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आयु: 5 साल, ऊँचाई: 51 इंच, वजन: 200 किलो… जानिए भगवान रामलला की मूर्ति की हरेक बात, आप के लिए ट्रस्ट लेकर आया है खास हैशटैग

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की जिस मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठित किया जा रहा है, उस मूर्ति को कर्नाटक के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है। कृष्णशिला पर बनाई गई इस मूर्ति का वजन 150 से 200 किलोग्राम है। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भक्तों से अपील की है कि सभी लोग भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा से जुड़ी अपनी भावनाओं का वीडियो बनाएँ।

ट्रस्ट ने लोगों से यह भी कहा है कि उस वीडियो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर #ShriRamHomecoming हैशटैग के साथ शेयर करें। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया, “कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा कृष्णशिला पर निर्मित मूर्ति का चयन भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह के रूप में प्रतिष्ठित होने हेतु किया गया है।”

रामलला की जिस मूर्ति को चुना गया, जानिए उसकी खास बातें

मैसूर (कर्नाटक) के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने पाँच वर्षीय रामलला की 51 इंच ऊँची श्यामल (सांवली) मूर्ति बनाई थी। इसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के 11 ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से चुना है। हालाँकि, अब तक रामलला की ये तस्वीर बाहर नहीं आई है। उम्मीद है कि सारी दुनिया रामलला को 22 जनवरी 2023 को ही देख पाएगी।

पाँच साल के बाल रूप में रामलला
रामलला की मूर्ति की ऊँचाई 51 इंच है
रामलला की मूर्ति का वजन करीब 200 किलो
श्यामल वर्ण के हैं रामलला
योगीराज ने 9 माह में बनाई रामलला की प्रतिमा

पाँच पीढ़ियों से मूर्ति बनाता है योगीराज परिवार

अरुण योगीराज का परिवार पाँच पीढ़ियों से मूर्तिकला के क्षेत्र में है। उन्होंने केदारनाथ में लगी आदि शंकराचार्य की मूर्ति को भी बनाया है। वहीं, दिल्ली में लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति को भी उन्होंने ही बनाया है। उनके परिवार द्वारा संरक्षित इस मूर्तिकला को मैसूर राजपरिवार का आश्रय प्राप्त रहा है।

अरुण योगीराज शुरू में मूर्ति बनाने को ही जीवन-यापन का जरिया नहीं बनाना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने एमबीए की शिक्षा प्राप्त की और फिर कुछ समय प्राइवेट नौकरी भी की। हालाँकि, कुछ ही समय में उनका मन प्राइवेट नौकरी से हट गया और उन्होंने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

राम तीर्थ क्षेत्र ने की खास अपील

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक अपील सभी लोगों से की है। आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया है, “प्रभु श्री राम अपनी जन्मस्थली पर पाँच शताब्दियों के पश्चात पुन: पधार रहे हैं। इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए सम्पूर्ण ब्रह्मांड उत्सुकता से प्रतीक्षा में है। प्रभु श्री राम के स्वागत की भव्यता को बढ़ाने के लिए हम दुनिया भर के सभी रामभक्तों से एक लघु वीडियो के माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन के बारे में अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त करने का आग्रह करते हैं।”

पोस्ट में आगे कहा गया है, “आप ये वीडियो अपने पूरे नाम, जगह और संक्षिप्त व्यक्तिगत नोट के साथ #ShriRamHomecoming लिखकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर सकते हैं। आइए, सभी मिलकर सामूहिक रूप से एकता के सबसे बड़े सूत्रधार भगवान श्रीराम के आगमन का उत्सव मनाएँ।”

बता दें कि आज (16 जनवरी 2024) से रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। अयोध्या में भगवान राम के जन्मभूमि पर भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत प्रायश्चित पूजा के साथ शुरू हुई। उसके बाद कर्मकूटि पूजन हुआ। 17 जनवरी को रामलला की मूर्ति को मंदिर परिसर में लाया जाएगा। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को 12.20 बजे से प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम होगा।

प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जैसे गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा है कि भगवान राम की जिस मूर्ति की अभी पूजा हो रही है, उनकी भी पूजा जारी रहेगी। उन्हें मूल मूर्ति के साथ ही गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

रातभर लाशों को रौंदती रही गाड़ियाँ, सुबह ऊँगली और कान से पता चला ये भी मानव थे: सड़क से खुरचकर निकालने पड़े अवशेष

सोमवार (15 जनवरी 2024) तक वे भी हमारी-आपकी तरह ही हाड़-माँस के इंसान थे। उनकी भी एक पहचान थी। लेकिन मंगलवार की सुबह तक कुछ नहीं बचा था, क्योंकि रात भर गाड़ियाँ इनकी लाशों को रौंदती रही। ऊँगली और कान देखकर लोगों को सुबह पता चला कि सड़क से चिपक गए अवशेष किन्हीं इंसानों के ही हैं। पुलिस को इन अवशेषों को खुरच-खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा।

ये कौन थे इसका पता लगाना तो बाद की बात है। ये लाशें पुरुषों की है या महिलाओं की यह भी पोस्टमार्टम से ही पता चल पाएगा। यह भी कि मरने वाले की उम्र क्या थी। इनमें से एक घटना गाजियाबाद की है तो दूसरी आगरा की।

एक लाश गाजियाबाद-हापुड़ हाइवे से बरामद की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वेव सिटी थाना क्षेत्र में सद्भावना कट के नजदीक यह दुर्घटना हुई थी। मंगलवार की सुबह सैर करते कुछ लोगों की नजर सड़क पर गई तो दुर्घटना का पता चला। करीब जाने पर ऊँगलियों से पता चला कि रात के समय दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि एक्सीडेंट के बाद इस व्यक्ति की लाश को रात भर वाहन रौंदते रहे, क्योंकि कोहरा घना था।

वेव सिटी पुलिस के अनुसार मौके से कुछ सिर के बाल, एक ऊँगली और कान का टुकड़ा मिला है। इसे भी खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा। मृतक के शरीर का कोई भी हिस्सा पूरा नहीं मिला है। यहाँ तक कि कपड़े भी नहीं। पुलिस के अनुसार कोहरे के कारण CCTV फुटेज से भी कुछ पता नहीं चल रहा। अब शिनाख्त के लिए आसपास के थानों से मिसिंग लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

इसी तरह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भी दुर्घटना हुई। मरने वाले को रातभर गाड़ियों ने इस तरह रौंदा कि मंगलवार की सुबह शव के अवशेष सड़क से चिपके हुए थे। बताया जा रहा है कि सड़क पर 10 मीटर तक शव के अवशेष बिखरे पड़े थे।फावड़े से खुरचकर अपशेष इकट्ठे किए।

रिपोर्ट में प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह के हवाले से बताया गया है कि टोल के आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला है कि 40 साल का एक विक्षिप्त युवक इस इलाके में घूमता था। ग्रामीण उसे खाने देते थे। माना जा रहा है कि रात में सड़क पार करते समय यही युवक किसी वाहन की चपेट में आ गया होगा।

जिस अयोध्या में जन्मीं अनुष्का शर्मा वहाँ से मुंबई उनके घर पहुँचा न्योता, प्राण-प्रतिष्ठा का निमत्रंण स्वीकार करते समय विराट कोहली भी थे साथ

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी अभिनेेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा को 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण मिला है। यह आमंत्रण कोहली के मुंबई स्थित आवास पर दिया गया। निमंत्रण-पत्र प्राप्त करने के लिए वह इंदौर से मुंबई पहुँचे थे। बताते चलें कि अनुष्का शर्मा का जन्म अयोध्या में ही हुआ है।

बताया जा रहा है कि राम मंदिर का आमंत्रण प्राप्त करने के लिए विराट कोहली विशेष रूप से मुंबई गए थे। वह आमंत्रण प्राप्त करने के बाद बेंगलुरु के लिए निकल गए। बेंगलुरु में वह भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरिज में हिस्सा लेंगे।

विराट कोहली से पहले अन्य कई भारतीय क्रिकटरों को भी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आमंत्रण दिया गया। अब तक सचिन तेंदुलकर और पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में आने का आमंत्रण दिया गया है।

मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए यह आमंत्रण विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी लेकर पहुँच रहे हैं। आमंत्रण श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र की तरफ से दिए जा रहे हैं, जो इस निर्माणाधीन मंदिर के प्रबन्धन के लिए उत्तरदायी संस्था है।

एक ख़ास बात यह है कि अगर ये सेलिब्रिटी कपल मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होते हैं तो यह एक संयोग भी होगा। दरअसल, अनुष्का शर्मा का जन्म राम की नगरी अयोध्या में ही हुआ था। उनका जन्म यहाँ के सेना अस्पताल में वर्ष 1988 में हुआ था। दरअसल, अनुष्का के पिता भारतीय सेना के डोगरा रेजिमेंट में थे।

जब अनुष्का का जन्म हुआ था, तब उनके पिता अजय शर्मा की तैनाती अयोध्या में स्थित डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में थी। भारतीय सेना के प्रसिद्ध डोगरा रेजिमेंट का मुख्यालय अयोध्या में ही है। इसका मुख्यालय पहले मेरठ में हुआ करता था, लेकिन बाद में वर्ष 1976 में इसे अयोध्या शिफ्ट कर दिया गया।

अयोध्या में 22 जनवरी के प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। प्राण प्रतिष्ठा के लिए होने वाली पूजा का आज (16 जनवरी, 2024) से प्रारम्भ भी हो गई है। 22 जनवरी को इस पूजा में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी समेत तमाम साधु संत और बड़ी हस्तियाँ शामिल होंगी।

अभी तो अनुष्ठान शुरू हुआ है आरफा और तुम लगी छटपटाने

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जब देश भर में हर्षोल्लास का माहौल है उस समय में कुछ लोग बिलबिलाए घूम रहे हैं। लोकतंत्र के नाम पर, संविधान की आड़ में इन्हें अपनी नफरत को जायज ठहराना है। जैसे, आरफा खानम शेरवानी को ही देख लीजिए। आजीवन निष्पक्ष पत्रकारिता के नाम पर इस्लाम की बात करने वाली आरफा अब प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तारीख नजदीक आते देख झुंझलाई हुई हैं।

उन्हें समस्या हो रही है इस बात से कि आखिर चारों ओर इतना राम का नाम लिया जा रहा है, क्यों मीडिया सिर्फ अयोध्या की कवरेज करने में लगा है, क्यों प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं, क्यों बीजेपी इसका प्रचार कर रही है, क्यों हिंदू कार्यकर्ता अपनी रामभक्ति दिखा रहे हैं और क्यों उनका प्रोपगेंडा अब फल फूल नहीं रहा।

उनकी ये सब झुंझलुहाट द वायर पर डली उनकी वीडियो में देखने को मिली। यहाँ उन्होंने आवाज में दम लगाकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और इसकी क्लिप शेयर करके फिर अपने ट्वीट में लिखा,

“ताकि सनद रहे: भारत एक संप्रभु,समाजवादी,धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है जिसने सभी नागरिकों को सुरक्षित करने का संकल्प लिया है। विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता देने वाला देश है। आज सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग रामनामी चादर ओढ़कर संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।”

आरफा की यह चिंता अचानक नहीं जगी है। जब-जब हिंदुओं ने अपनी पहचान और धर्म के लिए आवाज उठाई है, तब-तब उन्हें चारों ओर डर का माहौल नजर आया है और अब जब हर दिशा में राम नाम की गूंज है तो वह ये सब कैसे बर्दाश्त कर लें… यही वजह है वह उस संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने लगीं, जिसके दम पर हिंदुओं ने भगवान श्रीराम का मंदिर बनवाया है मगर आरफा इस तथ्य को भूली बैठी हैं। आरफा को उस कानूनी लड़ाई का ख्याल नहीं है जो हिंदुओं ने दशकों तक लड़ी और तब जाकर अपने प्रभु को उनका उचित स्थान दिला पाए।

आरफा वीडियो में जोर देकर धर्म को निजी मामला बताती हैं लेकिन अजीब बात ये है कि यही आरफा ये वाकया इससे पहले दोहराती कभी नहीं दिखीं। चाहे कोई सड़क घेरकर नमाज पढ़े चाहे कोई ट्रेन रोककर। आरफा को वहाँ संविधान और लोकतंत्र की बात याद नहीं आती। लेकिन कोई अगर उन्हें ये सब करने से रोक दे तो उन्हें देश का अल्पसंख्यक जरूर खतरे में लगने लगता है।

आरफा खानम शेरवानी कभी लव जिहाद जैसे मुद्दों पर भी नहीं बोलतीं जहाँ साफ तौर पर धर्मांतरण पर जोर दिया जाता है, क्या तब आरफा जैसी मुस्लिम महिला पत्रकारों को ये ज्ञान नहीं देना चाहिए कि मजहब तो निजी मसला होना चाहिए और क्यों सैंकड़ों लड़कियों को धोखे से फँसाकर मुस्लिम बनाया जा रहा है।

उनको संविधान, कानून और धर्म- निजी आस्था का विषय जैसी बातें तब नहीं समझ आती हैं जब इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ हाथ में चाकू तलवार लेकर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए सड़कों पर आती है और फिर कभी दिल्ली दंगा होता है तो बेंगलुरु में हिंसा।

आरफा की आवाज का बेस उस समय भी गायब रहता है जब कोई सरकार, पार्टी, उसके नेता बड़ी-बड़ी इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं और इस्लामी टोपी पहन उसमें शिरकत करते हैं। क्या तब ये इतना बुद्धिजीवी होने के नाते दर्शकों को समझाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए कि एक समुदाय को खुश करने के लिए आखिर क्या किया जा रहा है, इससे हिंदुओं की भावना आहत हो सकती है….या ये सारा ज्ञानभंडार केवल हिंदुओं के लिए, भाजपा के लिए, प्रधानमंत्री मोदी के लिए ही है।

आरफा खानम चाहती हैं कि इस राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में पीएम मोदी भाग ही न लें। जबकि ऐसा वो क्यों करें इस बात का आरफा के पास जवाब नहीं है। राम मंदिर शुरू से ही भाजपा के लिए एक बड़ा मुद्दा रहा था। आज जब उनके कार्यकाल में वो कार्य पूरा हो रहा है तो वो इसमें क्यों न शामिल हों, क्यों अपनी खुशी न दिखाएँ।

वह खुद कहती हैं कि भारत देश धर्मनिरपेक्ष है और सबको पूजा का अधिकार है। तो, क्या इस देश के प्रधानमंत्री को अधिकार नहीं है कि वो अपने धर्म का अनुसरण करें। अगर पीएम मोदी को देश का ‘प्रधान’ मंत्री होने के नाते वहाँ पूजा पाठ करने का अवसर मिल रहा है तो क्या सिर्फ वो इसलिए छोड़ दें कि आरफा जैसे लोग नाराज हो जाएँगे। क्या प्रधानमंत्री देश के नागरिक नहीं हैं, उनकी कोई निजी आस्था नहीं है?

हर वीडियो में जब खुद को सच्चा, निष्पक्ष पत्रकार बताकर पूरे करियर भर इस्लाम की बातें कर सकती हैं, गलत को सही और सही को गलत होने के तर्क दे सकती हैं तो प्रधानमंत्री तो सिर्फ सनातन का पालन ही कर रहे हैं।

ज्यादा वक्त नहीं बीता है जब आरफा ने सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों की आग में घी डालने का काम किया था और मुस्लिमों को ज्ञान दिया था कि उन्हें अपनी स्ट्रैटेजी बदलने की जरूरत है। क्या उन्हें पत्रकार होने के नाते देश के हर नागरिक की आवाज नहीं बनना चाहिए था? वो क्यों एक ही समुदाय को उनकी स्ट्रैटेजी बदलकर बात मनवाने की तरकीब सिखा रही थीं?

दरअसल, आरफा जैसों के लिए परेशानी ये है कि आज के समय में जैसे-जैसे हिंदू अपने धर्म के लिए जागरूक हो रहा है उनके सेकुलर होने की परिभाषा भी उसके सामने स्पष्ट हो गई है। इतने सालों से खुद को ‘सेकुलर’ कहकर हर कट्टरपंथी कृत्य को धो-पोंछने का काम किया जा रहा था, और ऐसा माहौल बनाया जा रहा था कि हिंदू अपने हिंदू होने पर ही शर्मिंदा होने लगे।

अब वो वक्त बदला। हिंदू के मन में लालसा जगी ये जानने की आखिर अयोध्या का नाम फैजाबाद कैसे पड़ा, कैसे रामजन्मभूमि पर बाबरी का ढाँचा खड़ा हुआ तो इन्हीं आरफा जैसे लोगों का ये सेकुलरिज्म खतरे में आ गया। आज एक राम मंदिर बन जाने से मुस्लिमों की भावना आहत होने की बात करने वाली आरफा खानम, क्या तब हिंदुओं की भावनाएँ आहत नहीं हुईं होंगी जब इस्लामी आक्रांताओं ने हिंदुओं के मंदिर पर हथौड़े चलाए होंगे। उनके देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित किया होगा।

एक बार सोच के देखिए भारत में इस्लामी आक्रांताओं के आने से पहले यहाँ सनातन का स्वर्णिम इतिहास था जिसे मिटाने का काम होता रहा। आपसे कोई पूछे कि आप क्यों नहीं आवाज उठातीं उस समय हिंदुओं पर हुई बर्बरता पर तो आप क्या जवाब देंगी…

ये सारी बातें सिर्फ इसलिए याद दिलाईं है ताकि आपको भी सनद रहे हिंदुओं ने राम मंदिर कानूनी लड़ाई से लिया है। वो संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहकर अपने प्रभु के मंदिर बनने का उत्सव मना रहे हैं। मथुरा-काशी अभी शेष हैं और शेष हैं वो सारे धर्मस्थल… जिनका नामों-निशान एक जमाने में मिटाने का प्रयास हुआ, और देश का तथाकथित सेकुलर आजादी के बाद उसपर चुप रहा। हिंदू अपनी आस्था से जुड़ी हर बात साबित करने के लिए कोई गैर लोकतांत्रिक कदम नहीं उठा रहा उनका हर तरीका कानून के दायरे में रहकर है इसके लिए इतनी तिलमिलाहट अच्छा नहीं है।

आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी मंदिर पहुँचे पीएम मोदी, किया दर्शन और सुनी चौपाइयाँ: जानिए अयोध्या से इस स्थान का क्या है कनेक्शन

अयोध्या में नवनिर्मित भगवान राम के मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी में स्थित वीरभद्र मंदिर में दर्शन करने पहुँचे। रामायण में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले इस मंदिर में प्रधानमंत्री काफी देर तक रुके। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में जाने के बाद रामायण के तेलुगु स्वरुप रंगनाथ रामायण से चौपाइयाँ भी सुनीं।

लेपाक्षी शहर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित है और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। लेपाक्षी धार्मिक एवं ऐतिहासिक वैभव से भरपूर एक नगर है। यह भारत की समृद्ध वास्तुकला और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ भगवान श्रीराम लगभग मृतप्राय जटायु से मिले थे।

राक्षस रावण वह माता सीता को अपहृत करके लंका ले जा रहा था, उस दौरान जटायु ने बड़ी वीरता से लड़ाई लड़ी थी। बताया जाता है कि लेपाक्षी में ही जटायु ने प्रभु राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण को बताया था कि माता सीता का अपहरण कर रावण लंका ले गया है। जटायु ने प्रभु राम से कहा था कि उन्हें माता सीता के पास पहुँचने के लिए समुद्र तट की तरफ बढ़ना चाहिए।

लेपाक्षी में स्थित जटायु की एक मूर्ति (चित्र साभार: NDTV)
लेपाक्षी में स्थित जटायु की एक मूर्ति (चित्र साभार: NDTV)

इस नगर का नाम लेपाक्षी तेलुगु भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है, ‘उठो हे पक्षी’। यह जटायु को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने माता सीता को राक्षस रावण द्वारा अपहरण किए जाने से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस नगर में कई हिन्दू मंदिर हैं। यह मंदिर पौराणिक महत्व के हैं।

यहाँ भगवान शिव, विष्णु, पापनाथेश्वर, रघुनाथ श्रीराम और अन्य देवताओं के मंदिर हैं। यहाँ मंदिरों पर की गई नक्काशी और इनकी विहंगमता देखकर श्रद्धालु चकित हो जाते हैं। वीरभद्र मंदिर के खम्भों पर महीन नक्काशी हो या फिर दुनिया के सबसे बड़े नंदी की मूर्ति, विजयनगर राजवंश के कारीगरों का शिल्प कौशल यहाँ की शोभा बढ़ा रहा है।

वीरभद्र मंदिर (चित्र साभार: The Hindu)
वीरभद्र मंदिर (चित्र साभार: The Hindu)

लेपाक्षी में आकर्षण का मुख्य केंद्र वीरभद्र मंदिर है, जिसे सामान्यतः लेपाक्षी मंदिर के नाम से ही जाना जाता है। यह मंदिर भारत की अद्भुत शिल्पकला के इतिहास का प्रमाण है। यह मंदिर चट्टानों को काटकर बनाया गया है। यह विजयनगर साम्राज्य की भव्यता को भी दिखाता है।

लेपाक्षी मंदिर तब की कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह मंदिर उत्कृष्ट भित्तिचित्रों से भी सुसज्जित है। मंदिर परिसर का एक हिस्सा एक चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है, जिसे कुर्मासैलम के नाम से जाना जाता है। यह हिस्सा कछुए के आकार की तरह दिखता है।

हवा में झूलता स्तम्भ (चित्र साभार: Anicient Origins)
हवा में झूलता स्तम्भ (चित्र साभार: Anicient Origins)

मंदिर के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक ‘हवा में झूलता स्तम्भ‘ है। यह मंदिर के अन्य स्तम्भों जैसा ही है, लेकिन यह भूमि को नहीं छूता है। इस मंदिर में माता सीता के पदचिह्न मिलने की भी बात कही जाती है। यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की भव्यता को दर्शाता है, जो कि कभी दक्षिण के बड़े हिस्से पर राज किया करता था। विजयनगर साम्राज्य ने अपने पूरे राज्य में मंदिर बनवाए थे।

विजयनगर साम्राज्य ने ही वीरभद्र मंदिर की दीवालों पर भी भित्ति चित्र बनवाए थे। मंदिर की दीवालों पर बने भित्ति चित्र माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान शिव, संतों और संगीतकारों के चित्र दर्शाता है। मंदिर के अन्दर 70 स्तम्भ मौजूद हैं, जबकि इसके अंदर स्थित एक गुफा संत अगस्त्य का निवास स्थान मानी जाती है।

यहाँ साँप की एक प्रसिद्ध मूर्ति भी है, जिसे माना जाता है कि मूर्तिकारों के दोपहर के खाने के दौरान एक ही चट्टान से बनाया गया था। इसके अलावा, पास की पहाड़ियों पर पापनाथेश्वर, रघुनाथ, श्रीराम और दुर्गा के मंदिर बने हुए हैं। इन पहाड़ियों को कुर्मासैला के नाम से जाना जाता है।

केरल के त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में पूजा करेंगे पीएम मोदी, भगवान राम की 6 फीट ऊँची है प्रतिमा: द्वापर और द्वारका से है कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश और केरल के दौरे पर हैं। वे बुधवार (17 जनवरी 2024) को केरल पहुँचेंगे और सुबह त्रिशूर जिले के गुरुवयूर मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद वो त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर जाएँगे। इस मंदिर में भगवान राम की की पूजा होती है और यहाँ उनकी 6 फुट ऊँची प्रतिमा स्थापित है, जिसका कनेक्शन भगवान कृष्ण, द्वारका और गुजरात से भी है।

गुरुवयूर मंदिर में सुबह करेंगे पूजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 7.30 बजे त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवयूर मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। भगवान विष्णु के कृष्णावतार को समर्पित इस मंदिर को वैष्णवों का खास तीर्थस्थल माना जाता है। इसमें गैर-हिंदुओं का प्रवेश भी वर्जित है। माना जाता है कि गुरुवयूर मंदिर को भूलोक वैकुंठ (पृथ्वी पर स्वर्ग) की संज्ञा दी जाती है। ये वैष्णवों के 108 अभिमान क्षेत्रों में से एक है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर पहुँचेंगे।

भगवान राम को समर्पित है त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर

त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर भगवान राम को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान राम की 6 फुट ऊँची प्रतिमा है। इस मंदिर के मुख्य देवता राम हैं, जो विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनकी चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष और माला हैं। भगवान राम यहाँ राजघराने के पीठासीन देवता हैं, जिन्हें ‘ब्रह्मांड में सभी देवताओं से ऊपर’ का स्थान दिया गया है।

भगवान राम को यहाँ पर त्रिप्रयार थेवर या त्रिप्रयारप्पा के रूप में भी जाना जाता है। यह मंदिर करुवन्नूर नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिप्रयार से बहते हुए थेवरा नदी कहा जाता है। मंदिर परिसर में भगवान राम के साथ-साथ दक्षिणमुखी शिव, गणेश और कृष्ण के मंदिर स्थापित हैं। यहाँ हनुमान की भी पूजा होती है। इस मंदिर का संबंध द्वापर युग में भगवान कृष्ण से भी जोड़ा जाता है।

मुख्य पुजारी थराननेल्लूर पदिनजारे मन पद्मनाभन नंबूथिरीपाद ने 1 जनवरी 2024 को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंदिर आने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण द्वारा गुजरात के द्वारका में भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की मूर्तियों को समुद्र से निकालकर एक ही समय में स्थापित किया गया था। द्वारका के चारों कोनों पर भगवान राम के चारों भाइयों के मंदिर बनाए गए थे।

केरल का प्रमुख नालंबलम

केरल में नालंबलम का मतलब है कि एक खास क्षेत्र में राजा दशरथ के चारों पुत्रों के अलग-अलग मंदिर। इसमें त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर से जुड़े समूह को प्रमुख माना जाता है। त्रिप्रयार से 20-22 किलोमीटर की दूरी पर इरिंजलाकुडा में कूडलमानिक्यम मंदिर है, जो राम के भाई भरत का मंदिर है। लक्ष्मण का मंदिर थिरुमुझिकुलम में है। वहीं, पायम्मल मंदिर को शत्रुघ्न का मंदिर माना जाता है।

कहा जाता है कि अगर मलयालम माह कड़कडकम के किसी भी एक दिन में कोई अगर इन मंदिरों में पूजा कर ले, वो बहुत किस्मत वाला होता है। चूँकि चारों मंदिरों की आपस में दूरी लगभग 20-22 किलोमीटर है। ऐसे में ये कठिन व्रत माना जाता है। केरल में 4 अन्य नालंबलम भी हैं। हालाँकि, वो अपेक्षाकृति कम मशहूर है।

ज्ञानवापी ढाँचे में जहाँ मिला शिवलिंग, उस जगह की साफ-सफाई की सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को दी अनुमति: मजिस्ट्रेट करेंगे निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 जनवरी 2024) को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे में स्थित शिवलिंग वाले स्थान को साफ़ करवाने की अनुमति हिन्दू पक्ष को दे दी। इस जगह को मुस्लिम पक्ष वुजुखाना (पानी का टैंक) कहता है, जहाँ नमाज पढ़ने से मुँह और हाथ-पैर धोया जाता है। यहाँ से मई 2022 में सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला था। अब यहाँ वाराणसी के डीएम की उपस्थिति में सफाई करवाया जाएगा।

हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ज्ञानवापी में शिवलिंग वाले स्थान पर सफाई की माँग 12 जनवरी 2024 को हुई सुनवाई में की थी। हिन्दू पक्ष का कहना था कि यहाँ शिवलिंग मिलने के बाद पानी के इस टैंक को सील कर दिया गया है। सील होने के कारण इसकी सफाई नहीं हो पाई है और इसमें मौजूद मछलियाँ मर गई हैं। इससे दुर्गन्ध फैल रहा है।

हिन्दू पक्ष ने कहा कि यहाँ मछलियों की मौत 12 से 25 दिसम्बर 2023 के बीच हो गई है। इससे यहाँ काफी गंदगी हो गई है। जहाँ मछलियाँ मरी हैं, वहाँ पर हिन्दुओं के लिए आराध्य शिवलिंग मौजूद है। श्रद्धा के चलते इस क्षेत्र को साफ रखा जाना चाहिए। इसीलिए यहाँ सफाई की अनुमति दी जाए। साफ-सफाई की इस याचिका का मुस्लिम पक्ष ने विरोध नहीं किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हिन्दू पक्ष ने मछलियों के मरने के लिए मस्जिद की अंजुमन इस्लामिया कमिटी को जिम्मेदार ठहराया है। हिंदू पक्ष ने कहा कि अंजुमन इस्लामिया कमिटी पर इस पूरे परिसर के प्रबन्धन का प्रभार है। इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए उस जगह की सफाई की अनुमति दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद टैंक को साफ करवाने की अनुमति दे दी। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से भी यही माँग की गई थी कि यहाँ सफाई की अनुमति दी जाए। मुस्लिम पक्ष ने भी पूर्व में ऐसी ही एक याचिका दायर की थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में स्थित हिंदुओं के प्रसिद्ध धर्मस्थली वाराणसी में 16 मई 2022 को ज्ञानवापी का सर्वे पूरा किया था। इस दौरान पत्थर का स्तंभ मिला था, जो शिवलिंग जैसा दिखता है। इसे हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने का दावा किया था। शिवलिंग उस स्थान से मिलने का दावा किया गया था, जहाँ पर नमाज से पहले वज़ू किया जाता था।

इसके बाद इस मामले में दायर की गई याचिकाओं पर वाराणसी के जिला न्यायालय ने 21 जुलाई 2023 को निर्णय सुनाते हुए ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जरिए सर्वेक्षण करवाए का आदेश दिया था। इस फैसले के विरुद्ध मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट भी गया था, लेकिन सर्वे जारी रखा गया था।

ASI के सर्वे के दौरान हिन्दू पक्ष ने दावा किया था कि परिसर में खंडित मूर्तियाँ, टूटे हुए पिलर, खंडित कलाकृतियाँ, त्रिशूल के कई चिह्न और कलश आदि मिले हैं। हालाँकि, ASI ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की थी। ASI ने यह सर्वे पूरा करके अपनी रिपोर्ट 18 दिसम्बर 2023 को न्यायालय को सौंप दी है।

जैन संतों का स्वागत कर रहे थे श्रद्धालु, ट्रक ने आकर रौंद दिया; कई की हालत नाजुक: Video वायरल, जैन समाज ने बताया षड्यंत्र

राजस्थान के पाली जिले के एक शहर में जैन श्रद्धालुओं के एक समूह पर मिनी ट्रक चढ़ाने का मामला सामने आया है। इस घटना में कुछ श्रद्धालु घायल हो गए हैं, जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। इस घटना से जैन समाज बेहद नाराज है और इसे ‘अनूप मंडल’ की साजिश बता रहा है। पुलिस ने ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। राजस्थान में एक महीने में जैन संतों पर हमले का यह दूसरा मामला है।

जानकारी के अनुसार, पाली जिले के तखतगढ़ में जैन संतों के नगर प्रवेश का कार्यक्रम 12 जनवरी 2024 को चल रहा था। यह कार्यक्रम तखतगढ़ के पीएल मिस्त्री सर्कल पर हो रहा था। यहाँ कई जैन श्रद्धालु इन संतों के नगर प्रवेश कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आए हुए थे। ये कार्यक्रम जैन मुनि तपोरत्न सूरी आचार्य महाराज के नेतृत्व में पाली से जालौर के लिए निकला था।

जैसे ही जैन संन्यासी और श्रद्धालु यहाँ से आगे बढ़े, वैसे ही एक सफ़ेद रंग का मिनी ट्रक भीड़ को चीरता हुआ आया और कई श्रद्धालुओं को चपेट में ले लिया। इस दौरान चीख-पुकार मच गई। श्रद्धालुओं पर चढ़ने के बाद भी यह ट्रक नहीं रुका और वह वहाँ से भाग निकला। पता चला है कि यह तखतगढ़ बाजार से सामान लेकर जा रहा था।

इस घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। फुटेज में दिख रहा है कि जैन श्रद्धालु सड़क पर खड़े हैं, इसी बीच एक मिनी ट्रक लोगों को कुचलता हुआ आगे निकल जाता है। लोग इस ट्रक से बचने के लिए इधर-उधर भागने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते हैं।

बताया गया है कि ट्रक चढ़ने के कारण कुछ महिलाओं सहित चार लोग शामिल हैं। इसमें से एक महिला के हाथ में गंभीर चोट आई है, जबकि एक महिला का पैर टूट गया है। कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद सुमेरपुर और अहमदाबाद के लिए रेफर कर दिया गया है। वहीं, पुलिस ने इस घटना को ट्रक का ब्रेक फेल होने से जोड़ा है।

इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज करके ट्रक के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है। जैन समाज के लोगों ने इसे साजिश बताया है। जैन शासन रक्षार्थ समिति के अध्यक्ष कल्पेश ने बताया कि जैन साधुओं पर इस तरह के हमले लगातार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस ने सामान्य धाराओं में केस दर्ज किया है। 

जैन साधुओं के खिलाफ साजिश

पाली के श्री संघ सभा से जुड़े जैन समाज के कई लोग 15 जनवरी 2024 को आईजी से मिले और इसमें षडयंत्र की आशंका जताई। उनका कहना था कि ट्रक ड्राइवर ने जानबूझ कर जैन साधुओं पर ट्रक चढ़ाया है। इसके बाद ट्रक के मालिक को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, ट्रक का ड्राइवर अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है।

जैन समाज के संतों पर हमले का एक महीने में यह दूसरा मामला है। इससे पहले भीनमाल थाना इलाके के रामसिंह गाँव में महाराज तपोरत्न सूरी पर बोलेरो चढ़ाने की कोशिश की गई थी। जैन समाज के लोगों ने इस घटना के पीछे ‘अनूप मंडल’ का हाथ होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अनूप मंडल जैन विरोधी है और साधुओं की जान के पीछे पड़े हैं।

क्या अनूप मंडल

दरअसल, अनूप मंडल कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि एक समूह है जो जैन और बनिया समाज की खिलाफत करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1909 में अनूप दास नाम के साधु ने ‘जगतहितकारिणी’ नाम से एक किताब लिखी थी, जिसमें जैन और वैश्य समाज के खिलाफ गलत बातें लिखी है। बाद में उनके अनुयायियों ने आश्रम खोले और संगठन बनाए। इनका प्रभाव राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक में है।

अनूप दास के अनुयायियों के समूह को ही अनूप मंडल कहा जाता है। ये गुट मानता है कि संसार में जो कुछ भी गलत हो रहा है, उसके पीछे जैन और बनिए शामिल हैं। अनूप मंडल से जुड़े लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि दुनिया के किसी कोने में जैन लोगों ने एक राक्षसी दुनिया बनाई हुई है और वहाँ से ये लोग दुनिया में महामारी छोड़ते हैं।

पैसे लेकर सेक्स कर लो… लक्षद्वीप में सैनिक अनवर आलम ने 13 साल के बच्चे को दिया था लालच, केरल HC ने बेल से किया साफ मना

केरल हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप के अनवर हुसैन नाम के एक सैनिक की जमानत याचिका ठुकरा दी है। अनवर पर आरोप है कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग बालक को सेक्स करने के लिए पैसे का लालच दिया। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अनवर को बेल देने से मना किया।

जानकारी के अनुसार, लक्षद्वीप के अमीनी गाँव में रहने वाले अनवर हुसैन टी पर आरोप है कि उसने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को पैसों का लालच दिया कि वह उनके साथ सेक्स कर ले।

इस मामले में नाबालिग लड़के के परिजनों ने पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया। हालाँकि, कोर्ट के सामने अनवर हुसैन ने कहा कि जिस नाबालिग लड़के के साथ सेक्स करने के लिए पैसे का लालच देने का आरोप उस पर लगाया गया है, उसके परिवार से उनका विवाद है।

अनवर ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसे पारिवारिक विवाद में फँसाने के लिए ऐसा किया गया है। अनवर के ऊपर POCSO के तहत मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। इसीलिए उसने केरल हाई कोर्ट के सामने जमानत याचिका लगाई थी।

गौरतलब है कि लक्षद्वीप का परिक्षेत्र केरल हाई कोर्ट के अंतर्गत आता है। हाई कोर्ट ने अनवर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। केरल हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही जज सोफी थॉमस ने कहा, “एक सैनिक होने के कारण आरोपित (अनवर) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को और गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनसे यह आशा की जाती है कि वह देश के नागरिकों के सम्मान की रक्षा करेंगे।”

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में जाँच चल रही है और अगर अनवर के ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं तो एक सैनिक होने के नाते यह बड़ी ही अभद्र और सैन्य अफसर के व्यवहार के विपरीत होगी। कोर्ट ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनवर को जमानत देने से मना कर दिया।

प्रायश्चित पूजा, कर्मकूटि पूजा… अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा का यज्ञ आरंभ, जानिए रामलला से किस बात के लिए माँग रहे क्षमा: PM मोदी नहीं होंगे मुख्य यजमान

अयोध्या में भगवान राम के नवनिर्मित भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। आज मंगलवार (16 जनवरी 2024) से शुरू यह अनुष्ठान 22 जनवरी 2024 को संपन्न होगा। इस संपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या में ‘प्रायश्चित पूजा’ के साथ की गई है। प्रायश्चित पूजा को मुख्य यजमान द्वारा किया जाता है। इसे विशेष पूजा माना जाता है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का मुख्य यजमान बनाया गया है। उन्हें इस पूरे कार्यक्रम के दौरान न सिर्फ मौजूद रहना है, बल्कि उन्हीं के हाथों से सभी कार्यक्रम संपन्न कराए जाएँगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यजमान के तौर पर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान अनुष्ठान करेंगे। इसके वो कड़े व्रत का पालन भी कर रहे हैं।

क्या है प्रायश्चित पूजा?

प्रायश्चित पूजा के माध्यम से रामलला से क्षमा माँगी जा रही है। ये क्षमा प्रतिमा बनाने के दौरान छेनी-हथौड़ी या किसी भी वजह से उन्हें जो चोट लगी होगी, उसके लिए माँगी जाती है। प्रायश्चित पूजा के लिए यजमान को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। मुख्य यजमान को 10 विधि से स्नान कराया जाया है। उनमें सबसे पहले गोमूत्र से स्नान कराया जाएगा। उसके बाद गोमय, गोदुग्ध, गोदधि, गोघृत, कुशोदक, भस्म, मिट्टी और शहद से स्नान कराए जाने के बाद अंत में पवित्र जल से स्नान कराया जाएगा।

यजमान के स्नान इत्यादि के दौरान प्रायश्चित पूजा से जुड़े मंत्रोच्चार और अंगभूत हवन होता रहता है। हवन के बाद मुख्य यजमान पंचगव्य का प्राशन करते हैं। तब जाकर मुख्य यजमान इस पूरे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए योग्य होते हैं। प्रायश्चित पूजा के दौरान गोदान भी किया जाता है। इसके अलावा द्रव्य (मुद्रा) दान, स्वर्ण दान भी करना होता है। इस पूरे अनुष्ठान में लगभग 2 घंटे का समय लगता है। इसके बाद कर्मकूटि पूजन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए अयोध्या में होंगे। इसके लिए वे खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर शुद्ध रखने के लिए 11 दिनों का व्रत कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर के तीन दिन लकड़ी से बनी चौकी पर केवल कंबल बिछाकर सोएँगे।

इन तीन दिनों पीएम मोदी सिर्फ फलाहार करेंगे। खुद पीएम मोदी ने इस बात की जानकारी माँगी थी कि उन्हें व्रत से जुड़ी जानकारियाँ दी जाए। वो कठिन से कठिन व्रत करने को भी तैयार हैं। ऐसे में पीएम मोदी को जाप के लिए विशेष मंत्रों की भी जानकारी दी गई है।

कर्मकूटि पूजन

कर्मकूटि पूजन उस पूजन को कहा जाता है, जिसमें मुख्य हवन वाली वेदी को जागृति किया जाता है। इस पूजन के पश्चात ही मंदिर और प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रम की शुरुआत होती है। प्रायश्चित पूजा भगवान से क्षमा और यजमान को तैयार करने के लिए होती है। कर्मकूटि पूजन कार्यक्रम के साथ ही अनुष्ठान को मुख्य मंदिर में किया जाता है। कर्मकूटि पूजन में भगवान विष्णु का आह्वान किया जाता है। इस पूजन के बाद ही अन्य वेदियों को जागृत किया जाता है।

22 जनवरी तक होंगे ये अनुष्ठान

16 जनवरी: प्रायश्चित और कर्मकूटि पूजन
17 जनवरी: मूर्ति का परिसर प्रवेश
18 जनवरी (सायं): तीर्थ पूजन, जलयात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास
19 जनवरी (प्रातः): औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास
19 जनवरी (सायं): धान्याधिवास
20 जनवरी (प्रातः): शर्कराधिवास, फलाधिवास
20 जनवरी (सायं): पुष्पाधिवास
21 जनवरी (प्रातः): मध्याधिवास
21 जनवरी (सायं): शय्याधिवास

भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा योग का शुभ मुहूर्त, पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी, विक्रम संवत 2080, यानी सोमवार (22 जनवरी, 2024) को है। सभी शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए, प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अभिजित मुहूर्त में संपन्न किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व शुभ संस्कारों का प्रारंभ 16 जनवरी 2024 से शुरु हो गया है, जो 21 जनवरी 2024 तक चलता रहेगा। इसके बाद 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

समारोह के अनुष्ठान की सभी प्रक्रियाओं का समन्वय, समर्थन और मार्गदर्शन करने वाले 121 आचार्य होंगे। इस संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान गणेश्वर शास्त्री द्राविड सभी प्रक्रियाओं की निगरानी, समन्वय और दिशा-निर्देशन कर रहे हैं। वहीं, काशी के लक्ष्मीकांत दीक्षित मुख्य आचार्य के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।