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दामाद नाजिर से जुलेखा के थे अवैध संबंध, विरोध करने पर शौहर मुस्लिम अंसारी को कुल्हाड़ी से काट डाला: खेत में फेंक दी लाश, झारखंड की घटना

झारखंड के गढ़वा में मुस्लिम अंसारी की हुई हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। हत्या के आरोप में उसकी बीवी जुलेखा और दामाद नाजिर अली को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को जेल भेज दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार जुलेखा और नाजिर के अवैध संबंध थे। इसका विरोध करने के कारण दोनों ने कुल्हाड़ी से काटकर मुस्लिम अंसारी की हत्या कर दी और उसकी लाश खेत में फेंक दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गढ़वा के ऊंटारी थानाक्षेत्र का है। सोनबरसा गाँव का मुस्लिम अंसारी बेंगलुरु में काम करता था। नाजिर अली भी बेंगलुरु में ही काम करता था। यहीं दोनों की दोस्ती हुई थी। छुट्टी में नाजिर अली अक्सर मुस्लिम अंसारी के गढ़वा स्थित घर आया-जाया करता था। बाद में मुस्लिम अंसारी ने अपनी बेटी का निकाह नाज़िर अली से कर दिया। कुछ समय बाद नाज़िर और उसकी सास जुलेखा में अवैध संबंध बन गए।

दावा किया जा रहा है कि दोनों के बीच करीब 2 सालों से अवैध संबंध था। इसका पता चलने पर मुस्लिम अंसारी ने विरोध किया। इसी विरोध के चलते वह बीवी जुलेखा और दामाद नाज़िर की आँखों में खटकने लगा था। सास और दामाद किसी भी हाल में रिश्ता खत्म करने के लिए तैयार नहीं थे। 25 मार्च 2023 को मौक़ा पा कर जुलेखा ने दामाद नाज़िर के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन के पास मुस्लिम अंसारी की हत्या कर दी।

मुस्लिम अंसारी की हत्या सिर पर कुल्हाड़ी मार कर की गई थी। हत्या के बाद दोनों ने लाश को खेत में फेंक दिया और पुलिस के आगे अनजान बने रहे। आखिरकार पुलिस ने जाँच कर मामले का खुलासा 30 मार्च 2023 को किया। पूछताछ में जुलेखा ने जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने घटना में प्रयोग हुई कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली है।

आज ममता बनर्जी और इस्लामपरस्त कर रहे ‘मुस्लिम एरिया’ की बात, कभी हाईकोर्ट ने लगाई थी लताड़ः कहा था- मुस्लिम बहुल इलाके में नहीं रोक सकते हिंदुओं का जुलूस

पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में रामनवमी के मौके पर हिन्दू विरोधी हिंसा हुई, लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका इसका सारा ठीकरा पीड़ित हिन्दुओं पर ही फोड़ डाला। उन्होंने उलटा हिन्दुओं से ही कहा कि वो रमजान के महीने में मुस्लिमों की रक्षा करें। जिस पश्चिम बंगाल में मुस्लिम लगभग एक तिहाई हो गए हैं, वहाँ की सीएम उन्हें अल्पसंख्यक बता रही हैं। उन्होंने ‘मुस्लिम एरिया’ का भी जिक्र किया, जिसके लिए आपको मद्रास हाईकोर्ट की एक पुरानी टिप्पणी याद कराए जाने लायक है।

असल में TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा था कि हिन्दुओं को रामनवमी मनानी चाहिए, लेकिन उन्हें ‘मुस्लिम एरिया’ में नहीं जाना चाहिए क्योंकि अभी रमजान का महीना चल रहा है। यानी, इस देश में अब मुस्लिमों के अलग एरिया बन गए हैं, जहाँ हिन्दू त्योहारों की शोभा यात्राएँ नहीं घुस सकतीं। ये सब तब हो रहा है, जब ‘मुस्लिमों के लिए अलग मुल्क’ की माँग पर ही भारत का बँटवारा हुआ था। इसका परिणाम ये हुआ कि पाकिस्तान और बांग्लादेश उन्हें मिला।

अब बात करते हैं मद्रास हाईकोर्ट की उस टिप्पणी की, जो उसने किसी तरह के एक मामले को लेकर की थी। मामला तमिलनाडु के पेरम्बलूर जिले के वी कलाथुर इलाके का था। एक खास रूट को लेकर मुस्लिमों की आपत्ति थी कि यहाँ से मंदिर की यात्रा नहीं निकल सकती। पुराने समय से ही वहाँ मंदिरों का 3 दिवसीय त्योहार हर साल आयोजित होता आ रहा है, लेकिन 2012 से स्थानीय मुस्लिम इसे हराम बता कर आपत्ति जताने लगे।

जजों ने भी इस बात को माना कि 2011 तक गाँव के हर रास्ते पर मंदिर की शोभा यात्रा निकलती थी और किसी को कोई आपत्ति नहीं होती थी। मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सड़कों या गलियों तक जनता की पहुँच होनी चाहिए, चाहे वो किसी भी धर्म/मजहब के हों। मद्रास हाईकोर्ट ने भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बताते हुए कहा था कि किसी खास क्षेत्र में किसी मजहब के लोग बहुलता में हैं, इसका ये अर्थ नहीं है कि वहाँ से दूसरे धर्म के लोग यात्रा नहीं निकाल सकते।

मद्रास हाईकोर्ट ने चेताया कि ऐसे मामलों से इस तरह की स्थितियाँ उत्पन्न हो जाएँगी कि अल्पसंख्यक देश के अधिकतर हिस्सों में अपने त्योहार नहीं मना सकेंगे, या जुलूस नहीं निकाल सकेंगे। मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा था कि इसी तरह की दिक्कतें दूसरा समाज भी करने लगे तो देश भर में अशांति और उन्माद का माहौल पैदा हो जाएगा। TMC को भी देश की न्यायपालिका पर अगर भरोसा है तो ‘मुस्लिम एरिया’ जैसी बातें नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सदियों से जो परंपरा है उसे निभाने से रोकना हिन्दुओं के साथ अन्याय है।

‘हिंदू चरमपंथी- मुस्लिम पीड़ित, मदरसा जला दिया’: रामनवमी हिंसा पर OIC कर रहा था प्रोपेगेंडा, मोदी सरकार ने ‘मजहबी सोच’ पर लताड़ा

मुस्लिम देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी OIC को मोदी सरकार ने जमकर लताड़ लगाई है। रामनवमी हिंसा को लेकर ओआईसी प्रोपेगेंडा कर रहा था। चिंता जताने के बहाने हिंदुओं को ‘कट्टरपंथी’ और मुस्लिमों को ‘विक्टिम’ दिखलाने की कोशिश कर रहा था। मोदी सरकार ने इसे ओआईसी की मजहबी सोच और भारत विरोधी एजेंडे का नमूना बताया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने 4 अप्रैल 2023 को OIC के बयान पर कड़ा एतराज जताया। ओआईसी को फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा, “हम भारत के संबंध में OIC सचिवालय की ओर से जारी किए गए बयान की कड़ी निंदा करते हैं। ओआईसी का यह बयान उसकी सांप्रदायिक मानसिकता और भारत विरोधी एजेंडे का एक और नमूना है।” बागची ने कहा कि भारत विरोधी ताकतों के झाँसे में आकर OIC अपनी प्रतिष्ठा को खुद नुकसान पहुँचा रहा है।

उल्लेखनीय है कि भारत के 7 राज्यों के कई जगहों पर रामनवमी शोभा यात्रा को निशाने बनाने की घटना सामने आई है। ज्यादातर मामलों में शोभा यात्रा पर हमले मस्जिद के पास हुए हैं। बिहार के सासाराम और बिहारशरीफ में भी हिंसा हुई है। बिहारशरीफ में एक मदरसे के जलने की घटना सामने आई है। वैसे यहाँ आग कैसे लगी यह स्पष्ट नहीं है। कुछ लोग आशंका जाहिर कर रहे हैं कि खुद को पीड़ित दिखाने के लिए दंगाइयों ने जानबूझकर आग लगाई हो।

इन घटनाओं का हवाला देते हुए OIC ने 4 अप्रैल को एक बयान जारी किया था। इस बयान में कहा गया था, “OIC सचिवालय रामनवमी शोभा यात्रा के दौरान भारत के कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाली हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं से चिंतित है। कट्टरपंथी हिंदुओं की भीड़ ने 31 मार्च को बिहारशरीफ में मदरसे और लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया। ओआईसी दोषियों पर कड़ी कड़ी कार्रवाई और देश में मुस्लिमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान भारतीय अधिकारियों से करता है।”

बयान में मुस्लिमों को विक्टिम दिखाने के लिए ‘इस्लामोफोबिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब ओआईसी ने भारत के अंदरुनी मामलों को लेकर टिप्पणी की हो। वह जम्मू-कश्मीर को लेकर भी विवादित बयान दे चुका है।

रात के अंधेरे में रामनवमी पर लगे भगवा झंडों को नोंचा, पैरों से कुचला… वीडियो वायरलः दिल्ली पुलिस ने अजीम को किया गिरफ्तार

दिल्ली में रामनवमी के मौके पर लगाए गए भगवा झंडों को पैरों से कुचलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब 28 सेकेंड के इस वीडियो में दिख रहे शख्स की पहचान अजीम के तौर पर हुई है। पुलिस ने अजीम पर FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने अजीम पर IPC की धारा 153 A और 295 A के तहत एक्शन लिया है। यह मामला दिल्ली के शास्त्री पार्क थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गली नंबर 8 में रहने वाले सागर ने अजीम के खिलाफ हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। उसने अजीम की करतूत का वीडियो भी पुलिस को सौंपा था।

सोशल मीडिया वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि रात के अँधेरे में कुर्ता-पायजामा पहना एक व्यक्ति पहले गली में टाँगे गए भगवा झंडों को नोंचता है और फिर पैरों से उसे कुचलने लगता है। 28 सेकेंड के इस वीडियो के अंत में आरोपित अपने घर में चला जाता है। पुलिस जाँच में यह हरकत करने वाला आरोपित अजीम निकला, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

गौरतलब है कि इस साल रामनवमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कट्टरपंथियों द्वारा हिंसा की गई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र प्रभावित हुए हैं। दिल्ली के जहाँगीरपुरी में पिछले साल रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद प्रशासन इस बार की शोभायात्रा की अनुमति देने में आनाकानी कर रहा था। हालाँकि बाद में हिन्दू संगठनों ने भव्य शोभायात्रा निकाली थी।

30 वीडियो, 15 झूठ – रामनवमी में हिंदुओं ने ही की हिंसा: हीरो-हिरोइन से लेकर पत्रकार-प्रोफेसर-सुप्रीम कोर्ट वकील… सबने फैलाई हिंदू-घृणा

रामनवमी हिंदुओं के लिए हर्षोल्लास का पर्व है। माहौल लेकिन इसके उलट रहा इस साल। देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की गई, हर जगह निशाने पर थे हिंदू। पत्थरबाजी से एक कदम आगे बढ़ बमबाजी और आगजनी करके हिंदुओं को खौफ में रखने का षड्यंत्र किया गया। दो कदम आगे बढ़ प्रोपेगेंडा फैलाया गया कि हिंसा हिंदुओं ने ही की, वो मुस्लिमों को सता रहे। ‘शांतिप्रिय’ इस्लामी इकोसिस्टम के कट्टर मुस्लिम सिपाहियों ने इस प्रोपेगेंडा की पटकथा लिखी। इसे दूर-दूर तक फैलाने का काम किया वामपंथी इकोसिस्टम ने।

बॉलीवुड के हीरो से लेकर पाकिस्तानी हिरोइन तक, पत्रकार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर, प्रोफेसर, नेता, राजनीतिक दल, हिंदुस्तानी-पाकिस्तानी-विदेशी… हिंदू-घृणा से सने हर क्षेत्र के लोगों ने रामनवमी पर हिंदुओं को कलंकित करने का कार्य किया। यह किया गया बहुत ही सुनियोजित ढंग से। मीर फैजल नाम के तथाकथित पत्रकार को इस खेल का प्यादा बनाया गया।

‘मकतूब मीडिया’ के लिए काम कर रहे मीर फैजल ने रामनवमी की ही रात (30-31 मार्च 2023) को ट्विटर पर एक थ्रेड पोस्ट किया। इस थ्रेड में कुल 24 ट्वीट थे। अब 21वाँ डिलीट कर दिया गया है। वो भी इसलिए क्योंकि इस्लामी-वामी इकोसिस्टम की प्रिय राजस्थान पुलिस ने ही इसका फैक्ट-चेक कर दिया। नीचे जिस वीडियो पर राजस्थान की गंगानगर पुलिस ने प्रतिक्रिया दी है, वही वीडियो 21वें थ्रेड में डाला गया था। फेक न्यूज फैलाने वालों की गिरफ्तारी की बात सुन फैजल का खून ठंडा पड़ गया, चुपके से डिलीट कर दिया।

हिंदुओं का नाम हिंसा के साथ जोड़ने के लिए कोई भी फर्जी वीडियो पोस्ट करना, उसके बारे में 2-4 लाइन कुछ भी लिख देना… मीर फैजल ने प्रोपेगेंडा का यही तरीका अपनाया। एक को राजस्थान पुलिस ने धर लिया, बाकी 23 को हम ध्वस्त करेंगे, एक-एक करके।

1. महाराष्ट्र के किराडपुरा में हुई हिंसा

ट्विटर थ्रेड की शुरुआत 12 सेकंड के एक वीडियो से की गई। लिखा गया कि मुस्लिम-बहुल किराडपुरा में मुस्लिमों के ही खिलाफ भड़काऊ नारे बाइक सवार कुछ युवकों ने लगाए। इसके बाद कहासुनी हुई और फिर हिंसा भड़की। वीडियो की सच्चाई आखिर है क्या? सच्चाई यह है कि किसने नारे लगाए, किसने किसको उकसाया, किसने हिंसा की, पत्थरबाजी कहाँ से हुई, किन लोगों ने सड़क पर गाड़ियों को जलाया – 12 सेकंड के वीडियो को 12 बार देखने के बाद भी पता लगाना असंभव है। बस झूठ गढ़ दिया गया, इस्लामी-वामी लोगों ने उसे ‘पाक-शब्द’ मान कर फैला दिया।

किराडपुरा में हुई हिंसा का सच यह है कि वहाँ राम मंदिर के सामने पत्थरबाजी और बमबाजी की गई। दूसरा सच यह है कि AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील ने मंदिर को मुस्लिम दंगाइयों से बचाने का दावा किया, खुद को हीरो बनाया। इम्तियाज जलील के अनुसार मंदिर पर पथराव करने वालों की संख्या लगभग 500 थी। मंदिर के अंदर कई हिंदू जान बचाने के लिए छिपे हुए थे, कुछ पुलिस वाले भी थे। मंदिर के विशाल गेट और अंदर से लॉक लगे होने के कारण दंगाई घुस नहीं पाए। इसके बाद उन लोगों ने प्रवेश द्वार पर लगे भगवा झंडे को फाड़ने की कोशिश की।

2. बिहार के लखीसराय में भड़काऊ गाने

पूरे 1 मिनट का वीडियो पोस्ट किया गया। लिखा कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तलवारें चमकाईं और भड़काऊ गानों के साथ शोभा यात्रा निकाली। लाउडस्पीकर पर गाने के बीच बोला गया – “जिनको पाकिस्तान पसंद है, वो पाकिस्तान चले जाएँ। हम उन्हें रोकेंगे नहीं, मुफ्त में टिकट देंगे।”

इस वीडियो का सच यह है कि लखीसराय में रामनवमी की शोभा यात्रा शांतिपूर्ण रही। रामनवमी पर हिंदुओं का तलवार लेकर निकलना, लाठी भाँज कर करतब करना अपने धर्म के प्रति समर्पण है, एकता का प्रदर्शन है। ‘जय श्रीराम’ के बोल वाले बैकग्राउंड म्युजिक का गाना भड़काऊ कैसे हो सकता है मीर फैजल?

और हाँ, भारत में रहने वाले किसी भी नागरिक को भूखा-नंगा पाकिस्तान कैसे पसंद हो सकता है? इसके बावजूद भारत पर बार-बार आक्रमण करने, आतंकवादियों को भेजने वाला देश अगर किसी को पसंद है तो उसे उसके पसंदीदा देश में भेजने की बात करने वाली लाइन भड़काऊ केसै? यह तो स्वागत-योग्य बात है। कट्टर इस्लामी हो या वामी, मुफ्त में अपनी पसंदीदा जगह जाने से क्यों हिचक रहे हो, बिंदास जाओ।

3. खंडवा (मध्य प्रदेश) में नाम-मजहब पूछ युवक पर हमला

12 सेकंड का वीडियो है। एक युवक घायल है, अस्पताल के बेड पर लेटा हुआ। लिखा गया कि घायल युवक से उसका नाम-मजहब पूछ कर 3 लोगों ने चाकूओं से मारा।

आखिर सच क्या है? पहला सच यह है कि पूरी वीडियो में न तो घायल युवक ने कहीं भी कहा कि नाम-मजहब पूछ कर उस पर हमला किया गया, न ही उसके आप-पास खड़े लोग ऐसा बोलते दिखे/सुनाई दिए। दूसरा सच खंडवा जिले के संबंधित थाने के SHO ने ऑपइंडिया को बताया। पुलिस को दी गई शिकायत में किसी प्रकार के हिंदू-मुस्लिम विवाद का जिक्र नहीं किया गया है। मतलब जो युवक घायल है, जिसे चाकू से मारा गया है, वो खुद पर हुए हमले को हिंदू-मुस्लिम नहीं बता रहा। लेकिन प्रोपेगेंडा पत्रकार और गैंग 12 सेकंड का वीडियो डाल कर से ‘खतरे में मुस्लिम’ वाला षड्यंत्र रचने-फैलाने में लग गया।

और तो और, SHO ने घायल मुस्लिम युवक की हरकत को ही संदिग्ध बताया है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि युवक आधी रात को टॉयलेट करने बाइक से इतनी दूर क्यों गया था, इसकी जाँच की जा रही है। अब तक की पुलिस जाँच में यह पता चला है कि बाइक से जब यह युवक रात को जा रहा था तो 2 लोगों ने इससे चादर चढ़ाने के लिए दरगाह जाने का रास्ता पूछा। इसरे बाद इसने पलट कर सवाल किया कि क्या ये टाइम चादर चढ़ाने का है। इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ और इस युवक को चाकू लग गई। पुलिस हालाँकि इस आरोप की सच्चाई जानने के लिए भी CCTV की जाँच करवा रही है।

4. झारखंड का हजारीबाग जिला, गाय चोरी के आरोप में मंजूर खान की पिटाई

वीडियो 2 मिनट 20 सेकंड का है। एक इंसान घायल है, अस्पताल के बेड पर लेटा हुआ है। वीडियो में घायल आदमी बोल रहा है कि उसे 40-50 आदमियों ने घेर कर मारा। कारण पूछने पर उसने बताया कि जहाँ मारपीट हुई, वहाँ कोई जानवर चोरी की घटना हुई थी, उसी सिलसिले में स्थानीय लोगों ने इसका नाम पूछा और उसके बाद मारा।

जहाँ पीड़ित खुल कर बोल रहा है, हिंदुओं पर साफ-साफ आरोप लगा रहा है, वहाँ का पूरा वीडियो डाला मीर फैजल ने। अच्छी स्ट्रैटजी… बस एक चूक कर दी। आरोप को सत्य मान लिया, ठीक वैसे जैसे खुद को पत्रकार। इस वीडियो का सच बताया हजारीबाग जिले के चुरचू पुलिस स्टेशन के थाना इंचार्ज ने।

सच यह है कि बालीडीह गाँव से मंजूर खान नाम का शख्स गुजर रहा था। इस गाँव में जानवरों की चोरी हुई थी। स्थानीय लोग इसी मामले में बाहरी और अनजान आते-जाते लोगों से पूछताछ कर रहे थे। मंजूर खान से भी पूछताछ की गई। चुरचू पुलिस स्टेशन के थाना इंचार्ज के अनुसार इसने वहाँ बहस की, गाली-गलौच की। इसके बाद दोनों ओर से हाथापाई हुई, मारपीट की गई। पूरे मामले में कहीं भी हिंदू-मुस्लिम का विवाद नहीं हुआ, न ही नाम और मजहब को लेकर मारपीट की गई।

थाना इंचार्ज ने स्पष्ट किया कि मामले को सनसनीखेज बनाने के लिए गलत मीडिया रिपोर्टिंग की गई। मारपीट में शामिल दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है, संगत धाराओं में केस दर्ज कर जाँच की जा रही है।

ऊपर एक वीडियो है, इसमें संबंधित चुरचू थाने का नंबर नीचे दाईं ओर कोने में चिपकाया गया है। यही नंबर हजारीबाग जिले के पुलिस वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। लेकिन पत्रकारिता के नाम पर जब प्रोपेगेंडा करना हो तो कोई मीर फैजल भला फैक्ट चेक करने की जहमत क्यों उठाए?

5. बिहार के किशनगंज में मियाँ को माँ की गाली?

वीडियो सिर्फ 7 सेकंड का है। सड़क पर कुछ लोग बाइक से आ-जा रहे हैं। कुछ भगवा झंडे लहरा रहे हैं। बैकग्राउंड में जय श्रीराम के नारों की गूंज है। कहीं से एक आवाज ऐसी भी आती है – “मियाँ मादर$^@ है।” हालाँकि ऑडियो क्लियर नहीं है। क्लियर यह भी नहीं है कि अगर सच में गाली दी गई मुस्लिमों को तो किसने दी? क्या हिंदुओं ने दी या मुस्लिम कट्टरपंथियों ने ही षड्यंत्र के तहत जानबूझकर ऐसा किया?

इस वीडियो को लेकर ना तो किशनगंज पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराई गई है, ना ही मीडिया में कोई रिपोर्ट छपी। 7 सेकंड के अनजान/अनवेरिफाइड वीडियो को बस पोस्ट कर दिया गया ताकि हिंदुओं को बदनाम किया जा सके। वीडियो को वायरल कर बाकी काम इस्लामी-वामी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंशर ने कर दिया।

6. झारखंड के धनबाद में गौवंश की हत्या, मुस्लिम युवक को पेड़ से बाँधा

धनबाद जिले के भुरकुंडा में यह घटना हुई। 2 वीडियो डाला गया है – 4 मिनट 44 सेकंड का और 5 मिनट 37 सेकंड का। लिखा गया कि भीड़ ने एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट की और पेड़ से बाँध दिया। उस पर गाँव वालों ने आरोप यह लगाया कि उसके परिवार वालों ने रामनवमी पर एक गौवंश (गाय/बैल) की हत्या की।

दोनों वीडियो लंबे हैं। मतलब सुन कर मामले को समझा जा सकता है। सुनने-समझने का काम मीर फैजल ने किया नहीं, उसे करना भी नहीं था। इस वीडियो का सच मार खाए और पेड़ से बंधे शहाबुद्दीन ने खुद बताया है, वो भी पहले ही वीडियो में। ‘रामनवमी पर उग्र हिंदू, हिंसा करते हिंदू’ जैसा इस वीडियो में कुछ भी नहीं है।

शहाबुद्दीन के अनुसार उसके घर में एक बैल बीमार था। रामनवमी के ही दिन उस बैल की हत्या कर दी गई। किसने किया, उसके अब्बा ने क्या निर्णय लिया – शहाबुद्दीन ने सब कुछ बताया। रामनवमी पर गौवंश (गाय/बैल) की हत्या स्थानीय हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ था। जैसे ही यह बात लोगों को पता चली, उन्होंने विरोध किया। इलाके में पहले से चोरी किए जा रहे गौवंशों का आरोप भी लगाया। स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भी विरोध का सामना करना पड़ा।

यह सब कुछ कई मीडिया रिपोर्टों में भी छपा है। दोनों वीडियो में भी स्पष्ट है। लेकिन प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए तथ्य छिपा लिए गए। क्योंकि हिंदू भीड़ को हिंसक दिखाना था… वो भी उन्हीं के पर्व-त्योहार पर। मकसद एकदम साफ है – लाउडस्पीकर पर हर दिन नमाज 5 बार हो, ताजिया का जुलूस शान से निकले, मुहर्रम के जुलूस में खुलेआम तलवारें भाँजी जाए, शब-ए-बारात में हुड़दंगी बाइक वालों से ट्रैफिक अस्त-व्यस्त हो जाए… लेकिन रामनवमी पर मुस्लिम इलाकों का जुमला गढ़ के 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने के षड्यंत्र की ओर एक कदम और बढ़ा जाए।

7. वडोदरा (गुजरात) में हिंसक हिंदू भीड़, मस्जिद पर पथराव

वीडियो 1 मिनट 13 सेकंड का डाला गया। फ्रेम में एक मस्जिद है। कुछ लोग पथराव कर रहे हैं। जो पथराव कर रहे, उनकी ओर भी पत्थर मारे जा रहे। जो आदमी वीडियो शूट कर रहा, वो ऐसी बालकनी में खड़ा है, जिसका अंत जीशान एफ शेख नाम के हाई कोर्ट वकील के बोर्ड/बैनर पर होता है। कौन पत्थर मार रहा, किसकी क्रिया है, किसकी प्रतिक्रिया – कुछ भी क्लियर नहीं। ‘हिंदू भीड़ मस्जिद पर बरसा रही पत्थर’ – यह लेकिन लिख दिया गया।

रामनवमी पर वडोदरा में क्या-क्या हुआ, यह 30-31 मार्च को छप चुका था। इसके लिए 1 मिनट के किसी वीडियो के बजाय मीडिया रिपोर्ट ही देख लेते हैं।

यहाँ के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। जैसे ही शोभा यात्रा इस क्षेत्र की एक मस्जिद के सामने से गुजरी, दोनों पक्षों में विवाद हो गया। थोड़ी ही देर की बहस के बाद मस्जिद के पास से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी शुरू हो गई।

वडोदरा के ही कुम्भारवाड़ा से निकली शोभा यात्रा पर मस्जिद में मौजूद लोगों ने पथराव किया। मस्जिद के गेट पर बने छपरे से पत्थर फेंक कर एक शख्स मस्जिद के अंदर कूद गया। इसके बाद पुलिस मस्जिद में दाखिल हुई। अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस जब तथाकथित ‘मुस्लिम इलाके’ में गई तो मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। ‘पत्थर मारो सालों को’ कह कर इन महिलाओं ने गाली भी दी और अपने आसपास के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काया भी।

8. दरगाह हाजी अब्दुल रेहमान मलंग शाह के परिसर में भगवा झंडा

28 सेकंड के वीडियो में “जय श्रीराम” और “आई भवानी शक्ति दे, मलंग गडाला मुक्ति दे” के नारे लगा रहा है एक युवक। उसके हाथ में भगवा ध्वज भी है। न किसी के लिए गाली, न कोई भड़काऊ बात, न ही किसी तरह की हिंसा। इस वीडियो को डाल कर रामनवमी पर हिंदू हिंसक की बात कैसे कर सकता है कोई?

इस्लामी-वामी इकोसिस्टम हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब की मिसालें देता आया है। मंदिर में रोजे-इफ्तारी की तस्वीरों को डाल कर ‘ये है असल भारत’ जैसी सुनहरी बातें लिखता है। फिर ऐसा क्या है कि दरगाह में भगवा ध्वज के साथ जय श्रीराम का नारा और हिंदुओं का प्रवेश हिंसक की कैटिगरी में आ गया? यहाँ गंगा-जमुनी तहजीब वाली बात लागू नहीं होती क्या? इस्लामी-वामी इकोसिस्टम को तो इसका स्वागत करना चाहिए। हर साल रामनवमी पर हर एक मस्जिद-मदरसा-दरगाह भगवा ध्वज के स्वागत में खोल देना चाहिए। आखिर तभी तो दिखेगा ‘असल भारत’ वाली तस्वीर।

9. मथुरा जामा मस्जिद की बाहरी दीवार पर लहराया भगवा

कुछ अति-उत्साही नौजवान भावनाओं में बह कर सड़क किनारे बनी दुकानों के छज्जों पर चढ़ गए। 2 मिनट 20 सेकंड के वीडियो में यह साफ दिख रहा है। चढ़ कर इन लोगों ने भगवा ध्वज भी लहराया। सब कुछ स्पष्ट दिख रहा है। स्पष्ट लेकिन यह भी दिख रहा है कि इन युवकों ने कोई हिंसक कार्य नहीं किया। जाने-अनजाने इनसे यह गलती जरूर हुई कि दुकानों के छज्जों के बाद ये साथ में बनी मस्जिद के छज्जे पर भी चढ़ गए। तो क्या ये हिंदू उग्रवादी हो गए, जैसा मीर फैजल ने लिखा है? बिल्कुल नहीं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 शरारती युवकों को गिरफ्तार किया, उन्हें जेल भी भेजा गया। मुख्यमंत्री योगी की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास करती है। गलत चाहे रामनवमी पर हो या ईद पर… सुसंगत कार्रवाई की जाती है।

जामा मस्जिद में शरारतपूर्ण कृत्य के मामले में 4 गिरफ्तार, मथुरा पुलिस की प्रेसनोट

‘हिंदू उग्रवादी’ वाला प्रोपेगेंडा यहाँ भी ध्वस्त हो गया। “शरारती तत्वों द्वारा किया गया शरारतपूर्ण कृत्य” – इस वीडियो का सच यही है।

10. वडोदरा (गुजरात) में मुस्लिमों पर पुलिस का अत्याचार, हिंसक हिंदू भीड़: कुल 8 वीडियो

वीडियो नंबर-1: सिर्फ 59 सेकंड का वीडियो डाला मीर फैजल ने लेकिन सुनने-समझने की कोशिश नहीं की… और अपने ही जाल में फँस गया। कैसे? क्योंकि इस वीडियो में पुलिस वालों को गाली देती महिलाएँ हैं। गाली से मन नहीं भरने पर ‘पत्थर मारो सालों को’ कह कर इन महिलाओं ने आसपास के लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काया भी।

वीडियो नंबर-2: कुछ युवक पत्थरबाजी कर रहे हैं। क्यों कर रहे हैं, 51 सेकंड के वीडियो में ना तो क्लियर है न ही मीर फैजल ने बताने की कोशिश की। “रामनवमी के नाम पर यह (पत्थरबाजी, हिंसा) हो रहा है” – लिख कर प्रोपेगेंडा फैला दिया बस। तो आखिर सच क्या है इस वीडियो का?

रामनवमी पर वडोदरा में जो तनाव की स्थिति बनी, उसका सच यह है कि शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी एक मस्जिद के पास की गई। कई वीडियो ऐसे आए, जिनमें क्लियर है कि शोभा यात्रा पर पथराव सिर्फ मस्जिद के आसपास की छतों से ही नहीं, बल्कि मस्जिद से भी की गई।

वीडियो नंबर-3: एक औरत इसमें आरोप लगा रही है कि रोजा खोलते समय ही पुलिस इनके घर में घुस गई, तोड़-फोड़ किया। रोजा खोलने का समय भी नहीं दिया। 1 मिनट 26 सेकंड के आरोप में इमोशन है। पुलिस हालाँकि इमोशन में आकर काम नहीं करती। वह आदेशों का पालन करती है।

जिन-जिन घरों से पत्थरबाजी की गई होगी, पुलिस को जिन-जिन के खिलाफ शिकायत मिली होगी, उन-उन घरों में जाकर जाँच करना सामान्य पुलिस प्रक्रिया है। इस वीडियो के आखिरी में गेट के बाहर खड़ी एक महिला के चेहरे को याद कर लीजिए। इसलिए क्योंकि इसी सेम महिला को 2 वीडियो बाद आप फिर से देखेंगे। गुजरात पुलिस के अनुसार इन्हीं महिलाओं के झुंड ने उनको घेर कर कार्रवाई करने से रोका, गालियाँ दीं और उन पर पत्थरबाजी करने के लिए लोगों को उकसाया।

वीडियो नंबर-4: आसमा बानू नाम की महिला। पुलिस पर आरोप लगा रही है कि वो इफ्तारी के समय दरवाजा तोड़ कर उनके घर में घुसी। आरोप यह भी कि पुलिस टीम में कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी और इसके कपड़े भी फाड़े गए। 1 मिनट 53 सेकंड के वीडियो में आसमा बानू किसी पुलिस वाले का बैज भी दिखा रही है, जो उसने किसी की वर्दी से नोची।

आरोप गंभीर हैं, इसलिए हमने गुजरात पुलिस से बात की। डीसीपी अभय सोनी ने ऑपइंडिया को बताया कि पुलिस को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये वही महिलाएँ हैं, जो पत्थरबाजी में भी शामिल थीं। पुलिस टीम में कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी, इस आरोप को भी उन्होंने सरासर गलत बताया।

डीसीपी ने कहा कि पुलिस ने सिर्फ और सिर्फ नियम के तहत कार्रवाई की है। वीडियो में आसमा बानू जिस पुलिस वाले का बैज दिखा रही है, वो वडोदरा के जॉइंट सीपी मनोज निनामा का है। मतलब पुलिस अगर कार्रवाई करने आए तो उसे घेरो, उस पर पत्थरबाजी करो, उसे गालियाँ दो… बाद में मीडिया के सामने महिला वाला विक्टिम कार्ड खेलो। शाहीन बाग वाली ट्रेनिंग पूरी इंडिया में फैल गई मालूम पड़ती है।

वीडियो नंबर-5, 6, 7, 8: वीडियो नंबर 5 में वो महिलाएँ हैं, जो गुजरात पुलिस के अनुसार पत्थरबाजी में शामिल थीं। वीडियो नंबर 6 पता नहीं क्यों डाला गया है। शायद सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए। किनके ऑटो हैं, क्यों शीशे टूटे हुए हैं, किसने तोड़े हैं… कुछ भी क्लियर नहीं।

वीडियो नंबर 7 में एक महिला गुजराती में आरोप लगा रही है। यह महिला बार-बार अपनी बाईं ओर देखती है, जहाँ से कुछ बोला/सिखाया जा रहा है। मतलब रामनवमी पर हिंदुओं और पुलिस पर आरोप तो लगा रही है लेकिन ट्रेनिंग और रट्टा मारने में कमी रह गई, वीडियो में यह स्पष्ट है।

वीडियो नंबर 8 एकदम ही फालतू है। किसी घर से कुछ आरोपितों/संदिग्धों को पुलिस उठाने आई है। स्वभाविक है कि आरोपित खुद से पुलिस वैन में तो बैठेगा नहीं। ऐसे में पुलिस क्या करेगी? खींच कर, जबरन उठा कर गाड़ी में डालेगी।

वडोदरा से जुड़े इन सभी वीडियो में कहीं से भी हिंसक हिंदू वाला पॉइंट साबित नहीं कर पाया मीर फैजल। उल्टे जिन मुस्लिम महिलाओं की पैरवी करने निकला था, वही पत्थरबाज निकलीं। घेरने चला था हिंदुओं को, उल्टा मस्जिद से और उसके आसपास से पत्थरबाजी की बात सामने आ गई।

11. जम्मू में हिंदू राष्ट्र की माँग

भारत क्या है… हिंदू राष्ट्र। 1 मिनट 32 सेकंड के वीडियो की शुरुआत इसी नारे के साथ होती है। इसके बाद एक महिला रिपोर्टर किसी शख्स का इंटरव्यू लेती है, जिसमें हिंदू राष्ट्र और राम राज्य दोनों की स्थापना की बात कही जाती है।

शांतिपूर्ण ढंग से किसी चीज की माँग करना लोकतांत्रिक भारत में कब से अवैध हो गया? माँग करने से हिंदू हिंसक कैसे हुआ? इस वीडियो को थ्रेड में घुसाने के पीछे एक ही मकसद हो सकता है – रामनवमी हो या छठ, हिंदू अपने घरों में रहो… ना जय श्रीराम का नारा लगाओ, न ही भजन-आरती करो।

12. हावड़ा (पश्चिम बंगाल) में रामनवमी पर हिंसक हिंदुओं ने की आगजनी, तोड़फोड़: 5 वीडियो

52 सेकंड के पहले वीडियो में कुछ लोग आगजनी कर रहे हैं। दूसरे वीडियो में सड़क पर कुछ गाड़ियाँ उल्टी पड़ी हैं। 45 सेकंड के इस वीडियो में बात करने वाले बंगाली के बजाय बिहारी टोन में बोल रहे हैं। तीसरा वीडियो 13 सेकंड का है, कुछ लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं। 17 सेकंड के चौथे वीडियो में आगजनी है। पाँचवाँ वीडियो भी आगजनी का है, 19 सेकंड का।

5 वीडियो डाल कर भी मीर फैजल यह साबित नहीं कर पाया कि आखिर हावड़ा में पत्थरबाजी हुई क्यों? किसने की शुरुआत? रामनवमी की शोभा यात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर हमला किसने किया? सिर्फ एक वीडियो से सब क्लियर हो जाएगा। और यह वीडियो 30 मार्च का है जबकि हिंदुओं को हिंसक ठहराने वाला पाँच षड्यंत्री वीडियो 31 मार्च को ट्वीट किया गया। 30 मार्च को हावड़ा में हुई हिंसा पर हमने रिपोर्ट भी की थी।

स्पष्ट है कि पत्रकार के नाम पर कलंक है मीर फैजल। सिंपल फैक्ट को भी क्रॉस चेक करने की क्षमता नहीं है इसमें। क्या खाक पत्रकारिता करेगा यह… हाँ, प्रोपेगेंडा के लिए परफेक्ट जीव है यह।

13. हिंदू राष्ट्र का संकल्प, टी राजा सिंह और मुस्लिमों को धमकी: 2 वीडियो

भला हो कि इंडिया में मीर फैजल जैसे लोगों की चलती नहीं है वरना ये लोग सीधे-साधे संकल्प “1 जनवरी से मैं पढ़ाई करूँगा” लेने पर भी पाबंदी लगा देंगे।

यह इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि 45 सेकंड के पहले वीडियो में जो-जो संकल्प लिए गए, वो हैं – गौहत्या नहीं होने दूँगा, अपना जीवन हिंदू राष्ट्र के लिए समर्पित करता हूँ, जाति में नहीं बटूँगा, राजनीति में नहीं बटूँगा, जब तक जीवित रहूँगा… एक ही संकल्प होगा हिंदू राष्ट्र।

इन सारी बातों या संकल्पों में हिंसा कहाँ है, कोई बताए। वीडियो में टी राजा सिंह या उनके समर्थकों ने हिंसा की कोई बात की, ऐसा दिखा भी नहीं।

दूसरे वीडियो में टी राजा सिंह पर आरोप लगाते हुए लिखा गया कि वो मुस्लिमों के खिलाफ बोल रहे हैं। 1 मिनट 56 सेकंड के वीडियो को जरा सुनिए।

“ये तो झाँकी है, अभी पूरी पिक्चर बाकी है। आज रामभक्तों का मेला नहीं, रेला निकलने वाला है रेला। और इस ताकत को कोई रोक नहीं सकेगा। हमसे टकराओगे तो पूरा फट जाओगे। बेटा आधे कटे हो, पूरे कट जाओगे। जाग उठा अब हिंदू वीर, न जाने क्या होगा… हिंदू से जो टकराएगा, हाल उसका बुरा होगा।”

अपने मन से की-बोर्ड ठोकते हुए कुछ भी लिखना हो तो आदमी मुस्लिम, धमकी, आधा कटा मतलब खतना आदि-इत्यादि लिख ही सकता है, लिख भी दिया। पत्रकारिता लेकिन तथ्य माँगती है। और इस वीडियो का सच यह है कि टी राजा सिंह ने ऐसा एक भी शब्द नहीं बोला है, जो मुस्लिमों की ओर इशारा कर रहा हो।

14. मुंबई में मस्जिद के आगे भड़काऊ नारे

26 सेकंड के वीडियो में ‘जय श्रीराम’ के नारों के अलावा कुछ भी नहीं। जबकि लिखा क्या गया – मुंबई के मलाड में मस्जिद के सामने रुकी हिंदू भीड़, लगाए भड़काऊ नारे।

सवाल यह कि मस्जिद के सामने अगर कोई सड़क है तो क्या उसकी रजिस्ट्री करवा ली है कट्टर इस्लामियों ने? क्यों नहीं गुजर सकते हैं वहाँ से हिंदू? जुम्मे की नमाज किन-किन सड़कों पर पढ़ते हो, कभी पूछा है खुद से? और दूसरा सवाल – ‘जय श्रीराम’ का नारा संविधान की किस धारा के तहत भड़काऊ घोषित किया गया?

इस वीडियो को ट्वीट करने के पीछे एक ही मकसद है – मुस्लिम एरिया की इतनी चर्चा करो कि कम से कम ममता बनर्जी के राज्य में इसे लेकर एकाध बिल तो पास कर ही दिया जाए।

15. श्रीगंगानगर (राजस्थान) की मस्जिद पर फहराया भगवा झंडा

इस वीडियो को मस्जिद के साथ जोड़ कर मीर फैजल ने फेक न्यूज फैलाई। जब राजस्थान की गंगानगर पुलिस ने फेक न्यूज फैलाने वाले 2 लोगों की गिरफ्तारी वाली सूचना दी तो चुपके से डिलीट कर दिया। 24 थ्रेड के ट्वीट में यह 21वाँ थ्रेड था। सबसे ऊपर में क्या था इस थ्रेड के वीडियो में और राजस्थान पुलिस ने क्या दिया जवाब – उसे आप देख सकते हैं।

16. खरगोन (मध्य प्रदेश) में हजरत काले खान की दरगाह पर फहराया भगवा झंडा

मथुरा जामा मस्जिद मामले की तरह यहाँ भी एक अति-उत्साही युवक ने गलत हरकत कर दी। हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने इसको लेकर खेद भी जताया। स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने भी तुरंत एक्शन लिया। खरगोन सिटी SHO के अनुसार FIR दर्ज करके एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

मध्य प्रदेश की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास करती है। गलत चाहे रामनवमी पर हो या ईद पर… सुसंगत कार्रवाई की जाती है।

17. नालंदा (बिहार) में मस्जिद और कब्रिस्तान में लगाई आग: 2 फोटो, 2 वीडियो

पहला वीडियो 19 सेकंड का है। बैकग्राउंड में कोई बोल रहा है कि मियाँ लोग का सब दुकान जला दिया। कौन बोल रहा है, पता नहीं। मीर फैजल ने लेकिन मान लिया कि कोई हिंदू ही बोल रहा है। दूसरा वीडियो 39 सेकंड का है, इसमें एक भीड़ दिखाई देती है। भीड़ में हिंदू हैं या मुस्लिम, पहचानना मुश्किल। 2 फोटो भी है, दोनों अगजनी की। इसमें भी क्लियर नहीं कि आखिर आग किसने लगाई।

बिहार पुलिस और नालंदा के डीएम शशांक शुभंकर ने मस्जिद में आग और रामनवमी पर हिंसक हिंदू वाली थ्योरी को लेकर दो टूक जवाब दिया है। मस्जिद में आग लगाए जाने की घटना को डीएम शशांक शुभंकर ने नकार दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी मस्जिद में आग लगाए जाने की सूचना नहीं है।

अफवाह फैलाने वालों को बिहार पुलिस की चेतावनी

रामनवमी पर अगर हिंदू ही हिंसक होते तो बिहारशरीफ में शोभायात्रा पर पथराव किसने किया? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हमले के कारण शोभायात्रा में शामिल 6 युवक घायल हो गए।

मीर फैजल सिर्फ प्यादा, इस्लामी-वामी इकोसिस्टम है जड़

रामनवमी तो बस एक अवसर था। निशाने पर हर दिन हिंदू ही होंगे, यह तय है। षड्यंत्र के तहत हिंदुओं को इतनी हीन भावना से ग्रसित कर दिया जाएगा कि अंततः वो अपने पर्व-त्योहार पर घरों में सिमटने लगेंगे। हिंदू ही पीड़ित होंगे और इनको ही हिंसक बताने का खेल शुरू कर दिया गया है – सोशल मीडिया पर भी, मंच से ‘मुस्लिम इलाके’ की बात कर राजनीति में भी। यही कारण है कि शुरुआत में ही कट्टर मुस्लिम सिपाहियों को ‘प्यादा’ शब्द से संबोधित किया गया। क्योंकि इस खेल को खेला जा रहा इस्लामी-वामी इकोसिस्टम के द्वारा।

मीर फैजल जैसे सिपाहियों को खाद-पानी देकर तैयार करने का काम करता है गैंग लीडर मोहम्मद जुबैर। हल्दवानी में झुग्गी-झोपड़ी हटाने वाले मामले में जुबैर ने ग्राउंड रिपोर्टिंग (जोकि एकतरफा थी, फर्जी थी) के लिए इसी फैजल की पीठ थपथपाई थी। हास्यास्पद यह कि खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाला जुबैर अपने प्यादों के शेयर किए फर्जी खबरों की फैक्ट-चेकिंग नहीं करता है। जब ऐसे सिपाही तैयार हो जाते हैं, तब इस्लामी-वामी इकोसिस्टम इन्हें गोद में बिठाता है।

इसको डायरेक्ट उदाहरण से समझिए। मीर फैजल के थ्रेड को 3900 से अधिक लोगों ने रिट्वीट किया। यह संभव हुआ क्योंकि कुछ बड़े नामों ने इसे पहले रिट्वीट किया। इन नामों में बॉलीवुड हीरो से लेकर रेडियो जॉकी, बड़े पत्रकार से लेकर प्रोफेसर, नेता से लेकर राजनीतिक पार्टी और नामचीन विदेशी लोग भी शामिल हैं। आप इनमें से कुछ लोगों के नाम और काम की लिस्ट देखिए, मामला एकदम क्लियर हो जाएगा।

  • RJ सायमा (रेडियो जॉकी)
  • सुशांत सिंह (बॉलीवुड हीरो)
  • करुणा नंदी (सुप्रीम कोर्ट की वकील)
  • जफरुल इस्लाम खान (दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष)
  • AIMIM बिहार
  • मुजमिल जलील (इंडियन एक्सप्रेस के डेप्यूटी एडिटर)
  • प्रोफेसर त्रिशा गुप्ता (जिंदल स्कूल ऑफ जर्नलिजम ऐंड कॉम्युनिकेशन)
  • इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल
  • सेहर शिनवारी (पाकिस्तानी हिरोइन)

ऐसे लोगों की लिस्ट बहुत लंबी है और पहुँच उससे भी खतरनाक। क्या बॉलीवुड, क्या सुप्रीम कोर्ट, क्या नेता और पार्टी… पूरे सिस्टम में ये घुसे हुए हैं। हिंदुओं को अपना वजूद बचाने के लिए इसी सिस्टम से लड़ना होगा। जय श्रीराम का उद्घोष तेज और तेज होता जाए, इसके लिए हिंदू को बिना बँटे, बिना टूटे… लड़ना होगा, यही एकमात्र रास्ता है।

इंस्टाग्राम रील से फँसाती, फिर न्यूड फोटो भेज ब्लैकमेल करती: पैसे नहीं देने पर गैंगस्टरों से धमकियाँ, काॅन्ग्रेस नेता मददगार

पंजाब की लुधियाना पुलिस ने जसनीत कौर उर्फ राजवीर नाम की एक इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर को गिरफ्तार किया है। वह अर्धनग्न हो इंस्टाग्राम रील बनाती थी। इसके जरिए लोगों को फँसाकर उनसे बातचीत शुरू करती। फिर उनको न्यूड फोटो भेज ब्लैकमेल करने लगती थी। पैसे नहीं देने पर गैंगस्टरों से धमकियाँ भिजवाती थी। रिपोर्टों के अनुसार काॅन्ग्रेस नेता लकी संधू इस ‘ब्लैकमेलर हसीना’ का मददगार था। उसकी भी तलाश की जा रही है।

जसनीत मूल तौर रूप से संगरूर की रहने वाली है। गुरबीर नामक एक कारोबारी ने उसके खिलाफ शिकायत की थी। गुरबीर के अनुसार वह सोशल मीडिया के जरिए जसनीत के संपर्क में आया था। वह उससे 1 करोड़ रुपए माँग रही थी। पैसों की उगाही के लिए किसी गैंगस्टर से भी उसे कॉल करवाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला थाना क्षेत्र मॉडल टाउन का है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जसनीत को गिरफ्तार किया। पूछताछ में कॉन्ग्रेस नेता लकी संधू उसका सहयोगी निकला। साहनेवाल निवासी लकी ने ही गुरबीर को गैंगस्टरों से धमकी दिलवाई थी। पुलिस अब लकी के भी आपराधिक नेटवर्क की तलाश कर रही है। वहीं जसनीत पर साल 2022 में मोहाली में इसी प्रकार की उगाही के प्रयास का एक और केस दर्ज होने की जानकारी मिली है।

पुलिस की जाँच में जसनीत की पूरी कुंडली सामने आ रही है। अपने पिता की मौत के बाद जसनीत ने पैसे कमाने के लिए इंस्टाग्राम पर एडल्ट रील डालनी शुरू की थी। इससे लोगों को फँसाकर उगाही का काम शुरू कर दिया। उसके टारगेट पर खासतौर से व्यापारी हुआ करते थे। वह उन्हें बातों में फँसा कर अपनी न्यूड फोटो भेजती थी और फिर बदनाम करने की धमकी देकर उनसे वसूली करती थी।

इंस्टाग्राम पर जसनीत के लाखो फॉलोवर्स हैं। उसने अश्लील वीडियो डालने के लिए 3 अलग-अलग एकाउंट भी बना रखे हैं। जसनीत कौर के पास पुलिस को 75 लाख रुपए कीमत की BMW गाड़ी भी मिली है। इस रैकेट में कॉन्ग्रेस नेता लकी संधू भी शामिल था। जब कोई व्यक्ति जसनीत से नहीं डरता तो लकी उसे गैंगस्टरों से धमकी दिलावाया करता था। पुलिस रैकेट से जुड़े बाकी लोगों की भी तलाश कर रही है।

‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में भारतीय छात्र को अयोग्य घोषित कराने के पीछे राहुल गाँधी की करीबी प्रोफेसर! व्हाट्सएप्प चैट में दिखी हिन्दू घृणा

ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में हिंदूफोबिया का शिकार हुई रश्मि सामंत के बाद अब लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में करण कटारिया के साथ नस्लीय भेदभाव की घटना सामने आई है। इस भेदभाव के कारण उन्हें विश्वविद्यालय में स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में डिसक्वालिफाई करा दिया गया। इसके पीछे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की करीबी मुकुलिका बनर्जी का नाम सामने आ रहा है।

फर्स्टपोस्ट की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू दक्षिणपंथी संगठन आरएसएस के साथ संबंध होने के कारण मुकुलिका बनर्जी करण कटारिया के खिलाफ घृणा अभियान चला रही थीं। इस कारण उन्हें स्टूडेंट यूनियन के चुनाव के अयोग्य कर दिया गया। बनर्जी के इस हस्तक्षेप को पहले ही LSE प्रशासन के संज्ञान में लाया जा चुका है।

कौन हैं मुकुलिका बनर्जी?

मुकुलिका बनर्जी लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में मानव विज्ञान की प्रोफेसर हैं। वह यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया सेंटर की निदेशक भी हैं। मुकुलिका बनर्जी लंबे समय से पश्चिमी देशों की मीडिया में ‘मुस्लिम अंडर अटैक इन इंडिया’ करती रही है।

फर्स्टपोस्ट ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि बनर्जी लंदन में अकादमिक और नीतिगत हलकों में बहुत प्रभावशाली महिला हैं। वह वाम-उदारवादी और हिंदू-विरोधी प्रोपेगेंडा का प्रचार करती हैं। उन्हें आरएसएस, हिंदुत्व और नरेंद्र मोदी-विरोधी के रूप में जाना जाता है। जनवरी 2020 में उन्होंने ‘संडे टाइम्स’ में एक लेख लिखा, जिसका शीर्षक था, ‘मोदी मुसलमानों के प्रति अपनी नफरत खुलेआम दिखाते हैं और भारत के संविधान का मजाक बनाते हैं’।

मुकुलिका राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भी शामिल हुई थीं। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी की लंदन में मेजबानी भी की थी। जब यात्रा समाप्त हुई तो वह राहुल गाँधी के लंदन दौरे के दौरान कई कार्यक्रमों की व्यवस्था करने में मदद की थीं। उन्होंने राहुल गाँधी की हाउस ऑफ कॉमन्स में कार्यक्रम आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यहीं पर राहुल गाँधी ने ‘भारतीय लोकतंत्र खतरे में’ भाषण दिया था, इसे ‘बचाने’ के लिए विदेशी मदद माँगी थी। इससे पहले भी कई मौकों पर मुकुलिका बनर्जी ने राहुल गाँधी को LSE साउथ एशिया सेंटर को संबोधित करने के लिए अपने कार्यालय का इस्तेमाल किया, जिसकी वह निदेशक हैं।

मुकुलिका ने कैसे फैलाई प्रोपेगेंडा

मुकुलिका का एक ह्वाट्सएप चैट भी सामने आया है, जिसके माध्यम से वह आरएसएस के साथ संबंध रखने के कारण करण कटारिया को वह बदनाम करने की हद तक आगे बढ़ जाती हैं। हालाँकि, एक प्रोफेसर के रूप में उनका काम शिक्षा देना और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना होता है।

चैट का स्क्रीनशॉट (साभार: फर्स्टपोस्ट)

इतना ही नहीं, फर्स्टपोस्ट को एक कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिसमें LSE के छात्रों में से एक को यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि मुकुलिका बनर्जी ने उसे यह बताने के लिए बुलाया था कि करण के आरएसएस और हिंदू संगठनों के साथ संबंध थे।

फोन कॉल पर छात्र आश्चर्य करता है कि क्या LSE करण को अयोग्य घोषित कर देगा। छात्र यह भी कहता है कि अयोग्यता ही करण को चुनावी दौड़ से बाहर करने का एकमात्र तरीका है, क्योंकि अगर वह जीत जाता है तो LSE प्रशासन उसे बाहर करने के लिए कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि छात्र संघ स्वायत्त है।

ये वही कैंपेन थे, जो करण कटारिया को बाहर करने के लिए चलाए गए थे.

करण कटारिया के खिलाफ प्रोपेगेंडा में क्या गया था-

इसमें कहा गया था- ‼️ LSE के विद्यार्थियों ध्यान दो – फ़ासीवादी संगठनों को SU से बाहर रखें ‼️

अर्जेंट अपील: हमें पता चला है कि एक व्यक्ति, जो भारत में एक अति-दक्षिणपंथी, क्वेरोफोबिक और इस्लामोफोबिक संगठन का संभावित सदस्य है, LSESU चुनाव में खड़ा है। वोटिंग आज शाम 4 बजे बंद हो जाएगी! LSESU के महासचिव पद के उम्मीदवार करण कटारिया के संबंध फासीवादी संगठन आरएसएस से हैं। इस संगठन के समानांतर यूके में नेशनल फ्रंट और यूएसए में कू क्लक्स क्लान है। https://www.theguardian.com/world/2020/feb/20/hindu-supremacists-nationalismtearing-india-apart-modi-bjp-rss-jnu-attacks

करण की किताब ‘भारत’ इंडस स्क्रॉल प्रेस द्वारा प्रकाशित है, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणित सामग्री प्रकाशित करती है। यह पुस्तक RSS नेता जे. नंदकुमार (https://indusscrolls.com/rss-is-thebiggest-open-university-in-the-world-j-nandakumar) द्वारा लॉन्च की गई थी। एलएसई के सूत्र, जो बैकलैश के डर से गुमनाम रहना चाहते हैं, ने आरएसएस के भीतर उनकी सदस्यता का उल्लेख किया है।

हमारा मानना है कि इसका खुलासा न करना LSESU के जवाबदेही और पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। आरएसएस और उसकी राजनीतिक शाखा बीजेपी ने भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं और श्री कटारिया का BAME और Queer छात्रों का समर्थन करने का दावा मूवमेंट को देखते हुए संदिग्ध है।

हालाँकि, जब फर्स्ट पोस्ट ने इस संबंध में मुकुलिका बनर्जी से संपर्क किया तो उन्होंने इस अभियान में अपनी किसी भी संलिप्तता से इनकार कर दिया। उन्होंने आरएसएस सदस्यों के साथ करण कटारिया की किसी भी तस्वीर को प्रसारित करने या किसी अन्य तरह के मैसेज करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।

क्या कहा था करण ने?

LSE में हुई घटना का जिक्र करण ने किया था। करण ने कहा था, “दुर्भाग्य से कुछ लोग भारतीय-हिंदू को LSESU का नेतृत्व करता देखने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने मेरे चरित्र और मुझे बदनाम करना शुरू कर दिया। साफ दिख रहा था कि वो हमारी उस संस्कृति के खिलाफ हैं जिसके जहन में रखकर हमारा पालन हुआ।”

कटारिया कहते हैं कि छात्रों का समर्थन पाने के बावजूद उन्हें LSE स्टूडेंट यूनियन के जनरल सेक्रेट्री चुनाव से डिसक्वालिफाई कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा था, “मुझ पर होमोफोबिक, इस्लामोफोबिक, क्विरफोबिक (Queerphobic) होने का इल्जाम लगा और मुझे हिंदू राष्ट्रवादी कहा गया। मेरे खिलाफ कई शिकायतें हुईं। कई झूठे आरोप लगने के बाद मेरी छवि और मेरे चरित्र पर कीचड़ उछाला गया जबकि मैंने तो हमेशा समाज में सकारात्मक बदलाव और सामाजिक सद्भाव रखने की पैरवी की है।”

रश्मि सामंत ने राहुल-मुकुलिका की साझा की तस्वीर

रश्मि सामंत ने एक ट्वीट करके मुकुलिका और राहुल गाँधी की तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा, “मुकुलिका बनर्जी, जो राहुल गाँधी की करीबी सहयोगी रही हैं, हो सकता है कि हिंदू दक्षिणपंथी, विशेष रूप से आरएसएस के साथ संबंध होने के कारण एलएसई में करण कटारिया के खिलाफ इस नफरत अभियान को चला रही हों।”

बता दें कि मार्च 2021 में रश्मि सामंत को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए बाध्य कर दिया गया था। हिंदू पहचान और उपनिवेशवाद विरोधी विचारों को लेकर उन्हें लगातार ऑनलाइन निशाना बनाया जा रहा था। यह मामला भारतीय संसद में भी उठा था।

कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामंत को निशाना बनाते हुए उन्हें नस्ली और असंवेदनशील बताया गया। इन पोस्टों के जरिए उन्हें नस्लवादी, यहूदी विरोधी, इस्लामोफोबिक, ट्रांसफ़ोबिक बताने की कोशिश की गई। यहाँ तक कि उनके हिंदू होने को लेकर भी निशाना साधा गया। सामंत को 11 फरवरी 2021 को प्रतिष्ठित पद के लिए चुना गया था, लेकिन ऑनलाइन आलोचना और दुर्व्यवहार का सामना करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

दरअसल रश्मि सामंत ने 2017 में जर्मनी में बर्लिन होलोकास्ट मेमोरियल की यात्रा के दौरान एक पोस्ट में कुछ तस्‍वीरें पोस्‍ट की थीं, जिसमें वह मलेशिया के बुद्ध मंदिर के बाहर खड़ी हैं। इसके कैप्‍शन में उन्‍होंने लिखा था- चिंग चांग। ऑक्सफोर्ड द्वारा प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक स्टूडेंट अखबार ‘चेरवेल’ द्वारा इस खबर को प्रकाशित करने के बाद विवाद गहरा गया था।

‘पानी माँगी तो दी गाली, फोन छीन लिया, फायरिंग में भाई की हो गई थी मौत, पोस्टमार्टम के बहाने देर रात तक घुमाती रही बिहार पुलिस’: वीडियो में हिन्दू पीड़ितों के आरोप

बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में रामनवमी के अवसर पर निकाली गई शोभा यात्रा पर पथराव किया गया था। उसके बाद हिंसा की घटनाएँ शुरू हो गईं। 2 पक्षों के बीच गोलियाँ भी चलीं। इसी दौरान 17 साल का एक नाबालिग गुलशन कुमार दंगाइयों की गोली का शिकार हो गया। गुलशन के भाई विकास कुमार ने द लल्लनटॉप के साथ इंटरव्यू में जानकारी दी कि भाई की मौत के बाद पोस्टमार्टम के बहाने किस तरह बिहार पुलिस ने उसे भूखे-प्यासे देर रात तक गाड़ी में बैठाकर घुमाती रही।

मृतक के भाई विकास ने लल्लनटॉप के रिपोर्टर रणवीर सिंह से बातचीत में बताया कि दोनों भाई राशन और दवाई लेने निकले थे। दोनों जब घर की तरफ लौट रहे थे तो दरगाह के पास से फायरिंग हुई। दोनों भाई बदहवास हो कर भागने लगे। इसी बीच गुलशन को गोली लग गई और वह वहीं गिर गया। गोलियों की आवाज सुनकर आस पास के लोग घटनास्थल के पास पहुँचे। वहाँ उन्होंने गुलशन को उठाया और अस्पताल ले गए।

विकास के अनुसार, बिहार पुलिस ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। गुलशन के पोस्टमार्टम के बहाने बिहार पुलिस उसे देर रात तक भूखे-प्यासे घुमाती रही। आरोप है कि बिहारशरीफ ले जाने की जगह पुलिस दूसरे स्थानों के चक्कर लगाती रही। इस बीच जब विकास ने पुलिस वालों से पूछा कि उसे कहाँ ले जाया जा रहा है तो पुलिस वालों ने गाली गलौज की। कथित तौर पर पुलिस की करतूत को विकास ने अपने कैमरे पर कैद करने की कोशिश की तो उससे फोन छीन लिया गया।

विकास को अपने घर वालों से संपर्क नहीं करने दिया गया। देर रात पुलिस की टीम उन्हें पटना लेकर पहुँची। आरोप है कि तब तक विकास को भूखा और प्यासा रखा गया। विकास ने जब पीने के लिए पानी माँगी तो उसे गाली दी गई। मृतक के भाई ने कहा कि इस बीच उन्हें पेशाब करने भी नहीं दिया गया। उन्हें गाड़ी में बंद कर के रखा गया। यह पूरी बात चीत वीडियो में 5.00 मिनट से 10.00 मिनट के बीच सुनी जा सकती है।

परिजनों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इलाके की महिलाएँ भी सरकार और पुलिस के रवैये से खुश नहीं हैं। परिवार वालों की माँग है कि उनका एक सहारा नहीं रहा। ऐसे में घर चलाना मुश्किल होगा। बेटे को रोजगार दिया जाए। दूसरी तरफ बिहारशरीफ की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनके घर के पुरुष गायब हैं।

‘अवॉर्ड विनिंग फिल्म दी जो हिट भी हुई, फिर भी 14 महीने घर बैठा रहा’: विवेक ओबेरॉय ने प्रियंका चोपड़ा का किया समर्थन, बताया क्या है बॉलीवुड की डार्क साइड

अमेरिका में बस चुकीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में बताया था कि कैसे बॉलीवुड में उनके खिलाफ अभियान चलाया गया था। अब अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने इसी बहाने अपने 20 साल पुराने प्रेस कॉन्फ्रेंस को याद किया है। उन्होंने कहा कि वो खुशकिस्मत हैं कि अब उस चीज से उबर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड ने उनकी अग्निपरीक्षा ली जिसमें वो पास हो गए, लेकिन हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं होता। उन्होंने बताया कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद वो कई गैर-ज़रूरी चीजों से गुजरे।

उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ जम कर लॉबिंग हुई थी और उन्हें दबाने के लिए कई कहानियाँ चलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि जैसा प्रियंका चोपड़ा ने बताया, कुछ उसी तरह उनके साथ भी हुआ था। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री का हॉलमार्क ही यही है। उन्होंने इसे इसका सबसे डार्क साइड करार दिया। विवेक ओबेरॉय ने कहा कि वो इससे पीड़ित रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये इतना परेशान करने वाला है कि इससे व्यक्ति थक जाता है, कमजोर हो जाता है।

उन्होंने याद किया कि ‘शूटआउट एट लाख़ोंड़वाला’ (2007) एक अवॉर्ड विनिंग फिल्म थी जो थिएटर में भी खूब चली, लेकिन इसके बावजूद वो 14 महीने घर बैठे रहे। उन्होंने बताया कि वो उस वक्त कुछ अच्छा करना चाहते थे, जो उन्हें इस बुरी अवधि से बाहर ले जाए। विवेक ओबेरॉय ने बताया कि इसके बाद उन्होंने कारोबार और समाजसेवा को अपना समय देना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि नई जगह बनाने की दिशा में प्रियंका चोपड़ा का ताज़ा बयान प्रेरक है।

विवेक ओबेरॉय ने कहा कि प्रियंका चोपड़ा बाहर निकलीं और लीक से हट कर उन्होंने कुछ अलग करने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने कहा कि इसका परिणाम ये हुआ कि प्रियंका चोपड़ा की व्यक्तिगत और प्रोफेशनल ज़िन्दगी में चमत्कार हुए। इससे पहले फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने दावा किया था कि साल 2012 में प्रियंका चोपड़ा ने लगातार दो हिट फिल्में की थीं, इसके बाद बॉलीवुड में उन्हें किनारे लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था।

अंबानी की पार्टी में सलमान खान बैकग्राउंड डांसर, वीडियो हुआ वायरल तो बोले लोग – पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता है

मुंबई में शुक्रवार (31 मार्च 2023) को नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। सोशल मीडिया पर इस प्रोग्राम की कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं, जिनमें बॉलीवुड सितारों ने प्रस्तुति दी थी। इन सब के बीच बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का भी एक वीडियो वायरल है। इस वीडियो में सलमान उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी के पीछे बैकग्राउंड डांसर की भूमिका में नजर आ रहे हैं। हालाँकि, ये वीडियो अभी का नहीं है और पुराना है, जो फिर से वायरल हो रहा।

सलमान खान के इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग कह रहे हैं, “पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता।” वायरल वीडियो मुकेश अंबानी की बेटी ईशा के संगीत उत्सव का है। पाँच साल पुराने वीडियो में सलमान खान अनंत अंबानी के बैकग्राउंड डांसर बने हुए हैं। अनंत और सलमान के अलावा राधिका मर्चेंट और अन्य डांसर भी स्टेज पर मौजूद हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अनंत आगे हैं और सलमान उनके पीछे डांसिंग स्टेप्स फॉलो कर रहे हैं। सभी शाहरुख खान की फिल्म के गाने पर थिरक रहे हैं।

सोशल मीडिया पर अचानक वायरल होने के बाद नेटिजन्स भी इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सलमान खान के फैन्स उन्हें बैकग्राउंड में डांस करता देख हैरान हैं।

अंकुर बरिया नाम के एक यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “पावर ऑफ मनी (पैसे की ताकत) सल्लू भाईजान बैकग्राउंड डांसर।”

डॉ.निमो यादव नाम के यूजर ने लिखा, “मैं सलमान खान का फैन नहीं हूँ फिर भी मुझे यह देखकर बुरा लग रहा है। अंबानी उनके साथ नौकरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं।” इस पर ऋषभ नाम के यूजर ने लिखा, “पैसा फेक तमाशा देख… तू पैसा देगा तो तेरे पीछे खड़ा होकर भी नाचेगा।”

इंस्टाग्राम पर भी कई लोगों ने वीडियो शेयर किया है। एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए उस पर लिखा कि इतना अमीर बनो कि सलमान भाई खुद शाहरुख भाई के गाने पर आपकी शादी में डांस करने आएँ। इस पर एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “भाई पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता।”

वायरल पोस्ट का स्क्रीन शॉट

वीडियो में सलमान और अनंत के अलावा और भी डांसर्स स्टेज पर नजर आ रहे हैं। सभी ‘कोई मिल गया’ गाने पर नाच रहे हैं। पहले अनंत गिटार के साथ नाच रहे होते हैं। उस वक्त सलमान सभी लोगों के साथ पीछे दिख रहे हैं। फिर वो घुटनो पर बैठकर डांस करने लगते हैं। वीडियो के आखिर में अनंत सलमान के पास जाते हुए नजर आ रहे हैं। फिर सभी स्टेज से चले जाते हैं।