जानकारियाँ देने तक ही सीमित था, जिनका प्रयोग करना या न करना कॉन्ग्रेस के ऊपर था।

जब नोबेल विजेता से पूछा गया कि ये योजना इतनी ही अच्छी थी तो कॉन्ग्रेस ने इसे उन राज्यों में क्यों नहीं लागू किया जहाँ वे सत्ता में हैं? इसके जवाब में बनर्जी ने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य एक तरह से वित्तीय मामलों में इतना कमज़ोर हो चुका है कि वो इस योजना को लागू कर ही नहीं सकता। अभिजीत बनर्जी ने इस बात को भी माना कि कॉन्ग्रेस एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रही है।

आपको याद होगा कि लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने ‘न्याय योजना’ का बढ़-चढ़ कर प्रचार-प्रसार किया था और पार्टी को उम्मीद थी कि लोग इस योजना के लागू होने की आस में उसे वोट देंगे। कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गाँधी ने घोषणा की थी कि इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों को ‘न्यूनतम आमदनी’ के रूप में प्रतिवर्ष 72,000 रुपए दिए जाएँगे। साथ ही पार्टी ने यह भी कहा था कि इसके लिए किसी अन्य सरकारी योजना का आवंटन कम नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ था कि कॉन्ग्रेस की सरकार बनने पर 7 लाख करोड़ रुपए सिर्फ़ सब्सिडी पर ही ख़र्च किए जाते।

कमलनाथ का ‘घोटालेबाज’ भांजा: अमेरिका के नाइटक्लब में एक ही रात में फूँके ₹8 करोड़

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मोजर बेयर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया है। इसके मुताबिक रतुल पुरी ने अमेरिका के एक नाइटक्लब में एक ही रात में 1.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 7.8 करोड़ रुपए फूँक दिए थे।

बता दें कि चार्जशीट में रतुल पुरी के अलावा उनके सहयोगी और मोजर बेयर इंडिया (प्राइवेट) लिमिटेड (MBIL) का भी नाम शामिल है। पुरी मोजर बेयर के कार्यकारी निदेशक हैं। ईडी ने चार्जशीट में कहा है, “लेनदेन का सत्यापन किया गया और यह पता चला कि लेनदेन के पैसे का इस्तेमाल भारत और विदेशों के तमाम महँगे होटलों में ऐशो-आराम पर खर्च किए गए। प्रोवोकेटर नाम के एक नाइट क्लब में रतुल पुरी ने एक रात में 11,43,980 डॉलर खर्च कर डाले।”

एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि नवंबर 2011 और अक्टूबर 2016 के बीच पुरी का निजी खर्च 4.5 मिलियन डॉलर यानी 32 करोड़ रुपए रहा है। चार्जशीट में आकलन किया गया है कि पुरी ने लगभग 8,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की है, जो शुरुआती अनुमान से काफी ज्यादा है।

ईडी का कहना है कि MBIL ने बैंकों से लिए गए लोन को आसानी से खत्म करने के लिए कंपनियों का एक बेहद ही पेचीदा ढाँचा तैयार किया था। ईडी ने अपनी जाँच में ‘शेल कंपनियों’ के जाल पर विशेष गौर फरमाया है, जिनके जरिए हवाला का सारा खेल रचा गया। चार्जशीट में दर्जनों सहयोगी कंपनियों का जिक्र है, जिनके मार्फत फंड को डायवर्ट किया गया।

ईडी ने रतुल पुरी को 20 अगस्त को गिरफ्तार किया था। उसे 17 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ईडी के अलावा सीबीआई और आयकर विभाग भी रतुल पुरी और उसकी मोजर बेयर कंपनी के खिलाफ जाँच कर रही है। रतुल पुरी अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले में भी आरोपित है। उसकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी गई थी। इसके साथ ही ईडी ने पुरी पर अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले के एक गवाह की हत्या का भी आरोप लगाया है।

सीबीआई ने रतुल पुरी, उसके पिता दीपक पुरी, माँ नीता और अन्य के खिलाफ 354 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने इन लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। ईडी ने सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर मामला दर्ज किया। बैंक ने दावा किया था कि कंपनी और इसके निदेशकों ने जाली दस्तावेज सौंप कर बैंक को चूना लगाया।

कमलेश तिवारी मर्डर: हत्यारों के 3 नए वीडियो सामने आए, योगी आदित्यनाथ से मिला पीड़ित परिवार

हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में तीन नए वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में संदिग्ध हत्यारे नज़र आ रहे हैं। पहले वीडियो में, खालसा होटल (लखनऊ) का वह कमरा है जहाँ संदिग्ध हत्यारे ठहरे हुए थे। इसी कमरे से पुलिस ने ख़ून में सने कुरता, बैग समेत बरामद किया है।

जाँच में पता चला है कि हत्यारों ने अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के नाम से होटल का कमरा बुक कराया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार होटल मालिक के पास से आरोपियों की आईडी भी मिली है, जिस पर नाम के साथ सूरत का पता दर्ज है। हत्यारों की लोकेशन भी ट्रेस हो गई है। लखनऊ से निकल के हरदोई और बरेली होते हुए गाज़ियाबाद तक की लोकेशन मिली है।

इसके अलावा, एक दूसरा वीडियो सामने आया है जिसमें हत्यारे होटल के रिसेप्शन काउंटर पर नज़र आ रहे हैं। शायद यह वीडियो हत्या करने से पहले होटल का कमरा बुक करने के समय का है। 

तीसरे वीडियो में संदिग्ध हत्यारा भगवा कपड़े में नज़र आ रहे हैं। एक के हाथ में पॉलीथिन है। शायद इसमें वही मिठाई का डिब्बा रहा होगा जिसमें छिपाकर हत्यारे चाकू और पिस्टल लेकर तिवारी के कार्यालय पहुॅंचे थे। इस फुटेज को देखकर यह पता चल रहा है कि यह वीडियो हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले का है। बता दें कि हत्या के दौरान कमलेश तिवारी के सीने और ठोड़ी पर 15 से अधिक वार किए गए थे।

इस बीच, तिवारी के परिजनों ने रविवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर भेंट की। मुलाकात के बाद कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। किरण तिवारी ने कहा कि हत्यारों को मृत्युदंड दिए जाने की माँग पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि दोषियों को कड़ी सज़ा दिलवाई जाएगी। पीड़ित परिवार ने 11 सूत्री मॉंग पत्र सीएम को सौंपा। परिवार लखनऊ में कमलेश तिवारी की प्रतिमा लगाने की मांग कर रहा है। खुर्शीद बाग का नाम बदलकर कमलेश बाग रखने के साथ ही अपराधियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

ग़ौरतलब है कि लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को हत्या की वारदात को अंजाम देकर हत्यारे वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

इस मामले में गुजरात एटीएस ने सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और राशिद पठान को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र एटीएस ने सैयद आसिम अली नाम के शख़्स को हिरासत में लिया है। राशिद पठान के पाकिस्तान से भी कनेक्शन होने की बात सामने आई है।

पाकिस्तान के 5 सैनिक ढेर, 4 आतंकी लॉन्च पैड तबाह: POK के आतंकी शिविरों पर सेना ने दागे गोले

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा किए गए सीजफायर उल्लंघन का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में स्थित आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया है। तोपों से आतंकी शिविरों पर गोले दागे जाने की खबर है। इन शिविरों में जुटे दहशतगर्दों को घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी सेना लगातार कोशिश कर रही थी। सूत्रों के अनुसार तंगधार सेक्टर से सटे पीओके के इलाकों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 4-5 सैनिक मारे गए हैं और कई जख्मी भी हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार पीओके नीलम वैली में आतंकियों के चार लॉन्च पैड भी सेना ने तबाह कर दिए हैं। इससे पहले रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को भी पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर का उल्लंघन किया। सीजफायर उल्लंघन में दो जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। साथ ही एक आम नागरिक की भी मौत हो गई।

घुसपैठ के मंसूबे नाकाम रहने पर पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे 2 गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं और 19 गायों और भेड़ों के साथ 2 गोशाला भी नष्ट हो गए। सेना ने बताया कि पाकिस्तान की इस नापाक हरकत का करारा जवाब दिया गया है और जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उसके सैनिक भी मारे गए हैं।

पाकिस्तान द्वारा गोलाबारी के बाद कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर के मनियारी गाँव के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पाकिस्तान की तरफ से लगातार की जा रही गोलाबारी से वहाँ के लोग काफी परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने इस पर अपनी व्यथा जाहिर करते हुए कहा, “हम भाग्यशाली हैं कि बच्चे अंदर नहीं सो रहे थे। हम पीएम से अनुरोध करते हैं कि वे पाकिस्तान को करारा जवाब दें। पाकिस्तान द्वारा गोलीबारी के कारण हमें पहले ही नुकसान हो चुका है।”

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान इससे पहले भी कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। हालाँकि हर बार भारतीय जवानों ने इसका मुँहतोड़ जवाब देते हुआ पाकिस्तान की हर नापाक हरकत को नाकामयाब किया है।

कमलेश तिवारी मर्डर: अशफाक और मोईनुद्दीन ने की हत्या, खालसा होटल से मिला खून लगा कुर्ता, गाजियाबाद तक लोकेशन ट्रेस

हिंदू समाज पार्टी के प्रमुख और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्याकांड में बड़ा ख़ुलासा हुआ है। दोनों हत्यारे लखनऊ के ही नाका थाना क्षेत्र के खालसा होटल में ठहरे थे। होटल से खून लगा भगवा कुर्ता और बैग बरामद किया गया है। पुलिस ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट के साथ मिलकर पूरे कमरे की जाँच की और सामान क़ब्ज़े में ले लिया।

जाँच में पता चला है कि हत्यारों ने अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के नाम से होटल का कमरा बुक कराया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार होटल मालिक के पास से आरोपियों की आईडी भी मिली है, जिस पर नाम के साथ सूरत का पता दर्ज है। हत्यारों की लोकेशन भी ट्रेस हो गई है। लखनऊ से निकल के हरदोई और बरेली होते हुए गाज़ियाबाद तक की लोकेशन मिली है।

ख़बर के अनुसार, शनिवार (19 अक्टूबर) को मामले की जाँच कर रही टीम को सूचना मिली थी कि पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत खालसा होटल के कमरे में कुछ भगवा कपड़े और बैग पड़ा है। सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस मौक़े पर पहुँची और फील्ड यूनिट को बुलाकर साक्ष्य इकट्ठे किए। मौक़े पर आला अधिकारियों ने भी पहुँचकर मुआयना किया।

बताया जा रहा है कि आरोपी इसी होटल में रुके थे। यहीं से भगवा कपड़ा पहनकर वे कमलेश तिवारी से मिलने पहुँचे थे। हत्या के बाद आरोपी दोबारा फिर होटल में आए। कपड़ा बदला और फरार हो गए।

जानकारी के मुताबिक़, 17 अक्तूबर को रात 11 बजे दोनों आरोपी होटल आए थे। 18 अक्टूबर को सुबह साढ़े 10 बजे होटल से निकल गए। इसके बाद दोपहर 1.21 बजे होटल में वापस आए और दोपहर को 1.37 बजे वापस निकल गए।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि दोनों हमलावरों की आख़िरी लोकेशन बरेली थी। हमलावर कुछ समय तक बरेली में रहे और फिर शहर से भाग गए। फ़िलहाल, यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) समेत कई पुलिस दल आरोपितों की धर-पकड़ में जुटे हुए हैं। ग़ौरतलब है कि लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को हत्या की वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

इस मामले में गुजरात एटीएस ने सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और राशिद पठान को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र एटीएस ने सैयद आसिम अली नाम के शख्स को हिरासत में लिया है। राशिद पठान के पाकिस्तान से भी कनेक्शन होने की बात सामने आई है।