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आजम खान को ‘मोगेंबो’ बोलना नकवी को पड़ा भारी, हुआ केस दर्ज

सोमवार(अप्रैल 15, 2019) को शाहबाद में भाजपा उम्मीदवार जया प्रदा के समर्थन में आयोजित जनसभा को संबोधित करने के दौरान केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सपा नेता आजम खान पर जमकर निशाना साधा।

नकवी ने अपने भाषण में आजम खान को मोगेंबो कहा। जिसके बाद नकवी के इन शब्दों को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया और नकवी पर आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

जनसभा में मौजूद रहे मजिस्ट्रेट महेश चंद्र गुप्ता की ओर से नकवी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया गया है। गौरतलब है कि नकवी ने आजम खान के लिए मोगैम्बो शब्द का प्रयोग उनके अंडरवियर वाले बयान के मद्देनजर दिया था।

इसके अलावा बता दें कि जया प्रदा पर आजम खान द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने सपा नेता के चुनाव प्रचार पर 72 घंटे का बैन लगा दिया है।

इसके पहले, नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ भी आचार संहिता के उल्लंघन पर केस दर्ज किया गया है। सिद्धू पर आरोप है कि उन्होंने बिहार में एक रैली के दौरान धर्म के आधार पर वोट माँगा था। मायावती और योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार पर भी बैन लगाया जा चुका है।

रिटायर्ड कर्नल की कविता से चुराया कॉन्ग्रेस ने अपना थीम सॉन्ग, क्या ‘अब होगा न्याय’?

कॉन्ग्रेस पार्टी के नए चुनावी गीत ‘मैं ही तो हिंदुस्तान हूँ’ का पार्टी नेताओं द्वारा ज़ोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है। अब ये गीत रिलीज होते ही विवादों में घिर गया है। धनबाद निवासी रिटायर्ड कर्नल जे के सिंह की पत्नी ने पार्टी पर अपने पति द्वारा लिखित कविता को चोरी करने का आरोप लगाया है। रिटायर्ड कर्नल जे के सिंह की पत्नी नितिका ने कहा कि कॉन्ग्रेस के चुनावी गाने के बोल उनके पति द्वारा रचित कविता पर आधारित हैं। इस बाबत आपत्ति जताते हुए नितिका सिंह ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को खुला पत्र लिखा है।

बता दें कि अभियान का थीम सॉन्‍ग ‘मैं ही तो हिन्दुस्तान हूँ’ के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसके वास्तविक रचयिता जावेद अख्तर हैं और संगीत अर्जुना हरजाई ने दिया है। कॉन्ग्रेस की प्रचार क्लिप का निर्देशन निखिल आडवाणी ने किया है और इसके छायाकार तुषार कांति राय हैं और पटकथा अनुजा चौहान ने लिखी है। इसके लॉन्च होने से पहले चुनाव आयोग की आपत्ति के कारण इसकी कुछ पंक्तियाँ हटानी पड़ी थी। इसे ‘अब होगा न्याय’ टाइटल के अंतर्गत रिलीज किया गया है।

कॉन्ग्रेस का चुनावी थीम सॉन्ग

सेवानिवृत्त कर्नल सिंह की पत्नी ने राहुल गाँधी को भेजे गए खुले पत्र में लिखा है कि उनके पति कर्नल जे के सिंह ने ‘मैं सारा हिंदुस्तान हूँ’ कविता संग्रह लिखा था। कुछ ही दिनों पहले 25 फरवरी को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के उद्घाटन के दौरान उन्होंने नेशनल स्टेडियम दिल्ली में क़रीब 20 हज़ार पूर्व सैनिकों के समक्ष इस कविता का पाठ भी किया था। कर्नल जे के सिंह सेना के कार्यक्रमों के जाने-माने संचालक हैं और अब तक कई बड़े कार्यक्रमों का संचालन कर चुके हैं। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण कई टीवी चैनलों पर भी हुआ था।

कर्नल जे के सिंह ने अपने काव्य संग्रह ‘मैं सारा हिंदुस्तान हूं’ का विमोचन 13 अप्रैल 2012 को जालियाँवाला बाग़ में किया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस द्वारा इसे कॉपी किए जाने को ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स’ का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से कहा कि अगर उनकी पार्टी इस गीत का उपयोग करना ही चाहती है तो पहले उनसे सहमति पत्र लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो सहमति पत्र देने के बदले कोई राशि भी नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि सहमति पत्र के बदले राहुल गाँधी वीरगति को प्राप्त झारखण्ड के किसी सैनिक या पुलिसकर्मी के परिवार को आर्थिक सहायता दें।


₹300 करोड़ तक के हथियार खरीदने के लिए सशस्त्र सेनाओं को अनुमति नहीं लेनी होगी: रक्षा मंत्रालय

पुलवामा हमले से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से लगी सीमा की सुरक्षा हेतु सेना को आवश्यक हथियार व रक्षा उपकरण खरीदने के लिए आपातकालीन अधिकार दिए हैं। इसके तहत सशस्त्र सेनाओं के तीनों अंग (आर्मी, नेवी एयर फ़ोर्स) अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ₹300 करोड़ प्रति आवश्यकता की दर से रक्षा उपकरण खरीद सकते हैं। सेनाओं को हथियार खरीदने की प्रक्रिया 3 महीने में पूरी करने की छूट दी गई है।

मीडिया खबरों के मुताबिक इस संबंध में तीनों सेनाएँ कई प्रस्तावों को लेकर आगे बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि अपनी आपातकालीन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सेना ने इस्राएल से 250 स्पाईक मिसाईल खरीदने का प्रस्ताव भी रखा है जिनका प्रयोग दुश्मन के टैंक के ख़िलाफ़ किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर वायुसेना ने अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कुछ मिसाइल खरीदने में भी दिलचस्पी दिखाई थी, जिनसे सीमा पर भारत विरोधी गतिविधि रोकने में सहायता मिलेगी।

बता दें कि सेना को मिले इन आपातकालीन अधिकारों के तहत हथियार और उपकरणों की खरीद के लिए सेनाओं को रक्षा वित्त विभाग के इंटीग्रेटेड फाइनेंस एडवाइजर की सहमति लेने की भी जरूरत नहीं होगी। प्राप्त अधिकार में सेना एक विक्रेता से उपकरण खरीदने का विकल्प भी चुन सकती है। ANI की रिपोर्ट के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर सुरक्षाबलों को युद्ध लड़ना है, इसलिए उन्हें निर्णय लेना होगा कि उन्हें किस हथियार या उपकरण की आवश्यकता है।

Bar Council के नियमों का उल्लंघन करते पकड़े गए प्रशांत भूषण, NGOs से दिया इस्तीफा

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण एक बार फिर विवादों की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने तीन ग़ैर सरकारी संगठनों (NGOs) से इस्तीफा दे दिया है। भूषण ने सेंटर फॉर पीआईएल (CPIL), कॉमन कॉज और स्वराज अभियान नामक संगठनों से इस्तीफा दे दिया। प्रशांत भूषण ने ये क़दम तब उठाया है जब वो बार कॉउन्सिल के नियमों को ताक पर रखते हुए पकड़े गए हैं। बता दें कि प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स को परिभाषित करते हुए बार कॉउन्सिल के कुछ नियम हैं, जिनका सभी सदस्य वकीलों को पालन करना पड़ता है। इसके क्लॉज 9 में लिखा है कि वकील अदालत में ऐसे किसी भी प्रतिष्ठान का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते, जिसमें उन्होंने कोई पद ग्रहण कर रखा है।

प्रशांत भूषण कई बार इन संगठनों के लिए अदालत में जिरह कर चुके हैं, जिनके गवर्निंग बॉडी में वो शामिल हैं। मेजर सुरेंद्र पुनिया (रिटायर्ड) ने भूषण के ख़िलाफ़ शिकायत दायर की थी जिसके बाद उन्होंने ये क़दम उठाया। प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर कहा कि भले ही उन्होंने इन संगठनों की गवर्निंग बॉडी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन वो इसके लिए लड़ना जारी रखेंगे।

प्रशांत भूषण ने कहा कि बार कॉउन्सिल ऑफ दिल्ली उनके पीछे पड़ा हुआ था क्योंकि वो इन संगठनों के लिए अदालत में केस लड़ रहे थे। बार कॉउन्सिल ने नोटिस देकर भूषण से जवाब माँगा था जिसके बाद उन्होंने इस संगठनों के लिए केस लड़ने की बात स्वीकार की थी। अब उन्होंने बार कॉउन्सिल को अपने इस्तीफे से अवगत करा दिया है।

इससे पहले भी प्रशांत भूषण ऐसी हरकतें कर चुके हैं। अदालत के फैसले को लेकर ट्विटर पर टिप्पणी करने के कारण उनसे जवाब माँगा गया था। उनके ख़िलाफ़ 87 वर्षीय अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल राव ने अवमानना केस भी किया था। 16 जनवरी को लोकपाल मामले में बहस के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश ने प्रशांत भूषण को जमकर फटकार लगाई थी। प्रधान न्यायाधीश ने प्रशांत भूषण नसीहत देते हुए चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की बात कही थी। लोकपाल मामले पर बहस के दौरान कोर्ट में जब प्रशांत भूषण ने सर्च कमिटी के उपर सवाल खड़ा किया तो चीफ़ जस्टिस ने तल्ख अंदाज में प्रशांत भूषण को ये जवाब दिया था- “ऐसा लगता है आप जजों से भी ज्यादा जानते हैं।”

‘सबरीमला पर निर्णय के कारण ही मामले को सुन रहे हैं’: SC ने मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर कहा

कल (अप्रैल 16, 2019) सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश संबंधी एक याचिका को स्वीकार किया। इसके बाद इस मामले पर जस्टिस एस ए बोबडे और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।

पुणे के एक मुस्लिम दंपति ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर करते हुए न्याय व्यवस्था से गुहार लगाई है कि भारत की मस्जिदों में औरतों के प्रवेश पर रोक को अवैध और असंवैधानिक घोषित किया जाए। याचिका में यासमीन जुबेर अहमद पीरजादे और जुबेर अहमद पीरजादे ने दलील दी है कि कुरान और हदीस में ऐसी किसी बात का उल्लेख नहीं है जो मस्जिद में प्रवेश के लिए लिंगभेद को जरूरी बताए। इसके अलावा संविधान में प्राप्त अधिकारों की बात रखते हुए दंपति ने अपनी याचिका में अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का हवाला दिया और मस्जिद में महिलाओं को प्रवेश न देने को महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

मस्जिद में महिलाएँ Vs मर्द: एक साथ खड़े होने का समय अब नहीं तो कब?

दंपति ने याचिका में इस बात का भी जिक्र किया है कि देश में बहुत सी औरतें इस भेदभाव से पीड़ित हैं लेकिन वो कोर्ट तक अपनी आवाज़ पहुँचाने की हालत में नहीं हैं। ध्यान रहे कि सऊदी अरब, यूएई, मिस्र, अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर की मस्जिदों में महिलाओं को जाने की अनुमति है। याचिका में सबरीमला विवाद का भी हवाला दिया गया है, जिसके मद्देनजर शीर्ष अदालत ने महिलाओं के हक में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी भी धार्मिक स्थल में महिलाओं को पूजा-अर्चना के अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता।

दंपति की याचिका में कहा गया है कि जमात-ए-इस्लामी और मुजाहिद वर्ग के लोग महिलाओं को मस्जिदों में नमाज पढ़ने की अनुमति देते हैं जबकि सुन्नी समुदाय में महिलाओं के मस्जिद में जाने पर प्रतिबंध है। हालाँकि जिन मस्जिदों में महिलाओं को जाने दिया जाता है वहाँ पर उनके प्रवेश द्वार से लेकर उनके नमाज पढ़ने वाले स्थान को अलग रखा जाता है। जबकि मजहब वालों के सबसे पाक स्थल मक्का में इस तरह का भेदभाव नहीं किया जाता है। काबा में महिलाएँ और पुरूष दोनों एक साथ बैठकर नमाज़ अदा करते हैं।

इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं के वकील के जवाबों से उच्चतम न्यायालय असंतुष्ट दिखाई दिया। पीठ कहा कि सर्वोच्च न्यायालय केरल के सबरीमला मंदिर पर अपने फैसले के कारण मामले की सुनवाई के लिए तैयार है। पीठ का कहना है कि इस मामले को सुनने का एकमात्र कारण, केरल के सबरीमाला मंदिर पर उनका फैसला है।

गौरतलब है कि पुणे के मुस्लिम दंपत्ति ने याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि विधानमंडल आम महिलाओं/मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और उनके समानता के अधिकार सुनिश्चित करने में विफल रहा है, विशेष रूप से तब जब बात महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश को लेकर हो या फिर उनके बुर्के पहनने को लेकर हो।

VIDEO: ‘झाड़ू उठाओ और सेन्ट्रल फ़ोर्स को मार भगाओ’- तृणमूल विधायक का फरमान

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल की एक विधायक ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है। चकदाहा की विधायक रत्ना ने तृणमूल कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि सेन्ट्रल फ़ोर्स (संभवतः CRPF) को खदेड़ने का समय आ गया है। रत्ना घोष ने पार्टी कैडर को संबोधित करते हुए ऐसे शब्दों का प्रयोग किया। एक विधायक द्वारा इस तरह खुलेआम हिंसा भड़काने की बात करने पर भाजपा समेत अन्य दलों ने निशाना साधा है। नीचे दिए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कैसे विधायक कार्यकर्ताओं को हिंसक बनने को कह रही हैं।

नदिया ज़िले के सिमुराही की एक भरी सभा में बंद दरवाज़ों के बीच कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए तृणमूल विधायक ने कहा कि अगर आप कोई युद्ध जीतना चाहते हैं तो इसका कुछ भी अच्छा या बुरा तरीका नहीं होता। विधायक ने कहा कि इसके लिए अलोकतांत्रिक या कोई भी ऐसा तरीका अपनाया जा सकता है। विधायक ने ‘किसी भी माध्यम का प्रयोग करते हुए’ इस ‘युद्ध’ को जीतने की बात कही।

विधायक ने हिंसा भड़काने की बात करते हुए आगे कहा:

“मैंने 2016 के विधानसभा चुनाव में देखा था कि कैसे ये अर्धसैनिक बलों के जवान हमरे लड़कों की पिटाई करते हैं। उस समय बहुत ख़ूनख़राबा हुआ था। इस समय स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है। मैं एक-एक कर सभी बूथों पर जाऊँगी और हम लोग केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों से नहीं डरेंगे। अगर केंद्रीय सुरक्षा बल ज्यादा सक्रिय होते हैं तो मैं महिला मोर्चा के सदस्यों से निवेदन करूँगी कि वो सभी झाड़ू उठाएँ और उन्हें अपने क्षेत्र से खदेड़ डालें।”

इस विवादित बयान के बाद अभी तक पार्टी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक अन्य तृणमूल नेता अनुब्रता मंडल ने भी केंद्रीय बलों को ‘नहीं छोड़ने’ की बात कही है। एक रैली को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा:

“आपलोगों को डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान तो आएँगे ही। इसके लिए कोई चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर वो कुछ ग़लत करें तो उन्हें छोड़ना नहीं है। चाहे वहाँ जो भी हो, आपलोग पहले पहुँचिए और वोट कीजिए।”

बंगलादेशी अभिनेताओं को चुनाव प्रचार करने के लिए बुलाने से लेकर केंद्रीय बलों के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने तक, तृणमूल और उसके नेता लगातार विवादों में हैं। पश्चिम बंगाल में चुनावों में हिंसा होती इस बार सुरक्षा के ख़ास इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में, देखना यह है कि इन विधायकों पर पार्टी व चुनाव आयोग द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है।

Uber ड्राइवर आफ़ताब ने शिवाजी को दी माँ की गाली, यात्री के मना करने पर बौखलाया

मुंबई में एक उबर ड्राइवर ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर अपशब्द कहे। मराठा साम्राज्य के अधिपति रहे शिवाजी के नाम पर थिएटर को देखते ही ड्राइवर आफ़ताब गुस्से से लाल हो गया और उसने शिवाजी को माँ बहन की गालियाँ देनी शुरू कर दीं। बता दें कि मुंबई स्थित ‘शिवाजी मंदिर’ थिएटर मुंबई के दादर में स्थित है। मई 1965 में मुंबई के पहले क्लोज्ड ऑडिटोरियम के रूप में इसका उद्घाटन हुआ था। यहीं से गुज़रते समय ड्राइवर अपना आपा खो बैठा और उसने गालियाँ बकनी शुरू कर दी।

आफ़ताब ने गुस्से में कहा,“जहाँ देखो वहाँ शिवाजी…और ये लोग तो पूजा भी करते हैं उसकी..!” बता दें कि मुंबई की कई प्रसिद्ध इमारतें व लैंडमार्क शिवाजी के नाम पर रखी गई हैं। मुंबई का इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन भी शिवाजी के नाम पर ही है। ट्विटर पर उबर ड्राइवर के बारे में ये जानकारी समीर ने दी। समीर ने जब ड्राइवर से अपशब्द नहीं बोलने को कहा तो वो और भी गुस्सा हो गया और बौखला गया।

आफताब का कहना था कि किसी को भी शिवाजी की पूजा नहीं करनी चाहिए। उसने बीच यात्रा में समीर को गाड़ी से उतर जाने को भी कहा। उसने समीर पर एहसान जताते हुआ कहा कि इतने ट्रैफिक के बावजूद वो उन्हें लेने आ गया यही बहुत है। जैसे-तैसे उसने समीर को उनके गंतव्य तक तो छोड़ दिया लेकिन उसने फिर उनका फोन छीन कर ख़ुद को 5 रेटिंग देने की कोशिश की। जब उन्होंने उबर से इस बात की शिकायत की तो उबर ने रुपए वापस कर के कहा कि उक्त ड्राइवर के विरुद्ध एक्शन ले लिया गया है।

समीर ने इस घटना का विवरण देते हुए कहा कि वो ये सब इसीलिए बता रहे हैं ताकि किसी भविष्य में अन्य यात्री के साथ ऐसी घटना न हो। उनका मानना है कि अल्पसंख्यकों को भी हिन्दू भावनाओं व परम्पराओं का सम्मान करते हुए इन सबके ख़िलाफ़ अपशब्द नहीं कहने चाहिए। उन्होंने मीडिया पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मीडिया नैरेटिव बनाता है कि हिन्दू भीड़ मुस्लिमों को मार रही है। इसके बाद कई अन्य यूजर्स ने भी अपनी बातें रखी। एक ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक ओला ड्राइवर ने उससे भी फोन छीनकर ख़ुद को 5 स्टार रेटिंग दे दी थी।

द्रमुक प्रत्याशी से ₹11.5 करोड़ बरामद होने पर वेल्लोर संसदीय क्षेत्र में चुनाव रद्द

मतदान के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को वेल्लोर में होने वाले चुनाव को निर्वाचन आयोग ने रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि इस महीने डीएमके के एक उम्मीदवार के कार्यालय से लगभग ₹11.5 करोड़ बरामद हुए थे जिसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को अनुशंसा भेजी थी। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति जारी करते हैं, इसलिए चुनाव रद्द करना भी उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।

निर्वाचन आयोग ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि उनकी सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति ने वेल्लोर में चुनाव रद्द करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। मतदाताओं को लुभाने के लिहाज से पैसों के दुरुपयोग के आरोप में किसी संसदीय क्षेत्र में चुनाव रद्द होने का यह पहला मामला है।

कुछ दिन पहले डीएमके प्रत्याशी के कार्यालय से भारी मात्रा में नकद राशि बरामद की गई थी। जिसके बाद वहाँ की जिला पुलिस ने डीएमके उम्मीदवार कातिर आनंद समेत दो अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया था। यह केस 10 अप्रैल को आयकर विभाग की एक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था।

कातिर पर जनप्रतिनिधि कानून के तहत इस मामले को दर्ज किया गया है। आनंद पर आरोप है कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी। साथ ही श्रीनिवासन और दामोदरन पर रिश्वत का आरोप है। आनंद पार्टी के वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन के बेटे हैं। 30 मार्च को आयकर विभाग के अफसरों ने दुरई मुरुगन के घर पर चुनाव में अवैध पैसों के इस्तेमाल की शिकायत पर छापेमारी की थी जिसमें उन्हें ₹10.50 लाख बरामद किए थे। वहीं, दो दिनों बाद दावा किया गया कि एक डीएमके नेता के ही गोदाम से ₹11.53 करोड़ बरामद किए गए थे। आनंद ने छापे की कार्रवाई को रुकवाने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली।

MHA ने बांग्लादेशी फिरदौस का वीसा किया रद्द, ममता ने प्रचार के लिए बुलाया दूसरा अभिनेता

गृह मंत्रालय ने बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस को दिया गया बिजनेस वीसा रद्द कर दिया है। इसके साथ ही उसे भारत छोड़ने का नोटिस भी थमा दिया गया है। फिरदौस द्वारा वीसा नियमों के उल्लंघन के बाबत गृह मंत्रालय ने इमीग्रेशन ब्यूरो से रिपोर्ट माँगी थी। फिरदौस तृणमूल के लिए पश्चिम बंगाल में प्रचार कर रहा था। नोटिस मिलने के साथ ही उसे अब तुरंत बांग्लादेश वापस लौटना होगा। वो बिजनेस वीसा पर भारत आया था। फिरदौस को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है। फिरदौस नार्थ दिनाजपुर के इस्लामपुर में रायगंज से तृणमूल लोकसभा प्रत्याशी कन्हैया लाल अग्रवाल के लिए चुनाव प्रचार कर रहा था। उसके साथ बांग्लादेशी फ़िल्म इंडस्ट्री के दो अन्य लोग अंकुश हाज़रा और पायल सरकार भी मौजूद थे।

एक अधिकारी ने इस इस बारे में विशेष जानकारी देते हुए बताया, “मीडिया रिपोर्ट के आधार पर बांग्लादेशी अभिनेता से पूछा गया कि उसने चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया है या नहीं? जवाब में फिरदौस ने बताया कि वो यहाँ फ़िल्म शूटिंग के लिए आया था और उसने लोकसभा चुनाव में प्रचार भी किया है। एक विदेशी नागरिक के तौर पर उसका यहाँ चुनाव प्रचार करना सही नहीं था। अतः उसे वापस जाने को कहा गया है। अब वो चुनाव ख़त्म होने के बाद ही यहाँ शूटिंग कर पाएगा।” इससे पहले चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा था कि आचार संहिता में किसी विदेशी नागरिक द्वारा चुनाव प्रचार करने को लेकर कुछ नहीं लिखा गया है।

भाजपा ने फिरदौस के चुनाव प्रचार करने को लेकर चुनाव आयोग को शिकायत की थी। अभिनेता को गिरफ़्तार करने की माँग भी की। इसके बाद भारत में बांग्लादेश उच्चायोग ने भी फिरदौस को वापस जाने को कहा। फिरदौस द्वारा तृणमूल उम्मीदवार के पक्ष में किए गए रोड शो का वीडियो भी वायरल हो गया। भाजपा नेता प्रताप बनर्जी ने कहा कि संसदीय क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोटों को लुभाने के लिए ही बांग्लादेशी कलाकार को यहाँ चुनाव प्रचार करने के लिए बुलाया गया था, जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है। तृणमूल ने जवाब में 1971 मुक्ति संग्राम का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश की आज़ादी में भारत का अहम योगदान रहा है, अतः ये ग़लत नहीं है।

उधर अभी फिरदौस को लेकर विवाद थमा भी नहीं था तभी एक अन्य बांग्लादेशी अभिनेता के तृणमूल के लिए चुनाव प्रचार करने की बात सामने आई है। बांग्लादेशी अभिनेता गाज़ी अब्दुन नूर द्वारा दमदम से तृणमूल उम्मीदवार सौगत के लिए प्रचार करते हुए देखा गया। गाज़ी के साथ पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे तृणमूल नेता मदन मित्रा भी मौजूद थे। भाजपा महासचिव राहुल सिन्हा ने कहा कि आज बांग्लादेशी अभिनेता चुनाव प्रचार कर रहे हैं, कल को हो सकता है कि ममता बनर्जी पाकिस्तान से भी अभिनेताओं को अपने पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए बुलाए।

कॉन्ग्रेस की राय भी इस मामले में भाजपा से मिलती जुलती है। वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने बांग्लादेशी अभिनेताओं के साथ-साथ उन उम्मीदवारों को भी गिरफ़्तार करने की माँग की, जिनके पक्ष में वे प्रचार कर रहे थे। फिरदौस 4 बार अवॉर्ड जीत चुका है, वहीं गाज़ी की शूटिंग के लिए बंगाल आया हुआ है।

मेहुल चौकसी की कम्पनी को बेचा जाएगा, भगोड़े ने गिनाई अपनी बीमारियाँ

आर्थिक भगोड़े मेहुल चोकसी की बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध आभूषण रिटेल कम्पनी गीतांजलि जेम्स को बेच दिया जाएगा। चोकसी की कम्पनी लिक्विडेशन की तरफ बढ़ रही है। बता दें कि कम्पनी को क़र्ज़ देने वाले अधिकतर बैंकों ने समाधान के लिए उसे 180 दिनों का समय दिया था। अब बैंकों ने उस बढ़ाने से साफ़ इनकार कर दिया है। गीतांजलि जेम्स को क़र्ज़ देने वाले बैंकों ने हाल ही में एक बैठक की। इस बैठक में 54.14% वोटिंग से निर्णय लिया गया कि 180 दिनों की समय सीमा (समाधान प्रक्रिया की अवधि) को नहीं बढ़ाया जाएगा। कम्पनी के रिजॉल्यूशन प्रफेशनल विजय कुमार गर्ग ने स्टॉक एक्सचेंजों को मंगलवार (अप्रैल 16, 2019) को इस बात की जानकारी दी।

विजय गर्ग ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा, “सीओसी ने लोन रिजॉल्यूशन के लिए समयसीमा बढ़ाने से मना कर दिया है, इसलिए अब कंपनी को लेक्विडेट (बेच) कर दिया जाएगा।” बता दें कि कम्पनी को मिली 180 दिनों की ‘Corporate Insolvency Resolution Process’ की समयसीमा 6 अप्रैल को ही ख़त्म हो गई थी। अक्टूबर 2018 में नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई ब्रांच में ICICI बैंक ने इस कम्पनी के ख़िलाफ़ याचिका दाखिल की थी। ₹890 करोड़ के ऋण को गीतांजलि ने नहीं चुकाया था, जिसके बाद बैंक को ये क़दम उठाना पड़ा।

चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी के ख़िलाफ़ $200 करोड़ से भी अधिक की धोखाधड़ी का मामला चल रहा है। सरकारी एजेंसियाँ मामले की जाँच कर रही है। मामला पंजाब नेशनल बैंक से जुड़ा है। जाँच शुरू होने के बाद ये पहली इन्सॉल्वेंसी पेटिशन थी। हालाँकि, गीतांजलि पर और भी कई क़र्ज़ हैं। कम्पनी पर बैंकों का ₹12,558 करोड़ अभी भी बकाया है। अगर सीओसी की बात करें तो उसमे आईसीआईसीआई बैंक के पास 7.9% वोटिंग शेयर्स हैं, जबकि कंपनी को 5,518 करोड़ का क़र्ज़ देने वाले पीएनबी के पास 43.94% वोटिंग शेयर है।

उधर अधिकारियों ने कहा है कि चोकसी के खिलाफ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी है और भारत ऐंटिगुआ एवं बारबुडा के अधिकारियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहा है। अभी क़ानूनी प्रक्रिया जारी है और जाँच एजेंसियाँ उस देश के अधिकारियों से अगली सूचना मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही आगे का कोई निर्णय लिया जाएगा। उधर कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर मेहुल चोकसी ने कहा:

“मैं भारत की जाँच एजेंसियों की सख्‍ती का खामियाज़ा भुगत रहा हूँ। मेरे ख़िलाफ़ एक भी सबूत नहीं जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद मैं अपने तीन दशक के व्यापार का नुकसान झेलने को विवश हूँ। मैं लम्बे समय से बीमार चल रहा हूँ। मुझे दिल की बीमारी तो है ही, पैरों में भी दर्द है। मेरे दिमाग में भी ख़ून का थक्का जमा हुआ है। मुख्‍य दोषी अब भी सुरक्षित हैं। स्‍कैम के मुख्‍य दोषियों से एजेंसियाँ किसी भी तरह की पूछताछ नहीं कर रही हैं।”

चोकसी ने मुंबई अदालत में दाखिल याचिका में ये बातें कहीं। नीरव मोदी अभी लंदन के जेल में बंद है और उसके प्रत्यर्पण के लिए भी भारतीय एजेंसियाँ प्रयास कर रही हैं। नीरव मोदी के ख़िलाफ़ सुनवाई के दौरान ब्रिटिश जज ने कहा कि इस बात के पर्याप्त आधार हैं कि आरोपित को ज़मानत दी गई तो वह आत्मसमर्पण नहीं करने वाला है।