नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पिछले दिनों इतिहास, नागरिक शास्त्र और हिंदी के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किए थे। केरल की कम्युनिस्ट सरकार ने इन बदलावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। केरल की स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) ने तय किया है कि पाठ्यक्रम से जिन सामाग्री को NCERT ने हटाया है, उसे राज्य सरकार के स्कूली किताबों में शामिल किया जाएगा।
मंगलवार (25 अप्रैल 2023) को केरल शिक्षा विभाग की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एनसीईआरटी द्वारा हटाए गए पाठ्यक्रमों को शामिल करने को लेकर चर्चा हुई। बैठक में केरल शिक्षा बोर्ड ने हटाए गए हिस्सों को पाठ्यक्रम में शामिल रखने का फैसला लिया। शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार से फैसले को लागू करने की अनुमति माँगी है। सरकार की तरफ से अनुमति मिलते ही हटाए गए चैप्टर्स केरल के स्कूलों में पढ़ाए जा सकेंगे।
केरल के शिक्षा मंत्री ने पहले ही कहा था कि राज्य अपने स्कूलों के पाठ्यक्रम में NCERT द्वारा हटाए गए हिस्सों को शामिल करेगा। केरल शिक्षा विभाग मुगलों का इतिहास, गुजरात दंगे और डार्विन के विकासवाद की थ्योरी को अपने सिलेबस में शामिल रखना चाहती है।
केरल सरकार की मंजूरी मिलते ही विवादित विषयों को राज्य भर के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा। इसके लिए छात्रों को केरल में छपी सप्लीमेंट्री किताबें उपलब्ध कराई जाएँगी, जो NCERT की किताबों से इतर स्कूलों में पढ़ाई जाएँगी।
बता दें NCERT ने 10वीं, 11वीं और 12वीं के इतिहास, नागरिक शास्त्र और हिन्दी की किताबों में बदलाव किया है। इतिहास की किताब से मुगल इतिहास से जुड़ी फालतू जानकारी हटाई गई है। वहीं हिंदी के पाठ्यक्रम से कुछ कविताएँ और पैराग्राफ हटाने का फैसला किया गया है। सिलेबस में जो भी बदलाव किया गया है, उसे मौजूदा शैक्षणिक सत्र यानी 2023-24 से ही लागू कर दिया गया है।
माओवादी सरकार ने हटाई थी ‘मुगलों की सच्चाई’
आश्चर्यजनक है कि सीपीएम ने पश्चिम बंगाल की सत्ता में रहते हुए मुगलों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों की घटनाओं को किताबों से हटवा दिया था। इसके लिए एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में साफ तौर पर लिखा हुआ था, “मुस्लिम शासन की कभी भी आलोचना नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम शासकों और आक्रमणकारियों द्वारा किए गए मंदिरों के विनाश का भी उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए।”
अब उसी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद बिनय विश्वम (Binoy Viswam) ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में में उन्होंने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताबों से मुगलों के बारे में जानकारी हटाने को लेकर चिंता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (25 अप्रैल 2023) को केरल में देश के पहले वाटर मेट्रो सर्विस की शुरुआत की। इसके साथ-साथ उन्होंने केरल को पहले वंदे भारत ट्रेन का तोहफा भी दिया। पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में डिजिटल साइंस पार्क की आधारशिला रखी और कई अन्य परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इसके पहले उन्होंने तिरुवनंतपुरम में एक रोड शो भी किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरुवनंतपुरम में सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर तिरुवनंतपुरम-कासरगोड के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा उन्होंने डिंडीगुल-पलानी-पलक्कड़ सेक्शन के रेल इलेक्ट्रिफिकेशन का भी उद्घाटन किया। इसके बाद पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में देश के पहले डिजिटल साइंस पार्क की आधारशिला रखी। 1515 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के पहले फेज में 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे।
Glimpses from the programme in Thiruvananthapuram where various development works were launched. pic.twitter.com/sprEVMAjee
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने देश की पहली वाटर मेट्रो सर्विस का उद्घाटन किया। यह मेट्रो पोर्ट सिटी कोच्चि में कोच्चि सिटी से आस-पास के 10 टापुओं के बीच चलेगी। पीएम मोदी ने परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के अवसर पर लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने विकास कार्यों और करोड़ों के प्रोजेक्ट की शुरुआत को लेकर प्रदेश के लोगों को बधाई दी। पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा कि केरल बहुत ही जागरूक, समझदार और शिक्षित लोगों का राज्य है। यहाँ के लोग सामर्थ्यवान और परिश्रमी हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि केरल का विकास होगा तो देश का भी विकास होगा। हम इस सेवा भावना के साथ काम कर रहे हैं। पीएम ने जानकारी दी कि इस साल के बजट में भी हमने 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना तय किया है। उन्होंने कहा कि हम रेलवे के स्वर्णिम युग की तरफ बढ़ रहे हैं। पीएम ने कहा कि हम देश के भगौलिक परिस्थिती के अनुसार मेड इन इंडिया सुविधाएँ दे रहे हैं। उदाहरण के लिए आवश्यकतानुसार सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन हो, रो-रो फेरी हो, रोप-वे हो जहाँ जैसी जरूरत, वहाँ वैसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
पीएम ने कहा कि केरल की पहली वंदे भारत ट्रेन नॉर्थ केरल को साउथ केरल से जोड़ेगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह ट्रेन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना तेज गति से चलेगी। पीएम ने कहा कि भाजपा सरकार बिना जाति-मजहब देखे एक भारत श्रेष्ठ भारत के भाव के साथ सभी के लिए विकास के कार्य करती है।
5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल का निधन हो गया है। वो 95 साल के थे। 1970 में वो देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे। वो 1996 से 2008 तक ‘अकाली दल’ के अध्यक्ष रहे थे। प्रकाश सिंह बादल के बारे में ये भी जानने वाली बात है कि 2007 से 2017 के बीच वो देश के सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री बने थे। 2007 और 2012 के चुनाव में पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन को बड़ी जीत मिली थी और प्रकाश सिंह बदल सीएम बने थे।
प्रकाश सिंह बादल को ‘शिरोमणि अकाली दल (SAD)’ का पितृपुरुष माना जाता है। वो पंजाब के सबसे बुजुर्ग नेता थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पंजाब के मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) को रात 8:28 बजे उन्होंने अंतिम साँस ली। उन्हें ICU में रखा गया था। बठिंडा स्थित बादल गाँव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बुधवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गाँव ले जाया जाएगा।
इससे पहले अस्पताल ने बताया था कि प्रकाश सिंह बादल की तबीयत में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन फिर उनके निधन की खबर आई। उन्हें पिछले साल जून में ही गैस्ट्रिक्स और अस्थमा के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुःख जताते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का एक विशालकाय व्यक्तित्व करार दिया। उन्होंने कहा कि बादल ने कठिन समय में पंजाब को विकास के रास्ते में बढ़ाया।
Shri Parkash Singh Badal’s passing away is a personal loss for me. I have interacted closely with him for many decades and learnt so much from him. I recall our numerous conversations, in which his wisdom was always clearly seen. Condolences to his family and countless admirers. pic.twitter.com/YtD9xKsos2
प्रधानमंत्री ने प्रकाश सिंह बादल के निधन को अपने लिए व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि तक उन्हें उनसे काफी कुछ सीखने को मिला। उन्होंने बताया कि उनसे की गई बातचीत में उनकी विद्वता स्पष्ट दिखती थी। प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर, 1927 को हुआ था। उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल पंजाब के उप-मुख्यमंत्री रहे हैं। उनकी बहू हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्री रही हैं। वो अपने पीछे अपनी पत्नी सुरिंदर कौर बादल को भी छोड़ गए हैं।
उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने अपने दोस्त और पुराने कर्मचारी मनोज मोदी को मुंबई में 1500 करोड़ रुपए का घर गिफ्ट किया है। मनोज मोदी को मुकेश अंबानी का दाहिना हाथ माना जाता है। इसलिए उन्हें रिलायंस के कर्मचारी होने के साथ-साथ मुकेश अंबानी के दोस्त होने का भी दर्जा प्राप्त है। रिपोर्टों के मुताबिक, रिलायंस के लिए लिए गए सभी अहम फैसलों में उनकी सहमति आवश्यक होती है।
मनोज मोदी वर्षों से रिलायंस के लिए अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। उनकी ईमानदारी और निष्ठा का ही नतीजा है कि मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी, अनंत अंबानी और ईशा अंबानी भी उनकी बहुत इज्जत करते हैं। सभी उनकी सलाह मानते हैं। अब मुकेश अंबानी ने अपने सबसे चहेते कर्मचारी और दोस्त को उनके मेहनत का फल 22 मंजिला इमारत के रूप में देने का फैसला किया है।
यह मकान मुंबई के पॉश इलाके नेपियन सी रोड में है, जिसे 1.7 लाख वर्ग फुट जमीन पर बनाया गया है। इस इमारत का नाम वृंदावन रखा गया है। बिल्डिंग की शुरुआती 7 फ्लोर्स को पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। घर का ज्यादातर फर्निचर इटली से मँगाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, घर मिलने के बाद मनोज ने मुंबई स्थित 41.5 करोड़ रुपए के अपने 2 फ्लैट बेच दिए हैं।
बता दें कि मुकेश अंबानी और मनोज मोदी दोनों क्लास साथी रहे हैं। दोनों ने मुंबई में रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (ICT) से साथ में पढ़ाई की है। पढ़ाई खत्म होने के बाद जब मुकेश अंबानी अपने पिता के साथ रिलायंस में काम करना शुरू किया तो उन्होंने अपने क्लासमेट मनोज को भी बुला लिया। जानकारी के मुताबिक, मनोज साल 1980 से ही मुकेश के साथ रिलायंस के लिए सेवाएँ दे रहे हैं।
मनोज मोदी रिलायंस जियो और रिलायंस रिटेल के निदेशक (Director) हैं। मनोज चंकचौंध से दूरी बनाए रखते हैं। यही वजह है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं हैं। मुकेश अंबानी द्वारा अपने दोस्त को दिए गए इस कीमती तोहफे की चर्चा हर तरफ की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को जान से मारने की धमकी देने वाला पकड़ा गया है। आरोपित की पहचान आमीन के तौर पर हुई है। कानपुर से मंगलवार (25 अप्रैल 2023) को उसे गिरफ्तार किया गया। पता चला है कि अपनी गर्लफ्रेंड के पिता को फँसाने के लिए उसने सीएम की हत्या की धमकी दी थी।
धमकी आपातकालीन सेवाओं के लिए जारी किए गए नंबर डायल-112 पर व्हाट्सएप मैसेज कर रविवार (23 अप्रैल 2023) रात दी गई थी। मैसेज में लिखा था, “सीएम योगी को मार दूँगा जल्द ही।” धमकी भरा मैसेज मिलने के बाद लखनऊ पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी थी। लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में सोमवार (24 अप्रैल 2023) को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506, 507 और IT एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आमीन को उसकी प्रेमिका के पिता पसंद नहीं करते हैं, इसलिए वह उन्हें फँसाना चाहता था। इसके लिए आमीन ने उनका मोबाइल चुरा लिया। इसके बाद 23 अप्रैल की रात 8.22 मिनट पर उसने यूपी पुलिस के 112 नंबर पर व्हाट्सएप मैसेज भेजा। मैसेज मिलते ही यूपी पुलिस के कान खड़े हो गए और उस नंबर की जाँच शुरू कर दी जिससे धमकी दी गई थी।
सर्विलांस की टीम ने पाया कि जिस नंबर से मैसेज आया था वह कानपुर का है। इसके बाद कानपुर पुलिस से संपर्क किया गया और पुलिस नंबर मालिक तक पहुँची। पुलिस को फोन चोरी होने की जानकारी मिली। इसके बाद छानबीन करती हुई पुलिस आमीन तक पहुँची। पूछताछ में उसने फोन चुराकर धमकी भरा मैसेज भेजने की बात कबूल ली। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक उस पर चोरी समेत कई धाराएँ लगाई गई हैं।
कानपुर पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा है कि आरोपित का मकसद गर्लफ्रेंड के पिता को फँसाकर रास्ते से हटाना था। उसका उद्देश्य सीएम योगी को धमकी देना नहीं था। आमीन से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। इसके बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा।
बता दें कि इससे पहले गत 18 अप्रैल 2023 को झारखंड के रहने वाले अमन रजा नामक व्यक्ति ने सीएम योगी को गोली मारने की धमकी दी थी। उसने यह धमकी फेसबुक पोस्ट के जरिए दी थी। इस मामले में यूपी एटीएस जाँच कर रही है। अमन रजा की गिरफ्तारी के लिए जाँच टीम झारखंड के बोकारो भी गई थी। लेकिन वह नहीं मिला।
गौरतलब है कि अगस्त 2022 में भी डायल-112 पर व्हाट्सएप कर सीएम योगी की बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने जाँच करते हुए राजस्थान के भरतपुर से सरफराज नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक अन्य पत्र भी मिला था। इस पत्र में, 15 दिन के भीतर सीएम योगी की बम से उड़ाने के बारे में लिखा हुआ था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर ‘Times Now Navbharat’ ने बड़ा खुलासा किया है। ‘ऑपरेशन शीशमहल’ नामक शो में ये खुलासा किया गया। चैनल ने बताया है कि AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कोरोना काल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने सरकारी बँगले के सौंदर्यीकरण पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। यानी, बने-बनाए बँगले को चमकाने और उसे सुंदर बनाने के लिए इतने रुपए फूँक दिए गए।
मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) की शाम को प्रसारित किए गए शो में ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने जानकारी दी कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं। शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है। AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल आंदोलन से निकले नेता हैं और कोई फकीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बँगला 1942 का बना है, वहाँ छत से पानी टपकती थी और बुजुर्गों को परेशानी होती थी।
राघव चड्ढा ने सफाई दी कि इसे सरकारी बँगला बताते हुए पीएम आवास के बारे में बात करने की सलाह दी। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “खुद को आम आदमी कहने वाले अरविंद केजरीवाल ने अपने घर पर रिनोवेशन के नाम पर जनता के 44.78 करोड़ रुपए बर्बाद कर डाले। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को शर्म आनी चाहिए। ऐसे ढोंगी आम आदमी और भ्रष्टाचारी व्यक्ति को दिल्ली का मुख्यमंत्री बने रहने का कोई हक नहीं है।”
अयोध्या में भव्य राम मंदिर का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और समय के साथ ही भक्तों के बीच उत्सुकता भी बढ़ती जा रही है। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ निर्माण कार्य से लेकर अन्य व्यवस्थाओं में लगा हुआ है। ट्रस्ट में एक से बढ़ कर एक विद्वान और अनुभवी लोग हैं, जिनका सीधा सरोकार अयोध्या और भगवान श्रीराम के मंदिर से रहा है। इनमें अधिकतर लंबे समय तक आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनका भी प्रयास है कि इस कार्य में कोई कोताही न रह जाए।
हाल ही में राम मंदिर की प्रतिमा को लेकर कुछ खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में रामलला की वहाँ पूजा हो रही है, जो लंबे समय से टेंट में थे। ये प्रतिमा सन् 1949 से वहाँ है। ये प्रतिमा वहाँ कैसे आई थी, इसकी भी एक अलग कहानी है। अब राम मंदिर के गर्भगृह में नई मूर्ति की स्थापना की बात। इसके बाद ये सवाल उठ रहा है कि पुरानी मूर्ति का क्या होगा और नई मूर्ति कौन बनाएगा।
दिसंबर 1949 में बाबरी ढाँचे में प्रकट हुए थे रामलला
इन सभी सवालों के जवाब हम जानेंगे, लेकिन उससे पहले बात करते हैं कि रामलला की जो वर्तमान प्रतिमा है और जिसका दर्शन लोग पिछले 74 वर्षों से कर रहे हैं, वो वहाँ कैसे प्रकट हुई थी। वो 23 दिसंबर, 1949 का दिन था जब लोगों ने दरवाजा खोला तो पाया कि अंदर रामलला की मूर्ति रखी हुई थी। इससे पहले बाहर चबूतरे पर पूजा-पाठ होता था। इसके बाद वहाँ हजारों लोग जुटे थे और ‘भए प्रकट कृपाला, दींन दयाला, कौशल्या हितकारी’ से पूरी अयोध्या गूँज उठी थी।
इस घटना को ‘रामलला का प्राकट्य’ के नाम से जाना गया। उस समय केंद्र में जवाहरलालर नेहरू प्रधानमंत्री थे, जो खासे सेक्युलर थे। यूपी में भी केंद्र की तरह ही कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। ऐसे में अयोध्या में पुलिस ने अभयराम दास, सकल दास और सुदर्शन दास और 50-60 अन्य लोगों को ‘दंगाई’ बताते हुए FIR भी दर्ज की। 29 दिसंबर को बाबरी ढाँचे को विवादित संपत्ति का हिस्सा मान कर प्रशासन ने ताला जड़ दिया। जिस चबूतरे का यहाँ हमने जिक्र किया, वहाँ सैकड़ों वर्षों से भगवान् श्रीराम की पूजा होती आ रही थी।
1951 में श्रद्धालुओं की याचिका पर अदालत ने फैसला सुनाया कि मुक़दमे की समाप्ति तक वहाँ से मूर्तियों को न हटाया जाए। मुस्लिमों ने तब आरोप लगाया था कि किसी ने अंदर घुस कर चुपचाप मूर्ति रख दी है। जहाँ मूर्ति प्रकट हुई थी, वो बाबरी ढाँचे, जिसे मुस्लिम मस्जिद कहते थे, उसके मुख्य गुंबद के नीचे वाला कमरा था। उस दौरान गोरखपुर मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ भी साधु-संतों के साथ कीर्तन के लिए अयोध्या में ही मौजूद थे।
राम मंदिर में नई मूर्ति को लेकर तैयारियाँ जोरों पर
हाल ही में पूरे देश ने वो दृश्य देखा, जब नेपाल से 6 करोड़ वर्ष पुरानी शिलाएँ सड़क मार्ग से अयोध्या पहुँचीं। रास्ते में जहाँ-जहाँ से शिला गुजरी, काफिला बनता गया। क्या बच्चे-बुजुर्ग और क्या महिलाएँ, शिला के दर्शन और पूजन के लिए भीड़ जुटती रही। 127 क्विंटल वजन के दो शालिग्राम शिलाओं को जनकपुर की गंडकी नाड से लाया गया। जनकपुर वही जगह है, जहाँ माँ सीता के पिता जनक राज करते थे। इन शिलाओं का धूमधाम से अयोध्या में स्वागत किया गया। हालाँकि, बाद में कई जगह की शिलाओं के परीक्षण के बाद कर्नाटक के शिलाओं के इस्तेमाल पर सहमति बनी।
फ़िलहाल भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण के लिए तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में चल रहे हैं – राम वनजी सुतार, अरुण योगीराज और वासुदेव कामथ। राम वनजी सुतार ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ प्रतिमा का निर्माण किया है, जो गुजरात के केवडिया का मुख्य आकर्षण है। 99 साल के राम वनजी सुतार ने 1950 के दशक में अजंता-एलोरा की गुफाओं में मूर्तियों की मरम्मत में बड़ी भूमिका निभाई थी।
पद्म भूषण से सम्मानित राम वनजी सुतार को ‘आज का विश्वकर्मा’ भी कहा जाता है। इसके बाद आते हैं अरुण योगीराज पर। केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य की जो प्रतिमा स्थापित हुई है, उसका निर्माण उन्होंने ही किया है। उनके पूर्वज भी पत्थर की मूर्तियाँ तराशने में दक्ष थे और उन्हें ये कला विरासत में भी मिली है। इस प्रतिमा के लिएअरुण योगीराज ने 9 महीने रोज 14-15 घंटे की मेहनत की। 39 वर्षीय अरुण योगीराज के पूर्वजों को मैसूर राजघराने का संरक्षण प्राप्त था।
उन्होंने 23 मार्च को एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उन्होंने अपनी बनाई भगवान श्रीराम की एक प्रतिमा का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए समझाया था। प्रतिमा के हर एक भाग के बारे में उन्होंने बताया था, जिसे ‘Iconography’ भी कहते हैं। उनकी रिसर्च तगड़ी होती है। आते हैं तीसरे नाम पर, जो चर्चा में है। वासुदेव कामथ के बारे में मीडिया में आया कि उन्होंने जो तस्वीर बना कर दी, उससे ट्रस्ट के सदस्य खुश हैं। उन्होंने ट्रस्ट की एक बैठक में अपनी डिजाइन का प्रदर्शन किया था।
रामलला की मूर्ति पहले से, ऐसे में नई प्रतिमा क्यों? – जानें कारण
ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रतिमा पहले से है ही, तो फिर नई प्रतिमा की क्या आवश्यकता है? हमने इस पूरे मामले पर कामेश्वर चौपाल से बातचीत की, जो ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य हैं। कामेश्वर चौपल के बारे में बता दें कि वो बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के नींव की पहली ईंट 9 नवंबर, 1989 को रखी थी। वो ‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ (दक्षिण बिहार) के प्रांतीय अध्यक्ष का दायित्व भी सँभाल रहे हैं।
नई प्रतिमा के संबंध में उन्होंने बताया कि अभी तक जितनी चर्चाएँ हुई हैं, वो ट्रस्ट के सामने रखी जाएँगी और ट्रस्ट द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद ही मीडिया को इस संबंध में सब कुछ बताया जाएगा। उन्होंने ये स्वीकारा कि जिन मूर्तिकारों के नाम पर चर्चा चल रही है, उनमें अरुण योगीराज का भी नाम है। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए सीधे किसी एक व्यक्ति का चयन नहीं होता, बल्कि सभी को अपना प्रेजेंटेशन दिखाने का मौका दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि पद्म भूषण से सम्मानित वासुदेव कामत का नाम भी सूची में शामिल है। इतना साफ़ है कि शास्त्रों में जैसा वर्णित है, उस हिसाब से रामलला की प्रतिमा तैयार करवाई जा रही है। कामेश्वर चौपाल ने बताया कि कई कलाकारों के नाम पर विचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि इन सभी कलाकारों ने अपने-अपने चित्र प्रस्तुत किए हैं। ट्रस्ट की पूर्ण बैठक में जिस कलाकार पर सहमति बन जाएगी, मीडिया को सूचित कर दिया जाएगा।
दो मूर्तियों का कारण क्या है? क्या गर्भगृह में दोनों ही रहेंगी? इस सवाल के जवाब में कामेश्वर चौपाल कहते हैं कि अधिकतर मंदिरों में 2 प्रतिमाएँ होती हैं। उन्होंने समझाया कि इनमें से एक को ‘उत्सव मूर्ति’ के रूप में जाना जाता है तो दूसरी ‘प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति’ कहलाती है। प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को कहीं खिसकाया नहीं जा सकता, वो वहीं पर विराजमान रहती हैं जहाँ उन्हें स्थापित किया जाता है। वहीं झाँकी या शोभा यात्रा जैसे आयोजनों में ‘उत्सव मूर्ति’ को निकाला जाता है।
‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने इसकी पुष्टि की है कि अयोध्या में बन रहे भव्य एवं दिव्य राम मंदिर में भी एक मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित होगी और एक उत्सव के लिए। उन्होंने इसकी भी जानकारी दी कि जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न कर लिया जाएगा। ऐसे में, साफ़ है कि वर्तमान में जो रामलला की मूर्ति है, उसे ही ‘उत्सव मूर्ति’ के रूप में विराजमान किया जाएगा। वो प्रतिमा छोटी भी है।
नवंबर 1989 में दलित कामेश्वर चौपाल ने ही रखी थी राम मंदिर की पहली ईंट
कामेश्वर चौपाल ने बताया कि बड़ी मूर्तियों को बहार नहीं निकाला जा सकता, इसीलिए उन्हें वहीं पर विराजमान रखा जाता है। प्रतिमा कैसे दिखेगी? – इस संबंध में मई के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट की बैठक में सब साफ़ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि फ़िलहाल चर्चाएँ ही चल रही हैं, इसीलिए कुछ स्पष्ट बताना ठीक नहीं है। प्राण प्रतिष्ठा के संबंध में उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी तारीख़ तय नहीं की गई है। उन्होंने समझाया कि शादी-विवाह से लेकर अन्य सभी शुभ अवसरों पर विद्वान आचार्य बताते हैं कि कब मुहूर्त है।
इसी तरह, राम मंदिर के लिए भी आचार्य गण बैठेंगे और ये निर्णय लेंगे कि नई प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कौन सी तारीख़ और कौन सा समय तय रहेगा। कामेश्वर चौपाल ने उदाहरण दिया कि कितना भी बड़ा घर बन कर तैयार हो जाए, पंडित द्वारा शुभ मुहूर्त बताने जाने के पश्चात ही घरवास का कार्यक्रम होता है। उन्होंने कहा कि आचार्यों से विमर्श कर के शुभ मुहूर्त में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का समय तय किया जाएगा। ये तारीख़ जनवरी 2024 की ही होगी, इस पर फ़िलहाल सहमति बन गई है।
माफिया अतीक अहमद को लेकर लगभग हर रोज नया खुलासा हो रहा है। गुजरात के साबरमती जेल में रहने के दौरान अतीक फोन का इस्तेमाल किया करता था। उमेश पाल की हत्या की साजिश भी साबरमती जेल से ही रची गई थी। हत्या की साजिश के अलावा अतीक ने मोबाइल फोन का इस्तेमाल किन कामों के लिए किया, अब उसके बारे में भी जानकारी सामने आ रही है। पता चला है कि अतीक की नजर अहमदाबाद में एक जमीन पर थी। वह अपने साथियों संग अहमदाबाद में जमीन खरीदने की फिराक में था। इतना ही नहीं वह अहमदाबाद की एक सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ना चाहता था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जून 2019 से साबरमती सेंट्रल जेल में बंद अतीक अहमद अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। सिम कार्ड उपलब्ध कराने और बदलने में बापूनगर के रहने वाले अल्ताफ पठान ने अतीक की काफी मदद की थी। दरअसल, अल्ताफ पुलिस का मुखबिर था और उसने एक बार AIMIM और दूसरी बार समाजवादी पार्टी की टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। यह वही अल्ताफ है, जिसने गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान वोटर्स से रोते हुए वोट देने की अपील की थी। उसका यह वीडियो खूब वायरल हुआ था। वह समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहा था।
अतीक अहमद का अहमदाबाद कनेक्शन सामने आने के साथ ही खुलासा हुआ है कि अतीक अहमद बापूनगर स्थित कपड़ा मिल की जमीन खरीदना चाहता था। इसके लिए अतीक ने अल्ताफ पठान, एक अज्ञात नेता और रियल स्टेट कारोबारियों के साथ बात की थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि अतीक के एक अन्य गुर्गे मेहराज ने उसे जेल में ऐश-ओ-आराम की कई चीजें उपलब्ध कराई थीं।
रिपोर्टों के अनुसार अतीक अहमद गुजरात में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता था। इसके लिए उसने एक सीनियर नेता से बापूनगर सीट के लिए टिकट भी माँगी थी। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अतीक और अशरफ की हत्या से पहले ही पठान दुबई भाग गया था।
बिहार सरकार ने 27 अपराधियों को रिहा करने की एक सूची जारी की है। इसमें एक नाम पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह का भी है। वे गोपालगंज के डीएम रहे जी कृष्णैया की हत्या में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उनकी रिहाई के लिए राज्य सरकार ने 10 अप्रैल 2023 को को जेल नियमावली, 2012 के नियम 481 में संशोधन किया था। आनंद मोहन के बेटे चेतन बिहार की महागठबंधन सरकार के साझीदार राजद के विधायक हैं।
आनंद मोहन की रिहाई पर जी कृष्णैया की विधवा उमा देवी ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा है, “मुझे अच्छा नहीं लग रहा है। उसने एक ईमानदार अधिकारी को मारा था। उसको जैसी सजा मिलनी चाहिए, वो नहीं मिली। उसकी रिहाई का सबको विरोध करना चाहिए।” साथ ही उन्होंने इस फैसले के लिए बिहार की जातीय राजनीति को भी जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा, “बिहार में जाति की राजनीति है। वह (आनंद मोहन) राजपूत है। राजपूतों का वोट पाने के लिए उसे जेल से छोड़ा जा रहा है। यदि ऐसा नहीं होता तो एक अपराधी को बाहर लाने की क्या जरूरत थी।”
#WATCH | We are not happy, we feel it is wrong. There is caste politics in Bihar, he is a Rajput, so he will get Rajput votes and that is why he is being taken out (from jail), otherwise, what is the need of bringing a criminal. He will be given election ticket so that he can… pic.twitter.com/dfWgGZ5KEx
आनंद मोहन और जी कृष्णैया की हत्या की कहानी जानने से पहले आपको गैंगस्टर कौशलेंद्र शुक्ला उर्फ छोटन शुक्ला के बारे में जानना चाहिए। छोटन शुक्ला को इस दुनिया से गए 28 साल से भी अधिक समय हो चुका है। उसकी हत्या किसने की यह आज भी कोई नहीं जानता।
दरअसल, 4 दिसंबर 1994 की रात मुजफ्फरपुर में छोटन शुक्ला की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। छोटन के साथ उसकी कार में सवाल 4 अन्य लोग भी मारे गए थे। माना जाता है कि छोटन शुक्ला की हत्या लालू यादव और आनंद मोहन के बीच छिड़ी जंग की वजह से हुई थी। इसलिए छोटन की हत्या का बिहार की राजनीति पर बहुत बड़ा असर हुआ। आनंद मोहन की BPP (बिहार पीपुल्स पार्टी) से छोटन शुक्ला केसरिया से विधानसभा चुनाव भी लड़ने वाला था।
छोटन शुक्ला की हत्या के अगले ही दिन यानी 5 दिसंबर 1994 को लोग मुजफ्फरपुर की सड़कों पर उतर आए। उसके समर्थक शव के साथ ही प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान मुजफ्फरपुर के रास्ते पटना से गोपालगंज जा रहे थे दलित अधिकारी जी. कृष्णैया। वे उस समय गोपालगंज के कलेक्टर होते थे। भीड़ ने मुजफ्फरपुर के खबड़ा गाँव में उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया। पहले भीड़ ने कृष्णैया को कार से बाहर निकाला। फिर उनकी जमकर पिटाई की। इसके बाद कथित तौर पर भुटकुन शुक्ला ने गोली मारकर उनके जिंदा रहने की संभावना पर विराम लगा दिया।
छोटन शुक्ला की शव यात्रा का नेतृत्व आनंद मोहन, उनकी पत्नी और वैशाली की पूर्व सांसद लवली आनंद, छोटन शुक्ला का भाई और विधायक मुन्ना शुक्ला, विक्रमगंज का पूर्व विधायक अखलाक अहमद, शशिशेखर और अरुण कुमार सिन्हा कर रहे थे। इन लोगों पर डीएम की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप था। हाजीपुर पहुँचने से पहले आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद को गिरफ्तार कर लिया गया।
कलेक्टर की हत्या के आरोप में पटना की निचली अदालत ने साल 2007 में आनंद मोहन को फाँसी की सजा सुनाई थी। लेकिन इसके बाद पटना हाई कोर्ट ने उनकी सजा को उम्र कैद में बदल दिया। उम्र कैद काटने की सजा होने के बाद भी आनंद मोहन पेरोल पर जेल से बाहर आते रहे हैं। अभी भी वे पेरोल पर ही बाहर हैं।
#WATCH | "I will go for parole surrender and complete all the formalities and procedures of the jail. I will go back today itself, I have to reach there by tomorrow morning," says former MP & murder convict Anand Mohan Singh as he leaves from Patna for Saharsa for surrender… pic.twitter.com/atrCSYpcRa
अब जेल से रिहाई पर बिहार सरकार के फैसले को लेकर आनंद मोहन का जवाब भी सुन लीजिए। न्यूज एजेंसी एएनआई के पत्रकार ने उनसे पूछा कि जो पहले वाले आनंद मोहन थे और बाहर निकलने वाले आनंद मोहन में क्या कोई बदलाव देखने को मिलेगा। आनंद मोहन का जवाब था, “देखिए नेचर और सिग्नेचर…”
यूपी पुलिस ने माफिया अतीक अहमद के गुर्गे आतिन जफर को गिरफ्तार किया है। आतिन वही शख्स है, जिसने अतीक के बेटे असद के अकाउंट से पैसे निकाले थे। पैसा निकालने के दौरान एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर कैद हो गई थी। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। दूसरी तरफ पता चला है कि माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या करने से पहले तीनों शूटर्स ने सिद्धू मूसेवाला मर्डर के वीडियो देखे थे। इसके बाद शूटर्स ने सिर्फ 16 सेकेंड में अतीक और अशरफ पर 34 गोलियाँ दाग दी थी।
असद को बचाने की साजिश जो नाकाम रही
उमेश पाल हत्याकांड में असद का नाम न आए इसकी पूरी प्लानिंग की गई थी। असद का स्मार्टफोन और एटीएम कार्ड आतिन जफर को दे दिया गया था। तय हुआ कि जिस समय प्रयागराज में उमेश पाल पर हमला किया जाएगा, उस वक्त आतिन लखनऊ में असद के एटीएम कार्ड से रुपए निकालेगा। इससे बाद में यह साबित हो सकेगा कि उमेश पाल की हत्या के समय असद मौके पर मौजूद नहीं था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल की हत्या वाले दिन असद को गाड़ी से न निकलने की सलाह दी गई थी। कहा गया था कि यदि गाड़ी से निकलना पड़े तो मंकी कैप लगाकर निकले।
अपना नाम कमाना चाहता था असद
उमेश पाल हत्याकांड के समय के वायरल हुए वीडियो में असद गोली चलाता नजर आ रहा है। इस दौरान उसने मंकी कैप भी नहीं पहनी हुई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया है कि असद क्राइम की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहता था। पिता अतीक और चाचा अशरफ की नजर में वह भी अपने आप को साबित करना चाहता था। दावा है कि इसके लिए उसे गुड्डू मुस्लिम ने उकसाया था। उमेश पाल की हत्या के बाद असद फरार हो गया था। 13 अप्रैल को झाँसी में शूटर गुलाम के साथ वह एनकाउंटर में वह ढेर हो गया था।
16 सेकेंड में अतीक-अशरफ को दागी 34 गोलियाँ
असद के एनकाउंटर के 2 ही दिन बाद यानी 15 अप्रैल 2023 की रात तीन शूटर्स लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य ने अतीक अहमद और अशरफ अहमद को गोलियों से भून दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक हत्याकांड वाली जगह पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच से पता चला है कि तीनों आरोपितों ने 16 सेकेंड में 34 गोलियाँ फायर की थीं। एसआईटी के अनुसार देसी पिस्टल से कई राउंड फायरिंग के बाद पिस्टल में गोली फँस गई थी। जिगाना पिस्टल से फायरिंग जारी रही। जाँच में पता चला है कि शूटर्स गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से प्रभावित थे। तीनों ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की खबरें और वीडियो कई बार देखी थीं।
बता दें कि जितेंद्र गोगी नाम के गैंगस्टर ने सनी को जिगाना पिस्टल दी थी। उसने सनी को अपने दुश्मन टिल्लू ताजपुरिया को खत्म करने का टारगेट दिया था। जितेंद्र गोगी की सितंबर 2021 में दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।