Home Blog Page 1256

‘ये मुस्लिम इलाका, यहाँ नहीं निकलेगी श्रीराम की फेरी’: राम मंदिर का अक्षत बाँट रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर भीड़ ने तलवार लेकर किया हमला, महिलाओं ने छत पर से बरसाए पत्थर

मध्य प्रदेश के शाजापुर में राम जन्मभूमि पर बन रहे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अक्षत बाँट रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। मस्जिद के पास अक्षत बाँटने जैसे ही हिन्दू कार्यकर्ता पहुँचे, उन पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव किया।

जानकारी के अनुसार, 8 जनवरी, 2024 की शाम को शाजापुर शहर के सोमवारिया क्षेत्र में अक्षत वितरण कार्यक्रम चल रहा था। इसके लिए सांध्यकालीन श्रीराम फेरी निकाली जा रही थी। इसमें बड़ी संख्या में हिन्दू कार्यकर्ता शामिल थे। यात्रा में श्रीराम के भजन बजाए जा रहे थे। यहाँ पर जब यात्रा हररायपुर क्षेत्र में एक मस्जिद के पास पहुँची तो इस पर हमला हो गया।

हिन्दू कार्यकर्ता यात्रा लेकर जैसे ही मस्जिद के पास पहुँचे, यहाँ पर मौजूद मुस्लिम भीड़ ने इस पर एकाएक हमला बोल दिया और पथराव करने लगे। मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू कार्यकर्ताओं पर हमला किया और उनपर पत्थर बरसाए। इस हमले में कुछ हिन्दू कार्यकर्ता घायल हो गए। मुस्लिम भीड़ के हमले के कारण श्रीराम यात्रा में खलल पड़ गया।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मुस्लिम भीड़ का उनसे कहना था कि यह शहर का मुस्लिम इलाका है इसलिए यहाँ श्रीराम की फेरी नहीं निकल सकती। उनके धमकाने के बाद जब हिन्दू कार्यकर्ता आगे बढे तो इन्होने भीड़ इकट्ठा करके हमला कर दिया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस हमले में घरों की छतों के ऊपर से पत्थर फेंके गए। पत्थर फेंकने में मुस्लिम परिवारों की महिलाएँ भी शामिल थीं। कुछ मुस्लिम युवक हिन्दू कार्यकर्ताओं पर तलवार लेकर भी दौड़े और हमला किया।

ऑपइंडिया ने इस मामले में शाजापुर के शहर कोतवाल बृजेश मिश्रा से बात की तो उन्होंने बताया कि अभी शहर में शान्ति व्याप्त है और मामले की सूचना लेकर मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है। इसमें मुस्लिम भीड़ में शामिल 24 लोगों के विरुद्ध नामजद मुकदमा हुआ है। अधिकाँश आरोपित अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

वहीं जिले के हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता इस हमले के बाद से गुस्से में हैं। उन्होंने 8 जनवरी, 2024 की रात को हमले के बाद प्रदर्शन भी किया। हिन्दू कार्यकर्ता उन घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं जहाँ से उन पर पथराव हुआ।

महिला CEO ने होटल में की 4 साल के बेटे की हत्या, शव को बैग में भरकर टैक्सी से हुई फरार: कमरे में खून बिखरा देख पुलिस ने पकड़ा

गोवा में एक महिला ने अपने 4 वर्षीय बेटे को मार दिया और उसका शव एक बैग में भर कर गोवा से कर्नाटक तक एक टैक्सी में आ गई। जिस महिला ने हत्या की वह एक स्टार्टअप की को फाउंडर और CEO है और खुद को AI और हैकिंग का एक्सपर्ट बताती है। उसे अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, 39 वर्षीय सुचाना सेठ नाम की एक टेक स्टार्टअप फाउंडर और माइंडफुल नाम की कम्पनी की CEO 6 जनवरी, 2024 को शाम को अपने 4 वर्ष के बेटे के साथ गोवा के एक होटल पहुँची थी। उसने 7 जनवरी, 2024 को जल्दी-जल्दी में अपना होटल छोड़ दिया। जब वह वापस निकली तो उसके साथ उसका बेटा नहीं था।

उसने 7 जनवरी, 2024 को सुबह होटल जल्दी खाली करने की अर्जी की थी और साथ ही होटल में रिसेप्शनिस्ट से कहा कि उसे बेंगलुरु के लिए एक निजी टैक्सी चाहिए। होटल के कर्मचारियों ने कहा कि सुचाना को फ्लाइट लेना चाहिए लेकिन वह टैक्सी लेने पर अड़ी रही। इसके बाद जब उसे टैक्सी मिली तो वह वहाँ से एक बैग के साथ निकल गई, इस दौरान उसका बेटा नहीं दिखा। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

सुचाना के कमरा छोड़ने के बाद जब वहाँ होटल के कर्मचारी साफ़ सफाई के लिए पहुँचे तो वहाँ उन्होंने खून बिखरा दिखा। उसने होटल के प्रबन्धन को सूचित किया जिन्होंने यहाँ पुलिस बुलाई। इसके बाद उन्होंने पुलिस को बताया कि उसका बेटा साथ में वापस जाते नहीं दिखा।

पुलिस ने जब सुचाना को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसका बेटा गोवा के फट्रोडा में है जहाँ उसके दोस्त हैं। उसने पुलिस को फर्जी पता भी दिया। पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो उसे शक हुआ। पुलिस ने सुचाना को लेकर जा रही टैक्सी के ड्राईवर को फ़ोन किया और उसे नजदीकी पुलिस थाने जाने को कहा। ड्राईवर उस समय कर्नाटक के चित्रदुर्ग में था जहाँ वह पुलिस थाने पहुँचा। यहाँ महिला की जाँच करने पर उसके बैग में उसके 4 वर्षीय बेटे की लाश मिली।

इसके बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और उससे आगे की पूछताछ की। गोवा पुलिस कर्नाटक उसे गिरफ्तार करने पहुँच चुकी है। हत्या करने वाली महिला सुचाना सेठ के बारे में भी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। हत्या करने वाली सुचाना सेठ की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लिखा है कि वह माइंडफुल AI लैब की CEO, AI और डाटा साइंस एक्सपर्ट है जिसे इस मामले में 12 वर्षों का अनुभव है। यह भी लिखा है कि AI एक्सपर्ट 100 महिलाओं की लिस्ट में शामिल रही है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की जाएगी कुर्सी? अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू: एक्शन में डेमोक्रेट नेता, टूरिस्ट यूनियन ने भी घेरा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Maldives President Mohamed Muizzu) की कुर्सी जा सकती है, उनकी सरकार गिर सकती है। मालदीव में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मालदीव की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अली अजीम ने राष्ट्रपति मुइज्जू को पद से हटाने और उनकी सरकार को गिराने के लिए अन्य नेताओं से अपील की है।

मालदीव में संसदीय अल्पसंख्यक नेता अली अजीम ने सोमवार (8 जनवरी 2024) को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का आह्वान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से बेदखल करने में मदद करने की अपील की। अली अजीम ने लिखा:

“डेमोक्रेट पार्टी से जुड़े हम लोग देश की विदेश नीति की स्थिरता को बनाए रखने और किसी भी पड़ोसी देश को अलग-थलग होने से रोकने के लिए समर्पित हैं। क्या आप राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से हटाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं? क्या मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की शुरुआत करेगी?”

सांसदों, कई बड़े नेताओं, पूर्व राष्ट्रपतियों के अपने ही सरकार के खिलाफ बयान के बाद मालदीव की टूरिस्ट यूनियन (MATI: Maldives Association of Tourism Industry) ने मुइज़्ज़ू सरकार के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। उधर मालदीव को जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी कमी आ गई है। भारत की सबसे बड़ी व्यापार संस्था CAIT ने भी भारतीय व्यापारियों से मालदीव से व्यापार ना करने की अपील की है। यह भी सामने आया है कि वर्तमान में चीन की यात्रा पर गए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा को लेकर भी मालदीव ने प्रस्ताव रखा है।

मालदीव की टूरिस्ट यूनियन ने की आलोचना

मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। इसने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया है। MATI ने कहा है, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”

MATI ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के समय भारत ने उनकी काफी सहायता की थी। उसके कारण भारत और मालदीव के रिश्ते बढ़ते रहे। MATI ने लोगों को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी, जिनका रिश्तों पर बुरा असर हो।

सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था ने किया मालदीव का बहिष्कार

भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने देश के सभी कारोबारियों से अपील की है कि वह मालदीव के साथ कोई भी व्यापार ना करें। खंडेलवाल ने कहा है कि मालदीव के साथ व्यापार ना करके भारत के व्यापारी उसे एक कड़ा सन्देश भेजें कि दोनों देशों के रिश्ते एक दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने से ही चल सकते हैं।

मालदीव जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी आई कमी

मालदीव के बहिष्कार की माँग के चलते अब भारतीय यहाँ जाने की अपेक्षा देश में ही घूमने को तरजीह दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव को भारत से जोड़ने वाली उड़ानों को ऑपरेट करने वाली एयरलाइन्स ने कहा है कि बीते कुछ दिन में यहाँ की उड़ान की बुकिंग में कमी आई है। वहीं भारत में टूर ऑपरेटर की संस्था इंडियन एसोशिएसन ऑफ़ टूर ऑपरेटर्स ने कहा है कि बीते दो दिनों से उनके पास मालदीव जाने के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है।

भारत आना चाहते हैं मालदीव के मुखिया मुइज़्ज़ू

मालदीव के मंत्रियों के भारत और पीएम मोदी को लेकर दिए गए बयान के बाद उपजे विवाद के बीच मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू भारत आना चाहते हैं। मालदीव की सरकार ने यह प्रस्ताव भारत के सामने रखा है। वह अभी चीन की यात्रा पर हैं। इससे पहले वह तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। मालदीव के राष्ट्रपतियों का चुने जाने के बाद पहली विदेश यात्रा में भारत आना एक परम्परा रही है। हालाँकि, भारत विरोधी भावनाओं को हवा देकर चुनाव जीते मुइज्जू ने इससे किनारा किया।

मीडिया पोर्टल WION के अनुसार इस यात्रा के लिए प्रस्ताव यह विवाद चालू होने से पहले रखा गया था। हालाँकि, अब इसको लेकर भारत का क्या रुख होगा, यह देखने वाली बात होगी। मुइज्जू, मालदीव में भारत विरोधी कैम्पेन ‘India Out’ को हवा देते रहे हैं।

भारत-मालदीव विवाद में अब तक क्या हुआ?

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

चीन की मिसाइलों में भरा है पानी, सही से ढक्कन तक नहीं खुलते: US की रिपोर्ट में खुलासा, सैन्य अधिकारियों ने किया गोला-बारूद में घोटाला

चीन की मिसाइलों में गोला बारूद की जगह पर पानी भरा हुआ है। इनको लॉन्च नहीं किया जा सकता क्योंकि इनके कवर के ढक्कन तक सही से नहीं खुलते। इसी चक्कर में चीन ने ताइवान को आँख दिखाना बंद कर दिया है। आगे भी चीन की सेना किसी पर हमला करने की अपनी रणनीतियों पर सोच विचार कर रही है क्योंकि उसके अन्दर सैकड़ों खामियाँ निकली हैं। यह सारे खुलासे एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में हुए हैं।

ब्लूमबर्ग द्वारा सूत्रों के हवाले जुटाई गई जानकारी के अनुसार, सेना और इसके साजोसामान खरीदने में भ्रष्टाचार इस कदर पैठ बना चुका है कि अब उसके हथियारों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसी कारण से चीन के राष्ट्रपति ने हाल ही में कुछ सैन्य अधिकारियों को सेना से निकाल फेंका था।

रिपोर्ट में बताया गया है 2021 में भी एक खुफिया जानकारी सामने आई थी कि शिनजियांग के मरुस्थल में सैकड़ों परमाणु मिसाइल बना रहा है। इनका उपयोग चीन के पड़ोसियों को डराने धमकाने में किया जाना था। इसके बाद 2022 और 2023 में चीन ने पड़ोसी ताइवान को काफी परेशान भी किया और इसकी तरफ रॉकेट भी तान दिए।

हालाँकि, अब सामने आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन मिसाइल को जिन कनस्तरों में रखा जाता है, उनके ढक्कन (Lids) ही सही से काम नहीं करते और समय पर नहीं खुलते। इससे मिसाइल सही से लॉन्च नहीं हो पाती। ऐसे में किसी दुश्मन देश के हमले का जवाब देना मुश्किल होगा। खुफिया रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ मिसाइलों में गोला बारूद भरा ही नहीं गया है। इनमें इसकी जगह पर पानी भरा हुआ है, ऐसे में यह काम ही नहीं करेंगी।

ख़ुफ़िया रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सारे घोटाले सेना के रॉकेट फ़ोर्स यूनिट में हुए हैं। इन सभी घोटालों के पीछे सेना में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार को जड़ बताया जा रहा है। इसी के चलते चीन अब दूसरे देशों को आँख दिखाने की अपनी रणनीति पर भी दोबारा विचार कर रहा है।

चीन की सेना में इस भ्रष्टाचार के कारण ही हाल ही में रक्षा मंत्री ली शांगफू को भी उनके पद से हटा दिया गया था। इसके अलावा हाल ही में चीन की सेना के 9 बड़े अधिकारियों को शी जिनपिंग ने बाहर का रास्ता दिखाया था। यह भी चीन की सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार से ही जुड़ा मामला था। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह अधिकारी फ़ोर्स से जुड़े हुए थे और इनमें से 4 इन खराब मिसाइलों के लिए जिम्मेदार थे, जिसके लिए इन्हें सजा दी गई।

चीन की सेना में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। दरअसल, चीन की सेना देश को समर्पित ना हो कर यहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी की फ़ौज है। यह पार्टी के हितों को पूरा करने के लिए काम करती है। इसकी निष्ठा चीन देश के प्रति ना हो कर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति है। ऐसे में यहाँ भ्रष्टाचार भी काफी बड़ी बात है क्योंकि अधिकांश समय चीन की सेना में पार्टी से ही बड़े कार्यकारी अधिकारी भर्ती किए जाते हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सत्ता में आने के बाद से ही भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन इसमें उन्हें कुछ ख़ास सफलता नहीं मिली है।

जिस जज ने खुलवाया राम जन्मभूमि का ताला, MBBS पढ़ती उनकी बेटी को ‘विशेष वर्ग’ ने किया था टॉर्चर: मुलायम सरकार में प्रमोशन भी नहीं

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए कई लोगों ने संघर्ष किया है। इसमें उन जज ‘कृष्ण मोहन पांडे’ का नाम भी आता है जिन्होंने हिंदुओं को वहाँ पूजा करने की इजाजत दी। इस एक फैसले के बाद उनके जीवन में जो उथल-पुथल मची, उसका किसी को अंदाजा भी नहीं है। बताया जाता है कि हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देने के बाद उन्हें पाकिस्तान से तो धमकियाँ आती ही थीं। देश में भी उनके साथ अन्याय होना शुरू हो गया था। इस फैसले को देने की वजह से तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा उनका प्रमोशन रोक दिया गया था। पदोन्नति पाने के लिए उन्हें कोर्ट में लड़ाई लड़नी पड़ी थी। इतना ही नहीं उनकी बेटी को क्लास में एक खास वर्ग द्वारा परेशान किया जाता था, जिसका जिक्र बहुत कम पढ़ने को मिलता है।

बेटी को किया गया प्रताड़ित

आज राम मंदिर में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इसी क्रम में जज कृष्ण मोहन पांडे के फैसले को भी याद किया जा रहा है जो उन्होंने 1 फरवरी 1986 को दिया था। इसी आदेश में जन्मभूमि का ताला खोलकर हिंदुओं को वहाँ पूजा पाठ करने की इजाजत दी गई थी। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, केएम पांडे की बेटी मधु पांडे की मानें तो उनके पिता लंबित मामलों के खिलाफ थे और इसीलिए उन्होंने इस मामले में सीधा निर्णय सुनाया। वह किसी तरह दबाव में नहीं थे। जब वे फैजाबाद (अब अयोध्या) के जिला जज नियुक्त हुए तो उन्होंने 40 वर्ष से लंबित इस मुकदमे को प्राथमिकता दी थी।

मधु पांडे के अनुसार उनके पिता ने खुद गजेटियर से लेकर पुराने साक्ष्यों का तीन से चार माह तक गहन अध्य्यन किया था। इसके बाद उन्होंने सारे साक्ष्य जुटाए थे। जब उन्हें कहीं ये बात नहीं मिली कि मंदिर का ताला क्यों बंद है तो उन्होंने 1 फरवरी 1986 को अपना ऐतिहासिक निर्णय दिया। इस फैसले को न हाईकोर्ट ने पलटा न सुप्रीम कोर्ट ने। मगर इस एक निर्णय से सब तत्कालीन सरकार बिलबिला गई।

उन्होंने उनकी पदोन्नति रोक दी। वहीं कृष्ण मोहन पांडे के फैसला देने के बाद उनकी बेटी को भी प्रताड़ित किया गया। वह उस समय केजीएमसी में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। जब क्लास में सबको पता चला कि ताला खोलकर पूजा पाठ करने की अनुमति देने का फैसला उनके पिता का है तो उन्हें एक ‘वर्ग’ द्वारा बहुत परेशान किया गया। हालत ऐसी कर दी गई कि उन्हें कई पेपर छोड़ने की स्थिति बन गई।

केएम पांडे के भतीजे सुजीत पांडे बताते हैं कि एक फैसला सुनाने के लिए उन्होंने अपने चाचा को 8-8 घंटे रिसर्च करते देखा था। करीबन 6 माह तक ऐसा रहा। लेकिन किसी को उन्होंने भनक भी नहीं लगने दी कि वह किस मुकदमे पर काम कर रहे हैं। सुजीत पांडे ये भी बताते हैं कि उनके चाचा को एक ज्योतिषी प्रो कुन्ने ने कहा था कि कुछ समय बाद उनका एक छोटे जिले में ट्रांसफर होगा, वह वहाँ जाने से मना न करें। उन्हें प्रसिद्धि मिलेगी। जब केएम पांडे का ट्रांसफर फैजाबाद हुआ और उनके सामने अयोध्या का मामला आया तो वो समझ गए कि यही वो केस है। उन्होंने दिन रात मेहनत करके इस फैसले पर निर्णय दिया।

वानर खुद बैठा था फैसला सुनने

1991 में उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘अंतरआत्मा की आवाज’ में लिखा, ”जिस दिन मैं ताला खुलवाने का फैसला दे रहा था उस दिन मुझे बजरंगबली के वानर के रूप में दर्शन हुए। मेरे दरबार की छत पर एक काला बंदर दिन भर झंडा-स्तंभ पकड़े बैठा रहा। जो लोग इस फैसले को सुनने के लिए दरबार में आए थे, वे उन्हें चना दे रहे थे और उस बंदर को मूँगफली, लेकिन मजे की बात है कि उस बंदर ने कुछ भी नहीं खाया। वह चुपचाप झंडा चौकी पकड़कर लोगों को देखता रहा। वह मेरे आदेश सुनाते ही चला गया। जब फैसला देने के बाद डीएम और एसएसपी मुझे घर ले गए तो मैंने देखा कि वही बंदर मेरे घर के बरामदे में बैठा है। मैं बहुत हैरान हुआ। मैंने उसे प्रणाम किया। वह कोई दिव्य शक्ति रही होगी।”

मुलायम सरकार ने रोकी पदोन्नति

इसी फैसले के बाद जब केंद्र सरकार के पास हाईकोर्ट में प्रमोट करने वाले जजों की लिस्ट भेजी गई तो कृष्ण मोहन पांडे के नाम के साथ मुलायम सिंह यादव ने भी अपना नोट छोड़ा। इस नोट में लिखा था“पांडे जी सुलझे हुए ईमानदार तथा कर्मठ जज हैं। फिर भी 1986 में राम जन्मभूमि का ताला खुलवाने का आदेश देकर उन्होंने सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा की थी, इसलिए मैं उनके नाम की सिफारिश नहीं करता।” बस इसी नोट के कारण केएम पांडे पदोन्नति के लिए नामित होने के बाद भी प्रमोशन न पा सके।

बाद में 13 जनवरी 1990 को विश्व हिंदू परिषद अधिवक्ता संघ के तत्कालीन महासचिव हरिशंकर जैन ने इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। तब जाकर कृष्ण मोहन पाण्डेय को हाई कोर्ट में पदोन्नति मिली। जानकारी के अनुसार, याचिका में जस्टिस पांडेय के प्रमोशन की माँग करते हुए कहा गया था कि यूपी सरकार ने 15 लोगों का नाम केंद्र को भेजा था, जिसमें मुख्यमंत्री का लिखा उक्त कथित नोट लगा हुआ था। केंद्रीय कैबिनेट ने वह सूची विचार के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भेजी। सीजेआई ने उसमें से 7 नामों को मंजूरी दी, जिसमें जस्टिस पांडेय का नाम भी शामिल था। लेकिन, केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने सीजेआई की ओर से सूची में मंजूर कर भेजे गए 7 नामों में से 6 को नियुक्ति की मंजूरी दी और जस्टिस पांडेय का नाम रोक लिया। बाद में उनसे कनिष्ठ जज आरके अग्रवाल को हाई कोर्ट प्रमोट किया गया।

मिस्टर सिन्हा को जान से मारने की धमकी: कौन हैं, क्या किया… क्यों एक ट्वीट से मालदीव ने टेके घुटने, 3 मंत्रियों की हुई छुट्टी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की यात्रा की और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया। इन तस्वीरों को और पीएम मोदी की यात्रा को भारत में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम माना गया। इस बीच, एक एक्स यूजर मिस्टर सिन्हा ने कुछ ऐसा लिख दिया कि सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। इस जंग में कूदे मालदीव के एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन मंत्रियों को छुट्टी हो गई। मालदीव सरकार को सफाई देनी पड़ी, इसके बावजूद भारतीयों ने मालदीव का बायकॉट कर दिया है और मालदीव की भारत विरोधी सरकार को लोग जमकर सुना रहे हैं। तो आखिर ये मिस्टर सिन्हा हैं कौन? जिनके ट्वीट पर इतना बड़ा बवाल हो गया।

दरअसल, मिस्टर सिन्हा का पूरा नाम रौशन सिन्हा है और वो एक राजनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पीएम मोदी की एक वीडियो को साझा किया था। सिन्हा ने पीएम मोदी द्वारा लक्षद्वीप के पर्यटन को बढ़ाने देने की अपील को री-ट्वीट करते हुए मालदीव की सरकार को चीन की कठपुतली सरकार बता दिया। उन्होंने लिखा, “क्या बढ़िया कदम है! यह मालदीव की नई चीनी कठपुतली सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। साथ ही इससे लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।”

इस पोस्ट ने मालदीव की युवा अधिकारिता, सूचना और कला उप मंत्री मरियम शिउना को परेशान कर दिया। सिन्हा की उस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मालदीव की नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “विदूषक” और “इजरायल की कठपुतली” कह दिया। इस मामले में सोशल मीडिया पर जबरदस्त बखेड़ा खड़ा हो गया। जिसके बाद मालदीव में सत्ताधारी पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ शिउना को निलंबित कर दिया गया है।

इस पूरे मामले के बाद मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर एक पोस्ट किया और उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि ये मामला मालदीव तक पहुँच गया है और कई मालदीववासी इससे आहत हैं। मैं बस ये साफ करना चाहता हूँ कि हम मालदीव के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि तुम्हारे चीनी कठपुतली सरकार के खिलाफ हैं, जो भारत विरोधी है।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मालदीव में विपक्ष भारत समर्थक है जबकि मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ सरकार चीन समर्थक है। बता दें कि ये विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब 8 जनवरी को मुइज्जू चीन की यात्रा पर जाने वाले थे। सिन्हा ने भारतीयों की ताकत को रेखांकित करते हुए लिखा, “विदेश मंत्रालय ने ऐसे समय में मालदीव के दूत को बुलाया, जब मालदीव के राष्ट्रपति चीन में हैं। यह एक तरह से चीन के लिए भी बड़ा संदेश है।” सिन्हा ने कहा कि भारत विरोधी शक्तियों के खिलाफ अब भारतीय एकजुट हो गए हैं।

मिस्टर सिन्हा गुजरात में रहने वाले व्यवसाई हैं। वो मूलरूप से बिहार के हैं। सिन्हा भारत की राजनीति, वैश्विक राजनीति और विदेश नीति में रूचि रखते हैं। वो अपनी हिंदू पहचान पर गर्व भी करते हैं। अपनी राजनीतिक चेतना के बारे में बात करते हुए मिस्टर सिन्हा का कहना है कि साल 2014 के बाद से भारतीयों के आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि हुई है। मिस्टर सिन्हा पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। उनका एक अकाउंट भले ही सस्पेंड हो गया है, लेकिन उनके एक्स सोशल मीडिया पर 167k से ज्यादा फॉलोवर हैं।

सिन्हा ने ऑपइंडिया को बताया कि ये विवाद शुरू होने के बाद से उन्हें इनबॉक्स में कई लोगों ने जान से मारने की धमकी दी है, तो कई लोगों ने गालियाँ भी दी हैं। हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि भारतीयों द्वारा मालदीव के बहिष्कार को भारत सरकार का भी समर्थन मिलता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि मालदीव में सरकार का बदलना भारत के लिए अच्छा ही होगा। 7 जनवरी को सूत्रों के हवाले से मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर दावा किया कि मालदीव का पर्टयन विभाग भारत विरोधी अभियान को हवा दे रहा है।

सिन्हा ने कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “मालदीव में राष्ट्रपति मुइज्जू के करीबी लोग, उनके मंत्री और कुछ व्यापारिक घराने भारत विरोधी अभियान को हवा देने में जुटे हैं, क्योंकि वो चीन को खुश करना चाहते हैं। वो कुछ समय में चीन भी जाने वाले हैं।” हालाँकि अब मुइज्जू चीन पहुँच चुके हैं।

मालदीव के एक अखबार ने भारत विरोधी पोस्ट शेयर किया था, जिसमें मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों पर तुरंत रोक लगाने का आह्वान किया गया था। इस पोस्ट में यूरोपीय पर्यटकों और भारतीय पर्यटकों के बीच तुलना की गई थी और बताया गया था कि यूरोप के पर्यटक भारतीयों से बेहतर क्यों है। इसमें भारतीय पर्यटक के तौर पर मिस्टर सिन्हा की तस्वीर इस्तेमाल की गई थी।

ऐसे में जब सिन्हा ने लक्षद्वीप को लेकर पोस्ट किया और मालदीव को आईना दिखाया, तो मालदीव की भारत विरोधी ताकतें नाराज हो गईं और भारतीयों को नीचा दिखाने की कोशिश में जुट गए। इसी कड़ी में उन्होंने पीएम मोदी का भी अपमान करने की कोशिश की। इसके बाद जब भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, तो मालदीव की सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने तीन मंत्रियों को पद से हटाना पड़ा। वहीं, इस बीच मालदीव में भारत समर्थक नेताओं ने भारत का जबरदस्त समर्थन किया। इस विवाद के बीच इस बात की जरूरत भी थी कि मालदीव के जिम्मेदार लोग या जो पहले जिम्मेदार पदों पर रहे हैं, वो भारत को लेकर अपना रुख साफ करें। कई पूर्व राष्ट्रपतियों और मंत्रियों ने ऐसा किया भी और भारत के साथ दोस्ती की कसमें खाईं।

वैसे, इस पूरे मामले में एक बात तो साफ हो गई कि मालदीव का भारत विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। इससे भी जरूरी बात ये हुई कि भारतीय लोग जाग गए और उन्होंने पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखा दी। अब इस मामले में भले ही तीन मंत्रियों को हटा दिया गया हो, लेकिन भारतीय लोग #VisitMaldives के विरोध में #Explore IndianIslands #BoycottMaldives #MaldivesOut #LakshadweepTourism जैसे हैशटैग लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और मालदीव को घुटने पर ला रहे हैं।

लड़की को हिन्दू लड़के से था प्यार, अम्मी ने सिर में गोली मार दी गोली: झारखंड में 15 साल की नाबालिग की ‘ऑनर किलिंग’

झारखंड के गिरिडीह में ऑनर किलिंग का मामला सामने आया है। यहाँ अम्मी ने अपनी 15 साल की बेटी की ही गोली मार कर हत्या कर दी। असल में नाबालिग लड़की को मोहल्ले के ही एक लड़के से प्यार था और वो उस लड़के से शादी भी करना चाहती थी। पुलिस ने हत्यारी अम्मी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। साथ ही हत्या में जिस पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था, उसे भी जब्त कर लिया गया है। मामला बगोदर के हरिजन मोहल्ले का है। अम्मी ने बेटी की लव मैरिज से इनकार कर दिया, क्योंकि लड़का हिन्दू समुदाय का था

मामला मुस्लिम परिवार का है। घटना शनिवार (6 जनवरी, 2024) की है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और तनाव व्याप्त हो गया। अम्मी ने खुद थाने पहुँच कर बेटी की हत्या वाली बात बताई। इसके बाद ये खबर पूरे इलाके में फैल गई। मृतका के अब्बा ने बगोदर थाने में शिकायती पत्र दिया है, जिसमें अपनी पत्नी को ही उसने आरोपित बताया है। SDPO नौशाद आलम ने इसकी पुष्टि की है कि प्रेम प्रसंग में माँ ने अपनी ही बेटी की गोली मार कर हत्या कर दी है।

पुलिस ने बताया कि लड़की की अम्मी उसकी शादी कहीं और करना चाहती थी, लेकिन बेटी अड़ी रही कि वो उसी से शादी करेगी जिसे वो प्यार करती है। अभी इसकी जाँच ही चल रही है कि पिस्टल कहाँ से आया था और किसने मँगाया था। अम्मी ने बेटी की मनाही के बावजूद उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी और 15 जनवरी से निकाह की रस्में भी शुरू होने वाली थीं। 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी का उस दिन सुबह से ही अमित के साथ झगड़ा चल रहा था।

मारपीट भी हुई, जिसे पड़ोसियों ने हस्तक्षेप कर शांत कराया था। शाम को गोली चलने की आवाज़ सुनी गई। बेटी रुखसाना की हत्या के बाद अम्मी फरजाना खातून थाने पहुँची और कबूल किया कि उसने अपनी बेटी की हत्या कर दी है। रुखसाना के सिर पर गोली के निशान थे। एसपी दीपक शर्मा ने भी कहा कि हत्या अम्मी ने ही की है, मामला लव मैरिज बनाम अरेंज मैरिज के विवाद का है। मृतका के अब्बा अंजान खान मैकेनिक हैं। 3 साल से परिवार इसी किराए के मकान में रहता है। घटना के वक्त अब्बा नहीं थी, जबकि लड़की की नानी घर में थी।

गौरक्षक बिट्टू बजरंगी के भाई की मौत: हमलावरों ने पेट्रोल डालकर जला दिया था, दिल्ली के AIIMS में हो रहा था इलाज

गौ-रक्षक बिट्टू बजरंगी के भाई 32 वर्षीय महेश पांचाल की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई है। बीते साल 13 दिसंबर को फरीदाबाद में कुछ कार सवार बदमाशों ने महेश पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। इसके बाद वे 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे और उनका दिल्ली के AIIMS में इलाज चल रहा था।

गौरतलब है कि 13 दिसम्बर 2023 को बिट्टू बजरंगी के भाई महेश को जान से मारने का प्रयास किया गया था। हमलावरों ने महेश के ऊपर फरीदाबाद की दाबुआ कॉलोनी में थिनर डाल कर आग लगा दी थी। महेश को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया था। महेश का शरीर इस हमले में 60% जल चुका है।

इस हमले के विषय में फरीदाबाद पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया गया था, जिसकी जाँच हरियाणा पुलिस की SIT कर रही है। इसी मामले में 22 दिसम्बर 2024 को ‘हिन्दुतान टाइम्स’ में लीना धनखड़ नाम की एक पत्रकार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

HT में प्रकाशित इस खबर में लिखा था कि फरीदाबाद पुलिस ने कहा है कि बिट्टू बजरंगी के भाई अलाव में गिर जाने के कारण जल गए थे और उनकी हत्या के प्रयास के कोई सबूत नहीं हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल के जलने के मामले में पुलिस में फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई और एक गौतस्कर को इसमें फँसाया गया।

हालाँकि, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की इस खबर को नकार दिया था। फरीदाबाद के ACP ने इस खबर के बारे में बताए जाने पर पूछा कि आखिर पुलिस में किसने इस केस को फेक बता दिया? उन्होंने कहा कि ये बात ठीक है कि अभी इस मामले में आरोपित के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि केस फर्जी होने की बात कही गई है। उन्होंने इसकी पुष्टि की थी कि बिट्टू बजरंगी के भाई जल गए हैं।

इसके बाद बिट्टू बजरंगी अपने भाई की हत्या के प्रयास को झूठा बताकर फेक न्यूज फैलाने के आऱोप में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि जुबैर ने उनके और उनके भाई के बारे में पहले भी अफवाहें फैलाई हैं। इस बार उनके झूठी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस घिनौनी कार्रवाई को अंजाम दिया, जबकि उनका भाई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

HT में खबर प्रकाशित होने और जुबैर द्वारा इसे प्रचारित करने के बाद बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि इसको लेकर वह कार्रवाई करेंगे। इसके बाद उन्होंने गुुरुवार (28 दिसंबर 2023) को फरीदाबाद पुलिस को शिकायत दी थी। बिट्टू बजरंगी द्वारा पुलिस से की गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसमें उन्होंने जुबैर को कट्टरपंथी और घोर सांप्रदायिक बताया है।

 

Beaches Of India… समुद्री तटों का आनंद लेना चाहते हैं तो ये कंपनी दे रही भारी डिस्काउंट, लक्षद्वीप यात्रा के लिए भी ऑफर

सोशल मीडिया से निकली बहस ने मालदीव के तीन मंत्रियों की कुर्सी छीन ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप की यात्रा के बाद शुरू हुए विवाद ने मालदीव के पर्यटन को काफी नुकसान पहुँचाया है। वहीं, भारत का लक्षद्वीप एकाएक लोगों की नजर में आ गया है। बुकिंग करने वाली कंपनी ‘मेक माय ट्रिप’ ने बताया है कि लक्षद्वीप के बारे में लोग खूब सारी इन्क्वॉयरी कर रहे हैं। सिर्फ लक्षद्वीप ही नहीं, भारत के अन्य बीच वाले ठिकानों के बारे में भी लोग जानना चाह रहे हैं।

सोशल मीडिया पर #BoycottMaldives ट्रेंड के बीच लोग बीच (Beach) वाले भारतीय शहरों के बारे में सर्च कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, लक्षद्वीप के लिए उसके प्लेटफॉर्म पर हुए सर्च में 3400% की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद ‘मेक माय ट्रिप’ ने लक्षद्वीप के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम “Beaches of India” है।

इस अभियान में कंपनी लक्षद्वीप और अन्य भारतीय द्वीपों के लिए यात्रा पैकेजों में छूट एवं ऑफर प्रदान कर रही है। वहीं, लक्षद्वीप के बारे में गूगल पर 50 हजार से अधिक लोगों ने सर्च किया।

सर्च में 3400 प्रतिशत की बढ़ोतरी

मेक माय ट्रिप ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “न्यूज़फ्लैश: हमने माननीय प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद से लक्षद्वीप के लिए ऑन-प्लेटफॉर्म खोजों में 3400% की वृद्धि देखी है। भारतीय समुद्र तटों में इस रुचि ने हमें भारतीय यात्रियों को देश के आश्चर्यजनक समुद्र तटों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है और इसके लिए ऑफ़र एवं छूट के साथ मंच पर ‘भारत के समुद्र तट’ अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। इस स्थान को देखते रहें!

ट्रैवल कंपनी ने मालदीव के लिए बुकिंग कैंसिल की

एक अन्य ट्रैवल वेबसाइट, EaseMyTrip ने घोषणा की है कि उसने मालदीव के लिए उड़ानों और होटलों की सभी बुकिंग को रद्द कर दिया है। एक्स पर एक पोस्ट में कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ निशांत पिट्टी ने कहा कि मालदीव के मंत्रियों द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद सभी मालदीव उड़ान बुकिंग निलंबित कर दी गई हैं।

EaseMyTrip के सह-संस्थापक प्रशांत पिट्टी ने कहा, “हमारी कंपनी पूरी तरह से घरेलू और भारत में बनी है। पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा पर मालदीव के सांसद की पोस्ट पर विवाद के बीच हमने फैसला किया है कि हम मालदीव के लिए कोई भी बुकिंग स्वीकार नहीं करेंगे। हम चाहते हैं कि अयोध्या और लक्षद्वीप अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन बने।”

गौरतलब है कि लक्षद्वीप द्वीप समूह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। यह द्वीपसमूह हिंद महासागर में स्थित है। लक्षद्वीप में कई खूबसूरत समुद्र तट हैं। द्वीप समूह में कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं। वहीं, मालदीव भारतीय पर्यटकों के लिए लोकप्रिय पर्यटनस्थलों में से एक है। देश के पर्यटन मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक, साल 2023 के दौरान मालदीव जाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा थी। भारत से 2.05 लाख पर्यटन मालदीव पहुँचे थे तो दूसरे नंबर पर 2.03 लाख पर्यटक रूस से मालदीव पहुँचे थे।

704 किलोमीटर स्केटिंग कर के जयपुर से अयोध्या पहुँचेगा 10 साल का हिमांशु, कहा – ठण्ड है, लेकिन भगवान श्रीराम की कृपा है: रामेश्वरम से अगस्त्य भी निकले

भगवान राम के 10 साल के भक्त ने जयपुर से अयोध्या तक स्केटिंग करने का फैसला किया है। 10 साल का हिंमाशु सैनी पूरे 7 दिन की स्केटिंग करके अयोध्या पहुँचेगा। हिमांशु जयपुर के कोटपुतली के रहने वाले हैं। हिमांशु सैनी को कोटपूतली के अंग्रेशन तिराहे से कोटपूतली विधायक के प्रतिनिधि तरुण पटेल और समाज सेवी मुकेश गोयल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हिमांशु के साथ उसके पिता व भाई भी उसके साथ रहेंगे। वहीं, अगस्त्य 80 दिन स्केटिंग करके रामेश्वरम से अयोध्या पहुँच रहे हैं।

हिमांशु की अयोध्या तक की यात्रा के दौरान बीजेपी भी पूरी मदद करेगी। कोटपुतली के विधायक प्रतिनिधि तरुण पटेल और समाज सेवी मुकेश गोयल ने हिमांशु को रास्ते में कोई समस्या न हो, इसके लिए बीजेपी कार्यकर्ता पूरा ध्यान रखेंगे। उन्होंने कहा कि हिमांशु की हौसला अफजाई के लिये रास्ते मे जगह जगह प्रशासन और पुलिस को जानकारी दे दी गई है, ऐसे में उसे कोई समस्या नहीं होने पाएगी। वहीं, स्केटिंग छात्र हिमांशु सैनी ने बताया, “मेरे ऊपर भगवान रामचंद्र जी का आशीर्वाद है, उन्हीं की प्रेरणा से मैं मूर्ति स्थापना पर उनके मंदिर अयोध्या जा रहा हूँ।

भास्कर से बातचीत में हिमांशु ने कहा, “एक दिन मैं यूट्यूब पर वीडियो देख रहा था। अयोध्या में भगवान राम के उत्सव में शामिल होने लोग पैदल जा रहे थे। तब मैंने स्केटिंग करके अयोध्या तक जाने का फैसला किया। पापा और भैया भी साथ जा रहे हैं। अयोध्या यहाँ से 704 किलोमीटर है। पूरे रास्ते स्केटिंग करता जाऊँगा। ठंड तो है, लेकिन श्रीराम की कृपा है।”

रामेश्वरम से अयोध्या पहुँचने वाले हैं अगस्त्य

हिमांशु जयपुर से स्केटिंग करते हुए अयोध्या को रवाना हुए हैं, तो करीब 75 दिन पहले से रामेश्वरम से अयोध्या के लिए अगस्त्य भी निकले हैं। अगस्त्य 80 दिन की धर्मसेतु यात्रा पर है। अगस्त्य ने बताया कि सालों बाद रामलला अयोध्या मंदिर में विराजित होंगे। इसकी ही खुशी और उत्साह है। अगस्त्य का पूरा नाम अगस्त्य घनश्याम भाई है और उनकी उम्र 22 साल है। अगस्त्य 22 साल के हैं और वो भगवान राम के दर्शन के लिए रामेश्वरम से अयोध्या तक धर्मसेतु यात्रा पर स्केटिंग करते हुए निकले हैं।