Home Blog Page 1414

‘जडेजा का लेग स्टंप पर गिरा बॉल स्पिन होकर मिडल स्टंप पर कैसे जा सकता… DRS तकनीक पर BCCI का कब्जा’: ‘यंगेस्ट’ Pak क्रिकेटर हसन रजा

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर हसन रजा ने एक बाद फिर से आईसीसी और बीसीसीआई पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए डीआरएस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कोलकाता में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए मुकाबले में डीआरएस पर सवाल उठाए। उन्होंने जडेजा की घूमती गेंदों पर शक जताया और कहा कि लेफ्ट ऑफ स्पिनर की जिस गेंद पर वॉन डेर डुसैन को डीआरएस पर आउट दिया गया, वो बॉल राइट हैंड बैटर के लिए लेग स्टंप से बाहर निकलती, न कि घूम कर लेग स्टंप पर। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई डीआरएस सिस्टम को अपने हिसाब से चला रहा है, क्योंकि ग्राउंड बीसीसीआई का, ब्रॉडकास्टर बीसीसीआई के और सिस्टम भी बीसीसीआई का है।

हसन रजा ने एबीएन न्यूज पर ये बातें कहीं। हालाँकि इस बार उन्होंने गेंदों पर सवाल नहीं उठाए, लेकिन ये जरूर कहा कि गेंदों के वजन में थोड़ा सा भी अंतर आता है, तो वो ज्यादा घूमती हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि रविंद्र जडेजा की जिस गेंद पर वॉन डेर डुसैन को आउट दिया गया, वो लेग स्टंप से बाहर जाती।

सवाल करते हुए उन्होंने पूछा कि जडेजा की गेंद कैसे उल्टी दिशा में जा सकती है? हसन रजा ने दावा किया कि उन्होंने बहुत क्रिकेट खेला है और ऐसा नहीं होता, जैसा डीआरएस ने दिखाया। उनके अनुसार खुद डुसैन भी आउट दिए जाने से काफी हैरान थे।

हसन रजा ने कई साल पहले के मैच का जिक्र भी किया और कहा कि सईद अजमल की जिस गेंद पर सचिन तेंदुलकर को नॉट आउट दे दिया गया था, वो गेंद एकदम सीधी जा रही थी। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि बीसीसीआई ब्रॉडकास्टिंग और पूरे सिस्टम को कंट्रोल करता है। उनके अनुसार ऐसा ही कुछ रविंद्र जडेजा की गेंद पर हुआ। हसन रजा की पूरी बातचीत को आप 1.40 मिनट से 5.10 तक सुन सकते हैं।

क्वॉलिटी बोलिंग के सवाल पर एंकर को जवाब देते हुए हसन रजा ने बताया कि पाकिस्तान के गेंदबाज दुनिया के

क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 में भारत ने कोलकाता में खेले गए मैच में दक्षिण अफ्रीकी टीम को 243 रनों से हरा दिया। इस मैच में विराट कोहली ने अपने जन्मदिन के मौके को शतक लगाकर खास बनाया। भारत ने 5 विकेट के नुकसान पर निर्धारित 50 ओवरों में 326 रनों का स्कोर खड़ा किया था, इसके जवाब में पूरी दक्षिण अफ्रीकी टीम महज 83 रनों पर ऑल आउट हो गई। इस मैच में विराट कोहली ने रिकॉर्ड 49वाँ शतक लगाया, वहीं रविंद्र जडेजा ने 5 विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीकी टीम की कमर तोड़ दी।

पहले गेंदों को लेकर उठा चुके हैं सवाल

बता दें कि हसन रजा ने भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए मैच के बाद आरोप लगाया था कि बीसीसीआई भारतीय गेंदबाजों को अलग-तरह का बॉल देती है, जिसकी वजह से विपक्षी बल्लेबाज उन पर रन नहीं बना पा रहे। उनके इस दावे की जम कर आलोचना हुई थी। उन्हें पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में मौका देने वाले उनके ही पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने जमकर लताड़ लगाई थी और कहा था कि कम से कम वो पूरे पाकिस्तान की बेईज्जती न कराएँ। वसीम अकरम ने मैच के दौरान इस्तेमाल होने वाली गेंदों को चुने जाने की प्रक्रिया भी बताई थी।

हसन रजा ने कहा था कि मोहम्मद शामी, मोहम्मद सिराज या जसप्रीत बुमराह अगर सीम या स्विंग करा पा रहे हैं तो इसकी वजह है उनको दी जाने वाली अलग तरह की गेंद। इनके अनुसार इस अलग तरह की गेंद पर कुछ एक्स्ट्रा लेयर या एक्स्ट्रा कोटिंग की गई है। 4 मिनट के अपने जवाब में हसन रजा ने कहा कि मोहम्मद शामी, मोहम्मद सिराज या जसप्रीत बुमराह जिस तरह से बॉल फेंक रहे हैं, वो एलन डोनल्ड की याद दिला रहा और इसके पीछे वजह यह है कि इनको अलग तरह की गेंद दी जा रही है। हसन के मुताबिक इसके पीछे अंपायर या ICC या BCCI किसी का भी हाथ हो सकता है।

आपको बता दें कि हसन रजा ने 14 साल 227 दिन की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करके रिकॉर्ड बनाया था। बाद में पाकिस्तान क्रिकेट ने इनके जन्मदिन की सही जानकारी के अभाव में इस रिकॉर्ड को खुद ही हटा लिया था। यह वही हसन रजा है, जिस पर क्रिकेट में फिक्सिंग का भी आरोप लगा है।

छत्तीसगढ़ में BJP के 10 नेताओं की हत्या, सिर्फ नक्सली ही नहीं, कॉन्ग्रेसियों पर भी आरोप… CM बघेल ने इसलिए कहा छिटपुट घटना?

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार आने के बाद से अब तक भाजपा के 10 नेताओं की हत्या नक्सलियों और कॉन्ग्रेसियों द्वारा की जा चुकी है। 2019 में भाजपा विधायक भीमा मंडावी से लेकर 4 नवम्बर को हुई भाजपा नेता रतन दुबे की हत्या तक यह सिलसिला चलता ही चला आ रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन घटनाओं को छिटपुट मान रहे हैं।

गौरतलब है कि 4 नवम्बर 2023 को नारायणपुर जिले में मतदान से मात्र तीन दिन पहले भाजपा उपजिलाध्यक्ष रतन दुबे की हत्या कर दी गई है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे छिटपुट घटना करार दिया था।

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ में पहली बार भाजपा के किसी नेता की हत्या हुई हो। भूपेश बघेल के सत्ता में आने के बाद गाँव के सरपंच से लेकर विधायक, जिला पदाधिकारी और जनता में अपना प्रभाव रखने वाले 10 नेताओं की हत्या हो चुकी है। कभी हत्या के आरोपित नक्सली रहे हैं तो कभी कॉन्ग्रेस के नेता।

रतन दुबे की हत्या से मात्र 15 दिन पहले ही मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले में भाजपा नेता बिरजू तारम की हत्या की गई थी। तारम इस इलाके में ईसाई मिशनरियों और धर्मांतरण के विरुद्ध काम कर रहे थे। उन्होंने यहाँ पर आसामजिक तत्वों द्वारा माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़े जाने पर भी विरोध किया था।

बिरजू तारम की 20 अक्टूबर को नक्सलियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। उनकी मौत के कुछ दिनों बाद उनके गाँव में नक्सलियों ने इस हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए पर्चे भी फेंके थे। नक्सलियों ने यह धमकी दी थी कि वह आरएसएस भाजपा से जुड़े लोगों को ऐसे ही मारते रहेंगे।

बिरजू की हत्या से 5 दिन पहले भाजपा नेता चंद्रशेखर गिरी गोस्वामी की भी छत्तीसगढ़ के धमतरी में हत्या कर दी गई थी। वह पूर्व विधायक सोमप्रकाश गिरी गोस्वामी के बेटे थे। उनकी हत्या में खुलासा हुआ था इसके लिए उनके भाइयों ने ही 1 लाख रुपए की सुपारी दी थी। उनकी पत्नी ने आरोप भी लगाया था कि हत्या करवाने वाले उनके दोनों देवर कॉन्ग्रेस नेता हैं इसलिए कार्रवाई में देर हो रही है।

अगस्त 2023 में बीजापुर जिले के तर्रेम थाना क्षेत्र में पूर्व सरपंच रामा पूनेम की भी अगवा किए जाने बाद हत्या कर दी गई थी। बताया गया है कि वह भाजपा से जुड़े हुए थे इसलिए उन पर मुखबिरी का आरोप लगाकर नक्सलियों ने उन्हें मार दिया।

इसके अलावा जून 2023 में बीजापुर जिले में भाजपा के एसटी मोर्चा के जिला मंत्री काका अर्जुन की हत्या कर दी थी। पहले नक्सलियों ने उन्हें अगवा किया और फिर उनके गाँव के बाहर उनका शव फेंक कर चले गए। उनके शव पर रखे गए पर्चे में भी नक्सलियों ने भाजपा के लिए काम ना करने की धमकी दी थी।

वर्ष 2023 छत्तीसगढ़ में क़ानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से कॉन्ग्रेस सरकार के लिए विफलता का स्मारक रहा। खबर में जिक्र की गई घटनाओं से जान सकते हैं कि 2023 में ही आधा दर्जन से अधिक भाजपा नेताओं की हत्या की गई।

फरवरी माह में बीजापुर जिले में ही भाजपा मंडल अध्यक्ष नीलकंठ काकेम की कुल्हाड़ियों से काट कर हत्या कर दी थी। उनकी हत्या एक शादी समारोह के दौरान सादे कपड़ों में आए नक्सलियों ने की थी।

नीलकंठ के बाद नारायणपुर जिले में भाजपा नेता सागर साहू की हत्या नक्सलियों ने उनके घर में घुसके कर दी थी। सागर की जब हत्या हुई तब वह अपने घर में बैठ कर टीवी देख रहे थे। सागर ढाई दशकों से भाजपा से जुड़े हुए थे।

सागर की हत्या के एक सप्ताह के भीतर ही एक अन्य भाजपा नेता और पूर्व सरपंच रामाधीर अलामी की हत्या नक्सलियों ने कर दी थी। यह दस दिनों के भीतर छत्तीसगढ़ में तीसरे भाजपा नेता की हत्या थी।

भाजपा ने इस दौरान भूपेश बघेल पर ऐसी हत्याओं पर कार्रवाई ना करने का आरोप लगाया था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव ने कहा था कि ऐसा क्यों है कि हमारे ही नेता मारे जा रहे हैं?

भाजपा ने इसे कॉन्ग्रेस का क्षद्म युद्ध बताया था। जनवरी 2023 में भाजपा नेता बुधाराम कर्तम की हत्या का शक नक्सलियों पर जताया गया था। हालाँकि पुलिस ने बताया था कि उनकी मौत एक गाड़ी से कुचलने के कारण हुई है।

भाजपा नेताओं की हत्या का सिलसिला भूपेश बघेल के सत्ता में आने के कुछ महीनों के बाद ही चालू हो गया था। दिसम्बर 2018 में भूपेश बघेल के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर अप्रैल 2019 में दंतेवाड़ा के भाजपा विधायक भीमा मंडावी और उनके दो अंगरक्षकों की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।

भाजपा नेताओं की हत्याओं के इस सिलसिले पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का इसे छोटी मोटी घटना कहना दिखाता है कि वह कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं और ना ही वह राज्य नक्सलियों को खत्म करने में रूचि रखते हैं।

बिकनी वाली मॉडल को बना दिया रश्मिका मंदाना, वीडियो देख अमिताभ बच्चन भी भड़के: केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नए IT नियमों की दिलाई याद

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक स्विमसूट पहनी हुई एक लड़की लिफ्ट के भीतर घुसती है। जो भी इस वीडियो को देखेगा उसे ऐसा ही लगेगा कि ये अभिनेत्री रश्मिका मंदाना हैं। तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा’ में अल्लू अर्जुन के साथ दिखने के बाद रश्मिका मंदाना जाना-पहचाना नाम बन गई हैं और हिंदी फिल्मों में आपने उन्हें ‘मिशन मजनू’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ देखा होगा। रश्मिका मंदाना ने कन्नड़ फिल्म ‘किरिक पार्टी’ से फिल्मों में शुरुआत की थी, वहीं ‘वरिसु’ नाम तमिल फिल्म में उन्हें विजय के साथ देखा गया था।

ऐसे में लोगों को लगा कि इस वीडियो में रश्मिका मंदाना ही हैं। लेकिन, सचाई कुछ और है। असल में इस वीडियो में जो लड़की दिख रही है उसका नाम ज़ारा पटेल है। Deepfake नामक AI (आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस) तकनीक का इस्तेमाल कर के इसे हूबहू रश्मिका मंदाना की तरह बना दिया गया है। ज़ारा पटेल एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर हैं, जो अक्सर अंतरंग वस्त्रों में तस्वीरें और वीडियो अपलोड करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 4.32 लाख फॉलोवर्स हैं। वो डेटा इंजीनियर भी हैं।

वहाँ उन्हें बिकनी में कई तस्वीरें अपलोड कर रखी हैं। लेकिन, किसी ने उनके एक वीडियो का गलत इस्तेमाल किया और इसमें उनकी जगह रश्मिका मंदाना को दिखा दिया। अमिताभ बच्चन तक ने इस वीडियो का संज्ञान लिया और कहा कि इस पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे सभी डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा एवं भरोसे को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “अप्रैल 2023 में जिन IT नियमों की अधिसूचना जारी की गई थी, उसके तहत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इसके लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं कि किसी भी यूजर द्वारा कोई गलत सूचना न शेयर की जाए। साथ ही यूजर या सरकार द्वारा सूचित किए जाने के 36 घंटों के भीतर उन्हें भ्रामक सूचनाओं को हटाना है। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो नियम-7 के तहत उन्हें कोर्ट में घसीटा जा सकता है। Deepfake गलत सूचनाओं का ताज़ा और खतरनाक चलन है, जिससे निपटना पड़ेगा।”

बता दें कि डीपफेक एक AI तकनीक है जिसका इस्तेमाल कर के डिजिटल रूप से किसी भी व्यक्ति के चेहरे या फिर शरीर के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। यानी, होगा कोई और लेकिन तस्वीर या वीडियो में वो दिखेगा कोई और। गलत सूचनाओं को प्रसारित करने के लिए इनका इस्तेमाल होता रहा है। इसमें AI के साथ-साथ मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाता है। ये फोटोशॉपिंग से भी ऊपर की चीज है और कई बड़े देश के नेता इसका शिकार बने हैं।

9 साल की दलित बच्ची से दुष्कर्म करके फरार हुआ कबाड़ी पीर मोहम्मद, लड़की लहूलुहान खेत में मिली: केस दर्ज, योगी सरकार उठाएगी इलाज का खर्च

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में 9 साल की एक नाबालिग दलित बच्ची के साथ रेप किए जाने की खबर है। 55 साल के आरोपित का नाम पीर मोहम्मद है। दुष्कर्म के बाद बच्ची की हालात बिगड़ गई है जिसको इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया है। बलात्कार करने के बाद पीर मोहमद फरार हो गया है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। घटना रविवार (5 नवंबर 2023) की है। ऑपइंडिया से बातचीत में बच्ची के परिजनों ने पीड़िता की हालत खतरे से बाहर बताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला रायबरेली के थानाक्षेत्र खीरों का है। यहाँ के एक गाँव की रहने वाली दलित महिला ने रविवार को पुलिस में अपनी 9 साल की बच्ची से रेप की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी बेटी घर के बाहर खेल रही थी। इस दौरान रात 8:30 पर उधर से 55 साल का पीर मोहम्मद उधर से गुजरा। लड़की को अकेला देख कर पीर मोहम्मद बदनीयती से उसे बहला-फुसला कर खेतों की तरफ ले गया। यहाँ उसने पीड़िता से बलात्कार किया।

पीड़िता के रोने और चीखने-चिल्लाने का आरोपित पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में पीर मोहम्मद लड़की को लहूलुहान हालात में खेतों में छोड़ कर फरार हो गया। इधर काफी देर से गायब लड़की को खोजते उसके परिजन खेतों की तरफ गए तो उन्हें वहाँ बच्ची रोती हुई मिली। पीड़िता का स्थानीय अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। बाद में हालत खराब होने पर बच्ची को लखनऊ रिफर कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपित पीर मोहम्मद पर IPC की धारा 376 (3) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/5 व SC/ST एक्ट में केस दर्ज किया है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। अपने खिलाफ पुलिस में हुई शिकायत के बाद पीर मोहम्मद फरार हो गया। जिले के तमाम सीनियर अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। रायबरेली के एडिशनल एसपी के मुताबिक आरोपित की तलाश में पुलिस की 4 टीमों को लगाया गया है। आरोपित को जल्द गिरफ्तार करने के आश्वासन के साथ उन्होंने बताया कि मौके पर लॉ एंड ऑर्डर की कोई समस्या नहीं है।

बाल-बच्चेदार है कबाड़ी पीर मोहम्मद

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता के साथ अस्पताल में मौजूद बच्ची के चाचा से बात की। उन्होंने बताया कि बच्ची की हालत फ़िलहाल खतरे से बाहर है और खून बहना बंद हो चुका है। इलाज का खर्च भी उन्होंने सरकार द्वारा दिया जाना बताया। खुद को रायबरेली पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट बताते हुए बच्ची के चाचा ने कहा कि आरोपित पीर मोहम्मद बाल-बच्चेदार है। वह कबाड़ी का काम करता है। हमें यह भी बताया गया कि उनके गाँव में मुस्लिमों की तादाद दलितों से अधिक है। बच्ची के चाचा के अनुसार अभी तक भीम आर्मी जैसे संगठन से उनसे कोई मिलने नहीं आया है।

PAK को कश्मीर पर मिला आतंकी संगठन ‘हमास’ का साथ… दोनों को सताई मानवाधिकार की चिंता: बोले- मुस्लिम उम्माह इकट्ठा हों

इजरायल और हमास के बीच जारी जंग के दौरान पाकिस्तान का हमास प्रेम देखने को मिला है। दरअसल, पाकिस्तान के नेताओं ने रविवार (5 नवंबर, 2023) को फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास के प्रमुख  से मुलाकात की है, जिसमें फिलिस्तीन की तुलना कश्मीर से की गई है। पाकिस्तान की मजहबी पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कतर में हमास के प्रमुख इस्माइल हानिया और पूर्व प्रमुख खालिद मशाल से मुलाकात की है, जिसमें कश्मीर राग अलापा गया है।

आतंकी संगठन हमास के प्रमुख ने कहा, फिलिस्तीन और कश्मीर में अन्याय उन देशों के चेहरे पर एक तमाचा है, जो मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए दूसरों की निंदा करते हैं। इतना ही नहीं गाजा को जंग में झोंकने वाला हमास अब पाकिस्तान की शह पर कश्मीर-कश्मीर चिल्ला रहा है। यह वही हमास है, जिसने एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की चाह में गाजा को दाव पर लगा दिया है। पर आतंकी हमला किया और अब जवाबी कार्रवाई में गाजा के लोगों के पास न तो खाना है और ना ही पानी।

मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि अधिकांश अस्पतालों में भी हमास के लोग छिपे हुए हैं। साथ ही घायलों की संख्या इतनी ज़्यादा बढ़ गई है कि अब गाजा के किसी भी अस्पताल में कोई भी बेड खाली नहीं बचा है।

आतंकी हमास को पाकिस्तान का खुला समर्थन 

हमास के आतंकी हमले का पाकिस्तान खुला समर्थन कर रहा है। अब इसी समर्थन को और ज्यादा मजबूत करने के लिए मौलाना फजलुर रहमान ने रविवार को कतर में हमास के सर्वोच्च नेता इस्माइल हानिया और पूर्व प्रमुख खालिद मशाल से मुलाकात की। फजलुर रहमान जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) का प्रमुख है। अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक JUI-F चीफ शनिवार (4 नवंबर, 2023) को ही कतर पहुँच गए थे।

हमास के आतंकी हमले को पाकिस्तान खुलकर सपोर्ट कर रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तान में फिलिस्तीन और हमास के समर्थन में लगातार रैलियाँ निकाली जा रही हैं। ऐसे में कहा जा रहा कि पाकिस्तान के मजहबी नेता मौलाना फजलुर रहमान अरब देशों के नेताओं के साथ मिलकर गाजा पर माहौल बनाने की कोशिश में है।

हमास को भी सता रही मानवाधिकार की चिंता

हमास के आतंकी खालिद मशाल ने कश्मीर राग अलापते हुए कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से की है। रिपोर्ट के अनुसार, मशाल ने कहा कि कश्मीर और फिलिस्तीन में जारी अत्याचार मानवाधिकारों पर एक तमाचा है।”

अब इजरायल में बेगुनाहों का खून बहाने वाले हमास को भी मानवाधिकार की चिंता सता रही है। जबकि आतंकी संगठन हमास यह भूल गया कि कश्मीर के हालात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से भी अच्छे हैं, जहाँ कंगाली के साथ रोज-रोज आतंकी हमलों का खौफ बना हुआ है। वहीं कश्मीर में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। शांतिपूर्ण तरीके से त्यौहार मनाए जा रहे हैं।

पाकिस्तानी मौलाना फजलुर से क्या बोला हमास चीफ

जेयूआई-एफ के प्रवक्ता असलम गौरी ने मौलाना फजलुर रहमान और इस्माइल हानिया के बीच बैठक के बारे में बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने फिलिस्तीन मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान, हानिया ने मुस्लिमों से इजरायली हमले के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया – जिसमें 7 अक्टूबर से लगभग अब करीब 10 हजार फिलिस्तीनियों की मौत का दावा किया गया है। हानिया ने कहा, “यह मुस्लिम उम्माह की जिम्मेदारी है कि वह इजरायली अत्याचारों के खिलाफ एकजुट हो।”

खबर है कि हमास के आतंकी और पाकिस्तान के मजहबी नेताओं के बीच ऐसे समय में मुलाकात हुई जब इजरायली फाइटर जेट लगातार गाजा पट्टी पर हमला कर रहे हैं, जिसमें 7 अक्टूबर से अब तक 4,800 बच्चों सहित 9,770 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

गौरतलब है कि गाजा की यह हालत 7 अक्टूबर को हमास के इजरायल पर किए गए आत्मघाती हमलों के बाद हुई है। हमास ने अपने लड़ाकों के लिए गाजा की सुरंगों में पूरी व्यवस्था बना रखी है लेकिन उसने आम लोगों को उनके हालात पर मरने के लिए छोड़ दिया है। हमास ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि वह गाजा के लोगों के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं। हालात यह है कि लोग दाने-दाने को मोहताज है। यहाँ तक कि बिजली पानी भी नहीं है। 

अरविंद केजरीवाल जी, आपका बायो-केमिकल डीकंपोजर कहाँ गया? पराली से कोयला बनाने वाली तकनीक कहाँ है? 2020 को बताया था प्रदूषण का आखिरी साल, पर अब भी हाल बेहाल

आज जब पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ बदस्तूर जारी हैं और दिल्ली प्रदूषण के खतरनाक स्तर से जूझ रहा है, AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के तमाम दावे और वादे भी धरे के धरे दिख रहे हैं। इसे समझने के लिए हमें चलना होगा 3 साल पहले, लेकिन फ़िलहाल जानते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति क्या है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ इस साल 17,000 के पार हो गई हैं और रविवार (5 नवंबर, 2023) को ऐसी 3230 घटनाएँ हुई हैं।

ये एक दिन में इस बार सबसे ज़्यादा संख्या है। साफ़ अर्थ है कि ये घटनाएँ जारी रहेंगी और इस पर लगाम नहीं लगने वाला। सोचिए, 4 नवंबर को पराली जलाने की 1360 गतिविधियाँ सामने आई थीं और अगले ही दिन संख्या लगभग ढाई गुना बढ़ गई। वहीं 2022 की बात करें तो उस साल इसी दिन, यानी 5 नवंबर को ही पंजाब में पराली जलाने की 2817 घटनाएँ सामने आई थीं। ताज़ा घटनाओं की बात करें तो संगरूर, जो कि मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला भी है, वो 551 के साथ टॉप पर रहा।

अब चलते हैं 2 साल पहले, सितंबर 2021 में। तब AAP ने यूट्यूब पर एक वीडियो डाला था, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहते दिख रहे हैं कि जब किसान अक्टूबर महीने में धान की फसल काटता है तो उसके बाद उसके तने नीचे रह जाते हैं, जिन्हें पराली कहते हैं। उन्होंने कहा था कि दोष सरकारों का है, किसानों का नहीं है, जो किसान अपने खेतों को जलाएगा उस पर जुर्माना लगाए की बजाए सरकारों को समाधान देना चाहिए।

इसके बाद अरविंद केजरीवाल इस वीडियो में कहते हैं कि पिछले साल दिल्ली सरकार ने समाधान निकाला, पूसा इंस्टिट्यूट ने एक बायो डीकंपोजर बनाया, उसे हमने दिल्ली में टेस्ट किया और 39 गाँवों में 1935 एकड़ में इसका छिड़काव किया गया और सामने आया कि इससे धान के डंठल गल जाते हैं, उन्हें काटना नहीं पड़ता है, जलाना नहीं पड़ता। केजरीवाल ने शानदार नतीजे का दावा करते हुए कहा था कि खुद केंद्र सरकार की एजेंसी ने इसकी तारीफ़ की है और 90% ने कहा कि 15-20 दिनों में उनकी पराली जल गई और अगले फसल के लिए खेत तैयार हो गई।

बकौल अरविंद केजरीवाल, इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी बढ़ गई। जब केजरीवाल बोल रहे होते हैं, इस वीडियो में चलाया गया कि कैसे ये कथित बायो डीकंपोजर काम कर रहा है। केजरीवाल ने तभी प्रदूषण की मुक्ति की बात करते हुए कहा था कि जब दिली में ये हो सकता है तो अन्य राज्यों में भी हो सकता है। ये अलग बात है कि पंजाब में भी उन्हीं की सरकार है लेकिन तब भी पराली जलाने के आँकड़े खतरनाक तरीके से बढ़ते ही चले जा रहे हैं।

इतना ही नहीं, यही सब ड्रामा आज से 3 साल पहले, यानी नवंबर 2020 में भी हुआ था। तब भी अरविंद केजरीवाल ने पराली जलाने का सस्ता और आसान समाधान देने की बात करते हुए कहा था कि अभी तक की सरकारें पराली जलाने को लेकर सिर्फ बहाना मार रही थीं। तब उन्होंने प्रदूषण के लिए पंजाब में पराली जलाने को जिम्मेदार बताया था, लेकिन अब उनकी पार्टी के लोग यूपी-हरियाणा को इसका जिम्मेदार बताते हुए कह रहे कि पंजाब की घटनाओं का यहाँ कोई असर ही नहीं हो रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने तो यहाँ तक कह दिया था कि ये आखिरी साल है जब दिल्ली प्रदूषण को झेल रहा है। इसके बाद 2021 बीत गया, 2022 बीत गया और अब 2023 भी बीत रहा है, लेकिन प्रदूषण घटने की बजाए बढ़ता ही चला जा रहा है, AQI 999 के स्तर पर पहुँच गया है और इससे ज़्यादा तो मापा भी नहीं जा सकता। केजरीवाल का वो ‘आखिरी साल‘ आखिर खत्म नहीं हुआ अभी तक? या फिर वो स्वर्ग के कोई देवता हैं, जिनके लिए दिन और रात पृथ्वी पर दिन-रात की अवधि के हजारों गुना अधिक होते हैं?

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 3 साल पहले दावा किया था कि सिर्फ 20 लाख रुपए में पूरी दिल्ली की पराली को गलाया जा सकता है। इसमें तो वो बजट का भी बहाना नहीं दे सकते हैं। उस समय भी गोपाल राय ही पर्यावरण मंत्री थे, जो अब हैं। डीकंपोजर के छिड़काव के समय बड़े-बड़े दावों में वो भी शामिल थे। कहाँ है आज वो डीकंपोजर? दिल्ली की पूरी पराली 20 लाख रुपए में खाद क्यों नहीं बन रही? ये फॉर्मूला उनकी पार्टी पंजाब में क्यों नहीं अपना रही?

अरविंद केजरीवाल ने अलग-अलग कार्यक्रमों में इस ‘बायोकेमिकल सलूशन’ की बात करते हुए बताया था कि ये बहुत सस्ता है और दिल्ली की तरह पंजाब में भी ये किया जा सकता है, वो लोग क्यों नहीं कर रहे? आज अरविंद केजरीवाल खुद से पूछें कि वो पंजाब में उनकी ही सरकार ये क्यों नहीं कर रही? एक रैली में उन्होंने इसी तरह दावा किया था कि पंजाब में कई फैक्ट्रियाँ लगाई जा सकती हैं जो पराली से कोयला बनाएँगे और इससे किसानों को 1000 रुपए प्रति एकड़ पैसे मिलेंगे सो अलग।

उन्होंने यहाँ तक दावा किया था कि पराली काट कर ले जाने के लिए भी कंपनियाँ आएँगी, इसमें किसानों का पैसा या मेहनत नहीं लगेगी। इसी तरह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पंजाब की तत्कालीन सरकार पर हमला बोला था। तब वहाँ कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे और कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। तब केजरीवाल ने एक टाइमलाइन माँगते हुए कहा था कि दिल्ली की जनता सरकारों से स्पेसिफिक टाइमलाइन चाहती है कि आप कब पराली जलाना शुरू करेंगे और किसानों को मशीनें उपलब्ध कराएँगे।

इसी तरह एक और रैली में उन्होंने हरियाणा सरकार पर हमला बोला था। मीडिया से बात करते हुए भी उन्होंने पराली से कोयला बनाने की बात कही थी और कहा था कि कई फैक्ट्रियाँ किसानों की पराली खरीदने के लिए तैयार हैं। केजरीवाल का वो बायोकेमिकल सलूशन कहाँ है? कम बजट वाला आसान समाधान कहाँ है? है तो सिर्फ प्रदूषण और पराली से उठता धुआँ। कल वो टाइमलाइन माँगते थे, आज उनके पास इस समस्या के लिए टाइम ही नहीं है।

प्रदूषण का जिम्मेदार हरियाणा…पंजाब तो 500Km दूर: सरकार बनने पर जिस प्रदेश को बचा रही AAP, उस पर पहले केजरीवाल ही उठाते थे सवाल

दिल्ली में बिगड़ती हवा का ठीकरा आम आदमी पार्टी किसी भी तरीके से सिर्फ हरियाणा पर फोड़ना चाहती है। उनको बस ये दिखाना है कि किस तरीके से पंजाब में जलने वाली पराली का दिल्ली में बढ़ रहे AQI से कोई लेना देना नहीं है। इसके लिए उन्होंने पहले कहा कि हरियाणा सरकार पराली जलाने पर कंट्रोल नहीं कर रही है और जब ये बात सामने आई कि पंजाब में ये वाकये ज्यादा है तो तर्क दिया कि पंजाब तो दिल्ली से 500 किलोमीटर दूर है और हरियाणा सिर्फ 100 किलोमीटर।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार नहीं थी तब इन्हें अक्सर हरियाणा के साथ पंजाब को भी दोष देते देखा जाता था। मगर अब जब से आप सरकार वहाँ आई है तब से पार्टी का काम वहाँ जलती परालियों को डिफेंड करने का है और दिल्ली से उसकी दूरी दिखाकर ये समझाने का है कि वहाँ का धुआँ दिल्ली में इतना नहीं आ सकता।

जब केजरीवाल करते थे पंजाब पर सवाल

आम आदमी पार्टी की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कर ने इस संबंध में आज मीडिया से बात की। यहाँ आँकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने पहले तो दिल्ली की स्थिति को पहले के मुकाबले बेहतर दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा- आँकड़े बताते हैं कि दिल्ली में इस बार 31% प्रदूषण कम हुआ है। केंद्र सरकार को भी ये स्वीकारना पड़ा कि दिल्ली में पिछले 8 सालों में इस बार सबसे बेहतर हवा थी।

फिर, उन्होंने CAQM आँकड़ों का हवाला देकर कहा, पंजाब में इस बार अभी तक पिछले साल के मुकाबले 50-67 प्रतिशत पराली कम जली है। जो पराली पंजाब में अभी जल रही है वो यहाँ (दिल्ली) से 500 किलोमीटर दूर है और जो पराली हरियाणा में जल रही है वो यहाँ से करीब 100 किलोमीटर दूर है।

उन्होंने सारा ठीकरा हरियाणा पर फोड़ते हुए कहा कि दिल्ली का सबसे करीब राज्य हरियाणा है तो जरूरी है कि समक्षा की जानी चाहिए कि 2014 से खट्टर सरकार ने प्रदूषण को लेकर क्या कदम उठाए हैं। आगे उन्होंने मीडिया को बताया कि अभी हरियाणा सरकार 100 ईवी बसें लेने पर विचार कर रही है। अभी उन्होंने ये बसें ली नहीं है। वहाँ जो बसें चल रही हैं वो प्रतिबंधित फ्यूल से चल रही हैं।

प्रियंका कक्कर का कहना है कि यही बसें दिल्ली में एंटर कर रही हैं और गोपाल राय ये डिमांड कर रहे हैं कि इमरजेंसी के चलते हरियाणा सरकार इन बसों के प्रवेश को रोके। प्रियंका कहती हैं कि इंडस्ट्री हरियाणा में चल रही हैं खट्टर सरकार ने उन्हें कोई सहूलियत नहीं दी कि वो क्लीन फ्यूल इस्तेमाल कर पाएँ जैसा कि दिल्ली ने किया है। सारी इंस्ट्री एनसीआर में हैं उसका प्रदूषण भी दिल्ली में आ रहा है।

बता दें कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से इस समय जनता बेहाल है और AAP पार्टी उन्हें समाधान देने की बजाय ये समझा रही है कि किस तरीके ये सब दूसरे प्रदेशों ने किया है। एक वीडियो भी सामने आई है जिसमें कुछ इलाकों में हवा साफ करने के लिए वहाँ पानी का छिड़काव हो रहा है। हालाँकि बाकी जगह क्या स्थिति है इस बारे में बात नहीं हो रही। लोग लगातार आम आदमी पार्टी से सवाल पूछ रहे हैं जिसका जवाब देने की बजाय पार्टी प्रवक्ता उनके आगे दूसरे प्रदेशों को कोस रहे हैं।

आज भी जब प्रियंका कक्कर ने पंजाब की दूरी ज्यादा बताकर हरियाणा पर सारा ठीकरा फोड़ना चाहा उस समय लोगों ने गूगल मैप के लिए जरिए दिल्ली पंजाब की दूरी का प्रमाण देकर उन्हें झूठा करार दिया और रास्ता शेयर करते हुए बोले जितने किलोमीटर आप पंजाब को दूर बता रही हैं उतने में तो लोग लाहौर एंटर कर जाएँगे।

चेकिंग के नाम पर उतरवाया मंगलसूत्र, बुर्के में सबको एंट्री दे दी: कर्नाटक में सरकारी नौकरी की परीक्षा देने आई हिंदू महिलाओं-लड़कियों का आरोप

कर्नाटक के कलबुर्गी में सरकारी नौकरी के लिए हो रहे इम्तिहान के दौरान हिन्दू छात्राओं के मंगलसूत्र और कानों की बालियाँ उतरवाने का मामला सामने आया है। छात्राओं का आरोप है कि बुर्का पहने छात्राओं को चेकिंग के बाद प्रवेश की अनुमति दे दी गई थी। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को हिन्दुओं के खिलाफ पक्षपात बताया है। घटना रविवार (5 नवम्बर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कलबुर्गी के प्री-ग्रेजुएशन गर्ल्स कॉलेज का है। रविवार को यहाँ कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा एफडीए भर्ती परीक्षा आयोजित थी। इस परीक्षा के दौरान कई लड़कियों ने आरोप लगाया है कि जाँच के नाम पर उनसे मंगलसूत्र और गले की चेन उतरवा ली गई। परीक्षा देने आई कुछ अन्य महिलाओं ने सुरक्षा जाँच के नाम पर कानों की बालियाँ और पायल भी उतरवा लेने की बात कही है। इन महिलाओं में एक का नाम राजम्मा है।

वहीं एक अन्य छात्रा का आरोप है कि कुछ लड़कियाँ बुर्का पहन कर आईं थीं। उन लड़कियों की जाँच तो की गई लेकिन उन्हें बुर्के में ही अंदर जाने की अनुमति दे दी गई थी। इस आदेश की शिकार छात्राओं के मुताबिक हिन्दू परम्परा में मंगलसूत्र का उतारा जाना अपशगुन होता है लेकिन अधिकारियों की वजह से उनको ऐसा करना पड़ा। उन पर पैरों की बिछिया तक को भी उतारने का दबाव बनाया गया। जाँच कर रहे अधिकारियों ने इसे कुछ छात्रों के ब्लूटूथ और नकल करने की अन्य सामग्री के साथ पकड़े जाने के बाद बरती गई सख्ती बताया है।

हालाँकि, जाँच के नाम पर प्रभावित हुई छात्राओं ने इस जवाब पर पूछा कि किसी और की गलती की सजा उनको क्यों दी जा रही है? कुछ ही देर में यह खबर वायरल हो गई। भारतीय जनता पार्टी के विजयपुरा से विधायक बसनगौड़ा ने पूछा है कि क्या नियम सिर्फ हिन्दुओं के लिए ही है? विरोध बढ़ता देख कर कई अधिकारी कॉलेज पहुँच गए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं के मंगलसूत्र आदि चेकिंग के नाम पर न उतरवाए जाएँ।

Mahadev Book और Reddyannaprestopro सहित सट्टेबाजी वाले 22 ऐप ब्लॉक: केंद्र सरकार का सट्टेबाजी पर एक्शन

इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अनुशंसा पर 22 सट्टेबाजी वाले ऐप के खिलाफ ब्लॉकिंग के आदेश दिए हैं। इन ऐप्स में महादेव बेटिंग ऐप भी शामिल है, जिसके प्रमोटरों पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ₹508 करोड़ रूपए देने का आरोप है।

मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ में महादेव ऐप पर ED की जाँच के बाद लिया है। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस के एक कॉन्स्टेबल भीम सिंह यादव को गिरफ्तार किया गया है, जिसके ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

आईटी राज्यमंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने इस मामले में कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार के पास यह अधिकार था कि वह इस महादेव ऐप को बंद कराने के लिए अनुशंसा कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया।”

उन्होंने आगे कहा, ” वह इस मामले की 1.5 साल से जाँच कर रहे हैं लेकिन इस दौरान छत्तीसगढ़ की सरकार ने एक बार भी इस ऐप को बंद करवाने की माँग नहीं रखी। इस अवैध ऐप को बंद करने की केवल एक माँग ED की तरफ से आई है। इस पर एक्शन लिया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार को ऐसा करने से कोई नहीं रोक रहा था।”

महादेव बेटिंग ऐप के साथ ही रेड्डीअन्नाप्रेस्टोप्रो और 20 अन्य ऐप को बंद किया गया है। गौरतलब है कि भारत में ऐसे सट्टेबाजी के ऐप को चलाने की अनुमति नहीं है, जिनमें भाग्य के आधार पर जीतने वाला का निर्णय हो। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय में कहा गया था कि केवल वही ऐप चल सकते हैं, जो ‘गेम ऑफ़ स्किल’ यानी कौशल पर आधारित हैं।

महादेव ऐप के मामले में शुभम सोनी नाम के एक शख्स ने वीडियो रिलीज करके दावा किया है कि वही महादेव बेटिंग ऐप का मालिक है और उसने ही इसे 2017 में शुरू किया था। शुभम दुबई में रहता है। उसने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ₹508 करोड़ देने का दावा भी किया है।

महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटरों सौरभ चन्द्राकर और रवि उप्पल पर आरोप है कि उन्होंने सट्टेबाजी की इस रकम को हवाला के जरिए भारत से दुबई पहुँचाया। इस मामले में 34 बॉलीवुड एक्टरों की भूमिका भी जाँच हो रही है।

हमने शुरू की तीर्थ यात्रा योजना, BJP ने कॉपी किया: केजरीवाल हो रहे थे चौड़े, CM शिवराज बोले- जब अस्तित्व में नहीं थी AAP, तब से चल रही ये स्कीम

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार (4 नवम्बर 2023) को प्रदेशवासियों के लिए ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ का ऐलान किया था। इस घोषणा पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने रविवार (5 नवम्बर 2023) को इसे आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा शुरू की गई योजना करार दे दिया।

हालाँकि इस दावे पर पलटवार करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को ही इसे अपने प्रदेश में अपनी सरकार द्वारा साल 2012 में ही शुरू की गई योजना बताया और दावा किया अरविन्द केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं।

अब सच्चाई क्या है इसके लिए ऑपइंडिया ने दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के दावे की पड़ताल की…

केजरीवाल का दावा

दरअसल, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ का ऐलान किया। इसमें उन्होंने वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, अमृतसर, पटना साहिब आदि तीर्थ स्थानों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा रेलवे की फ्री यात्रा की जानकारी दी। इस योजना का लाभ 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को मिलेगा। अरविन्द केजरीवाल ने अगले दिन रविवार को इस योजना को भाजपा सरकार द्वारा अपनी सरकार की नकल करार दिया।

अपने X हैंडल पर अरविन्द केजरीवाल ने रविवार को लिखा, “मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना पूरे देश में अभी तक केवल दिल्ली में चल रही थी। पहली बार दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने चलाई। इस योजना के तहत हम दिल्ली के 75,000 से ज़्यादा बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवा चुके हैं। हमें ख़ुशी है कि बीजेपी हमारी सरकार से सीखकर काम करने की कोशिश कर रही है। खट्टर साहिब, अगर इसके कार्यान्वन में कोई तकलीफ़ आये तो पूछ लीजिएगा, हरियाणा वासियों की मदद करने में हमें बड़ी ख़ुशी होगी।”

शिवराज सिंह चौहान ने केजरीवाल को बताया झूठा

रविवार को ही शिवराज सिंह चौहान ने अरविन्द केजरीवाल के ट्वीट को कोट (Quote) किया। उन्होंने लिखा, “अरविंद जी, झूठ के अपने शीश महल से बाहर निकलिए और आँखें खोलकर देखिए। जब ‘आप’ का अस्तित्व भी नहीं था, तब से मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बुजुर्गों को तीर्थ दर्शन करवा रही है। भाजपा की हमारी सरकार ने 2012 में ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ प्रारंभ की थी और अब तो हम हवाई जहाज से भी यात्राएं करा रहे हैं।”

शिवराज सिंह का दावा सही

ऑपइंडिया ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिल्ली के CM अरविन्द केजरीवाल के दावों की अपने स्तर पर पड़ताल की। मध्य प्रदेश सरकार के धार्मिक न्याय विभाग की वेबसाइट पर हमें मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा योजना की जानकारी मिली।

इसमें साफ़ तौर पर योजना के जून 2012 में शुरू होने की जानकारी दी गई है। योजना के पात्र तीर्थयात्रियों को स्पेशल ट्रेन से न सिर्फ यात्रा बल्कि नाश्‍ता, भोजन, पीने का पानी, ठहरने का इंतजाम, बस आदि की व्यवस्था सरकार करवाती है।

वहीं अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना महज 5 साल पहले शुरू हुई थी। तब साल 2018 में शुरू हुई यह योजना बीच में लगभग 23 माह बंद भी रही थी। दिल्ली सरकार की योजना में वृन्दावन और हरिद्वार के साथ अजमेर शरीफ का भी नाम है।

योजना के अंतर्गत दिल्ली की प्रत्येक विधानसभा से हर साल 1100 बुजुर्गों को यात्रा कराने का प्रावधान है। हालाँकि सितंबर 2023 में भी एक कार्यक्रम के दौरान अरविन्द केजरीवाल इस योजना को सबसे पहले अपने दौरा शुरू किए जाने का दावा कर चुके हैं।