Home Blog Page 1988

निवेशकों को किया गुमराह, कमाया ₹75 लाख: SEBI ने एक्टर अरशद वारसी को बीवी, साले सहित किया बैन, 45 यूट्यूबर्स पर कार्रवाई

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी (Arshad Warsi) सहित 45 यूट्यूबर्स को शेयर पंप एंड डंप मामले में दोषी पाया है। सेबी ने गुरुवार (2 मार्च 2023) को सभी दोषियों पर कार्रवाई करते हुए बाजार में ट्रेडिंग से तत्‍काल रोक लगा दी। इस मामले में अरशद वारसी, उनकी बीवी मारिया गोरेट्टी (Maria Goretti) और साले पर भी पाबंदी लगाई गई है। इन लोगों पर निवेशकों को गुमराह करने और शेयर बाजार को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साधना ब्रॉडकास्ट (Sadhna Broadcast) और शार्पलाइन ब्रॉडकास्ट (Sharpline Broadcast) नाम की दो कंपनियों के शेयर में हेराफेरी करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है। सेबी ने अपनी जाँच में पाया कि अपराधियों ने कृत्रिम रूप से बढ़ाए गए साधना ब्रॉडकास्ट के शेयर बेचे। इसके लिए 45 यूट्यूबर्स ने 41.90 करोड़ रुपए का अवैध लाभ भी कमाया। साधना ब्रॉडकास्ट के शेयरों को लेकर ‘द एडवाइजर’ और ‘मनीवाइज’ नाम के YouTube चैनलों ने निवेशकों को गुमराह किया।

सेबी ने उन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन्होंने इन कंपनियों के शेयरों को पंप और डंप करने के लिए यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। साधना ब्रॉडकास्ट के अपराधियों की सूची में बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी, उनकी बीवी मारिया और उनके भाई इकबाल वारसी शामिल हैं। सभी अपराधियों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है।

दरअसल, सेबी लंबे समय से यूट्यूब इंफ्लूएंशर्स पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा था। इसको लेकर दो साल पहले ही नियम बनाने की कवायद शुरू हो गई थी। सेबी ने कहा है कि मामले में दोषी पाए गए अरशद वारसी सहित कई यूट्यूबर्स निवेशकों को गुमराह करके अपना वॉल्‍यूम बढ़ा रहे थे और महीने में 75 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे थे। सेबी ने अभिनेता की बीवी के साथ इस बारे में हुई बातचीत को भी रिकॉर्ड किया है। सेबी ने अपने आदेश में कहा किसाधना ब्रॉडकास्ट के लिए उन्होंने 27 अप्रैल, 2022 से 30 सितंबर, 2022 के बीच जाँच की, जबकि शार्पलाइन ब्रॉडकास्ट की जाँच 12 अप्रैल, 2022 से 19 अगस्त, 2022 के बीच की गई थी।

इसको लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स अरशद वारसी के जमकर मजे ले रहे हैं। उन पर मीम्स बना रहे हैं। अभिषेक लिखते हैं, “अरशद वारसी को जब पंप और डंप यूट्यूबर्स का कॉल आए।”

एक और यूजर ने लिखा कि भाई सर्किट का करियर तो शुरू होते ही खत्म हो गया।

प्रेम दोशी लिखते हैं कि हम हैरान क्यों हैं? साधना ब्रॉडकास्ट सर्किट में ही चलता था। सर्किट तो होगा ही ना! साधना ब्रॉडकास्ट x अरशद वारसी।

बता दें कि सेबी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि Moneywise, The Advisor, MidCap Calls और Profit Yatra के अलावा इस मामले में शामिल अन्य यूट्यूब चैनल्‍स अपना काम बनने के बाद उसे डिलीट कर देते हैं।

5 साल में 47 रैलियाँ… नॉर्थ-ईस्ट के इतिहास में PM मोदी ने बनाया रिकॉर्ड: राहुल-प्रियंका चुनाव के समय भी बर्फ से खेलते रहे, कॉन्ग्रेस बोली- उम्मीदें टूट गईं

पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के विधानसभा चुनावों को लेकर रुझान सामने आ गए हैं। इन रुझानों के अनुसार, भाजपा एक बार फिर त्रिपुरा और नागालैंड में सरकार बनाती दिख रही है। वहीं, नागालैंड में भी भाजपा की स्थिति में सुधार हुआ है। अब तक सामने आए परिणामों को कॉन्ग्रेस अपने लिए झटका मान रही है। हालाँकि यह भी कहना है कि यह भाजपा के प्रचार के जीत है। इन नतीजों को पूरा देश का रुझान मानना गलत होगा।

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता आखिलेश प्रताप सिंह ने कहा है कि पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों के चुनाव परिणाम उनकी उम्मीदें से अलग हैं। यह कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका है। वहीं, कॉन्ग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत का कहना है कि इन चुनाव परिणामों को पूरे देश के नजरिए से देखना गलत होगा। इसे पूरे देश का रुझान कहना सही नहीं है। यह जीत भाजपा की नहीं बल्कि उनके प्रचार की जीत है। श्रीनेत ने यह भी कहा है कि पूर्वोत्तर राज्यों के चुनाव परिणाम इस बात पर तय करते हैं कि केंद्र में किसकी सरकार है।

बेशक कॉन्ग्रेस नेता भाजपा की इस जीत को उनके प्रचार की जीत बता रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कॉन्ग्रेस ने इन तीनों राज्यों में चुनाव प्रचार नहीं किया। यदि प्रचार नहीं किया है तो फिर चुनाव मैदान में उतरने का क्या मतलब था। यदि प्रचार किया है तो फिर हार और जीत के बीच की कड़ी को प्रचार बताकर कॉन्ग्रेस अपनी ही खामियों को उजागर कर रही है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार को लेकर कई राजनीतिक विश्लेषक भी सवाल उठा चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आखिर राहुल गाँधी ने इन राज्यों में प्रचार क्यों नहीं किया। क्या कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी को इस लायक नहीं मानती या फिर राहुल के लिए चुनावों में हार जीत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनकी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ थी।

हालाँकि राहुल गाँधी ने मेघालय में एक रैली जरूर की थी। लेकिन त्रिपुरा जैसे राजनीतिक और रणनीतिक रूप से अहम राज्य से कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता गायब थे। वास्तव में न केवल राहुल गाँधी बल्कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गाँधी भी त्रिपुरा से नदारद रहीं। दिलस्चप बात यह है कि इस दौरान भाजपा अपने दिग्गज नेताओं को उतारकर लगातार चुनाव प्रचार कर रही थी। वहीं, प्रियंका और राहुल गुलमर्ग में बर्फबारी का मजा ले रहे थे। यह हालत तब थी जब राहुल, खड़गे और प्रियंका गाँधी का नाम स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल था।

वहीं, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का प्रचार करने के लिए न केवल पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई बड़े चेहरे इन चुनावों के दौरान रैली करते नजर आए।

पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए प्रयासों को देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2017 के बाद से 47 दौरे किए हैं। यह एक ऐसा आँकड़ा है जो पूर्वोत्तर के इतिहास में सबसे अधिक प्रभावित करने वाला है। दरअसल, आजादी के बाद से किसी भी प्रधानमंत्री ने इतने दौरे नहीं किए जितने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 5 सालों में किए हैं। चुनाव से पहले भी पीएम मोदी ने त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में 3 बड़ी रैलियाँ की हैं।

बता दें कि तीनों राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में अब तक भाजपा सत्ता में थी। अब तक सामने आए रुझानों में त्रिपुरा और नागालैंड में भाजपा फिर से सत्ता में वापसी करती दिख रही है। वहीं, मेघालय में भाजपा और एनपीपी ने चुनाव से पहले गठबंधन तोड़ दिया था। हालाँकि अब यदि बीजेपी-एनपीपी गठबंधन बनता है तो तीनों राज्यों में भाजपा एक बार फिर सत्ता में होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनाई कमिटी, कामथ-नीलकेणि भी शामिल: हिंडेनबर्ग-अडानी जाँच रिपोर्ट 2 महीने में SEBI से माँगी

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी हिंडेनबर्ग (Hindenburg) ने अडानी समूह (Adani Group) को लेकर दी गई रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है। इसको लेकर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर भी है। अब इस मामले में सु्प्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सेवानिवृत जज की निगरानी में विशेषज्ञ दल बनाया है। इसके साथ ही SEBI से निश्चित समय में रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

दरअसल, अडानी-हिंडनबर्ग मामले की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 मार्च 2023) को सुनवाई की। सुनवाई में बनाई समिति हिंडेनबर्ग द्वारा रिपोर्ट में अडानी समूह पर लगाए गए आरोपों की जाँच करेगी। इसके साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) अपनी जाँच को दो महीने में पूरा कर रिपोर्ट दे। 

इस समिति का अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे को बनाया गया है। पूर्व जस्टिस सप्रे की अध्यक्षता वाली समिति में प्रख्यात बैंकर केवी कामथ और ओपी भट, इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकेणि, ओपी भट और पूर्व जज जेपी देवधर शामिल होंगे। यह समिति शेयर बाजार के नियामक तंत्र के मौजूदा ढाँचे की समीक्षा करेगी।

इधर, सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को यह भी जाँच करने का निर्देश दिया कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इसके साथ ही SEBI यह भी जाँच करे कि शेयर की कीमतों में हेरफेर किया गया है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस जाँच में समिति को केंद्र सरकार, वित्तीय सांविधिक निकायों, सेबी चेयरपर्सन को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है। 

बता दें कि अडानी समूह पर हिंडेनबर्ग द्वारा अपनी रिपोर्ट में लगाए को आरोपों की जाँच SEBI पहले से ही कर रही है। इस जाँच को ही दो महीने में पूरा करने और शेयरों की कीमतों में हेरफेर आदि को लेकर जाँच करने के लिए कहा है। गौतम अडानी ने कोर्ट ने निर्देशों का स्वागत किया और कहा कि इससे सच्चाई सामने आएगी।

इसके पहले 10 फरवरी 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरोपों के कारण अडानी समूह के शेयरों में गिरावट को देखते हुए निवेशकों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। कोर्ट ने इसके लिए केंद्र सरकार को समिति बनाने का निर्देश दिया था।

बता दें कि हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है। अडानी के शेयर्स दो-तिहाई से अधिक तक गिर गए हैं। इस उथल-पुथल के कारण शेयर बाजार में भारी बिकवाली की स्थिति बनी हुई थी। इससे भारतीय निवेशकों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। अडानी ग्रुप ने इस रिपोर्ट को पक्षपाती बताया था।

देश के प्रसिद्ध वकील हरीश साल्वे (Harish Salve) ने अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी (Gautam Adani) का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि किसी भारतीय व्यवसायी की वैश्विक उपस्थिति से कोई खुश नहीं हैं। इस तरह की रिपोर्ट तो आनी ही थी। उन्होंने कहा था कि समूह पर लगाए गए अधिकांश आरोप सही नहीं लगते। उन्होंने कहा कि गौतम अडानी की अधिकांश संपत्ति रेग्युलेटेड है। उनकी ज्यादातर कंपनियाँ स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं। उनके सारे रिकॉर्ड पब्लिक डोमेन में हैं।

दरअसल, कुछ समय पहले अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कंपनी को टारगेट करने के आरोप में अमेरिका के न्याय विभाग ने 30 इन्वेस्टमेंट एवं रिसर्च कंपनियों एवं उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ जाँच शुरू की थी। जिन कंपनियों के खिलाफ जाँच शुरू हुई थी, उनमें हिंडेनबर्ग रिसर्च भी शामिल है। ये कंपनियाँ किसी को टारगेट करके उसकी वित्तीय रिपोर्ट जारी करते थे और उसके स्टॉक पर अपना शॉर्ट पोजीशन बनाते थे। जब उस कंपनी का स्टॉक जितना ही, गिरता उतना ही ये लाभ कमाते थे।

गौरतलब है कि हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई आरोप लगाए हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप हैं, जो किसी कंपनी के लिए घातक हो सकता है। इस तरह की रिपोर्ट बाजार में आते ही निवेशकों के बीच आफरा-तफरी मच जाती है और कंपनी के स्टॉक धाराशायी होने लगते हैं।

हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अडानी समूह ने मॉरीशस और कैरेबियन द्वीप समूह जैसे टैक्स हेवन में संस्थाओं का उपयोग किया और अपनी कंपनियों की सूचीबद्ध शेयरों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया। यानी रिसर्च फर्म ने अडानी ग्रुप पर टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए।

CM योगी ने बनाया UP का सबसे बड़ा रिकॉर्ड (राजनीतिक): मुलायम-मायावती-अखिलेश-कॉन्ग्रेसी… सबको छोड़ा पीछे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। वह उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड कॉन्ग्रेस के डॉ. सम्पूर्णानंद के नाम पर था।

योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी। तब से वह लगातार सूबे के मुखिया बने हुए हैं। मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल 5 साल और 347 दिन का हो गया है। इससे पहले कॉन्ग्रेस के डॉ. संपूर्णानंद 5 साल और 345 दिन मुख्यमंत्री रहे। संपूर्णानंद उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री थे। वह 28 दिसंबर 1954 से लेकर 7 दिसंबर 1960 तक मुख्यमंत्री रहे।

बड़ी बात यह है कि योगी आदित्यनाथ के इस बड़े रिकॉर्ड ने कॉन्ग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को पीछे छोड़ दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह, नारायण दत्त तिवारी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के कार्यकाल भी योगी आदित्यनाथ के आगे फीके दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, उत्तर प्रदेश में 4 बार मुख्यमंत्री बनने वाली मायावती और 3 बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव भी इस रिकॉर्ड में बहुत पीछे हैं।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के उन गिने चुने नेताओं में से एक हैं, जिनके नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनी है। इससे पहले एनडी तिवारी के नेतृत्व में साल 1985 में कॉन्ग्रेस सरकार बनी थी। वहीं, उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग होने के बाद से देखें तो योगी आदित्यनाथ ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जो लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं।

सीएम योगी ने तोड़ा नोएडा मिथक

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा कहा जाता था कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाएगा, उसकी कुर्सी चली जाएगी। इसी मिथक के चलते मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक मुख्यमंत्री रहते हुए कभी भी नोएडा नहीं गए। हालाँकि अपने 5 साल और 347 दिनों के कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ करीब 25 बार नोएडा गए। कुर्सी जाने की बात तो दूर मिथकों को तोड़ते हुए योगी दोबारा मुख्यमंत्री बने हैं।

भारतीय शराब में झूमेगा रूस: ऑफिसर्स चॉइस बनाने वाली कंपनी का दारू बिकेगा वहाँ, बैन के कारण अंग्रेजी व्हिस्की मार्केट से गायब

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के चलते कई पश्चिमी देशों ने रूस में शराब की बिक्री रोक दी। इससे वहाँ की 70 हजार से अधिक दुकानों और करीब 20 हजार बार की बिक्री प्रभावित हुई। अब हालाँकि रूस के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब, भारतीय कंपनी एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स रूस में अपनी शराब बेचेगी।

दरअसल, भारतीय कंपनी एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (ABD) ने मंगलवार (28 फरवरी 2023) को ऐलान किया है कि रूस की वोदका बनाने वाली कंपनी अल्कोहल साइबेरियन ग्रुप (एएसजी) एबीडी के दो ब्रांड बेचेगी। रिपोर्ट्स में रूसी अखबार कोमर्सेंट के हवाले से कहा जा रहा है कि पश्चिमी देशों के ब्रांड द्वारा सप्लाई बंद करने के बाद खाली हुए बाजार को भारतीय कंपनी टारगेट करने जा रही है। बड़ी बात यह है कि एबीडी ने अब से पहले कभी भी रूस में शराब नहीं बेची है हालाँकि यह 20 से अधिक देशों को शराब निर्यात करती है।

भारतीय कंपनी एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने फरवरी में अपनी शराब रूस में भेजना शुरू किया था। एबीडी और रूसी कंपनी अल्कोहल साइबेरियन ग्रुप के बीच शराब बिक्री को लेकर 2 साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट हुआ है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत रूसी कंपनी अक्टूबर 2025 तक भारतीय कंपनी की शराब बेचेगी। हालाँकि शराब कितनी बेची जानी है, इसको लेकर दोनों कंपनियों ने डील को सार्वजनिक नहीं किया है।

भारतीय कंपनी एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स दुनिया की तीसरी सबसे लोकप्रिय व्हिस्की, ‘ऑफिसर्स चॉइस’ का उत्पादन करती है। कहा जा रहा है कि रूस में स्कॉच माल्ट और इंडियन ग्रेन स्पिरिट से बनी ऑफिसर्स च्वाइस ब्लू व्हिस्की की 0.75 लीटर की बोतल की कीमत 1,000 से 1,200 रूबल (1000-1320 रुपए) के बीच होगी। वहीं, स्टर्लिंग रिजर्व प्रीमियम ब्लेंड की कीमत प्रति बोतल 1,100 से 1,500 रूबल (1100-1650 रुपए) के बीच होगी।

बता दें कि इंग्लैंड समेत अन्य पश्चिमी देशों द्वारा शराब की सप्लाई बंद करने के बाद बोतलबंद व्हिस्की का साल 2022 में आयात आधा रह गया था। जॉनी वॉकर, जैक डेनियल, बुशमिल्स, जिम बीम और व्हाइट हॉर्स सहित कुछ ब्रांडों को सप्लाई की अनुमति थी। इससे कुछ हद तक मार्केट में शराब उतरी थी। NielsenIQ के आँकड़ों के अनुसार, साल 2022 के पहले नौ महीनों में 36 नए स्थानीय व्हिस्की ब्रांड रूस के बाजार में दिखाई दिए।

‘हम राम और कृष्ण के वंशज’: कॉन्ग्रेस MLA सफिया जुबेर, पार्टी विधायक अमीन खान बोले – भारत हिन्दू राष्ट्र बन जाए, फिर भी हमें कोई नहीं मारेगा

राजस्थान विधानसभा में बुधवार (01 मार्च, 2023) को कॉन्ग्रेस के मुस्लिम विधायकों ने बड़ी बातें बोलीं। कॉन्ग्रेस विधायक साफिया जुबेर ने खुद को राम और कृष्ण का वशंज बताया। उन्होंने कहा कि भले हमने धर्म बदल लिया हो लेकिन खून तो राम और कृष्ण का ही है। कॉन्ग्रेस विधायक अमीन खान ने भी बड़ा बयान दिया। अमीन खान ने कहा कि हमें भी हिंदू धर्म का ज्ञान है और यदि भारत हिंदू राष्ट्र हो भी गया तो हमें कोई नहीं मारेगा।

विधानसभा में शिक्षा विभाग की अनुदान माँगों पर बहस के दौरान साफिया जुबेर और अमीन खान का संबोधन चर्चा का विषय बना हुआ है। अलवर जिले की रामगढ़ सीट से कॉन्ग्रेस विधायक साफिया जुबेर अपने संबोधन के दौरान मेव समुदाय की बात की। उन्होंने कहा,”मेव लोग अलवर,भरतपुर, नूँह और थोड़ा मथुरा में बसते हैं, जहाँ कृष्ण जी का जन्म हुआ था। मैंने भी जागाओं (वंशावली की जानकारी रखने वालों) से अपना इतिहास निकलवाया है। उसमें यह निकलकर आया कि मेव तो राम और कृष्ण के वंशज हैं। चाहे धर्म का परिवर्तन हो गया हो लेकिन खून तो नहीं बदलता। खून तो हम में राम और कृष्ण का ही है।

बाड़मेर के शिव से कॉन्ग्रेस विधायक अमीन खान ने कहा कि 31 अक्टूबर, 1984 के बाद से भारत को हम सेक्युलर नहीं मानते हैं। बता दें इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी गई थी। कॉन्ग्रेस विधायक ने आगे कहा कि देश हिंदू राष्ट्र बन जाएगा तो भी हमको कोई नहीं मारेगा। उन्होनें कहा कि हम भी हिंदू धर्म का ज्ञान रखते हैं। हिंदू भी दूसरे इन्सान की रक्षा करेंगे। धर्मनिरपेक्षता सिर्फ कागजों में है। उन्होंने इसके बाद स्कूलों में होने वाली प्रार्थना पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान के हर स्कूल में संप्रदाय के नाम की पूजा से कार्यक्रम शुरू करते हो, यह धर्मनिरपेक्ष देश की मजबूती के निशान नहीं हैं। लोग डर से नहीं बोलते हैं जानते सब हैं।

बता दें कि अनुदान माँगों पर चर्चा के दौरान राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को अपने ही विधायकों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में कॉन्ग्रेस के विधायक अपनी ही सरकार की खामियाँ गिनावा रहे थे। राजसथान सरकार में राज्य मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और विधायक हरीश मीणा ने गहलोत सरकार को कानून व्यवस्था और पेपर लीक मामले में जमकर घेरा। यहाँ तक की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले कॉन्ग्रेस विधायक गणेश घोररा ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए सरकार को घेरा।

‘इस्लाम पसंद नहीं, जीवन भर हिन्दू रहूँगी’: नरगिस ने आलोक से रचाई शादी, कहा – अब्बू करते थे पिटाई

उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली नरगिस ने हिंदू धर्म स्वीकार कर मैनपुरी के आलोक से शादी रचाई है। मंगलवार (28 फरवरी, 2023) को मैनपुरी में नरगिस और आलोक का विवाह संपन्न हुआ। दोनों एक दूसरे को साल भर से जानते थे। उनकी दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए हुई। इसके बाद दोनों ने विवाह करने का निश्चय किया।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो अपनी शादी से खुश नरगिस ने कहा है कि उसे बचपन से ही सनातन धर्म पसंद था। कभी-कभी वह मंदिर भी चली जाती थी जिससे नाराज अब्बू (पिता) उसकी पिटाई भी किया करते थे। शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद नरगिस से निक्की बनी नई -नवेली दुल्हन ने बताया कि इस्लाम उसे कभी पसंद नहीं था। निक्की के अनुसार, आलोक से उसकी दोस्ती इंस्टाग्राम पर हुई थी। कुछ दिनों की बातचीत के बाद दोनों ने एक होने का निश्चय कर लिया।

निक्की का कहना है कि अब वह जीवन भर हिंदू बनकर रहना चाहती हैं। मैनपुरी के मंदिर में विवाह के दौरान आलोक के परिजन व दोस्त मौजूद रहे, जबकि निक्की के घर से किसी ने विवाह समारोह में हिस्सा नहीं लिया। बताया गया है कि निक्की की माँ की मौत हो चुकी है। निक्की और आलोक ने कोर्ट में भी विवाह (कोर्ट मैरिज) करने वाले हैं।

आलोक को मिली थी प्यार करने की सजा

आलोक और निक्की के प्यार के बीच निक्की के वालिद (पिता) दीवार बनकर खड़े थे। माँ की मौत के बाद निक्की और उसके अब्बू ही घर में रह गए थे। निक्की के मुताबिक, एक बार जब आलोक निक्की से मिलने आगरा पहुँचा था तो निक्की के पिता को इसकी भनक लग गई थी। इसके बाद उन्होंने निक्की की पिटाई की थी। इस बात की जानकारी होते ही आलोक निक्की को लेकर मैनपुरी चले आए।

निक्की के पिता ने आलोक की शिकायत कर दी। इसके बाद पुलिस ने आलोक को पकड़ लिया और निक्की को उसके पिता के हवाले कर दिया। पुलिस की गिरफ्त से छूटने के बाद आलोक और निक्की ने विवाह कर लेने का फैसला किया। निक्की का कहना है कि मैं बालिग हूँ और मुझे अपने पसंद के लड़के से विवाह करने का अधिकार है। मैंने बिना देरी किए आलोक के साथ 28 फरवरी को शादी कर लिया। वहीं आलोक का कहना है कि नरगिस से निक्की बनने के लिए हमारी तरफ से कोई दबाव नहीं डाला गया। यह फैसला उसका अपना है।

कानपुर में हनुमान मंदिर पर कब्जे और तोड़फोड़ का आरोप, हिन्दू संगठनों की पुलिस से झड़प: साधु-संतों का प्रदर्शन, DSP सलमान ने कहा – कब्जेदारी का विवाद

बुधवार (01 मार्च, 2023) को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हनुमान मंदिर पर कब्जे और तोड़फोड़ का विरोध कर रहे साधु-संतो व हिंदू संगठन के लोगों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। बताया जा रहा है कि मंदिर को पुलिस ने सील कर दिया। जिसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं और हिंदू संगठन के लोगों ने प्रदर्शन किया। खबर है कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज भी किया है। तनाव को देखते हुए कई थाना की पुलिस को मंदिर के पास तैनात किया गया है।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर के जूही थाना क्षेत्र के परमपुरवा में स्थित संकटहारी बाला जी दरबार मंदिर और मंदिर की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। रविवार (26 फरवरी, 2023) से मंदिर परिसर में भक्तों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। मंदिर पर कब्जे के खिलाफ पुजारी और साधु-संत शिकायत लेकर डीएसपी साउथ के दफ्तर पहुँचे। इसके बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुँची।

मौके पर पुलिस के पहुँचते ही हिंदू संगठनों और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मंदिर पर पहुँचे। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मंदिर में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। कार्यकर्ता मंदिर को खोलने की माँग करने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया गया।

ख़बरों के मुताबिक, पुलिस ने ‘बजरंग दल’ के जिला संयोजक दिलीप सिंह को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस ने मंदिर को सील कर दिया है। जिससे हिंदू संगठन के कार्यकर्ता और भी भड़क उठे। तनाव को देखते हुए मौके पर 10 थानों की फोर्स तैनात की गई है।

मामले पर पुलिस का पक्ष

जूही थाना पुलिस ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस विवाद को मंदिर विवाद नहीं बल्कि कब्जेदारी विवाद करार दिया है। डीसीपी साउथ सलमान ताज पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान जानकारी दी कि साधु संतो द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद मामले की जाँच की गई। प्रकरण कब्जेदारी विवाद से जुड़ा है। सलमान ताज ने बताया कि एक व्यक्ति की जमीन पर कई किराएदार रहते हैं। मालिक किसी मामले में फरार था। इस बीच एक किराएदार के घर में कुछ लोग जबरन दाखिल हो गए। कुछ महिलाएँ ताला बंद कर के अंदर बैठ गईं।

साधु-संतों का आरोप है कि महिलाओं ने मकान मालिक के इशारे पर कब्जा किया है। दरअसल, इस जगह पर साधु-संत किराए पर रह रहे थे। उनका कहना है कि पूजा की सामग्री व अन्य चीजें नहीं दी जा रही हैं। इसे लेकर साधु-संत विरोध कर रहे थे। डीएसपी का कहना है कि महिलाओं को भी समझाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने धारा 145 के तहत कार्रवाई की बात कही है। पुलिस का कहना है कि न्यायालय के निर्देश के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

‘मस्जिद में लगाओ 2 पेड़ और 21 दिन तक पढ़ो 5 टाइम की नमाज’: दोष साबित होने पर मालेगाँव कोर्ट ने सुनाई सज़ा

महाराष्ट्र की मालेगाँव कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में दोषी पाए गए एक मुस्लिम व्यक्ति को 21 दिनों तक दिन में 5 बार नमाज़ और मस्जिद में 2 पेड़ लगाने की सजा सुनाई है। सोमवार (27 फरवरी, 2023) को ये अनोखी सजा सुनाने वाले जज का नाम तेजवंत सिंह संधू है, जबकि सजा पाने वाले व्यक्ति का नाम रऊफ खान है। मामला साल 2010 का है, जब लगभग 13 साल पहले रऊफ पर एक व्यक्ति पर हमला कर के उसे सड़क दुर्घटना में घायल करने का आरोप लगा था।

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, 29 अप्रैल, 2010 को मालेगाँव के रहने वाले मोहम्मद शरीफ नाम के पीड़ित ने पुलिस में रउफ खान के खिलाफ शिकायत दी थी। तब मोहम्मद शरीफ ने बताया था कि 1 दिन पहले वह बाइक से सोनपुरा गया था। यहाँ बाइक गली में लगा कर वह किसी से बात कर रहा था। तभी अचानक उसे अपनी बाइक के गिरने की आवाज आई। जब मोहम्मद शरीफ वहाँ पहुँचा तब पाया कि रिक्शा चला रहे रऊफ ने उसकी गाड़ी को ठोकर मारी थी। इसी बात पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।

FIR के मुताबिक, इसी बहसबाजी के दौरान रऊफ ने अपने साथियों लतीफ, अजीज और अयूब को बुला कर मोहम्मद शरीफ की पिटाई कर दी। पिटाई में शरीफ का एक दाँत भी टूट गया। मारपीट में शरीफ के पेट और आँखों पर भी चोटें आईं थीं। इसी के साथ आरोपितों द्वारा पीड़ित का पर्स और मोबाइल भी छीन लिया गया था। इस मारपीट के दौरान पीड़ित को गालियाँ और धमकियाँ मिलीं। मोहम्मद शरीफ ने इस घटना की शिकायत पुलिस में की तब आरोपित पर IPC की धारा 323, 325, 504 और 506 के तहत केस दर्ज हुआ।

आरोपित रऊफ मालेगाँव के ही सोनापुरा झोपड़पट्टी में पड़ने वाले क्रान्ति नगर का रहने वाला है। लगभग 13 साल तक हुई कोर्ट की बहस और दलीलों में यह बात भी सामने आई कि रऊफ ने खुद को इस्लाम का प्रबल अनुयायी माना। हालाँकि, उसने अदालत में कहा कि समय की कमी के चलते वह 5 बार नमाज़ नहीं पढ़ पाता। अदालत ने रऊफ को IPC 325, 504 और 506 के आरोप से बरी कर दिया लेकिन IPC 323 में उसे 21 दिन तक लगातार पाँचों टाइम की नमाज़ पढ़ने और मस्जिद में 2 पेड़ लगाने का दंड सुनाया।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तेजवंत सिंह संधू के फैसले में मस्जिद का जिक्र इसलिए आया क्योंकि जिस जगह उसने पीड़ित की पिटाई थी की वह सोनपुरा मस्जिद के पास थी। अदालत के फैसले में पाँचों नमाज़ बाकायदा नाम के साथ दर्ज हैं, जिन्हे फज्र, असिर, जोहर, मगरिब और ईशा के नाम से दर्ज दिया गया है।

प्रयागराज गोलीकांड में तीसरी मौत, उमेश पाल और संदीप निषाद के बाद गनर राघवेंद्र भी नहीं रहे: तय हो गई थी शादी की तारीख़, पिता भी पुलिस में थे

प्रयागराज गोलीकांड में अब उमेश पाल और उनके गनर संदीप निषाद के बाद उनके एक अन्य गनर राघवेंद्र की भी मौत हो गई है। राजधानी लखनऊ स्थित PGI अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। प्रयागराज से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बना कर उन्हें यहाँ लाया गया था। 5 मई को राघवेंद्र की शादी होने वाली है। बता दें कि ये घटना धूमनगंज में शुक्रवार (24 फरवरी, 2023) को हुई थी। उमेश पाल और संदीप निषाद की उसी दिन मौत हो गई थी।

राघवेंद्र को ICU में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। राघवेंद्र रायबरेली के लालगंज के रहने वाले थे, लेकिन उन्हें प्रयागराज में तैनाती मिली थी। उमेश पाल की जान बचाने के लिए वो हमलावरों और अतीक अहमद के गुर्गों के बीच आ गए थे। गुंडों ने उन्हें गोली मारी थी और साथ ही उन पर बम भी फेंके थे। बम से उनका कंधा उड़ गया था। प्रयागराज के SRN (स्वरूप रानी नेहरू) अस्पताल में उनके शरीर से गोलियाँ निकाल दी गई थीं।

हालाँकि, उनके शरीर से अत्यधिक खून बह चुका था। बम लगने के कारण उनके फेफड़े भी जख्मी हो गए थे। उनके शरीर में गंभीर संक्रमण फ़ैल रहा था। उनकी मौत शाम के पौने 6 बजे के करीब हुई। राघवेंद्र के पिता भी पुलिस में रहे हैं। राघवेंद्र की सगाई हो चुकी थी, ऐसे में घर वाले भी शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। यूपी पुलिस में भी इस घटना के बाद शोक की लहर है। इस तरह प्रयागराज गोलीकांड में मृतकों की संख्या अब 3 हो गई है।

उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस ने अतीक अहमद के भाई, बेटों और बीवी समेत दर्जन भर गुर्गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल हत्या के इस मामले के ज्यादातर आरोपित फरार हैं। आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। इधर प्रशासन ने खालिद जफर के घर को गिरा दिया। कहा जा रहा है कि हत्याकांड के बाद माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन इसी घर में रुकी हुई थी।