केंद्र सरकार ने कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी पर बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय ने नियमों की अवहेलना करने के कारण यामिनी अय्यर के नेतृत्व में चलने वाले एक थिंक टैंक का फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) रद्द कर दिया है। बता दें कि यामिनी सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) नाम से एक थिंक टैंक संचालित करती हैं।
FCRA लाइसेंस निलंबित होने के बाद CPR अब विदेशों से फंड नहीं ले सकेगा। विदेशों से धन प्राप्त करने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को FCRA पंजीकरण कराना जरूरी होता है। सरकार को पता चला कि यह संस्था अनुदान हासिल करने में नियमों की लगातार अवहेलना कर रही है। CPR केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर लंबे समय से रहा है।
यामिनी अय्यर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। दरअसल, CPR का कार्यालय दिल्ली में है, जो 21वीं सदी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर कथित शोध का काम करता है। CPR को घरेलू तथा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भारी अनुदान मिलता है।
सितंबर 2022 में आयकर विभाग ने भी विदेशी फंडिंग को लेकर CPR का सर्वे किया था। मार्च 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CPR के FCRA लाइसेंस को 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया था। इतना ही नहीं, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) सहित कई एजेंसियों द्वारा इस थिंक टैंक की नियमित तौर पर जाँच और ऑडिट की गई। इसके बाद आखिरकार संस्था के लाइसेंस को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
मंत्रालय के मुताबिक, CPR को फोर्ड फाउंडेशन सहित कई विदेशी संस्थानों से फंडिंग मिली थी। इतना ही नहीं, गुजरात दंगे को लेकर देश में कई तरह की प्रोपेगेंडा फैलाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ की एनजीओ को भी यामिनी अय्यर के थिंक टैंक CPR ने चंदा दिया था। गृह मंत्रालय ने साल 2016 में तीस्ता के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।
दरअसल, समाज सेवा एवं शोध आदि के नाम पर चलने वाले एनजीओ कई तरह की गड़बड़ी और भारत विरोधी रूख के कारण चर्चा में रहे हैं। इनमें पर कई संस्थानों पर सरकार ने कार्रवाई भी की है। इनमें ऑक्सफैम इंडिया, न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक, बेंगलुरु स्थित मीडिया फाउंडेशन सहित कई संस्थान विदेशी फंडिंग को लेकर जाँच के दायरे में हैं। ऑक्सफैम इंडिया की FCRA लाइसेंस भी रद्द हो चुकी है।
अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को निर्माणाधीन राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। रामजन्मभूमि के लिए हुए 5 सदी तक संघर्ष के बाद आए इस अवसर पर देश और दुनिया भर के हिन्दू दीपावली जैसा पर्व मनाने की तैयारी में हैं। ऐसे में हिन्दू समाज उन तमाम बलिदानी रामभक्तों को याद कर रहा है जिन्होंने मुगल काल से मुलायम काल के बीच राम के नाम पर खुद को बलिदान कर दिया। उन तमाम रामभक्तों में से एक थे जयराज यादव।
जयराज यादव को 22 अक्टूबर, 1990 में बस्ती जिले के गाँव सांडपुर में गोली लगी थी। वो कारसेवकों की तलाश में गाँव में घुस कर अत्याचार कर रही पुलिस टीम का विरोध कर रहे थे। तब से जयराज यादव लगातार अस्वस्थ चल रहे थे। आखिरकार मई 2023 में उन्होंने प्राण त्याग दिए। ऑपइंडिया ने जयराज यादव के घर जाकर उनके परिजनों के वर्तमान हालात की जानकारी जुटाई।
तंगहाली में गुजारा कर रहा परिवार
बलिदानी जयराज यादव मूलतः बस्ती जिले के गाँव हेंगापुर के रहने वाले हैं। अभी उनके परिवार में लगभग 50 वर्षीया विधवा राधा यादव के अलावा 2 बेटियों खुशबू और चंचल के साथ 1 बेटा दुर्गेश है। जयराज के सभी संतानों की उम्र 18 से 24 साल के बीच है। जब ऑपइंडिया की टीम उनके घर पहुँची तब राधा और दुर्गेश कहीं बाहर गए थे। घर पर दोनों बेटियाँ मौजूद मिलीं। जयराज का घर बेहद गरीबी की हालत में गुजारा कर रहा है।
घर के कई हिस्सों में प्लास्टर भी नहीं लगा है। फर्श की जगह ईंट के कंकड़ बिछे मिले। रसोई का सामान भी अस्त-व्यस्त था। हालात ये थे कि बाहर से आए आगंतुकों के लिए उनके पास सिर्फ पानी भर था जो एक टूटे ग्लास में दिया गया था।
सिर में मारी गई थी गोली
दिवंगत जयराज की छोटी बेटी खुशबू यादव ने हमें बताया कि उनकी माँ ने बचपन में ही उन्हें रामजन्मभूमि को लेकर उनके पिता द्वारा किए गए कार्यों की सच्ची घटना सुनाई थी। तब गाँव सांडपुर में देश के अलग-अलग हिस्सों से कारसेवक आ कर रुकते थे। यहाँ ग्रामीण उन्हें खाना-पीना देने के बाद नाव से नदी पार करवा कर अयोध्या पहुँचाते थे। इस बीच किसी ने पुलिस को मुखबिरी कर दी। 22 अक्टूबर, 1990 को उनके गाँव में पुलिस ने सुबह-सुबह दबिश मार दी।
जब कारसेवक न मिलने पर महिलाओं और बच्चों को तंग किया जाने लगा तब ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। इस विरोध में जयराज यादव भी शामिल थे। पुलिस बल को अपना यह विरोध नागवार गुजरा। पैरामिलिट्री के साथ पुलिस बल ने तब गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी।
अपने पापा को याद कर के खुशबू यादव रो पड़ीं। खुद को सँभालते हुए उन्होंने आगे बताया कि पुलिस द्वारा चलाई गई गोली का छर्रा उनके पापा जयराज यादव के सिर में घुस गया। गोली लगते ही जयराज यादव घायल हो कर गिर पड़े। पुलिस टीम उन्हें उठा कर अपने साथ ले जाने के लिए बढ़ी। इस बीच कुछ ग्रामीणों ने घायल जयराज यादव को कंधे पर लादा और गोलीबारी से दूर ले जाने की कोशिश करने लगे। हालाँकि, पुलिस ने दौड़ा कर जयराज यादव को ग्रामीणों से छीन लिया।
घायल अवस्था में ही बिना बेहतर इलाज के जयराज यादव को जेल भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक, यहीं से सिर में घुसा गोली का छर्रा जयराज यादव के मस्तिष्क में मवाद बनाने लगा था। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि घायल होने के बावजूद जयराज को थाने में बेरहमी से टॉर्चर किया गया था।
गोली भी मारी और मुल्जिम भी बना दिया
जयराज यादव पर मुलायम सिंह यादव की सरकार उस समय दोहरी मार तब पड़ी जब उन्हें गाँव में पुलिस द्वारा किए गए उपद्रव में मुल्जिम बना दिया गया। यह मुकदमा तत्कालीन थाना प्रभारी दुबौलिया की तहरीर पर 23 अक्टूबर, 1990 को दर्ज हुआ था। लगभग हर जाति और वर्ग के कई अन्य ग्रामीणों के साथ जयराज यादव पर भी IPC की धारा 147, 149, 307, 332, 333, 353 और 336 के साथ 7 क्रिमिनल एक्ट लगाया गया था।
पहले से ही बीमार हालत में पड़े जयराज यादव को जब इसकी जानकारी हुई थी तब उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी। हालाँकि, उनके साथ गिरफ्तार हुए अन्य ग्रामीणों द्वारा दी गई हिम्मत के बाद वो कुछ हद तक सामान्य हुए थे।
1990 में जयराज यादव पर दर्ज FIR में उन्हें बताया गया मुल्जिम
घायल अवस्था में ही जयराज यादव को लगभग 1 माह तक जेल में रखा गया था। घर वालों ने ग्रामीणों के सहयोग से जैसे-तैसे उनकी जमानत करवाई। बेटे के ऊपर हुए अत्याचार से दुखी मुन्नीलाल यादव भी कुछ दिनों बाद कई बीमारियों से घिर गए। आखिरकार लगभग 20 साल पहले जयराज यादव के पिता मुन्नीलाल ने दम तोड़ दिया।
32 साल तक हर दिन लड़ी मौत से जंग
जयराज की बड़ी बेटी चंचल यादव ने हमें बताया कि सन 1990 में जब उनके पिता को गोली लगी थी तब से जयराज का इलाज लगातार चल रहा था। उन्होंने बताया कि गोली के कुछ छर्रे सिर में फँसे रह गए थे। इसी के चलते खोपड़ी के एक हिस्से में मवाद बन गई थी। बहुत इलाज के बाद भी जयराज पूरी तरह से कभी नहीं ठीक हो पाए। वो लगभग 32 साल जीवित रहे लेकिन कभी सामान्य रूप में नहीं आ सके।जयराज का इलाज बस्ती से ले कर लखनऊ तक हुआ लेकिन सिर में लगी गोली ने कभी उन्हें सामान्य नहीं होने दिया।
जयराज की छोटी बेटी खुशबू यादव ने हमें बताया, “पापा का लगभग हर दिन सिर जोर से दर्द करने लगता था। वो दर्द से चीखने लगते थे। कई बार तो बेहोश भी हो जाते थे। इसी वजह से उन्हें कहीं अकेले नहीं भेजा जाता था। होश में आने के बाद वो थोड़े समय नॉर्मल रहते थे लेकिन बाद में फिर अचानक दर्द उठने लगता था।” खशबू के मुताबिक, तमाम दवाएँ उनके पिता के इलाज में बेअसर रहती थीं। आखिरकार लम्बे समय तक मौत से लड़ते हुए जयराज यादव का 29 मई, 2023 को देहांत हो गया।
दिवंगत पिता को याद कर के आज भी रोने लगती हैं चंचल और खुशबू यादव
इलाज और मुकदमे में बिक गए गहने और खेत
दिवंगत जयराज यादव की छोटी बेटी खुशबू ने हमें बताया कि इस समय उनके परिवार की माली हालत बद से भी बदतर है। घर में खाने तक के लाले पड़े हैं। लगभग 30 साल तक चले जयराज के इलाज और चल रहे मुकदमे की वजह से परिवार के गहने और खेत भी बिक गए। इसके अलावा लाखों रुपए का कर्ज अलग से सिर पर चढ़ा है। कर्जदार आए दिन घर आते हैं और पैसे माँगते हैं। थोड़े बहुत खेत और एक घर बचा है जयराज यादव के आश्रितों के पास। परिवार का कहना है कि अगर उसे भी बेचने कि नौबत आई तो उन्हें सड़क पर सोना पड़ेगा।
जयराज यादव के घर के अंदर का दृश्य
बनना चाहती थीं डॉक्टर, पर छोड़ दी पढ़ाई
जयराज यादव की तीनों संतानों ने पढ़ाई छोड़ दी है। बेटा दुर्गेश यादव कहीं से छोटे-मोटे काम कर के परिवार की माली हालात सुधारने का प्रयास कर रहा है। वहीं दोनों बेटियों चंचल और खुशबू ने भी पैसों की तंगी से स्कूल जाना छोड़ दिया है। खुशबू यादव ने हमें बताया कि वो बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना पाल कर रखीं थीं लेकिन हालातों ने उन्हें स्कूल से ही दूर कर दिया। खुशबू ने बताया कि अब उनकी पहली प्राथमिकता माँ का हाथ बँटाना है। हालाँकि किसी मदद के मिलने के बाद दिवंगत जयराज यादव की बेटियाँ आज भी पढ़ कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हैं।
दिवंगत जयराज यादव का परिवार आज ही भगवान राम का उपासक है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को ले कर यह परिवार काफी खुश है। खुशबू और चंचल यादव ने कहा कि रामजन्मभूमि के लिए उनके पिता ने बलिदान दिया था। आज मंदिर निर्माण को जयराज यादव की बेटियाँ अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि मानती हैं।
मुंबई-बेंगलुरु स्पाइसजेट फ्लाइट में एक पैसेंजर को हवाई जहाज में टॉयलेट जाना भारी पड़ गया। यात्री को करीबन 1 घंटा 40 मिनट का सफर उसी टॉयलेट में बैठकर करना पड़ा। घटना मंगलवार (16 जनवरी, 2024) की है जब एक यात्री प्लेन के टॉयलेट में गया और उसका दरवाजा बंद किया।
बताया जा रहा है कि गेट बंद करते ही लॉक में कुछ खराबी आ गई जिसकी वजह से गेट ही नहीं खुल पाया। यात्री ने अंदर से केबिन क्रू को परेशान होकर आवाज दी। जब केबिन क्रू ने इसे सुना तो उन्हें टॉयलेट में यात्री फँसे होने के बारे में पता चला। क्रू की बेतहाशा कोशिशों के बाद भी टॉयलेट का दरवाजा नहीं खुला।
फ्लाइट के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (केआईए) पर लैंड होने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। वहाँ इंजीनियरों की दो घंटे की मशक्कत के बाद टॉयलेट का दरवाजा तोड़ा गया। तब कहीं जाकर पैसेंजर की जान में जान आई। सदमे में आए पैसेंजर को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया। फिलहाल पैसेंजर की पहचान जाहिर नहीं हो पाई है।
स्पाइसजेट ने भी इस घटना को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है। जानकारी के मुताबिक, यह वाकया फ्लाइट SG-268 में पेश आया। ये फ्लाइट मंगलवार सुबह 2 बजे मुंबई हवाई अड्डे से रवाना हुई थी। हालाँकि फ्लाइट का टेक ऑफ टाइम सोमवार 15 जनवरी, 2024 की रात 10.55 बजे का था।
On 16 January, a passenger unfortunately got stuck inside the lavatory for about an hour on SpiceJet flight operating from Mumbai to Bengaluru, while the aircraft was airborne due to a malfunction in the door lock. Throughout the journey, our crew provided assistance and guidance… pic.twitter.com/CfCDPDPCpI
केआईए ग्राउंड स्टाफ के एक सदस्य के मुताबिक, “यह पता था कि 14डी सीट पर बैठा यात्री प्लेन के टेक ऑफ करने और सीटबेल्ट साइन बंद होने के तुरंत बाद टॉयलेट गया था। दुख की बात है कि टॉयलेट का दरवाजा खराब होने की वजह से वह अंदर फँस गया।”
पैसेंजर की टॉयलेट से आ रही चिल्लाने की आवाजों ने क्रू का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने बाहर से दरवाजा खोलने की पुरजोर कोशिश की। जब क्रू को ये एहसास हो गया कि उनसे दरवाजा नहीं खुल पाएगा तो एयर होस्टेस ने कागज पर एक नोट लिख टॉयलेट के दरवाजे से इसे अंदर खिसका दिया।
नोट में लिखा था, “सर, हमने दरवाजा खोलने की पूरी कोशिश की, लेकिन हम नहीं कर सके। घबराओ नहीं। हम कुछ ही मिनटों में उतर रहे हैं, इसलिए कृपया कमोड का ढक्कन बंद कर दें और उस पर बैठ जाएँ और खुद को सुरक्षित कर लें। जैसे ही मेन दरवाजा खुलेगा, इंजीनियर आ जाएगा।”
फ्लाइट मंगलवार सुबह 3.42 बजे केआईए एयरपोर्ट पर लैंड हुई। फिर इसमें इंजीनियर चढ़े। उन्होंने दरवाज़ा तोड़ा और दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पैसेंजर को बचाया। एक अधिकारी ने कहा, “यात्री क्लॉस्ट्रोफोबिया की वजह से पूरी तरह से सदमे में था।”
वाराणसी के राष्ट्रीय हिन्दू दल ने अयोध्या के धन्नीपुर में बन रही मस्जिद में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की मूर्ति लगाने का ऐलान किया है। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मस्जिद में मुलायम की मूर्ति स्थापित किए जाने के समय अखिलेश यादव से मौजूद रहने को लेकर पत्र भेजा है।
रोशन पाण्डेय ने अखिलेश यादव को भेजे गए पत्र में लिखा है कि उनके ‘जन्नती पिता मुलायम सिंह’ जिन्दगी भर मुस्लिम समुदाय के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर ना बने, इसके लिए पूरे जीवन संघर्ष किया और कारसेवकों की लाशें बिछा दी। आगे रोशन पाण्डेय ने कहा है कि राम मंदिर में भले ही मुलायम सिंह यादव का कोई योगदान ना हो लेकिन अयोध्या के धन्नीपुर में कोर्ट के निर्णय से बन रही मस्जिद के निर्माण में उनका योगदान जरूर है।
रोशन पाण्डेय ने इसी योगदान के चलते उनको श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी एक मूर्ति इस मस्जिद में स्थापित करने की बात कही है। रोशन पाण्डेय ने कहा है कि इस मूर्ति का पत्थर किछौछा शरीफ दरगाह से मँगाया जाएगा। इसके बाद इस पत्थर को अजमेर शरीफ, हाजीअली, दारूल उलूम देवबंद और कलियर शरीफ जैसी दरगाहों के पानी से पाक किया जाएगा।
रोशन पाण्डेय ने कहा है कि इस दौरान वह उन मुस्लिम मौलानाओं को भी आमंत्रित करेंगे, जिनके साथ मुलायम सिंह यादव रोजा इफ्तारी करते थे। साथ ही रोशन पाण्डेय ने पूछा है कि यदि अखिलेश यादव चाहें तो दिल्ली की जामा मस्जिद से एक नमाजी टोपी मँगा कर भी मूर्ति के ऊपर रख दी जाएगी। पाण्डेय ने बताया है कि मुलायम सिंह की यह मूर्ति वैसी होगी, जैसे वह मुस्लिमों के साथ इफ्तारी में खजूर खाते हुए दिखते थे।
रोशन पाण्डेय ने कहा है कि मस्जिद में इस मूर्ति को लगाने का कार्यक्रम अखिलेश यादव के दिए हुए समय पर ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी अपील की है कि इस कार्यक्रम में फिलिस्तीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान और फिलिस्तीन-गाजा जैसे मुस्लिम देशों से मुस्लिमों को बुलाकर जय समाजवाद का नारा लगाया जाए।
रोशन पाण्डेय ने साथ ही में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और जमीयत उलेमा उल हिन्द से मस्जिद के प्रांगण में मुलायम सिंह की मूर्ति लगाने की अनुमति माँगी है। उन्होंने कहा है कि वैसे तो वो खुद ही सारा खर्चा उठाएँगे लेकिन कोई कुछ सहयोग दें, तो भी अच्छा रहेगा।
मस्जिद में मूर्ति लगाने पर उन्होंने कहा है कि हो सकता है कि AIMPLB और जमीयत को इससे ऐतराज हो क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता। लेकिन इसका जवाबी तर्क भी खुद ही दे डाला। रोशन पाण्डेय ने तर्क दिया है कि मस्जिद में मुलायम सिंह की मूर्ति से कोई भी समस्या नहीं होनी चाहिए क्योंकि मुहम्मद अली जिन्नाह की तस्वीर AMU में लगी रहे, इसको लेकर काफी बवाल हुआ था। साथ ही उन्होंने कर्नाटक में टीपू सुल्तान की मूर्तियों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने इन दोनों संगठनों से यह अपील भी की है कि वह इस मस्जिद का नाम ‘मुलायम मस्जिद’ रख दें।
गुजरात के वडनगर में ईसा से 800 साल पहले के मानवों के रहने के सबूत मिले हैं। वडनगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृहनगर है। सामने आया है कि यहाँ आज से 2800 साल पहले भी मानव रहा करते थे। यह शोध भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री (PRL) ने किया है। इसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं।
शोधकर्ताओ ने बताया है कि यहाँ की बसावट में सात सांस्कृतिक चरण होने की जानकारी मिली है। डॉ आनिन्द्य चक्रबर्ती ने मीडिया को बताया कि यहाँ 2016 से खुदाई चल रही है, अब तक उनकी टीम 20 मीटर की खुदाई कर चुकी है। चक्रबर्ती IIT खड़गपुर में भूगर्भ विज्ञान के प्रोफ़ेसर हैं।
#WATCH | Gujarat: Remains of a 2800-year-old settlement found in PM Narendra Modi's village, Vadnagar. pic.twitter.com/Fefjt7Dn9Z
वडनगर में मिली इस मानव बस्ती के विषय में एक विज्ञान पत्रिका में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओ ने बताया है कि यहाँ मौर्यकाल, इंडो-ग्रीक, शक-क्षत्रप, हिन्दू सोलंकी, सुल्तानी-मुग़ल और गायकवाड-ब्रिटिश कल के साथ ही आज के समय तक मानव रह रहे हैं। यहाँ एक बुद्ध मठ भी मिला है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि इसी खुदाई के साथ ही वडनगर भारत की सबसे पुरानी बसावट बन गई है जो आज भी उसी तरह बसी हुई है। यहाँ से सोना, चाँदी, लोहा और ताम्बे की वस्तुओं के भी अवशेष मिले हैं।
शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यहाँ मिले अवशेषों की कार्बन डेटिंग से पता चला है कि यह 3400 वर्ष पुराने तक हो सकते हैं। अगर यह बात पूरी तरह से सिद्ध हो जाती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में बीते 5000 सालों से सभ्यता लगातार चली आ रही है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बात सिद्ध हो जाने से कथित ‘डार्क एज‘ का दावा भी तोड़ा जा सकेगा। भारतीय इतिहास में सिन्धु घाटी सभ्यता के पतन और महाजनपद काल के उदय के बीच को डार्क एज बताया जाता है। इस काल में भारतीय भूभाग में क्या हुआ इसकी जानकारी काफी कम मिलती है।
शोधकर्ताओं ने बताया है कि भारत पिछले 2200 वर्षों में अनेकों बाह्य आक्रमण झेलता आया है। वडनगर में हुई खुदाई में इसके भी सबूत मिलते हैं। बताया गया है कि यहाँ पर 1 लाख से अधिक अवशेष प्राप्त हुए हैं और 30 से अधिक स्थानों पर खुदाई हुई है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म वडनगर में ही हुआ था। यहाँ वह बचपन में अपने पिता के साथ स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। वडनगर प्रधानमंत्री के बचपन के समय काफी छोटा क़स्बा हुआ करता था, हालाँकि अब यह एक शहर बन गया है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता महुआ मोइत्रा का कैश फॉर क्वेरी केस में सांसदी जाने के बाद भी दिल्ली के सरकारी बंगले का मोह छुटाए नहीं छूट रहा है। अब थक हारकर संपदा निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स) ने मंगलवार (16 जनवरी,2024) को उन्हें सरकारी बंगले से बेदखल करने का नोटिस जारी किया।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व टीएमसी एमपी महुआ मोइत्रा से सांसद के तौर पर उन्हें आवंटित हुए सरकारी बंगले को तुरंत खाली करने को कहा गया है। बंगले को जल्द खाली कराने के लिए एक टीम बुधवार (17 जनवरी 2024) को उनके सरकारी आवास पर भेजी जाएगी।
बताते चलें कि उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद संसद की हाउसिंग कमिटी ने महुआ को एक महीने के अंदर 7 जनवरी 2024 तक बंगला खाली करने को कहा था।
बकायदा महुआ को 11 दिसंबर 2023 को केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने पत्र भेजकर इस आदेश से अवगत कराया था। इसके बाद 12 दिसंबर को उन्हें तीसरा नोटिस दिया गया, लेकिन इस आदेश को चुनौती देने के लिए वो 18 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट जा पहुँची थीं।
दिल्ली HC में डाली गई याचिका में महुआ ने कहा था, ”उन्हें (महुआ को) सरकारी घर खाली करने का आदेश वक्त से पहले दिया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता के निष्कासन की वैधता अभी देश के सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।”
दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई याचिका में महुआ ने डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के 11 दिसंबर के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो कम से कम उन्हें उनके सरकारी आवास में वैकल्पिक तौर पर 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे आने तक रहने की मंजूरी दी जाए।
हाई कोर्ट को दी गई याचिका में टीएमसी नेता महुआ ने ये तक कह डाला, “मुझे 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर पहली बार लोकसभा भेजा गया था। टीएमसी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी वहाँ से अपना उम्मीदवार बनाया है।”
इस पर हाई कोर्ट ने उन्हें 4 जनवरी 2024 को सुनवाई का वक्त दिया था। महुआ की अर्जी पर सुनवाई के बाद जज ने बताया कि केंद्र सरकार की संपत्ति के लिए निदेशालय में आवेदन किया जाना चाहिए, कोर्ट इसमें कुछ नहीं कर सकता।
इसके बाद महुआ के वकील ने केस वापस ले लिया था। ये वही बंगला है, जिसके लिए मोइत्रा ने कहा था कि इसके हालत खराब होने पर इसे ठीक कराने के लिए वो दर्शन हीरानंदानी से संपर्क साधी थीं। बताते चलें कि दर्शन हीरानंदानी ने कहा था कि महुआ मोइत्रा ने अपने सरकारी आवास की मरम्मत के लिए भी उनसे पैसे लिए थे।
अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इसके बावजूद इंडी गठबंधन और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भगवान राम को अपमानित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे। इसी क्रम में अब कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार में मंत्री और कॉन्ग्रेस का बड़ा क्षेत्रीय नेता केएन राजन्ना का भी नाम जुड़ गया है। केएन राजन्ना ने कहा है कि बीजेपी भगवान राम के नाम पर लोगों को धोखा दे रही है। उन्होंने कहा कि वो अयोध्या जा चुके हैं और वहाँ मस्जिद में 2 गुड़ियों को राम कहा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16 जनवरी को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने कहा कि बीजेपी भगवान राम के नाम पर लोगों को धोखा दे रही है। उन्होंने अपने बयान में भगवान राम की तुलना ‘तंबू में रखी गुड़िया’ से कर दी।
राजन्ना ने दावा किया कि जब 1991 में बाबरी ढाँचा ढहाया गया था, तब वो अयोध्या गए था। उन्होंने कहा, “हिंदुओं ने तंबू में गुड़िया रखी और उसे राम मंदिर कह दिया।” राजन्ना ने अयोध्या के मंदिर को पवित्र मानने से इनकार करते हुए कहा कि अयोध्या से ज्यादा पवित्र राम मंदिर अन्य जगहों पर हैं।
राजन्ना ने कहा, “हमारे देश में हजारों साल पुराने ऐतिहासिक राम मंदिर हैं, जो ज्यादा पवित्र हैं। अब बीजेपी चुनाव के लिए मंदिर बना रही है। बीजेपी लोगों को धोखा दे रही है।”
राजन्ना ने आगे कहा, “जब बाबरी को गिराया गया, तो मैं वहाँ गया था। उन लोगों ने तंबू में दो गुड़िया रख दी और उन्हें राम कहना शुरू कर दिया। हम जब राम मंदिर जाते हैं, तो एक पवित्र अहसास होता है, लेकिन अयोध्या में मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ। ये टॉकीज में रखी गुड़िया को देखने जैसा था।”
इस मामले में बीजेपी की नेता मालविका अविनाश ने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मालविका अविनाश ने कहा कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक और मानसिक तौर पर दिवालिएपन की शिकार हो चुकी है।
बता दें कि इंडी गठबंधन के नेता लगातार राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दे रहे हैं। कुछ समय पहले ही शिवसेना नेता संजय राउत ने दावा किया था कि राम लला के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बन रहा है, बल्कि मूलस्थान से 4 किलोमीटर दूर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।
राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा-काशी को लेकर अपना पक्ष साफ कर दिया है। उन्होंने बताया है कि अयोध्या को लेकर कहा गया था- रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे, तो अब मंदिर वहीं पर बन रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अयोध्या के लिए कानून लड़ाई लड़ी गई वैसे ही मथुरा-काशी के लिए न्यायालय के सामने सबूत दिए जाएँगे, फिर जो फैसला होगा उसे माना जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये सारी बातें आजतक को दिए इंटरव्यू में कहीं। यहाँ वह अयोध्या को एक नगरी न मानकर पूरे विश्व की राजधानी बताते दिखे। वहीं उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट के संजय राउत के आरोपों का भी जवाब दिया जिसमें कहा जा रहा था कि राम मंदिर का गर्भगृह ठीक स्थान पर नहीं बना है। सीएम योगी ने राउत के सवालों पर कहा कि प्रभु राम का मंदिर ठीक उसी जगह पर बनाया है जहाँ उसे होना चाहिए था।
सीएम योगी बोले कि संजय राउत और उद्धव ठाकरे तो खुद इसके दर्शन कर चुके हैं। अगर उन्हें ऐसा कुछ लगा था तो उन्होंने पहले सुझाव क्यों नहीं दिया। अब अंगूर खट्टे हैं तो कोई भी बोल सकता है। सीएम योगी ने ये भी कहा कि हमारी पूरी लड़ाई वही थी- रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे। अब मंदिर वहीं उसी जगह बन रहा है। वेदों में अयोध्या को सप्तपुरियों में से प्रथम पुरी के रूप में सम्मानित किया गया है, अयोध्या उसी रूप में सुसज्जित हो रही है।
उन्होंने अयोध्या में आए बदलाव की बात करते हुए कहा कि 10 साल पहले तक कोई सोचता भी नहीं था कि यहाँ फोर लेन सड़क बनेगी। मगर आज शहर के पास सुख सुविधाओं से लैस रेलवे स्टेशन है, जो कि एक समय में छोटी सी रेल लाइन हुआ करता था। यहाँ अयोध्या में इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बनकर तैयार है। सरयू नदीं पर पहले सरकारे गोलियाँ चलवाती थीं, अब यहाँ क्रूज चलते हैं।
मथुरा काशी पर जब सीएम से सवाल हुआ तो उन्होंने कहा, “ये विषय अभी न्यायालय में है। हमने रामलला के लिए 500 सालों तक संघर्ष किया। हमने मर्यादित ढंग से ही न्याय और सत्य की विजय प्राप्त करने के बाद ही रामलला का मंदिर बना रहे हैं। ऐसे ही हम इस मामले को भी न्यायालय के जरिए ही हल करेंगे। हम हर सबूत कोर्ट के सामने रखेंगे और अपनी लड़ाई लड़ेंगे।”
जब उनसे कृष्ण मंदिर की तारीख पूछी गई तो इस पर सीएम योगी ने कहा सब कुछ कानूनी तरीके से किया जाएगा। प्रभु की तारीख हम कैसे तय कर सकते हैं। जब प्रभु की इच्छा होगी तब ये सब हो जाएगा।
राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को पॉलिटिकल इवेंट बताने पर सीएम योगी ने कहा कि अगर ये पॉलिटिकल इवेंट है तो कॉन्ग्रेस को ऐसा करने से किसने रोका था। 1948 से एक लंबे समय तक देश में सरकारें चलाई हैं। उन्होंने ऐसा कोई इवेंट क्यों नहीं किया। राहुल गाँधी तो 2004 से सांसद हैं और काफी समय से सरकार पीछे से चलाते आए हैं, उन्हें ऐसा इवेंट करने से किसने मना किया था। सीएम योगी ने कहा कि राहुल गाँधी हमेशा बस भारत के संविधान का अपमान करने वाले इवेंट करते आए हैं।
ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुस कर एक आतंकी समूह पर हमला किया है। यह हमला 16-17 जनवरी, 2024 की रात को ईरान ने बलूचिस्तान के एक क्षेत्र में किया। ईरान ने पाकिस्तान के भीतर यह हमला जैश-अल-अदल नाम के एक इस्लामी आतंकी समूह के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया।
ईरान की अर्ध सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने इस हमले की जानकारी दी है। तस्नीम ने बताया है कि ईरानी सेना ने ड्रोन और मिसाइल हमले के जरिए बलूचिस्तान प्रांत में कोह-सब्ज इलाके में यह हमला किया जिसमें जैश-अल- अदल के आतंकी ठिकाने तबाह किए गए।
ईरान का कहना है कि बलूचिस्तान का यह इलाका आतंकियों के लिए पनाहगाह का काम कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान का यह हमला बलूचिस्तान के अंदर एक मस्जिद पर हुआ। ईरान ने अभी इस हमले में मारे गए लोगों के विषय में कोई जानकारी नहीं दी है।
वहीं ईरान का कहना है कि जैश-अल-अदल इस्लामी आतंकी समूह ने दिसम्बर, 2023 में ईरान के हिस्से में पड़ने वाले बलूचिस्तान प्रांत में एक पुलिस थाने पर हमला किया था। इस हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए थे। पाकिस्तान के भीतर किया गया हमला इसी के बाद सामने आया है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ईरान के इस कृत्य पर विरोध जताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में एक बयान जारी किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, “पाकिस्तान ईरान द्वारा उसके हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की कड़ी निंदा करता है, इस हमले में दो बच्चों की मौत हुई है जबकि तीन बाच्चियाँ घायल हुई हैं।”
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Pakistan’s Strong Condemnation of the Unprovoked Violation of its Air Space
आगे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने लिखा, “पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन अस्वीकार्य है और इसके बुरे अंजाम हो सकते हैं। यह सबसे अधिक चिंता की बात है कि ईरान ने यह तब किया है जब पाकिस्तान और उसके बीच बातचीत के कई चैनल मौजूद हैं।”
पाकिस्तान ने इस मामले में ईरान से अपना विरोध दर्ज करवाया है। उसने ईरान के राजदूत को भी विदेश मंत्रालय तलब किया है। पाकिस्तान का कहना है कि इस इलाके में आतंकवादी घटनाएँ सबके लिए खतरा हैं। इसका जो भी अंजाम होगा उसके लिए ईरान जिम्मेदार होगा।
जिस आतंकी समूह जैश-अल-अदल को ईरान ने निशाना बनाया है, उसने बताया कि ईरान ने 6 ड्रोन के माध्यम से यह हमला किया। यह आतंकी समूह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की आजादी के लिए लड़ने का दावा करता है। यह सुन्नी इस्लामी आंतकी समूह है जबकि ईरान शिया बहुल राष्ट्र है।
2012 में बनाया गया यह आतंकी समूह जब तब ईरान के भीतर हमला करता है। इसका निशाना ईरान के वह शहर होते हैं जिनकी सीमा पाकिस्तान से लगती है। वह यहाँ सुरक्षा बलों पर हमला करके पाकिस्तान भाग जाते हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा कई जगह पर हुई है, इससे तस्करी और आतंकियों का प्रसार होता रहता है।
Honoured to call on the President of the Islamic Republic of Iran Dr Ebrahim Raisi @raisi_com.
Conveyed the greetings of PM @narendramodi. Expressed condolences over the Kerman attack.
Apprised him of my productive discussions with the Iranian Ministers. Value his guidance… pic.twitter.com/veugg7rVwg
गौरतलब है कि पाकिस्तान पर ईरान ने यह हमला ऐसे समय में किया है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ईरान के दौरे पर गए हुए थे। जयशंकर ने 15 जनवरी, 2024 को ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी से मिले और 16 जनवरी की देर रात ईरान ने पाकिस्तान में घुस कर हमला कर दिया।
केरल हाई कोर्ट ने एक याचिका खारिज कर दी है, जिसमें फिल्म ‘एंटनी’ के एक दृश्य को चुनौती दी गई थी। इस दृश्य में एक बंदूक को ईसाइयों के धार्मिक किताब बाइबिल में छिपाया गया था। याचिकाकर्ता जोजी वर्गीस ने तर्क दिया था कि यह दृश्य ईसाई धर्म की अवमानना करता है। उन्होंने कहा था कि बाइबिल एक पवित्र किताब है और इसे इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए।
जोजी वर्गीस बनाम केरल राज्य केस की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने मौखिक रूप से कहा, “क्या हमें इतना असहिष्णु होना चाहिए कि किसी पुस्तक के एक संक्षिप्त संदर्भ पर भी आपको आपत्ति उठानी पड़े? भले ही वह बाइबल ही क्यों न हो, क्या आपको आपत्ति जताने के लिए किसी नकारात्मक सन्दर्भ या अर्थ की आवश्यकता नहीं है?”
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दृश्य केवल कुछ क्षणों का था और ये फिल्म की कहानी के लिए आवश्यक था। इस दृश्य को अन्य फिल्मों में भी इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा, “बाइबिल में बंदूक रखना एक ऐसी चीज है जो 60 और 70 के दशक में अंग्रेजी सिनेमा में कई बार किया गया है। मलयाली ये काम अब कर रहे हैं।”
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने मौखिक रूप से कहा, “बाइबिल का उपयोग बंदूक छिपाने के लिए किया जाता है, इसलिए ईसाई नाराज हो जाएँगे। अगर गीता में छिपाया जाए तो हिंदू नाखुश होंगे। यदि यह कुरान है तो मुस्लिम नाखुश होंगे।” उन्होंने कहा कि फिल्म को पहले ही सेंसर बोर्ड पास कर चुका है और इसमें बाइबिल को ब्लर करके दिखाया गया है।
जज ने कहा, “इस याचिका से सिर्फ फिल्म निर्माताओं को ही फायदा होगा। क्या उन्होंने आपसे यह याचिका दायर करने के लिए कहा था? यह कौन सी फिल्म है? एंटनी? क्या किसी ने इसे देखा है? इस फिल्म की जाँच सेंसर बोर्ड पहले ही कर चुका है।” जज ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता को विश्वास है कि दिखाई की किताब बाइबिल ही है। अब इस मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
बता दें कि एंटनी फिल्म 1 दिसंबर 2023 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देश जोजीय ने किया है। वो मलयालम सिनेमा के बड़े डायरेक्टरों में शुमार हैं। इस फिल्म में जोजू जॉर्ज, कल्याणी प्रियदर्शन, चेम्बन विनोद जोसे जैसे सितारे मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कोई खास बिजनेस नहीं किया है।