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‘पहले यह सोच थी कि भारत नहीं बदल सकता, नई सोच ये है कि ये देश अब पूरी दुनिया को बदल सकता है’: MP के बाद केरल पहुँचे PM मोदी, हजारों करोड़ की दी सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ रैलियाँ कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए रैलियाँ कर रहे हैं। सोमवार (24 अप्रैल 2023) को पीएम ने दोपहर में मध्य प्रदेश के रीवा में और शाम में केरल के कोच्चि में जनसभा को संबोधित किया।

पीएम मोदी ने दो दिवसीय केरल दौरे पर हैं। इस दौरे के पहले दिन उन्होंने कोच्चि में पैदल चलते हुए रोड शो किया। इसके बाद कार में बैठकर भी लोगों का अभिवादन स्वीकार करते रहे। करीब 2 किलोमीटर लंबे रोड शो के बाद पीएम ‘युवम 2023’ कार्यक्रम में पहुँचे। यहाँ उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा है कि पहले की सरकारों ने सभी सेक्टर में घोटाले किए हैं। वहीं बीजेपी सरकार हर सेक्टर में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

पीएम ने युवम 2023 में युवाओं और कोच्चि की जनता को संबोधित करते हुए यह भी कहा है कि उन्होंने हाल ही में केरल के एक 99 वर्षीय युवा से मुलाकात की थी। वह युवा प्रसिद्ध गाँधीवादी श्री वी. पी. अप्पुकुट्टा पोडुवल हैं। राष्ट्रपति ने उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है। पीएम ने महान वैज्ञानिक नंबी नारायणन और आद्य शंकराचार्य की भी बात की। उन्होंने कहा कि विकृतियों के खिलाफ समाज को जागरूक करने की जरूरत हुई तो केरल से नारायण गुरू जैसे सुधारक आए।

पीएम ने यह भी कहा है कि आज पूरी दुनिया कह रही है कि 21वीं सदी भारत की सदी है। भारत वह देश है जिसके पास युवा शक्ति का भरपूर भंडार है। पहले यह सोच थी कि भारत नहीं बदलेगा। लेकिन अब सोच बदल गई है। नई सोच यह है कि हमारा ये देश अब पूरी दुनिया को बदल सकता है।

कॉन्ग्रेस ने गाँधी के विचारों को किया अनसुना- पीएम मोदी

इससे पहले प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश के रीवा में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर आयोजित पंचायती राज सम्मेलन में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने 2300 करोड़ रुपए की रेल परियोजनाओं और 7853 करोड़ रुपए की 5 नल-जल परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसके अलावा उन्होंने तीन ट्रेनों को भी वर्चुअली हरी झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने कहा बापू कहते थे कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है।

पीएम मोदी ने कहा कि इसके बावजूद कॉन्ग्रेस ने उनके विचारों पर ध्यान नहीं दिया। कॉन्ग्रेस ने 90 के दशक में पंचायती राज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की। गाँव के लोगों को बाँटकर पार्टियों ने अपनी दुकानें चलाईं।

शुरू हुआ मोदी सरकार का ‘ऑपरेशन कावेरी’, पहले जत्थे में सूडान में फँसे 500 भारतीयों को लाया जा रहा वापस: गृह युद्ध में अब तक गई 413 जानें

अफ्रीकी देश सूडान गृह युद्ध से जूझ रहा है। ऐसे में वहाँ फँसे भारतीयों ने अपनी जान बचाने के लिए भारत सरकार से गुहार लगाई थी। इसको लेकर सरकार ने ‘ऑपरेशन कावेरी’ शुरू किया है। इसके तहत सूडान में फँसे भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। 500 से अधिक लोग भारत आने के लिए पोर्ट सूडान पहुँच चुके हैं। जहाँ से वह भारत आने के लिए उड़ान भरेंगे।

कैसे बने गृह युद्ध के हालात

सूडान में गृह युद्ध सेना और अर्धसैनिक बल यानी मिलिट्री और पैरामिलिट्री के बीच जंग के कारण शुरू हुआ है। निश्चित तौर पर सूडान में गृह युद्ध 15 अप्रैल 2023 से शुरू हुआ। लेकिन इसकी नींव 4 साल पहले यानी साल 2019 में पड़ चुकी थी। दरअसल, अप्रैल 2019 में सेना ने करीब तीन दशक से देश की सत्ता में काबिज राष्ट्रपति उमर अल बशीर को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसमें सेना का सहयोग देश में लोकतंत्र का समर्थन करने वाले लोगों ने प्रदर्शन कर किया। सेना ने तख्तापलट तो कर दिया था। लेकिन इसके बाद लोग सरकार में अपनी हिस्सेदारी की माँग करने लगे।

इसके बाद सूडान में सेना और देश के नागरिकों को मिलाकर नई सरकार का गठन किया गया। लेकिन अक्टूबर 2021 में सेना ने तख्तापलट करते हुए पूरी सत्ता अपने हाथ में ले ली। इसके बाद से संप्रभु परिषद देश को चला रही है। इसमें सेना और अर्धसैनिक बल बराबरी की भूमिका में हैं। हालाँकि इस परिषद के अध्यक्ष यानि सरकार की कमान सूडान के सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल बुरहान के पास है। एक तरह से वह देश के राष्ट्रपति है। वहीं, इसके उपाध्यक्ष या उपराष्ट्रपति का पद अर्धसैनिक बल प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान डगलो के पास है। मौजूदा सरकार, यानी सेना अर्धसैनिक बल का सेना में विलय चाहती थी। लेकिन अर्धसैनिक बल इसके लिए तैयार नहीं थे।

अर्धसैनिक बल का कहना था कि विलय का फैसला 10 वर्षों के लिए टाला जाए। वहीं, सेना 2 वर्षों के भीतर ही अर्धसैनिक बलों का सेना में विलय चाहती थी। इसी मुद्दे को लेकर सेना और अर्धसैनिक बल आमने-सामने हैं। शुरुआत में ऐसा माना जा रहा था कि यह पूरा मामला आपसी बातचीत से निपट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सूडान में सेना और अर्धसैनिक बल एक दूसरे के ठिकानों पर कब्जा करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

सूडान में गंभीर हालात, भारत सरकार ने शुरू किया ‘ऑपरेशन कावेरी’

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ के अनुसार, सूडान में जारी हिंसा के चलते अब तक 413 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें 9 बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, 3551 लोग घायल हुए हैं। सूडान में रह रहे लोगों की हालत बेहद खराब होती जा रही है। लोगों को खाना तो दूर की बात पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। वहाँ फँसे भारतीय बाथरूम के नल से आने वाले पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। गृह युद्ध शुरू होने के अगले ही दिन यानी 16 अप्रैल को वहाँ रह रहे भारतीय नागरिक अल्बर्ट ऑगस्टीन की गोली लगने से मौत भी हो गई थी।

सूडान में लगातार खराब हो रहे हालात के चलते वहाँ फँसे भारतीयों ने अपनी जान बचाने के लिए भारत सरकार से गुहार लगाई थी। सूडान में अब भी चार हजार भारतीय फँसे हुए हैं। इन सभी को सुरक्षित भारत लाने के लिए सरकार ने पूरा प्लान तैयार करते हुए ‘ऑपरेशन कावेरी’ शुरू किया है। इस ऑपरेशन के तहत ही करीब 500 भारतीय नागरिकों को सूडान पोर्ट लाया जा चुका है।

‘ऑपरेशन कावेरी’ और सूडान में फँसे भारतीयों को वापस लाने को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा है, “सूडान में फँसे भारतीयों को निकालने का काम शुरू हो चुका है। करीब 500 नागरिकों को पोर्ट सूडान लाया जा चुका है। इनके अलावा कुछ और नागरिक वहाँ पहुँचने वाले हैं। हमारे शिप और एयरक्राफ्ट भारतीयों को वापस लाने के लिए तैयार हैं। हम सूडान में अपने सभी भारतीयों की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

कोलकाता से लखनऊ तक तेजस्वी यादव को लेकर दौड़े नीतीश कुमार, पर न खुदा मिला न विसाल-ए-सनमः ममता-अखिलेश ने नहीं खोले अपने पत्ते

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुँच कर समावजदी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात की। विपक्षी एकता की कवायद में लगे जदयू नेता नीतीश कुमार ने इससे पहले कोलकाता पहुँच कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठक की थी। वो दिल्ली में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी मिल चुके हैं।

लखनऊ में नीतीश कुमार ने कहा कि पूरे देश को भाजपा से मुक्ति मिले और देश आगे बढ़े, इसके लिए सब मिल कर प्रयास करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इतिहास को बदलने के चक्कर में है। बकौल बिहार सीएम, काम नहीं हो रहा है और केवल प्रचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पार्टियों को एक साथ मिल कर आगे बढ़ने और एक साथ मिल कर चुनाव लड़ने पर फायदा हो सकता है, देशहित में हो सकता है।

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के लोगों का रिश्ता उत्तर प्रदेश से शुरू से है। उन्होंने खुद को समाजवादी बताया। साथ ही कहा कि देश के अन्य जगहों के हित में भी बातचीत हुई है और अन्य दलों से भी बातचीत होगी। उन्होंने कहा कि अच्छी बातचीत हुई है। नेता तय होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सब लोग एकजुट हो जाएँगे, तब नेता बनेंगे और अच्छा काम करेंगे। हालाँकि, उन्होंने कहा कि वो नेता नहीं बनेंगे और उन्हें कुछ नहीं चाहिए।

नीतीश कुमार ने कहा कि अगर सब मिल कर लड़ेंगे तो आगे चल कर परिणाम अच्छा आएगा। उन्होंने कहा कि यूपी-बिहार में अधिकतर परिणाम इधर ही आएँगे। वहीं इस दौरान अखिलेश यादव ने लोकतंत्र पर संकट की बात करते हुए कहा कि संविधान को बचाने के लिए भाजपा की गलत नीतियों से किसान-मजदूर परेशान हैं और महँगाई-बेरोजगारी चरम सीमा पर है। उन्होंने कहा कि भाजपा हटाने और देश बचाने के अभियान में वो साथ हैं।

हालाँकि, दोनों ही बैठकों में एक बात तय है कि नीतीश कुमार के हाथ बातों से ज़्यादा कुछ नहीं लगा है। न तो लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कोई गठबंधन की बात हुई, न ही विपक्ष के पास नेता का चेहरा है। बिहार में नीतीश कुमार वामपंथी दलों से गठबंधन में हैं, बंगाल में वो उनके विरोधी ममता बनर्जी से मिलते हैं। क्या वामदल-TMC एक साथ आएँगे? क्या यूपी में मायावती विपक्षी गठबंधन के प्लान का हिस्सा नहीं हैं? या फिर नीतीश कुमार यूँ ही टाइमपास कर रहे हैं?

गुरुद्वारा में जूते पहन कर घुसा युवक, पाठियों की कर दी पिटाई, पगड़ियाँ उतार दी, गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी: SGPC ने की निंदा, CM भगवंत मान बोले – होगी कड़ी कार्रवाई

पंजाब में एक बार फिर से गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी की घटना सामने आई है। ताज़ा मामला रोपड़ के मोरिंडा स्थित गुरुद्वारे का है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक सिख व्यक्ति गुरुद्वारे में घुसता है और वहाँ गुरु ग्रन्थ साहिब के पास बैठे पाठियों की पिटाई करने लगता है। इस दौरान उसने जूते भी पहन रखे थे। इस दौरान उसका हाथ गुरु ग्रन्थ साहिब पर भी लग गया।

उक्त घटना सोमवार (24 अप्रैल, 2023) की है। हालाँकि, इस दौरान गुरुद्वारा में मौजूद लोगों ने उस युवक को पकड़ लिया और उसकी जम कर पिटाई कर डाली। बेअदबी की इस घटना के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया और लोगों ने धरना प्रदर्शन किया। सड़क पर जाम की स्थिति पैदा हो गई। पंजाब पुलिस उस युवक को गिरफ्त में लेकर पूछताछ कर रही है। अभी तक ये सामने नहीं आया है कि उसने इस घटना को क्यों अंजाम दिया।

कोतवाली साहिब गुरुद्वारे में हुई इस घटना क CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। ये घटना दोपहर के सवा 1 बजे की है। संगत उस समय जाप में लगी थी, तभी केशधारी युवक आ धमका। उसने जूते पहन रखे थे। उसने इशारा कर के गुरु ग्रन्थ साहिब का जाप कर रहे पाठियों को बाहर निकालने के लिए भी कहा। वो स्टील की ग्रील फाँद कर वहाँ जा पहुँचा और उनकी पिटाई शुरू कर दी। साथ ही उनकी पगड़ियाँ भी उतार डाली।

युवक को घसीटते हुए लोग गुरुद्वारा के बाहर ले गए, इसकी तस्वीर भी सामने आई है। पुलिस को घटना की जानकारी मिलते ही वो वहाँ पहुँच गई। लोगों का कहना है कि जब तक युवक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, वो धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने भी कड़ी कार्रवाई की माँग की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कहा है कि निंदा करने वालों को कानून नहीं बख्शेगा। पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस घटना की निंदा की है।

‘नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा’: सहारनपुर से CM योगी ने फूँका निकाय चुनाव का बिगुल, कहा- अब माफिया की मौत पर आँसू बहाने वाला भी नहीं मिलता

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों की तैयारियाँ चल रही है। 4 और 11 मई को मतदान होना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इन चुनावों के प्रचार का बिगुल 24 अप्रैल 2023 को सहारनपुर से फूँका। उन्होंने शामली में भी जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान अतीक अहमद का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब माफिया अतीत हो गए हैं। यूपी को दंगा, कर्फ्यू से मुक्ति मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि पहले जो गर्मी दिखाया करते थे, उनकी अब गर्मी निकल चुकी है। पहले यूपी में गुंडा टैक्स वसूला जाता था। अब गुंडा टैक्स वसूलने वाले कहाँ चले गए, यह पता ही नहीं चल रहा। उन्होंने कहा, “नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।” शामली की जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने लोगों को पूर्व की सरकारों में हुए और कांधला से हुए हिंदुओं के पलायन की भी याद दिलाई। इस इलाके में गुंडाराज और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “याद करिए आज से 6 साल पहले शामली जनपद की क्या स्थिति हुआ करती थी। पलायन, गुंडाराज, दंगों का दंश, बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। व्यापारियों से गुंडा टैक्स की वसूली होती थी। लेकिन 6 वर्षों के अंदर कैसे तकदीर बदली जा सकती है, शामली और उत्तर प्रदेश इसका जीता जागता उदाहरण है।” उनके इस बयान को वीडियो में 17 मिनट 30 सेकेंड के बाद सुना जा सकता है।

उन्होंने कहा, “पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब कर्फ्यू नहीं लगता। अब दंगे नहीं होते, गुंडा टैक्स की वसूली नहीं होती। गुंडा टैक्स वसूली करने वालों की गर्मी शांत हो गई। गुंडा टैक्स वसूलने वाले कहाँ चले गए पता ही नहीं चलता। उनके लिए दो बूँद आँसू बहाने वाले भी अब नहीं है। जब बेटियों को माँ-बाप के संरक्षण में अपने ही घर और गाँव के स्कूल में पढ़ते हुए देखता हूँ तो मुझे लगता है कि हमारा सत्ता में आना सफल हो गया।”

विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गरीबों को शौचालय, फ्री रसोई गैस का कनेक्शन, फ्री बिजली कनेक्शन, आयुष्मान भारत जैसी योजना का लाभ नहीं मिलता था। तब किसान, व्यापारी, बेटी कोई सुरक्षित नहीं थी। लेकिन जब उत्तर प्रदेश ने जातिवाद की जगह राष्ट्रवाद को चुना तो प्रदेश को बदलने में समय नहीं लगा।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के दोनों चरणों में 9-9 मंडलों में मतदान होना है। पहले चरण में सहारनपुर, मुरादाबाद, आगरा, झाँसी, प्रयागराज, लखनऊ, देवीपाटन, गोरखपुर, वाराणसी में वोट डाले जाएँगे। दूसरे चरण में मेरठ, अलीगढ़, कानपुर, चित्रकूट, अयोध्या, बस्ती, आजमगढ़ और मिर्जापुर में मतदान होगा।

जिंदगी भर कठमुल्लापन से लड़ते रहे तारिक फ़तेह, उनकी मौत के बाद भी मजहबियों ने दिखा दिया रंग: इस्लामी कट्टरपंथियों ने Haha से मनाया जाने का जश्न

स्कॉलर तारिक फ़तेह का निधन हो गया है। उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था, लेकिन वो परिवार के साथ कनाडा में रह रहे थे। उनकी बेटी नताशा ने उनके निधन की सूचना दी। इस्लाम के इतिहास पर पुस्तकें लिख चुके तारिक फतह से कट्टर मुस्लिम नफरत करते थे, जो उनके निधन के बाद भी दिख रहा है। कई कट्टर मुस्लिमों ने उनके निधन पर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। उनके निधन वाली खबर पर ‘हाहा’ रिएक्शंस डाले जा रहे हैं।

नताशा फ़तेह ने उनके निधन की खबर देते हुए उन्हें ‘पंजाब का शेर’, ‘हिंदुस्तान का बेटा’, ‘कनाडा को प्यार करने वाला’, ‘सच बोलने वाला’, ‘न्याय के लिए लड़ने वाला’ और ‘दबे-कुचले लोगों की आवाज’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि तारिक फ़तेह ने आखिरकार अपनी मशाल आगे सौंप दी है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके द्वारा शुरू की गई क्रांति उनलोगों के साथ जारी रहेगी, जो उन्हें जानते और प्यार करते थे।

उनका जन्म 20 नवंबर, 1949 को कराची में हुआ था। उनका परिवार विभाजन के दौरान बॉम्बे से कराची चला गया था। 60 और 70 के दशक में उन्होंने एक क्रांतिकारी छात्र नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। फिर वो अपनी बेधड़क पत्रकारिता के ले पहचाने जाने लगे। पाकिस्तान की सरकार और फ़ौज को उनका ये रवैया पसंद नहीं आया, जिस कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्हें पाकिस्तान छोड़ कर कनाडा में शरण लेनी पड़ी।

वो खुद को ‘पाकिस्तान में जन्म भारतीय’ बताते थे और उन्हें ये मानने में कोई गुरेज नहीं था कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। तारिक फतह पंजाबी मुस्लिम परिवार से आते थे। 1996 से 2006 तक उन्हें ‘मुस्लिम क्रॉनिकल’ नामक शो होस्ट करने के लिए भी जाना जाता है। वो इस्लाम और मुस्लिम समाज में सुधारों के पक्षधर थे। उनकी पुस्तकों ‘The Jew Is Not My Enemy’ और ‘Chasing a Mirage’ को लोगों ने खूब पसंद किया था।

जब फेसबुक पर ‘Times Of India’ ने लंबी बीमारी के बाद लेखक तारिक फ़तेह फतह के निधन की खबर दी, तो पोस्ट पर ‘हाहा’ रिएक्शंस की बाढ़ आ गई। इनमें अधिकतर कट्टर मुस्लिम थे। जहाँ अधिकतर लोग, खासकर भारतीय, उनके निधन पर गमगीन दिखे, वहीं इस्लामी कट्टरपंथी इस दौरान जश्न मनाते नजर आए। लोगों ने उन्हें एक महान व्यक्तित्व करार दिया और साथ ही उन्हें आईना दिखाया, जो उनके निधन पर जश्न मना रहे हैं।

तारिक फतह निधन वाली खबर पर कट्टर मुस्लिमों ने दिया हाहा रिएक्शन

भारत के कई न्यूज़ चैनलों पर तारिक फ़तेह हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में अपनी बात रखते हुए और बहस में हिस्सा लेते हुए दिखते थे। ‘आप की अदालत’ में रजत शर्मा ने उनका इंटरव्यू लिया था, जो ‘इंडिया टीवी’ पर आया था और खासा वायरल हुआ था। वो अक्सर तथ्यों और इतिहास को सामने रख कर पाकिस्तान को बेनकाब कर देते थे। वो कहते हैं कि कट्टरपंथी ‘मुल्ला का इस्लाम’ में मानते हैं जबकि वो ‘अल्लाह के इस्लाम’ में भरोसा रखते हैं।

NIA ने सील की हिजबुल सरगना सैयद सलाउद्दीन के बेटे की संपत्ति: कहने को लैब में काम, असली में आतंक के लिए जुटाता था फंड

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन के बेटे की संपत्ति कुर्क कर ली। सैयद सलाहुद्दीन का बेटा सैयद अहमद शकील भी आतंकी है। फिलहाल वह आतंकी फंडिंग के मामले में जेल में बंद है। एनआईए ने यह कार्रवाई यूएपीए के तहत की।

सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद की जिन संपत्तियों को NIA ने कुर्क किया है वह जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर व बडगाम शहर में हैं। संपत्तियों को कुर्क कर एनआईए ने वहाँ कुर्की का नोटिस बोर्ड लगा दिया है। इस बोर्ड में लिखा है, “सभी को सूचित किया जाता है कि नरसिंह गढ़, मोहल्ला राम बाग, श्रीनगर में स्थित सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील की संपत्तियों को कुर्क कर लिया गया है। वह घोषित आतंकवादी है। एनआईए ने यह कार्रवाई विशेष अदालत के आदेश से गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत की है।”

गौरतलब है कि सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटे सैयद अहमद शकील और सैयद यूसुफ सरकारी नौकरी में थे। लेकिन दोनों ही साल 2018 में आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाते पाए गए थे। इसके बाद साल 2021 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दोनों को ही बर्खास्त कर दिया था। इन दोनों के साथ ही प्रशासन ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्त 9 अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया था।

एनआईए ने जाँच में पाया था कि मोस्ट वांटेड आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के दोनों बेटे सैयद अहमद शकील और सैयद यूसुफ हिजबुल मुजाहिदीन की आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा कर रहे थे। दोनों ये फंड हवाला के जरिए इकट्ठा करते और ट्रांसफर करते पाए गए थे। सैयद अहमद शकील शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस), सौरा में लैब तकनीशियन के रूप में काम करता था। वहीं, सैयद यूसुफ जम्मू-कश्मीर के कृषि विभाग में काम कर रहा था। नौकरी से बर्खास्त करने के बाद अब संपत्ति कुर्क करने को हिजबुल मुजाहिदीन और आतंकवाद पर बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है।

रैपर बादशाह ने माँगी माफी, ‘सनक’ गाने का बोल बदलेंगे: सेक्स… फाड़ता फिरूँ रैप में ‘भोलेनाथ’ का इस्तेमाल कर विवादों में घिरे थे

अपने नए गाने ‘सनक’ में आपत्तिजनक शब्दों के साथ ‘भोलेनाथ’ का इस्तेमाल करने को लेकर रैपर बादशाह (Badshah) ने माफी माँग ली है। उन्होंने गाने के लिरिक्स में बदलाव कर इसे दोबारा रिलीज करने की बात कही है। महाकाल के पुजारियों ने इस गाने पर आपत्ति जताते हुए उनसे माफी माँगने का कहा था। ऐसा नहीं होने पर उज्जैन सहित अन्य शहरों में FIR करवाने की चेतावनी भी दी थी।

बादशाह ने सोमवार (24 अप्रैल 2023) को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर कहा, “मेरी जानकारी में आया है कि हाल ही में रिलीज हुए मेरे ‘सनक’ गाने से कुछ लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं। मैं कभी भी जानबूझकर या अनजाने में किसी को ठेस नहीं पहुँचाऊँगा। मैं अपनी आर्टिस्टिक क्रिएशन और म्यूजिकल कंपोजीशन को बहुत ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचाता हूँ। हाल में हुई घटना के बाद मैंने इस बारे में ठोस कदम उठाते हुए अपने गानों के कुछ हिस्सों को बदला है और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए वर्जन के साथ पुराने वर्जन को बदल दिया है, ताकि कोई और इससे आहत न हो।”

बादशाह ने आगे लिखा, “रिप्लेसमेंट में थोड़ा समय लगेगा, जिसके बाद गाने का नया वर्जन रिलीज हो जाएगा। मैं आप सभी से विनम्र निवेदन करता हूँ कि तब तक थोड़ा धैर्य बनाएँ रखें और उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाओं को मैंने अनजाने में ठेस पहुँचाई। मेरे फैंस मेरे लिए सबसे बड़ा सपोर्ट हैं, इसलिए मैं उनको सबसे ज्यादा महत्व देता हूँ।” रैपर का यह इंस्टाग्राम पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बता दें कि ‘सनक’ में अश्लील शब्दों के साथ भगवान भोलेनाथ को जोड़ने पर उज्जैन के महाकाल मंदिर के पुजारी सहित कई शिव भक्तों ने आपत्ति जताई थी। महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश ने कहा था कि हिंदू सनातन में छूट का दुरुपयोग हो रहा है। साधु-संत, कथावाचक सभी ऐसी चीजों पर मौन हैं। फिल्म स्टार हो या गायक उन्हें भगवान के नाम पर अश्लीलता फैलाना का कोई अधिकार नहीं है। देश भर में एक साथ उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, अखंड हिंदू सेना के संस्थापक एवं महामंडलेश्वर आचार्य शेखर ने इस गाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था, “कोई भी गाना बनाओ हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हमारे देवी-देवताओं का नाम सम्मान से लिया जाना चाहिए। यदि उनके नाम और सम्मान के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ किया जाता है, तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।” परमहंस अवधेशपुरी महाराज ने भी बादशाह के गाने में आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह से भगवान शिव का पावन नाम लेना सरासर गलत है।

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह हो या उसके साथी, असम के डिब्रूगढ़ जेल में ही क्यों किए जा रहे कैद: जानें वजह और इतिहास, कई अन्य कुख्यात भी रहे यहाँ

भगोड़े खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को पंजाब पुलिस ने रविवार (23 अप्रैल 2023) को मोगा जिले के रोडे गाँव से गिरफ्तार किया। पंजाब में कानून-व्यवस्था न बिगड़े इसलिए उसे और उसके सहयोगियों को असम में अंग्रेजों के जमाने की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमृतपाल अपने नौ सहयोगी दलजीत सिंह कलसी, पापलप्रीत सिंह, कुलवंत सिंह धालीवाल, वरिंदर सिंह जोहल, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, हरजीत सिंह, भगवंत सिंह, बसंत सिंह और गुरिंदरपाल सिंह औजला के साथ डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।

डिब्रूगढ़ जेल को देश की आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले भारतीयों को रखने के लिए बनाया गया है। पूर्वोत्तर में कंक्रीट से बनी ये पहली जेल है। हालाँकि, आजादी के बाद इसमें देश के खिलाफ काम करने वाले कई कुख्यात कैदियों को रखा गया है। इसमें उल्फा के उग्रवादियों से लेकर अब खालिस्तान समर्थकों को रखा जाना शामिल है। यह इस क्षेत्र की सबसे पुरानी और सबसे सुरक्षित जेलों में से एक है।

अंग्रेजों द्वारा इसे 1859-60 में में बनाया गया था। जेल परिसर 15.54 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और असम पुलिस के ब्लैक कैट कमांडो, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा कर्मियों से घिरा हुआ है। रिपोर्टों से पता चलता है कि अपने 170 वर्षों के इतिहास में डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में कभी भी जेल ब्रेक की घटना नहीं हुई है।

ऐसा माना जा रहा है कि खालिस्तानी समर्थकों को असम ले जाने का एक कारण उन्हें असमिया भाषा न आना भी हो सकता है, क्योंकि जो कैदी असमिया नहीं जानते हैं, वे विशेष रूप से अन्य कैदियों के साथ कम बातचीत करते हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल और राजस्थान की जेलों में कई कैदी पंजाबी बोल और समझ सकते थे। इनमें से कुछ जेलों में कई पंजाबी गैंगस्टर और अलगाववादी भी बंद हैं।

इसके अलावा, अगर अमृतपाल और उसके सहयोगियों को पंजाब की जेल में रखा जाता, तो राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। उसे असम ले जाकर पंजाब में अमृतपाल के पक्ष में उठने वाली आवाज को दबाया जा सकता है। कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि असम ही क्यों, गुजरात, उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र क्यों नहीं? दरअसल, महाराष्ट्र की जेलों में कई हाईप्रोफाइल अपराधियों को रखा गया है। एक कारण यह भी हो सकता है कि असम इन राज्यों की तुलना में पंजाब से काफी दूर है। इससे असम की तुलना में इन राज्यों में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मकसद से भीड़ जुटाना थोड़ा आसान है।

बता दें कि एक राज्य के हाईप्रोफाइल अपराधियों को दूसरे राज्य में शिफ्ट करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। 2021 में जम्मू-कश्मीर से 26 बंदियों को उत्तर प्रदेश की आगरा सेंट्रल जेल में ट्रांसफर किया गया था।

‘हिंदुत्व भीड़ ने मुस्लिम बुजुर्ग को बेरहमी से मार डाला, काट दी दाढ़ी’: ‘उम्माह’ वाले ने शेयर किया 2 साल पुराना झूठ, तब ओवैसी-जुबैर गिरोह की खुल गई थी पोल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर के दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिन्दू भीड़ ने एक मुस्लिम बुजुर्ग को मार डाला। न सिर्फ ALTNews चलाने वाले मोहम्मद जुबैर, बल्कि प्रोपेगंडा पत्रकार राना अय्यूब और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी कभी इस झूठ को आगे बढ़ाया था। हालाँकि, इस संबंध में गाजियाबाद पुलिस की छानबीन के बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। ये आरोप झूठा निकला था।

‘उम्माह’ के लिए काम करने वाले मजीद फ्रीमैन ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “ये दिल तोड़ने वाला है। हिंदुत्व भीड़ ने उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम बुजुर्ग को क्रूरता से मार डाला। इससे पहले उन पर हमला किया गया और उनकी दाढ़ी को कैंची से काट डाला गया। रोज-रोज हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा मुस्लिमों के खिलाफ होने वाली इस हिंसा को रोका जाना चाहिए।” हालाँकि, लोगों द्वारा आईना दिखाए जाने और सच्चाई बताए जाने के बावजूद उसने अब तक ट्वीट डिलीट नहीं किया है।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि एक तो ये मामला 2 साल पुराना है, ऊपर से ये वैसा नहीं है जैसा इसे बता कर पेश किया जा रहा है। जून 2021 में भी इस मामले को लेकर काफी हो-हंगामा हुआ था और तब भी इसका फैक्ट-चेक हुआ था तो ये आरोप झूठे निकले थे। मोहम्मद जुबैर को अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा था और उसने कबूला था कि ये मामला जैसा दिख रहा है वैसा नहीं है। उस समय कई इन्फ्लुएंसर्स ने इस झूठ को फैलाया था।

तब जिन लोगों ने इस झूठ को आगे बढ़ाया था, उनमें हिदायत करीम, ‘The Wire’, वारिस पठान, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद शोएब पठान, फैजान सिद्दीकी, डॉ शमा मोहम्मद, साक्षी जोशी, सबा नकवी, हसीबा अमीन, सुचित्रा विजयन, सुजाता, अशरफ हुसैन, सुफियान खान, स्वरा भास्कर और अरफ़ा खानुम शेरवानी जैसे ट्विटर के जाने-पहचाने नाम शामिल हैं। जिस घटना के बारे में बात की जा रही है, वो कस्बा अनूपशहर के बुलंदशहर के मीरा मोहल्ला निवासी अब्दुल समद से जुड़ा है।

आगे बढ़ने से पहले ये भी बता दें कि मजीद फ्रीमैन ने लेस्टर और बर्मिंघम में हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसा के दौरान भी जम कर झूठ फैलाया था। वो एक इस्लामी कट्टरवादी है। उसने लेस्टर में कुरान का अपमान होने की झूठी खबर फैलाई थी। हालाँकि, इसका कोई वीडियो या सबूत सामने नहीं आया। इसके बाद मुस्लिम भीड़ सड़कों पर निकली और जम कर हिंसा की गई। उसने ये झूठ भी फैलाया कि एक मुस्लिम लड़के को पकड़ कर हिन्दू भीड़ ने उसका मजहब पूछा और उसे पीटा।

‘हिंदुत्व भीड़ ने मुस्लिम बुजुर्ग को मार डाला’ – फैलाया जा रहा झूठ, अब जानिए सच्चाई

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में सच्चाई बताई थी। पुलिस ने बताया था कि ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।

वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। आरोपितों का कहना है उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे। पुलिस ने बताया था कि मुख्य आरोपित पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कल्लू और आदिल भी गिरफ्तार कर लिए गए। अन्य अभियुक्तों की भी धर-पकड़ की गई थी।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित लोनी में मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट के मामले को सांप्रदायिक रंग देने के आरोपित सपा नेता उम्मेद पहलवान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई थी। पूछताछ में पता चला था कि केस दर्ज होने के बाद खुद को फँसता देख उम्मेद पहलवान ने अब्दुल समद से हलफनामे पर यह लिखवाने की कोशिश की थी कि उससे जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया था। इसके बाद आरोपित ने वीडियो को वायरल कर दिया।