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छत्तीसगढ़ के पूर्व CM अजित जोगी के बेटे अमित जोगी गिरफ़्तार: जन्म को लेकर गलत जानकारी देने का मामला

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया। बिलासपुर स्थित घर से उन्हें हिरासत में लिया गया। उन पर चुनाव के दौरान अपने जन्म स्थान को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप है।

बिलासपुर के एसपी (ग्रामीण) संजय कुमार ध्रुव ने बताया कि जोगी को अदालत में पेश किया जाएगा। उन पर 2013 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान अपने शपथ पत्र में ग़लत जानकारी देने का आरोप है।

अजित जोगी की जनता कॉन्ग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रवक्ता अहमद रिजवी ने कहा कि अमित जोगी की गिरफ़्तारी दंतेवाड़ा उपचुनाव में दबाव बनाने के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार बदले की राजनीति कर रही है। सोमवार को समीरा पैकरा समेत मरवाही के आदिवासियों ने अमित जोगी की गिरफ़्तारी की माँग को लेकर बिलासपुर एसपी ऑफ़िस का घेराव किया था।

दूसरी तरफ, अमित जोगी की गिरफ़्तारी मामले पर क़ॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम का कहना है कि कोई अगर ग़लत काम करेगा तो उसकी गिरफ़्तारी होगी ही। क़ानून सबसे लिए एक समान है। अगर उन्होंने (अमित जोगी) ग़लती की है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से उसके लिए माफ़ी माँग लेनी चाहिए। मरकाम ने बताया कि अमित जोगी की गिरफ़्तारी भाजपा नेता समीरा पैकरा की शिक़ायत पर हुई है।

ख़बर के अनुसार, 3 फरवरी को मरवाही के पूर्व विधायक अमित जोगी के ख़िलाफ़ गौरेला थाने में धारा-420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। ये मामला 2013 में मरवाही विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की प्रत्याशी रहीं समीरा पैकरा ने दर्ज कराया था। दर्ज की गई शिक़ायत के अनुसार जोगी ने शपथ-पत्र में अपना जन्म स्थान ग़लत बताया था। जिस पर गौरेला थाने में अमित जोगी के विरुद्ध धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। चुनाव हारने के बाद समीरा पैकरा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके अमित जोगी की जाति एवं जन्मतिथि को चुनौती दी थी।

इस मामले पर हाईकोर्ट ने चार दिन पहले ही फ़ैसला सुनाया था, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र समाप्त हो चुका है, इसलिए अब इस याचिका को ख़ारिज किया जाता है। इसके बाद समीरा गौरेला थाने पहुँची और उन्होंने इस मामले में शिक़ायत दर्ज कराई। 

उन्होंने अपनी शिक़ायत में कहा है कि अमित जोगी ने शपथ-पत्र में अपना जन्म वर्ष 1978 में गाँव सारबहरा गौरेला में होना बताया है, जबकि उनका जन्म 1977 में अमेरिका के डगलस में हुआ था।

हाल ही में, अजित जोगी के आदिवासी के दर्जे के दावे को भी सरकार ने ख़ारिज कर दिया था। जोगी की जाति के मामले की जाँच कर रही हाई-पावर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। कमिटी ने उन्हें आदिवासी मानने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, फ़रवरी 2018 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर डीडी सिंह की अध्यक्षता में बनी समिति ने 21 अगस्त 2019 को अपनी जाँच रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि अजित जोगी कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं दे सके जिससे वह यह साबित कर सकें कि वह आदिवासी जाति से ताल्लुक रखते हैं।

लिहाज़ा बिलासपुर के कलेक्टर को छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी नियम 2013 के तहत उन पर एक्शन लेने के लिए कहा गया है। अजित जोगी मारवाही से विधायक हैं और अगर इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है, तो उनकी विधायकी जा सकती है। यह विधानसभा सीट आदिवासी प्रत्याशी के लिए आरक्षित है।

उन्नाव रेप पीड़िता के वकील को हाईकोर्ट का नोटिस, पूछा- क्यों ना चलाएँ अवमानना का मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (सितंबर 2, 2019) को उन्नाव रेप पीड़िता के वकील को नोटिस जारी किया। इसमें वकील से पूछा गया है कि सुनवाई के दौरान बार-बार हस्तक्षेप करके न्यायिक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

दरअसल, कोर्ट यूपी के कांस्टेबल आमिर खान की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो कि न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में याचिका दायर करते हुए आरोपों को रद्द करने की माँग की है। वकील डीके मिश्रा पर आरोप है कि वो याचिकाकर्ता आमिर की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे थे, ताकि आमिर पर पीड़िता के पिता की कथित हत्या के लिए आरोप तय किए जा सके।

हालाँकि, वकील मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसके कारण उनके खिलाफ बताओ नोटिस जारी किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी एक शिकायत पेंडिंग है और इसी आधार पर वे जस्टिस सुरेश कुमार कैत से गुहार लगा रहे थे। साथ ही मिश्रा ने कथित तौर पर जज पर असभ्य भाषा बोलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जज ने भरी अदालत में  उनके लिए असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हुए अवमानना का आदेश पारित कर दिया।

बता दें कि, आमिर खान द्वारा दायर किए गए इस याचिका में कहा गया है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान ट्रायल जज ने स्वीकार किया कि पीड़िता के पिता के साथ मारपीट या पिटाई की साजिश में याचिकाकर्ता की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए हत्या के लिए याचिकाकर्ता (खान) सहित पुलिस अधिकारियों को उत्तरदायी बनाना गैरकानूनी है। फिलहाल कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 5 सितंबर का वक्त तय किया है।

वहीं, जाँच एजेंसी सीबीआई ने सोमवार को पीड़िता का बयान भी दर्ज किया है। फिलहाल, पीड़िता की हालत में सुधार बताया जा रहा है। उसे आईसीयू से निकाल कर वार्ड में शिफ्ट किया गया है।

त्रिमूर्ति की लड़ाई से बेबस कॉन्ग्रेस, क्या फिर पार्टी का बॅंटाधार करेंगे दिग्विजय सिंह?

अटकलें तो बीते साल के अंत में मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद ही लगने शुरू हो गए थे। एक तो खुद के पास बहुमत का जादुई आँकड़ा न होना और उस पर से धड़ों में बॅंटी कॉन्ग्रेस। एक तरफ मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ, दूसरी ओर पर्दे के पीछे से कथित तौर पर सरकार चला रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और तीसरे पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने-अपने हित।

प्रदेश अध्यक्ष पद पर सिंधिया के समर्थकों की दावेदारी के बाद जिस तरह कमलनाथ के वन मंत्री उमंग सिंघार ने दिग्विजय पर आरोप लगाते हुए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को पत्र लिखा है उसने इस खेल को सार्वजनिक कर दिया है। इससे कई सवाल उठने लगे हैं। पहला, कमलनाथ सरकार कब तक बची रहेगी? दूसरा, सिंधिया प्रदेश अध्यक्ष बन पाएँगे? तीसरा, जो सबसे महत्वपूर्ण भी है कि क्या दिग्विजय फिर से प्रदेश में पार्टी की कब्र खोद कर ही मानेंगे?

दिग्विजय सिंह लगातार 10 साल (1993-2003) तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन, अपनी नीतियों से उन्होंने पार्टी को ऐसा नुकसान पहुॅंचाया कि कभी गढ़ रहे एमपी की सत्ता में लौटते-लौटते कॉन्ग्रेस को 15 साल लग गए और जब पहुॅंची तो भी बैसाखियों के सहारे। 2003 के विधानसभा चुनावों में उमा भारती ने दिग्विजय को ‘मिस्टर बॅंटाधार’ का नाम दिया था, जो जनता की जुबान पर चढ़ गया। चुनाव हारने के बाद दिग्विजय केंद्र की राजनीति में आ गए और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के शुरुआती राजनीतिक गुरुओं में माने जाते हैं। राहुल के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस ने जो उपलब्धियॉं हासिल की है उस पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि विवादित बयानों के मसीहा दिग्विजय सिंह अपनी ही पार्टी का बॅंटाधार करने में किस कदर उस्ताद हैं। लिहाजा, सिंघार के खत से पार्टी में हलचल तो मचनी ही थी।

सिंघार का दावा है कि दिग्विजय सिंह कमलनाथ सरकार को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। सोनिया गाँधी को लिखे खत में उन्होंने कहा है कि दिग्विजय खुद को प्रदेश में ‘पावर सेंटर’ के रूप में स्थापित कर कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों को पत्र लिख उसे सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं।

आगे उन्होंने दिग्विजय सिंह पर हमला करते हुए लिखा है कि व्यापमं घोटाला, ई-टेंडरिंग घोटाला, वृक्षारोपण घोटाला को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा। लेकिन सिंहस्थ घोटाले को लेकर वे कुछ नहीं कहते, क्योंकि इससे संबंधित विभाग उनके पुत्र जयवर्धन सिंह के पास है।

प्रदेश के एक और मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी सिंघार के समर्थन में आगे आए हैं। दबी जुबान राज्य के कई मंत्री दिग्विजय पर लगे आरोपों को सही बता रहे। पर कॉन्ग्रेस की परेशानी यह है कि राज्य के 5 मंत्री दिग्विजय सिंह के भी साथ हैं।

यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब ज्योतिरादित्य पहले से ही प्रदेश अध्यक्ष बनने को लेकर पार्टी को अल्टीमेटम दे चुके हैं। फिलहाल इस पर फैसला पार्टी ने हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनावों का हवाला देकर टाल दिया है।

संकट को लेकर फौरन हरकत में नहीं आने की यह आदत कहीं एमपी में कॉन्ग्रेस सरकार को ही न डूबो दे। वैसे भी, मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव जुलाई में ही कह चुके हैं कि यदि उनके नंबर 1 या नंबर 2 का आदेश आया तो कमलनाथ सरकार 24 घंटे भी नहीं चलेगी।

सेना की जासूसी करते पकड़ा गया असलम अंसारी, कोडवर्ड- जो टास्क दिया जाएगा वही काम करेंगे

संंवेदनशील माने जाने वाले बरेली के छावनी क्षेत्र से मिलिट्री इंटेलीजेंस ने एक संदिग्ध युवक को पकड़ा। युवक का नाम असलम अंसारी है। उसके पास से कई संदिग्ध चीजें मिली हैं।

दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार की सुबह 7 बजे कैंट रोड तिराहे पर एक युवक सड़क किनारे बैठ ड्राइंग बना रहा था। शक होने पर वहाँ घूम रहे कुछ युवकों ने उसे घेर लिया।

जानकारी मिलने पर मिलिट्री इंटेलीजेंस मौक़े पर पहुँची और युवक की तलाशी ली। उसके बस्ते से कंपास, नक्शे, मैप वगैरह मिले। उर्दू और हिंदी में अलग-अलग लिखी चीजे भी मिलीं और कुछ कोडवर्ड्स भी थे। मसलन, ‘जो टास्क दिया जाएगा वही काम करेंगे’

पूछताछ के दौरान उसने गुमराह करने की भी कोशिश की। कभी बदायूं जाने की बात कही, तो कभी दिल्ली। प्रत्यक्षदर्शियों के साथ सेना अधिकारी को भी ऐसा लगा जैसे उसकी हरकतें किसी प्रशिक्षित जासूस जैसी थी।

चश्मदीदों का तो ये भी कहना है कि वो काफ़ी टाइम तक अलग-अलग बयान देकर टीम को गुमराह करता रहा। लंबे पूछताछ के बाद पता चला कि वो बिहार का रहने वाला है। लेकिन जब पुलिस ने उससे उसके घर का नंबर माँगा तो वह टालमटोल करने लगा। काफ़ी टाइम बाद उसने एक टेलर का नंबर दिया, जिसके जरिए असलम के पिता तैय्यब अंसारी का नंबर टीम को मिला।

फोन किया गया तो असलम के पिता तैय्यब ने बताया कि वे बिहार के सीतामढ़ी के निवासी हैं। उनके बेटे की दिमागी हालत ठीक नहीं हैं। जिसका इलाज कराने के लिए वे बरेली पहुँचे थे। रात गुजारने के लिए वे फुटपाथ पर सोए थे और इसी दौरान उनका बेटा कहीं चला गया। जब बहुत ढूँढने पर वह नहीं मिला तो वे दिल्ली चले गए।

इसके बाद उसे कैंट थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। कहा जा रहा है कि पूछताछ में उसने अधिकारियों से कई भाषा में बात की, जो कि सामान्य नहीं हैं। उसके कई भाषाओं का जानकार होना और उसके बस्ते से मिले सामान के आधार पर उसकी सच्चाई पर सवाल बना हुआ है। अब पूरी जाँच के बाद ही तय हो सकेगा कि आखिर असलम हकीकत में बीमार है या फिर उसकी वास्तविकता छिपाने के लिए ये सारी कहानी गढ़ी गई है।

बाज नहीं आया पाक: 2017 में शीशे के स्क्रीन का पर्दा, काउंसलर एक्सेस के दौरान भी जाधव पर बिठाया पहरा

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के आदेश से बॅंधे पाकिस्तान ने मजबूरी में कुलभूषण जाधव तक राजनयिक पहुॅंच की इजाजत तो दी, लेकिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। दिसंबर 2017 में जब उसने जाधव की पत्नी और मॉं को उनसे मिलने की इजाजत दी थी, तब मुलाकात शीशे के स्क्रीन के पीछे से कराई गई थी। अब इस्लामाबाद में भारत के उप उच्चायुक्त गौरव अहलूवालिया से उनकी मुलाकात के दौरान भी उसने इसी तरह के पैंतरे दिखाए।

पहले तो आखिरी क्षणों में उसने मुलाकात की जगह बदल दी। फिर अपने अधिकारियों को तैनात रखा ताकि जाधव अपनी बात भारतीय अधिकारी को नहीं बता सके। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि उसने सीसीटीवी कैमरे में पूरी मुलाकात रिकॉर्ड की। नतीजतन, जाधव बेहद दबाव महसूस कर रहे थे और वे गलत बयानी को मजबूर थे।

जाधव 2016 से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। भारतीय नौसेना के इस पूर्व अधिकारी को उसने ईरान से अगवा किया था जहॉं वे कारोबार के सिलसिले में गए थे। बाद में उसने जासूसी का आरोप लगाते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई। इसके खिलाफ भारत ने आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। इंटरनेशनल कोर्ट ने भारत की दलीलों को मानते हुए मौत की सजा की तामील पर रोक लगा रखी है। कोर्ट ने उन तक राजनयिक पहुॅंच के आदेश भी दिए थे।

इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा,

“अभी हमें विस्तृत रिपोर्ट का इंतज़ार है। यह स्पष्ट है कि कुलभूषण जाधव भारी दबाव में थे और उन्हें वही कहने को मजबूर होना पड़ रहा था, जिससे पाकिस्तान के फर्ज़ी दावों को मज़बूती मिले। राजनयिक से पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद हम आगे की योजना पर फ़ैसला लेंगे।”

उन्होंने कहा कि इस मुलाक़ात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जाधव की मां को घटनाक्रम की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, सरकार जाधव को जल्द से जल्द इंसाफ दिलाने और सुरक्षित भारत वापसी के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद सोमवार को हुई मुलाकात जाधव तक भारत की पहली राजनयिक पहुॅंच थी। भारत ने कहा है कि आईसीजे के प्रावधानों के मद्देनजर इस दौरान पाकिस्तान के किसी भी अधिकारी की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए थी।

वहीं, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा है कि जाधव और अहलूवालिया की मुलाकात करीब दो घंटे तक चली। राजनयिक पहुंच पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों की मौजूदगी में उपलब्ध कराई गई। बयान में यह नहीं बताया गया है कि मुलाकात कहॉं कराई गई। हालॉंकि पाकिस्तानी मीडिया ने खबर दी है कि यह इस्लामाबाद के एक उप जेल में हुई थी।

सेना पर हमले के लिए PAK ने बनाया 7 लश्कर आतंकियों का दस्ता, घुसपैठ करते 2 पकड़े गए

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार घाटी में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है। मगर भारतीय सुरक्षा बल भी अलर्ट हैं। जानकारी के मुताबिक, कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश कर रहे 2 पाक आतंकी पकड़े गए हैं। सेना के अधिकारियों ने सोमवार (सितंबर 2, 2019) को दोनों आतंकियों के पकड़े जाने की सूचना दी।

बता दें कि, जिन दो आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है उनके नाम नाजिम खोखर (25) और खलील अहमद (36) है। इन्हें पिछले हफ्ते गुलमर्ग के पास से गिरफ्तार किया गया है। दोनों ही आतंकियों से पूछताछ की जा रही है। 

दोनों आतंकियों ने जाँच एजेंसियों को बताया है कि उन्हें लश्कर के खचरबन और कोटली कैंप में आतंकी हमले की ट्रेनिंग दी गई थी। आतंकी खलील अहमद और नाजिम खोखर ने कबूल किया है कि रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में उनकी मुलाकात पाक सेना के कुछ बड़े अधिकारियों से कराई गई थी। इसके बाद कश्मीर में हमले के लिए 7 लश्कर आतंकियों के ग्रुप को तैयार किया गया। इनमें 3 अफगानी मूल के भी आतंकी हैं। इन्हें घाटी में सुरक्षा बलों पर हमले के लिए तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार फारूक खान ने रविवार (सितंबर 1, 2019) को जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए बताया था कि घाटी में सक्रिय आतंकियों की संख्या पहले से काफी कम हो गई है। उन्होंने बताया था कि कभी घाटी में हजारों की संख्या में सक्रिय रहने वाले आतंकियों की संख्या घटकर महज 150 से 200 के बीच रह गई है। इसके साथ ही उन्होंने आतंकियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि आतंकियों को या तो जेल या फिर कड़ी सजा झेलने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

मोहम्मद शमी हो सकते हैं गिरफ्ताार, BCCI ने कहा- चार्जशीट देख होगी कार्रवाई

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के खिलाफ पत्नी हसीन जहॉं के साथ घरेलू हिंसा करने के आरोप में सोमवार को अरेस्ट वारंट जारी हुआ। वारंट पश्चिम बंगाल के अलीपुर कोर्ट ने जारी किया है। शमी के अलावा उनके भाई हसीद अहमद के खिलाफ भी वारंट जारी हुआ है। सरेंडर करने के लिए कोर्ट ने 15 दिन का समय दिया है। ऐसा नहीं करने पर दोनों गिरफ्तार हो सकते हैं।

शमी फिलहाल भारतीय टीम के साथ वेस्टइंडीज दौरे पर हैं। बीसीसीआई ने साफ़ कर दिया है कि उनके ख़िलाफ़ तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक वे चार्जशीट नहीं देख लेते। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा है कि अभी कोई कार्रवाई करना जल्दबाजी होगी। मामले में चार्जशीट देखने के बाद ही वह कुछ फैसला ले पाएँगे।

अधिकारी के मुताबिक, “हम समझते हैं कि गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। लेकिन हमें नहीं लगता कि अभी इस मामले में दखल देने की जरूरत है। एक बार हम चार्जशीट देख लें तब हम तय करेंगे कि क्या बीसीसीआई के संविधान के अनुसार कोई ऐक्शन लेने की जरूरत है। लेकिन इस समय तो कह सकते हैं कि कुछ भी करना जल्दबाजी होगी।’ “

2018 में दर्ज हुआ था मामला

उल्लेखनीय है कि पिछले साल 2018 में शमी की पत्नी ने उनके ऊपर मारपीट, रेप, हत्या की कोशिश, घरेलू हिंसा और दूसरी औरतों से अवैध संबंध जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके आधार पर शमी व उनके भाई के खिलाफ आइपीसी की धारा 498 ए (दहेज उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इस मामले में बीते मार्च में चार्जशीट दाखिल हुई थी। जिसपर कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। लेकिन पेश नहीं होने के कारण कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

2.5 बिहारियों के मंतर से सुतली के भाव एटम बम… फ्री हूर का जंतर भी फुस्स

मैं समय हूॅं। जिन्ना के जमूरों की कहानी सुनाने जा रहा हूॅं। ये कथा मेरे सिवाय कोई सुना नहीं सकता। क्योंकि मैं ही बिहारी हूॅं। यह कथा मियॉं मुशर्रफ से लेकर इमरान तक की है। एटम बम के सुतली बम के भाव गिरने की है।

यह कथा 2.5 बिहारियों की भी है, जिनके मंतर से जमूरों के हाथ कटोरा आया। 1.5 ने तो ‘आतंक के अन्नदाता’ की उनके ही घर लैंड कर लंका लगाई। 1 ने वाया-मार्फत मंतर भेजा, क्योंकि विरोधी कहते हैं उसके आँत में दॉंत है। तीनों के पराक्रम से आज एटम बम पाव, आधा पाव का हो चुका है।

एटम बम का नाम सुन देह सिहर गया। पर उन 2.5 देह का सोचिए जिनसे एटम बम सिहर गया। बत्ती नहीं जली। पर्दा उठाता हूॅं परिचय कराता हूॅं। एक बिहारी अपने लालू, दूसरे सुशासन वाले नीतीशे कुमार और आधे मौसम विज्ञानी रामविलास, जिनके बंगले मने लोजपा का चुनाव निशान में ही सत्ता की चाबी रहती है।

परिचय हो गया तो कथा 16 बरस पीछे ले चलता हूॅं। 2003 का साल। महीना अगस्त। तब लालू आईआईएम- हार्वर्ड मास्टरी करने नहीं गए थे। रामविलास नाखून कटा शहीद ही हुए थे। 1.5 बिहारी की इस जुगल जोड़ी को मियॉं परवेज मुशर्रफ ने घर बुलाया। मियॉं साहेब चच्चा सैम के कम होते खैरात से दुबले थे।

1.5 बिहारी ने मौका लपक मियॉं साहेब का कान फूॅंक दिया। धीरे-धीरे आउ-माउ-चाउ मॉडल आया। तेजी से मियाँ साहब रुखसत हो गए। इधर, सुशासन आया और चच्चा सैम का खुला बाजार लाने वाले के कैबिनेट में 1.5 इन थे। खान साहेब के आते-आते आतंक का अन्नदाता समझ चुका था कि आउ-माउ-चाउ में चच्चा बला बॉंटने का जिगरा नहीं है। इधर, सुशासन में विदेशी बिजनेस मॉडल परचम लहरा शटर गिरा चुका था।

इस मॉडल की खोज सुशासन की जोत पहली बार जगने से हुई। चौक-चौक पर ठेका सजा। सवा रुपए का भॉंग पचाने वालों पर विदेशी जादू करने आई। लेकिन, जेब अठन्नी-चवन्नी से भरे थे और विदेशी भाव गिराने को तैयार नहीं। सो सुशासन की किरपा से ‘ठेकादारों’ ने नया नुस्खा खोजा। पव्वा का सील टूटा और 5-10 के भाव बूॅंदों में बिकने लगी विदेशी। वो भी ऐसी चढ़ती कि पूछिए मत जनाब!

फिर बहार आई। विदेशी बंद हो गई। ठेकादार भी सुशासन का बिजनेस मॉडल ले गिरिराज मेल पर सवार हो पाकिस्तान पहुॅंच गए, जहॉं कटोरा में चवन्नी गिराने वाले कद्रदान भी न थे। ठेकादारों से खान साहब को सुशासन का विदेशी बेचो फॉर्मूला हाथ लगा। खान साहेब को पहली बीवी विदेशी लाने का अनुभव भी था। इसलिए फॉर्मूला चोखा लगा।

लेकिन, बेचने को कुछ न था। आखिर में गोदाम से एटम बम निकला। खान साहेब चिल्लाए एटम बम मार दूॅंगा। भाव न चढ़ा। छुक-छुक करते रेल वाले शेख साहेब आए। अंडा और करंट खाकर शेख साहेब ने मुनादी की- हमने एटम बम काट लिया। छोटे-छोटे। पाव-आधा पाव के।

खान साहेब ने भी ताव खाया। टोकरी में सजाए एटम बम। बीच बाजार खड़े हुए। आवाज लगाई ले लो…एटम बम। 5 का 2 ले लो। पाव भर ले लो…आधा पाव ले लो। लाल-नीले-हरे ले लो। लेकिन, सुतली के भाव आया चीनी बाग के एटम बम का बाजार न चढ़ा। कब फुस्स हो जाए चीनी भी न जाने!

खान साहेब ऑफर लाए। बाय एटम बम गेट हूर फ्री। वही हूर जिसे पाने की लबलबाहट में लौंडे खुद को उड़ा लेते हैं। तब भी भाव ना चढ़ा। खान साहेब ने नया पासा फेंका। भाजी में टिमाटर के बदले ही डाल लेना। वैसे भी अब कबाब कहॉं नसीब। भाजी बनाने के लिए हूर तो पहले से ही फ्री दे रहा हूॅं। लेकिन, लौंडे न आएँ।

इधर, सुशासन का नया फॉर्मूला आ गया “क्यूँ करें विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार।” उधर, 2.5 कॉकटेल के असर से जिहाद भड़ाम और हूर के ख्वाब भी दूभर। थक हार खान साहेब भी बोले- हम से न हो पाएगा।

कहते हैं एक बिहारी सौ पर भारी। कहते तो यह भी हैं कि तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा। यहॉं तो 2.5 ही 20 करोड़ पर भारी पड़े। अब मैग्सेसे वाले बिहारी चाहे तो अपने 2.5 बंधु-बांधव के इस पराक्रम पर स्क्रीन काली कर लें। मैं तो अपनी गति में हूॅं, सो कथा को पूर्णविराम लगाता हूॅं।

हमारे पास आधा पाव से लेकर 1 पाव तक के परमाणु बम: करंट लगने के बाद पाक मंत्री का नया बयान

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद लगातार अपनी ही फौज और देश का मज़ाक बनवा रहे हैं। अब वह परमाणु बम का आकार मापने में भी लग गए हैं। उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान के पास आधा पाव से लेकर एक पाव तक के एटम बम हैं। शेख रशीद ने 125 ग्राम से लेकर 250 ग्राम तक के वजन वाले एटम बेम होने की बात कही। हाल ही में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की फ़ौज ने अपनी तैयारियों की घोषणा करने के लिए उन्हें रखा हुआ है।

ये वही मंत्री हैं, जिन्हें मोदी का नाम लेते ही करंट लगा था। जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ कथित एकता दिखाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में जैसे ही उन्होंने पीएम मोदी को कोसना शुरू किया, उन्हें माइक से जोरदार करंट का झटका लगा। पाकिस्तानी मंत्री ने पंजाब के नानकाना साहिब में बोलते हुए गर्व से बताया कि जम्मू कश्मीर पर भारत के निर्णय के बाद पाकिस्तान ने पड़ोसी देश के साथ सारी बातचीत रोक दी है।

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अगर युद्ध हुआ तो पाकिस्तान पहले परमाणु बम का प्रयोग नहीं करेगा। लगातार आ रही युद्ध की धमकियों के बीच पाकिस्तान के नेता एक से बढ़ कर एक बयान दे रहे हैं।

पूर्व पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने की ‘कश्मीरी’ पोर्न स्टार की फोटो रीट्वीट, जॉनी सीन्स को बताया पेलेट गन्स पीड़ित

पाकिस्तान की जनता से लेकर उसके मंत्री और अधिकारी अपनी अर्थव्यवस्था, नान-रोटी और ‘टिमाटर’ के भाव तय करने के बजाय कश्मीर मुद्दे पर सक्रीय भूमिका निभा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भारत के ट्विटर यूज़र्स भी पाकिस्तान के मजे लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सोशल मीडिया पूरी तरह से कॉमेडी सर्कस बनकर रह गया है जहाँ तमाम लोग पकिस्तान पर चुटकुले बना रहे हैं और हँस भी रहे हैं। इस बार ट्विटर यूजर्स के जाल में फँसे हैं भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित।

दरअसल, ट्विटर पर अब्दुल बासित ने एक ऐसा ट्वीट रीट्वीट किया है, जिसमें एक अडल्ट फिल्म कलाकार के स्क्रीनशॉट को कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहाँ की पीड़ित जनता बताकर दिखाया जा रहा है।

भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने ट्विटर पर शेयर की जा रही तस्वीरों को कश्मीर में पेलेट गन्स से पीड़ित लोगों की तस्वीर समझकर रीट्वीट किया। जबकि इस तरह की तस्वीरें आजकल सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के लोगों का मजाक बनाने के लिए ट्विटर यूजर्स इस्तेमाल कर रहे हैं।

अब्दुल बासित द्वारा रीट्वीट की गई तस्वीरों में पोर्न स्टार जॉनी सीन्स की तस्वीरें दिखाई गई हैं, जो कि बिना किसी शक के कश्मीरी नागरिक नहीं है। इस तस्वीर में दिखाया गया है कि यूसुफ़ अनंतनाग का रहने वाला है, जिसकी आँखों की रौशनी पेलेट गन्स की वजह से चली गई।

पाकिस्तान भारत को कश्मीर मुद्दे पर दुनिया के सामने घेरने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहा है। हालाँकि, वह लगातार इस प्रयास में असफल हो रहा है और बदले में उसे विश्वस्तर पर इसके लिए जलील भी किया जा रहा है।

ये वही अब्दुल बासित हैं जिन्होंने हाल ही में एक विवादास्पद बयान में कहा है कि 2016 में आतंकी बुरहान वानी की हत्या के बाद उन्होंने प्रख्यात सोशलाइट-कॉलमनिस्ट शोभा डे से जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह के पक्ष में वकालत करवाई। हालाँकि, शोभा डे ने इस दावे का खंडन किया है।