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प्रयागराज में BJP महिला नेता के बेटे पर बाइक सवारों ने किया बम से हमला, घटना CCTV में कैद

उमेश पाल हत्याकांड के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बमबाजी की घटना सामने आई। बाइक सवार हमलावरों ने भाजपा की महिला नेता विजयलक्ष्मी चंदेल के बेटे को निशाना बनाते हुए बम से हमला किया था। हालाँकि इस हमले में वह बाल-बाल बच गए। घटना गुरुवार (6 अप्रैल 2023) रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना प्रयागराज के झूँसी इलाके की है। जहाँ भाजपा की महिला नेता विजयलक्ष्मी चंदेल का बेटा विधान सिंह अपने दोस्त प्रांशु यादव के साथ अपनी मौसी के घर गया हुआ था। जहाँ घर के बाहर मौसी के बेटे का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान दो बाइकों में सवार होकर आए हमलावरों ने बारी-बारी से कार पर बमबाजी कर दी।

गनीमत यह रही कि हमले के वक्त विधान सिंह अपनी सफारी कार के अंदर बैठा हुआ था। इसलिए बम के हमले से वह और उसका दोस्त पूरी तरह सुरक्षित रहे। घटना का वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो विधान सिंह जहाँ खड़ा था वहाँ लगे एक सीसीटीवी का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि मुँह में कपड़ा बाँधे हुए हमलावर एक के बाद एक दो बम कार में मार रहे हैं। हमले के तुरंत बाद विधान सिंह को अपनी कार तेजी से बढ़ाते हुए भी देखा जा सकता है। इस दौरान स्कूटी सवार एक महिला भी दुर्घटना का शिकार होते-होते बची।

दरअसल, विजयलक्ष्मी चंदेल भाजपा की जिला महामंत्री हैं। इसके अलावा वह थानापुर ग्राम की ग्राम प्रधान भी हैं। कहा जा रहा है कि बीते दिनों कौशांबी में तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल शिव बचन यादव के बेटे शिवम यादव से विधान सिंह का विवाद हुआ था। इस मामले में कॉन्स्टेबल और उसके बेटे ने विधान सिंह से माफी माँग ली थी। लेकिन अब विधान सिंह ने कॉन्स्टेबल के बेटे और उसके दोस्तों पर ही जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने कॉन्स्टेबल के बेटे शिवम यादव समेत 6 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

भाजपा नेता विजयलक्ष्मी चंदेल का कहना है कि कॉन्स्टेबल के बेटे शिवम यादव ने ही हमलाकर उनके बेटे की जान लेने की कोशिश की है। भगवान का शुक्र है उनका बेटा बच गया। हमलावरों के पास असलहे भी थे। उन्होंने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की।

बमबाजी में गई थी उमेश पाल की जान

राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल 24 फरवरी 2023 को गवाही के बाद वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी। अब तक इस मामले में पुलिस कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। हालाँकि मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है।

रामनवमी हिंसा के बाद बिहार में बह रही इफ्तारी बयार, ‘तुष्टिकरण’ की नैया के खेवैया बने नीतीश कुमार

हिंसाग्रस्त बिहार में अब इफ्तार पार्टी की राजनीति का मौसम है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने आज शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को मुख्यमंत्री आवास में इफ्तार पार्टी का आयोजन करके मुस्लिम वोटरों को एक संदेश देने की कोशिश की। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से यह पहले नीतीश कुमार की यह गर्मजोशी बहुत कुछ कहती है।

नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बाद उनकी सरकार में भागीदार राजद ने भी इफ्तार पार्टी की तारीख तय करके बता दिया कि वह भी पीछे नहीं रहने वाली है। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) ने 8 अप्रैल को अलग से इफ्तार पार्टी की तारीख मुकर्रर की है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस की तरफ से अभी तारीखों की घोषणा नहीं की गई है।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की माँ राबड़ी देवी 13 अप्रैल 2023 को अपने आवास पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करेंगी। वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) HAM के सुप्रीमो जीतनराम माँझी भी पीछे रहने वाले नहीं हैं। उन्होंने 16 अप्रैल 2023 को अपने आवास पर इफ्तार का आयोजन किया है।

नीतीश कुमार ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग पर इफ्तार का आयोजन किया। इसके लिए उन्होंने राज्यपाल और भाजपा के नेताओं से लेकर तमाम नेताओं को न्यौता दिया। हालाँकि, भाजपा इफ्तार की राजनीति से अब तक दूर ही रही है। भाजपा ने इसमें शामिल होने से साफ मना कर दिया। वैसे सुशील कुमार मोदी ऐसे अकेले भाजपाई थे, जो इफ्तार पार्टी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। अब वे भी बिहार से बाहर हैं।

इफ्तार राजनीतिक खिचड़ी पकाने का एक आयोजन है और साथ ही यह भी दिखाने का एक मौका कि ‘देखो मुस्लिमों का एक मात्र खामख्वाह मैं ही हूँ।’। हालाँकि, मुख्यमंत्री के इस आयोजन का भाजपा ने तीखी आलोचना की है। भाजपा के नेता विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार जल रहा है और मुख्यमंत्री अपने आवास में इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे हैं।

दरअसल, रामनवमी के बाद से बिहार के सासाराम, बिहार शरीफ, मुंगेर, मुजफ्फरपुर सहित कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा में हैं। इसकी आग लंबे समय तक लोगों को झुलसाती रही। इस पर चुप्पी को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा कर दिया और हिंसा के लिए उनकी मौन सहमति बता दी। हालाँकि, नीतीश इससे विचलित नहीं हुए और इसी दरम्यां वे फुलवारी शरीफ के इफ्तार पार्टी में पहुँच गए।

उस दौरान भी नीतीश कुमार की खूब आलोचना हुई। किसी ने उन्हें नीरो कहा तो किसी ने मुहम्मद बिन तुगलक तो किसी ने उन्हें तुष्टिकरण की हद पार करने वाला मौकापरस्त राजनेता बता दिया। हालाँकि, राजनीतिक मंच और सोशल मीडिया में लोग अपनी बातें कहते रहे और नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर फैसले लेते रहे। इस नफा-नुकसान के पीछे उनकी महत्वकांक्षा भी एक आधार है।

यहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षा का जिक्र करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वह लंबे समय से प्रधानमंत्री बनने के लिए जी तोड़ कोशिश करते रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कई प्रयास भी किए। कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी से लेकर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी तक से वे मिले, लेकिन ये सारे नेता खुद ही पीएम पद के उम्मीदवार हैं। इसलिए बात बनती नहीं दिखी।

अंत में उन्हें खुद आगे आकर कहना पड़ा कि प्रधानमंत्री पद में उनकी कोई रुचि नहीं है। हालाँकि, राजनीति में कथनी और करनी के बीच भयानक शत्रुता होती है। ऐसे में राजनीति की थोड़ी-बहुत समझ रखने वाले लोग भी ये मानने को तैयार नहीं है कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के सांसारिक ख्वाबों से परे हो गए हैं और उनका मकसद सिर्फ जनता की सेवा रह गया और यह सेवा वे सीएम रहते हुए भी कर सकते हैं।

नीतीश ने भले कह दिया कि वे पीएम नहीं बनना चाहते, लेकिन बिहार में हिंसा के बीच जब वे फुलवारी शरीफ में इफ्तार पार्टी में शामिल हुए तो नेपथ्य में लगी तस्वीरों ने लोगों को चौंका दिया। नीतीश कुमार जहाँ बैठे हुए थे, उसके ठीक पीछे लाल किले की तस्वीर लगी हुई थी। फिर क्या, बिहार की राजनीति में बवाल हो गया। लोग हिंसा में मरते रहे और नीतीश कुमार इधर राजनीति में व्यस्त दिखी।

हालाँकि, लाल किले की तस्वीर के सामने मसनद पर पसर कर भले ही नीतीश कुमार गंभीर दिख रहते रहे, लेकिन लोगों में मन खुसफुहाट बनी रही कि वे आम जनता की सुरक्षा को लेकर वे गंभीर नहीं हैं। बिहार की राजनीति में कभी उनके बेहद करीबी रहे भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने ही नीतीश कुमार पर तंज कसा था। सुशील मोदी ने कहा कि लाल किला ही क्यों, नीतीश कुमार अपना मन बहलाने के लिए ह्वाइट हाउस का बैनर लगाकर फोटो खिंचवा लें। 

जाहिर है कि सुशील मोदी कहना चाह रहे हैं कि नीतीश के लिए दिल्ली अभी दूर ही नहीं….. बहुत दूर है। हालाँकि, पिछली बार के इफ्तार पार्टी में तेजस्वी यादव को शॉल ओढ़ाकर स्वागत करने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा को सत्ता से ही बाहर कर दिया, लेकिन इस बार वे क्या गुल खिलाते हैं यह अभी देखना बाकी है।

‘मैदान तय कर लो राहुल बाबा, हम दो-दो हाथ करने को तैयार हैं’: अमित शाह ने राहुल गाँधी को दिया चैलेंज, बोले- हम नहीं डरते

राहुल गाँधी के विदेश में दिए गए बयानों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को चैलेंज देते हुए कहा है कि वह मैदान तय कर लें बीजेपी वाले दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। उन्होंने यह बयान शुक्रवार (7 मार्च 2023) को दिया।

दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश के कोशांबी में आयोजित कोशांबी महोत्सव में जन सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा है, “‘कल ही संसद समाप्त हुई। आजादी के इतिहास में कभी नहीं हुआ कि देश के बजट सत्र में चर्चा करे बिना संसद समाप्त हुई हो। विपक्ष के नेताओं ने सदन को चलने नहीं दिया। इसका कारण यह है कि राहुल गाँधी को संसद पद से अयोग्य घोषित किया गया।” उनके इस बयान को 9:20 मिनट के बाद से सुना जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा है, “सूरत कोर्ट ने राहुल गाँधी को सजा दी है। सजा होते ही सांसदी चली जाती है, चाहे कोई भी हो। अब तो 17 विधायक और सांसदों की सदस्यता रद्द की जा चुकी है। इसी तरह राहुल गाँधी की भी हुई। इसको लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं ने काले कपड़े पहनकर संसद नहीं चलने दी। मैं राहुल गाँधी को कहना चाहता हूँ कि कानून का पालन करना हर नागरिक का धर्म होता है। वह सांसद थे, उन्हें कोर्ट के फैसले को ऊँची अदालतों में चुनौती देते अदालत में लड़ते। लेकिन उन्होंने देश की संसद का वक्त बलि चढ़ा दिया। इस देश की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी।”

गृह मंत्री ने आगे कहा, “देश के किसी भी नेता को दूसरे देश में जाकर भारत की बुराई नहीं करनी चाहिए। यहॉं खुला मैदान पड़ा है। राहुल बाबा कौन डरता है। मैदान तुम तय कर लो, भारत में कहीं भी हो भाजपा वाले दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। हम नहीं डरते। देश के बाहर जाकर सार्वजनिक रूप से देश की बुराई करते हैं। किस प्रकार की राजनीति भारत में शुरू करना चाहते हैं? उन्हें लगता है कि देश की जनता कुछ नहीं समझती। लेकिन देश की जनता सब समझती है। 10 साल से विपक्ष के नेता का पद खाली है। राहुल बाबा फिर से एक बार 300 से अधिक सीटों से मोदी जी की सरकार बनने जा रही है।”

अमित शाह ने यह भी कहा है, “ये कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। लोकतंत्र खतरे में नहीं है। बल्कि आपका परिवार खतरे में हैं। आपने इस लोकतंत्र को जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण के तीन नाखूनों में घेर कर रखा था। सोनिया जी हों, राहुल जी हों या और कोई भी हो, जब भी मोदी जी को गाली दी है, जनता ने इन गालियों के कीचड़ में कमल को और मजबूत करके खिलाया है।”

‘दोस्त कहते हैं कलमा पढ़ लो, मुस्लिम बन जाओ’ : पाकिस्तान में हिंदू सांसद पर धर्मांतरण का दबाव, संसद में उठा मुद्दा

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत किसी से छिपी नहीं है। अब वहाँ के हिंदू सांसद दानिश कुमार ने संसद में कहा है कि साथी सांसद उन पर इस्लाम अपनाने का दबाव डालते हैं। उन्होंने यह भी कहा, “जो लोग मुझे इस्लाम अपनाने के लिए कहते हैं वे पहले मुनाफाखोरों को मुस्लिम बनाएँ इसके बाद उपदेश दें।” दानिश कुमार ने यह बात गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को कही।

दरअसल, दानिश कुमार पाकिस्तान में उपजे मौजूदा खाद्य संकट और महँगाई को लेकर संसद के उच्च सदन में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान में महँगाई बढ़ रही है। रमजान से पहले केले की कीमत 150 रुपए थी। अब यह 400-450 रुपए पहुँच गई है। इसी तरह अन्य चीजों की कीमतें भी बढ़ गईं हैं। उन्होंने कहा है, “मैं गैर-मुस्लिम हूँ लेकिन मुझे शर्म आ रही है कि यहाँ कैसे लोग हैं जो अपने मुस्लिम भाइयों का ही खून चूस रहे हैं।”

दानिश कुमार ने आगे कहा है, “सर मैं आपको बताता हूँ, यहाँ पर मेरे दोस्त हैं जो मुझसे कहते हैं कि दानिश कुमार कलमा पढ़ लो, मुस्लिम हो जाओ। पहले आप उन शैतानों को जो मुनाफाखोर हैं, उन्हें मुस्लिम बनाएँ। फिर दानिश कुमार को उपदेश दें। मैं चाहता हूँ कि ये लोग वादा करें जब तक ये उन्हें मुस्लिम नहीं बनाते, तब तक मुझे उपदेश नहीं देंगे।”

कौन हैं दानिश कुमार

दानिश कुमार पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन सीनेट के सदस्य हैं। वह अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर संसद से सड़क तक मुखर रहे हैं। साल 2018 में बलूचिस्तान अवामी पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीट टिकट दिया था। जहाँ से जीतकर वह सांसद बने। इससे पहले वज बलूचिस्तान की प्रांतीय विधानसभा के सदस्य (विधायक) भी रह चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र भी जता चुका है चिंता

बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार विशेषज्ञ भी चिंता चुके हैं। इसी साल जनवरी में यूएन के विशेषज्ञों ने कहा था कि पाकिस्तान में अपहरण, जबरन विवाह, और नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

यूएन के मानवाधिकार विशेषज्ञों की एक टीम ने कहा था, “हमें यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि 13 साल से उम्र की लड़कियों को उनके घरों से अगवा किया जा रहा है। इसके बाद तस्करी करके इन लड़कियों को घरों से दूर स्थानों पर भेजा जा रहा है। कभी-कभी उनकी उम्र से दोगुनी उम्र के पुरुषों से शादी करने और इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है।”

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने यह भी कहा था, “हम बहुत चिन्तित हैं कि इस तरह के विवाह और धर्मांतरण, इन लड़कियों और महिलाओं या उनके परिवारों को हिंसा की धमकी देकर करवाए जा रहे हैं।” इन विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में, जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यक पीड़ित परिवारों को न्याय न मिल पाने को लेकर भी निराशा जताई थी।

केजरीवाल ने BRS को भिजवाए ₹15 करोड़, कोड वर्ड ’15 किलो घी’ था: महाठग सुकेश का नया दावा, कहा- ‘मेरे पास 700 पन्नों की चैट है’

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने एक बार फिर से चिट्ठी जारी की है। इस बार उसने आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि सीएम केजरीवाल का दक्षिण भारतीय ग्रुप और तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं के साथ साँठगाँठ है।

सुकेश चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के कहने पर ही बीआरएस दफ्तर में 15 करोड़ रुपए पहुँचाए गए थे। महाठग ने दावा किया है कि उसके पास वह चैट मौजूद है जिसमें केजरीवाल द्वारा रुपए पहुँचाने और बीआरएस नेता द्वारा उसे स्वीकारे जाने की बात कही जा रही है। सुकेश के अनुसार उसके पास मौजूद चैट के स्क्रीनशॉट से साफ है कि बीआरएस नेता ने अरुण पिल्लई (शराब कारोबारी) को 15 करोड़ रुपए देने को कहा और उसने वह बॉक्स काले रंग की रेंज रोवर गाड़ी में रखी जिसपर MLC का स्टिकर लगा हुआ था।

इस चैट से केजरीवाल और दक्षिण भारतीय ग्रुप के बीच के संबंधों पर मुहर लगती है। खत में सुकेश का दावा है कि चैट में 15 करोड़ रुपए को कोड वर्ड में 15 किलो घी कहा गया है। उसका दावा है कि केजरीवाल और बीआरएस के नेता लंबे समय से एक दूसरे के संपर्क में हैं। केजरीवाल और बीआरएस नेताओं के बीच कई बार पैसों का लेनदेन हो चुका है।

इतना ही नहीं सुकेश ने कहा है कि यदि उसकी बातों पर किसी को भरोसा नहीं है तो वो नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट या किसी भी तरह का परीक्षण कराने को तैयार है। उसने कहा, “मैं सिर्फ बातें ही नहीं कर रहा बल्कि हर बात के सबूत पेश करने वाला हूँ। सुकेश का दावा है कि उसके पास अरविंद केजरीवाल के साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट के कुल 700 पेज सुरक्षित हैं। उसने कथित तौर पर साल 2020 में बीआरएस कार्यालय को 75 करोड़ रुपए देने की भी बात कही है।

मुंबई में जहाँ हुई ‘रामसेतु’ और ‘आदिपुरुष’ की शूटिंग, ₹1000 करोड़ के उस स्टूडियो पर BMC का बुलडोजर चलाः पूर्व मंत्री असलम शेख ने किया था अवैध निर्माण

उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता असलम शेख के फिल्म स्टूडियो पर बीएमसी ने बुलडोजर चलाया। आरोप है कि असलम शेख ने मड-मार्वे इलाके में 1000 करोड़ रुपए की लागत से अवैध रूप से स्टूडियो बनाया था। इस स्टूडियो में रामसेतु और आदिपुरुष जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। बीएमसी ने यह कार्रवाई शुक्रवार (7 मार्च 2023) को की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को अवैध स्टूडियो के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद ही बीएमसी ने यह कार्रवाई की है। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि अस्थाई स्टूडियो बनाने की अनुमति दी गई थी। इस अनुमति का दुरुपयोग करते हुए स्थायी स्टूडियो बनाया गया। इसलिए यह स्टूडियो अवैध है।

कैसे सामने आया मामला

दरअसल, बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्रालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में उन्होंने कहा था कि असलम शेख और उसके सहयोगियों ने मड-मार्वे इलाके में अवैध रूप से फिल्म स्टूडियो बनाए हैं। इसके बाद मामले की जाँच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए।

असलम शेख के स्टूडियो पर हो रही इस कार्रवाई को लेकर किरीट सोमैया मौके पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने कहा है, “आदित्य ठाकरे खुद यहाँ आए थे और उनके आशीर्वाद से यह स्टूडियो बनाया गया था। बीएमसी आयुक्त इकबाल चहल को अवैध स्टूडियो के बारे में बहुत पहले से पता था। लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद हमने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने बीएमसी से सवाल किया कि अवैध निर्माण की अनुमति कैसे दी गई? मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की जाँच का आदेश देने का अनुरोध किया है।”

एनजीटी का आदेश…

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने अपने आदेश में कहा था कि अस्थाई निर्माण के लिए अनुमति ली गई थी। लेकिन फिल्म स्टूडियो में स्टील और कंक्रीट समेत कई अन्य सामग्री का उपयोग कर स्थाई निर्माण किया गया था। स्टूडियो निर्माण करने वाले व्यक्ति का दावा है कि निर्माण पर्यावरण के अनुकूल है। लेकिन जाँच में पाया गया है कि पूरा निर्माण कार्य नियमों की अनदेखी कर किया गया।

किसान आंदोलन से भारत में आई कोरोना की लहर, अल्फा वैरिएंट के सुपरस्प्रेडर थे प्रदर्शनकारी: देश-दुनिया के 7 संस्थानों की स्टडी से खुलासा, साल भर वैज्ञानिकों ने किया रिसर्च

देश में कोरोना वायरस फैलने को लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) समेत 7 रिसर्च संस्थानों की स्टडी रिपोर्ट सामने आई है। इंटरनेशनल जर्नल ‘एमडीपीआई कोविड’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार देश में कोरोना की पहली लहर (First wave of corona) का कारण किसान आंदोलन बना था। कोरोना के अल्फा वेरिएंट पर की गई रिसर्च के आधार पर यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, किसान आंदोलन की वजह से कोरोना के मामलों में अचानक वृद्धि हुई थी। साल 2020-21 में देश में कोरोना के अल्फा वेरिएंट का प्रसार असामान्य तरीके से हुआ था। आमतौर पर यह वेरिएंट तेजी से नहीं फैलता, लेकिन आंदोलनकारियों ने देश में खासकर उत्तर भारतीय राज्यों में कोरोना का यह वेरिएंट फैलाया था।

रिसर्च में शामिल जाह्नवी के मुताबिक दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ में अल्फा वैरिएंट की 44 जेनेटिक शाखाएँ मौजूद थीं। यही वजह थी कि पूरे भारत के बजाय सिर्फ उत्तर भारत में कोरोना का यह प्रकार तेजी से फैला। पंजाब में किसान आंदोलन के लिए हुए इवेंट्स, बैठक और सभाओं के कारण संक्रमण सामान्य से 5 से 10 गुना तेजी से बढ़ा था।

अध्ययन करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे बीएचयू में जूलॉजी के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि 3085 अल्फा वैरिएंट के जीनोमिक सीक्वेंस का विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि पंजाब समेत उत्तरी भारत के राज्यों में कोरोना के मामलों में आया उछाल अचानक नहीं था। इसके पीछे किसान आंदोलन की भूमिका थी।

स्टडी से पता चला है कि अल्फा वेरिएंट (SARS-CoV-2) का पहला मामला दिसंबर 2020 में दक्षिण पूर्वी ब्रिटेन में पाया गया था। इसके बाद यह पंजाब समेत उत्तरी भारत में फैलने लगा। इस रिसर्च और रिपोर्ट को तैयार करने में लगभग एक साल का समय लगा है।

इस रिसर्च में बीएचयू, बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, आनुवंशिक विभाग उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद, जैव प्रौद्योगिकी विभाग स्वास्थ्य सम्बद्ध विज्ञान संस्थान गाजियाबाद, क्षेत्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला भोपाल, कलकत्ता यूनिवर्सिटी और अमृता स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के 15 वैज्ञानिक और रिसर्चर शामिल थे।

32 साल में 100+ शादी, किसी को नहीं दिया तलाक: बना दिया वर्ल्ड रिकाॅर्ड, 14 देश की औरतों से अलग-अलग नाम से बनाए रिश्ते

पूरी दुनिया में एक से एक अजीब रिकॉर्ड बनते रहते हैं। पर क्या आप जानते हैं दुनिया में बिना तलाक दिए सबसे ज्यादा शादी का रिकॉर्ड किसके नाम है? ऐसा करने वाले व्यक्ति का नाम है- जियोवन्नी विगलियोटो (Giovanni Vigliotto)। उसके नाम 100 से ज्यादा महिलाओं से शादी करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने पिछले विगलियोटो की कहानी बताते हुए एक वीडियो शेयर किया है। इसके अनुसार विगलियोटो ने साल 1949 से 1981 के बीच बिना तलाक लिए 105 महिलाओं से शादी की। उसकी कोई भी पत्नी एक-दूसरे के बारे में नहीं जानती थी। ऐसा कहा जाता है कि उसने हर शादी अलग-अलग नाम से की। उसने अमेरिका के 27 राज्यों और 14 अन्य देशों में की महिलाओं से शादी की थी।

उसका असली नाम जियोवन्नी विगलियोटो भी नहीं है। यह नाम उसने आखिरी शादी के लिए इस्तेमाल किया था। इसके बाद वह पकड़ा गया। उस वक्त उसकी उम्र 53 साल थी। उसने दावा किया था कि उसका जन्म 3 अप्रैल, 1929 को इटली के सिसिली में हुआ था और उसका असली नाम निकोलाई पेरुस्कोव है, जबकि एक प्रॉसिक्यूटर ने उसके सभी दावों को झूठ करार दिया था। प्रॉसिक्यूटर ने बताया था कि उसका असली नाम फ्रेड जिप है और उसका जन्म 3 अप्रैल, 1936 को न्यूयॉर्क में हुआ था।

ऐसा कहा जाता है कि विगलियोटो सभी महिलाओं से चोर बाजार में मिलता था और उन्हें पहली डेट पर ही शादी के लिए प्रपोज कर देता था। फिर शादी के तुरंत बाद वह अपनी नई पत्नी के पैसे, गहने और कीमती समान लेकर भाग जाता था। चुराए गए सामानों को वह चोर बाजार में बेच देता था और फिर वह एक नई महिला का शिकार करने में जुट जाता था। लेकिन उसका शिकार बनी आखिरी महिला ने उसे अमेरिका के फ्लोरिडा में धर दबोचा। इस महिला का नाम शारोन क्लार्क था और वह इंडियाना के चोर बाजार में मैनेजर का काम करती थी। शेरोन क्लार्क ने बताया था कि उसने 13 जून 1981 को उससे शादी की, लेकिन तीन हफ्ते बाद ही उसे छोड़ दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने विगलियोटो को 28 दिसंबर 1981 को गिरफ्तार किया था। जाँच में सामने आया कि वह अपनी पत्नियों को यह कहकर झाँसा देता था कि वो बहुत दूर रहता है, इसलिए सामान लेकर उन्हें उसके पास ही आना होगा। उसके खिलाफ जनवरी 1983 में मुकदमा शुरू हुआ। हर दिन कोर्ट रूम महिलाओं से खचाखच भरा रहता था। उसे कुल 34 साल जेल की सजा हुई थी। इसमें 28 साल की सजा धोखाधड़ी और छह साल की सजा एक से अधिक शादी करने पर हुई थी। साथ ही उस समय $336,000 (वर्तमान में करीब 2 करोड़ 75 लाख रुपए) का जुर्माना भी लगाया गया था।

उत्तराखंड पुलिस ने 1000 अवैध मजारों की बनाई सूची: CM धामी बोले- देवभूमि में लैंड जिहाद नहीं होने देंगे, खुद हटाने के लिए 6 महीने का दिया वक्त

ऑपइंडिया ने उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में मजार बनाकर सरकारी जगहों पर अवैध कब्जे को लेकर रिपोर्ट की एक सीरीज की थी। अब उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार में पुलिस ने ऐसे 1000 से अवैध मजारों की एक सूची बनाई है, जिन पर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लैंड जिहाद हो या मजार जिहाद, देवभूमि उत्तराखंड में कानून और धर्म के विरुद्ध कोई काम नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हमने ऐसे 1000 जगहों का सर्वे कराया है, जहाँ अतिक्रमण किया गया है। अगर 6 महीने में इसे नहीं हटाया गया तो सरकार कार्रवाई करेगी।’

मुख्यमंत्री धामी ने शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को कालाढूंगी के राजकीय इंटर कॉलेज में कहा कि उत्तराखंड में 1,000 से ज्यादा जगह अवैध मजार बना दी गई हैं। इसके पहले जब कुछ जगहों पर खोद करके देखा गया तो उसके नीचे किसी तरह के मानव अवशेष नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और देवभूमि में लैंड जिहाद को किसी भी कीमत में नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी की विरोधी नहीं है, लेकिन वह तुष्टिकरण भी नहीं होने देगी। 

ऑपइंडिया राज्य में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव, लैंड जिहाद, अवैध मजार और मदरसों को aलेकर साल 2021 से समय-समय पर रिपोर्ट करता रहा है। सीएम धामी ने 22 मई 2022 को एक बयान में पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर चिंता जताई थी।

इसके बाद धामी सरकार ने दिसंबर 2022 और मार्च 2023 में कार्रवाई करते हुए 41 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया था। अब सरकार ने 1000 अवैध अवैध मजारों की एक बार फिर लिस्ट बनाकर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई शुरू करने जा रही है।

अदनान सामी ने बीवी के साथ पोर्न DVD बनाई, डिग्री भी फर्जी: गायक के भाई का दावा, बाद में डिलीट कर लिया पोस्ट

भारतीय नागरिक बनने के लिए साल 2015 में अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ने वाले गायक अदनान सामी (Adnan Sami) एक बार फिर चर्चा में हैं। अदनान सामी के छोटे भाई जुनैद सामी (Junaid Sami) ने अपने फेसबुक पर गायक के बारे में चौंकाने वाले खुलासे करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अदनान को झूठा कहते हुए बताया कि आखिर उनके भाई ने भारत की नागरिकता क्यों ली थी? साथ ही यह भी दावा किया कि गायक ने अपनी दूसरी बीवी के साथ पोर्न DVD बनाया। अपनी पोस्ट में ​​जुनैद ने दावा किया कि सामी के पास फर्जी डिग्रियाँ हैं और वह जेल भी जा चुका है। हालाँकि, इस पोस्ट को अदनान के भाई ने अब डिलीट कर दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है।

जुनैद ने लिखा, “अब इमरान खान बनने का समय आ चुका है। मैं अपने बड़े भाई अदनान सामी को लेकर कई सच बताने जा रहा हूँ, क्योंकि ऊपर वाले के अलावा मुझे अब किसी का खौफ नहीं है। मैं ये सब करना नहीं चाहता, लेकिन मुझे ऐसा करना ही होगा, क्योंकि अब सच का बाहर आना बेहद जरूरी है। मैं अदनान को चुनौती देता हूँ कि वो मेरी इन बातों में से किसी एक को भी गलत साबित कर के दिखा दें।”

जुनैद सामी खान के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसके बाद जुनैद ने प्वाइंटर्स में अपनी बात कहना शुरू किया। उन्होंने कहा, “15 अगस्त 1969 में अदनान का जन्म रावलपिंडी के एक अस्पताल में हुआ था। इसके बाद 1973 में मेरा भी जन्म उसी अस्पताल में हुआ। अदनान इंग्लैंड में पैदा हुआ था, ये झूठ है। इंग्लैंड में वो 1986 में अपने ओ लेवेल्स में फेल हो गया था और फिर उसने लाहौर से अपनी डिग्री बनवाई। इसके बाद ए लेवेल्स उन्होंने अबु धाबी से प्राइवेटली किया। वह झूठ बोलते हैं कि उनके पास यूके से कानून की डिग्री है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है।”

जुनैद ने अपने करियर में आगे न बढ़ पाने का कारण अपने भाई को बताते हुए कहा, “अदनान ने मेरी कभी भी मदद नहीं की। उसे डर था कि मैं उससे बेहतर कर सकता हूँ। कई लोगों ने मुझसे कहा कि मेरी आवाज उनसे बेहतर हैं। इसके बावजूद उन्होंने मेरी परवाह नहीं की और स्वार्थी बन गए। इसलिए उन्होंने मुझे भारत में भी लॉंच नहीं लिया। आज उनकी वजह से मैं घर बैठा हूँ।”

इसके आगे जुनैद ने अदनान सामी की पर्सनल लाइफ से जुड़े कई खुलासे किए। जुनैद ने लिखा कि अदनान ने अपनी दूसरी पत्नी सबा के साथ 2007-2008 में पोर्न डीवीडी बनाई थी। इस डीवीडी को उन्होंने कोर्ट में पेश किया था, ताकि इसे पूरा भारत देख सके। कोर्ट में अदनान ने दावा किया था कि ये वीडियो सबा के आशिक ने बनाई है, जबकि सच तो यह है कि उन्होंने खुद इसे बनाया था।

जुनैद सामी खान के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

अपनी पोस्ट में जुनैद ने गायक की भारतीय नागरिकता के बारे में लिखा कि कि इसमें कोई शक नहीं है कि वह भारत से प्यार करता है। इस देश ने उसे सिंगर बनाया है। लेकिन सच तो यह है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता इसलिए ली, क्योंकि यहाँ (भारत) अच्छे पैसे मिलते हैं, जो कि पाकिस्तान में नहीं मिलते। उन्होंने अपने भाई पर एक और आरोप लगाया कि उसने कहा था कि उनकी अम्मी भारतीय हैं, जबकि वह पाकिस्तान की रहने वाली हैं। अभी तक इस मामले पर अदनान सामी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि अदनान सामी ने साल 2015 में पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी थी। इसके बाद, भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया और साल 2016 में भारतीय नागरिक बन गए। सामी ने कहा था, “मेरी समस्या वहाँ की सरकार से है, जो लोग मुझे जानते हैं उन्हें पता है कि प्रशासन ने मेरे साथ क्या किया। यही वजह थी कि मैंने पाकिस्तान छोड़ दिया।”