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‘आप हमारे लिए कृष्ण हैं’: गुजराती जोड़े को बंधक बना ब्लेड मारता था पाकिस्तानी, जानिए रथ यात्रा के बीच गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने कैसे बचाई जान

ईरान के तेहरान में एक गुजराती कपल को बंधक बना लिया गया था, जिसे गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी की कशिशों के बाद 24 घंटे के भीतर छुड़ाने में सफलता मिली है। ईरान की राजधानी तेहरान में एक पाकिस्तानी एजेंट ने न सिर्फ इस गुजरती जोड़े को बंधक बनाया था, बल्कि उनकी पिटाई भी की थी। ब्लेड मार-मार कर उन्हें घायल कर दिया गया था। बेरहमी से पिटाई के फोटो-वीडियो दिखा कर परिवार से रंगदारी भी माँगी गई थी।

तेहरान पुलिस ने अब न सिर्फ पाकिस्तानी एजेंट और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया है, बल्कि बंधक बनाए गए भारतीय जोड़े को भी छुड़ाने में सफलता पाई है। ये सब संभव हुआ गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी के प्रयासों से। पंकज और उनकी उनकी पत्नी निशा पटेल असल में अमेरिका में एंट्री करना चाहते थे। उनके पास कोई वैध अनुमति नहीं थी, ऐसे में वो नियमों का उल्लंघन कर के ऐसा कर रहे थे। इस दौरान वो हैदराबाद के एक एजेंट के चक्कर में फँस गए।

उक्त एजेंट ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पहले उन्हें ईरान भेजा जाएगा और फिर वहाँ से अमेरिका पहुँचा दिया जाएगा। साथ ही ईरान का वीजा और फ्लाइट का टिकट भी तैयार करवा दिया। जब वो ईरान पहुँचे तो एयरपोर्ट पर उन्हें एक पाकिस्तानी एजेंट ने रिसीव किया। वो उन्हें वहाँ से लेकर गया और बंधक बना लिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि पंकज को पीठ के बल लिटाया गया था और उनके हाथ बँधे हुए थे। उनकी पीठ पर दर्जनों घाव थे।

वीडियो में वो दर्द से छटपटाते हुए कहते हैं कि ये जितने पैसे माँगें, इन्हें दे दो। यहाँ परिवार ने इस मामले में नरोडा स्थित पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया। गृह मंत्री हर्ष सांघवी से मदद माँगी। सांघवी इस मामले को लेकर गंभीर हुए और उन्होंने तुरंत केंद्रीय विदेश मंत्रालय के साथ-साथ भारतीय दूतावास को सूचित किया। रथयात्रा की तैयारियों के बीच वो मामले की जानकारी लेते रहे। परिवार ने अब हर्ष सांघवी को मैसेज भेज कर उन्हें धन्यवाद कहा है।

पंकज और निशा को छुड़ा कर गुजरात लाया जा रहा है। पंकज और निशा के परिजनों ने गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी को लेकर कहा कि हम आपका जितना धन्यवाद करें कम है, आप हमारे लिए श्रीकृष्ण बन के आए। परिजनों ने बताया कि उन्हें हर्ष सांघवी को सिर्फ एक व्हाट्सएप्प मैसेज किया, और उन्होंने पूरी मेहनत कर के 24 घंटे के भीतर में बंधक बनाए गए कपल की रिहाई सुनिश्चित की। उन्होंने केंद्र सरकार का भी धन्यवाद दिया।

नेहरू की तस्वीर दिखा योग दिवस पर काॅन्ग्रेस कर रही थी पाॅलिटिकल आसन, अपने ही MP शशि थरूर ने करा दिया शीर्षासन

आज यानी 21 जून 2023 को विश्व योग दिवस (International Yoga Day) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के प्रयास से भारत की संस्कृति एवं धरोहर का एक प्रमुख हिस्सा योग के रूप में आज दुनिया को शांति और स्वास्थ्य प्रदान कर रहा है। हालाँकि, इसको लेकर भी कॉन्ग्रेस राजनीति करती दिख रही है। जहाँ कॉन्ग्रेस इसे पंडित जवाहरलाल नेहरू का योगदान मान रही है, वहीं पार्टी सांसद शशि थरूर इसके लिए पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं।

विश्व योग दिवस पर केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। थरूर ने यह प्रतिक्रिया कॉन्ग्रेस के ट्वीट पर दी, जिसमें नेहरू को शीर्षासन करते हुए दिखाया गया है और योग को प्रचलित करने का श्रेय उन्हें दी गई है।

शशि थरूर ने कहा ट्वीट में लिखा, “बेशक! हमें हमारी सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय सहित उन सभी के योगदान को भी स्वीकार करना चाहिए, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से #InternationalYogaDay के रूप में योग को अंतर्राष्ट्रीय पर पुनर्जीवित किया और लोकप्रिय बनाया। जैसा कि मैंने दशकों से तर्क दिया है, योग दुनिया भर में हमारी सॉफ्ट पावर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे मान्यता प्राप्त होते देखना बहुत अच्छा है।”

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने बुधवार (21 जून 2023) को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का शीर्षासन करते हुए एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर के साथ के कॉन्ग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम पं. नेहरू का धन्यवादा करते हैं, जिन्होंने योग को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और यहाँ तक कि इसे राष्ट्रीय नीति का हिस्सा भी बनाया था। आइए हम अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में प्राचीन कला और दर्शन के महत्व की सराहना करें और इसे अपने जीवन में शामिल करने के लिए कदम उठाएँ।”

कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल के साथ-साथ कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी नेहरू की उस तस्वीर को साझा किया है। इसके साथ ही जयराम ने लिखा, “डिस्कवरी ऑफ इंडिया में पंडित नेहरू ने कहा- पतंजलि की योग प्रणाली अनिवार्य रूप से शरीर के अनुशासन और मानसिक एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण के लिए जरूरी तरीका है।”

बता दें कि साल 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को संयुक्त राष्ट्र संघ में मान्यता दिलवाकर योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय किया था। भारत के आह्वान पर दुनिया के 180 से ज्यादा देश एक साथ आए और योग का समर्थन किया था।

दरअसल, पीएम मोदी अमेरिका की यात्रा पर हैं और वे न्‍यूयॉर्क में योग दिवस मना रहे हैं। इस दौरान पीएम ने एक वीडियो संदेश में कहा, “2014 में जब संयुक्त राष्ट्र आम सभा में योग दिवस का प्रस्ताव आया था तो रिकॉर्ड देशों ने समर्थन दिया था। आज योग एक वैश्विक आंदोलन और भावना बन गया है।”

‘पुलिसवालों को मार दो, सब जला दो, कोई जिंदा न बचे’: इस्लामी भीड़ ने जूनागढ़ में कैसे की हिंसा, FIR से हुआ खुलासा

गुजरात के जूनागढ़ में 16 जून 2023 को इस्लामी भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। आरोप है कि हिंसक भीड़ शहर की एक दरगाह से अवैध अतिक्रमण हटाने का नोटिस देख कर भड़की थी। हमले के दौरान पुलिस के साथ आम नागरिकों को ले जा रही एक बस पर पत्थरबाजी की गई। इस हमले में 4 पुलिसकर्मियों के अलावा 1 हिन्दू नागरिक भी घायल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में 31 हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायत एक महिला पुलिसकर्मी ने दी है।

दिव्य भास्कर के मुताबिक मामला संभाग थाना क्षेत्र का है। यहाँ मुस्लिमों की भीड़ मजेवाड़ी दरगाह पर अवैध अतिक्रमण हटाने का नोटिस देख कर विरोध के नाम पर जमा हुई थी। भीड़ में 500 से 600 लोग थे। महिलाएँ भी शामिल थीं। इस हंगामे की जानकारी होते ही रात के लगभग 8:30 बजे पुलिस को दरगाह पर पहुँचने के निर्देश मिले। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों से अपनी बात कानूनी ढंग से रखने के लिए कहा। आरोप है कि पुलिस की इस माँग पर भीड़ और भड़क गई।

इस घटना की शिकायत में बताया गया है कि हमले के दौरान भीड़ ‘अल्लाह हू अकबर’ ‘नारा ए तकबीर’ के साथ ‘सब जला दो’, ‘मारो पुलिस वालों को’, “कोई जिन्दा न बचे’ जैसे उत्तेजक नारेबाजी कर रही थी। यह भी बताया गया है कि भीड़ में से कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पुलिस वालों को मार डालने के बाद रास्ते में कोई नहीं आएगा। हमलावर भीड़ के आगे बढ़ने पर उसमें से कुछ लोगों ने दरगाह के पास खड़ी बाइकों में आग लगा दी। आसपास से गुजर रहे राहगीरों पर भी पत्थर मारे गए।

भीड़ में से कुछ लोगों ने एक यात्री बस पर पत्थरबाजी की। बस के शीशे तोड़ दिए गए। हमले में पत्थरों के अलावा लाठी-डंडों का भी प्रयोग हुआ। हमले के दौरान 4 पुलिस वाले और एक हिन्दू नागरिक घायल हो गया। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में घायल नागरिक ने दम तोड़ दिया। महिला पुलिसकर्मी की तहरीर पर इस हिंसा में 31 आरोपितों को नामजद करते हुए सैकड़ों अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज हुई है।

जिन आरोपितों को नामजद किया गया है, उनके नाम हैं;

1) नसीरुद्दीन उर्फ नसरो
2) सिकंदर सुलेमान
3) मुस्तकीम अशरफभाई
4) साजिद कलामुद्दीन अंसारी
5) जाकिर यूसुफ
6) फैजल खान
7) अकबर मियां
8) शकील जानुलहक अंसारी
9)आफताब असगर अली अंसारी
10) फिरोज अमदभाई
11) मुस्ताक मोहम्मद
12) बशीर ममदभाई
13) मुस्तफा यूसुफभाई
14) वसीम उर्फ लादेन
15) साबिर यूसुफभाई
16) सब्बीरहुसैन मोहम्मदहुसैन
17) अमन बोडूभाई
18) फैजान इकबालभाई शेख,
19) फरदीन इकबालभाई
20) आसिफ यूनुस जुनेजा
21) अरमान असलम अरब
22) साजिद उर्फ तव इकबाल
23) यूसुफ इकबालभाई मालेक
24) अफजल असरफभाई मेमन
25) साजिद सरवादी
26) लाल बादशाह
27) फैजल उर्फ कोठमीर फिरोजभाई
28) एजाज उर्फ रियाज
29) रणजीत मुनाभाई
30) अमन अदरेमन पांजा
31) आद्रेमन आमद पंजा जगमाल चौक

बताते चलें कि जूनागढ़ नगर निगम की ओर से जूनागढ़ के मजेवाड़ी गेट के बाहर सड़क पर बनी दरगाह को अवैध अतिक्रमण बताते हुए हटाने का नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में इस दरगाह के सदस्यों को 5 दिनों के भीतर जमीन के मालिकाना हक के कागजात दिखाने के लिए कहा गया था। हालाँकि कागज दिखाने के बजाए मुस्लिम समुदाय के लोग 16 जून की शाम दरगाह के पास जमा होकर पुलिस पर हमला कर दिया।

जिस यात्री बस पर हमला किया गया था, उसके ड्राइवर आसिफ के मुताबिक भीड़ ने गेट को बाहर से बंद कर दिया था। आरोप है कि हमलावरों ने बस में आग लगाने की कोशिश की। आसिफ का दावा है कि जब उन्होंने भीड़ को अपना नाम बताया तब उन्हें बस से उतरने दिया गया।

‘मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी’: पाकिस्तान परस्त अमेरिकी सांसद ने दिखाई हिंदू घृणा, नेटिजंस बोले- सगे भाई से निकाह करने वाली न आए तो ही बेहतर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी (PM Modi US Visit) दौरे पर हैं। अमेरिका के बड़े कारोबारी और विचारकों ने उनसे मुलाकात की है। उनके नेतृत्व की प्रशंसा कर रहे हैं। दूसरी ओर इल्हान उमर (Ilhan Omar) जैसे कुछ अमेरिकी सांसद भी हैं जो इस मौके पर भी भारत और हिंदुओं को लेकर अपनी घृणा का प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी काॅन्ग्रेस की महिला सदस्य ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में शामिल नहीं होंगी। पीएम मोदी अमेरिकी काॅन्ग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। दो बार अमेरिकी सदन को संबोधित करने वाले वे पहले भारतीय नेता हैं।

21 जून 2023 को एक ट्वीट में इल्हान उमर ने कहा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है। हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को गले लगाया है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी।” उन्होंने आगे लिखा है, “मैं पीएम मोदी के दमन और हिंसा के रिकॉर्ड पर चर्चा करने के लिए मानवाधिकार समूहों के साथ एक ब्रीफिंग करूँगी।” 

अपने भारत विरोधी इस रुख के लिए इल्हान उमर नेटिजंस के भी निशाने पर हैं। @DruzeSaher ने पूछा, “आपने पाकिस्तान का दौरा किया और आप अल्पसंख्यकों के दमन की शिकायत कर रही हैं? वहीं राष्ट्र सर्वोपरि नाम के एक अन्य यूजर ने इल्हान उमर के मोदी के कार्यक्रम में न जाने के एलान पर कहा, “जाने की जरूरत भी नहीं है। वो ऐसे लोगों को पसंद भी नहीं करते जिसने अपने भाई से ही निकाह कर लिया हो।” रिकी नाम के यूजर ने भी इल्हान उमर के भाई से निकाह वाली बात दोहराई है।

चित्र साभार- @IlhanMN के ट्वीट पर आए जवाब

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

पाकिस्तान परस्त डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर अफ्रीकी मूल की हैं। पिछले साल उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा किया था। आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने भी उनका जोरदार स्वागत किया था। लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया था। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया था।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। उन्हें मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है। कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। 

इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं। उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुसलमानों के प्रति नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।” अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।

इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?” यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी। डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

जल्द ही भारत आएगी टेस्ला, PM मोदी से मिलकर बोले एलन मस्क- मैं उनका फैन, वे वाकई भारत की परवाह करते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दौरे पर हैं। मंगलवार (20 जून 2022) की रात उन्होंने 24 दिग्गजों से मुलाकात की। इनमें दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क भी शामिल थे। मुलाकात के बाद मस्क ने खुद को पीएम मोदी का फैन बताया। साथ ही जल्द भारत में टेस्ला की ईकाई स्थापित करने की बात भी कही।

मस्क ने अगले साल भारत आने की भी बात कही है। कहा है कि बिजनेस के लिए किसी भी दूसरे बड़े देश से भारत में ज्यादा संभावना है। पीएम मोदी को ऐसा व्यक्ति बताया है जो वास्तव में भारत की परवाह करते हैं। वे वही करते हैं जो देशहित में होता है। मस्क ने कहा कि PM मोदी नई कंपनियों का समर्थन भारत का फायदा देख कर करते हैं।

मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए मस्क ने बताया कि ट्विटर के पास किसी देश की सरकार द्वारा लगाए गए नियमों का पालन करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा न करने पर उस देश में ट्विटर को बैन कर दिया जाएगा।

मस्क ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर काफी खुश हैं। मोदी को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने वाला नेता बताते हुए भारत में टेस्ला कारों के भविष्य पर भी बात की। मस्क के मुताबिक टेस्ला के लिए फैक्ट्री की जगह चिन्हित करने का काम चल रहा है और इस साल के अंत तक उसे तय कर लिया जाएगा।

एलन मस्क ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत में निवेश का न्योता दिया गया है जिसके चलते वो अगले साल भारत आ रहे हैं।उन्होंने बताया कि सोलर एनर्जी जेनरेट और इंटरनेट सेक्टर के लिए भारत काफी अच्छी जगह है। बकौल मस्क उनके द्वारा निवेश के बाद दूरदराज के इलाकों में सस्ता इंटरनेट पहुँचाने में भी मदद मिलेगी।

₹8 लाख करोड़ का कारोबार, महिलाओं से लेकर जनजातीय समाज के कारीगरों का बना करियर: विश्व भर में योग का डंका, US में 48 हजार सेंटर

इंसान को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए योग कितना लाभकारी है इसे आज बताने की आवश्यकता नहीं है। बीते कुछ सालों में भारत के बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक योग को लेकर जागरूक हुए हैं और इसका श्रेय कहीं न कहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। पीएम ने साल 2015 में योगा डे का कॉन्सेप्ट शुरू किया और लोगों से बड़ी मात्रा में आकर योग प्रोग्रामों में शामिल होने की अपील की। उनके एक आह्वान के बाद स्कूल-कॉलेजों से लेकर विभिन्न संस्थानों में इस दिवस की महत्वता बढ़ गई और बाद में इसका प्रभाव तब देखने को मिला जब कोविड आया।

कोविड काल में तन-मन स्वस्थ रखने के लिए लोगों ने योग में विश्वास जताया। नतीजा ये हुआ लॉकडाउन के बाद पार्क में योग क्लासेस की संख्या बढ़ी, ऑफलाइन मोड में कई योग सेंटर अस्तित्व में आए, कई लोगों ने इसे ऑनलाइन भी अपनाना शुरू किया। इन पहलों से एक ओर तो उन लोगों को फायदा हुआ जिन्हें अपने फिट होने के सफर में योग की जरूरत थी, दूसरा उन लोगों को भी इसका लाभ हुआ जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इस प्रकार से योग का क्षेत्र अचानक करियर या रोजगार के तौर पर उभरेगा।

योग क्षेत्र में करियर बना रहीं महिलाएँ

ऋषिकेष योग पीठ में 15-20 साल तक प्रशिक्षण दे चुकी सीनियर योग टीचर दीप्ति कुलश्रेष्ठ ऑपइंडिया से बातचीत में बताती हैं कि योग उनके लिए आध्यात्म है और आज जो योग को लोकप्रियता मिली है उसके लिए वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आभारी भी हैं। दीप्ति का मानना है कि योग वही लोग कर पाते हैं जिन्हें मन से योग करना होता है। कोरोना के बाद से दीप्ति ने अपनी ऑनलाइन योगा क्लासों को भी शुरू किया है। बीते समय में बतौर सीनियर योग टीचर रहते हुए कई विदेशियों को योग प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

इसी तरह लक्ष्मी नगर स्थित नित्यम योग सेंटर की 30 वर्षीय योगाचार्या प्रीति वर्मा इस संबंध में बताती हैं कि उनके सेंटर पर योग के 5 बैच चलते हैं। हर बैच में कम से 10-12 लोग आते हैं। इस तरह वो एक तय अमाउंट में प्रति दिन 50 से ज्यादा लोगों को योग सिखाने का कार्य करती हैं। बीते 12 वर्षों से योग के क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाली प्रीति मानती है कि योग के बारे में लोग पहले सोचते थे कि ये पुराने काल की बातें और इसका संबंध सिर्फ ऋषियों और मुनियों से ही है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका जिक्र किए जाने के बाद लोगों में योग के प्रति जागरूकता और उत्साह दोनों बढ़ा जबकि कोविड के बाद लोगों को इसकी जरूरत खुद महसूस होने लगी। वह बताती हैं कि उन्होंने कोरोना काल में लोगों को मुफ्त में योग क्लासें दीं और पाया कि योग करने वाले लोग इस बीमारी से जल्दी रिकवर होने में सक्षम थे।

योग की महत्वता और एक रोजगार की तरह हो रहे उसके विकास का अंदाजा हम इस बात से भी लगा सकते हैं कि जो लोग दूसरे क्षेत्रों में कार्यरत हैं वह भी आज अलग से इसमें संभावना देख रहे हैं। जैसे सिसी अगस्तन। जनसंपर्क क्षेत्र में काम करने वाली सिसी ने कुछ समय पहले योगा क्लासें देनी शुरू कीं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें याद है कि साल 2015 के बाद योग लोगों के बीच पॉपुलर होना शुरू हुआ था। अगस्तन के अनुसार लोगों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उन्होंने योग की क्लासें देनी शुरू की थी और जैसे-जैसे उनके पास योग सीखने वालों की संख्या बढ़ेगी वो कोशिश करेंगी कि अलग से एक स्पेस लेकर वो अपनी योगा क्लासें चलाएँ।

AYUSH मंत्रालय की स्थापना

बता दें कि भारत में योग का इतिहास 5 हजार से 10 हजार साल पुराना है, लेकिन आधुनिक होने के क्रम में इसे पिछड़ा मान लिया गया। देश में इसे लेकर जागरूकता घर-घर में फैलनी तब शुरू हुई जब साल 2014 में मोदी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए। 2014 में जब मोदी सरकार सरकार आई तो नवंबर माह में आयुष मंत्रालय बनाया गया। इस मंत्रालय का उद्देशय ही यही था कि आयुर्वेद, योग, नैचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होमियोपैथी (AYUSH) सेक्टर में नए स्टार्टअप हों। इस मंत्रालय ने उन उद्यमियों को सहारा देना शुरू किया जो इन दिशाओं में काम कर रहे थे। इसकी स्थापना के बाद साल 2015 में प्रधानमंत्री द्वारा योगा डे मनाने की घोषण की गई और उसके बाद तो अचानक योग के कारोबार में वृद्धि दिखी। 

आयुष मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट (2022-23) पृष्ठ संख्या 12-13 पर दी सूचना के अनुसार, 2014-15 से लेकर 2020 में आयुष की मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री में बहुत अधिक उछाल आया। साल 2014-15 में आयुष मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री केवल 21, 697 करोड़ रुपए की थी। जबकि 2020 तक ये 6 गुना बढ़ी और 1,37, 800 करोड़ हो गई। इसी तरह आयुष के सर्विस सेक्टर में हुआ प्रारंभिक आँकड़ा भी 1,66, 797 करोड़ के राजस्व इकट्ठा होने की जानकारी देता है। वहीं साल 2022 में भारत के केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ये भी कह चुके हैं कि भारतीय आयुष क्षेत्र 2023 तक कम से कम 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार पर अपना कब्जा जमा लेगा। उन्होंने कहा था कि आयुष मंत्रालय भारत के आयुष क्षेत्र को वांछित समय सीमा के भीतर इस लक्ष्य तक पहुंचने में समर्थ बनाने के लिए कई पहल भी कर रहा है।

WHO ने माना योग का लोहा, अमेरिका में क्रेज बढ़ा

इसके अलावा केवल योग सेक्टर की बात करें तो स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के अलावा अंतरराष्ट्रीय लेवल पर भी योग की महत्ता बीते कुछ सालों में ही बहुत बढ़ी। WHO ने तो योग को जरूरत समझते हुए इसे वैश्विक स्तर पर ले -जाने के लिए आयुष मंत्रालय के साथ मिल WHOmYoga एप को भी लॉन्च किया, ताकि कहीं भी बैठे लोग योग से अपने जीवन को सुधार सकें।

इन प्रयासों का असर ये हुआ कि भारत के अलावा अमेरिका जैसे देशों में भी योग का क्रेज बढ़ गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, आज 36 मिलियन से ज्यादा अमेरिकन योग का अभ्यास करते हैं व 48 हजार से ज्यादा पाइलेट्स व योग स्टूडियो यूएस में खुले हुए हैं। वहाँ एक औसत योगा प्रैक्टिशनर अपनी योगा क्लास, वर्कशॉप तथा उपकरणों पर एवरेज 62 हजार 640 डॉलर खर्चता है और इस तरह अमेरिका में योग सेक्टर एक बेहतरीन ढंग से हर साल ग्रो करता है। 

ग्लोबल योगा मार्केट की बात करें तो रिपोर्ट बताती है कि साल 2022 में योग का कारोबार 8 लाख करोड़ रुपए पहुँचा था जबकि 2023 से 2028 के बीच में योग 9 फीसद बढ़कर 9.6 लाख करोड़ रुपए (₹96,42,18,86,40,000) होने की पूरी संभावना है।

योग दिवस के कारण रोजगार में वृद्धि

इसी तरह भारत में भी न केवल योग सीखने और सिखाने वाले इस सेक्टर को मजबूत कर रहे हैं बल्कि वो लोग भी अच्छा कमा रहे हैं जो योगा से जुड़े मैट आदि उपकरण बनाते हैं। सरकार ऐसे स्टार्टअप को सपोर्ट करने में पूरा सहयोग कर रही है। उदाहरण के लिए इकोनॉमिक टाइम्स में 20 जून 2023 को प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि आयुष मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले 34,000 योग मैट प्रदान करने के लिए ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) के साथ हाथ मिलाया। इस सराहनीय पहल का उद्देश्य जनजातीय कारीगरों के उत्थान और उनकी असाधारण शिल्प कौशल का प्रदर्शन बताया जा रहा है।

इसी तरह डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार नोएडा स्थित योग स्टूडियो प्रणव योग के निदेशक एमएस श्रीनाथ ने पिछले साल बताया था कि योग दिवस की बदौलत उनका कारोबार हर साल जून और जुलाई में 30-40 फीसदी तक बढ़ जाता है। उनके साथ पिछले वर्ष तक 300 से अधिक योग छात्र नामांकित थे जिनमें से 112 पिछले साल इन दो महीनों में परमानेंट मेम्बरशिप के लिए आए थे। श्रीनाथ ने ये भी बताया था कि पिछले कुछ वर्षों में योग के लिए साइन अप करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।

चीन ने फिर चली अपनी चाल, 26/11 के गुनहगार साजिद मीर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने से रोका: UN में भारत-अमेरिका के प्रस्ताव पर लगाया वीटो

आतंकवाद पर चीन का चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। चीन ने 26/11 आतंकी हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी साजिद मीर (Sajid Mir) को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा दिया। भारत और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव रखा था। चीन इससे पहले भी साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को रोक चुका है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अल-कायदा प्रतिबंध समिति 1267 के समक्ष साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में मीर की संपत्ति जब्त करने से लेकर उसकी यात्रा पर प्रतिबंध लगाने और हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। लेकिन चीन ने एक बार फिर वीटो लगाते हुए साजिद मीर को बचा लिया।

इससे पहले, सितंबर 2022 में साजिद मीर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए एक प्रस्ताव लाया गया था। हालाँकि, तब भी चीन ने इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। बता दें कि साजिद मीर भारत और अमेरिका का मोस्ट वांटेड आतंकी है। साजिद साल 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले में शामिल था। इस हमले में भारतीयों सहित अमेरिकी नागरिक भी इस्लामी आतंकवाद का शिकार बन गए थे। ऐसे में अमेरिका ने उस पर 5 लाख डॉलर का इनाम रखा हुआ है।

गौरतलब है कि जून 2022 में पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने टेरर फंडिंग मामले में साजिद मीर को 15 साल से अधिक की सजा सुनाई थी। दिलचस्प बात यह है कि पहले पाकिस्तान दावा करता था कि साजिद मीर मर चुका है। लेकिन भारत, अमेरिका समेत अन्य कई देश उसकी मौत का सबूत माँग रहे थे। हालाँकि इसके बाद एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के दबाव के बाद पाकिस्तान ने कथित तौर पर साजिद मीर के खिलाफ एक्शन लिया था।

मसूद अजहर को भी बचाता रहा है चीन

ज्ञात हो कि इससे पहले चीन आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषणा करने के प्रस्ताव पर भी रोक लगाता रहा है। हालाँकि दुनियाभर के देशों के सामने बार-बार बेनकाब होने के बाद आखिरकार मई 2019 में चीन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए तैयार हो गया था। अब मसूद अजहर एक वैश्विक आतंकी है।

रामचरितमानस पर टिप्पणी करने वाले बिहार के मंत्री के घर में ही कलह, भाई थामेंगे BJP का दामन: बोले – सामाजिक समरसता के प्रबल समर्थक थे तुलसीदास

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव के भाई प्रोफेसर रामचंद्र प्रसाद ने भाजपा का दामन थामने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही मधेपुरा के राजद विधायक के घर में ही कलह शुरू हो गई है। अधिकतर मौकों पर रामचंद्र प्रसाद को अपने छोटे भाई चंद्रशेखर यादव के साथ देखा गया था, लेकिन अब उन्होंने किनारा कर लिया है। उन्होंने खुद को राष्ट्रवादी बताते हुए कहा है कि वो भाजपा की नीतियों से प्रभावित हैं। इसके साथ ही भाजपा ने बिहार के शिक्षा मंत्री को उनके घर में ही घेर लिया है।

मधेपुरा यादव बहुल क्षेत्र है, जहाँ लोकसभा से लेकर विधानसभा की सीटों तक पर अहीर समाज के लोग जीत दर्ज करते आए हैं। इसी कारण यहाँ ‘मधेपुरा गोप का’ वाली कहावत प्रचलित है। प्रोफेसर रामचंद्र प्रसाद ने राजद और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि ये दोनों दल OBC समाज को आरक्षण के नाम पर गुमराह कर रहे हैं, ठग रहे हैं। उन्होंने अपने भाई द्वारा रामचरितमानस पर टिप्पणी किए जाने का भी विरोध किया।

प्रोफेसर चंद्रशेखर यादव ने दावा किया था कि तुलसीदास जातिवादी थे और रामचरितमानस में जातिवादी चौपाइयाँ हैं जिन्हें हटाया जाना चाहिए। इस पर उनके बड़े भाई ने कहा कि तुलसीदास समरसता के प्रबल समर्थक थे और अवधि भाषा में लिखी गई रामचरितमानस को बिना पढ़े-समझे उस पर किसी तरह की टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं हैं। मंत्री चंद्रशेखर यादव ने रामचरितमानस को नफरती ग्रन्थ तक करार दिया था, जिसके बाद उनकी खासी आलोचना हुई थी।

अगले विधानसभा चुनाव में भाई के खिलाफ लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी चाहेगी तो वो ज़रूर लड़ेंगे। उन्होंने इसके लिए माधवराव सिंधिया और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्माता सीतारमण का उदाहरण देते हुए कहा कि इन घरानों के अलग-अलग लोग अलग-अलग परिवारों में रहे। 24 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा मधुबनी में रैली करने वाले हैं, जहाँ वो भाजपा में शामिल हो सकते हैं। DU के सत्यवती कॉलेज से बतौर प्रोफेसर रिटायर हुए रामचंद्र प्रसाद का कहना है कि अगली बार कोसी क्षेत्र में कमल खिलने वाला है।

हिन्दू लड़के से शादी करने जा रही थी मुस्लिम लड़की, मंदिर से उठा कर ले गई केरल पुलिस: वीडियो में चीखती-चिल्लाती आई नजर, अब कोर्ट ने दी शादी की अनुमति

केरल के अल्फिया और अखिल की शादी की सुर्खियों में बनी हुई है। सुर्खियों का कारण वहाँ की पुलिस है। दरअसल, अल्फिया और अखिल शादी के मंडप में बैठे हुए थे। तभी पुलिस आई और अल्फिया को मण्डप से खींचकर ले गई। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुँचा। कोर्ट के आदेश के बाद अखिल और अल्फिया मंगलवार (20 जून, 2023) को शादी करेंगे।

दरअसल, अल्फिया मुस्लिम है। वहीं, अखिल हिंदू है। दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं। इसलिए अल्फिया शुक्रवार (16 जून, 2023) को घर से भागकर तिरुवनंतपुरम आ गई थी। अखिल और अल्फिया शनिवार (17 जून, 2023) को तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में शादी करने वाले थे। वहीं, दूसरी ओर अल्फिया के घर वालों ने उसके गुमशुदगी की शिकायत पुलिस को दे दी थी। इसके बाद पुलिस अल्फिया की तलाश में जुटी हुई थी। 

शनिवार को अखिल और अल्फिया शादी करने के लिए मण्डप में बैठे हुए थे। तभी वहाँ पुलिस आ धमकी। पुलिस अल्फिया को अपने साथ लेने आई थी। लेकिन अल्फिया ने साफ तौर पर कह दिया था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से शादी कर रही है। हालाँकि इसके बाद भी पुलिस उसे वहाँ से जबरन ले जाने की कोशिश करने लगी। ऐसे में अल्फिया चींखने, चिल्लाने लगी और वह लगातार कहने कि उसे नहीं जाना है। अल्फिया के लाख मना करने के बाद भी पुलिस उसे जबरन उठाकर ले गई थी। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में अल्फिया को चिल्लाते हुए देखा जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार अल्फिया और अखिल ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा है कि पुलिस ने अल्फिया को कोर्ट में पेश किया था। जहाँ अल्फिया ने कोर्ट में कहा था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से अखिल के साथ शादी कर रही है। इसके बाद कोर्ट ने अल्फिया को अखिल के साथ जाने की इजाजत दे दी। अब दोनों मंगलवार (20 जून, 2023) को तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में शादी करेंगे।

अल्फिया का कहना है कि वह अपनी मर्जी से अखिल के साथ शादी करने के लिए घर से तिरुवनंतपुरम आई थी। उसके घर वाले नहीं चाहते कि वह अखिल से शादी करे। लेकिन वह बालिग है। इसलिए अपनी जिंदगी के फैसले वह खुद ले सकती है। पुलिस जब उसे उठाने के लिए मंदिर पहुँची थी, तब भी वह पुलिस को यही समझाना चाहती थी। लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी। अखिल और अल्फिया ने पुलिस द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के खिलाफ शिकायत करने का भी फैसला किया है।

पुलिस ने पेश की सफाई

लड़की को जबरन मंदिर से उठाने को लेकर पुलिस ने सफाई पेश की है। पुलिस का कहना है कि वह सिर्फ अपने कर्तव्य का पालन कर रही थी। दूल्हा और दुल्हन यदि सहयोग करते तो ऐसा नहीं होता। कोर्ट में पेश करने के बाद दुल्हन को छोड़ दिया।

‘जैसे 21 को योग दिवस, वैसे ही 20 जून को घोषित किया जाए अंतरराष्ट्रीय गद्दार दिवस’: संजय राउत ने UN महासचिव को पत्र लिख बयाँ किया दर्द – 40 MLA हमें छोड़ गए

महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता संजय राउत ने UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने 20 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय गद्दार दिवस (World Traitors Day)’ घोषित किए जाने की माँग की है। उन्होंने खुद को राज्यसभा सांसद और उद्धव ठाकरे की पार्टी का प्रतिनिधि बताते हुए ये पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने बताया है कि उनकी पार्टी शिवसेना (UBT) पश्चिमी भारत के एक महत्वपूर्ण राज्य महाराष्ट्र से ताल्लुक रखती है।

पत्र में संजय राउत ने आगे लिखा है, “बाल ठाकरे ने स्थानीय युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए शिवसेना की स्थापना 1966 में बॉम्बे (अब मुंबई) में की थी। मेरी पार्टी का नेतृत्व अब उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जो 28 नवंबर, 2019 से लेकर 29 जून, 2022 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। 20 जून को 40 विधायकों के एक बड़े समूह ने भाजपा द्वारा धमकाए जाने के बाद हमारी पार्टी को छोड़ दिया। बताया गया है कि दल-बदल के लिए उनमें से प्रत्येक ने 50-50 करोड़ रुपए लिए।”

संजय राउत ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लिखे गए पत्र में आरोप लगाया है कि भाजपा ने हर वो कोशिश की, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार गिर जाए। उन्होंने लिखा कि जो 40 विधायक शिवसेना छोड़ कर गए उनके नेतृत्व एक अन्य प्रमुख विधायक एकनाथ शिंदे कर रहे थे, जो फ़िलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं। संजय राउत ने लिखा कि इनके अलावा MVA सरकार का समर्थन कर रहे 10 निर्दलीय भी छोड़ कर चले गए।

शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव संपादक संजय राउत ने दावा किया है कि पार्टी छोड़ कर विधायकों के जाने का सिलसिला 20 जून (2022) को ही शुरू हुआ था, जब एकनाथ शिंदे के साथ कुछ विधायक महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य गुजरात निकल गए थे। बकौल संजय राउत, उन्होंने उद्धव ठाकरे को धोखा दिया जिनका 2021 में 12 एवं 21 नवंबर को 2 सर्जरी हुई थी और वो बीमार थे। बकौल संजय राउत, 21 जून को योग दिवस की तरह 20 जून को गद्दार दिवस घोषित किया जाना चाहिए।