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जिम कार्बेट में जिस ‘मजार जिहाद’ का ऑपइंडिया ने किया था पर्दाफाश, उस पर मेनस्ट्रीम मीडिया भी जागा: बोले CM धामी- खुद हटा लें, वरना सरकार सख्ती से हटाएगी

कुछ दिन पहले ऑपइंडिया ने रणनीतिक रूप से महत्वपर्ण जगहों पर अवैध मजार या दरगाह एवं मस्जिद-मदरसे बनाने को लेकर रिपोर्ट की एक पूरी श्रृंखला की थी। इसमें नेपाल सीमा से सटे जिलों में मजार और अवैध मस्जिद-मदरसे शामिल थे। बाद में यूपी की सरकार ने उनका संज्ञान लिया और उनका सत्यापन भी किया।

इसी तरह ऑपइंडिया ने उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में मजार बनाकर सरकारी जगहों पर अवैध कब्जे को लेकर रिपोर्ट की सीरीज की थी। जिन स्थानों पर अवैध मजार बनाकर कब्जा की गई हैं, उनमें प्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क भी शामिल है। इन रिपोर्ट्स का पहले की तरह उत्तरांखड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने फिर संज्ञान लिया है। बता दें कि उत्तराखंड में सिर्फ कालू सैय्यद के नाम पर 10 अवैध मजारें हैं, जबकि सैय्यद बाबा के नाम से आधा दर्जन मजारें हैं।

धामी सरकार ने कहा कि प्रदेश में जहाँ कहीं भी सरकारी जमीन को कब्जा करके अवैध रूप से मजार या अन्य ढाँचे बनाए गए हैं, उनके खिलाफ सरकार ऐक्शन लेगी। उन्होंने कहा कि बेहतर हो कि जिन लोगों ने कब्जा किया है, वे स्वयं उस कब्जे को हटा लें। अगर सरकार हटाएगी तो कठोर कार्रवाई करेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लैंड जिहाद हो या मजार जिहाद, देवभूमि उत्तराखंड में कानून और धर्म के विरुद्ध कोई काम नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हमने ऐसे 1000 जगहों का सर्वे कराया है, जहाँ अतिक्रमण किया गया है। अगर 6 महीने में इसे नहीं हटाया गया तो सरकार कार्रवाई करेगी।’

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा ऑपइंडिया की अवैध मजार वाली रिपोर्ट का संज्ञान लेेकर कार्रवाई करने की चेतावनी देने के साथ ही देश की मेनस्ट्रीम मीडिया ने भी इस मामले को उठाया है। आजतक न्यूज चैनल ने बकायदा इस पर एक स्टोरी की है।

ऑपइंडिया राज्य में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव, लैंड जिहाद, अवैध मजार और मदरसों को लेकर साल 2021 से समय-समय पर रिपोर्ट करता रहा है। सीएम धामी ने 22 मई 2022 को एक बयान में पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर चिंता जताई थी। इस बार सरकार ने चेतावनी दी है।

मई 2022 की अपनी रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने बताया था कि राज्य में कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ने और उनके द्वारा अतिक्रमण करने के कारण राज्य को सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है। कई जगहों पर डेमोग्राफिक बदलाव भी हो गए हैं। जिन जगहों पर डेमोग्राफिक बदलाव हुआ है, वहाँ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्याओं के भी होनेे की आशंका है। परिणाम यह हुआ कि कई इलाकों में मुस्लिमों की जनसंख्या 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक हो गई है।

अवैध मजारों और नशे के खिलाफ काम कर रहे वयोवृद्ध संत स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को बताया था, “1985 तक यहाँ एक भी मस्जिद नहीं थी। हमारे यहाँ मुस्लिमों को मनिहारी कहा जाता है, जो औरतों के साज-श्रृंगार के सामान बेचने का काम करते हैं। अल्मोड़ा में एक स्थानीय स्वर्णकार ने पहली मस्जिद दया भाव से मनिहारियों को बनाने दी थी। उन्हें ये नहीं पता था कि इसके बाद यहाँ मस्जिदों की बाढ़ आ जाएगी। दया दिखाने वाले उस स्वर्णकार के परिजन आज भी देहरादून में रहते हैं, जिनका यहाँ नाम बताना उचित नहीं है।”

स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को बताया था कि उत्तराखंड में मुस्लिमों को सबसे अधिक बढ़ावा कॉन्ग्रेस की एनडी तिवारी के नेतृत्व में बनी सरकार में मिला था। उन्होंने कहा था, “एनडी तिवारी की सरकार में महापाप हुआ है। उनकी ही सरकार में नैनीताल के नैना देवी के मंदिर के ऊपर उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बना दी गई। मस्जिद पूरी तरह से अतिक्रमण करके सड़क पर बनाई गई है। मस्जिद के आगे मंदिर भी छोटा लगने लगा है।”

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक, आज पूरे उत्तराखंड में लगभग 2000 अवैध मजारें हैं। ये मजारें तमाम सरकारी जमीनों को कब्जाए हुए हैं। मज़ारों को सिंचाई विभाग, वन विभाग, PWD आदि जमीनों पर बनाया गया है। देहरादून नगर निगम और जिला पंचायत की 60 से 70 प्रतिशत सरकारी जमीनों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है। 

इसी तरह अगस्त 2022 में ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड के रामनगर में पड़ने वाले जिम कार्बेट नेशनल पार्क में मजारों के जरिए अवैध कब्जे किए गए हैं। पार्क में लगभग हर एक किलोमीटर पर मजार बनाकर सरकारी जमीनों का अतिक्रमण किया गया है। ऑपइंडिया ने रानीखेत मार्ग से लेकर झिरना इलाके तक के मजारों का रिपोर्ट दी थी।

बता दें कि ‘मजार जिहाद’ की रिपोर्टिंग के बाद उत्तराखंड की सरकार ने दिसंबर 2022 में कुछ मजारों पर बुलडोजर भी चलाया था। देहरादून और पौढ़ी जिलों के जंगलों में बने 15 मजारों को ध्वस्त कर दिया गया था। वन विभाग की जमीन पर बनी 17 मजारों को चिह्नित किया गया था, लेकिन कार्रवाई के दौरान दस्तावेज दिखाए जाने के बाद दो मजारों को छोड़ दिया गया था।

इसी तरह मार्च 2023 में एक बार फिर धामी सरकार ने अवैध मजारों पर कार्रवाई शुरू की थी। राज्य सरकार ने 12 मार्च 2023 को एक ही रात में 26 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया गया था। ध्वस्त हुई मजारों में कुछ ऐसी भी थीं, जो राजधानी देहरादून के जंगली जानवरों के लिए रिजर्व क्षेत्र में बनी हुई थीं। 

बता दें कि जब इन मजारों को ध्वस्त किया गया तो इनमें से किसी तरह का मानव अवशेष नहीं मिला था। इससे इस आशंका को पुष्टि मिलती है कि अवैध मजारों के जरिए सरकारी जमीनों पर कब्जा किया जाता है और फिर उसे वक्फ की संपत्ति बताकर सिर्फ मुस्लिमों की संपत्ति घोषित कर दी जाती है।

‘नंगई, गाली-गलौच, अश्लीलता…अच्छा लगेगा आपकी बेटी देखे’ : सलमान खान ने OTT कंटेंट पर उठाए सवाल, कहा- सेंसरशिप जरूरी

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) शाम को मुंबई में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट दिखाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ओटीटी पर कंटेंट स्ट्रीम करने से पहले उसे हमेशा चेक किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मुझे सच में लगता है कि ओटीटी प्लेटफार्मों पर सेंसरशिप होनी चाहिए। वल्गैरिटी, न्यूडिटी, गाली-गलौज पर रोक लगनी चाहिए। अब सब कुछ फोन पर आ गया है। चलो 15-16 साल का बच्चा देख ले कोई बात नहीं। लेकिन क्या आपको यह अच्छा लगेगा अगर आपकी छोटी सी बेटी पढ़ाई के बहाने यह सब देखे? इसलिए मेरा मानना है कि ओटीटी पर जो भी कंटेंट स्ट्रीम होता है, उसे चेक किया जाना चाहिए। कंटेंट जितना क्लीन होगा, उतना ही बेहतर होगा।”

‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म के अभिनेता ने ओटीटी की दुनिया पर सब कुछ कर चुके एक्टर्स के लिए कहा, “आपने सब कुछ कर लिया। लवमेकिंग सीन कर लिए आपने। किसिंग सीन्स कर लिए और खूब एक्सपोज भी कर लिया। जब आप अपनी बिल्डिंग में घुसते हैं तो आपका लिफ्टमैन, आपका वॉचमैन आपका काम देख रहा होता है। मुझे नहीं लगता कि यह सब अच्छा है। यह सुरक्षा की दृष्टि से भी सही नहीं है। हमें यह सब करने की जरूरत नहीं है। हिंदुस्तान में रहते हैं। थोड़ा-बहुत ठीक है, लेकिन बीच में इतना ज्यादा हो गया था। हालाँकि, अब थोड़ा कंट्रोल में आया है।”

इस मौके पर ‘तेरे नाम’ फिल्म के अभिनेता ने कहा, “मैं यहाँ 1989 से काम करता आ रहा हूँ। मैंने कभी भी इस तरह (वल्गैरिटी, न्यूडिटी, गाली-गलौज ) की चीजें नहीं की हैं। इसलिए मुझे लगता है कि ओटीटी पर सेंसर होना चाहिए।”

बता दें कि सलमान खान इस बार 2023 में होने वाले फिल्मफेयर अवॉर्ड्स को होस्ट करेंगे। वर्क फ्रंट की बात करें तो वह जल्द ही ‘किसी का भाई किसी की जान’ में नजर आएँगे। यह फिल्म 21 अप्रैल 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा वह ‘टाइगर 3’ में भी दिखाई देंगे। अप्रैल 2024 से शाहरुख के साथ सलमान ‘टाइगर वर्सेज पठान’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं।

‘इशरत जहाँ बिहार की बेटी और मनीष कश्यप बिहार का आतंकी’: मनीष कश्यप पर NSA लगने के बाद बीजेपी MLA ने नीतीश कुमार को घेरा

बिहार के यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप (Manish Kashyap) के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। इसका विरोध हो रहा। उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है।

मनीष कश्यप पर एनएसए के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद भाजपा विधायक ने ट्वीट कर कहा है, “लश्कर वाली इशरत जहाँ बिहार की बेटी थी और यूट्यूब से पेट पालने वाला मनीष कश्यप बिहार का आतंकी है, वाह नीतीश जी।” तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों पर हमले के कथित दावों की रिपोर्टिंग पर हुए विवाद के बाद मनीष कश्यप ने सरेंडर किया था। बाद में उन्हें तमिलनाडु पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर ले गई थी।

नीतीश कुमार ने क्या कहा था

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने गुजरात के चर्चित इशरात जहाँ एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कथित तौर पर इशरत को बिहार की बेटी कहा था और एनकाउंटर की जाँच की माँग की थी। हालाँकि, बाद में नीतीश कुमार अपने बयान से पलट गए थे और सफाई दी थी कि मीडिया ने उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया। रिपोर्टों की मानें तो पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर ने भी साल 2013 में इशरत को बिहार की बेटी कहा था। उस समय अली अनवर जेडीयू में थे। इतना ही नहीं तेज प्रताप ने भी नीतीश कुमार का समर्थन करते हुए इशरत को बिहार की बेटी कहा था।

लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी थी इशरत

इशरत जहाँ को गुजरात पुलिस ने 2004 में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया था। इस मुठभेड़ में उसके साथियों जावेद शेख उर्फ प्रग्णेश पिल्लै, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जौहर को भी मार गिराया गया था। इस एनकाउंटर पर सवाल उठने के बाद कई एजेंसियों ने इसकी जाँच की थी। मार्च 2021 में कोर्ट ने इशरत जहाँ को लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी मानते हुए एनकाउंटर को सही ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुँचे मनीष कश्यप

मनीष कश्यप ने नियमित जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज सभी मामले एक साथ करने की अपील की है। अर्जी पर गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। इससे पहले मदुरै कोर्ट ने कश्यप को 19 अप्रैल 2023 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

TV पर लगेगी न्यूड पाठशालाः वयस्कों को नंगा करके दिखाएँगे ताकि इंसानी शरीर के बारे में जान सकें युवा, नेटिजन्स ने जताया एतराज

ब्रिटेन में ‘4 टीवी’ नाम के चैनल पर युवाओं को इंसानी शरीर के प्रति जागरूक करने के लिए ‘नेक्ड एजुकेशन (Naked Education)’ नाम का शो शुरू किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस शो का मकसद ये है कि वयस्कों का नग्न शरीर दिखाकर युवाओं को इंसानी शरीर के लिए सहज किया जाएगा।

सामने आए ट्रेलर में देख सकते हैं कि कैसे युवाओं को समझाया जा रहा है कि नग्न होना कोई गलत चीज नहीं है। हर तरह के शरीर को सामान्य ढंग से देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस शो की होस्ट एना रिचर्डसन (Anna Richardson) हैं। वह खुद को पढ़ा-लिखा, भावनात्मक और आनंदपूर्ण बताती हैं। उन्होंने पहले ‘नेक्ड अट्रैक्शन’ नाम के शो में भी काम किया है। यह एक डेटिंग शो था।

उन्होंने अपने नए शो का बचाव करते हुए मीडिया से कहा, “मैं ऐसे शो बनाना पसंद करती हूँ जो भ्रांतियों को तोड़ते हों और जिनसे बदलाव पड़ता हो। और जो भी शो मैंने किए हैं आप देख सकते हैं कि उन्होंने ऐसा ही किया है।” उन्होंने बताया कि ये शो उन युवाओं के लिए है जो अपने शरीर को जानने के लिए इच्छुक रहते हैं।

चैनल 4 ने इस शो को ग्राउंडब्रेकिंग सीरीज कहा। चैनल के अनुसार, “नंगा होना हमेशा बुरा नहीं होता। ये शो हर शरीर को सामान्य बनाता है।” वहीं एना के मुताबिक ये नेक्ड एजुकेशन शो एक बॉडी पॉजिटिव शो है, जो हर शरीर का और उसकी विभिन्नताओं का सामान्यीकरण करता है ताकि लोग बिन कपड़ों के भी शरीर को स्वीकार पाएँ।

सोशल मीडिया पर हो रहा शो का विरोध

बता दें इस शो की झलक देखने के बाद समाज का अधिकतर वर्ग इसका विरोध कर रहा है। कहा जा रहा है कि ये चैनल बच्चों को जागरूक करने की जगह भ्रमित करेगा। इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर्स भी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा काम उनके समय में कोई करता था तो उसे ‘फ्लैशिंग’ कहा जाता था जबकि अब तो ये सब नेशनल टीवी पर खुलकर हो रहा है।

इससे पहले नेटफ्लिक्स पर एक फ्रेंच मूवी क्यूटीज आई थी। उसमें 11 साल की लड़की से अश्लीलता करवाई गई थी। वामपंथियों ने इसे बच्चों में सेक्स एजुकेशन सामान्य करने का प्रयास बताया था। इसके अलावा कुछ लोगों ने दो कदम आगे बढ़ते हुए बाल यौन शोषण करने वालों को भी भी जायज ठहराया था। उनका कहना था कि पेडोफाइल्स केवल वो लोग होते हैं जो नाबालिगों की ओर आकर्षित होते हैं

मुलायम सिंह पर गीत, डिंपल यादव के लिए प्रचार, अखिलेश-शिवपाल के साथ तस्वीर: भोजपुरी हिरोइन सुसाइड केस में गिरफ्तार समर सिंह यादव का सपा से क्या है कनेक्शन

वाराणसी के एक होटल से भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे का शव मिलने के मामले में मृतका के बॉयफ्रेंड समर सिंह यादव को पुलिस ने गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। समर पर आकांक्षा का अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप है। अब तक यही माना जाता था कि अभिनेत्री ने आत्महत्या की है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल खड़े किए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार की रात को गाजियाबाद के नंदग्राम थाना के राजनगर एक्सटेंशन स्थित चार्म्स क्रिस्टल सोसायटी में छिपा था। वह पुलिस से बचने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार अपने ठिकाने से बदल रहा था। उत्तर पुलिस पिछले 10 दिनों से उसकी तलाश कर रही थी।

अश्लील वीडियो द्वारा ब्लैकमेल का आरोप

बता दें कि आकांक्षा की माँ मधु दुबे ने कहा था कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती है। आकांक्षा की हत्या की गई है। इसके लिए उन्होंने समर और उसके भाई संजय को आरोपित किया था। बता दें कि 26 मार्च को वाराणसी के एक होटल में आकांक्षा का शव फाँसी पर लटका हुआ मिला था।

आकांक्षा का सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी मिला है, जिसमें वह अचानक फुट-फुटकर रोने लगती हैं। आकांक्षा की माँ की ने कहा था कि समर सिंह यादव उनकी बेटी को ब्लैकमेल करता था। दूसरे ऐक्टर के साथ काम नहीं करने देता था। इतना ही नहीं, वह आकांक्षा की कमाई के पैसे भी हड़प लेता था।

मधु दुबे ने कहा था कि समर ने उनकी बेटी आकांक्षा को झाँसे में ले लिया था। इसके बाद वह शादी के नाम पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान उसने आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिए थे। इस वीडियो के आधार पर वह उनकी बेटी को ब्लैकमेल करता था। उन्होंने समर पर आकांक्षा के साथ मारपीट का भी आरोप लगाया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

अब तक यही कहा जा रहा था कि होटल में लौटने से पहले आकांक्षा में बहुत अधिक शराब पी रखी थी और कमरे में पहुँचकर आत्महत्या कर लिया था। अब जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है, उसमें कहा गया है कि आकांक्षा के शरीर में अल्कोहल की मात्रा नहीं थी। यानी उन्होंने शराब नहीं पी थी।

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि आकांक्षा के पेट से संदिग्ध भूरा पदार्थ मिला है। उनकी कलाई पर भी चोट के निशान मिले हैं। इतना ही नहीं, पेट की श्लेष्मा झिल्ली भी क्षतिग्रस्त मिली है। इससे आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं।

मधु दुबे ने यह भी आरोप लगाया था कि समर यादव का समाजवादी पार्टी के नेताओं से संबंध हैं और सपा के नेता उसे संरक्षण दे रहे हैं। बता दें कि आकांक्षा दुबे भोजपुरी गायक समर सिंह यादव के साथ वाराणसी के टकटकपुर क्षेत्र में लिव-इन रिलेशन में रहती थीं। मौत से कुछ दिन पहले ही दोनों अलग हुए थे। समर का नाम आने के बाद से वह लापता हो गया था।

अखिलेश यादव के करीबी समर सिंह यादव

आजमगढ़ के मेहनगर इलाके के रहने वाले समर सिंह भोजपुरी गायक और अभिनेता है। उसे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। अखिलेश यादव ने अगस्त 2021 में समर सिंह यादव को समाजवादी पार्टी में शामिल किया था। तब समर ने कहा था कि वह 2022 के यूपी विधानसभा में सपा को बहुमत में लाने का संकल्प लिया था।

समर यादव का सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ कई तस्वीरें हैं। इतना ही नहीं अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव के साथ भी समर की कई तस्वीरें हैं। समर ने चुनावों के दौरान सपा के लिए कई गाने भी लिखे और गाए थे। इनमें एक ‘सपा आई रे…’ खूब वायरल हुआ था।

पिछले साल अक्टूबर में उसने सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ‘श्रद्धांजलि श्रद्धेय नेता जी को’ नाम से एक श्रद्धांजलि गीत भी गाया था। इसमें उसने मुलायम सिंह यादव की जमकर तारीफ की थी।

समर सिंह यादव ने साल 2022 में आजमगढ़ सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के पक्ष में जमकर प्रचार भी किया था। भाजपा ने इस सीट पर भोजपुरी फिल्मों को गायक और अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ (Dinesh lal yadav Nirahua) को उतारा था। डिंपल यादव को फेवर में समर ने बैनर पोस्टर भी लगवाए थे।

भिंडरवाले जैसा दिखने की सनक में 2 महीने जॉर्जिया में रहा था अमृतपाल सिंह, खालिस्तानी भगोड़े ने कराई थी कॉस्मेटिक सर्जरी

खालिस्तानी भगोड़े और ‘वारिस पंजाब दे’ का सरगना अमृतपाल सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। श्रीअकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा 7 अप्रैल 2023 को दमदमा साहिब में बुलाई गई एक सभा में उसके सरेंडर करने की अटकलें लग रही हैं। इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि भारत लौटने से पहले अमृतपाल जाॅर्जिया गया था। वहाँ दो महीने रहकर उसने सर्जरी कराई थी ताकि जरनैल सिंह भिंडरवाले की तरह दिख सके।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमृतपाल के सहयोगी पूछताछ में लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं। इसी क्रम में अब अमृतपाल के जॉर्जिया जाने और सर्जरी करवाने की बात सामने आई है। असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह के सहयोगियों ने खुफिया एजेंसियों को पूछताछ में बताया है कि भारत लौटने से पहले अमृतपाल जॉर्जिया गया था। वह अगस्त 2022 में भारत लौटा था।

जरनैल सिंह भिंडरावाले से अमृतपाल प्रभावित था। वह भिंडरवाले की तरह ही दिखना चाहता था। इसलिए कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए वह जॉर्जिया गया था। यहाँ वह 2 महीने रहा था। एजेंसियों द्वारा इस जानकारी की पुष्टि की जा रही है। अमृतपाल भिंडरवाले की ही तरह नीली पगड़ी पहना करता है। उसकी वेशभूषा भी भिंडरवाले से मिलती-जुलती है, इसलिए उसे पंजाब का दूसरा भिंडरवाले भी कहा जाता है। वह अपने भाषणों में कई बार भिंडरावाले को प्रेरणा बताते हुए उसके रास्ते पर चलने की बात कह चुका है।

रिपोर्टों के अनुसार खुफिया एजेंसियाँ इस बात का पता लगा रही हैं कि दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत के बाद अमृतपाल अचानक भारत क्यों पहुँचा? उसी को वारिस पंजाब दे का प्रमुख क्यों बनाया गया? दूसरी तरफ पंजाब पुलिस द्वारा अमृतपाल की तलाश जारी है। वह 18 मार्च 2023 से ही फरार चल रहा है। कहा जा रहा है कि वह दमदमा साहिब में सरेंडर कर सकता है।

बता दें दीप सिद्धू की मौत 15 फरवरी 2022 को हुई थी। इसके बाद 29 सितंबर 2022 को मोगा जिले में जरनैल सिंह भिंडरावाले के गाँव रोडे में अमृतपाल की दस्तारबंदी (पगड़ी बाँधा जाना) हुई थी। इस समारोह में खुलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हमें क्या चाहिए-आजादी’ जैसे नारे लगाए गए थे। पगड़ी पहनते ही अमृतपाल सिंह ने मंच से ‘भविष्य की जंग’ शुरू करने की घोषणा की थी। बाद में वह वह खुलेआम खालिस्तान की माँग करने लगा था।

कॉपरेट करो वरना कर देंगे नंगाः हिरोइन स्वास्तिका मुखर्जी को बंगाली फिल्म के प्रोड्यूसर ने भेजा मेल, पोर्न साइट पर न्यूड फोटो डालने की धमकी

अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी को धमकी भरे ईमेल मिले हैं। इसमें कथित तौर पर उनकी न्यूड फोटो पोर्न साइट पर अपलोड करने की धमकी दी गई है। मुखर्जी के अनुसार ये मेल बंगाली फिल्म ‘शिबपुर’ के को-प्रोड्यूसर संदीप सरकार और एसोसिएट प्रोड्यूसर रवीश शर्मा ने भेजे हैं। स्वास्तिका मुखर्जी (Swastika Mukherjee) कला, पाताल लोक, क्रिमिनस जस्टिस सीजन जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आ चुकी हैं।

स्वास्तिका ने कहा अपनी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर पोर्न साइट पर अपलोड किए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने कोलकाता के गोल्फ ग्रीन पुलिस थाने में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार एक्ट्रेस को महीनों से धमकी भरे ईमेल मिल रहे हैं। ईटाइम्स को दिए साक्षात्कार में स्वास्तिका ने बताया कि वे एक बंगाली फिल्म ‘शिबपुर’ के लिए काम कर रही थीं। धमकी देने वाले संदीप सरकार इसी फिल्म के को-प्रोड्यूसर हैं। संदीप सरकार और उनके एसोसिएट प्रोड्यूसर रवीश शर्मा पिछले एक महीने से स्वास्तिका और उनकी मैनेजर श्रीस्ती जैन को यौन उत्पीड़न करने वाले और जान से मारने की धमकी से भरे ईमेल भेज रहे हैं।

स्वास्तिका रवीश शर्मा उन्हें ‘कॉपरेट’ करने को कह रहे हैं। बकौल अभिनेत्री उनसे कहा गया कि यदि ‘कॉपरेट’ नहीं किया तो उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स हैक कर लिए जाएँगे। उनकी मॉर्फ्ड न्यूड तस्वीरों को पोस्ट किया जाएगा। पोर्न वेबसाइट्स पर भी इन्हें अपलोड कर दिया जाएगा। अभिनेत्री का कहना है कि को-प्रोड्यूसर संदीप सरकार उन पर पैसे वसूलकर मार्केटिंग और प्रमोशन से दूरी बनाने का इल्जाम लगा रहा है।

स्वास्तिका का कहना है, “मुझे या मेरे मैनेजर को कभी किसी मार्केटिंग प्लानिंग की जानकारी नहीं दी गई। यहाँ तक कि मुझे बिना बताए फिल्म की रिलीज डेट बदल दी गई।” अभिनेत्री का कहना है कि उन्हें कोई भी अतिरिक्त पेमेंट नहीं किया गया जैसा कि कहा जा रहा है। उन्हें फिल्म के कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से पैसे दिए गए। फिल्म एक इंडो-अमेरिकन प्रोडक्शन हाउस द्वारा बनाया जा रहा है।

अदाकारा ने ओटीटी प्ले को दिए इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान वे को-प्रोड्यूसर से नहीं मिलीं। उनका परिचय फिल्म के दूसरे को-प्रोड्यूसर्स के साथ था। शूटिंग के बाद संदीप सरकार अमेरिकी नागरिक होने का दावा करते हुए ईमेल भेजने लगे। धमकी देने लगे कि यदि ‘कॉपरेट’ नहीं किया तो वे यूएस कंस्यूलेट से बात करेंगे और अभिनेत्री का वीजा जारी नहीं होने देंगे।

क्या करना है, कैसे करना है… सब सत्येंद्र जैन के दिमाग की उपज, हाई कोर्ट ने भी माना मनी लाॅन्ड्रिग का कर्ताधर्ता: जानिए AAP नेता को क्यों नहीं मिली बेल

दिल्ली की केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन को हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले का कर्ताधर्ता बताया है। साफ शब्दों में कहा है कि क्या करना है, कैसे करना है, यह सब कुछ जैन के दिमाग की उपज थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी 6 अप्रैल 2022 को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।

जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने 46 पन्नों के आदेश में कहा है कि सत्येंद्र जैन या उनका परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन कंपनियों को नियंत्रित कर रहा था, जिनका इस्तेमाल मनी लाॅन्ड्रिंग में किया गया। साथ ही कहा है कि वे बाहर निकलने पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने में कर सकते हैं। इसी आधार पर AAP नेता की जमानत याचिका खारिज की गई।

हाई कोर्ट ने कहा है, “पंकुल अग्रवाल की गवाही से जाहिर है कि मेसर्स जेजे आइडियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड पर सत्येंद्र कुमार जैन का पूर्ण नियंत्रण है। इसी तरह राजेंद्र बंसल, जीवेंद्र मिश्रा, आशीष चोखानी और जेपी मोहता की गवाही से पता चलता है कि सत्येंद्र कुमार जैन इस पूरे ऑपरेशन के बारे में सोचने वाले, फैसला करने वाले और अंजाम देने वाले थे। इसमें वैभव जैन और अंकुश जैन ने उनकी मदद की।” आदेश में जैन के लिए conceptualizer, visualizer and executor शब्द का इस्तेमाल किया गया है। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो हाई कोर्ट ने जैन को मनी मनी लॉन्ड्रिंग मामले का कर्ताधर्ता बताया है।

उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने सत्येंद्र जैन के साथ मामले के दो अन्य आरोपित वैभव जैन और अंकुश जैन को भी जमानत देने से इनकार कर दिया था। सत्येंद्र जैन ने जमानत माँगते हुए दलील दी थी कि किसी तरह की संपत्ति पर उनका नियंत्रण नहीं है। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से हुई आय पर नियंत्रण वश्यक नहीं है। ऐसा आय को छिपाने या फिर काले धन को कानूनी रूप देने के लिए भी किया गया हो सकता है।

सत्येंद्र जैन मई 2022 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। ससे पहले निचली अदालत ने भी सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि सत्येंद्र जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आय छिपाने की कोशिश की। निचली अदालत के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। इसके बाद भी वह जाँच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी उन्हें जेल में रखने की कोई जरूरत नहीं है।

दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य और जेल मंत्री रहे सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में ही बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन के मामले में हुई थी। ईडी ने अपनी जाँच में पाया है कोलकाता की कंपनियों के साथ उन्होंने अवैध रूप से 4.81 करोड़ रुपए का अवैध लेन-देन किया है। इस मामले में ईडी उनकी 4.81 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है।

बंगाल में मिला था 81000 डेटोनेटर, 27000 Kg अमोनियम नाइट्रेट… 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट से हुआ था बेरुत धमाका, 200 किमी तक सुनाई पड़ी थी आवाज

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रविवार (2 अप्रैल 2023) को आतंकी गतिविधियों के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान मेराजुद्दीन अली खान और मीर मोहम्मद नुरुज्जमां के रूप में हुई है। इन लोगों ने इतने अधिक विस्फोटक जमा कर लिए थे कि साल 2020 में हुए बेरूत धमाके की दहशत को ताजा कर दिया था।

दरअसल, पश्चिम बंगाल एसटीएफ (West Bengal STF) ने जून 2022 में कोलकाता से एक टाटा सूमो कार सहित कई जगहों से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया था। इनमें 81,000 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 27000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और 1625 किलोग्राम जिलेटिन छड़ें शामिल थीं।

आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं विस्फोटक की मात्रा बड़ा विषय…

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 81000 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और 27000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट का जखीरा मिलने का सीधा मतलब यह था कि देश में एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी।

इस विस्फोटक से यदि धमाका होता तो कोलकाता जैसा बड़ा शहर पूरी तरह से दहल जाता। यही नहीं, यदि किसी भीड़-भाड़ वाले इलाके में यह धमाका होता तो कई किलोमीटर तक लाशें बिछ जातीं और तबाही का मंजर लोगों को भूलाए नहीं भूलता।

इस मामले में अब तक कुल 4 संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। पहली गिरफ्तारी जून 2022 में ही हुई थी। जिस टाटा सूमो कार में डेटोनेटर ले जाया जा रहा था, उसके ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सितंबर 2022 में मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया।

इसके बाद NIA ने इस साल की शुरुआत यानी जनवरी 2023 में रिंटू शेख नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अब मेराजुद्दीन अली खान और मीर मोहम्मद नुरुज्जमां की गिरफ्तारी हुई है। इन दोनों ने ही रिंटू शेख को विस्फोटक सप्लाई किए थे।

बेरूत की चर्चा क्यों…?

दरअसल, 4 अगस्त 2020 की तारीख लेबनान के इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज है। इस दिन राजधानी बेरूत के पोर्ट इलाके में हुए धमाके से 10 किलोमीटर के दायरे में तबाही मच गई थी। इस भीषण दुर्घटना का वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में एक वेयरहाउस से धुँआ निकलते हुए देखा गया।

इसके बाद अचानक ही भयानक विस्फोट हुआ। इस धमाके की तीव्रता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसकी गूँज करीब 200 किलोमीटर दूर तक सुनी गई थी। इस दुर्घटना में 218 लोग मारे गए थे। वहीं 6,000 से अधिक घायल हुए थे।

इस धमाके को लेकर लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने कहा था कि बेरूत के पोर्ट इलाके में स्थित एक वेयरहाउस में 2750 टन (27,50,000 किलोग्राम) अमोनियम नाइट्रेट असुरक्षित रूप से रखा हुआ था। इसी अमोनियम नाइट्रेट की वजह से भीषण धमाका हुआ।

इस धमाके को लेकर अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने कहा था कि यह धमाका 3.3 तीव्रता के भूकंप की तरह था। चूँकि यह धमाका पोर्ट इलाके यानी बंदरगाह क्षेत्र में हुआ था। जहाँ आमतौर पर लोगों की संख्या अधिक नहीं होती है, लेकिन यदि यह धमाका शहर के बीच में हुआ होता तो मरने वालों और घायलों की संख्या कहीं अधिक होती।

इसी तरह अमोनियम नाइट्रेट कई बड़े औद्योगिक हादसों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में अमरीका के टेक्सस में 2000 टन रसायन ले जा रहे एक जहाज़ में धमाका हो गया था। इस धमाके के कारण 581 लोग मारे गए थे।

‘हज ड्यूटी हर मुस्लिम कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार’: दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, सुरक्षा को लेकर स्मृति ईरानी के ‘सुधारों’ का विरोध

आमिर जावेद नाम के एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका में उन्होंने कहा है कि हज यात्रा के दौरान जेद्दा में तैनाती पर भेजा जाना केंद्र और राज्य सरकार के प्रत्येक मुस्लिम कर्मचारी का ‘संवैधानिक अधिकार’ है।

इस याचिका में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के 20 मार्च 2023 को दिए गए ज्ञापन को चुनौती दी गई है। इस ज्ञापन में कहा गया है कि अस्थायी प्रतिनियुक्ति पर केवल सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) कर्मचारियों को शामिल किया गया। 

वकील जावेद ने याचिका में तर्क दिया है कि यात्रा में शामिल काम प्रशासनिक है और इसलिए कोई कारण नहीं है कि केवल सीएपीएफ अधिकारियों को ही तैनात किया जाए। याचिका में दलील दी गई कि हज ड्यूटी पर तैनाती मुस्लिम कर्मचारियों का ‘संवैधानिक अधिकार’ है।

याचिका में आगे दलील दी गई है कि मंत्रालय का आदेश उन मुस्लिम कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जो हज तीर्थयात्रियों की सेवा करना चाहते हैं। बता दें कि साल 2023 मे लगभग 1.4 लाख भारतीय तीर्थयात्रियों के हज जाने उम्मीद है। इसकी पहली उड़ान 21 मई 2023 को निर्धारित की गई है।

वकील आमिर जावेद ने अपनी याचिका में कहा कि मौजूदा ज्ञापन संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन करता है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (5 अप्रैल 2023) को स्मृति ईरानी के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से इस पर जवाब माँगा।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने हज डिवीजन को सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपना जवाब अदालत के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 10 मई 2023 को सुनिश्चित की है।

दरअसल, सऊदी अरब ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हर देश अपने तीर्थयात्रियों की देखभाल के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। इसलिए भारत भी हज यात्रियों की देखभाल के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजता है। गैर-मुस्लिमों को मक्का में घुसने की अनुमति नहीं है। ऐसे में सरकार मुस्लिमों को ही भेजती है।

इससे पहले केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के 900 से अधिक मुस्लिम कर्मचारी थे, जिन्हें जेद्दा में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। उनके पास समस्या यह थी कि जिन लोगों भेजा गया था, उनके पास तीर्थयात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं था।

उदाहरण के लिए, यदि भगदड़ मची थी, तो 900 प्रतिनिधि ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए सुसज्जित नहीं थे, क्योंकि इनमें से अधिकांश प्रतिनियुक्त क्लर्क, शिक्षक और इसी तरह के लिए की गई थी। इसको देखते हुए स्मृति ईरानी ने साल 2023 के लिए नियम बदला है, ताकि पेशेवरों को वहाँ भेजा जा सके।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा ने लिखी है। विस्तार से इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)