Home Blog Page 1414

सरकारी संस्था FSSAI दीपावली को बता रहा ‘जश्न-ए-रोशनी’? सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्टर, अब सामने आई सच्चाई

सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो रहा है। सरकारी संस्था ‘भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)’ के नाम से वायरल इस पोस्टर में दीपावली को ‘जश्न-ए-रौशनी’ का नाम दिया गया है। इस संबंध में 9 नवम्बर, 2023 को दिल्ली स्थित FSSAI मुख्यालय पर एक कार्यक्रम आयोजन की बात भी पोस्टर में कही गई है।

FSSAI जश्न ए रोशनी

सोशल मीडिया पर यह पोस्टर सामने आने के बाद कई लोगों ने मोदी सरकार पर प्रश्न उठाए और कहा कि आखिर हिन्दू त्योहारों का उर्दू में नाम लिख कर इस्लामीकरण क्यों किया जा रहा है? कई लोगों ने मोदी सरकार पर इस्लामी तुष्टिकरण में लीन होने के आरोप भी लगाए।

एक यूजर आनंद अटल ने लिखा. “जश्न ए रोशनी – यह क्या है… दीपावली है ईद?”

हालाँकि, अब FSSAI ने खुद ही सामने आकर इसकी सच्चाई बता दी है। FSSAI ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “FSSAI कथित तौर पर ‘जश्न-ए-रोशनी’ नाम का कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं कर रहा है, जैसा की सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर साझा की जा रही तस्वीर ना ही FSSAI ने जारी की है और ना ही उसे मंजूरी दी है।”

गौरतलब है कि FSSAI देश में खाद्य पदार्थों के मानक तय करने एवं जाँचने वाली एजेंसी है जो कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह एजेंसी देश भर में खाने-पीने के सामान का निर्माण करने वाली कम्पनियों, दुकानों और रेस्टॉरेंट आदि को प्रमाण पत्र जारी करती है। इसे 2006 में बनाया गया था।

इससे पहले भी कई बार दीवाली का नाम बदल कर इस्लामिक नाम देने के प्रयास किए गए हैं। कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने वर्ष 2020 में दीवाली को ‘जश्न-ए-चिराग‘ बता दिया था। उन्होंने इस शब्द का उपयोग एक टीवी एकंर को दीवाली की बधाई देने के लिए किया था। एक फैशन कम्पनी ‘फैबइंडिया’ ने भी दीवाली को ‘जश्न-ए-रिवाज‘ बताने की कोशिश की थी।

गरीब है एक चौथाई सामान्य वर्ग, सबसे ज़्यादा सरकारी नौकरियाँ यादवों के पास: बिहार विधानसभा में रखे गए जाति जनगणना के आँकड़े, राज्य की महज 7% आबादी ग्रेजुएट

बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़ों के बाद अब विधानसभा के पटल पर पूरे बिहार की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का आँकड़ा रखा है। ये आँकड़ा जातिवार है। बिहार में कुल 2 करोड़ 76 लाख 68 हजार 930 परिवार हैं, जिसमें से 94 लाख 42 हजार 786 परिवार गरीब हैं। ये कुल परिवारों का 34.13 प्रतिशत आँकड़ा है। इस गणना के हिसाब से बिहार में सामान्य वर्ग के कुल 43 लाख 28 हजार 282 परिवार हैं, जिसका 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गरीबी में जीवन यापन कर रहा है।

बिहार में आर्थिक आधार पर जातीय आँकड़ा

बिहार विधानमंडल के पटल पर रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में पिछड़ा वर्ग के कुल 33.16 प्रतिशत, सामान्य वर्ग के कुल 25.09 प्रतिशत, अति पिछड़ा वर्ग के 33.58 प्रतिशत, अनुसूचित जाति वर्ग के 42.93 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कुल 42.7 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। यही नहीं, सामान्य वर्ग में भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत जैसे तीन सबसे समृद्ध बताई जाने वाली जातियों के करीब 25 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

इसमें सबसे ज्यादा भूमिहार के 27.58 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो ब्राह्मणों के 25.3 प्रतिशत और राजपूतों के 24.89 प्रतिशत और कायस्थों के कुल 13.83 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।

अनुसूचित जातियों की स्थिति बदतर

बिहार में अनुसूचित जातियों की आर्थिक रूप से स्थिति बदतर हालत में है। अनुसूचित जातियों में मुसहरों के सबसे ज्यादा 54.64 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। अहिरवार के 42.06 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, बिहार सरकार के आँकड़ों में बताया गया है कि ‘डोम’ जाति के 53.10 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो 49.06 प्रतिशत नट परिवार गरीब हैं। दुसाध जाति के 39.36 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो पासी जाति के 38.24 प्रतिशत, धोबी जाति के 35.82 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।

ये है बिहार की शैक्षणिक स्थिति, महज 7 प्रतिशत ग्रेजुएट

बिहार में शिक्षा की हालत बेहद खराब है। पूरे बिहार की करीब एक चौथाई आबादी 5वीं तक भी नहीं पढ़ी है। बिहार की 22.67 प्रतिशत आबादी के पास वर्ग 1 से 5 तक की शिक्षा ही है। वहीं, कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा महज 14.33 प्रतिशत आबादी के पास है। पूरे बिहार के सिर्फ 14.71 लोग ही 9वीं से 10वीं तक की शिक्षा ले पाए हैं, तो 12वीं तक की शिक्षा सिर्फ 9.19 प्रतिशत आबादी के पास है। पूरे राज्य में महज 7 प्रतिशत लोग ही ग्रेजुएट हैं।

बिहार में सबसे ज्यादा नौकरियाँ यादवों के पास, सामान्य वर्ग का भी दबदबा

बिहार सरकार द्वारा सदन में रखे गए आँकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नौकरियाँ बिहार में यादव जाति के पास है। बिहार में 2 लाख 89 हजार 538 नौकरियाँ अकेले यादवों के पास है। दूसरे नंबर पर भूमिहार लोग हैं। भूमिहारों के पास 1 लाख 87 हजार 256 नौकरियाँ हैं। बिहार में कुशवाहा के पास 1 लाख 12 हजार 106 नौकरियाँ हैं। कुशवाहा की कुल आबादी का 2.04 हिस्सा सरकारी नौकरी में है।

सबसे ज्यादा मजबूत कुर्मी हैं। संख्या बल में कम होने के बावजूद कुर्मियों की कुल आबादी का 3.11 प्रतिशत हिस्सा सरकारी नौकरियों में है। कुल 1 लाख 17 हजार 171 सरकारी नौकरियाँ कुर्मियों के पास है। इसके अलावा ब्राह्मणों के पास 1.72 लाख सरकारी नौकरियाँ, राजपूतों के पास 1.71 लाख सरकारी नौकरियाँ और कायस्थों के पास 52.49 हजार नौकरियाँ हैं। सबसे ज्यादा कायस्थों की 6.68 आबादी सरकारी नौकरी में है।

6 साल की बच्ची का गुदा छुआ या भीतर डाली उंगली?: कानूनी दाँव-पेंच में अपराधी की सजा 5 साल कम, दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (6 नवंबर 2023) को अपने एक फैसले में कहा है कि किसी नाबालिग पीड़िता के प्राइवेट पार्ट को कपड़ों के ऊपर से छूना पॉक्सो एक्ट के तहत पेनिट्रेटिव यौन अपराध नहीं माना जा सकता है। यह मामला 6 साल की एक बच्ची से जुड़ा हुआ है, जिसका यौन शोषण उसके ट्यूशन टीचर के भाई ने 5 अगस्त 2016 को किया था। इस अपराधी को निचली अदालत ने 10 साल जेल और जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के फैसले में अब दोषी को 5 साल की सजा सुनाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के तीस हजारी न्यायिक क्षेत्र का है। 5 अगस्त 2016 को 6 साल की एक बच्ची अपनी महिला ट्यूशन टीचर के घर पढ़ने गई थी। इस दौरान टीचर का भाई बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ छेड़खानी करता है। 3 दिनों बाद 8 अगस्त को इस मामले की शिकायत पुलिस में दी जाती है। पुलिस को दिए गए बयान (CrPC 161) में बच्ची ने बताया कि आरोपित ने उसके प्राइवेट पार्ट (गुदा) पर हाथ लगाया। इसकी वजह से पीड़िता ने खुद को दर्द होने की बात कही। इस आधार पर बच्ची का मेडिकल टेस्ट करवाया गया।

लाहौरी गेट थाना पुलिस ने इस मामले में 9 अगस्त को IPC की धारा 376 व पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 6 के तहत FIR दर्ज करके उसी दिन आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। 9 अगस्त को अदालत में पीड़िता ने अपना बयान (CrPC 164) दर्ज करवाया। इस बयान में 6 साल की पीड़ित बच्ची ने बताया कि आरोपित ने उसके प्राइवेट पार्ट (गुदा) में उंगली डाली थी। इसके चलते आरोपित के नाखूनों से पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में घाव हो गया था। साथ ही विरोध करने पर गला दबाया और किसी को बताने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी थी।

तीस हजारी कोर्ट में यह मामला ट्रायल पर चला और आरोपित को 10 साल की जेल के साथ 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसी सजा को आरोपित पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगा कर चुनौती दी थी। इसी याचिका पर जस्टिस अमित बंसल ने सुनवाई की।

दिल्ली हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया। आरोपित के वकीलों ने बताया कि निचली अदालत ने पीड़िता के CrPC 161 और CrPC 164 के बयानों में आए विरोधाभास पर ध्यान नहीं दिया। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया, जिसमें बच्ची के मेडिकल परीक्षण में किसी घाव के निशान नहीं पाए गए थे।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बताया कि आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 6 के तहत अपराध नहीं बनता है। इसी केस की सुनवाई के दौरान ‘सिम्पल टच’ को अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 3 (C) के तहत अपराध नहीं माना। जस्टिस बंसल के मुताबिक अभियोजन पक्ष इस बात के सबूत नहीं पेश कर पाया कि पीड़िता को किसी प्रकार की चोट लगी या घाव हुआ था। हालाँकि हाईकोर्ट ने आरोपित को पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 10 के तहत दोषी मानते हुए 10 साल की सजा को 5 साल कर दिया।

मात्र साढ़े 27 रुपए में ‘भारत आटा’, 25 रुपए किलो प्याज: जानिए कहाँ-कहाँ मिलेगा, और क्या-क्या कम कीमत पर बेच रही मोदी सरकार

मोदी सरकार ने देशवासियों को कम कीमत पर आटा उपलब्ध करवाने के लिए ‘भारत आटा’ की बिक्री चालू की है। इस ‘भारत आटा’ को बेचने वाली 100 गाड़ियों को सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, वस्त्र और वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हरी झंडी दिखाई।

अब यह भारत आटा देश ₹27.5/किलोग्राम की दर से केन्द्रीय भण्डार, नैफेड और NCCF तथा इन गाड़ियों से खरीदा जा सकेगा। इसका विस्तार सहकारी और अन्य दुकानों पर भी किया जाएगा, जिससे आसानी से जनता तक इसकी पहुँच हो सके।

इस ‘भारत आटा’ के लिए केंद्र सरकार ने 2.5 लाख मीट्रिक टन गेहूँ को ₹2150/क्विंटल की दर से नैफेड, NCCF और अन्य सहकारी तथा अर्ध-सहकारी संगठनों को दिया गया है। इसको पीस कर ‘भारत आटा’ के रूप में बाजार में उतारा जाएगा। जहाँ दाल 60 रुपए किलो बेचा जाएगा, वहीं प्याज 25 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।

अभी तक सरकार राशन वितरण योजना के तहत लोगों को गेहूँ कम कीमत पर देती आई है। ‘भारत आटा’ के जरिए उस वर्ग को भी इसमें जोड़ने का प्रयास किया जाएगा जो कि राशन वितरण के दायरे में नहीं है या फिर पैकेटबंद आटा लेना चाहते हैं। केंद्र सरकार पहले से ही बाजार में चना दाल और प्याज, दोनों ही कम कीमतों पर बेच रही है। अब इसमें ‘भारत आटा’ शामिल कर लिया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि उसने यह कदम बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए उठाया है।

गौरतलब है कि अन्य निजी कम्पनियों के आटे की कीमत इस समय बाजार में ₹35 से अधिक है। कई आटे की कंपनियाँ ₹50-₹60 में भी आटा बेचती हैं। ‘भारत आटा’ के जरिए ग्राहकों को कम कीमत में आटा लेने का मौका मिलेगा। हाल ही में देश में खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया था कि प्रति व्यक्ति मुफ्त 5 किलो राशन की योजना अगले पाँच वर्षों तक जारी रहेगी। इस योजना से 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जाएगा।

सरकार का यह कदम महँगाई को कम करने में भी काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद आए ऊर्जा और खाद्य संकट के कारण महँगाई का कड़ा रुख लगातार बना हुआ है। हालाँकि, सरकार ने अपने क़दमों से इसे नियन्त्रण में किया है लेकिन खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम भी उठाए जा रहे हैं।

गरीब कल्याण योजना के तहत राशन वितरण, चावल का निर्यात रोकना और कीमत नियन्त्रण के चलते सितम्बर माह में देश में महँगाई का स्तर घट कर 5.02% पर आ गया था। इससे पहले अगस्त माह में यह 6.83% पर था। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) महँगाई को 2%-6% के बीच रखने का प्रयास रखती है। इससे ज्यादा होने पर वह मौद्रिक नीति में बदलाव पर विचार करती है।

मूर्ति तोड़ कर फेंक दी, मुँह पर कर दी लैट्रिन, मंदिर के प्रांगण में पेशाब किया, भगवा वस्त्रों में भर दिया मल: प्रधान शखावत हुसैन बोले – असामाजिक तत्वों की करतूत

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक हिन्दू मंदिर में घुस कर मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया है। मंदिर की मूर्ति को तोड़ कर बजरंग बली के मुँह पर लैट्रिन कर दी गई है। परिसर में भगवा वस्त्र में मल भर के रख दिया गया और प्रांगण में पेशाब भी किया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। मंदिर को साफ़ करवाया गया है। सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है।

यह मामला मुरादाबाद जिले के थाना क्षेत्र सोनकपुर का है। यहाँ के अजमत नगर चौपड़ा इलाके में एक प्राचीन शिव मंदिर है। आसपास के हिन्दुओं की आस्था के केंद्र इस मंदिर में तमाम अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। सोमवार की सुबह कुछ स्थानीय लोग मंदिर में पूजा करने पहुँचे तो मंदिर परिसर का माहौल अस्त-व्यस्त दिखा। गर्भगृह के पहले ही भगवा रंग के गमछे में किसी ने मल भर के फेंक रखा था। अभी तक यह कन्फर्म नहीं हो पाया है कि यह मल मानव का है या किसी जानवर का।

इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में पेशाब भी किया गया था। जब श्रद्धालु गर्भगृह के पास पहुँचे तब उन्हें बजरंग बली की मूर्ति टूटी हालत में मिली। अनुमान है कि किसी व्यक्ति ने इस घटना को रात के अँधेरे में अंजाम दिया है। मंदिर के हालत देख कर लोगों में नाराजगी फ़ैल गई। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुँचा। पुलिस ने फ़ौरन ही अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। मंदिर परिसर को साफ करवाया गया और नाराज लोगों को समझाया गया।

मंदिर की देखभाल करने वाले भूरेलाल ने बताया कि घटना के समय वो सो रहे थे। सुबह उन्हें पता चला कि बजरंग बली की मूर्ति को थोड़ी दूर ले जा कर फेंक दिया गया है। भूरेलाल जब मूर्ति के पास गए तो देखा कि वो क्षतिग्रस्त है और उसके मुँह पर किसी ने लैट्रीन कर दिया था। भूरेलाल के मुताबिक अभी तक किसी को पकड़ा नहीं जा सका है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उनको किसी पर शक भी नहीं है और न ही उन्होंने किसी को देखा।

गाँव के प्रधान शखावत हुसैन ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि घटना को किसी असामाजिक तत्व ने अंजाम दिया है।

अमेरिका में यहूदी बुजुर्ग को भारी पड़ा हमास समर्थक से बहस करना, मेगाफोन से वार कर मार डाला: इजरायल के विरोध में रैली, फ्रांस में महिला को मारा था चाकू

संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी लॉस एंजिल्स में रविवार (5 नवंबर, 2023) को एक यहूदी बुजुर्ग को इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारी के साथ बहस की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

दरअसल, उत्तरी लॉस एंजिल्स शहर के नजदीक वेस्टलेक विलेज में एक फिलिस्तीन समर्थक रैली आयोजित की गई थी। इस दौरान ही इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारी ने यहूदी बुजुर्ग के सिर पर मेगाफोन दे मारा। इससे बुजुर्ग की बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ अधिक खून बहने की वजह से उनकी मौत हो गई।

बुजुर्ग की पहचान पॉल केसलर के तौर पर की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (6 नवंबर, 2023) को पुलिस अधिकारियों ने इस हादसे की पुष्टि की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रैली के दौरान केसलर और एक युवा इजरायल विरोधी समर्थक के बीच तीखी बहस हुई थी।।

इसके बाद आरोपित ने हाथ में पकड़े मेगाफोन से 65 साल के यहूदी शख्स के सिर पर हमला कर दिया। इस वजह से वो जमीन पर गिर पड़े और उनके सिर से बहुत अधिक से खून बहने लगा। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।

कथित तौर पर उनकी मौत की वजह ‘ब्रेन हैमरेज’ बताई जा रही है। इस घटना से वेस्टलेक विलेज के नजदीक रहने वाला यहूदी समुदाय सदमे में है। वेंचुरा काउंटी शेरिफ कार्यालय (VSCO) ने एक बयान में कहा कि वो घटना की जाँच कर रहे हैं। उसने नफरत में किए गए अपराध (हेट क्राइम) की आशंका से इनकार नहीं किया है। वहीं आरोपित की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

एक बयान में, यहूदी फेडरेशन ऑफ ग्रेटर लॉस एंजिल्स ने कहा, “जबकि हम अपने कानूनी अधिकारियों से अधिक जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हम आपको याद दिलाते हैं कि अकेले इस साल लॉस एंजिल्स में हुआ यह यहूदियों के खिलाफ हुआ चौथा बड़ा अपराध है।”

यहूदी फेडरेशन ने आगे कहा, “सभ्य समाज में हमारे लोगों के खिलाफ हिंसा की कोई जगह नहीं है। हम सुरक्षा की माँग करते हैं। हम अपने समुदाय के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।”

गौरतलब है कि शनिवार (7 अक्टूबर, 2023) को हमास के इजरायल पर खौफनाक हमले के बाद के बाद से ही दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी हुई। हाल ही में इजरायल-हमास युद्ध के बीच, फ्रांस के औवेर्गने-रोन-आल्प्स इलाके के ल्योन शहर में एक यहूदी महिला को उसके घर में घुस कर चाकू मार दिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात हमलावर ने पीड़िता के पेट में दो बार चाकू मारा। हमलावरों ने अपार्टमेंट के दरवाजे पर नाज़ी प्रतीक (जिसे हेकेनक्रूज़ या हुक्ड क्रॉस भी कहा जाता है) भी बनाया। इसके बाद पीड़िता को स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया और हल्की चोटों के लिए उसका इलाज किया गया। बताया जा रहा है कि महिला की उम्र लगभग 30 साल के करीब होगी। उसने घंटी की आवाज सुनकर दरवाजा खोला तो उस पर हमला कर दिया गया।

पीड़िता के वकील स्टीफन ड्रेई ने BFMTV को बताया, “महिला, उसका परिवार और यहूदी समुदाय सदमे में है। जब हमने दरवाजा खोला, तो हमें नहीं पता था कि हम यहूदी-विरोधी हमले का शिकार हो सकते हैं, हत्या की कोशिश की जा सकती है।” इस घटना पर ल्योन के मेयर ग्रेगरी डौसेट ने ट्वीट किया, “हिंसा का ऐसा कृत्य कल्पना से परे है। मैं पीड़िता और उसके रिश्तेदारों को अपना पूरा समर्थन देता हूँ।”

‘हमेशा करता रहूँगा सनातन का विरोध, नहीं बदलूँगा बयान’: हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी कायम हैं मंत्री उदयनिधि स्टालिन के तेवर, बोले – यह सैकड़ों वर्ष पुराना मुद्दा

तमिलनाडु के मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार (6 नवंबर, 2023) को सनातन धर्म के खिलाफ अपने रवैये का बचाव करते हुए कहा कि वो सनातन का विरोध जारी रखेंगे, भले ही उन्हें इसके लिए कानूनी कार्रवाई का ही सामना क्यों न करना पड़ा। मद्रास हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई न होने पर पुलिस को फटकारा था, जिसके बाद उनका ये बयान आया है।

दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके के मंत्री उदयनिधि और पीके शेखर बाबू की सनातन धर्म को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई न करने पर पुलिस को आड़े हाथों लिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी भी शख्स को बँटवारे वाले विचारों को बढ़ावा देने या किसी विचारधारा को खत्म करने का अधिकार नहीं है।

गौरतलब है कि उदयनिधि स्टालिन पहले ‘सनातन धर्म’ की तुलना ‘डेंगू’ और ‘मलेरिया’ से कर चुके हैं। तमिलनाडु सरकार के युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए।

वो सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे। अब वो अपने इस बयान के पक्ष में मजबूती से खड़े दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये कहकर उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है और वो अपने इस बयान को लेकर कानूनी नतीजे भुगतने को तैयार हैं। मतलब साफ है कि उन्हें करोड़ों लोगों की भावनाओं की कोई परवाह नहीं और विरोध के बावजूद वो सनातन पर की गई अपनी बयानबाजी से बाज नहीं आने वाले हैं।

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। मैंने जो कहा वह सही था और मैं इसका कानूनी तौर पर सामना करूँगा। मैं अपना बयान नहीं बदलूँगा। मैंने अपनी विचारधारा की बात कही है। मैंने अंबेडकर, पेरियार या थिरुमावलवन ने जो कहा था उससे ज्यादा कुछ नहीं कहा है। मैं एक विधायक, एक मंत्री या युवा विंग का सचिव हो सकता हूँ और कल शायद नहीं भी, लेकिन एक इंसान होना अधिक महत्वपूर्ण है।”

डीएमके नेता ने आगे कहा, “हम कई सालों से सनातन के बारे में बोल रहे हैं जबकि NEET 6 साल पुराना मुद्दा है। यह (सनातन) कई सौ साल पुराना मुद्दा है, हम इसका हमेशा विरोध करेंगे।”

दुनिया के सबसे अमीर शख्स के बेटे का ‘हिंदी नाम’: जिस भारतीय के ऊपर रखा, वो नोबेल पुरस्कार विजेता, 33 की उम्र में बन गए थे प्रोफेसर

हाल ही में देश के आईटी और इलेक्ट्रॉनिकी मामलों के राज्यमंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने खुलासा किया था कि टेस्ला और SpeceX जैसी कंपनियों के मालिक अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने अपने बेटे का नाम नोबेल विजेता भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर के नाम पर रखा है।

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क के साथ मिलने के बाद यह जानकारी उन्होंने ‘X’ ( पूर्व मेंट्विटर) पर साझा की। उनकी एलन मस्क से यह मुलाक़ात इंग्लैंड में हुई जहाँ पर वह AI सेफ्टी समिट में हिस्सा ले रहे थे। असल में एलन मस्क ने अपने बेटे के नाम में प्रसिद्ध वैज्ञानिक का नाम उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए शामिल किया है।

इस बात की पुष्टि शिवोन जिल्स ने भी की है। शिवोन एलन के बच्चों की सरोगेट माँ शिवोन जिल्स ने मंत्री राजीव के ट्वीट के जवाब में लिखा, “यह बात सही है। हम उसे शेखर बुलाते हैं लेकिन यह नाम सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर की विरासत के सम्मान में चुना गया था।”

नोबेल विजेता भारतीय-अमेरिकी सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर का जन्म अविभाजित भारत के लाहौर में वर्ष 1910 में हुआ था। उनके पिता रेलवे में बड़े अधिकारी थे। सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर, एक अन्य नोबेल विजेता भारतीय वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकट रमन के भतीजे थे।

उनकी स्नातक तक की शिक्षा भारत में ही हुई थी। उन्होंने पहले प्रेसिडेंसी कॉलेज मद्रास और फिर इंग्लैंड में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से पढ़ाई की। इसके लिए उन्हें सरकार से छात्रवृत्ति मिली थी। वह इसके पश्चात लम्बे समय तक इंग्लैंड में अलग अलग शोध विषयों पर काम करते रहे। उनके शोध का मुख्य क्षेत्र खगोल विज्ञान था।

चन्द्रशेखर ने वर्ष 1936 में अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय में पढ़ाना चालू किया था। इसके पश्चात वह अपने पूरे कैरियर के दौरान यहीं प्रोफ़ेसर रहे। उनके पास अन्य कई विश्वविद्यालय से भी प्रोफ़ेसर बनने का मौका आया लेकिन वह नहीं गए। उन्हें शिकागो विश्वविद्यालय में मात्र 33 वर्ष की आयु में 1943 में प्रोफ़ेसर का दर्जा दे दिया गया था।

अमेरिका में ही काम करने के दौरान ही उन्होंने वर्ष 1953 में अपनी पत्नी सहित अमेरिकी नागरिकता ले ली थी। वह 1952 से लेकर 1971 तक खगोल विज्ञान के विषय में खबरें छापने वाली एक मैग्जीन के भी सम्पादक रहे।

वर्ष 1983 में उन्हें तारों के ढाँचे और उनके बदलाव पर शोध करने के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। नोबेल पाने के 12 वर्षों के भीतर वर्ष 1995 में उनकी मृत्यु हो गई थी। गौरतलब है कि उनके नाम पर अपने बेटे का नाम रखने वाले एलन मस्क भी अन्तरिक्ष में काफी रुचि रखते हैं। एलन की कम्पनी स्पेसएक्स लगातार इस क्षेत्र में नई खोजें कर रही है।

BJP की महाराष्ट्र पंचायत में बंपर जीत, सहयोगी शिवसेना और NCP के साथ 72% सीटों पर कब्जा: कॉन्ग्रेस ने कहा, पार्टी-सिंबल पर नहीं लड़ा चुनाव

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ग्राम पंचायत चुनावों में शानदार जीत हासिल की है। भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय के अनुसार 778 सीटें बीजेपी ने अकेले दम पर जीती हैं। वहीं राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को 301 जबकि अजीत पवार वाली राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 407 सीटें जीती हैं।

अभी मतगणना जारी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले ने हालांकि दावा किया है कि भाजपा 1000 से अधिक ग्राम पंचायतों में जीत चुकी है। उन्होंने मीडिया को बताया कि 1700 पंचायतों में भाजपा और उनके सहयोगी जीत रहे हैं।

महाराष्ट्र के पंचायत चुनावों में एनडीए गठबंधन ने 1486 सीटें जीतकर विपक्षी पार्टियों को लोकसभा चुनावों के नतीजों की एक तस्वीर पेश कर दी है। महाराष्ट्र में एनसीपी में हुई टूट और मराठा आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि पर हुए ग्रामपंचायत चुनाव में बीजेपी की गठबंधन ने कॉन्ग्रेस, शिवसेना (UBT) और अजीत पवार वाली एनसीपी के पेशानी पर बल ला दिए हैं।

जहाँ लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आए महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनाव के एकतरफा नतीजों ने सत्ताधारी दल (बीजेपी + शिंदे गुट वाली शिवसेना + अजीत पवार गुट वाली एनसीपी) का मनोबल बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी तरफ महाविकास आघाड़ी खेमे के हाथ निराशा लगी है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में रविवार (5 नवंबर,2023) को 2359 ग्राम पंचायतों के लिए कुल 74 फीसदी वोटिंग हुई। इसमें बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी की अजित पवार गुट गठबंधन यानी महायुति ने 1486 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की है। वहीं दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी (कॉन्ग्रेस, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और एनसीपी शरद पवार गुट) के खाते में महज 569 ग्राम पंचायतों को जीत आई है। इसके अलावा अन्य को 419 ग्राम पंचायतों की जीत पर संतोष करना पड़ा। कुछ ग्राम पंचायतों के नतीजे मंगलवार (7 नवंबर 2023) को घोषित किए जाने हैं।

इस जीत को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र में ग्राम पंचायत चुनावों में महायुति सरकार की शानदार सफलता कल्याण-उन्मुख सरकार में राज्य के लोगों द्वारा जताए गए विश्वास का एक ठोस प्रमाण है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए नंबर 1 का स्थान हासिल किया। उन्होंने आगे कहा:

“इस सफलता का पूरा श्रेय भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को जाता है। आगामी लोकसभा चुनाव में जनता महायुति का साथ देगी और 48 में से 45 से ज्यादा सांसद चुनकर आना तय है।”

महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनाव में कॉन्ग्रेस को 287, शिवसेना (उद्धव गुट) को 115 और एनसीपी (शरद पवार गुट) को 144 सीटों पर जीत मिली। ऐसी निराशाजनक नतीजों पर कॉन्ग्रेस ने कहा कि ग्राम पंचायत चुनाव पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते। आदर्श स्थिति में यह सच भी है लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि सभी पार्टियाँ चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट को अपना-अपना समर्थन देती हैं।

1 लाख भारतीयों को नौकरी देगा इजरायल, फिलिस्तीनियों को भगाया: यहूदी देश में ज्यादा पैसा कमाते थे लेकिन हमले के बाद विश्वास के लायक नहीं

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद अपने देश से 1 लाख फिलिस्तीनियों को काम से निकालने की योजना तैयार की है। इन फिलिस्तीनियों की जगह 1 लाख भारतीय कामगारों को इजरायल नौकरियाँ देगा।

एक्स (पहले ट्विटर) पर पत्रकार आदित्य राज कौल ने बताया है कि इजरायल ने भारत से जल्द से जल्द से 1 लाख कामगार उपलब्ध करवाने के लिए कहा है। यह कामगार फिलिस्तीनियों की जगह लेंगे क्योंकि 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद उनके काम करने पर रोक लगा दी गई है। अब फिलिस्तिनियों को इजरायल रोजगार परमिट नहीं दे रहा है।

भारत और इजरायल के बीच पहले ही 42,000 भारतीयों को इजरायल में काम करने के लिए सहमति बन चुकी है। इसके लिए दोनों देशों के बीच मई 2023 में समझौता हुआ था। यदि अब 1 लाख कामगार भारत से और जाते हैं तो यह संख्या तीन गुने से अधिक हो आएगी।

गौरतलब है कि इजरायल में इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को हमला करके 1,400 लोगों की हत्या कर दी थी। इजरायल ने इसके जवाब में गाजा और फिलिस्तीन के लोगों पर काम करने से लेकर आने-जाने और अन्य कई प्रतिबन्ध लगा दिए।

इजरायल में काम करने वाले फिलिस्तीनी कामगार, फिलिस्तीन या गाजा में काम करने वाले कामगारों से कहीं अधिक कमाते हैं। हालाँकि, हमले के बाद अब इनके प्रति अविश्वास पैदा हो गया है, इसलिए इनको हटा कर इनकी भरपाई भारत से लाए गए कामगारों से करने की योजना तैयार की जा रही है।

जिन फिलिस्तीनियों को हटाया जा रहा है, उनमें से अधिकाँश कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करते थे। इनके हटने से इजरायल में कामगारों की एकाएक कमी हो गई है। कामगारों की कमी से इस क्षेत्र में रुकावट ना पैदा हो, इसके लिए इजरायली बिल्डर्स असोसिएशन ने सरकार से 50,000-1,00,000 तक भारतीय कामगारों को मंजूरी देने की अपील की है।

इस असोसिएशन के उपाध्यक्ष हाइम फेग्लिन ने कहा, “हम वर्तमान में भारत से बातचीत कर रहे हैं और इजरायली सरकार के इस पहल को मंजूरी देने का इन्तजार कर रहे हैं। हम भारत से 50,000 से 1,00,000 कामगार अलग-अलग सेक्टर में लाने की योजना बना रहे हैं।”

इजरायल में अभी लगभग 18,000 भारतीय कामगार मौजूद हैं। इनमें से अधिकाँश भारतीय सेविकाओं के रूप में मौजूद हैं, जो बूढ़े या बच्चों की देखरेख का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में भारतीय इजरायल के आईटी जैसे क्षेत्रों में भी काम करते हैं। हमास के हमले में इसी तरह काम करने वाली एक भारतीय महिला घायल भी हुई थी।

गौरतलब है कि बड़ी संख्या में भारतीय पहले ही इजरायल के आसपास के खाड़ी देशों में कंस्ट्रक्शन और अन्य क्षेत्रों में काम करते आए हैं। यहाँ की कठिन परिस्थितियों में भी काम करने के लिए भारतीय कामगारों की प्रशंसा की जाती है। सऊदी अरब, क़तर, UAE जैसे देशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 1 करोड़ है।