Thursday, July 18, 2024
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‘ब्रिटेन ईसाई देश नहीं’: चर्च ऑफ इंग्लैंड के आधे से अधिक पादरियों ने माँगी समलैंगिकों की शादी की अनुमति, 64% बोले- LGBT के बीच सेक्स पाप नहीं

द टाइम्स के इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि 75% पादरियों का मानना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए। वहीं, 64 फीसदी पादरियों ने कहा है कि ब्रिटेन को ऐतिहासिक रूप से ईसाई देश तो कहा जा सकता है, लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इसे ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।

ब्रिटेन स्थित ‘चर्च ऑफ इंग्लैंड’ के आधे से अधिक पादरियों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। साथ ही समलैंगिकों की शादी कराने की अनुमति के लिए चर्च के कानून में परिवर्तन की भी माँग की है। वहीं, 75 प्रतिशत से अधिक पादरियों का कहना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।

द टाइम्स ने चर्च ऑफ इंग्लैंड के पादरियों का एक सर्वे किया है। इस सर्वे में 53.4% पादरियों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। साथ ही समलैंगिक शादी कराने का समर्थन किया। वहीं, 36.5% पादरियों ने इसका विरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2014 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने के बाद इंग्लैंड के ‘एंग्लिकन पादरियों’ से इस बारे में सवाल किया गया था। तब, 51% पादरियों ने समलैंगिक विवाह को गलत बताया था। वहीं, 39% पादरियों ने इसका समर्थन किया था।

गौरतलब है कि साल 2022 में लैंबेथ सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में दुनिया भर के एंग्लिकन पादरी शामिल हुए थे। इस दौरान कैंटरबरी के आर्कबिशप ने साल 1998 में दिए एक बयान की पुष्टि करने को लेकर कहा था कि समलैंगिक संबंध पाप करने की तरह है। इसको लेकर उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

हालाँकि, अब किए गए सर्वे में सामने आया है कि इंग्लैंड के 64.5% पादरियों का कहना है कि समलैंगिक संबंधों को पाप या उनके मजहबी ग्रन्थों के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए। यही नहीं, 27.3% पादरियों ने समलैंगिकों के लिए शुचिता की धारणा को नकार दिया। साथ ही 37.3% पादरियों ने कहा है कि वह समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों से उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है।

द टाइम्स के इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि 75% पादरियों का मानना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए। वहीं, 64 फीसदी पादरियों ने कहा है कि ब्रिटेन को ऐतिहासिक रूप से ईसाई देश तो कहा जा सकता है, लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इसे ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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