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मदरसा बनाने के लिए चल रही थी खुदाई, निकला शिवलिंग! मुस्लिम पक्ष ने बताया निर्माण रोकने की साजिश, बिहार प्रशासन ने नदी में प्रवाहित किया

बिहार के लखीसराय में एक मदरसे के निर्माण की खुदाई दौरान शिवलिंग मिलने की खबर है। इस घटना से दो पक्षों के बीच तनातनी हो गई। हिन्दू पक्ष जहाँ उस जगह को मंदिर की बता रहा है वहीं मुस्लिम पक्ष उसी जमीन पर मदरसा बनाने के लिए अड़ा है। मामले को बढ़ता देख कर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुस्लिम पक्ष ने इसे निर्माण रोकने की साजिश बताया है। फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। घटना शनिवार (4 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला लखीसराय के सूर्यगढ़ा नगर परिषद क्षेत्र का है। यहाँ पुरानी बाजार में एक नए मदरसे का निर्माण कार्य हो रहा था। इस दौरान शनिवार दोपहर लगभग 11 बजे हो रही एक पेड़ की कटाई के दौरान शिवलिंग निकल आया। शिवलिंग निकलने की खबर थोड़ी ही देर में आसपास फ़ैल गई। दावा है कि बॉउंड्री पर मिले इस शिवलिंग के साथ नंदी की प्रतिमा भी थी। मौके पर हिन्दू धर्म के लोग जमा होने लगे। उन्होंने जमीन को मंदिर की बताते हुए निर्माण रोकने के लिए कहा। कुछ श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर पूजा अर्चना भी शुरू कर दी।

इसी गाँव के कुछ लोगों का यह भी दावा है कि जहाँ मदरसे की घेराबंदी चल रही है, वो जगह सरकार की है। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष निर्माण कार्य जारी रखना चाहता था। मुस्लिम पक्ष ने शिवलिंग मिलना एक साजिश बताया। उनका कहना है कि मदरसे का निर्माण रुकवाने के लिए किसी ने मिट्टी में शिवलिंग और नंदी को दबा दिया होगा। दोनों पक्षों के आमने-सामने होने की जानकारी जब पुलिस को हुई तो वो मौके पर पहुँची। दोनों समुदाय के लोगों को प्रशासन द्वारा समझाया गया लेकिन तत्काल किसी फैसले पर नहीं पहुँचा जा सका।

बताया जा रहा है कि शिवलिंग सीमेंट का बना हुआ था। बाद में इसे हिन्दू पक्ष की सहमति के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विधि-विधान से नदी में प्रवाहित कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय SHO को मामले की जाँच के आदेश दिए। फ़िलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। जानकारी के मुताबिक, इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। होली के बाद इस मामले में किसी फैसले की उम्मीद जताई जा रही है। मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

‘स्त्री को ज़िंदा जला कर जश्न मनाना गलत, ऐसी प्रथा को बंद करो’: होली से पहले फिर सक्रिय हुआ वामपंथी गैंग, YouTuber ने कहा – ऐसे नहीं बनेगा अच्छा समाज

होली का त्योहार नजदीक आ रहा है, ऐसे में अब इसे लेकर घृणा फैलाने का दौर शुरू हो गया है क्योंकि ये हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। निर्देश सिंह नामक महिला यूट्यूबर ने एक वीडियो जारी कर होली को लेकर अनाप-शनाप बका है। इस वीडियो में वो कहती दिख रही हैं कि हम खुद को सभ्य समाज में रहने वाला नागरिक समझते हैं, लेकिन आप खुद ही सोचिए कि एक सभ्य समाज में एक स्त्री को जीवित जला कर जश्न मनाना कहाँ तक उचित है?

वीडियो में वो कहती हैं, “अगर हमारी सभ्यताओं में महिलाओं को ज़िंदा जला कर जश्न मनाना रहा है तो मैं इसे गलत मानती हूँ। हमारी सभ्यताओं में स्त्रियों को सती-प्रथा के तहत ज़िंदा चिताओं में जलाया गया तो वो प्रथा भी बदली हमलोगों ने, क्योंकि हम एक प्रोगेसिव सोसाइटी हैं। मुझे लगता है कि होलिका दहन के नाम पर एक स्त्री को जलाना, चाहे काल्पनिक हो, त्योहार या जश्न के रूप में हो – किसी भी रूप में, किसी भी अर्थ में ऐसी प्रथा की सख्त विरोधी हूँ।”

उन्होंने कहा कि स्त्री के प्रतीक को भी जलाना गलत है और वो जीवन भर इसका विरोध करती रहेंगी। साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अगर वो ‘प्रोग्रेसिव सोसाइटी’ का हिस्सा हैं तो इसका विरोध करें। निर्देश सिंह ने कहा कि जब हमारे बच्चे आज एक स्त्री को जला कर जश्न मनाते हुए देखेंगे तो भविष्य में किसी बहन-बेटी को ज़िंदा जलते देखेंगे तो वो उसका विरोध नहीं कर पाएँगे। यूट्यूबर के अनुसार, होलिका दहन एक निंदनीय है और इससे एक अच्छा समाज नहीं बनेगा।

बता दें कि होलिका एक राक्षसी थी, जो अपने भतीजे प्रह्लाद को जलाना चाहती थी। लेकिन, आग में वो खुद जल गई। प्रह्लाद भगवान विष्णु के अनन्य भक्त के रूप में जाने जाते हैं। लोगों ने यूट्यूबर से पूछा कि क्या एक मासूम को ज़िंदा जलाने की साजिश रचने वाली का समर्थन किया जाना चाहिए? निर्देश सिंह ‘The Hasti’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाती हैं। लोग उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वो भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन की कथा पढ़ें, क्योंकि होलिका ने खुद आग में जाने की साजिश रची थी।

अब वो होगा जो पाकिस्तान ने पहले कभी नहीं देखा… गिरफ्तार करने के लिए इमरान खान के घर पहुँची पुलिस, ढाल बन कर खड़े हुए PTI कार्यकर्ता

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। दरअसल, तोशाखान मामले में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है। इसलिए, उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस रविवार (5 मार्च, 2023) को उनके लाहौर स्थित घर पहुँची है। वहीं दूसरी ओर इमरान खान समर्थक उनके घर के बाहर इकट्ठा होकर सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तोशाखाना मामले में इमरान खान किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए इस्लामाबाद पुलिस लाहौर के जमां पार्क स्थित उनके घर के बाहर मौजूद है। इस्लामाबाद पुलिस का कहना है कि इमरान गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं। पुलिस अधीक्षक इमरान खान के घर गए थे। लेकि,न वह वहाँ नहीं मिले।

इस पूरे मामले में इस्लामाबाद पुलिस ने कहा है कि वह इमरान खान को गिरफ्तार कर सुरक्षित तरीके से इस्लामाबाद ले जाएँगे। कानून सबके लिए बराबर है। अदालत के आदेश में रुकावट पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

इस्लामाबाद के आईजी अकबर नासिर ने एक इंटरव्यू में कहा है, ”हम इमरान खान से साथ चलने का का अनुरोध कर रहे हैं। बहुत सम्मान के साथ हमने इमरान खान से अनुरोध किया है कि वह हमारे साथ आएँ। ताकि अदालत के आदेश का पालन किया जा सके और इमरान को अदालत में पेश किया जा सके।”

आईजी ने यह भी कहा है, “इस्लामाबाद और लाहौर पुलिस की टीमें इमरान खान के घर के बाहर मौजूद हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार किए बिना नहीं जाएगी। पुलिस का काम अदालत के आदेशों का पालन करना कानून-व्यवस्था को बनाए रखना है। हम इमरान को गिरफ्तार करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

घर के बाहर लगा है समर्थकों का मजमा

इमरान खान के लाहौर स्थित घर के बाहर न केवल पुलिस बल्कि बड़ी संख्या में समर्थक भी जुटे हुए हैं। सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे समर्थकों का कहना है कि वह इमरान को गिरफ्तार नहीं करने देंगे। यही नहीं, इमरान की पार्टी PTI के कई बड़े नेता भी यहाँ मौजूद हैं। इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर पार्टी नेता फवाद चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “इमरान खान के खिलाफ 74 मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मामलों में किसी भी व्यक्ति का अदालत में पेश होना मानवीय रूप से संभव नहीं है। इमरान की गिरफ्तारी का उद्देश्य पंजाब में होने वाले चुनावों को टालना है।”

फवाद चौधरी ने यह भी कहा है कि इमरान ने हमेशा ही न्यायपालिका का सम्मान किया है। जब भी उन्हें बुलाया गया, वह कोर्ट में पेश हुए हैं। लेकिन पाकिस्तानी सरकार चाहती है कि इमरान खान अदालत जाएँ ताकि आतंकवादी उन्हें फिर से निशाना बना सकें। यही नहीं, फवाद ने इमरान खान के समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहने की भी अपील की। उन्होंने कहा है, “यदि वह (सरकार और पुलिसल) अपनी हद पार करती है तो ऐसा विरोध होगा जो पाकिस्तान ने पहले कभी नहीं देखा।”

दूसरी ओर इमरान खान की पार्टी पीटीआई के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि समर्थकों को घबराने की जरूरत नहीं है। पुलिस के नोटिस में गिरफ्तारी का कोई आदेश नहीं है। इमरान खान और उनकी कानूनी टीम एक बैठक करेगी। इसके बाद आगे का फैसला किया जाएगा।

इस बीच सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान पुलिस इमरान खान को गिरफ्तार करने पहुँची थी। हालाँकि वहाँ मौजूद समर्थकों ने पुलिस को इमरान के घर के अंदर जाने से रोक दिया।

क्या है तोशाखाना मामला, जिसमें गिरफ्तार हो सकते हैं इमरान खान

दरअसल, तोशाखाना पाकिस्तान सरकार का एक विभाग है। इस विभाग में अन्य देशों के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा अन्य अधिकारियों द्वारा दिए गए गिफ्ट रखे जाते हैं। नियम के अनुसार, इन गिफ्टों को तोशाखाना में रखा जाना जरूरी है। इमरान खान ने नियम का पालन करते हुए गिफ्टों को तोशाखाना में जमा कराया था। हालाँकि बाद में उन्होंने इन गिफ्टों को सस्ते में खरीदकर महँगे दामों में बेंच दिया था। इससे इमरान खान को करीब 6 करोड़ रूपए का फायदा हुआ था।

‘राजस्थान पुलिस ने पुलवामा के बलिदानियों की पत्नियों पर बरसाई लाठियाँ’: कॉन्ग्रेस सरकार की वादाखिलाफी पर परिजनों का धरना, घेरे में CM गहलोत

राजस्थान के जयपुर में पुलवामा आतंकी हमले के बलिदानी CRPF जवानों के परिजनों ने पुलिस द्वारा खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। वीरगति पाए जवानों के परिवार वालों ने राजस्थान सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए इच्छामृत्यु की माँग की है। इन आरोपों के समर्थन में कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें राजस्थान पुलिस के जवान महिलाओं से बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं। पीड़ित परिजन शहीद स्मारक पर अपनी माँगों को लेकर धरना दे रहे थे। भाजपा ने इस मामले में गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में बलिदान हुए CRPF जवानों के परिजन जयपुर स्थित शहीद स्मारक के एक हिस्से में अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में बलिदानी जवानों की माताएँ और पत्नियाँ भी शामिल हैं। बलिदानी हेमराज मीणा की वीरांगना पत्नी मधुबाला मीणा ने बताया कि काफी पहले ही उनके गाँव का नाम उनके पति के नाम पर रखने और सांगोद के स्कूल में स्मारक बनाने का वादा हुआ था जो अब तक अधूरा है। मधुबाला का आरोप है कि ये कोई बहुत बड़ी माँग नहीं है, लेकिन राजस्थान सरकार के मंत्री इसे टाल रहे हैं।

एक अन्य बलिदानी रोहिताश लाम्बा की पत्नी मंजू ने बताया कि उनके पति के अंतिम संस्कार के समय तमाम नेता और मंत्री आ कर बड़े-बड़े वादे किए थे। तब मंजू के देवर जितेंद्र को सरकारी नौकरी के साथ रोहिताश का एक स्मारक भी बनवाने का वादा राज्य सरकार की तरफ से किया गया था। वारांगना मंजू का आरोप है कि वो तमाम सरकारी वादे अधूरे पड़े हैं। बताया गया कि अब रोहिताश के घर किसी मंत्री या नेता का आना-जाना तो दूर, कोई अधिकारी ठीक से बात भी नहीं करता।

रोते हुए मंजू लम्बा ने बताया कि जब उन्होंने अपनी माँगों के लिए आवाज उठाई, तब उन्हें राजस्थान पुलिस से प्रताड़ित करवाया गया। इस दौरान मंजू लाम्बा ने कहा, “हमने सोचा था कि हम अपने बच्चों को भी देश के लिए लड़ने भेजेंगे, पर यह सब देख कर हमने अपने हाथ वापस खींच लिए हैं।”

भाजपा ने उठाए सवाल

राजस्थान भाजपा ने पुलवामा हमले में वीरगति पाए जवानों की वीरांगनाओं के साथ पुलिस और गहलोत सरकार के रवैये की आलोचना की है। भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने मंजू लाम्बा का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुख्यमंत्री से मिलने जा रही पुलवामा के अमर शहीद रोहिताश लांबा जी की पत्नी को कॉन्ग्रेस की राजस्थान सरकार की पुलिस ने लाठियाँ से पीटा। इस बिलखती वीरांगना के आँसू आपको सोने देंगे अशोक गहलोत जी?”

भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने घटनास्थल पर अपनी मौजूदगी का दावा किया। उन्होंने लिखा, “आज तीनों वीरांगनाओं के साथ राज्यपाल महोदय को ज्ञापन देने राजभवन गया था। ज्ञापन सौंपने के बाद वीरांगनाएँ मुख्यमंत्री जी से मिलने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर पहुँचीं तो पुलिस ने उनके साथ अभद्रता व मारपीट की। इसमें मंजू जाट घायल हो गईं।”

किरोड़ी लाल मीणा ने एक वीडियो भी अपने ट्वीट में शेयर की है जिसमें राजस्थान पुलिस वीरांगनाओं से धक्का-मुक्की करती दिखाई दे रही है। राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस धरने पर बोलते हुए बताया कि जो माँग दोनों महिलाओं द्वारा की जा रही है, उसका प्रावधान ही नहीं है। उन्होंने बताया कि जमीन और नौकरी के वादे राज्य सरकार द्वारा पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। हालाँकि, उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात कही है।

माँ की मौजूदगी में यौन शोषण करता था सौतेला बाप, नाबालिग यूट्यूबर ने दोनों की हरकतों का बनाया था वीडियो: कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

गुजरात की अहमदाबाद कोर्ट ने नाबालिग लड़की का यौन शोषण करने के आरोप में पीड़िता की माँ और उसके सौतेले पिता को 5 साल की सजा सुनाई है। पीड़ित लड़की ने अपने सौतेले पिता पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने कहा था कि इसमें उसकी माँ भी सहयोग कर रही थी। पीड़ित नाबालिग लड़की यूट्यूबर है। उसने दोनों आरोपितों की हरकतों का वीडियो सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद के गेरतपुर की रहने वाली 17 वर्षीय यूट्यूबर ने दिसंबर 2021 में अपनी 52 वर्षीय माँ और 38 वर्षीय सौतेले पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता महिला की चार बेटियों में सबसे छोटी है। उससे तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि वह कोरोना महामारी के समय अपनी माँ के साथ रहने गई थी। वहाँ सौतेले पिता ने उसका यौन शोषण करना शुरू कर दिया था।

पीड़ित नाबालिग लड़की ने जब इसकी शिकायत अपनी माँ से की तो उसने अनसुना कर दिया। इसके साथ ही उसकी माँ ने कहा कि उसका सौतेला पिता जल्द ही उससे शादी कर लेगा। पीड़िता ने परेशान होकर अपने साथ हो रही घटना की जानकारी पड़ोसियों को दी। तब पड़ोसियों ने उससे अपनी माँ और सौतले पिता की हरकतों का वीडियो बनाने की सलाह दी।

इसके बाद जब सौतला पिता उसे गलत तरीके से छू रहा था, तब पीड़िता ने इसका वीडियो बना लिया। यही नहीं, उसने अपनी माँ का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। वीडियो में माँ उसकी शादी होने तक इंतजार करने के लिए कह रही थी। इसके बाद पीड़िता ने वीडियो के बारे में पड़ोसियों को बताया। इस पर पड़ोसियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।

पीड़िता के बयान और वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने 13 दिसंबर 2021 को पीड़िता की माँ और सौतेले पिता के खिलाफ आईपीसी (IPC) की धारा 354 और पॉक्सो एक्ट (Pocso Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने दोनों को को गिरफ्तार कर लिया था।

वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत

इस मामले की सुनवाई करते हुए विशेष पॉक्सो कोर्ट ने पीड़िता के बयान और वीडियो को सबूत मानते हुए कहा है कि आरोपित सौतेले पिता की हरकतों से यह साबित होता है कि वह अपने और पीड़िता के बीच संबंधों को ताक पर रखते हुए उसका यौन शोषण कर रहा था। भले ही पीड़िता उसकी सौतेली बेटी थी, लेकिन फिर वह एक बेटी ही है।

इसके बाद कोर्ट ने पीड़िता की माँ और सौतेले पिता पर नौ-नौ हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए 5 साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया है कि वह सहायता राशि के रूप में पीड़ित नाबालिग लड़की को 1 लाख रुपए प्रदान करे।

‘ये अवैध है, संविधान नहीं देता इजाजत’: सूरत स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ वाले वीडियो से भड़के कट्टर मुस्लिम, लोगों ने दिखा दी मस्जिद-मजार की तस्वीरें

सोशल मीडिया पर मुस्लिम यूजर्स भारतीय रेलवे के प्रति आक्रोश जता रहे हैं। कारण है एक वीडियो। ये वीडियो सूरत रेलवे स्टेशन का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस इन्फॉर्मेशन स्क्रीन पर ट्रेनों की टाइमिंग दिखती रहती है, उस पर साथ में ‘जय श्री राम’ भी लिखा हुआ है। साथ ही वहाँ ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ भी लिखा हुआ दिख रहा है। मुस्लिम ट्विटर यूजर इसे हिन्दू कट्टरवाद बता कर बौखलाए हुए हैं और मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं।

डिस्प्ले बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ वाला वीडियो देख कर मुस्लिम यूजर्स भड़क गए हैं। इस वीडियो में ‘एक ही नारा, एक ही नाम’ लिखा हुआ भी दिख रहा है। इसके बाद आगे ‘जय श्री राम’ और ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ लिखा हुआ दिख रहा है। स्टेशन की मुख्य एंट्रेंस पर LED से इस तरह लिखा हुआ देख कर कट्टर मुस्लिम भड़क गए हैं। पत्रकार अहमद खबीर ने पूछा है कि क्या भारत के संविधान के हिसाब से इसकी अनुमति है, क्या ये वैध है?

मोहम्मद मुजीबुर रहमान नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “सूरत रेलवे स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर ‘वेलकम’ की जगह ‘जय श्री राम’ लिखा आ रहा है। ये बताता है कि भारतीय रेलवे भी अब हिंदुत्ववादी हो गया है।”

आलम गुमत नाम के एक अन्य मुस्लिम यूजर ने केंद्रीय रेल मंत्रालय को टैग करते हुए पूछा, “ये सब क्या हो रहा है?”

हुसैन अहमद नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, “अगर कलबुर्गी रेलवे स्टेशन पर हरा रंग वैध नहीं है तो फिर सूरत रेलवे स्टेशन पर भी इस तरह की चीज लीगल नहीं है।”

अभी तक भारतीय रेलवे या केंद्रीय रेल मंत्रालय ने इन घटनाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनका कमेंट आते ही हम इस आर्टिकल को अपडेट करेंगे। हालाँकि, इस दौरान लोग जवाब भी दे रहे हैं। एक व्यक्ति ने कुछ तस्वीरें शेयर की, जिनमें रेलवे स्टेशनों पर मुस्लिम भीड़ को नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। एक तस्वीर में इलाहाबाद जंक्शन पर मस्जिद बना कर नमाज पढ़ती मुस्लिम भीड़ देखी जा सकती है। अन्य तस्वीरों में रेलवे स्टेशन पर ही मजार बनी हुई देखी जा सकती है।

इन तस्वीरों को शेयर करते हुए समीर नाम के एक यूजर ने कहा कि सूरत रेलवे स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ लिखा आ रहा है तो इसे हटा दो, लेकिन ऐसी चीजों को भी हटाना होगा जो पूरी तरह अवैध हैं और असंवैधानिक भी। कुछ अन्य लोगों ने भी आवाज़ उठाई कि कैसे कई रेलवे स्टेशनों की जमीनों को कब्ज़ा कर के वहाँ मस्जिद या मजार बना दी गई है। ट्रेनों में नमाज पढ़ने के वीडियोज भी वायरल होते आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेसी नेता हुआ टकला, वजह ममता बनर्जी: बोला- ‘कसम खाता हूँ कि जब तक ममता सरकार नहीं गिरा दूँ, सिर पर बाल नहीं रखूँगा’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) पर कथित टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार युवा कॉन्ग्रेस नेता और वकील कौस्तव बागची (kaustav Bagchi) को जमानत मिल गई है। शनिवार (4 मार्च 2023) को कस्टडी से बाहर आते ही बागची ने अपना मुंडन करवाकर तृणमूल सरकार गिराने की कसम खाई। उन्होंने ममता सरकार गिर जाने तक सिर पर बाल नहीं रखने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को छूटते ही बागची ने कहा, “जब तक मैं ममता बनर्जी की सरकार नहीं गिरा दूँगा, तब तक बाल नहीं रखूँगा। मैं ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दूँगा।” कौस्तव बागची के मुताबिक, अगर ममता कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी से माफी माँगेंगी, तभी वह माफी के बारे में सोचेंगे। मुंडन करवाते कौस्तव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या था मामला

कौस्तव बागची पर आरोप है कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी दीपक कुमार घोष द्वारा लिखित पुस्तक ‘ममता बंद्योपाध्याय के जेमोन देखछि’ के हवाले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी जीवन के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया था। इसी बयान को उनकी गिरफ्तारी की वजह बताई जा रही है। कॉन्ग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने कौस्तव की गिरफ्तारी पर ममता सरकार की निंदा की।

कौस्तव का दावा था कि 189 पन्नों की किताब में चॉकलेट सैंडविच खाकर अनशन करने से लेकर ममता बनर्जी के काफी पारिवारिक मुद्दे हैं, जिनका खुलासा होने पर जनता उन्हें पहचान जाएगी। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शनिवार सुबह बैरकपुर से कौस्तव बागची को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

कौस्तव अपने बयान पर कायम

हालाँकि, गिरफ्तारी के ही दिन शाम को कौस्तव को जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद भी कॉन्ग्रेस नेता अपने बयान पर अड़े रहे। उन्होंने ममता बनर्जी पर रिटायर्ड IAS द्वारा लिखी गई किताब की सॉफ्ट कॉपी लोगों बाँटने का फैसला किया है।

इसी काम के लिए कौस्तव ने 2 व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए हैं, जिस पर उन्होंने धमकी आने का आरोप लगाया है। कौस्तव ने कहा कि अगर भविष्य में उसके साथ कोई भी अनहोनी होती है तो उसके लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार माना जाए।

मनुस्मृति जलाकर पकाया मांस, उसी से सिगरेट भी लहराई: टीचर ट्रेनिंग वाली महिला दलित एक्टिविस्ट ने अम्बेडकर पर की बात

सोशल मीडिया पर एक लड़की द्वारा मनुस्मृति जलाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में लड़की मनुस्मृति जलाते हुए मांस पकाते दिखाई दे रही है। इसी वीडियो में लड़की जल रही मनुस्मृति से सिगरेट सुलगा कर कश लगाती भी दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि लड़की का नाम प्रिया दास है जो बिहार की रहने वाली है। बिहार पुलिस इस मामले में सटीक सूचना मिलने पर कार्रवाई की बात कह रही है।

अपना वीडियो वायरल होने के बाद प्रिया दास खुद कैमरे पर आई। उसने कहा कि ये तो सिर्फ एक्शन है क्योंकि इसकी नींव बहुत पहले बाबा साहब अम्बेडकर रख चुके हैं। प्रिया दास के मुताबिक उसने मनुस्मृति जला कर ढोंग और पाखंडवाद पर वार किया है। मनुमृति पर एक दूसरे पर लोगों को बाँटने और ऊँच-नीच का भेद करने का आरोप लगाते हुए प्रिया दास ने कहा, “ये तो सिर्फ शुरुआत है। इसे अस्तित्वविहीन करना है।”

प्रिया दास ने आगे कहा, “समय लगेगा। लोग जाग रहे हैं। आज नहीं तो कल अस्तित्वविहीन होगा ही। लोगों को मूल शिक्षा समझना हमारा प्रयास है।” प्रिया दास ने कहा कि मनुस्मृति स्त्री और पुरुष में भी भेद करती है, जिसमें पुरुष को भगवान और स्त्री को भोग्या बताया गया है। बिहार पुलिस ने वीडियो के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने पर कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

युधिष्ठिर को बताया महाभारत का जिम्मेदार

मनुस्मृति जलाने के बाद प्रिया दास ने ‘द एक्टिविस्ट’ नाम के एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दिया। प्रिया दास ने इस चैनल के मोहम्मद कैफ से कहा, “महाभारत की जिम्मेदार द्रौपदी नहीं बल्कि धर्म का चोला ओढ़े युधिष्ठिर है।” इस दौरान प्रिया ने सभी कुरीतियों का जिम्मेदार मनुस्मृति को बताया। वीडियो में खुद के सिगरेट पीने की वजह भी प्रिया दास ने मनुस्मृति में औरतों के लिए बनाए कानून का विरोध करना बताया।

प्रिया दास ने खुद को टीचर की ट्रेनिंग लेते हुए राजनीति में सक्रिय एक दलित एक्टिविस्ट बताया है।

हवाई जहाज में फिर पेशाब-कांड: न्यूयॉर्क से मुंबई आ रही थी फ्लाइट, नशे में धुत छात्र ने बगल में बैठे यात्री पर किया सूसू, एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रहे विमान में एक यात्री ने दूसरे यात्री पर फिर पेशाब कर दिया है। पेशाब करने वाले व्यक्ति की पहचान आर्य वोहरा के रूप में हुई है। वह अमेरिका रहकर पढ़ाई करता है। आरोप है कि आर्य वोहरा नशे में था और नींद में ही उसने दूसरे यात्री पर पेशाब कर दिया।

इस मामले में दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के डीसीपी ने कहा है कि उन्हें अमेरिकन एयरलाइंस से एक यात्री द्वारा दूसरे यात्री पर पेशाब करने की शिकायत मिली थी।आरोपित पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के उतरते ही आरोपित को सीआईएसएफ ने गिरफ्तार कर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया।

इस घटना को लेकर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के एक अधिकारी ने कहा, “हमें अमेरिकन एयरलाइंस से एक रिपोर्ट मिली है। उन्होंने स्थिति को अच्छे तरीके से संभाला और आवश्यक कार्रवाई की। इस घटना की जानकारी मिलते ही सीआईएसएफ और एयरलाइन की आंतरिक सुरक्षा टीम आवश्यक कार्रवाई में जुट गई थी। विमान के हवाई अड्डे पर उतरते ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।”

वहीं, दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, आरोपित आर्य वोहरा को पता है कि इस घटना से उसका करियर प्रभावित होगा। इसलिए उसने पीड़ित यात्री तथा क्रू मेंबर से माफी माँग ली है। एयरलाइन कंपनी ने मामले की जानकारी दिल्ली हवाई अड्डे की एयर ट्रैफिक पुलिस को भी दी है।

गौरतलब है कि भारत के विमानन नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री ऐसी हरकतें करते हुए पाया जाता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई तो होती ही है। साथ ही उसके अपराध के आधार पर एक निश्चित समय के लिए फ्लाइट में बैठने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

दिल्ली पुलिस ने इस घटना ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि वह अमेरिकन एयरलाइंस के संपर्क में है। पुलिस का कहना है, “इस घटना को लेकर हम एयरलाइन कंपनी (अमेरिकन एयरलाइंस) के संपर्क में हैं। पीड़ित यात्री न तो अपना नाम सार्वजनिक करना चाहता है और न ही शिकायत दर्ज कराना चाहता है।”

गौरतलब है कि हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं हैं। 26 नवंबर 2022 को न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में शंकर मिश्रा नामक व्यक्ति ने शराब के नशे में धुत होकर 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर पेशाब कर दी थी। इसके बाद से पुलिस ने उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस से लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी।

इसी तरह की एक घटना 30 जनवरी 2023 को सामने आई थी। तब विस्तारा एयरलाइंस का विमान UK 256 अबू धाबी से मुंबई आ रहा था। इस दौरान नशे में धुत महिला यात्री द्वारा क्रू मेंबर पर हमला करने और थूकने का मामला सामने आया था। जब उसे रोकने की कोशिश की गई तो उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। फिर कपड़े उतारकर अर्धनग्न अवस्था में विमान में ही चलने लगी थी।

आरोपित महिला की पहचान पाओला पेरुशियो के रूप में हुई। वह इटली की नागरिक है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहाँ कोर्ट ने उसका पासपोर्ट जब्त करते हुए 25000 रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी थी।

होली पर ‘वीर्य वाले बैलून’ से हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश, क्या सैकड़ों-हजारों ने किया था सामूहिक हस्तमैथुन? लेफ्टिस्ट प्रोपेगंडा के 5 साल

अक्सर हिन्दू धर्म को बदनाम करने की कोशिश में मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवियों का लिबरल गिरोह लगा रहता है। इसके तहत हिन्दुओं को आतंकी साबित करने की कोशिश की जाती है। हिन्दू शास्त्रों को विज्ञान विरोधी बताया जाता है। हिन्दू मंदिरों के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं। और अव्वल तो ये कि हिन्दू पर्व-त्योहारों को बदनाम किया जाता है। ऐसा ही एक प्रोपेगंडा चलाया गया था होली में सीमेन भरे बैलूनों को लेकर।

हम जिस प्रकरण की बात कर रहे हैं, वो मार्च 2018 का है। अर्थात, इस घटना को 5 साल हो गए। क्या आपने कभी भारत में वामपंथी गिरोह को क्रिसमस या ईद के खिलाफ अभियान चलाते देखा है? नहीं। लेकिन, महाशिवरात्रि पर दूध बचाने और होली पर पानी बचाने के अलावा दीवाली पर प्रदूषण फैलने की बात करते हुए पटाखे प्रतिबंधित करने जैसे फैसले होते हैं। ज्ञान बाँचा जाता है। ‘सीमेन भरे बैलून’ इसी कड़ी की ‘नेक्स्ट लेवल पेशकश’ थी।

‘जीसस एंड मेरी कॉलेज’ के शिक्षकों और छात्रों ने दिल्ली में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था और होली को ‘उपद्रवियों का त्योहार’ बताते हुए इस पर लगाम लगाने की माँग की थी। ये भारत में ही हो सकता है कि इसी धरती पर जिस धर्म को मानने वाले लोग बहुलता में रहते हैं, उनकी ही परंपराओं के खिलाफ बाहरी संप्रदायों के लोग आकर बैन लगाने की माँग करें। 2018 की होली के दौरान आरोप लगाया गया था कि महिलाओं पर ‘सीमेन भरे बैलून’ फेंके गए थे।

प्रोपेगंडा पत्रकार सागरिका घोष ने तब होली पर टिप्पणी करते हुए लिखा था, “ये काफी शर्मनाक और घृणास्पद है। क्या अब ‘सीमेन भरे बैलून’ भी होली के दौरान हिन्दू गर्व का हिस्सा हो गए हैं?” जब किसी ने उन्हें टोका और पूछा कि क्या अब सीमेन का भी रिलिजन होता है? इस पर उन्होंने ज़हर उगलते हुए लिखा था, “तो फिर सीमेन होली के टाइम पर क्यों फेंकते हैं सर? होली किस बड़े धर्म के अंतर्गत आता है? आपके क्या विचार हैं?”

सोचिए, इस तरह की घृणा कि किसी हिन्दू त्योहार के दौरान कोई घटना हो तो हिन्दू धर्म को ही जिम्मेदार ठहरा दो। बकरीद पर दुनिया भर में भले ही लाखों पशु कटते हों, लेकिन क्या इन लोगों ने कभी कहा कि पशु हत्या इस्लामी है? ये भी दें कि ‘सीमेन भरे बैलून’ वाली बात झूठ निकली थी। पहले आप ही अंदाज़ा लगाइए कि कौन से व्यक्ति के पास इतना सीमेन निकालने की क्षमता होगी कि एक पूरा का पूरा बैलून वो भर डाले?

अब सच्ची बात जान लीजिए। ‘फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी’ ने जाँच के बाद पाया था कि कथित छात्रों ने जिस बैलून का सैंपल सौंपा था, उसमें सीमेन की कोई मात्रा मिली ही नहीं थी। फरवरी 2018 में LSR (लेडी श्रीराम) कॉलेज के होली कार्यक्रम के दौरान ही इसे फेंके जाने की घटना सामने आई थी। बैलून में सीमेन वाली बात साबित ही नहीं हो पाई। यानी, ये एक हौव्वा था। एक साजिश थी, हिन्दू त्योहार को बदनाम करने की।

इस घटना को आधार बना कर हिन्दू त्योहार के दौरान लोगों द्वारा महिलाओं की प्रताड़ना की बात कही गई थी। हालाँकि, सवाल ये उठा था कि किस व्यक्ति के पास क्षमता है इतना सीमेन बैलून में भर डालने की। हाँ, उपद्रव पर एक्शन लेना चाहिए, लेकिन जो हुआ ही नहीं उसे आधार बना कर बदनामी की साजिश रची गई। एक छात्र ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिख कर भी ऐसा दावा किया था। ये भी सामने नहीं आया था कि बैलून फेंकने वाला लड़का था या लड़की।

उस समय लोगों ने वैज्ञानिक ढंग से भी इस घटना को झूठ साबित कर दिया था। होली बैलून का डायमीटर 40 से 100 mm तक हो सकता है। यानी, उसका वॉल्यूम 268 से 4188.8 ml हो सकता है। एक औसत व्यक्ति 2-5 ml सीमेन निकाल सकता है। यानी, इस तरह के बैलून को भरने के लिए 54 से लेकर 2095 लोगों की ज़रूरत होगी। यानी, सैकड़ों-हजारों लोगों का सामूहिक हस्तमैथुन? साफ़ है, हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए ये सब किया गया था।