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21 राज्यों/UT में खाता भी नहीं खोल पाई कॉन्ग्रेस, मोदी सुनामी में हारे कई दिग्गज

कॉन्ग्रेस 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में खाता खोलने में भी विफल रही है। मोदी लहर में कॉन्ग्रेस के कई दिग्गज चारों खाने चित हो गए। भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को पटखनी दी। दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को पटना साहिब से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा कई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में धमाकेदार प्रदर्शन करती दिख रही है। ताज़ा रुझानों के अनुसार, पूर्ण बहुमत से आगे निकल चुकी भाजपा ने 300 सीटों का आँकड़ा भी छू लिया है। राहुल गाँधी अमेठी हार चुके हैं। उन्हें स्मृति ईरानी ने पटखनी दी। जिन राज्यों/UT में कॉन्ग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई है, उनके नाम हैं:

गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, दादर नगर हवेली, अंडमान निकोबार, दमन दीव, लक्षद्वीप, त्रिपुरा।

Breaking: बुरहान वानी का ‘उत्तराधिकारी’ ज़ाकिर मूसा कुत्ते की मौत मारा गया

जम्मू और कश्मीर के त्राल में सुरक्षा बलों ने अंसार गज़वातुल हिन्द के आतंकी सरगना और हिज्बुल ‘पोस्टर बॉय’ बुरहान वानी के ‘उत्तराधिकारी’ माने जाने वाले ज़ाकिर मूसा को मार गिराया है। यह अभी कुछ देर पहले की ही घटना है।

ददसारा गाँव में हुए एनकाउंटर में सेना की 42वीं राष्ट्रीय राइफल, एसओजी और सीआरपीएफ ने रिपोर्टों के मुताबिक गाँव को शाम से ही घेर लिया था। उन्हें आतंकी सरगना के वहाँ होने की गुप्त सूचना मिली थी। जॉइंट टीम ने पहले तो मूसा को आत्मसमर्पण के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन उसने सैनिकों पर ग्रेनेडों से हमला कर दिया।

सॉल्ट न्यूज़ MEME चेकर ने किया खुलासा, ‘नहीं, देश में नहीं मोदी लहर’, लिबरल गिरोह ने ली राहत की साँस

देश में मोदी लहर के रुझान के बाद आदर्श लिबरल गिरोह और पत्रकारिता के समुदाय विशेष के बीच डर का माहौल देखने को मिला है। EVM हैक होने की ख़बरों से भी खुद को और अपने जैसे ही अन्य लगभग लिबरल्स को हौसला दिला पाने में नाकाम रहे मीडिया गिरोह प्रमुखों ने आखिरकार एक बड़ा फैसला लिया है।

मीडिया गिरोह प्रमुखों ने चुनाव नतीजों के इकतरफा होने के कारण देश में होती लोकतंत्र की हत्या को देखकर कमर कसने का फैसला लिया और तुरंत एक उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में रुझान देखकर बदहवास हालात में यहाँ-वहाँ एक-दूसरे को चूंटियाँ काटकर यकीन दिलाते आदर्श लिबरल को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए गए हैं।

बिकाऊ मीडिया और बिक चुकी संस्थाओं में यकीन ना करने वाले कॉन्ग्रेस के पार्टी प्रवक्ता कुणाल कामरा फैन क्लब ने चुनाव के नतीजों का फैक्ट चेक करने का फैसला लिया है और इस फैक्ट चेक का ठेका उन्होंने MEME और फेकिंग न्यूज़ की ख़बरों का फैक्ट चेक कर के जीवनयापन करने वाले विश्वस्तरीय फैक्ट चेकर्स को देने का निर्णय लिया है। फ्री-ड्रिंकर और चिड़ियाघर के भालू नाम के इन दो कुख्यात फैक्ट चेकर्स की जोड़ी का सोशल मीडिया पर बहुत क्रेज है। कई लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि दंत कथाओं में जिन अतापि-वतापि भाइयों का जिक्र मिलता है ये दोनों उन्हीं का पुनर्जन्म है।

सोशल मीडिया पर लोगों की जासूसी करने वाले इस फैक्ट चेक गिरोह ने आदर्श लिबरल्स की भावनाओं को 2 कौड़ी का भाव देते हुए तत्परता से चुनाव के वास्तविक रुझान का फैक्ट चेक करने की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर ली है। चूँकि इन चुनावी नतीजों के बाद ही आदर्श लिबरल्स अपने नेता को स्वीकारेंगे, इसलिए इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाने के लिए सॉल्ट न्यूज़ ने हिटलर के अंग विशेष की नाप छाप करने वाले मीडिया के नाम पर संक्रामक रोग की भी मदद माँगी है। हालाँकि, एग्जिट पोल के दिन से ही नरेंद्र मोदी की यात्रा और गुफा वाली तस्वीरों को छोड़कर इस संक्रामक मीडिया गिरोह की एक टुटपुँजिया टुकड़ी को गोभी के पत्तों में कीड़े होने की जाँच करते हुए देखा गया है। नाम न बताने की शर्त पर कुछ सूत्रों ने बताया है कि आज चुनाव के नतीजों के बाद ‘छी खल्लनखोट’ नामक यह मीडिया गिरोह अपने नाम के आगे ‘चौकीदार दी खल्लनखोट’ लगाने पर भी विचार कर रहा है।

नहीं, फैक्ट चेक में नहीं नजर आई कोई मोदी लहर

सॉल्ट न्यूज़ ने फैक्ट चेक करने के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आदर्श लिबरल गिरोह और क्रांति के चितेरों में यह देख कर उत्साह का माहौल है। मीडिया गिरोह के कुलपति ने यह चौंकाने वाला फैक्ट चेक सुनते ही खुद को रोक नहीं पाए और अपने विशेष शो में तुरंत नागिन डाँस कर के दिखा दिया। उन्होंने इसके बाद स्पष्टीकरण दिया कि जिस प्रकार बनारस में किए गए सर्वे में नरेंद्र मोदी जी द्वारा किए गए कार्यों को वो नहीं मानते हैं, उसी प्रकार चुनाव आयोग और गोदी मीडिया द्वारा दिखाए जा रहे चुनाव के नतीजों को वो नहीं मानते हैं।

आदर्श लिबरल्स ने भी तुरंत ट्रोलाचार्य निष्पक्ष पत्रकार द्वारा दिए गए ‘इनपुट’ को लोल सलाम करते हुए साथी-शपथ ली कि अब वो भी उसी चुनावी नतीजों को मानेंगे, जो सॉल्ट न्यूज़ द्वारा प्रमाणित है। इसी बीच आदर्श लिबरल्स को ख़ुशी से झूमता देख सॉल्ट न्यूज़ के अतापि-वतापि ब्रदर्स ने लगे हाथ चुपके से 2 और MEME के फैक्ट चेक कर के उन्हें पढ़वाकर शाम को अपनी दुकान बढ़ाई।

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने इन नतीजों के बाद अपनी ख़ुशी प्रकट करने से खुद को नहीं रोक पाई और उन्होंने बेहद सुंदर शब्दों में दिल्ली के नागरिकों की हालत पर ट्वीट करते हुए बताया कि सॉल्ट न्यूज़ के नतीजों के बाद दिल्ली में बहुत ही सुंदर माहौल है, लोग एक-दूसरे को गले लगा रहे हैं। और उम्मीद जताई है कि यह चलता रहे।

वो सब हार गए जिनके लिए स्वरा भास्कर ने लिए थे नए साड़ी-ब्लाउज़, ट्विटर पर लोगों ने कहा- ‘पनौती’

चुनावी नतीजे लगभग सामने आ चुके हैं अब सिर्फ़ औपचारिक घोषणा बाकी है। ऐसे में विपक्ष को समर्थन देने वाले लोग स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। स्वरा भास्कर उन्हीं लोगों में शामिल हैं जिन्होंने भाजपा को सत्ता से हटाने से लिए विपक्षी नेताओ के लिए कैंपेनिंग की थी। लेकिन मोदी लहर के आगे उनका जलवा नहीं चल पाया। वो सभी कैंडिडेट्स रुझानों में भाजपा नेताओं से पिछड़ते नजर आए, जिनकी कैम्पेनिंग करने के लिए स्वरा ने नए साड़ी ब्लाउज़ लिए थे। रुझानों के आने के साथ स्वरा को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक स्वरा सभी के लिए ‘पनौती’ साबित हुई हैं।

दरअसल स्वरा भास्कर ने आप उम्मीदवार आतिशी मार्लेना, दिलीप सिंह, राघव चड्ढा को समर्थन दिया था लेकिन इनमें से कोई भी दिल्ली में अपनी जीत हासिल नहीं कर पाया। इसके अलावा उन्होंने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह, सीपीएम उम्मीदवार आमरा राम और सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार का प्रचार करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए।

स्वरा, कन्हैया कुमार के चुनावी प्रचार के लिए बेगुसराय तक गई थीं। उन्होंने वहाँ अपने भाषण के दौरान ‘जय हिंद, जय भीम, लाल सलाम’ का नारा तक लगाया था, लेकिन अफसोस उन्हें बेगुसराय में इसका कोई फायदा नहीं दिखा। रुझानों के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह उन्हें 2 लाख वोटों से मात दे रहे हैं।

स्वरा भास्कर ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए जम कर प्रचार किया था लेकिन साध्वी प्रज्ञा के आगे उनका जादू नहीं चल पाया। 1 लाख से ज्यादा वोटों का अंतर से साध्वी प्रज्ञा रुझानों में लीड कर रही हैं और लगातार आगे बढ़ी हुई हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के लिए भी चुनावी रैली की थी लेकिन राघव को भी जबरदस्त तरीके से शिकस्त खानी पड़ी है। इसके साथ ही आतिशी भी गौतम गंभीर से हारती नजर आई और दिलीप सिंह अपनी जीत दर्ज नहीं करवा पाए।

बता दें कि स्वरा के ट्विटर पर ट्रोल होने के बाद उन्होंने एक ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर चुनाव सिर्फ़ इसी बात पर था कि स्वरा ने कितनों को समर्थन दिया तो वो बता दें कि उन्होंने 6 प्रत्याशियों को समर्थन दिया है।

क्या भाजपा को कॉन्ग्रेस की राजनैतिक निर्ममता अब दिखानी चाहिए?

क्या भाजपा को अपने विरोधियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उनपर लगे आरोपों की सही जाँच करनी चाहिए? क्या चूक हुई जिसे कॉन्ग्रेस अभी भी सुधारना नहीं चाहती? क्या EVM हैक की गई? EVM हैक हुई है, लेकिन उसे जनता ने हैक किया। आप जनता को विकास दिखा कर हैक कर लो, किसने रोका है?

जनता समझदार है, राहुल गाँधी जी! उनको अपने जैसा मत समझिए…

बुद्धिजीवी कुछ सकुचाए, भरमाए से एक बात कह रहे हैं कि 2019 का चुनाव मुद्दों का चुनाव नहीं रहा। यह चुनाव केवल एक मुद्दे पर लड़ा गया वह है मोदी। या तो आप मोदी के लिए वोट दे रहे थे या मोदी के विरुद्ध। भाजपा की तरफ से कोई दूसरा प्रत्याशी किसी चुनाव क्षेत्र में नहीं था और दूसरी तरफ विपक्ष की ओर से भी कोई स्थानीय प्रत्याशी किसी स्थानीय प्रत्याशी के विरुद्ध नहीं खड़ा हुआ था।

चुनाव को मुद्दों का चुनाव बनाने की जिम्मेदारी विपक्ष की होती है, सत्ता में जो दल रहेगा वह तो अपना गुणगान करेगा ही। लेकिन कॉन्ग्रेस ने कुछ मुद्दे गलत चुने जिसका परिणाम उसे भुगतना पड़ा। जो कॉन्ग्रेस  दिसंबर 2018 तक सोशल मीडिया पर बहुत आगे दिख रही थी फ़रवरी आते आते पिछड़ गयी। कॉन्ग्रेस के सामने समस्या यह भी है कि भाजपा की सरकारों ने मानदंड ऐसे स्थापित किये हैं जिनपर खरा उतर पाना और तुलना से बचना बिना कठिन परिश्रम के संभव नहीं।

न्याय योजना एक अच्छा दांव था लेकिन राजस्थान और मध्यप्रदेश की सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई जिससे यह पूर्व नियोजित दांव कमजोर पड़ गया। कई स्थानों पर फॉर्म बंटवा कर वोटरों को भ्रमित करने का भी कार्य हुआ। उसके आलावा कॉन्ग्रेस  के पास न कोई मुद्दा दिखा न कोई नीयत। कॉन्ग्रेस और अन्य सभी दलों ने किसी मुद्दे को उठाने के स्थान पर मोदी को हटाने की बात पर अधिक जोर दिया जिससे एक प्रकार से मोदीजी को ही बल मिला। असीमित अपशब्दों और घृणा के बाद भी मोदीजी की यह जीत अप्रत्याशित ही नहीं विपक्ष के लिए शोध का विषय भी है।

भ्रष्टाचार का आरोप मोदी पर लगाना पानी में तेल मिलाने जैसा मुद्दा था, लेकिन कॉन्ग्रेस अपने पूरे प्रचार में इसी पर अड़ी रही। यहाँ तक कि कोर्ट से फटकार मिलने के बाद भी राहुल गाँधी क्षमा तो माँगते दिखे लेकिन वही बात दोहराते रहे। उनका सलाहकार ठीक होता तो उन्हें इस बात को बहुत पहले ही छोड़ देने को कहता। बचने का तरीका यह था कि आप कह देते कि चलिए उच्चतम न्यायलय कह रहा है तो उनका सम्मान कहते हुए हम मान जाते हैं और अगर हमारी सरकार बनी तो इस मामले में जो दोष होंगे उन्हें दूर करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

इसका परिणाम यह हुआ कि राहुल गाँधी के पूर्वज भी चुनाव में घसीट लिए गए। राफेल की बात बोफोर्स पर जाकर कॉन्ग्रेस के गले में अटक गई। व्यक्तिगत टिप्पणियाँ आज की बात नहीं हैं, चुनावों में सदा से होती आई हैं, बस आजकल सोशल मीडिया की वजह से प्रतिक्रिया तुरंत मिल जाती है, जो पहले संभव नहीं होती थी। किसी नेता ने कुछ कहा, जब तक वह बात फैलती थी तब तक दूसरा कुछ कह देता था और जनता के मन में छोटी मोटी बातें नहीं टिक पाती थीं, अब वैसा सम्भव नहीं है। जो भी सार्वजानिक जीवन में नेता करते और कहते हैं वह एक मुद्दा होता है।

कॉन्ग्रेस को अब राहुल गाँधी के आगे सोचना होगा, एक नेता और देश के नेतृत्त्व के लिए वे स्वयं को सर्वोत्तम प्रत्याशी साबित नहीं कर पाए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं और उन्हें पार्टी जबरदस्ती नेता बना कर रखना चाहती है। कहना अलग बात है और करना अलग।

अगर उनकी मानसिकता को समझा जाए तो जिस प्रकार से उन्होंने एक खबर फैलाई कि प्रियंका गाँधी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगी और फिर वे पीछे हट गए, वह उनका कमजोर पक्ष दिखाता है। सन्देश यह गया कि वे मुकाबला करना ही नहीं चाहते। उसके बाद वे कहते दिखे कि ‘वे तो सबको सस्पेंस में रखना चाहते थे और उसमे में सफल हुए हैं’। अगर उनके मन में प्रधानमंत्री का पद सँभालने की इच्छा होती तो स्वयं को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित करके कम से कम 400 सीटों पर चुनाव लड़ते। लेकिन वे स्वयं जीतना नहीं चाहते। वो केवल मोदी को हराना चाहते थे। अब तक वे अपनी क्षमता पर लोगों को विश्वास दिलाने में असफल ही रहे हैं। प्रियंका गाँधी से कॉन्ग्रेस ने बहुत उम्मीद लगाई थी लेकिन वे भी एक प्रकार से स्वयं को उस स्तर पर स्थापित नहीं कर पाईं जिसकी उनसे आशा थी।

कॉन्ग्रेस  को अगर आगे अपना अस्तित्त्व बचाना है और बेहतर राजनैतिक दल के रूप में उभरना है तो गाँधी परिवार के आगे सोचना होगा। कॉन्ग्रेस को अपने भूत और वर्तमान के बोझ से एक बार में मुक्ति पानी होगी। अगर पुनर्निर्माण करना है तो पूरी तरह मिटना होगा।

कॉन्ग्रेस की समस्या शक्ति के केंद्र कुछ गिने चुने परिवारों और उनके मित्रों के बीच रहना है। हेमंत विश्व शर्मा उनके सामने एक ऐसा उदाहरण है। अकेले इन्होंने पूर्वोत्तर की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। मनमोहन सिंह से बेहतर प्रधानमंत्री प्रणव मुखर्जी साबित होते लेकिन प्राथमिकताएँ और थीं। ऐसे ही अनेक प्रतिभाशाली नेता कॉन्ग्रेस के पास निश्चित होंगे लेकिन उनके पास उचित अवसर नहीं हैं।

अन्य दलों ने भी कॉन्ग्रेस की ही नीति अपनाते हुए केवल मोदी के विरुद्ध वोट करने की माँग की अपने लिए वोट नहीं माँगे, जैसे इनके पास अपनी कोई योजना नहीं है। प्रतिद्वंद्वी की छवि को बिगाड़ने के प्रयास करने से स्वयं की छवि का निर्माण नहीं हो सकता।

प्रतिभा की कमी कॉन्ग्रेस के पास भी नहीं है बीजेपी के पास नहीं, नेताओं की छवि जनता के मन में एक-सी ही है। सच कहें तो जिन्हें लोग, पिद्दी, आपिया या भक्त कहते हैं उनमे से अगर कुछ आईटी सेल वाले और कुछ कट्टर समर्थक निकाल दिए जाएँ जो कि एजेंडा को बढ़ाते हैं तो बाकी के लोग आम जनता ही हैं। चुनाव समाप्त होंगे तो अधिकतर अपने अपने काम में लग जाएँगे। किसी भी दल का समर्थक हो, सभी को वही रोटी, कपड़ा, मकान और रोजगार चाहिए। सभी अपने देश से प्रेम करते हैं बस सबका दृष्टिकोण अलग अलग है। अपनी दृष्टि में जो ठीक लगता है उसके साथ वे खड़े हो जाते हैं चाहे वो किसी भी दल से क्यों न हो। कल जो कॉन्ग्रेस  के साथ थे आज जो बीजेपी के साथ हैं और कल वो कॉन्ग्रेस के साथ फिर जा सकते हैं, लेकिन परिपक्व नेतृत्त्व उनकी शर्त है।

वोटर के मन में क्या था अब यह स्पष्ट हो गया है। आशा है सभी विपक्षी दल इससे कुछ सीखेंगे और फिर से सत्ता में आई मोदी सरकार राष्ट्रनिर्माण में कोई कसर नहीं छोड़ेगी क्योंकि इस बार उम्मीदें पिछली बार से अधिक होंगी। विपक्ष को सलाह है कि वे लोगों की उम्मीदों पर अधिक ध्यान दें, मोदी को गिराने की जगह स्वयं को राष्ट्रनिर्माण में सहयोगी की तरह प्रस्तुत करें अन्यथा अगला चुनाव भी स्वप्न ही होगा।

ये जनादेश श्रद्धांजलि है बंगाल के दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं के बलिदान पर

अमित शाह ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि भाजपा के 80 कार्यकर्ताओं की हत्या बंगाल की चुनावी हिंसा में हुई। हम तक कुछ ही नाम पहुँचे जो मीडिया ने पहुँचाए, और बाकी नाम गुमनाम रहे। कोई पोल पर टँगा मिला, किसी की लाश पेड़ पर लटकी मिली, कोई खेत में पाया गया।

लोकतंत्र ने आज मौका दिया कि उनकी बलिदान व्यर्थ न हो। आज जब बंगाल में भाजपा ने अपनी बढ़त बनाई है और लगभग बीस सीटों पर आगे है, तब उन लोगों को भारतीय लोकतंत्र एक श्रद्धांजलि-सा देता प्रतीत होता है जिन्हें इस हिंसा और एक तानाशाह की नकारात्मकता ने लील लिया।

कुछ दुखद घटनाओं का स्मरण करें तो कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में भाजपा कार्यकर्ता अपूर्बा चक्रवर्ती को तृणमूल के गुंडों ने बेरहमी से पीटा था। जिसके बाद से चक्रवर्ती की हालत गंभीर हो गई थी और वह उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गए थे।

इतना ही नहीं मालदा में, भाजपा ग्राम पंचायत के सदस्य उत्पाल मंडल के भाई पटानू मंडल को भी टीएमसी के गुंडों ने उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा टीएमसी के एक अन्य विधायक सोवन चटर्जी और उनके मित्र बैशाखी चटर्जी को भी कथित तौर पर एक बंगले में सिर्फ़ इसलिए कैद रखा गया था क्योंकि उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें थीं। इतना ही नहीं पिछले साल पंचायत के चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार की एक गर्भवती रिश्तेदार का टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा रेप तक कर दिया गया था।

यह तो कुछ नाम हैं जिनकी खबर आई। दर्जनों ऐसे कार्यकर्ता भी हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते। जिस लोकतंत्र को बचाने की बात मीडिया AC रूम में बैठकर करती है। जिस लोकतंत्र को बचाने वाले जोशीले भाषण नेता AC की हवा खाते हुए मंचों से देते हैं या फिर हम और आप जिस लोकतंत्र को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर आपस में लड़-मरते हैं, गाली-गलौज करते हैं।

दरअसल उस लोकतंत्र को अपने खून से सींचा है पश्चिम बंगाल के उन कार्यकर्ताओं ने, जिन्होंने अपनी जान न्यौछावर की। उन्होंने अपनी जान इसलिए न्यौछावर की क्योंकि उन्हें सही मायने में लोकतंत्र में विश्वास था। उनको नमन कीजिए क्योंकि आपके एक वोट की सही कीमत उन्होंने ही समझी।

मेरे मुँह पर करारा तमाचा पड़ा है, आगे और भी ज्यादा… : प्रकाश राज

लोकसभा चुनाव की मतगणना जारी है। अभी तक के रुझान को देखें तो भाजपा ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। रुझानों का परिणाम सामने आते ही प्रकाश राज की हार लगभग तय मानी जा रही है और इसके बाद से ही ट्विटर यूजर्स ने भी एक्टर को ट्रोल करना शुरू कर दिया है। ट्रोलिंग के बीच एनडीए के प्रचंड बहुमत को देखते हुए प्रकाश राज ने खुद ट्वीट करते हुए अपनी हार को स्वीकार कर लिया है।

मतगणना शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद अपनी हार को स्वीकार करते हुए एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “ मेरे मुँह पर करारा तमाचा पड़ा है। आगे और भी ज्यादा गालियाँ, ट्रोलिंग और अपमान का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मैं अपनी ज़मीन नहीं छोड़ूँगा। धर्म निरपेक्ष भारत के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी। एक मुश्किल सफ़र अभी शुरू हुआ है। इस यात्रा में मेरा साथ देने वालों के लिए शुक्रिया। जय हिंद।”

प्रकाश राज के इस ट्वीट पर लोगों के खूब रिएक्शन्स आ रहे हैं। काफी लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं। लोग उन्हें सांत्वना देते हुए लिख रहे हैं कि ये तो बस शुरुआत है। वहीं कुछ ट्रोल करने वाले लिख रहे हैं कि उनके (प्रकाश राज) पास अभी भी टाइम है, मोदी से नफरत करना छोड़ दें। कुछ ने तो उन्हें डूबकर मर जाने की भी सलाह दे डाली।

प्रकाश राज बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे थे। इस सीट पर कॉन्ग्रेस के रिजवान अरशद सबसे आगे हैं, वहीं बीजेपी के पीसी मोहन दूसरे नंबर पर हैं। प्रकाश राज को अभी तक की मतगणना के अनुसार 12,000 से भी कम मत प्राप्त हुए हैं। उन्होंने पहले राउंड के आँकड़े जारी होने के तुरंत बाद मैदान छोड़ दिया था।

PM नरेंद्र मोदी को विश्वभर के नेताओं से मिलीं बधाईयाँ, जानिए किसने क्या कहा

विश्व भर के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाइयाँ और शुभकामनाएँ देनी शुरू कर दी हैं। पड़ोसी देश श्री लंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा कि जनता ने मोदी के नेतृत्व पर फिर से भरोसा जताया है और वे आगे भी भारत के साथ काम करने के लिए और रिश्तों को प्रगाढ़ करने के लिए तैयार हैं।

इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्यहू ने पीएम मोदी को लिखा:

भूटान के प्रधानमंत्री ने भी पूरे भूटान की तरफ से बधाई देते हुए कहा कि वे उनके नेतृत्व में भारत के आगे बढ़ने की कामना करते हैं।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद सोलीह ने इस जीत को ऐतिहासिक बताते हुए पीएम मोदी को बधाई दी।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी पीएम मोदी के साथ मिलकर भारत-चीन संबंधों को आगे ले जाने की बात कही।

पुर्तगाल के प्रधानमंत्री अंटोनिओ कोस्टो ने प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि वो भारत-पुर्तगाल संबंधों को नए सिरे पर ले जाने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति गनी ने कहा कि उनके देश के लोग भारत से संबंधों को आगे बढ़ने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करते रहेंगे और दोनों लोकतंत्र के रिश्ते सही होंगे।

नेपाल के नेता के पी शर्मा ओली ने भी प्रधानमंत्री को बधाई दी।

कर्नाटक में JD(S) के 17, बंगाल में TMC के 47 और MP में कॉन्ग्रेस के 6 MLA बदल सकते हैं पाला

लोकसभा निर्वाचन 2019 के नतीजे आने के साथ ही राज्यों में भी उठापटक की खबरें आनी शुरू हो गई हैं। रिपब्लिक टीवी के सूत्रों के अनुसार कर्नाटक में सत्ताधारी दल के 17 विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं।

बंगाल में भी तृणमूल के 47 विधायक पार्टी छोड़ने का मूड बना रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 6 विधायक कमलनाथ सरकार का साथ छोड़ सकते हैं।

ताजा अपडेट मिलने तक ममता बनर्जी ने अपने सभी विधायकों को तृणमूल कार्यालय पर बैठक के लिए बुलाया है। वहीं जनता दल (सेक्युलर) के नेताओं की बैठक भी देवगौड़ा के घर पर हो रही है। रिपब्लिक के अनुसार मुख्यमंत्री कुमारस्वामी अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं।