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‘बजरंग दल’ के दलित समर्थक की हत्या, उत्तराखंड पुलिस ने आजम, इरफ़ान, रिजवान और साबिर को दबोचा: मृतक के परिवार का आरोप – घर में घुस महिलाओं से की थी छेड़छाड़

उत्तराखंड के नैनीताल में ‘बजरंग दल’ के समर्थक दलित अरविंद सागर उर्फ़ पप्पी की रविवार (30 अप्रैल, 2023) को हत्या कर दी गई। पुलिस ने घटना का पर्दाफाश कर लिया है। जिप्सी पर सवार होकर आए अपराधियों ने पहले उन्हें घर से बुलाया, फिर 250 मीटर दूर ले जाकर उन पर गोलीबारी कर दी। आक्रोशित परिजनों ने इसके बाद हत्यारों की गिरफ़्तारी के लिए सिटी एसपी का घेराव भी किया। 24 वर्षीय अरविंद सागर शिवलालपुर रियूनिया के रहने वाले थे।

उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके शरीर में 3 गोलियाँ लगी थीं। मृतक के भाई चंदन ने बताया कि एकाध महीने पहले मुस्लिमों से उनका विवाद हुआ था, जिसके बाद 20-25 लोग घर के भीतर घुसे थे और घर की महिलाओं पर हाथ लगाया था, लेकिन तहरीर के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। चंदन ने बताया कि आजम सहित सभी हत्यारे आए और एक लड़ाई में मदद की माँग करते हुए साथ ले गए।

चंदन का कहना है कि उनके माँ-बाप नहीं है और सिर्फ एक भाई था, जिसने पाल-पोष कर बड़ा किया था और आज उसके साथ ऐसा हो गया। मृतक के चाचा रमेश ने बताया कि सुबह जब ये घटना हुई, तब वो घूम रहे थे। उन्होंने बताया कि 5-6 लोग हत्या के लिए आए थे और झगड़े की बात कह कर गाड़ी में बिठा कर ले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उनकी सुनवाई नहीं हुई है। उत्तराखंड पुलिस ने बयान देकर पूरे मामले को साफ़ किया है।

SHO अरुण कुमार ने कहा कि उन्हें अस्पताल से गोलीबारी में मौत की सूचना मिली थी। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम में भिजवाया गया। इस मामले में संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस द्वारा पहले कार्रवाई न किए जाने की बात को नकारते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा कोई बात नहीं है। पुलिस ने घटना के 36 घंटों के भीतर 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। हत्या के खुलासे के लिए 10 टीमों का गठन किया गया था।

घटना के बाद सीसीटवी खँगाला गया, सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग की गई और मुखबिरों से सूचना ली गई। जसपुर खुर्द निवासी 20 वर्षीय आजम, लूटाबड़ रामनगर निवासी इरफ़ान, महुआखेड़ा गंज निवासी 24 साल का रिजवान उर्फ सुक्खा और साबिर उर्फ पंचर को गिरफ्तार किया गया है। घटना में इस्तेमाल की गई बाइक और तमंचा जब्त कर लिया गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP जिला मंत्री रामनगर यशपाल ने बताया कि मृतक हिंदू संगठन में कोई लिखित पदाधिकारी नहीं था, लेकिन वो संगठन की सभाओं में आता जाता था।

1600 PFI दंगाइयों पर से केस वापस लेने वाली कॉन्ग्रेस अब ‘बजरंग दल’ के पीछे पड़ी: वोटों के लिए किया था राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़, SDPI से भी हुई थी ‘डील’

देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करना कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए कोई नई बात नहीं है। मुस्लिम तुष्टिकरण तो तभी से चला आ रहा है जब से पार्टी का जन्म हुआ था। PFI जिस तरह से फैला-फूला, उसमें कॉन्ग्रेस पार्टी का भी बड़ा योगदान है। मोदी सरकार ने बड़ी तैयारी के साथ ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया’ को बैन किया। इसने 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश के साथ हथियारों के प्रशिक्षण से लेकर विदेशी फंडिंग जुटाने तक के प्रयास तेज कर दिए थे।

अब कॉन्ग्रेस पार्टी अपने घोषणापत्र में ‘बजरंग दल’ की तुलना PFI से करते हुए इसे प्रतिबंधित करने का वादा कर रही है। ‘बजरंग दल’ का नाम आज तक न तो किसी देश विरोधी गतिविधि में आया है और न ही राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ जाकर इसने कुछ किया है। संगठन हिन्दुओं को सुरक्षा देने का कार्य करता है। पीड़ित हिन्दुओं की आवाज़ उठाता है। ऐसे में बजरंग बली की जन्मभूमि पर ‘बजरंग दल’ को बैन करने का वादा करना कॉन्ग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता को बताता है।

ये वही कॉन्ग्रेस पार्टी है, जिसने केंद्र में सत्ता में रहते लिंगायत समाज को अलग धर्म की मान्यता देने का प्रयास कर के हिन्दू धर्म को तोड़ने की कोशिश की थी। लिंगायत समाज भगवान शिव की पूजा करता है। कॉन्ग्रेस पार्टी का हमेशा से प्रयास रहा है कि हिन्दुओं को कमजोर किया जाए और मुस्लिम तुष्टिकरण कर के अपने पक्ष में हिन्दू विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण किया जाए। लेकिन, लोग अब पार्टी के इस प्रयास को समझ गए हैं और यही कारण है कि जनता ने कई राज्यों की सत्ता से उसे उखाड़ फेंका।

1600 PFI सदस्यों के खिलाफ केस वापस लिया था कॉन्ग्रेस सरकार ने

कर्नाटक में मई 2013 से मई 2018 तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रहे और कॉन्ग्रेस सत्ता में रही। इसके बाद भी अगले 1 वर्ष तक JDS के एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहे और कॉन्ग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रही। इन 6 वर्षों में PFI को पनपने के बड़ा अवसर दिया गया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण समझने के लिए हमें चलना होगा जून 2015 में। तब सिद्धारमैया की सरकार ने 1600 PFI आतंकियों के खिलाफ सारे केस वापस लेने का निर्णय लिया था।

सोचिए, ये कितना खतरनाक निर्णय था। एक ऐसा संगठन जिसके दर्जनों ठिकानों पर NIA की छापेमारी में हथियार और देश विरोधी साहित्य से लेकर विदेशी फंडिंग के सबूत तक मिले, उसके सदस्यों के साथ इतनी नरमी? ये अदूरदर्शिता का नहीं, बल्कि जानबूझ तक तुष्टिकरण और वोटों के लिए देश की सुरक्षा से खेलने का मामला था। आज इस संगठन की तुलना ‘बजरंग दल’ से कर के कॉन्ग्रेस विपक्ष में बैठ कर भी यही काम कर रही है।

PFI के अलावा ‘कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (KFD)’ के सदस्यों पर से भी केस वापस लिए गए थे। ये दोनों ही संगठन SIMI से निकले थे, जिसका गठन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अप्रैल 1977 में हुआ था। ये एक आतंकी संगठन था, जिसके लोगों ने बाद में ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ बनाया। जयपुर, इलाहाबाद, दिल्ली, पुणे, पटना और बोधगया से लेकर हैदराबाद तक बम विस्फोटों में इस संगठन का नाम सामने आया। SIMI के लोग ही बैन के बाद PFI का हिस्सा बन गए।

जहाँ तक KFD की बात है, मैसूर में सांप्रदायिक दंगों से लेकर IISC बेंगलुरु में गोलीबारी जैसी घटनाओं तक में इसका नाम सामने आया। मैसूर के एक कॉलेज में 2 छात्रों की हत्या का सीधा आरोप इसी संगठन पर लगा। ये सब सिद्धारमैया की सरकार बनने से पहले की घटनाएँ हैं, अर्थात सब कुछ जानबूझ कर किया गया। तब कर्नाटक के कानून मंत्री रहे TB जयचंद्र ने केस वापस लेने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि ये शांतिपूर्ण लोग हैं जो सिर्फ विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हुआ थे, लेकिन इनका नाम चार्जशीट में डाल दिया गया।

बिना किसी जाँच के उन्होंने ऐलान कर दिया कि वो भीड़ का हिस्सा थे और हिंसा में उनका कोई हाथ नहीं था। तब भाजपा ने 1600 PFI कार्यकर्ताओं पर से 175 मामले वापस लेने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि देश की सुरक्षा की कीमत पर ये सब किया जा रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया था कि इन संगठनों को लेकर जो आरोप हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है जिससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव और बढ़ेगा। इन पर कोई साधारण आरोप नहीं थे, बल्कि मैसूर और शिवमोगा सहित कई इलाकों में दंगे के आरोप थे।

अक्टूबर 2022 में भाजपा ने फिर से जनता को इस फैसले की याद दिलाने के लिए अभियान शुरू किया था, जिसमें बताया गया था कि तत्कालीन DGP और कानून विभाग के सचिव की राय के विरुद्ध जाकर कॉन्ग्रेस की सरकार ने ये निर्णय लिया था। कॉन्ग्रेस महासचिव किसी वेणुगोपाल ने बयान दिया था कि PFI को बैन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कॉन्ग्रेस विधायक तनवीर सैत द्वारा सरकार को लिखे पत्र में केस वापस लेने की माँग की गई थी, जिसके बाद ये निर्णय हुआ।

PFI के साथ ‘डील’, जिहादी मानसिकता से समाज को बचाने वाले ‘बजरंग दल’ से दिक्कत: कॉन्ग्रेसी मानसिकता

इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस ने कई सीटों पर PFI और इसके छात्र संगठन SDPI के साथ एक गुप्त डील भी की थी, जिसके तहत 2018 के विधानसभा चुनाव में इन्होंने कॉन्ग्रेस के खिलाफ अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। केरल और तमिलनाडु के मुकाबले PFI कर्नाटक में तेजी से पाँव पसार रहा था और इसने हिन्दू धर्म के बड़े चेहरों की हत्या के लिए हिटलिस्ट भी बना ली थी। RSS नेता इनका निशाना थे। पुत्तुर में एक पूरा का पूरा कम्युनिटी हॉल हथियारों का गोदाम बना दिया गया था, जिसे NIA ने सीज भी किया था।

जो कॉन्ग्रेस पार्टी कल तक PFI के साथ डील करती थी और उसके सदस्यों को कानून से बचाती थी, आज वही ‘बजरंग दल’ को बदनाम करने के लिए PFI के साथ उसका नाम जोड़ रही है। VHP ने इसे पार्टी की जिहादी मानसिकता करार दिया है। राहुल गाँधी कह चुके हैं कि 2008 में मुंबई को दहलाने वाले आतंकियों से ज्यादा हिन्दू संगठन खतरनाक हैं। उनकी पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह ने मुंबई हमले को RSS की साजिश करार दिया था।

इससे ही पता चल जाता है कि कॉन्ग्रेस किस कदर हिन्दू विरोधी मानसिकता में डूब चुकी है। ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाने वालों की तुलना उनसे की जा रही है जो इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से समाज को सुरक्षित रखने के कार्य में लगे हुए हैं। PFI 17 राज्यों में फ़ैल गया, इसके श्रेय कॉन्ग्रेसी मानसिकता को जाता है। ‘बजरंग दल’ को बिना सबूत आतंकी संगठन बताने वाली कॉन्ग्रेस को तथ्यों के साथ बात करनी चाहिए। या फिर, ये बार-बार ऐसी हरकतों से ये जताती रहे कि ये राहुल गाँधी की पार्टी है।

घर गया, पानी की टंकी गई… अब भीषण गर्मी में चारपाई ही छत: जानिए जोधपुर के बुलडोजर पीड़ित पाकिस्तानी हिंदुओं का हाल

करीब चार महीने पहले 23 साल के रामचंद्र भील ने पाकिस्तान छोड़ा था। कई दिनों की यात्रा के बाद वे राजस्थान के जोधपुर के चोखा गाँव पहुँचे। जीवन भर की कमाई (70 हजार रुपए) देकर यहीं जमीन का एक टुकड़ा लिया। घर बनाया और रहने लगे। लेकिन अब भील बेघर हैं। इस गर्मी में चारपाई ही उनकी छत है। भील उन पाकिस्तानी हिंदुओं में से एक हैं, जिनके घरों पर 24 अप्रैल 2023 को जोधपुर विकास प्राधिकरण ने बुलडोजर चला दिया था।

बुलडोजर चलने के बाद यहाँ रह रहे लोगों के हालात बदतर हो गए हैं। भीषण गर्मी में भी वे खुले में रहने को मजबूर हैं। बच्चों को एक वक्त का खाना तो दूर पानी भी ढंग से नसीब नहीं हो पा रहा। घर टूटने के बाद सब कुछ अस्त-व्यस्त है। चारों ओर फटे हुए तिरपाल, खाली बर्तन और अन्य सामान बिखरे हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदकर घर बनाया था। वहीं, प्रशासन का कहना है कि इनके पास जमीन के कोई कागजात नहीं हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने यहाँ जाकर पीड़ितों का हालात जाना। स्वराज्य को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के संघार जिले से आए रामचंद्र भील ने बताया कि वे 4 महीने पहले यात्री वीजा पर भारत आए। अब लॉन्ग टर्म वीजा भी बनवा लिया है। लेकिन जीवन भर की कमाई से जो उन्होंने और उनकी पत्नी ने जो घर यहाँ बनाया वो अब नहीं है। इसके कारण रामचंद्र और और उनका परिवार भीषण गर्मी में चारपाई की छत के भरोसे जी रहे हैं। वे लकड़ी के सहारे चारपाई को तिरछा खड़ा देते हैं और पूरा परिवार उसकी छाया में दिन काटता है। उन्होंने बताया कि अब खाना तो दूर पानी भी नहीं मिल पा रहा है। यहाँ पानी के लिए सीमेंट की जो टंकी थी, उसे भी प्रशासन ने तोड़ दिया।

मजना राम भील तो साल 2013 में ही पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आ गए थे। अब पानी और भोजन के लिए उनके परिवार को कई किलोमीटर चलना पड़ रहा है। वे पूछते हैं कि हम यहाँ नहीं रहेंगे तो और कहाँ जाएँगे। सरकार हमें यहीं घर बनाने की अनुमति दे। बेघर होने के बाद कुछ लोग घर बनाने के लिए किसी दूसरी जगह की तलाश कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग पुरानी जगह पर ही फिर से घर बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। बुजुर्ग चौथराम बताते हैं कि जब पीने का पानी ही नहीं है तो लोग नहाना और दूसरी चीज़ों के बारे में सोच भी नहीं सकते।

स्वराज्य की रिपोर्ट की मानें तो इस जगह बुलडोजर चलने के बाद भी अधिकांश मुस्लिमों के पक्के घर बने हुए हैं। वहीं, पाकिस्तानी हिंदू हिंदू बाँस और तिरपाल के सहारे झुग्गी में रहने को मजबूर हैं। 24 अप्रैल को JDA की कार्रवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर जेसीबी ड्राइवर और एक पत्रकार पर पथराव किया था। इसके बाद प्रवासी हिन्दुओं को उकसाने का आरोप में भाग चंद भील को गिरफ्तार किया गया है। भाग चंद की गिरफ्तारी को लेकर भी इन लोगों में गुस्सा है। लोगों का कहना है कि भाग चंद ने उन्हें बसाने में मदद की थी, क्या उसका यही अपराध था?

‘छुट्टियों में लिखूँगा फैसला’: राहुल गाँधी को गुजरात HC ने 2 साल की सज़ा के मामले में अंतरिम राहत देने से किया इनकार, 1 महीने की गर्मी छुट्टी पर गए जज

मोदी सरनेम पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गाँधी को अंतरिम राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया है। सूरत की अदालत द्वारा सुनाई गई 2 साल की सज़ा के खिलाफ राहुल गाँधी गुजरात हाईकोर्ट पहुँचे थे। सज़ा मिलने के बाद राहुल गाँधी की संसद सदस्यता भी चली गई थी। अगर उनकी सज़ा पर रोक लग जाती तो वो वापस संसद सदस्यता के लिए प्रयास कर सकते थे। उनके वकील ने सुनवाई में कहा था कि एक जमानती अपराध में सज़ा के लिए ज़िन्दगी भर चुनाव लड़ने से वंचित होना संविधान और व्यक्ति पर बहुत बुरा प्रभाव है।

हालाँकि, गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला रिजर्व रख लिया है और इसे छुट्टियों के बाद सुनाया जाएगा। राहुल गाँधी अपने बयान ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी ही है’ को लेकर घिरे हुए हैं। एकल पीठ के जज हेमंत प्रच्छक ने इस मामले में अंतरिम रहत देने से मना कर दिया। फ़िलहाल हाईकोर्ट में गर्मी की छुट्टियाँ चल रही हैं। 5 मई को अंतिम वर्किंग डे है, जिसके बाद अब सीधे 1 महीने बाद 5 जून को हाईकोर्ट खुलेगा।

राहुल गाँधी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता व कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने उन्हें अंतरिम राहत देने की माँग की। उन्होंने गुहार लगाई कि कुछ तो निर्णय दे दिया जाए, लेकिन जज ने कहा, “मैंने पहले ही सब स्पष्ट कह दिया है। मैं दलीलें वगैरह सुनूँगा। छुट्टियों के दौरान मैं फैसला लिखूँगा।” इस मामले के ऑरिजिनल रिकॉर्ड और सुनवाई के डिटेल्स हाईकोर्ट ने अपने समक्ष पेश किए जाने का भी आदेश दिया है।

इस मामले में पूर्णेश मोदी ने मुकदमा दायर किया था, जो भाजपा के विधायक भी रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इससे मोदी समुदाय को ठेस पहुँची है। उन्होंने दलील दी थी कि एक सासंद होने के कारण वो जो कहते हैं, उसका गहरा असर होता है। पूर्णेश मोदी ने ये भी कोर्ट को बताया कि राहुल गाँधी ने अब तक अपने बयान पर अफ़सोस तक नहीं जताया है। उनके वकील ने कहा कि अगर राहुल गाँधी को माफ़ी नहीं माँगनी है तो फिर को अदालत में जाकर ‘Crybaby’ बनना बंद करें।

क्या बागेश्वर सरकार को घेरेंगे लालू यादव के बेटे, लाठी और हरे झंडे वाली DSS को दे रहे ट्रेनिंग: बिहार में कथा से पहले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर केस भी

बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बिहार आने वाले हैं। पटना के नौबतपुर में 13 से 17 मई तक वे हनुमत कथा सुनाएँगे। एक तरफ इस कथा के आयोजन को लेकर तैयारियाँ चल रही हैं, दूसरी ओर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे और नीतीश सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव उनके विरोध की तैयारियों में जुटे हैं।

तेज प्रताप यादव ने पिछले दिनों एयरपोर्ट पर ही धीरेंद्र शास्त्री का घेराव करने की धमकी दी थी। अब उन्होंने धर्मनिरपेक्ष सेवक संघ (DSS) के सदस्यों की लाठी और हर झंडे के साथ ट्रेनिंग की कुछ तस्वीर भी सोशल मीडिया में शेयर की है। इसको बागेश्वर सरकार के विरोध की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इतना ही नहीं धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर में मुकदमा भी दर्ज हुआ है।

तेज प्रताप यादव ने रविवार (30 अप्रैल 2023) को सोशल मीडिया पर कुछ फोटो शेयर की हैं। इन फोटो के साथ उन्होंने लिखा है, “धर्म को टुकड़ों में बाँटने वालों को करारा जवाब मिलेगा, तैयारी पूरी है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में हैं भाई-भाई।” फोटो में वे DSS सदस्यों को ट्रेनिंग देते नजर आ रहे हैं। कुछ फोटो में डीएसएस के सदस्य लाठी और हरे झंडे के साथ दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि तेज प्रताप यादव अपने सरकारी आवास में ही इन लड़कों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

इससे पहले तेज प्रताप यादव ने कहा था, “अगर बागेश्वर बाबा हिंदू-मुसलमान को लड़वाने के लिए आ रहे हैं तो मैं उनका विरोध करूँगा। मैं उनका हवाई अड्डे पर घेराव करूँगा। अगर वह भाईचारे का संदेश देंगे कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब हैं भाई-भाई तो उनकी बिहार में एंट्री हो सकती है।” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 12 मई को बिहार पहुँचेंगे।

बागेश्वर सरकार पर मुजफ्फरपुर में मुकदमा

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर के ECJM कोर्ट में मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा सूरज कुमार नामक व्यक्ति ने कराया है। सूरज कुमार पेशे से वकील है। सूरज कुमार का आरोप है कि 24 अप्रैल 2023 को राजस्थान में आयोजित एक कथा में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने खुद को हनुमान जी का अवतार बताते हुए अपनी तुलना भगवान से की थी। उसने धीरेंद्र शास्त्री पर हिंदुओं को धोखा देने, गुमराह करने और ठगने का आरोप लगाया है। सूरज कुमार की शिकायत पर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ धारा 295 क, 505 और 298 के तहत मामला दर्ज हुआ है। मामले की सुनवाई 10 मई 2023 को होगी।

‘भाजपा MP ने किया कन्नड़ गौरव का अपमान’: लखनऊ के अटल बिहारी ग्राउंड में भिड़े कोहली-गंभीर, कर्नाटक की पिच पर कॉन्ग्रेसी गैंग लगा भुनाने

लखनऊ इकाना स्टेडियम में सोमवार (1 मई, 2023) को विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच लड़ाई हो गई। उससे पहले विराट कोहली और नवीन-उल-हक़ आपस में भिड़ते हुए दिखे। इस मैच को RCB (रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर) ने जीता, जबकि बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए मैच में LSG (लखनऊ सुपरजायंट्स) ने जीता था। अब कॉन्ग्रेस से जुड़े कुछ लोग इस घटना को कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जबरन जोड़ रहे हैं।

इस लड़ाई के बाद BCCI ने इन खिलाड़ियों पर जुर्माना भी लगाया है। जहाँ विराट कोहली पर मैच फी का 100% जुर्माना लगाया गया, जो 1.07 करोड़ रुपए बैठता है। वहीं गौतम गंभीर पर 25 लाख रुपए और नवीन-उल-हक़ पर 1.79 लाख रुपए का जुर्माना लगा। कॉन्ग्रेस समर्थक अब इस लड़ाई को लेकर कर्नाटक विधानसभा चुनाव में फायदा उठाना चाहते हैं। गौतम गंभीर पूर्वी दिल्ली से भाजपा के सांसद भी हैं, ऐसे में उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस छोड़ चुके संजय झा, जो अभी भी पार्टी की तरफदारी करते हैं, उन्होंने लिखा, “गौतम गंभीर भारत के लिए खेला करते थे। लेकिन, भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने स्तर को गिरा कर खुद को एक धौंस जमाने वाला राजनीतिक व्यक्ति बना लिया है। IPL मैच के दौरान जो भी हुआ, वो निंदनीय है। क्या विधानसभा चुनाव में दिख रही हार के कारण भाजपा नेता इतने गुस्से में हैं?” संजय झा ने कहीं के मामले को कहीं जोड़ दिया।

इसी तरह, अर्चना पवार नाम की यूजर लिखा, “भाजपा सांसद गौतम गंभीर घमंड को देखिए। वो कन्नड़ लोगों के गौरव, कप्तान विराट कोहली को धमकी दे रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ऐसा करने का अधिकारी दिया है? ऐसे खिलाड़ियों को किसी भी टीम के लिए नहीं चुना जाना चाहिए। 13 मई को कर्नाटक ज़रूर इन लोगों को सबक दिखाएगा।” IPL की लड़ाई में बिना मतलब का पीएम मोदी को भी घसीट लिया गया।

इसी तरह, APJ नाम के यूजर ने लिखा, “भाजपा नेता गौतम गंभीर ने 7 करोड़ कन्नड़ जनता का अपमान किया है। जिस कप्तान विराट कोहली से हम इतना प्यार करते हैं, उनका उन्होंने अपमान किया है। आशा है कि चुनाव के दिन कर्नाटक सटीक जवाब देगा।” इसी तरह, निम्मो यादव नामक हैंडल ने LSG के कोच गौतम गंभीर को मानसिक इलाज की ज़रूरत तक बता दिया। शांतनु नाम के यूजर ने भी लिखा कि कन्नड़ जनता भाजपा को सबक सिखाएगी।

बता दें कि कोहली-गंभीर के बीच का झगड़ा एक दशक पुराना है। 2013 में जब गौतम गंभीर KKR (कोलकाता नाइट राइडर्स) के कप्तान थे और विराट कोहली RCB के, तब एक मैच में कोहली के आउट होने के बाद गंभीर ने कुछ कह दिया था, जिस पर तनातनी हुई थी। तब रजत भाटिया ने उन्हें अलग किया था। याद हो कि जब विराट कोहली ने अपना पहला शतक जड़ा था, तब गौतम गंभीर ने अपना ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड उन्हें दे दिया था। ये स्नेह बाद में झगड़े में बदल गया।

दिल्ली के शराब घोटाले में राघव चड्ढा का भी आया नाम, ED की चार्जशीट में सिसोदिया के घर हुए बैठक का जिक्र: AAP सांसद ने बताया प्रोपेगेंडा

दिल्ली के शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल के बाद अब AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी इसमें सामने आया है। ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में चड्ढा का जिक्र है। हालाँकि आप सांसद ने इसका खंडन करते हुए इसे प्रोपेगेंडा बताया है।

चड्ढा का कहना है कि ईडी की किसी भी शिकायत में उन्हें आरोपित या संदिग्ध नहीं बताया गया है। उन पर कोई आरोप नहीं है। उनके नाम का जिक्र किसी बैठक में शामिल होने को लेकर है, लेकिन इसका आधार स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में आ रहे समाचार तथ्यात्मक तौर पर गलत और उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार का हिस्सा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बताया है कि मनीष सिसोदिया के पीए सी अरविंद ने राघव चड्ढा का नाम लिया था। अपने बयान में सी अरविंद ने दावा किया है कि मनीष सिसोदिया के घर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में राघव चड्ढा, पंजाब सरकार के एसीएस वित्त, आबकारी आयुक्त वरुण रूजम, एफसीटी और पंजाब आबकारी के अफसर भी मौजूद थे।

ईडी ने चार्जशीट में कहा है कि दिल्ली की नई आबकारी नीति सीएम अरविंद केजरीवाल का प्लान के तहत बनाई गई थी। पूरी आबकारी नीति को विजय नायर मैनेज कर रहा था। तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव की बेटी के कविता ने आबकारी नीति बनने और उसके लागू होने के बाद विजय नायर के साथ कई बार मीटिंग की थी। केजरीवाल और सिसोदिया ने विजय नायर को आबकारी नीति बनाने और उसको लागू करने के लिए पूरी तरह छूट दे रखी थी।

इस मामले में दिनेश अरोड़ा ने ईडी को बताया है कि उसने AAP नेता संजय सिंह के कहने पर दिल्ली के कई रेस्टोरेंट मालिकों से 82 लाख रुपए जुटाकर मनीष सिसोदिया को पार्टी फंड के नाम पर दिया था। इस फंड का इस्तेमाल दिल्ली के चुनावों में किया गया था। दिनेश अरोड़ा ने यह भी कहा है कि उसने दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से 5-6 बार बात की थी। यही नहीं, उसने संजय सिंह के आवास पर अरविंद केजरीवाल से हुई मुलाकात का जिक्र भी किया है।

केजरीवाल से भी हुई थी पूछताछ

बता दें कि शराब घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जेल में बंद हैं। ईडी और सीबीआई दोनों ही जाँच एजेसियों ने उन पर शिकंजा कस रखा है। वहीं, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल से भी सीबीआई ने 16 अप्रैल को पूछताछ की थी। करीब 9 घंटे की पूछताछ के दौरान सीबीआई ने केजरीवाल से 56 सवाल पूछे थे। इसके अलावा ईडी की चार्जशीट में भी अरविंद केजरीवाल का नाम है।

‘पहले प्रभु श्रीराम को ताले में बंद किया, अब बजरंग बली से दिक्कत’: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पर बरसे PM मोदी, अमित शाह ने कहा – सत्ता में आकर PFI से बैन हटा लेगी कॉन्ग्रेस

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पार्टी को घेरा है। बता दें कि कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणापत्र में हिन्दू संगठन ‘बजरंग दल’ को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। होसपेट पहुँचे पीएम मोदी ने कहा कि ये हनुमान जी की पवित्र भूमि है और उनके लिए इस धरती को नमन करना बहुत बड़ा सौभाग्य है, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि कॉन्ग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में बजरंग बली को ताले में बंद करें का निर्णय किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि पहले इन्होंने भगवान श्रीराम को ताले में बंद किया, अब कॉन्ग्रेस ने ‘जय बजरंग बली’ बोलने वालों को ताले में बंद करने का संकल्प लिया है। पीएम मोदी ने कहा कि ये देश का दुर्भाग्य है कि कॉन्ग्रेस पार्टी को प्रभु श्रीराम से भी तकलीफ होती थी, वहीं अब ‘जय बजरंग बली’ बोलने वालों से भी तकलीफ हो रही है। पीएम मोदी ने इस दौरान ये भी कहा कि कॉन्ग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड गारंटी पूरी करने का नहीं बल्कि गरीबों को लूटने का है।

उन्होंने कहा, “कर्जमाफी से लेकर हर घर बिजली पहुँचाने की गारंटी तक, कॉन्ग्रेस ने झूठ ही झूठ बोला है। कॉन्ग्रेस गारंटी की बात करती है, लेकिन उसका मकसद कुछ और होता है। कॉन्ग्रेस की नजर योजनाओं के 85% पैसे पर होती है। हमें कर्नाटक को कॉन्ग्रेस की 85% कमीशन वाली आदत से बचाना है। कॉन्ग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसे इस देश के हर क्षेत्र ने नकार दिया है। एक समय था जब कॉन्ग्रेस इस घमंड में रहती थी कि पूरे भारत में पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक उसका ही शासन है, लेकिन आज भारत की जनता ने पार्टी को गिने-चुने राज्यों में समेट दिया है।”

उधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मैसूर में भाजपा के लिए चुनाव प्रचार किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पार्टी सरकार बनाने में सफल हो जाती है और सिद्धारमैया जीत जाते हैं, तो ये लोग PFI पर से बैन हटा देंगे। बता दें कि कट्टर इस्लामी संगठन PFI भारत को 2047 तक ‘इस्लामी राज्य’ बनाने के मिशन पर लगा था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे प्रतिबंधित किया। अमित शाह ने कहा कि सिद्धारमैया ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के अलावा कुछ भी नहीं किया।

अमित शाह ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक को केंद्र का ATM बनाया। सिद्धारमैया के राज में कर्नाटक में सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ। सिद्धारमैया के समय में इतना भ्रष्टाचार हुआ कि पूरे भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार करने वाली सरकार सिद्धारमैया की सरकार थी। ‘लिंगायतों ने यहां भ्रष्टाचार किया है’ – यह कहकर सिद्धारमैया ने लिंगायत समुदाय का अपमान किया है। निजलिंगप्पा और वीरेंद्र पाटिल को हटाकर पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी लिंगायत समुदाय का अपमान कर चुकी है।”

जो जस करहि सो तस फल चाखा… अतीक की हत्या के बाद प्रयागराज पहुँचे CM योगी ने याद की रामचरितमानस की पंक्तियाँ, कहा – प्रकृति नहीं बर्दाश्त करती अत्याचार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार (2 मई, 2023) को संगम की भूमि प्रयागराज पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। बता दें कि प्रयागराज में 45 वर्षों तक आतंक का पर्याय रहे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद से ही मॉडल गर्माया हुआ है। ऐसे में सीएम योगी के यहाँ पहुँचने और उनके भाषण पर सभी की नजर थी। अतीक अहमद का बेटा असद भी पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है।

इस दौरान सीएम योगी ने रामचरितमानस में संत तुलसीदास की एक चौपाई का जिक्र किया – “कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करहि सो तस फल चाखा।।” उन्होंने कहा कि ये पंक्तियाँ आज भी उसी प्रकार से प्रासंगिक है, जैसी मध्यकाल में थी। उन्होंने कहा कि ये पंक्तियाँ हमारे कर्म प्रधान विवशता का मार्गदर्शन करती दिखती हैं। उन्होंने ये भी कहा कि जिस प्रयागराज में दुनिया अपनी आध्यात्मिक पिपासा के लिए आती है और जिसने हजारों वर्ष से मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया हो, वहाँ करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगा कर जीवन को धन्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रयागराज में अन्याय और अत्याचार से पीड़ित मानव न्यायालय की शरण में न्याय प्राप्त करने की अभिलाषा लेकर आता है, उस धरती को कुछ लोगों ने न्याय और अत्याचार का शिकार बना दिया था, पापाचार का शिकार बना दिया था, लेकिन ये प्रकृति न किसी पर अत्याचार करती है और न किसी के अत्याचार को स्वीकार ही करती है। सीएम योगी ने कहा कि प्रयागराज की धरती कभी सात्विक प्रकृति को निराश नहीं करती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहाँ महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार के लिए आए थे। पार्टी ने यहाँ गणेश केशरवानी को उम्मीदवार बनाया है। सीएम योगी ने पार्टी में नए कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की बात भी कही और भारत देश को लोकतंत्र की जननी बताते हुए भाजपा के लोकतंत्र की भी बात की। उन्होंने 2017 के पहले के उत्तर प्रदेश को याद करते हुए कहा कि तब भय के साये में व्यक्ति पर्व-त्योहारों के दौरान हिंसा की आशंका से काँपता था, लेकिन अब कफ्यू-दंगा नहीं बल्कि सब चंगा है।

सीएम योगी ने कहा, “अपराध के प्रति सरकार की कार्रवाई जीरो टॉलेरेंस की है। जो पहले आतंक के बल पर निर्दोषों की संपत्ति कब्जाते थे, वो गले में तख्ती लगा कर आत्म-समर्पण करते हैं। अब व्यापारी को रंगदारी नहीं देना पड़ता, उन्हें 10 लाख रुपए की बीमा सुरक्षा योजना का लाभ मिलता है। 2017 से पहले व्यापारियों से रंगदारी वसूली होती थी, आज पीएम योजना से स्वनिधि का लाभ मिलता है। हम गरीबों को संरक्षण देने, व्यापारियों को सुरक्षा देंगे। माफियाओं की संपत्ति जब्त कर गरीबों के लिए आवास बनेगा।”

तिहाड़ में सुआ घोंप-घोंप कर गैंगस्टर को मार डाला, ग्रिल काटकर किए 40 वार: उसी गैंग ने किया हमला, जिससे अतीक-अशरफ के शूटर को मिली थी पिस्टल

दिल्ली के तिहाड़ जेल में गैंगवार में एक और अपराधी मारा गया है। मारे गए गैंगस्टर की पहचान टिल्लू ताजपुरिया (Tillu Tajpuria Murder) के तौर पर हुई है। उस की हत्या करने वाले गोगी गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। गोगी गैंग का नाम प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद भी आया था। कहा जा रहा है कि माफिया ब्रदर्स को ढेर करने वाले शूटरों को जिगाना पिस्टल गोगी गैंग से ही मिली थी।

मंगलवार (2 मई 2023) की सुबह करीब 6 बजे ताजपुरिया पर हमला हुआ। उस पर गोगी गैंग के 4 अपराधियों ने लोहे की रॉड और सुआ से करीब 40 वार किए। ताजपुरिया पर गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या का आरोप था। ऐसे में इसे जितेंद्र गोगी की हत्या का बदला कहा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टिल्लू ताजपुरिया तिहाड़ के हाई सिक्योरिटी जेल के ग्राउंड फ्लोर में स्थित जेल नंबर 8 में बंद था। उसकी हत्या यहीं की गई। हत्या पूरी प्लानिंग के तहत की गई। गोगी गैंग के चार अपराधी योगेश टुंडा, दीपक तीतर, राजेश और रियाज फर्स्ट फ्लोर के जेल नंबर 9 में बंद थे। हत्या करने के लिए उन्होंने पहले लोहे की ग्रिल को काटा। इसके बाद चादर की सहायता से ग्राउंड फ्लोर पर कूद गए। इसके बाद लोहे की रॉड और सुआ से वार कर ताजपुरिया की हत्या कर दी।

हमले में घायल होने के बाद ताजपुरिया को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लेकिन उसकी मौत हो गई। इस हमले में ताजपुरिया को बचाने में रामनिवास नामक एक अन्य कैदी भी घायल हुआ है। फिलहाल वह खतरे से बाहर है। बताया जा रहा है कि गोगी गैंग के कई गुर्गे तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस हत्या में रोहित मोई का नाम भी सामने आ रहा है। रोहित को जितेंद्र गोगी का राइट हैंड माना जाता है। जितेंद्र गोगी और रोहित मोई को पुलिस ने एक साथ ही गिरफ्तार किया था। ज्ञात हो कि गोगी गैंग के लॉरेंस विश्नोई गैंग से भी संबंध रहे हैं। दोनों गैंग साथ मिलकर काम करने के लिए जाने जाते थे।

गौरतलब है कि टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी एक समय दोस्त हुआ करते थे। लेकिन साल 2010 में दिल्ली के एक कॉलेज में हुए छात्र संघ चुनाव के दौरान दोनों में किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद दोनों की राहें अलग हो गई थी। यही नहीं, दोनों के बीच आपसी गैंगवार भी देखने को मिल रहा था। इसी गैंगवार के चलते बीते 6 सालों में 12 लोगों की हत्या को चुकी है।

अतीक की हत्या में आया था गोगी गैंग का नाम

बता दें कि माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या में भी गोगी गैंग का नाम सामने आया था। अतीक और अशरफ को तुर्की की जिगाना पिस्टल से मारा गया था। यह पिस्टल शूटर सनी को गोगी गैंग से ही मिली थी। पहले इस पिस्टल से टिल्लू की हत्या होनी थी। लेकिन उससे पहले ही सनी ने दो अन्य शूटरों के साथ मिलकर अतीक और अशरफ की हत्या कर दी।