Home Blog Page 1595

‘₹56 करोड़ कर्ज चुका कर सनी देओल का बँगला बचाएँगे अक्षय कुमार’: जानें वायरल खबर का सच, उधर ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ ने वापस लिया लोन वाला नोटिस

एक ओर सनी देओल की फिल्म ‘गदर 2’ ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। वहीं, दूसरी ओर 56 करोड़ रुपए का लोन न चुका पाने के चलते बैंक ने उन्हें घर की नीलामी का नोटिस भेजा था। इसके बाद खबर आई थी कि सनी की मदद के लिए अक्षय कुमार आगे आए हैं। हालाँकि, अक्षय के प्रवक्ता इस बात से इनकार कर रहे हैं। इन तमाम बातों के बीच बैंक ने सनी देओल को राहत देते हुए घर की नीलामी का नोटिस वापस ले लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स में ‘बॉलीवुड हंगामा’ के हवाले से कहा जा रहा है कि सनी देओल के घर की नीलामी वाली खबर सामने आने के कुछ ही घण्टों बाद रविवार (20 अगस्त, 2023) को अक्षय कुमार ने सनी देओल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अक्षय ने सनी देओल की मदद करने का फैसला किया। साथ ही दोनों के बीच तय हुआ सनी देओल के कर्ज का बड़ा हिस्सा अक्षय कुमार चुकाएँगे। इसके बाद एक निश्चित समय के बाद सनी देओल अक्षय को पैसा वापस कर देंगे।

हालाँकि, रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि अक्षय कुमार सनी देओल को कितना पैसा देने वाले हैं। लेकिन यह कहा गया था कि यह राशि 30-40 करोड़ रुपए हो सकती है। यही नहीं, रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है कि अगर यह सच है तो इससे साबित हो गया है कि फिल्म इंडस्ट्री एक परिवार की तरह है। साथ ही इससे यह भी साफ हो गया है कि अक्षय कुमार का दिल भी बहुत बड़ा है।

हालाँकि अक्षय कुमार के प्रवक्ता ने सनी देओल की मदद को लेकर मीडिया में हो रहे दावों को सिरे से खारिज किया है। मीडिया रिपोर्ट में प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है, “इस तरह के सभी दावे पूरी तरह से गलत हैं।”

बैंक ने वापस लिया नोटिस

‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ ने सनी देओल को नोटिस भेज कहा था कि 56 करोड़ रुपए का कर्ज न चुका पाने के कारण मुंबई के जूहू इलाके में स्थित उनका घर नीलाम किया जाएगा। घर की ई-नीलामी होगी। हालाँकि, अब सोमवार (21 अगस्त, 2023) को बैंक ने टेक्निकल गलती का हवाला देते हुए यह नोटिस वापस ले लिया है। इसके लिए बैंक ने अखबार में विज्ञापन भी प्रकाशित किया है।

‘इस जनम में नहीं छोड़ूँगा तिलक, कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं को चिढ़’: आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने राजस्थान में गहलोत के हार की भी कर दी भविष्यवाणी, CWC में कल्कि पीठाधीश्वर को जगह नहीं

उत्तर प्रदेश के संभल स्थित श्रीकल्कि धाम पीठ के मुख्य महंत आचार्य प्रमोद कृष्णम् के सुर आजकल बदले-बदले लग रहे हैं। वो राज्य में कॉन्ग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं में से एक हैं और प्रियंका गाँधी के करीबी माने जाते हैं। टीवी चैनलों पर भी अक्सर उन्हें पार्टी के पक्ष में बहस करते हुए देखा जा सकता है। क्या राजनीति में गहरी रुचि लेने वाले महंत का अब कॉन्ग्रेस पार्टी से मोहभंग हो रहा है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि उनके कुछ ट्वीट्स ऐसे सामने आए हैं जो इसी तरफ इशारा करते हैं।

असल में कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी’ का नए सिरे से गठन किया है, जिसमें 39 सदस्य हैं। साथ ही 32 परमानेंट इंवाइटिज और 13 स्पेशल इंवाइटिज के नामों की भी घोषणा की गई। हालाँकि, इसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम् को जगह नहीं मिली। जब एक पत्रकार ने पूछा कि आखिर एक हिन्दू संत को CWC में जगह क्यों नहीं दी, तो कल्कि धाम पीठाधीश्वर के दिल का छिपा हुआ दर्द बाहर आ गया और उन्होंने ट्वीट के जरिए ही पार्टी पर निशाना साधा।

उन्होंने लिखा, “पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को मेरी वेशभूषा और तिलक से चिढ़ है, जिन्हें मैं इस जन्म में नहीं छोड़ सकता।” यानी, उन्होंने न सिर्फ बता दिया है कि वो हिन्दू धर्म की पहचान को नहीं छोड़ सकते, बल्कि ये भी खुलासा कर दिया है कि पार्टी में कुछ लोग साधु-संतों की वेशभूषा और तिलक से नफरत करते हैं। हालाँकि, कई ट्वीट्स के माध्यम से उन्होंने होने उन साथी नेताओं को बधाई दी, जिन्हें CWC में शामिल किया गया है। पवन खेड़ा, शशि थरूर, सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, जितेंद्र सिंह अलवर, कुमारी शैलजा, राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा को उन्होंने बधाई दी।

वहीं एक अन्य ट्वीट के माध्यम से उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साध दिया। अशोक गहलोत ने विमान में कुछ दस्तावेजों के साथ तस्वीर डालते हुए लिखा था कि वो ‘मिशन 2030’ की तैयारी में लगे हुए हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने लिखा, “भ्रष्टाचार, बलात्कार, लूट खसोट और खनन, नासिर-जुनैद की हत्या ‘लाल डायरी’ और गमन।” यानी, उन्होंने इस ट्वीट के माध्यम से भविष्यवाणी कर दी है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस हार रही है और अशोक गहलोत का ‘गमन’ होगा।

यहाँ यह बढ़ाना ज़रूरी है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस के मंत्री रहे राजेंद्र सिंह गुढ़ा को बरख़ास्त कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने महिला अपराध में राजस्थान के नंबर-1 होने को लेकर विधानसभा में अपनी ही सरकार पर तंज कसा। इसके बाद उन्होंने बताया कि सीएम अशोक गहलोत एक ‘लाल डायरी’ को जाँच एजेंसियों से छिपाना चाहते थे, जिसमें उनके भ्रष्टाचार का पूरा लेखा-जोखा है। उन्होंने कहा था कि इसी डायरी में लिखा है कि किसे कितने पैसे दिए गए। साथ ही विधानसभा में उन्होंने कॉन्ग्रेस के नेताओं पर मारपीट करते हुए ये डायरी छीनने का आरोप भी लगाया था।

ये भी जानकारी देते चलें कि उत्तर प्रदेश के संभल में कल्कि धाम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्माण पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया है। मुस्लिमों की आपत्ति के 2016 में निर्माण पर जिलाधिकारी ने रोक लगा दी थी। उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। मुस्लिमों की आपत्ति के बाद संभल के तत्कालीन डीएम ने कानून-व्‍यवस्‍था बिगड़ने का हवाला देकर मंदिर निर्माण पर रोक लगा दी थी। 

कुत्ते को मारने से रोका तो पत्नी और बच्चों को तलवार से काटा, फिर खुद की गर्दन काट की सुसाइड: दो बच्चों ने छत से कूदकर बचाई जान

मध्य प्रदेश के उज्जैन से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। 19 अगस्त 2023 की रात शराब के नशे में धुत एक व्यक्ति कुत्ते को मार रहा था। पत्नी ने रोका तो तलवार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद दो और बच्चों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। फिर तलवार से खुद का गला काट आत्महत्या कर ली। इस दौरान दो अन्य बच्चों ने छत से कूदकर अपनी जान बचाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के बालोदा की है। यहाँ रहने वाला दिलीप पंवार नामक व्यक्ति शराब के नशे में धुत था। एक कुत्ता उसे देखकर भौंकने लगा। इससे दिलीप भड़क गया। वह घर से तलवार निकालकर कुत्ते को मारने दौड़ा। इसी दौरान दिलीप की पत्नी गंगा ने उसे मना किया। इससे उसने गुस्से में आकर तलवार से हमला कर पत्नी की हत्या कर दी।

माँ पर हुए हमले का बेटी नेहा और बेटे योगेंद्र ने विरोध किया तो उन्हें भी तलवार से काट डाला।​ इससे उन दोनों की भी मौत हो गई। इस दौरान दिलीप का गुस्सा देखकर घर में मौजूद दो अन्य बच्चे जान बचाकर भागने में कामयाब रहे। इसके बाद दिलीप ने अपनी गर्दन काटकर आत्महत्या कर ली।

जान बचाकर भागे बच्चों ने आस-पड़ोस के लोगों को मामले की जानकारी दी। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुँची। इसके बाद घर का दरवाजा खोला गया। घर के अंदर दिलीप, उसकी पत्नी गंगा और दो बच्चों नेहा और योगेंद्र की लाश पड़ी हुई थी। पूरे घर में खून फैला हुआ था। घर से भागे दोनों बच्चे भी घायल बताए जा रहे हैं।

पुलिस इस मामले की कई एंगल से जाँच कर रही है। अब तक सामने आया है कि दिलीप शराब का आदी था। नशे की हालत में उसने इस वारदात को अंजाम दिया। इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि दिलीप ने हाल ही में जमीन बेची थी। इससे उसे 30 लाख रुपए थे। इसमें से वह बड़ी रकम सट्टे में हार गया था। इसको लेकर भी घर में विवाद चल रहा था। फोरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुँचकर जाँच की।

एसपी सचिन शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि पुलिस ने मौके पर सभी सबूत इकट्ठा किए हैं। मामले की जाँच चल रही है। घटना के कारण को लेकर एसपी ने कहा है कि घर में बंधा कुत्ता भौंक रहा था। इस कारण दिलीप उसे तलवार लेकर मारने जा रहा था। पत्नी ने रोकने की कोशिश की तो उसकी हत्या कर दी। दो अन्य बच्चे भी घायल हुए हैं।

बिहार सरकार ने बदल डाला ‘अटल बिहारी वाजपेयी पार्क’ का नाम, अब कहलाएगा ‘कोकोनट पार्क’: मंत्री तेज प्रताप यादव ने किया उद्घाटन, नीतीश कहते हैं – ‘श्रद्धेय अटल जी’

बिहार की राजधानी पटना के कंकड़बाग में स्थित ‘अटल बिहारी वाजपेयी पार्क’ का नाम अब ‘कोकोनट पार्क’ रख दिया गया है और राज्य के पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव ने इसका उद्घाटन किया है। ये सब तब हो रहा है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर ‘श्रद्धेय अटल जी’ कह कर पूर्व प्रधानमंत्री को संबोधित करते रहे हैं और उनकी तारीफ़ करते रहे हैं। बिहार में महागठबंधन की सरकार है, जिसमें राजद-जदयू-कॉन्ग्रेस शामिल है। केंद्र में विपक्षी पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार ने कई बार अटल बिहारी वाजपेयी की प्रशंसा की है।

इसके बावजूद दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर जिस पार्क का नाम रखा गया था, अब उसे बदल दिया गया है और इसका फिर से उद्घाटन किया जा रहा है। अगस्त 2018 में जब अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ था, तब जनता ने ही इस पार्क की पहचान उनके नाम पर कर दी थी। याद हो कि 2004 में बिहार में एक रैली के दौरान वाजपेयी ने कहा था कि वो ‘अटल’ भी हैं और ‘बिहारी’ भी, इससे बिहार को लेकर उनके जुड़ाव का पता चलता है। आपातकाल के दौरान उन्होंने पूर्वी चम्पारण आकर गिरफ़्तारी दी थी।

जिस पार्क की बात हो रही है, वहाँ कंकड़बाग की जनता ने दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा भी स्थापित की थी। अब तेज प्रताप यादव फिर से इसका नाम बदलेंगे। बिहार भाजपा के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने इस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ तो नीतीश कुमार ‘श्रद्धेय अटल जी’ की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके मंत्री वाजपेयी के नाम पर जनमानस द्वारा नामकरण किए गए पार्क का नाम बदल देते हैं। उन्होंने पूछा कि ‘भारत रत्न’ के नाम पर पार्क का जो नाम है, उसे बदल देना विचित्र बात है।

उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से माँग की है कि इस पार्क का नाम दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर ही रहने दिया जाए और इसके साथ छेड़छाड़ न की जाए। बिहार के पर्यावरण विभाग ने ये फैसला लिया है। अरविंद कुमार सिंह ने इसे फिरंगियों के इशारे पर लिया गया फैसला करार दिया है। बिहार सरकार दावा कर रही है कि अगस्त में पटना को 16 पार्कों का तोहफा मिलेगा, जिसकी शुरुआत 3 अगस्त से हो भी गई है। इसमें अकेले कंकड़बाग़ में 7 पार्कों के उद्घाटन की बात कही जा रही है।

तेज प्रताप यादव ने 8 अगस्त, 2023 को राजेंद्र नगर में 2 पार्कों का उद्घाटन किया था। कहा जा रहा है कि इन पार्कों में निःशुल्क प्रवेश के साथ-साथ टहलने की सुविधाएँ, महिला-पुरुष के लिए ओपन जिम, वॉटर कूलर, लोगों के बैठने के लिए बेंच, बच्चों के लिए झूलों, वर्मी कॉम्पोस्ट और शौचालय तक की भी व्यवस्था होगी। तेज प्रताप यादव ने पर्यावरण संरक्षण के लिए 11 सूत्री संकल्प भी दिलाया है, जिसके तहत लोगों को पेड़-पौधे लगा कर उनकी देखभाल करने, नदी-तालाब के जल को दूषित न करने और सिर्फ ज़रूरत भर पानी का इस्तेमाल करने के अलावा आसपास के इलाके को स्वच्छ रखने के लिए कहा गया है।

हिंदू महिला को जिंदा जलाया, चौकी में आग लगा दो पुलिसकर्मियों की हत्या-हथियार लूटे: मुरादाबाद में मुस्लिम भीड़ की हिंसा से रिपोर्ट ने उठाया पर्दा

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने 8 अगस्त 2023 को मुरादाबाद दंगों की जाँच रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की थी। साल 1980 में हुए दंगों (Moradabad Riots) में कम से कम 83 लोग मारे गए थे। वहीं 112 लोग घायल हुए थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस एमपी सक्सेना की एक सदस्यीय आयोग ने मुरादाबाद दंगों पर मई 1980 में 496 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में दंगों के प्रमुख कारणों और उनके प्रभाव के बारे में बताया गया है।

मुरादाबाद दंगों को लेकर पेश की गई रिपोर्ट में दंगों के दौरान मौके पर मौजूद रहे मुस्लिम और हिंदुओं के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों के बयान भी शामिल हैं। इस रिपोर्ट में दंगों के समय मौजूद छह हिंदुओं की लिखित गवाही का विस्तार से उल्लेख किया गया है। बड़ी बात यह है कि सभी बयानों से यह पता चलता है कि मुरादाबाद दंगा अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह सुनियोजित साजिश थी।

दंगों के प्रत्यक्षदर्शियों में से एक वकील दयानंद गुप्ता ने अपने बयान में बताया था कि 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद के ईदगाह में शुरू हुई हिंसा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस अधिकारियों और वाल्मीकि दलित समाज के लोगों पर बिना किसी उकसावे के हमला किया।

हिंदुओं पर हुए हिंसक हमले को याद करते हुए दयानंद गुप्ता ने कहा था कि 13 अगस्त को ईद थी। इसलिए ईदगाह में नमाज पढ़ने के लिए 80000 मुस्लिम इकट्ठा हुए थे। गुप्ता ने इस बात से असहमति जताई थी कि ईदगाह में नमाज अदा कर रहे लोगों के बीच एक सुअर छोड़े जाने को लेकर दंगे हुए। उन्होंने दावा किया था नमाज पढ़ रहे मुस्लिम एक-दूसरे के बेहद करीब बैठे थे। ऐसे में उनके बीच किसी भी जानवर के जाने के लिए जगह ही नहीं थी।

जस्टिस सक्सेना की रिपोर्ट के अंश

दयानंद गुप्ता का दावा है कि नमाज के बाद वहाँ मौजूद कई मुस्लिम कॉन्ग्रेस के शिविर में चले गए। वहाँ पहुँचने के बाद उन लोगों ने अपना सामान इकट्ठा करना शुरू कर दिया। यह ठीक वैसा ही था जैसे कि उन लोगों को यह पता रहा हो कि दंगा होने वाला है। जब मुस्लिमों से पूछताछ की गई तो उनका कहना था कि इस्लाम में हराम माने जाने वाला एक सुअर नमाजियों के बीच आ गया था। लेकिन जब उनसे यह सवाल किया कि उन्हें कैसे पता चला कि नमाज के दौरान सुअर घुस आया तो मुस्लिमों ने चुप्पी साध ली।

पेशे से वकील दयानंद गुप्ता का दावा है कि दंगा शुरू होने से पहले अचानक ही कुछ मुस्लिम ईदगाह से बाहर आए। इसके बाद उन लोगों ने सड़क किनारे खड़े एक पुलिस अधिकारी बीबी लाल पर सुअर छोड़ने का आरोप लगाया और उनके साथ मारपीट करने लगे। फिर हिंसक मुस्लिम भीड़ ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) डीपी सिंह को घसीटा और पीट-पीटकर मार डाला।

13 अगस्त की शाम मुस्लिम भीड़ ने गलशहीद पुलिस चौकी पर हमला किया और आग लगा दी। इस हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ ने दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी और चौकी से हथियार लूट लिए। इसी तरह मुरादाबाद के बरवाड़ा गाँव में 10 हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई। गुप्ता ने अपने बयान में कहा था कि हिंदुओं के खून की प्यासी मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू महिला को जिंदा जला दिया था। साथ ही कई हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पूरी तरह से सुरक्षित थे।

मुरादाबाद दंगों के प्रत्यक्षदर्शी गुप्ता का दावा था कि दंगे मेरठ, बरेली, रामपुर, अलीगढ़, प्रयागराज (तब इलाहाबाद) और दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर एक साथ हो रहे थे। इसलिए यह पूरी तरह स्पष्ट है कि यह सब सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।

अपने लिखित बयान में दयानंद गुप्ता ने कहा था कि इस हिंसा की शुरुआत हिंदुओं ने नहीं की थी। बल्कि, स्थानीय मुस्लिमों के घरों में अवैध हथियारों का एक बड़ा जखीरा पाया गया था। इससे यह साफ होता है कि 13 अगस्त, 1980 को मुस्लिमों ने ही हिंदुओं के नरसंहार की शुरुआत की थी।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने अपनी पिछली रिपोर्ट में बताया था कि मुरादाबाद में हुए दंगों की असली वजह सुअर नहीं थी, बल्कि इस्लामवादी भारत को ‘पाकिस्तान’ बनाना चाहते थे। मुरादाबाद में भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा ने कहा था कि ये हिंसा बहुत बड़ी साजिश का महज एक हिस्सा भर ही थी। इस हिंसा के लिए मुस्लिम पक्ष को बाहरी देशों, इस्लामी संगठनों जैसे मुस्लिम लीग, जमीयत उलेमा-ए-हिंसा और तबलीगी-ए-इस्लाम ने फंडिंग की थी। इन्होंने नया इस्लामी राज्य बनाने के अभियान को गति देने के लिए यूपी के अलीगढ़ और मुरादाबाद को चुना था।

वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने बताया था कि दंगों के चश्मदीद संतोष सरन ने अपने बयान में खुलासा किया था कि हिंसा की वजह वोट बैंक और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति थी। दंगे भड़कने से पहले 30000 से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को सोची-समझी साजिश के तहत लाकर बसाया गया था। इन्हें मुरादाबाद के मुस्लिम बहुल गाँवों में रखा गया था।

दंगों की प्रमुख वजह संतोष सरन ने जिले की डेमोग्राफी बदलने की साजिश बताया। सरन के अनुसार 1947 में मिली आजादी के समय मुरादाबाद मुस्लिम बहुल था। तब शहर की आबादी में 52 प्रतिशत मुस्लिम और 48% हिन्दू थे। लेकिन स्वतंत्रता मिलने के बाद कई मुस्लिम पाकिस्तान चले गए थे, जिस वजह से आज़ादी के बाद मुरादाबाद हिन्दू बहुल हो गया था। तब यहाँ 52 प्रतिशत हिन्दू और 48 प्रतिशत मुस्लिम हो गए थे।

मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 को ईद के दिन एक बड़ा दंगा हुआ था। इस दंगे के बारे में अब तक ये कहकर प्रचारित किया जाता रहा है कि इसके पीछे अप्रवासी हिंदू (विशेषत: पाकिस्तान से आए हिंदू) शामिल थे। इस दंगे के पीछे की वजह बताया जाता है कि ईदगाह में ‘नमाजियों के बीच सुअर’ छोड़े गए थे। इस दंगे में करीब 83 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 122 लोग घायल हो गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दंगे की जाँच रिपोर्ट विधानसभा में रखी तो इसका खुलासा हुआ।

हैरानी की बात यह है कि साल 1983 में बनाई गई जाँच कमेटी की रिपोर्ट को कभी न तो सार्वजनिक किया गया था, न ही सदन के पटल पर रखा गया था, क्योंकि इससे इस दंगे के असली ‘कर्ता-धर्ता’ लोगों की पहचान सार्वजनिक हो जाती। हालाँकि, 8 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज एमपी सक्सेना की कमिटी वाली जाँच रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखा, बल्कि दंगों के पीछे की साजिश की कॉन्ग्रेसी और मुस्लिम लीगी कनेक्शन को बेनकाब भी कर दिया।

फिल्म डायरेक्टर है जसिक अली, 18 साल से कम उम्र की लड़की को सिनेमा में रोल देने के बहाने फँसाया, किया यौन शोषण: पुलिस ने दबोचा

फिल्म में रोल देने का लालच देकर एक नाबालिग का यौन शोषण किया गया। केरल से यह मामला सामने आया है। जिस पर यह आरोप है, वो निर्देशक है। नाम है – जसिक अली। आरोपित निर्देशक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वो कुरुवंगद, कोझिकोड, केरल का रहने वाला है। यह बात भी सामने आई है कि पिछले साल भी जसिक अली पर नाबालिग के यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में भी उसने फिल्म में रोल देने का झाँसा देकर नाबालिग को शिकार बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, निर्देशक जसिक अली पर यह आरोप है कि उसने नाबालिग को अपनी आने वाली फिल्म में रोल देने का झाँसा देकर उसका यौन उत्पीड़न किया। मामले की पोल तब खुली, जब लड़की ने निर्देशक के खिलाफ यौन शोषण का FIR दर्ज कराया। इसके बाद नादक्कावु (Nadakkavu) में एक ठिकाने से दूसरे ठिकाने की ओर भागने का प्रयास करते समय आरोपित निर्देशक को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित जसिक अली की उम्र 36 साल बताई जा रही है। 

शिकायत के बाद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जसिक अली पीड़ित लड़की के साथ यौन उत्पीड़न करने के लिए उसे अलग-अलग जगहों पर ले गया था। अभी तक की जाँच में यह बात सामने आई है कि  नाबालिग इसलिए आसानी से आरोपित निर्देशक के झाँसे में आ गई क्योंकि हाल ही में उसकी मलयालम फिल्म ‘बाइनरी’ रिलीज हुई थी। इसका निर्देशक जसिक अली ही है। कहा जा रहा है जसिक ने इसी फिल्म का फायदा उठाते हुए नाबालिग लड़की को फिल्म में रोल देने के नाम पर बरगलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

गौरतलब है कि दुष्कर्म के इस मामले में नाबालिग लड़की और उसके माता-पिता ने लिखित शिकायत की थी। इसके बाद हिमत कोयलड़ी स्टेशन में आरोपित जसिक अली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। केस दर्ज होते ही पुलिस अधिकारियों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। लेकिन वह कई सप्ताह तक छिपता फिर रहा था। जसिक को पता चल चुका था कि नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पुलिस उसे खोज रही है।

पिछले साल भी नाबालिग से यौन शोषण मामले में हुआ था गिरफ्तार

पिछले साल नवम्बर में भी जसिक अली 17 साल की नाबालिग लड़की के यौन शोषण मामले में गिरफ्तार हुआ था। उस मामले में भी उसने फिल्म में रोल देने का लालच देकर नाबालिग को अपना शिकार बनाया था। तब उसके साथ एक और आरोपित शमनद की भी गिरफ़्तारी हुई थी।

जिस खिलाड़ी ने अपने एक गोल से टीम को बनाया वर्ल्ड चैंपियन, स्टेडियम में दोस्त की माँ को दी श्रद्धांजलि… उसे अपने ही पिता के निधन की नहीं थी जानकारी

फीफा को विमेंस फुटबॉल का नया चैंपियन मिला है। फाइनल में स्पेन ने इंग्लैंड को 1-0 से हराकर फीफा का खिताब अपने नाम किया। मैच का एकमात्र गोल स्पेन की ओल्गा कार्मोना ने किया। गोल करने के बाद उन्होंने अपनी जर्सी उठाकर जश्न मनाया। जर्सी के नीचे ‘MERCHI’ लिखा हुआ था। इसके जरिए उन्होंने अपने दोस्त की माँ को श्रद्धांजलि दी, जिनकी कुछ दिनों पहले ही मृत्यु हुई थी। एक तरफ वो दोस्त के लिए मार्मिक संदेश दे रही थीं, दूसरी ओर उन्हें पता भी नहीं था कि मैच से पहले उनके पिता की भी मृत्यु हो गई है। उनके परिवार ने यह बात उनसे छुपाए रखी।

वीमेंस फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में स्पेन इंग्लैंड पर पूरी तरह से हावी नजर आया। मैच के पहले हाफ के 29वें मिनट में ओल्गा कार्मोना के गोल ने स्पेन को बढ़त दिला दी थी। ओल्गा कार्मोना ने गोल करने के बाद जश्न मनाते हुए अपनी जर्सी उठाई। इसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसको लेकर लोग कई प्रकार की बातें कर रहे थे। हालाँकि कोई भी यह समझ नहीं पा रहा था कि इसका मतलब क्या है?

शुरुआत में यह माना जा रहा था कि ओल्गा ने स्पेन के कोच जॉर्ज विल्डा के सपोर्ट में जर्सी उठाई है। हालाँकि कुछ लोगों का मानना था कि वर्ल्ड कप से बाहर किए गए 12 खिलाड़ियों के समर्थन में ओल्गा ने यह किया। बता दें कि साल 2022 में विल्डा के खिलाफ स्पेन के 15 खिलाड़ियों ने मोर्चा खोल दिया था। इसमें वर्ल्ड कप में शामिल 3 खिलाड़ी भी थे।

इसके बाद जब ओल्गा कार्मोना की फोटोज सामने आईं तो लोगों का कन्फ्यूजन और बढ़ गया। दरअसल, उनकी जर्सी के नीचे ब्लैक कलर से ‘MERCHI’ लिखा हुआ था। हालाँकि मैच के बाद यानि पोस्ट मैच प्रजेंटेशन में ओल्गा ने कहा “सबसे पहले, मैं कहना चाहती हूँ कि यह जीत, यह उपलब्धि मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक की माँ को समर्पित है। उनका हाल ही में निधन हो गया था। मैंने उनकी नाम लिखी जर्सी के साथ जश्न मनाया। मैं इसे अपने पूरे प्यार के साथ पूरे परिवार को समर्पित करती हूँ।”

स्पेन को पहली बार वर्ल्ड कप विजेता बनाने वाली ओल्गा कार्मोना जीत के बाद काफी खुश थीं। उन्होंने ट्रॉफी और मेडल को चूमकर जश्न भी मनाया। हालाँकि बाद में उन्हें बताया गया कि उनके पिता का भी निधन हो गया है। रेलेवो की रिपोर्ट के अनुसार, फाइनल मैच शुरू होने से पहले ही कार्मोना के पिता का निधन हो गया था। वह फाइनल में अच्छे से खेलती रहें, इसलिए उनके परिवार ने उनसे यह खबर छिपाए रखी।

पिता के निधन की खबर मिलने के बाद ओल्गा कार्मोना ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “मैच शुरू होने से पहले मेरे स्टार मेरे साथ थे। मैं जानती हूँ कि आपने मुझे कुछ अनोखा हासिल करने की ताकत दी है। मुझे पता है कि आज रात भी आप मुझे देख रहे हैं और आपको मुझ पर गर्व हो रहा होगा। शांति से आराम करिए पापा।”

नूहं दंगों में जिस साइबर क्राइम थाने को जलाया, उसके 2 आरोपित जाबिर और इरशाद गिरफ्तार: छिपे थे अरावली की पहाड़ियों में

नूहं में 31 जुलाई 2023 को निकली ब्रजमंडल शोभयात्रा के दौरान हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ करने वाले आरोपितों पर हरियाणा सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच तथा अन्य पुलिस टीमों का लगातार सर्च आपरेशन जारी है। रविवार (20 अगस्त, 2023) को पुलिस द्वारा 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से दो आरोपित जाबिर और इरशाद हैं। 

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, नूहं हिंसा के दोनों आरोपित राजस्थान के अलवर जिला के गाँव चूहड़पुर के निवासी बताए जा रहे हैं। इन दोनों को रविवार की रात में गाँव से सटी अरावली पहाड़ी से गिफ्तार किया गया है। इन दोनों आरोपितों का नाम खेड़ला चौक पर हुई हिंसा के साथ-साथ साइबर क्राइम थाने में तोड़फोड़ करने तथा पुलिस के वाहनों को आग लगाने के मामले में सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस रिमांड पर लेकर इन दोनों से कड़ाई से पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि हिंसा से जुड़े सुनियोजित साजिश में अन्य दंगाइयों के बारे में पता लगाया जा सकेगा। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जाबिर और इरशाद के अलावा तीन अन्य आरोपितों को भी पुलिस ने गिरफ्तार करने का दावा किया है, लेकिन उनके नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं। कहा जा रहा है कि तीनों को अलग-अलग थाने की टीमों ने गिरफ्तार किया है। 

गौरतलब है कि मेवात के नूहं में 31 जुलाई को जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदुओं पर ही मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया था। इस दौरान नल्हड़ के शिव मंदिर में श्रद्धालु घंटों बंधक की तरह फँसे रहे। पहाड़ियों से दंगाई इस मंदिर को भी निशाना बना रहे थे।

अब तक नूहं हिंसा से जुड़े 264 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। हरियाणा पुलिस और STF की टीमें लगातार आरोपितों पर कार्रवाई करते हुए सर्च अभियान चला रही है। नूहं दंगों के बाद से हरियाणा पुलिस लगातार पब्लिक और पत्रकारों से भी सहयोग माँग रही है ताकि हिंसा के सभी आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

इस मामले में एसपी नरेंद्र बिजारणिया ने कहा, “सर्च ऑपरेशन के दौरान किसी भी निर्दोष व्यक्ति को डरने की जरूरत नहीं है। उपद्रवी चाहे कोई भी हो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

3 लाख लोग, एल्विश यादव संग CM मनोहर लाल खट्टर और गुरुग्राम में ‘हैंग हुआ सिस्टम’: बिग बॉस OTT विजेता के साथ मुख्यमंत्री का कदमताल, हरियाणा टैलेंट हंट का ऐलान

बिग बॉस ओटीटी 2 (Bigg Boss OTT 2) के विनर एल्विश यादव (Elvish Yadav) लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। रविवार (20 अगस्त, 2023) को हरियाणा के गुरुग्राम में एल्विश का सम्मान समारोह आयोजित हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एल्विश यादव को सम्मानित किया। खबर है कि इस कार्यक्रम में 3 लाख से अधिक लोग जुटे थे।

दरअसल, एल्विश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए पहले ही ऐलान किया था कि 20 अगस्त को अभिनंदन समारोह आयोजित होना है। ऐसे में एल्विश के फैंस बड़ी संख्या में गुरुग्राम स्थित देवीलाल स्टेडियम में पहुँचे थे। पूरा स्टेडियम ‘एल्विश आर्मी’ से खचाखच भरा नजर आया। जहाँ हर तरफ एल्विश-एल्विश के नारे गूँज रहे थे। इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर हरियाणा के सीएम मनोहर खट्टर के अलावा एल्विश यादव के माता-पिता भी नजर आए। साथ ही मॉडल और बॉडी बिल्डर प्रिंस नरूला भी मौजूद रहे।

एल्विश यादव के इस ‘अभिनंदन समारोह’ के कई वीडियो सामने आए हैं। इनमें से एक वीडियो में सीएम मनोहर लाल खट्टर और एल्विश यादव मंच पर साथ चलते नजर आ रहे हैं। इसके बाद खट्टर एल्विश यादव का हाथ ऊपर उठाकर उनके फैंस को यह बताते नजर आ रहे हैं कि बिग बॉस ओटीटी 2 का विजेता सबके सामने है।

इस कार्यक्रम में सीएम खट्टर ने ऐलान किया है कि 1 नवंबर को हरियाणा दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार स्टेट लेवल टैलेंट हंट का कार्यक्रम आयोजित करेगी। खट्टर ने कहा है कि इस कार्यक्रम के तहत राज्य की युवा प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा। इसमें खासतौर से एल्विश यादव का सम्मान होगा।

वहीं एल्विश यादव की माँ सुषमा यादव का भी वीडियो सामने आया। एल्विश की माँ ने ‘एल्विश आर्मी’ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा है, “आप सभी बच्चों को बहुत-बहुत धन्यवाद। यदि आप लोगों का साथ नहीं होता तो यह चीज कभी पूरी नहीं हो पाती। अगर आप लोग नहीं होते तो यह काम पूरा नहीं हो पाता। आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया।”

बता दें कि एल्विश यादव मशहूर यूट्यूबर हैं। यूटयूब से लोगों के बीच मशहूर होने के बाद बिग बॉस ओटीटी 2 पर उन्हें वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी। इसके बाद वह और भी अधिक चर्चा में आ गए थे। वास्तव में बिग बॉस में जाने के कुछ ही दिनों बाद उनके विनर बनने की चर्चा तेज हो गई थी। इसके बाद ऑन लाइन हुई वोटिंग में भी एल्विश के फैंस ने उन्हें जमकर वोट देते हुए विनर बनाया था। बिग बॉस ओटीटी 2 जीतने पर एल्विश को ₹25 लाख का इनाम मिला।

सब्जी की दुकान पर डिजिटल पेमेंट कर UPI के मुरीद हुए जर्मनी के मंत्री, खरीदी मिर्च: कहा – डिजिटल इंफ़्रास्ट्रक्चर भारत की सफलता की एक कहानी

जर्मनी के मंत्री वोल्कर विसिंग प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘डिजिटल इंडिया’ से प्रभावित नजर आए। वह एक छोटी सी दुकान पर डिजिटल पेमेंट देखकर दंग रह गए। जर्मनी के दूतावास ने भी भारत में बढ़ते डिजिटलीकरण की तारीफ की। साथ ही इसे देश की सफलता की कहानी करार दिया।

दरअसल, जर्मनी के डिजिटल और परिवहन मंत्री वोल्कर विसिंग जी-20 सम्मेलन में भाग लेने भारत पहुँचे हैं। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में एक सब्जी की दुकान पर मिर्च खरीदी। इसका भुगतान करने के लिए उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानि UPI का उपयोग किया। इसके कुछ वीडियो और फोटो भी सामने आए हैं। वीडियो में विसिंग को यूपीआई के जरिए पेमेंट करते देखा जा सकता है।

इस दौरान वोल्कर विसिंग काफी खुश नजर आए। भारत में बढ़ते UPI के उपयोग और विसिंग के अनुभव को लेकर जर्मनी के दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “भारत की सफलता की कई कहानी है। इनमें से एक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। UPI हर किसी को सेकंडों में लेनदेन करने में सक्षम बनाता है। लाखों भारतीय इसका इस्तेमाल करते हैं। जर्मनी के डिजिटल और परिवहन मंत्री ने खुद यूपीआई से पेमेंट कर इसकी सरलता का अनुभव किया। वह इसके मुरीद हो गए।”

बता दें कि वोल्कर विसिंग जी-20 में डिजिटल मंत्रियों की बैठक में शामिल होने 18 अगस्त को बेंगलुरु पहुँचे थे। उन्होंने 19 अगस्त को भारत के सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत अन्य देशों के मंत्रियों के साथ बैठक की थी।

गौरतलब है कि UPI अब सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। साथ ही कई देश इसका उपयोग भी कर रहे हैं। यूपीआई को लेकर भारत ने  श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर के साथ साझेदारी की है। वहीं जब प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस दौरे पर थे तब उन्होंने कहा था कि UPI से पेमेंट को लेकर दोनों देशों के बीच साझेदारी हुई है।