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किसी माँ ने वो औलाद नहीं जना, जो रोहिंग्याओं को निकाल कर दिखा दे: वायरल वीडियो का Fact Check

चुनावी पारा इन दिनों चरम पर है। हर पार्टी और उसके कार्यकर्ता अपनी नीतियों और विचारधाराओं को परोसकर जनमत निर्माण करने के लिए सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में बंगाल के एक मौलवी शब्बीर अली का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जिस भाषा और संदर्भ का इस्तेमाल किया गया है, वो घटिया तो है ही, देशद्रोही भी है। लेकिन क्या यह वीडियो सही है या इसे एडिट कर वायरल बनाने की चाल है? आइए करते हैं पड़ताल।

पहले वीडियो देखिए

इस वीडियो में कोलकाता की एक भीड़ को मौलाना शब्बीर अली संबोधित कर रहे हैं। बात रोहिंग्या की हो रही है। धमकी केंद्र सरकार को दी जा रही है। धमकी भी ऐसी, जिसके हर एक शब्द से देशद्रोह टपक रहा है। वीडियो में मौलाना भीड़ में शामिल लोगों को मजहब की ताकत से वाकिफ़ कराते दिख रहे हैं – पूरी ऊँची आवाज के साथ।

मजहबी भाई-भाई और धमकी

मौलाना शब्बीर के शब्द सुनिए, “इंशाअल्लाह…इंशाअल्लाह… सुनो…सुनो हमारा ये मेमोरेंडम है दिल्ली की सरकार से कि ये रोहिंग्या, ये हमारे भाई हैं। ये हमारे समुदाय के हैं। जो इनका कुरान, वो मेरा कुरान। जो इनके रसूल, वो मेरे रसूल। जो इनका खुदा, वो मेरे खुदा। ये मत समझना कि हिंदुस्तान के मजहबियों से रोहिंग्या अलग है। दुनिया में कहीं भी हों, हम सब आपस में भाई हैं। इस्लाम के सब लोग आपस में भाई हैं।”

अपने भड़काऊ भाषण को आगे बढ़ाते हुए शब्बीर ने खुलेआम इस वीडियो में सरकार को धमकी दी है। शब्बीर ने इस वीडियो में बंगाल में रह रहे रोहिंग्याओं के बारे में कहा, “हम करबला वाले हैं, हम हुसैनी हैं, हम 72 भी होते हैं तो लाखों का जनाजा निकाल देते हैं। और रोहिंग्या को लावारिस मत समझना कि उन्हें बंगाल से निकाल दोगे। सुनो… ये असम नहीं, ये गुजरात नहीं, ये यूपी नहीं, ये मुजफ्फरनगर नहीं… ये बंगाल है, बंगाल। और बंगाल में अभी तक किसी माँ ने वो औलाद नहीं जना है जो रोहिंग्याओं को निकाल कर दिखा दे।”

फै़क्ट चेक

ऐसे समय में जब चुनाव आचार संहिता लागू है, इस तरह का वीडियो मन में शंका पैदा करता है। शंका इसलिए क्योंकि चुनाव के वक्त इतनी भीड़ का जुटना बिना किसी नेता के संभव नहीं। कुछ की-वर्ड्स गूगल पर डाले, न्यूज और वीडियो सेक्शन में उनको खंगाले और नतीजा सामने है। यह वीडियो सितंबर 2017 का है। खबरों में यह आया 19-20 सितंबर 2017 को। ऊपर जो यूट्यूब का लिंक लगा है, वो 19 सितंबर 2017 का है।

इंडिया TV ने भी इस ख़बर को पब्लिश किया था

वीडियो असली, वायरल कराने की मंशा घातक

वीडियो असली है, एडिटेड नहीं – यह प्रमाणित हो चुका है। लेकिन इतने भड़काऊ वीडियो का तकरीबन पौने दो साल बाद अचानक से वायरल होना बहुत कुछ कहता है। हो सकता है यह कुछ शातिर नेताओं की चुनावी रणनीतियों का हिस्सा हो। जिन भड़काऊ बयानों पर एक्शन लिया जाना चाहिए, उसे चुनाव के नज़दीक होने पर प्रासंगिक बनाकर वायरल किया जा रहा है। ये जितना शर्मासार करने वाला है, उससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक है। मंच पर दिए भाषणों का प्रभाव प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से श्रोताओं पर पड़ता ही है। और अगर वो वायरल हो गया तब तो जहाँ तक उसकी पहुँच है, वो हर एक सुनने-देखने वाले को प्रभावित करेगा ही। वीडियो के मौलाना शब्बीर की मानसिकता खतरनाक है। साथ ही इसे वायरल करने-करवाने वाले की भी। चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए।

यदि बंगाल में या कहीं और ‘जनमत निर्माण’ का निर्धारण मौलाना शब्बीर जैसे लोगों के भाषणों द्वारा किया जाता है, तो हम सोच सकते हैं कि देश में नागरिकों के भीतर लोकतंत्र की सोच को किस प्रकार से बरगलाया जा रहा है। देखा जाए तो भीड़ में मौजूद लोग (मौलाना के समर्थक) और इस वीडियो को शेयर करने वाले लोग ही देश के नागरिक हैं। तो फिर हमें विचार करने की जरूरत है कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश में किस माहौल का निर्माण कर रहे हैं? जिन अराजक तत्वों से देश की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, उन्हें हम धर्म का ठेकेदार बनाकर परिभाषित भी कर रहे हैं और मानक भी मान रहे हैं!!

बता दें कि शब्बीर के इस धमकी भरे भाषण से पहले कई आतंकवादी संगठन भी रोहिंग्याओं के मुद्दे को आधार बनाकर सरकार को ‘जिहाद’ की धमकी दे रहे थे। उन धमकियों में आतंकी संगठनों ने बोला था कि वो मोदी सरकार और भारत से बदला लेने के लिए 1 लाख जिहादियों की फौज़ तैयार कर रहे हैं।

12वीं के बाद BEST: क्या पढ़ें, कहाँ पढ़ें – सरकार ने जारी कर दिया है ऑथेंटिक डाटा, एडमिशन से पहले ध्यान दें

12वीं की परीक्षा देने के बाद हर छात्र चाहता है कि वो सबसे बढ़िया कॉलेज में दाखिला ले। ऐसे में अगर बच्चे के नंबर उसे टॉप कॉलेजों में एडमिशन लेने का विकल्प देते हों तो फिर कहना ही क्या… चूँकि जल्द ही बाहरवीं के परिणाम आ जाएँगे और उसके बाद एडमिशन के लिए दौड़-भाग अभिभावकों के लिए आम हो जाएगी। ऐसे में जरूरी है कि हमें बेस्ट कॉलेज़ों के बारे में मालूम हो, ताकि इधर-उधर दिमाग खपाने की जगह हम अपनी प्राथमिकता को समय दे पाएँ।

सोमवार (अप्रैल 8, 2019) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने NIRF 2019 रैकिंग जारी की। इसमें अलग-अलग संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की रैंकिंग दी गई है। एक तरफ़ जहाँ IIT बंगलुरू को पछाड़ते हुए IIT मद्रास ने ओवरऑल सर्वश्रेष्ठ होने का ख़िताब जीता है, वहीं विश्वविद्यालयों की सूची में जेएनयू को NIRF की रैंकिंग के अनुसार देश का दूसरा सबसे बेहतरीन विश्वविद्यालय बताया गया है। विश्वविद्यालय कैटिगरी में पहले स्थान पर बंगलुरू स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस है। इसी कैटिगरी में जामिया मिलिया को 12वाँ स्थान मिला और दिल्ली विश्वविद्यालय को 13वाँ।

इस दौरान राष्ट्रपति ने इनोवेशन के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले संस्थानों को अटल रैंकिंग ऑफ इंस्टीट्यूशन ऑफ इनोवेशन अचीवमेंट का अवार्ड भी दिया। इसमें सरकारी वर्ग से IIT मद्रास के अलावा निजी वर्ग में वेल्लूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी को पहला रैंक प्राप्त हुआ। वहीं जामिया हमदर्द को फार्मेसी में प्रथम स्थान मिला है।

NIRF के अनुसार टॉप 10 कॉलेजों की लिस्ट में इस वर्ष 6 कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी के ही हैं। पिछले साल इस लिस्ट में डीयू के सिर्फ 5 कॉलेजों का नाम शामिल था।

इस लिस्ट में मिरांडा हाउस लगातार तीसरी बार पहले नंबर है। दूसरे नंबर पर हिंदू कॉलेज है। जबकि यहाँ पहले स्टीफन कॉलेज हुआ करता था, लेकिन अब स्टीफन चौथे नंबर पर पहुँच गया है। 5वें पर लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन को स्थान मिला है। वहीं 7वें पायदान पर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और 9वें पर हंसराज कॉलेज है।

इतना ही नहीं देश के पहले 100 कॉलेजों में भी दिल्ली विश्वविद्यालय के 22 और कॉलेजों ने स्थान प्राप्त किया है। बता दें कि इस रैंकिंग में कुल 3,127 संस्थानों ने हिस्सा लिया था।

इस रैंकिंग को जारी करने के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने कहा, “रैंकिंग से छात्रों और अभिभावकों को सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान चुनने में मदद मिलेगी। वहीं, रिसर्च, इनोवेशन, पेटेंट आधार होने के कारण अब संस्थान समाज व देश के विकास के लिए रिसर्च पर जोर देंगे। इस रैंकिंग से अब शिक्षण संस्थानों में बेहतर प्रतिस्पर्धा शुरू होगी, जो उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शुमार करेगी।”

पूरी रिपोर्ट 84 पेज की है। इसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं और अपने पसंद के विषय व संस्थान का चयन कर सकते हैं।

तनवीर हसन को हराने के लिए एकजुट हुए ‘निष्पक्ष वामपंथी’ जावेद, स्वरा और शबाना

लोकसभा चुनाव 2019 में जिन संसदीय क्षेत्रों को लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है उनमें से एक है बिहार का बेगूसराय। इस क्षेत्र के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि यहाँ पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के ‘पोस्टर बॉय’ कहे जा रहे कन्हैया कुमार और केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद गिरिराज सिंह के बीच सीधी टक्कर है। लेकिन यदि पिछले चुनाव पर नज़र डालें और वहाँ के जातीय समीकरण को देखें तो दरअसल मुक़ाबला गिरिराज और तनवीर के बीच है। बता दें कि यहाँ से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार तनवीर हसन भी चुनावी मैदान में हैं। तनवीर हसन यहाँ काफ़ी दिनों से सक्रिय रहे हैं।

पिछली बार उनके और भाजपा सांसद भोला सिंह के बीच काँटे का मुक़ाबला हुआ था। मगर मोदी लहर और अपनी लोकप्रियता एवं अनुभव की वजह से तनवीर भाजपा उम्मीदवार भोला सिंह तनवीर को 5.41% मतों से हराने में सफल रहे थे। इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी भोला सिंह को 4,28,227 वोट मिले थे तो वहीं तनवीर हसन को 3,69,892 वोट हासिल हुआ था। दोनों प्रत्याशियों को मिले मतों के बीच का अंतर मात्र 58,335 था। सीपीआई प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह को 1,92,639 वोट पड़े थे।

कन्हैया कुमार की लोगों से अपील

अब बात करते हैं कन्हैया कुमार की, जिन्होंने पहली बार सीपीआई प्रत्याशी के तौर पर बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। कन्हैया कुमार आज मंगलवार (अप्रैल 9, 2019) को बेगूसराय लोकसभा सीट से अपना नामांकन का पर्चा भरेंगे। इस लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को मतदान होना है। कन्हैया ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लोगों से नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपील की है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा,

“साथियों, कल 9 अप्रैल, 2019 को मुझे बेगूसराय में लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन करना है। यह चुनाव मैं अकेले नहीं लड़ रहा, बल्कि वे सभी मेरे साथ उम्मीदवार के तौर पर खड़े हैं, जो समाज की सबसे पिछली कतार में खड़े लोगों के अधिकारों के साथ संविधान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ताकत कितनी भी बड़ी हो, एकजुटता के उस जज़्बे के सामने छोटी पड़ ही जाती है जो आपकी हर बात में झलकता है। हमेशा की तरह इस बार भी मुझे पक्का यकीन है कि कल मुझे आपका प्यार और समर्थन ज़रूर मिलेगा। उम्मीद है जो साथी बेगूसराय में हैं वे समय निकालकर इस मौके पर मेरे साथ ज़रूर मौजूद रहेंगे।”

बॉलीवुड हस्तियाँ कर रही कन्हैया का समर्थन

बता दें कि कन्हैया की तरफ से चुनाव प्रचार करने के लिए जाने-माने गीतकार जावेद अख्तर, उनकी पत्नी शबाना आजमी, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल बेगूसराय पहुँचेंगे। इसके साथ ही चुनाव प्रचार में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत बड़ी नामचीन हस्तियों के भी आने की उम्मीद है। अब यहाँ पर गौर करने वाली बात ये है कि शबाना आजमी या फिर स्वरा भास्कर जैसे लोग क्या सोचकर कन्हैया कुमार का समर्थन करने के लिए बेगूसराय आ रही हैं? क्या इन हवा-हवाई सेलेब्स को शायद बिहार के राजनीतिक समीकरण का कोई अंदाज़ा नहीं है?

बिहार की राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं कि यहाँ लालू यादव जैसा वरिष्ठ और अनुभवी नेता भी संसदीय चुनाव हार सकता है, तो इन हवा-हवाई सेलेब्स की बात पर यहाँ की जनता शायद ही ध्यान दे। शबाना आज़मी और जावेद अख़्तर का न तो यहाँ जनाधार है और न ही उनका ऐसा कोई प्रभाव है कि उन्हें सुनने के लिए भीड़ जुटे।

आपको ऐसा लग रहा होगा कि आप कन्हैया का समर्थन करके भाजपा को हराने की कोशिश कर रहीं है, मगर सोचने वाली बात तो ये है कि ये सेलेब्स कन्हैया को जिताने नहीं बल्कि तनवीर हसन को हराने जा रहे हैं। सम्प्रदाय विशेष के हितों की रक्षा का दावा करने वाले सेलेब्स के इस ब्रिगेड विशेष से पूछा जाना चाहिए कि क्या तनवीर हसन को हराना (इनकी घटिया परिभाषा के हिसाब से) एक अल्पसंख्यक व्यक्ति के हितों पर चोट पहुँचाने वाला कार्य नहीं है? क्या ये सेलेब्स अपनी ही परिभाषा को गलत साबित करने बेगूसराय जा रहे हैं?

बिहार राजनीति में जातिगत समीकरण की महत्त्वपूर्ण भूमिका

दरअसल, बेगूसराय की कुल जनसंख्या में भूमिहार सबसे ज़्यादा (19 प्रतिशत) हैं। उनके बाद मुस्लिम 15 प्रतिशत और यादव 12 प्रतिशत के आसपास हैं। अनुसूचित जाति के लोग भी अच्छी-ख़ासी संख्या में हैं। हाँ, अगर कन्हैया कुमार महागठबंधन के उम्मीदवार होते तो वो लड़ाई में आ भी सकते थे लेकिन अब इसकी संभावना काफी कम दिखाई दे रही है।

वामपंथ के खिलाफ बेगूसराय का क्षेत्रीय इतिहास

इस लोकसभा क्षेत्र में पिछले कुछ सालों से वामपंथी दलों के लिए स्थितियाँ कमजोर होती गई हैं। 2009 में जदयू के उम्मीदवार ने सीपीआई के दिग्गज नेता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह को हरा दिया, तो वहीं, 2014 में भाजपा के भोला सिंह ने सीपीआई प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह को कड़ी शिकस्त दी थी।

कन्हैया की एक और मुश्किल

इसके अलावा कन्हैया के सामने एक और मुश्किल उनकी छवि है। महागठबंधन का साथ न मिलने और बेगूसराय के क्षेत्रीय इतिहास के अलावा उनकी अपनी छवि भी इस चुनावी मुक़ाबले में उनका खेल बिगाड़ सकती है। बेगूसराय के लोग जेएनयू में लगे नारों से अनजान नहीं हैं और शायद यही कारण है कि उनके अपने ही गाँव में उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा। लोग उनकी विचारधारा व सेना के बारे में दिए गए उनके बयानों के बारे में उनसे सवाल पूछ रहे हैं, जिनका कन्हैया के पास कोई उत्तर नहीं है।

वामपंथ की राजनीतिक मौत

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में वामपंथी दलों को एक के बाद एक चुनावी हारों का सामना करना पड़ा है। केरल जैसे एकाध राज्य को छोड़ दें तो वामपंथ एक ढहता क़िला है, जिसके पूरी तरह गिरने में अब ज़्यादा समय नहीं है। ऐसे में वामपंथ के एक मज़बूत क़िले जेएनयू से निकले कन्हैया कुमार वाम दलों के लिए भी एक छोटी सी उम्मीद लेकर आए हैं। ऐसे में इन नामचीन हस्तियों का कन्हैया कुमार का समर्थन करना यह दिखाता है कि ख़ुद को राजनीतिक रूप से निष्पक्ष कहने वाले ये सेलेब्स असल में निष्पक्ष नहीं हैं बल्कि खुलेआम नेता, दल या विचारधारा विशेष का समर्थन और प्रचार करते हैं।

अगर ये सेलेब्स कल को सरकार के ख़िलाफ़ कोई बयान देते हैं तो क्यों न इनके बयानों को एक दल विशेष के समर्थक के बयान के रूप में आँका जाए? किसी पार्टी, विचारधारा या नेता का खुलेआम समर्थन करना गलत नहीं है, अपितु यही तो लोकतंत्र है। लेकिन, किसी पार्टी का खुले तौर पर प्रचार करना और ख़ुद को राजनीतिक रूप से निष्पक्ष बताना यह दिखाता है कि ये सेलेब्स असल में किसी ख़ास पार्टी के समर्थक नहीं हैं बल्कि मोदी के विरोध में मीडिया जो भी चेहरा पेश करता है, उसके समर्थक हैं। कभी राहुल, कभी केजरीवाल, कभी कन्हैया, अभी ये प्रक्रिया चलती रहेगी।

संकट में कॉन्ग्रेस: ₹511 करोड़ का अवैध लेनदेन, विदेशी बैंकों में 80 कम्पनियों का काले धन – एक ‘बड़ा नेता’ शक के घेरे में

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के क़रीबियों के यहाँ हुई छापेमारी में करोड़ों के अवैध लेनदेन का पता चला है। इसी बीच केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि दिल्ली के तुग़लक़ रोड स्थित एक महत्वपूर्ण और बड़े नेता के घर से 20 करोड़ रुपए नक़द दिल्ली स्थित एक प्रमुख पार्टी के मुख्यालय में भेजा गया। बता दें कि तुग़लक़ रोड में कई वरिष्ठ नेताओं के आवास हैं और एजेंसी के इस ख़ुलासे से बाद चर्चाएँ ज़ोर पकड़ रही हैं कि वो कौन सा नेता था। सीबीडीटी ने देर रात बयान ज़ारी कर जानकारी दी कि भरोसेमंद जानकारियाँ एवं बड़े स्तर पर अवैध धन की सूचना के बाद इनकम टैक्स विभाग ने दिल्ली, भोपाल और इंदौर में छापेमारी की।

इनकम टैक्स विभाग ने कहा कि मध्य प्रदेश में राजनीति और व्यापार से जुड़े कई लोगों के बीच अवैध धन के एक बड़े रैकेट का भी पता चला है। यह एक सुव्यवस्थित रैकेट है, जिसमें कई तरह के बड़े लोग शामिल हैं और इस रैकेट के पास 281 करोड़ रुपए के अवैध धन का पता चला है। इसके अलावा 14.6 करोड़ रुपए नकद भी बरामद किए गए हैं, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके अलावा दिल्ली में छापेमारी के दौरान एक बड़े नेता के क़रीबी के यहाँ से 230 करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन का पता चला है। यहाँ से टैक्स हेवेन कहे जाने वाले देशों में 80 कंपनियों की मौजूदगी के सुबूत भी मिले हैं। दिल्ली के पॉश इलाक़ों में कई बेनामी और अवैध संपत्ति का भी पता लगा है। इनकम टैक्स विभाग चुनाव आयोग के भी संपर्क में है, ताकि दोषियों पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला चलाया जा सके। 242 करोड़ रुपए के फ़र्ज़ी हेरफेर का मामला भी सामने आया है।

वहीं सोमवार (अप्रैल 8, 2019) को भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के घर छापेमारी ज़ारी रही। उनसे इंदौर में दिन भर पूछताछ की गई। भोपाल में कक्कड़ के क़रीबी प्रतीक जोशी और अश्विनी शर्मा के यहाँ से आयकर विभाग पाँच बक्से लेकर रवाना हुई। इन बक्सों में उनके ठिकानों से ज़ब्त कैश और महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकते हैं, जिससे आगे और भी ख़ुलासा होने की उम्मीद है।

आयकर टीम के अधिकारियों के पास नोट गिनने की भी मशीन थी, जिससे ज़ब्त कैश को जल्दी-जल्दी गिना जा सके। एनजीओ और आर्म्स डीलिंग समेत कई धंधों में अच्छा-ख़ासा दखल रखने वाला अश्विन शर्मा कक्कड़ का क़रीबी बताया जा रहा है। उसके पास आठ क़ीमती कारें मिली हैं। कई बैंक खातों और लॉकर्स का पता चला है। फिलहाल उसका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया है और बैंक खातों व लॉकर्स की गहन जाँच ज़ारी है।

रविवार (अप्रैल 7, 2019) को कक्कड़ के इंदौर स्थित घर से 30 लाख रुपए की ज्वेलरी और 2 लाख रुपया कैश मिला था। उनसे रात भर पूछताछ की गई। वहीं उनकी पत्नी को आयकर विभाग आईडीबीआई बैंक लेकर गई, जहाँ बैंक खतों व लॉकर्स के सम्बन्ध में जानकारियाँ हासिल की गईं।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिकायत की है कि राज्य में वर्तमान पुलिस महानिदेशक के रहते लोकसभा के निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को हटाने की माँग करते हुए राज्य के लिए अलग स्पेशल ऑब्जर्वर की नियुक्ति की माँग की। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की जाए। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस मामले का जिक्र करते हुए कॉन्ग्रेस को घेरा।

LET’S KILL THIS LOVE: 24 घंटे में 5 करोड़ 67 लाख व्यूज़ के साथ बना डाला नया YouTube रिकॉर्ड

इंटरनेट पर यूजर्स को कब-क्या पसंद आ जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता है। 2012 में यूट्यूब पर गंगनम स्टाइल गाना जब रिलीज हुआ तो देखते ही देखते वो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस गाने की ऊर्जा और स्टेप्स को लोगों ने अपने डांस में कॉपी करने की ख़ूब कोशिशें की। नतीजन इस गाने ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। अब तक इसे 3 अरब से भी ज्यादा लोगों द्वारा देखा जा चुका है।

बात सिर्फ म्यूजिक वीडियोज़ की करें और यूट्यूब पर उसके रिलीज के अगले 24 घंटे तक में आने वाले व्यूज़ की तो 5 अप्रैल को एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना है। एक साउथ कोरियाई पॉप बैंड ‘BLACKPINK’ ने यह रिकॉर्ड बनाया है। दरअसल, दक्षिण कोरियाई पॉप बैंड ‘ब्लैकपिंक‘ का एक गाना सबसे कम समय में यूट्यूब पर 13 करोड़+ व्यूज़ बटोरने वाला गाना बन चुका है।

LET’S KILL THIS LOVE नाम का यह गाना 3.13 मिनट का है। इस गाने को बनाने के बाद जब इसको यूट्यूब पर 4 अप्रैल को अपलोड किया गया तो यह कुछ ही समय में यह वायरल हो गया। 24 घंटे में इसे 56.7 मिलियन (5 करोड़ 67 लाख) बार देखा गया। जबकि अब तक इस गाने को यूट्यूब पर 13,36,71,227 बार देखा जा चुका है। रिलीज के अगले 24 घंटे तक में आने वाले व्यूज़ के मामले में LET’S KILL THIS LOVE ने एरियाना ग्रैंड के Thank U, Next नामक गाने का रिकॉर्ड तोड़ा।

इस गाने का टाइटल सुनने में थोड़ा सा अजीब है लेकिन बढ़ते व्यूज़ को देखकर लगता है जैसे इस गाने को सुनने वाले इसके दीवाने हो चुके हैं। दक्षिण कोरियाई पॉप बैंड ‘ब्लैकपिंक’ के बारे में आपको बता दें कि ये सिर्फ़ महिलाओं का बैंड है, जिसने साल 2016 में स्क्वायर वन नाम के एल्बम से शुरुआत की थी।

यहाँ बताते चलें कि अभी तक सिर्फ़ इस गाने ने या इससे पहले गंगनम स्टाइल ने ही रिकॉर्ड नहीं बनाया है। ‘सी यू अगेन’ नामक गाने ने भी इंटरनेट पर ख़ूब धमाल मचाया था। 2017 में ‘सी यू अगेन’ गाने ने गंगनम स्टाइल को पछाड़ते हुए अब तक यूट्यूब पर 400 करोड़ से भी ज्यादा व्यूज हासिल कर लिया है। 2015 में अपलोड हुआ विज खलीफ़ा का यह गाना आज भी गंगनम स्टाइल से आगे है।

तेलुगू अभिनेता बालाकृष्णा ने TDP कार्यकर्ता को खदेड़-खदेड़ कर पीटा, देखें Video

तेलुगू सिनेमा के प्रसिद्द अभिनेता नंदमुरी बालाकृष्णा ने अपने ही समर्थक को खदेड़-खदेड़ कर मारा है। बता दें कि बालाकृष्णा अभी आंध्र के हिंदूपुर से विधायक हैं। हिंदूपुर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व करिश्माई अभिनेता एनटीआर के परिवार की पारम्परिक सीट है। यहाँ से एनटीआर, उनके बेटे नंदामुरी हरिकृष्णा और अब नंदामुरी बालाकृष्णा जीत चुके हैं। वीडियो में साफ़-साफ़ देखा जा सकता है कि गुस्साए बालाकृष्णा ने तेलुगूदेशम पार्टी के कार्यकर्ता को खदेड़-खदेड़ कर पिटाई कर रहे हैं। बालाकृष्णा को तेलुगू सिनेमा का ‘सीरियल ऑफेंडर’ भी कहा जाता है क्योंकि वो सिर्फ़ फ़िल्म में ही नहीं बल्कि फ़िल्मों के सेट पर भी वास्तविकता में लोगों को पीट डालते हैं।

तेलुगू फ़िल्मों में गुंडों को उड़-उड़ कर मारने वाले बालाकृष्णा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहा है। विजयनगरम के चीपुरुपल्ली शहर में बीच सड़क पर हज़ारों पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बालाकृष्णा ने एक कार्यकर्ता को कॉलर पकड़ के धर लिया और फिर उसकी पिटाई की। बता दें कि बालाकृष्णा ख़ुद टीडीपी के ही विधायक हैं। उनके पिता एनटीआर द्वारा स्थापित पार्टी अभी आंध्र की सत्ताधारी पार्टी है और एनटीआर के दामाद चंद्रबाबू नायडू पार्टी के अध्यक्ष हैं। अभी हाल ही में आई सुपरहिट फ़िल्म और एनटीआर की बायोपिक में बालाकृष्णा अपने पिता के किरदार में दिखे थे।

बालाकृष्णा की 2017 में आई भारत के प्राचीन इतिहास पर आधारित फ़िल्म ‘गौतमीपुत्र शतकर्णी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 80 करोड़ रुपए बटोरे थे। इस फ़िल्म के हिंदी डब्ड वर्जन को यूट्यूब पर एक करोड़ से भी अधिक लोग देख चुके हैं। ऐसे में, बालाकृष्णा द्वारा इस तरह टपोरियों जैसी हरकत करना उनके फैंस को पसंद नहीं आया। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि बालाकृष्णा भूल गए थे कि ये एक चुनावी रैली है, किसी फ़िल्म के एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग नहीं।

बालाकृष्णा ने टीडीपी कार्यकर्ता का फोन भी छीन कर फेंक दिया। अभी 10 दिन भी नहीं हुए जब उन्होंने एक और व्यक्ति की पिटाई की थी। वो अपनी फ़िल्म के सेट पर अपने सेक्रेटरी की भी पिटाई कर चुके हैं। फ़िल्मों में दमदार डायलॉग के लिए जाने जाने वाले बालाकृष्णा असल ज़िन्दगी में जल्दी अपना आपा खोने के लिए कुख्यात हैं। 2011 में आई एक फिल्म ‘राम राज्यम’ में वो भगवान राम का किरदार भी निभा चुके हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने एक पत्रकार को झापड़ मारा था।

‘कॉन्ग्रेसी नेता सज्जन कुमार है सिख दंगों का सरगना, ज़मानत मिलने पर गवाहों को करेगा आतंकित’

सिख दंगों के मामले में अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई ने उसे 1984 सिख दंगों का सरगना बताया है। बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायलय ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 सिख दंगों के मामले में दोषी करार दिया था। घटना के 34 वर्ष बाद आए अहम फ़ैसले में सज्जन कुमार पर लगे दंगे भड़काने की साजिश रचने और भीड़ को उकसाने के आरोप को अदालत ने सही पाया था। उच्च न्यायालय ने 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को आरोपों से बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए उसे हत्या का अपराध, समूहों के बीच विद्वेष फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का दोषी पाया था।

अब सज्जन कुमार ने हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से निवेदन किया कि सज्जन कुमार को ज़मानत देकर न्याय का मखौल न उड़ाया जाए क्योंकि पटियाला हाउस कोर्ट में उसके ख़िलाफ़ सिख दंगों से जुड़ा एक अन्य मामला भी चल रहा है। तीन महीने से जेल में बंद सज्जन कुमार के बारे में सीबीआई ने कहा कि सिख दंगा एक बर्बर अपराध था और सज्जन कुमार उस समय बड़ा नेता हुआ करता था।

सीबीआई को डर है कि बाहर निकलने पर सज्जन कुमार अपने ख़िलाफ़ चल रहे एक अन्य मुक़दमे को प्रभावित कर सकता है। उस मुक़दमे में भी गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं और अदालत कभी भी उसकी सुनवाई तेज़ करने का आदेश दे सकती है। सज्जन कुमार के वकील ने तर्क दिया कि पहले भी उसे अग्रिम ज़मानत दी जा चुकी है लेकिन उसने कभी इसका दुरूपयोग नहीं किया। ज्ञात हो कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 में 1 और 2 नवंबर की रात दक्षिणी पश्चिमी दिल्ली के राज नगर पार्ट-1 में पाँच सिखों को जिंदा जलाने और राज नगर पार्ट-2 में एक गुरुद्वारे में आग लगाने के मामले में दोषी पाया था।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में सज्जन कुमार के अलावा चार अन्य भी दोषी पाए गए थे और उनके ख़िलाफ़ ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए उम्र कैद के फैसले को उच्च अदालत ने बरकरार रखा था। अदालत ने कहा था कि पुलिस द्वारा सक्रिय रूप से आरोपितों को बचाने की कोशिश की गई। दोषियों में कॉन्ग्रेस से पार्षद रहे बलवान खोखर और कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक महेंदर यादव भी शामिल हैं।

बता दें कि सिख दंगों के दौरान अकेले दिल्ली में 3000 के क़रीब सिखों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। मामले में कई कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम सामने आए थे। इंदिरा गाँधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या करने के बाद भड़की हिंसा में सिखों को चुन-चुन कर ज़िंदा जलाया गया था और उनका घर-बार लूटा गया था। सीबीआई ने सज्जन कुमार के राजनीतिक रसूख का जिक्र करते हुए अदालत को कहा कि वो बाहर निकलते ही गवाहों को आतंकित कर सकता है। 1984 में सज्जन कुमार सांसद था। आउटर दिल्ली लोकसभा से 1980 में जीते सज्जन ने 1991 और 2004 में सांसदी का यह सीट फिर से जीता था।

50% नहीं, केवल 5 बूथों पर करो औचक VVPAT जाँच: सुप्रीम कोर्ट

चुनाव व्यवस्था और ईवीएम में विश्वास बहाली की तरफ एक बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने औचक VVPAT मिलान की संख्या एक से बढ़ाकर पांच कर दी है। यानि अब हर लोकसभा सीट के एक नहीं बल्कि पाँच बूथों पर चुनाव आयोग का उड़न दस्ता छापा मारकर औचक जाँच करेगा कि वहाँ ईवीएम ठीक से काम कर रही है या नहीं। अभी तक यह केवल एक बूथ प्रति लोकसभा क्षेत्र होता था। इसके अलावा अदालत ने इसे आगामी लोकसभा चुनावों से ही लागू करने का भी आदेश केन्द्रीय चुनाव आयोग को दिया है।

विपक्षी नेताओं की याचिका पर हो रही थी सुनवाई

ईवीएम की शुचिता पर कई मौकों पर सवालिया निशान खड़े कर चुके दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल समेत विपक्ष के कई नेताओं ने याचिका दायर की थी, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा था। अन्य याचिकाकर्ताओं में थे तेदेपा (तेलुगु देशम पार्टी) के चंद्रबाबू नायडू, द्रमुक नेता एमके स्टालिन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल नेता डेरेक ओ’ब्रायन।

‘हम वर्तमान प्रणाली में कोई दोष नहीं घोषित कर रहे’

विपक्षी नेताओं के उलट उच्चतम न्यायलय ने ईवीएम सहित चुनाव आयोग की वर्तमान प्रणाली में कोई दोष निकालने या पाने से साफ़ इंकार कर दिया। उसे अपनी जाँच का दायरा बढ़ाने का आदेश देने के बावजूद भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह साफ़ किया कि उसे वर्तमान प्रणाली में कोई खोट नहीं दिखता और यह एक से पाँच की बढ़ोतरी केवल चुनाव प्रणाली में भरोसा बढ़ाने के लिए हो रही है।

विपक्षी नेताओं की माँग लगभग खारिज

याचिका में विपक्षी नेताओं ने माँग की थी हर लोकसभा क्षेत्र के 50% बूथों पर VVPAT ऑडिट किया जाए। चुनाव आयोग ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए इसका विरोध किया था और यह कहा था कि इससे तो मानवीय भूल द्वारा गलत नतीजे आने की सम्भावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा इससे चुनावों के नतीजे आने में भी लगभग एक सप्ताह तक की देर हो सकने का अंदेशा आयोग ने जताया था।

अभी तक एक बूथ प्रति लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से 0.44% बूथों की जाँच होती थी, जिसे उच्चतम न्यायलय के आदेश के बाद बढ़ाकर 2% करना होगा। इसके बाद भी नतीजे एक दिन के भीतर आने का चुनाव आयोग को भरोसा है।

अब तक कहीं नहीं निकली गड़बड़ी

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में यह भी साफ़ किया कि उसने अब तक जिन 1,500 बूथों पर जाँच की है, उनमें से एक में भी उसे गड़बड़ी नहीं मिली है।

Times Now-VMR सर्वे: NDA को मिलेगा पूर्ण बहुमत, 150 से भी कम पर सिमटेगी UPA

टाइम्स नाउ-वीएमआर के सर्वे में भी राजग को पूर्व बहुमत मिलता दिख रहा है। वैसे आधिकारिक नतीजे तो 23 मई को आने वाले हैं लेकिन कई सर्वे में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर से एनडीए की सरकार बनती दिख रही है। टाइम्स नाउ के सर्वे की मानें तो राजग को जहाँ 279 सीटें आने का अनुमान है वहीं यूपीए सिर्फ़ 149 सीटों पर सिमट जाएगी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भाजपा को भारी फायदा होने जा रहा है।

असम की 14 सीटों में से भाजपा ने 2014 में 7 सीटें जीती थीं। इस ओपिनियन पोल की मानें तो इस बार भाजपा यहाँ 8 तथा कॉन्ग्रेस 4 सीटें जीत सकती हैं। वहीं एआईयूडीएफ के खाते में 2 सीटें जा सकती हैं। अगर बिहार की बात करें तो यहाँ भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन को 40 में से 29 सीटें मिलती नज़र आ रही हैं। वहीं कॉन्ग्रेस, राजद और रालोसपा के महागठबंधन को महज 11 सीटों से संतोष करना पड़ेगा।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 42 में से 22 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। टाइम्स नाउ के ओपिनियन पोल के मुताबिक यहाँ भाजपा को 2014 की 2 सीटों के मुकाबले 7 सीटों का फ़ायदा मिलता हुए दिख रहा है और पार्टी को यहाँ 9 सीटें मिलती दिख रही हैं। हालाँकि, भाजपा का दावा है कि ये आँकड़ा और ज्यादा होगा।

उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से सपा-बसपा गठबंधन को 27 तथा भाजपा के नेतृत्व वाली वाले एनडीए गठबंधन को 50 सीटें मिल सकती हैं। यहाँ यूपीए को 3 सीटें मिलती दिख रही है। ये चौंकाने वाला है क्योंकि जिस उत्तर प्रदेश के लिए प्रियंका गाँधी को जोर-शोर से लॉन्च किया गया है, उसी यूपी में कॉन्ग्रेस गठबंधन को 80 में से महज 3 सीटें मिलेंगी।

वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी का खाता तक नहीं खुलेगा। पिछले आम चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा सातों सीटों पर कब्ज़ा करेगी। टाइम्स नाउ के सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में कॉन्ग्रेस और आप का एक बार फिर सफाया होना तय है।

इंडियन नेवी अफसर ने डूबते व्यक्ति की बचाई जान, इंटरनेट ने किया नमन!

फेसबुक पर भारतीय नौसेना के आधिकारिक पेज पर आज एक युवा नौसैन्यकर्मी का कारनामा शेयर हुआ है, जिसे हर तरफ से वाहवाही मिल रही है। लेफ्टिनेंट राहुल दलाल ने केरल के वाईपिन तट पर एक डूबते हुए व्यक्ति की जान बचाई, जिसके बाद उन्हें नायक की प्रशस्ति मिल रही है। अपनी पत्नी के साथ लेफ्टिनेंट दलाल 5 अप्रैल को बीच पर साईट-सीइंग के लिए पहुंचे थे जब उन्होंने देखा कि एक आदमी डूब रहा है और मदद की गुहार लगा रहा है। बाद में बचाए गए व्यक्ति ने अपनी पहचान औरंगाबाद के दिलीप कुमार के रूप में की।

वहाँ हालाँकि और भी लोगों की भीड़ इकट्ठा थी पर वे या तो पानी में कूदने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे या उनमें से कोई भी ऐसा करने में सक्षम नहीं था। लेफ्टिनेंट दलाल तुरंत पानी में कूद गए और डूबते इन्सान की ओर बढ़ने लगे।

अपनी ही जान साँसत में आ गई थी

सोशल मीडिया के अनुसार लेफ्टिनेंट दलाल को दिलीप तक पहुँचने में कुछ मिनट ही लगे पर पानी के तेज बहाव के चलते उन्हें दिलीप को लेकर वापस आने में लगभग 20 मिनट लग गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दिलीप इतने डरे और घबराए हुए थे कि वह लेफ्टिनेंट दलाल को ही जकड़कर नीचे खींचने लगे, जिससे दोनों पर ही डूबने का खतरा मंडराने लगा था। लेफ्टिनेंट दलाल ने दिलीप को शांत किया और उनसे कहा कि वे (दिलीप) दलाल के केवल कंधे ही पकड़े रहें। जब दिलीप ने ऐसा किया तो लेफ्टिनेंट दलाल ने वापस तट की तरफ तैरना प्रारंभ कर दिया। स्थानीय व्यक्तियों की सहायता से तट पर पहुँचने के बाद उन्होंने पाया कि दिलीप बेहोश हो गए हैं और उनकी साँसें भी नहीं चल रही हैं।

लेफ्टिनेंट दलाल ने उनका मुँह खोला तो पाया कि कुछ पौधे दिलीप के साँस के रास्ते में फँसे हुए हैं। उन्हें निकाल कर दलाल ने दिलीप को Cardio Pulmonary Resuscitation (कृत्रिम श्वास) दी, जिसके बाद दिलीप की चेतना लौटी। इसके बाद सूचना पाकर पहुँची पुलिस ने दिलीप को सरकारी अस्पताल पहुँचाया जहाँ से उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दे दी गई।

शाबाशियों और बधाइयों का सैलाब  

सोशल मीडिया पर यह खबर आते ही लेफ्टिनेंट दलाल को बधाई देने और उनकी प्रशंसा करने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। सभी ने जी भरकर उनकी वीरता को सराहा।

‘मैंने नौसेना का सिखाया ही आजमाया’

भारतीय नौसेना ने आज सुबह फेसबुक पर इस घटना के विवरण के साथ बचाव अभियान के ठीक बाद की तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें लेफ्टिनेंट दलाल को दिलीप के साथ देखा जा सकता है। उनकी दिलीप को कृत्रिम श्वास देते हुए तस्वीर भी नौसेना ने जारी की है। खबर लिखे जाने तक फेसबुक पर इस पोस्ट को 6,000 से ज्यादा बार लाइक किया गया है, 350 से ज्यादा इस पर कमेंट्स आए हैं, और 600 के करीब लोगों ने इसे शेयर किया है।


एक स्वतन्त्र पत्रकार से बात करते हुए लेफ्टिनेंट दलाल ने बताया कि उनकी बाद में भी दिलीप से बात हुई है, और उस व्यक्ति की आवाज़ सुनना सही में अद्भुत अनुभूति है, जिसकी उन्होंने जान बचाई हो। ‘उसने मुझे हॉस्पिटल से फ़ोन किया। जो संतोष मुझे महसूस हो रहा है, उसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता।’ लेफ्टिनेंट ने यह भी कहा कि यदि हम खुद पर विश्वास रखें तो अपनी सीमाओं को तोड़ किसी की जान बचाना एक बहुत खूबसूरत पल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि उस दिन उन्होंने जो कुछ किया वह उन्हें भारतीय नौसेना और उनके वरिष्ठों ने सिखाया था, और वे भारतीय नौसेना का अंग होने पर गर्व करते हैं।