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भ्रष्टाचार में तमिलनाडु के मंत्री को 3 साल की सजा, पत्नी पर भी ₹50 लाख जुर्माना: DMK के इसी नेता ने कहा था हिंदी वाले पानीपूरी बेचते हैं

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली द्रमुक मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के. पोनमुडी को मद्रास हाईकोर्ट ने आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में 3 वर्ष की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर ₹50 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। उनकी पत्नी पर भी ₹50 लाख का कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। मद्रास हाईकोर्ट ने पोनमुडी को 19 दिसंबर को दोषी ठहराया था और 21 दिसम्बर 2023 को सजा सुनाई। अब उनका मंत्री पद और विधानसभा सदस्यता, दोनों जा सकती है।

कौन हैं के पोनमुडी?

72 वर्षीय के पोनमुडी तमिलनाडु के कल्लाकुरुची जिले में तिरुक्कोल्यालुर सीट से विधायक हैं। वह DMK के प्रभावी नेताओं में से एक हैं। पोनमुडी साल 2006 से 2011 तक की करूणानिधि सरकार में भी उच्च शिक्षा मंत्री थे। इससे पहले वे राज्य में ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभाल चुके हैं। वह 2016 से एमके स्टालिन सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री हैं।

पोनमुडी का परिवार सूर्या कॉलेज समूह का मालिक है। इसके अंतर्गत वह इंजीनियरिंग, विज्ञान और पॉलिटेक्निक के कॉलेज चलाते हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी साल 1989 में शुरू की थी। इसके बाद वे 6 बार विधायक बने। पोनमुडी के एक बेटे गौतम सिगामणि सांसद हैं, जबकि दूसरे बेटे तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।

द्रमुक नेता पनमुडी ने मई 2022 में हिंदी भाषियों पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग हिंदी बोलते हैं, वे तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों में पानीपूरी बेचते हैं। अंग्रेजी को अंतरराष्ट्रीय भाषा बताते हुए पोनमुडी ने कहा था, “बहुत से लोग कहते हैं कि अगर आप हिंदी पढ़ते हैं तो आपको नौकरी मिलेगी। क्या ऐसा है? आप कोयंबटूर या कहीं जाकर देख सकते हैं कि जो पानीपुरी बेच रहा है वे सभी हिंदी बोलते हैं?”

क्या है के पोनमुडी पर आरोप?

पोनमुडी पर आरोप है कि साल 2006 से 2010 के दौरान उनकी और उनकी पत्नी की सम्पत्ति में ₹1.7 करोड़ की वृद्धि हुई। यह आय उनके बताए गए स्रोतों से मेल नहीं खाती है। तमिलनाडु के विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधी विभाग (DVAC) ने बताया कि उनकी और उनकी पत्नी की सम्पत्ति 2006 की शुरुआत में ₹2.71 करोड़ थी, जो 2011 में बढ़कर ₹6.27 करोड़ हो गई।

इस बढ़ी हुई आय में से ₹1.7 करोड़ का कोई हिसाब नहीं मिला। इसी आधार पर उनके खिलाफ मामला चलाया गया। सबसे पहले उनके खिलाफ विल्लुपुरम जिला अदालत में मामला दर्ज किया गया, लेकिन 2016 में जिला अदालत ने यह कहकर उन्हें और उनकी पत्नी को छोड़ दिया कि उनके खिलाफ पेश किए गए सबूत पूरे नहीं हैं और उनकी पत्नी को कृषि जैसे स्रोतों से आय हो रही थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

इसके बाद यह मामला मद्रास हाईकोर्ट में गई। मद्रास हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन ने निचली अदालत के निर्णय को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने पोनमुडी और उनकी पत्नी पी. विशालाक्षी को अलग-अलग मानकर भूल की है।

हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि पोनमुडी की पत्नी उनके द्वारा अज्ञात स्रोतों से कमाई गई धनराशि को समायोजित नहीं कर रही थीं। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने इसके पीछे उनकी कृषि आय को आधार बनाया है, लेकिन यह साफ़ है कि जिस आय का स्रोत नहीं पता है वह कृषि से नहीं आई।

हाईकोर्ट ने इस मामले में आज (21 दिसम्बर 2023) को सुनवाई करते हुए 72 वर्षीय के. पोनमुडी के खिलाफ सबूतों को सही पाया और दोषी ठहराते हुए 3 वर्षों की सजा सुना दी। उनके और उनकी पत्नी पर अलग-अलग ₹50 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना ना भरने की दशा में 6 महीने की और जेल होगी।

सजा मुक़र्रर होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता और मंत्री पद अपने आप चला जाएगा। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत यदि किसी भी विधायक/सांसद को 2 वर्षों से अधिक की सजा होती है तो उसका पद चला जाता है। हालाँकि, इस मामले में वे हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसके लिए उन्हें 30 दिन का समय दिया गया है।

CBI ने कोर्ट के सामने उजागर किया रिया चक्रवर्ती का ‘झूठ’, नेटिजन्स बोले- गिरफ्तार करो: खुद को ‘ब्रांड एंबेसडर’ बताकर जाना चाहती थी विदेश

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत मामले को 3 साल से भी ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक ये सामने नहीं आ सका है कि आखिर उस दिन हुआ क्या था। शुरू में रिया चक्रवर्ती समेत कई लोगों को बुला बुलाकर पूछताछ हुई, फिर बाद में उन्हें भी जमानत मिल गई। हालाँकि अब एक बार फिर इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया गया है और रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी की माँग हो रही है। ट्विटर पर #ArrestRheaChakraborty ट्रेंड कर रहा है। सीबीआई जाँच पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस दौरान पता चला है कि केस की आरोपित रिया चक्रवर्ती ने बॉम्बे हाई कोर्ट में विदेश जाने की माँग करते हुए सीबीआई के लुकआउट नोटिस को चुनौती दी थी। जिसका केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने बॉम्बे हाईकोर्ट में विरोध किया।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस ए एस गडकरी समक्ष रिया की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जिस कंपनी (Drools Pets Pvt. Ltd.) की ओर से रिया ने बाहर जाने के काम को जरूरी बताया है, वो अब उसकी ब्रांड एंबेसडर है ही नहीं। उसकी एंबेस्डर तो कियारा आडवाणी हैं। इसके अलावा जाँच एजेंसी ने कोर्ट से इस मामले की पूरी जाँच और पुष्टि के लिए समय माँगा है।

बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने कोर्ट के लुकआउट नोटिस को कुछ दिन के लिए सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था कि उन्हें काम के सिलसिले में 27 नवंबर से 2 जनवरी तक दुबई की यात्रा करनी है। इसी पर सीबीआई ने विरोध किया और कोर्ट से कहा कि जब तक वो जाँच न कर लें कि रिया का उस कंपनी से अब क्या संबंध है और वो क्यों बाहर जाना चाहती हैं, तब तक उन्हें विदेश न जाने दिया जाए।

सीबीआई की दलील सुन रिया चक्रवर्ती द्वारा डाली गई याचिका पर कोर्ट ने गौर नहीं किया और सुनवाई की अगली तारीख 26 दिसंबर दे दी। कोर्ट ने कहा कि वह कार्यवाही में जल्दबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने सीबीआई को समय दिया है ताकि वो हर तथ्य की जाँच कर सकें।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच के दौरान रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक के खिलाफ 2020 में लुकआउट नोटिस जारी हुआ था। इस साल की शुरुआत में शोविक के खिलाफ जारी सर्कुलर अस्थायी रूप से निलंबित किया गया तो उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति मिल गई। अब इसी सर्कुलर को हटवाने में रिया चक्रवर्ती जुटी हुई हैं।

हाजिरी पंजाब के विपश्यना शिविर में, जवाब ED को: दिल्ली के CM ने शराब घोटाले में समन को ‘अवैध’ करार दिया, खुद को बताया ‘ईमानदार’

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को 21 दिसंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होना था। लेकिन उससे पहले ही वे विपश्यना के लिए पंजाब के होशियारपुर चले गए। उन्होंने ईडी को भेजे जवाब में समन को ‘अवैध’ और खुद को ‘ईमानदार’ बताया है। मामला दिल्ली के शराब घोटाले से जुड़ा है।

20 दिसंबर को ईडी को भेजे जवाब में केजरीवाल ने कहा है, “यह समन भी एजेंसी द्वारा जारी किए गए पिछले समन की तरह ही गैर कानूनी है। ईडी को यह समन वापस लेना चाहिए, क्योंकि यह राजनीति से प्रेरित है। मैंने अपना जीवन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जिया है। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।”

आप मुखिया ने कहा है कि विपश्यना ध्यान के लिए उनकी यात्रा के बारे में सारी दुनिया और मीडिया को पता है। इसके बावजूद 18 दिसंबर को समन भेजकर 21 दिसंबर को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया। इससे उनका यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि यह प्रोपेगेंडा से प्रेरित है। इसका मकसद लोकसभा चुनाव से पहले सनसनीखेज खबरें फैलाना है। उन्होंने समन को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि यह समझ ही नहीं आ रहा है कि उन्हें किस हैसियत से बुलाया गया है, गवाह की हैसियत से या फिर संदिग्ध की हैसियत से।

जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक अरविंद केजरीवाल चार्टर्ड विमान में सवार होकर 20 दिसंबर को जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट पहुँचे। यहाँ उनकी अगवानी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने की। फिर दोनों नेता मेडिटेशन सेंटर के पास स्थित चौहाल के लिए हेलीकॉप्टर पकड़कर निकले। दोपहर के समय केजरीवाल विपश्यना सेंटर पहुँच गए, वहीं भगवंत मान चौहाल में ही रात भर रुके।

अरविंद केजरीवाल हर साल 10 दिनों के लिए विपश्यना के लिए जाते रहे हैं। वो कभी बेंगलुरु, तो कभी जयपुर में विपश्यना करते रहे हैं। इस बार उन्होंने पंजाब के होशियारपुर जिले के आनंदपुर स्थित विपश्यना सेंटर को इसके लिए चुना है। पहले केजरीवाल 19 दिसंबर को ही विपश्यना के लिए जाने वाले थे। लेकिन INDI गठबंधन की बैठक की वजह से वो एक दिन बाद बुधवार (20 दिसंबर 2023) को रवाना हुए।

गौरतलब है कि दिल्ली शराब नीति से घोटाले से जुड़े केस में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे आप नेता पहले से जेल में हैं। इस मामले में कई अन्य आरोपित भी जेल में हैं। अब केजरीवाल से ईडी पूछताछ करना चाहती है। इससे पहले ईडी ने 30 अक्टूबर 2023 को दिल्ली के सीएम को समन जारी कर 2 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन तब विधानसभा चुनावों में व्यस्तता का हवाला देकर वे पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए थे।

घर में हुआ बुरा हाल तो खालिस्तानी आतंकी पर बदले जस्टिन ट्रूडो के सुर, कनाडाई PM ने कहा- निज्जर की हत्या पर भारत से पंगा नहीं चाहता

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत से रार ठानने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के सुर अब बदल गए हैं। उनका कहना है कि वे निज्जर की हत्या को लेकर भारत के साथ किसी झगड़े की स्थिति में नहीं पड़ना चाहते हैं। साथ ही व्यापार समझौते पर काम करने की इच्छा जताई है।

आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा में एक सिख सामुदायिक केंद्र के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सितंबर 2023 में जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि इस हत्या के पीछे भारतीय खुफिया एजेंटों का हाथ हो सकता है। कनाडा की सरकार ने एक शीर्ष भारतीय राजनयिक को निष्कासित भी कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में बेहद तल्खी आ गई थी। भारत ने बिना सबूत आरोप मढ़ने पर ट्रूडो को लताड़ भी लगाई थी।

अब ट्रूडो ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर भारत के साथ लड़ाई की स्थिति में नहीं पड़ना चाहते। वे व्यापार समझौते पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक रणनीति को आगे बढ़ाने में भारत के साथ सहयोग की इच्छा जाहिर की है।

कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन को दिए इंटरव्यू में ट्रूडो ने कहा कि कनाडा के लिए लोगों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और कानून के शासन के लिए खड़ा होना जरूरी है। हम यही करने जा रहे हैं।

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिशों को लेकर अमेरिकी दावे का जिक्र करते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि एक समझ की शुरुआत हुई है। वे (भारत) अपना रास्ता नहीं बदल सकते हैं। सहयोग करने के लिए अब ज्यादा रास्ते खुले हैं, जो पहले कम थे।”

हाल ही में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था, “कनाडा और अमेरिका के मामले अलग-अलग हैं। अमेरिका ने हमें सुबूत मुहैया कराए हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ हम बहुत जिम्मेदार हैं। हम जो करते हैं उसमें विवेक रखते हैं।”

गौरतलब है कि ट्रूडो के सुर में यह बदलाव उस सर्वे के बाद देखा गया है, जिसमें उनके कनाडा में उनकी राजनीतिक साखा काफी गिरने की बात सामने आई थी। इस सर्वे के मुताबिक दो-तिहाई से अधिक कनाडाई लोग चाहते हैं कि 2024 चुनाव से पहले जस्टिन ट्रूडो को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। अगर वो नहीं छोड़ते हैं, तो फिर वो दूसरा विकल्प खोंजेंगे।

ग्लोबल न्यूज के इस सर्वे के अनुसार 69 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को इस्तीफा दे देना चाहिए। अधिकांश कनाडियाई चाहते हैं कि लिबरल पार्टी को अपने सहयोगियों को बदलना चाहिए।

बता दें कि कनाडा की राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था है। इस समय कनाडा में लिबरल पार्टी सत्ता में है। लिबरल पार्टी के नेता के तौर पर जस्टिन ट्रूडो साल 2015 से देश की कमान संभाल रहे हैं। उनकी अगुवाई में पार्टी दो चुनाव पार्टी जीत चुकी है।

राहुल गाँधी पर ममता बनर्जी ने फोड़ा उपराष्ट्रपति के अपमान का ठीकरा, कहा- वे वीडियो नहीं बनाते तो कुछ नहीं होता

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नक़ल उतार कर मजाक उड़ाने के मामले में तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूरी जिम्मेदारी कॉन्ग्रेस नेता और सांसद राहुल गाँधी पर डाल दी है। वहीं राहुल ने अपना बचाव किया है।

ममता बनर्जी का कहना है कि राहुल अगर कल्याण बनर्जी की अभद्र हरकतों को रिकॉर्ड नहीं करते तो इतना ज्यादा यह मुद्दा नहीं उठता। इस मुद्दे के बारे में किसी को पता ही नहीं चलता। उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी का भी बचाव किया है।

दिल्ली में ममता बनर्जी ने कहा, “हम सबका सम्मान करते हैं। यह (कल्याण बनर्जी का कृत्य) किसी की बेईज्जती करने के बारे में नहीं था। इसे राजनीतिक तौर पर हलके फुल्के तरीके से लिया जाना चाहिए। आपको इस बारे में कभी पता नहीं चलता अगर राहुल जी इसे रिकॉर्ड नहीं करते।”

गौरतलब है कि 19 दिसम्बर, 2023 को राज्यसभा की कार्रवाई में व्यवधान डाल रहे 49 विपक्षी सांसदों को निलम्बित किया गया था। इसके बाद यह सांसद, नई संसद के मकर द्वार पर धरना देने लगे थे। इसी दौरान लोकसभा में TMC के सांसद कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ का अपमान किया।

कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नक़ल उतारी। इस दौरान वहाँ मौजूद अन्य सांसद हँसते रहे। राहुल गाँधी इस मौके पर मौजूद थे, उन्होंने अपने फ़ोन इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद यह कल्याण की इन हरकतों का वीडियो वायरल हो गया।

हालाँकि राहुल गाँधी ने इस मामले में अपना बचाव किया है। राहुल गाँधी का कहना है, “मैंने कल्याण बनर्जी का वीडियो शूट जरूर किया था लेकिन वह अभी मेरे फ़ोन में ही है और मैंने उसे साझा नहीं किया।”

ममता बनर्जी ने यह बयान 20 दिसम्बर, 2023 को संसद में दिया जहाँ वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने आईं थी। इससे एक दिन पहले वह INDI गठबंधन की बैठक में भी शामिल हुईं। वह जब प्रधानमंत्री से मिलें पहुँची तो अपने साथ उपराष्ट्रपति का अपमान करने वाले सांसद कल्याण बनर्जी को नहीं ले गईं जबकि उनका नाम इस सूची में था।

कल्याण बनर्जी ने इस मामले पर अभी तक माफ़ी नहीं माँगी है। वहीं इस मामले पर जाट समुदाय ख़ासा आक्रोशित है और उसने कल्याण बनर्जी से माफ़ी माँगने को कहा है। जाट समुदाय के एक नेता ने कहा कि यदि कल्याण बनर्जी माफ़ी नहीं माँगते तो तृणमूल सांसदों के घरों का घेराव होगा।

उपराष्ट्रपति के इस अपमान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दुख जताया था और कल्याण बनर्जी की इस हरकत पर रोष प्रकट किया था। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने इसे उनकी किसान पृष्ठभूमि और जाट समुदाय का अपमान बताया था।

दरभंगा में ललित झा के घर पहुँचे दो ‘अनजान व्यक्ति’, क्रांतिकारी वाले पोस्टर लगा मदद का किया ऑफर: संसद घुसपैठ में दिल्ली पुलिस ने 2 और को उठाया

संसद घुसपैठ के मास्टरमाइंड ललित झा के घर पर पोस्टर लगाए जाने की खबर सामने आई है। कथित तौर पर दो ‘अनजान व्यक्ति’ बिहार के दरभंगा जिले बहेड़ा थाना क्षेत्र के रामपुर उदय गाँव स्थित ललित के घर पहुँचे। वहाँ पोस्टर लगाते हुए उसके परिजनों को मदद की पेशकश की।

नए संसद भवन में 13 दिसंबर 2023 को घुसपैठ की घटना हुई थी। इस मामले में गिरफ्तार 6 लोगों को दिल्ली पुलिस ने आमने-सामने बैठा कर पूछताछ की है। इसके अलावा कर्नाटक और उत्तर प्रदेश से एक-एक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ललित झा के घर पर जो पोस्टर लगे हैं उनमें संसद घुसपैठ के आरोपितों को ‘क्रांतिकारी योद्धा’ बताया गया है। पोस्टर पर ललित के अलावे नीलम, मनोरंजन, सागर, अमोल शिंदे और महेश कुमावत की तस्वीर तथा नाम है। साथ ही इसमें भूख, बेरोजगारी व महंगाई से आजादी का जिक्र है। पोस्टर में कल्पना ईनामदार की तस्वीर और मोबाइल नंबर भी दिया गया है।

ललित झा के घर पर पोस्टर लगाने वाले कौन?

लाइव हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार 20 दिसंबर 2023 की शाम के करीब चार बजे दो लोग ललित के घर आए। ललित के भाई हरिदर्शन झा उर्फ सोनू के हवाले से बताया है कि ये ‘अनजान लोग’ मुंबई और हरियाणा से आए थे। उन्होंने ललित के घर पर पोस्टर चिपकाए। उसके परिजनों से कहा कि ललित ने कायर का काम नहीं किया है। उससे आपकी मुलाकात की व्यवस्था हम करेंगे। रिपोर्ट में थाना प्रभारी बीके ब्रजेश ने इस तरह के पोस्टर के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है।

बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद 20 दिसंबर को ही राष्ट्रीय लोक आंदोलन की कार्यकारी अध्यक्ष कल्पना ईनामदार व बलवीर सिंह ने ललित के पिता-माता और भाई से मुलाकात कर मदद की पेशकश की। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि कल्पना ईनामदार के साथ दो से तीन लोग आए थे। इन्होंने ही पोस्टर चिपकाए और मदद की पेशकश की।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि कल्पना ईनामदार अन्ना हजारे के राष्ट्रीय लोक आन्दोलन की मुखिया है। उसने दो दिन पहले भी ललित को ‘क्रांतिकारी योद्धा’ बताया था। अप्रैल 2022 में उससे मुलाकात होने की बात कही थी। उसके द्वारा इंडिया टुडे को दिया गया एक पोस्टर संसद में घुसपैठ के मास्टरमाइंड ललित झा को ‘क्रांतिकारी योद्धा’ बताता है। संभवतः यही पोस्टर ललित के घर पर भी लगाया गया था।

ललित झा को क्रांतिकारी बताता पोस्टर(साभार: इंडिया टुडे)
ललित झा को क्रांतिकारी बताता पोस्टर (साभार: इंडिया टुडे)

ललित झा समेत सभी 6 आरोपित अभी सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में हैं और उनसे आगे की पूछताछ चल रही है। इनको अदालत ने 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा था। ये सभी पुलिस की पूछताछ में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं और बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं। इसलिए दिल्ली पुलिस ने इन्हें आमने-सामने बैठा कर पूछताछ भी की है।

इससे दिल्ली पुलिस यह पता लगाएगी कि इन सबके द्वारा बताया जा रहा घटनाओं का क्रम एकसमान है या नहीं। इन्हें दिल्ली पुलिस अलग-अलग रख रही है। मामले की जाँच को काउन्टर इंटेलिजेंस यूनिट को सौंपा गया है।

दो और लोगों को पुलिस ने उठाया

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो और लोगों को कर्नाटक और उत्तर प्रदेश से उठाया है। जानकारी के अनुसार, इनमें से एक को कर्नाटक के बागलकोट से हिरासत में लिया गया है, जबकि दूसरा व्यक्ति उत्तर प्रदेश के जालौन का है।

कर्नाटक से गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम साई कृष्णा है। साईं कृष्णा संसद में हमले के आरोपित मनोरंजन के साथ पढ़ता था और उससे बातचीत करता रहता था। इसके पिता कर्नाटक पुलिस में अधिकारी रह चुके हैं।

जालौन से पकड़े गए शख्स का नाम अतुल कुलश्रेष्ठ है, वह भगत सिंह फैन्स क्लब में शामिल था और संसद में हमले के आरोपितों से फेसबुक पर बातचीत करता था। अतुल किसानों के प्रदर्शन में भी शामिल हुआ था। उसके परिवार वालों ने मीडिया से बातचीत करने से मना किया है।

ललित झा है मास्टरमाइंड

गौरतलब है कि 13 दिसम्बर, 2023 को संसद की कार्रवाई के दौरान के दो लोग दर्शक दीर्घा से लोकसभा में कूद गए थे और धुएँ वाला स्प्रे छोड़ा था। इसके अलावा उनके साथियों ने संसद के बाहर भी प्रदर्शन किया था।

इस मामले की शुरूआती जाँच के बाद यह सामने आया था कि इस पूरी घटना की साजिश का मास्टरमाइंड ललित झा है। वह घटना के बाद राजस्थान भाग गया था। वहाँ उसने अपने और अन्य आरोपितों के मोबाइल फ़ोन को नष्ट किए थे। इसके बाद 15 दिसम्बर 2023 को उसने दिल्ली पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था।

आज तक के अनुसार सदन में अपने साथियों की करतूत का वीडियो ललित ने पश्चिम बंगाल के एक युवक को व्हाट्सएप पर भेजा था। जय हिन्द से सम्बोधन करते हुए ललित ने युवक से कहा, “प्रोटेस्ट किया हूँ। सर्कुलेट करो।” जिस युवक को ललित ने मैसेज भेजा था उसका नाम सौरव चक्रवर्ती है।

ललित के परिवार वालों से इससे पहले पूछताछ हो चुकी है। ललित के पिता ने बताया था कि निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए कुछ दिन पहले बेटे ने उनसे पैसे माँगे थे। लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया था।

जमीन की तरह ही आसमान में भी इंटरनेट चूस लेने के लिए तैयार हैं भारतीय, हवाई जहाज में डाटा खपत करने वाली टॉप कौम होने की उम्मीद

भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2028 तक इंटरनेट खपत के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे होगा। यही उम्मीद भारतीयों को लेकर इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी (IFC) यानी हवाई जहाज के अंदर इंटनेट का इस्तेमाल करना, को लेकर भी है।

IFC लीग में भारतीयों की एंट्री भले देर से हुई है, लेकिन ग्लोबल टेलीकॉम कंपनी वियासैट (Viasat) का मानना है कि वे जल्द ही जहाज में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले शीर्ष लोगों में शामिल होंगे। कंपनी का कहना है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन का बेहतरीन इस्तेमाल कर भारतीय हवा में भी जमीन की तरह ही इंटरनेट के सबसे बड़े उपभोक्ता बनने की राह पर हैं।

वियासैट के ग्लोबल प्रेसिडेंट गुरु गौरप्पन ने कहा है कि भारत में एयरलाइन कंपनियाँ आईएफसी में भारी उछाल को लेकर खासी तैयारियों में जुटी हैं। खासकर जब विमानों का बेड़ा मौजूदा संख्या 650 से जल्द ही बढ़ने वाला है। भारत की घरेलू विमानन कम्पनियाँ करीब 1100 नए विमानों की खरीद की तैयारी कर रही हैं।

गौरप्पन ने बताया है, “भारतीय एयरलाइंस में 2024 के आखिर तक हमारी आईएफसी (IFC) सर्विस शुरू होने की उम्मीद है। हम अगले साल अपने भारतीय एयरलाइन ग्राहकों के लिए ऐलान करेंगे।” उनके मुताबिक, उत्तरी अमेरिका में IFC यानी फ्लाइट के अंदर इंटरनेट लगभग 75 फीसदी, मध्य-पूर्व में 49 फीसदी और पूरे यूरोप में 35 फीसदी विमानों में इस्तेमाल होता है। यात्रियों के एयरलाइन्स के टिकट खरीदने के फैसले पर IFC की सर्विस का भी असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि एशिया पैसेफिक (एपीएसी) क्षेत्र में विमानों के बेड़े का आकार बढ़ेगा। इससे उड़ान के दौरान इंटरनेट की माँग बढ़ेगी। गौरप्पन के मुताबिक, “वैलोर कंसल्टेंसी के रिसर्च से पता चलता है कि उत्तरी अमेरिका में 4700 और पूरे यूरोप के 3300 विमान के मुकाबले भारत सहित एशिया प्रशांत पहले से ही 5300 विमानों के साथ 2032 तक आईएफसी का बड़ा बाजार बनने जा रहा है।”

माना जा रहा है कि एयर इंडिया, विस्तारा और इंडिगो सहित देश की सभी टॉप एयरलाइंस अगले साल से अपने बेड़े में इंटरनेट सर्विस देने के लिए टेक्नोलॉजी और कंटेंट कंपनियों से बात कर रही हैं। गौरतलब है कि वियासैट दुनिया की कुछ मशहूर एयरलाइनों में आईएफसी सर्विस देता है। इनमें डेल्टा, अमेरिकन एयरलाइंस, जेटब्लू, क्वांटास और ब्रिटिश एयरवेज, आयरलैंड की एयर लिंगस और स्पेन की इबेरिया और वुएलिंग चलाने वाला इंटरनेशनल एयरलाइंस ग्रुप भी शमिल हैं। वियासैट ने 2021 में 7.3 बिलियन डॉलर के सौदे में ब्रिटेन की सैटेलाइट कंपनी इनमारसैट का अधिग्रहण किया था।

‘समोसा’ के बाद अब अमेरिकी संसद में ‘हिंदू कॉकस’: जानिए क्या है ये, कैसे करेगा सनातन हितों की रक्षा

अमेरिकी संसद के भारतीय मूल के प्रतिनिधियों का एक समूह समोसा कॉकस (Samosa Caucus) कहलाता है। यह समूह भारत से जुड़े मुद्दे संसद में उठाता है। अब अमेरिकी संसद में हिंदू कॉकस (Hindu caucus) बना है। सांसदों का यह समूह हिंदू हितों की रक्षा के लिए काम करेगा।

यह समूह अमेरिकी संसद में ऐसे कानूनों के लिए जोर लगाएगा जो हिंदुओं के लिए लाभप्रद होंगे। इस कॉकस की अब आधिकारिक घोषणा हो गई है। अमेरिकी संसद के संदर्भ में कॉकस सांसदों के ऐसे समूह को कहा जाता है जो समान हितों के लिए साथ आते हैं। ये सांसद इन हितों के पूर्ति कानूनी तरीके से करने के लिए ‘कॉकस’ का गठन करते हैं। इन कॉकस में अलग-अलग पार्टियों के सदस्य भी होते हैं। एक तरह से यह एक ‘दबाव समूह’ के तौर पर काम करते हैं।

कॉकस के सदस्य एक साथ मिल कर संसद में ऐसे कानूनों को लाते हैं जो उनके उन हितों को कानूनी रूप से लाभ पहुँचा सकें जिसके लिए इसका गठन किया जाता है। यह कॉकस किसी भी आधार पर गठित किए जा सकते हैं। इनका लक्ष्य अपनी विदेश नीति, धार्मिक समूह, नस्लीय समूह या अपने हितों वाले समूहों के लिए अधिक से अधिक समर्थन जुटाना होता है।

हिंदू कॉकस के गठन के लिए काफी समय से प्रयास चल रहे थे। हाल ही में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद श्री थानेदार ने भी इसकी वकालत की थी। अब अमेरिकी सांसद पीट सेशंस और एलिसी स्टेफनिक ने हिंदू कॉकस के गठन की आधिकारिक घोषणा की है।

इस कॉकस की अध्यक्ष अध्यक्ष एलिसी स्टेफनिक ही हैं। उनकी अध्यक्षता में यह कॉकस अमेरिकी हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करेगा। साथ ही यह भारतीय-अमेरिकी हिंदू समुदाय के मूल्यों को आगे बढ़ाएगा।

इस हिन्दू कॉकस के माध्यम से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और अमेरिका तथा नीदरलैंड के हिंदुओं का प्रतिनिधित्व किया जाएगा। इस कॉकस के माध्यम से मात्र हिंदू ही नहीं बल्कि सिख, जैन और बौद्ध अनुयायियों के हितों की वकालत भी की जाएगी।

यह कॉकस खुले व्यापार, सरकार के कम हस्तक्षेप, खर्चे में सूझबूझ और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा तानाशाही का विरोध करने वाली विदेश नीति का पक्षधर होगा। कॉकस में स्टेफनिक के अलावा अन्य कई सदस्य भी शामिल हैं।

इसके गठन के मौके पर सांसद पीट सेशंस ने कहा, “कॉन्ग्रेस में हिंदू कॉकस का गठन हमारे देश की राजधानी में हिंदू-अमेरिकी समुदाय की आवाज को पहचानने और बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम उनकी चिंताओं को दूर करने, उनके योगदान को प्रदर्शित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि उनकी सोच को सरकार के सबसे ऊँचे स्तर तक आवाज मिले।”

गौरतलब है कि अमेरिका में लगभग 35 लाख हिंदू रहते हैं। इनमें से अधिकांश भारतीय या भारतीय मूल के हैं। अन्य कई देशों से आए हिंदू भी अमेरिका में रहते हैं। अमेरिकी हिंदू कुल जनसंख्या का लगभग 1% हैं। यह अमेरिका का एक प्रभावशाली वर्ग है।

अमेरिका के सबसे अधिक पढ़े-लिखे धार्मिक समूह में से अमेरिकी हिंदू हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के एक शोध के अनुसार, अमेरिका में रहने वाले 77% हिंदू स्नातक हैं। यह किसी भी अन्य धार्मिक समूह से अधिक है। अमेरिका में कमाई के हिसाब से भी हिंदू सर्वोच्च कमाने वालों में से एक हैं। वह किसी भी औसत अमेरिकी परिवार से अधिक कमाते हैं।

अरविंद केजरीवाल फिर नहीं होंगे ED के सामने पेश, पूछताछ से पहले ‘विपश्यना’ के लिए हुए रवाना: AAP सांसद बोले- प्रोग्राम पहले था

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली की आबकारी नीति में कथित घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया था, उन्हें 21 दिसंबर को ईडी कार्यालय पहुँचना था, लेकिन वो अब ईडी के साथ पूछताछ में शामिल नहीं होंगे। जानकारी सामने आ रही है कि वो विपश्यना करने के लिए पंजाब के होशियारपुर चले गए हैं। अगले 10 दिन वो वहीं रहेंगे। हर साल वो 10 दिनों के लिए विपश्यना करने जाते हैं। पहले अरविंद केजरीवाल मंगलवार (19 दिसंबर 2023) को ही विपश्यना के लिए जाने वाले थे, लेकिन INDI गठबंधन की बैठक की वजह से वो एक दिन बाद बुधवार (20 दिसंबर 2023) को रवाना हुए।

जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए यह दूसरी बार समन भेजा था। इससे पहले केजरीवाल को ईडी ने 2 नवंबर को दिल्ली के शराब घोटाले के मामले में तलब किया था, लेकिन वह नोटिस को अवैध और राजनीति से प्रेरित बताते हुए पूछताछ में शामिल नहीं हुए थे। इस बार भी वो ईडी के सामने पेश नहीं होंगे।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि मुख्यमंत्री हर साल विपश्यना के लिए जाते हैं। इस बारे में कार्यक्रम पहले से तय था। आम आदमी पार्टी ने ईडी के समन के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के वकील नोटिस को समझ रहे हैं और कानूनी रूप से सही कदम उठाए जाएँगे।

विपक्षी दलों ने केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि वह ईडी के सामने पेश होने से बच रहे हैं क्योंकि उनके पास कुछ छिपाने की बात है। ईडी का भी कहना है कि केजरीवाल से पूछताछ जरूरी है क्योंकि उनके नाम का उल्लेख कथित घोटाले के संबंध में कुछ दस्तावेजों में हुआ है।

दिल्ली की आबकारी नीति में घोटाला में सामने आया था। इस नीति के तहत दिल्ली सरकार ने शराब की बिक्री और लाइसेंसिंग का काम निजी कंपनियों को दे दिया था। इस नीति पर कई सवाल उठे थे, जिसमें यह भी सवाल था कि क्या इस नीति से दिल्ली सरकार को राजस्व में नुकसान हुआ है। ईडी ने इस घोटाले की जाँच शुरू की और उसने कई लोगों से पूछताछ की। केजरीवाल के अलावा, इस घोटाले में कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए, जिनमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। मनीष सिसोदिया, संजय सिंह जैसे महत्वपूर्ण लोग इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।

बता दें कि केजरीवाल हर साल 10 दिनों के लिए विपश्यना शिविर में भाग लेते हैं। शिविर में, वे ध्यान की गहरी तकनीकों का अभ्यास करते हैं। केजरीवाल का कहना है कि विपश्यना ने उन्हें अपने आसपास की दुनिया को अधिक जागरूकता और समझ के साथ देखने में मदद की है। उन्होंने कहा है कि विपश्यना ने उन्हें एक अधिक शांत और संतुलित व्यक्ति भी बनाया है।

अब तक 143, लोकसभा से सांसद थॉमस और आरिफ निलंबित: चैंबर, लॉबी और गैलरी में भी नहीं मिलेगी एंट्री

लोकसभा के दो और सांसदों- सी थॉमस और एएम आरिफ को आज बुधवार (20 दिसंबर 2023) को संसद की शीतकालीन सत्र से सस्पेंड कर दिया गया। इन दोनों सांसदों के सस्पेंशन के बाद शीतकालीन सत्र में सस्पेंड हुए सांसदों की कुल संख्या 143 हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन दोनों सांसदों को सदन की अवमानना के लिए सस्पेंड किया है। दोनों सांसदों ने तख्तियाँ लेकर सदन में प्रदर्शन किया था।

निलंबित सांसदों को संसद चैंबर, लॉबी और गैलरी में प्रवेश करने की भी अनुमति नहीं है। उन्हें समिति की बैठकों में भाग लेने, नोटिस पेश करने और समिति चुनावों में मतदान करने से भी रोक दिया गया है। इस बारे में लोकसभा सचिवालय की तरह से नोटिस भी जारी कर दिया गया है। सी थॉमस केरल के बड़े नेता माने जाते हैं। वो केरल से कॉन्ग्रेस के सांसद हैं। वहीं, एएम आरिफ सीपीआई (एम) के अलाप्पुझा सीट से सांसद हैं।

निलंबित सांसदों की संख्या पहुँची 143

संसद के शीतकालीन सत्र में अब तक 143 सांसदों को सस्पेंड किया जा चुका है। इनमें 46 सांसद राज्यसभा के हैं, जबकि 97 सांसद लोकसभा के हैं। इसकी शुरुआत हुई थी 14 दिसंबर को, जब लोकसभा के 13 और राज्यसभा से 1 सांसद को सस्पेंड किया गया था। इसके बाद 18 दिसंबर को लोकसभा के 33 और राज्यसभा के 45 सांसद सस्पेंड कर दिए गए। यही नहीं, 19 दिसंबर को 49 और सांसदों पर गाज गिरी।

कॉन्ग्रेस के सबसे ज्यादा सांसद सस्पेंड

संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा से निलंबित हुए सबसे ज्यादा सांसद कॉन्ग्रेस के हैं। कॉन्ग्रेस के कुल 57 सांसद सस्पेंड हुए हैं, जिनमें लोकसभा के 38 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा के 19 सांसद हैं। अब लोकसभा में कॉन्ग्रेस के 10 सांसद बचे हैं, जबकि राज्यसभा में 11 सांसद। इसके बाद टीएमसी के 21 सांसद भी सस्पेंड हुए हैं, जिनमें 13 सांसद लोकसभा और 8 सांसद राज्यसभा के हैं।

तीसरे नंबर पर जेडीयू है, जिसके 16 लोकसभा सांसदों में 11 सस्पेंड हो चुके हैं। वहीं, राज्यसभा के दो सांसद भी सस्पेंड हुए हैं। इस तरह कुल 13 सांसद जेडीयू के सस्पेंड हो चुके हैं। मौजूदा समय में लोकसभा में कॉन्ग्रेस के पास 10, डीएमके के पास 8 और टीएमसी के पास 9 सांसद बचे हैं। वहीं, राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के 11, टीएमसी-आरजेडी और डीएमके के पाँच-पाँच सांसद बचे हैं। अन्य दलों की गिनती कम है।