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फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण किया रद्द, 2014 में कॉन्ग्रेस- NCP सरकार ने अध्यादेश लाकर दिया था कोटा

महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से कमजोर माने जाने वाले मुस्लिमों को दिए जा रहे 5 फीसदी आरक्षण को खत्म कर दिया है। 2014 में ये व्यवस्था लागू की गई थी लेकिन देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने 17 फरवरी 2026 को इस आदेश को रद्द कर दिया।

सरकारी आदेश के मुताबिक, 2014 में जिन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (SBC-A) के तहत आरक्षण दिया गया था, वह आदेश अब समाप्त कर दिया गया है। इसमें सरकारी और अर्ध सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान आरक्षण मिलता था। इसपर रोक लग गई है। नए आदेश के बाद मुस्लिमों को जारी किया जाने वाला जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र पर भी रोक लग गई है। 2014 का यह आदेश अनिश्चित स्थिति में था, जिसे सरकार ने रद्द कर स्थिति साफ कर दी है।

महाराष्ट्र में जुलाई 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार ने मुस्लिमों और मराठा आरक्षण को अध्यादेश के जरिए लागू किया था। मराठा समुदाय को 16 फीसदी आरक्षण और मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था। इससे राज्य में आरक्षण कुल 73 फीसदी हो गया था। दोनों आरक्षण का प्रस्ताव तत्कालीन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नसीम खान ने कैबिनेट के सामने रखा था, जिसे मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद मुस्लिमों में पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए।

बॉम्बे हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

हालाँकि 2014 में ही इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने 14 नवंबर 2014 को अंतरिम आदेश जारी कर 16 फीसदी मराठा आरक्षण पर रोक लगा दी, क्योंकि इससे 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का उल्लंघन हो रहा था, लेकिन मुस्लिम आरक्षण को बरकरार रखा था। 2019 में हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण को वैध ठहराया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में रद्द कर दिया।

अध्यादेश की अवधि समाप्त हो चुकी है

फडणवीस सरकार का कहना है कि जिस अध्यादेश के जरिेए मुस्लिम आरक्षण लागू किया गया, उसकी अवधि खत्म हो चुकी है। ये कानून में तब्दील नहीं हुआ है इसलिए अवधि समाप्त होते ही अध्यादेश के आदेश भी खत्म हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संबंधित आदेश को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है।

सरकार के मुताबिक, ये आदेश सरकारी रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए दिया गया है। हालाँकि जानकार बता रहे हैं कि मुस्लिम आरक्षण राज्य का संवेदनशील मुद्दा है इसको लेकर राज्य में प्रतिक्रिया हो सकती है।

उपसचिव का भी तबादला

अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय का ट्रांसफर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि ये कार्रवाई 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच 75 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को रिकॉर्ड समय में अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया। कई फाइलों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद डिजिटल हस्ताक्षर मिले, इसके बाद कहा गया कि मंत्री के निधन के बाद इतनी जल्दी इतनी फाइल क्लियर कैसे हुई। विवाद के बाद सीएम फडणवीस ने सारी मंजूरियाँ रद्द कर दी।

‘पायजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश’: SC ने पलटा इलाहाबाद HC का आदेश, CJI बोले- इसे हल्के में लेना समाज के लिए खतरनाक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 फरवरी 2026) को अहम फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि किसी महिला को गलत तरीके से छूना और उसके पायजामे की नाड़ा खोलना ‘रेप की कोशिश’ नहीं माना जा सकता।

शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई आरोपित किसी लड़की का पायजामा खोलने की कोशिश करता है, उसके कपड़े से छेड़छाड़ करता है और उसे जबरन खींचता है, तो यह केवल छेड़छाड़ या यौन उत्पीड़न नहीं बल्कि साफतौर पर ‘रेप की कोशिश’ की श्रेणी में आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य को हल्के में लेना कानून और समाज, दोनों के लिए खतरनाक है।

अदालत ने यह भी माना कि हाई कोर्ट का नजरिया कानून की सही व्याख्या नहीं करता और इससे गलत संदेश जा सकता है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला खारिज कर दिया और कहा कि इस मामले में रेप की कोशिश से जुड़ी धाराएँ लागू होंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुओ मोतो (Suo Motu) यानी खुद संज्ञान लिया, क्योंकि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ NGO ‘वी द वीमन’ (We the Women) सहित वरिष्ठ वकीलों और एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था कि यह निर्णय ‘संवेदनहीन’ और कानून के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई में जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एनवी अनजारिया की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि किसी अपराध को कोशिश मानने के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह पूरी तरह अंजाम तक पहुँच जाए। अगर आरोपित ने ऐसा ठोस कदम उठा लिया हो जिससे साफ पता चले कि उसका इरादा अपराध करने का था और वह उस दिशा में आगे बढ़ चुका था, तो उसे कोशिश माना जाएगा।

अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोपित का व्यवहार स्पष्ट रूप से गंभीर यौन हमले की दिशा में था और इसे हल्के अपराध की तरह नहीं देखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में BNS की धारा 376 को धारा 511 के साथ पढ़ा जाना चाहिए, जो बलात्कार की कोशिश से जुड़ी है। साथ ही POCSO कानून की धारा 18 भी लागू होगी, जो नाबालिग के साथ पेनिट्रेटिव यौन अपराध की कोशिश से संबंधित है।

अदालत ने यह भी कहा कि नाबालिगों के मामलों में अदालतों को ज्यादा संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए और तकनीकी आधार पर गंभीर धाराएँ हटाना न्याय के उद्देश्य के खिलाफ है।शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के उस हिस्से को पूरी तरह रद्द कर दिया जिसमें बलात्कार की कोशिश की धारा हटाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामला उन्हीं गंभीर धाराओं के तहत आगे बढ़े जैसा निचली अदालत ने पहले तय किया था।

क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला?

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को एक विवादित फैसला सुनाया था, जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी थी। यह आदेश जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने दिया था। मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से जुड़ा था, जहाँ एक 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ छेड़छाड़ का आरोप था। घटना साल 2021 की बताई गई थी।

मामले के अनुसार, दो आरोपितों पर आरोप था कि उन्होंने बच्ची के साथ जबरदस्ती की, उसके स्तन पकड़े, उसका पायजामे का नाड़ा तोड़ा और उसे एक सुनसान जगह की ओर खींचने की कोशिश की। निचली अदालत ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए आरोपितों को BNS की धारा 376 (रेप) और POCSO एक्ट की धारा 18 (रेप की कोशिश) के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।

लेकिन 17 मार्च 2025 के अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध त्थ्यों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि आरोपितों ने ‘रेप करने की पूरी कोशिश’ की थी। अदालत ने कहा कि सिर्फ पायजामे का नाड़ा तोड़ना और शरीर के ऊपरी हिस्से को पकड़ना, अपने आप में ‘रेप की कोशिश’ साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कथित तौर पर कपड़े पूरी तरह नहीं उतारे गए थे।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह कृत्य गंभीर है, लेकिन इसे गंभीर यौन उत्पीड़न माना जाएगा, न कि रेप की कोशिश। इसीलिए अदालत ने BNS की धारा 354(b) और POCSO एक्ट की धारा 9/10 के तहत मुकदमा चलाने को सही ठहराया।

टॉप 3 AI सुपर पावर में हो भारत: PM मोदी ने बताया 2047 का विजन, कहा- मानव और विश्व कल्याण के लिए हो तकनीक का इस्तेमाल

ग्लोबल साउथ में पहली बार दिल्ली में हो रहे एआई इंपैक्ट समिट को लेकर एएनआई से खास बातचीत में पीएम मोदी ने विकसित भारत का विजन और एआई की भूमिका से लेकर सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की बात कही।

उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों, मंत्रियों, वैश्विक प्रौद्योगिकी के नेताओं और उद्योग जगत एक साथ लाता है, ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा देने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और सतत विकास को सक्षम बनाने में एआई की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत को एआई के टॉप 3 देशों में शामिल होना चाहिए। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि एआई को मानव-केंद्रित रहते हुए वैश्विक विकास को गति देना चाहिए।

पीएम मोदी ने खास बातचीत में विजन 2047 में एआई के योगदान, समावेशी समाज, मानव कल्याण और एमएसएमई के विकास से लेकर रोजगार और एआई से डरने नहीं बल्कि तैयारी के साथ उसका इस्तेमाल कैसे करना है इस पर भी अपनी बात कही।

भारत को टॉप 3 देशों में एक होना चाहिए

आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहे भारत को केवल टेक्नोलॉजी उपभोक्ता बन कर नहीं रहना है बल्कि टेक्नोलॉजी क्रिएटर भी बनना है। पीएम मोदी ने कहा कि एआई का विजन संप्रभुता, समावेशी समाज और इनोवेशन पर आधारित है। भारत के एआई मॉडल आने वाले वर्षों में दुनियाभर में धूम मचाएँगे। एआई से कार्य करने में सटीकता आएगी और युवकों को हाईक्वालिटी जॉब मिलेगा यानी रोजगार के क्षेत्र में भी एआई क्रांति लाने वाला है। पीएम मोदी ने कहा, “भारत को दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक होना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “यह AI ही है जो सच में नागरिकों को सशक्त बनाता है और 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा को तेज़ करेगा और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।”

गवर्नेंस में एआई का बेहतर इस्तेमाल संभव

स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टिट्यूट और टेक्नोलॉजी का पूरा इकोसिस्टम ऐसे एआई सॉल्यूशन विकसित कर सकते हैं, जो विनिर्माण से लेकर गवर्नेंस तक को बेहतर बना सकता है। इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि देश को नई दिशा मिलेगी। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत की युवा शक्ति ऐसा एआई सॉल्यूशन बना सकते हैं, जो किसानों, महिलाओं, छोटे और मंझोले उद्योगपतियों के लिए मददगार साबित होगा। केन्द्रीय बजट में भी इस विजन को रखा गया है।

वैश्विक विकास में सहायक होगा एआई

पीएम मोदी ने कहा, “हमारा विजन साफ है, AI को पूरी तरह से मानव-केंद्रित रहते हुए वैश्विक विकास को गति देनी चाहिए।” यह दुनिया को नई दिशा दिखा सकता है। उन्होने कहा कि इससे डरने के बजाए इसको लेकर तैयारी की जानी चाहिए। इसलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों को स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं।

जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों के डर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तैयारी डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं।”

भारत को सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए बल्कि उसे क्रिएट भी करना चाहिए। AI में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत डिजिटल सेंचुरी के लिए अपना कोड खुद लिखे। चूंकि पहला ग्लोबल AI समिट ग्लोबल साउथ में हो रहा है, भारत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रहा है जो कम प्रतिनिधित्व वाली आवाजों और डेवलपमेंट प्रायोरिटीज को बढ़ावा देगा।

भारत का IT सेक्टर 2030 तक करीब 3300 करोड़ तक पहुँच सकता है

एआई मार्केट प्रोजेक्शन दिखाते हैं कि भारत का एआई सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा। 2025 में इंडिया AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट को लॉन्च किया गया। भारत ने AI सिस्टम के एथिकल, सेफ और जिम्मेदार डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक मैकेनिज्म तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ANI से कहा, “AI बाजार के अनुमान बताते हैं कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक 400 बिलियन डॉलर यानी 3300 करोड़ तक पहुँच सकता है, जो AI-सक्षम आउटसोर्सिंग और डोमेन-विशिष्ट स्वचालन की नई लहरों से प्रेरित होगा।”

AI एक सिविलाइज़ेशनल इन्फ्लेक्शन पॉइंट पर है- पीएम

PM मोदी ने मानव-केंद्रित इनोवेशन का आह्वान करते हुए कहा कि AI एक सिविलाइजेशनल इन्फ्लेक्शन पॉइंट पर है। यह इंसान की क्षमता में जबरदस्त इजाफा कर सकता है। लेकिन अगर इसे बिना दिशानिर्देश के छोड़ दिया जाए, तो ये सामाजिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए इंडिया एआई समिट को ‘इम्पैक्ट’ के साथ जोड़ा गया, ताकि इनोवेशन ही नहीं जिम्मेदारी के साथ इक्विटेबल आउटकम भी मिले।

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ को चरितार्थ करे। टेक्नोलॉजी इंसानियत की सेवा के लिए है, इंसान की जगह नहीं ले सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना भारत के सभ्यतागत दर्शन का प्रतिबिंब है। तकनीक का अंतिम लक्ष्य ‘सबका कल्याण और सबकी प्रसन्नता’ होना चाहिए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ANI से कहा, “यह AI ही है जो सच में नागरिकों को सशक्त बनाता है और 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा को तेज करेगा और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।”

प्रधानमंत्री का विजन एआई को लेकर साफ है कि जीवन के हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मानव कल्याण इसका उद्देश्य होना चाहिए, गुड गवर्नेंस से लेकर एमएसएमई तक का मददगार होना चाहिए। युवाओं को इसमें आगे आकर नए इनोवेशन पूरी जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। पीएम ने कहा है कि ऐसे युवाओं की मदद के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है।

‘भारत क्लॉड का दूसरा सबसे बड़ा बाजार, सबसे मुश्किल काम कर रहे यहाँ के डेवलपर्स’: AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी के बीच एंथ्रोपिक ने बेंगलुरु में खोला ऑफिस

दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक ने बेंगलुरु में अपना नया ऑफिस खोलने की घोषणा की। यह एशिया में टोक्यो के बाद उसका दूसरा बड़ा सेंटर है। भारत में कंपनी की कमान एंथ्रोपिक इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर इरीना घोष सँभालेंगी। कंपनी ने एंटरप्राइज, स्टार्टअप, शिक्षा, कृषि और सार्वजनिक क्षेत्र में कई साझेदारियों का भी ऐलान किया है।

एंथ्रोपिक के लोकप्रिय AI असिस्टेंट क्लॉड डॉट एआई (Claude.ai) के लिए भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। कंपनी के अनुसार, भारत में क्लॉड का लगभग आधा उपयोग कोडिंग, गणना और सॉफ्टवेयर विकास जैसे तकनीकी कामों में हो रहा है।

भारत में असंभव चीजें भी संभव हैं: राहुल पाटिल

बेंगलुरु कार्यालय के उद्घाटन पर आयोजित डेवलपर समिट में एंथ्रोपिक के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (Chief Technology Officer) राहुल पाटिल ने बेंगलुरु में बिताए बचपन को याद किया। उन्होंने कहा, “भारत में असंभव चीजें भी संभव हैं।”

राहुल पाटिल ने बताया कि उनकी माता कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षिका थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई बाल्डविन इंस्टीट्यूशंस (Baldwin Institutions), सेंट जोसेफ्स कॉलेज (St. Joseph’s College) और बाद में पीईएस विश्वविद्यालय (PES University) से की। पाटिल ने यह भी साझा किया कि इंजीनियरिंग के पहले वर्ष में ही उनकी मुलाकात पत्नी से हुई थी। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल AI के क्षेत्र में बड़ा बाजार बन चुका है बल्कि वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व गढ़ने वाली महत्वपूर्ण भूमि भी है।

भारतीय भाषाओं में AI को मजबूत करने पर फोकस

एंथ्रोपिक भारत में AI को भारतीय भाषाओं में मजबूत बनाने पर खास ध्यान दे रही है। कंपनी का कहना है कि देश में एक अरब से अधिक लोग दर्जनभर से ज्यादा आधिकारिक भाषाएँ बोलते हैं लेकिन AI सिस्टम अब तक अंग्रेजी में ज्यादा बेहतर काम करते रहे हैं।

इस कमी को दूर करने के लिए एंथ्रोपिक ने छह महीने पहले दस प्रमुख भारतीय भाषाओं हिंदी, बांग्ला, मराठी, तेलुगु, तमिल, पंजाबी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम और उर्दू में सुधार का अभियान शुरू किया। बेहतर और संतुलित प्रशिक्षण डेटा तैयार किया गया, जिससे भाषा की प्रवाह और समझ में साफ सुधार हुआ है।

कंपनी कर्या और कलेक्टिव इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट के साथ मिलकर ऐसे सिस्टम भी बना रही है जो खासकर कृषि और कानून जैसे भारतीय क्षेत्रों में AI की क्षमता जाँचें। डिजिटल ग्रीन और अदालत AI के विशेषज्ञ भी इस पहल में जुड़े हैं। लक्ष्य है इन परीक्षण उपकरणों को सार्वजनिक करना ताकि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर AI सिस्टम तैयार किए जा सकें।

क्लॉड को अपना रहे बड़े स्टार्टअप

एंथ्रोपिक का कहना है कि अक्टूबर 2025 में विस्तार योजना की घोषणा के बाद भारत में उसका राजस्व दोगुना हो गया है। यह बढ़ोतरी बड़े उद्योग समूहों, डिजिटल कंपनियों और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स से आ रही है।

एअर इंडिया अपने डेवलपर्स को कम लागत और तेजी से कस्टम सॉफ्टवेयर तैयार करने में मदद के लिए क्लॉड कोड का उपयोग कर रही है। फिनटेक मंच CRED ने फीचर डिलीवरी में दोगुनी तेजी और टेस्ट कवरेज में 10% सुधार की जानकारी दी है। वहीं, वैश्विक आईटी सेवा कंपनी Cognizant अपने 3.5 लाख कर्मचारियों के बीच क्लॉड को लागू कर रही है ताकि सिस्टम और AI अपनाने की रफ्तार बढ़ाई जा सके।

स्टार्टअप दुनिया में Razorpay ने अपने रिस्क सिस्टम, रोजमर्रा के कामकाज और अंदरूनी फैसलों में AI को जोड़ दिया है। एंटरप्रेट (Enterpret) अपने AI अस्टिस्टेंट को चलाने के लिए क्लॉड का इस्तेमाल कर रही है और इससे ग्राहकों की राय और जानकारी सीधे क्लॉड तक पहुँच जाती है।

एक और स्टार्टअप Emergent लोगों को साधारण भाषा में बताकर सॉफ्टवेयर बनवाने की सुविधा देता है। इसने पाँच महीने से भी कम समय में करीब 2.5 डॉलर की सालाना कमाई और बीस लाख उपयोगकर्ता बना लिए। यह पूरा मंच क्लॉड पर ही तैयार हुआ है।

इस तेजी से बढ़ते माहौल को सहारा देने के लिए एंथ्रोपिक की भारत टीम कंपनियों और नए कारोबारों को जमीन से जुड़ी AI सलाह देगी ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से क्लॉड आधारित समाधान बना सकें और आगे बढ़ा सकें।

शिक्षा के लिए AI का इस्तेमाल

भारत में क्लॉड का करीब 12 प्रतिशत उपयोग पढ़ाई से जुड़ा है। एंथ्रोपिक ने प्रथम (Pratham) के साथ मिलकर सुरक्षा और बेहतर शिक्षा पर काम शुरू किया है। प्रथम ने एंथ्रोपिक को अपना पहला रणनीतिक AI लैब सहयोगी चुना है। क्लॉड से चलने वाली ‘एनीटाइम टेस्टिंग मशीन’ 20 स्कूलों के 1,500 छात्रों पर आजमाई जा रही है और 2026 तक 100 स्कूलों तक पहुँचेगी। इसे पढ़ाई छोड़ चुकी 5,000 से ज्यादा महिलाओं के लिए भी जोड़ा गया है ताकि वे तैयारी जारी रख सकें।

कंपनी सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (Central Square Foundation) के साथ मिलकर निजी ट्यूटर, टीचर कोचिंग और परीक्षा आधारित पढ़ाई जैसे AI साधनों को बढ़ावा दे रही है। इसका लक्ष्य है कि तकनीकी मदद देकर इन्हें वंचित इलाकों के बच्चों तक पहुँचा दिया जाए।

खेती, स्वास्थ्य और न्याय तंत्र में AI

भारत की डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था को बड़े और आपस में जुड़े तंत्र के रूप में दुनिया में मिसाल माना जाता है। एंथ्रोपिक, एकस्टेप फाउंडेशन (EkStep Foundation) के साथ मिलकर देख रही है कि AI को इस मजबूत आधार से कैसे जोड़ा जाए।

खेती, जो देश की अर्थव्यवस्था का लगभग छठा हिस्सा है और आधी आबादी को रोजगार देती है, बड़ा फोकस क्षेत्र है। ओपन एग्रीनेट (OpenAgriNet) पहल के तहत किसानों और कृषि कामगारों तक विशेषज्ञ जानकारी पहुँचाने के लिए क्लॉड को जोड़ा जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नूरा हेल्थ (Noora Health) और इंटेलेहेल्थ (Intelehealth) जैसे संगठन क्लॉड कोड और कोवर्क (Cowork) के जरिए अपने सिस्टम बेहतर करने और दूरदराज के मरीजों को बेहतर इलाज से जोड़ने पर काम कर रहे हैं।

करीब 5 करोड़ लंबित मामलों वाले भारत के न्याय तंत्र में भी AI से मदद की कोशिश है। अदालत एआई (Adalat AI) के साथ मिलकर राष्ट्रीय वॉट्सऐप हेल्पलाइन शुरू की जा रही है जो मामलों की ताजा जानकारी, दस्तावेजों का सार, अनुवाद और कानूनी सवालों के जवाब भारतीय भाषाओं में देगी। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने भारत डिजिटल (Bharat Digital) के सहयोग से पहला सरकारी MCP सर्वर शुरू किया है, ताकि AI प्रणालियाँ राष्ट्रीय आँकड़ों तक पहुँच पा सकें। निजी क्षेत्र में स्विगी (Swiggy) क्लॉड के जरिए किराना मँगाने और भोजन आरक्षण की सुविधा दे रहा है।

वैश्विक AI कंपनियाँ भारत को क्यों चुन रही हैं?

एंथ्रोपिक का विस्तार एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। पिछले 2 वर्षों में कई वैश्विक AI कंपनियों ने शोध, साझेदारी और बाजार विस्तार के लिए भारत में निवेश बढ़ाया है। OpenAI और Microsoft ने शोध सहयोग, क्लाउड भागीदारी और डेवलपर कार्यक्रमों के जरिए भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Google ने भी भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए एआई शोध और उत्पादों का विस्तार किया है।

भारत के पास तीन बड़ी ताकतें हैं दुनिया के सबसे बड़े डेवलपर समूहों में से एक, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा जैसे पहचान और भुगतान प्रणाली, और कई भाषाओं व विविध जरूरतों वाला विशाल बाजार। यही कारण है कि भारत AI परीक्षण और विस्तार के लिए उपयुक्त बन गया है। आने वाले वर्षों में भारत का AI बाजार तेजी से बढ़ने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने की उम्मीद है।

(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में दिव्या भारती ने लिखी है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

कब करें किसकी खेती, कौन सी डालें मिट्टी-खाद… सब जानकारी देगा ‘भारत विस्तार’ : केंद्र ने किसानों के लिए लॉन्च किया डिजिटल प्लेटफॉर्म, जानें खासियत

2026-2027 के बजट को पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की थीं। इन्हीं घोषणाओं में एक एआई डिजिटल प्लैटफॉर्म को लॉन्च करने को लेकर थी। इसको साकार करते हुए ‘भारत‑VISTAAR’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को समर्पित किया।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे लॉन्च करते हुए कहा कि इस ऐप के जरिए पूरी कृषि व्यवस्था को जोड़ेंगे। सरकारी योजनाओं की जानकारी, किसी के खिलाफ शिकायत से लेकर आपके खेत को क्या जरूरी है, उसमें क्या उपजाएँ, नमी, कीटों की समस्या और उससे निजात के उपाए समेत तमाम दिक्कतों का समाधान होगा।

इस ऐप का उद्देश्य कृषि से जुड़ी जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी संसाधनों को एक ही डिजिटल इंटरफेस पर एकीकृत करना है। यह प्लेटफ़ॉर्म भारत के AgriStack पोर्टल, जिसमें किसानों के डिजिटल रिकॉर्ड, फसल डेटा और कृषि सूचनाएँ हैं, को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक कृषि अभ्यास और AI सिस्टम से जोड़ता है। इसका उद्देश्य खेती से जुड़े फैसलों को सरल, त्वरित और डेटा-आधारित बनाना है।

सरकार ने इस ऐप को लॉन्च करते समय जो विजन रखा है, अगर वो सफल होता है तो कृषि क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। इसके जरिए

  • स्थानीय भाषाओं में कृषि सलाह, मौसम सूचना, मिट्टी का विश्लेषण और फसल-विशिष्ट सुझाव देगा, जिससे भारत के छोटे और सीमांत किसानों तक उपयोगी जानकारी आसानी से पहुँचेगी।
  • उन्नत AI तकनीक के माध्यम से यह प्लेटफ़ॉर्म मौसम, मिट्टी, बाजार भाव, कीट और रोगों से निपटने के उपाय जैसे डेटा-आधारित सुझाव देगा।
  • किसान इस सिस्टम के जरिए सरकारी कृषि योजनाओं के बारे में जान सकते हैं, आवेदन कर सकते हैं और उनमें प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।

किसानों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा

इस ऐप की मदद से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, मिट्टी की स्थिति, बीज और उर्वरक चयन जैसी सलाह मिल सकती है, जिससे खेती में निर्णय अधिक वैज्ञानिक और सटीक होंगे। इससे कृषि जोखिम, जैसे मौसम-आधारित नुकसान और फसल विफलता की संभावना कम हो सकती है।

AI-आधारित सलाह किसानों को सही समय पर संसाधनों का उपयोग (जैसे पानी, उर्वरक और कीटनाशक) करने में मदद करती है, जिससे खेती की लागत कम होने और फसल उत्पादन बढ़ने की संभावनाएँ मजबूत होती हैं। बहुत से छोटे किसानों के लिए भाषा एक बड़ी बाधा होती है। ‘भारत विस्तार’ में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे किसान समझदारी से तकनीकी सलाह ले सकते हैं, जो पहले मुश्किल था।

AI टूल को शुरू में हिंदी और इंग्लिश में लॉन्च किया गया है। इसके बाद गुजराती, बांग्ला, पंजाबी, तेलुगू, तमिल, कन्नड़ समेत 11 क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध हो जाएँगे। इसके लिए कृषि मंत्रालय ने ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों के साथ MoU साइन किए हैं। यहाँ ट्रायल शुरू हो गया है।

कृषि मंत्री ने भारत- अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी कहा कि दूध, घी, दही, पनीर कोई भी डेयरी और उत्पाद जो दूध से संबंधित हैं, भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर नहीं आएगा, ताकि हमारे दूध उत्पादक किसानों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियाँ आरोप लगा कर किसानों में डर पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, जो पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के शासन में 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद का आयात होता था और डेयरी उत्पाद भी आयात किए जाते थे।

18 करोड़ श्रद्धालु, 1.2 लाख रोजगार, ₹10000 करोड़ का टूरिज्म रेवेन्यू… राम मंदिर ने 1 साल में अयोध्या की अर्थव्यवस्था में जोड़े ₹4 लाख करोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में प्रभु राम के मंदिर की नींव रखी और 22 जनवरी 2024 को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भव्य उद्घाटन भी हो गया। इस ऐतिहासिक घटना से भारत की सांस्कृतिक चेतना की पुनर्स्थापना तो हुई ही, साथ ही साथ अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभरकर सामने आने लगी। केंद्र की नरेंद्र मोदी और UP की योगी आदित्यनाथ की सरकार की कोशिशों से अयोध्या विकास की पटरी पर दौड़ रही है।

सदियों से भारत के मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे बल्कि उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। तिरुपति, वैष्णो देवी और शिरडी जैसे तीर्थस्थल इसके उदाहरण हैं। अब अयोध्या भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के संगम का नया मॉडल बनती दिखाई दे रही है।

IIM लखनऊ ने भारत के अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण: श्री राम मंदिर पर एक केस स्टडी (The Economic Renaissance of Ayodhya, India: A Case Study on Sri Ram Mandir) शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें बताया गया है कि किस तरह राम मंदिर ने अयोध्या का आर्थिक कायाकल्प कर दिया है।

कितनी बड़ी है भारत की टेंपल इकोनॉमी?

टेंपल इकोनॉमी (Temple Economy) का मतलब उन सभी आर्थिक गतिविधियों से है जो मंदिरों के कारण पैदा होती हैं जैसे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु, तीर्थ पर्यटन, मंदिर प्रबंधन, प्रसाद, फूल-माला, होटल, परिवहन और अन्य सेवाएँ। भारत में मंदिर सिर्फ पूजा के स्थान नहीं रहे बल्कि हजारों सालों से आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र भी रहे हैं। पुराने समय में जब अर्थव्यवस्था स्थानीय स्तर पर चलती थी, तब मंदिर आसपास के लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर देते थे। तीर्थयात्रा के कारण दुकानदारों, कारीगरों, पुजारियों, गाइडों और अन्य काम करने वालों को काम मिलता था।

वाराणसी, मदुरै, पुष्कर और उज्जैन जैसे शहर इसके उदाहरण हैं। ये शहर किसी बड़े उद्योग के लिए नहीं बल्कि अपने प्रसिद्ध मंदिरों और तीर्थ स्थलों के लिए जाने जाते हैं। मंदिरों के आसपास बनी यह अर्थव्यवस्था सदियों से इन शहरों को सहारा देती रही है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों जैसे सुप्रभेदगम, विजयगम, अनलगम और प्रोद्गीतगम में भी बताया गया है कि मंदिरों को ऐसी सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ करनी चाहिए जो समाज के सभी वर्गों, खासकर कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाएँ और संतुलित विकास में मदद करें।

State Bank of India (SBI) और अन्य आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, भारत की टेंपल इकोनॉमी हर साल लगभग ₹3.02 लाख करोड़ से ₹6 लाख करोड़ तक का योगदान देती है। यह देश के कुल GDP का करीब 2.3% से 3% हिस्सा है। इसी संदर्भ में राम मंदिर अयोध्या की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है और शहर को दुनिया के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल कर रहा है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 5 फरवरी 2020 से 5 फरवरी 2025 के बीच लगभग ₹400 करोड़ कर के रूप में सरकार को दिए। इसमें ₹270 करोड़ GST और ₹130 करोड़ अन्य करों के रूप में शामिल हैं। राम मंदिर के निर्माण पर सरकार को लगभग ₹400 करोड़ GST मिलने का अनुमान है।

करोड़ों श्रद्धालुओं से दिखा बढ़ता आर्थिक प्रभाव

अयोध्या में श्री राम मंदिर के उद्घाटन के बाद आर्थिक गतिविधियों का प्रभाव कई गुना बढ़ गया है। धार्मिक पर्यटन ने यहाँ परिवहन, होटल, भोजन, व्यापार और दान अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति दी है। IIM लखनऊ की रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी से सितंबर 2024 के बीच अयोध्या में 13.77 करोड़ श्रद्धालु पहुँचे जो वर्ष के अंत तक 16-18 करोड़ तक का अनुमान था।

इसकी तुलना करें तो ईसाईयों के सबसे बड़े तीर्थस्थल वेटिकन में हर साल लगभग 0.9 करोड़ और मुस्लिमों के मक्का में करीब 2 करोड़ लोग पहुँचते हैं। अयोध्या कई दूसरे धार्मिक स्थलों को पीछे छोड़ते हुए एक बड़ा तीर्थस्थल बनने वाला है जिससे 2025-26 तक हर साल टूरिज्म से 100 बिलियन (₹10000 करोड़) से ज्यादा का रेवेन्यू मिल सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक शोध के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में सिर्फ अयोध्या से जुड़ी तीर्थ यात्रा और उससे संबंधित गतिविधियों से ₹4 लाख करोड़ से ज्यादा का आर्थिक उत्पादन (इकोनॉमिक आउटपुट) होने का अनुमान था। यानी राम मंदिर के कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं से पर्यटक, होटल, दुकानों और परिवहन जैसी सेवाओं से बहुत बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है।

मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही दिन में ₹3 करोड़ से ज्यादा की भेंट चढ़ाई गई थी। यह दिखाता है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ यहाँ बड़ी आर्थिक गतिविधि भी जुड़ी हुई है।

वित्त वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार को अतिरिक्त ₹25,000 करोड़ तक का कर राजस्व मिलने की संभावना जताई गई है। इसमें जीएसटी (GST) और अन्य तरह के टैक्स शामिल हैं। यानी मंदिर और पर्यटन से राज्य की आमदनी भी बढ़ रही है, जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है।

अयोध्या में होटल और लॉज का तेजी से विकास हो रहा है। 150 से ज्यादा होटल और लॉज अलग-अलग चरणों में बन रहे हैं या तैयार हो चुके हैं। बड़े होटल ब्रांड जैसे ताज होटल्स, रेडिसन और OYO भी यहाँ अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। सालभर होटलों में औसतन 60% से 70% तक कमरे भरे रहते हैं। त्योहारों और खास मौकों पर यह आँकड़ा 100% तक पहुँच जाता है यानी एक भी कमरा खाली नहीं रहता।

डोमिनोज और पिज्जा हट जैसी अंतरराष्ट्रीय फूड चेन ने भी अयोध्या में अपने आउटलेट शुरू किए हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

रोजगार और रियल एस्टेट में ऐतिहासिक उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण की परियोजना से सीधे 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जो राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। यानी मंदिर के प्रबंधन, सुरक्षा, प्रशासन और अन्य कार्यों में हजार से ज्यादा लोग नियमित रूप से काम कर रहे हैं। निर्माण के दौरान स्थिति और भी व्यापक थी। मंदिर के निर्माण कार्यों में 50,000 से अधिक मजदूर अलग-अलग चरणों में जुड़े। इसमें राजमिस्त्री, इंजीनियर, पत्थर तराशने वाले कारीगर, ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग और अन्य श्रमिक शामिल थे। इससे हजारों परिवारों की आमदनी बढ़ी।

मंदिर बनने के बाद सिर्फ प्रत्यक्ष रोजगार ही नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रोजगार भी तेजी से बढ़ा। सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से करीब 1.2 लाख नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं। ये नौकरियाँ होटल और पर्यटन, हस्तशिल्प और धार्मिक वस्तुओं के व्यापार, स्थानीय परिवहन और टूर गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बनी हैं। लोगों को कई क्षेत्रों में नया रोजगार या अतिरिक्त कमाई का अवसर मिला।

जमीन की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। 2020 से पहले यहाँ जमीन की कीमत ₹400 से ₹800 प्रति वर्ग फुट के बीच थी। लेकिन 2024 तक यही कीमत बढ़कर ₹4,000 से ₹10,000 प्रति वर्ग फुट तक पहुँच गई। यानी सिर्फ चार साल में करीब दस गुना बढ़ोतरी हुई। इससे अयोध्या निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।

धार्मिक सामग्री बेचने वाले दुकानदारों की बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। खास तौर पर GI टैग वाले अयोध्या के बेसन लड्डू बनाने वालों और स्थानीय हस्तशिल्प कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने से इन उत्पादों की माँग भी लगातार बढ़ रही है। कई छोटे विक्रेताओं ने 2024 में ₹5 लाख से अधिक की कमाई की जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है। नए बाजार, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल की योजनाएँ भी बनाई जा रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और व्यापार के अवसर और बढ़ने की संभावना है।

सड़क, रेल, हवाई अड्डा: अयोध्या के इन्फ्रा पर जोर

सरकार ने अयोध्या को एक आधुनिक और विश्व स्तरीय आध्यात्मिक नगरी बनाने के लिए अयोध्या मास्टर प्लान 2031 के तहत ₹85,000 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य सिर्फ मंदिर क्षेत्र का विकास नहीं बल्कि पूरे शहर को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।

इस योजना में नई सड़कों, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, आधुनिक बस टर्मिनल, पार्किंग जोन और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। यानी अयोध्या को एक व्यवस्थित और साफ-सुथारे शहर के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा सड़कों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों को भी विकसित किया गया है।

दिसंबर 2023 से शुरू हुआ महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव लेकर आया है। वित्त वर्ष 2025 में इस हवाई अड्डे ने 1.1 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभाला जो पिछले वर्षों की तुलना में 423% वृद्धि दिखाता है। इसका मतलब है कि अब देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग सीधे अयोध्या पहुँच पा रहे हैं। भविष्य में इसकी क्षमता को 10 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक बढ़ाने की योजना है।

साथ ही, अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण किया गया है। स्टेशन को भव्य डिजाइन, बेहतर वेटिंग रूम, एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इसके अलावा, नए एक्सप्रेसवे और चौड़ी सड़कों ने अयोध्या को लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर से जोड़ दिया है। इससे यात्रा समय कम हुआ है और व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ भी तेज हुई हैं।

2021 से पहले और 2025 की अयोध्या

2021 से पहले की अयोध्या और 2025 की अयोध्या के बीच का अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। 2021 से पहले शहर में केवल 500 ई-रिक्शा थे, जो 2025 तक बढ़कर 17,000 हो गए यह बताता है कि आवागमन में जोरदार वृद्धि हुई है। होटल उद्योग में भी बड़ा बदलाव आया है, जहाँ पहले केवल 20 होटल थे, वहीं 2025 में उनकी संख्या 200 तक पहुँच गई, जिनमें 5-स्टार होटल भी शामिल हैं। बैंकिंग सेवाएँ 15 से बढ़कर 60 हो गईं, जो बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और निवेश का संकेत देती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों की संख्या 108 से बढ़कर 401 हो गई। पेट्रोल/CNG पंप 50 से कम से बढ़कर 75 से अधिक हो गए, जो वाहनों और परिवहन विस्तार को दर्शाता है। वहीं, स्ट्रीट वेंडर्स की संख्या 500 से बढ़कर लगभग 2,000 हो गई, जिससे छोटे व्यापार और स्वरोजगार में चार गुना तक उछाल दिखाई देता है। कुल मिलाकर, 2021 की तुलना में 2025 की अयोध्या अधिक सक्रिय, अधिक व्यावसायिक और कहीं अधिक तेजी से विकसित होती हुई नजर आती है।

अयोध्या के विकास का असर अब सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास के जिलों तक भी साफ दिखाई दे रहा है। फैजाबाद, बस्ती, सुलतानपुर, अमेठी, लखनऊ और गोरखपुर में भी आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं। इन क्षेत्रों में होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं की संख्या बढ़ रही है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स हब और परिवहन सेवाओं का विस्तार हुआ है।

इन आर्थिक गतिविधियों से साफ है कि मोदी और योगी सरकार की मंशा केवल अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करने की नहीं है बल्कि दोनों सरकारें अयोध्या को एक बड़े विजन के तहत विकसित कर रही हैं। जब दुनिया के मानचित्र पर बड़े तीर्थस्थलों का जिक्र किया जाएगा तो उसमें अयोध्या का नाम शीर्ष स्थानों में रहे इसकी पूरी तैयारी सरकारें कर रही हैं।

मुंब्रा को ‘हरे रंग’ में रंगने की चाह रखने वाली सहर शेख को अब चाहिए ’15 मिनट’ वाली शांति: इस्लामी भीड़ को पता है मतलब, क्या हिंदू समझ रहे हैं चेतावनी

मजहब को आधार बनाकर राजनीति करने वाले हर छोटे-बड़े नेता को अपना असली मकसद अच्छे से पता है। इसका एक उदाहरण एक समय में AIMIM पार्टी के बड़े नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने दिया था और एक उदाहरण अब उनकी ही पार्टी की युवा महिला नेता सहर युनूस शेख ने पेश किया है। सहर ने हैदराबाद जाकर भीड़ के सामने ’15 मिनट’ वाला बयान इस लहजे में दोहराया है जिससे साफ पता चलता है कि उनका इशारा क्या था।

आगे बढ़ने से पहले आपको याद दिला दें कि साल 2013 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने ’15 मिनट हटा लो पुलिस को’ वाला विवादित बयान दिया था। अपने भड़काऊ बयान में उन्होंने कहा था, “अगर 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हम (मुसलमान) 100 करोड़ (हिंदुओं) को खत्म कर देंगे।”

इस भड़काऊ बयान को सुनने के बाद उनपर IPC (अब BNS) की धारा 120(b) और 153(a) व अन्य धाराओं के तहत लंबा केस चला था। 2022 में उन्हें इस मामले में जाकर बरी किया गया था। बाद में उन्होंने जेल से निकलकर अपने ऊपर भड़काऊ बयानबाजी करने वाले आरोपों को खारिज करने की कोशिश की थी।

अब AIMIM के यही नेता उसी 15 मिनट वाले बयान को खुलेआम दोहराते हैं। सहर शेख को देखिए। मुंबई के मुंब्रा में नगर निगम चुनाव जीतने के बाद उन्हें हैदराबाद में ‘दारुल इस्लाम दिन’ को मनाने के लिए बुलाया गया।

सहर मंच पर गईं और स्पीच शुरू करने से पहले ही साफ कर दिया कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि इस्लाम का नाम लेकर और हिजाब पहनकर सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने वाली सहर को देखते ही भीड़ ने हल्ला करना शुरू कर दिया था। सहर पहले ये देख कर मुस्कुराई और उसके बाद उन्होंने कहा “2 मिनट की शांति चाहिए…नहीं-नहीं 15 मिनट की।”

वीडियो में जिस तरह से सहर 15 मिनट वाली बात को नेताओं को देखकर कह रही हैं उससे साफ है कि ये कोई मजाक नहीं था। ये संदेश था कि सहर के जहन में भी वही जहर भरा है जो अकबरुद्दीन में था।

वहीं उनके साथ हँसने वाली भीड़ भी ये बता रही थी कि उन सबको इस 15 मिनट के मायने बहुत अच्छे से पता हैं। वो इस बात से वाकिफ हैं कि अगर देश से 15 मिनट के लिए कानून व्यवस्था गायब हो जाए तो उन्हें एकजुट होकर क्या करना है और किसके साथ करना है।

सहर का ये अंदाज हिंदुओं के लिए एक चेतावनी है, लेकिन हिंदुओं को उनके रवैये पर हैरान होने की जरूरत नहीं है। AIMIM से जब सहर को पार्षद चुना गया था तब उन्होंने अपनी जीत के बाद लोगों को संबोधित करते हुए यही कहा था कि अगली बार पूरे मुंब्रा को ‘हरे रंग‘ में रंग देना।

जब इस बयान पर बवाल मचा तो वो अपनी बात से पलट गईं। उन्होंने कहा कि ये रंग उनकी पार्टी का रंग है। जो इसके मायने निकाले जा रहे हैं उनका वो अर्थ था ही नहीं। अपनी सफाई में उन्होंने सेकुलर होने तक का दावा किया था। हालाँकि लोगों को सच्चाई का पता था। इस बार भी यही हुआ है। हो सकता है सहर बाद में ये कह दें कि 15 मिनट से उनका अर्थ वाकई भीड़ को शांत करने से था, लेकिन हिंदुओं को इसके मायने पता होने चाहिए।

‘अपने गाँव में ईसाई मिशनरियों की एंट्री बैन करना जनजातीय लोगों का अधिकार’ : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ HC के फैसले को रखा बरकरार, चुनौती देने वालों की अर्जी खारिज

छत्तीसगढ़ में जनजातीय गाँवों में ईसाई मिशनरियों और बाहरी पादरियों के प्रवेश पर रोक जारी रहेगा। ग्राम सभाओं के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी 2026 में दिए गए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दी। याचिका में कांकेर सहित कई जिलों के जनजातीय गाँवों में पादरियों की एंट्री रोकने वाले होर्डिंग्स को असंवैधानिक करार दिया गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ग्राम सभाओं को ये अधिकार है कि वे अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए कदम उठा सकती है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से मना कर दिया, जिसमें लालच और धोखाधड़ी से किए गए धर्मांतरण का सामाजिक सद्भाव और जनजातीय सांस्कृतिक पहचान पर क्या असर पड़ता है, इसके बारे में विस्तार से बताया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस अवलोकन को सही करार दिया है, जिसमें ‘लालच और धोखाधड़ी’ के द्वारा धर्म परिवर्तन कराए जाने को रोकने के लिए होडिंग लगाने को असंवैधानिक नहीं माना था।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ये मामला सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। इसमें किसी भी धर्म को मानने की आजादी के उल्लंघन जैसी बात नहीं है। स्थानीय ग्राम सभाएँ PESA एक्ट 1996 के तहत अपनी परंपराओं को बचाने के लिए बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर जनजातीय लोगों की परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए ‘बाहरी हस्तक्षेप’ को रोकना और नियंत्रित करना जरूरी है, तो ऐसा किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि एंट्री पर रोक ईसाइयों के साथ भेदभाव है और ये संविधान 25 का उल्लंघन है। छत्तीसगढ़ सरकार और ग्राम सभा की ओर से कहा गया था कि होडिंग्स केवल उन पादरियों की एंट्री रोकने के लिए है, जो बहला फुसलाकर या जबरन गाँववालों का धर्मांतरण करा रहे हैं।

क्या है मामला

यह मामला कांकेर जिले के आठ जनजातीय लोगों के गाँव में ग्राम सभाओं द्वारा पास किए गए प्रस्तावों से जुड़ा है। ये गाँव हैं-कुडल, परवी, जुनवानी, घोटा, घोटिया, हबेचुर, मुसुरपुट्टा और सुलागी। गाँववालों ने होर्डिंग्स लगा कर कहा था कि PESA एक्ट 1996 के तहत पादरियों और ‘बाहरी लोगों’ की एंट्री पर बैन है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में दिगबल टांडी ने एक रिट पिटीशन फाइल की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि होर्डिंग्स लगा कर पादरियों और धर्मपरिवर्तन करने वाले स्थानीय जनजातीय लोगों को गाँवों में आने से असल में रोका जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे संविधान के आर्टिकल 14, 19(1)(d) और 25 का उल्लंघन होता है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि ईसाई आदिवासियों को दफनाने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। उनका सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है और उन्हें जबरदस्ती भगाया जा रहा है, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो रहा है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की बेंच ने अपने फैसले में होर्डिंग्स लगाने से ग्रामसभा को रोकने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि गैर-कानूनी या जबरदस्ती धर्म बदलने के खिलाफ चेतावनी देने वाले बैनर लगाना अपने आप में गैर-संवैधानिक नहीं कहा जा सकता।

हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि धर्म बदलना भारत के सामाजिक-राजनीतिक माहौल में लंबे समय से एक सेंसिटिव मुद्दा रहा है। हालांकि संविधान धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की आज़ादी की गारंटी देता है, लेकिन कोर्ट ने चेतावनी दी कि जबरदस्ती, लालच या धोखे से इस आज़ादी का गलत इस्तेमाल करना बहुत चिंता की बात है।

हाई कोर्ट ने कहा कि भारत में मिशनरी एक्टिविटी ओपनिवेशिक काल से चली आ रही है, जो शुरू में सामाजिक सुधार, पढ़ाई-लिखाई और हेल्थकेयर पर फोकस होती थी। समय के साथ, कुछ मिशनरी ग्रुप्स ने ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े तबकों, खासकर अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के बीच धर्म बदलने के लिए करना शुरू कर दिया।

हाई कोर्ट के मुताबिक, जब धर्म बदलना निजी आस्था का मामला नहीं रह जाता और लालच या कमज़ोरी का फायदा उठाने का नतीजा बन जाता है, तो यह जबरदस्ती नया कल्चर पैदा करता है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कृत्यों से जनजातीय समुदायों में ध्रुवीकरण, सामाजिक बहिष्कार और कभी-कभी हिंसक झड़पें हुई हैं।

हाई कोर्ट ने साफ किया कि आर्टिकल 25 खुद में पूरा अधिकार नहीं है, यह नैतिकता और दूसरे मामलों के अधीन है। इसका मतलब यह है कि लालच देकर धर्म बदलना सिर्फ धार्मिक चिंता नहीं है, बल्कि एक सामाजिक खतरा है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के भेदभाव के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि सर्कुलर या होर्डिंग्स ईसाइयों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ाता है। उसने कहा कि होर्डिंग्स सिर्फ कुछ पादरियों की एंट्री पर रोक से जुड़ा है, जो धर्म बदलने के लिए कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट आने से पहले दूसरे कानूनी उपायों का इस्तेमाल नहीं किया था और उसे पहले संबंधित ग्राम सभाओं के सामने समाधान की माँग करनी चाहिए थी।

सूर्य कुमार यादव ने पाकिस्तानियों से हाथ क्यों नहीं मिलाया? Economic Times पूछ रहा सवाल, कहा- इतिहास जवाब माँगेगा

“बेवकूफ और #तिये में धागे भर का फर्क होवे है। धागे के इंगे बेवकूफ और धागे के उंगे #तिया। और जो धागा खींच लो तो कौन बेवकूफ और कौन #तिया – करोड़ रुपये का प्रश्न है भईया।”

T20 वर्ल्ड कप 2026 चल रहा है। सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को इस वर्ल्ड कप में सिर्फ हराया नहीं, मसल दिया – खेलते हुए भी, खेल से बाहर भी। हिंदुस्तानी जनता खुश है। कोई खुश नहीं है तो वो है भारत की कथित सेकुलर मीडिया और इनके सेकुलर पाठक। क्योंकि इन्हें बेवकूफ और #तिये में फर्क पता ही नहीं है।

भारत मैच जीत गया, इससे Economic Times को मतलब नहीं। उसे मतलब है कि सूर्य कुमार यादव ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ क्यों नहीं मिलाया। तकलीफ इतनी है कि इस विषय पर ज्ञान देते हुए यहाँ तक लिख दिया कि इतिहास इसे कठोरता के साथ देखेगा, सवाल पूछेगा।

वैसे इतिहास होता क्या है – यह सवाल Economic Times को क्रिकेट और T20 वर्ल्ड कप 2026 के बजाय अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए। जब वो ऐसा करेंगे तो पाएँगे कि उनके Times of India ग्रुप के जो मालिक हैं, उन्होंने इतिहास में शुरू किया था ‘अमन की आशा’ वाला घटिया प्रोग्राम।

  • भारत पर आतंकी हमले हों
  • हर समय हमारे सैनिक बलिदान देते रहें
  • आम जनता आतंकी गोलियों की शिकार बनती रहे
  • पैंट खोल कर खतना देखने के बाद लोगों को इस्लामी आतंक का शिकार बनाया जाता रहे

यह सब कुछ चलता रहे लेकिन Times of India की ‘अमन की आशा’ बंद नहीं हो। पाकिस्तानी सिंगर-एक्टर-क्रिकेटरों को भारत में नौकरी मिलती रहे – यह है Economic Times के मालिक का इतिहास। इतिहास यह भी है कि Times of India ने ‘अमन की आशा’ वाली यह नौटंकी शुरू की थी पाकिस्तानी मीडिया हाउस ‘जंग समूह’ के साथ मिलकर। इसी मीडिया हाउस के Geo News ने ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत को लेकर क्या-क्या लिखा है, नीचे के स्क्रीनशॉट से पाठक समझ सकते हैं – यह और बात है कि धंधे के लिए Economic Times शायद ही समझे।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पाकिस्तानी वेबसाइट Geo News से संबंधित गूगल सर्च का स्क्रीनशॉट

अब करते हैं क्रिकेट की बात, सूर्य कुमार यादव की बात। करेंगे ईशान किशन की भी बात। और बात होगी शिवरात्रि की भी। वो इसलिए क्योंकि Economic Times से क्रिकेट और धर्म की समझ करना बेमानी है, देश-हित और राष्ट्रीयता तो खैर धंधे में सर से लेकर पाँव तक डूबा हुआ मीडिया हाउस क्या ही समझेगा और समझाएगा।

T20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच से पहले ही सूर्य कुमार यादव ने स्पष्ट कर दिया था कि मैच बराबरी वालों के बीच नहीं है। मतलब पाकिस्तानी क्रिकेटरों और पाकिस्तानियों को उन्होंने मैच से पहले ही औकात बता दी थी। मैच में मसल कर अपने इरादे पर मुहर भी लगा दी। लेकिन Economic Times को चाहिए था हाथ मिलाते ‘अमन की आशा’ वाला थीम – जो हो न सका। इंटरनेशनल भिखारियों से शायद कोई हाथ मिला भी ले… लेकिन हत्यारों से क्यों?

हत्यारा शब्द के लिए संदर्भ है: फाहिम अशरफ। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर इस पाकिस्तानी क्रिकेटर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली थी। जरा सोचिए क्रिकेट के कौन से ‘स्पिरिट ऑफ द गेम’ के तहत ऐसे खिलाड़ी वाले टीम से हाथ मिलाने की परंपरा निभाई जाए?

बात सिर्फ सूर्य कुमार यादव की नहीं है। पाकिस्तानियों को लेकर ईशान किशन क्या सोचते हैं, यह भी सुना जाए। और ईशान किशन ‘स्पिरिट ऑफ द गेम’ के तहत ऐसा सोचते हैं, यह भी नहीं है। वो ऐसा सोचने पर मजबूर हुए क्योंकि पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान कट्टर इस्लाम के नाम पर भारत के खिलाफ क्या-क्या करता रहा है, इससे वो वाकिफ हैं, आँख मूँद कर सब कुछ देखने वाले बेवकूफ नहीं हैं।

और हाँ, T20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान को रगड़-रगड़ के मसलने के बाद कप्तान सूर्य कुमार यादव ने जीत का जश्न कैसे मनाया? हर हर महादेव के उद्घोष के साथ। क्योंकि उनको याद था कि उनके देश के नागरिकों की हत्या धर्म देख कर की गई थी। इसलिए क्रिकेट तो एक माध्यम था, जीत तो धर्म को ही समर्पित थी। 

‘ओमकारा’ फिल्म का जो डायलॉग सबसे शुरू में लिखा गया है, वो Economic Times के लिए ही है। धागे की पहचान कर उन्हें अपना ऑप्शन तय करना है। पूरी भारतीय क्रिकेट टीम, कप्तान सूर्य कुमार यादव या ईशान किशन – किसी को भी दोनों ऑप्शन में से किसी से भी सलाह लेने की जरूरत नहीं है।

प्रियंका चोपड़ा के इंटरव्यू पर मचा बवाल, भारत के नक्शे से PoK गायब देख लोग भड़के: अभिनेत्री की चुप्पी पर नेटिजन्स ने पूछा- क्या तुम्हें इससे फर्क नहीं पड़ा

बॉलीवुड और हॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुकीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इन दिनों एक इंटरव्यू को लेकर सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गई हैं। इस इंटरव्यू में भारत का गलत नक्शा दिखाया गया, जिसके बाद नेटिजन्स ने प्रियंका चोपड़ा की चुप्पी को लेकर खूब आलोचना की। नेटिजन्स ने पूछा कि क्या भारत का गलत नक्शा दिखाने से प्रियंका चोपड़ा को फर्क नहीं पड़ता?

यह इंटरव्यू अंतरराष्ट्रीय एंटरटेनमेंट मैगजीन ‘वैरायटी’ (Variety) के लिए था, जिसमें एक ‘इंडियन और नॉट इंडियन’ (Indian or Not Indian) नाम का एक सेगमेंट था। इस वीडियो की शुरुआत में भारत का गलत नक्शा दिखाया गया, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत (PoK) को शामिल नहीं किया गया। यूट्यूब पर यह वीडियो अपलोड होते ही नेटिजन्स ने नाराजगी जाहिर की।

वीडियो की शुरुआत में दिखाया का भारत का गलत नक्शा (फोटो साभार: Youtube- Variety)

कुछ यूजर्स ने लिखा कि भारत का नक्शा गलत दिखाना गंभीर बात है। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि इंटरव्यू के दौरान प्रियंका चोपड़ा ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। कई लोगों ने सीधे उनसे पूछा कि क्या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया।

भारत के गलत नक्शे पर नेटिजन्स की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय मैगजीन ‘वैरायटी’ ने प्रियंका चोपड़ा के साथ इस इंटरव्यू का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किया है। इस वीडियो पर नेटिजन्स के भर-भरकर कमेंट सामने आए हैं, जिसमें भारत के गलत नक्शें को लेक आलोचना की जा रही है। इसी विवाद में प्रियंका चोपड़ा को भी घेरा गया है।

एक यूजर ने कमेंट किया, “शुरुआत में दिखाया गया भारत का नक्शा निश्चित रूप से भारतीय नहीं है!”

अन्य यूजर ने कमेंट किया, “वे बार-बार भारत का विकृत नक्शा क्यों दिखाते रहते हैं?”

एक यूजर ने लिखा, “ये पश्चिमी देश न तो हमारे नक्शे को समझते हैं और न ही हमारे देश के इतिहास को, जो वाकई बेहद निराशाजनक है… उम्मीद है प्रियंका इसे देखेंगी और समझेंगी। मेरा मतलब है कि उन्होंने कश्मीर और लद्दाख के आधे हिस्से को ही हटा दिया है, जो कि नियंत्रण रेखा (LOP) और संपर्क रेखा (LOC) पर है, लेकिन फिर भी भारत का अभिन्न अंग है। शुरुआत में दिखाया गया नक्शा निश्चित रूप से पूरे भारत को नहीं दर्शाता। यह वाकई बेहद असंवेदनशील है।”

एक यूजर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि एक भारतीय का इंटरव्यू करना, वो भी भारत के गलत नक्शे के साथ। उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है।

अन्य यूजर ने लिखा, “भारत का गलत नक्शा इस्तेमाल न करें। उस हिस्से को हटा दें या फिर भारत सरकार द्वारा जारी किया गया असली और सही नक्शा ही दिखाएँ।”

अन्य यूजर ने लिखा, “आप भारत का गलत नक्शा क्यों दिखा रहे हैं… यह हमारा अपमान है… किसी की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता… यह बात याद रखें।”

एक यूजर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि आप जानबूझकर भारत का गलत नक्शा लगा रहे हैं या नहीं, लेकिन यह बहुत ही अपमानजनक है और आपके परिचय वाले हिस्से में मुझे यह जानकारी नहीं मिल पाई।”

एक यूजर ने वीडियो को डिसलाइक कर दिया यह कहते हुए कि भारत का गलत नक्शा दिखाया गया है।

एक यूजर ने गुस्से में लिखा, “वीडियो से पहले और बाद में जो संगीत बजाया गया है, वह बिल्कुल भी भारतीय नहीं है और वीडियो में दिखाया गया नक्शा भी सटीक नहीं है। कश्मीर भारत का हिस्सा है। वह शानदार है, लेकिन संपादक बिल्कुल ही घटिया है।”

वीडियो में भारत के गलत नक्शा दिखाने से ज्यादा यूजर्श को इस बात से परेशानी हुई कि भारतीय होने के नाते प्रियंका चोपड़ा ने इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधी है। नेटिजन्स ने पूछा कि क्या प्रियंका चोपड़ा को इससे फर्क नहीं पड़ता है। बता दें कि 5 दिन पहले रिलीज हुए इस इंटरव्यू में भारत का गलत नक्शा दिखाने के बावजूद प्रियंका चोपड़ा या उनकी टीम की तरफ से कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई और न ही सार्वजनिक तौर पर कोई बयान जारी किया गया है। न ही अब तक मैगजीन ने कोई माफी माँगी है।

इंटरव्यू में प्रियंका चोपड़ा से भारतीय होने के नाते पूछे कई सवाल

दरअसल, वैरायटी ने प्रियंका चोपड़ा के साथ ‘इंडियन और नॉट इंडियन’ के इस सेगमेंट में भारत से जुड़े कई सवाल पूछे। उनसे अलग-अलग चीजों के बारे में पूछा जाता है कि वे चीजें भारतीय हैं या नहीं।

इंटरव्यू के दौरान प्रियंका से खाने-पीने की चीजों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े सवाल पूछे गए। उन्होंने मोर, योग, शतरंज, चाय, बासमती चावल, घी और बटर चिकन को भारतीय बताया। वहीं उन्होंने कहा कि चिकन टिक्का मसाला और चाय लाटे भारतीय नहीं माने जाते। वह सवालों के जवाब हल्के-फुल्के और मजेदार अंदाज में देती नजर आईं।

लेकिन वीडियो की शुरुआत में दिखाए गए भारत के नक्शे ने लोगों का ध्यान खींचा। नेटिजन्स ने वीडियो के कमेंट बॉक्स में बहस की। कुछ लोगों ने वीडियो के उस हिस्से को हटाने या सही नक्शा दिखाने की माँग की। हालाँकि अब तक कोई बयान या नक्शा हटाने की कार्रवाई नहीं हुई है।