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पटना में नहीं मिला ‘फाॅर्मूला’, अब शिमला में होगी विपक्ष की बैठक: ज्वाइंट प्रेस काॅन्फ्रेंस से केजरीवाल का किनारा, BRS को काॅन्ग्रेस नहीं कबूल

केंद्र की सत्ता से भाजपा को हटाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर 15 विपक्षी दलों की पटना में बैठक हुई। हालाँकि, इस बैठक में बसपा, बीजद, बीआरएस और वाईएसआर कॉन्ग्रेस इसका हिस्सा नहीं रहीं। बैठक के बाद नीतीश कुमार, राहुल गाँधी, ममता बनर्जी, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला आदि ने कहा कि मीटिंग शानदार रही और सभी साथ मिलकर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

इस बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, सांसद, संजय सिंह और राघव चड्ढा भी पहुँचे थे। हालाँकि, बैठक में सहमति बनने से पहले असहमति साफ दिख गई। बैठक में शामिल होने से पहले AAP ने दिल्ली के अध्यादेश पर कॉन्ग्रेस से समर्थन माँगा।

AAP ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस उसे समर्थन नहीं देती है तो माना जाएगा कि वह भाजपा के साथ है। कहा जा रहा है कि मीटिंग में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान आदि शामिल तो हुए, लेकिन बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्ग्रेस में दोनों नदारत रहे। बैठक में अध्यादेश पर उन्हें उद्धव ठाकरे और शरद पवार का समर्थन मिला।

बैठक के बाद सभी नेताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करने पर सहमति दी। बंगाल की मुुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जो पटना से शुरू होता है, वह जन आंदोलन बन जाता है। उन्होंने सत्ताधारी भाजपा को तानाशाह बताया। लालू यादव ने कहा कि वे अब फिट हो गए हैं और मोदी जी को भी फिट कर देना है।

इस दौरान लालू यादव ने मजाकिया अंदाज में राहुल गाँधी की शादी की चर्चा भी की। उन्होंने कहा, आप शादी कीजिए। बात मानिए मेरी। शादी कीजिए और हम सब को बाराती ले चलिए। आपको शादी करना पड़ेगा। बात मानिए।” उन्होंने कहा कि हनुमान अब उन लोगों की तरफ हैं और बजरंग बली का गदा अब भाजपा को पड़ गई है।

इस बीच भारत राष्ट्र समिति ने इस महाबैठक पर तंज कसा है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री केटीआर राव ने कहा, “आज राजनीतिक दलों की एकता उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि देश में व्याप्त मुद्दों पर लोगों को एकजुट करना महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने भाजपा और कॉन्ग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, “आज हमारा देश जिन समस्याओं से जूझ रहा है उसके लिए कॉन्ग्रेस और भाजपा जिम्मेदार हैं। अगर राजनीतिक दल भाजपा या कॉन्ग्रेस को साथ लेकर एकजुट हो जाएँगे तो इससे देश का कोई भला नहीं होगा।”

इस संबंध में अगली बैठक 12 जुलाई को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में होगी। इसकी घोषणा बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। जाहिर सी बात ही पटना की बैठक में कोई सर्वमान्य फॉर्मूला नहीं मिला है।

इसके पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने गुरुवार (21 जून 2023) को कई ट्वीट किए। इनमें उन्होंने लिखा, “महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन, अशिक्षा, जातीय द्वेष, धार्मिक उन्माद/हिंसा आदि से ग्रस्त देश में बहुजन के त्रस्त हालात से स्पष्ट है कि परमपूज्य बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी समतामूलक संविधान को सही से लागू करने की क्षमता कॉन्ग्रेस-बीजेपी जैसी पार्टियों के पास नहीं है।”

उन्होंने अगले ट्वीट में नीतीश कुमार की अगुवाई में विपक्षी दलों की बैठक को लेकर लिखा, “अब लोकसभा आम चुनाव के पूर्व विपक्षी पार्टियाँ जिन मुद्दों को मिलकर उठा रही हैं और ऐसे में श्री नीतीश कुमार द्वारा कल 23 जून की विपक्षी नेताओं की पटना बैठक ’दिल मिले न मिले हांथ मिलाते रहिए’ की कहावत को ज्यादा चरितार्थ करता है।”

बताते चलें कि इस बैठक में जदयू, आरजेडी, कॉन्ग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, एनसीपी, शिवसेना-यूबीटी, झामुमो, पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, सपा के नेता शामिल हुए। बता दें कि विपक्षी एकता में बसपा का जिक्र नहीं है। यही कारण है कि मायावती इस बैठक को लेकर सवाल उठा रही हैं।

बैठक में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और केसी वेणुगोपाल शामिल रहे। वहीं, AAP के अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, संजय सिंह और राघव चड्ढा, TMC से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, NCP से शरद पवार एवं सुप्रिया सुले, शिवसेना (UBT) से उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे एवं संजय राउत, जदयू से नीतीश कुमार और ललन सिंह, राजद से तेजस्वी यादव और लालू यादव, झामुमो से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, PDP से महबूबा मुफ्ती, NC से उमर अबदुल्ला, सपा के अखिलेश यादव, डीएमके से एमके स्टालिन, भाकपा महासचिव डी.राजा, भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य नेता भी शामिल रहे।

जैसा 100 चूहे खाकर बिल्ली का हज पर जाना, वैसा ही है बराक ओबामा का मुस्लिमों और मानवाधिकारों पर ‘उलेमा’ होना

अमेरिकी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से कुछ देर पहले यूएस के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक इंटरव्यू में भारत को लेकर खूब ज्ञान दिया। सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को भारतीय पीएम से मिलकर भारतीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बात करनी चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि यह बात उन्हीं ओबामा ने कही है जिन्हें लेकर बकायदा डेटा है कि इन्होंने 7 मुस्लिम देशों पर 26171 से ज्यादा बम गिराए।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स के अनुसार, ओबामा काल के वक्त साल 2016 में 26, 171 बम गिराए गए थे। इनमें से सीरिया में 12, 192, इराक में 12095, अफगानिस्तान में 1337, पाकिस्तान में 3, लिबिया में 496, यमन में 35 और सोमालिया में 14 बम हमले करवाए गए थे। प्रति दिन के हिसाब से आँकड़ों को देखें तो यही पता चलता है राष्ट्रपति रहते हुए ओबामा ने हर दिन मुस्लिम देशों पर 72 बम गिरवाए। इसके बावजूद उनका इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाकर बोलना काफी हैरान करने वाला है।

अब वही ओबामा अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी को बोल रहे हैं कि हिन्दू बहुल भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा ध्यान देने योग्य है। उन्होंने साक्षात्कार में बोला, “पीएम मोदी को मैं अच्छे से जानता हूँ, अगर मेरी उनसे बात होती, तो मैं कहता कि अगर आप भारत में जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करेंगे, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि भारत किसी बिंदु पर बँटना होना शुरू कर देगा। हमने देखा है कि जब इस प्रकार के बड़े आंतरिक संघर्ष होने लगते हैं तो क्या होता है।”

हिंदू बहुल भारत में मुस्लिमों के अधिकारों की बात करते हुए पार्टिशन की चिंता एक ऐसे शख्स को है जिन्होंने इस्लामी देशों पर न केवल अंधी स्ट्राइक्स करवाईं बल्कि उसमें कई नागरिकों को मरवा दिया और उसके बावजूद उन्हें नोबल प्राइज का हकदार कहा जाता रहा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ओबाना ने अपने कार्यकाल के दौरान इस्लामी देश पाकिस्तान में 54 ड्रोन स्ट्राइक करने की अनुमति भी दी थी। इनमें से एक स्ट्राइक तो ऐसी हुई जो किसी के जनाजे पर गिरी और 41 पाकिस्तानी नागरिक मारे गए। इसके बाद भी आने वाले सालों में वहाँ 128 सीआईए ड्रोन स्ट्राइक हुईं जिसमें करीबन 89 नागरिक मारे गए थे।

इसके अलावा यमन में की गई एयरस्ट्राइक में 55 लोग मरे थे जिनमें से 21 बच्चे थे और 12 गर्भवती महिलाएँ। अफगानिस्तान में भी 2016 में 1337 हथियार छोड़े गए। 2007 से 2016 के बीच वहाँ एक अनुमान है 582 नागरिक मारे गए थे। अब ऐसे में ये स्थिति तो हास्यासपद ही है कि एक व्यक्ति जो राष्ट्रपति रहते हुए इस्लामी देशों की मदद के नाम पर उन पर बम गिरवा देता है वो कुछ साल बाद भारत के प्रधानमंत्री को नसीहत दे रहा है कि उन्हें देश में मुस्लिमों के अधिकार पर ध्यान देना चाहिए वरना विभाजन हो सकता है। ये बिलकुल ऐसा है जैसे 100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।

यहाँ कौन जाकर ओबामा को समझाए कि 1947 में हुआ भारत-पाक का विभाजन देश के हिंदू बहुल या हिंदू मानसिकता के कारण नहीं बल्कि इस्लामियों के कट्टर विचारों की वजह से हुई थी। ये बात और है कि बाद में इस तथ्य पर लीपा-पोती करने के लिए उसका जिम्मेदार ब्रिटिशों की डिवाइड एंड रूल पॉलिसी को बना दिया गया। आज ओबामा का ऐसे बयान का विरोध इसलिए जरूरी नहीं है कि उन्होंने पीएम मोदी के राजकीय यात्रा के दौरान इस तरह बात करके भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल उठाया, बल्कि इसलिए भी जरूरी है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को झूठे प्रोपेगेंडों के आधार पर बरगलाया न जा सके।

‘जिहादियों 30 दिन में हिमाचल प्रदेश छोड़कर चले जाओ’: चंबा में हिंदुओं का प्रदर्शन, मुस्लिम लड़की से प्यार करने पर मनोहर के कर दिए थे 8 टुकड़े

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के संघणी में हुई मनोहर लाल की जघन्य हत्या के विरोध में हिंदू एकजुट होकर न्याय की माँग कर रहे हैं। इसको लेकर गुरुवार (22 जून, 2023) को विभिन्न हिंदू संगठन के सदस्यों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। साथ ही जिहादियों को 30 दिन के भीतर प्रदेश छोड़ने का अल्टीमेटम भी दिया है।

इस विरोध प्रदर्शन में संघणी हत्याकांड संघर्ष समिति के बैनर तले बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा, सिप्पी कल्याण सभा, वाल्मिकी सभा, व्यापार मंडल चंबा के सदस्य शामिल रहे। प्रदर्शन में शामिल लोग मनोहर लाल की हत्या मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के बनाने और आरोपितों को फाँसी की सजा देने की माँग कर रहे थे। लोगों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।

चंबा के चौहरा बाँध के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। इसको हटाने को लेकर राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी प्रमुख और कार्यकर्ताओं तथा पुलिस के बीच जमकर बहस हुई। पुलिस ने धारा 144 का हवाला देते हुए आक्रोशित लोगों को आगे जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद भी संघणी जाने की जिद पकड़े हिंदू शाम 5 बजे तक छौहारा में ही डटे रहे।

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हिंदू संगठन के सदस्य कमल गौतम का कहना है कि मनोहर लाल की हत्या एक बेहद क्रूर घटना है। यह हिमाचल प्रदेश में हिंदू समुदाय पर सीधा हमला है। यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। उन्होंने कहा, “यह कोई सामान्य हत्या नहीं थी। इसलिए हम मनोहर लाल की हत्या के पीछे की साजिश को सामने लाने के लिए एनआईए या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से जाँच की माँग करते हैं।”

बता दें कि गुरुवार (22 जून 2023) को राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के प्रमुख रुमित ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि मनोहर लाल की हत्या करने वालों के नाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए वह धारा 144 तोड़कर पीड़ित परिवार से मिलेंगे। इसके बाद उसी दिन सुबह करीब साढ़े 11 बजे वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ तुन्नुहट्टी पहुँचे। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।

इस विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो सामने आए हैं। इसमें से एक वीडियो में हिंदू संगठन के एक नेता ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा है, “ज इस ऐतिहासिक विरोध में मैं हिमाचल प्रदेश के संपूर्ण हिंदू समाज से आह्वान करने यहाँ आया हूँ। हिमाचल प्रदेश में घूम रहे जिहादी मानसिकता के लोगों को 30 दिन का समय देते हैं। तुम्हारे पास 30 दिन का समय है। 30 दिन में हिमाचल प्रदेश छोड़कर चले जाओ, नहीं तो उसके बाद जो होगा उसके जिम्मेदार तुम खुद होगे।” चंबा के डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय एजेंसियों से जाँच की माँग कर रहे हैं।

क्या है मामला

21 वर्षीय मनोहर 6 जून 2023 को लापता हो गया था। उसका शव पुलिस ने 9 जून 2023 को चंबा के सलूनी इलाके के एक नाले से बरामद किया। शव के 8 टुकड़े किए गए थे। आरोप है कि रुखसाना नाम की लड़की से प्यार करने की वजह से मोहम्मद शरीफ और उसके साथियों ने पहले मनोहर को बेरहमी से पीटा और बाद में लाश को टुकड़ों में काटकर नाले में फेंक दिया। इस मामले में अभी तक कुल 11 गिरफ्तारियाँ की गईं हैं। घटना से नाराज लोगों ने आरोपितों के घर में आग भी लगा दी थी।

साक्षी-बजरंग-विनेश सहित 6 पहलवानों को ट्रायल में छूट: योगेश्वर दत्त बोले- यह कुश्ती के लिए काला दिन, क्या धरना का यही मकसद था

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत 6 पहलवानों को ट्रायल में आखिरकार छूट दे दी गई। इससे ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त नाराज हो गए हैं। उन्होंने कुश्ती के लिए काला दिन बताते हुए पूछा कि क्या यही वो वजह थी, जिसको हासिल करने के लिए पहलवान प्रदर्शन कर रहे थे।

बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत 6 पहलवानों को ट्रायल में छूट दी गई है। उन्होंने अन्य पहलवानों के विपरीत सिर्फ एक मुकाबला खेलना होगा। यह छूट एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप के चयन के लिए मिली है। यही पहलवानों की माँग रही है और बृजभूषण सिंह से टकराव का एक बड़ा कारण इस छूट का नहीं मिलना था।

दरअसल, भारतीय ओलिंपिक संघ (Indian Olympic Association) के एडहॉक पैनल ने इन पहलवानों को आगामी एशियाई खेलों और विश्व चैम्पियनशिप की चयन प्रक्रिया के लिए सिर्फ एक मुकाबले में शामिल होना होगा। इन पहलवानों को दोनों प्रतियोगिताओं की भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए सिर्फ ट्रायल के विजेताओं को हराने की जरूरत होगी। ये लोग 5 से 15 अगस्त के बीच ट्रायल विजेताओं से भिड़ेंगे।

जिन छह पहलवानों को यह छूट दी गई है, उनमें विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, संगीता फोगाट, सत्यव्रत कादियान और जितेंद्र किन्हा शामिल हैं। ये सभी विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे हैं। इस छूट को लेकर योगेश्वर दत्त ने कुश्ती के लिए काला दिन बताया। इंडिया के पूर्व कोच कृपा शंकर ने भी इस फैसले का विरोध किया है।

योगेश्वर दत्त ने कहा, “IOA की एडहॉक कमिटी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले 6 पहलवानों को ट्रायल में छूट दी है। इनके बस फाइनल ट्रायल होंगे। जो पहलवान इनके वेट कैटेगरी में विजेता होगा, उनके साथ इनकी फाइनल ट्रायल होगी। मुझे नहीं पता कि एडहॉक कमिटी ने इसके लिए क्या मापदंड अपनाए हैं। अगर आपको ऐसे ही ट्रायल लेने हैं तो रवि दहिया है, ओलंपिक का मेडलिस्ट है, दीपक पुनिया है, अंशु मलिक है, सोनम मलिक है और भी बहुत से पहलवान हैं।”

उन्होंने कहा, “सिर्फ यही 6 पहलवानों को ट्रायल में छूट देना मेरी समझ के बाहर है। बिना नियम देखे और बिना क्राइटेरिया बनाए लिया गया यह फैसला गलत है। तो जितने भी पहलवान हैं … लड़कियाँ हैं… अपनी आवाज जरूर उठाइए। मैं ये नहीं कहता कि धरना कीजिए, प्रदर्शन कीजिए… लेकिन अपनी आवाज मीडिया के माध्यम से उठाइए, आप प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखिए, गृहमंत्री जी को पत्र लिखिए, खेलमंत्री अनुराग ठाकुर जी को पत्र लिखिए, IOA को पत्र लिखिए।”

फैसले पर सवाल उठाते हुए दत्त ने आगे कहा, “आज तक के कुश्ती के इतिहास में पिछले फेडरेशन ने भी ऐसे फैसले नहीं किए। बिना ट्रायल के टीम भी भेजी है, लेकिन वो नंबर वन टीम थी। ट्रायल में छूट भी दी गई है, लेकिन वो सबके लिए नहीं थी। जो आउटस्टैंडिंग पहलवान थे, उनके लिए थी। ये पहलवान को मैच से एक डेढ़ साल से दूर रहे हैं। यह फैसला IOA का तानाशाही वाला फैसला है।

खाप और किसान संगठनों से दत्त ने कहा, “जितने भी खाप पंचायतें और उनके प्रतिनिधि हैं और किसान संगठन हैं, उनसे भी मेरा आग्रह है कि आप भी एक बार इस फैसले को जरूर देखिए, क्योंकि इस आंदोलन में आपने बहुत बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ये फैसला किसके लिए अच्छा है और किसके लिए बुरा है? मेरा मानना है कि कि कुश्ती के लिए तो यह बिल्कुल भी अच्छा फैसला नहीं है। मुझे पता चला कि इसके लिए पहलवानों ने एडहॉक कमिटी को चिट्ठी लिखी थी कि उन्हें छूट दी जाए।”

वहीं, पूर्व कोच कृपा शंकर ने भी IOA की एडहॉक कमिटी के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “आखिर मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि खेल मंत्रालय, भारत सरकार और IOA की एडहॉक कमिटी की वो कौन सी दुखती रग है, जिसे इन पहलवानों ने पकड़ रखा है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एडहॉक समिति के प्रमुख भूपेंद्र सिंह बाजवा ने 16 जून 2023 को पहलवानों को इस फैसले की जानकारी पत्र के माध्यम से दी। पत्र में कहा गया है कि इन पहलवानों का ट्रायल एशियाई खेलों-विश्व चैंपियनशिप के लिए संबंधित भार वर्ग के विजेताओं के साथ आयोजित किया जाएगा।

IOA ने 16 जून को OCA से संपर्क कर भारतीय कुश्ती टीम के लिए नामों के साथ एंट्री जमा करने की 15 जुलाई की समय सीमा बढ़ाने की माँग की थी। IOA ने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) से 30 जून तक अपनी-अपनी टीमों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा था, ताकि वह बिना किसी परेशानी के OCA की समय सीमा का सम्मान कर सके। OCA ने अभी तक IOA के अनुरोध का जवाब नहीं दिया है।

वही, भारतीय ओलंपिक संघ ने WFI के चुनाव की तारीखों में बदलाव किया है। 6 जुलाई को होने वाले कुश्ती महासंघ के चुनाव को 11 जुलाई कर दिया गया है। IOA की एडहॉक समिति ने पाँच अमान्य प्रदेश इकाइयों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव का दिनांक बदलने का फैसला किया है।

सबरीना सिद्दीकी, इल्हान उमर, रशीदा तलीबी… ‘मुस्लिम-मानवाधिकार’ प्रोपेगेंडा का हथियार बनी अमेरिकी ‘जनाना मंडली’ को जानते हैं आप

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही ‘भारत में मुस्लिमों का दमन’ दुनियाभर की लेफ्ट-लिबरल लॉबी का पसंदीदा प्रोपेगेंडा है। उससे पहले ‘गुजरात में मुस्लिम असुरक्षित’ उनके प्रोपेगेंडा लिस्ट में टॉप पर होता था। पीएम मोदी के अमेरिका के राजकीय दौरे के दौरान भी इस प्रोपेगेंडा को हवा देने की पूरी कोशिश हुई। तीन औरतों को इसके लिए आगे किया गया। इनमें से दो इल्हान उमर और रशीदा तलीब अमेरिका की सांसद हैं। वहीं सबरीना सिद्दीकी पत्रकार। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने व्हाइट हाउस में प्रेस काॅन्फ्रेंस के दौरान लोकतंत्र का पाठ पढ़ाकर एक बार फिर से इस प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है।

कौन है सबरीना सिद्दीकी और क्या पूछा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान सबरीना सिद्दीकी ने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अल्पसंख्यकों के हित में उठाए जाने वाले कदमों पर सवाल किया था। सबरीना ने पूछा था, “आप और आपकी सरकार अपने देश में मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों में सुधार करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाने को तैयार हैं?” इस पर पीएम मोदी ने उन्हें करारा जवाब देते हुए भारतीय लोकतंत्र का मतलब समझाया था और कहा था किभारत किसी के धर्म, जाति, रंग, लिंग को देखकर भेदभाव नहीं करता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अल्पसंख्यकों पर सवाल करने वाली सबरीना सिद्दीकी वॉल स्ट्रीट की जर्नलिस्ट हैं। वह अमेरिका की हाई प्रोफाइल मुस्लिम अमेरिकनों में से एक हैं। वॉशिंगटन डीसी में वह वॉल स्ट्रीट जर्नल की ओर से व्हाइट हाउस की रिपोर्टिंग करती हैं। इसे अमेरिका में पत्रकारिता क्षेत्र की सबसे खास बीट माना जाता है।

इससे पहले उन्होंने 2019 में गार्जियन के लिए काम करते हुए व्हाइट हाउस पर रिपोर्टिंग की थी। मौजूदा जानकारी के अनुसार उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और वर्तमान में वाशिंगटन में ही अपने शौहर अली जाफरी के साथ रहती हैं। उनके अब्बा का नाम जमील है जो पैदा भारत में हुए, लेकिन पले-बढ़े पाकिस्तान में। सबरीना की अम्मी भी पाकिस्तान की है।

कश्मीरी के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने वाले के क्रम में सबरीना पीछे नहीं रही हैं। साल 2019 में जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा था तब उस समय सबरीना ने इस मुद्दे को ट्रंप के आगे उठा दिया था।

एक रिपोर्ट बताती है कि सबरीना को साल 2016 के चुनावों के दौरान कई मतदाताओं से मुस्लिमों के लिए अपशब्द सुनने को मिले थे। इसी के बाद उन्हें अपनी मुस्लिम पहचान का एहसास हो गया। इसके बाद वो मुस्लिमों की आवाज बनी और पत्रकार होते हुए उनके मुद्दे उठाने लगीं। प्रधानमंत्री के आगे भी सबरीना ने इसी दिशा में सवाल पूछा था। हालाँकि प्रधानमंत्री ने करारा जवाब दिया और सोशल मीडिया पर लोग एकतरफा पत्रकारिता पर सवाल उठाने लगे सो अलग।

लोगों ने सबरीना ने कहा कि जिस तरह से व्हाइट हाउस में भारतीय लोकतंत्र पर प्रधानमंत्री से सवाल किया गया है क्या इस तरह का सवाल कभी किसी मुस्लिम देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से किया गया है कि वहाँ अल्पसंख्यकों की हालत क्या है।

कौन हैं रशीदा तलीब

इसी तरह पीएम के अमेरिकी दौरे को महिला सांसद रशीदा तलीब ने शर्मनाक कहा था जबकि वो खुद आतंकवादियों की हमदर्द हैं। उनके ऐसे संस्थानों और लोगों के साथ उठना बैठना है जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इसके अलावा वो अमेरिका संसद होते हुए भी यहूदियों के खिलाफ अपनी घृणा को दिखाती रही हैं। एक बार तो उन्होंने हिटलर द्वारा यहूदियों के नरसंहार पर खुशी मनाने की बात कही थी। इसके अलावा कश्मीर विरोधी प्रोपेगेंडा का भी प्रचार करने में वो पीछे नहीं रहीं।

कौन हैं इल्हान उमर

रशीदा तलीबी की तरह अमेरिका में एक और मुस्लिम महिला सांसद इल्हान उमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों का बॉयकॉट करने का ऐलान किया, जो कि सोमालिया की मूल निवासी हैं और इस्लाम की जबरदस्त पैरोकार भी। इल्हान वही महिला सांसद हैं जिन्हें तारक फतेह कभी भारत विरोधी कट्टरपंथी कहते थे और जो अपने सगे भाई से शादी करने के कारण पहले भी मीडिया में चर्चा का कारण रह चुकी हैं।

सेमी कंडक्टर प्लांट, फाइटर इंजन भी अब घर में ही बनेगा: जानिए PM मोदी के दौरे से भारत को क्या मिला, अमेरिका के साथ अंतरिक्ष से लेकर रेलवे तक करार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं। गुरुवार (22 जून 2023) को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख सौदों पर हस्ताक्षर किए। ये सौदे ना सिर्फ भारत-अमेरिकी संबंधों में विश्वास बहाली और रिश्तों को नई ऊँचाई पर पहुँचाने की कोशिश हैं, बल्कि इसे हिंद और प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी पर अंकुश लगाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

भारत और अमेरिका ने ना सिर्फ रक्षा क्षेत्र में सौदों किया, बल्कि अंतरिक्ष, सेमी कंडक्टर, व्यवसाय आदि कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत ने भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग को आगे बढ़ाते हुए आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग

नासा (NASA) और इसरो (ISRO) इस साल के अंत तक मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए एक रणनीतिक ढाँचे पर सहयोग करने पर सहमत हुए हैं। नासा 2024 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक संयुक्त मिशन शुरू करने के लक्ष्य के साथ ह्यूस्टन, टेक्सास में जॉनसन स्पेस सेंटर में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करेगा।

इसको लेकर जारी किए गए एक संयुक्त बयान में कहा गया, “नेताओं ने भारत के बेंगलुरु में इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर में नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (एनआईएसएआर) उपग्रह की डिलीवरी का जश्न मनाया और भारत से एनआईएसएआर के 2024 लॉन्च की प्रतीक्षा की।”

आर्टिमिस समझौता

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत की सराहना की। यह मानवता के लाभ के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है। आर्टेमिस समझौता यह सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष अन्वेषण पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, सुरक्षित, स्थायी और पारदर्शी तरीके से किया जाए।

इसके मूल सदस्य संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इटली, जापान, लक्ज़मबर्ग और संयुक्त अरब अमीरात हैं। अधिक से अधिक देश अनुसंधान स्टेशनों, उपग्रहों या फिर रॉकेट लॉन्चरों के माध्यम से अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आर्टेमिस समझौता अन्वेषण, विज्ञान और वाणिज्यिक संचालन को बढ़ावा देने के लिए तय करता है।

भारत में सेमी-कंडक्टर बनाने के लिए माइक्रोन $825 मिलियन निवेश करेगी

अमेरिका और भारत एक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत माइक्रोन टेक्नोलॉजी इंक. ने सरकारी मदद से एक नया सेमीकंडक्टर विनिर्माण और परीक्षण संयंत्र विकसित करने के लिए गुजरात में $825 मिलियन तक निवेश करने की घोषणा की है। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने इस फैसले की सराहना की।

माइक्रोन अगले पाँच वर्षों में कुल 2.75 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी। इससे 5,000 नए और 15,000 सामुदायिक रोजगार के अवसर पैदा करेगा। माइक्रोन के अनुसार, नया सेंटर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की माँग को पूरा करने के अलावा, यहाँ DRAM और NAND उत्पादों के लिए असेंबली और परीक्षण विनिर्माण किया जाएगा।

दूरसंचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और AI में सहयोग

भारत और अमेरिका ओपन आरएएन और 5जी/6जी में अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए आधुनिक दूरसंचार पर दो संयुक्त कार्य बल लॉन्च किए। दोनों देशों द्वारा दिए गए एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि वेंडर और ऑपरेटरों के बीच सार्वजनिक-निजी सहयोग का नेतृत्व भारत के भारत 6G एलायंस और यूनाइटेड स्टेट्स नेक्स्ट जी एलायंस द्वारा किया जाएगा।

एक और महत्वपूर्ण प्रगति क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में सहयोग है। दोनों देशों ने उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त भारत-अमेरिका क्वांटम समन्वय तंत्र (Quantum Coordination Mechanism) का गठन किया है। इसका लक्ष्य अंततः पूर्ण क्वांटम सूचना विज्ञान और प्रौद्योगिकी समझौते तक पहुँचना है।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन ने AI एजुकेशन को आगे बढ़ाने, व्यावसायिक संभावनाओं को बढ़ावा देने और जेनरेटिव एआई सहित भरोसेमंद एवं जिम्मेदार एआई पर संयुक्त और विश्वव्यापी जुड़ाव पर सहमति जताई। अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी (Global Partnership on Artificial Intelligence) के अध्यक्ष के रूप में भारत के नेतृत्व का भी समर्थन किया।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग

अमेरिका के रक्षा दिग्गज GE एयरोस्पेस ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान इंजन बनाने के लिए भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ एक समझौता पर हस्ताक्षर किया है। GE एयरोस्पेस HAL के साथ हल्के लड़ाकू विमान Mk 2 के लिए भारत में अपने F414 जेट इंजन का उत्पादन करेगा।

भारत इस समझौते के बाद अमेरिका, रूस, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के साथ जेट इंजन का उत्पादन करने वाला दुनिया का पाँचवाँ देश बन जाएगा। अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने और रक्षा उत्पादन का विस्तार करने के साथ-साथ यह सौदा भारत के पुराने लड़ाकू बेड़े को बदलने में सहायता करेगा।

कुशल भारतीयों के लिए ‘इन-कंट्री’ रिन्यूएबल H1B वीजा

पीएम मोदी की यात्रा के बीच अमेरिकी सरकार ने ‘इन-कंट्री’ नवीकरणीय एच-1बी वीजा शुरू करने की घोषणा की। इस निर्णय से उन विभिन्न भारतीयों के लिए एच-1बी वीजा के नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान हो जाएगी, जो वर्तमान में एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं। भारतीय पेशेवरों को अब अपने कार्य वीजा को नवीनीकृत करने के लिए विदेश यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

बता दें कि एच-1बी वीजा एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को सैद्धांतिक या तकनीकी क्षमता की आवश्यकता वाले विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेरिकी सरकार की इस घोषणा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया।

MQ9B रीपर ड्रोन खरीद

भारत अमेरिका स्थित जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक. (जीए-एएसआई) से 31 MQ9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदेगा। यह सैन्य बिक्री लगभग 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की है। इस ड्रोन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके जरिए भारत के सैन्य बलों की ISR क्षमताओं में सुधार करेगा। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के दीर्घकालिक उद्देश्यों में इससे मिलेगी।

यह पिछले साल अमेरिका द्वारा भारत को मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) के निर्माण में सुविधा प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) की पेशकश के बाद आया है। इसको लेकर पिछले साल से ही वार्ता चल रही है और आखिरकार इसे मूर्त रूप दे दिया गया।

रेलवे को लेकर समझौता

पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारतीय रेलवे ने यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट/इंडिया (यूएसएआईडी/इंडिया) के साथ MoU पर हस्ताक्षर किया है। इसके अलावा क्लीन एनर्जी और ऊर्जा दक्षता समाधानों पर USAID/भारत के साथ सहयोग की परिकल्पना की गई है।

इसकी अलावा, कार्बन उत्सर्जन को भी कम करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। मिशन नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को पाने के लिए भारतीय रेलवे कार्बन फुटप्रिंट्स को कम करने का प्रयास किया गया है।

माँ-बाप-भाई को पीटती थी महिला, 4 महीने से कमरे में कर रखा था बंद, खाने को देती थी 1 रोटी: दावा- अल्ताफ अंसारी के भड़काने पर हैवान बनी निधि

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बेटी द्वारा बुजुर्ग माता-पिता और भाई पर अत्याचार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अल्ताफ अंसारी नामक व्यक्ति के बहकावे में आकर महिला ने पिता से तीन करोड़ रुपए माँगे। पैसा नहीं देने पर माँ-बाप और भाई को बंधक 4 महीनों से एक कमरे में बंद कर रखा था। बुर्जुग दंपती के दोस्त की शिकायत के बाद पुलिस ने तीनों को मुक्त कराया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत अरेरा कॉलोनी का है। यहाँ रहने वाले 80 साल के बुजुर्ग सीएस सक्सेना एसबीआई में मैनेजर के पद से रिटायर हुए थे। वह अपनी 76 वर्षीय पत्नी कनक सक्सेना और 48 वर्षीय बेटे के साथ रह रहे थे। उनके बेटे की मानसिक हालत ठीक नहीं है। सीएस सक्सेना ने साल 2002 में अपनी बेटी निधि की लखनऊ में शादी की थी। लेकिन 4 महीने पहले उसका अपने पति और ससुराल वालों से झगड़ा हो गया। इसके बाद अपने बेटे को लेकर वह भोपाल आ गई।

भोपाल आने के बाद निधि अपने पिता से तीन करोड़ रुपए की माँग कर रही थी। उन्होंने देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि इसके बाद से निधि ने अपने बड़े बेटे मैथिल ठाकुर के साथ मिलकर बुजुर्ग दंपती और मानसिक रूप से कमजोर भाई के साथ मारपीट करने लगी। उन्हें एक कमरे में बंदकर उनका खाना-पीना कम करा दिया। कथित तौर पर खाने के लिए केवल एक रोटी दी जाती थी। पैसों को लेकर निधि और उसका बेटा मैथिल आए दिन तीनों के साथ मारपीट करते थे।

इसी साल फरवरी में सक्सेना से मिलने उनके एक दोस्त घर आए थे। निधि ने उन्हें लौटा दिया। 19 जून 2023 को दोबारा वही दोस्त मिलने पहुँचे। इस बार भी निधि ने उन्हें अपने पिता से मिलने नहीं दिया। जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो निधि उनके साथ गाली-गलौज करने लगी। इसके बाद सीएस सक्सेना के इस दोस्त ने हबीबगंज थाने में जाकर किसी अनहोनी की आशंका जताई और इसको लेकर लिखित शिकायत की। कार्रवाई करते हुए पुलिस सक्सेना के घर जा पहुँची। निधि ने पुलिस को रोकने की काफी कोशिश की। लेकिन सख्ती के बाद पुलिस घर के अंदर गई तो एक कमरे में ताला लटका मिला। कमरे का ताला खोलने पर बुजुर्ग दंपति और उनका मानसिक रूप से कमजोर बेटा कमरे में बंद मिला। तीनों के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। पुलिस ने तीनों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया है।

निधि की माँ कनक सक्सेना का कहना है कि पहले उनकी बेटी ऐसी नहीं थी। लेकिन एनजीओ संचालक अल्ताफ अंसारी के बहकावे में आकर उसने यह सब किया है। निधि न केवल उन लोगों के साथ मारपीट करती थी, बल्कि उन्हें ढंग से खाना भी नहीं देती थी। उसने माता-पिता से सारे ATM छीन लिए थे और कई सारे पेपर्स पर साइन भी कराए हैं। पुलिस ने आरोपित महिला के खिलाफ मारपीट एवं सीनियर सिटीजन एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज किया है।

‘वो डरा हुआ था, सिर्फ अब्बा के कारण गया’: टाइटेनिक का मलबा देखने गया ‘टाइटन’, सभी 5 अरबपति सवारों की अटलांटिक महासागर में मौत

टाइटेनिक का मलबा देखने की चाह ने पाकिस्तान के बड़े अरबपति बिजनेसमैन और उनके 19 साल के बेटे की जान ले ली। 48 वर्षीय शहजाद दाऊद और उनके बेटे सुलेमान दाऊद कुछ दिन पहले एक पनडुब्बी में बैठ अटलांटिक महासागर गए थे। पर, अब खबर आई है कि दोनों का उसी पनडुब्बी में इंतकाल हो गया।

शहजाद और सुलेमान की इस तरह मौत की खबर सुनने के बाद दाउद फाउंडेशन ने इस संबध में बयान जारी किया। इसमें कहा गया “बड़े दुख के साथ हम शहजाद और सुलेमान दाऊद के इंतकाल के बारे में आपको बता रहे हैं।” आगे पत्र में टाइटन पनडुब्बी पर सवार अन्य यात्रियों के परिवारों के प्रति तहे दिल से संवेदना व्यक्त की गई।

वहीं शहजाद दाऊद की बहन आजमेह ने इस मामले में खुलासा किया है कि उनका भतीजा इस ट्रिप के लिए तैयार नहीं था। उसे जाने में बहुत डर लग रहा था। लेकिन वो फिर भी इस ट्रिप पर गया क्योंकि ये ट्रिप फादर्स डे वाले वीकेंड पर पड़ रही थी। सुलेमान अपने अब्बा को खुश करना चाहता था जो कि बहुत समय से टाइटेनिक को मलबा देखने को बेताब थे।

आजमेह कहती हैं कि उन्हें शुरुआत में तो यकीन ही नहीं था कि उनका भाई और भतीजा अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन जब गुरुवार को ओशनगेट कंपनी ने बताया कि उस पनडुब्बी में बैठा कोई यात्री नहीं बचा तो पूरी तरह टूट गईं। वो कहती है कि भाई और भतीजे के साथ हुई घटना सोच सोचकर उन्हें खुद साँस की दिक्कत बढ़ गई।

शहजाद कराची की एंग्रो कॉर्पोरेशन में उपाध्यक्ष थे। वहीं प्रिंस ट्रस्ट इंटरनेशनल में एडवाइजर थे जिसे किंग्स चार्ल्स III ने स्थापित किया है। बहन आजमेह के अनुसार जब वो लोग पाकिस्तान में थे तब से शहजाद को टाइटैनिक का क्रेज था। वो 1958 में बनी ‘अ नाइट टू रिबेंबर’ देखते थे।

इसके अलावा उन्हें टाइटैनिक की डॉक्यूमेंट्री देखना, म्यूजियम में जाकर उसके मलबे देखना आदि पसंद था। इसलिए जब शहजाद सुलेमान ने टिकट ली तो किसी को हैरानी नहीं हुई।

बता दें कि कुछ दिन पहले खबर आई थी कि टाइटेनिक देखने अटलांटिक महासागर में घुसी पनडुब्बी वहीं गुम हो गई है। इसमें पाकिस्तान के अरबपति शहजाद दाऊद समेत 5 लोग थे। इन्हें ढूँढने के लिए अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की नौसेना ने विशेष अभियान चलाया। जिसके बाद शुक्रवार को खबर आई कि पनडुब्बी में बैठे पाँचों लोगों की मौत हो गई है।

‘बायडेन की बीवी को ग्रीन डायमंड, अपनी पत्नी को क्या…’: PM मोदी के गिफ्ट से जली काॅन्ग्रेस की वह नेताइन, जिस पर टैक्स चोर से उपहार में हीरा लेने का आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका (PM Modi US Visit) के राजकीय दौरे पर हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन और उनकी पत्नी जिल को कई उपहार दिए हैं। बायडेन दंपती से भी पीएम को भेंट मिले हैं। यह एक सामान्य बात है। ऐसा राष्ट्रध्यक्षों के दौरे में होता रहता है। लेकिन काॅन्ग्रेस नेता रेणुका चौधरी (Renuka Chowdhury) ने इसमें भी ओछी राजनीति पर उतारू हो गईं। पीएम मोदी ने जिल बायडेन को 75 कैरेट का कृत्रिम हीरा ‘ग्रीन डायमंड’ उपहार में दिया था। इस पर रेणुका चौधरी ने पीएम मोदी की पत्नी को भी राजनीति में घसीट लिया। ये वही रेणुका चौधरी हैं जिन पर एक टैक्स चोर से गिफ्ट में हीरा लेने का आरोप लग चुका है।

रेणुका चौधरी से जिल बायडेन को पीएम मोदी की ओर से मिले गिफ्ट को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने PM पर तंज कसते हुए कहा, “भाई हम क्या कहें? बायडेन की बीवी को ग्रीन डायमंड दिए हैं। अपनी बीवी को क्या मिला ये मुझे पता नहीं है। ये तो देखना पड़ेगा।”

रेणुका चौधरी पर उपहार में हीरा लेने का आरोप

रेणुका चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2000 में एक टैक्स चोर से 1.2 करोड़ रुपए का हीरा उपहार में लिया था। यह टैक्स चोर पुणे के एक फार्म का मालिक हसन अली खान था। यह मामला तब सामने आया जब 2011 में करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हसन अली पकड़ा गया। कथित तौर पर उसने हवाला के जरिए कोलकाता के उद्योगपति काशीनाथ तापुरिया और दिल्ली के प्रवीण कुमार की मदद से स्विस बैंक के खातों में अरबों डॉलर जमा किए थे।

हसन अली खान के बिजनेस पार्टनर रहे काशीनाथ तापुरिया से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साल 2011 में पूछताछ की थी। इस दौरान तापुरिया ने कहा था कि हसन अली खान ने कॉन्ग्रेस नेता रेणुका चौधरी को 1.2 करोड़ रुपये का हीरा उपहार में दिया था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, काशीनाथ तापुरिया ने कहा था, ”मैंने बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर अब्बास नकवी के सोइर ज्वैलर्स से अपने पास रखने के लिए एक हीरा लिया था। इसकी कीमत करीब 1.2 करोड़ रुपए थी। हसन अली खान ने मुझसे यह हीरा ले लिया और कहा कि तीन महीनों के भीतर या तो हीरा या फिर इसकी कीमत दे देगा।”

तापुरिया ने ED से कहा था, “हसन अली ने रेणुका चौधरी का नाम लेते हुए कहा था कि वह हीरा एक महत्वपूर्ण व्यक्ति को देना चाहता है। उसने कहा था कि रेणुका एक नेता हैं और उसकी बेहद करीबी दोस्त है। हालाँकि इसके बाद हसन ने उस हीरे की कीमत मुझे नहीं दी।”

तापुरिया का बयान सामने आने के बाद रेणुका चौधरी ने खुद पर लगे आरोपों को झूठा करार दिया था। उन्होंने कहा था, “मैं परेशान हूँ और मैं कानूनी कार्यवाही करूँगी। तापुरिया को यह साबित करना होगा कि वह मुझे जानता है या मुझसे मिल चुका है। वह अपने बचाव के लिए मेरा नाम ले रहा है।”

गौरतलब है कि करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब तक सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है। हसन अली खान की 23 फरवरी 2023 को मौत हो चुकी है। कथित तौर पर बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री विजय भास्कर रेड्डी जैसे कई अन्य नेताओं से उसके करीबी संबंध थे।

शिक्षण संस्थानों में होली पर लगा बैन पाकिस्तान ने लिया वापस, इस्लामी मूल्यों के खिलाफ बताकर प्रतिबंधित किया था हिंदुओं का त्योहार

पाकिस्तान के उच्च शिक्षा आयोग (HEC) ने देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में होली उत्सव मनाने पर रोक वाले विभाजनकारी फैसले की विश्व भर में आलोचना के बाद उसे गुरुवार (22 जून 2023) को रद्द कर दिया। 21 जून को HEC ने यह कहते हुए पाकिस्तान के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में होली समारोह पर प्रतिबंध लगा दिया था कि इससे देश की इस्लामी पहचान में गिरावट आ रही है।

HEC ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है, “यह स्पष्ट किया जाता है कि उच्च शिक्षा आयोग (HEC) देश में मनाए जाने वाले सभी धर्मों, आस्थाओं और विश्वासों और उनसे जुड़े त्योहारों एवं उत्सवों का अत्यधिक सम्मान करता है। इस संबंध में दिए गए संदेश का किसी भी तरह से किसी व्यक्ति या समूह की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं है।”

पाकिस्तान के HEC का नोटिस

बयान में कहा गया है, “यह चित्रित धारणा और प्रसारित अर्थ कि एचईसी ने किसी भी उत्सव पर ‘प्रतिबंध’ लगाया है, संचार की भावना के संदर्भ से बाहर है, क्योंकि एचईसी ने देश में उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईएलएस) में मुख्य कारण पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया है। उनके अस्तित्व का मतलब है, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान की गुणवत्ता और राष्ट्र की विचारधारा के अनुसार अनुशासित एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में युवाओं की प्रतिभा का उपयोग करना।”

अपने बयान में पाकिस्तानी उच्च शिक्षा आयोग ने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों में होली के उत्सव पर रोक लगाने वाले उसके पूर्व को नोटिस को ‘संदर्भ से बाहर देखा गया’ और वह अधिसूचना को ‘वापस लेते हुए प्रसन्न’ है, क्योंकि इससे अनजाने में उसके इच्छित संदेश की गलत व्याख्या हुई थी।

कायद-ए-आजम विश्वविद्यालय के छात्रों को परिसर में होली मनाते हुए देखे जाने और इस कार्यक्रम के वीडियो वायरल होने के बाद एचईसी ने नोटिस जारी किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक संगठन मेहरान स्टूडेंट्स काउंसिल द्वारा आयोजित किया गया था।

HEC ने बुधवार को एक नोटिस जारी कर होली पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। आयोग ने अपनी अधिसूचना में कहा था कि पाकिस्तान के इस्लामी सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों का पालन करने के लिए छात्रों को इस त्योहार को मनाने से रोका गया है।

नोटिफिकेशन के अनुसार, “इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सांस्कृतिक, जातीय और धार्मिक विविधता एक समावेशी और सहिष्णु समाज की ओर ले जाती है, जो सभी धर्मों और पंथों का गहराई से सम्मान करता है। हालाँकि, इसे अतिशयोक्ति किए बिना एक नपे-तुले ढंग से करने की आवश्यकता है। छात्रों को निहित स्वार्थों के बारे में जागरूक होने की आवश्यकता है।”

नोटिफिकेशन में आगे कहा गया था कि इन सब बातों को देखते हुए उच्च शिक्षा आयोग सभी शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों को इन सबसे दूर रहने के लिए का निर्देश देता है। आयोग ने कहा कि इन संस्थानों को विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। बता दें कि आयोग फैसला उस वक्त आया है, जब कुछ दिन पहले इस्लामाबाद के कायद-ए-आज़म विश्वविद्यालय (QAU) में होली उत्सव की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए थे।

बता दें कि इस साल पाकिस्तान के कई विश्वविद्यालयों में होली मनाने पर हिंदू विद्यार्थियों पर हमला किया गया था। इस साल मार्च में पाकिस्तान के लाहौर स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में होली खेल रहे हिन्दू छात्रों पर हमले किए गए थे। हमला इस्लामी जमीयत तुलबा (IJT) नाम के एक कट्टरपंथी संगठन ने किया था। इस हमले में 15 छात्रों के घायल हो गए थे।

पीड़ित छात्रों ने दावा किया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से होली आयोजन की अनुमति ले रखी थी। हालाँकि, यूनिवर्सिटी के गार्डों ने भी हमलावरों का ही पक्ष लिया था। सिंध काउंसिल के महासचिव कासिफ ब्रोही ने भी हिन्दू छात्रों द्वारा कार्यक्रम की अनुमति लेने की पुष्टि की थी।

माना जा रहा है कि इस कट्टरपंथी समूह को यूनिवर्सिटी में हो रहे आयोजन की जानकारी हिन्दू छात्रों द्वारा फेसबुक पर की गई पोस्ट से मिली थी। तब उन्होंने सोशल मीडिया पर ही हिन्दू छात्रों को धमकाया भी था। इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यह बात सामने आई थी कि यूनिवर्सिटी के सुरक्षा गार्ड 4-5 हिन्दू छात्रों को अपने साथ गाड़ी में भर कर ले गए। इसकी वजह से पीड़ित छात्र अपनी शिकायत भी नहीं दर्ज करवा पाए थे। 

इतना ही नहीं, पाकिस्तान में हिंदुओं के द्वारा होली मनाने पर सिंध के एक मौलाना ने कहा था कि सिंध की जमीन सूफियों की जमीन है। उसने वहाँ सिर्फ मोहम्मद के दीन का ही जश्न मनाए की नसीहत दी है। भीड़ को संबोधित करते हुए मौलना द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

वायरल वीडियो पाकिस्तान के कट्टरपंथी समूह जमीयत उलेमा ए इस्लामी के सिंध में आयोजित एक सम्मेलन का था। वीडियो में ‘जमीयत उलेमा ए इस्लामी’ के सिंध प्रान्त के सचिव मौलाना राशिद महमूद कहता है, “हिंदू सिंध में होली नहीं खेल सकते। यह जगह दिल्ली और मुंबई नहीं है। यहाँ पर सिर्फ मोहम्मद का दीन मनेगा। यह जमीन सूफी फकीरों की है। हम गैर-मुस्लिमों को जश्न की इजाजत नहीं दे सकते।”