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‘डैडी से शादी करना…सबसे बेस्ट डिसीजन’: टिकटॉकर महिला ने रचाई अपने सौतेले पिता से शादी, बोली- माँ को कोई ऐतराज नहीं

अमेरिका में एक महिला ने अपने सौतेले पिता से शादी करके ‘दुल्हन के पिता’ को नया अर्थ दे दिया है। इस जोड़ी ने शादी के अपने ‘फर्स्ट किस’ को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। अपने पिता से शादी करने वाली महिला ने इस शादी को अपना सबसे अहम फैसला बताया है। वहीं, इसका वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लोग भड़क गए हैं।

मामला अमेरिका के फ्लोरिडा का है। क्रिस्टी नाम की टिक टॉकर महिला ने अपनी शादी का एक वीडियो सोशल मीडिया टिक टॉक (Tik Tok) पर शेयर किया और लिखा, ‘अपने सौतेले पिता से शादी करना मेरा अब तक सबसे शानदार फैसला है।’

फ्लोरिडा के टाम्पा की रहने वाली क्रिस्टी दो बच्चों की माँ भी हैं। अपने शेयर किए गए वीडियो में क्रिस्टी पति बने अपने सौतेले पिता को ऑन-स्क्रीन चुम्मा ले रही हैं। क्रिस्टी ने वीडियो के कैप्शन में #MarryYourMomsEx हैशटैग भी लगाया है। इस वीडियो को लगभग 2 करोड़ लोग देख चुके हैं।

इस तरह की शादी और हैशटैग से सोशल मीडिया के लोग हैरान रह गए। वे इस वीडियो पर तरह-तरह कमेंट करने लगे। एक महिला ने कहा, “मुझे नहीं लगता है कि मैं कभी इस तरह की स्थिति में आऊँगी। यह बेहद गंदा है।” एक अन्य यूजर ने महिला के इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए पूछा, “दुनिया में 7 अरब लोग हैं। ऐसा क्यों किया?”

एक अन्य यूजर में मजाकिया अंदाज में कहा, “वो अब डैड से डैडी बन गया है।” कभी यूजर ने क्रिस्टी से उनकी माँ के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछा। एक ने लिखा, “मुझे ये सोचकर आश्चर्य हो रहा है कि आपकी माँ कैसी होंगी?”

इन सब सवालों के जवाब में क्रिस्टी ने कहा कि उनकी इस शादी से उनकी माँ को कोई ऐतराज नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनकी माँ शादी के जश्न में शामिल हुईं। वीडियो में दिख रही महिला उनकी माँ हैं और वह शादी की तस्वीरें ले रही हैं। इस शादी से उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

क्रिस्टी ने कहा, “क्या मेरे पिता ने मुझे groom किया? नहीं। क्या मेरे पिता ने मुझे पाला-पोसा? नहीं। क्या मैं नाबालिग थी जब मैं उनसे मिली? नहीं।” क्रिस्टी ने आगे कहा कि वह और उसकी माँ की अभी भी बातचीत होती है। उसने बताया कि उसकी माँ और उसके सौतेले पिता की शादी से कोई कोई बच्चा नहीं है।

‘वेश्या के बेटे’ से लेकर ‘महिलाओं के जननांग’ तक, तमिलनाडु में बिहारियों को दी जा रही गाली: पानी-पूड़ी और पान मसाला वाला तंज, PM मोदी को अपशब्द

तमिलनाडु में बिहारी लोगों के प्रति नस्लवाद का माहौल देखने को मिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में कई बिहारी मजदूरों की हत्याएँ हुई हैं और कइयों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए एक टीम तमिलनाडु भेजने का निर्णय लिया है। इस बीच सामने आया है कि कैसे तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के लिए नस्लवादी टिप्पणियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मीडिया संस्थान ‘The Commune’ ने एक खबर में बताया है कि बिहार के प्रवासियों के लिए तमिलनाडु में ‘पानी-पूड़ी’ और ‘पान मसाला’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर के नस्लवाद का परिचय दिया जा रहा है। बता दें कि जब तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की हत्याओं का मामला पूरे देश में गूँज रहा था, तब बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की 70वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे।

तमिलनाडु में भाषा के प्रति कट्टरता कई बार देखी जा चुकी है। क्षेत्रवाद के नाम पर भी हिंसा की घटनाएँ हुई हैं। बता दें कि द्रविड़ राजनीति ने राज्य के एक बड़े हिस्से में कट्टरता को जन्म दिया, जिस कारण ब्राह्मण विरोधी घृणा भी फैली। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक तमिल व्यक्ति को ट्रेन में एक बिहारी को गाली देते हुए देखा जा सकता है।

इसमें पहले वो पूछता है कि तुम हिंदी हो या तमिल? फिर पीछे से एक व्यक्ति कहता है कि हम सब हिंदी हैं। इसके बाद तमिल व्यक्ति कहता है, “मैं तुम सबको मार डालूँगा। तुम लोग यहाँ आते ही क्यों हो? मोदी के मुँह में अपना $%# घुसेड़ दूँगा। ” बीच-बीच में उसने तमिल में कुछ शब्दों का प्रयोग किया, जिसके अर्थ होंगे ‘वेश्या के बेटे, महिलाओं का जननांग’ इत्यादि। इसके बाद वो एक दूसरे व्यक्ति को थप्पड़ भी मारता है।

इसके बाद एक अन्य तमिल व्यक्ति कहता दिख रहा है कि ये लोग यहाँ काम करने आते हैं, लेकिन मारपीट करते हैं। जिस व्यक्ति ने कैमरा रखा होता है, वो कहता है कि ये सब मोदी का किया-धरा है। इस वीडियो में तमिलों को बिहारियों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। ये सब एक ट्रेन के अनारक्षित बोगी की घटना है। रेलवे पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज किए जाने की बात कही है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि इस संबंध में जाँच जारी है।

आपको बता दें कि कार्तिक गोपीनाथ नाम के जिस शख्स ने ट्रेन के अंदर बिहारी मजदूरों के साथ मारपीट वाला वीडियो शेयर किया था, उन्हें रेलवे पुलिस की ओर से समन जारी किया गया। कार्तिक गोपीनाथ ने उस समन को भी ट्वीट किया है और उसके बाद सक्षम पुलिस पदाधिकारियों के सामने प्रस्तुत होकर अपनी ओर से आरोपितों के बारे में जानकारी भी शेयर की।

इन सब के बीच बिहार सरकार इन घटनाओं की जाँच के लिए 4 सदस्यीय टीम तमिलनाडु भेज रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि घटना पर उनकी नजर है। उन्होंने ‘समाचार पत्रों’ के माध्यम से इन घटनाओं की जानकारी मिलने की बात बताते हुए कहा कि बिहार के वरिष्ठ अधिकारी तमिलनाडु में अपने समकक्षों से संपर्क में हैं। तिरुप्पुर की पुलिस का कहना है कि कई फेक वीडियोज भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उधर ‘साउथ इंडियन मिल एसोसिएशन (SIMA)’ ने बिहारियों से अपील की है कि वो दक्षिण भारत को छोड़ कर अपने घर नहीं लौटें। उनका कहना है कि अगर ये जारी रहा तो तमिलनाडु की पूरी की पूरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री ध्वस्त हो जाएगी। इन घटनाओं पर ‘Confederation of Indian Textile Industry (CITI)’ ने भी चिंता जताई है। हालाँकि, तमिलनाडु का प्रशासन कह रहा है कि अधिकतर फेक चीजें ऑनलाइन शेयर हो रही हैं।

राज ठाकरे के करीबी MNS नेता पर सुबह-सुबह जानलेवा हमला: CCTV में घटना कैद, शिवसेना कार्यकर्ता समेत 2 हिरासत में

मुंबई में मनसे (MNS) नेता संदीप देशपांडे पर हमला हुआ है। इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें 4 की संख्या में बताए जा रहे हमलावरों के हाथों में क्रिकेट में प्रयोग होने वाला स्टम्प देखा जा सकता है। हमला तब हुआ जब पीड़ित मार्निंग वॉक पर निकले थे। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक 2 संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिल रही है जिसमें एक शिवसेना कार्यकर्ता बताया जा रहा है। संदीप देशपांडे को राज ठाकरे का करीबी माना जाता है। घटना शुक्रवार (3 मार्च 2023) की है।

हमले में संदीप देशपांडे घायल हो गए थे। उनका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा था। फिलहाल उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस घटना का CCTV फुटेज भी वायरल हुआ है। वायरल फुटेज में संदीप एक हमलावर को हरे रंग की टी शर्ट और दूसरे को कुर्ते और टोपी में देखा जा सकता है। हमले के बाद दोनों तेज कदमों से घटनास्थल से निकलते देखा जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना शिवाजी पार्क इलाके की है। इस मामले की जाँच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रान्च को सौंपी गई है। अभी तक 2 संदिग्धों को भांडूप इलाके से हिरासत में लिया गया है। इसमें एक का नाम सोलंकी बताया जा रहा है। दोनों से पुलिस की पूछताछ जारी है। आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस ने 8 टीमें बनाई हैं।

पुलिस ने इस हमले के पीछे राजनैतिक विवाद बताया है। मनसे कार्यकर्ताओं ने इस हमले पर नाराजगी जताई है और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

‘मोदी आतंकी, हिंदू कौम आतंकी’: ऑस्ट्रेलिया के लक्ष्मी नारायण मंदिर में खालिस्तानियों का हमला; दीवारों पर लिखे आपत्तिजनक नारे

ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई है। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में शनिवार (4 मार्च 2023) बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर में की गई इस तोड़फोड़ में खालिस्तान समर्थकों का हाथ बताया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में हिंदूफोबिया के तहत हिंदुओं और उनके धर्मस्थलों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं।

इस घटना के बारे में उस वक्त लोगों को जानकारी मिली, जब कुछ श्रद्धालु पूजा करने के लिए मंदिर पहुँचे। स्थानीय मीडिया ऑस्ट्रेलिया टुडे के अनुसार, ब्रिस्बेन के दक्षिण में बरबैंक में स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर में तोड़फोड़ खालिस्तानी समर्थकों ने की है।

सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे हैं। इसमें ‘मोदी टेररिस्ट, हिंदू कौम टेररिस्ट, 1984 सिख नरसंहार’ जैसे नारे लिखे हुए हैं। इस वीडियो को ऑस्ट्रेलिया हिंदू मीडिया नाम के ट्विटर हैंडल ने शेयर किया है।

हिंदू मानवाधिकार ने बताया कि यह कृत्य हिंदुओं को आतंकित करने के लिए एक पैटर्न के तहत किया गया है। हिंदू मानवाधिकार की महानिदेशक सारा एल गेट्स ने कहा कि हिंदू मंदिरों पर हमला करना चरमपंथी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का पैटर्न है। इसका उद्देश्य हिंदुओं को आतंकित करना है।

इसके पहले ब्रिस्बेन स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला किया गया था और खालिस्तानी झंडे फहराए गए थे। क्वींसलैंड के ब्रिस्बेन में स्थित भारत की वाणिज्य दूत अर्चना सिंह ने 22 फरवरी 2023 को कार्यालय में खालिस्तान का झंडा लगा हुआ पाया था।

बता दें कि पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया के हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद ब्रिस्बेन में स्थित एक हिंदू मंदिर को धमकी दी गई थी कि यदि वे महाशिवरात्रि मनाना चाहते हैं तो उन्हें खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करनी होगी।

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू लगातार खालिस्तानियों के निशाने पर रहा है। जनवरी 2023 में 20 दिनों के भीतर ही खालिस्तानियों ने 3 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करते हुए देश विरोधी और खलिस्तान के समर्थन में नारे लिख दिए थे।

खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर में पहला हमला 12 जनवरी को किया था। यह हमला मेलबर्न के BAPS स्वामीनारायण मंदिर में हुआ था। मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवार पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।

इसके बाद खालिस्तानियों ने 16 जनवरी 2023 को मेलबर्न के ही कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

वहीं, तीसरा हमला मेलबर्न के ही अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में 22 जनवरी 2023 को हमला हुआ। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद, मंदिर की दीवारों में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।

‘छवि सुधारने में जुटे अनुष्का-विराट’ : महाकाल की भस्म आरती में लिया भाग, विधि-विधान से किया ज्योतिर्लिंग के आगे पूजा-पाठ

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में हाजिरी लगाई है। इस अवसर पर उनकी पत्नी अनुष्का भी मौजूद रहीं। विराट ने न सिर्फ महाकाल के भक्तिभाव से दर्शन किए बल्कि भस्म आरती में भी हिस्सा लिया। दर्शन के दौरान विराट कोहली ने मंदिर का पारम्परिक परिधान पहन कर तिलक लगा रखा था। पूर्व कप्तान के इस रूप पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के कमेंट आ रहे हैं। कुछ लोगों ने अपनी छवि सुधारने वाला कदम बताया है।

विराट कोहली का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि शनिवार (4 मार्च 2023) को विराट सुबह-सुबह विराट कोहली अनुष्का के साथ उज्जैन पहुँचे। वीडियो की शुरुआत में विराट और उनकी पत्नी मंदिर के गेट पर बैठ कर भस्म आरती देख रहे हैं। इस दौरान महादेव शिव की स्तुति गयी जा रही थी। मंदिर में अन्य श्रद्धालुओं की भी भीड़ देखी जा सकती है।

आरती खत्म होने के बाद अनुष्का ने बहुत अच्छे से दर्शन होने की बात कही। वहीं विराट कोहली ने ‘जय महाकाल’ का उद्घोष किया। इंदौर में कल 3 मार्च को हुए टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद विराट कोहली सीधे इंदौर पहुँचे थे। कुछ समय तक मंदिर के धार्मिक कार्यक्रम के हिस्सा लेने के बाद विराट और अनुष्का वहाँ से चले गए। इस दौरान दोनों ने माथे पर तिलक लगा रखा था।

नेटिज़ेंस ने दी अपनी-अपनी राय

विराट और अनुष्का द्वारा महाकाल मंदिर दर्शन पर सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन आए हैं। जहाँ शिवम गुप्ता ने विराट कोहली को भोला भक्त कहा तो वहीं निखिल सोनी ने इस कदम को अपनी छवि को बदलने का प्रयास बताया है।

चित्र साभार- NDTV ट्वीट पर आए कमेंट

दीक्षयन्त ने इस वीडियो पर विराट कोहली और उनकी पत्नी को हिन्दू हृदय सम्राट लिखा है।

ना रंग फेंकें-ना गुब्बारे, ना गाना बजाएँ- ना नारे: होली आते ही राजस्थान के बाड़मेर में लगी धारा-144, आदेश में रखा गया ‘मजहबी भावनाओं’ का ख्याल

राजस्थान में हिंदुओं के त्योहार आते ही प्रशासन प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिया। बाड़मेर जिले के कलेक्टर की ओर से जिले में धारा 144 लगा दी है। प्रशासन के इस निर्णय पर विवाद हो गया है। ऑर्डर में लिखा है कि कोई भी इस तरीके से रंग न खेले कि किसी दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे। इसका भाजपा और हिंदू संगठनों ने विरोध किया है।

बाड़मेर के जिलाधिकारी लोकबंधु द्वारा जारी किए गए इस ऑर्डर पर राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ कुठाराघात है। यह आदेश अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर कलंक है।

इस मामले को राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में भी उठाया और कहा कि होली का पर्व रंगों का त्योहार है। उन्होंने कहा, “बाड़मेर कलेक्टर का एक आदेश मेरे हाथ में है। कलेक्टर ने 2 से 12 मार्च तक धारा 144 लागू की है। होली पर धारा 144 लागू करना हमारी धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने सरकार इस ऑर्डर पर जवाब दे।

बाड़मेर जिलाधिकारी द्वारा निकाला गया आदेश (साभार: दैनिक भास्कर)

जिला कलेक्टर द्वारा निकाले गए आदेश में गाना बजाने और नारे लगाने पर पाबंदी लगाई है। आदेश में कहा गया है कि किसी भी धर्म का कोई व्यक्ति कोई ऐसा ऑडियो गाना नहीं चलाएगा और ना ही नारे लगाएगा, जिससे किसी दूसरे धर्म या व्यक्ति की भावना को ठेस पहुँचे।

आदेश में आगे कहा गया है कि होली पर इस तरह रंग ना खेलें कि दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचे। किसी व्यक्ति की इच्छा के विरूद्ध उस पर रंग ना डाले, जिससे कि साम्प्रदायिक या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे।

उधर, कलेक्टर ने कहा कि यह ऑर्डर सभी त्योहारों से पहले निकाले जाते हैं। इसमें लोगों के इकट्ठा होने पर रोक नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर लोग शराब ना पीएँ, धारदार हथियार ना निकालें और लड़ाई-झगड़े आदि ना हों, इसलिए ऑर्डर निकाला गया है। ये ऑर्डर कई सालों से निकल रहे हैं।

पिछले साल भी हिंदुओं के त्योहारों से पहले राजस्थान के कई जिलों में धारा 144 लागू की गई थी। पिछले साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) ने अजमेर जिले में हिंदू त्योहारों से पहले धारा 144 लागू किया था। इस फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक चिन्ह वाले झंडों को नहीं लगाने की हिदायत दी गई थी।

उस भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर नीरज जैन हिंदुस्तानी ने कॉन्ग्रेस शासन की तुलना मुगलराज से की थी। नीरज जैन ने ट्वीट कर लिखा था, “कोटा, बीकानेर, जोधपुर और अब अजमेर सहित अन्य शहर में गहलोत साब का नादिरशाही फ़रमान। किसी धार्मिक चिन्ह के झण्डे लगाना, DJ बजाना अपराध है! गौरतलब है कि एक और महावीर जयंती, दुर्गा अष्टमी, अम्बेडकर जयंती, राम नवमी और हनुमान जयंती के जुलूस और शोभा यात्रा पर ये आदेश।“

उस साल 10 अप्रैल को रामनवमी, 14 अप्रैल को महावीर जयंती और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती थी। इन अवसरों पर हिंदू समुदाय धूमधाम से झाँकी एवं जुलूस निकालते हैं और पर्व को मनाते हैं। हालाँकि, राजस्थान सरकार ने फरमान जारी कर आयोजनों के दौरान धार्मिक झंडे पर रोक लगा दी थी। इसके बाद काफी बवाल हुआ था।

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 को पथराव की घटना के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने घरों पर धार्मिक झंडे फहराने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा जुलूसों और शोभा यात्राओं के दौरान डीजे बजाने को लेकर पाबंदियाँ लगाई थी। ये पाबंदियाँ दुर्गा अष्टमी, राम नवमी, महावीर जयंती और हनुमान जयंती आदि हिंदू त्योहारों को चिह्नित करने के लिए की गईं।

राज्य के कई जिलों में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू कर दी गई है। राजस्थान सरकार ने अपने आदेश में यहाँ तक कहा था कि इस दौरान लोगों को घर के आगे से गुजरने वाली शोभा यात्रा को देखने के लिए अपने घरों की छतों पर खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इससे पहले 28 अक्टूबर 2021 को झुंझनू जिले के जिलाधिकारी उमर दीन खान ने दीपावली त्योहार के चलते धारा 144 लागू करने का आदेश जारी कर दिया था। इस दौरान धार्मिक ऑडियो चलाने से लेकर जयकारा लगाने तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद खूब बवाल हुआ। बवाल के बाद जिलाधिकारी को अपने आदेश में बदलाव करना पड़ा था।

पिछड़े वर्ग की लड़की को ले भागा दलित हरीश, प्रेमिका के भाई ने साथियों के साथ मिलकर मार डाला: हैदराबाद की घटना

हैदराबाद में एक दलित लड़के की हत्या उसकी प्रेमिका के भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर कर दी। मृतक की पहचान 28 साल के हरीश के तौर पर हुई है। बुधवार (1 मार्च 2023) को हुई इस हत्या के 11 आरोपितों में से 10 की गिरफ्तारी हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवरकोंडा क्षेत्र के रहने वाला हरीश नामक व्यक्ति DJ का काम करता था। लगभग 7 माह पहले वह हैदराबाद के ही एल्लारेड्डीगुड़ा इलाके में रहने गया गया था। यहीं उसकी मुलाकात मनीषा नाम की लड़की से हुई थी। कुछ दिनों बाद दोनों में प्रेम संबंध बन गए थे। मनीषा के परिवार वालों को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। लड़की के भाइयों ने कई बार हरीश को अपनी बहन से दूर रहने की नसीहत दी थी और एकाध बार पिटाई भी की थी। मनीषा पर भी उनके घर में तमाम तरह की पाबंदियाँ लगा दी गईं।

बताया जा रहा है कि इन पाबंदियों के बाद भी हरीश और मनीषा सोशल मीडिया से एक दूसरे के सम्पर्क में बने रहे। बीच-बीच में दोनों की मुलाकात भी होती रही। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार हरीश और पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाली 25 वर्षीय मनीषा करीब 5 महीनों से प्रेम संबंध में थे। मनीषा के भाई दीनदयाल ने संबंध तोड़ने के लिए हरीश पर दबाव डाला था। लेकिन उसकी धमकियों को नजरंदाज करते हुए हरीश 22 फरवरी को प्रेमिका मनीषा को भगा ले गया।

घर से भागने के बाद दोनों के रुकने का इंतजाम हरीश के दोस्त राजेंद्र कुमार ने किया था। उसने ही हरीश को सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी दिलवाई थी। इस दौरान जब दीनदयाल अपनी बहन की खोज कर रहा था तो राजेंद्र ने सारी बात उसे बता दी।

पेटबशीराबाद थाने के एसएचओ के गौरी प्रशांत के मुताबिक 1 मार्च को राजेंद्र ने ही अपनी पाटर्नर जी नवनीता के साथ मिल हरीश और मनीषा को मिलने के लिए बुलाया। दीनदयाल भी अपने साथियों के साथ उनका इंतजार कर रहा था। हरीश और मनीषा के आते ही दीनदयाल अपने साथियों के साथ उन पर टूट पड़ा। हरीश की हत्या कर दी और मनीषा को अपने साथ ले गए।

पुलिस ने दीनदयाल और उसके साथियों टी नरेश और पी वेंकटेश को हरीश की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। अन्य 5 को हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। राजेंद्र और नवनीता को दोनों की जानकारी देने के आरोप में पकड़ा गया है। एक अन्य आरोपित बी वेंकट फरार है।

अपडेट: कुछ शुरुआती मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया में हरीश की प्रेमिका के दूसरे समुदाय से जुड़े होने का दावा किया गया था। लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि लड़की पिछड़े वर्ग की थी। इसके बाद हम अपनी रिपोर्ट आवश्यक बदलाव कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्ट में लड़की को अन्य मजहब से जुड़ा होने के लिए बताने का हमें खेद है।

‘गाय बेहद पवित्र, गौहत्या करने वाले नरक में सड़ते हैं’: इलाहाबाद HC ने खारिज की अब्दुल की याचिका, कहा- गोवंश को संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच (Allahabad High Court) ने शुक्रवार (3 मार्च 2023) को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि देश में गोहत्या रोकने (Ban on Cow Slaughter) के लिए केंद्र सरकार को प्रभावी कदम उठाना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने गाय को संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित करने की जरूरत बताई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शमीम अहमद की एकल पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि गाय की महिमा वैदिक काल से चली आ रही है। इसके साथ ही न्यायमूर्ति शमीम ने बाराबंकी के देवा थाना क्षेत्र के मोहम्मद अब्दुल खलीक की याचिका खारिज कर दी। खलीक को पुलिस ने गोवंश के मांस के साथ गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ यूपी गोवध निवारण कानून के तहत आरोप था।

कोर्ट ने कहा, “आशा है कि केंद्र सरकार देश में गोहत्या रोकने के लिए उचित निर्णय लेगी और इसे संरक्षित राष्ट्रीय जीव घोषित करेगी।” कोर्ट ने आगे कहा, “गाय को हिंदू धर्म में सभी जानवरों में सबसे पवित्र माना गया है। इसे कामधेनु या दिव्य गाय और सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाली के रूप में जाना जाता है।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा बताते हुए कहा, “हम एक धर्मनिरपेक्ष देश में रह रहे हैं और सभी धर्मों के लिए सम्मान होना चाहिए। हिंदू धर्म का यह मत है कि गाय दैवीय और प्राकृतिक भलाई की प्रतिनिधि है। इसलिए इसकी रक्षा और पूजा की जानी चाहिए।”

पुराणों और महाभारत आदि ग्रंथों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, “पुराण कहते हैं कि गायों के दान/उपहार से अधिक धार्मिक और कुछ भी नहीं है। भगवान राम के विवाह में भी गायों को उपहार के रूप में दिया गया था। महाभारत में भीष्म पितामह का मानना है कि गाय जीवन भर मानव को दूध प्रदान करके एक सरोगेट माँ के रूप में कार्य करती है। इसलिए वह वास्तव में दुनिया की माँ है।”

गाय के महत्व को बताते हुए हाईकोर्ट ने आगे कहा, “किंवदंतियों में यह भी कहा गया है कि ब्रह्मा ने एक ही समय में पुजारियों और गायों को जीवन दिया, ताकि पुजारी धार्मिक ग्रंथों का पाठ कर सकें और गाय अनुष्ठानों के लिए प्रसाद के रूप में घी दे सकें।” कोर्ट ने कहा कि गाय के चारों पैरों को चार वेद कहा गया है।

कोर्ट ने आगे कहा, “जो कोई भी गायों को मारता है या दूसरों को मारने की अनुमति देता है, माना जाता है कि उसे तब तक नरक में सड़ता रहेगा जब तक कि उसके शरीर पर बाल हैं। इसी तरह बैल को भगवान शिव के वाहन के रूप में दर्शाया गया है। यह नर मवेशियों के सम्मान का प्रतीक है।”

हाईकोर्ट ने कहा कि गाय को अन्य देवताओं के साथ भी जोड़ा गया है, विशेष रूप से भगवान शिव, भगवान इंद्र, भगवान कृष्ण और देवी (कई के मातृ गुणों के कारण) के साथ। कोर्ट ने कहा कि हिंदू धर्म में गाय को सबसे पवित्र जानवर माना गया है। कोर्ट ने कहा कि गोवंश का वैदिक काल से लेकर मनुस्मृति, महाभारत, रामायण में वर्णित धार्मिक महत्व के साथ ही व्यापक अर्थिक महत्व भी है। गाय से मिलने वाले पदार्थों से पंचगव्य तक बनता है।

इसके पहले सितंबर 2021 में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया था। उस वक्त विश्व हिंदू परिषद ने स्वागत किया था। वीएचपी (VHP) के अंतराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा था कि गाय सदियों से गाय इस देश की प्राणवायु की तरह रही है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को न्यायाधीश के सुझाव का पालन करते हुए गोहत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

15 साल का समय, ₹7 करोड़ खर्चा और चेन्नई के कारीगर: ओडिशा के गाँव में बना संतोषी माँ का भव्य मंदिर, पति ने पूरी की पत्नी की इच्छा

ओडिशा में एक पति द्वारा अपनी पत्नी के लिए एक 7 करोड़ का मंदिर बनवाने का मामला सामने आया है। ये मंदिर संतोषी माता है जिसे बनने में पूरे 15 साल लग गए और खर्चा 7 करोड़ रुपए का आया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मंदिर ओडिशा के जाजपुर जिले के चिकना गाँव में बना है। इस मंदिर के निर्माण की कहानी बेहद दिलचस्प है। दरअसल, मंदिर बनने वाले खेत्रावासी लेनका ने बैजंती से साल 1992 में शादी की थी। शादी के बाद बैजंती ने मंदिर बनवाने को लेकर इच्छा व्यक्त की थी। बैजंती संतोषी माता की भक्त हैं और उन्होंने अपने पति खेत्रावासी से कहा था कि उनकी इच्छा है कि उनके गाँव में ही संतोषी माता का मंदिर हो।

बैजंती की इच्छा के चलते ही खेत्रावासी लेनका ने मंदिर बनवाने की ठान ली। इसके बाद साल 2008 में इस मंदिर की शुरुआत की गई। चूँकि खेत्रावासी एक संपन्न बिजनेसमैन हैं। इसलिए उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी। ऐसे में उन्होंने मंदिर को भव्य बनाने के लिए 7 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।

खेत्रावासी मूल रूप से हैदराबाद से हैं। इसलिए यह मंदिर भी दक्षिण भारतीय शैली में बना है। इसके लिए कारीगर भी चेन्नई से बुलाए गए थे। मंदिर बनने तक कारीगर चिकना गाँव में ही रुके रहे। इस मंदिर के तैयार होने में 15 साल का समय लग गया है। मंदिर में संतोषी माता सहित भगवान भोलेनाथ, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, नवग्रह तथा अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है।

मंदिर बनने का सपना पूरा होने पर बैजंती ने कहा है, उनकी इच्छा थी कि गाँव में एक मंदिर बने। इसके लिए उन्होंने अपने पति के सामने इच्छा जाहिर की थी। मंदिर निर्माण के लिए वह अपने पति की आभारी हैं। उन्होंने कहा है कि उनके पति ने उनके सपने को पूरा किया है। वह एक छोटा मंदिर बनाना चाहती थीं। हालाँकि भगवान के आशीर्वाद से अब गाँव में एक भव्य मंदिर बन गया है। यह मंदिर सिर्फ उनके लिए नहीं है। बल्कि यहाँ गाँव के सभी लोग पूजा-पाठ करते हैं।

हिंसा पर तमिलनाडु के सुर में बोलते रहे चाचा-भतीजा, मीडिया के सामने रोते रहे बिहारी मजदूर: अब टीम भेजेगी नीतीश सरकार

तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के साथ हत्या और मारपीट जैसी वारदातों को तमिलनाडु सरकार के साथ-साथ बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी नकारा है। हालाँकि, वहाँ से लौटने वाले लोगों ने अत्याचारों की कहानी जब सुनानी शुरू की तो तमिलनाडु के साथ-साथ बिहार सरकार की भद पीट गई। बिहार की नीतीश कुमार की सरकार की हर तरफ छीछालेदर होने लगी।

आलोचनाओं के बीच बिहार सरकार ने हकीकत का पता लगाने के लिए अधिकारियों की एक टीम तमिलनाडु भेजने की घोषणा की है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके लिए मुख्य सचिव आमिर सुबहानी और डीजीपी आरएस भट्टी के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने अधिकारियों के साथ सर्वदलीय टीम भेजने की माँग की है।

इसके पहले तेजस्वी ने बिहारियों के साथ हिंसा को सिरे से नकार दिया था। इसे नकारने की वजह भी हो सकती है। जिस समय यह घटना मीडिया में आई, उस समय बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव उसी तमिलनाडु में बैठ कर राजनीतिक पींगे बढ़ा रहे थे। वे तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के जन्मदिन में शामिल होकर बर्थडे केक खा रहे थे।

जब मामला मीडिया में आया तो तेजस्वी ने एक शब्द भी कुछ नहीं कहा। सोशल मीडिया पर लोग उनसे सवाल पूछने लगे। इस बीच बिहार में विपक्षी पार्टी भाजपा इस मुद्दे पर सरकार को घेरने लगी। 2 मार्च 2023 को सदन में हंगामा हो गया। विपक्षी दलों ने मजदूरों के मुद्दे पर सदन से वॉकआउट कर दिया। मीडिया में सरकार की किरकिरी होने लगी। इसके बाद पीएम की कुर्सी खोज रहे सीएम नीतीश कुमार की तंद्रा टूटी।

नीतीश ने ट्वीट किया, “मुझे समाचार पत्रों के माध्यम से तमिलनाडु में काम कर रहे बिहार के मजदूरों पर हो रहे हमले की जानकारी मिली है। मैंने बिहार के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों से बात कर वहां रह रहे बिहार के मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निदेश दिया है।” विकास पुुरुष कहलाने वाले सीएम नीतीश कुमार को बिहारियों की दुर्दशा की जानकारी समाचार-पत्रों से मिली।

बिहार में जदयू-राजद गठबंधन सरकार की किरकिरी और स्टालिन सरकार पर सवाल उठता देख तमिलनाडु के डीजीपी शैलेंद्र बाबु ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिहारी या हिंदीभाषी लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ झूठी और अफवाह हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा के जो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, वे भी फर्जी हैं।

बिहार पुलिस ने अपनी तरफ से घटना को सत्यापित किए बिना ही तमिलनाडु के डीजीपी के बयान के आधार पर घटना को झूठा बता दिया। यह तब हुआ जब तमिलनाडु से लौट रहे पीड़ितों के नाम और पते के साथ समाचार पत्रों में उनकी तस्वीरें छप रही थीं। ये पीड़ित वहाँ की घटना के बारे में खुलकर मीडिया को बता रहे थे। बिहार पुलिस ने इन पीड़ितों से मिलकर हकीकत जानने के बजाय तमिलनाडु के डीडीपी के बयान पर भरोसा किया।

तमिलनाडु के डीजीपी के बयान के बाद बिहार पुलिस उनका संदर्भ देतेे हुए ट्वीट किया, “कुछ समाचार पत्रों तथा अन्य माध्यमों से प्रकाशित/प्रसारित सूचना कि तमिलनाडु राज्य में प्रवासी हिंदी भाषी श्रमिकों तथा कामकाजी लोगों के साथ कतिपय स्थानीय लोगों के द्वारा हमला की जा रही है का पुलिस महानिदेशक, तमिलनाडु द्वारा खंडन किया गया।”

तमिलनाडु सरकार और बिहार पुलिस का सहारा मिलते ही बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नींद से जागे और तमिलनाडु की घटना के लिए भाजपा और एवं मीडिया को दोषी ठहराने लगे। तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “बीजेपी, बीजेपी समर्थित मीडिया और इनके नेताओं का तथ्य और सत्य से कोई नाता नहीं है। इनकी झूठ फिर पकड़ी गयी। भ्रम, झूठ, नफ़रत, हिंसा और अफवाह फैलाना ही भाजपाइयों का मुख्य धंधा और पूँजी है।”

सोशल मीडिया पर शेयर की जाने वाली तस्वीरें झूठी हो सकती हैं। लोगों के बयान झूठे हो सकते हैं, लेकिन तमिलनाडु से लौट रहे लोग झूठ क्यों बोलेंगे यह समझ से परे है। सरकार ने लौटे दर्जनों लोगों में किसी से मिलने और वहाँ की वास्तविक स्तिथि को जानने का प्रयास नहीं किया। सरकार बस इस मामले की लीपापोती में लगी हुई है।

अगर तमिलनाडु के डीजीपी सच बोल रहे हैं, तो बिहार सरकार ने यह जानने का प्रयास क्यों नहीं किया कि जो लौट तमिलनाडु से लौट रहे हैं वेे हिंदी बोलने की वजह क्यों बता रहे हैं। क्यों इतने लोग अचानक घर लौटने लगे? आखिर इनके पीछे कौन लोग हैं? हालाँकि, इसकी छानबीन तो दूर सरकार ने इसे झुठलाने का काम शुरू कर दिया।

अब भाजपा एवं अन्य विपक्षी दलों के दबाव में बिहार सरकार अधिकारियों की टीम वहाँ भेजकर स्थिति जानना चाह रही है। वहीं, भाजपा का कहना है कि अधिकारियों के दल के साथ सर्वदलीय टीम भी भेजी जाए। हालाँकि, इसको लेकर सरकार सहमत हुई है या नहीं, अभी जानकारी सामने नहीं आई है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि तमिलनाडु में मजदूरों के साथ दुखद घटनाएँ हो रही हैं और इस मामले में तमिलनाडु के DGP झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमुई और मुंगेर के लोग सहमे हए हैं। पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर मामला गलत निकला तो मैं माफी माँगूँगा नहीं तो आपको सदन में माफी माँगनी पड़ेगी।”

धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से बुधवार (1 मार्च 2023) को हिंदी भाषियों का एक जत्था राँची लौटा। राँची लौटे एक व्यक्ति ने बताया कि वहाँ पिछले 20 दिन से माहौल खराब है। वहाँ के स्थानीय लोग पकड़-पकड़कर लोगों से पूछ रहे हैं कि वे कहाँ से हैं। अगर वे हिंदीभाषी राज्य से बताते हैं तो उन्हें तमिल में गालियाँ दी जाती हैं और मारपीट की जाती है। तमिलनाडु में रहने वाले बिहारी लोगों का कहना है कि वे बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।

तमिलनाडु की सरकार भले ही इन घटनाओं को नकारे, लेकिन हाल के कुछ दिनों में हुई हत्याएँ वहाँ की स्टालिन सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। सिकंदरा थाना क्षेत्र में दो युवकों की मौत तथा दो के घायल होने की खबर है। वहीं, 21 फरवरी 2023 को त्रिपुर में धधौर निवासी कामेश्वर यादव के पुत्र पवन यादव की हत्या नारियल काटने वाले धारदार हथियार से कर दी गई थी।

कामेश्वर यादव को बचाने की चेष्टा कर रहे भाई नीरज के सिर पर भी धारदार हथियार से प्रहार किया गया था। उसके ममेरे भाई भुल्लो निवासी बलिराज की भी पिटाई करके गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। सिकंदरा रविदास टोला के युवक की भी संदिग्ध मौत हो गई थी। कहा जा रहा है कि युवक का शव 26 फरवरी 2023 को फंदे से झूलता हुआ मिला था।

अपडेट: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में तमिलनाडु में हिंदी भाषिक श्रमिकों की हत्या, अंगुलियाँ काटने, फाँसी पर लटकाने जैसे दावे किए गए थे। हमने स्पष्ट रूप से दैनिक भास्कर को क्रेडिट देते हुए ये दावे प्रकाशित किए थे। लेकिन राष्ट्रव्यापी विवाद के बाद दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट अपडेट करते हुए वे दावे हटा लिए हैं। चूँकि भास्कर अपनी पूर्व की रिपोर्ट में किए गए दावों से पीछे हट गया है, इसलिए हमने भी अपनी रिपोर्ट में आवश्यक बदलाव किए हैं।