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‘किसी का कोई भगवान हो, हमारा भगवान तो PDA’: अखिलेश यादव ने ठुकराया राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता, कहा – जो देने आए उन्हें नहीं जानता

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होनी है। भारत की वामपंथी पार्टियों ने तो इस आयोजन का बहिष्कार कर दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनका भगवान तो PDA है। अखिलेश के PDA का मतलब है- पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक।

दरअसल, अखिलेश यादव से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अयोध्या जाएँगे। इस अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण नहीं मिला है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंगलवार (9 जनवरी 2023) को कहा कि अखिलेश यादव को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया, लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

दरअसल, विश्व हिंदू परिषद की ओर से आलोक कुमार अखिलेश यादव को निमंत्रण देने गए थे। अखिलेश ने कहा, “हम इनको (आलोक कुमार को) नहीं जानते हैं। जिन्हें हम जानते नहीं हैं, उन्हें निमंत्रण नहीं देते और न ही उनसे कोई निमंत्रण लेते हैं। जब भगवान बुलाएँगे, तब जाएँगे। किसी का कोई भगवान हो, हमारा भगवान तो पीडीए है।”

इस पर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “पहले वो कह रहे थे कि अगर बुलाएँगे तो हम जाएँगे। हमने उनको बुलाया है। अब वो कह रहे हैं कि राम जी बुलाएँगे तो जाएँगे। अब देखते हैं कि राम जी खुद उन्हें बुलाते हैं या नहीं। अगर नहीं बुलाएँगे तो साफ हो जाएगा कि राम जी शायद उन्हें नहीं बुलाना चाहते हैं।”

इसके पहले अखिलेश ने कहा था कि जब भगवान की मर्जी होती है, तभी उनके दर्शन होते हैं। भगवान की मर्जी के बिना कोई उनके दर्शन नहीं कर सकता। क्या पता कब किसको भगवान का बुलावा आ जाए, ये कोई नहीं कह सकता। उन्होंने राम मंदिर के नाम पर भाजपा पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि अगर राम मंदिर ट्रस्ट उन्हें बुलाता है तो वो अयोध्या जाएँगे। इस पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा था कि प्रभु तो सबके हैं। ट्रस्ट बुलाए या न बुलाए, दर्शन तो हर वक्त कर सकते हैं। ट्रस्ट लोगों को आमंत्रित कर रहा है, लेकिन का नाम छूट जाए तो वो आए और दर्शन करे। सबका स्वागत है।

CPI(M) की पोलितब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समरोह में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करती है लेकिन एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने इसे धार्मिक अनुष्ठान का राजनीतिकरण बताते हुए गलत करार दिया।

बता दें कि वामपंथी नेता वृंदा करात ने राम मंदिर का निमंत्रण स्वीकार करने से मना कर दिया था। वृंदा ने कहा था कि राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में न जाने के पीछे उनकी पार्टी की बुनियादी सोच है। उन्होंने इस कार्यक्रम के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगते हुए कहा कि संविधान के हिसाब से भारत की सत्ता किसी धार्मिक रंग का नहीं होना चाहिए। सीताराम येचुरी ने वृंदा करात का समर्थ किया था।

22 जनवरी को यूपी के सभी स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी, शराब की दुकानें बंद: राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर CM योगी का आदेश, अयोध्या में ‘कुम्भ मॉडल’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 जनवरी, 2024 को राज्य में छुट्टी घोषित की है। उस दिन सभी शैक्षिक संस्थान बंद रहेंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश में जितनी भी शराब की दुकानें हैं, वो सब भी बंद रहेंगी। उस दिन निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत भी हिस्सा लेंगे। देश भर से हजारों नेताओं, साधु-संतों और कलाकारों को इसके लिए निमंत्रण पत्र भेजा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी स्कूलों एवं कॉलेजों को आदेश दिया है कि वो 22 जनवरी, 2024 को अवकाश घोषित करें। उन्होंने मंगलवार (9 जनवरी, 2024) को ये आदेश दिया। साथ ही उस दिन को ‘ड्राई डे’ घोषित कर दिया गया है, यानी उस दिन शराब की बिक्री नहीं होगी। इस संबंध में पहले ही आदेश जारी कर दिया गया है, अब इसे दोहराया गया है। यूपी ही नहीं, उस दिन छत्तीसगढ़ में भी दारू की दुकानें नहीं खुलेंगी और इसकी खरीद-बिक्री बंद रहेगी।

अयोध्या में उस दिन दोपहर के समय प्राण-प्रतिष्ठा का मुहूर्त तय किया गया है। 10,000 VIP मेहमानों के पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सुरक्षा को लेकर भी सरकार पूरी तरह तैयार है। पूरे देश में इस दौरान अलग-अलग मंदिरों में पूजा-पाठ का आयोजन होना है। अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी खुला है। अयोध्या में तैयारियों पर खुद सीएम योगी नज़र रख रहे हैं और वो हाल ही में जायजा लेने के लिए पहुँचे भी थे।

योगी सरकार की योजना है कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को ‘राष्ट्रीय उत्सव’ के रूप में मनाया जाए। अयोध्या में ‘कुम्भ मॉडल’ लागू करने का आदेश देते हुए कहा गया है कि मेहमानों के स्वागत, साज-सज्जा और आतिशबाजी का इंतजाम हो, सभी सरकारी भवनों को निखारा जाए। मेहमानों के लिए विश्राम स्थल पहले से तय रहेंगे। प्रशासन ने लखनऊ के होटलों से भी खाली कमरों की लिस्ट माँगी है। 116 कमरे वाले सेन्ट्रिम होटल में साफ़-सफाई चालू है।

यूपी ATS ने ISIS के 2 और आतंकियों को दबोचा: AMU के पूर्व छात्र हैं फराज अहमद और अब्दुल समद मलिक, बड़ी साजिश का पर्दाफाश

UP ATS को अलीगढ़ आतंकी मॉड्यूल मामले में फिर से एक बड़ी सफलता मिली है। यूपी ATS ने खूंखार आतंकी संगठन ISIS के एक आतंकी को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया है। उस पर 25,000 रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। वहीं, एक अन्य आतंकी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है।

ISIS के जिस आतंकी को गिरफ्तार किया गया है, उसका नाम आमस उर्फ फ़राज़ अहमद है। वह 22 साल का है और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से स्नातक है। उसने AMU से मनोविज्ञान में स्नातक किया है। उसे ATS ने अलीगढ़ से उठाया है। फराज प्रयागराज का रहने वाला है और एक भगोड़े आतंकी फैजान बख्तियार का करीबी है।

इसके अलावा, ISIS के एक अन्य आतंकी अब्दुल समद मलिक ने कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े इन दोनों आतंकियों की यूपी ATS को तलाश थी। इस मॉड्यूल का अक्टूबर 2023 में यूपी ATS ने भंडाफोड़ किया था। उस दौरान यूपी ATS ने कई आतंकी और इसके सरगना को गिरफ्तार किया था।

यूपी ATS ने सबसे पहले नवम्बर 2023 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संगठन स्टूडेंट्स ऑफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनियन (SAMU) से जुड़े अब्दुल्ला अर्सलान और माज बिन तारिक को गिरफ्तार किया था। ये दीपावली पर धमाकों की साजिश रच रहे थे। इनका कनेक्शन दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़े गए शहनवाज और रिजवान जैसे आतंकियों के साथ निकला था। दोनों आतंकियों के पास से कई सामान बरामद हुए थे।

इसके बाद यूपी एटीएस ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग से आईएसआईएस (ISIS) समूह के एक और आतंकी वजीहुद्दीन अली खान को गिरफ्तार किया था। वजीहुद्दीन अली खान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पीएचडी कर रहा था। वजीहुद्दीन आईएसआईएस के अपने हैंडलर के लगातार संपर्क में था और वो आतंकी हमलों की योजना बना रहा था।

आतंकी वजीहुद्दीन अली खान पर अधिक से अधिक मुस्लिमों को जिहाद के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आईएसआईएस से जोड़ने की जिम्मेदारी थी। यही अलीगढ़ मॉड्यूल को सँभाल रहा था। वजीहुद्दीन छतीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है और इसके चेले चेले इसे अमीर कहते थे। अमीर इस्लामी शासक के लिए आमतौर पर प्रयुक्त होता है।

जिस यूपी को छोड़ने की बात करते थे मुनव्वर राना, वहीं के सरकारी अस्पताल में चल रहा इलाज: अचानक तबीयत बिगड़ने से ICU में भर्ती, ऑक्सीजन सपोर्ट पर

लंबे समय से बीमार चल रहे शायर मुनव्वर राना की तबीयत अचानक से ज़्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें लखनऊ स्थित ‘संजय गाँधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS)’ में भर्ती कराया गया है। वहाँ उन्हें ICU (गहन चिकित्सा इकाई) वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया है कि अगले कुछ दिन मुनव्वर राना के लिए काफी अहम होने वाले हैं। पिछले कई दिनों से 71 वर्षीय शायर का स्वास्थ्य खराब चल रहा है और वो मुशायरों में भी नहीं देखे जा रहे थे। उन्हें अब ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। उनका SPO2 (ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल) घट कर 85 चला गया है। ये 95+ रहना चाहिए।

बता दें कि मुनव्वर राना अपनी कट्टर इस्लामी सोच के लिए भी जाने जाते हैं। मार्च 2022 में उन्होंने योगी आदित्यनाथ के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद बयान दिया था कि मुमकिन है कि वो उत्तर प्रदेश छोड़ दें। मुनव्वर राना की बेटी उरुषा ने पुरुवा विधानसभा सीट से बतौर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी चुनाव भी लड़ा था लेकिन उन्हें बुरी हार मिली थी। चुनाव से पहले मुनव्वर राना ने कहा था, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि अगर योगी आएगा तो मैं पलायन कर दूँगा। इस बात को स्पष्ट तौर पर नोट कर लिया जाए।”

अब उसी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल में मनव्वर राना का इलाज चल रहा है, जिसे वो छोड़ने की बातें करते थे। मई 2023 में भी उनकी हालत बिगड़ गई थी, जब डायलिसिस के दौरान उनके पेट में तेज़ दर्द उठा था। डॉक्टरों ने उन्हें एडमिट कर के उनका सिटी स्कैन कराया था, जिसमें उन्हें गॉल ब्लैडर की समस्या सामने आई थी। इसके बाद उनकी सर्जरी की गई, लेकिन उनकी तबीयत में सुधर नहीं हुआ। अभी उनकी हालत ज़्यादा ख़राब है और डॉक्टरों की टीम निगरानी कर रही है।

मुनव्वर राना हिंदी, अवधि और उर्दू में शायरी करते रहे हैं। उनके शेर ‘मेरे हिस्से में माँ आई’ ने खासी लोकप्रियता बटोरी थी। उन्हें साहित्य अकादमी अवॉर्ड भी मिल चुका है, लेकिन मोदी सरकार के खिलाफ ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग का हिस्सा बनते हुए उन्होंने पुरस्कार लौटा दिया था। हर सप्ताह 3 बार मुनव्वर राना की 3 बार डायलिसिस होती है। चेकअप में उनके फेफड़ों में पानी की बहुलता पाई गई थी और उन्हें निमोनिया भी हो गया था। इस कारण उन्हें साँस लेने में भी तकलीफ होती है।

कॉन्ग्रेस नेता ने हिन्दू कार्यकर्ताओं को सोसाइटी से निकाला, राम मंदिर का ‘अक्षत निमंत्रण’ देने आए थे: CCTV में कैद हुई घटना

राजस्थान के जयपुर में रामभक्तों के साथ बदसलूकी का मामला आया है। बताया जा रहा है कि रामभक्तों की टोली, जो घरों में अक्षत पहुँचाने का काम कर रही थी, उन्हीं को कॉन्ग्रेस नेता जगदीश चौधरी द्वारा अपमानित किया गया। ये घटना सीसीटीवी में कैद हो गई।

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठित समारोह के लिए अक्षत का वितरण करने पहुँचे राम भक्तों की टोली के साथ बदसलूकी कृष्णा कुंज विलास वेलफेयर सोसायटी में हुई। ये राम भक्त रामधुन कर रहे थे तभी सोसायटी के अध्यक्ष व कॉन्ग्रेसी नेता जगदीश चौधरी और उपाध्यक्ष राजीव कुमार बाहर निकले और उन लोगों को दुत्कार कर बाहर कर दिया।

इस दौरान रामभक्तों की टोली हाथ में भगवा झंडा लिए जय सियाराम-जय सियाराम का नारा लगाती रही और फिर वहाँ से चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद रामभक्तों ने कहा कि जयपुर में वह लोग जहाँ भी गए उन हर जगह ही सम्मान मिला है। सभी लोगों ने उनका सत्कार किया है। लेकिन प्रदेश में भाजपा सरकार के आने के कारण कॉन्ग्रेसी ये सब करके अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।

वहीं जगदीश चौधरी का कहना है, “राम हमारे आराध्य हैं। उन्हें हम खुद मानते हैं। किसी खास पार्टी से जुड़े होने का अर्थ राम विरोधी होना नहीं हो सकता। मैं सोसायटी और समाज में होने वाले धार्मिक कामों में पूरा सहयोग करता हूँ। कुछ लोगों ने मेरी छवि खराब करने के लिए निराधार खबर फैलाने का प्रयास किया है जिसका मैं विरोध करता हूँ। ये लोग नौटंकी करते हैं। असली राम को हम मानते हैं। हम सुबह शाम राम की पूजा करते हैं। मेरे घर में आकर देख लीजिए। हम कभी भगवान के खिलाफ जा ही नहीं सकते”

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने वाला है। इसकी खुशी पूरे देश में है। रामभक्त जगह-जगह से फेरी निकालकर लोगों में उत्साह जगा रहे हैं। इसी क्रम में 1 जनवरी से पूजित अक्षत वितरण का कार्य हो रहा है। ये काम 15 जनवरी तक चलेगा। ये सब देख कुछ लोगों को रामभक्तों का उत्साह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। राजस्थान में जहाँ उनके साथ बदसलूकी हुई है। वहीं मध्यप्रदेश में तो रामभक्तों पर पत्थरबाजी की भी खबर आई है जहाँ मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं को तलवार लेकर भी दौड़ाया

लक्षद्वीप में बनेगा बहुउद्देश्यीय एयरपोर्ट: लड़ाकू विमान करेंगे हिंद और अरब सागर की निगरानी, पर्यटक भी पहुँचेंगे आसानी से

मालदीव के मंत्रियों द्वारा भारत और प्रधानमंत्री मोदी पर की गई टिप्पणी से शुरू हुए विवाद के बीच लक्षद्वीप चर्चा में है। सोशल मीडिया पर यूजर्स लोगों को मालदीव की बजाय लक्षद्वीप जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस बीच भारत सरकार ने लक्षद्वीप में नया एयरपोर्ट बनाने की तैयारी की। इसका उपयोग सामरिक और नागरिक दोनों ही उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह एयरपोर्ट लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप में बनाया जाएगा। पहले भी इसकी योजना बन चुकी है, लेकिन वह सिर्फ वायुसेना अड्डे के रूप में विकसित किया जाना था। हालाँकि, अब नागरिक विमान भी यहाँ से उड़ सकेंगे। इस पर काम जल्द ही चालू होने की आशा है। लक्षद्वीप में इस समय अगत्ती द्वीप पर ही एक एयरपोर्ट है। नया एयरपोर्ट बनने से टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड भी कर सकेंगे। इसके कारण हिंद महासागर और अरब सागर में भारत की पैठ भी मजबूत होगी। इसके साथ ही हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सामरिक रूप से यह इलाका भारत के काफी महत्वपूर्ण है।

मिनिकॉय द्वीप लक्षद्वीप का सबसे दक्षिण में स्थित द्वीप है। यह भारत की मुख्य भूमि यानी केरल के तिरुअनंतपुरम के तट से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। मिनिकॉय लक्षद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है। इस द्वीप पर लगभग 10,000 की आबादी रहती है।

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मोहम्मद मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के कई सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थीं। मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लक्षद्वीप दौरे की अपनी तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया है। एक बयान में वहाँ की सरकार ने कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

मालदीव सरकार के मंत्रियों की अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के रवैये की आलोचना शुरू कर दी। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं, ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

वर्तमान में मालदीव की सरकार बैकफुट पर है। मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने देश के सभी कारोबारियों से अपील की है कि वे मालदीव के साथ व्यापार ना करें। 

डोनाल्ड ट्रम्प के कई लड़कियों के साथ यौन संबंध: ‘सेक्स टेप’ केस में बोली पीड़िता

अभी दुनिया भर में जेफरी एप्सटीन के साथ बड़े-बड़े नेताओं और सेलेब्स का नाम जुड़ने के कारण बवाल मचा हुआ है। जेफ्री एप्सटीन लड़कियों की तस्करी करने वाला माफिया था, जिसके पास अमेरिका के वर्जीनिया में 72 एकड़ का एक प्राइवेट द्वीप भी था। इसका नाम है – लिटिल सेंट जेम्स आइलैंड। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों डोनाल्ड ट्रम्प एवं बिल क्लिंटन के अलावा UK के प्रिंस एंड्रू तक का नाम जेफरी एप्सटीन के ग्राहकों में जुड़ा है। मामला अमेरिका की अदालत में चल रहा है।

इसी बीच पीड़िताओं में से एक सारा रैनसम सामने आई हैं। उन्होंने बताया है कि डोनाल्ड ट्रम्प के कई लड़कियों के साथ यौन संबंध थे, जिनमें से एक सारा की दोस्त भी थी। बकौल सारा रैनसम, जेफरी एप्सटीन के न्यूयॉर्क स्थित टाउनहाउस पर डोनाल्ड ट्रम्प देखे गए थे। सारा ने बताया, “मेरी दोस्त ने मुझे डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उसकी अनौपचारिक दोस्ती के बारे में बताया था। डोनाल्ड ट्रम्प के मन में उसके लिए कुछ न कुछ था। उसने मुझे बताया कि कैसे ट्रम्प लगातार बताते रहते थे कि वो ‘कुसुमित (Pert) निप्पल्स’ को कितना पसंद करते हैं।”

पीड़िता ने ये भी बताया कि उसने डोनाल्ड ट्रम्प की हरकतों के कारण कई बार लड़कियों की निप्पल्स में दर्द हो जाता था और वो इसकी गवाह है। सारा रैनसम ने आरोप लगाया कि जेफरी एप्सटीन के न्यूयॉर्क स्थित बँगले पर उसने अपनी दोस्त को डोनाल्ड ट्रम्प के साथ देखा था। कोर्ट में डाले गए दस्तावेज में तो सारा ने डोनाल्ड ट्रम्प को ‘Pedophile (बच्चों के प्रति कामुकता रखने वाला)’ तक बता दिया है। साथ ही उन्होंने बिल क्लिंटन पर भी कई आरोप लगाए हैं।

कोर्ट के दस्तावेज में पीड़िता ने कहा है, “डोनाल्ड ट्रम्प मेरी दोस्त की निप्पल्स को तब तक उँगलियों से दबा कर हिलाते रहते थे और चूसते रहते थे, जब तक उन पर एकदम से निशान न बन जाएँ। एक शाम जब मैं और मेरी दोस्त साथ नहा रही थी तो उसने मुझे अपने निप्पल्स दिखाए। ये काफी दुःखदायी था। वो लाल हो गए थे और सूजे हुए थे। मैं उसके निप्पल्स को देख कर डर गई थी।” उसने कहा कि ट्रम्प व क्लिंटन वगैरह ने जो किया उन्हें इसकी सज़ा मिलनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि बिल क्लिंटन के खिलाफ चुप रहने के लिए उनकी पत्नी हिलेरी ने लोगों को भेज कर जबरन उनसे समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए। उन्होंने कहा कि 2008 में उनकी एक दोस्त ने एप्सटीन, क्लिंटन, गायक ब्रेनसन और ट्रम्प के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पीड़िता ने कहा कि उल्टा उसकी दोस्त को ‘गंदी वेश्या और झूठी’ महसूस कराया गया। ‘क्लिंटन फाउंडेशन’ ने लड़की को चुप रहने के लिए पैसे भी दिए थे।

‘भगवान राम और हनुमान का भक्त हूँ’: साउथ अफ्रीका के केशव महाराज ने बताया क्यों उनके आते ही मैदान में बजने लगता है ‘राम सियाराम’

साउथ अफ्रीका के स्पिनर व अपनी हिंदू आस्था के लिए पहचाने जाने वाले केशव महाराज ने खुलासा किया है कि भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान जब वो बल्लेबाजी के लिए आते थे, तो ‘राम सियाराम’ गाना क्यों बजाया जाता था।

दरअसल, ऐसा इसलिए होता था क्योंकि खुद केशव महाराज ने ही एंट्रेंस सॉन्ग बजाने वाले शख्स को ये गाना बजाने को कहा था। केशव के अनुसार इस गाने के कारण उन्हें अपने जोन में आने में मदद मिलती थी और वो एकाग्र होकर गेम खेल पाते थे।

महाराज ने इस गाने को लेकर कहा– “ये मेरा एंट्रेंस गाना है। मैं भगवान हनुमान और भगवान राम का भक्त हूँ इसलिए सोचता हूँ कि ये गाना एकदम फिट है।”

उन्होंने कहा, “यह एक ऐसी चीज थी, जिसे मैंने खुद मीडिया लेडी से कहा था और ये सॉन्ग लगाने की रिक्वेस्ट की थी। भगवान का मेरे ऊपर काफी आर्शीवाद रहा है। उन्होंने मुझे हर समय राह दिखाई है, तो मैं कम से कम ये तो कर ही सकता हूँ। इससे मुझे अपने जोन में आने में मदद मिलती है। जब आप मैदान में प्रवेश करें तो फिर बैकग्राउंड में ‘राम सियाराम’ की धुन सुनना अच्छा लगता है।”

बता दें कि भारत साउथ अफ्रीका के बीच पिछले दिनों टेस्ट सीरिज हुई थी। ये सीरिज 1-1 के साथ ड्रॉ रही। लेकिन इसकी चर्चा केशव महाराज के कारण खूब हुई। हाल में जब उन्हें भारत के खिलाफ टेस्च मैच मैदान में उतरते देखा गया तो उनकी एंट्री के समय भी ‘राम सियाराम’ गाना बजा। इसे सुनकर विराट कोहली ने भी उन्हें नमन किया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

देख सकते हैं कि इसमें भारतीय टीम के खिलाड़ी विराट कोहली गाना सुनकर भगवान श्री राम के अंदाज में धनुष चलाते नजर आते हैं और उसके बाद नमन करते हैं।

केशव महाराज का एंट्रेंस सॉन्ग देखकर विराट कोहली का रिएक्शन

ब्रिटेन से ₹58 करोड़ की फंडिंग, रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुस्लिमों को भारत में बसाता था: यूपी ATS ने NGO चलाने वाले अबू सालेह को दबोचा

उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने रोहिंग्याओं को अवैध रूप से देश में बसाने वाले सिंडिकेट के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। लखनऊ से आरोपित अबू सालेह मंडल है और वह पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। 50 साल का मंडल एक एनजीओ भी चलाता है, जिसमें वह इन कामों के लिए देश-दुनिया से फंडिंग लेता है। उस पर पुलिस ने 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।

यूपी एटीएस ने अबू सालेह मंडल के पास एक लाख रुपए नकद और दो मोबाइल फोन बरामद किया है। मंडल ने यूपी के देवबंद स्थित मदरसे से पढ़ाई की है। वह एक सिंडिकेट बनाकर म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए अवैध एवं फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाकर उन्हें भारत के अलग-अलग शहरों में बसाता था। इसकी जानकारी यूपी एटीएस को काफी समय से मिल रही थी।

इस इनपुट के आधार पर यूपी एटीएस ने कार्रवाई करने के लिए एक टीम बनाई। इसके बाद इस सिंडिकेट से जुड़े 6 लोगों की गिरफ्तारी की थी। गिरफ्तार लोगों में अदिलुर रहमान असरफी, अबु हुरैरा गाजी, शेख नजीबुल हक, तानिया मंडल, इब्राहिम खान और मोहम्मद अब्दुल अव्वल शामिल है। इनसे पूछताछ के बाद मंडल के कारनामों की जानकारी मिली थी।

अबू सालेह ने ATS को बताया कि वह हरोआ-अल जमियातुल इस्लामिया दारूल उलूम मदरसा और कबीरबाग मिल्लत एकेडमी नाम से दो ट्रस्ट चलाता है। इन ट्रस्टों के FCRA खातों में ब्रिटेन के उम्मा वेलफेयर ट्रस्ट से साल 2018-22 तक लगभग 58 करोड़ रुपए आए। उम्मा ट्रस्ट को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और उनकी मदद करने के कारण अमेरिका प्रतिबंधित कर चुका है।

विदेशों से मिले इस फंड के एक बड़े हिस्से को वह अपनी टीम के सदस्यों के मार्फत फर्जी बिलिंग कराकर नगद हासिल कर लेता था। इतना ही नहीं, अबू सालेह ने अब्दुल्ला गाजी नाम के एक आरोपित के साथ मिलकर गाजी फूड्स सप्लाई और गाजी मैसनरीज नाम से फर्जी फर्म बना लिया और इसके जरिए फंडों की बिलिंग की गई। यह फर्म केवल कागजों में है।

एटीएस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि उसे कुछ नकदी उसे हवाला के जरिए भी मिले थे। इन पैसों का इस्तेमाल वह रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों को भारत में घुसपैठ कराने और उन्हें बसाने के लिए करता था। इतना ही नहीं, वह इन लोगों को आर्थिक मदद भी देता था और फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाता था। कुछ पैसों का इस्तेमाल वह अन्य राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भी करता था।

यूपी एटीएस ने जब सबूत जुटा लिए तो अबू सालेह मंडल को लखनऊ के मानकनगर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। एटीएस के एडीजी मोहित अग्रवाल का कहना है अबू सालेह मंडल के खिलाफ पुख्ता सबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि उससे कुछ अहम जानकारियाँ हासिल करना बाकी है। इसके लिए जरूरत पड़ी तो उसे पुलिस रिमांड पर भी लिया जाएगा।

बताते चलें कि ATS ने जुलाई 2023 में एक साथ मथउरा, अलीगढ़, हापुड़ सहित कई जिलों में छापेमारी करके अवैध रूप से रह रहे 60 से अधिक रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए रोहिंग्याओं को पशुओं के कटान वाली फैक्ट्री में नौकरी दी गई थी। इनके पास भी फर्जी भारतीय दस्तावेज बरामद हुए थे।

नाले की सफाई और टोंटी सही कराने जैसे कामों पर खर्च कर दिए ₹29 करोड़, अरशद-अहमद जैसों को ठेका: RTI खुलासे के बाद घिरे ‘शीशमहल’ वाले अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने अपने आधिकारिक आवास में छोटे-मोटे कामों के लिए वर्ष 2015 से 2022 के बीच ₹29 करोड़ खर्च कर दिए। यह खुलासा एक RTI से हुआ है। भाजपा ने इसको लेकर केजरीवाल पर प्रश्न उठाए हैं।

एक्स (पहले एक्स) पर सुमित जोशी नाम के शख्स ने इस RTI की एक फोटो डाली है। RTI में प्रश्न पूछा गया था कि केजरीवाल के दिल्ली के आधिकारिक आवास पर वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2022 तक सिविल कामों (इलेक्ट्रिक वायरिंग, प्लंबिंग और लकड़ी के काम) पर कितना पैसा खर्च किया गया और इसका ठेका किसे दिया गया।

RTI के जवाब में दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बताया है कि 31 मार्च 2015 से 27 दिसम्बर 2022 तक केजरीवाल के आवास में प्लंबिंग (टोंटी, पाइप और पानी की आपूर्ति से जुड़े अन्य काम), बिजली के कामों और लकड़ी के कामों पर ₹29.56 करोड़ खर्चे गए हैं।

वहीं दिल्ली के PWD विभाग ने यह काम करने वाले ठेकेदारों के विषय में भी जानकारी दी है। इनमें से मुनज़रीन अहमद को ₹21.89 लाख, मोहम्मद अरशद को ₹17.21 लाख के ठेके दिए गए। इसी के साथ ही मेसर्स AK बिल्डर्स को ₹29.08 करोड़ और मेसर्स MA बिल्डर्स को ₹8.7 लाख के ठेके दिए गए।

भाजपा ने केजरीवाल के आवास में छोटे-मोटे कामों पर ₹29 करोड़ खर्चने को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं। दिल्ली भाजपा ने इसे केजरीवाल का नवाबी ठाठ बताया है। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे जनता की जगह अपना विकास करना बताया है। शहजाद पूनावाला ने केजरीवाल को दिल्ली का ठग बताया है।

अरविन्द केजरीवाल के आवास के रखरखाव पर ही ₹29 करोड़ खर्च किए जाने को लेकर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इससे पहले अप्रैल 2023 में सामने आया था कि केजरीवाल ने अपने आवास के सौन्दर्यीकरण में ₹45 करोड़ खर्चे। इन सौन्दर्यीकरण में मार्बल वियतनाम से मंगवाया गया जबकि ₹8 लाख के परदे मँगवाए गए।