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34000 रुपए कटा ट्रैफिक पुलिस का चालान, सरकारी कर्मी होने पर लगा दोगुना जुर्माना

झारखंड की राजधानी राँची में शुक्रवार को नए ट्रैफिक नियम का खामियाजा खुद ट्रैफिक पुलिस को भुगतना पड़ा। एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 34000 रुपए का चालान कटने की घटना सामने आई है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने गश्त के दौरान देखा कि एक शख्स बिना हेलमेट के जा रहा है, जिसके बाद उन्हें पकड़ा गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्स्टेबल राकेश कुमार अपने दोपहिया वाहन पर बिना हेलमेट असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ट्रैफिक) रामेश्वर राय के साथ बाइक पर जा रहे थे। दोनों को प्लाजा चौक पर रोका गया। नियमों का उलंघन करते हुए पकड़े जाने पर उन पर सामान्य जुर्माने के मुकाबले में दोगुना जुर्माना लगाया गया क्योंकि नए कानून के मुताबिक अगर खुद पुलिसकर्मी इस तरह की गलतियाँ करते हुए पाए जाते हैं, तो उन पर डबल जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

कॉन्स्टेबल राकेश कुमार के साथ पीछे बैठे ASI रामेश्वर राय ने हेलमेट नहीं लगाया था। ट्रैफिक एसपी ने दाेनाें काे शुक्रवार काे ऑफिस बुलाया। राकेश से बाइक के कागजात माँगे। लेकिन राकेश कुमार के पास न ताे ड्राइविंग लाइसेंस था, न पाॅल्यूशन और न ही इंश्याेरेंस। इसके लिए उन पर कुल 17 हजार रूपए का चालान बनता था क्योंकि राकेश ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत हैं, इसलिए दोगुनी राशि का चालान कटा।

ऐसी पहली रिपोर्ट सामने आई है जब एक ट्रैफिक पुलिस को नए नियम लागू होने के बाद का जुर्माना किया गया है। राँची के ट्रैफिक सुपरिटेंडेट ऑफ पुलिस (एसपी) अजीत पीटर डुंगडुंग ने कहा- “दोनों को उस वक्त पकड़ा गया, जब वे दोनों रात बाइक पर वापस अपने घर लौट रहे थे।”

कॉन्ग्रेस राज में कानून-व्यवस्था चौपट: एमपी में वर्दी वाले गुंडे, राजस्थान में गुंडों के डर से भागे पुलिसवाले

बीते साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद दोनों राज्यों में कानून-व्यवस्था की हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। सत्ताधारी दल के नेता कुर्सी बचाने के लिए आपस में लड़ रहे हैं। इसका फायदा उठाकर पुलिस वाले और गुंडे दोनों बेकाबू हो रहे हैं।

ताजा घटना में मध्य प्रदेश में पुलिस वाले ने वर्दी का धौंस दिखा आरएसएस के एक प्रचारक को पीट दिया तो राजस्थान में एके-47 लहारते हुए बदमाश आए और हवालात में बंद अपने साथी को छुड़ाकर ले गए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को राजस्थान पुलिस ने शुक्रवार को पकड़ा था। हरियाणा के खरौली गॉंव का रहने वाला गुर्जर हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती सहित कई मामलों में वांछित है। उसे अलवर की बहरोड़ पुलिस ने गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया। लेकिन, गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही उसके करीब 15 साथी तीन कार में सवार होकर आए। एके-47 लहराते और फायरिंग करते थाने में घुसे। हवालात तोड़ पपला को लेकर चले गए।

फायरिंग के डर से पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए। लॉकअप की चाबी नहीं मिलने पर बदमाशों ने ताला तोड़ दिया। भागते समय बदमाशों की जब कार रास्ते में खराब हो गई तो हथियार के बल पर एक स्कार्पियो छीन ली। पपला डॉक्टर गैंग का कुख्यात शूटर है। इससे पहले 8 सितंबर 2017 को भी महेंद्रगढ़ कोर्ट में पेशी के वक्त साथियों ने पुलिस पर फायरिंग कर उसे छुड़ा लिया था।

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक थाना प्रभारी ने आरएसएस के नगर प्रचारक गोविंद ठाकुर के साथ मारपीट की। रिपोर्टों के मुताबिक ठाकुर एक कॉलेज के पास कुछ छात्रों से बात कर रहे थे। इसी दौरान गश्त पर निकले थाना प्रभारी अनिल काकड़े से किसी मसले पर उनकी बहस हो गई।

इसके बाद उन्हें थाने लाया गया। यहाँ पुलिसवालों ने न केवल उनकी पिटाई की बल्कि कपड़े भी फाड़ दिए। घटना की जानकारी मिलने के बाद बीजेपी के स्थानीय विधायक संदीप जायसवाल, महापौर शशांक श्रीवास्तव और कार्यकर्ता धाने पहुॅंचकर धरने पर बैठ गए। इसके बाद ठाकुर की शिकायत पर काकड़े को लाइन हाजिर कर दिया गया।

उइगरों का मुद्दा UN में: चीन को ऐसे घेरेगा अमेरिका

अमेरिका और चीन के मध्य विभिन्न मसलों को लेकर चल रही जंग के बीच अब दोनों देशों के बीच एक अन्य मसले पर भी ठन सकती है। दरअसल, अमेरिका ने चीन के उइगुर मुस्लिमों के लिए यूएन की जनरल असेंबली में समर्थन हासिल करने की घोषणा की है। इस कदम से अमेरिका एक बार फिर से चीन को घेरने की कोशिश करेगा। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने इसकी जानकारी दी।

पॉम्पियो ने कहा कि सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाली यूएन की जेनरल एसेंबली में इस बात को रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कई और सभाएँ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन सभाओं में वो बाकी देशों से इस मामले में संपर्क करेंगे और समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि वो चीन को इस अमानवीय कृत्य को रोकने में अन्य देशों से मदद माँगेंगे। 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन में उइगुर मुस्लिमों को सामूहिक रूप से कैद में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उइगरों के साथ बर्ताव कर रहा है, वह दुनिया पर बदतरीन धब्बा है। उन्होंने इस मसले को चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा से इतर बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें अब तक कुछ सफलता मिली है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है और यह प्रक्रिया अभी भी चल रहा है।

पॉम्पियो ने कहा कि यूँ तो चीन के साथ उनकी बहुत सारी चुनौतियाँ हैं, लेकिन फिलहाल वो उइगुर मुस्लिमों की आजादी चाहते हैं, उन लोगों को मौलिक अधिकार दिलाना चाहते हैं, जिससे वो लोग वंचित हैं। साथ ही उन्होंने उन चीनी दावों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि शिविर धार्मिक चरमपंथ से प्रभावित लोगों को शिक्षित करने और बचाने के लिए लगाए गए थे।

गौरतलब है कि चीन ने व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों को उइगरों के किसी भी दुर्व्यवहार से लगातार इनकार किया है, जो कहते हैं कि यह चरमपंथ और हिंसा का मुकाबला करने में बेहद सफल रहा है। हाल ही के वर्षों में बीजिंग द्वारा इस्लामवादियों और चरमपंथियों पर लगाए गए आरोप के बाद झिंजियांग में फैली अशांति में सैकड़ों लोग मारे गए। अधिकार समूहों और निर्वासन का कहना है कि हिंसा उइगुर लोगों के चीन के दमन के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है।

NDTV के पत्रकार की टुच्चागिरी: चंद्रयान-2 के ISRO से संपर्क टूटने के बाद वैज्ञानिकों पर चिल्लाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरा देश जहाँ मून मिशन चंद्रयान-2 के लिए इसरो और भारतीय वैज्ञानिकों पर गर्व कर रहा है, वहीं एनडीटीवी का एक पत्रकार अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के इसरो से संपर्क टूटने की वजह से पहले से ही हताश वैज्ञानिकों पर चिल्लाकर पत्रकार महोदय ने साबित कर दिया कि पूरे मिशन की 95% सफलता उसके लिए मायने नहीं रखती।

वायरल हुए वीडियो में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने आए वैज्ञानिकों पर एक पत्रकार को चिल्लाते हुए सुना जा सकता है। पत्रकार वैज्ञानिकों पर चिल्लाते हुए कहता है कि यह एक परंपरा है कि जब कुछ गलत होता है, तो इसरो प्रमुख मीडिया के साथ बातचीत करते हैं, तो फिर वो इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद क्यों नहीं हैं? इतना ही नहीं, उस पत्रकार ने प्रेस ब्रीफिंग के लिए आए वैज्ञानिकों को जूनियर तक कह डाला। उसने कहा कि इसरो प्रमुख को मीडिया से बात करनी चाहिए थी, न कि किसी जूनियर को भेजना चाहिए था।

वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि पत्रकार के इस तरह के अशिष्ट और असभ्य सवाल से मीडिया को ब्रीफ करने आए वैज्ञानिक काफी दुखी और असहज हो जाते हैं। वीडियो में पत्रकार का चेहरा नहीं दिख रहा है, लेकिन बाद में पता चलता है कि इस तरह का अशिष्ट सवाल करने वाला कोई और नहीं बल्कि एनडीटीवी का पत्रकार पल्लव बागला है। 

हालाँकि, पल्लव बागला ने देश की जनता का मूड और मामले को बढ़ता देख माफी माँग ली है। मगर, लोगों ने पल्लव के वैज्ञानिकों के साथ किए गए व्यवहार के लिए खूब खिंचाई की है। लोगों ने तो पल्लव बागला के इसरो चीफ के सिवन के साथ चंद्रयान 2 को लेकर किए गए इंटरव्यू को भी शेयर किया है।

इस वीडियो में आप इसके सवाल का स्तर देखकर हैरान रह जाएँगे! दरअसल, पल्लव बागला इसरो चीफ से पूछता है कि चंद्रयान -2 के साथ कितने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जा रहा है? बागला के इस तरह के स्तरहीन सवाल पर के सिवन ने बेहद ही धैर्यपूर्वक तरीके से समझाया कि यह एक स्वचालित और मानव रहित मिशन है। इसमें किसी भी अंतरिक्ष यात्री को नहीं भेजा जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर अपनी मंजिल से महज 2.1 किलोमीटर पहले थम गया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से पहले कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। मगर इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि चंद्रयान-2 मिशन 5 फीसदी ही फेल हुआ है। पीएम मोदी ने भी वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि देश को उन पर गर्व है। उन्होंने इसे देश की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। भविष्य में सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करें। एक वीडियो में पीएम मोदी इसरो चीफ के सिवन को गले लगाते हुए उनकी हिम्मत बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

#IndiaFailed जिसने भी लिखा, उसे #ProudIndian से मिला करारा वाला जबाव

नून-टिमाटर वाले देश के लोग भी कल रात जाग रहे थे। भूखे पेट भला नींद आए भी तो कैसे! उसी देश का एक मंत्री है – वो भी विज्ञान व तकनीक मंत्री। नाम है फवाद चौधरी। कल रात जब चंद्रयान-2 के लैंडर से संपर्क टूट गया तो उसने एक तंज भरा ट्वीट किया। उसने लिखा – आऊ… जो काम आता नहीं, पंगा नहीं लेते ना… डियर इंडिया। इसके बाद भूखे पेट नींद न आने की बीमारी से ग्रसित पाकिस्तानियों ने #IndiaFailed के साथ ट्वीट करना शुरू कर दिया।

और यहीं वो गलती कर गया। उसे ये याद रखना चाहिए था कि चाहे युद्ध का मैदान हो या साइंस-टेक्नॉलजी… हमने हमेशा तुम्हारी बजाई है। इसलिए सोशल मीडिया पर भी बजाएँगे, और क्या खूब बजाया गया भाई साब! पत्रकारिता और संपादकीय नीति का सम्मान करते हुए नीचे सिर्फ वही ट्वीट लगा सकने में सक्षम हूँ, जिसमें गालियाँ नहीं हैं। वैसे पाठकगण इन ट्वीट को देख कर अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तानियों के कान से खून बह रहा होगा या मवाद!

पाकिस्तानियों के नून-टिमाटर से सहानुभूति रखने वाले कुछ छिछोरे (मतलब लिबरपंथी) भारतीय भी कल रात खुश थे। लेकिन ये अपनी मौत खुद मरेंगे (राजनीतिक रूप से तो लगभग मर ही चुके हैं, सामाजिक छीछालेदर भी समय-समय पर हो ही जाता है) इसलिए इन पर की-बोर्ड क्या ही पीटना!

नोट: पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है। इस्लाम में सूअर हराम है। इसलिए जिन ट्वीट में पाकिस्तानियों को सूअर की तरह दिखाया गया है, ऑपइंडिया की संपादकीय नीति के तहत हम उसकी कड़ी निंदा करते हैं।

पूर्व IAS ऑफिसर को 5 साल की कैद: रखता था अवैध विदेशी हथियार, जमा की थी अकूत संपत्ति

सीबीआई कोर्ट ने मुकदमा दर्ज होने के 32 साल बाद 81 वर्षीय पूर्व आईएएस ऑफिसर को 5 साल कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही इस पूर्व अफसर पर 1.5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि सुरेंद्र सिंह अहलूवालिया नाम के पूर्व आईएएस अधिकारी के सरकारी आवास पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले की छापेमारी में बड़ी संख्या में हथियार व कारतूस बरामद किए गए थे। सीबीआई ने इस मामले में 31 अगस्त 1987 को एफआईआर दर्ज की थी। उस समय अहलूवालिया नागालैंड में श्रम और रोजगार सचिव और आयुक्त के पद पर तैनात था।

नौकरशाह सुरेंद्र सिंह अहलूवालिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगने के बाद सीबीआई ने उसके दिल्ली और कोहिमा स्थित आवासोंं पर छापेमारी की थी। इस दौरान सीबीआई ने उसके आवास से एक कारबाइन समेत 5 बंदूक, एक विदेशी राइफल व 328 कारतूस बरामद किए थे।

जाँच एजेंसी ने मामले की जाँच 5 साल में पूरी कर ली थी और 10 अप्रैल 1992 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। अदालती लड़ाई के चलते आरोप तय होने में 18 साल लग गए और 10 फरवरी 2010 को उसके खिलाफ आरोप तय हो पाए।

मामले में दोषी अहलूवालिया 3 मई 1964 को आपातकालीन कमीशन अधिकारी के तौर पर सेना में शामिल हुआ था। इसके बाद उसने 1971 में भारतीय प्रशासनिक सेवा ज्वाइन की और उसे नागालैंड कैडर मिला था। अपनी सेवा के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित करने के चलते यह अधिकारी सीबीआई के निशाने पर आया था। उस समय इसके पास दिल्ली, ग्वालियर और चंडीगढ़ के पॉश इलाकों में कई संपत्ति और एक वातानुकूलित सिनेमा घर भी पाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि हथियारों की बरामदगी में सीबीआई ने उसके खिलाफ एक अलग मामला दर्ज किया था।

राउज एवेन्यू अदालत के एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने शुक्रवार (सितंबर 6, 2019) को सुरेंद्र सिंह अहलूवालिया को 5 साल की कैद और डेढ़ लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। सीबीआई के मुताबिक यह सबसे लंबा चलने वाला मुकदमा रहा है।

यह वीडियो बताता है कि हम सफल हुए हैं… हम कामयाब होते रहेंगे!

एक किसान हल-बैल लेकर खेत पर जाता है। दिन भर मेहनत करता है। पूरा खेत फिर भी नहीं जोत पाता है। शाम को वापस घर आता है। रात में खाता है, आराम करता है और सुबह फिर से खेत की ओर चल देता है। एक दिन उसकी मेहनत रंग लाती है। उसकी मेहनत को देख प्रकृति भी मेघ के रूप में उस पर मेहरबान होती है। फिर खेत में फसल लहलहाते हैं और उससे न सिर्फ किसान का घर चलता है बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था भी पटरी पर दौड़ती है।

जरा सोचिए, इस मेहनत के बावजूद भी अगर बारिश न हो और किसान निराश हो जाए तो क्या होगा! रोने लग जाए तो क्या होगा? और जरा सोचिए, उस रोते हुए किसान को अगर एक मजबूत कंधा मिल जाए, जो उसे ढाढस बँधाए तो क्या होगा? दूसरे उदाहरण वाला किसान संबल पाकर पहले से ज्यादा उत्साह के साथ मेहनत में जुट जाएगा जबकि पहले वाला हतोत्साहित होकर टूट जाएगा।

चंद्रयान-2 में पूरे भारतवर्ष को जो 5% विफलता देखने को मिली है, वह दूसरे किसान की ही कहानी है। और इस ‘किसान’ को ढाढस देने आया कौन! देश का मुखिया खुद। इसरो चीफ के सिवन जब टूट रहे थे, तो उनके कंधों पर शाबासी की थपकी मिली किससे – खुद पीएम से। जब पीएम मोदी ने रोते हुए सिवन को गले लगाया तो उसमें यह संदेश छिपा था कि देश को आपकी सफलता पर गर्व है, जबकि आपकी विफलता पर वो आपके साथ और भी मजबूती के साथ खड़ा है।

95% सफल रहा Chandrayaan-2 मिशन, ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में सुरक्षित, लगा रहा चक्कर

भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर अपनी मंजिल से महज 2.1 किलोमीटर पहले थम गया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से पहले कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। मगर ये मिशन फेल नहीं हुआ है।

इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि 978 करोड़ रुपए के लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का सब कुछ समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि लैंडर विक्रम का संपर्क टूटने से मिशन का सिर्फ 5 फीसदी का नुकसान हुआ है। अधिकारी के मुताबिक, मिशन को सिर्फ लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर का नुकसान हुआ है, जबकि अंतरिक्ष यान का तीसरा खंड ऑर्बिटर अब भी चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा है।

एक साल की मिशन अवधि वाला ऑर्बिटर चंद्रमा की कई तस्वीरें लेकर इसरो को भेजेगा। अधिकारी ने कहा कि ऑर्बिटर लैंडर की तस्वीरें लेकर भी भेज सकता है, जिससे उसकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है।

बता दें कि चंद्रयान-2 में तीन खंड हैं -ऑर्बिटर (2379 किलोग्राम, आठ पेलोड), विक्रम (1471 किलोग्राम, चार पेलोड) और प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पेलोड)। विक्रम 2 सितंबर को आर्बिटर से अलग हो गया था। विक्रम ने ‘रफ ब्रेकिंग’ और ‘फाइन ब्रेकिंग’ चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, लेकिन ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया।

इसरो के प्रमुख के सिवन ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि आँकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। लैंडर विक्रम का संपर्क टूट जाने के बाद पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि देश को उन पर गर्व है। उन्होंने इसे देश की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। भविष्य में सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करें।

गौरतलब है कि चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को भारत के हेवी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल मार्क-3 (जीएसएलवी एमके-3) के जरिए अंतरिक्ष में लॉन्‍च किया गया था।

NDTV, Reuters और AP के पत्रकारों को आलीशान कश्मीरी बंगलों को खाली करने का आदेश

सरकार ने हाल ही में NDTV के ब्यूरो प्रमुख नाज़िर मसूदी, रॉयटर्स के वरिष्ठ प्रतिनिधि फ़य्याज़ बुखारी और एसोसिएटेड प्रेस के ऐजाज़ हुसैन को जल्दी-से-जल्दी उन्हें श्रीनगर में मिले हुए सरकारी बंगले खाली करने का निर्देश दिया है। कारण बताया गया है कि वे उन बंगलों के आवंटन की न्यूनतम शर्तें पूरी नहीं करते।

आर्गेनाइज़र में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन तथाकथित पत्रकारों को यह बंगले पिछली सरकार ने उनकी “पत्रकारिता की सेवाओं” के बदले न्यूनतम शर्तें पूरी न करने पर भी आवंटित कर दिए थे। अब चूँकि वे शर्तों को पूरा नहीं करते थे, तो उन्हें हुआ यह आवंटन सरकार के किसी भी नियम के हिसाब से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था। अतः उनका वहाँ निवास करते रहना साफ-साफ अवैध था। इसीलिए सरकार ने उन पत्रकारों को बंगले खाली करने के निर्देश दिए।

ज़ाहिर तौर पर इससे कश्मीर का, और उससे जुड़े देश भर का, पत्रकारिता का समुदाय विशेष नाराज़ तो हो ही गया। इतने साल से पिछली सरकारों से मिलती आ रही सुविधाओं की लत जो लग गई थी। इसीलिए इस समुदाय विशेष की संस्था कश्मीर प्रेस क्लब ने बयान जारी कर राज्य प्रशासन (यानि कि केंद्र सरकार) पर ‘प्रताड़ना’ का आरोप लगाया है- यानि उनके हिसाब से इन पत्रकारों ने जो बंगलों पर अवैध कब्ज़ा कर रखा था, उसे हटाने की कोशिश इन्हें प्रताड़ित करना है। उनके हिसाब से यह प्रताड़ना इसलिए है, ताकि घाटी के पत्रकार एक लाइन विशेष को पकड़ कर ही रिपोर्टिंग करें।

यह समुदाय विशेष वाले पत्रकार केवल कश्मीर के पत्रकारों का समुदाय विशेष हो, ऐसा भी नहीं है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और एडिटर्स’ गिल्ड का पूरा समर्थन रहता है।

यहाँ इन पत्रकारों के बारे में यह जान लेना ज़रूरी है कि इनमें से कई न केवल जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की ही भाषा बोल रहे हैं, बल्कि उसे हिंदुस्तान के खिलाफ प्रोपेगंडा करने के लिए ‘कच्चा माल’ ही नहीं, पकी-पकाई खीर ही थाली में परोस रहे हैं।

उदाहरण हैं NDTV के नाज़िर मसूदी, जिनकी श्रीनगर से की गई ‘रिपोर्टिंग’ के दम पर इमरान खान की पीटीआई हिंदुस्तान को गालियाँ बकती फिर रही है। मसूदी ने बिना किसी वीडियो सबूत या लोगों के नाम बताए यह दावा किया कि उन्होंने श्रीनगर के स्थानीय लोगों से बात की हैं और वे बस इस इंतज़ार में हैं कि सुरक्षा इंतज़ाम ढीले हों और वे हिंदुस्तान के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन के नाम पर जिहादी हिंसा शुरू करें।

जिहाद के लिए आने-जाने वाले पैसे की जाँच के दौरान NIA ने भी दावा किया था कि कश्मीर प्रेस क्लब और कश्मीर एडिटर्स’ गिल्ड के सदस्यों में से कई ISI से वित्तपोषित होते हैं। कश्मीर में अशांति किसी-न-किसी तरह साबित करने के लिए, बल्कि वहाँ अशांति फ़ैलाने के लिए, कई तरह का प्रोपेगंडा, कई तरह की फेक न्यूज़ वहाँ के पत्रकारों द्वारा फैलाई जा रही है। एक झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है कि हिंदुस्तानी सुरक्षा बल कश्मीर में ‘अत्याचार’ कर रहे हैं।

आर्य कहीं बाहर से नहीं आए थे: राखीगढ़ी DNA स्टडी से इतिहास का सबसे बड़ा खुलासा

आर्यों को लेकर कई दावे किए गए लेकिन फिर भी सवाल ज्यों का त्यों रहा कि आर्य बाहर से आए थे या यहीं (भारत) के ही निवासी थे? इस सवाल के जवाब में वामपंथियों ने कई दावे किए जिसका मकसद भारतियों को शायद हीन साबित करना रहा हो लेकिन अब इस सवाल का जवाब स्पष्ट नज़र आने लगा है।

दरअसल, हरियाणा के हिसार जिले के राखीगढ़ी में हुई हड़प्पाकालीन सभ्यता की खोदाई में कई ऐतिहासिक राज से पर्दा उठ गया है। बता दें कि राखीगढ़ी में मिले 5000 साल पुराने कंकालों के डीएनए टेस्ट के बाद जारी की गई रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि आर्य कहीं बाहर से नहीं आए बल्कि यहीं अर्थात भारत के ही के मूल निवासी थे। डीएनए स्टडी से यह भी खुलासा हुआ है कि भारत के लोगों के जीन में पिछले हजारों सालों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखने को मिला है।

इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के एक अंश में यह दावा किया गया है कि इस अध्ययन में सामने आया है कि आर्यन्स भारत के ही मूल निवासी थे। इसे लेकर वैज्ञानिकों ने राखीगढ़ी से प्राप्त नरकंकालों के अवशेषों का डीएनए टेस्ट किया था। डीएनए टेस्ट से स्पष्ट पता चला है कि यह रिपोर्ट प्राचीन आर्यन्स की डीएनए रिपोर्ट से मेल नहीं खाती है। ऐसे में जाहिर आर्यों के बाहर से आने की थ्योरी ही गलत साबित होती है। वैसे पहले भी कई इतिहासकारों का कहना था कि वामपंथियों की आर्यन थ्योरी मनगढंत कल्पना पर आधारित है। जिसकी परतें इस नए शोध से उघड़ती नज़र आ रही हैं।

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि 9000 साल पहले भारत के लोगों ने ही कृषि की शुरुआत की थी। इसके बाद ये ईरान व इराक होते हुए पूरी दुनिया में पहुँची। भारत के विकास में यहीं के लोगों का योगदान है।

यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि इतिहास के लिए तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं, इन तथ्यों में भी वैज्ञानिक सबूतों का ज्यादा महत्व होता है। राखीगढ़ी में मिले 5000 साल पुराने कंकालों के अध्ययन के बाद जारी की गई रिपोर्ट में ऐसी कई बातें सामने आई है जिनके अभी तक कयास ही लगाए जा रहे थे।

बता दें कि हिसार के राखीगढ़ी में हड़प्‍पा खोदाई का काम कर रहे पुणे के डेक्कन कॉलेज के पुरातत्वविदों के अनुसार, खोदाई के वक्त युवक (कंकाल) का मुँह युवती की तरफ था। और यह पहली बार है कि जब हड़प्पा सभ्यता की खुदाई के दौरान किसी युगल की कब्र मिली है।

यहाँ हैरानी की बात यह भी है कि अब तक हड़प्पा सभ्यता से संबंधित कई कब्रिस्तानों की जाँच की गई थी लेकिन आज तक किसी भी युगल के इस तरह दफनाने का मामला सामने नहीं आया था।

राखीगढ़ी में खोदाई करने वाले पुरातत्वविदों के अनुसार, युगल कंकाल का मुँह, हाथ और पैर सभी एक समान है। इससे साफ है कि दोनों को जवानी में एक साथ दफनाया गया था। बता दें के ये निष्कर्ष हाल ही में अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, एसीबी जर्नल ऑफ अनैटमी और सेल बायॉलजी में प्रकाशित किए गए थे।

इस नए शोध और प्रमाणों के साये में इतिहास को देखने और समझने की एक नई दृष्टि मिलती है। और वामपंथियों की हीनता भरे इतिहास को एक चपत भी लगती है। आप इस स्टडी पर एक रिपोर्ट यहाँ Opindia पर भी पढ़ सकते हैं।