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लोकसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस को एक और बड़ा झटका: मिलिंद देवड़ा ने पार्टी ने नाता तोड़ा, कभी राहुल गाँधी के थे बेहद करीबी

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान आधिकारिक रूप से कर दिया है। इस बात की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की है। मिलिंद अब ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह वाली कतार में शामिल हो गए हैं।

मिलिंद ने एक्स पर लिखा, “आज मेरी राजनीतिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। मैंने अपने परिवार की पार्टी के साथ 55 वर्ष पुराने रिश्ते को खत्म करते हुए कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। मैं वर्षों से लगातार समर्थन के लिए सभी साथी नेताओं, सहकर्मियों और कार्यकर्ताओं का आभारी हूँ।”

47 वर्षीय देवड़ा UPA-2 सरकार में संचार और IT मामलों के राज्यमंत्री थे। उनके पास जहाजरानी विभाग भी था। वह UPA-2 के सबसे युवा मंत्रियों में से एक थे। साल 2011 में जब उन्हें मंत्री बनाया गया था, तब उनकी आयु मात्र 35 वर्ष थी। वह राहुल गाँधी की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य माने जाते थे।

मिलिंद देवड़ा का कॉन्ग्रेस से काफी पुराना रिश्ता रहा है। उनके पिता मुरली देवड़ा भी कॉन्ग्रेस से कई बार सांसद रहे थे। मिलिंद के पिता मुरली देवड़ा UPA-1 और 2 सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मामलों के कैबिनेट मंत्री थे। मिलिंद के जाने से पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान महाराष्ट्र और विशेष कर मुंबई में उठाना पड़ेगा।

मिलिंद और उनके पिता मुंबई दक्षिण सीट से सांसद रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वह 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी यही सीट माँग रहे थे। हालाँकि, अभी इस सीट पर शिवसेना (उद्धव) के प्रमोद सावंत सांसद हैं। इसलिए यह सीट, गठबंधन के बँटवारे में शिवसेना को जानी थी।

मिलिंद देवड़ा, मुंबई की कारोबारी बिरादरी में कॉन्ग्रेस के लिए काफी उपयोगी थे। उनका परिवार अम्बानी, महिंद्रा और मुंबई के अन्य बड़े कारोबारी समूहों का नजदीकी रहा है और इसका फायदा पार्टी को भी मिला है। देवड़ा परिवार गाँधी परिवार का भी काफी करीबी रहा है।

मिलिंद 2009 से लेकर 2014 तक चली UPA-2 सरकार में राहुल के करीबी कुछ नेताओं में माने जाते थे। हालाँकि, राहुल और मिलिंद के बीच 2014 के बाद से खटपट की खबरें आनी चालू हो गई थीं। इसके बाद कई मौकों पर देखा गया कि मिलिंद ने कॉन्ग्रेस की पार्टी लाइन छोड़ कर कुछ प्रश्न उठाए।

साल 2014 की हार के बाद मिलिंद ने कहा था कि राहुल गाँधी को सलाह देने वाले ऐसे लोग हैं, जिन्हें चुनाव का कोई अनुभव नहीं है। उनका कहना था कि उनको सलाह देने के साथ सलाह लेने वाले भी जिम्मेदार माने जाने चाहिए। इसके बाद मिलिंद देवड़ा को कॉन्ग्रेस में हाशिए पर धकेल दिया गया था।

अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मिलिंद देवड़ा शिवसेना (शिंदे) में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, उन्होंने 13 जनवरी 2023 को इन खबरों को गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि यह सब कुछ अफवाह है। यह बात देखने वाली होगी कि वह कॉन्ग्रेस के अपने पुराने साथियों की तरह कोई कदम उठाते हैं या नहीं।

हमीरपुर में लव जेहाद: शादीशुदा हिंदू महिला को भगा ले गया अनीस खान, धर्म परिवर्तन कराकर किया निकाह, 2 साल के बच्चे के साथ भटक रहा पति

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में लव जेहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ शादीशुदा एक हिंदू महिला को बीएससी का छात्र अनीस खान भगा ले गया। इसके बाद महिला का धर्म परिवर्तन कराकर उसका निकाह करा दिया गया। महिला का लगभग दो साल का एक बेटा भी है, जिसे उसने घर पर ही छोड़ दिया है। महिला का पति इसको लेकर गहरे तनाव में हैं।

बता दें कि यह महिला दूसरी बार घर से भागी है। महिला पहली बार अप्रैल 2023 में भागी थी, तब महिला थाना के दबाव में आरोपितों ने उसे वापस भेज दिया था। हालाँकि, महिला दोबारा भाग गई। अब उस महिला ने धर्मांतरण करके निकाह कर लिया है। इसका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

मामला बिंवार थाना इलाके का है। आकांक्षा नाम की इस महिला के पति मनीष गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने 6 दिसंबर 2023 को एफआईआर दर्ज की थी। तब से एक माह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। इस मामले में पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

अकांक्षा के साथ अनीस खान और धर्म परिवर्तन कराने वाला मौलवी मुश्ताक (बीच में)

ऑपइंडिया से बातचीत में मनीष गुप्ता ने कहा, “मेरी पत्नी अकांक्षा गुप्ता पहली बार अनीस के साथ अप्रैल माह में भागी थी। वो अपने साथ स्त्री धन और 12 हजार रुपए नकद भी लेकर भागी थी। तब उसने बिंवार थाना में संपर्क किया था और शिकायत पत्र दिया था। उस समय महिला पुलिस थाना के हस्तक्षेप के बाद वो वापस आ गई थी। गहने भी बरामद हो गए थे।”

मनीष ने आगे बताया, “घर लौटने के 16-17 दिन बाद अप्रैल महीने में ही वो दूसरी बार फरार हो गई। इस बीच 27 नवंबर को मेरी पत्नी का धर्म परिवर्तन करा दिया गया। उसका धर्म परिवर्तन छानी बुजुर्ग के रहने वाले मुश्ताक नाम के मौलवी ने कराया था। मैंने फिर से पुलिस में शिकायत दी, लेकिन अभी तक मेरी पत्नी को नहीं ढूँढा जा सका है।”

मनीष ने कहा कि अचानक उनकी पत्नी का मुस्लिम रीति-रिवाज से निकाह कराए जाने का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आरोपित अनीस खान भी दिख रहा है। वीडियो में मौलाना मुश्ताक उनकी पत्नी का धर्म परिवर्तन कराकर अनीस से निकाह कराता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और ना ही उनकी पत्नी बरामद हुई है।

अपनी पीड़ा बताते हुए मनीष गुप्ता भर्राए गले से कहते हैं, “अगर अकांक्षा को जाना ही था तो तलाक देकर चली जाती। मेरा और मेरे बच्चे के साथ ही मेरे परिवार को बर्बाद कर दिया। वो धर्म परिवर्तन करके निकाह कर चुकी है। वीडियो वायरल हो रहा है। बताइए, मैं कहाँ जाऊँ? किसे मुँह दिखाऊँ?”

मनीष का कहना है कि अनीस खान उनके घर के पास रहता था। उसकी चचेरी बहन और एक भाई भी उसके साथ रहते थे। उन्होंने कहा, “इस प्रकरण में अनीस की बहन की संलिप्तता ज्यादा है। उसी ने मेरी पत्नी का ब्रेनवॉश किया है।”

इस संबंध में बिंवार थाने के एसआई गौरव चौबे से भी ऑपइंडिया ने बात की। एसआई गौरव चौबे ने कहा कि पुलिस को जैसे ही शिकायत मिली, एफआईआर दर्ज कर ली गई और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने 300 किमी दूर तक छापेमारी की है, लेकिन अभी तक आरोपित गिरफ्त में नहीं सके हैं।

गौरव चौबे ने कहा कि पुलिस जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लेगी। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बिंवार थाने के प्रभारी राकेश सरोज का बयान भी छापा गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘महिला अपनी मर्जी से गई थी’। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपित को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सारे फोन बंद हैं।

जितना चाहे पैसे ले लो, लेकिन केस वापस लो: कर्नाटक में जिस मुस्लिम महिला से हुआ था गैंगरेप, उस पर बनाया जा रहा दबाव; हिंदू साथी संग दिखने पर हुई थी पिटाई

कर्नाटक के हावेरी में हिन्दू व्यक्ति के साथ होने के कारण एक मुस्लिम महिला को कट्टरपंथी युवकों द्वारा होटल से उठाकर ले जाने और फिर सामूहिक बलात्कार के मामले में नया खुलासा हुआ है। पीड़ित मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया है कि उसे मुस्लिम युवकों के खिलाफ दी गई शिकायत को वापस लेने के लिए लाखों रुपए का लालच दिया जा रहा है।

महिला ने बताया है कि उसके साथ मारपीट करने वाले मुस्लिम युवकों के करीबी लोग उस पर पैसे लेकर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। हालाँकि, महिला ने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया है। महिला का कहना है कि पैसे लेने से उसकी इज्जत तो वापस नहीं आएगी।

मुस्लिम पीड़िता से भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल भी मिला है। भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़िता को ₹25,000 की आर्थिक सहायता दी है। वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने इस मामले में SIT जाँच की माँग की है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार पर राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त करने का आरोप लगाया है।

होटल में घुस कर मुस्लिम महिला उठा ले गए थे, किया था रेप

दरअसल, कुछ दिन पहले कर्नाटक के हावेरी जिले में एक मुस्लिम महिला का गैंगरेप करने का मामला सामने आया था। जिले के हंगल इलाके के एक होटल में मुस्लिम महिला अपने हिंदू पुरुष मित्र के साथ थी। इसके बाद कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया। आरोपितों ने होटल में महिला और पुरुष के साथ मारपीट की थी।

वे महिला को अपने साथ बाइक पर जबरन बैठाकर एक जंगल में लेकर चले गए थे। यहाँ 7 आरोपितों ने तीन अलग-अलग जगहों पर महिला के साथ बारी बारी से गैंगरेप किया था। इसके बाद इनमें से तीन आरोपितों ने उसे कार में बैठाकर एक बस स्टैंड पर छोड़ दिया था। इसको लेकर कई वीडियो भी सामने आए हैं।

पहले वीडियो में मुस्लिम महिला और हिंदू पुरुष पर हमला करते हुए हमलावर दिख रहे हैं। इसमें वे उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे हैं। वहीं, दूसरी वीडियो में महिला के साथ एक जंगली क्षेत्र में बदतमीजी करने का वीडियो सामने आया है। तीसरी वीडियो में कार में महिला के साथ बदतमीजी करते हुए आरोपित दिख रहे हैं, जबकि एक अन्य वीडियो में पीड़ित महिला इन पर गैंगरेप का आरोप लगाते दिख रही है।

इस मामले में FIR दर्ज कर पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का मेडिकल कराया गया और उसका बयान दर्ज कराया जा चुका है। अपने बयान में पीड़ित ने बताया कि उसका अपहरण करने के बाद 7 लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। पीड़िता ने कहा कि इस दौरान आरोपितों ने उसे जान से मारने की कोशिश भी की।

गिरफ्तार आरोपितों में 24 साल का आफताब मकबुल अहमद चंदनकट्टी, 23 साल का मदारसाब मोहम्मद इसाक मंदक्की और 28 साल का ऑटो चालक अब्दुल खादर जाफर साब हंचिनमनी शामिल हैं। वहीं, चौथे आरोपित का अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक, चौथे आरोपित मोहम्मद सैफ सविकेरी की बाइक बालुर के पास एक गाड़ी के टकरा गई थी। इससे उसके पैर में चोट आई गई है। उसकी सर्जरी की जा रही है और ठीक होने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपितों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

जिले के एसपी अंशू कुमार ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ गैरकानूनी सभा, दंगा भड़काने, आपराधिक धमकी देने, चोट पहुँचाने और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से उनके खिलाफ हमला या आपराधिक बल प्रयोग के तहत दर्ज किया गया था। हालाँकि, महिला के बयान के बाद इसमें गैंगरेप का मामला भी जोड़ दिया गया है।

राज्य में इस गंभीर आपराधिक कृत्य के कारण माहौल गरमाया हुआ है। इससे पहले भी कर्नाटक से महिलाओं के साथ गंभीर अपराध की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। हाल ही में कर्नाटक के बेलगावी में एक महिला को उसके घर से निकाल कर मारापीटा गया था और नग्न किया गया था।

जाँच एजेंसियों की रडार पर केरल के CM विजयन की बेटी वीणा, अवैध लेनदेन से जुड़ा है मामला: केंद्र ने दिया जाँच का आदेश

केंद्र सरकार ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी टी. वीणा की कंपनी एक्सलॉजिक के खिलाफ जाँच का आदेश दिया है। दरअसल, यह जाँच कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट से शुरू की गई है, जिसमें कंपनी अधिनियम के तहत विभिन्न उल्लंघनों और अपराधों पर प्रकाश डाला गया है। केंद्र की कॉरपोरेट अफेयर के महानिदेशक के आदेश पर तीन सदस्यीय टीम इसकी जाँच करेगी।

वीणा की कंपनी की जाँच के लिए जो टीम नियुक्त की गई है, उसमें कर्नाटक के डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज वरुण बीएस, चेन्नई के डिप्टी डायरेक्टर केएम शंकर नारायण और पांडिचेरी कंपनी के रजिस्ट्रार ए गोकुलनाथ शामिल हैं। कॉरपोरेट मामलों के महानिदेशक ने जाँच रिपोर्ट चार महीने के भीतर सौंपने का आदेश दिया है।

12 जनवरी 2024 को जारी आदेश में कहा गया है, “एक शिकायत के आधार पर कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 206 (4) के प्रावधानों के तहत कंपनी रजिस्ट्रार, बैंगलोर द्वारा एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की जाँच की गई थी। जिसने अधिनियम के तहत विभिन्न उल्लंघनों और अपराधों पर प्रकाश डालते हुए मामलों की जाँच की सिफारिश की।”

इस आदेश में एर्नाकुलम के कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा दी गई उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जो केंद्र को सौंपी गई थी। वहीं, आयकर अंतरिम सेटलमेंट बोर्ड (आईटीआईएसबी) ने बताया था कि साल 2017 से तीन वर्षों में कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) द्वारा एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस को 1.72 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था।

सीएमआरएल से वीणा की फर्म को मासिक भुगतान की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। विपक्ष ने विजयन की सरकार पर वीणा को अवैध रूप से फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया था। बिना किसी सर्विस के वीणा की कंपनी से वित्तीय लेन-देन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि सीएमआरएल को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए वीणा की कंपनी को पैसे दिए गए।

मुवत्तुपुझा से कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनदान ने कंपनी के खिलाफ आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री की बेटी ने उनकी कंपनी का जीएसटी नहीं चुकाया है। उन्होंने कथित रिश्वत को लेकर वीणा के खिलाफ जाँच की माँग करते हुए सतर्कता विभाग से भी संपर्क किया था।

इसके अलावा, आईटीआईएसबी द्वारा ट्रेड यूनियन नेताओं, अधिकारियों और राजनेताओं को अवैध भुगतान पाए जाने के बाद केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने सीएमआरएल और केएसआईडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

गुजरात में मकरसंक्रांति पर पटाखे क्यों? विवादित बाबरी ढाँचे और वाजपेयी-आडवाणी के कनेक्शन से कैसे हुई इसकी शुरुआत?

गुजरात में मकरसंक्रांति को दो और नामों से भी जाना और बुलाया जाता है – उत्तरायण या उतराण। गुजरात में इस त्यौहार की महत्ता यदि दीवाली के समकक्ष नहीं है तो उससे कम भी नहीं है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान बाण शैया पर सोए हुए भीष्म पितामह ने इसी दिन अपना देहत्याग किया था और मोक्ष को प्राप्त किया था। समग्र गुजरात में मकरसंक्रांति के दिन और उसके बाद वाले दिन यानी की दो दिन पतंग उड़ाने की परंपरा तो सालों से है पर प्रथम दिन के संध्याकाल के समय पटाखे फोड़ने की परंपरा न ही आधुनिक है परन्तु यह सिर्फ तीन दशकों से ही विद्यमान है।

हर साल समग्र गुजरात में उत्तरायण की संध्या को पटाखे फोड़े जाते हैं। आकाश में रॉकेट छोड़े जाते हैं और आतिशबाजी भी की जाती है। दो पल तो ऐसा लगता है कि दो या तीन महीने बाद समग्र गुजरात में दीवाली वापस आ गई है। मेरे हम-उम्र या मुझसे बड़े कई बार ऐसा बोलते हुए सुने जा सकते हैं कि “हमारे समय में ऐसा नहीं था”।

और उनकी यह बात सच भी है। पर किसी ने यह जानने की कभी कोशिश नहीं की – अगर आज से कुछ साल पहले यदि ये नहीं था तो यह परंपरा शुरू कैसे हुई, उसके पीछे कारण क्या-क्या है? मुझे बिलकुल और साफ-साफ याद है और मैंने इसको गुजरात के विश्व हिन्दू परिषद के सीनियर अधिकारी के साथ चर्चा करके कन्फर्म भी किया है कि मकरसंक्रांति की संध्या को पटाखे फोड़ने की शुरुआत आज से बिल्कुल 31 साल पहले यानी 1993 की 14 जनवरी को हुई थी।

अगर उस दिन की बात करें तो लगभग एक महीना और आठ दिन पहले अयोध्या में बाबरी ढाँचा गिराया गया था। कारसेवकों को कथित रूप से उकसाने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती वगैरह को उस समय की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा तुरंत हिरासत में ले लिया गया था।

1993 के जनवरी माह में, यानी मकरसंक्रांति के कुछ दिन पहले ही इन सभी को जेल से जब रिहा किया गया तब गुजरात विश्व हिन्दू परिषद ने राज्य के सभी हिन्दुओं से यह अपील की थी कि मकरसंक्रांति के संध्या समय हर छत पर आप मशाल जलाइए और थाली बजाइए और इस अवसर को दिवाली के रूप में मनाइए।

हम गुजराती तो वैसे भी काफी उत्साह में रहते हैं, इसलिए हमने विहिप की अपील को तो स्वीकारा ही पर मशाल जलाने व थाली बजाने के साथ-साथ हमने सम्पूर्ण दिवाली मनाते हुए पटाखे भी फोड़े और खूब फोड़े। फिर अगले साल यानी 1994 की संक्रांति को मशाल तो नहीं जली पर गुजरातियों का उत्साह बरकरार रहा और पटाखे बराबर फूटे। बस वो दिन है और आज का दिन है, मकरसंक्रांति की संध्या को पटाखे फोड़ना गुजरात में एक परंपरा सी बन गई है और आतिशबाजी से पूरा आकाश जगमगा जाता है।

आज भी मकरसंक्रांति है और जब संध्या का समय होगा तब आप भी गुजरात के साथ पटाखे फोड़ेंगे न?

आप सभी को मकरसंक्रांति की ढेरों शुभकामनाएँ!

‘सिर्फ राम मंदिर के खिलाफ प्रलाप कर रही हो, मुस्लिमों पर बोल कर दिखाओ’: हिन्दू शख्स ने SFI की नेता को दी चुनौती तो वामपंथी गुंडों ने किया हमला, पीट-पीट कर निकाला

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में वामपंथी संगठन SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी दीपसिता धर की रैली में संगठन के गुंडों ने एक हिन्दू शख्स पर हमला कर दिया और उसकी पिटाई की। बता दें कि ये छात्र संगठन CPI(M), यानी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी)’ से सम्बद्ध है। रामपुरहाट में दीपसिता धर की रैली के दौरान एक हिन्दू शख्स ने राम मंदिर और हिन्दू समाज के खिलाफ उनकी गलतबयानी का विरोध किया।

शनिवार (13 जनवरी, 2024) को आयोजित इस रैली में उक्त हिन्दू शख्स ने निडरता से जवाब देते हुए कहा, “तुम उसी समय से हिन्दुओं के खिलाफ प्रलाप कर रही हो। मैं तुम्हें चुनौती देता हूँ – मुस्लिम समाज के खिलाफ कुछ भी बोल कर दिखाओ। तुमने मुस्लिमों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन राम मंदिर के निर्माण पर ही अटकी हुई हो।” उक्त व्यक्ति ने सिर्फ सवाल पूछा और किसी प्रकार की शारीरिक चोट पहुँचाने की कोई कोशिश भी नहीं की, फिर भी उसे घेर लिया गया।

दीपसिता धर के समर्थकों ने उसकी पिटाई कर दी। साथ ही उसे धक्के देकर रैली से बाहर निकाल दिया गया। इस दौरान दीपसिता धर ने SFI के गुंडों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया और बाद में ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए कहने लगीं कि उक्त शख्स ने उनके भाषण का सिर्फ एक अंश ही सुना था। कम्युनिस्ट पार्टी की नेता ने बेशर्मी दिखाते हुए उसकी तुलना ‘लघु दृष्टि’ के मरीज से कर दी और कहा कि उन्होंने काफी कुछ कहा, लेकिन उसने सिर्फ राम मंदिर को लेकर बातें सुनी।

याद दिलाते चलें कि दीपसिता धर हावड़ा के बाली से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। 2021 में हुए चुनाव में उन्हें मात्र 22,040 (18%) वोट ही प्राप्त हुए थे। TMC और भाजपा प्रत्याशियों के बाद वो तीसरे नंबर पर आई थीं। बताया जाता है कि उनका मकसद भाजपा की वैशाली डालमिया को किसी तरह हरवाना था। वो मात्र 6237 वोट से ये सीट हारी थीं। साथ ही वो दिल्ली की सीमाओं को घेर कर हुए किसान आंदोलन में भी खासी सक्रिय रही थीं।

सोनू सूद, एल्विश यादव, जैकलीन फर्नांडिस, शहनाज गिल… बागेश्वर धाम वाले बाबा के दरबार में सेलब्स का जमावड़ा, महाराष्ट्र में कथा सुनने आई लाखों की भीड़

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस, यूट्यूबर एल्विश यादव और अभिनेता सोनू सूद ने मुंबई में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लिया। बता दें कि जहाँ जैकलीन फर्नांडिस ‘मर्डर 2’ (2011) और ‘किक’ (2014) जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं, वहीं ‘अरुंधति (2009)’ और ‘दबंग’ (2010) जैसी फिल्मों के जरिए नाम कमाने वाले सोनू सूद कोरोना के दौरान लोगों की मदद कर चर्चा में आए थे। एल्विश यादव ने हाल ही में ‘बग बॉस OTT’ का ख़िताब अपने नाम किया है।

सोनू सूद ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को माला पहना कर उनका स्वागत भी किया। साथ ही ‘बिग बॉस 13’ की रनर-अप रहीं शहनाज गिल ने भी बागेश्वर धाम वाले बाबा का आशीर्वाद लिया। कुछ ही दिनों पहले भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी बागेश्वर धाम वाले बाबा के चरणों में पहुँची थीं। वहीं महाराष्ट्र में ही भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने भी उनके चरणों में हाजिरी लगाई थी। पनवेल में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का कथावाचन भी हुआ।

महाराष्ट्र के पनवेल में रात के अँधेरे में भी उनका कथावाचन सुनने के लिए लाखों लोगों का जमावड़ा लगा। वहीं इसके बाद वो गोरखपुर के लिए निकल गए, जहाँ उनका कथावाचन अब चल रहा है। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अक्सर विरोधियों के निशाने पर रहते हैं, जो उनके ‘दिव्य दरबार’ को लेकर उन पर निशाना साधते रहते हैं। हालाँकि, उन्होंने कई मीडिया चैनलों पर इंटरव्यू देकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों पर सफाई दी थी और विरोधियों को तगड़ा जवाब दिया था।

जैकलीन फर्नांडिस जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर से रिश्तों के कारण भी विवादों में हैं। वो अक्सर जेल के भीतर से ही अभिनेत्री के लिए पत्र जारी करता रहता है। वहीं एल्विश यादव पर मेनका गाँधी के NGO ने साँप के ज़हर से बना ड्रग्स रेव पार्टियों में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। हालाँकि, इस पर अब तक कुछ साबित नहीं हो सका है। इन सेलेब्स के बागेश्वर धाम वाले बाबा से मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

‘चीन से संघर्ष के लिए तैयार हों’: जिसे उपद्रवी बताता है ड्रैगन अब वो बना ताइवान का राष्ट्रपति, लाई चिंग-ते की जीत से शी जिनपिंग को बड़ा झटका

ताइवान में चीन को बड़ा झटका लगा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कट्टर विरोधी लाई चिंग-ते ने राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनावों में जीत हासिल की है। शनिवार (13 जनवरी, 2024) को ताइवान में राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना की गई, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। अभी तक वोटिंग पूरी नहीं हुई है, लेकिन लाई को विजेता घोषित कर दिया गया है। वो मौजूदा समय में ताईवान के उप-राष्ट्रपति हैं और अब 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

सत्तारूढ़ ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी’ (DPP) के लाई चिंग-ते, जिन्हें विलियम लाई नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने 41.6% वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंद्वी, कुओमिन्तांग (KMT) के होऊ यू-इह ने 33.4% वोट हासिल किए। लाई चिंग-ते एक स्वतंत्रतावादी नेता हैं जिन्हें चीन द्वारा एक ‘उपद्रवी‘ के रूप में देखा जाता है। उनकी जीत से चीन-ताइवान संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है।

लाई चिंग-ते ने अपने चुनावी अभियान के दौरान एक अधिक स्वतंत्रतावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वह ताइवान की संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और चीन के साथ एकीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह ताइवान को एक अधिक लोकतांत्रिक और समृद्ध समाज बनाने के लिए काम करेंगे।

लाई चिंग-ते की जीत से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को झटका लगा है। शी जिनपिंग ताइवान को चीन का एक प्रांत मानते हैं और उन्होंने ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य कार्रवाई करने की धमकी दी है। लाई चिंग-ते की जीत के बाद, ताइवान में चीन-विरोधी भावना बढ़ने की संभावना है। लाई चिंग-ते ने ताइवान के लोगों से चीन के साथ संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।

अमेरिका से नजदीकी की वजह से खार खाता है जिनपिंग

लाई चिंग-ते की जीत से अमेरिकी खेमे में भी खुशी की लहर है। ताइवान को भले ही अमेरिका आधिकारिक रूप से अलग देश नहीं मानता, लेकिन ताइवान की संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, चीन ताइवान को अपना एक प्रांत मानता है और वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य कार्रवाई करने की धमकी देता है। लाई चिंग-ते की जीत से चीन की चिंता बढ़ने की संभावना है क्योंकि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के प्रयासों को और अधिक कठिन बना सकती है।

लाई चिंग-ते की जीत से चीन-ताइवान संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है। लाई चिंग-ते एक स्वतंत्रतावादी नेता हैं जिन्हें चीन द्वारा एक “उपद्रवी” के रूप में देखा जाता है। उनकी जीत से चीन की चिंता बढ़ने की संभावना है क्योंकि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के प्रयासों को और अधिक कठिन बना सकती है।

‘ये भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध, अस्वीकार्य’: POK पहुँचीं UK की हाई कमिश्नर तो भारत ने लताड़ा, ब्रिटिश उच्चायुक्त के सामने भी जताई आपत्ति

भारत सरकार ने पाकिस्तान में ब्रिटेन की हाई कमिश्नर जेन मैरियट द्वारा POK का दौरा करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत सरकार ने दिल्ली में ब्रिटेन के हाई कमिश्नर को तलब कर ये आपत्ति जताई और कहा कि जेन मैरियट का पीओके दौरा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत के विदेश सचिव ने इस मामले में कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है।

इस मामले में भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय (MEA) ने शनिवार (13 जनवरी, 2023) को बयान भी जारी किया है। भारत सरकार ने कहा, “10 जनवरी, 2024 को ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के साथ ब्रिटिश हाई कमिश्नर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यात्रा को भारत ने गंभीरता से लिया है। जेन मैरियट का यह कदम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है, जो अस्वीकार्य है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और रहेंगे। विदेश सचिव ने इस पर भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।”

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान में ब्रिटेन की उच्चायुक्त जेन मैरियट ने ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर 10 जनवरी को मीरपुर की यात्रा की तस्वीरें साझा की थी और कहा था, “मीरपुर से सलाम, ब्रिटेन और पाकिस्तान के लोगों के बीच संबंधों का दिल! 70 फीसदी ब्रिटिश पाकिस्तानी मूल रूप से मीरपुर से हैं, जिससे हम सभी का साथ मिलकर काम करना प्रवासी हितों के लिए अहम है। अपने आतिथ्य सत्‍कार के ल‍िए आभार!”

क्या है पीओके?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन रियासत का हिस्सा था। 1947 में भारत के बँटवारे के तुरंत बाद, महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर इसे भारत में मिला दिया था। पीओके के पास करीब 13,296 वर्ग किलोमीटर का इलाका है। इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है और इसमें 10 जिले हैं। भारत पीओके को अपना अभिन्न अंग मानता है। भारत, बिना इजाजत के विदेशी लोगों की इस क्षेत्र में यात्रा का कड़ा विरोध करता है।

बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे में पीओके के अतिरिक्त गिलगित-बाल्टिस्तान का भी इलाका है। वो उसे अलग राज्य बताता है। लेकिन ये हिस्सा भारत के लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का है। पाकिस्तान दिखावे के लिए सिर्फ पीओके के छोटे से हिस्से को आजाद कश्मीर बताता है, जबकि गिलगित वाले इलाके को अलग राज्य बना चुका है।

‘हाजिर क्यों नहीं हो रहे? जाँच में आ रही बाधा’: जमीन घोटाले में CM हेमंत सोरेन को ED का 8वाँ समन, कहा – 16 से 20 जनवरी के बीच पेश होइए

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन केस में बयान दर्ज करवाने के लिए आठवीं बार समन भेजा है। शनिवार (13 जनवरी, 2024) को भेजे गए समन में ईडी ने सीएम सोरेन को जवाब देने के लिए 16 से 20 जनवरी तक का वक्त दिया है।

इसके लिए उन्हें इन पाँच दिनों के बीच ED के राँची के क्षेत्रीय दफ्तर में हाजिर होने को कहा गया है। जाँच एजेंसी ने समन में उनसे पूछा है कि वे बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर क्यों नहीं हो रहे हैं? इससे जाँच में बाधा पैदा हो रही है। इस पर राज्य से बीजेपी MP निशिकांत दुबे ने सोरेन के इस्तीफे की माँग की है।

इससे पहले ईडी इस केस में सीएम सोरेन को सात समन भेज चुकी है। हालाँकि हर बार उन्होंने समन को नजरअंदाज कर दिया। जमीन घोटाला केस में ईडी की तरफ से अगस्त 2023 से ही हेमंत सोरेन को समन भेजने की शुरुआत हो चुकी है।

आठवें समन से पहले दिसंबर 2023 के आखिरी हफ्ते में भेजे गए 7वें समन में ईडी ने सोरेन से खुद ही पूछताछ के लिए जगह, वक्त और तारीख बताने को कहा था। इसके लिए जाँच एजेंसी ने उन्हें 7 दिन का वक्त दिया था।

सीएम सोरेन ने 2 जनवरी, 2024 को ईडी को पत्र भेज समन की तार्किकता और वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाया था। बताते चलें कि सीएम सोरेन सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ED की जाँच पर रोक लगाने की अपील की थी। हालाँकि दोनों कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दी है।

सीएम सोरेन पर निशाना साधते हुए गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “AAP के पाप के लिए तो 4 था, झारखंड के मुख्यमंत्री के डकैती के लिए 8वाँ समन कोई मायने नहीं रखता। केजरीवाल जी तो हल्ला मचा रहे हैं, हमारा मुख्यमंत्री तो चुपचाप रज़ाई में घुसकर जाड़ा काट रहे हैं। कम से कम शिबू सोरेन जी की इज़्ज़त तो रखिए, इस्तीफ़ा दीजिए व एजेंसियों के प्रश्न का जवाब दीजिए।”

बताते चलें कि सीएम हेमंत सोरेन पर अवैध खनन लीज पट्टे और अवैध जमीन घोटाला कुल दो केस चल रहे हैं। जमीन घोटाले में उनके खिलाफ ईडी केस दर्ज कर अरेस्ट वॉरंट जारी कर सकती है। वहीं अवैध खनन घोटाले में भी ED उन पर शिकंजा कस सकती है।

ईडी राँची के जिस जमीन घोटाले में सीएम सोरेन को को पूछताछ के लिए तलब कर रही है। ये जाँच एक सर्कल ऑफिसर की से शुरू हुई थी। इसका दायरा बढ़कर कोलकाता के रजिस्ट्रार ऑफ एश्योरेंस के दफ्तर तक पहुँचा था। वहीं ये खुलासा हुआ कि 36 फर्जी डीड और कागजात के जरिए सैंकड़ों एकड़ जमीन का फर्जी सौदा किया गया है। इस फर्जीवाड़े में छोटे दफ्तर के अधिकारी से लेकर जिले के उपायुक्त और बड़े-बड़े कारोबारियों का नाम आया हैं और इन सबके तार आखिर में सीएम हेमंत सोरेन से जुड़ गए।

वहीं चुनाव आयोग से जुड़े केस में कभी भी उनके खिलाफ राज्य के राज्यपाल पत्र जारी कर सकते हैं। बताते चलें कि चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन को लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9-ए के उल्लंघन का दोषी पाया। हेमंत सोरेन पर सीएम और खनन मंत्री रहते हुए कथित तौर पर अपने पद का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप भी है। इस सबके बीच बीते साल दिसंबर में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के राज्य की मुख्यमंत्री बनने की खबरें भी सुर्खियों में रही।