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चिराग-सात्विक की बैडमिंटन जोड़ी को ‘खेल रत्न’, मोहम्मद शमी को ‘अर्जुन अवॉर्ड’: राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का ऐलान, देखिए किसे कौन सा सम्मान

भारत सरकार के युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने बुधवार (20 दिसंबर, 2023) को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार – 2023 का ऐलान कर दिया है। इसमें खेल के सबसे बड़े सम्मान मेजर ध्यान चंद खेल रत्न के लिए बैडमिंटन स्टार जोड़ी चिराग शेट्टी और सात्विक साईराज रंकी रेड्डी को चुना गया है। वहीं क्रिकेटर मोहम्मद शमी को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

खेल मंत्रालय के मुताबिक, इस साल क्रिकेटर शमी सहित कुल 26 एथलीट्स को अर्जुन अवॉर्ड दिया जाएगा। पुरस्कार विजेताओं को मंगलवार (9 जनवरी, 2024) को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन में एक खास समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ये पुरस्कार देंगी। बता दें कि मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार बीते चार साल से खेल के क्षेत्र में शानदार और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया जाता है।

चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी जोड़ी ने इस साल की शुरुआत में अक्टूबर में हांग्जो में एशियाई खेलों में बैंडमिटन स्वर्ण पदक जीतने के बाद BWF रैंकिंग में शीर्ष पर पहुँची थी। यह जोड़ी 2022 से इंडियन ओपन, फ्रेंच ओपन, स्विस ओपन, इंडोनेशिया ओपन और कोरिया ओपन सहित पाँच बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीतने के बाद से असाधारण रही है।

वहीं मोहम्मद शमी ने ICC वर्ल्ड कप 2023 में शानदार प्रदर्शन किया था। सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 7 विकेट लेकर मोहम्मद शमी ने एक इतिहास रचा दिया था। वो क्रिकेटर शमी ने भी लगातार क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करते रहे हैं।

किस खेल के खिलाड़ी को मिला कौन सा अवॉर्ड

खेल रत्न अवॉर्ड बै़डमिंटन के लिए – चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी, अर्जुन अवॉर्ड – तीरंदाजी के लिए ओजस प्रवीण देवताले, अदिति गोपीचंद स्वामी को, एथलेटिक्स के लिए श्रीशंकर और पारुल चौधरी को मिलेगा।

बॉक्सिंग के लिए अर्जुन अवॉर्ड मोहम्मद हुसामुद्दीन को तो शतरंज के लिए आर वैशाली को मिलेगा। क्रिकेट के लिए अर्जुन अवॉर्ड मोहम्मद शमी के तो घुड़सवारी के लिए अनुश अग्रवाल और घुड़सवारी ड्रेसेज के लिए दिव्यकृति सिंह के नाम रहेगा।

वहीं गोल्फ के लिए अर्जुन अवॉर्ड दीक्षा डागर, हॉकी के लिए कृष्ण बहादुर पाठक और सुशीला चानु को मिलेगा। कबड्डी के लिए पवन कुमार और रितु नेगी के नाम हैं, खो-खो के लिए नसरीन लॉन बॉल्स के लिए ये अवॉर्ड पिंकी को मिलेगा।

अर्जुन अवॉर्ड – शूटिंग के लिए ऐश्वर्या प्रताप सिंह तोमर और ईशा सिंह को, स्क्वैश के लिए हरिंदर पाल सिंह को टेबल टेनिस के लिए अयहिका मुखर्जी को, रेसलिंग के लिए सुनील कुमार और अंतिम को तो वुशु के लिए रोशीबिना देवी को मिलेगा। इसके साथ ही पैरा आर्चरी के लिए ये अवॉर्ड शीतल देवी तो ब्लाइंड क्रिकेट के लिए अजय कुमार और पैरा कैनोइंग के लिए प्राची यादव को मिलेगा।

बताते चलें कि खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले को सम्मान देने के लिए हर साल खेल पुरस्कार दिए जाते हैं। इसके तहत मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किसी खिलाड़ी के चार साल तक खेल के क्षेत्र में शानदार और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है।

मेजर ध्यानचंद पुरस्कार खेलों के विकास में आजीवन योगदान करने के लिए दिया जाता है। वहीं, अर्जुन पुरस्कार 4 साल तक लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। इसके अलावा द्रोणाचार्य पुरस्कार किसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए प्रशिक्षकों को दिया जाता है।

वहीं राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार उन कारपोरेट संस्थाओं और लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने खेल प्रोत्साहन व विकास के क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो। अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में समग्र रूप से शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को मौलाना अबुल कलाम आजाद (एमएकेए) ट्रॉफी से सम्मानित किया जाता है।

इसके लिए भारत सरकार का युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय हर साल खेल पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित करता है। समिति की सिफारिशों के आधार पर और उचित जांच के बाद सरकार ने खिलाड़ियों, कोचों और संस्थाओं को पुरस्कार देने का फैसला लेती है।

‘सबूत है तो दें, हम गौर करेंगे’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश पर बोले PM मोदी, कहा- आतंकवाद का सफाया भारत-अमेरिका संबंधों की कड़ी

खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश रचने को लेकर अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाए हैं। इस पर पहली पीएम मोदी ने कहा, “कोई हमें इससे संबंधित सूचना देता है तो हम उस पर जरूर गौर करेंगे। अगर हमारे किसी नागरिक ने कुछ भी सही या गलत किया है तो हम उस पर गौर करने के लिए तैयार हैं। हम कानून को लेकर प्रति प्रतिबद्ध हैं।”

यूके के ‘द फाइनेंशियल टाइम्स’ के साथ एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच आपसी रिश्ते कुछ घटनाओं की वजह से पटरी से नहीं उतरेंगे। इस बयान से पीएम मोदी ने साफ इशारा किया कि पन्नू वाले मामले से दोनों देशों के बीच संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

इस दौरान पीएम मोदी विदेशों में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों को लेकर भी खासे फ्रिकमंद नजर आए। उन्होंने कहा, “ये लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में डराने-धमकाने और हिंसा भड़काने में लगे हुए हैं।” उन्होंने जोर देते हुए ये भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों की अहम कड़ी सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा, “मुझे नहीं लगता कि कुछ घटनाओं को दोनों देशों के राजनयिक संबंधों से जोड़ना सही है।” उन्होंने आगे कहा, “इस रिश्ते के लिए दोनों तरफ से मजबूत समर्थन है, जो एक परिपक्व और स्थिर साझेदारी का साफ संकेत देता है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमें इस बात को स्वीकार करने की जरूरत है कि हम बहुपक्षवाद के युग में रह रहे हैं। दुनिया एक दूसरे से जुड़ी हुई और एक दूसरे पर निर्भर है। यह वास्तविकता हमें यह मानने के लिए मजबूर करती है कि सभी मामलों पर सहयोग करने के लिए पूरी सहमति पहले से ही रखी शर्त नहीं हो सकती है।”

बीते महीने इसी अखबार ‘द फाइनेंशियल टाइम्स’ ने अनाम अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी थी कि उन्होंने अमेरिकी धरती पर पन्नू की हत्या की साजिश को नाकाम कर दिया। अखबार ने यह भी बताया कि अमेरिकी सरकार ने इस पर भारत को चेतावनी जारी की थी।

दरअसल, अमेरिकी न्याय विभाग ने 52 साल के भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर खालिस्तानी आतंकी पन्नू की कथित हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि गुप्ता न्यूयॉर्क शहर में रहने वाले पन्नू की हत्या करने के लिए एक हत्यारे को 1,00,000 डॉलर देने पर राजी हुए थे।

निखिल गुप्ता चेक गणराज्य में रहता है। अमेरिका के कहने पर चेक अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार करके अमेरिका के हवाले कर दिया। दरअसल, अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि है। वहीं, निखिल गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि वो भारत सरकार से इस मामले में दखल देने के लिए कहें।

निखिल गुप्ता का कहना है कि उन्हें बगैर किसी लीगल वॉरंट के गलत तरीके से प्राग में गिरफ्तार किया गया था। वहाँ उन्हें उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बीफ और पोर्क तक खाने को मजबूर किया जा रहा है। अमेरिका के कहने पर चेक गणराज्य के अधिकारियों ने राजधानी प्राग से निखिल गुप्ता को 30 जून 2023 को गिरफ्तार किया था।

जिस पन्नू की हत्या की साजिश को लेकर अमेरिका ने इतना बवाल खड़ा किया है, वह भारत में घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू है। वो प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संगठन का सरगना है और भारत के खिलाफ आग उगलता रहता है। उसके पास संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की दोनों देशों की नागरिकता है।

इस केस को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने 30 नवंबर 2023 को बयान जारी किया। ब्लिंकन ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव से दिए गए इस बयान में कहा था, “ये कानूनी मसला है और वो इस पर खुलकर सब कुछ नहीं बता सकते, लेकिन वो इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हैं।”

भारत ने अमेरिका की ओर से पन्नू का मामला उठाने के बाद जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने इसको लेकर कहा था, “कनाडा और अमेरिका के मामले अलग-अलग हैं। अमेरिका ने हमें सुबूत मुहैया कराए हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ हम बहुत जिम्मेदार हैं। हम जो करते हैं उसमें विवेक रखते हैं।”

दरअसल कनाडा ने 18 जून 2023 को सरे में हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हुई हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था। वहीं नवंबर में कनाडा की वाणिज्य मंत्री मेरी एनजी ने कहा था कि जब तक भारत की मोदी सरकार निज्जर की हत्या मामले की जाँच में सहयोग नहीं करेगी, तब तक कारोबारी बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। विदेश मंत्री जयशंकर कई बार कनाडा से इस मामले को लेकर सबूत देने के लिए कह चुके हैं।

‘मेरी बेइज्जती करो लेकिन उप-राष्ट्रपति पद और किसानों का अपमान बर्दाश्त नहीं’: जगदीप धनखड़ की दो टूक, जाटों के प्रदर्शन में नारा – राहुल गाँधी होश में आओ

भारत के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नक़ल उतारने और उनका मजाक उड़ाने के मामले में अब दिल्ली में जाटों ने विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने बुधवार (20 दिसंबर, 2023) को राज्यसभा में कहा कि उन्हें अपमान बर्दाश्त है लेकिन वह उप-राष्ट्रपति पद और किसान समाज की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं करेंगे।

जाट समुदाय ने ‘OBC संयुक्त मोर्चा’ के बैनर तले दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और ‘राहुल गाँधी होश में आओ’ के नारे लगाए। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी के माफ़ी माँगने के नारे लगाए और कॉन्ग्रेस की अर्थी भी निकाली।

उप-राष्ट्रपति पद का अपमान करने वाले सांसदों ने नई संसद के मकर द्वार पर धरना दिया था। इस धरने के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की अपमानजनक तरीके से नक़ल उतारी और मजाक उड़ाया था। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गाँधी कल्याण बनर्जी का वीडियो अपने फ़ोन से बनाते रहे और बाकी सांसद भी उप-राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते रहे। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ है।

इससे पहले जाटों ने एक मीटिंग बुला कर कल्याण बनर्जी से माफ़ी माँगने को कहा था। देश की सबसे बड़ी खाप के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा थ कि यदि कल्याण बनर्जी माफ़ी नहीं माँगते तो तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसदों के घरों का घेराव होगा।

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के कल्याण बनर्जी की हरकतों का वीडियो बनाने पर उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कॉन्ग्रेस के बुजुर्ग नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और दिग्विजय सिंह से कहा कि आपकी चुप्पी मेरे कानों में गूँज रही है। आपके यहाँ के एक सांसद कल्याण बनर्जी की हरकतों को बढ़ावा दे रहे हैं। आपके यहाँ यही संस्कार हैं।

उप-राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है कि आप जगदीप धनखड़ की कितनी बेइज्जती करते हैं लेकिन मैं भारत के उप-राष्ट्रपति पद का, किसान समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं करूँगा। मैं खुद की पूरी आहुति दे दूँगा, मेरी बेइज्जती कोई करता है मैं सहन करता हूँ, खून के घूँट पीता हूँ लेकिन यह मैं सहन नहीं करूँगा कि मैं इस पद की गरिमा मैं सुरक्षित नहीं रख पाया।”

इससे पहले उप-राष्ट्रपति ने संसद में इन घटनाओं पर अपना दुख और पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा था कि उनकी किसान और जाट पृष्ठभूमि को निशाना बनाए जाने से वह व्यक्तिगत रूप से आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम से इस घटना पर दुख जताते हुए अपनी बात रखी थी।

उन्होंने कल इस मामले में सदन में कहा, “मैंने सदन स्थगित कर दी है। लोगों के मन में इस संस्था के ख़िलाफ़ किस तरह की प्रतिक्रिया है, इसका अंदाज़ा आपको नहीं है और हमें इसका सबसे निचला स्तर देखने का मौक़ा मिला। श्री चिदम्बरम यहाँ हैं। श्री चिदम्बरम, आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं। कल्पना कीजिए कि मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी जब आपके वरिष्ठ नेता एक संसद सदस्य का चेयरमैन के संस्थान का मजाक उड़ाते हुए वीडियो बनाते हैं, और एक व्यक्ति के रूप में मुझे निशाना बनाते हैं।”

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी इससे पहले मिले थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस मामले पर ट्वीट करके अपना दुख जताया था। भाजपा सांसदों ने भी उपराष्ट्रपति के समर्थन में राज्यसभा में एक घंटे खड़े रह कर कार्रवाई में भाग लिया था।

महुआ मोइत्रा की याचिका पर हाई कोर्ट ने फैसला रख लिया सुरक्षित, BJP सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व पाटर्नर पर लगाया था मानहानि का आरोप

तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा द्वारा भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ दायर किए गए मानहानि के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जय अनंत देहाद्राई और निशिकांत दुबे ने महुआ पर ‘कैश फॉर क्वेरी‘ के आरोप लगाए थे जिसके जवाब में महुआ ने मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था।

महुआ ने इस मामले में कोर्ट से माँग की थी कि जय अनंत और निशिकांत दुबे को उनके खिलाफ आरोप लगाने से रोका जाए। उन्होंने इस मामले में पहले मीडिया संस्थानों को भी लपेटा था लेकिन बाद में उनका नाम हटा दिया था। निशिकांत दुबे और जय अनंत के वकीलों ने कोर्ट के सामने महुआ के खिलाफ कुछ सबूत भी पेश किए हैं।

दरअसल, निशिकांत दुबे और जय अनंत देहाद्राई ने टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा पर दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर अडानी समूह के विरुद्ध संसद में प्रश्न पूछने के आरोप लगाए थे। इसको लेकर निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिख कर महुआ पर कार्रवाई की माँग की थी।

महुआ के खिलाफ यह जाँच संसद की आचार समिति को भेज दी गई थी। आचार समिति ने महुआ को अपनी जाँच में दोषी पाया था। इसीके बाद 8 दिसम्बर, 2023 को महुआ को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है।

महुआ ने यह आरोप सामने आने के बाद निशिकांत दुबे और जय अनंत देहाद्राई को कोर्ट में खींचा था। इसी मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट कर रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या महुआ और हीरानंदानी के बीच कोई लेनदेन हुआ था।

इस पर इन दोनों के वकीलों ने कोर्ट के सामने आचार समिति की बातें रखी। उन्होंने कहा कि आचार समिति ने महुआ को गिफ्ट लेने का दोषी पाया है। कोर्ट ने दोनों के वकील से आचार समिति की रिपोर्ट लाने को कहा है।

वहीं महुआ के वकील का कहना था कि हीरानंदानी से गिफ्ट महुआ ने इसलिए लिए क्योंकि दोनों दोस्त हैं ना कि हीरानंदानी को अडानी के खिलाफ प्रश्न पुछवाने थे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मामले में महुआ को राहत पर निर्णय सुरक्षित कर लिया। हालाँकि महुआ को अभी कोई राहत नहीं मिली क्योंकि कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित कर लिया।

मुस्तकीम की गाड़ी पर लिखी थी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, हो रही थी गो तस्करी: गोरक्षकों ने रोका तो करने लगे फायरिंग, गाड़ी और 6 गोवंश बरामद

हरियाणा के फरीदाबाद में एक बार फिर से गोरक्षकों और गोतस्करों के बीच भिड़ंत हुई है। इस भिड़ंत के बाद 6 जीवित गौवंश को बरामद किया गया है। इस दौरान गो तस्करों द्वारा गोरक्षकों पर पत्थरबाजी भी की गई। गौवंशों को एक वाहन से तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था। सभी तस्कर गाड़ी छोड़ कर भाग गए। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने गाड़ी को अपने कब्ज़े में ले लिया है। घटना बुधवार (20 दिसंबर 2023) सुबह की है।

गौरक्षक ‘लिव फॉर नेशन’ के सदस्यों ने इस घटना को अपने फेसबुक पेज पर LIVE किया है। लगभग 2 मिनट के इस वीडियो में एक सफेद रंग का बोलेरो वाहन दिख रहा है। वीडियो लाइव कर रहे व्यक्ति को यह दावा करते सुना जा सकता है कि उस महिंद्रा पिकअप में 6 गोवंशों को भर के ले जाया जा रहा था। साथ ही यह भी बताया गया कि तस्करी में प्रयोग हो रहे गाड़ी को एक मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था। कर्मर्शियल गाड़ी के पीले रंग के प्लेट पर नंबर HR 55 AQ 2956 दिख रहा है।

लिव फॉर नेशन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कौशिक ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि गाड़ी पकड़ने में काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने गौ तस्करों द्वारा पत्थर फेंकने और गोलियाँ चलाने का आरोप लगाया गया है। गाड़ी को सोहना रोड के धौज थाना क्षेत्र में आलमपुर में पकड़ा गया है। तस्करों की संख्या 6 से 7 के बीच बताई जा रही है। खुद को घिरता देखकर सभी तस्कर गाड़ी छोड़कर भाग निकले।

उन्होंने आगे बताया कि गाड़ी में 6 गोवंशों को बेरहमी से ठूँस कर भरा गया था। वे गाड़ी को लेकर थाना धौज गए और वहाँ उन्होंने केस दर्ज करवाया। इस दौरान रास्ते में उन्होंने टोल पर खड़े एक व्यक्ति का धन्यवाद भी दिया, जिसने तस्करों को पकड़वाने में उनकी मदद की। बरामद गोवंशों को गोशाला में रखा गया है। गाडी के पीछे ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का स्लोगन लिखा हुआ था।

ऑपइंडिया ने जब पकड़े गए वाहन की जानकारी जुटाई तब यह उस्मान खान के बेटे मुस्तकीम खान के नाम पर रजिस्टर्ड मिली। मुस्तकीम मूल रूप से राजस्थान के अलवर जिले में लाडिया इलाके का निवासी है। वह फ़िलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के पास सेक्टर 38 में रहता है। गाड़ी भी इसी पते पर खरीदी गई है। यह वाहन इसी साल जून 2023 में कमर्शियल कार्यों के लिए खरीदा गया है।

अगस्त 2023 में राजस्थान के भिवाड़ी में इस वाहन का 1100 रुपए का चालान भी हुआ था। इस चालान को आज तक नहीं भरा गया है। घटना के दौरान इस गाड़ी को तारीफ खान नाम का ड्राइवर चला रहा था। ऑपइंडिया ने पिकअप वाहन के मालिक को कई बार सम्पर्क किया, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया।

उद्यमिता को बढ़ावा, डिजिटल बुनियादी ढाँचा, सशक्त महिलाएँ… मोदी सरकार ऐसे पूरा कर रही विकसित भारत का सपना, दुनिया भर में बढ़ी देश की साख

भारतीय दर्शन में गीता और महाभारत विधि-विधान, नियम और अधिनियम, संसाधनों का वितरण तथा शासन करने हेतु प्रमुख शोध प्रबंध हैं। इन ग्रंथों में शासकों और नागरिक गुणों के कर्तव्यों और दायित्वों का विस्तृत विवेचना किया गया है। पिछले एक दशक में आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में भारत को विकसित होते देखना उत्साहवर्धक है। यह नरेंद्र मोदी जी के कुशल प्रशासन और उनके मज़बूत इरादों से ही संभव हो पाया है। कहते हैं कि परिवर्तन एक क्रमिक नियम है और अगर हम इस परिवर्तन के पथ पर बढ़ेंगे तो अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। माननीय प्रधानमंत्री का यह मानना है कि देश के युवा अगर अपनी क्षमताओं और कर्तव्यों का निर्वहन करना आरम्भ करें तो देश एक विकसित राष्ट्र के रूप में तीव्र गति से उभर सकता है।

उन्होंने अपने कई भाषणों में कहा भी है, “भारत एक युवा राष्ट्र है, वर्तमान में इसकी 65% आबादी की आयु 35 वर्ष से कम है। युवाओं के पास राष्ट्र को बदलने की, उसे एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभारने के क्षमता होती है।” प्रधान सेवक ने समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के बीज बोए हैं, जिसे विकसित राष्ट्र रूपी वृक्ष बनाने के लिए हमें कुछ समय देना होगा। इसलिए पिछले दिनों प्रधान सेवक ने देश को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए देश में एक ‘विकसित भारत 2047’ के माध्यम से योजनाओं एवं उसके क्रियान्वयन के लिए तथा इस योजना तथा क्रियान्वयन में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल की है।

इसका उद्देश्य युवाओं को एक मंच प्रदान करना है जहाँ युवा अपनी क्षमताओं और कौशल के माध्यम से भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकें। विकसित भारत, एक दूरदर्शी अवधारणा का प्रतिनिधित्व करता है जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र के व्यापक परिवर्तन की कल्पना करता है। इस दृष्टिकोण में आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समावेशिता, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और वैश्विक नेतृत्व शामिल है।

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, बुनियादी ढाँचे और नवाचार के प्रमुख पहलुओं को एकीकृत करते हुए एक बहुआयामी दृष्टिकोण आवश्यक है। यह लेख ‘विकसित भारत’ पर दूरदर्शी बिंदुओं की पड़ताल करता है, जिसका लक्ष्य एक संपन्न, प्रगतिशील और सामंजस्यपूर्ण भारत की तस्वीर पेश करना है।

आर्थिक सशक्तीकरण:

उद्यमिता को बढ़ावा: विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए सहायता, सलाह और वित्त पोषण प्रदान करके उद्यमिता की संस्कृति को प्रोत्साहित किया गया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। 

कौशल विकास: भविष्य की नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल के साथ कार्यबल को सशक्त बनाने के लिए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश। इससे रोजगार क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल विकास पर भारत सरकार की दूरदर्शिता स्पष्ट दिखाई देती है जिससे की विद्यार्थियों का समावेशी विकास हो सके।

सामाजिक समावेशिता:

सभी के लिए शिक्षा: भारत सरकार ने मजबूत शिक्षा नीति को लागू किया है और साथ ही सुनिश्चित किया है कि हर बच्चे को सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच मिले। इससे सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा और असमानताएँ कम होंगी।

लैंगिक समानता: समान अवसर, उचित वेतन और भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली नीतियों के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया गया है। राष्ट्र के समग्र विकास के लिए महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना महत्त्वपूर्ण है।

तकनीकी उन्नति:

डिजिटल बुनियादी ढाँचा: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुँच सुनिश्चित करते हुए एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचा विकसित किया जा रहा है। इससे डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने, ई-गवर्नेंस और कनेक्टिविटी बढ़ाने में आसानी होगी।

अनुसंधान और विकास: वैज्ञानिक नवाचार और तकनीकी सफलताओं को प्रोत्साहित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण निवेश किया गया। यह भारत को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।

पर्यावरणीय स्थिरता:

नवीकरणीय ऊर्जा: गैर-नवीकरणीय संसाधनों पर निर्भरता कम करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना। 

संरक्षण पहल: जैव विविधता, प्राकृतिक आवास और जल संसाधनों की रक्षा के लिए संरक्षण कार्यक्रम लागू किया है। सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करती है।

वैश्विक नेतृत्व:

राजनयिक जुड़ाव: दुनिया भर के देशों के साथ राजनयिक संबंधों को मजबूत करना तथा व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देना। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की साख बढ़ी है।

शांति और सुरक्षा: भारत ने वैश्विक शांति स्थापना प्रयासों और संघर्ष समाधान में सक्रिय भूमिका निभाई है। आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए एक स्थिर और सुरक्षित क्षेत्र आवश्यक है।

बुनियादी ढाँचे का विकास:

कनेक्टिविटी: देश के भीतर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सड़कों, रेलवे और हवाई अड्डों सहित आधुनिक परिवहन नेटवर्क के विकास में निवेश किया गया है। इससे वस्तुओं और लोगों की आवाजाही सुगम होगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

शहरी नियोजन: तेजी से शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्थायी शहरी नियोजन प्रथाओं को लागू किया गया है। कुशल बुनियादी ढांचे वाले स्मार्ट शहर नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएँगे।

समावेशी स्वास्थ्य सेवा:

यूनिवर्सल हेल्थकेयर: यूनिवर्सल हेल्थकेयर कवरेज प्राप्त करने की दिशा में काम किया गया है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक नागरिक को वित्तीय बोझ के बिना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो। इससे समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार होगा।

स्वास्थ्य शिक्षा: निवारक स्वास्थ्य देखभाल प्रथाओं को प्रोत्साहित करने, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर बोझ को कम करने और जनसंख्या की भलाई में सुधार करने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा दिया गया है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि कुछ मिशन केवल मिशन भर नहीं होते, बल्कि सपने होते हैं। विकसित भारत भारतीय जनमानस के सामूहिक चैतन्य और चिंतन का स्वप्न है। ऐसे विराट सपने, सक्षम और दूरदर्शी नेतृत्व के अभिलाषी होते हैं व ऐसा नेतृत्व किसी समाज अथवा देश को हमेशा नहीं मिलते। भारतीय राष्ट्र के लिए यह गौरव व सौभाग्य का अवसर है कि विकासशील भारत के बेहद महत्त्वपूर्ण पड़ाव पर उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे युगस्रष्टा का नेतृत्व मिला है।

23 साल के सेवा-भाव का ऐसा सार्वजनिक जीवन, जहाँ एक नेता की ज़ुबान गारंटी में तब्दील हो जाए, उसी के नेतृत्व में राष्ट्र के विकसित होने का सपना पूरा होगा। जिस नेता की चिंता में रोटी, कपड़ा और मकान ही नहीं, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कें बराबर रहती हैं; जिसने भारत के पैरों को वैश्विक पटल पर अंगद जैसा जमा दिया हो; वही इस ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ का पथ-प्रदर्शक भी हो सकता है व संचालक भी। 2047 तक भारत के विकसित होने का सपना इस यात्रा का आरंभ भी है और उद्देश्य भी।

राजस्थान विधानसभा में रच गया इतिहास: यूनुस खान और जुबैर खान सहित 16 नव निर्वाचित विधायकों ने संस्कृत में किया शपथ ग्रहण

राजस्थान विधानसभा में नव-निर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण कर लिया। इस दौरान एक नहीं, दो नहीं बल्कि 16 विधायकों ने संस्कृत में शपथ ग्रहण किया। इन विधायकों में कॉन्ग्रेस के विधायक जुबैर खान और बीजेपी से बागी होकर निर्दलीय लड़े यूनुस खान के नाम शामिल हैं। यूनुस खान चुनाव जीतने के बाद देशनोक में करणी माता के दरबार में भी माथा टेका था।

यूनुस खान को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का समर्थक माना जाता है। वे वसुंधरा सरकार में मंत्री भी थे। बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया तो वे बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े थे। वे कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को हराकर तीसरी बार विधानसभा पहुँचे हैं। वहीं, भाजपा से बागी होकर शिव विधानसभा से निर्दलीय जीतने वाले रवींद्र सिंह भाटी ने पहले राजस्थानी और बाद में हिंदी में शपथ ग्रहण किया।

इन विधायकों ने ली संस्कृत में शपथ

संस्कृत में शपथ लेने वाले विधायकों में पोकरण के विधायक महंत प्रतापपुरी, हवामहल-जयपुर के विधायक बाल मुकुंद आचार्य, शेरगढ़ के विधायक बाबू सिंह राठौड़, आहोर के विधायक छगन सिंह राजपुरोहित, सिविल लाइंस-जयपुर के विधायक गोपाल शर्मा, फलौदी के विधायक पब्बाराम बिश्नोई, अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी, मांडल के विधायक उदयलाल भडाना शामिल हैं।

इसके अलावा कामाँ के विधायक नौक्षम चौधरी, जालोर के विधायक जोगेश्वर गर्ग, गढ़ी के विधायक कैलाश चंद्र मीणा, बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास, सुमेरपुर के विधायक जोराराम कुमावत और राजसमंद की विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी, डीडवाना से निर्दलीय विधायक यूनुस खान और अलवर के रामगढ़ से जीते विधानसभा पहुँचे कॉन्ग्रेस के विधायक जुबैर खान के नाम हैं।

डीडवाना के निर्दलीय विधायक यूनुस खान

यूनुस खान को बीजेपी के अल्पसंख्यक चेहरे के तौर पर देखा जाता रहा है। वो डीडवाना से दो बार विधायक रहे हैं। उन्होंने 2003 और 2013 में डीडवाना सीट से विधानसभा चुनाव जीता था और 2018 तक राजस्थान की वसुंधरा सरकार में मंत्री रहे थे।

उन्हें 2018 में टोंक विधानसभा सीट से सचिन पायलट के सामने उतारा गया था, जहाँ वो चुनाव हार गए थे। इसके बाद इस बार वो फिर से अपनी पारंपरिक सीट डीडवाना से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट माँग रहे थे, लेकिन बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

उन्हें वसुंधरा राजे का करीबी भी माना जाता है। हालाँकि, चुनाव के बाद उन्होंने साफ कर दिया था कि किसी चेहरे के नाम पर नहीं, बल्कि वो जनता की सेवा करने के लिए मैदान में उतरे हैं। वो जनता की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जमकर तारीफ भी की थी।

अलवर के रामगढ़ से विधायक जुबैर खान ने भी संस्कृत में शपथ

यूनुस खान के अलावा जुबैर खान ने भी संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण किया। वो चौथी बार विधायक बने हैं। जुबैर साल 1990 में पहली बार 26 साल की उम्र में विधायक बने थे। इसके बाद उन्होंने 1993 और 2003 में चुनाव जीता। पिछले चुनाव 2018 में उनकी पत्नी ने रामगढ़ सीट जीती थी।

इस बार जुबैर खान ने फिर से खुद चुनाव लड़ा और चौथी बार विधायक बने हैं। यूनुस खान ने खुद ही वीडियो शेयर करके अपने शपथ ग्रहण की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “आज 16वीं राजस्थान विधानसभा के प्रथम सत्र की बैठक में चौथी बार विधायक के रूप में भारत के संविधान के प्रति शपथ ग्रहण की।”

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान काली पट्टी बाँधकर पहुँचे कॉन्ग्रेसी विधायक

संसद में चल रहे हंगामे के विरोध में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोल गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और अन्य सभी कॉन्ग्रेसी विधायक काली पट्टी बाँधकर विधानसभा पहुँचे। इस बीच, कई विधायकों ने राजस्थानी भाषा में भी शपथ ग्रहण किया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए प्रोटेम स्पीकर कालीचरण सराफ ने इसकी अनुमति नहीं दी।

बता दें कि सदन के सदस्य आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से किसी में भी शपथ ग्रहण कर सकता है, लेकिन राजस्थानी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है। ऐसे में राजस्थानी भाषा में शपथ लेने वालों का शपथ मान्य नहीं हुआ।

मॉब लिंचिंग पर फाँसी, राजद्रोह खत्म, किसी भी थाने में जीरो FIR: IPC की जगह ‘भारतीय न्याय संहिता’, संसद में बोले अमित शाह – अब तारीख़ पर तारीख़ नहीं चलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ‘नए भारत का नया कानून’ के रूप में IPC (भारतीय दंड संहिता) की जगह ‘भारतीय न्याय संहिता’ लेकर आई है, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद को जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक सदन में करीब 150 साल पुराने तीन कानून, जिनसे हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली चलती है, उन तीनों कानूनों में पहली बार पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीयता, भारतीय संविधान और भारत की जनता की चिंता करने वाले बहुत आमूल-चूल परिवर्तन लेकर वो आए हैं।

अमित शाह ने कहा कि ‘Indian Penal Code’ जो 1860 में बना था, उसका उद्देश्य न्याय देना नहीं बल्कि दंड देना ही था। उसकी जगह ‘भारतीय न्याय संहिता’ 2023 इस सदन की मान्यता के बाद पूरे देश में अमल में आएगी। वहीं CrPc की जगह ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ इस सदन के अनुमोदन के बाद अमल में आएगी। इनके अलावा ‘Indian Evidence Act, 1872’ की जगह ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023’ अमल में आएगा।

अमित शाह ने ‘भारतीय न्याय संहिता’ को लेकर संसद में दी जानकारी

अमित शाह ने आगे जानकारी दी कि आतंकवाद की व्याख्या अब तक किसी भी कानून में नहीं थी। उन्होंने कहा कि पहली बार अब मोदी सरकार आतंकवाद को व्याख्यायित करने जा रही है, जिससे इसकी कमी का कोई फायदा न उठा पाए। साथ ही बताया कि मॉब लिंचिंग घृणित अपराध है और केंद्र सरकार इस कानून में मॉब लिंचिंग अपराध के लिए फाँसी की सजा का प्रावधान कर रही है। उन्होंने विपक्ष से सवाल दागा कि आपने भी वर्षों देश में शासन किया है, आपने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून क्यों नहीं बनाया?

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “आपने मॉब लिंचिंग शब्द का इस्तेमाल सिर्फ हमें गाली देने के लिए किया, लेकिन सत्ता में रहे तो कानून बनाना भूल गए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (CRPC) में पहले 484 धाराएँ थीं, अब 531 होंगी, 177 धाराओं में बदलाव हुआ है। 9 नई धाराएँ जोड़ी गई हैं, 39 नए सब सेक्शन जोड़े गए हैं, 44 नए प्रोविजन और स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं, 35 सेक्शन में टाइम लाइन जोड़ी हैं और 14 धाराओं को हटा दिया गया है। राज्य का सबसे पहला कर्तव्य न्याय होता है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका – लोकतंत्र के तीन स्तंम्भ हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने देश को मजबूत प्रशासन देने के लिए इन तीनों के बीच काम का बँटवारा किया। आज पहली बार ये तीनों मिलकर देश को दंड केंद्रित नहीं, न्याय केंद्रित क्रिमिनल सिस्टम देंगे।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आतंकवाद की व्याख्या अब तक किसी भी कानून में नहीं थी, पहली बार अब मोदी सरकार आतंकवाद को व्याख्यायित करने जा रही है। ऐसा इसीलिए किया जा रहा है, ताकि इसकी कमी का कोई फायदा न उठा पाए। इसके साथ-साथ राजद्रोह को देशद्रोह में बदलने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा बनाया गया राजद्रोह का कानून, जिसके तहत तिलक महाराज, महात्मा गाँधी, सरदार पटेल… हमारे बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानी सालों साल जेल में रहे और वह कानून आज तक चलता रहा। जब विपक्ष में रहते थे, तब विरोध करते थे, लेकिन सत्ता में आते थे, तो इसका दुरुपयोग ​करते थे। पहली बार मोदी सरकार ने राजद्रोह कानून को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया।

अमित शाह ने संसद में कहा कि पहली बार हमारे संविधान की स्पिरिट के हिसाब से कानून अब मोदी जी के नेतृत्व में बनने जा रहे हैं। 150 साल के बाद इन तीनों कानूनों को बदलने पर उन्होंने गर्व जताया। कुछ साथ ही तंज कसा कि लोग कहते थे कि हम इन्हें नहीं समझते, उन्हें वो कहना चाहेंगे मन अगर भारतीय रखोगे तो समझ में आ जाएगा, लेकिन अगर मन ही इटली का है तो कभी समझ नहीं आएगा। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि ये अंग्रेजों का शासन नहीं है, ये कॉन्ग्रेस का शासन नहीं है, ये भाजपा और नरेन्द्र मोदी का शासन है – यहाँ आतंकवाद को बचाने की कोई दलील काम नहीं आएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “हमने कहा था कि हम धारा 370 और 35-A हटा देंगे, हमने हटा दिया। हमने वादा किया था, आतंकवाद को समाप्त कर देंगे, जीरो टॉलरेंस की नीति बनाएँगे और सुरक्षाकर्मियों को फ्री हैंड देंगे, हमने दिया। हमने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर बनाएँगे और अब 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। ये नरेन्द्र मोदी की सरकार है, जो कहती है-वो करती है।

जानिए ‘भारतीय न्याय संहिता’ में क्या-क्या है नया

मोदी सरकार में देश की कानूनी प्रक्रियाओं को सरल करने पर जोर दिया गया है। छोटे-मोटे आपराधिक मामलों में समरी ट्रायल के जरिए तेज़ी लाई जाएगी। चोरी-चकारी, आपराधिक धमकी जैसे मामलों में ये समरी ट्रायल ज़रूरी होगा। 3 साल तक की सज़ा वाले मामलों में मजिस्ट्रेट समरी ट्रायल चलाएँगे। संगठित अपराध पर भी मोदी सरकार ने दोहरा वार किया है। इससे संबंधित नई दाण्डिक धाराएँ जोड़ी गई हैं। सिंडिकेट की विधिविरुद्ध गतिविधि को दंडनीय बनाया गया है।

भारत की एकता एवं अखंडता के खिलाफ कृत्यों को नए प्रावधानों में जोड़ा गया है। सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक कृत्यों और अलगाववादी गतिविधियों को इसमें शामिल किया गया है। घोषित अपराधियों पर चलेगा सख्त कानूनी हंटर चलाने का ऐलान भी किया गया है। 10 वर्ष या उससे अधिक, आजीवन कारावास एवं मृत्युदंड के दोषी अब ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ घोषित किए जा सकेंगे। घोषित अपराधियों की भारत से बाहर की संपत्तियों को जब्त करने के लिए नया प्रावधान लाया गया है।

नागरिकों की सुविधा के लिए किसी भी थाने में ‘जीरो FIR’ दर्ज की जा सकेगी। E-FIR के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं। 90 दिन में पुलिस को जाँच की प्रगति की सूचना देनी होगी। विकसित भारत में फॉरेन्सिक्स का बढ़िया उपयोग होगा। 7 वर्ष या उससे अधिक की जेल की सज़ा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक अनिवार्य होगा। सभी प्रदेशों में इसका इस्तेमाल आवश्यक होगा। 5 वर्ष के भीतर इसके लिए राज्यों एवं संघ/राज्य क्षेत्रों में इसके लिए इंफ़्रास्ट्रक्चर तैयार कर दिया जाएगा।

FIR से लेकर जजमेंट तक, सब कुछ डिजिटलाइज किया जाएगा। जाँच-पड़ताल से लेकर मुकदमों के साक्ष्यों तक की रिकॉर्डिंग की जाएगी। पुलिस द्वारा सर्च एवं जब्ती की कार्रवाई में तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक या किसी भी प्रकार के डिजिटल रिकॉर्ड को दस्तावेज बनाया जाएगा। यौन हिंसा के मामलों में पीड़िता का बयान सिर्फ महिला मजिस्ट्रेट ही रिकॉर्ड कर सकेगी। पीड़िता का बयान उसके आवास पर महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष ही दर्ज होगा।

बयान दर्ज किए जाते समय पीड़िता के माता-पिता/अभिभावक मौजूद रहेंगे। गैंगरेप के मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है। 18 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के मामलों में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सज़ा दिलाई जा सकती है। झूठे वादे या पहचान छिपा कर यौन संबंध बनाना अब अपराध है। राजद्रोह जैसे अंग्रेजों के काले कानून को निरस्त किया गया। मृत्युदंड की सज़ा को अब आजीवन कारावास में बदला जा सकेगा।

इस मामले में आजीवन कारावास की सज़ा को भी 7 वर्ष की सज़ा में बदला जा सकेगा। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति अपनाते हुए पहली बार इसकी व्याख्या की गई है। अब ये दंडनीय अपराध है। मॉब लिंचिंग में नस्ल, जाति, समुदाय के आधार पर की गई हत्या से संबंधित अपराध का नया प्रावधान जोड़ा गया है। मॉब लिंचिंग में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड का प्रावधान है। इस तरह अब IPC की जगह BNS (भारतीय न्याय संहिता) ने ले ली है।

IPL में खरीदना था 19 साल के शशांक सिंह को, खरीद लिया 32 साल के शशांक सिंह को: प्रीति जिंटा ने डुबोए पंजाब किंग्स के ₹20 लाख

आईपीएल के लिए खिलाड़ियों की नीलामी के दौरान प्रीति जिंटा की एक भूल के कारण पंजाब किंग्स टीम को ₹20 लाख का नुकसान हो गया। प्रीति जिंटा ने आईपीएल की नीलामी के दौरान एक गलत खिलाड़ी खरीद लिया, जिसे बाद में उन्हें वापस करना चाहा। हालाँकि, इस खिलाड़ी को वे वापस नहीं कर सके और उन्हें अपनी टीम में रखना ही पड़ा।

दरअसल, 19 दिसम्बर 2023 को दुबई में आईपीएल 2024 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी हो रही थी। इस दौरान सभी टीम अपने लिए खिलाड़ियों की बोली लगा रहे थे। पंजाब किंग्स टीम की तरफ से उसकी मालकिन प्रीति जिंटा, टीम के सह-मालिक नेस वाडिया और टीम के हेड कोच संजय बांगड़ खिलाड़ियों की बोली लगा रहे थे।

इसी दौरान जब खिलाड़ियों की नीलामी आयोजित कर रही मल्लिका सागर ने शशांक सिंह का नाम बोली के लिए रखा। थोड़े सोच-विचार और संजय बांगड़ से बातचीत के बाद शशांक सिंह पर प्रीति जिंटा ने बोली लगा दी। शशांक सिंह का बेस प्राइस (खिलाड़ी को बोली में मिलने वाली न्यूनतम रकम) ₹20 लाख रखा गया था।

प्रीति जिंटा ने शशांक सिंह को खरीदने के लिए जब बोली लगाई तो और किसी टीम ने उन में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद नीलामी करवा रही मल्लिका सागर ने एक बार सबसे पुष्टि करके शशांक सिंह को पंजाब किंग्स के लिए बिका हुआ घोषित कर दिया। हालाँकि कुछ ही देर बाद जब अगले खिलाड़ी की बोली चालू हुई तो प्रीति जिंटा और नेस वाडिया ने मल्लिका सागर का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

उन्होंने मल्लिका सागर को बताया कि उन्होंने गलत खिलाड़ी को खरीद लिया है। वे इस खिलाड़ी को नहीं खरीदना चाहते थे। हालाँकि, उनकी यह खरीद वापस नहीं हो सकी। मल्लिका सागर ने कहा कि जब एक खिलाड़ी की नीलामी के लिए हथौड़ा नीचे हो गया फिर उसे वापस नहीं किया जा सकता। पंजाब को यह खिलाड़ी रखना ही पड़ेगा।

प्रीति जिंटा से आईपीएल खरीददारी में क्यों हुई यह गलती?

जानकारी के अनुसार, प्रीति जिंटा ने जिन शशांक सिंह को गलती से खरीद लिया वह 32 वर्ष के बैट्समैन हैं और बीते वर्ष सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से खेले थे। हालाँकि, उनका प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं रहा था। इसलिए उनको इस बार टीम ने रिलीज कर दिया। इसके कारण उनकी बोली लग रही थी। शशांक सिंह प्रथम श्रेणी का क्रिकेट खेल चुके हैं। शशांक छत्तीसगढ़, मुंबई और दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से भी खेल चुके हैं।

वहीं, प्रीति जिंटा समझ रही थीं कि वह 19 वर्षीय शशांक सिंह के लिए बोली लगा रही हैं। इन शशांक सिंह की उम्र मात्र 19 वर्ष है और अभी वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट नहीं खेले हैं। वह बंगाल के एक क्लब कंचनजंगा वॉरियर्स की तरफ से खेल चुके हैं। दोनों के नाम एक जैसे होने के कारण कन्फ्यूजन पैदा हुआ। नाम के अलावा दोनों का बेस प्राइज भी एक ही ₹20 लाख थी। इसीलिए 19 वर्षीय शशांक सिंह की जगह प्रीति जिंटा ने 32 वर्षीय शशांक सिंह को खरीद लिया।

शाहरुख खान की पत्नी से ED करेगी पूछताछ, ₹30 करोड़ की ठगी में भेजा नोटिस: जानिए वायरल खबर का सच

बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान की बीवी गौरी खान को लेकर मंगलवार (19 दिसंबर,2023) को खबर फैली कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें नोटिस जारी किया है। कहा गया कि उन्हें ये नोटिस लखनऊ की रियल एस्टेट कंपनी तुलसियानी ग्रुप का ब्रांड एंबेसडर होने की वजह से भेजा गया है।

खबर में दावे किए गए तुलसियानी ग्रुप पर चूँकि निवेशकों और बैंकों से 30 करोड़ रुपए ठगने का आरोप है इसलिए इसकी ब्रांड एंबेसडर होने के कारण फिल्म निर्माता, इंटीरियर डिजाइनर गौरी खान को नोटिस भेजा गया। हालाँकि बाद में ये खबर फर्जी निकली। ईडी ने खुद इसका खंडन किया।

गूगल और सोशल मीडिया पर देखेंगे तो तमाम प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने इस खबर को तूल दिया था कि प्रवर्तन निदेशालय अब शाहरुख खान की पत्नी और तुलसियानी ग्रुप के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जाँच में जुटा है और अधिकारी इस बात का पता भी लगाएँगे कि गौरी को तुलसियानी समूह का ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए कितने पैसे मिले। इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी और अन्य दस्तावेज भी जाँचे जाएँगे।

खबरों में इस बात पर भी जोर दिया गया था कि ईडी की ओर से जो नोटिस भेजा गया है उस पर अभी गौरी खान ने कोई जवाब नहीं दिया है।

गौरी खान को लेकर मीडिया में फैली इस खबर के बाद एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने इस पर संज्ञान लिया। कई रिपोर्टों में बताया गया कि ईडी ने इस खबर को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने कन्फर्म किया कि गौरी के खिलाफ कोई नोटिस नहीं भेजा गया है। ना ही परमिशन लेने जैसी कोई तैयारी की जा रही है। ये खबर पूरी तरह से गलत है। गौरी के खिलाफ कार्रवाई करने की कोई तैयारी नहीं की जा रही है।

क्या था मामला?

बता दें कि लखनऊ के तुलसियानी ग्रुप की सुशांत गोल्फ सिटी नाम की एक प्रोजेक्ट में मुंबई के किरीत जसवंत शाह ने कथित तौर पर 2015 में 85 लाख रुपए में एक फ्लैट खरीदा था। मगर समय बीतने के बाद भी कंपनी ने शाह को फ्लैट नहीं दिया और न ही पैसे वापस किए। इसके चलते शाह ने तुलसियानी ग्रुप के निदेशकों अनिल कुमार तुलसियानी, महेश तुलसियानी के साथ-साथ ब्रांड एंबेसडर गौरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मार्च 2023 में शाह ने इन तीनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी।

जसवंत शाह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उन्होंने ये फ्लैट गौरी को ऐड में देखकर लिया था। उन्होंने कहा था, “मैं उसी साल सुशांत गोल्फ सिटी में तुलसियानी कंपनी के ऑफिस गया और इसके निदेशकों से मिला और 86 लाख रुपए का एक फ्लैट खरीदने पर सहमति जताई। मुझे आश्वासन दिया गया था कि मुझे 2016 में फ्लैट का कब्जा मिल जाएगा। लेकिन जब काफी वक्त बीत गया और मुझे फ्लैट नहीं मिला तब मैंने पता किया तो मुझे पता चला कि मेरे बुक किए फ्लैट का एग्रीमेंट कंपनी ने किसी और को ट्रांसफर कर दिया है।”